samacharsecretary.com

क्या शशि थरूर होंगे केरल के अगले मुख्यमंत्री? सांसद ने दिया सीधा जवाब

केरल केरल विधानसभा चुनाव से पहले तिरुवनंतपुरम सांसद शशि थरूर की मुख्यमंत्री उम्मीदवारी को लेकर अटकलें तेज हो गईं हैं। हालांकि, उन्होंने इससे इनकार कर दिया है और कहा है कि वह विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि वह व्यक्तिगत रूप से चुनाव से पहले संभावित मुख्यमंत्री चेहरे का ऐलान करने के पक्षधर हैं। पीटीआई भाषा से बातचीत में थरूर ने कहा कि चूंकि वे इस बार उम्मीदवार नहीं हैं, इसलिए उन्हें किसी एक विशेष निर्वाचन क्षेत्र की चिंता करने की जरूरत नहीं है और राज्य के चुनावों में उनकी भूमिका एक मिक्स्ड बैग या मिली-जुली है। उन्होंने आगे कहा कि वे चुनाव प्रचार के लिए राज्य के 'चप्पे-चप्पे और हर कोने' में जाने के लिए उत्सुक हैं। अपनी सीएम उम्मीदवारी को लेकर उन्होंने कहा, 'नहीं, और बिल्कुल नहीं हूं, और इसके पीछे कई अच्छे कारण हैं, जिनमें से एक यह भी है कि मैं चुनाव में उम्मीदवार नहीं हूं। मेरा मानना है कि आदर्श रूप से मुख्यमंत्री का चयन चुने हुए विधायकों में से ही किया जाना चाहिए।' कितनी सीटों का है लक्ष्य थरूर ने कहा कि वह 85 से 100 सीटें यानी कांग्रेस की बहुमत आने पर खुश हो जाएंगे। केरल में खुल 140 विधानसभा सीटें हैं। उन्होंने कहा कि UDF या यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट खासतौर से लेफ्ट गठबंधन को गुगली डाल रहा है, क्योंकि 'वो मुश्किल पिच पर खेल रहे हैं और हम उन्हें वहां हरा सकते हैं।' थरूर से पूछा गया कि क्या चुनाव प्रचार में कोई निश्चित चेहरा न होने से कांग्रेस की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। इसपर उन्होंने कहा व्यक्तिगत रूप से मैं आपकी बात से सहमत हूं कि हम उस रास्ते (चेहरा घोषित करने) पर जा सकते थे, लेकिन जैसा कि पार्टी नेतृत्व ने मुझे बताया, कांग्रेस ने पहले कभी ऐसा नहीं किया है। उम्मीदवारों के नाम के ऐलान की तैयारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी डी सतीशन ने गुरुवार को कहा कि राज्य में आगामी चुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवारों के चयन से जुड़े सभी मुद्दे सुलझा लिए गए हैं। सतीशन ने नई दिल्ली में सुबह संवाददाताओं से कहा कि पार्टी जिन शेष 40 सीट पर चुनाव लड़ रही है, उनके लिए उम्मीदवारों के नाम की सूची दिन में घोषित कर दी जाएगी। कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार को 55 उम्मीदवारों की सूची जारी की थी। केरल चुनाव आयोग ने रविवार को घोषणा की कि नौ अप्रैल को असम, केरल और पुडुचेरी में एक ही चरण में मतदान होगा जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होगा। वहीं पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होगा। मतों की गिनती के लिए 4 मई की तारीख निर्धारित की गई है।  

वॉशिंगटन पोस्ट में बड़ी छंटनी, शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर भी हुए बेरोजगार

नई दिल्ली दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अखबारों में से एक 'वॉशिंगटन पोस्ट' ने अपने कर्मचारियों को एक बड़ा झटका दिया है. अखबार ने अपने कुल स्टाफ के लगभग एक-तिहाई (300 से अधिक कर्मचारियों) की छंटनी कर दी है.इस बड़ी छंटनी की चपेट में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और अखबार के वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय स्तंभकार ईशान थरूर भी आए हैं. उन्होंने अखबार में बिताए अपने वर्षों की सेवा और अचानक समाप्त हुए अपने कार्यकाल पर भावुक प्रतिक्रिया दी और इसे यह न्यूज़रूम और वैश्विक पत्रकारिता के लिए 'बेहद दुखद दिन' बताया. उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा,“आज अंतरराष्ट्रीय स्टाफ के अधिकांश साथियों और कई अन्य शानदार सहकर्मियों के साथ मुझे वॉशिंगटन पोस्ट से ले-ऑफ कर दिया गया है. हमारा न्यूज़रूम और खासकर वे बेहतरीन पत्रकार, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पोस्ट की सेवा की उनके लिए दिल से बहुत दुखी हूं.” एक अलग पोस्ट में उन्होंने खाली न्यूज़रूम की तस्वीर साझा करते हुए इसे बस “एक बुरा दिन” बताया. ईशान ने अख़बार में अपने काम को याद करते हुए कहा कि 2017 में ‘वर्ल्डव्यू’ कॉलम की शुरुआत करना उनके लिए सम्मान की बात थी जिसका मकसद पाठकों को वैश्विक मामलों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करना था. उन्होंने उन लगभग पांच लाख सब्सक्राइबर्स का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने वर्षों तक उनकी रिपोर्टिंग को पढ़ा और सराहा. वॉशिंगटन पोस्ट ने बड़ी संख्या में छंटनियों की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कदम व्यापक पुनर्गठन का हिस्सा है. अखबार ने अपने स्पोर्ट्स सेक्शन को पूरी तरह बंद कर दिया है. इसके साथ ही कई विदेशी ब्यूरो और बुक कवरेज सेक्शन पर भी ताला लग गया है. सबसे चौंकाने वाला फैसला मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) की पूरी रिपोर्टिंग टीम और संपादकों को हटाना रहा. पूर्व संपादकों ने की आलोचना अखबार के पूर्व कार्यकारी संपादक मार्टिन बैरन ने इस कदम को "खुद ब्रांड का खात्मा करना" करार दिया है. वहीं वर्तमान प्रबंधन का कहना है कि बदलती तकनीक और दर्शकों की आदतों के अनुसार खुद को ढालने के लिए यह "दर्दनाक लेकिन जरूरी" फैसला था. काहिरा ब्यूरो चीफ क्लेयर पार्कर और युद्ध क्षेत्र से रिपोर्टिंग करने वाली लिजी जॉनसन जैसी दिग्गज पत्रकारों को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. वहीं पत्रकारिता के शिक्षाविदों और पूर्व कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि ये कटौतियां दुनिया के सबसे प्रभावशाली न्यूजरूम्स में से एक को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकती हैं. काहिरा ब्यूरो प्रमुख क्लेयर पार्कर ने एक्स पर बताया कि उन्हें अख़बार की पूरी मिडिल ईस्ट रिपोर्टिंग टीम के साथ नौकरी से निकाल दिया गया है. उन्होंने इस फैसले को “समझ से परे” बताया. वहीं लिजी जॉनसन जिन्होंने हाल ही में युद्ध क्षेत्र जैसी परिस्थितियों में यूक्रेन से रिपोर्टिंग की थी ने भी पुष्टि की कि उन्हें भी नौकरी से हटा दिया गया है. पूरे पत्रकारिता जगत में इस फैसले को लेकर गुस्सा और हैरानी देखने को मिली. द अटलांटिक में लिखे एक लेख में वॉशिंगटन पोस्ट की पूर्व पत्रकार ऐश्ले पार्कर ने चेतावनी दी कि लगभग 150 वर्षों से अमेरिकी लोकतंत्र का स्तंभ रहे इस अखबार की मौजूदा दिशा उसकी विरासत को गंभीर खतरे में डाल रही है. एग्ज़ीक्यूटिव एडिटर मैट मरे ने इस फैसले को “दर्दनाक लेकिन ज़रूरी” बताया. उन्होंने स्टाफ से कहा कि बदलती तकनीक और दर्शकों की आदतों के अनुसार ढलने के लिए संगठन हर किसी के लिए सब कुछ नहीं बन सकता. कंपनी की बैठक के बाद कर्मचारियों को ईमेल के जरिए उनके भविष्य के बारे में बताया गया.   

भारत-US ट्रेड डील पर शशि थरूर का तंज: सफलता का जश्न बाद में, पहले देश को पूरी सच्चाई

नई दिल्ली मंगलवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते पर केंद्र सरकार से स्पष्टता की मांग की। थरूर ने कहा कि भले ही भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ (शुल्क) को 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसद करना सकारात्मक हो सकता है, लेकिन सरकार को इसके सभी पहलुओं और विवरणों को सार्वजनिक करना चाहिए। थरूर ने कहा कि वे इस डील को लेकर जश्न मनाना चाहेंगे लेकिन पहले सरकार बताए तो कि मसला क्या है? शशि थरूर की मुख्य आपत्तियां एएनआई से बात करते हुए थरूर ने सरकार की कार्यशैली और पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा- हमारे पास राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के ट्वीट हैं; क्या संसदीय लोकतंत्र में इतना ही काफी है? क्या भारत सरकार को देश की जनता को यह नहीं समझाना चाहिए कि इस सौदे में वास्तव में क्या है? उन्होंने विशेष रूप से कृषि क्षेत्र पर समझौते के प्रभाव को लेकर चिंता जताई। थरूर ने कहा कि यदि अमेरिका भारत को अपने कृषि उत्पादों का बड़ा बाजार बनाना चाहता है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि भारतीय किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर अमेरिका 500 अरब डॉलर के व्यापार की बात कर रहा है, जबकि भारत का कुल आयात बिल लगभग 700 अरब डॉलर है, तो क्या भारत को अन्य देशों से आयात कम करना पड़ेगा। थरूर ने कहा- विपक्ष सिर्फ इतना जानना चाहता है कि इस समझौते में है क्या। अगर यह अच्छी खबर है तो हम खुशी-खुशी इसका स्वागत करेंगे, लेकिन सरकार को देश को बताना चाहिए कि इसमें कौन-सी शर्तें शामिल हैं। कांग्रेस पार्टी के तीखे सवाल कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक विस्तृत पोस्ट शेयर कर सरकार से कई कड़े सवाल पूछे हैं- घोषणा का तरीका: कांग्रेस ने आपत्ति जताई कि युद्धविराम की तरह इस व्यापार समझौते की घोषणा भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा की गई। यह भी कहा गया कि यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी के अनुरोध पर हुआ है। 'जीरो' टैरिफ का डर: ट्रंप के दावे के अनुसार, भारत अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को 'शून्य' करने पर सहमत हो गया है। कांग्रेस का मानना है कि इससे भारतीय बाजार पूरी तरह अमेरिका के लिए खुल जाएगा, जिससे स्थानीय उद्योगों, व्यापारियों और किसानों को भारी नुकसान हो सकता है। रूसी तेल पर पाबंदी: सबसे बड़ा सवाल रूसी तेल को लेकर है। कांग्रेस ने पूछा है कि क्या मोदी सरकार ने ट्रंप के दावे के अनुसार रूस से मिलने वाले रियायती तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जता दी है? विपक्ष का मुख्य तर्क यह है कि किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते को केवल सोशल मीडिया घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार संसद और जनता के सामने इस सौदे का पूरा कच्चा चिट्ठा रखे ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भारतीय किसानों और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा कैसे की जा रही है।

संजू सैमसन फिर चूके, शशि थरूर बोले– बदकिस्मती पीछा नहीं छोड़ती; ईशान किशन की तारीफों के पुल बांधे

नई दिल्ली T20 वर्ल्ड कप से पहले भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 मैचों की सीरीज अपने नाम कर ली। आखिरी मैच में भारत ने न्यूजीलैंड को 46 रनों से शिकस्त दी। हालांकि, लोकल स्टार और विकेटकीपर संजू सैमसन एक बार फिर फ्लॉप रहे। उनकी पारी को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि सैमसन की किस्मत साथ नहीं दे रही है। सैमसन को लेकर थरूर ने कहा, 'ऐसा लगता है कि उनकी किस्मत ही खराब है। लेकिन बाकी हमारे लिए, इस मैदान पर रिकॉर्ड स्कोर, पूरी सीरीज का रिकॉर्ड स्कोर, टी20आई (T20i) में बनाए गए सबसे ऊंचे स्कोर में से एक। इतने सारे छक्के, इतने सारे चौके, बहुत सारा एक्शन… इंडिया वर्ल्ड कप के लिए बहुत अच्छी स्थिति में दिख रही है और इसीलिए हर कोई उत्साहित है…।' इस दौरान उन्होंने भारतीय बल्लेबाज ईशान किशन की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, 'शानदार! वह खिलाड़ी वाकई टैलेंटेड हैं और आप जानते ही हैं कि यह फॉर्म का भी सवाल है। वह सचमुच फॉर्म में है, और जाहिर है, संजू फॉर्म में नहीं है… लेकिन यह एक जबरदस्त ट्रीट थी… हम टी20 वर्ल्ड कप के लिए अच्छी स्थिति में हैं…।' भारत बनाम न्यूजीलैंड किशन के पहले टी20 शतक और उनके साथ अर्शदीप सिंह ने पांच विकेट लेकर न्यूजीलैंड के खिलाफ शनिवार को पांचवें और आखिरी मैच में भारत को 46 रन से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। पंड्या ने आखिरी ओवरों में 17 गेंद में 42 रन बनाकर भारत को उसके टी20 इतिहास में चौथी बार 250 रन के पार पहुंचाया। न्यूजीलैंड की टीम जवाब में 19.4 ओवर में 225 रन पर आउट हो गई । भारत के लिये तेज गेंदबाज अर्शदीप ने 51 रन देकर पांच विकेट लिए। उन्होंने पहले दो ओवर में 40 रन दिए और टिम सीफर्ट का विकेट लिया लेकिन इसके बाद अगले दो ओवर में 11 रन देकर चार विकेट चटकाए। न्यूजीलैंड के लिये फिन एलेन ने 38 गेंद में 80 रन बनाये लेकिन लक्ष्य तक नहीं पहुंच सके। भारत का स्कोर पावरप्ले के बाद दो विकेट पर 54 रन था। इसके बाद सूर्यकुमार और ईशान ने मोर्चा संभाला। चोट के कारण चौथे टी20 से बाहर रहे ईशान ने मैदान के चारों ओर स्ट्रोक्स लगाए।  

राहुल और खरगे से मुलाकात के बाद थरूर की सफाई, बोले— ‘मेरे रुख को गलत समझा गया’

नई दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि कुछ मुद्दों पर उनके रुख को मीडिया द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थन के रूप में भले ही देखा जाए, लेकिन वह इसे केवल सरकार या भारत के समर्थन के रूप में देखते हैं। थरूर ने कहा कि उन्होंने पहले भी स्पष्ट किया है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय मामलों पर उन्हें राजनीति के बारे में बात करना पसंद नहीं है और इसके बजाय वह देश के बारे में बात करना पसंद करते हैं। थरूर ने बीते दिनों कांग्रेस लीडरशिप मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मुलाकात की थी, जिसके बाद उन्होंने कहा था कि सबकुछ ठीक है।   तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद थरूर ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘यह कोई नयी बात नहीं है, मैं हमेशा से यही कहता आया हूं।’’ पिछले साल भारत-पाकिस्तान संघर्ष और पहलगाम हमले के बाद की गई राजनयिक पहल पर उनकी टिप्पणियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। उनकी टिप्पणियां कांग्रेस के रुख से भिन्न थीं और पार्टी के कई नेताओं ने उनकी मंशा पर सवाल उठाते हुए उन पर निशाना साधा था। थरूर ने पत्रकारों से बातचीत में यह भी स्वीकार किया कि पार्टी के किसी सदस्य को पार्टी की विचारधारा के विरुद्ध नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मैं संसद में हमेशा पार्टी के साथ खड़ा रहा हूं, इसलिए चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।’’ जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वह स्पष्ट रूप से कह सकते हैं कि वह कांग्रेस पार्टी नहीं छोड़ेंगे, तो थरूर ने कहा, ‘‘मैं कह सकता हूं कि मैं कांग्रेस में ही रहूंगा और कहीं नहीं जा रहा हूं। मैं (केरल में) चुनाव प्रचार का हिस्सा रहूंगा और यूडीएफ की जीत के लिए काम करूंगा।’’ उन्होंने पूछा, ‘‘लेकिन, मुझे इस तरह के बयान देने के लिए क्यों कहा जा रहा है?’’ थरूर ने अपनी शिकायतों के निवारण के लिए बृहस्पतिवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मुलाकात की, जिसके बाद उन्होंने कहा कि ‘‘सब ठीक है’’ और ‘‘सब एक साथ हैं।’’ थरूर हाल ही में कोच्चि में एक कार्यक्रम में उनके साथ हुए व्यवहार और केरल में कुछ नेताओं द्वारा उन्हें ‘दरकिनार’ करने के प्रयासों से नाराज बताए जा रहे थे। यह मुलाकात केरल विधानसभा चुनावों से पहले हुई है, जो कांग्रेस के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। कांग्रेस पिछले 10 साल से राज्य में विपक्ष में है और इस बार वह जीत हासिल करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।  

थरूर बोले ‘Thank You Rahul’ — कांग्रेस में सब ठीक? मीटिंग के बाद बदले रिश्तों के संकेत

नई दिल्ली कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने उन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की हैं जिनमें उनकी पार्टी आलाकमान के साथ नाराजगी की बात कही जा रही थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने गुरुवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद थरूर ने कहा है कि पार्टी में सब कुछ ठीक है और वे एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। शशि थरूर ने राहुल गांधी और खरगे के प्रति आभार भी जताया है।   इससे पहले शशि थरूर, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की मुलाकात संसद भवन स्थित खरगे के कार्यालय में हुई। शशि थरूर ने इस मुलाकात को सार्थक और सकारात्मक करार दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में थरूर ने इस मुलाकात की एक तस्वीर शेयर की और लिखा, “आज कई विषयों पर गर्मजोशी भरी और रचनात्मक चर्चा के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी का धन्यवाद। हम सभी भारत के लोगों की सेवा में आगे बढ़ रहे हैं और इस मामले में हम साथ ही हैं।” आलाकमान से नाराजगी की खबरें इस बैठक के बाद शशि थरूर ने संवाददाताओं से यह भी कहा है कि सब कुछ ठीक है और वे सब एकसाथ आगे बढ़ रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी से इनकार करते हुए शशि थरूर ने कहा कि यह उनके लिए कभी मुद्दा नहीं रहा। इससे पहले कांग्रेस पार्टी की कई बैठकों में थरूर के गायब रहने के बाद इस तरह की चर्चाएं हैं कि वे कांग्रेस आलाकमान से नाराज हैं। इस बीच बीते दिनों रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया गया कि केरल के कोच्चि में हाल ही में एक कार्यक्रम में राहुल गांधी द्वारा 'नजरअंदाज' किए जाने के कारण शशि थरूर पार्टी नेतृत्व से नाराज थे। थरूर ने दी थी सफाई हालांकि इन खबरों पर थरूर से स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कहा है। उन्होंने हालिया बैठक में ना पहुंचने को लेकर कहा था कि दिल्ली में हुई कांग्रेस की उच्च स्तरीय बैठक में उनकी अनुपस्थिति महज समय ना मिल पाने की बात थी। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए थरूर ने यह भी कहा था कि उनका इरादा अपने विचारों के बारे में पार्टी नेतृत्व से सीधे बात करने का है और बुधवार से शुरू हो रहा संसद सत्र इन चर्चाओं के लिए बिल्कुल सही समय होगा। देर से मिला आमंत्रण? शशि थरूर के मुताबिक, इस बैठक का आमंत्रण इतनी देर से आया कि उनके पास अपने पूर्व के कार्यक्रम को बदलने का कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने बताया, "मुझे रणनीतिक बैठक में एक-दो दिन पहले ही आमंत्रित किया गया था। तक मैं दुबई से वापसी के लिए विमान का टिकट बुक करा चुका था।"  

शशि थरूर ने दी सफाई, कहा- ‘मैं पार्टी लाइन से कभी नहीं हटा’

नई दिल्ली  कांग्रेस में जारी अंतर्कलह के बीच पार्टी के सीनियर लीडर और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने अपनी चुप्‍पी तोड़ी है. उन्‍होंने आलोचकों को दो टूक जवाब देते हुए कहा कि उन्‍होंने कभी भी पार्टी लाइन का उल्‍लंघन नहीं किया. कांग्रेस सांसद ने ऑपरेशन सिंदूर पर ऐसी बात कही है, जिससे पार्टी लीडरशिप खासकर राहुल गांधी के लिए इसे पचा पाना मुश्किल होगा. ऑपरेशन सिंदूर पर शशि थरूर के रुख से पार्टी में कलह की धार और तेज हो सकती है. बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर राहुल गांधी काफी क्रिटिकल रहे हैं. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार 24 जनवरी 2026 को कहा कि उन्होंने संसद में कभी भी पार्टी लाइन का उल्लंघन नहीं किया है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनका रुख हमेशा देशहित को प्राथमिकता देने वाला रहा है. केरल साहित्य महोत्सव के दौरान कोझिकोड में एक संवाद सत्र में बोलते हुए थरूर ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक रूप से उन्होंने केवल ‘ऑपरेशन सिंधूर’ के मुद्दे पर सैद्धांतिक असहमति जताई थी और उस रुख को लेकर उन्‍हें कोई पछतावा नहीं है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में पार्टी नेतृत्व के साथ उनके कथित मतभेदों को लेकर अटकलें तेज हुई हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कोच्चि में हाल ही में हुए एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मंच पर मौजूद नेताओं के नाम लेने के क्रम में थरूर का नाम न लिए जाने से वे आहत हुए थे. इसके अलावा राज्य स्तर पर कुछ नेताओं द्वारा उन्हें लगातार हाशिए पर रखने की कोशिशों की बातें भी सामने आई हैं. जिम्‍मेदारी से अपनी राय रखी – थरूर इन अटकलों के बीच थरूर ने अपने पक्ष को विस्तार से रखते हुए कहा कि बतौर सांसद और लेखक उन्होंने हमेशा जिम्मेदारी के साथ अपनी राय रखी है. उन्होंने बताया कि पहलगाम की घटना के बाद उन्होंने एक अखबार में लेख लिखकर कहा था कि इस तरह की घटनाओं को बिना जवाब के नहीं छोड़ा जाना चाहिए और आतंकवादी ढांचों के खिलाफ सीमित तथा निर्णायक कार्रवाई जरूरी है. थरूर ने कहा कि उनका मानना था कि भारत विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है और उसे पाकिस्तान के साथ किसी लंबे सैन्य संघर्ष में उलझना नहीं चाहिए, लेकिन आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने जैसी सीमित कार्रवाई उचित होगी. अगर भारत नहीं रहेगा तो कौन बचेगा? थरूर ने यह भी कहा कि उन्हें आश्चर्य हुआ जब केंद्र सरकार ने लगभग वही कदम उठाए जिनकी उन्होंने सिफारिश की थी. उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से सही दिशा में उठाया गया कदम बताया. थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय हितों से जुड़े मामलों में राजनीति को पीछे छोड़ देना चाहिए. उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के प्रसिद्ध कथन का हवाला देते हुए कहा, ‘अगर भारत नहीं रहेगा तो कौन बचेगा?’ उनका कहना था कि जब देश की सुरक्षा और विश्व में उसकी स्थिति का सवाल हो, तो भारत सबसे पहले आता है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं और ये एक बेहतर भारत के निर्माण की प्रक्रिया में सहायक होते हैं. लेकिन जब बात राष्ट्रीय हितों की हो, तब पार्टी से ऊपर देश को रखा जाना चाहिए. थरूर ने स्पष्ट किया कि संसद में उन्होंने कभी पार्टी के आधिकारिक रुख से हटकर बयान नहीं दिया और उनकी सार्वजनिक टिप्पणियां भी जिम्मेदार और संतुलित रही हैं. क्‍यों अहम थरूर का बयान? कांग्रेस के भीतर उनके कथित मतभेदों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच थरूर का यह बयान पार्टी नेतृत्व के लिए भी एक संदेश माना जा रहा है कि वे संगठन के भीतर रहते हुए भी स्वतंत्र विचार रखने से पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन देशहित से जुड़े मुद्दों पर उनकी प्राथमिकता हमेशा राष्ट्रीय हित ही रहेगी. यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी आंतरिक एकजुटता और रणनीतिक दिशा को लेकर कई चुनौतियों का सामना कर रही है, और थरूर का रुख कांग्रेस के भीतर विचार-विमर्श और बहस की संस्कृति को रेखांकित करता है.

शशि थरूर ने कांग्रेस बैठक से बनाई दूरी, खुली बड़ी वजह

केरल केरल विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के भीतर मतभेद नजर आए। पार्टी हाईकमान द्वारा बुलाई गई अहम बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर केरल विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को होने वाली पार्टी की एक रणनीतिक बैठक में शामिल नहीं होंगे क्योंकि वह इस बात से 'आहत' हैं कि राहुल गांधी ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर उनके मौजूद होने के बावजूद उनके नाम का उल्लेख नहीं किया और राज्य के नेताओं द्वारा बार-बार उन्हें 'दरकिनार' करने की कोशिश की जा रही है। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। खरगे शुक्रवार को केरल के वरिष्ठ नेताओं के साथ विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर बैठक करेंगे। आगामी मार्च-अप्रैल महीने में विधानसभा चुनाव संभावित हैं। उन्होंने कहा कि थरूर को अपने साथ किए गए व्यवहार से निराशा हुई, लेकिन अहम बात यह थी कि राहुल गांधी ने 19 जनवरी को कोच्चि में स्थानीय निकाय के चुनाव में जीतने वालों को सम्मानित करने के लिए आयोजित 'महापंचायत' में उनका उल्लेख नहीं किया।   सूत्रों ने कहा कि राहुल गांधी ने मंच पर अन्य वरिष्ठ नेताओं का उल्लेख किया और उनके नाम भी लिए, लेकिन चार बार के सांसद और कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य थरूर का उल्लेख नहीं किया, जबकि वह मंच पर मौजूद थे। हालांकि थरूर के कार्यालय ने कहा कि उन्होंने कोझिकोड में केरल साहित्य महोत्सव में अपनी पूर्व प्रतिबद्धताओं के कारण बैठक में शामिल होने में असमर्थता के बारे में पार्टी को सूचित कर दिया है। हालांकि, उनके करीबी सूत्रों के अनुसार, वह पार्टी द्वारा उनके साथ किए गए व्यवहार से बहुत आहत हैं, जबकि थरूर ने खासकर आगामी राज्य विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार करने के मकसद से केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित शिविर के मौके पर मतभेद दूर करने का प्रयास किया था।   उस कार्यक्रम के बाद थरूर ने कहा था कि वह कभी भी पार्टी के रुख से अलग नहीं हटे हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। केरल कांग्रेस नेताओं द्वारा वायनाड में आयोजित उस शिविर से आगामी विधानसभा चुनावों में वाम लोकतांत्रिक मंच (LDF) का मुकाबला करने के लिए एकजुट आह्वान किया गया था। उसमें कथित तौर पर यह सहमति बनी कि थरूर विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे बल्कि पूरे राज्य में चुनाव प्रचार करेंगे। हालांकि, कुछ दिनों बाद राज्य इकाई के भीतर मतभेद फिर से उभर आए हैं और थरूर हाल ही में कोच्चि में अपने साथ किए गए व्यवहार से खुश नहीं हैं।   थरूर ने पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और केरल प्रभारी दीपा दास मुंशी सहित पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों को भी संदेश भेजा है जिसमें उनके साथ हुए ‘गलत व्यवहार' की ओर इशारा किया गया है। थरूर के बयानों और लेखों की हाल के दिनों में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कांग्रेस नेताओं ने तीखी आलोचना की थी। पिछले साल भारत-पाकिस्तान संघर्ष और पहलगाम हमले के बाद राजनयिक संपर्क के प्रयासों को लेकर उनकी टिप्पणियों पर विवाद खड़ा हो गया था। उनकी टिप्पणियां कांग्रेस के रुख से भिन्न थीं और पार्टी के कई नेताओं ने उनके इरादों पर सवाल उठाते हुए उन पर कटाक्ष किया था। हालांकि, थरूर ने कहा है कि विदेश नीति पर रुख में कोई भिन्नता नहीं है।  

‘नेहरू के कुछ फैसलों के कारण चीन से हारे’, शशि थरूर ने पूर्व पीएम को लेकर किया बड़ा बयान

नई दिल्ली देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को लेकर तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बड़ा बयान दिया है. शशि थरूर ने गुरुवार को कहा कि वह भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भारतीय लोकतंत्र का संस्थापक मानते हैं, मगर उनकी तारीफ आलोचना से खाली नहीं है. शशि थरूर ने माना कि नेहरू के कुछ फैसलों के कारण 1962 में भारत को चीन से हार मिली, मगर हर चीज के लिए नेहरू को दोषी ठहराना ठीक नहीं. शशि थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि नेहरू की गलतियों को मानना ​​जरूरी है, लेकिन भारत की सभी समस्याओं के लिए उन्हें दोष देना गलत है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, ‘मैं जवाहरलाल नेहरू का प्रशंसक हूं, लेकिन आंख बंद करके समर्थन नहीं करता. मैं उनकी सोच और दृष्टिकोण की बहुत सराहना करता हूं और उनके प्रति गहरा सम्मान रखता हूं. हालांकि मैं उनकी सभी नीतियों और विचारों से सौ फीसदी सहमत नहीं हूं. उन्होंने जो कई काम किए, वे सबसे ज्यादा सराहना के योग्य हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नेहरू ने भारत में लोकतंत्र को मजबूती से स्थापित किया… मैं यह नहीं कहूंगा कि मोदी सरकार लोकतंत्र विरोधी है, लेकिन वे निश्चित रूप से नेहरू विरोधी हैं. नेहरू को एक सॉफ्ट टारगेट यानी आसान निशाना बना दिया गया है.’ नेहरू के फैसलों की आलोचना साल 1962 के भारत-चीन युद्ध को याद करते हुए शशि थरूर ने कहा कि मौजूदा सरकार की पंडित नेहरू पर की जा रही आलोचना का कुछ आधार हो सकता है. उन्होंने कहा, ‘उदाहरण के लिए 1962 में चीन के खिलाफ मिली हार को कुछ हद तक नेहरू के फैसलों से जोड़ा जा सकता है. लेकिन अब जो हो रहा है, वह यह है कि नेहरू को हर बात के लिए दोषी ठहराया जाता है, चाहे मुद्दा कुछ भी हो.’ उन्होंने कहा, 'सबसे जरूरी यह है कि नेहरू ही थे, जिन्होंने भारत में लोकतंत्र स्थापित किया…। मैं ये नहीं कहूंगा कि वो (मोदी सरकार) लोकतंत्र के विरोधी हैं, लेकिन वो नेहरू विरोधी जरूर हैं। नेहरू को आसान बली का बकरा बना दिया गया है।' उन्होंने कहा, 'कुछ मामलों में उनका (मोदी सरकार की) आलोचना का आधार हो सकता है। उदाहरण के लिए, 1962 में चीन के खिलाफ हार का कुछ श्रेय नेहरू के कुछ फैसलों को दिया जा सकता है।' पार्टी लाइन पर दी थी सफाई थरूर ने सोमवार को कहा कि वह कभी भी पार्टी लाइन से अलग नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा, 'मेरा सवाल यह है कि किसने कहा कि मैंने पार्टी की विचारधारा का उल्लंघन किया है? मैंने विभिन्न विषयों पर अपनी राय व्यक्त की है, लेकिन अधिकतर मामलों में पार्टी और मैं एक ही रुख पर कायम रहे हैं।' थरूर ने कहा कि उन्होंने संसद में मंत्रियों के सामने जो सवाल उठाए थे, उनकी एक स्पष्ट दिशा थी और पार्टी को उनसे परेशान नहीं होना चाहिए। यादों की गलियों में सफर अपनी यादों को ताजा करते हुए शशि थरूर ने बताया कि उन्हें पढ़ने का शौक बचपन में ही लग गया था, जब न टीवी था और न ही मोबाइल फोन. कांग्रेस सांसद ने याद किया कि उन्होंने पहली बार बहुत कम उम्र में ही उपन्यास लिखा था, लेकिन बाद में वह स्याही गिरने की वजह से खो गया. शशि थरूर ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में पढ़ने की आदतें कम हो रही हैं, लेकिन केरल में पढ़ने की संस्कृति अब भी आगे है. कांग्रेस नेता ने दिल्ली के प्रसिद्ध सेंट स्टीफन कॉलेज के अपने कॉलेज के दिनों को भी याद किया, जहां उन्होंने एक बार मंच पर एंटनी का किरदार निभाया था और फिल्म निर्माता मीरा नायर ने क्लियोपेट्रा की भूमिका निभाई थी.

अमेरिका के वेनेजुएला हमले पर भड़के शशि थरूर, बोले— अब दुनिया में ‘जंगलराज’ चल रहा है

नई दिल्ली अमेरिका ने देर रात वेनेजुएला की राजधानी काराकास पर हमला करके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अपने कब्जे में ले लिया। अब दोनों पर अमेरिका में ही मुकदमा चलाने की तैयारी है। इसके साथ ही, डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि फिलहाल वेनेजुएला को अमेरिका ही चलाएगा। वेनेजुएला मामले को लेकर दुनियाभर के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं शशि थरूर, अभिषेक मनु सिंघवी आदि ने भी रिएक्शन दिया है।   लोकसभा सांसद शशि थरूर ने कहा कि कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर को नजरअंदाज किया जा रहा है, और अब जंगल का कानून चल रहा है। एक्स पर एक पोस्ट में थरूर ने लिखा, "अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएन चार्टर को कुछ सालों से तोड़ा जा रहा है। आज जंगल का कानून चल रहा है। 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' ही नया नियम है।" वहीं, कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने भी अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की है। उन्होंने एक्स पर लिखा, "क्रूज मिसाइल से सत्ता परिवर्तन, युद्धपोत से लोकतंत्र और खुद बनाए गए सिद्धांत के तहत संप्रभुता को फिर से लिखना? यह लीडरशिप नहीं है, यह 21वीं सदी की भाषा में 19वीं सदी का साम्राज्यवाद है। अगर अंतर्राष्ट्रीय कानून सिर्फ कमजोरों के लिए मायने रखता है, तो यूएन को बंद हो जाना चाहिए। दुनिया नियमों की हकदार है, न कि सनकी शासकों की।" बता दें कि वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर दुनिया भर में कड़ी प्रतिक्रियाएं हुई हैं। चीन, रूस, फ्रांस और ईरान सहित कई देशों ने अमेरिका की इस कार्रवाई की आलोचना और निंदा की है। इसके अलावा, भारत ने भी वेनेजुएला से जुड़े घटनाक्रम को लेकर रविवार को गहरी चिंता व्यक्त की। भारत ने कहा कि वह वेनेजुएला में तेजी से बदल रही स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘वेनेजुएला में हालिया घटनाक्रम गहरी चिंता का विषय हैं। हम तेजी से बदलती स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं।’’ भारत ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने का भी आह्वान किया। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत वेनेजुएला के लोगों के कुशल-क्षेम और उनकी सुरक्षा के प्रति समर्थन की फिर पुष्टि करता है।’’ बयान में कहा गया, ‘‘हम सभी संबंधित पक्षों से अपील करते हैं कि वे बातचीत के जरिए मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाएं ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।’’