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अंजुमन इस्लामिया स्कूल का नया फरमान, रविवार स्कूल लगाने पर बवाल

जबलपुर  शहर में स्कूल की छुट्टी का एक अनोखा मामला सामने आया है. यहां अंजुमन इस्लामिया नाम के स्कूल ने शुक्रवार की छुट्टी रखी है और रविवार के दिन स्कूल लगाने का फरमान जारी किया है. इस फरमान के खिलाफ अल्पसंख्यक मोर्चा के एक नेता ने आपत्ति जाहिर की है, उनका कहना है कि स्कूल के स्टाफ और कई अभिभावकों ने इस फैसले को गलत माना है लेकिन स्कूल प्रबंधन उनकी बात नहीं सुन रहा है.मामले में जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत की गई है. जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि वे जल्द ही इस मामले में जांच करके फैसला देंगे. पाकिस्तान और बांग्लादेश में होती है शुक्रवार की छुट्टी जबलपुर अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता मुजम्मिल अली ने अंजुमन इस्लामिया स्कूल के एक अनोखे फरमान के खिलाफ कलेक्टर कार्यालय में शिकायत की है. मुजम्मिल अली ने कहा, '' स्कूल में एक अनोखा फरमान निकला है, जिसमें स्कूल में साप्ताहिक अवकाश रविवार की जगह शुक्रवार के दिन रखा जाएगा और रविवार के दिन स्कूल लगाया जाएगा. भारत में रविवार की ही छुट्टी होती है, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे मुस्लिम देश में शुक्रवार के दिन की छुट्टी रखी जाती है इसलिए भारत में इस तरह की छुट्टी सही नहीं है. मुजम्मिल ने प्रशासन से इस मामले में दखल देने की अपील की है. शुक्रवार की छुट्टी पर मैनेजमेंट की सफाई इस मामले में अंजुमन इस्लामिया स्कूल के प्रबंधक अनवर अली ने कहा, '' अंजुमन इस्लामिया संस्था पांच स्कूल और एक कॉलेज का संचालन करती है और केवल एक स्कूल नहीं बल्कि सभी स्कूलों में शुक्रवार के दिन की छुट्टी पहले से ही रहती है. मैंने केवल इंग्लिश मीडियम स्कूल की छुट्टी की है और रविवार के दिन इसलिए स्कूल लगाया जा रहा है ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान ना हो.'' डीईओ के पास पहुंची अंजुमन की शिकायत वहीं, जबलपुर के जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी ने कहा, '' हमारे पास यह शिकायत आई है क्योंकि अंजुमन इस्लामिया स्कूल एक निजी संस्था चलाती है ऐसी स्थिति में हमें उनके नियम देखने होंगे. हालांकि, भारत में रविवार को ही छुट्टी की परंपरा है. ऐसी स्थिति में अंजुमन इस्लामिया स्कूल ने मनमाने ढंग से कैसे नियम बदला है, इसे देखना होगा. यदि संस्थान नियम विरुद्ध तरीके से काम करेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.'' अब देखना ये होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और अंजुमन इस्लामिया स्कूल ने किस नियम के तहत ये बदलाव किया.

गांवों में शिक्षा सुधार की पहल, छत्तीसगढ़ में खुलेंगे CBSE स्कूल; सरकार देगी आर्थिक प्रोत्साहन

रायपुर  छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) सरकार ग्रामीण और पिछड़े शहरी इलाकों को विकसित करने के लिए कई प्रयास और योजनाएं चला रही है। इसी कड़ी में अब राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एक और कदम उठा रही है। गांव में आज भी उच्च शिक्षा का अभाव देखा जाता है तो वहीं गांवों के बच्चों को इंग्लिश मीडियम जैसे स्कूलों में पढ़ने के लिए शहर की जाना पड़ता है। ऐसे में अब राज्य सरकार छत्तीसगढ़ निजी विद्यालय प्रोत्साहन नियम 2025 तैयार किया है। इस नीति के तहत अब गांव में CBSE स्कूल खोले जाएंगे। इसके लिए सरकार भी प्रोत्साहित करेगी। बता दें कि इस अधिनियम के तहत गांवों में भी शहर जैसी आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार ऐसे निवेशकों को भारी सब्सिडी देगी जिन्हें औद्योगिक विकास नीति के दायरे में भी शामिल किया गया है। इससे गांवों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) वाले स्कूल खोले जाएंगे। जो विद्यालय विकासखंड मुख्यालय से 10 किलोमीटर की परिधि में या सीमित सुविधाओं वाले नगरीय क्षेत्रों में खोले जाएंगे, उन्हें निवेश प्रोत्साहन मिलेगा। इनमें कम से कम 500 छात्रों की क्षमता और कक्षा पहली से बारहवीं तक CBSE मान्यता अनिवार्य होगी। स्कूल में रहेंगी ये सुविधाएं स्कूल में बच्चों के लिए कई सुविधाएं दी जाएंगी। परिसर में छात्रावास, पुस्तकालय, स्मार्ट क्लास, प्रयोगशाला और खेल सुविधा की व्यवस्था अनिवार्य है। इच्छुक निवेशकों को उद्यम आकांक्षा प्रमाण पत्र और विस्तृत परियोजना के साथ आवेदन जमा करना होगा। प्रस्ताव में परियोजना की संक्षिप्त रूपरेखा, निवेश लागत का विवरण, स्थल चयन, आर्किटेक्चरल प्लान और संभावित रोजगार के आंकड़े शामिल होने चाहिए। निवेश की गणना लोक निर्माण विभाग की दर अनुसूची या 2,000 प्रति वर्गफुट, जो न्यूनतम हो, के आधार पर की जाएगी। कैसे मिलेगी सब्सिडी? छत्तीसगढ़ सरकारा ने इस अधिनियम को लेकर कड़े नियम बनाए हैं। निवेशकों के आवेदन आने के बाद उद्योग संचालनालय सैद्धांतिक स्वीकृति जारी करेगा। इसके बाद इकाई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के परिशिष्ट 7/8 के अंतर्गत निवेश प्रोत्साहन के लिए पात्र होगी। इस नीति के तहत ब्याज सब्सिडी, पूंजी लागत सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी छूट, बिजली शुल्क छूट जैसे प्रोत्साहन उपलब्ध हैं। हालांकि, भूमि, कार्यशील पूंजी और प्रारंभिक व्यय को इसमें नहीं गिना जाएगा।

शैक्षणिक सत्र में बदलाव पर सवाल, 2 महीने में परीक्षा, रिजल्ट और नामांकन चुनौतीपूर्ण: शिक्षक प्रतिक्रिया

जयपुर   राजस्थान के शिक्षा महकमे ने आगामी शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल 2026 से शुरू करने का प्रस्ताव रखा है. इससे सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ेगा. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए स्कूलों के अधिग्रहण से छात्रों की बाधित होने वाली पढ़ाई की भरपाई होगी. साथ ही सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों से प्रतिस्पर्धा भी कर पाएंगे. हालांकि, शिक्षक इससे इत्तेफाक नहीं रखते. उनका मानना है कि राजस्थान में 1 अप्रैल से शिक्षा सत्र शुरू करने की कवायत राजस्थान की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से ठीक नहीं है. पहले भी इस तरह के प्रयोग किए गए हैं, जो फेल हुए हैं. मार्च तक परीक्षा और रिजल्ट : शिक्षक संघ शेखावत के प्रदेश अध्यक्ष महावीर सिहाग ने बताया कि 1 अप्रैल से शुरू करने का संदर्भ ही यही है कि परीक्षा और रिजल्ट का काम मार्च तक पूरा करना पड़ेगा, जो संभव नहीं है. इस सत्र में सितंबर खत्म होने को आ गया है, लेकिन अब तक छात्रों को किताबें प्राप्त नहीं हुई हैं और यदि मार्च में सत्र खत्म होगा तो छात्रों तक किताबें पहुंचना भी एक चुनौती होगी. इसलिए सरकार की ये सोच राजस्थान की भौगोलिक दृष्टि के हिसाब से ठीक नहीं है. पहले भी ये अनुभव किया जा चुका है, बावजूद इसके बार-बार प्रयोग करके शिक्षा विभाग को बर्बाद करने का प्रयास किया जा रहा है. ये सरकार को बंद करना चाहिए. कम से कम इस विषय में शिक्षा से जुड़े हुए शिक्षक संगठनों से बातचीत करके कोई निर्णय करना चाहिए. तानाशाही तरीके से जो भी निर्णय लिए जाते हैं, वो कभी भी शिक्षा के लिए फलदाई नहीं रहे और फिर सरकार को बाद में बदलाव करना पड़ता है. किसने क्या कहा, सुनिए. बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं में रखना होगा तारतम्य : हालांकि, शिक्षकों का एक धड़ा इस पहल का स्वागत भी कर रहा है. राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने बताया कि राजस्थान में प्राइवेट स्कूल 1 अप्रैल या उससे भी पहले से एडमिशन शुरू कर देते हैं. जबकि सरकारी स्कूल 1 जुलाई से प्रवेश उत्सव शुरू करते हैं. इससे सरकारी स्कूल पीछे रह जाते हैं और नामांकन में संतोषजनक वृद्धि नहीं होती. यदि सत्र 1 अप्रैल से सत्र शुरू होगा, तो सरकारी स्कूलों का नामांकन निश्चित रूप से बढ़ेगा. साथ ही शहरी क्षेत्र में लगभग 35 से 40 दिन प्रतियोगी परीक्षाओं के कारण जो पढ़ाई के दिन कम हो रहे हैं, उनकी भरपाई भी होगी. हालांकि, उन्होंने इसके साथ ही चुनौतियां गिनाते हुए कहा कि विभाग को इसके लिए विशेष तैयारी करनी होगी. सबसे बड़ी चुनौती परीक्षाओं के टाइम टेबल को लेकर रहेगी. बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं को पहले आयोजित करना जरूरी होगा. शिक्षा मंत्री का दावा- छात्रों और अभिभावकों को राहत : हालांकि, शिक्षा मंत्री इस प्रयोग से आश्वस्त हैं. मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि ये अभी प्रस्ताव है. अंतिम मोहर लगनी बाकी है, लेकिन यदि सत्र 1 अप्रैल से शुरू होता है तो गरीब बच्चों को भी लाभ मिलेगा और सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ेगा. निजी स्कूल फीस के मामले में कभी-कभी अनुचित तरीके अपनाते हैं. ऐसे में ये नई व्यवस्था अभिभावकों को भी राहत देगी. दिलावर ने ये भी स्पष्ट किया कि ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले एक से डेढ़ महीने की पढ़ाई का टेस्ट लिया जाएगा. विभाग ये सुनिश्चित करेगा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को उनका कोर्स अप्रैल के पहले सप्ताह में ही मिल जाए, ताकि परीक्षा में छात्र अच्छा प्रदर्शन कर सकें. उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल से 15 मई तक शिक्षक घर-घर जाकर एडमिशन लेंगे, जिससे जुलाई में प्रवेश उत्सव की आवश्यकता नहीं होगी. इसके अलावा, ड्रॉपआउट छात्रों को प्रोत्साहित कर उनका भी संबंधित कक्षा में दाखिला कराया जाएगा. शिक्षा विभाग की होगी बड़ी 'परीक्षा' : बहरहाल, 1 अप्रैल से सत्र शुरू होने से कक्षा 1 से 12 तक की परीक्षाएं 31 मार्च तक खत्म कर रिजल्ट जारी करना होगा. अप्रैल के पहले सप्ताह में किताबें, वर्क बुक छात्रों तक पहुंचानी होगी, क्योंकि यदि सामग्री अप्रैल तक नहीं पहुंचती है तो ग्रीष्मावकाश में इसे छात्रों को उपलब्ध कराना आसान नहीं होगा. वहीं, यदि इसे मूर्त रूप मिलता है तो इसका सीधा लाभ सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों और उनके अभिभावकों को मिलेगा.  

रायपुर: मोहगांव हाई स्कूल में अंग्रेजी, गणित और कला विषयों के शिक्षकों की हुई नई पदस्थापना

रायपुर : मोहगांव हाई स्कूल में अंग्रेजी, गणित एवं कला विषय के शिक्षकों की पदस्थापना स्कूल में लौटी शिक्षा की रौनक, बढी शिक्षा की गुणवत्ता रायपुर विद्यालय में एक शिक्षकीय विद्यालय या शिक्षकों की नियुक्ति न होने के कारण प्रारंभ से ही यह संस्था शिक्षकविहीन स्थिति में संचालित हो रही थी, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। अभिभावकों की चिंता और बच्चों की शैक्षणिक प्रगति में बाधा को लेकर ग्रामीणजनों में निराशा व्याप्त थी। शिक्षा विभाग द्वारा इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत्  विद्यालय में छात्र संख्या के आधार पर शिक्षकों को पदस्थ किए गए हैं, जिससे स्कूल में शिक्षा की रौनक बढी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।       महासमुंद जिले के विकासखंड बागबाहरा अंतर्गत शासकीय हाई स्कूल मोहगांव की स्थापना वर्ष 2022 में विद्यार्थियों को माध्यमिक स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। किंतु युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत् तीन व्याख्याता अंग्रेजी, गणित एवं कला विषय के लिए इस विद्यालय में पदस्थ किए गए हैं। इन विषयों की अत्यधिक आवश्यकता थी क्योंकि ये विद्यार्थी के समग्र बौद्धिक और रचनात्मक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्री देवेंद्र चंद्राकर, शैलेन्द्र ठाकुर, रामसिंह नाग व विज्ञान सहायक भूपेंद्र जसपाल शिक्षकों की नियुक्ति के साथ ही विद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियाँ पुनः गति पकड़ने लगी हैं। अब नियमित रूप से कक्षाएँ संचालित हो रही हैं और विद्यार्थी पूरे उत्साह एवं रुचि के साथ अध्ययन में भाग ले रहे हैं। बच्चों की उपस्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार हो रहा है।     विद्यालय में व्याख्याताओं की पदस्थापना से न केवल बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से प्रारंभ हुई है, बल्कि ग्राम मोहगांव सहित आस-पास के क्षेत्रों के पालकों एवं ग्रामीणजनों में भी प्रसन्नता की लहर है। बच्चों के भविष्य को लेकर अब उनमें आश्वस्ति का भाव है। ग्राम के नागरिकों ने शासन एवं शिक्षा विभाग के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि यह निर्णय दूरस्थ ग्रामीण अंचल में शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने अपेक्षा जताई कि इसी तरह अन्य आवश्यक सुविधाएँ भी विद्यालय में शीघ्र उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।     क्षेत्र के जनपद सदस्य भूपेंद्र मोंटू दीवान, सरपंच नरेन्द्र दीवान व एसएमसी अध्यक्ष डॉ. चेतन साहू ने प्रसनता व्यक्त करते कहा कि शिक्षा विभाग की यह पहल शिक्षा सबके लिए के उद्देश्य को साकार करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी बच्चे को केवल संसाधनों के अभाव में शिक्षा से वंचित न होना पड़े।

इंदौर के सांदीपनि मालव कन्या विद्यालय को मिला एक्सीलेंस स्कूल अवार्ड, शिक्षा में रचा नया कीर्तिमान

इंदौर के सांदीपनि मालव कन्या विद्यालय को मिला एक्सीलेंस स्कूल अवार्ड फ्यूचर रेडी स्किल श्रेणी प्रतियोगिता में शामिल हुआ था विद्यालय  इंदौर सांदीपनि मालव कन्या विद्यालय ने फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) का एक्सीलेंस राष्ट्रीय स्तर का स्कूल अवार्ड जीता है। अलायंस फॉर री-इमेजिनिंग स्कूल एजुकेशन अवार्ड (अराइज) फिक्की का प्रतिष्ठित अवार्ड है। विद्यालय को अवार्ड बच्चों में अकादमिक विषयों से आगे बढ़कर भविष्य के लिये स्किल्स डेव्हलपमेंट के क्षेत्र में नवाचार किये जाने केलिये दिया गया है। विद्यालय के बच्चों को कम्प्यूटर में कोडिंग सिखाई जा रही है। इसी के साथ कम्युनिकेशन और क्रिएटिव की नई तकनीक सिखाई जा रही है। सरकारी स्कूल के बच्चों में स्किल डेवलप कर भविष्य के लिये तैयार किया जा रहा है। नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में हुए कार्यक्रम में अनेक शिक्षाविद् के साथ हाल ही में भारत से स्पेस स्टेशन पर गये ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भी मौजूद थे। प्रदेश के लिये गौरव की बात है कि देश के एक हजार स्कूलों में इंदौर के सांदीपनि विद्यालय ने अपने नवाचार कार्यक्रम के जरिये यह पुरस्कार जीता है। पुरस्कार प्राचार्य श्री रामकृष्ण कोरी और उनकी टीम ने प्राप्त किया। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में पीपल फाउंडेशन की मदद से बच्चों में कम्प्यूटर में दक्षता के लिये यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है। ज्यूरी सदस्यों में केन्द्र सरकार की पूर्व शिक्षा सचिव सुश्री अनीता करवाल और नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर एजुकेशन के चेयर पर्सन प्रो. पंकज अरोरा भी शामिल थे।  

हरियाणा :गांव के सरकारी स्कूलों में स्मार्ट शिक्षा का सपना अधूरा, सुविधाओं की भारी कमी

चंडीगढ़   हरियाणा में सरकारी स्कूलों को स्मार्ट बनाने की रफ्तार सुस्त है। प्रदेश के कुल 14,338 सरकारी स्कूलों में से 6,101 स्कूलों में ही स्मार्ट क्लासरूम, स्मार्ट बोर्ड या वर्चुअल क्लासरूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह जानकारी केंद्र सरकार की यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (यूडीआईएसई) की 2024-25 की रिपोर्ट में दी गई है। स्मार्ट स्कूल में एक क्लास के अंदर इंटरएक्टिव बोर्ड, डिजिटल स्क्रीन, ई-लर्निंग सामग्री की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। राज्य सरकार ने 2023 में हरियाणा स्मार्ट एजुकेशन मिशन शुरू किया था जिसके तहत तीन वर्षों में सभी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों को स्मार्ट क्लासरूम से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया। रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा के 16.3 फीसदी सरकारी स्कूलों में प्रोजेक्टर और 41.6 फीसदी में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाएं (आईसीटी) हैं। वहीं, 63.9 फीसदी निजी सहायता प्राप्त स्कूल ही स्मार्ट बने हैं। स्मार्ट स्कूलों में ज्यादातर शहरी क्षेत्रों या मॉडल संस्कृति स्कूलों हैं। अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल डिजिटल सुविधाओं से वंचित हैं। स्मार्ट को अब स्मार्ट प्लस बनाने की योजना हरियाणा सरकार का दावा है कि अगले दो साल में पांच हजार से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बनाए जाएंगे। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके अलावा स्मार्ट स्कूलों को अब स्मार्ट प्लस स्कूल के रूप में अपग्रेड करने की योजना बना रही है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित लर्निंग टूल्स और वर्चुअल लैब की व्यवस्था होगी। पंजाब ने चार साल पहले शुरू की थी पहल पंजाब सरकार ने हरियाणा से चार साल पहले 2019 में सरकारी स्कूलों को स्मार्ट बनाने की पहल शुरू की थी। यहां कुल 19,107 सरकारी स्कूलों में से 6,832 स्मार्ट हैं। इसके अलावा 13 हजार स्कूलों में 41 हजार स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए गए और 3,500 स्कूलों में एजुकेशनल सैटेलाइट सुविधा उपलब्ध है। स्मार्ट स्कूल नीति के तहत पंचायतों, एनआरआई और समाजसेवी संगठनों के सहयोग से तेजी से विस्तार किया। इससे कई गांवों तक डिजिटल शिक्षा की पहुंच हो गई है। प्रदेश के 13 जिलों के 50 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में एक-एक अटल टिंकरिंग लैब स्थापित की जा चुकी है। 615 अन्य राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में एक-एक नई विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित लैब बनाने की प्रक्रिया जारी है। रही बात स्मार्ट स्कूलों की रफ्तार धीमी होने की तो उसकी भी समीक्षा की जा रही है। इस बार मुख्यमंत्री ने शिक्षा का बजट बढ़ाया है। -महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री 

स्टूडेंट्स के लिए बड़ी खबर: कल से फिर शुरू होंगी कक्षाएं, जानें मंत्री का बयान

चंडीगढ़ पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने कहा कि राज्य में बाढ़ के कारण हाल में बंद किये गए स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय नौ सितंबर से फिर से खुल जाएंगे। मंत्री ने कहा कि यदि कोई स्कूल या कॉलेज बाढ़ से प्रभावित होता है, तो उसे बंद करने का निर्णय संबंधित उपायुक्त द्वारा लिया जाएगा। पंजाब सरकार ने राज्य में दशकों की सबसे भीषण बाढ़ के मद्देनजर हाल में सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों को सात सितंबर तक बंद करने का आदेश दिया था। रविवार को ‘एक्स' पर एक पोस्ट में, बैंस ने कहा कि राज्य के सभी सरकारी, निजी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल, कॉलेज एवं विश्वविद्यालय फिर से खुलेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘आठ सितंबर को राज्य के सभी सरकारी स्कूल छात्रों के लिए बंद रहेंगे। शिक्षक विद्यालयों में मौजूद रहेंगे और पंचायतों, नगर परिषदों और नगर निगमों के सहयोग से स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा।'' बैंस ने कहा, "शिक्षक स्कूल भवनों का गहन निरीक्षण करेंगे। यदि कोई समस्या पाई जाती है, तो इसकी सूचना तुरंत जिले के उपायुक्त और इंजीनियरिंग विभाग को दी जानी चाहिए।" उन्होंने कहा कि नौ सितंबर से सभी सरकारी स्कूल सामान्य रूप से फिर से खुलेंगे। बैंस ने कहा कि निजी विद्यालयों के प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा कि स्कूल भवन और कक्षाएं पूरी तरह सुरक्षित हों। हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद सतलुज, व्यास और रावी नदियों और मौसमी जलधाराओं में उफान के कारण पंजाब के बड़े हिस्से में बाढ़ आ गई है। इसके अलावा, हाल के दिनों में पंजाब में हुई भारी बारिश ने बाढ़ की स्थिति और विकराल कर दी है।

29 अगस्त को एमपी के प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों में बनेगी शाला प्रबंधन समितियां, दो साल का होगा कार्यकाल

भोपाल  मध्यप्रदेश के सभी शासकीय और अनुदान प्राप्त प्राथमिक, माध्यमिक और कक्षा 1 से 8 तक की संयुक्त शालाओं में 29 अगस्त को शाला प्रबंधन समितियों (एसएमसी) का गठन किया जाएगा। इसके लिए राज्य शिक्षा केंद्र ने सभी जिलों के कलेक्टरों को आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं। शाला प्रबंधन समितियां शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बनाई जाती हैं। इनका कार्यकाल दो साल का होता है। समितियों की जिम्मेदारी स्कूल में बच्चों के नामांकन, नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्कूल की सुविधाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास पर रहती है। हर समिति में 14 पालक प्रतिनिधि, प्रधान शिक्षक, वरिष्ठ महिला शिक्षिका और स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन बच्चों के पालकों में से होगा, जबकि प्रधान शिक्षक समिति के सदस्य सचिव रहेंगे। प्रदेश के करीब 83 हजार स्कूलों में एक ही दिन समितियों का गठन होगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के अभिभावकों से अपील की है कि वे 29 अगस्त को स्कूल पहुंचकर समितियों में सक्रिय रूप से जुड़ें और शालाओं के विकास कार्यों में सहयोग दें। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शासकीय एवं अनुदान प्राप्त स्कूलों में अध्ययनरत् विद्यार्थियों के पालकों एवं अभिभावकों से 29 अगस्त-2025 को स्कूल पहुंचकर, शाला प्रबंधन समिति से जुड़ने और शालाओं के विकास कार्यों में सहभागी बनने का आग्रह किया गया है। 

रायपुर के गाँव में शिक्षा सुधार की नई मिसाल, युक्तियुक्तकरण से बदलाव

रायपुर बिलासपुर जिला के कोटा ब्लॉक का छोटा सा ग्राम खरगा अब शिक्षा की नई रोशनी से जगमगा रहा है। इस गाँव के शासकीय प्राथमिक विद्यालय की छात्रा पूनम धृतलहरे की आंखों में अब आत्मविश्वास और उम्मीद दोनों चमकते हैं। मेहनती और होशियार पूनम शुरू से पढ़ाई में आगे रही है, लेकिन लंबे समय से यह विद्यालय एकल शिक्षकीय था, जिससे उसकी और उसके साथियों की शिक्षा प्रभावित हो रही थी। कठिन सवालों के उत्तर न मिल पाने से बच्चे धीरे-धीरे उत्साह खोने लगे थे और कुछ तो स्कूल छोड़ने की सोच भी रहे थे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए गए युक्तियुक्तकरण ने इस गाँव के बच्चों की जिंदगी में नई दिशा दी। विद्यालय में पहले से कार्यरत शिक्षक श्री संतोष कुमार खांडे के साथ अब श्री मुकेश कुमार यादव की नियुक्ति होने से कक्षाओं में नई ऊर्जा और बेहतर शिक्षण वातावरण आया। दो शिक्षकों की मौजूदगी ने न केवल पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारी, बल्कि बच्चों का स्कूल से जुड़ाव भी बढ़ाया। पूनम और उसके सहपाठियों का कहना है कि अब वे कठिन से कठिन प्रश्न हल करना सीख गए हैं और पढ़ाई में मजा आने लगा है। पालकों ने भी मुख्यमंत्री के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि अब उनके बच्चों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है, जिससे वे भी शहर के बच्चों की तरह बड़े सपने देख और पूरे कर सकेंगे। खरगा जैसे छोटे गाँवों में जब शिक्षक समय पर पहुँचते हैं, तो यह बदलाव केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे गाँव के भविष्य को दिशा देता है। आज पूनम और उसके साथी न सिर्फ मन लगाकर पढ़ रहे हैं, बल्कि आने वाले समय में अपने गाँव और राज्य का नाम रोशन करने के लिए तैयार हैं।

छात्राओं की शिकायतों पर लापरवाही, इंदौर कमिश्नर ने स्कूल प्रभारी को हटाया

खरगोन  जिले के धूलकोट सांदीपनि विद्यालय में छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार की शिकायतों की अनदेखी का भारी खामियाजा भुगतना पड़ा है। इंदौर के कमिश्नर दीपक सिंह ने सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने प्रभारी प्राचार्य सत्यनारायण मालवीय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल से मिली रिपोर्ट के आधार पर की गई है। दरअसल, अंशकालिक मजदूर पवन शर्मा पर स्कूल की छात्रों के साथ अनुचित हरकत करने के आरोप लगे थे। इस पर छात्राओं ने कई बार शिकायत की थी। लेकिन प्रभारी प्राचार्य सत्यनारायण मालवीय ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। इसके बाद जुलाई महीने में छात्र छात्राओं और उनके पेरेंट्स ने भगवानपुरा थाने का घेराव किया था। साथ ही भगवानपुर धूलकोट मार्ग पर 3 से 4 घंटे तक चक्का जाम कर दिया गया था। प्रदर्शन के बाद भी प्राचार्य की बेरुखी परिजनों के प्रदर्शन के बावजूद प्रभारी प्राचार्य मालवीय ने अपनी बेरूखी बनाए रखी और कोई कार्रवाई नहीं की थी। वहीं, छात्राओं की शिकायत पर कलेक्टर भव्या मित्तल ने एसडीएम खरगोन से जांच कराने के निर्देश दिए थे। जांच में प्रथम दृष्टिया मालवीय की गम्भीर लापरवाही सिद्ध हुई थी। इसके बाद इंदौर कमिश्नर ने प्रभारी प्राचार्य के एमपी सिविल सेवा नियम 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए है। सत्यनारायण मालवीय (मूल पद लेक्चरर, कृषि) का मुख्यालय अब कार्यालय, परियोजना प्रशासक, एकीकृत आदिम जाति विकास परियोजना खरगोन रखा गया है। उनके स्थान पर उच्च माध्यमिक शिक्षक विनोद सांवलिया को अस्थाई रूप से सांदीपनि विद्यालय धूलकोट का प्राचार्य का दायित्व दिया गया है।