samacharsecretary.com

फीस कानून पर बड़ा अपडेट! सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया स्पष्टीकरण, अगले सत्र में नहीं होगा लागू

नई दिल्ली   दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की फीस नियंत्रित करने वाले नए कानून पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली स्कूल एजुकेशन (ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस) एक्ट, 2025 को वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2025-26 में लागू नहीं किया जाएगा। यह कानून अब अगले शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा। शिक्षा निदेशालय की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने यह जानकारी दी। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कानून को शैक्षणिक सत्र के बीच में जल्दबाजी से लागू करने पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा था कि ऐसा करने से स्कूलों और अभिभावकों को परेशानी हो सकती है और यह व्यावहारिक नहीं होगा। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की पीठ ने माना कि कानून का उद्देश्य अच्छा है। लेकिन, इसे सही समय पर लागू करना जरूरी है। सरकार के इस फैसले के बाद कोर्ट ने कहा कि अब इस पर दखल देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार ने समझदारी दिखाई है। यह कानून प्राइवेट स्कूलों में फीस की मनमानी बढ़ोतरी रोकने के लिए बनाया गया है। इसके तहत हर स्कूल को फीस तय करने के लिए एक स्कूल लेवल कमेटी बनानी होगी। इस कमेटी में स्कूल प्रबंधन का प्रतिनिधि, प्रधानाचार्य, तीन शिक्षक, पांच अभिभावक और शिक्षा निदेशालय का एक प्रतिनिधि शामिल होगा। कमेटी फीस के प्रस्ताव पर विचार करेगी और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। इसके अलावा जिला स्तर पर अपील कमेटी भी होगी। कानून कैपिटेशन फीस वसूलने पर रोक लगाता है और अतिरिक्त शुल्क पर भी नियंत्रण रखता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून की वैधता से जुड़ा मामला दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है। अब आगे की सुनवाई और फैसला हाई कोर्ट ही करेगा। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशंस ने इस कानून को चुनौती दी है। लेकिन, कोर्ट ने फिलहाल इसे लागू करने के तरीके पर ही ध्यान दिया। अभिभावक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि इससे फीस में अचानक बढ़ोतरी पर लगाम लगेगी। अगले साल से लागू होने पर स्कूलों को भी तैयारी का समय मिलेगा। यह कदम दिल्ली में शिक्षा की पहुंच और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

ग्वालियर जिले में भीषण ठंड के कारण 9-10 जनवरी को छुट्टी, आदेश जारी

ग्वालियर  मध्यप्रदेश में शीतलहर और भीषण ठंड को देखते हुए कई जिलों के शासकीय और अशासकीय स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिए गए हैं। इसी बीच ग्वालियर में 9 और 10 जनवरी नर्सरी से लेकर कक्षा पांचवी तक के बच्चों के लिए स्थानीय अवकाश घोषित किए गए हैं। इसके साथ ही कक्षा छठवीं से लेकर कक्षा बाहरवीं तक के लिए स्कूलों का समय 10.30 से 3 बजे तक निर्धारित किया गया है। कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने यह आदेश जारी किया है। सभी स्कूलों पर लागू रहेंगे आदेश जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने बताया कि यह आदेश अत्यधिक ठंड की वजह से बच्चों के स्वास्थ्य, सुविधा, सुरक्षा एवं आवागमन को ध्यान में रखकर जारी किया गया है। यह आदेश ग्वालियर जिले में संचालित एमपी बोर्ड, सीबीएसई व आईसीएसई से संबद्ध सभी शासकीय एवं अशासकीय व शासन से मान्यता प्राप्त स्कूलों पर लागू होगा। इंदौर में स्कूलों के समय में बदलाव इंदौर में शीतलहर और तापमान में आई गिरावट को ध्यान में रखते हुए शासकीय/अशासकीय/सी.बी.एस.ई./आई.सी.एस.ई/ माध्यमिक शिक्षा मंडल एवं समस्त बोर्ड से सबंद्ध विद्यालयों की कक्षा नर्सरी से कक्षा 8 वी तक, एवं आंगनवाडी के छात्र-छात्राओं हेतु 8 जनवरी से आगामी आदेश तक विद्यालय का संचालन प्रातः 09.30 बजे से पूर्व नहीं किया जाएगा। अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों यथा परीक्षा इत्यादि पूर्ववत संचालित रहेगी।

उत्तर प्रदेश में सर्दी से हालात बिगड़े, 5 जनवरी तक कक्षा 12 तक के सभी स्कूल बंद

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में ठंड और कोहरा का सितम जारी है। प्रदेश में शीत लहर चलने से शरीर कंपाने वाली ठंड पड़ रही है। हालांकि गुरुवार को धूप निकलने से लोगों को बड़ी राहत मिली थी। लेकिन शुक्रवार को फिर से दोपहर के समय भी धूप के दीदार नहीं हुए और बदली छाई रही। इस तरह प्रदेश में भीषण ठंड के प्रकोप को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कक्षा 12 तक के स्कूलों की छुट्टी बढ़ा दी है। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों को जरूरी निर्देश भी दे दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भीषण शीतलहर को लेकर 12 वीं तक के स्कूलों में छुट्टी बढ़ा दी है। सीएम योगी ने 5 जनवरी तक सभी स्कूल बंद रखने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी ने यूपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड और आईसीएससी बोर्ड के सभी स्कूलों को 5 जनवरी तक बंद करने के निर्देश दिए है। मैदान में उतरें अफसर, सुनिश्चित करें व्यवस्थाएं मुख्यमंत्री ने शासन और प्रशासन के आला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्वयं क्षेत्रों में भ्रमणशील रहकर जमीनी हकीकत का जायजा लें। सीएम ने कहा कि भीषण ठंड को देखते हुए हर जिले के सार्वजनिक स्थलों पर अलाव और कंबलों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। 'कोई भी खुले में न सोए' शीलहर को देखते हुए सीएम योगी ने रैन बसेरों के संचालन को लेकर अधिकारियों को विशेष हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोई भी व्यक्ति कड़ाके की ठंड में खुले में सोने को मजबूर न हो। सभी रैन बसेरों में बिछौने, कंबल और साफ-सफाई समेत सभी आवश्यक सुविधाएं पुख्ता की जाएं। अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि जरूरतमंदों को समय पर राहत सामग्री और आश्रय प्राप्त हो। इसके अलावा अलाव की व्यवस्था की जाए। तीन डिग्री पर ठिठुरा बाराबंकी, मेरठ में सर्द दिन प्रदेश के कई जिलों में धूप निकली लेकिन सर्द हवाओं का सितम रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बीते 24 घंटों के दौरान बाराबंकी का तापमान 3 डिग्री दर्ज किया गया। यह प्रदेश का सबसे सर्द जिला रहा। सीजन में भी सबसे सर्द रहा। वहीं मेरठ में दिन का तापमान सबसे कम रहा। मेरठ में दिन का तापमान 14.9 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। मेरठ सहित वेस्ट यूपी में गुरुवार को दिनभर धूप गायब रही। अमौसी स्थित मौसम मुख्यालय के अनुसार बाराबंकी के अलावा गोरखपुर और हरदोई में भी गलन और ठिठुरन ने अपना असर दिखाया। गोरखपुर में न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री रहा, जो सामान्य से 4.7 डिग्री कम है। वहीं, हरदोई में पारा 4.5 डिग्री, अयोध्या में 5.0 डिग्री, सुलतानपुर में 5.2 डिग्री और बरेली में 5.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कानपुर में भी रात का तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। वहीं, पछुआ हवा के चलते दिन में भी धूप बेअसर साबित हो रही है। बस्ती में अधिकतम तापमान सामान्य से 5.6 डिग्री गिरकर 18.0 डिग्री पर आ गया। आगरा, अलीगढ़, इटावा और फतेहगढ़ जैसे शहरों में भी दिन का तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री नीचे रहा। अभी तक कक्षा 12 तक के स्कूलों में 1 जनवरी तक छुट्टी घोषित थी। लेकिन अब इसे 5 जनवरी तक बढ़ा दी गई है। भीषण ठंड के प्रकोप के चलते स्कूलों में छुट्टी बढ़ाने का फैसला लिया गया है। वहीं कक्षा 8 तक के स्कूल 14 जनवरी तक बंद रहेंगे। इसके अलावा बढ़ती ठंड को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को भी जरूरी दिशा निर्देश दे दिए हैं। सीएम योगी ने कहा कि शीत लहर को लेकर सभी अधिकारी क्षेत्र में भ्रमण शील रहें। साथ ही सीएम योगी ने सभी जिलों में कंबल और अलाव की व्यवस्था करने के लिए भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। सीएम योगी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति खुले में न सोए। साथ ही कहा कि अधिकारी सभी रैन बसेरों में आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करे। बता दें, प्रदेश में दिन पर दिन ठंड बढ़ती जा रही है। कड़ाके की ठंड के साथ ही कोहरे का सितम भी जारी है।

कलेक्टर IAS गौरव बैनल ने अचानक दौरा किया माता सबरी कन्या विद्यालय का, प्राचार्य पर कार्रवाई

सिंगरौली  सिंगरौली जिले के कलेक्टर IAS गौरव बैनल सोमवार को अचानक गड़ेरिया स्थित माता सबरी आवासीय कन्या विद्यालय पहुंचे.निरीक्षण के दौरान प्राचार्य और शिक्षक विद्यालय से गायब मिले.कलेक्टर ने दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी कर प्राचार्य की एक वेतन वृद्धि रोकने के निर्देश दिए.हालांकि कलेक्टर के आने के कुछ समय बाद ही स्कूल से गायब प्राचार्य स्कूल में पहुंच गए. निरीक्षण के बाद कलेक्टर ने माता सबरी आवासीय कन्या विद्यालय के छात्राओं से संवाद किया.कलेक्टर गौरव बैनल ने छात्राओं को अपनी रुचि के अनुसार कैरियर चुनने की सलाह दी. कुछ छात्राओं ने कलेक्टर गौरव बैनल से IAS बनने का मार्गदर्शन भी लिया. कलेक्टर ने विद्यालय के पुस्तकालय व लैब का भी जायजा लिया. और साफ सफाई व लैब संचालित करने के लिए निर्देशित किया. इस दौरान विद्यालय के प्राचार्य ने कलेक्टर से बताया कि विद्यालय परिसर के पास स्टोन क्रेशर होने के कारण छात्राओं की पढ़ाई में बाधा उत्पन्न होती है.इस समस्या पर भी कलेक्टर ने तत्काल जिला खनिज अधिकारी को जांच के प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया। 

सागर जिले में सभी जर्जर स्कूल एवं अन्य भवन गिराने की कार्रवाई की जा रही है

अब तक 300 से अधिक जर्जर भवन गिराए गए भोपाल  सागर ज़िले में जर्जर स्कूल एवं अन्य भवनों को गिराकर नए भवन बनाने की कार्रवाई तेज़ी से की जा रही है। कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने विगत दिवस स्कूल शिक्षा विभाग के प्राचार्य की समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि जिले में कोई भी स्कूल भवन सहित अन्य भवन क्षतिग्रस्त जर्जर नहीं हो इसके लिए तत्काल कार्रवाई कर दो दिवस में क्षतिग्रस्त भवनों को गिराया जाए। कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. के निर्देश के बाद जिले के सभी जर्जर स्कूल भवन एवं अन्य भवन को गिराने की कार्रवाई युद्ध स्तर पर की गई। एक दिन में लगभग 50 से अधिक स्कूल भवन सहित अन्य भवनों को गिराया गया। कलेक्टर ने कहा कि कोई भी स्कूल भवन क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में उस भवन में स्कूल संचालित नहीं होना चाहिए। जिले के शिक्षा, राजस्व एवं नगरीय निकाय के अधिकारी और स्कूल के प्राचार्य यह सुनिश्चित करें कि किसी भी विद्यालय का भवन जर्जर स्थिति में हो, उसे तत्काल गिरा दिया जाए। कलेक्टर ने कहा कि कोई भी घटना होने पर संबंधित क्षेत्र के अधिकारी, स्कूल प्रबंधन, मकान मालिक दोषी होंगे। सभी स्कूल के प्राचार्य, भवन गिराने के बाद इसका प्रमाण पत्र संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेंगे, जिसे सूचीबद्ध कर जिला शिक्षा अधिकारी प्रस्तुत करेंगे। कलेक्टर के निर्देश पर सागर, रहली, खुरई, राहतगढ, माल्थोन, देवरी में स्कूल भवन सहित अन्य भवनों को गिराने की कार्रवाई की गई है। नगर निगम क्षेत्र में भी नगर निगम के द्वारा अनेक जर्जर भवनों को जो कि चिन्हित किए गए थे, उनको गिराने की कार्रवाई की जा रही है। इसी प्रकार सभी नगरीय निकायों में भी यह कार्रवाई की जा रही है। अब तक जिले में 300 से अधिक भवनों को गिराने की कार्रवाई की गई है।  

स्कूल से दूर देश की 45.4% लड़कियां: देखें राज्यों के अनुसार आंकड़े

नई दिल्ली संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लड़कियों की शिक्षा को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में अब भी 45.4 प्रतिशत लड़कियां स्कूल नहीं जा रही हैं। यह स्थिति बताती है कि तमाम योजनाओं के बावजूद बालिका शिक्षा अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। महाराष्ट्र में हालात सबसे खराब राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो महाराष्ट्र की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है, जहां 66 फीसदी लड़कियां स्कूल से बाहर हैं। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश (54.8%), मिजोरम (53.8%), जम्मू-कश्मीर (53.7%) और ओडिशा (49.5%) में भी बड़ी संख्या में लड़कियां शिक्षा से वंचित हैं। केरल सहित कुछ राज्यों का बेहतर प्रदर्शन वहीं दूसरी ओर, केरल लड़कियों की शिक्षा के मामले में अन्य राज्यों से आगे नजर आता है। यहां केवल 33.2 फीसदी लड़कियां स्कूल नहीं जातीं। मध्य प्रदेश (37.8%) भी राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में है। हालांकि बिहार (45.7%), राजस्थान (46.2%) और उत्तर प्रदेश (47.2%) अब भी राष्ट्रीय औसत के आसपास या उससे ऊपर हैं। राज्यवार स्कूल न जाने वाली लड़कियों का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत – 45.4% महाराष्ट्र – 66% हिमाचल प्रदेश – 54.8% मिजोरम – 53.8% जम्मू-कश्मीर – 53.7% ओडिशा – 49.5% उत्तर प्रदेश – 47.2% राजस्थान – 46.2% बिहार – 45.7% मध्य प्रदेश – 37.8% केरल – 33.2% प्री-स्कूल से 12वीं तक के आंकड़े यह डेटा प्री-स्कूल से लेकर कक्षा 12वीं तक का है और पिछले पांच वित्तीय वर्षों (FY 2022 से FY 2026) पर आधारित है। इसमें 2025 और 2026 के आंकड़े अस्थायी हैं, जिनमें आगे बदलाव संभव है। ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि लड़कियों की शिक्षा को लेकर अभी और गंभीर प्रयासों की जरूरत है, ताकि भविष्य में यह अंतर कम किया जा सके।

निजी स्कूलों के लिए राहत, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मनमानी फीस वसूली के खिलाफ फीस वापसी आदेश निरस्त किया

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधकों को मनमानी फीस वसूली के मामले में हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल ने अपने आदेश में कहा है कि राज्य के अधिकारियों ने बहुत ही खराब माहौल में काम किया और अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया। दो दर्जन से अधिक प्राइवेट स्कूल संचालकों ने मनमानी फीस वसूली के खिलाफ प्रकरण दर्ज किये जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील दायर करने वाले अधिकांश स्कूल मिशनरी संस्थाओं के द्वारा संचालित किये जा रहे थे। अपील में मध्य प्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) अधिनियम, 2017 (जिसे आगे एक्ट कहा जाएगा) के सेक्शन 11 और मध्य प्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) नियम के तहत फीस वापस लौटाने के आदेश जारी किये जाने को चुनौती दी गई थी। अपील में कहा गया था कि राज्य की गाइडलाइन का कथित तौर पर उल्लंघन करने का आरोप में जिला प्रशासन की शिकायत पर पुलिस ने स्कूल प्रबंधन से जुडे व्यक्तियों तथा प्राचार्य पर प्रकरण दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार भी किया था। अपीलकर्ताओं की तरफ से तर्क दिया गया कि एक्ट के सेक्शन 11 के तहत अंतरिम सुरक्षा देने का कोई अधिकार नहीं है। एक्ट में प्रावधान नहीं होने के बावजूद भी साल 2017-18 के बाद से जमा की गई फीस वापस करने आदेश जारी किये गये हैं। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अधिकारियों ने बहुत खराब माहौल में और अपनी पावर का इस्तेमाल करते हुए अपने अधिकार से बाहर काम किया। राज्य के अधिकारियों का कार्य स्कूलों के मैनेजमेंट में दखलंदाज़ी के बराबर है। स्टूडेंट्स की फीस वापस करने का राज्य सरकार का निर्देश टिकने लायक नहीं है। अधिकारी आरोपों को साबित करने में नाकाम रहे। अधिकारियों के पास फीस तय करने और अलग-अलग निर्देश जारी करने का अधिकार नहीं है, जो स्कूल चलाने वाले मैनेजमेंट या सोसाइटी के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। जिस तरह से लोकल एडमिनिस्ट्रेशन ने पूरे मामले को हैंडल किया, उससे स्कूल मैनेजमेंट और पैरेंट्स के बीच अनबन और मतभेद पैदा हो गए, जो स्टूडेंट्स की पढ़ाई और करियर के लिए अच्छा नहीं है। इस मामले को 2017 के एक्ट और 2020 के रूल्स के तहत सही तरीके से हैंडल किया जा सकता था। युगलपीठ ने फीस वापस करने के आदेश को निरस्त करते हुए अपीलकर्ता स्कूलों को राहत प्रदान की। 

कलेक्टर का बड़ा आदेश: शीतलहर के चलते स्कूलों का समय बदला, जानें नया शेड्यूल

जांजगीर-चाम्पा  कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने जिले में पड़ रहे अत्याधिक ठंड और शीतलहर के कारण छात्रहित को ध्यान में रखते हुए जिले में संचालित  समस्त शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त एवं अन्य विद्यालयों का संचालन समय परिवर्तित किया है जो 11 दिसंबर 2025 से आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगा।        आदेशानुसार दो पाली में संचालित होने वाली शालाओं के लिए प्रथम पाली में संचालित शालाओं का संचालन समय सोमवार से शुक्रवार प्रातः 08 बजे से 12 बजे तक, शनिवार को दोपहर 12.15 से 4.15 बजे तक, द्वितीय पाली में संचालित होने वाले शालाओं का संचालन समय सोमवार से शुक्रवार तक दोपहर 12.15 बजे से 04.15 बजे तक एवं शनिवार प्रातः 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार एक पाली में संचालित होने वाली शालाओं का संचालन सोमवार से शुक्रवार सुबह 10 बजे से 04 बजे तक एवं शनिवार प्रातः 08 बजे से 12 बजे तक निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही परीक्षाएँ पूर्ववत निर्धारित समय अनुसार ही संचालित की जाएगी।

10 साल में एमपी के 32,000 से अधिक स्कूल हुए बंद, शिक्षकों व छात्रों की संख्या घटी; CBI जांच की मांग तेज

भोपाल  प्रदेश में वर्ष 2013-14 की तुलना में 2025-26 तक शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सरदारपुर विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 2013-14 में सरकारी स्कूलों की संख्या 1,14,972 थी, जो घटकर 82,128 रह गई। यानी 32,844 विद्यालय कम हुए। इसी अवधि में शिक्षकों की संख्या 2,91,992 से घटकर 2,33,817 रह गई, जो कुल 61,175 की कमी है। क्या कहा मंत्री ने मंत्री ने बताया कि 2025-26 में 21,193 शासकीय माध्यमिक विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें 20 से कम विद्यार्थी हैं। वहीं 29,486 स्कूलों में छात्रों की संख्या 40 से कम है। प्रदेश के 8,533 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जबकि 28,716 स्कूलों में सिर्फ दो शिक्षक हैं। बढ़ा बजट वर्ष 2010-11 में स्कूल शिक्षा विभाग का बजट 6,374.25 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 36,581.64 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं शासकीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 तक विद्यार्थियों की संख्या 2010-11 में 133.66 लाख थी, जो घटकर 2025-26 में 79.39 लाख रह गई। यानी कुल 54.27 लाख विद्यार्थियों की कमी हुई है। मंत्री ने बजट बढ़ने के कारण के रूप में सातवें वेतनमान और महंगाई भत्ते को वजह बताया। जबकि विद्यालय और शिक्षक संख्या में कमी के पीछे शालाओं के मर्ज होने और शिक्षकों की सेवानिवृत्ति को कारण बताया गया। हालांकि, विद्यार्थियों की संख्या में भारी कमी को लेकर कोई कारण नहीं बताया गया। वहीं मीडिया से बातचीत में विधायक प्रताप ग्रेवाल ने कहा कि वर्ष 2014-15 में 82 लाख विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्ति दी गई थी, जो 2025-26 में घटकर 58 लाख रह गई। वर्ष 2013-14 में 93.7 लाख बच्चों को निश्शुल्क पाठ्यपुस्तकें और गणवेश वितरित किए गए थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या घटकर 56.82 लाख रह गई। मध्यान्ह भोजन के लाभार्थी 75.75 लाख से घटकर 37.23 लाख और निश्शुल्क साइकिल योजना के लाभार्थी 3.29 लाख से घटकर 1.63 लाख रह गए। सीबीआई जांच की मांग ग्रेवाल ने सवाल उठाया कि स्कूल, शिक्षक, छात्र और सभी योजनाओं के लाभार्थी कम हो रहे हैं, फिर भी बजट कई गुना कैसे बढ़ गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी स्कूलों को बंद कर निजी स्कूलों को संरक्षण दे रही है और शिक्षा व्यवस्था शिक्षा माफिया के हाथों में जाती दिख रही है। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।

उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव, बच्चों को बैग से मिलेगी राहत—ये है पूरा प्लान

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार अब स्कूलों में बच्चों का बोझ कम करने और पढ़ाई को मजेदार बनाने पर जोर दे रही है. इसी पहल के तहत राज्य के सरकारी स्कूलों में 10 दिन बैगलेस क्लास लागू की गई है. इससे बच्चों को किताबों की जगह खेल, गतिविधियां और प्रैक्टिकल सीखने का मौका मिलेगा. उत्तर प्रदेश सरकार ने नई शिक्षा नीति के तहत चल रही “आनंदम योजना” के अनुसार एक बड़ा बदलाव किया है. अब सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को पूरे साल में 10 दिन स्कूल बैग लाने की जरूरत नहीं होगी. शनिवार को स्कूल में 6से 8 तक के बच्चों को खेल कूद,पिकनिक, भाषण,बाद विवाद जैसी प्रतियोगिता में शामिल कराया जाएगा. सरकार की आनंदम योजना के तहत बच्चों में Ground activity बढ़ाने के उद्देश्य से पूरे शैक्षणिक सत्र के लिए 10 days bagless को लागू किया गया इन दिनों को Bagless Days कहा जाएगा. इन बैगलेस दिनों में बच्चों को क्लासरूम में पढ़ाने के साथ-साथ बल्कि उन्हें विभिन्न तरह की मजेदार और सीख देने वाली गतिविधियों में शामिल किया जाएगा. इनका मकसद है कि बच्चे सिर्फ किताबों से ही नहीं, बल्कि अनुभव और खेल से भी सीखें. क्या-क्या होगा बैगलेस दिनों में? खेल-कूद भाषण प्रतियोगिता वाद-विवाद (डिबेट) पिकनिक कला, संगीत, डांस जैसी गतिविधियां ग्राउंड एक्टिविटी और टीम वर्क क्रिएटिव प्रोजेक्ट सरकार का उद्देश्य आनंदम योजना का मुख्य उद्देश्य है—बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें तनाव से मुक्त रखना. इसके साथ ही किसी भी काम को सीखने को मजेदार बनाना, ग्राउंड और आउटडोर गतिविधियां बढ़ाना है. सरकार चाहती है कि उनकी प्रतिभा को पहचानने का मौका मिले.इसके लिए पूरे शैक्षणिक वर्ष में 10 बैगलेस दिन अनिवार्य किए गए हैं.