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कोहरे की चादर में लिपटा राजस्थान, 20 मीटर से कम दिख रही सड़कें

जयपुर राजस्थान इन दिनों घने कोहरे की चपेट में है। प्रदेश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर अगले तीन दिनों के लिए बेहद घना कोहरा छाए रहने की चेतावनी मौसम विभाग की ओर से जारी की गई है। कोहरे के चलते प्रदेश में कई जगह सड़क हादसे भी हो रहे हैं। राजधानी जयपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में भी घना कोहरा देखा जा रहा है। कई जगहों पर दृश्यता 20 मीटर से भी कम दर्ज की गई, जिससे जनजीवन प्रभावित होता नजर आ रहा है। राजस्थान के पूर्वी हिस्सों में कोहरे का प्रभाव सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। रविवार को गंगानगर, हनुमानगढ़, अलवर, भरतपुर, करौली, दौसा, डीग, धौलपुर व खैरथल-तिजारा बेहद घना कोहरा रहा। उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। रात के तापमान में बढ़ोतरी हो रही है, जबकि दिन के तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। रविवार को प्रदेश के कई शहरों में अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। पिछले 24 घंटों के दौरान उत्तर-पूर्वी राजस्थान के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली और दौसा जिलों में घना कोहरा छाया रहा। कोहरे के चलते इन इलाकों में दिन के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। रविवार को अलवर और करौली प्रदेश के सबसे ठंडे शहर रहे। अलवर में अधिकतम तापमान 17 डिग्री और करौली में 17.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। करौली में दिन के तापमान में 7 डिग्री, जबकि अलवर में 5.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई। दौसा, श्रीगंगानगर, कोटा, पिलानी, जयपुर, चित्तौड़गढ़ और जैसलमेर समेत लगभग सभी शहरों में तापमान 1 से 7 डिग्री सेल्सियस तक गिरा। कोहरे के कारण कई शहरों में ‘ठंडा दिन’ दर्ज किया गया। दौसा में अधिकतम तापमान 23.3, सिरोही में 22.8, बारां में 23.7, गंगानगर में 21.1, पिलानी में 21.9 और कोटा में 24.2 डिग्री सेल्सियस रहा। रात के तापमान में बढ़ोतरी पश्चिमी विक्षोभ के कारण बादल छाए रहने से उत्तरी हवाएं कमजोर पड़ी हैं। इससे न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी हुई है और सुबह-शाम की सर्दी कुछ कम हुई है। कई शहरों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा। सबसे कम न्यूनतम तापमान माउंट आबू में 7 और चित्तौड़गढ़ में 7.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कल से बढ़ेगी सर्दी, कोहरा रहेगा जारी मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ का असर अभी बना रहेगा, जिससे कुछ इलाकों में हल्के बादल छाए रह सकते हैं। 23 दिसंबर से उत्तर भारत से ठंडी हवाओं का असर बढ़ेगा, जिससे न्यूनतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट हो सकती है। साथ ही उत्तर-पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में घना कोहरा छाए रहने की संभावना है।

एमपी के पेंच से राजस्थान पहुंची बाघिन, वायुसेना के हेलीकॉप्टर से सफल ट्रांसलोकेशन

बूंदी/ सिवनी रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में पिछले एक महीने से चल रही इंतजार की घड़ियां रविवार को समाप्त होने को हैं। मध्यप्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व से ट्रांसलोकेट की गई बाघिन पीएन 224 आज रात तक बूंदी पहुंच सकती है। हवाई मार्ग से इंटर-स्टेट टाइगर ट्रांसलोकेशन का राजस्थान में यह पहला मामला है। इस ट्रांसलोकेशन में भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद ली गई है और मामले को देखते हुए बूंदी रामगढ़ टाइगर रिजर्व से जुड़े तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट पर रखा गया है। मध्यप्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व में पिछले 24 दिनों से वन विभाग को चकमा दे रही बाघिन को आखिरकार रविवार को पकड़ लिया गया और भारतीय वायुसेना के MI-17 हेलीकॉप्टर के जरिए राजस्थान के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया गया। यह इंटर-स्टेट टाइगर ट्रांसलोकेशन का एक महत्वपूर्ण और सफल अभियान रहा। अधिकारियों के अनुसार बाघिन को रविवार सुबह से दोपहर तक कई बार हाथियों की मदद से घेरा गया। इसके बाद विशेषज्ञों ने उसे सावधानीपूर्वक ट्रैंकुलाइज किया। बेहोश करने के बाद बाघिन को रेस्क्यू वाहन में डालकर मध्य प्रदेश में सिवनी जिले के सुकतरा एयरस्ट्रिप लाया गया, जहां से शाम करीब 6 बजे MI-17 हेलीकॉप्टर द्वारा राजस्थान के लिए रवाना किया गया। हेलीकॉप्टर में बाघिन के साथ पिंजरा और विशेषज्ञों की पूरी टीम मौजूद थी। इस टीम में पेंच टाइगर रिजर्व के वन्यजीव चिकित्सक डॉ. अखिलेश मिश्रा, सहायक निदेशक गुरलीन कौर, रुखड़ रेंज के रेंजर लोकेश पवार, वाइल्ड लाइफ कंजरवेशन ट्रस्ट के पशु चिकित्सक डॉ. प्रशांत देशमुख, राजस्थान वन विभाग के अधिकारी और अन्य विशेषज्ञ शामिल थे, ताकि बाघिन की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित की जा सके। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार रात होने के कारण हेलीकॉप्टर को सीधे बूंदी नहीं उतारा गया। जयपुर में लैंडिंग के बाद बाघिन को सड़क मार्ग से रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व लाया जा रहा है। पूरे अभियान में उच्च स्तरीय अधिकारियों की सतत निगरानी रही। बूंदी रामगढ़ टाइगर रिजर्व के एसीएफ नवीन नारायणी ने बताया कि पिछले तीन दिनों से सभी टीमों को अलर्ट पर रखा गया था और सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। यह इंटर-स्टेट ट्रांसलोकेशन बाघों की प्रजनन दर बढ़ाने और पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में मदद करेगा। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि नई बाघिन का रामगढ़ में बसना स्थानीय प्रजातियों के बीच सामंजस्य बनाए रखेगा और जैव विविधता को मजबूती प्रदान करेगा। मध्य प्रदेश के मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक शुभ रंजन सेन ने बताया कि बाघिन पीएन 224 को पहले से आईडेंटिफाई कर उसे एक बार रेडियो कॉलर लगा दिया था, पर वह निकल भी गया था। ऐसे में दोबारा आज उसे दुबारा मिलने के बाद ट्रेंकुलाइज किया गया है। इस बाघिन की उम्र करीब ढाई-तीन साल के आसपास है।

दिल्ली से राजस्थान तक अरावली को लेकर टकराव, आखिर किस बात का है विवाद?

 गुरुग्राम अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा ने दिल्ली से राजस्थान तक विरोध के सुर तेज कर दिए हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं को डर है कि बदली हुई परिभाषा देश की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली के इकोलॉजिकल संतुलन को बिगाड़ सकती है। नई परिभाषा के अनुसार केवल उसी भू-आकृति को अरावली पहाड़ियों में शामिल किया जाएगा, जो अपने स्थानीय धरातल से कम से कम 100 मीटर ऊंची हो। अरावली रेंज ऐसी दो या दो से ज्यादा पहाड़ियों का समूह है जो एक-दूसरे से 500 मीटर की दूरी पर हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम में शनिवार को बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, सामाजिक संगठनों के सदस्यों और स्थानीय लोगों हरियाणा के कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह के घर के बाहर एकत्रित होकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी बैनर और तख्तियां लिए हुए थे। वे "अरावली बचाओ, भविष्य बचाओ" और "अरावली नहीं तो जीवन नहीं" जैसे नारे लगा रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने नई परिभाषा को मंजूरी देने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भी गहरी चिंता व्यक्त जताई। अरावली की नई परिभाषा के बारे में क्या कहते हैं एक्टिविस्ट? पीटीआई की एक रिपोर्ट में बताए गए एक्टिविस्ट्स के मुताबिक, नई परिभाषा से माइनिंग, कंस्ट्रक्शन और कमर्शियल एक्टिविटीज को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे अरावली रेंज की प्राकृतिक सुंदरता नष्ट होने का खतरा बढ़ जाएगा। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि हमारा मानना ​​है कि यह फैसला इसके इकोलॉजिकल संतुलन के लिए नुकसानदायक हो सकता है। एक्टिविस्ट्स का कहना है कि अरावली पर्वत श्रृंखला दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करती है, जो प्रदूषण, रेगिस्तान बनने और पानी के संकट को रोकने में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने मांग की कि सरकार अरावली को पूरी तरह से संरक्षित क्षेत्र घोषित करे और एक सख्त और स्पष्ट संरक्षण नीति लागू करे। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, "विकास के नाम पर प्रकृति से समझौता नहीं किया जा सकता, क्योंकि अरावली का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा है। हवा में जहर धीरे-धीरे फैलता जा रहा है।'' राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने शनिवार को केंद्र सरकार के अरावली रेंज को फिर से परिभाषित करने के कदम की आलोचना की, जिससे 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों वाले इलाकों में माइनिंग की इजाजत मिल जाएगी। जूली ने चेतावनी दी कि इससे बड़े पैमाने पर इकोलॉजिकल नुकसान होने के साथ ही रेगिस्तान बन सकता है, क्योंकि अरावली रेंज रेगिस्तान बनने से रोकने और ग्राउंडवॉटर लेवल बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। जूली ने एएनआई को बताया, "एक तरफ आप 'एक पेड़ मां के नाम' नाम से कैंपेन चला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आप अपने दोस्तों के लिए लाखों पेड़ काट रहे हैं। यह गलत है… अरावली राजस्थान की जीवनरेखा है। यह अरावली ही रेगिस्तान को रोकती है… वैज्ञानिकों ने भी माना है कि अगर अरावली पर्वत श्रृंखला नहीं होती, तो दिल्ली तक का पूरा इलाका रेगिस्तान बन गया होता।" सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक कमेटी की अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखलाओं की परिभाषा संबंधी सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था। अरावली पर्वतमाला की नई परिभाषा तय किए जाने के विरोध में शानिवार को राजस्थान के उदयपुर में बड़ी संख्या में वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया।इन वकीलों ने अरावली पर्वतमाला की ऊंचाई पर आधारित नई परिभाषा पर चिंता जताई। वकीलों ने नारेबाजी करते हुए न्यायालय परिसर से जिला कलेक्ट्रेट तक मार्च किया। वहां उन्होंने अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा।

कोर्ट सख्त: नियम तोड़ने वाले राजस्थान के 10 डेंटल कॉलेजों को ₹10-10 करोड़ भरने का आदेश

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बीडीएस (बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी) में दाखिले के नियमों का उल्लंघन करने पर राजस्थान के 10 निजी डेंटल कॉलेजों पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इन सभी कॉलेजों पर 10-10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि इन कॉलेजों ने जानबूझकर नियमों की अनदेखी की, जिससे मेडिकल शिक्षा के मानकों को नुकसान पहुंचा। न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई और न्यायमूर्ति जेके महेश्वरी की पीठ ने कॉलेजों के साथ-साथ राज्य सरकार की भूमिका पर भी नाराजगी जताई। अदालत ने बीडीएस दाखिले (शैक्षणिक सत्र 2016-17) में कानूनी प्रक्रिया का पालन न करने पर राजस्थान सरकार को 10 लाख रुपये राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (आरएसएलएसए) में जमा करने का आदेश दिया। क्या था मामला? बीडीएस में दाखिले के लिए एनईईटी परीक्षा में न्यूनतम प्रतिशत तय है। राजस्थान सरकार ने बिना अधिकार के इस न्यूनतम प्रतिशत में पहले 10 प्रतिशत और फिर पांच प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दे दी। इस छूट के कारण कई ऐसे छात्रों को दाखिला मिल गया, जो तय पात्रता पूरी नहीं करते थे। इतना ही नहीं, कुछ कॉलेजों ने इस 10+5 प्रतिशत की छूट से भी आगे जाकर छात्रों को दाखिला दे दिया, जो पूरी तरह नियमों के खिलाफ था। छात्रों को राहत, कॉलेजों पर सख्ती सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय आधार पर 2016-17 में दाखिला पाए छात्रों को राहत दी। अदालत ने अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए उनकी बीडीएस डिग्री को वैध (रेग्युलराइज) कर दिया। हालांकि, जिन छात्रों को राहत मिली है, उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे राजस्थान हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल करेंऔर राज्य में आपदा, महामारी या किसी आपात स्थिति में निःशुल्क सेवा देने के लिए तैयार रहें। जुर्माने की रकम कहां जाएगी? सभी कॉलेजों को जुर्माने की राशि आठ सप्ताह के भीतर आरएसएलएसए में जमा करनी होगी। यह पैसा वन स्टॉप सेंटर, नारी निकेतन, वृद्धाश्रम और बाल देखभाल संस्थानों जैसे सामाजिक कल्याण के कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा।

राजस्थान: बाड़मेर में चल रही थी एमडी ड्रग फैक्टरी, करोड़ों की नशीली सामग्री जब्त

बाड़मेर बाड़मेर जिले में पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ एक और बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस थाना सदर क्षेत्र के केरली, आदर्श चवा इलाके में छापामारी कर अवैध एमडी ड्रग्स बनाने की फैक्टरी का पर्दाफाश किया गया। कार्रवाई के दौरान मौके से करीब 40 किलो एमडी ड्रग बरामद की गई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 80 करोड़ रुपये आंकी गई है।   भारी मात्रा में रसायन और उपकरण जब्त पुलिस ने फैक्टरी से भारी मात्रा में ड्रग्स बनाने में प्रयुक्त रसायन, मशीनें और अन्य उपकरण भी जब्त किए हैं। जब्त सामग्री से लगभग 50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त एमडी ड्रग्स तैयार की जा सकती थी। इस पूरी सामग्री की कुल कीमत करीब 85 करोड़ रुपये बताई गई है, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो जाता है।   डीएसटी की सूचना पर की गई संयुक्त कार्रवाई एसपी नरेंद्र सिंह मीना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि डीएसटी टीम को सूचना मिली थी कि सदर थाना क्षेत्र के आदर्श चवा इलाके में एक मकान में अवैध एमडी फैक्टरी संचालित हो रही है। सूचना के आधार पर डीएसटी और सदर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने भैराराम पुत्र हनुमानाराम जाट के मकान पर दबिश दी, जहां से अवैध मादक पदार्थ और निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई।   मकान मालिक गिरफ्तार, मास्टरमाइंड फरार पुलिस ने मौके से मकान मालिक भैराराम पुत्र हनुमानाराम जाट निवासी केरली, आदर्श चवा को गिरफ्तार कर लिया है। इस फैक्ट्री का मास्टरमाइंड कुख्यात तस्कर मोटाराम पुत्र वीरमाराम जाट निवासी आदर्श चवा बताया गया है। उसके साथ दिनेश गिरी पुत्र अचलगिरी स्वामी निवासी रावतसर और एक अन्य फौजी को भी नामजद किया गया है, जो फिलहाल फरार हैं। पुलिस टीमें उनकी तलाश में जुटी हुई हैं।   बरामदगी और आगे की जांच एसपी ने बताया कि मौके से 39 किलो 777 ग्राम अवैध एमडी और 99 किलो 931 ग्राम केमिकल बरामद किए गए हैं। इसके अलावा कांच के बर्तन, वैक्यूम पंप, सेक्शन पाइप, डिजिटल थर्मामीटर, भट्टियां, मशीनें, प्लास्टिक टंकियां, इलेक्ट्रॉनिक कांटा और दो लग्जरी वाहन भी जब्त किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी एमडी तैयार करने के बाद मशीनों के पार्ट्स खोलकर अलग-अलग स्थानों पर छिपा देते थे। पुलिस ने थाना सदर में मामला दर्ज कर तस्करी नेटवर्क की गहन जांच शुरू कर दी है।

अरावली की ढलान पर खनन को हरी झंडी! SC के फैसले से पर्यावरण पर मंडराया बड़ा खतरा

अरावली देश में पिछले कुछ वर्षों से खनन के जरिए पहाड़ों को काटने का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने पर्यावरण से जुड़े बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। 20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने खनन से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया, जिसके तहत 100 मीटर तक ऊंचाई वाले पहाड़ों पर खनन की अनुमति दी गई है। यह फैसला खासतौर पर राजस्थान और अरावली पर्वतमाला के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह फैसला पूरी तरह लागू हुआ, तो राजस्थान में रेगिस्तान का क्षेत्र बढ़ सकता है। अरावली पर्वतमाला पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला अरावली पर्वतमाला को राजस्थान की लाइफ लाइन कहा जाता है, लेकिन अब यह लाइफ लाइन खतरे में नजर आ रही है। पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि अरावली पर्वत का क्षेत्र तेजी से सिकुड़ रहा है। कोर्ट के अनुसार, अरावली का लगभग 90% हिस्सा अब 100 मीटर से कम ऊंचाई का रह गया है, 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्र को अब पर्वत नहीं, सिर्फ भूभाग माना जाएगा,  इसका सीधा मतलब यह है कि इन इलाकों में खनन के रास्ते खुल सकते हैं। क्या राजस्थान में बढ़ेगा रेगिस्तान? पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया कि अरावली पर्वतमाला अब पहले जैसी ऊंची नहीं रही। अरावली मरुस्थल के विस्तार को रोकने में प्राकृतिक दीवार का काम करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अरावली में खनन बढ़ा, तो: मरुस्थल का विस्तार तेजी से होगा, मानसून की हवाएं कमजोर पड़ेंगी, प्रदेश में बारिश कम होगी। अरावली की ऊंचाई घटने से मानसून सिस्टम भी प्रभावित हो रहा है, जिससे राजस्थान के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राजस्थान की पहचान है अरावली पर्वतमाला अरावली पर्वतमाला को दुनिया की सबसे पुरानी वलित पर्वतमालाओं में से एक माना जाता है। अरावली की कुल लंबाई: 692 किलोमीटर राजस्थान में हिस्सा: करीब 550 किलोमीटर सबसे ऊंची चोटी: गुरु शिखर (माउंट आबू) – ऊंचाई 1727 मीटर अरावली तीन राज्यों—दिल्ली, राजस्थान और गुजरात—से होकर गुजरती है। राजस्थान की अधिकांश नदियों का उद्गम भी अरावली पर्वतमाला से ही होता है, इसलिए इसे प्रदेश की लाइफ लाइन कहा जाता है। अरावली कमजोर होने से क्या होंगे नुकसान अगर अरावली पर्वतमाला का क्षरण इसी तरह जारी रहा, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं: राजस्थान में मरुस्थल का तेजी से विस्तार गर्म हवाओं का असर और बढ़ेगा बंगाल की खाड़ी से आने वाला मानसून कमजोर पड़ेगा भूकंप के झटकों का असर बढ़ सकता है अरावली से निकलने वाली नदियां सूख सकती हैं खेती और फसलों पर बुरा असर पड़ेगा प्रदेश की जलवायु और भौगोलिक संतुलन बिगड़ जाएगा बारिश का सिस्टम हो रहा है प्रभावित पर्यावरण विशेषज्ञ और राजस्थान विश्वविद्यालय की भूगोल विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर के अनुसार, अरावली की ऊंचाई कम होने से राजस्थान का वर्षा तंत्र बिगड़ रहा है। पहले मानसून की हवाएं अरावली से टकराकर पूर्वी राजस्थान में बारिश करती थीं, लेकिन अब अरावली कमजोर होने के कारण हवाएं पश्चिमी राजस्थान की ओर निकल जा रही हैं। इससे पूरे प्रदेश का वर्षा संतुलन गड़बड़ा रहा है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है। कैसे शुरू हुआ अरावली का क्षरण अरावली पर्वतमाला के क्षरण की शुरुआत 1990 के दशक में हुई। इसके मुख्य कारण बताए जा रहे हैं: तेजी से शहरीकरण दिल्ली और राजस्थान में बड़े निर्माण कार्य पत्थर और खनिजों के लिए अंधाधुंध खनन पेड़ों की कटाई स्थिति बिगड़ने पर 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने अरावली में अवैध खनन पर रोक लगाई थी, लेकिन अब नए फैसले के बाद एक बार फिर पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ गई है।  

किसानों पर ‘सेम’ की दोहरी मार, राजस्थान की 2 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित

जयपुर राजस्थान में सूखे से ज्यादा सेम की समस्या खेती को बर्बाद कर रही है।  मिट्टी की लवणता यानी ‘सेम’ की समस्या राजस्थान में तेजी से गंभीर रूप ले रही है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी कि राज्य में करीब 1 लाख 96 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि सेम से प्रभावित हो चुकी है। सबसे ज्यादा असर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में देखने को मिल रहा है, जहां हजारों हेक्टेयर उपजाऊ जमीन दलदली होकर खेती के लायक नहीं रह गई है। इससे किसानों की आजीविका पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने सांसद कुलदीप इंदोरा के एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI) द्वारा वैज्ञानिक अध्ययन कराया गया है। इस अध्ययन में सामने आया कि राजस्थान में 1,95,571 हेक्टेयर भूमि मिट्टी के लवणीकरण से प्रभावित है, जिसे आम भाषा में सेम कहा जाता है। क्यूं बढ़ रही है सेम की समस्या अध्ययन के अनुसार सेम की मुख्य वजहें प्राकृतिक जल निकास में रुकावट, अत्यधिक सिंचाई और भूजल स्तर का बढ़ना हैं। इन कारणों से मिट्टी में मौजूद लवण ऊपर की सतह पर आ जाते हैं, जिससे धीरे-धीरे खेत बंजर हो जाते हैं और फसल उत्पादन प्रभावित होता है। केंद्र सरकार ने माना कि उत्तर राजस्थान के नहर सिंचित क्षेत्रों में स्थिति लगातार बिगड़ रही है। ICAR की रिपोर्ट के मुताबिक अकेले श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में करीब 5,397 हेक्टेयर भूमि सेम से प्रभावित है, जिससे जलभराव, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और कृषि उत्पादकता में कमी आ रही है। ICAR ने सुझाए उपाय समस्या से निपटने के लिए ICAR ने अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों उपाय सुझाए हैं। अल्पकालिक उपायों में प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, सतही जल निकासी में सुधार, सिंचाई का बेहतर प्रबंधन, मिश्रित गुणवत्ता के पानी का उपयोग और नमक सहनशील फसलों को बढ़ावा देना शामिल है। वहीं दीर्घकालिक समाधान के तौर पर भूमिगत जल निकासी प्रणाली, गहरी जड़ों वाले वृक्षों के जरिए बायो-ड्रेनेज और नमक सहनशील पेड़ों के साथ कृषि वानिकी मॉडल अपनाने की सिफारिश की गई है। सरकार ने बताया कि इन तकनीकों को प्रशिक्षण, प्रदर्शन और जागरूकता अभियानों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके साथ ही मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना के तहत जारी किए जा रहे सॉयल हेल्थ कार्ड भी सेम प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को मिट्टी प्रबंधन में मदद कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो राजस्थान में उपजाऊ कृषि भूमि का नुकसान और बढ़ सकता है।

ठिठुर रहा राजस्थान: फतेहपुर में तापमान शून्य के पास, मौसम विभाग ने चेताया

जयपुर उत्तर भारत से चल रही बर्फीली हवाओं ने राजस्थान में हाड़ कंपाने वाली ठंड बढ़ा दी है। शेखावाटी में तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया, जिससे खेतों में ओस जमने के बाद पाला पड़ना शुरू हो गया है और फसलें प्रभावित हो रही हैं। शुक्रवार को राज्य के 15 से ज्यादा शहरों का पारा सिंगल डिजिट में दर्ज हुआ। जयपुर में भी इस सीजन पहली बार तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कड़ाके की सर्दी जारी रहने की चेतावनी दी है। फतेहपुर सबसे ठंडा पिछले 24 घंटों में सीकर का फतेहपुर 1.9 डिग्री के साथ सबसे ठंडा रहा। बीकानेर के लूणकरणसर में 3.2, सीकर में 3, नागौर में 3.1, अलवर में 5.4, दौसा में 4.6 और झुंझुनूं में 6.4 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। जयपुर में न्यूनतम तापमान 9.2 डिग्री सेल्सियस रहा। चूरू, सीकर, झुंझुनूं, नागौर, बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़ और अलवर में रातें बेहद ठंडी बनी हुई हैं। सर्द हवा और फीकी धूप के चलते अधिकतम तापमान कई शहरों में 25 डिग्री से नीचे रहा। सिरोही शुक्रवार को सबसे ठंडा रहा, जहां अधिकतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। आगे कैसा रहेगा मौसम? मौसम केन्द्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार, अगले एक सप्ताह तक मौसम शुष्क रहेगा और तापमान में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होगा। शेखावाटी में रात का तापमान 3 से 5 डिग्री तक रहने के साथ कुछ जगहों पर शीतलहर की स्थिति बनी रह सकती है।  

सर्दी ने बढ़ाई रफ्तार: शेखावाटी में यलो अलर्ट, फतेहपुर में ठंड की दस्तक

जयपुर राजस्थान में गुरुवार से कड़ाके की सर्दी का दौर तेज होने जा रहा है। उत्तर भारत से आने वाली बर्फीली हवाओं के कारण राज्य के उत्तर-पूर्वी जिलों में न्यूनतम तापमान में और गिरावट दर्ज की जाएगी। हिमालय पर आज से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता नजर आ रहा है। इसके प्रभाव से मैदानी इलाकों में अगले कुछ दिनों में सर्दी का प्रभाव तेजी से बढ़ेगा। शेखावाटी क्षेत्र में सुबह और शाम कपकपाने वाली ठंड पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने 4, 5 और 6 दिसंबर के लिए झुंझुनूं, चूरू और सीकर जिलों में कोल्ड वेव का यलो अलर्ट जारी किया है। सीकर में हल्की बारिश के बाद मंगलवार रात तापमान गिरकर 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। बढ़ती सर्द हवा ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। ग्रामीण इलाकों में रात के समय ओस जमने लगी है। गुरुवार सुबह कई जिलों में घना कोहरा छाया रहा। सीकर, नागौर और शेखावाटी के अन्य इलाकों में विजिबिलिटी प्रभावित हुई। सोमवार को सबसे कम तापमान लूणकरणसर (बीकानेर) में 4.7°C रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 घंटों में प्रदेश के शेखावाटी क्षेत्र में ता पमान में और गिरावट देखने को मिल सकती है। इस दौरान जबरदस्त शीतलहर का प्रभाव भी रहेगा। प्रदेश में सर्वाधिक न्यूनतम तापमान की बात करें तो सीकर के फतेहपुर में 3.2 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रहा। वहीं बीकानेर के लूणकरणसर में भी पारा 3.2 डिग्री रहा।  सीकर में बुधवार देर शाम हल्की बारिश हुई जिसके चलते वहां पारे में तेज गिरावट देखने को मिली। अन्य शहरों में न्यूनतम तापमान की बात करें तो  गंगानगर में 6.9°C, चूरू में 9°C, बीकानेर  9.3°C, अलवर  8°C  और जैसलमेर में 10°C रहा। वहीं दिन के अधिकतम तापमान में भी गिरावट देखने को मिली। इसमें सीकर में  24.5°C, पिलानी में 26.2°C जयपुर में 26.6°C व अलवर  26.5°C पारा दर्ज किया गया।

बड़ा खुलासा: राजस्थान में जब्त अवैध विस्फोटक, गंभीर खतरे से टला बड़ा हादसा

राजसमंद  दिल्ली में हुए कार बम धमाके के बाद अलर्ट मोड पर चल रही राजस्थान पुलिस ने बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री जब्त की है. राजस्थान के श्रीनाथजी थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए अवैध विस्फोटक सामग्री से भरी एक पिकअप को जब्त किया है. इस पिकअप में इतना विस्फोटक भरा हुआ था कि अगर उसमें ब्लास्ट हो जाता तो वह करीब 10 किलामीटर के इलाके को अपनी चपेट में ले सकता था. यहां विस्फोटक कहां से लाया गया था और कहां ले जाया जा रहा था कि इसकी जांच पड़ताल की जा रही है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भारी मात्रा में जब्त किया गया यह विस्फोटक आमेट क्षेत्र से नाथद्वारा की तरफ ले जाया जा रहा था. इसकी सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर विस्फोटक से भरी पिकअप को जब्त कर लिया. पिकअप में भारी मात्रा में भरी विस्फोटक सामग्री को देखकर पुलिस सन्न रह गई. उसने तत्काल पिकअप को जब्त कर आलाधिकारियों को सूचना दी. भारी मात्रा में विस्फोटक की जब्ती से अधिकारी भी अलर्ट मोड पर आ गए और मौके के लिए रवाना हो गए. लंबे चौड़े एरिया में मचा सकता था तबाही पुलिस अधिकारियों की मानें तो पिकअप के अंदर इतनी मात्रा विस्फोटक भरा था कि अगर उसमें ब्लास्ट होता तो लगभग 10 किलोमीटर तक लंबे चौड़े इलाके में तबाही मच सकती थी. पुलिस टीम मौके पर जब्त किए विस्फोटक की काउंटिंग करने में जुटी है. पुलिस अधिकारी अब इस बात की जांच पड़ताल में जुटे हैं कि विस्फोटक सामग्री की नेचर कितनी खतरनाक है. इसे कहां से लाया गया था और कहां ले जाया जा रहा था? इसके साथ ही इस बात की भी जांच की जा रही है कि इसे किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था और इसके पीछे किसका हाथ है? पुलिस इन सभी पहलुओं की गंभीरता जांच कर रही है. पुलिस पिकअप चालक से हुई पूछताछ में जो नाम सामने आए हैं उन्हें ढूंढने में लगी है. राजस्थान में पकड़ा गया था TTP से जुड़ा मौलवी उल्लेखनीय है कि राजस्थान में बीते दिनों सुरक्षा एजेंसियों ने चार संदिग्ध मौलवियों को भी पकड़ा था. उनमें एक मौलवी ओसामा उमर का संबंध आंतकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के साथ पाया गया था. उसके बाद सुरक्षा एजेंसियां और ज्यादा अलर्ट पर आ गई थी. हालांकि राजस्थान के कई इलाकों में अवैध रूप से पत्थरों के खनन के लिए घातक विस्फोटक का ब्लास्टिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह विस्फोटक किस उद्देश्य के लिए ले जाया जा रहा था इसका खुलासा होना बाकी है.