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निजी स्कूलों के लिए राहत, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मनमानी फीस वसूली के खिलाफ फीस वापसी आदेश निरस्त किया

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधकों को मनमानी फीस वसूली के मामले में हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल ने अपने आदेश में कहा है कि राज्य के अधिकारियों ने बहुत ही खराब माहौल में काम किया और अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया। दो दर्जन से अधिक प्राइवेट स्कूल संचालकों ने मनमानी फीस वसूली के खिलाफ प्रकरण दर्ज किये जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील दायर करने वाले अधिकांश स्कूल मिशनरी संस्थाओं के द्वारा संचालित किये जा रहे थे। अपील में मध्य प्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) अधिनियम, 2017 (जिसे आगे एक्ट कहा जाएगा) के सेक्शन 11 और मध्य प्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) नियम के तहत फीस वापस लौटाने के आदेश जारी किये जाने को चुनौती दी गई थी। अपील में कहा गया था कि राज्य की गाइडलाइन का कथित तौर पर उल्लंघन करने का आरोप में जिला प्रशासन की शिकायत पर पुलिस ने स्कूल प्रबंधन से जुडे व्यक्तियों तथा प्राचार्य पर प्रकरण दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार भी किया था। अपीलकर्ताओं की तरफ से तर्क दिया गया कि एक्ट के सेक्शन 11 के तहत अंतरिम सुरक्षा देने का कोई अधिकार नहीं है। एक्ट में प्रावधान नहीं होने के बावजूद भी साल 2017-18 के बाद से जमा की गई फीस वापस करने आदेश जारी किये गये हैं। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अधिकारियों ने बहुत खराब माहौल में और अपनी पावर का इस्तेमाल करते हुए अपने अधिकार से बाहर काम किया। राज्य के अधिकारियों का कार्य स्कूलों के मैनेजमेंट में दखलंदाज़ी के बराबर है। स्टूडेंट्स की फीस वापस करने का राज्य सरकार का निर्देश टिकने लायक नहीं है। अधिकारी आरोपों को साबित करने में नाकाम रहे। अधिकारियों के पास फीस तय करने और अलग-अलग निर्देश जारी करने का अधिकार नहीं है, जो स्कूल चलाने वाले मैनेजमेंट या सोसाइटी के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। जिस तरह से लोकल एडमिनिस्ट्रेशन ने पूरे मामले को हैंडल किया, उससे स्कूल मैनेजमेंट और पैरेंट्स के बीच अनबन और मतभेद पैदा हो गए, जो स्टूडेंट्स की पढ़ाई और करियर के लिए अच्छा नहीं है। इस मामले को 2017 के एक्ट और 2020 के रूल्स के तहत सही तरीके से हैंडल किया जा सकता था। युगलपीठ ने फीस वापस करने के आदेश को निरस्त करते हुए अपीलकर्ता स्कूलों को राहत प्रदान की। 

कलेक्टर का बड़ा आदेश: शीतलहर के चलते स्कूलों का समय बदला, जानें नया शेड्यूल

जांजगीर-चाम्पा  कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने जिले में पड़ रहे अत्याधिक ठंड और शीतलहर के कारण छात्रहित को ध्यान में रखते हुए जिले में संचालित  समस्त शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त एवं अन्य विद्यालयों का संचालन समय परिवर्तित किया है जो 11 दिसंबर 2025 से आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगा।        आदेशानुसार दो पाली में संचालित होने वाली शालाओं के लिए प्रथम पाली में संचालित शालाओं का संचालन समय सोमवार से शुक्रवार प्रातः 08 बजे से 12 बजे तक, शनिवार को दोपहर 12.15 से 4.15 बजे तक, द्वितीय पाली में संचालित होने वाले शालाओं का संचालन समय सोमवार से शुक्रवार तक दोपहर 12.15 बजे से 04.15 बजे तक एवं शनिवार प्रातः 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार एक पाली में संचालित होने वाली शालाओं का संचालन सोमवार से शुक्रवार सुबह 10 बजे से 04 बजे तक एवं शनिवार प्रातः 08 बजे से 12 बजे तक निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही परीक्षाएँ पूर्ववत निर्धारित समय अनुसार ही संचालित की जाएगी।

10 साल में एमपी के 32,000 से अधिक स्कूल हुए बंद, शिक्षकों व छात्रों की संख्या घटी; CBI जांच की मांग तेज

भोपाल  प्रदेश में वर्ष 2013-14 की तुलना में 2025-26 तक शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सरदारपुर विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 2013-14 में सरकारी स्कूलों की संख्या 1,14,972 थी, जो घटकर 82,128 रह गई। यानी 32,844 विद्यालय कम हुए। इसी अवधि में शिक्षकों की संख्या 2,91,992 से घटकर 2,33,817 रह गई, जो कुल 61,175 की कमी है। क्या कहा मंत्री ने मंत्री ने बताया कि 2025-26 में 21,193 शासकीय माध्यमिक विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें 20 से कम विद्यार्थी हैं। वहीं 29,486 स्कूलों में छात्रों की संख्या 40 से कम है। प्रदेश के 8,533 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जबकि 28,716 स्कूलों में सिर्फ दो शिक्षक हैं। बढ़ा बजट वर्ष 2010-11 में स्कूल शिक्षा विभाग का बजट 6,374.25 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 36,581.64 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं शासकीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 तक विद्यार्थियों की संख्या 2010-11 में 133.66 लाख थी, जो घटकर 2025-26 में 79.39 लाख रह गई। यानी कुल 54.27 लाख विद्यार्थियों की कमी हुई है। मंत्री ने बजट बढ़ने के कारण के रूप में सातवें वेतनमान और महंगाई भत्ते को वजह बताया। जबकि विद्यालय और शिक्षक संख्या में कमी के पीछे शालाओं के मर्ज होने और शिक्षकों की सेवानिवृत्ति को कारण बताया गया। हालांकि, विद्यार्थियों की संख्या में भारी कमी को लेकर कोई कारण नहीं बताया गया। वहीं मीडिया से बातचीत में विधायक प्रताप ग्रेवाल ने कहा कि वर्ष 2014-15 में 82 लाख विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्ति दी गई थी, जो 2025-26 में घटकर 58 लाख रह गई। वर्ष 2013-14 में 93.7 लाख बच्चों को निश्शुल्क पाठ्यपुस्तकें और गणवेश वितरित किए गए थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या घटकर 56.82 लाख रह गई। मध्यान्ह भोजन के लाभार्थी 75.75 लाख से घटकर 37.23 लाख और निश्शुल्क साइकिल योजना के लाभार्थी 3.29 लाख से घटकर 1.63 लाख रह गए। सीबीआई जांच की मांग ग्रेवाल ने सवाल उठाया कि स्कूल, शिक्षक, छात्र और सभी योजनाओं के लाभार्थी कम हो रहे हैं, फिर भी बजट कई गुना कैसे बढ़ गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी स्कूलों को बंद कर निजी स्कूलों को संरक्षण दे रही है और शिक्षा व्यवस्था शिक्षा माफिया के हाथों में जाती दिख रही है। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।

उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव, बच्चों को बैग से मिलेगी राहत—ये है पूरा प्लान

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार अब स्कूलों में बच्चों का बोझ कम करने और पढ़ाई को मजेदार बनाने पर जोर दे रही है. इसी पहल के तहत राज्य के सरकारी स्कूलों में 10 दिन बैगलेस क्लास लागू की गई है. इससे बच्चों को किताबों की जगह खेल, गतिविधियां और प्रैक्टिकल सीखने का मौका मिलेगा. उत्तर प्रदेश सरकार ने नई शिक्षा नीति के तहत चल रही “आनंदम योजना” के अनुसार एक बड़ा बदलाव किया है. अब सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को पूरे साल में 10 दिन स्कूल बैग लाने की जरूरत नहीं होगी. शनिवार को स्कूल में 6से 8 तक के बच्चों को खेल कूद,पिकनिक, भाषण,बाद विवाद जैसी प्रतियोगिता में शामिल कराया जाएगा. सरकार की आनंदम योजना के तहत बच्चों में Ground activity बढ़ाने के उद्देश्य से पूरे शैक्षणिक सत्र के लिए 10 days bagless को लागू किया गया इन दिनों को Bagless Days कहा जाएगा. इन बैगलेस दिनों में बच्चों को क्लासरूम में पढ़ाने के साथ-साथ बल्कि उन्हें विभिन्न तरह की मजेदार और सीख देने वाली गतिविधियों में शामिल किया जाएगा. इनका मकसद है कि बच्चे सिर्फ किताबों से ही नहीं, बल्कि अनुभव और खेल से भी सीखें. क्या-क्या होगा बैगलेस दिनों में? खेल-कूद भाषण प्रतियोगिता वाद-विवाद (डिबेट) पिकनिक कला, संगीत, डांस जैसी गतिविधियां ग्राउंड एक्टिविटी और टीम वर्क क्रिएटिव प्रोजेक्ट सरकार का उद्देश्य आनंदम योजना का मुख्य उद्देश्य है—बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें तनाव से मुक्त रखना. इसके साथ ही किसी भी काम को सीखने को मजेदार बनाना, ग्राउंड और आउटडोर गतिविधियां बढ़ाना है. सरकार चाहती है कि उनकी प्रतिभा को पहचानने का मौका मिले.इसके लिए पूरे शैक्षणिक वर्ष में 10 बैगलेस दिन अनिवार्य किए गए हैं.

अंजुमन इस्लामिया स्कूल का नया फरमान, रविवार स्कूल लगाने पर बवाल

जबलपुर  शहर में स्कूल की छुट्टी का एक अनोखा मामला सामने आया है. यहां अंजुमन इस्लामिया नाम के स्कूल ने शुक्रवार की छुट्टी रखी है और रविवार के दिन स्कूल लगाने का फरमान जारी किया है. इस फरमान के खिलाफ अल्पसंख्यक मोर्चा के एक नेता ने आपत्ति जाहिर की है, उनका कहना है कि स्कूल के स्टाफ और कई अभिभावकों ने इस फैसले को गलत माना है लेकिन स्कूल प्रबंधन उनकी बात नहीं सुन रहा है.मामले में जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत की गई है. जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि वे जल्द ही इस मामले में जांच करके फैसला देंगे. पाकिस्तान और बांग्लादेश में होती है शुक्रवार की छुट्टी जबलपुर अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता मुजम्मिल अली ने अंजुमन इस्लामिया स्कूल के एक अनोखे फरमान के खिलाफ कलेक्टर कार्यालय में शिकायत की है. मुजम्मिल अली ने कहा, '' स्कूल में एक अनोखा फरमान निकला है, जिसमें स्कूल में साप्ताहिक अवकाश रविवार की जगह शुक्रवार के दिन रखा जाएगा और रविवार के दिन स्कूल लगाया जाएगा. भारत में रविवार की ही छुट्टी होती है, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे मुस्लिम देश में शुक्रवार के दिन की छुट्टी रखी जाती है इसलिए भारत में इस तरह की छुट्टी सही नहीं है. मुजम्मिल ने प्रशासन से इस मामले में दखल देने की अपील की है. शुक्रवार की छुट्टी पर मैनेजमेंट की सफाई इस मामले में अंजुमन इस्लामिया स्कूल के प्रबंधक अनवर अली ने कहा, '' अंजुमन इस्लामिया संस्था पांच स्कूल और एक कॉलेज का संचालन करती है और केवल एक स्कूल नहीं बल्कि सभी स्कूलों में शुक्रवार के दिन की छुट्टी पहले से ही रहती है. मैंने केवल इंग्लिश मीडियम स्कूल की छुट्टी की है और रविवार के दिन इसलिए स्कूल लगाया जा रहा है ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान ना हो.'' डीईओ के पास पहुंची अंजुमन की शिकायत वहीं, जबलपुर के जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी ने कहा, '' हमारे पास यह शिकायत आई है क्योंकि अंजुमन इस्लामिया स्कूल एक निजी संस्था चलाती है ऐसी स्थिति में हमें उनके नियम देखने होंगे. हालांकि, भारत में रविवार को ही छुट्टी की परंपरा है. ऐसी स्थिति में अंजुमन इस्लामिया स्कूल ने मनमाने ढंग से कैसे नियम बदला है, इसे देखना होगा. यदि संस्थान नियम विरुद्ध तरीके से काम करेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.'' अब देखना ये होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और अंजुमन इस्लामिया स्कूल ने किस नियम के तहत ये बदलाव किया.

गांवों में शिक्षा सुधार की पहल, छत्तीसगढ़ में खुलेंगे CBSE स्कूल; सरकार देगी आर्थिक प्रोत्साहन

रायपुर  छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) सरकार ग्रामीण और पिछड़े शहरी इलाकों को विकसित करने के लिए कई प्रयास और योजनाएं चला रही है। इसी कड़ी में अब राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एक और कदम उठा रही है। गांव में आज भी उच्च शिक्षा का अभाव देखा जाता है तो वहीं गांवों के बच्चों को इंग्लिश मीडियम जैसे स्कूलों में पढ़ने के लिए शहर की जाना पड़ता है। ऐसे में अब राज्य सरकार छत्तीसगढ़ निजी विद्यालय प्रोत्साहन नियम 2025 तैयार किया है। इस नीति के तहत अब गांव में CBSE स्कूल खोले जाएंगे। इसके लिए सरकार भी प्रोत्साहित करेगी। बता दें कि इस अधिनियम के तहत गांवों में भी शहर जैसी आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार ऐसे निवेशकों को भारी सब्सिडी देगी जिन्हें औद्योगिक विकास नीति के दायरे में भी शामिल किया गया है। इससे गांवों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) वाले स्कूल खोले जाएंगे। जो विद्यालय विकासखंड मुख्यालय से 10 किलोमीटर की परिधि में या सीमित सुविधाओं वाले नगरीय क्षेत्रों में खोले जाएंगे, उन्हें निवेश प्रोत्साहन मिलेगा। इनमें कम से कम 500 छात्रों की क्षमता और कक्षा पहली से बारहवीं तक CBSE मान्यता अनिवार्य होगी। स्कूल में रहेंगी ये सुविधाएं स्कूल में बच्चों के लिए कई सुविधाएं दी जाएंगी। परिसर में छात्रावास, पुस्तकालय, स्मार्ट क्लास, प्रयोगशाला और खेल सुविधा की व्यवस्था अनिवार्य है। इच्छुक निवेशकों को उद्यम आकांक्षा प्रमाण पत्र और विस्तृत परियोजना के साथ आवेदन जमा करना होगा। प्रस्ताव में परियोजना की संक्षिप्त रूपरेखा, निवेश लागत का विवरण, स्थल चयन, आर्किटेक्चरल प्लान और संभावित रोजगार के आंकड़े शामिल होने चाहिए। निवेश की गणना लोक निर्माण विभाग की दर अनुसूची या 2,000 प्रति वर्गफुट, जो न्यूनतम हो, के आधार पर की जाएगी। कैसे मिलेगी सब्सिडी? छत्तीसगढ़ सरकारा ने इस अधिनियम को लेकर कड़े नियम बनाए हैं। निवेशकों के आवेदन आने के बाद उद्योग संचालनालय सैद्धांतिक स्वीकृति जारी करेगा। इसके बाद इकाई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के परिशिष्ट 7/8 के अंतर्गत निवेश प्रोत्साहन के लिए पात्र होगी। इस नीति के तहत ब्याज सब्सिडी, पूंजी लागत सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी छूट, बिजली शुल्क छूट जैसे प्रोत्साहन उपलब्ध हैं। हालांकि, भूमि, कार्यशील पूंजी और प्रारंभिक व्यय को इसमें नहीं गिना जाएगा।

शैक्षणिक सत्र में बदलाव पर सवाल, 2 महीने में परीक्षा, रिजल्ट और नामांकन चुनौतीपूर्ण: शिक्षक प्रतिक्रिया

जयपुर   राजस्थान के शिक्षा महकमे ने आगामी शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल 2026 से शुरू करने का प्रस्ताव रखा है. इससे सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ेगा. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए स्कूलों के अधिग्रहण से छात्रों की बाधित होने वाली पढ़ाई की भरपाई होगी. साथ ही सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों से प्रतिस्पर्धा भी कर पाएंगे. हालांकि, शिक्षक इससे इत्तेफाक नहीं रखते. उनका मानना है कि राजस्थान में 1 अप्रैल से शिक्षा सत्र शुरू करने की कवायत राजस्थान की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से ठीक नहीं है. पहले भी इस तरह के प्रयोग किए गए हैं, जो फेल हुए हैं. मार्च तक परीक्षा और रिजल्ट : शिक्षक संघ शेखावत के प्रदेश अध्यक्ष महावीर सिहाग ने बताया कि 1 अप्रैल से शुरू करने का संदर्भ ही यही है कि परीक्षा और रिजल्ट का काम मार्च तक पूरा करना पड़ेगा, जो संभव नहीं है. इस सत्र में सितंबर खत्म होने को आ गया है, लेकिन अब तक छात्रों को किताबें प्राप्त नहीं हुई हैं और यदि मार्च में सत्र खत्म होगा तो छात्रों तक किताबें पहुंचना भी एक चुनौती होगी. इसलिए सरकार की ये सोच राजस्थान की भौगोलिक दृष्टि के हिसाब से ठीक नहीं है. पहले भी ये अनुभव किया जा चुका है, बावजूद इसके बार-बार प्रयोग करके शिक्षा विभाग को बर्बाद करने का प्रयास किया जा रहा है. ये सरकार को बंद करना चाहिए. कम से कम इस विषय में शिक्षा से जुड़े हुए शिक्षक संगठनों से बातचीत करके कोई निर्णय करना चाहिए. तानाशाही तरीके से जो भी निर्णय लिए जाते हैं, वो कभी भी शिक्षा के लिए फलदाई नहीं रहे और फिर सरकार को बाद में बदलाव करना पड़ता है. किसने क्या कहा, सुनिए. बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं में रखना होगा तारतम्य : हालांकि, शिक्षकों का एक धड़ा इस पहल का स्वागत भी कर रहा है. राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने बताया कि राजस्थान में प्राइवेट स्कूल 1 अप्रैल या उससे भी पहले से एडमिशन शुरू कर देते हैं. जबकि सरकारी स्कूल 1 जुलाई से प्रवेश उत्सव शुरू करते हैं. इससे सरकारी स्कूल पीछे रह जाते हैं और नामांकन में संतोषजनक वृद्धि नहीं होती. यदि सत्र 1 अप्रैल से सत्र शुरू होगा, तो सरकारी स्कूलों का नामांकन निश्चित रूप से बढ़ेगा. साथ ही शहरी क्षेत्र में लगभग 35 से 40 दिन प्रतियोगी परीक्षाओं के कारण जो पढ़ाई के दिन कम हो रहे हैं, उनकी भरपाई भी होगी. हालांकि, उन्होंने इसके साथ ही चुनौतियां गिनाते हुए कहा कि विभाग को इसके लिए विशेष तैयारी करनी होगी. सबसे बड़ी चुनौती परीक्षाओं के टाइम टेबल को लेकर रहेगी. बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं को पहले आयोजित करना जरूरी होगा. शिक्षा मंत्री का दावा- छात्रों और अभिभावकों को राहत : हालांकि, शिक्षा मंत्री इस प्रयोग से आश्वस्त हैं. मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि ये अभी प्रस्ताव है. अंतिम मोहर लगनी बाकी है, लेकिन यदि सत्र 1 अप्रैल से शुरू होता है तो गरीब बच्चों को भी लाभ मिलेगा और सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ेगा. निजी स्कूल फीस के मामले में कभी-कभी अनुचित तरीके अपनाते हैं. ऐसे में ये नई व्यवस्था अभिभावकों को भी राहत देगी. दिलावर ने ये भी स्पष्ट किया कि ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले एक से डेढ़ महीने की पढ़ाई का टेस्ट लिया जाएगा. विभाग ये सुनिश्चित करेगा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को उनका कोर्स अप्रैल के पहले सप्ताह में ही मिल जाए, ताकि परीक्षा में छात्र अच्छा प्रदर्शन कर सकें. उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल से 15 मई तक शिक्षक घर-घर जाकर एडमिशन लेंगे, जिससे जुलाई में प्रवेश उत्सव की आवश्यकता नहीं होगी. इसके अलावा, ड्रॉपआउट छात्रों को प्रोत्साहित कर उनका भी संबंधित कक्षा में दाखिला कराया जाएगा. शिक्षा विभाग की होगी बड़ी 'परीक्षा' : बहरहाल, 1 अप्रैल से सत्र शुरू होने से कक्षा 1 से 12 तक की परीक्षाएं 31 मार्च तक खत्म कर रिजल्ट जारी करना होगा. अप्रैल के पहले सप्ताह में किताबें, वर्क बुक छात्रों तक पहुंचानी होगी, क्योंकि यदि सामग्री अप्रैल तक नहीं पहुंचती है तो ग्रीष्मावकाश में इसे छात्रों को उपलब्ध कराना आसान नहीं होगा. वहीं, यदि इसे मूर्त रूप मिलता है तो इसका सीधा लाभ सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों और उनके अभिभावकों को मिलेगा.  

रायपुर: मोहगांव हाई स्कूल में अंग्रेजी, गणित और कला विषयों के शिक्षकों की हुई नई पदस्थापना

रायपुर : मोहगांव हाई स्कूल में अंग्रेजी, गणित एवं कला विषय के शिक्षकों की पदस्थापना स्कूल में लौटी शिक्षा की रौनक, बढी शिक्षा की गुणवत्ता रायपुर विद्यालय में एक शिक्षकीय विद्यालय या शिक्षकों की नियुक्ति न होने के कारण प्रारंभ से ही यह संस्था शिक्षकविहीन स्थिति में संचालित हो रही थी, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। अभिभावकों की चिंता और बच्चों की शैक्षणिक प्रगति में बाधा को लेकर ग्रामीणजनों में निराशा व्याप्त थी। शिक्षा विभाग द्वारा इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत्  विद्यालय में छात्र संख्या के आधार पर शिक्षकों को पदस्थ किए गए हैं, जिससे स्कूल में शिक्षा की रौनक बढी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।       महासमुंद जिले के विकासखंड बागबाहरा अंतर्गत शासकीय हाई स्कूल मोहगांव की स्थापना वर्ष 2022 में विद्यार्थियों को माध्यमिक स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। किंतु युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत् तीन व्याख्याता अंग्रेजी, गणित एवं कला विषय के लिए इस विद्यालय में पदस्थ किए गए हैं। इन विषयों की अत्यधिक आवश्यकता थी क्योंकि ये विद्यार्थी के समग्र बौद्धिक और रचनात्मक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्री देवेंद्र चंद्राकर, शैलेन्द्र ठाकुर, रामसिंह नाग व विज्ञान सहायक भूपेंद्र जसपाल शिक्षकों की नियुक्ति के साथ ही विद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियाँ पुनः गति पकड़ने लगी हैं। अब नियमित रूप से कक्षाएँ संचालित हो रही हैं और विद्यार्थी पूरे उत्साह एवं रुचि के साथ अध्ययन में भाग ले रहे हैं। बच्चों की उपस्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार हो रहा है।     विद्यालय में व्याख्याताओं की पदस्थापना से न केवल बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से प्रारंभ हुई है, बल्कि ग्राम मोहगांव सहित आस-पास के क्षेत्रों के पालकों एवं ग्रामीणजनों में भी प्रसन्नता की लहर है। बच्चों के भविष्य को लेकर अब उनमें आश्वस्ति का भाव है। ग्राम के नागरिकों ने शासन एवं शिक्षा विभाग के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि यह निर्णय दूरस्थ ग्रामीण अंचल में शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने अपेक्षा जताई कि इसी तरह अन्य आवश्यक सुविधाएँ भी विद्यालय में शीघ्र उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।     क्षेत्र के जनपद सदस्य भूपेंद्र मोंटू दीवान, सरपंच नरेन्द्र दीवान व एसएमसी अध्यक्ष डॉ. चेतन साहू ने प्रसनता व्यक्त करते कहा कि शिक्षा विभाग की यह पहल शिक्षा सबके लिए के उद्देश्य को साकार करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी बच्चे को केवल संसाधनों के अभाव में शिक्षा से वंचित न होना पड़े।

इंदौर के सांदीपनि मालव कन्या विद्यालय को मिला एक्सीलेंस स्कूल अवार्ड, शिक्षा में रचा नया कीर्तिमान

इंदौर के सांदीपनि मालव कन्या विद्यालय को मिला एक्सीलेंस स्कूल अवार्ड फ्यूचर रेडी स्किल श्रेणी प्रतियोगिता में शामिल हुआ था विद्यालय  इंदौर सांदीपनि मालव कन्या विद्यालय ने फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) का एक्सीलेंस राष्ट्रीय स्तर का स्कूल अवार्ड जीता है। अलायंस फॉर री-इमेजिनिंग स्कूल एजुकेशन अवार्ड (अराइज) फिक्की का प्रतिष्ठित अवार्ड है। विद्यालय को अवार्ड बच्चों में अकादमिक विषयों से आगे बढ़कर भविष्य के लिये स्किल्स डेव्हलपमेंट के क्षेत्र में नवाचार किये जाने केलिये दिया गया है। विद्यालय के बच्चों को कम्प्यूटर में कोडिंग सिखाई जा रही है। इसी के साथ कम्युनिकेशन और क्रिएटिव की नई तकनीक सिखाई जा रही है। सरकारी स्कूल के बच्चों में स्किल डेवलप कर भविष्य के लिये तैयार किया जा रहा है। नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में हुए कार्यक्रम में अनेक शिक्षाविद् के साथ हाल ही में भारत से स्पेस स्टेशन पर गये ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भी मौजूद थे। प्रदेश के लिये गौरव की बात है कि देश के एक हजार स्कूलों में इंदौर के सांदीपनि विद्यालय ने अपने नवाचार कार्यक्रम के जरिये यह पुरस्कार जीता है। पुरस्कार प्राचार्य श्री रामकृष्ण कोरी और उनकी टीम ने प्राप्त किया। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में पीपल फाउंडेशन की मदद से बच्चों में कम्प्यूटर में दक्षता के लिये यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है। ज्यूरी सदस्यों में केन्द्र सरकार की पूर्व शिक्षा सचिव सुश्री अनीता करवाल और नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर एजुकेशन के चेयर पर्सन प्रो. पंकज अरोरा भी शामिल थे।  

हरियाणा :गांव के सरकारी स्कूलों में स्मार्ट शिक्षा का सपना अधूरा, सुविधाओं की भारी कमी

चंडीगढ़   हरियाणा में सरकारी स्कूलों को स्मार्ट बनाने की रफ्तार सुस्त है। प्रदेश के कुल 14,338 सरकारी स्कूलों में से 6,101 स्कूलों में ही स्मार्ट क्लासरूम, स्मार्ट बोर्ड या वर्चुअल क्लासरूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह जानकारी केंद्र सरकार की यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (यूडीआईएसई) की 2024-25 की रिपोर्ट में दी गई है। स्मार्ट स्कूल में एक क्लास के अंदर इंटरएक्टिव बोर्ड, डिजिटल स्क्रीन, ई-लर्निंग सामग्री की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। राज्य सरकार ने 2023 में हरियाणा स्मार्ट एजुकेशन मिशन शुरू किया था जिसके तहत तीन वर्षों में सभी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों को स्मार्ट क्लासरूम से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया। रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा के 16.3 फीसदी सरकारी स्कूलों में प्रोजेक्टर और 41.6 फीसदी में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाएं (आईसीटी) हैं। वहीं, 63.9 फीसदी निजी सहायता प्राप्त स्कूल ही स्मार्ट बने हैं। स्मार्ट स्कूलों में ज्यादातर शहरी क्षेत्रों या मॉडल संस्कृति स्कूलों हैं। अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल डिजिटल सुविधाओं से वंचित हैं। स्मार्ट को अब स्मार्ट प्लस बनाने की योजना हरियाणा सरकार का दावा है कि अगले दो साल में पांच हजार से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बनाए जाएंगे। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके अलावा स्मार्ट स्कूलों को अब स्मार्ट प्लस स्कूल के रूप में अपग्रेड करने की योजना बना रही है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित लर्निंग टूल्स और वर्चुअल लैब की व्यवस्था होगी। पंजाब ने चार साल पहले शुरू की थी पहल पंजाब सरकार ने हरियाणा से चार साल पहले 2019 में सरकारी स्कूलों को स्मार्ट बनाने की पहल शुरू की थी। यहां कुल 19,107 सरकारी स्कूलों में से 6,832 स्मार्ट हैं। इसके अलावा 13 हजार स्कूलों में 41 हजार स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए गए और 3,500 स्कूलों में एजुकेशनल सैटेलाइट सुविधा उपलब्ध है। स्मार्ट स्कूल नीति के तहत पंचायतों, एनआरआई और समाजसेवी संगठनों के सहयोग से तेजी से विस्तार किया। इससे कई गांवों तक डिजिटल शिक्षा की पहुंच हो गई है। प्रदेश के 13 जिलों के 50 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में एक-एक अटल टिंकरिंग लैब स्थापित की जा चुकी है। 615 अन्य राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में एक-एक नई विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित लैब बनाने की प्रक्रिया जारी है। रही बात स्मार्ट स्कूलों की रफ्तार धीमी होने की तो उसकी भी समीक्षा की जा रही है। इस बार मुख्यमंत्री ने शिक्षा का बजट बढ़ाया है। -महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री