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एशियन गेम्स के बाद सान्या यादव की दमदार वापसी, डिस्कस थ्रो में पदक जीतकर बढ़ाया मान

नारनौल  जापान में एशियाई खेलों के दौरान पदक जीतने की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकीं बैरावास की बेटी सान्या यादव ने अब राष्ट्रीय मंच पर दमदार वापसी की है। नई दिल्ली में चल रही 65वीं नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सान्या ने महिला डिस्कस थ्रो स्पर्धा में 52.45 मीटर चक्का फेंककर कांस्य पदक अपने नाम किया। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद सान्या की यह उपलब्धि उनके लिए अहम है। साथ ही, उन्होंने दिखाया है कि एक प्रतियोगिता का नतीजा उनके हौसले और मेहनत को कमजोर नहीं कर सकता। इनके हिस्से आए पदक जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आठ से 11 अक्टूबर तक आयोजित चैंपियनशिप में महिला डिस्कस थ्रो का मुकाबला कड़ा रहा। हरियाणा की सीमा कालीरमण ने 57.63 मीटर का थ्रो फेंककर स्वर्ण पदक जीता। राजस्थान की निकिता कुमारी ने 52.48 मीटर के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि सान्या 52.45 मीटर के प्रदर्शन के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। सान्या और रजत पदक विजेता के प्रदर्शन में केवल तीन सेंटीमीटर का अंतर रहा। वायुसेना में हैं पिता गांव बैरावास निवासी सान्या के पिता महेंद्र सिंह यादव वायुसेना में कार्यरत हैं। बेटी के खेल करियर को आगे बढ़ाने के लिए मां कृष्णा यादव ने देहरादून में उसके साथ रहकर प्रशिक्षण और रोजमर्रा की जरूरतों की जिम्मेदारी संभाली। कोच जगजीत सिंह के मार्गदर्शन में अभ्यास करते हुए सान्या ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और एशियन गेम्स तक पहुंचीं। अब राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक जीतकर उन्होंने फिर अपनी क्षमता साबित की है।  

रीवा के सरई कला-रोझौही में न्यूक्लियर प्लांट पर विवाद, ग्रामीणों से बैठक बेनतीजा

रीवा  रीवा जिले की सिरमौर तहसील के सरई कला और रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर आज कंपनी, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही। बोरहोल का काम कराने पहुंची टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। परियोजना स्थल पर प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, कंपनी प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच विरोध की स्थिति बनी। सरई कला, रोझौही और आसपास के गांवों के लोग मौके पर पहुंचे। उनका कहना था कि जब वे परमाणु बिजलीघर के पक्ष में नहीं हैं, तो उनकी आपत्तियों का निराकरण किए बिना आगे की प्रक्रिया क्यों की जा रही है। अधिकारियों ने समझाया, ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े मौके पर सिरमौर तहसीलदार बिंदु तिवारी, गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पांडेय, लालगांव चौकी प्रभारी शैल यादव, एमपीआईडीसी के अधिकारी यूके तिवारी, एनपीसीआईएल के वैज्ञानिक श्री जैन और टाटा कंपनी के प्रतिनिधि परशुराम मिश्रा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों और कंपनी प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसर चाहिए, लेकिन परमाणु बिजलीघर से जुड़े संभावित पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों पर भी उनकी चिंताओं का समाधान होना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र में दूसरे उद्योग स्थापित करने का विकल्प देने की मांग की। कथित फर्जी एनओसी की जांच कराने की मांग सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने सरपंच के नाम पर जारी कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) का मामला उठाया। उन्होंने पत्र क्रमांक 170/2026 की जांच कराने की मांग की। द्विवेदी के मुताबिक, ग्राम सभा में 3 सितंबर और 5 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में प्रस्ताव पारित किए गए थे। उन्होंने कहा कि जब ग्राम सभा और स्थानीय ग्रामीण परियोजना का विरोध कर रहे हैं, तो उनकी सहमति और आपत्तियों को स्पष्ट किए बिना आगे की प्रक्रिया कैसे की जा सकती है। ग्रामीणों ने भी ग्राम सभा के प्रस्तावों और एनओसी से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। विकास चाहिए, लेकिन रेडिएशन का खतरा नहीं! प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने परमाणु ऊर्जा परियोजना से जुड़े संभावित पर्यावरणीय प्रभावों, रेडिएशन और परमाणु कचरे को लेकर चिंता जताई। ग्रामीणों का कहना है कि इस परियोजना से उनके स्वास्थ्य, खेती, जलस्रोतों और आने वाली पीढ़ियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन के सामने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसरों का वे विरोध नहीं कर रहे, लेकिन उनकी सहमति और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज कर परियोजना आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए। पुलिस बल के साथ पहुंचे अधिकारी, ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े बोरहोल की प्रक्रिया के दौरान मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस बल, एमपीआईडीसी, एनपीसीआईएल और टाटा कंपनी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने और उनकी आशंकाएं दूर करने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। विरोध के चलते बोरहोल का काम आगे नहीं बढ़ सका। मौके पर सिरमौर तहसीलदार/नायब तहसीलदार बिंदु तिवारी, गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पांडेय, लालगांव चौकी प्रभारी शैल यादव, एमपीआईडीसी के यूके तिवारी, एनपीसीआईएल के वैज्ञानिक श्री जैन तथा टाटा कंपनी के प्रतिनिधि परशुराम मिश्रा सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। स्थानीय सरपंच, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और सामाजिक कार्यकर्ता भी विरोध के दौरान उपस्थित थे। कथित फर्जी एनओसी का मामला उठा, निष्पक्ष जांच की मांग प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी एनओसी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरपंच के नाम पर जारी बताए जा रहे पत्र क्रमांक 170/2026 की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका सवाल है कि यदि संबंधित ग्रामसभा और ग्रामीण परियोजना का विरोध कर रहे हैं, तो फिर एनओसी किस आधार पर जारी की गई? शिवानंद द्विवेदी ने दावा किया कि 3 सितंबर और 5 अक्टूबर 2026 को ग्रामसभा में इस परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित किए गए थे। उन्होंने शासन-प्रशासन से ग्रामसभा के निर्णयों और स्थानीय लोगों की आपत्तियों को गंभीरता से लेने की मांग की। हालांकि, एनओसी के फर्जी होने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ग्रामीणों की चेतावनी—परियोजना निरस्त होने तक जारी रहेगा आंदोलन लगातार विरोध के बीच अब प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट का मुद्दा स्थानीय स्तर पर और अधिक गरमा गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक परियोजना को निरस्त नहीं किया जाता और उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन ग्रामीणों की आपत्तियों, ग्रामसभा के प्रस्तावों और कथित एनओसी विवाद की निष्पक्ष जांच कराएगा, या फिर परियोजना को लेकर टकराव आगे भी जारी रहेगा? फिलहाल, रोझौही और सरई कला क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना को लेकर विरोध जारी है। ग्रामीण विकास के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और ग्रामसभा के अधिकारों पर स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं। मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन जारी रखने की चेतावनी विरोध प्रदर्शन में सरई कला की सरपंच कोमल सिंह, लालगांव उपसरपंच प्रतिनिधि लवकुश तिवारी, सरपंच पति संजय सिंह,सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। ग्रामीणों के विरोध के चलते बोरहोल का काम आगे नहीं बढ़ सका। उन्होंने कहा कि परियोजना को लेकर उनकी आपत्तियों का निराकरण और मांगों पर निर्णय होने तक विरोध जारी रहेगा। फिलहाल बैठक में कोई सहमति नहीं बन सकी है। अब परियोजना की आगे की प्रक्रिया और ग्रामीणों की आपत्तियों पर प्रशासन के रुख पर नजर रहेगी।

82 साल में 13वीं बार सर्वपितृ अमावस्या पर दुर्लभ संयोग, उज्जैन में जूते-चप्पलों का विसर्जन और तेल की नीलामी

उज्जैन  82 साल में 13वीं बार बने तीन दुर्लभ संयोग के साथ सर्वपितृमोक्ष अमावस्या पर शनिवार को शिप्रा और नर्मदा में स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है। गजछाया योग में पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध के लिए उज्जैन के सिद्धवट घाट पर रात से ही लोग पहुंच गए। उज्जैन में भक्तों द्वारा शनिश्चरी अमावस्या पर भगवान शनि को चढ़ाए गए तेल की 24 घंटे बाद नीलामी होगी। वहीं, घाटों पर जूते-चप्पल और कपड़े भी भक्त छोड़ रहे हैं। इन्हें री-साइकिल कर फाइल कवर और तेल जैसे उत्पाद तैयार किए जाएंगे। उज्जैन के सिद्धवट घाट पर देशभर से लोग सुबह 5 बजे से ही पितरों के निमित्त तर्पण और पूजन के लिए पहुंचे। भीड़ को देखते हुए पुलिस ने चार पहिया वाहनों के लिए मंगलनाथ से भैरवगढ़ और भैरवगढ़ से सिद्धवट जाने वाले मार्ग पर आवागमन बंद कर दिया है। तीन योग एक साथ, पितृ कर्म का विशेष महत्व पंडित अमर डिब्बेवाला ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में अलग-अलग ग्रह योग और संयोग बनते हैं। जो लोग श्राद्ध के 15 दिनों में घाटों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना नहीं कर पाते, वे सर्वपितृ अमावस्या पर तर्पण करने आते हैं। इस बार अमावस्या के शनिवार को पड़ने के साथ गजछाया योग भी बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस योग में पितरों के निमित्त किए गए कर्मों का विशेष महत्व है। सूर्य और चंद्रमा को पितरों से जुड़े वैदिक कर्मों का साक्षी माना गया है। त्रिवेणी शनि मंदिर में आधी रात से लगी कतारें शनिश्चरी अमावस्या के चलते त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालु देर रात 12 बजे से ही पहुंचने लगे थे। यहां शिप्रा नदी के पानी से स्नान की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं के लिए नदी में फव्वारे लगाए गए हैं, इसलिए डुबकी लगाने की अनुमति नहीं दी गई है। शनि मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालु तेल, काली उड़द, फूल और प्रसाद लेकर भगवान शनि के दर्शन कर रहे हैं। केडी पैलेस पर भी पहुंचे श्रद्धालु सर्वपितृ अमावस्या पर केडी पैलेस स्थित शिप्रा नदी के घाट पर भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। यहां कुछ श्रद्धालु भूत-प्रेत बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति की धार्मिक मान्यता के चलते नदी में स्नान करते नजर आए। कई लोग हाथों में जंजीरें और तलवारें लिए तथा अलग-अलग तरह की आवाजें निकालते हुए भी पहुंचे। यह स्थानीय धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी परंपरा है। कन्या राशि, सूर्य-चंद्र और हस्त नक्षत्र से बनता है गजछाया योग पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार, जब अमावस्या हस्त नक्षत्र में आती है, तो उसे गजछाया या कुंजरछाया योग कहा जाता है। इस बार सूर्य और चंद्रमा का कन्या राशि में गोचर तथा हस्त नक्षत्र का संयोग इस योग का निर्माण कर रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, यह योग पितृ कर्म के लिए विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान ग्रह स्थिति में शनि मीन राशि में और बृहस्पति कर्क राशि में हैं। बृहस्पति की नौवीं दृष्टि शनि पर पड़ रही है। ज्योतिष शास्त्र में दोनों ग्रहों को धर्म और अध्यात्म से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में इस संयोग के दौरान किए जाने वाले धार्मिक कर्मों को विशेष महत्व दिया जाता है।

मैरी कॉम के खिलाफ दिल्ली की अदालत पहुंचा पूर्व पति, आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज

  नई दिल्ली ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज मैरी कॉम के पूर्व पति करोंग ओंखोलर ने इस साल की शुरुआत में एक टेलीविजन साक्षात्कार में उनके खिलाफ कथित तौर पर झूठी और मानहानिकारक टिप्पणियां करने के आरोप में दिल्ली की एक अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई है. छह अक्टूबर को दायर यह शिकायत समन जारी करने से पहले साक्ष्य दर्ज करने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शिवम गुप्ता की अदालत में लंबित है. अदालत में इस मामले पर 19 नवंबर को सुनवाई होनी है. समन जारी करने से पहले साक्ष्य (पीएसई) का मतलब निजी आपराधिक शिकायत के मामले में आरोपी को समन जारी करने का फैसला लेने से पहले मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किए जाने वाले प्रारंभिक मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य से है. ओंखोलर ने आरोप लगाया है कि दिसंबर 2023 में उनकी शादी टूटने के बाद मैरी कॉम ने इस साल 11 जनवरी को प्रसारित एक टेलीविजन साक्षात्कार में ये टिप्पणियां की थीं. शिकायत के अनुसार, मैरी कॉम ने कथित तौर पर उन पर धोखा देने और उन्हें छोड़ने का आरोप लगाया था. उन्होंने यह भी दावा किया था कि ओंखोलर का कोई सफल करियर नहीं है और वह उनकी कमाई पर निर्भर थे. शिकायतकर्ता ने दलील दी है कि इन बयानों से यह गलत धारणा बनी कि उनकी अपनी कोई स्वतंत्र पेशेवर पहचान नहीं थी और उन्हें मुक्केबाज मैरी कॉम से शादी करने के कारण आर्थिक लाभ हुआ था. शिकायत में उन आरोपों पर भी आपत्ति जताई गई है कि ओंखोलर ने मैरी कॉम के बैंक खातों से बिना अनुमति पैसे निकाले, उनके नाम पर कर्ज लिया और बच्चों के पालन-पोषण में योगदान नहीं दिया. इसमें उन कथित टिप्पणियों का भी जिक्र है, जिनमें उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश किया गया था, जो कोई काम नहीं करता था और आर्थिक रूप से मैरी कॉम पर निर्भर था. शिकायत के अनुसार, दोनों की शादी 12 मार्च 2005 को हुई थी और वे फरीदाबाद में साथ रहते थे. 20 दिसंबर 2023 को पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत उनका वैवाहिक संबंध समाप्त हो गया. यह शिकायत अधिवक्ता आकाश कृष्ण और प्रगति शर्मा के माध्यम से दायर की गई है. ओंखोलर ने अदालत से कथित अपराध का संज्ञान लेने, समन जारी करने से पहले उनके साक्ष्य दर्ज करने और पर्याप्त आधार मिलने पर मैरी कॉम को अदालत में पेश होने के लिए समन जारी करने का अनुरोध किया है.

पटना के होटल मौर्या से पनाश तक खाद्य विभाग की जांच, 14 दिन में कमियां दूर करने का नोटिस

पटना पर्व के पूर्व गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने को चल रहे अभियान के क्रम में शुक्रवार को राजधानी के पांच बड़े होटलों में खाद्य संरक्षा विभाग की पांच टीमों ने छापेमारी की। जांच में इन बड़े होटलों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता व स्वास्थ्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए। औचक जांच में रसोई से लेकर भंडारण तक में खामियां मिलीं। द पनाश होटल में बिना निर्माण व एक्सपायरी तिथि के पालीथिन में रखा करीब 10 किलो मटन-चिकन और बिना तिथि वाले ब्रेड के छह पैकेट नष्ट कराए गए। वहीं, पाटलिपुत्र एक्जोटिका में एक्सपायरी खाद्य सामग्री मिली। गार्गी ग्रैंड और होटल मौर्या में भी खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही सामने आई। विभाग ने पांचों होटलों को कमियां दूर करने के लिए 14 दिनों का सुधार नोटिस दिया है। स्वास्थ्य सचिव सह खाद्य संरक्षा आयुक्त कुमार रवि के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों की टीम ने होटल गार्गी ग्रैंड, पाटलिपुत्र एक्सोटिका, द पनाश होटल, होटल मौर्या और लेमन ट्री होटल का औचक निरीक्षण किया। खाद्य संरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी पांच होटलों को 14 दिनों के भीतर कमियां दूर करनी होंगी। आगे भी औचक निरीक्षण और कार्रवाई जारी रहेगी। पनाश में पानी की गुणवत्ता पर भी सवाल द पनाश होटल के फ्रीजर में पालीथिन में लपेटकर रखा करीब 10 किलो मटन-चिकन मिला। इस पर निर्माण व एक्सपायरी तिथि नहीं थी। खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 38 के तहत इसे नष्ट कराया गया। बिना तिथि वाले ब्रेड के छह पैकेट भी नष्ट कराए गए। पानी की जांच में टीडीएस (टोटल डिसाल्व्ड सालिड्स) 44 मिला। यहां कुल 6,250 रुपये की खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई। होटल गार्गी ग्रैंड की रसोई में शाकाहारी व मांसाहारी भोजन एक साथ रखा मिला। एफएफओ प्रणाली के पालन में भी कमी पाई गई। पानी की जांच वर्ष 2024 के बाद नहीं कराई गई थी और कर्मचारियों के स्वास्थ्य प्रमाणपत्र भी उपलब्ध नहीं थे। यहां से पनीर और अरहर दाल के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। पाटलिपुत्र एक्सोटिका की रसोई में गंदगी, टूटा वेंटिलेटर और कबूतरों की मौजूदगी मिली। स्टोर रूम में सामान रखने की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं थी। बिल पर एफएसएसएआइ नंबर नहीं मिला। होटल से एक्सपायरी के छह किलो राज मिल्क, आठ किलो बेकरी मिक्स, डेढ़ किलो हाइड्रो और 100 ग्राम जीरा सीड नष्ट कराए गए। मौर्या में जंग लगा फ्रिज, लेमन ट्री से लिए नमूने गांधी मैदान स्थित होटल मौर्या में एल्युमिनियम के बर्तनों में खाना बनाया जा रहा था, जिसे रोकने का निर्देश दिया गया। फ्रिज में जंग, तापमान का रिकार्ड नहीं होने, खराब ड्रेनेज और बिना ढक्कन वाले डस्टबिन जैसी खामियां भी मिलीं। यहां से पनीर और साल्टेड बटर के नमूने लेकर अगमकुआं स्थित प्रयोगशाला भेजे गए। लेमन ट्री होटल से पनीर, चीज, टमाटर सास और लिक्विड सास के नमूने जांच के लिए लिए गए। ड्रेनेज पर लगी जाली को ठीक से ढंकने का निर्देश भी दिया गया।

भारतीय रेलवे की बड़ी उपलब्धि, कपूरथला में बनी 16 कोच वाली वंदे भारत ने 180 KM/H पर भरी रफ्तार

कोटा  भारतीय रेलवे ने स्वदेशी रेल तकनीक के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पंजाब के कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री (आरसीएफ) में निर्मित 16 कोच वाली नई वंदे भारत चेयर कार ट्रेन का पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल में 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर सफल हाईस्पीड परीक्षण किया गया। मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त (सीसीआरएस) की निगरानी में गुरुवार को मथुरा से कोटा होते हुए नागदा रेलमार्ग पर यह परीक्षण किया गया। इस दौरान उच्च गति पर ट्रेन की कार्यक्षमता, परिचालन दक्षता और संरक्षा से जुड़े तकनीकी मानकों का आकलन किया गया। यह परीक्षण आधुनिक, तेज रफ्तार और स्वदेशी तकनीक से निर्मित ट्रेनों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कोटा रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ जैन ने बताया कि 16 कोच वाली वंदे भारत चेयर कार ट्रेन आधुनिक प्रोपल्शन सिस्टम से लैस है। परीक्षण के दौरान तेज गति पर ट्रेन के प्रदर्शन और परिचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की गई। मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त की निगरानी में हुए इस ट्रायल का उद्देश्य उच्च गति पर ट्रेन की तकनीकी क्षमता और सुरक्षा मानकों का आकलन करना था। कोटा मंडल में हुआ यह परीक्षण हाईस्पीड ट्रायल के लिए इस रेलखंड की महत्वपूर्ण भूमिका को भी दर्शाता है। कपूरथला फैक्ट्री ने बनाया उत्पादन रिकॉर्ड रेल कोच फैक्ट्री, कपूरथला आधुनिक रेल कोच निर्माण के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। यहां वंदे भारत और अमृत भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों के कोच और ट्रेनसेट तैयार किए जा रहे हैं। फैक्ट्री में निर्मित रेल कोच एशिया और अफ्रीका के कई देशों में निर्यात भी किए जा चुके हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय रेल निर्माण बाजार में भारत की पहचान को मजबूती मिली है। एक वर्ष में बनाए 2,383 रेल कोच फैक्ट्री ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 2,383 रेल कोच का निर्माण किया। इसे फैक्ट्री का अब तक का सर्वाधिक वार्षिक उत्पादन बताया गया है। यह उपलब्धि उसकी उत्पादन क्षमता और आधुनिक रेल निर्माण के क्षेत्र में बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है। स्वदेशी रेल तकनीक को मिलेगा बढ़ावा वंदे भारत ट्रेन का 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर सफल परीक्षण आधुनिक रेल तकनीक, संरक्षा मानकों और स्वदेशी निर्माण क्षमता को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम उपलब्धि है। यह केंद्र सरकार के ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ अभियान के अनुरूप देश में आधुनिक रेल उपकरणों और ट्रेनों के निर्माण को प्रोत्साहित करने के प्रयासों को भी मजबूती देगा।

चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर प्रदर्शन तेज, दिल्ली में 220 से ज्यादा CAPF कंपनियां तैनात

नई दिल्ली चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी प्रदर्शन के बीच दिल्ली पुलिस ने महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती बढ़ा दी है। प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ कथित अभद्र व्यवहार और छेड़छाड़ की घटनाओं को देखते हुए यूपी और हरियाणा से एक हजार महिला पुलिसकर्मियों को नई दिल्ली जिले में बुलाया गया है। यूपी और हरियाणा से आईं 500-500 महिला जवान पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों राज्यों से 500-500 महिला जवानों की तैनाती की गई है। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। प्रदर्शन स्थल पर जरूरत के हिसाब से की गई तैनाती सूत्रों के अनुसार, यूपी और हरियाणा से आई महिला पुलिसकर्मियों को प्रदर्शन स्थलों पर जरूरत के हिसाब से तैनात किया गया है। इसका मकसद प्रदर्शन के दौरान अव्यवस्था से निपटना और पुलिसकर्मियों से होने वाले दुर्व्यवहार पर लगाम लगाना है। गृह मंत्री अमित शाह हर स्थिती पर रख रहे अपनी नजर आपको बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से शनिवार को बुलाए गए मार्च को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस के अलावा सीएपीएफ की 220 से अधिक कंपनियां जंतर मंतर समेत बॉर्डर और अन्य इलाकों में तैनात की गई हैं। गृह मंत्री अमित शाह धरने-प्रदर्शन पर अपनी पैनी नजर रखे हुए हैं। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार पल-पल की जानकारी गृह मंत्री और देश के गृह सचिव गोविंद मोहन को दे रहे हैं। योजना है कि किसी प्रदर्शनकारी को जंतर मंतर तक नहीं पहुंचने देना है।  

भाजपा कार्यकर्ता से मारपीट पर इंदौर में बवाल, हजारों समर्थक थाने पहुंचे; 7 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

इंदौर  इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात जमकर हंगामा हुआ। पुलिसकर्मियों ने थाने के अंदर पंडित और भाजपा कार्यकर्ता के साथ मारपीट की। मामला विधायक गोलू शुक्ला के पंडित जयदीप दुबे और भाजपा कार्यकर्ता पंकज चौबे से जुड़ा है। घटना की जानकारी मिलते ही भाजपा कार्यकर्ता और विधायक समर्थक थाने पहुंच गए। देर रात तक थाने के बाहर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन चलता रहा।  हालात को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। शुरुआती जांच के बाद थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह कुशवाह, एक सब-इंस्पेक्टर समेत 7 पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया। पड़ोसियों से विवाद के बाद थाने पहुंचे थे पंडित मामले की शुरुआत जयदीप दुबे और उनके पड़ोसियों के बीच हुए विवाद से हुई। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई, जो मारपीट और अभद्र व्यवहार तक पहुंच गई। घटना के बाद जयदीप ने दोपहर करीब 3 बजे विधायक गोलू शुक्ला को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद विधायक ने एरोड्रम थाने के टीआई वीरेंद्र सिंह कुशवाह से चर्चा की। बताया जा रहा है कि टीआई ने शाम करीब 6 बजे जयदीप को थाने आने के लिए कहा था। इसके बाद जयदीप दुबे अपने साथी और भाजपा कार्यकर्ता पंकज चौबे के साथ शाम करीब 7 बजे थाने पहुंचे। शिकायत सुनने के बजाय की मारपीट  आरोप है कि थाने पहुंचने के बाद जयदीप दुबे और पंकज चौबे के साथ कुछ पुलिसकर्मियों ने अभद्रता की और मारपीट की। दोनों को थाने में ही बैठा लिया गया। घटना की जानकारी बाहर पहुंचने के बाद विधायक समर्थक और भाजपा कार्यकर्ता थाने पहुंचने लगे। रात होते-होते थाने के बाहर लोगों की भीड़ बढ़ गई। सूत्रों के मुताबिक, रात करीब 11 बजे तक 500 से 1,000 लोग जमा हो गए थे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों के व्यवहार पर नाराजगी जताई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए नारेबाजी की। सीसीटीवी फुटेज से जांच के दावे थाने के अंदर हुई घटना को लेकर सीसीटीवी फुटेज की भी चर्चा रही। सूत्रों का दावा है कि थाने में लगे कैमरों में घटनाक्रम रिकॉर्ड हुआ है। फुटेज में क्या दिखाई दे रहा है और उसमें मारपीट के आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए फुटेज का परीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचा मामला  घटना को लेकर देर रात तक पुलिस थाने के बाहर विरोध जारी रहा। बताया जा रहा है कि मामला भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल तक भी पहुंचा।  विधायक गोलू शुक्ला और अन्य नेताओं ने भी वरिष्ठ स्तर पर संपर्क किया। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने मामले में कार्रवाई की। रात करीब 3 बजे डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत और एडिशनल डीसीपी सुमित केरकट्टा मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और शुरुआती जांच के बाद कार्रवाई की जानकारी दी। TI समेत सात पुलिसकर्मी निलंबित मामले में एरोड्रम थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह कुशवाह और एक सब-इंस्पेक्टर समेत कुल सात पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। देर रात तक थाने के बाहर समर्थकों की मौजूदगी बनी रही। पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई के बाद मामले में आगे की जांच की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही गई। 

Orkut की वापसी की तैयारी? 12 साल बाद फिर चर्चा में आया पुराना सोशल मीडिया, जानें क्या है फाउंडर का प्लान

क्या आपको Orkut याद है? अगर आप मिलेनियल हैं तो पता ही होगा, लेकिन GenZ के लिए ये नाम नया लग सकता है. बता दें कि इसे सोशल मीडिया का OG प्लेटफॉर्म कहा जाता था. वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जहां दोस्तों के प्रोफाइल देखना, एक-दूसरे की प्रोफाइल पर मैसेज छोड़ना और अपनी पसंद की कम्युनिटी से जुड़ना इंटरनेट का खास एक्सपीरिएंस हुआ करता था. फीड की जगह स्क्रैप होते थे. लोग अपने दोस्तों को स्क्रैप लिखते थे, जिनके ज्यादा स्क्रैप होते थे वो पॉपुलर माने जाते थे. अब करीब 12 साल बाद Orkut एक बार फिर चर्चा में है. इसके फाउंडर Orkut Buyukkokten ने लोगों से एक नए सोशल नेटवर्क को बनाने के लिए सपोर्ट मांगा है. उनका मकसद ऐसा इंटरनेट तैयार करना है, जहां लाइक, व्यूज और एल्गोरिदम से ज्यादा अहमियत असली लोगों, दोस्ती और आपसी जुड़ाव को मिले. गूगल और Orkut कनेक्शन गूगल में काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर ऑर्कुट बायूकॉकटेन ने 2004 में Orkut नाम का प्लेटफॉर्म बनाया था. इसे गूगल के इंटर्नल प्रोजेक्ट के तौर पर तैयार किया गया था. हालांकि Orkut को गूगल ने 2014 में शटडाउन कर दिया, लेकिन Orkut.com के मालिक ऑर्कुट बायूकॉकटेन ही रहे, क्योंकि उन्हीं के पास इसके ट्रेडमार्क और राइट्स हैं. यह खबर ऐसे समय आई है, जब Instagram, Facebook और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर AI से तैयार कंटेंट, फर्जी प्रोफाइल और एल्गोरिदम के बढ़ते असर को लेकर चर्चा हो रही है. Orkut के फाउंडर का मानना है कि सोशल मीडिया लोगों को जोड़ने के बजाय उनका ध्यान खींचने और उन्हें ज्यादा समय तक स्क्रीन पर बनाए रखने पर केंद्रित हो गया है. ऐसे में वह इंटरनेट को फिर से इंसानों के करीब लाना चाहते हैं. बेहद पॉपुलर था Orkut Orkut की शुरुआत 2004 में हुई थी और दिलचस्प ये है कि इसके फाउंडर ने अपने ही नाम पर प्लेटफॉर्म का नाम रखा. इसके फाउंडर का नाम भी Orkut है. वो गूगल के इंजीनियर थे. ये भारत और ब्राजील में सबसे ज्यादा पॉपुलर हुआ. 2014 में इसे गूगल ने बंद कर दिया. क्या सच में वापस आ रहा है Orkut? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि Orkut की पुरानी वेबसाइट और उसके पुराने अकाउंट अभी दोबारा शुरू नहीं हुए हैं. फिलहाल इसकी ऑफिशियल वेबसाइट पर एक अभियान चल रहा है, जिसके जरिए लोगों से पूछा जा रहा है कि क्या वे असली लोगों, दोस्ती और कम्युनिटी पर आधारित नया सोशल नेटवर्क चाहते हैं. इस अभियान के लिए लोग अपना नाम दर्ज करा सकते हैं और एक सपोर्टर कार्ड भी पा सकते हैं. लेकिन नाम दर्ज कराने का मतलब यह नहीं है कि आपका पुराना अकाउंट वापस मिल जाएगा या नए प्लेटफॉर्म पर आपका यूजरनेम सुरक्षित हो गया है. कंपनी ने अभी यह भी नहीं बताया है कि नया सोशल नेटवर्क कब लॉन्च होगा. क्यों खास था Orkut? Orkut को जनवरी 2004 में लॉन्च किया गया था. इसे Google के इंजीनियर Orkut Buyukkokten ने बनाया था. उस दौर में भारत और ब्राजील जैसे देशों में यह काफी पॉपुलर हुआ. लोग अपनी प्रोफाइल बनाते थे, दोस्तों को जोड़ते थे और अपनी पसंद के सबजेक्ट पर बनी कम्युनिटी में बातचीत करते थे. इसकी खासियत सिर्फ दोस्तों की लिस्ट बनाना नहीं थी. यूजर्स एक-दूसरे की प्रोफाइल पर स्क्रैप यानी पब्लिक मैसेज छोड़ सकते थे और अपने दोस्तों के लिए टेस्टिमोनियल लिख सकते थे. कम्युनिटी में लोग फिल्मों, संगीत, कॉलेज, शहरों और अपनी रोजमर्रा की पसंद से जुड़े विषयों पर बातचीत करते थे. आज के सोशल मीडिया की तरह हर पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की होड़ उस समय इतनी बड़ी नहीं थी. Orkut पर लोगों को अपनी पसंद के समूहों में जुड़ने और एक-दूसरे से बातचीत करने का अलग अनुभव मिलता था. हालांकि, समय के साथ Facebook और दूसरे प्लेटफॉर्म ज्यादा लोकप्रिय हो गए. आखिरकार Google ने सितंबर 2014 में Orkut को बंद कर दिया. AI से क्यों परेशान हैं Orkut के संस्थापक? Orkut ने अपनी वेबसाइट पर लिखे खुले पत्र में आज के सोशल मीडिया के बदलते स्वरूप पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि सोशल नेटवर्किंग का असली मकसद लोगों को जोड़ना था, लेकिन अब कई प्लेटफॉर्म का जोर यूजर्स का ध्यान बनाए रखने पर है. उनके मुताबिक, AI से तैयार पोस्ट, बॉट्स और नकली तस्वीरों या वीडियो के बढ़ते इस्तेमाल से यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि स्क्रीन के दूसरी तरफ असली इंसान है या नहीं. सोशल मीडिया की खास बात यही थी कि लोग किसी दूसरे इंसान से जुड़ते थे. अगर यह भरोसा कमजोर होता है, तो ऑनलाइन बातचीत का अनुभव भी बदल सकता है. हालांकि, ऑर्कुट AI को पूरी तरह खारिज नहीं करते. उनकी सोच है कि AI का इस्तेमाल लोगों की जगह लेने के बजाय उन्हें नए दोस्त बनाने, पुराने दोस्तों को खोजने और अपनी पसंद की कम्युनिटी से जुड़ने में मदद करने के लिए होना चाहिए. यानी तकनीक का इस्तेमाल इंसानी रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए हो, न कि उनकी जगह लेने के लिए. क्या लोग सच में पुराने सोशल मीडिया को मिस कर रहे हैं? Orkut की वापसी की चर्चा के पीछे पुरानी यादें जरूर हैं, लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी जुड़ा है. क्या लोग आज के सोशल मीडिया से थक चुके हैं और ऐसा प्लेटफॉर्म चाहते हैं, जहां उन्हें हर समय ट्रेंडिंग पोस्ट, वायरल वीडियो और एल्गोरिदम से तय होने वाले कंटेंट के बीच न रहना पड़े? Orkut की आधिकारिक वेबसाइट पर चल रहे अभियान को दुनिया के कई देशों से समर्थन मिला है. रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 115 देशों के लोगों से 2.6 लाख से ज्यादा सपोर्ट दर्ज किए जा चुके थे. यह आंकड़ा लोगों की दिलचस्पी दिखाता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि नया सोशल नेटवर्क सफल होगा या सभी पुराने यूजर्स उस पर लौट आएंगे. किसी भी नए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए सिर्फ पुरानी यादें काफी नहीं होंगी. उसे यूजर्स की प्राइवेसी, फर्जी अकाउंट, ऑनलाइन सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन जैसी चुनौतियों का भी हल निकालना होगा. साथ ही यह भी देखना होगा कि लोग रोजमर्रा की जिंदगी में इसे इस्तेमाल करने के लिए क्यों चुनेंगे. अब आगे क्या होगा? फिलहाल Orkut की वापसी को एक शुरुआती पहल … Read more

बिहार में बाढ़ का कहर, टूटे तटबंधों से 5,472 करोड़ की क्षति; किसानों की फसलें डूबीं

 पटना  गंगा, गंडक, सोन एवं कोसी समेत बिहार की प्रमुख नदियों में कई वर्ष उपरांत रिकॉर्ड पानी आने से राज्य को दस हजार करोड़ रुपये से अधिक नुकसान हुआ है। इसमें आधे से अधिक क्षति जल संसाधन विभाग के तटबंधों के टूटने एवं क्षतिग्रस्त होने से हुई है। हालांकि, यह नुकसान का प्रारंभिक आकलन है। कई विभागों की अंतिम रिपोर्ट मिलना अभी शेष है। ऐसे में अंतिम आकलन के बाद नुकसान का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है। बाढ़ का कहर दो चरणों में देखने को मिला। पहले चरण में 26 अगस्त से 10 सितंबर के बीच बिहार की नदियों के राज्य से बाहर स्थित जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश हुई। इस दौरान 30 रेनगेज स्थलों पर औसतन 225 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गई। इसके कारण गंगा नदी ने दानापुर, गांधीघाट, बंकाघाट, पंडारक, सुल्तानगंज और एकचारी में अपने पुराने उच्चतम जलस्तर का रिकॉर्ड तोड़ दिया। दरधा नदी के कोल्हाचक में भी नया रिकॉर्ड बना। दूसरे चरण में 24 से 30 सितंबर के बीच नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश से गंडक नदी में पानी का दबाव काफी बढ़ गया। इस दौरान 13 घंटे तक पांच लाख क्यूसेक और 32 घंटे तक चार लाख क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया। गंडक नदी ने बगहा, डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज में उच्चतम जलस्तर का नया रिकॉर्ड बनाया। पानी के भारी दबाव के कारण नदी के छह स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हो गए। पहले चरण में 9617 करोड़ की क्षति पहले चरण की बाढ़ से 9617 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है। इसमें जल संसाधन विभाग ने तटबंधों के क्षतिग्रस्त होने से 5472 करोड़ रुपये की क्षति बताई है। आपदा प्रबंधन विभाग ने 2710 करोड़, ग्रामीण कार्य विभाग ने 1062 करोड़, कृषि विभाग ने 270 करोड़, पथ निर्माण विभाग ने 76 करोड़ और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने 27 करोड़ रुपये के नुकसान की सूचना दी है। वहीं, दूसरे चरण की बाढ़ से 1054 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन हुआ है। इसमें जल संसाधन विभाग की ओर से 1027.34 करोड़ और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की ओर से 26.81 करोड़ रुपये की क्षति बताई गई है। दोनों चरणों के विभागीय आकलन को जोड़ने पर नुकसान की राशि 10,671 करोड़ रुपये होती है। तटबंधों की मरम्मत के लिए मांगे करीब 1027 करोड़ गंडक नदी में तटबंध क्षतिग्रस्त होने से पश्चिम चंपारण के बगहा-एक, बैरिया और योगापट्टी, गोपालगंज के बैकुंठपुर तथा सारण के मकेर और पानापुर प्रखंड प्रभावित हुए। जल संसाधन विभाग ने क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत के लिए 28 करोड़ 65 लाख रुपये, चंपारण, तिरहुत एवं अन्य तटबंधों के सुदृढ़ीकरण के लिए 973 करोड़ 69 लाख रुपये और बाढ़ पूर्व मरम्मत के लिए 25 करोड़ रुपये की मांग की है। 82 हजार हेक्टेयर में फसल बर्बाद, 26 की मौत बाढ़ से कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कृषि विभाग ने 11 जिलों में 82 हजार 186 हेक्टेयर में फसल बर्बाद होने का अनुमान लगाया है। खेतों में पानी भरने और फसल डूबने से किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है। फसल क्षति का अंतिम आकलन होने के बाद प्रभावित किसानों को मिलने वाली सहायता का दायरा स्पष्ट होगा। दोनों चरणों की बाढ़ में राज्य में कुल 26 लोगों की मौत हुई है। पहले चरण में आठ और दूसरे चरण में 18 लोगों की जान गई। सारण में सर्वाधिक 15 लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा पश्चिम चंपारण में तीन, मुंगेर में चार, भोजपुर में दो और भागलपुर में दो लोगों की मौत हुई है। राज्य सरकार मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान दे रही है।