samacharsecretary.com

मध्य प्रदेश में फिर एक्टिव होगा मानसून, 23 सितंबर से 17 जिलों में बारिश के आसार

भोपाल  बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के ग्वालियर, भोपाल, रीवा, जबलपुर, शहडोल, सागर संभागों में बारिश देखने को मिली। सबसे ज्यादा बारिश देवरी-सागर में हुई। यहां 60.3 मिमी बारिश दर्ज हुई। वहीं इंदौर, नर्मदापुरम, उज्जैन संभागों में कहीं-कहीं बारिश हुई। राज्य के बाकी के हिस्से सूखे रहे। तापमान की बात करें तो बीते 24 घंटों के दौरान कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। जानिए बीते 24 घंटों के दौरान कैसा रहा मौसम, इसके साथ ही जानिए आने वाले समय का हाल। आने वाले दिन में हो सकती बारिश, जानिए कब बीते 24 घंटों की बात करने से पहले जानिए आने वाले समय के मौसम का हाल। अनुमान है कि 23 सितंबर से राज्य में बारिश का दौर शुरू हो सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र ने 24 और 25 सितंबर को सिस्टम की स्ट्रॉन्ग एक्टिविटी होने की उम्मीद जताई है। इसके चलते 2 दिन के अंदर 15 से 17 जिलों में बारिश देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग ने दी आंधी-बारिश की चेतावनी मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल ने झंझावत और वज्रपात के साथ झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान लगाया है। इसे ध्यान में रखते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में भोपाल, विदिशा, रायसेन, सिहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगौन, रतलाम, उज्जैन, देवास, आगर, नीमच, गुना, ग्वालियर, दतिया, भिंड समेत अन्य शामिल हैं। बीते 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश देवरी-सागर में बीते 24 घँटों में राज्य के कई हिस्सों में बारिश भी दर्ज हुई। सबसे ज्यादा पानी देवरी-सागर में गिरा। यहां 60.3 मिमी बारिश दर्ज हुई। वहीं कई इलाकों में बूंदा-बांदी हुई। यहां 4-5 मिमी बारिश दर्ज हुई। इन इलाकों में बागली, राघौगढ़, कटनी, पचमढ़ी, बांदा, रीवा-हुजूर, शाहगढ़ जैसे इलाके शामिल हैं। वहीं अगर ज्यादा बारिश वाले अन्य इलाकों की बात करें तो हट्टा में 49.4, कोतमा में 41, गैरतगंज में 38.6, परासिया में 37.2, बटियागढ़ में 36 मिमी बारिश दर्ज हुई। बीते 24 घंटों में कहां-कितना रहा तापमान धार में सबसे कम 20.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। कम पारा वाले इलाकों में पचमढ़ी (नर्मदापुरम) में 21, गिरवर (शाजापुर) में 21.2, मंदौसर/ खंडवा में 21.4 और भोपाल में 21.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। वहीं अगर सबसे ज्यादा तापमान की बात करें तो ग्वालियर में 35 डिग्री रहा। अन्य अधिक तापमान वाले इलाकों में अलीराजपुर में 34.5, खजुराहो (छतरपुर) में 34.4, पृथ्वीराजपुर (निवाड़ी) में 34.1 और रतलाम में 34 डिग्री तापमान दर्ज हुआ।

मध्यप्रदेश में फिर तेज बारिश का दौर, पूर्वी हिस्से में ज्यादा असर

भोपाल  मध्य प्रदेश में 23 सितंबर से भारी बारिश का दौर शुरू होगा। IMD (मौसम केंद्र) के मुताबिक, 24 और 25 सितंबर को सिस्टम की स्ट्रॉन्ग एक्टिविटी देखने को मिलेगी। 2 दिन में 17 जिलों में अति भारी या भारी बारिश हो सकती है।  प्रदेश में अब तक औसत 33.7 इंच पानी गिर चुका है। आगामी दिनों में तेज बारिश होने से इस आंकड़े सुधार की उम्मीद है। बता दें कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सितंबर के आखिरी सप्ताह से विदा होना शुरू हो जाएगा, लेकिन इससे पहले तेज बरसात का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार, लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) की वजह से प्रदेश में भारी बारिश के आसार दिखाई दे रहे हैं। 23 सितंबर से कुछ जिलों में पानी गिरेगा। पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में असर ज्यादा रहेगा। भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में भी अलर्ट है। इससे पहले रविवार रात को भोपाल के कई इलाकों में तेज पानी गिरा। नर्मदापुरम में हवा चलने के बाद करीब पौन घंटे बारिश हुई। फेफरताल में 33 केवी लाइन पर पेड़ गिर गया। बिजली गुल होने से शहर का करीब 40 फीसदी हिस्सा अंधेरे में डूबा रहा। रसूलिया, आशुतोष नगर और हरदा रोड स्थित महाराणा प्रताप मार्केट में गणेश पंडालों को नुकसान पहुंचा। सोमवार को भी भोपाल समेत कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। शाम को बादल छाए रहे। रात में कोलार इलाके में हल्की बारिश रिकॉर्ड की गई। प्रदेश में अब तक 6 प्रतिशत बारिश कम IMD की मानें तो प्रदेश में अब तक 856.8 मिमी यानी, 33.7 इंच बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 36.3 इंच (922.6 मिमी) की तुलना में 2.6 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 6 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 2% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 10% बारिश कम हुई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 2% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 23% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। सोमवार को आंकड़ा माइनस में 2 प्रतिशत रहा। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 7% से 49% कम पानी गिरा है। इन 23 जिलों में ज्यादा बारिश IMD की माने तो अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

छत्तीसगढ़ में बदलेगा मौसम, नए सिस्टम से भारी बारिश और बिजली गिरने की संभावना

रायपुर. छत्तीसगढ़ में आज से मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है. मानसून की रफ्तार फिर बढ़ सकती है. कुछ इलाकों में भारी वर्षा के आसार है. मौसम विभाग ने उत्तरी अंडमान सागर पर बने लो प्रेशर एरिया को डिप्रेशन में परिवर्तित होने की संभावना जताई है. इसी नए सिस्टम के प्रभाव से बारिश की संभावना बन रही है. प्रदेश में अबतक मौसमी सब-डिविज़नल वर्षा सामान्य रही है, जिसमें 6 प्रतिशत का अंतर है. राजधानी रायपुर में आज आसमान में बादल छाए रहने के साथ बारिश की संभावनाएं बन रही है. अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के करीब रह सकता है.  प्रदेश में बदलेगा मौसम का मिजाज? मौसम विभाग ने सोमवार को कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है. साथ ही कुछ स्थानों पर भारी बारिश और बादल गरजने-चमकने के साथ बिजली गिरने के आसार हैं. दो दिन बाद भी इसी तरह का मौसम बने रहने के अनुमान है. मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र लगातार पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है. इसके 21 सितंबर को डिप्रेशन और 22 सितंबर को डीप डिप्रेशन में बदलने की संभावना है. 23 सितंबर की सुबह तक इसके उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा तटों के पास पहुंचने की संभावना है. बिलासपुर में 33.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज प्रदेश में रविवार को अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा और एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा हुई. इस दौरान बिलासपुर में सबसे ज्यादा 33.2 डिग्री सेल्सियस तापमान और पेंड्रा रोड में 20.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया. छिंदगढ़ में सबसे ज्यादा 7 मिमी बारिश दर्ज की गई. तोंगपाल और छोटेडोंगर में 6-6 मिमी, नांगर और सुकमा में 5-5 मिमी, जबकि जगदलपुर, मालखरौदा, ओरछा, पेण्ड्रा रोड और कुसमी में 4-4 मिमी बारिश हुई. वहीं कई अन्य इलाकों में 1 से 3 मिमी तक बारिश दर्ज की गई.

मध्यप्रदेश में मानसून का 89.3% कोटा पूरा, 21 सितंबर तक बारिश के आसार

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून अब अपने अंतिम पड़ाव में है। सीजन खत्म होने में महज 11 दिन बाकी हैं और प्रदेश में अब तक 33.2 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। यह सामान्य बारिश के कोटे का 89.3 प्रतिशत है। यानी करीब 4.1 इंच पानी की कमी अभी बनी हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले चार दिन प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद महीने के आखिरी सप्ताह में किसी मजबूत मौसम प्रणाली के सक्रिय होने पर कुछ जिलों में तेज बारिश हो सकती है। इससे प्रदेश बारिश के सामान्य आंकड़े के करीब पहुंच सकता है ।हालांकि, सभी जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य तक पहुंचना आसान नहीं होगा। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में बारिश की कमी बनी है। इंदौर, धार, आलीराजपुर, रायसेन, विदिशा, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, पांढुर्णा, सागर, उज्जैन, रतलाम और शाजापुर में अभी सामान्य बारिश का 80 प्रतिशत पानी भी नहीं गिरा है। इन जिलों में सामान्य आंकड़ा पूरा करने के लिए मानसून के बचे दिनों में लगातार बारिश की जरूरत होगी। वहीं, मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य से दोगुने से अधिक पानी गिर चुका है। 37 जिलों में अभी सामान्य से कम बारिश प्रदेश के भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया में सामान्य या उससे अधिक बारिश दर्ज हो चुकी है। इसके उलट बाकी 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम है।प्रदेश की सामान्य मानसूनी बारिश 37.3 इंच है। इस लिहाज से सामान्य आंकड़ा पूरा करने के लिए अब करीब 4.1 इंच बारिश की जरूरत है। मऊगंज और निवाड़ी में दोगुने से ज्यादा पानी दूसरी ओर, प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश सामान्य आंकड़े से काफी आगे निकल चुकी है। मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य कोटे की तुलना में दोगुनी बारिश हो चुकी है। यानी जहां कुछ जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं इन जिलों में सामान्य से काफी ज्यादा पानी गिर चुका है। इन जिलों में सामान्य या ज्यादा बारिश प्रदेश के भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है। इसके अलावा प्रदेश के 37 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। अब मानसून के अंतिम 11 दिन इन जिलों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। यदि इस दौरान अच्छी बारिश होती है तो कई जिलों का बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच सकता है। 22 सितंबर तक होगी हल्की बारिश मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, अगले चार दिन यानी 22 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश का दौर बना रह सकता है। पश्चिमी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय होने से कुछ जिलों में बारिश हो रही है। वहीं, 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने के संकेत हैं। इसके असर से प्रदेश में मौसम में फिर बदलाव देखने को मिल सकता है। जून की कमी अब तक पूरी नहीं हुई इस मानसून में सबसे बड़ी कमी जून में रही। जून में प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन बाद में मानसून में दो बार ब्रेक आया और कई दिन बारिश थमी रही। जुलाई और अगस्त में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो गया, लेकिन जून की कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी। सितंबर में बारिश होने के बावजूद पूरे मानसून में अब तक करीब 7 प्रतिशत की कमी बनी हुई है। 22 सितंबर तक हल्की बारिश का दौर मौसम विभाग ने अगले चार दिन यानी, 22 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश होने का अनुमान जताया है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया, इस समय पश्चिमी हिस्से में एक साइक्लोनिक सकुर्लेशन सिस्टम (चक्रवात) एक्टिव है। इस वजह से पश्चिमी हिस्से के जिलों में बारिश का दौर बना हुआ है। 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके बाद इसके दक्षिण ओडिशा–उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने के संकेत हैं। इस सिस्टम से एमपी के मौसम में एक और बदलाव का आधार बन सकती है। जून में सूखा, जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई। आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, जुलाई और फिर अगस्त का भी कोटा फुल हो गया, लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। यही वजह है कि अब तक भी प्रदेश में 7 प्रतिशत कम पानी गिरा है। प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है। भोपाल में 4 साल से कोटे से ज्यादा बारिश भोपाल में सितंबर महीने की औसत बारिश 7 इंच है, लेकिन पिछले 5 साल से कोटे से ज्यादा पानी बरस रहा है। ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1961 में पूरे सितंबर माह में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 2 सितंबर 1947 को बना था। इस महीने औसत 8 से 10 दिन बारिश होती है। वहीं, दिन में तापमान 31.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।  

मध्यप्रदेश में मानसून का आखिरी दौर, 21 सितंबर से झमाझम बारिश के आसार; 3 जिलों में अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून अब अपने अंतिम दौर में है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में इसकी विदाई का सिलसिला शुरू होने का अनुमान है। हालांकि, इससे पहले प्रदेश में बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, 21 सितंबर तक कई इलाकों में बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है। मौसम के आगामी सात दिनों के पूर्वानुमान के अनुसार 18 से 21 सितंबर तक प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बनी रहने की संभावना है। 22 सितंबर से बारिश में कुछ कमी आ सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून की वापसी सबसे पहले पश्चिमी राजस्थान से शुरू होने के संकेत हैं, जबकि मध्य प्रदेश में इसकी सक्रियता सितंबर के आखिरी सप्ताह तक बनी रह सकती है। कम बारिश वाले जिलों को मिल सकती है राहत मानसून के बचे हुए दिनों में होने वाली बारिश से प्रदेश के उन जिलों में स्थिति सुधर सकती है, जहां इस सीजन अब तक सामान्य से कम पानी गिरा है। फिलहाल प्रदेश के 18 जिलों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं। वहीं, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे है। आलीराजपुर में सामान्य बारिश की तुलना में करीब आधा पानी ही दर्ज हुआ है। दूसरी ओर निवाड़ी में सामान्य से 54% ज्यादा बारिश हो चुकी है। भोपाल-सीहोर और देवास में झमाझम बारिश गुरुवार दोपहर भोपाल, सीहोर और देवास में बारिश का तेज दौर देखने को मिला। भोपाल-इंदौर रोड पर सोनकच्छ में कुछ समय के लिए इतनी तेज बारिश और अंधेरा छाया कि वाहन चालकों को दिन में ही हेडलाइट जलानी पड़ी। ग्वालियर में भी दिनभर की उमस के बाद शाम को मौसम बदला। शहर में झमाझम बारिश होने से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली। अरब सागर में बना कम दबाव का क्षेत्र मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, फिलहाल सौराष्ट्र और उससे लगे उत्तर-पूर्वी अरब सागर के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला है। इसके अलावा मानसून ट्रफ भी इसी कम दबाव वाले क्षेत्र से होकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल होते हुए बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है। इन मौसम प्रणालियों के कारण मध्य भारत में नमी और बारिश की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। 19 सितंबर के बाद बन सकता है नया सिस्टम मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक, 18 से 19 सितंबर के दौरान मध्य प्रदेश में अलग-अलग चरणों में बारिश हो सकती है। इसके बाद 19 सितंबर की शाम के आसपास एक नई मौसम प्रणाली बनने के संकेत हैं। उत्तर थाईलैंड के ऊपर बना ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण 18 सितंबर की शाम तक उत्तर अंडमान सागर के आसपास पहुंच सकता है। इसके प्रभाव से 19 सितंबर के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। यह सिस्टम आगे दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ सकता है। इसके असर से मध्य प्रदेश के मौसम में एक बार फिर बदलाव देखने को मिल सकता है। मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य विदाई आमतौर पर 2 अक्टूबर के आसपास होती है। हालांकि, इस साल मानसून के जाने से पहले सितंबर के आखिरी हफ्ते में राज्य में बारिश का एक और दौर शुरू होने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल के अनुसार, 18 सितंबर की शाम तक बंगाल की खाड़ी में एक चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है। इसके प्रभाव से 19 सितंबर की शाम तक एक कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है। यदि यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए मजबूत होता है, तो 21 सितंबर से राज्य में भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक औसतन 33.1 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य बारिश का 88.7 प्रतिशत है। राज्य में आमतौर पर मानसून के दौरान औसतन 37.3 इंच बारिश होती है। वर्तमान में राज्य में सामान्य से लगभग 7 प्रतिशत कम बारिश हुई है, लेकिन नए सिस्टम के सक्रिय होने से इस कमी में सुधार हो सकता है। MP में अब तक 33.1 इंच बारिश मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में अब तक 842.1 मिलीमीटर यानी करीब 33.1 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। यह मानसूनी कोटे का 88.9% है। इस अवधि में सामान्य बारिश 905.3 मिलीमीटर यानी करीब 35.6 इंच होनी चाहिए थी। इस हिसाब से प्रदेश में अभी करीब 2.5 इंच बारिश कम है। ओवरऑल प्रदेश में बारिश सामान्य से 7% कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में यह कमी करीब 2% और पश्चिमी हिस्से में 11% दर्ज की गई है।

विदाई से पहले फिर बरसेगा मानसून! सितंबर अंत में MP में बारिश का नया सिस्टम तैयार

भोपाल   मध्यप्रदेश में मानसून अब विदाई की ओर है, लेकिन बारिश का एक और दौर प्रदेश को तरबतर सकता है. मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 2 अक्टूबर के आसपास मानसून की सामान्य विदाई से पहले सितंबर के आखिरी सप्ताह में बंगाल की खाड़ी से बनने वाला नया सिस्टम बारिश बढ़ा सकता है. फिलहाल प्रदेश में सामान्य से करीब 7 प्रतिशत कम बारिश है, लेकिन मानसून के अंत तक यह कमी सामान्य सीमा के भीतर रहने के आसार हैं. जबकि प्रदेश की सामान्य मौसमी बारिश 37.3 इंच है।  7 प्रतिशत की कमी, फिर भी कोटा पूरा होने की उम्मीद कम मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, '' 1 जून से 17 सितंबर तक मध्यप्रदेश में दीर्घकालिक औसत से 7 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. वहीं, पूर्वी मध्यप्रदेश में कमी 2 प्रतिशत और पश्चिमी मध्यप्रदेश में 11 प्रतिशत है. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ दिनों में बारिश होने के बावजूद मानसून का पूरा कोटा हासिल होना मुश्किल है. हालांकि, अंतिम आंकड़ा सामान्य सीमा के भीतर रह सकता है।  सितंबर के आखिरी सप्ताह में फिर एक्टिव होगा मानसून मौसम केंद्र के अनुसार विदाई से पहले दक्षिण-पश्चिम मानसून का एक अच्छा दौर आ सकता है. बंगाल की खाड़ी में 18 सितंबर की शाम तक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है. इसके प्रभाव से 19 सितंबर की शाम तक निम्न दबाव का क्षेत्र बन सकता है. वहीं, यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा और मजबूत हुआ तो मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां फिर बढ़ सकती हैं. फिलहाल 20 सितंबर तक प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अलर्ट नहीं है. ऊपरी हिस्से से मानसून ट्रफ गुजर रही है और अरब सागर में भी कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है, लेकिन इनका मध्यप्रदेश पर बड़ा असर नहीं दिख रहा है. हालांकि, स्थानीय मौसम तंत्र से कुछ जिलों में तेज बौछारें पड़ सकती हैं।  32 जिलों में बारिश, हाटपिपलिया में पौने 2 इंच पिछले 24 घंटों में प्रदेश के 32 जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई. भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, भिंड, मुरैना, सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, मैहर, रीवा, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, अशोकनगर, धार, खरगोन, खंडवा, देवास और शाजापुर में बारिश दर्ज की गई है. सबसे अधिक बारिश देवास के हाटपिपलिया में करीब 45 मिमी रही. रहटगढ़ में 29.4 मिमी और सतना में 25.2 मिमी पानी गिरा।  बीते 13 साल में आखिरी सप्ताह में बारिश का ट्रेंड भोपाल के पिछले 13 साल के आंकड़े बताते हैं कि सितंबर के आखिरी सप्ताह में हर साल बारिश हुई है. कभी एक दिन तो कभी लगातार पांच दिन तक पानी बरसा. साल 2019 में पूरे सप्ताह बारिश हुई थी, जबकि 2025 में तीन दिन बारिश दर्ज की गई. 2023 और 2024 में सितंबर के अंतिम सप्ताह के दौरान एक दिन में दो इंच से ज्यादा बारिश भी रिकॉर्ड हुई थी। 

छत्तीसगढ़ में अगले दो दिन सामान्य बारिश के आसार, रायपुर का पारा 33 डिग्री तक जाने की संभावना

रायपुर  छत्तीसगढ़ में बारिश का दौर फिलहाल बना हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक इसके पीछे एक साथ तीन मौसमी सिस्टम सक्रिय हैं। मानसून ट्रफ, कम दबाव के क्षेत्र से जुड़ी ट्रफ और बंगाल की खाड़ी के पास बना चक्रवाती घेरा प्रदेश में नमी पहुंचा रहे हैं। इन्हीं मौसमी परिस्थितियों के प्रभाव से अगले दो दिनों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। पिछले 24 घंटे में कई जगह बारिश पिछले 24 घंटे के दौरान छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। इस दौरान माना में सबसे अधिक 33.2°C अधिकतम तापमान रिकॉर्ड किया गया। वहीं, प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान पेंड्रा रोड में 20°C दर्ज हुआ। रायपुर में बादल और बारिश के आसार राजधानी रायपुर में 15 सितंबर को आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार शहर में एक-दो बार बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।रायपुर में आज अधिकतम तापमान करीब 33°C और न्यूनतम तापमान करीब 25°C रहने का अनुमान है। 82 दिन पहले छत्तीसगढ़ पहुंचा था मानसून छत्तीसगढ़ में मानसून को आए 82 दिन हो चुके हैं। 23 जून को दंतेवाड़ा के रास्ते प्रदेश में प्रवेश करने के बाद से अब तक अच्छी बारिश दर्ज की गई है। 12 सितंबर तक प्रदेश में 1001 मिमी बारिश हो चुकी है। यह इस अवधि के औसत 1041.1 मिमी से करीब 4% कम है। 46 जलाशयों में 91% से ज्यादा औसत जलभराव लगातार हो रही बारिश का असर प्रदेश के जलाशयों पर भी दिखाई दे रहा है। 46 प्रमुख और मध्यम जलाशयों में औसत जलभराव 91.10% तक पहुंच गया है। 7 जलाशय पूरी तरह भर चुके हैं। 18 जलाशयों में 90% से ज्यादा पानी है। कई जलाशयों का जलस्तर बढ़ने के कारण पानी की निकासी करनी पड़ी है। धमतरी के रविशंकर सागर समेत कई जलाशयों के गेट खोले गए हैं। इससे साफ है कि प्रदेश में मानसून के दौरान हुई बारिश ने जलाशयों की स्थिति मजबूत की है। अगले दो दिन मौसम का हाल अगले दो दिनों में छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने की संभावना है। गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए विशेषकर खुले क्षेत्रों और खेतों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। 46 जलाशयों में 90 फीसदी से ज्यादा पानी मानसून को प्रदेश में पहुंचे 82 दिन हो चुके हैं। 23 जून को दंतेवाड़ा के रास्ते दाखिल हुए मानसून से अब तक अच्छी बारिश हुई। 12 सितंबर तक प्रदेश में 1001 मिमी पानी बरस चुका है। यह इस अवधि के औसत 1041.1 मिमी से केवल 4% कम है। लगातार बारिश से बांधों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। प्रदेश के 46 प्रमुख और मध्यम जलाशयों में औसत जलभराव 91.10% पहुंच गया है। इनमें सात जलाशय पूरी तरह भर चुके हैं, जबकि 18 अन्य में 90% से ज्यादा पानी है। धमतरी के रविशंकर सागर समेत कई जलाशयों के गेट खोलने पड़े हैं।  

उज्जैन-रतलाम समेत 7 जिलों में तेज बारिश की चेतावनी, 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

भोपाल मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। पश्चिमी हिस्से में बने मौसम तंत्र के असर से रविवार को कई जिलों में तेज बारिश हुई। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर संभाग के कई इलाकों में बारिश का दौर चला। बड़वानी में नदी-नाले और तालाब उफान पर आ गए, जबकि रतलाम, मुरैना, शाजापुर, झाबुआ, खरगोन और खंडवा में भी तेज बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में निम्न दाब क्षेत्र के साथ द्रोणिका सक्रिय है। इसके असर से पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं। जिन इलाकों में पिछले दिनों बारिश की कमी बनी हुई थी, वहां भी अब बारिश का दौर पहुंचा है। सोमवार को उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, राजगढ़, गुना और श्योपुर में भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, रायसेन, सीहोर, विदिशा, धार, झाबुआ, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, देवास, शाजापुर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, शिवपुरी, मुरैना, भिंड, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, रीवा, सतना, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ समेत कई जिलों में हल्की से तेज बारिश हो सकती है।  नदी-नाले उफने, बांध के गेट खुले रविवार को बड़वानी के सेंधवा क्षेत्र में रुक-रुककर तेज बारिश होती रही। कई नदी-नालों और तालाबों का जलस्तर बढ़ गया। रलावती का बड़ा तालाब भी ओवरफ्लो हो गया।टीकमगढ़ में तेज बारिश के बाद बान सुजारा बांध के चार गेट खोलने पड़े। हरदा के वन क्षेत्र में लाखादेह की पहाड़ी नदी उफान पर रही। शाजापुर के मक्सी, झाबुआ के पेटलावद, खरगोन के कसरावद, खंडवा, महू, ओंकारेश्वर और रतलाम में भी तेज बारिश हुई। भोपाल में भी बारिश के असर से जलाशयों में पानी बढ़ा। रविवार रात कलियासोत डैम के तीन गेट खोले गए। 15 सितंबर से बारिश की रफ्तार घटने के संकेत मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, 14 सितंबर को भी पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। निम्न दाब क्षेत्र के राजस्थान-गुजरात की ओर बढ़ने के दौरान पश्चिमी जिलों में इसका असर बना रहेगा। हालांकि 15 सितंबर के बाद बारिश की तीव्रता और दायरा धीरे-धीरे कम होने की संभावना है। अगले सात दिनों में पश्चिमी मध्य प्रदेश में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है। चंबल नदी में नहाते समय पिता-पुत्र डूबे रविवार को भोपाल समेत कई जिलों में तेज बारिश हुई। बड़वानी के सेंधवा में नदी-नाले और तालाब उफान पर रहे। रलावती में जिले का सबसे बड़ा तालाब ओवरफ्लो हो गया। मुरैना में चंबल नदी में नहाते समय पिता-पुत्र डूब गए। दोनों बाबू महाराज मंदिर में दर्शन के लिए आए थे। शाजापुर के मक्सी, झाबुआ के पेटलावद, खरगोन के कसरावद और खंडवा में भी मूसलधार बारिश हुई। टीकमगढ़ में तेज बारिश के बाद बान सुजारा बांध के 4 गेट खोल दिए गए। हरदा के वन क्षेत्र में लाखादेह की पहाड़ी नदी उफान पर रही। महू, ओंकारेश्वर, रतलाम समेत कई जिलों में तेज बारिश हुई। 32 जिलों में अब भी बारिश की कमी प्रदेश के 32 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में स्थिति पिछले सप्ताह की तुलना में सुधरी है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 2 से 25 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। पश्चिमी हिस्से में कमी ज्यादा है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 7 से 52 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।  झोंकेदार हवा से सावधान मौसम विभाग ने आगे बताया कि प्रदेश के शेष जिलों में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. वहीं 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवा चलेगी. इस दौरान खुले में, टिन शेड, हल्की नुकीली या धारदार वस्तुओं आदि के आसपास न खड़े हों।  MP में क्यों बदला मौसम का मिजाज? मौसम विभाग की ओर से बताया जा रहा है कि दक्षिण छत्तीसगढ़ और उसके आसपास के क्षेत्रों के ऊपर एक मजबूत कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, जो साइक्लोनिक सर्कुलेशन के साथ पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है. मानसून ट्रफ इस वक्त मध्य प्रदेश के बीच से गुजर रहा है. इसी के चलते प्रदेश में अभी भी बारिश का माहौल बना हुआ है. माना जा रहा है कि इस माह के अंत तक मानसून राज्य से विदा हो सकता है। 

मध्य प्रदेश में फिर बदला मौसम, 15 जिलों में बारिश का अलर्ट; 3 दिन रहेगा असर

भोपाल  मध्य प्रदेश में कुछ दिनों के ब्रेक के बाद एक बार फिर मानसून एक्टिव हो गया है. प्रदेश के कई हिस्सों में शुक्रवार को बारिश हुई. मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. इंदौर, जबलपुर, सागर और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में बारिश होने की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अगले तीन दिनों तक मानसून सिस्टम का असर बना रहेगा।  शुक्रवार को भोपाल समेत कई जिलों में मौसम बदला और तेज बारिश हुई. भोपाल में बारिश के साथ तेज आंधी भी चली. इसके कारण कई इलाकों में कुछ समय के लिए विजिबिलिटी 100 मीटर से भी कम हो गई. सड़कों पर गाड़ी चलाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा. दमोह, टीकमगढ़ और विदिशा समेत कई जिलों में भी बारिश दर्ज की गई।  मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बना लो प्रेशर एरिया अब प्रदेश के मौसम को प्रभावित कर रहा है. इसी सिस्टम के कारण मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर दोबारा शुरू हुआ है. आने वाले दिनों में इस सिस्टम का असर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिल सकता है।  भोपाल समेत कई जिलों में बारिश शुक्रवार को भोपाल में बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं। कुछ इलाकों में विजिबिलिटी 100 मीटर से भी कम हो गई, जिससे वाहन चालकों को काफी सावधानी बरतनी पड़ी। दमोह, टीकमगढ़ और विदिशा समेत कई जिलों में भी बारिश दर्ज की गई। बारिश के बाद तापमान में गिरावट आई और लोगों को गर्मी से राहत मिली। मौसम विभाग ने इंदौर, जबलपुर, सागर और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में बारिश की संभावना जताई है। भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम सक्रिय रह सकता है। 15 सितंबर तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। तेज बारिश के दौरान निचले इलाकों में जलभराव की समस्या हो सकती है। वाहन चालकों को कम विजिबिलिटी में धीमी गति से गाड़ी चलाने की सलाह दी गई है। तेज आंधी के समय पेड़ और बिजली के खंभों से दूर रहना भी जरूरी है। आने वाले दिनों में बारिश से राहत तो मिलेगी, लेकिन खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतना बेहद जरूरी रहेगा। बारिश नहीं होने से गर्मी-उमस दोनों बढ़ी बता दें कि प्रदेश के कई जिलों में पिछले 3 से 4 दिन बारिश नहीं हुई। इस वजह से गर्मी और उमस दोनों का असर बढ़ गया। बारिश शुरू होने से लोगों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है। प्रदेश में अब तक 31.5 इंच बारिश मौसम विभाग के अनुसार, अब तक हुई बारिश की बात करें तो इस सीजन 801.3 मिमी यानी, 31.5 इंच बारिश हो चुकी है। यह अब तक की सामान्य बारिश 34.2 इंच (868.6 मिमी) की तुलना में 2.7 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 8 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 1 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में औसत से 14% बारिश कम हुई है। 33 जिलों में 1% से 56% तक कम बारिश प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 1% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 3% से 26% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। बीते एक सप्ताह से यहां के कई जिलों में बाढ़ के हालात बने हुए हैं। इससे आंकड़े में सुधार आया और सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्सा आंकड़ों में बेहतर रहा है, लेकिन बुधवार तक आंकड़ा एक प्रतिशत हो गया। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 1% से 56% कम पानी गिरा है। इन 22 जिलों में ज्यादा बारिश IMD की मानें तो अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़्र, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। 15 सितंबर तक बारिश का दौर मौसम विभाग ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के कारण प्रदेश में 15 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. इस दौरान कई जिलों में हल्की बारिश हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश भी होने का अनुमान है. कहीं-कहीं तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।  तीन-चार दिन से थमी थी बारिश, अब फिर राहत प्रदेश के कई इलाकों में पिछले तीन-चार दिन से बारिश नहीं होने के कारण गर्मी और उमस बढ़ गई थी। शुक्रवार को बारिश शुरू होने के बाद मौसम बदला और लोगों को राहत मिली। भोपाल में बारिश के दौरान तेज हवा के कारण सड़क पर दृश्यता काफी कम हो गई। दमोह में तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भर गया। खंडवा में भी दोपहर में पहले तेज हवा चली और इसके बाद बारिश हुई। टीकमगढ़ में बारिश के बाद तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहाना हो गया। 31.5 इंच बारिश, सामान्य आंकड़े से अभी 2.7 इंच पीछे मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक 801.3 मिमी यानी 31.5 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 868.6 मिमी यानी 34.2 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में अभी 2.7 इंच यानी 8 प्रतिशत बारिश कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी करीब एक प्रतिशत रह गई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई है। 33 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम प्रदेश के 33 जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी हिस्से के कई जिलों में कमी 3 से 26 प्रतिशत तक है। इनमें बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडोरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी शामिल हैं। पश्चिमी हिस्से के कई जिलों में कमी ज्यादा है। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम पानी गिरा है। 22 जिलों में … Read more

ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग में तेज बारिश का अलर्ट, उज्जैन में गिरा महाकाल द्वार; शिवपुरी में हादसा

भोपाल  मध्यप्रदेश में मानसून अब बाढ़ और उफनती नदियों वाला दौर दिखा रहा है। पूर्वी हिस्से में लगातार बारिश के बाद अब पश्चिम और उत्तरी जिलों में भी मानसून सक्रिय है। नर्मदा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। भोपाल के भदभदा और कलियासोत के साथ बरगी बांध के गेट भी खोले गए हैं। नदी-नालों के उफान और बांधों से छोड़े जा रहे पानी के कारण कई इलाकों में लोगों को सतर्क किया गया है। आज 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम केंद्र ने रविवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, पन्ना और सतना में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, इंदौर, धार, उज्जैन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, जबलपुर, मंडला, रीवा, सीधी, सिंगरौली समेत कई जिलों में हल्की से तेज बारिश हो सकती है। भोपाल में डैम से पानी छोड़ा भोपाल में भदभदा के बाद कलियासोत बांध के गेट भी खोले गए। शनिवार शाम चार गेट खोले गए थे। पानी का दबाव कम होने पर इन्हें धीरे-धीरे बंद किया गया। रात में एक गेट खुला रहा। प्रशासन ने कलियासोत नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उज्जैन में बारिश की वजह से महाकाल मंदिर से रामघाट जाने वाले रोड का ऐतिहासिक महाकाल द्वार शनिवार देर रात गिर गया। किसी जनहानि की सूचना नहीं है। एक्जीक्यूटिव इंजीनियर कमल सक्सेना ने कहा- महाकाल द्वार के पास निर्माण कार्य के दौरान गहरी खुदाई चल रही है। बारिश के कारण मिट्टी में नमी बढ़ने और जमीन के सेटलमेंट की वजह से द्वार की संरचना प्रभावित होने की आशंका है। वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। रविवार सुबह शिवपुरी जिले के सिकराऊदा गांव में 21 वर्षीय राम रावत का शव गहलोनी के पास नदी किनारे मिला। वह शुक्रवार को रपटा पार करते समय तेज बहाव में बह गया था। शनिवार को SDERF ने दिनभर सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन युवक का पता नहीं चल सका था। रविवार को नदी का जलस्तर कम होने के बाद ग्रामीणों ने शव देखा। कढ़ाही में बैठकर रस्सी के सहारे पार कर रहे नाला मुरैना के कैलारस में खेरली-पचोखरा रोड पर गुराह नाले का पुल बारिश के बाद पानी में डूब गया है। जरूरी काम से निकले लोग बड़ी कढ़ाही जैसे बर्तन में बैठकर रस्सी के सहारे नाले के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंच रहे हैं। पानी का बहाव तेज होने के कारण जरा सी चूक हादसे का कारण बन सकती है। 9 सितंबर तक बारिश का दौर मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 6 सितंबर को भी मौसम तंत्र सक्रिय रहेगा। इसके बाद 7, 8 और 9 सितंबर को भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज बारिश जारी रह सकती है। यानी सितंबर की शुरुआत में मिली बारिश प्रदेश में अब तक की कमी को और कम कर सकती है।  23 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश लगातार बारिश से प्रदेश के बारिश के आंकड़े में तेजी से सुधार हुआ है। अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इसके विपरीत कई जिलों में अभी भी बारिश की कमी बनी हुई है। पश्चिमी मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में सामान्य से 2 से 53 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। जून की कमी सितंबर में हो रही कम प्रदेश में बारिश का मौसम इस बार उतार-चढ़ाव वाला रहा। जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश के बावजूद जून की कमी पूरी तरह नहीं भर सकी। सितंबर के पहले सप्ताह में सक्रिय सिस्टम ने बारिश का आंकड़ा तेजी से ऊपर किया है।प्रदेश में सामान्य बारिश करीब 37.3 इंच मानी जाती है। अब तक 30 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है और मौजूदा सिस्टम सक्रिय रहने से आने वाले दिनों में आंकड़े में और सुधार की उम्मीद है।