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स्कूल और कोचिंग संस्थानों पर ताला, प्रयागराज में 7 अगस्त तक बंदी

प्रयागराज जनपद के प्री प्राइमरी से लेकर कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों को सात अगस्त तक के लिए बंद कर दिया गया है। लगातार हो रही बारिश के साथ ही जनपद में बाढ़ की भयावह स्थिति को देखते हुए प्रयागराज के जिलाधिकारी ने यह निर्देश दिया है।  जिले में भारी वर्षा और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रयागराज में प्री प्राइमरी से कक्षा-12 तक संचालित समस्त बोर्ड (बेसिक शिक्षा परिषद, माध्यमिक शिक्षा परिषद, सीबीएसई, आईसीएसई, संस्कृत बोर्ड व अन्य बोर्ड) के सभी विद्यालय सात अगस्त तक के लिए बंद रहेंगे। समस्त विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। बीएसए देवब्रत सिंह ने भी आठवीं तक के सभी विद्यालय बंद रखने का आदेश जारी किया है। बीएसए ने साफ किया है कि परिषदीय शिक्षक वर्क फ्रॉम होम के तहत डीबीटी, यू-डायस प्लस एवं अन्य विभागीय कार्यों का संपादन करना सुनिश्चित करेंगे। साथ ही निर्देशित किया है कि जिन विद्यालयों में जिला प्रशासन ने बाढ़ चौकी व रैन बसेरा बनाया गया है उन विद्यालयों के प्रधानाध्यापक व संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी अपना सहयोग प्रदान करेंगे। वहीं दूसरी ओर सेंट जोसेफ कॉलेज, सेंट मेरीज कॉन्वेंट, गंगा गुरुकुलम फाफामऊ समेत कई स्कूलों ने सभी अभिभावकों को मैसेज किया है कि पांच से सात अगस्त तक ऑनलाइन कक्षाएं पूर्व निर्धारित समय सारिणी के अनुसार संचालित होंगी।  

शिक्षकों की नियुक्ति से खिल उठे छात्र, रायपुर में दूर हुई पढ़ाई की परेशानी

रायपुर कोरबा जिले में पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के ग्राम पचरा के हाई स्कूल में विद्यार्थियों की कोई कमी नहीं है। आसपास के एक दर्जन से अधिक गाँव के विद्यार्थी इस विद्यालय बहुत ही उम्मीद के साथ यह सोचकर दाखिला लेते हैं कि यहाँ से पढ़कर, पास होकर आगे की पढ़ाई जारी रखेंगे। पिछले कुछ सालों से उनके गाँव के सबसे नजदीक इस विद्यालय में नियमित शिक्षको की कमी थी। स्कूल में शिक्षकों की कमी उन्हें ही नहीं उनके माता-पिता को भी अक्सर चिंता में डालती थी। जिले में संचालित ऐसे विद्यालय जहाँ युक्ति युक्तकरण के पश्चात भी शिक्षको की कमी रह गई थीं उन विद्यालयों की सूची तैयार कर डीएमएफ से मानदेय के आधार पर शिक्षकों को नियुक्ति प्रदान की गई है। कोरबा जिला प्रशासन की इस पहल के बाद शासकीय हाई स्कूल पचरा में अब किसी विषय का कालखण्ड खाली नहीं जाता। दूरस्थ क्षेत्र से स्कूल आने वाले हर विद्यार्थियों को इस विद्यालय में शिक्षको से अध्यापन और विषय का ज्ञान मिलता है।    डीएमएफ से मानदेय के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। इसी क्रम में पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पचरा में संचालित हाई स्कूल में भी शिक्षको की कमी बनी हुई थी। कई विषयों के नियमित शिक्षक नहीं होने से यहाँ के विद्यार्थी उन विषयों की पढ़ाई अन्य शिक्षको के माध्यम से करते तो थे लेकिन उन्हें अक्सर महसूस होती थी कि काश सभी विषयों के लिए शिक्षक उपलब्ध हो। जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफ से की गई मानदेय शिक्षको की नियुक्ति से जहाँ विद्यार्थियों को शिक्षक मिल गए, वहीं गाँव के आसपास रहने वाले बेरोजगार युवाओं को रोजगार के साथ अध्यापन का अवसर भी मिल गया है। पचरा के हाई स्कूल में मानदेय शिक्षक के रुप में अध्यापन कराने वाली शिक्षिका अभिलाषा सिंह तंवर और लक्ष्मी कुमारी ने बताया कि मास्टर डिग्री लेने के बाद उन्होंने बीएड किया ताकि स्कूल में पढ़ाई करा सके। जिले में मानदेय शिक्षक की भर्ती होने पर उन्होंने अपना आवेदन किया था, अब नियुक्ति होने के बाद वह स्कूल में पढ़ाती है। उन्होंने बताया कि मानदेय शिक्षक के रूप में स्कूल में अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। मानदेय मिलने से घर का खर्च चलाने में सहूलियत होने लगी है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को भी खुशी होती है कि उनका कोई भी विषय खाली नहीं जाता। इस विद्यालय में कक्षा नवमीं में 48 और कक्षा 10वीं में 25 विद्यार्थी है। विद्यालय में गणित,अंग्रेजी और विज्ञान के शिक्षक है। मानदेय शिक्षिकाओं द्वारा हिंदी,सामाजिक विज्ञान और अन्य विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। विद्यालय में अध्ययन करने वाली छात्राओं विद्या, मानमती, सुहानी यादव ने बताया कि पहले विद्यालय में कम शिक्षक थे। अब नए शिक्षको के आने से सभी विषयों की पढ़ाई होती है। विद्यार्थियों ने बताया कि इस स्कूल में बहुत दूर-दूर के गाँव से लड़के-लड़कियां पढ़ाई करने आती है। सभी विषयों की पढ़ाई होने से हम लोग का मन भी स्कूल आने में होता है। गौरतलब है कि खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) से मानदेय के आधार पर 480 अतिथि शिक्षकों की भर्ती का निर्णय लिया गया है। इन अतिथि शिक्षकों में प्राथमिक शाला के 243, माध्यमिक ष्शाला के 109 और हाई तथा हायर सेकेण्डरी स्कूलों में व्याख्याताओं के 128 पदो पर भर्ती की जा रही है। खास बात यह है कि विगत शिक्षण सत्र में अतिथि शिक्षक के रूप में कार्य करने वाले शिक्षकों को इस सत्र की नियुक्ति में प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ अतिथि शिक्षकों को गत वर्ष दिये जाने वाले मानदेय में भी वृद्धि कर दी गई है। इस सत्र में प्राइमरी स्कूल के अतिथि शिक्षकों को 11 हजार, मिडिल स्कूल के अतिथि शिक्षकों को 13 हजार और हाई-हायर सेकेण्डरी के अतिथि व्याख्याताओं को 15 हजार रूपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। विगत वर्ष भृत्य को 8000, प्राइमरी स्कूल के अतिथि शिक्षकों को 10 हजार, मिडिल स्कूल के अतिथि शिक्षकों को 12 हजार और हाई-हायर सेकेण्डरी के अतिथि व्याख्याताओं को 14 हजार रूपये प्रतिमाह मानदेय दिया गया था।

निजी स्कूलों को झटका: हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, फीस रेगुलेशन एक्ट को बताया संविधानसम्मत

रायपुर  छत्तीसगढ़ में अब निजी स्कूल (Private Schools) मनचाही फीस नहीं वसूल सकेंगे। सरकार इसको लेकर नियम लागू कर सकती है। हाईकोर्ट (High Court) ने राज्य सरकार के “छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम 2020” (Chhattisgarh Non-Government School Fee Regulation Act, 2020) और उससे जुड़े नियमों को पूरी तरह संवैधानिक करार देते हुए, निजी स्कूल संघ की याचिका को खारिज कर दिया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) में आती है। राज्य सरकार को निजी स्कूलों की फीस तय करने का पूरा अधिकार है। याचिका में उठाए गए तर्क खारिज निजी स्कूलों ने अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 14 (Right to Equality) और 19(1)(g) (Right to Practice Profession) का उल्लंघन बताया था। लेकिन कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता एक संघ है, न कि व्यक्तिगत नागरिक। इसलिए वे इन अनुच्छेदों का हवाला नहीं दे सकते। हाईकोर्ट के इस महत्वपूर्ण फैसले से राज्य के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिल सकती है। इसके तहत फीस बढ़ाने के लिए जिला समिति की अनुमति आवश्यक होगी। अधिनियम की धारा 10 के तहत कोई भी स्कूल बिना जिला शुल्क निर्धारण समिति की अनुमति के फीस नहीं बढ़ा सकता। साथ ही प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की याचिका को खारिज कर दिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के अग्रवाल और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच में हुई। दरअसल, राज्य सरकार ने साल 2020 में छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम लागू करने का निर्णय लिया था। इसके लागू होने के बाद प्रदेश में संचालित निजी स्कूलों के एसोसिएशन ने साल 2021 में हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसमें कहा कि वे गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह अधिनियम उनकी स्वायत्तता (ऑटोनॉमी) में हस्तक्षेप करता है। फीस तय करने का अधिकार केवल प्रबंधन के पास होना चाहिए, इसमें सरकारी हस्तक्षेप अनुचित है। प्राइवेट स्कूलों ने बताया समानता के अधिकार का उल्लंघन याचिका में प्राइवेट स्कूल की तरफ से बताया गया कि अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता का अधिकार और 19(1)(g) व्यवसाय करने की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए अधिनियम को असंवैधानिक बताया। वहीं, राज्य सरकार ने तर्क दिया कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में आती है। अधिनियम का उद्देश्य पारदर्शिता और न्यायोचित शुल्क तय करना है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि निजी स्कूल भी इस नियम से मुक्त नहीं हो सकते। हाईकोर्ट ने कहा- संघ है याचिकाकर्ता, नागरिक नहीं हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा है कि याचिकाकर्ता संघ नागरिक नहीं हैं, ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देकर संवैधानिक अधिकारों का हवाला नहीं दिया जा सकता। फीस के लिए नियम तय करना राज्य सरकार का अधिकार है। अधिनियम का उद्देश्य केवल फीस में पारदर्शिता लाना है। कोई अधिनियम केवल इस आधार पर अवैध नहीं ठहराया जा सकता कि उससे किसी को असुविधा हो रही है। फैसले से छात्रों और अभिभावकों को मिलेगी राहत हाईकोर्ट के इस महत्वपूर्ण फैसले से राज्य के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिल सकती है। अब निजी स्कूलों को फीस तय करने में जवाबदेही और पारदर्शिता बरतनी होगी। इसमें अभिभावकों की भागीदारी और जिला स्तरीय समिति की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। साथ ही प्राइवेट स्कूलों के लिए राज्य शासन के निर्देशों के तहत ही फीस ली जा सकती है। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगेगा लगाम हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब राज्य शासन प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगा सकती है। इसके तहत शासन प्राइवेट स्कूलों की फीस बढ़ाने की सीमा तय भी कर सकेगी। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान भी अधिनियम में शामिल किया गया है। अधिनियम के तहत जिला और राज्य स्तर पर फीस निर्धारण समितियों का गठन अनिवार्य होगा। जिलों में कलेक्टर इसके अध्यक्ष होंगे, जबकि राज्य स्तर पर स्कूल शिक्षा मंत्री समिति के प्रमुख होंगे। ये समितियां निजी स्कूलों द्वारा ली जाने वाली फीस की नीति तय करेंगी। जानिए अधिनियम में क्या है प्रावधान अधिनियम की धारा 10 के अनुसार, कोई भी निजी स्कूल बिना समिति की अनुमति के फीस नहीं बढ़ा सकता। अगर फीस बढ़ानी हो, तो स्कूल प्रबंधन को कम से कम 6 महीने पहले प्रस्ताव देना होगा। समिति को 3 महीने में निर्णय लेना होगा। फीस वृद्धि की अधिकतम सीमा 8 फीसदी तय की गई है। वहीं, अभिभावक संघ भी फीस वृद्धि पर आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। समिति को ऐसी आपत्तियों पर सुनवाई करनी होगी। समितियों को सिविल कोर्ट जैसे अधिकार दिए गए हैं, जिससे वे स्कूल से रिकॉर्ड मांग सकते हैं और सुनवाई कर सकते हैं। शिकायत पर हो सकती है कार्रवाई अब स्कूलों को फीस रजिस्टर, वेतन, व्यय, उपस्थिति, भवन किराया से संबंधित दस प्रकार के रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग इसकी जांच कर सकता है। वहीं, अगर कोई स्कूल समिति की अनुमति से अधिक फीस वसूलता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

स्कूल मान्यता रद्द पर सरकार का आश्वासन – सभी बच्चों को दूसरे संस्थानों में मिलेगा प्रवेश

भोपाल  प्रदेश के 250 निजी स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी गई है। इन स्कूलों में अध्ययनरत करीब 25 हजार विद्यार्थियों को नजदीक के सरकारी स्कूलों में प्रवेश का विकल्प दिया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआइ) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को इस संबंध में व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कहा गया कि ऐसे विद्यार्थियों को एक सप्ताह के भीतर दूसरे स्कूल में प्रवेश दिलाया जाए। बच्चों की आगे की पढ़ाई पर संकट जिन स्कूलों की मान्यता समाप्त हुई है उनमें राजधानी भोपाल के ही करीब 12 स्कूल हैं। इनमें दर्ज बच्चों के एडमिशन अवैध हो गए हैं। अब बच्चों की आगे की पढ़ाई पर संकट है। इस कारण अब डीईओ की जिम्मेदारी होगी कि इन स्कूलों में दर्ज बच्चों को नजदीक के स्कूलों में प्रवेश दिलाएं। यह आदेश सत्र शुरू होने के चार माह बाद हुए। 250 स्कूलों की अपील खारिज बता दें, कि प्रदेश के 350 निजी स्कूलों की मान्यता संबंधी विवाद की अपील शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के पास पहुंची थी। उन्होंने 250 स्कूलों की अपील को खारिज कर दिया। ये स्कूल जमीन संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए थे। कुछ स्कूलों के पास जमीन नहीं थी तो कुछ के पास पर्याप्त जमीन और रजिस्ट्री के कागज नहीं थे। अपील में जाने वाले 50 स्कूलों की मान्यता का नवीनीकरण हुआ वहीं 50 स्कूलों का मामला अभी भी लंबित है। राजधानी के ये सालों पुराने स्कूल राजधानी के अंकुर हायर सेकेंडरी स्कूल, जवाहर चौक स्थित सेवन हिल्स, सर्वधर्म कोलार स्थित प्रीति हायर सेकेंडरी स्कूल, कोलार स्थित राजपुष्पा, पार्थ, ज्ञान कृष्णा समेत अन्य स्कूल शामिल है। इन स्कूलों में मान्यता समाप्त करने का कारण जमीन नहीं होना बताया गया है। इन स्कूलों में करीब दो ढाई हजार विद्यार्थी हैं। जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार का कहना है कि राजधानी के करीब 12 स्कूल हैं, जिनकी मान्यता समाप्त की गई है। इसमें कुछ बड़े स्कूल भी हैं, जिनके पास जमीन नहीं था और वे वर्षों से संचालित हो रहे थे। इन स्कूलों के करीब 2500 विद्यार्थियों को पास के सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाया जाएगा।

सरकारी स्कूल में बड़ा हादसा: छत गिरने से 4 बच्चों की मौत, प्रशासन पर सवाल

 झालावाड़  राजस्थान के झालावाड़ में स्कूली बच्चों के साथ बड़ा हादसा हुआ है. इलाके में एक स्कूल की छत गिरने की खबर हैं, जिसमें 4 छात्रों की मौत हो गई और कई बच्चों के दबे होने की आशंका है. हादसे के बाद 17 बच्चों के घायल होने की जानकारी सामने आई है. कई बच्चे गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं. झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र के पीपलोदी में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत अचानक गिर गई. क्लास में मौजूद छात्र इसके नीचे दब गए. जानकारी के मुताबिक, क्लास के अंदर करीब 60 बच्चे मौजूद थे, जिसमें से पच्चीस के दबे होने की आशंका है. स्कूल की छत गिरने से हुए हादसे के बाद इलाके के लोग मदद के लिए पहुंचे. मौके पर लोगों का मजमा इकट्ठा हो गया. मलबे में दबे बच्चों को लोग निकालने की कोशिश करने लगे. छत गिरने के बाद मलबे को देखकर ऐसा लग रहा है, जैसे स्कूल खंडहर में तब्दील हो गया हो. एजेंसी के मुताबिक, झालावाड़ के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि चार बच्चों की मौत हो गई और 17 अन्य घायल हो गए. दस बच्चों को झालावाड़ रेफर किया गया है, जिनमें से तीन से चार की हालत गंभीर है. पुलिस ने बताया कि शिक्षकों और ग्रामीणों की मदद से बच्चों को मलबे से बाहर निकाला गया. राजस्थान सरकार में शिक्षा मंत्री मदन दिवालर ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "झालावाड़ में स्कूल में दुखद घटना की सूचना मिली है. दुख है, बच्चों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. बच्चों का इलाज सरकारी खर्चे पर होगा. उच्च स्तरीय जांच होगी कि आखिर कैसे छत गिरी. शिक्षा मंत्री ने कहा, "कांग्रेस सरकार का किया हुआ पाप है. पिछले 5 सालों में कांग्रेस सरकार ने स्कूलों की देख-भाल नहीं की. कांग्रेस सरकार के दौरान स्कूल जर्जर हो गए थे, इनकी मरम्मत नहीं की. हम स्कूलों की चरणबद्ध तरीके से मरम्मत करवा रहे हैं और स्कूलों को पूरी तरह ठीक करेंगे." उन्होंने आगे कहा कि कोटा में भी कई स्कूल ऐसे हैं, जिनकी हालत पूरी तरह जर्जर है. हालत इतनी बुरी है कि छत का प्लास्टर टूट-टूट कर गिर रहा है और नीचे बच्चे पढ़ रहे हैं.  शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अब अस्वस्थ किया है कि राजस्थान के सभी स्कूलों का निर्माण करवाया जाएगा और पूरी तरह से ठीक करवाए जाएंगे. सीएम ने जताया दुख… राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "झालावाड़ के पीपलोदी में विद्यालय की छत गिरने से हुआ दर्दनाक हादसा अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक है. घायल बच्चों के समुचित उपचार सुनिश्चित करने हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है. ईश्वर दिवंगत दिव्य आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों को यह अपार दुःख सहन करने की शक्ति दें."

शिक्षा के हक़ में छात्रों की पदयात्रा, 170 बच्चों की आवाज़ पर प्रशासन ने की कार्रवाई

बड़वानी खराब खाने, जाति सूचक शब्दों के प्रयोग करने से नाराज बड़वानी जिले के निवाली छात्रावास के छात्रों का आक्रोश रंग लाया। कलेक्टर ने एकलव्य आवासीय विद्यालय की प्राचार्य को हटा दिया है। प्राचार्य व अध्यापकों से नाराज छात्र सोमवार को अपने होस्टल से पैदल नारेबाजी करते हुए निकले। उन्होंने 60 किलोमीटर पैदल चलकर बड़वानी कलेक्टर से मिलकर शिकायत करने का फैसला लिया था, लेकिन जैसे ही अफसरों को छात्रों के पैदल मार्च की भनक लगी, वे उनके पास पहुंचे। 30 किलोमीटर की यात्रा करने के बाद पानसेमल एसडीएम रमेश सिसोदिया ने छात्रों को रोका और उनकी बातें सुनी। इसके बाद कलेक्टर गुंचा सनोबर ने प्राचार्य मीनाक्षी भार्गव को पद से हटा दिया। छात्रों को समझा कर वापस वाहनों से छात्रावास लौटा दिया। उनका आरोप है कि छात्रावास की समस्या बताने पर प्राचार्य प्रताडि़त करती थी। भोजन भी घटिया दिया जाता था। विरोध करने पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था। सड़क पर बैठकर करने लगे विरोध छात्र जब नारेबाजी करते हुए पैदल चलने लगे, बड़वानी से अफसर एम्बुलैंस और अन्य गाडि़यां लेकर छात्रों से मिलने निकले। चिखलदा के समीप उन्हें रोका गया, लेकिन वे कलेक्टर से मिलने की मांग पर अड़े रहे। कुछ नाराज छात्र सड़क पर बैठकर नारेबाजी करने लगे। छात्रों को कहा गया कि शिकायत के बाद प्राचार्य के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। बड़ी मुश्किल से छात्र माने और उनका प्रदर्शन समाप्त हुआ।  

कावड़ियों की सुरक्षा व ट्रैफिक को देखते हुए सोमवार को स्कूलों की छुट्टी घोषित

 जबलपुर जबलपुर से गुजरने वाली कावड़ यात्रा को मद्देनदजर रखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से 21 जुलाई सोमवार को सभी स्कूलों की छुट्टी घोषित की गई है। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा ये आदेश सभी शासकीय, निजी सीबीएसई, आईसीएसई सभी स्कूलों पर लागू होगा। जबलपुर जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश जारी करते हुए कहा कि, 21 जुलाई को जबलपुर में निकलने वाली कावड़ यात्रा में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए अवकाश घोषित किया गया है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, कावड़ यात्रा के दिन भारी संख्या में श्रद्धालुओं के सड़क पर आने की वजह से शहर के कई मार्गों पर जाम लग जाता है, ऐसी स्थिति में स्कूली बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। घंटों स्कूली बच्चे और उनके परिजन ट्रैफिक में फंसना पड़ता है, लिहाजा 21 जुलाई को असुविधा से बचने के लिए सभी स्कूलों की छुट्टी घोषित की जाती है। नर्मदा का जल लेकर पैदल यात्रा करते हैं श्रद्धालु आपको ये भी बता दें कि, जबलपुर में कांवड़ यात्रा के दिन लाखों श्रद्धालु नर्मदा से जल लेकर करीब 35 किलोमीटर की यात्रा पैदल तय करते हुए खमरिया घाना स्थित शिवालय पहुंचते हैं। वहीं, पर नर्मदा जल अर्पित कर कर बाबा भोले की पूजा अर्चना करते हैं। पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर, हाईवे पर रूट डायवर्जन सावन के दूसरे सोमवार और आगामी शिवरात्रि पर्व को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। नेशनल हाईवे समेत कई प्रमुख मार्गों पर रूट डायवर्जन लागू कर दिया गया है ताकि कांवड़ यात्रा के दौरान कोई भी अव्यवस्था न हो। जनता से सहयोग की अपील प्रशासन ने आम जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि शिवभक्तों की आस्था और सुरक्षा दोनों प्राथमिकता में हैं, इसलिए आम नागरिक भी रूट डायवर्जन और सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करें। स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी से छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को होने वाली असुविधा को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही सूचना जारी कर दी है। यात्रा चरम पर, प्रशासन की बड़ी चुनौती हर साल की तरह इस बार भी अमरोहा में कांवड़ यात्रा का प्रभाव साफ नजर आ रहा है। बड़ी संख्या में शिवभक्तों के आने-जाने से जहां आस्था का माहौल है, वहीं ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी का निर्णय इस चुनौती को कम करने की दिशा में उठाया गया अहम कदम माना जा रहा है।

सेफ्टी पहले: भोपाल में स्कूल बच्चों के लिए ई-रिक्शा पर लगेगा बैन, बच्चों की सेफ्टी के सही नहीं

भोपाल  शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए शुक्रवार को कंट्रोल रूम में एक मीटिंग हुई। सांसद आलोक शर्मा ने जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम और पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। मीटिंग में लेफ्ट-टर्न को सुधारने, ई-रिक्शा पर नियंत्रण रखने, ट्रांसफार्मर हटाने और पार्किंग व्यवस्था को ठीक करने जैसे मुद्दों पर बात हुई। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को उनके अधूरे प्लान के लिए फटकार लगाई गई और उन्हें एक हफ्ते में ट्रैफिक एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर लेफ्ट टर्न सुधार का प्लान पेश करने का निर्देश दिया गया। शहर के 42 चौराहों पर लेफ्ट टर्न की समस्या को दूर करने के लिए 3 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। ई-रिक्शा पर रोक ई-रिक्शा के गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई गई और कलेक्टर ने कहा कि बच्चों को ई-रिक्शा में स्कूल भेजना सुरक्षित नहीं है। इसलिए स्कूलों में ई-रिक्शा को प्रतिबंधित करने का फैसला लिया गया, क्योंकि यह बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी था। मीटिंग में सड़कों से अतिक्रमण हटाने और कंडम वाहनों को हटाने पर भी बात हुई। सांसद शर्मा ने ट्रांसफार्मर और खंभों को हटाने की बात कही और पार्किंग व्यवस्था को आम लोगों के लिए आसान बनाने के निर्देश दिए। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को फटकार सांसद आलोक शर्मा ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को फटकार भी लगाई। दरअसल, पीडब्ल्यूडी अधिकारी बिना किसी वर्किंग प्लान के मीटिंग में पहुंच गए थे। इस पर सांसद ने नाराजगी जताई। मीटिंग में संबंधित विभागों को कुछ निर्देश दिए गए। उन्हें मैनिट के ट्रैफिक विशेषज्ञों की मदद से सभी 42 चौराहों की समीक्षा रिपोर्ट और एस्टीमेट तैयार करने को कहा गया। इससे जल्द से जल्द काम शुरू किया जा सके। ऐसा करने से ट्रैफिक जाम में कमी आएगी और लोगों का आना-जाना आसान हो जाएगा। साथ ही, चौराहों की सुरक्षा और दृश्यता भी बेहतर हो जाएगी।  

बेंगलुरु के 40 प्राइवेट स्कूलों को बम की धमकी, जांच में जुटी पुलिस और बम निरोधक दस्ता

दिल्ली / बेंगलुरु दिल्ली में आज फिर 20 से ज्यादा स्कूलों में बम की धमकी सामने आई है. इनमें पश्चिम विहार इलाके का एक स्कूल, रोहिणी सेक्टर तीन के अभिनव पब्लिक स्कूल समेत शहर के कुल 20 से अधिक स्कूलों को धमकी भरा मेल आया है. इधर बेंगलुरु के स्कूलों में भी 40 स्कूलों को थ्रेट मेल आए हैं. धमकी मिलने के बाद से हड़कंप मच गया. जानकारी मिलते ही फायर विभाग और दिल्ली पुलिस मौके पर पहुंच गए और परिसरों की जांच शुरू कर दी. अब तक दस से ज्यादा स्कूलों में जांच पूरी हो चुकी है. साथ ही अब दिल्ली पुलिस मेल के ओरिजिन की जांच में भी जुटी है. इस बीच कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के 40 प्राइवेट स्कूलों में भी बम की धमकी मिली है. इनमें आरआर नगर और केंगेरी के स्कूलों में थ्रेट ईमेल मिले. पुलिस इसकी जांच कर रही है. इन स्कूलों को मिली बम से उड़ाने की धमकी दिल्ली पुलिस ने बताया कि आज सुबह दिल्ली के तीन स्कूलों पश्चिम विहार स्थित रिचमंड ग्लोबल स्कूल, रोहिणी के अभिनव पब्लिक स्कूल और रोहिणी के द सॉवरेन स्कूल को ईमेल के जरिए बम धमकी मिली है। पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, धमकी भरे ईमेल में स्कूल परिसरों में विस्फोटक होने का दावा किया गया है। हालांकि, अभी तक किसी भी स्कूल में संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की पुष्टि नहीं हुई है। दिल्ली पुलिस की टीमें, बम निरोधक दस्ते और फायर ब्रिगेड के साथ मिलकर प्रभावित स्कूलों में तलाशी अभियान चला रही हैं। फायर विभाग ने नौ स्कूलों में बम की कॉल की पुष्टि की है। इनमें दिलशाद गार्डन स्थित क्वीन ग्लोबल, द्वारका सेक्टर 19 स्थित सेंट थॉमस, पश्चिम विहार स्थित रिचमंड पब्लिक स्कूल, पुष्पांजलि स्थित गुरुनानक स्कूल, रोहिणी सेक्टर 3 स्थित अभिनव पब्लिक स्कूल, सावरेन पब्लिक स्कूल, द्वारका सेक्टर 17 स्थित जीडी गोयंका स्कूल, रोहिनी सेक्टर नौ स्थित दिल्ली इंटरनेशनल स्कूल शामिल हैं। साइबर टीम कर रही जांच एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि सभी स्कूलों को खाली करवा लिया है और अभिभावकों को सूचित कर दिया गया है। स्थिति नियंत्रण में है। पुलिस ने यह भी कहा कि धमकी भरे ईमेल की जांच साइबर क्राइम यूनिट द्वारा की जा रही है ताकि प्रेषक की पहचान की जा सके। इधर, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना ने ट्वीट कर राजधानी में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने लिखा- आज 20 से ज्यादा स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकियां मिली हैं! जरा सोचिए, बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों को कितना सदमा झेलना पड़ रहा होगा. दिल्ली में भाजपा के हाथ में शासन के चारों इंजन हैं, फिर भी वह हमारे बच्चों को कोई सुरक्षा नहीं दे पा रही है. ये स्तब्ध करने वाला है. गौरतलब है कि बीते कुछ समय से दिल्ली में लगातार स्कूलों और कॉलेजों को बम से उड़ाने की धमकियां मिल रही हैं. इन धमकियों से छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों में दहशत है. हैरानी की बात यह है कि ये धमकियां ईमेल के जरिए भेजी जा रही हैं, जिन्हें लेकर दिल्ली पुलिस और बम निरोधक दस्ते सतर्क हो गए हैं.  इसी हफ्ते के पहले तीन दिन में 11 स्कूल और एक कॉलेज में ऐसा ही मेल आया था. इसके बाद आज शुक्रवार को फिर से 20 से अधिक स्कूलों को मेल आया है.  रिचमंड ग्लोबल स्कूल को धमकी पश्चिम विहार इलाके के प्रसिद्ध रिचमंड ग्लोबल स्कूल को भी बम की धमकी वाला मेल मिला है. इसके बाद स्कूल प्रशासन ने तुरंत पुलिस और अग्निशमन विभाग को इसकी सूचना दी. दिल्ली फायर सर्विस के अनुसार, फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचकर जांच में जुटी हैं. सुरक्षा के मद्देनजर स्कूल परिसर को खाली करवाया गया है और पूरे इलाके को सील कर दिया गया है. अभिनव पब्लिक स्कूल को भी धमकी रोहिणी सेक्टर 3 स्थित अभिनव पब्लिक स्कूल को भी इसी तरह का धमकी भरा मेल मिला है. पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और बम निरोधक दस्ते को मौके पर तैनात किया गया है. संबंधित अधिकारियों के अनुसार, अभी तक किसी भी स्थान से कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है, लेकिन एहतियात के तौर पर स्कूल परिसर की पूरी तरह तलाशी ली जा रही है. पुलिस का बयान दिल्ली पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है. प्रशासन ने कहा है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. साथ ही, भेजे गए मेल की पड़ताल के लिए साइबर सेल को भी जांच में लगाया गया है.  

आईसीटी और सांदीपनि स्कूलों में पहुंची स्किल डिवेलपमेंट गाइड, छात्रों को मिलेगा लाभ

सांदीपनि और आईसीटी लैब वाले विद्यालयों को मिली कौशल विकास पुस्तिका कौशल शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम, विशेष पुस्तिका पहुंची सांदीपनि और आईसीटी स्कूलों तक आईसीटी और सांदीपनि स्कूलों में पहुंची स्किल डिवेलपमेंट गाइड, छात्रों को मिलेगा लाभ भोपाल प्रदेश में संचालित सांदीपनि और आईसीटी लैब विद्यालयों में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को कम्प्यूटर कौशल से जुड़ी जानकारी पर आधारित पुस्तिका स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है। यह पुस्तिका कक्षा 6 से कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों के लिये उपयोगी है। इन पुस्तकों का प्रकाशन पाठ्यपुस्तक निगम से कराया गया है। आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय ने विद्यार्थियों के बीच पुस्तिका के वितरण के संबंध में समस्त जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश जारी किये है। अतिथि शिक्षकों को ई-अटेंडेन्स के बाद ही मिलेगा मानदेय लोक शिक्षण संचालनालय ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 में अतिथि शिक्षकों को शत प्रतिशत ई-अटेंडेन्स हमारे शिक्षक एप के माध्यम से दर्ज करने के निर्देश जारी किये है। निर्देश में कहा गया है कि यह व्यवस्था 18 जुलाई से प्रदेश में अनिवार्य रूप से लागू होगी। जिन अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति हमारे शिक्षक एप के माध्यम से दर्ज नहीं होगी उनका मानदेय का भुगतान नहीं किया जा सकेगा। इस व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू किये जाने के लिये जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किये गये है। विद्यालय में रिक्त पदों के विरूद्ध आवेदकों की री-ज्वॉइनिंग शासकीय विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2025-26 में पूर्व से कार्यरत अतिथि शिक्षक आवेदकों की रिक्त पद होने पर री-ज्वॉइनिंग के संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय ने समय सारणी जारी की है। समय सारणी के अनुसार आवेदकों को अंतिम अवसर देते हुए आज दिनांक 17 जुलाई गुरूवार तक री-ज्यॉइनिंग करने के निर्देश जारी किये गये है। नियत तिथि के बाद 18 जुलाई 2025 को रिक्त पदों की पुन: समीक्षा की जायेगी। प्रदेश में करीब 60 हजार से अधिक अतिथि शिक्षक शिक्षण कार्य से जुड़े हुए है।