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दिल्ली में शिक्षण संस्थानों को दहलाने की साजिश? बम धमकी से मचा हड़कंप

नई दिल्ली दिल्ली के द्वारका इलाके में स्थित सेंट थॉमस स्कूल और दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफन कॉलेज को सुबह ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया. ईमेल मिलने के बाद स्कूल को एहतियात के तौर पर खाली करा लिया और सभी छात्रों को सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया गया है. सूचना मिलने के बाद दिल्ली पुलिस, बम निरोधक दस्ता और  डॉग स्क्वाड मौके पर पहुंच गई हैं. हालांकि, अभी पुलिस को स्कूल या कॉलेज में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है. दिल्ली फायर सर्विस (DFS) के अनुसार, धमकी भरा ईमेल मिलने के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस, बम निरोधक दस्ता (बम स्क्वाड), डॉग स्क्वाड, दिल्ली दमकल विभाग और विशेष स्टाफ की टीमें दोनों संस्थानों में पहुंचीं और तलाशी अभियान शुरू कर दिया. बम की धमकी की सूचना मिलते ही पुलिस और बम निरोधक स्क्वाड ने दोनों ही संस्थानों को तुरंत खाली कर लिया गया है. सेंट थॉमस स्कूल और सेंट स्टीफन्स कॉलेज के परिसरों में मौजूद छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया. दिल्ली पुलिस के बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वाड ने परिसरों की गहन तलाशी ली. अधिकारियों के अनुसार, अब तक स्कूल या कॉलेज परिसर में कोई संदिग्ध वस्तु या सामग्री नहीं मिली है. नेवी और CRPF स्कूल को भी मिला धमकी भरा मेल वहीं, सोमवार को भी दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित नेवी स्कूल और द्वारका के CRPF पब्लिक स्कूल को सुबह ईमेल के जरिए बम की धमकी मिली थी. हालांकि, जांच में पुलिस और बम स्क्वाड को कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला था. प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये कोई पहली बार नहीं है जब दिल्ली के स्कूलों को बम की धमकी मिली हो. इससे पहले भी कई बार दिल्ली के अन्यों स्कूलों को धमकी भरे ईमेल मिल चुके हैं. पिछले साल मई में दिल्ली-NCR के करीब 100 स्कूलों को इसी तरह के ईमेल मिले थे जो पुलिस जांच में फर्जी साबित हुए.

पाठ्यक्रम में होगा बड़ा बदलाव, छात्रों को सिखाई जाएगी अपने राज्य की विरासत और भूगोल

भोपाल  मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग के पाठ्यक्रमों में बदलाव किया जाएगा। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के पाठ्यक्रम पर फोकस होने की वजह से स्कूलों के विद्यार्थियों को प्रदेश के इतिहास, भूगोल, संस्कृति और सामाजिक-आर्थिक ढांचे की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाती। ऐसे में तय हुआ है कि पाठ्यक्रम का 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश के इतिहास, भौगोलिक-सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक परिवेश पर केंद्रित रहेगा। दरअसल, मध्य प्रदेश के स्कूलों में भाषा को छोड़कर अन्य सभी विषयों में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम चलता है। अब प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने विभाग के अधिकारियों को एनसीईआरटी के लिए पत्र लिखकर इस योजना के मुताबिक बदलाव करने की अनुमति मांगने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने यह निर्देश हाल में हुई नई शिक्षा नीति 2020 की टास्क फोर्स समिति की बैठक में दिए। मंत्री ने कहा कि प्रदेश की स्कूली शिक्षा में भी प्रदेश का इतिहास, धरोहर, सांस्कृतिक विरासत समेत अन्य स्थानीय पाठ्यक्रम शामिल होना चाहिए। एनसीईआरटी की पुस्तकों में 25 से 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम मध्य प्रदेश का होना चाहिए। एनसीईआरटी से अनुमति मिलने के बाद पाठ्यक्रम समिति स्थानीय स्तर का पाठ्यक्रम प्रदेश की स्कूली शिक्षा की किताबों में शामिल करेंगे। नए पाठ्यक्रम को राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद (एससीईआरटी) की ओर से तैयार किया जाएगा। एससीईआरटी एकल इकाई बनेगी राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को मजबूत किए जाने के लिए संचालक की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी। यह एकल इकाई के रूप में कार्य करेगी। इसके लिए एससीईआरटी को मजबूत करना होगा। अब बच्चे पढ़ेंगे अपने वीरों की कहानियां स्कूल एजुकेशन में नया अध्याय शुरू हो गया है. अब कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को महाराणा प्रताप, वीर दुर्गादास, शिवाजी और दयानंद सरस्वती जैसे महान व्यक्तियों की कहानियां पढ़ाई जाएंगी. इस नए सिलेबस का मकसद बच्चों में अपने राज्य के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति के प्रति गर्व और आत्मविश्वास पैदा करना है. राजस्थान सरकार ने नई पीढ़ी को अपनी ऐतिहासिक जड़ों से जोड़ने के लिए शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है. अब कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों को एक नया सिलेबस पढ़ाया जाएगा जिसमें राज्य के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और महापुरुषों के योगदान को प्रमुखता दी गई है. यह बदलाव 2025-26 के नए शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाएगा. आइए जानें School Syllabus Change के बारे में विस्तार से.

गुना में स्कूल भवन निर्माण पर तेजी, केंद्रीय मंत्री सिंधिया को कलेक्टर ने दी जानकारी

 गुना  गुना जिले के बमोरी विकासखंड के ग्राम सांगई स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय, मारकी महू में लंबे समय से टपरे के नीचे कक्षाएं संचालित हो रही थीं। जैसे ही इस विद्यालय की जर्जर हालत और बच्चों की दयनीय पढ़ाई व्यवस्था की जानकारी केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री तथा गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को मिली, उन्होंने इस गंभीर विषय पर तुरंत संज्ञान लिया और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। बताया गया कि केंद्रीय मंत्री सिंधिया उस समय बेंगलुरु प्रवास पर थे। लेकिन जैसे ही उन्हें विद्यालय की बदहाल स्थिति और बच्चों की कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई किए जाने की सूचना मिली, उन्होंने स्थान और समय की परवाह किए बिना गुना कलेक्टर को फोन कर विद्यालय भवन निर्माण कार्य को प्राथमिकता पर लेकर शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने केंद्रीय मंत्री सिंधिया को आश्वस्त किया कि विद्यालय भवन का निर्माण कार्य अगले एक-दो दिनों में प्रारंभ कर दिया जाएगा। प्रशासन ने स्थल का निरीक्षण कर जरूरी तैयारियाँ भी शुरू कर दी हैं। यह विद्यालय पिछले तीन वर्षों से अत्यंत जर्जर स्थिति में था। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकने और प्लास्टर झड़ने के कारण बच्चों को अस्थायी टपरे के नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती थी। टिन-तिरपाल से बने इस अस्थायी ढांचे में पढ़ाई का वातावरण न तो सुरक्षित था और न ही सम्मानजनक। केंद्रीय मंत्री सिंधिया की इस त्वरित पहल ने न केवल प्रशासनिक कार्यशैली को सक्रिय किया, बल्कि यह भी साबित किया कि वे अपने संसदीय क्षेत्र की समस्याओं को लेकर हमेशा सजग और संवेदनशील रहते हैं।  

छात्राओं के साथ अमानवीय व्यवहार, पीरियड चेक के नाम पर प्रिंसिपल पर गंभीर आरोप

प्रिसिंपल ने पीरियड चेक करने के लिए नाबालिग छात्राओं के उतरवाए कपड़े, स्कूल में बवाल  स्कूल में शर्मनाक हरकत: पीरियड चेक करने के नाम पर छात्राओं से कपड़े उतरवाए, प्रिंसिपल पर आरोप नाबालिग छात्राओं के कपड़े उतरवाने का आरोप, स्कूल में पीरियड जांच को लेकर मचा बवाल छात्राओं के साथ अमानवीय व्यवहार, पीरियड चेक के नाम पर प्रिंसिपल पर गंभीर आरोप मुंबई  महाराष्ट्र के एक स्कूल से हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां कक्षा 5 से 10 तक की नाबालिग लड़कियों को कथित तौर पर कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया गया. शिक्षिकाओं ने छात्राओं की जांच की कि कहीं वे मासिक धर्म से तो नहीं गुज़र रही हैं. स्कूल में हुई छात्रों के साथ इस घटना के बाद अभिभावकों में गुस्सा है. स्कूल के खिलाफ शिकायत भी दर्ज करा दी गई है. यह घटना मंगलवार को हुई जब प्रिंसिपल ने कई छात्राओं, जिनमें ज़्यादातर कक्षा 5 से 10 की छात्राएं थीं. छात्राओं को स्कूल हॉल में बुलाया और उन्हें बाथरूम के फर्श पर मिले खून के धब्बों की तस्वीरें दिखाईं, बताया जा रहा है कि ये तस्वीरें हाउसकीपिंग स्टाफ़ ने ली थीं. महाराष्ट्र पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "इस मामले में स्कूल के प्रिंसिपल और एक चपरासी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य के खिलाफ मामला चल रहा है." इसके बाद प्रिंसिपल ने छात्राओं को दो समूहों में बांटने का आदेश दिया. एक वे जो मासिक धर्म से गुज़र रही थीं और दूसरी वे जो नहीं थीं. एक महिला चपरासी को 10 से 12 साल की कुछ लड़कियों की जांच करने के लिए कहा गया, जिन्होंने कहा कि उन्हें मासिक धर्म नहीं हो रहा है. जांच के दौरान चपरासी ने उनके अंतर्वस्त्रों को छुआ और एक लड़की को सैनिटरी नैपकिन इस्तेमाल करते हुए पाया, लेकिन वह उन लड़कियों के समूह में शामिल थी जिन्होंने कहा कि उन्हें मासिक धर्म नहीं हो रहा है. इसके बाद, प्रिंसिपल ने उसे अन्य छात्राओं और कर्मचारियों के सामने डांटकर अपमानित किया. पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज अपने बच्चों से घटना के बारे में जानने के बाद, गुस्साए अभिभावक स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के लिए जमा हो गए. बुधवार को उन्होंने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम के तहत स्कूल के प्रिंसिपल, एक चपरासी, दो शिक्षकों और दो ट्रस्टियों सहित छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. स्कूल के प्रिंसिपल और चपरासी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि पुलिस अन्य चार की जांच कर रही है.

नरसिंहपुर जिले में लगातार बारिश, जिला कलेक्टर ने सभी स्कूलों में 8 और 9 जुलाई की छुट्टी की घोषित

नरसिंहपुर  प्रदेश में बारिश जोर पकड़ चुकी है। जहां किसानों और पर्यटकों को राहत मिली है, तो वहीं जनजीवन अस्त-व्यस्त होने लगा है। कहीं रेलवे ट्रैक बह गया तो कहीं स्कूल के रास्ते जलमग्र हो गए। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के लिए प्रदेश में अति भारी बरसात का अलर्ट जारी किया। एमपी में साइक्लोनिक सर्कुलेशन बन रहा है जिससे कारण गरज चमक और तेज आंधी- तूफान के साथ जोरदार बारिश की संभावना है। आईएमडी ने 4 जुलाई को 7 और 5 जुलाई को 14 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। प्रदेश में लगातार हो रही बारिश से तबाही मची हुई है। हालांकि, प्रदेश के किसानों और यहां आने वाले पर्यटकों को राहत मिली है, तो वहीं जनजीवन अस्त-व्यस्त होने लगा है। कहीं रेलवे ट्रैक बह गया तो कहीं, स्कूल के रास्ते जलमग्न हो गए। बह गया रेलवे ट्रैक, भाजपा नेता की शिकायत मुरैना के कैलारस कस्बे से होकर जा रहे ग्वालियर श्योपुर ब्रॉडगेज रेलवे ट्रैक की मिट्टी पिछले दिनों तेज बारिश से बह गई, जिससे ट्रैक में दरारें आने लगीं। वहीं रेलवे ट्रैक का पानी आसपास बस्तियों में भर गया, जिससे स्थानीय लोगों को जलभराव की मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है। भाजपा नेता राजेंद शुक्ला ने झांसी रेल मंडल के डीआरएम से शिकायत की तो डिप्टी इंजीनियर अपनी टीम के साथ गुरुवार को कैलारस आए। उन्होंने निरीक्षण कर सुधार का आश्वासन दिया। बारिश के कारण अंगूरी नदी का जलस्तर बढ़ गया है, इस वजह से नरेटा गांव के स्कूल जाने वाले 70 बच्चों के स्कूल तक पहुंचने में बाधा उत्पन्न हो रही है। दतिया ब्लॉक के नरेटा गांव के 70 बच्चे भांडेर तहसील के तगा ग्राम के पीएमश्री स्कूल में पढ़ते है। दरअसल गांव और स्कूल के बीच नदी पर पुल या रपटा नहीं है, इस वजह से बच्चों को नदी पार करके स्कूल जाना पड़ता है। नदी पर पुल बनाने की मांग लंबे समय से हो रही है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नदी पर पुल बनाए जाने को लेकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल को पत्र लिखा है। नदी को पार कर कर स्कूल पहुंचने में बच्चों को मात्र एक किमी की दूरी तय करनी पड़ती है, जबकि दूसरे रास्ते से होकर जाने में बच्चों को सात से आठ किमी चलना पड़ता है। यह रास्ता हाईवे से होकर जाता है, जिससे बच्चों के अभिभावक परहेज करते हैं।

प्रदेश के सांदीपनि विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों का करियर मार्गदर्शन यूनिसेफ के सहयोग से दिया जायेगा

सांदीपनि विद्यालयों में यूनिसेफ के सहयोग से चलेगा कॅरियर मार्गदर्शन कार्यक्रम नोडल शिक्षक की मदद से सभी विद्यार्थियों के करियर डायरी और फोल्डर होंगे तैयार प्रदेश के सांदीपनि विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों का करियर मार्गदर्शन यूनिसेफ के सहयोग से दिया जायेगा भोपाल प्रदेश के सांदीपनि विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों का करियर मार्गदर्शन यूनिसेफ के सहयोग से दिया जायेगा। कॅरियर रिफ्रेशर प्रशिक्षण के द्वारा प्रत्येक विद्यालय के एक नोडल शिक्षक को संसाधनों को उपयोग करने के लिये सक्षम बनाया जा रहा है। नोडल शिक्षक के माध्यम से ही विद्यालय में कॅरियर मार्गदर्शन प्रदान करने वाली गतिविधियां संचालित की जायेंगी। कॅरियर मार्गदर्शन के संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त लोक शिक्षण कार्यालय ने प्रदेश के समस्त सांदीपनि विद्यालय के प्राचार्यों को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश जारी किये हैं। विद्यालय स्तर पर गतिविधियों का संचालन नोडल शिक्षक एवं कक्षा शिक्षक की सहायता से सभी विद्यार्थियों से कॅरियर इनफॉर्मेशन डायरी और कॅरियर फोल्डर तैयार कराया जायेगा, जिसमें हर माह की कॅरियर संबंधी जानकारी संधारित कराई जायेगी। कॅरियर गतिविधियों का संचालन राज्य स्तर से जारी कॅरियर कैलेंडर के अनुसार विद्यालयों में नियमित रूप से संचालित कराया जायेगा। निर्देश में यह भी कहा गया है कि विद्यालय समय सारणी में विद्यार्थियों के कॅरियर मार्गदर्शन के लिये कम से कम 2 पीरियड प्रति माह आवंटित किये जायें। विद्यालय में नामांकित विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार कॅरियर नोडल शिक्षक एवं सहयोगी शिक्षकों के माध्यम से कॅरियर मार्गदर्शन सत्रों की योजना बनाकर सुव्यवस्थित संचालन करवाया जाये। कॅरियर गाइडेंस में प्रशिक्षित नोडल शिक्षक के माध्यम से विद्यालय के कक्षा 9 से 12 तक अध्यापन कराने वाले अन्य 2 शिक्षकों को भी शाला स्तर पर प्रशिक्षित करके उनका सहयोग लिया जाये। प्रार्थना सभा में मिलेगी विस्तृत जानकारी विद्यालय में प्रार्थना सभा में कॅरियर गाइडेंस के तहत किसी एक डोमेन से संबंधित एक या दो कॅरियर कार्ड की संक्षिप्त जानकारी सप्ताह में किन्हीं 3 दिनों में साझा की जा सकती है। इस प्रक्रिया से विद्यार्थी कॅरियर के प्रति रूचि लेकर स्वयं कार्ड पढ़कर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकेगा। निर्देश में कहा गया है कि प्रत्येक सांदीपनि विद्यालय में एक कॅरियर कार्नर बनाया जाये जिसमें कॅरियर संबंधी सामग्री, कॅरियर कार्ड, पोस्टर, ब्रोशर और विद्यार्थी द्वारा बनाई गई सामग्री प्रदर्शित की जाये। कॅरियर मेला का आयोजन सांदीपनि विद्यालय के प्राचार्यों से इस शैक्षणिक सत्र में जनवरी माह में कॅरियर मेला आयोजन की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने के लिये कहा गया है। विद्यालय स्तर पर मॉनिटरिंग के लिये प्राचार्यों से कहा गया है कि कॅरियर मार्गदर्शन से संबंधित विमर्श पोर्टल की मॉनिटरिंग फार्म को नोडल शिक्षक की सहायता से भरवाया जाये। प्राचार्य द्वारा कम से कम 2 कॅरियर मार्गदर्शन कक्षाओं का अवलोकन करके संबंधित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को उचित मार्गदर्शन दिया जाये। राज्य स्तर की गतिविधियां राज्य स्तर कॅरियर मार्गदर्शन के लिये आवश्यक संसाधन जिनमें 501 करियर कार्डस् हिन्दी एवं अंग्रेजी में, पोस्टर, ब्रोशर और 7 एजुकेशनल वीडियो को विमर्श पोर्टल पर अपलोड कराया जा रहा है। प्रत्येक माह में नोडल शिक्षकों के साथ एक घंटे की ऑनलाइन समीक्षा की जायेगी। इस वर्ष अक्टूबर एवं दिसंबर में कॅरियर  संबंधित विषयों पर वेबिनार के आयोजन का भी किया जाना प्रस्तावित है।  

पालक, विद्यार्थी और शिक्षक शिक्षा व्यवस्था में आए सुधार से प्रसन्न

रायपुर : युक्तियुक्तकरण से संबलपुर स्कूल में शिक्षकों की बहाली, पढ़ाई को मिली रफ्तार राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभा रही  पालक, विद्यार्थी और शिक्षक शिक्षा व्यवस्था में आए सुधार से प्रसन्न रायपुर प्रदेशभर में शालाओं में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभा रही है। इसी क्रम में बालोद जिले के डौंडीलोहारा विकासखंड स्थित पीएमशासकीय प्राथमिक शाला संबलपुर में शिक्षकों की वर्षों पुरानी कमी अब दूर हो गई है। शिक्षकों की पदस्थापना से अब विद्यालय में अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था न केवल व्यवस्थित हुई है, बल्कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी प्राप्त हो रही है। युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के अंतर्गत यहां दो नए शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जिससे विद्यालय में अब कुल पांच शिक्षक कार्यरत हैं। विद्यालय में शिक्षकों की इस बहुप्रतीक्षित नियुक्ति को लेकर शाला विकास समिति, पालकगण और ग्रामीणों ने प्रसन्नता जाहिर की है। साहित्यकार एवं शिक्षाविद बिरेन्द्र निरोटी तथा शाला विकास समिति के अध्यक्ष गंगाराम निषाद ने राज्य शासन की इस पहल की सराहना करते हुए बताया कि विद्यालय में 150 से अधिक विद्यार्थी पंजीकृत हैं, किंतु पूर्व में केवल तीन शिक्षक कार्यरत थे। अब दो अतिरिक्त शिक्षकों की पदस्थापना से कक्षाएं नियमित और विषयवार संचालित हो रही हैं। विकासखंड शिक्षा अधिकारी हिमांशु मिश्रा ने जानकारी दी कि युक्तियुक्तकरण के तहत विद्यालय में श्रीमती बसंती टिकेश्वर और राबिन नागवंशी की नियुक्ति की गई है। वर्तमान में विद्यालय में प्रधानपाठक श्रीमती वीणा ठाकुर, अनिल दिल्लीवार और श्रीमती सुनीता सहित कुल पाँच शिक्षक शिक्षण कार्य कर रहे हैं। विद्यालय में शिक्षकों की संख्या बढ़ने से विद्यार्थियों में पढ़ाई को लेकर उत्साह बढ़ा है। पालकों ने बताया कि अब बच्चे घर आकर स्कूल की गतिविधियों के बारे में खुशी से चर्चा करते हैं। शासन की इस पहल से न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार हुआ है, बल्कि स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति (ड्रॉपआउट) पर भी अंकुश लगने की उम्मीद है। ग्रामीणों ने इस सकारात्मक पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और शिक्षा विभाग के प्रति आभार जताया है और विश्वास व्यक्त किया है कि ऐसी योजनाएं शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएंगी।

दो शिक्षकों की पदस्थापना से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, बच्चों व पालकों में दिखा उत्साह

रायपुर : युक्तियुक्तकरण से बदली तस्वीर : पतरापारा महलोई प्राथमिक शाला में पढ़ाई को मिली रफ्तार राज्य शासन द्वारा प्रारंभ की गई युक्तियुक्तकरण नीति का प्रभाव अब गांव-गांव में नजर आने लगा दो शिक्षकों की पदस्थापना से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, बच्चों व पालकों में दिखा उत्साह रायपुर राज्य शासन द्वारा प्रारंभ की गई युक्तियुक्तकरण नीति का प्रभाव अब गांव-गांव में नजर आने लगा है। रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम पतरापारा महलोई स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में शिक्षकों की नई पदस्थापना से शैक्षणिक वातावरण में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। पहले यह स्कूल एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहा था, लेकिन अब दो शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति के बाद पढ़ाई में नई ऊर्जा और दिशा आई है। विद्यालय में वर्तमान में कक्षा 1 से 5 तक कुल 78 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। पूर्व में एक ही शिक्षक के भरोसे सभी कक्षाओं का संचालन किया जा रहा था, जिससे न केवल शिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी, बल्कि विद्यार्थियों को विषय आधारित शिक्षा भी सीमित रूप से मिल पा रही थी। अब दो शिक्षकों की उपस्थिति से समयबद्ध, व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित हुआ है। विद्यालय के परिवेश में आए इस सकारात्मक बदलाव से पालकों में भी उत्साह का माहौल है। अपने बच्चे को स्कूल छोड़ने आई श्रीमती प्रमिला परजा ने कहा कि अब उनके बच्चे घर लौटकर स्कूल की पढ़ाई और गतिविधियों के बारे में खुशी से बताते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में उन्हें इस बात की चिंता रहती थी कि एक शिक्षक इतने सारे बच्चों को कैसे सम्हालेंगे, लेकिन अब दो शिक्षकों की नियुक्ति से बच्चों को ध्यानपूर्वक पढ़ाया जा रहा है और वे पढ़ाई में भी अधिक रुचि लेने लगे हैं। राज्य शासन की इस पहल से न केवल बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिला है, बल्कि ड्रॉपआउट दर में भी गिरावट की उम्मीद जताई जा रही है। शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता से बच्चों की पढ़ाई अब नियमित और व्यवस्थित रूप से हो रही है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में सीधा सुधार देखा जा रहा है। युक्तियुक्तकरण योजना के तहत की गई यह पहल ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रही है। इससे बच्चों को न केवल उनके गांव में ही बेहतर शिक्षा मिल रही है, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव भी मजबूत हो रही है।  

युक्ति युक्तकरण से सुदूरवर्ती गाँव सांचरबहार के शिक्षकविहीन स्कूल को मिला शिक्षक

रायपुर  इस  गाँव में शिक्षा की मशाल जल चुकी है…स्कूल खोलकर यहाँ के विद्यार्थियों को शिक्षा से न सिर्फ जोड़ा जा चुका है..अब वर्षों से शिक्षकविहीन इस विद्यालय में नियमित शिक्षक की नियुक्ति से विद्यार्थियों के साथ गाँव के लोगों में खुशियों का वातावरण है। शिक्षकविहीन की श्रेणी में आने वाले इस विद्यालय में राज्य शासन के फैसलों के बाद अतिशेष शिक्षको के युक्ति युक्तकरण की अपनाई गई प्रक्रिया ने यहाँ ज्ञान की नई रोशनी और उम्मीदों का दीया जला दिया है।        कोरबा ब्लॉक के सुदूरवर्ती ग्राम सांचरबहार ग्राम पंचायत नकिया का आश्रित ग्राम है। इस विद्यालय में वर्षों से नियमित शिक्षक पदस्थ नहीं था। स्कूल खुलने के साथ ही गाँव के लोगों की आस थी कि उनके बच्चे भी सही ढंग से पढ़ाई कर पाएंगे, दुर्भाग्यवश उनकी आस अधूरी ही थी, क्योंकि नियमित शिक्षक नहीं होने का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता था। अब जब विद्यालय में नियमित शिक्षक की नियुक्ति हुई है, तो गांव में उत्सव जैसा माहौल है।      गाँव में रहने वाली वृद्धा मैसो बाई खुश है कि स्कूल को नियमित शिक्षक मिल गया है अब उनका नाती-नतिनी ठीक से पढ़ाई कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि रिया और आशीष विद्यालय जाते हैं। गाँव की महिला राजकुमारी बाई ने बताया कि उनका बेटा प्रमेन्द्र स्कूल जाता है। पहले आसपास के विद्यालयों से किसी शिक्षक को स्कूल भेजकर काम चलाया जाता था। अब नियमित शिक्षक आ जाने से हम सभी खुश है कि हमारे गाँव के स्कूल और बच्चों की नई पहचान बनेगी और उनकी पढ़ाई भी आसान होगी।       शासन की युक्ति युक्तकरण से इस विद्यालय में नियुक्त सहायक शिक्षक शेखरजीत टंडन ने बताया कि विद्यालय शहर से बहुत दूर है और अभी नई नियुक्ति के साथ ही लेमरू में ठहरने की व्यवस्था कर वहाँ से नियमित विद्यालय आते हैं। उन्होंने बताया कि बारिश में आवागमन थोड़ा चुनौती है, आने वाले समय में रास्ता पक्का हो जाने के साथ ही समस्या दूर हो जाएगी। उन्होंने बताया कि युक्ति युक्तकरण के काउंसिलिंग प्रक्रिया में उन्होंने इस विद्यालय का चयन किया है। विद्यालय में अभी 11 बच्चे दर्ज है और उन्हें खुशी है कि सुदूरवर्ती गाँव सांचरबहार के विद्यार्थियों का भविष्य गढ़ने का उन्हें अवसर मिला। उन्होंने बताया कि इससे पहले दूरस्थ क्षेत्र श्यांग के स्कूल में भी पदस्थ रहकर अध्यापन कर चुके हैं, अब सांचरबहार के शासकीय प्राथमिक शाला में नियुक्त है।

दमोह : सेंट जॉन्स सीनियर स्कूल अब अभिभावकों के 6 करोड़ 25 लाख रुपए लौटाने पड़ेंगे

 दमोह  दमोह स्थित सेंट जॉन्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल को बड़ा झटका लगा है। राज्य समिति ने सेंट जॉन्स स्कूल की अपील को खारिज कर दिया है। अपील खारिज होने के बाद अब विद्यार्थियों के अभिभावकों के 6 करोड़ 25 लाख से ज्यादा रुपए लौटाने पड़ेंगे। 2 लाख रुपए की शास्ति भी जमा करनी होगी। मध्य प्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) अधिनियम 2017 एवं नियम 2020 के अन्तर्गत गठित जिला समिति ने स्कूल प्रशासन को दोषी पाया है। जिला प्रशासन की गठित जिला समिति ने जांच में स्कूल प्रंबधन को दोषी पाया है। इन वर्षों की अधिक फीस करनी होगी वापस जांच में पाया गया है कि सरप्लस के बाद भी सेंट जॉन्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल द्वारा सत्र 2022-23 में 2,160 विद्यार्थियों से 1 करोड़ 95 लाख 28 हजार 600 रुपए, सत्र 2023-24 में 2,179 विद्यार्थियों से 2 करोड़ 7 लाख 16 हजार 340 रुपए व सत्र 2024-25 में 2,234 विद्यार्थियों से 2 करोड़ 23 लाख 41 हजार 350 इस प्रकार वसूली गई। कुल फीस 6 करोड़ 25 लाख 86 हजार 290 रुपए अधिक वसूली गई है। जिसे जिला समिति द्वारा 30 दिवस के भीतर विद्यार्थियों या अभिभावकों के खाते में फीस वापस किए जाने का आदेश जारी किया गया है।