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स्टूडेंट्स के लिए बड़ी खबर: कल से फिर शुरू होंगी कक्षाएं, जानें मंत्री का बयान

चंडीगढ़ पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने कहा कि राज्य में बाढ़ के कारण हाल में बंद किये गए स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय नौ सितंबर से फिर से खुल जाएंगे। मंत्री ने कहा कि यदि कोई स्कूल या कॉलेज बाढ़ से प्रभावित होता है, तो उसे बंद करने का निर्णय संबंधित उपायुक्त द्वारा लिया जाएगा। पंजाब सरकार ने राज्य में दशकों की सबसे भीषण बाढ़ के मद्देनजर हाल में सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों को सात सितंबर तक बंद करने का आदेश दिया था। रविवार को ‘एक्स' पर एक पोस्ट में, बैंस ने कहा कि राज्य के सभी सरकारी, निजी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल, कॉलेज एवं विश्वविद्यालय फिर से खुलेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘आठ सितंबर को राज्य के सभी सरकारी स्कूल छात्रों के लिए बंद रहेंगे। शिक्षक विद्यालयों में मौजूद रहेंगे और पंचायतों, नगर परिषदों और नगर निगमों के सहयोग से स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा।'' बैंस ने कहा, "शिक्षक स्कूल भवनों का गहन निरीक्षण करेंगे। यदि कोई समस्या पाई जाती है, तो इसकी सूचना तुरंत जिले के उपायुक्त और इंजीनियरिंग विभाग को दी जानी चाहिए।" उन्होंने कहा कि नौ सितंबर से सभी सरकारी स्कूल सामान्य रूप से फिर से खुलेंगे। बैंस ने कहा कि निजी विद्यालयों के प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा कि स्कूल भवन और कक्षाएं पूरी तरह सुरक्षित हों। हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद सतलुज, व्यास और रावी नदियों और मौसमी जलधाराओं में उफान के कारण पंजाब के बड़े हिस्से में बाढ़ आ गई है। इसके अलावा, हाल के दिनों में पंजाब में हुई भारी बारिश ने बाढ़ की स्थिति और विकराल कर दी है।

29 अगस्त को एमपी के प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों में बनेगी शाला प्रबंधन समितियां, दो साल का होगा कार्यकाल

भोपाल  मध्यप्रदेश के सभी शासकीय और अनुदान प्राप्त प्राथमिक, माध्यमिक और कक्षा 1 से 8 तक की संयुक्त शालाओं में 29 अगस्त को शाला प्रबंधन समितियों (एसएमसी) का गठन किया जाएगा। इसके लिए राज्य शिक्षा केंद्र ने सभी जिलों के कलेक्टरों को आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं। शाला प्रबंधन समितियां शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बनाई जाती हैं। इनका कार्यकाल दो साल का होता है। समितियों की जिम्मेदारी स्कूल में बच्चों के नामांकन, नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्कूल की सुविधाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास पर रहती है। हर समिति में 14 पालक प्रतिनिधि, प्रधान शिक्षक, वरिष्ठ महिला शिक्षिका और स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन बच्चों के पालकों में से होगा, जबकि प्रधान शिक्षक समिति के सदस्य सचिव रहेंगे। प्रदेश के करीब 83 हजार स्कूलों में एक ही दिन समितियों का गठन होगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के अभिभावकों से अपील की है कि वे 29 अगस्त को स्कूल पहुंचकर समितियों में सक्रिय रूप से जुड़ें और शालाओं के विकास कार्यों में सहयोग दें। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शासकीय एवं अनुदान प्राप्त स्कूलों में अध्ययनरत् विद्यार्थियों के पालकों एवं अभिभावकों से 29 अगस्त-2025 को स्कूल पहुंचकर, शाला प्रबंधन समिति से जुड़ने और शालाओं के विकास कार्यों में सहभागी बनने का आग्रह किया गया है। 

रायपुर के गाँव में शिक्षा सुधार की नई मिसाल, युक्तियुक्तकरण से बदलाव

रायपुर बिलासपुर जिला के कोटा ब्लॉक का छोटा सा ग्राम खरगा अब शिक्षा की नई रोशनी से जगमगा रहा है। इस गाँव के शासकीय प्राथमिक विद्यालय की छात्रा पूनम धृतलहरे की आंखों में अब आत्मविश्वास और उम्मीद दोनों चमकते हैं। मेहनती और होशियार पूनम शुरू से पढ़ाई में आगे रही है, लेकिन लंबे समय से यह विद्यालय एकल शिक्षकीय था, जिससे उसकी और उसके साथियों की शिक्षा प्रभावित हो रही थी। कठिन सवालों के उत्तर न मिल पाने से बच्चे धीरे-धीरे उत्साह खोने लगे थे और कुछ तो स्कूल छोड़ने की सोच भी रहे थे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए गए युक्तियुक्तकरण ने इस गाँव के बच्चों की जिंदगी में नई दिशा दी। विद्यालय में पहले से कार्यरत शिक्षक श्री संतोष कुमार खांडे के साथ अब श्री मुकेश कुमार यादव की नियुक्ति होने से कक्षाओं में नई ऊर्जा और बेहतर शिक्षण वातावरण आया। दो शिक्षकों की मौजूदगी ने न केवल पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारी, बल्कि बच्चों का स्कूल से जुड़ाव भी बढ़ाया। पूनम और उसके सहपाठियों का कहना है कि अब वे कठिन से कठिन प्रश्न हल करना सीख गए हैं और पढ़ाई में मजा आने लगा है। पालकों ने भी मुख्यमंत्री के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि अब उनके बच्चों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है, जिससे वे भी शहर के बच्चों की तरह बड़े सपने देख और पूरे कर सकेंगे। खरगा जैसे छोटे गाँवों में जब शिक्षक समय पर पहुँचते हैं, तो यह बदलाव केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे गाँव के भविष्य को दिशा देता है। आज पूनम और उसके साथी न सिर्फ मन लगाकर पढ़ रहे हैं, बल्कि आने वाले समय में अपने गाँव और राज्य का नाम रोशन करने के लिए तैयार हैं।

छात्राओं की शिकायतों पर लापरवाही, इंदौर कमिश्नर ने स्कूल प्रभारी को हटाया

खरगोन  जिले के धूलकोट सांदीपनि विद्यालय में छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार की शिकायतों की अनदेखी का भारी खामियाजा भुगतना पड़ा है। इंदौर के कमिश्नर दीपक सिंह ने सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने प्रभारी प्राचार्य सत्यनारायण मालवीय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल से मिली रिपोर्ट के आधार पर की गई है। दरअसल, अंशकालिक मजदूर पवन शर्मा पर स्कूल की छात्रों के साथ अनुचित हरकत करने के आरोप लगे थे। इस पर छात्राओं ने कई बार शिकायत की थी। लेकिन प्रभारी प्राचार्य सत्यनारायण मालवीय ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। इसके बाद जुलाई महीने में छात्र छात्राओं और उनके पेरेंट्स ने भगवानपुरा थाने का घेराव किया था। साथ ही भगवानपुर धूलकोट मार्ग पर 3 से 4 घंटे तक चक्का जाम कर दिया गया था। प्रदर्शन के बाद भी प्राचार्य की बेरुखी परिजनों के प्रदर्शन के बावजूद प्रभारी प्राचार्य मालवीय ने अपनी बेरूखी बनाए रखी और कोई कार्रवाई नहीं की थी। वहीं, छात्राओं की शिकायत पर कलेक्टर भव्या मित्तल ने एसडीएम खरगोन से जांच कराने के निर्देश दिए थे। जांच में प्रथम दृष्टिया मालवीय की गम्भीर लापरवाही सिद्ध हुई थी। इसके बाद इंदौर कमिश्नर ने प्रभारी प्राचार्य के एमपी सिविल सेवा नियम 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए है। सत्यनारायण मालवीय (मूल पद लेक्चरर, कृषि) का मुख्यालय अब कार्यालय, परियोजना प्रशासक, एकीकृत आदिम जाति विकास परियोजना खरगोन रखा गया है। उनके स्थान पर उच्च माध्यमिक शिक्षक विनोद सांवलिया को अस्थाई रूप से सांदीपनि विद्यालय धूलकोट का प्राचार्य का दायित्व दिया गया है।

भोपाल नर्मदापुरम संभाग के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक डॉ० मथुरा प्रसाद को नोटिस जारी

सीएम हेल्पलाइन के हंटर से हायर एजुकेशन के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक को नोटिस जारी छात्र को स्कॉलरशिप दिलाने में लापरवाही भारी पड़ी उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी को भोपाल नर्मदापुरम संभाग के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक डॉ० मथुरा प्रसाद को नोटिस जारी कारण बताओ नोटिस जारी कर दो वेतन वृद्धि रोकी विदिशा शासकीय महाविद्यालय, नटेरन जिला विदिशा में अध्ययनरत छात्र सुमित साहू को वर्ष 2021-22 एवं 2022-23 की पिछडा वर्ग संवर्ग की पोस्ट मेट्रिक छात्रवृत्ति समय-सीमा में नहीं प्रदान करायी गई। जिस कारण छात्र सुमित साहू द्वारा सी०एम० हेल्पलाईन में शिकायत दर्ज की गई। छात्र द्वारा प्रथम वर्ष की स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने के दिनांक 22.01.2021 से एक वर्ष से अधिक समय के बाद 11.03.2022 को महाविद्यालय द्वारा मंजूर की गई।  शिकायत का संतुष्टिपूर्ण समाधान किये जाने के पूर्व ही एल-2 अधिकारी डॉ० नीता पाण्डे, प्रभारी प्राचार्य, शासकीय अग्रणी महाविद्यालय, विदिशा द्वारा कराए जाने की अनुशंसा एल-3 स्तर अधिकारी डॉ० मथुरा प्रसाद क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा, भोपाल-नर्मदापुरम संभाग, भोपाल को की गई।  छात्रवृत्ति का भुगतान समय-सीमा में न होने के कारण छात्र सुमित साहू की शिकायत समाधान आनलाईन पर चर्चा के लिए चिन्हित हुई। इस मामले में नोटिस जारी कर सात दिन में मांगा जबाब जबाब नहीं देने पर एक पक्षीय होगी कार्यवाही  उच्च शिक्षा विभाग के अवर सचिव वीरन सिंह मलावी ने जारी किया नोटिस

स्कूल और कोचिंग संस्थानों पर ताला, प्रयागराज में 7 अगस्त तक बंदी

प्रयागराज जनपद के प्री प्राइमरी से लेकर कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों को सात अगस्त तक के लिए बंद कर दिया गया है। लगातार हो रही बारिश के साथ ही जनपद में बाढ़ की भयावह स्थिति को देखते हुए प्रयागराज के जिलाधिकारी ने यह निर्देश दिया है।  जिले में भारी वर्षा और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रयागराज में प्री प्राइमरी से कक्षा-12 तक संचालित समस्त बोर्ड (बेसिक शिक्षा परिषद, माध्यमिक शिक्षा परिषद, सीबीएसई, आईसीएसई, संस्कृत बोर्ड व अन्य बोर्ड) के सभी विद्यालय सात अगस्त तक के लिए बंद रहेंगे। समस्त विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। बीएसए देवब्रत सिंह ने भी आठवीं तक के सभी विद्यालय बंद रखने का आदेश जारी किया है। बीएसए ने साफ किया है कि परिषदीय शिक्षक वर्क फ्रॉम होम के तहत डीबीटी, यू-डायस प्लस एवं अन्य विभागीय कार्यों का संपादन करना सुनिश्चित करेंगे। साथ ही निर्देशित किया है कि जिन विद्यालयों में जिला प्रशासन ने बाढ़ चौकी व रैन बसेरा बनाया गया है उन विद्यालयों के प्रधानाध्यापक व संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी अपना सहयोग प्रदान करेंगे। वहीं दूसरी ओर सेंट जोसेफ कॉलेज, सेंट मेरीज कॉन्वेंट, गंगा गुरुकुलम फाफामऊ समेत कई स्कूलों ने सभी अभिभावकों को मैसेज किया है कि पांच से सात अगस्त तक ऑनलाइन कक्षाएं पूर्व निर्धारित समय सारिणी के अनुसार संचालित होंगी।  

शिक्षकों की नियुक्ति से खिल उठे छात्र, रायपुर में दूर हुई पढ़ाई की परेशानी

रायपुर कोरबा जिले में पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के ग्राम पचरा के हाई स्कूल में विद्यार्थियों की कोई कमी नहीं है। आसपास के एक दर्जन से अधिक गाँव के विद्यार्थी इस विद्यालय बहुत ही उम्मीद के साथ यह सोचकर दाखिला लेते हैं कि यहाँ से पढ़कर, पास होकर आगे की पढ़ाई जारी रखेंगे। पिछले कुछ सालों से उनके गाँव के सबसे नजदीक इस विद्यालय में नियमित शिक्षको की कमी थी। स्कूल में शिक्षकों की कमी उन्हें ही नहीं उनके माता-पिता को भी अक्सर चिंता में डालती थी। जिले में संचालित ऐसे विद्यालय जहाँ युक्ति युक्तकरण के पश्चात भी शिक्षको की कमी रह गई थीं उन विद्यालयों की सूची तैयार कर डीएमएफ से मानदेय के आधार पर शिक्षकों को नियुक्ति प्रदान की गई है। कोरबा जिला प्रशासन की इस पहल के बाद शासकीय हाई स्कूल पचरा में अब किसी विषय का कालखण्ड खाली नहीं जाता। दूरस्थ क्षेत्र से स्कूल आने वाले हर विद्यार्थियों को इस विद्यालय में शिक्षको से अध्यापन और विषय का ज्ञान मिलता है।    डीएमएफ से मानदेय के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। इसी क्रम में पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पचरा में संचालित हाई स्कूल में भी शिक्षको की कमी बनी हुई थी। कई विषयों के नियमित शिक्षक नहीं होने से यहाँ के विद्यार्थी उन विषयों की पढ़ाई अन्य शिक्षको के माध्यम से करते तो थे लेकिन उन्हें अक्सर महसूस होती थी कि काश सभी विषयों के लिए शिक्षक उपलब्ध हो। जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफ से की गई मानदेय शिक्षको की नियुक्ति से जहाँ विद्यार्थियों को शिक्षक मिल गए, वहीं गाँव के आसपास रहने वाले बेरोजगार युवाओं को रोजगार के साथ अध्यापन का अवसर भी मिल गया है। पचरा के हाई स्कूल में मानदेय शिक्षक के रुप में अध्यापन कराने वाली शिक्षिका अभिलाषा सिंह तंवर और लक्ष्मी कुमारी ने बताया कि मास्टर डिग्री लेने के बाद उन्होंने बीएड किया ताकि स्कूल में पढ़ाई करा सके। जिले में मानदेय शिक्षक की भर्ती होने पर उन्होंने अपना आवेदन किया था, अब नियुक्ति होने के बाद वह स्कूल में पढ़ाती है। उन्होंने बताया कि मानदेय शिक्षक के रूप में स्कूल में अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। मानदेय मिलने से घर का खर्च चलाने में सहूलियत होने लगी है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को भी खुशी होती है कि उनका कोई भी विषय खाली नहीं जाता। इस विद्यालय में कक्षा नवमीं में 48 और कक्षा 10वीं में 25 विद्यार्थी है। विद्यालय में गणित,अंग्रेजी और विज्ञान के शिक्षक है। मानदेय शिक्षिकाओं द्वारा हिंदी,सामाजिक विज्ञान और अन्य विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। विद्यालय में अध्ययन करने वाली छात्राओं विद्या, मानमती, सुहानी यादव ने बताया कि पहले विद्यालय में कम शिक्षक थे। अब नए शिक्षको के आने से सभी विषयों की पढ़ाई होती है। विद्यार्थियों ने बताया कि इस स्कूल में बहुत दूर-दूर के गाँव से लड़के-लड़कियां पढ़ाई करने आती है। सभी विषयों की पढ़ाई होने से हम लोग का मन भी स्कूल आने में होता है। गौरतलब है कि खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) से मानदेय के आधार पर 480 अतिथि शिक्षकों की भर्ती का निर्णय लिया गया है। इन अतिथि शिक्षकों में प्राथमिक शाला के 243, माध्यमिक ष्शाला के 109 और हाई तथा हायर सेकेण्डरी स्कूलों में व्याख्याताओं के 128 पदो पर भर्ती की जा रही है। खास बात यह है कि विगत शिक्षण सत्र में अतिथि शिक्षक के रूप में कार्य करने वाले शिक्षकों को इस सत्र की नियुक्ति में प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ अतिथि शिक्षकों को गत वर्ष दिये जाने वाले मानदेय में भी वृद्धि कर दी गई है। इस सत्र में प्राइमरी स्कूल के अतिथि शिक्षकों को 11 हजार, मिडिल स्कूल के अतिथि शिक्षकों को 13 हजार और हाई-हायर सेकेण्डरी के अतिथि व्याख्याताओं को 15 हजार रूपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। विगत वर्ष भृत्य को 8000, प्राइमरी स्कूल के अतिथि शिक्षकों को 10 हजार, मिडिल स्कूल के अतिथि शिक्षकों को 12 हजार और हाई-हायर सेकेण्डरी के अतिथि व्याख्याताओं को 14 हजार रूपये प्रतिमाह मानदेय दिया गया था।

निजी स्कूलों को झटका: हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, फीस रेगुलेशन एक्ट को बताया संविधानसम्मत

रायपुर  छत्तीसगढ़ में अब निजी स्कूल (Private Schools) मनचाही फीस नहीं वसूल सकेंगे। सरकार इसको लेकर नियम लागू कर सकती है। हाईकोर्ट (High Court) ने राज्य सरकार के “छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम 2020” (Chhattisgarh Non-Government School Fee Regulation Act, 2020) और उससे जुड़े नियमों को पूरी तरह संवैधानिक करार देते हुए, निजी स्कूल संघ की याचिका को खारिज कर दिया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) में आती है। राज्य सरकार को निजी स्कूलों की फीस तय करने का पूरा अधिकार है। याचिका में उठाए गए तर्क खारिज निजी स्कूलों ने अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 14 (Right to Equality) और 19(1)(g) (Right to Practice Profession) का उल्लंघन बताया था। लेकिन कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता एक संघ है, न कि व्यक्तिगत नागरिक। इसलिए वे इन अनुच्छेदों का हवाला नहीं दे सकते। हाईकोर्ट के इस महत्वपूर्ण फैसले से राज्य के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिल सकती है। इसके तहत फीस बढ़ाने के लिए जिला समिति की अनुमति आवश्यक होगी। अधिनियम की धारा 10 के तहत कोई भी स्कूल बिना जिला शुल्क निर्धारण समिति की अनुमति के फीस नहीं बढ़ा सकता। साथ ही प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की याचिका को खारिज कर दिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के अग्रवाल और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच में हुई। दरअसल, राज्य सरकार ने साल 2020 में छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम लागू करने का निर्णय लिया था। इसके लागू होने के बाद प्रदेश में संचालित निजी स्कूलों के एसोसिएशन ने साल 2021 में हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसमें कहा कि वे गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह अधिनियम उनकी स्वायत्तता (ऑटोनॉमी) में हस्तक्षेप करता है। फीस तय करने का अधिकार केवल प्रबंधन के पास होना चाहिए, इसमें सरकारी हस्तक्षेप अनुचित है। प्राइवेट स्कूलों ने बताया समानता के अधिकार का उल्लंघन याचिका में प्राइवेट स्कूल की तरफ से बताया गया कि अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता का अधिकार और 19(1)(g) व्यवसाय करने की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए अधिनियम को असंवैधानिक बताया। वहीं, राज्य सरकार ने तर्क दिया कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में आती है। अधिनियम का उद्देश्य पारदर्शिता और न्यायोचित शुल्क तय करना है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि निजी स्कूल भी इस नियम से मुक्त नहीं हो सकते। हाईकोर्ट ने कहा- संघ है याचिकाकर्ता, नागरिक नहीं हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा है कि याचिकाकर्ता संघ नागरिक नहीं हैं, ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देकर संवैधानिक अधिकारों का हवाला नहीं दिया जा सकता। फीस के लिए नियम तय करना राज्य सरकार का अधिकार है। अधिनियम का उद्देश्य केवल फीस में पारदर्शिता लाना है। कोई अधिनियम केवल इस आधार पर अवैध नहीं ठहराया जा सकता कि उससे किसी को असुविधा हो रही है। फैसले से छात्रों और अभिभावकों को मिलेगी राहत हाईकोर्ट के इस महत्वपूर्ण फैसले से राज्य के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिल सकती है। अब निजी स्कूलों को फीस तय करने में जवाबदेही और पारदर्शिता बरतनी होगी। इसमें अभिभावकों की भागीदारी और जिला स्तरीय समिति की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। साथ ही प्राइवेट स्कूलों के लिए राज्य शासन के निर्देशों के तहत ही फीस ली जा सकती है। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगेगा लगाम हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब राज्य शासन प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगा सकती है। इसके तहत शासन प्राइवेट स्कूलों की फीस बढ़ाने की सीमा तय भी कर सकेगी। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान भी अधिनियम में शामिल किया गया है। अधिनियम के तहत जिला और राज्य स्तर पर फीस निर्धारण समितियों का गठन अनिवार्य होगा। जिलों में कलेक्टर इसके अध्यक्ष होंगे, जबकि राज्य स्तर पर स्कूल शिक्षा मंत्री समिति के प्रमुख होंगे। ये समितियां निजी स्कूलों द्वारा ली जाने वाली फीस की नीति तय करेंगी। जानिए अधिनियम में क्या है प्रावधान अधिनियम की धारा 10 के अनुसार, कोई भी निजी स्कूल बिना समिति की अनुमति के फीस नहीं बढ़ा सकता। अगर फीस बढ़ानी हो, तो स्कूल प्रबंधन को कम से कम 6 महीने पहले प्रस्ताव देना होगा। समिति को 3 महीने में निर्णय लेना होगा। फीस वृद्धि की अधिकतम सीमा 8 फीसदी तय की गई है। वहीं, अभिभावक संघ भी फीस वृद्धि पर आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। समिति को ऐसी आपत्तियों पर सुनवाई करनी होगी। समितियों को सिविल कोर्ट जैसे अधिकार दिए गए हैं, जिससे वे स्कूल से रिकॉर्ड मांग सकते हैं और सुनवाई कर सकते हैं। शिकायत पर हो सकती है कार्रवाई अब स्कूलों को फीस रजिस्टर, वेतन, व्यय, उपस्थिति, भवन किराया से संबंधित दस प्रकार के रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग इसकी जांच कर सकता है। वहीं, अगर कोई स्कूल समिति की अनुमति से अधिक फीस वसूलता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

स्कूल मान्यता रद्द पर सरकार का आश्वासन – सभी बच्चों को दूसरे संस्थानों में मिलेगा प्रवेश

भोपाल  प्रदेश के 250 निजी स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी गई है। इन स्कूलों में अध्ययनरत करीब 25 हजार विद्यार्थियों को नजदीक के सरकारी स्कूलों में प्रवेश का विकल्प दिया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआइ) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को इस संबंध में व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कहा गया कि ऐसे विद्यार्थियों को एक सप्ताह के भीतर दूसरे स्कूल में प्रवेश दिलाया जाए। बच्चों की आगे की पढ़ाई पर संकट जिन स्कूलों की मान्यता समाप्त हुई है उनमें राजधानी भोपाल के ही करीब 12 स्कूल हैं। इनमें दर्ज बच्चों के एडमिशन अवैध हो गए हैं। अब बच्चों की आगे की पढ़ाई पर संकट है। इस कारण अब डीईओ की जिम्मेदारी होगी कि इन स्कूलों में दर्ज बच्चों को नजदीक के स्कूलों में प्रवेश दिलाएं। यह आदेश सत्र शुरू होने के चार माह बाद हुए। 250 स्कूलों की अपील खारिज बता दें, कि प्रदेश के 350 निजी स्कूलों की मान्यता संबंधी विवाद की अपील शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के पास पहुंची थी। उन्होंने 250 स्कूलों की अपील को खारिज कर दिया। ये स्कूल जमीन संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए थे। कुछ स्कूलों के पास जमीन नहीं थी तो कुछ के पास पर्याप्त जमीन और रजिस्ट्री के कागज नहीं थे। अपील में जाने वाले 50 स्कूलों की मान्यता का नवीनीकरण हुआ वहीं 50 स्कूलों का मामला अभी भी लंबित है। राजधानी के ये सालों पुराने स्कूल राजधानी के अंकुर हायर सेकेंडरी स्कूल, जवाहर चौक स्थित सेवन हिल्स, सर्वधर्म कोलार स्थित प्रीति हायर सेकेंडरी स्कूल, कोलार स्थित राजपुष्पा, पार्थ, ज्ञान कृष्णा समेत अन्य स्कूल शामिल है। इन स्कूलों में मान्यता समाप्त करने का कारण जमीन नहीं होना बताया गया है। इन स्कूलों में करीब दो ढाई हजार विद्यार्थी हैं। जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार का कहना है कि राजधानी के करीब 12 स्कूल हैं, जिनकी मान्यता समाप्त की गई है। इसमें कुछ बड़े स्कूल भी हैं, जिनके पास जमीन नहीं था और वे वर्षों से संचालित हो रहे थे। इन स्कूलों के करीब 2500 विद्यार्थियों को पास के सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाया जाएगा।

सरकारी स्कूल में बड़ा हादसा: छत गिरने से 4 बच्चों की मौत, प्रशासन पर सवाल

 झालावाड़  राजस्थान के झालावाड़ में स्कूली बच्चों के साथ बड़ा हादसा हुआ है. इलाके में एक स्कूल की छत गिरने की खबर हैं, जिसमें 4 छात्रों की मौत हो गई और कई बच्चों के दबे होने की आशंका है. हादसे के बाद 17 बच्चों के घायल होने की जानकारी सामने आई है. कई बच्चे गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं. झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र के पीपलोदी में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत अचानक गिर गई. क्लास में मौजूद छात्र इसके नीचे दब गए. जानकारी के मुताबिक, क्लास के अंदर करीब 60 बच्चे मौजूद थे, जिसमें से पच्चीस के दबे होने की आशंका है. स्कूल की छत गिरने से हुए हादसे के बाद इलाके के लोग मदद के लिए पहुंचे. मौके पर लोगों का मजमा इकट्ठा हो गया. मलबे में दबे बच्चों को लोग निकालने की कोशिश करने लगे. छत गिरने के बाद मलबे को देखकर ऐसा लग रहा है, जैसे स्कूल खंडहर में तब्दील हो गया हो. एजेंसी के मुताबिक, झालावाड़ के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि चार बच्चों की मौत हो गई और 17 अन्य घायल हो गए. दस बच्चों को झालावाड़ रेफर किया गया है, जिनमें से तीन से चार की हालत गंभीर है. पुलिस ने बताया कि शिक्षकों और ग्रामीणों की मदद से बच्चों को मलबे से बाहर निकाला गया. राजस्थान सरकार में शिक्षा मंत्री मदन दिवालर ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "झालावाड़ में स्कूल में दुखद घटना की सूचना मिली है. दुख है, बच्चों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. बच्चों का इलाज सरकारी खर्चे पर होगा. उच्च स्तरीय जांच होगी कि आखिर कैसे छत गिरी. शिक्षा मंत्री ने कहा, "कांग्रेस सरकार का किया हुआ पाप है. पिछले 5 सालों में कांग्रेस सरकार ने स्कूलों की देख-भाल नहीं की. कांग्रेस सरकार के दौरान स्कूल जर्जर हो गए थे, इनकी मरम्मत नहीं की. हम स्कूलों की चरणबद्ध तरीके से मरम्मत करवा रहे हैं और स्कूलों को पूरी तरह ठीक करेंगे." उन्होंने आगे कहा कि कोटा में भी कई स्कूल ऐसे हैं, जिनकी हालत पूरी तरह जर्जर है. हालत इतनी बुरी है कि छत का प्लास्टर टूट-टूट कर गिर रहा है और नीचे बच्चे पढ़ रहे हैं.  शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अब अस्वस्थ किया है कि राजस्थान के सभी स्कूलों का निर्माण करवाया जाएगा और पूरी तरह से ठीक करवाए जाएंगे. सीएम ने जताया दुख… राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "झालावाड़ के पीपलोदी में विद्यालय की छत गिरने से हुआ दर्दनाक हादसा अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक है. घायल बच्चों के समुचित उपचार सुनिश्चित करने हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है. ईश्वर दिवंगत दिव्य आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों को यह अपार दुःख सहन करने की शक्ति दें."