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शशि थरूर ने दी सफाई, कहा- ‘मैं पार्टी लाइन से कभी नहीं हटा’

नई दिल्ली  कांग्रेस में जारी अंतर्कलह के बीच पार्टी के सीनियर लीडर और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने अपनी चुप्‍पी तोड़ी है. उन्‍होंने आलोचकों को दो टूक जवाब देते हुए कहा कि उन्‍होंने कभी भी पार्टी लाइन का उल्‍लंघन नहीं किया. कांग्रेस सांसद ने ऑपरेशन सिंदूर पर ऐसी बात कही है, जिससे पार्टी लीडरशिप खासकर राहुल गांधी के लिए इसे पचा पाना मुश्किल होगा. ऑपरेशन सिंदूर पर शशि थरूर के रुख से पार्टी में कलह की धार और तेज हो सकती है. बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर राहुल गांधी काफी क्रिटिकल रहे हैं. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार 24 जनवरी 2026 को कहा कि उन्होंने संसद में कभी भी पार्टी लाइन का उल्लंघन नहीं किया है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनका रुख हमेशा देशहित को प्राथमिकता देने वाला रहा है. केरल साहित्य महोत्सव के दौरान कोझिकोड में एक संवाद सत्र में बोलते हुए थरूर ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक रूप से उन्होंने केवल ‘ऑपरेशन सिंधूर’ के मुद्दे पर सैद्धांतिक असहमति जताई थी और उस रुख को लेकर उन्‍हें कोई पछतावा नहीं है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में पार्टी नेतृत्व के साथ उनके कथित मतभेदों को लेकर अटकलें तेज हुई हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कोच्चि में हाल ही में हुए एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मंच पर मौजूद नेताओं के नाम लेने के क्रम में थरूर का नाम न लिए जाने से वे आहत हुए थे. इसके अलावा राज्य स्तर पर कुछ नेताओं द्वारा उन्हें लगातार हाशिए पर रखने की कोशिशों की बातें भी सामने आई हैं. जिम्‍मेदारी से अपनी राय रखी – थरूर इन अटकलों के बीच थरूर ने अपने पक्ष को विस्तार से रखते हुए कहा कि बतौर सांसद और लेखक उन्होंने हमेशा जिम्मेदारी के साथ अपनी राय रखी है. उन्होंने बताया कि पहलगाम की घटना के बाद उन्होंने एक अखबार में लेख लिखकर कहा था कि इस तरह की घटनाओं को बिना जवाब के नहीं छोड़ा जाना चाहिए और आतंकवादी ढांचों के खिलाफ सीमित तथा निर्णायक कार्रवाई जरूरी है. थरूर ने कहा कि उनका मानना था कि भारत विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है और उसे पाकिस्तान के साथ किसी लंबे सैन्य संघर्ष में उलझना नहीं चाहिए, लेकिन आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने जैसी सीमित कार्रवाई उचित होगी. अगर भारत नहीं रहेगा तो कौन बचेगा? थरूर ने यह भी कहा कि उन्हें आश्चर्य हुआ जब केंद्र सरकार ने लगभग वही कदम उठाए जिनकी उन्होंने सिफारिश की थी. उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से सही दिशा में उठाया गया कदम बताया. थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय हितों से जुड़े मामलों में राजनीति को पीछे छोड़ देना चाहिए. उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के प्रसिद्ध कथन का हवाला देते हुए कहा, ‘अगर भारत नहीं रहेगा तो कौन बचेगा?’ उनका कहना था कि जब देश की सुरक्षा और विश्व में उसकी स्थिति का सवाल हो, तो भारत सबसे पहले आता है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं और ये एक बेहतर भारत के निर्माण की प्रक्रिया में सहायक होते हैं. लेकिन जब बात राष्ट्रीय हितों की हो, तब पार्टी से ऊपर देश को रखा जाना चाहिए. थरूर ने स्पष्ट किया कि संसद में उन्होंने कभी पार्टी के आधिकारिक रुख से हटकर बयान नहीं दिया और उनकी सार्वजनिक टिप्पणियां भी जिम्मेदार और संतुलित रही हैं. क्‍यों अहम थरूर का बयान? कांग्रेस के भीतर उनके कथित मतभेदों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच थरूर का यह बयान पार्टी नेतृत्व के लिए भी एक संदेश माना जा रहा है कि वे संगठन के भीतर रहते हुए भी स्वतंत्र विचार रखने से पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन देशहित से जुड़े मुद्दों पर उनकी प्राथमिकता हमेशा राष्ट्रीय हित ही रहेगी. यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी आंतरिक एकजुटता और रणनीतिक दिशा को लेकर कई चुनौतियों का सामना कर रही है, और थरूर का रुख कांग्रेस के भीतर विचार-विमर्श और बहस की संस्कृति को रेखांकित करता है.

शशि थरूर ने कांग्रेस बैठक से बनाई दूरी, खुली बड़ी वजह

केरल केरल विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के भीतर मतभेद नजर आए। पार्टी हाईकमान द्वारा बुलाई गई अहम बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर केरल विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को होने वाली पार्टी की एक रणनीतिक बैठक में शामिल नहीं होंगे क्योंकि वह इस बात से 'आहत' हैं कि राहुल गांधी ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर उनके मौजूद होने के बावजूद उनके नाम का उल्लेख नहीं किया और राज्य के नेताओं द्वारा बार-बार उन्हें 'दरकिनार' करने की कोशिश की जा रही है। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। खरगे शुक्रवार को केरल के वरिष्ठ नेताओं के साथ विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर बैठक करेंगे। आगामी मार्च-अप्रैल महीने में विधानसभा चुनाव संभावित हैं। उन्होंने कहा कि थरूर को अपने साथ किए गए व्यवहार से निराशा हुई, लेकिन अहम बात यह थी कि राहुल गांधी ने 19 जनवरी को कोच्चि में स्थानीय निकाय के चुनाव में जीतने वालों को सम्मानित करने के लिए आयोजित 'महापंचायत' में उनका उल्लेख नहीं किया।   सूत्रों ने कहा कि राहुल गांधी ने मंच पर अन्य वरिष्ठ नेताओं का उल्लेख किया और उनके नाम भी लिए, लेकिन चार बार के सांसद और कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य थरूर का उल्लेख नहीं किया, जबकि वह मंच पर मौजूद थे। हालांकि थरूर के कार्यालय ने कहा कि उन्होंने कोझिकोड में केरल साहित्य महोत्सव में अपनी पूर्व प्रतिबद्धताओं के कारण बैठक में शामिल होने में असमर्थता के बारे में पार्टी को सूचित कर दिया है। हालांकि, उनके करीबी सूत्रों के अनुसार, वह पार्टी द्वारा उनके साथ किए गए व्यवहार से बहुत आहत हैं, जबकि थरूर ने खासकर आगामी राज्य विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार करने के मकसद से केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित शिविर के मौके पर मतभेद दूर करने का प्रयास किया था।   उस कार्यक्रम के बाद थरूर ने कहा था कि वह कभी भी पार्टी के रुख से अलग नहीं हटे हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। केरल कांग्रेस नेताओं द्वारा वायनाड में आयोजित उस शिविर से आगामी विधानसभा चुनावों में वाम लोकतांत्रिक मंच (LDF) का मुकाबला करने के लिए एकजुट आह्वान किया गया था। उसमें कथित तौर पर यह सहमति बनी कि थरूर विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे बल्कि पूरे राज्य में चुनाव प्रचार करेंगे। हालांकि, कुछ दिनों बाद राज्य इकाई के भीतर मतभेद फिर से उभर आए हैं और थरूर हाल ही में कोच्चि में अपने साथ किए गए व्यवहार से खुश नहीं हैं।   थरूर ने पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और केरल प्रभारी दीपा दास मुंशी सहित पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों को भी संदेश भेजा है जिसमें उनके साथ हुए ‘गलत व्यवहार' की ओर इशारा किया गया है। थरूर के बयानों और लेखों की हाल के दिनों में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कांग्रेस नेताओं ने तीखी आलोचना की थी। पिछले साल भारत-पाकिस्तान संघर्ष और पहलगाम हमले के बाद राजनयिक संपर्क के प्रयासों को लेकर उनकी टिप्पणियों पर विवाद खड़ा हो गया था। उनकी टिप्पणियां कांग्रेस के रुख से भिन्न थीं और पार्टी के कई नेताओं ने उनके इरादों पर सवाल उठाते हुए उन पर कटाक्ष किया था। हालांकि, थरूर ने कहा है कि विदेश नीति पर रुख में कोई भिन्नता नहीं है।  

‘नेहरू के कुछ फैसलों के कारण चीन से हारे’, शशि थरूर ने पूर्व पीएम को लेकर किया बड़ा बयान

नई दिल्ली देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को लेकर तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बड़ा बयान दिया है. शशि थरूर ने गुरुवार को कहा कि वह भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भारतीय लोकतंत्र का संस्थापक मानते हैं, मगर उनकी तारीफ आलोचना से खाली नहीं है. शशि थरूर ने माना कि नेहरू के कुछ फैसलों के कारण 1962 में भारत को चीन से हार मिली, मगर हर चीज के लिए नेहरू को दोषी ठहराना ठीक नहीं. शशि थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि नेहरू की गलतियों को मानना ​​जरूरी है, लेकिन भारत की सभी समस्याओं के लिए उन्हें दोष देना गलत है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, ‘मैं जवाहरलाल नेहरू का प्रशंसक हूं, लेकिन आंख बंद करके समर्थन नहीं करता. मैं उनकी सोच और दृष्टिकोण की बहुत सराहना करता हूं और उनके प्रति गहरा सम्मान रखता हूं. हालांकि मैं उनकी सभी नीतियों और विचारों से सौ फीसदी सहमत नहीं हूं. उन्होंने जो कई काम किए, वे सबसे ज्यादा सराहना के योग्य हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नेहरू ने भारत में लोकतंत्र को मजबूती से स्थापित किया… मैं यह नहीं कहूंगा कि मोदी सरकार लोकतंत्र विरोधी है, लेकिन वे निश्चित रूप से नेहरू विरोधी हैं. नेहरू को एक सॉफ्ट टारगेट यानी आसान निशाना बना दिया गया है.’ नेहरू के फैसलों की आलोचना साल 1962 के भारत-चीन युद्ध को याद करते हुए शशि थरूर ने कहा कि मौजूदा सरकार की पंडित नेहरू पर की जा रही आलोचना का कुछ आधार हो सकता है. उन्होंने कहा, ‘उदाहरण के लिए 1962 में चीन के खिलाफ मिली हार को कुछ हद तक नेहरू के फैसलों से जोड़ा जा सकता है. लेकिन अब जो हो रहा है, वह यह है कि नेहरू को हर बात के लिए दोषी ठहराया जाता है, चाहे मुद्दा कुछ भी हो.’ उन्होंने कहा, 'सबसे जरूरी यह है कि नेहरू ही थे, जिन्होंने भारत में लोकतंत्र स्थापित किया…। मैं ये नहीं कहूंगा कि वो (मोदी सरकार) लोकतंत्र के विरोधी हैं, लेकिन वो नेहरू विरोधी जरूर हैं। नेहरू को आसान बली का बकरा बना दिया गया है।' उन्होंने कहा, 'कुछ मामलों में उनका (मोदी सरकार की) आलोचना का आधार हो सकता है। उदाहरण के लिए, 1962 में चीन के खिलाफ हार का कुछ श्रेय नेहरू के कुछ फैसलों को दिया जा सकता है।' पार्टी लाइन पर दी थी सफाई थरूर ने सोमवार को कहा कि वह कभी भी पार्टी लाइन से अलग नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा, 'मेरा सवाल यह है कि किसने कहा कि मैंने पार्टी की विचारधारा का उल्लंघन किया है? मैंने विभिन्न विषयों पर अपनी राय व्यक्त की है, लेकिन अधिकतर मामलों में पार्टी और मैं एक ही रुख पर कायम रहे हैं।' थरूर ने कहा कि उन्होंने संसद में मंत्रियों के सामने जो सवाल उठाए थे, उनकी एक स्पष्ट दिशा थी और पार्टी को उनसे परेशान नहीं होना चाहिए। यादों की गलियों में सफर अपनी यादों को ताजा करते हुए शशि थरूर ने बताया कि उन्हें पढ़ने का शौक बचपन में ही लग गया था, जब न टीवी था और न ही मोबाइल फोन. कांग्रेस सांसद ने याद किया कि उन्होंने पहली बार बहुत कम उम्र में ही उपन्यास लिखा था, लेकिन बाद में वह स्याही गिरने की वजह से खो गया. शशि थरूर ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में पढ़ने की आदतें कम हो रही हैं, लेकिन केरल में पढ़ने की संस्कृति अब भी आगे है. कांग्रेस नेता ने दिल्ली के प्रसिद्ध सेंट स्टीफन कॉलेज के अपने कॉलेज के दिनों को भी याद किया, जहां उन्होंने एक बार मंच पर एंटनी का किरदार निभाया था और फिल्म निर्माता मीरा नायर ने क्लियोपेट्रा की भूमिका निभाई थी.

अमेरिका के वेनेजुएला हमले पर भड़के शशि थरूर, बोले— अब दुनिया में ‘जंगलराज’ चल रहा है

नई दिल्ली अमेरिका ने देर रात वेनेजुएला की राजधानी काराकास पर हमला करके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अपने कब्जे में ले लिया। अब दोनों पर अमेरिका में ही मुकदमा चलाने की तैयारी है। इसके साथ ही, डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि फिलहाल वेनेजुएला को अमेरिका ही चलाएगा। वेनेजुएला मामले को लेकर दुनियाभर के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं शशि थरूर, अभिषेक मनु सिंघवी आदि ने भी रिएक्शन दिया है।   लोकसभा सांसद शशि थरूर ने कहा कि कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर को नजरअंदाज किया जा रहा है, और अब जंगल का कानून चल रहा है। एक्स पर एक पोस्ट में थरूर ने लिखा, "अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएन चार्टर को कुछ सालों से तोड़ा जा रहा है। आज जंगल का कानून चल रहा है। 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' ही नया नियम है।" वहीं, कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने भी अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की है। उन्होंने एक्स पर लिखा, "क्रूज मिसाइल से सत्ता परिवर्तन, युद्धपोत से लोकतंत्र और खुद बनाए गए सिद्धांत के तहत संप्रभुता को फिर से लिखना? यह लीडरशिप नहीं है, यह 21वीं सदी की भाषा में 19वीं सदी का साम्राज्यवाद है। अगर अंतर्राष्ट्रीय कानून सिर्फ कमजोरों के लिए मायने रखता है, तो यूएन को बंद हो जाना चाहिए। दुनिया नियमों की हकदार है, न कि सनकी शासकों की।" बता दें कि वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर दुनिया भर में कड़ी प्रतिक्रियाएं हुई हैं। चीन, रूस, फ्रांस और ईरान सहित कई देशों ने अमेरिका की इस कार्रवाई की आलोचना और निंदा की है। इसके अलावा, भारत ने भी वेनेजुएला से जुड़े घटनाक्रम को लेकर रविवार को गहरी चिंता व्यक्त की। भारत ने कहा कि वह वेनेजुएला में तेजी से बदल रही स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘वेनेजुएला में हालिया घटनाक्रम गहरी चिंता का विषय हैं। हम तेजी से बदलती स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं।’’ भारत ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने का भी आह्वान किया। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत वेनेजुएला के लोगों के कुशल-क्षेम और उनकी सुरक्षा के प्रति समर्थन की फिर पुष्टि करता है।’’ बयान में कहा गया, ‘‘हम सभी संबंधित पक्षों से अपील करते हैं कि वे बातचीत के जरिए मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाएं ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।’’  

दिग्विजय सिंह के RSS वाले बयान पर थरूर साथ, बोले— संगठन की ताकत को नकारा नहीं जा सकता

नई दिल्ली  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इन दिनों संघ और भाजपा के संगठन पर दिए बयान के बाद चर्चा में बने हुए हैं। कांग्रेस पार्टी में ही कई लोग उनके इस बयान पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि इसी बीच केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर अपने साथी के समर्थन में आगे आए हैं। थरूर ने कहा कि किसी भी पार्टी में अनुशासन जरूरी होता है। इस मामले में कांग्रेस का इतिहास 140 साल पीछे जाता है, हम इससे बहुत कुछ सीख सकते हैं।   थरूर ने कहा, "हमारी पार्टी का 140 साल पुराना इतिहास है। हम इससे बहुत कुछ सीख सकते हैं। किसी भी पार्टी में अनुशासन बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। मैं भी चाहता हूं कि हमारा संगठन मजबूत हो, हमारे संगठन में अनुशासन होना चाहिए, दिग्विजय सिंह इस मामले में खुलकर अपनी बात कह सकते हैं।" थरूर ने अपनी बात को आगे रखते हुए कहा कि कांग्रेस में सभी का लक्ष्य अपने संगठन को मजबूत करना ही होना चाहिए। कांग्रेस के भीतर सुधार की जरूरत पर बयान देकर विवादों में आए मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री के तर्क का थरूर ने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कांग्रेस को पार्टी को आतंरिक अनुशासन और संगठन की मजबूती पर ध्यान देना चाहिए। मीडिया से बात कर रहे थरूर से जब पूछा गया कि क्या इस मामले में उन्होंने दिग्विजय सिंह से बात की है। इस पर उन्होंने कहा कि उनके बीच बातचीत होना स्वाभाविक है। थरूर ने कहा, "हम दोस्त हैं और बातचीत होती रहती है। संगठन को मजबूत किया जाना चाहिए, इसमें कोई विवाद वाली बात नहीं है और न ही कोई सवाल है।" क्या है विवाद? मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में बने रहते हैं। आम तौर पर उनके इन बयानों के निशाने पर भाजपा होती है, लेकिन इस बार उन्होंने भाजपा और संघ की तारीफ की। शनिवार को उन्होंने 1995 में प्रधानमंत्री मोदी की एक तस्वीर साझा कि, जिसमें पीएम तत्तकालीन भाजपा नेताओं के आगे जमीन पर बैठे हैं। इसके साथ दिग्विजय सिंह ने लिखा कि यहां से कांग्रेस सीख सकती है कि संघ और भाजपा किस तरह से जमीनी स्तर के कार्यकर्ता को भी शीर्ष पदों पर पहुंचने का अवसर देती है। दिग्विजय सिंह की इस पोस्ट के बाद विवाद बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने अपनी सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह भाजपा और संघ के कट्टर विरोधी बने हुए हैं। हालांकि इसके बाद भी पार्टी की तरफ से लगातार उन पर परोक्ष हमले होते रहे। दरअसल, कांग्रेस पार्टी के भीतर कई बार नेताओं ने दरकिनार किए जाने के आरोप लगाए हैं। कई वरिष्ठ नेताओं ने भी इस तरह की शिकायत की है कि नेतृत्व संगठन की मजबूती पर ध्यान नहीं दे रहा है। इतना ही नहीं इसी तरह के आरोपों के चलते कई बड़े नेता कांग्रेस छोड़कर दूसरे दलों में भी शामिल हो गए हैं।  

बीमारी और इंतजार के बाद सक्रिय, शशि थरूर ने CWC मीटिंग में दिखाई तेज़ी

नई दिल्ली कांग्रेस की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की शनिवार को बैठक हो रही है. इंदिरा भवन में हो रही इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शरीक हुए हैं. इस बैठक में शामिल होने के लिए शशि थरूर भी पहुंचे. पार्टी की कई अहम बैठकों से नदारद रहने के बाद थरूर का इस बैठक में पहुंचना खासा चर्चा में है. थरूर यहां भागकर कांग्रेस मुख्यालय यानी इंदिरा भवन में दाखिल होते दिखे. सीडब्लूसी की बैठक में कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हो रहे हैं. तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कांग्रेस मुख्यालय पहुंच चुके हैं. इसके अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा, दिग्विजय सिंह, गौरव गोगोई, कुमारी सैलजा, सचिन पायलट, वीरप्पा मोइली, चरणजीत सिंह चन्नी और अभिषेक मनुसिंघवी भी सीडब्लूसी बैठक में शामिल होने पहुंचे हैं. कांग्रेस की बैठक से कब-कब दूर रहे थरूर? इसी महीने कांग्रेस के लोकसभा सांसदों की अहम बैठक हुई थी, जिसकी अध्यक्षता राहुल गांधी ने की थी. इस बैठक में संसद के शीतकालीन सत्र से पहले पार्टी की रणनीति पर चर्चा की गई थी. हालांकि शशि थरूर इसमें शामिल नहीं हुए थे. बाद में थरूर ने सफाई देते हुए कहा था कि वे निजी कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के चलते कोलकाता में थे, जिस वजह से बैठक में शामिल नहीं हो सके. कभी बीमार, कभी बिजी थे थरूर? इसके बाद 30 नवंबर को कांग्रेस की एक और अहम रणनीतिक बैठक बुलाई गई, जिसकी अध्यक्षता सोनिया गांधी ने की थी. इस बैठक का मकसद पार्टी की समग्र रणनीति और राजनीतिक दिशा पर मंथन करना था. इस बैठक में भी शशि थरूर अनुपस्थित रहे. थरूर की ओर से बताया गया कि वे उस समय केरल से उड़ान पर थे, और इसी कारण समय पर बैठक में नहीं पहुंच पाए. इससे पहले 18 नवंबर SIR वोटर री-वेरिफिकेशन जैसे मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व की एक अहम बैठक हुई थी. इस बैठक में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे, लेकिन शशि थरूर इसमें भी शामिल नहीं हो सके. इस बार उनकी गैरहाजिरी की वजह स्वास्थ्य कारण बताई गई थी. फिर चर्चा में थरूर का बयान इस बीच शशि थरूर एक बयान खूब चर्चा में है. उन्होंने इंडिया टुडे से बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करते हुए कहा कि विदेश नीति भाजपा या कांग्रेस नहीं, बल्कि भारत की होती है. अगर प्रधानमंत्री हारते हैं, तो यह पूरे देश की हार है और पीएम मोदी की हार का जश्न मनाना भी भारत की हार का जश्न मनाने जैसा ही है. थरूर ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के शब्दों को दोहराते हुए कहा, ‘अगर भारत मर गया, तो फिर कौन जिंदा रहेगा?’ CWC की बैठक में किन-किन मुद्दों पर चर्चा यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म कर उसकी जगह विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी ‘जी राम जी’ कानून लागू किया है. हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र में यह विधेयक पारित हुआ और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी भी मिल चुकी है. कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस नए कानून पर कड़ा ऐतराज जताया है. पार्टी का आरोप है कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना न सिर्फ गांधी जी का अपमान है, बल्कि ग्रामीण गरीबों के अधिकारों पर भी सीधा हमला है. जी राम जी कानून पर क्या आपत्ति? इस नए कानून के तहत हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है, लेकिन इसमें केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के फंडिंग अनुपात का प्रावधान किया गया है. कांग्रेस का कहना है कि इससे राज्यों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और योजना की मूल भावना कमजोर होगी. CWC बैठक में मनरेगा के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ रणनीति को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है. इसके अलावा मौजूदा राजनीतिक हालात और संगठनात्मक मुद्दों पर भी चर्चा होगी. बिहार में हार के बाद CWC की पहली बैठक यह बिहार चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी की पहली बैठक है. ऐसे में आत्ममंथन और आगे की रणनीति पर भी गंभीर चर्चा होने की उम्मीद है. यह बैठक अगले साल होने वाले असम, केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है. पार्टी इन राज्यों में अपनी सियासी दिशा और चुनावी रणनीति को लेकर भी मंथन कर सकती है.  

संसद में गरजे शशि थरूर: राम के नाम पर राजनीति बंद हो, कांग्रेस लाइन में लौटे नेता

नई दिल्ली लोकसभा में मनरेगा का नाम बदलने समेत कई प्रावधानों में फेरबदल वाले विधेयक को पेश किया गया है। इस विधेयक में मनरेगा को अब 'विकसित भारत- जी राम जी' योजना नाम देने की तैयारी है। इसे लेकर संसद में दिलचस्प बहस देखने को मिली है। कांग्रेस की ओर से सांसद प्रियंका गांधी ने तीखा विरोध किया तो वहीं उनके बाद बोलने खड़े हुए शशि थरूर ने भी लंबे समय बाद पार्टी के सुर में सुर मिलाया। उन्होंने कहा कि मैं मनरेगा स्कीम से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम बदलने के खिलाफ हूं। उन कारणों पर मैं विस्तार से नहीं जाऊंगा क्योंकि पूर्व के वक्ताओं ने उस पर काफी बोला है।   शशि थरूर ने कहा कि मैं जी राम जी विधेयक का विरोध करता हूं। मेरी पहली शिकायत यह है कि इसका नाम बदला जा रहा है, जो पहले महात्मा गांधी के ऊपर था। महात्मा गांधी का राम राज्य का विजन राजनीतिक आयोजन नहीं था बल्कि सामाजिक सुधार था। वह चाहते थे कि हर गांव सशक्त हो और राम राज्य जैसी स्थिति बने। उनके नाम को हटाना गलत है और नैतिकता के खिलाफ है। मेरे बचपन में गाते थे- देखो ओ दिवानों ये काम ना करो, राम का नाम बदनाम ना करो। तिरुअनंतपुरम से कांग्रेस के सांसद ने कहा कि इसके अलावा 40 फीसदी बजट सीधे राज्य सरकार के हिस्से में डालना भी गलत है। इससे उन राज्यों के लिए संकट की स्थिति पैदा होगी, जिनके पास राजस्व का संग्रह कम है। ऐसे राज्य जो पहले ही किसी तरह की मदद पर निर्भर हैं, आखिर वे कैसे इस स्कीम के लिए फंडिंग कर पाएंगे। कांग्रेस सांसद का पार्टी के स्टैंड से मिलता हुआ यह रुख लंबे समय बाद देखने को मिला है। वह कई बार पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ कर चुके हैं। इसके अलावा कांग्रेस की लगातार तीन मीटिंगों से गैरहाजिर रहे हैं। ऐसे में उनके भविष्य को लेकर कयास लगते रहे हैं। इसलिए जब वह संसद में इस पर बोलने खड़े हुए और कांग्रेस का समर्थन किया तो यह महत्वपूर्ण था। उन्होंने साफ कर दिया कि वह वैचारिक तौर पर अब भी अडिग हैं।  

थरूर का मीटिंग से लगातार तीसरी बार दूरी—तिवारी की गैरहाज़िरी ने बढ़ाई पार्टी की चिंता

नई दिल्ली  कांग्रेस के साथ खराब रिश्तों के दौर से गुजर रहे शशि थरूर ने लगातार तीसरी बार पार्टी की मीटिंग छोड़ दी है। शुक्रवार को कांग्रेस के लोकसभा सांसदों की मीटिंग थी, जिसमें वह नहीं पहुंचे। यह लगातार तीसरा मौका है, जब शशि थरूर ने पार्टी की बैठक छोड़ दी है। शशि थरूर ने कई बार पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। माना जा रहा है कि इसके चलते ही उन्हें लेकर कांग्रेस में असहजता की स्थिति है। इस बीच उनका लगातार कांग्रेस की बैठकों से दूर रहना आशंकाओं को बढ़ावा दे रहा है। शीत सत्र का 19 दिसंबर को समापन होना है और उससे पहले राहुल गांधी ने कांग्रेस के सभी 99 लोकसभा सांसदों की मीटिंग बुलाई थी। इस मीटिंग में यह तय होना था कि कैसे शीत सत्र के आगामी दिनों में सत्ता पक्ष को घेरा जाए। इस मीटिंग में शशि थरूर नहीं पहुंचे। इस बीच शशि थरूर के एक्स पर गुरुवार को कोलकाता में रहने की जानकारी दी गई थी। उन्होंने लिखा था कि लंबे समय तक मेरे सहयोगी रहे जॉन कोशी की कोलकाता में शादी है। इसके अलावा मेरी बहन स्मिता थरूर का जन्मदिन भी है। इस बीच मैं एक आयोजन में भी हिस्सा लूंगा। कांग्रेस की इस बैठक में सांसद मनीष तिवारी भी मौजूद नहीं रहे। उनको लेकर भी अकसर चर्चाएं होती रही हैं। इसस पहले नवंबर में हुई दो बैठकों में शशि थरूर ने हिस्सा नहीं लिया था। इनमें से एक बैठक तो 30 नवंबर को ही थी, जिसे सोनिया गांधी ने बुलाया था। अगस्त 2020 में शशि थरूर और अन्य नेताओं ने सोनिया गांधी के खिलाफ भी मोर्चा खोला था। इस पर जब सवाल हुआ था तो शशि थरूर का कहना था कि मैंने मीटिंग छोड़ी नहीं थी बल्कि पहुंच नहीं सका था। मैं केरल से दिल्ली लौट रहा था और प्लेन में था। इसके बाद उनके ऑफिस से बताया गया था कि वह अपनी 90 वर्षीया मां के साथ दिल्ली लौट रहे थे और उनकी फ्लाइट को रीशेड्यूल किया गया था। इस मीटिंग में कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद नहीं थे। SIR पर भी मीटिंग से रहे थे दूर, सोनिया गांधी ने किया था संबोधित इससे पहले 18 नवंबर को भी वह पार्टी की एक मीटिंग में नहीं गए थे, जिसमें विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर चर्चा की जानी थी। इस मीटिंग में भी सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने सांसदों से बात की थी, लेकिन शशि थरूर के कार्यालय ने बताया कि वह खराब सेहत के चलते गैरहाजिर रहे।  

वीर सावरकर अवॉर्ड पर शशि थरूर का खुलासा—क्या कांग्रेस सांसद होंगे सम्मानित?

नई दिल्ली  कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को एक ट्वीट के जरिए यह खुलासा किया है कि उन्हें दिल्ली में आज दिए जाने वाले “वीर सावरकर अवॉर्ड” के बारे में न तो कोई आधिकारिक सूचना मिली है और न ही उन्होंने इसे स्वीकार किया है। थरूर ने लिखा कि उन्हें केवल मीडिया रिपोर्टों से पता चला कि उनका नाम पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं में शामिल किया गया है। थरूर ने बताया कि वे स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान के लिए केरल गए थे, जहां उन्हें पहली बार इस अवॉर्ड के बारे में मीडिया से पता चला। उन्होंने कहा, “मैं न इस अवॉर्ड से अवगत था, न ही इसे स्वीकार किया है। आयोजकों द्वारा मेरी सहमति के बिना मेरा नाम घोषित करना पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना है।” उन्होंने कहा, “अवॉर्ड की प्रकृति, आयोजकों या किसी भी संदर्भ के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। ऐसे में कार्यक्रम में भाग लेने या अवॉर्ड स्वीकार करने का प्रश्न ही नहीं उठता।” आपको बता दें कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। हाल ही में उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए आयोजित राजकीय भोज में “गर्मजोशी भरा और आत्मीय” माहौल था तथा कई लोगों से बातचीत करना आनंददायक था। थरूर की यह टिप्पणी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पुतिन के सम्मान में दिए गए भोज के एक दिन बाद आई थी। थरूर ने शनिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, "शुक्रवार रात राष्ट्रपति पुतिन के लिए राष्ट्रपति भवन में आयोजित भोज में शामिल हुआ। माहौल बेहद गर्मजोशी भरा और आत्मीय था। वहां उपस्थित कई लोगों से बातचीत करने का आनंद लिया, खासतौर पर रूसी प्रतिनिधिमंडल से आए साथी बेहद अच्छे थे।’’  

थरूर की गैरमौजूदगी से कांग्रेस परेशान, लगातार दूसरी अहम बैठक में नहीं पहुंचे

नई दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर बीते कुछ समय से कांग्रेस से किनारा कसते नजर आ रहे हैं। वहीं वह कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मोदी सरकार के फैसलों की ताराीफ कर चुके हैं। हाल ही में एसआईआर के विरोध में रणनीत बनाने के लिए बुलाई गई कांग्रेस की मीटिंग में भी शशि थरूर शामिल नहीं हुए। इसके लिए उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया था। वहीं अब संसद के शीतकालीन सत्र की रणनीति को लेकर हुई बैठक में भी वह गैरहाजिर रहे। अब सवाल यह है कि एक दिन पहले ही वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में हाजिर थे। वहीं एक दिन बाद ही कांग्रेस की बैठक से किनारा कर गए। शशि थरूर ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए इन्स्टाग्राम पर पोस्ट भी किया था। पीएम मोदी की तारीफ को लेकर कांग्रेस के अन्य नेताओं ने उन्हें निशाने पर भी लिया था। थरूर ने सफाई देते हुए बताया कि वह केरल में थे। वह 90 वर्षीय मां के साथ थे और इसलिए बैठक में शामिल नहीं हो सके। इस बैठख में कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल भी शामिल नहीं हो पाए थे। वह स्थानीय चुनाव प्रचार में व्यस्त थे। कांग्रेस नेता ने कहा कि असल समस्या यह है कि वह देश को ठीक से समझते ही नहीं हैं। उन्हें यही लगता है कि बीजेपी की नीतियां बहुत अच्छीा हैं। अगर ऐसा ही है तो वह कांग्रेस में क्यों हैं? वह दोहरा रवैया अपना रहे हैं। कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि प्रधानमंत्री के भाषण में कोई प्रशंसा करने वाली बात नहीं थी इसके बाद भी शशि थऱूर को अच्छी लगी। मझे समझ में नहीं आता कि कांग्रेस पर निशाना साधना उन्हें क्यों अच्छा लगा? सोशल मीडिया पर भी शशि थरूर के रवैये को लेकर हलचल है। लोगों का कहना है कि क्या शशि थरूर बीजेपी में जाने का प्लान कर रहे हैं? बीते दिनों जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के एक कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे तब शशि थरूर ने उनका भाषण सुना और फिर जमकर तारीफ की। उन्होंने शिक्षा पर की गई उनकी टिप्पणी को भी सराहा था। जबकि इस भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुलामी की मानसिकता बताते हुए कांग्रेस की खूब आलोचना की थी।