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टीम इंडिया के खिलाफ नहीं खेलेंगे विल ओ’रूर्के, ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज को ध्यान में रखकर लिया फैसला

नई दिल्ली भारत के खिलाफ शुरू होने वाली सीरीज से पहले न्यूजीलैंड को एक और बड़ा झटका लगा है। तेज गेंदबाज विल ओ'रूर्के सीरीज से बाहर हो चुके हैं। 25 साल के ओ'रूर्के बाईं हैमस्ट्रिंग और पिंडली की चोट से जूझ रहे हैं और फिलहाल रिहैब प्रक्रिया में हैं। न्यूजीलैंड क्रिकेट के मुताबिक ओ'रूर्के को आराम दिया जा रहा है। मैनेजमेंट उन्हें लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। दिसंबर-जनवरी में टीम को ऑस्ट्रेलिया में चार टेस्ट मैचों की बेहद अहम सीरीज खेलनी है। न्यूजीलैंड के हेड कोच निराश न्यूजीलैंड के मुख्य कोच रॉब वाल्टर ने कहा, 'यह निराशाजनक है कि विल को भारत के खिलाफ घरेलू मैदान पर इतने बड़े दौरे से बाहर होना पड़ा। वह वनडे और टेस्ट दोनों सीरीज में हमारी योजना का हिस्सा थे, लेकिन बातचीत के बाद हम सभी इस बात पर सहमत हुए कि उन्हें चोटों से उबरने के लिए कुछ और समय देना चाहिए। अगले कुछ महीनों में हमारे तेज गेंदबाजी संसाधन बहुत जरूरी होंगे, इसलिए हम विल की वापसी का बेहतर तरीका अपना रहे हैं। हम चाहते हैं कि वह दोबारा मैदान पर उतरने से पहले पूरी तरह फिट हो जाएं। अच्छा होगा कि वह दिसंबर के आखिर में प्लंकेट शील्ड में कैंटरबरी के लिए वापसी कर पाए और अगर सब ठीक रहा तो 9 दिसंबर को पर्थ में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट के लिए तैयार हो जाएंगे।' बेंगलुरु टेस्ट में झटके थे 7 विकेट विल ओ'रूर्के ने भारत के लिए टेस्ट में दमदार बॉलिंग की थी। 2024 में बेंगलुरु में भारत और न्यूजीलैंड के पहले टेस्ट मैच में उन्होंने कुल 7 विकेट लिए थे। पहली पारी में भारतीय टीम सिर्फ 46 रनों पर ऑलआउट हो गई थी। उसमें ओ'रूर्के 4 विकेट के थे। 14 मैचों के टेस्ट करियर में उनके 49 विकेट हैं। ओ'रूर्के का हालिया करियर चोटों से प्रभावित रहा है। वह पीठ में स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण सात महीने बाहर रहने के बाद इस साल अप्रैल में बांग्लादेश के व्हाइट-बॉल दौरे पर लौटे थे। जून में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ तीनों टेस्ट खेले, लेकिन नॉटिंघम में तीसरे टेस्ट के आखिरी दिन उनकी हैमस्ट्रिंग खिंच गई। उसके बाद से उन्होंने कोई मैच नहीं खेला है। अगस्त में ट्रेनिंग के दौरान पिंडली में खिंचाव आने से उनकी वापसी और टल गई।  

पलामू के किसानों को राहत, धान खरीद के बकाया 1.71 करोड़ रुपये भुगतान पर हाई कोर्ट का आदेश

रांची  झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की अदालत ने पलामू जिला के पंडवा प्रखंड में धान खरीद के बकाए भुगतान मामले में 104 किसानों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि जिन 104 किसानों पर धान खरीद में अनियमितता का कोई आरोप नहीं है, उन्हें बकाया राशि का भुगतान करने के लिए दो महीने के भीतर हाई कोर्ट में राशि जमा कराई जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन किसानों को धान की आपूर्ति के बदले पहले ही 50 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है और उनके पास आपूर्ति की रसीद भी है। ऐसे में बिना किसी ठोस आधार के उनका शेष भुगतान रोका नहीं जा सकता। अदालत ने शेष 24 किसानों के मामले में राज्य सरकार को जांच करने की छूट दी है। सरकार को एक महीने के भीतर जांच की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। यदि इन किसानों के खिलाफ निर्धारित समय में कार्रवाई शुरू नहीं होती या जांच पूरी नहीं की जाती है, तो उन्हें भी बकाया राशि का भुगतान करना होगा। इसको लेकर आशा प्रसाद की ओर से जनहित याचिका दाखिल की गई है। 128 किसानों का लगभग 1.71 करोड़ रुपये था बकाया याचिका में कहा गया था कि पंडवा प्रखंड के पात्रा पैक्स के माध्यम से किसानों ने सरकार को धान की आपूर्ति की थी। किसानों को 50 प्रतिशत राशि का भुगतान किया गया, लेकिन शेष 50 प्रतिशत यानी लगभग 1.71 करोड़ रुपये का भुगतान लंबे समय से लंबित था। किसानों को भुगतान नहीं होने के मामले में हाई कोर्ट ने 10 जुलाई 2024 को राज्य सरकार के आश्वासन के बाद बकाया राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया था। सरकार की ओर से बताया गया कि उपायुक्त, पलामू की जांच रिपोर्ट में पात्रा पैक्स के माध्यम से धान खरीद में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि 104 किसानों के बकाए की राशि दो महीने के भीतर अदालत में जमा कराई जाए. इसके बाद हाई कोर्ट की रजिस्ट्री सीधे किसानों के बैंक खातों में राशि हस्तांतरित करेगी। इसके लिए याचिकाकर्ता को किसानों की पहचान और बैंक खाते से संबंधित विवरण रजिस्ट्री को उपलब्ध कराना होगा।

बिहार के किसानों को PM किसान की अगली किस्त का इंतजार, जानें कब आएंगे ₹2,000 और कैसे चेक करें स्टेटस

पटना  भारत के सभी राज्यों सहित बिहार के लाखों किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त का इंतजार कर रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से अब तक 23 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। अब किसानों की नजर 24वीं किस्त पर है। हालांकि, अगली किस्त जारी होने की आधिकारिक तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। ऐसे में किसानों के लिए जरूरी है कि वे अपनी पात्रता और भुगतान का स्टेटस पहले ही जांच लें। 24वीं किस्त में मिल सकते हैं 4,000 रुपये? PM Kisan 4000 Rupees पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये तीन बराबर किस्तों में दिए जाते हैं। यानी हर किस्त में 2,000 रुपये मिलते हैं। जिन किसानों की पिछली किस्त किसी वजह से अटक गई थी, उन्हें बकाया राशि मिलने पर अगली किस्त के साथ कुल 4,000 रुपये मिल सकते हैं। हालांकि, यह भुगतान पात्रता और संबंधित किस्त की मंजूरी पर निर्भर करेगा। बिहार के किसान पहले चेक करें ये जरूरी बातें PM Kisan Beneficiary Status किस्त का पैसा समय पर पाने के लिए किसान अपनी e-KYC पूरी रखें, बैंक खाते से जुड़ी जानकारी जांचें और योजना में अपनी पात्रता सुनिश्चित करें। किसी तरह की गड़बड़ी होने पर भुगतान रुक सकता है। घर बैठे ऐसे चेक करें किस्त का स्टेटस     सबसे पहले पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट खोलें।     Know Your Status विकल्प पर क्लिक करें।     अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और स्क्रीन पर मांगी गई जानकारी भरें।     रजिस्टर्ड मोबाइल पर आए OTP को दर्ज करें। इसके बाद भुगतान की स्थिति और खाते में राशि भेजे जाने से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं। कब आएगी अगली किस्त? फिलहाल 24वीं किस्त की तारीख को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। इसलिए 20 अक्टूबर को पैसा आने की खबर को निश्चित न मानें। बिहार के किसान किसी भी अपडेट के लिए सरकारी पोर्टल पर नजर रखें और अपनी जानकारी दुरुस्त कर लें।  

टी20 में 249 रन भी नहीं बचा पाया भारत, गावस्कर ने शिवम दुबे और कुलदीप के इस्तेमाल पर जताई नाराजगी

रांची  भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी20 सीरीज के दूसरे मुकाबले के बाद सुनील गावस्कर ने श्रेयस अय्यर की कप्तानी पर सवाल खड़े किए हैं। एक सप्ताह पहले एनसीए के हेड वीवीएस लक्ष्मण ने श्रेयस की कप्तानी की जमकर सराहना की थी। इस समय भारतीय टीम एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर लौटी थी। वीवीएस लक्ष्मण ने कहा था कि श्रेयस ने दिखाया है कि उनके अंदर बेहतरीन कप्तान बनने की क्षमता है। अब वह 249 रन का बचाव करने में असफल रहे हैं, जबकि जापान के खिलाफ उनकी कप्तानी में ही भारत ने 32 रन का स्कोर डिफेंड किया था। भारत की हार पर पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने भारत के गेंदबाजी चयन पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मेहमान टीम के रिकॉर्ड चेज के दौरान 17वां ओवर फेंकने के लिए कुलदीप के बजाय अर्शदीप सिंह या मयंक यादव बेहतर विकल्प हो सकते थे। गावस्कर ने जियोस्टार पर कहा, 'मैं अर्शदीप या मयंक में से किसी एक को चुनता। हां, अर्शदीप ने अपने आखिरी ओवर में काफी रन दिए, लेकिन मयंक ने शुरुआती झटके दिए थे। जो विकेट गिरे थे, उनमें से उसने 3 लिए थे। उसका इकॉनमी रेट लगभग 12 प्रति ओवर था और उस समय वेस्टइंडीज को इससे ज्यादा की जरूरत थी। इसलिए, अगर उसने एक विकेट लिया होता, और कभी-कभी जब गेम आपके पक्ष में जा रहा होता है, तो कौन जानता है, आपको एक विकेट मिल जाता, भले ही वह एक अच्छी गेंद न हो।' दुबे को नौवां ओवर देने की जरूरत नहीं थी पूर्व भारतीय कप्तान ने नौवें ओवर में शिवम दुबे को गेंद देने के फैसले पर भी सवाल उठाया और कहा कि उस समय कुलदीप यादव ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकते थे। उन्होंने कहा, टएक बार जब आपको विकेट मिल जाता है, तो अचानक, विरोधी टीम बैकफुट पर आ जाती है। एक नए बल्लेबाज को आना पड़ता है। शायद यह कोशिश की जा सकती थी। मुझे लगता है कि उस समय नौवें ओवर में शिवम दुबे को गेंद देना ठीक नहीं था। जब बैट्समैन अभी भी अपनी नजरें जमा रहे थे, तो शायद कुलदीप को लाना एक बेहतर आइडिया होता।' 250 रन चेज करने में सफल रही वेस्टइंडीज की टीम भारत इस मैच में 249 रन का स्कोर डिफेंड करने में नाकाम रहा और वेस्टइंडीज ने 19.2 ओवर में 4 विकेट खोकर 252 रन बना लिए और 6 विकेट से जीत हासिल की। इसके साथ ही 5 मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर कर दी। मेहमान टीम का यह सफल चेज भारत के खिलाफ सबसे बड़ा चेज था। मयंक ने 3 विकेट लेकर भारत को शुरुआती ब्रेकथ्रू दिए, लेकिन मेजबान टीम वेस्टइंडीज को मोमेंटम बनाने से नहीं रोक सकी। कप्तान शे होप ने 45 गेंदों पर नाबाद 102 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई। उनके साथ शेरफेन रदरफोर्ड ने 37 गेंदों पर 84 रन बनाए। दोनों ने 120 रन की अहम साझेदारी हुई।

बालोतरा के प्रसिद्ध रणछोड़राय मंदिर को मिले ₹4.52 करोड़, दो मंजिला भवन और म्यूजिकल फाउंटेन बनेंगे

बालोतरा  राजस्थान के बालोतरा जिले के प्रसिद्ध सनातनी तीर्थ खेड़ श्री रणछोड़राय मंदिर में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए विकास कार्यों की राह खुल गई है। देवस्थान विभाग की ओर से तीर्थ के विकास के लिए 4 करोड़ 52 लाख रुपए का बजट स्वीकृत किया गया है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग ने कार्यादेश जारी कर दिए हैं। नवरात्र की शुरुआत में निर्माण कार्य शुरू होगा। एक वर्ष में काम पूरा होने पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के ठहरने से लेकर वाहनों की पार्किंग तक की सुविधाओं का विस्तार होगा। दो मंजिला भवन, म्यूजिकल फाउंटेन और चारदीवारी सहित विभिन्न विकास कार्यों से प्राचीन तीर्थ का स्वरूप निखरेगा। सदियों पुराना तीर्थ, लाखों श्रद्धालुओं की आस्था खेड़ स्थित रणछोड़राय तीर्थ कई शताब्दियों पुराना है। यह जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल होने के साथ लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में भगवान रणछोड़राय की आदमकद संगमरमर की प्रतिमा सहित अन्य देव प्रतिमाएं स्थापित हैं। राधाष्टमी पर यहां वार्षिक मेले का आयोजन होता है। इसके अलावा विभिन्न धार्मिक आयोजनों में भी श्रद्धालु उत्साह से भाग लेते हैं। तीर्थ ट्रस्ट मंडल की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समय-समय पर विकास कार्य करवाए जाते रहे हैं। ठहरने से लेकर पार्किंग तक की सुविधाओं का विस्तार देवस्थान विभाग की ओर से स्वीकृत बजट से मंदिर परिसर में यात्रियों के ठहरने के लिए सर्वसुविधायुक्त दो मंजिला भवन का निर्माण करवाया जाएगा। इसमें कुल 16 कमरे होंगे। इसके अलावा श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए पार्किंग विकसित की जाएगी। मंदिर परिसर में म्यूजिकल फाउंटेन लगाने के साथ चारदीवारी का निर्माण भी करवाया जाएगा। अन्य आवश्यक विकास कार्य भी प्रस्तावित हैं। इन सुविधाओं के विकसित होने से धार्मिक आयोजनों और मेलों के दौरान मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी। श्रद्धालुओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं श्री खेड़ रणछोड़राय मंदिर शताब्दियों पुराना प्राचीन तीर्थ है। यह लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इसके विकास के लिए सरकार की ओर से बजट स्वीकृत किया जाना खुशी की बात है। प्रस्तावित कार्य पूरे होने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। भंवरलाल टावरी, अध्यक्ष, खेड़ रणछोड़राय मंदिर ट्रस्ट मंडल इनका कहना है बजट स्वीकृति के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी कर कार्यादेश जारी किए गए हैं। नवरात्र की शुरुआत में कार्य का शुभारंभ किया जाएगा। निर्माण कार्य प्राथमिकता से करवाया जाएगा।  गौतम कुमार, कनिष्ठ अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, बालोतरा

शैली सिंह का बड़ा बयान, लंबी कूद के नाप पर विवाद का फैसला स्वीकारेंगी; अब अगली प्रतियोगिताओं पर नजर

 नई दिल्ली लंबी कूद की एथलीट शैली सिंह एशियाई खेलों में विवादास्पद चौथे स्थान पर रहने की निराशा से उबरकर आगामी प्रतियोगिताओं पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं और वह भविष्य में भी ट्रिपल जंप में अपना भाग्य आजमाना चाहती हैं। जापान में एशियाई खेलों में इस 22 वर्षीय खिलाड़ी ने महिलाओं की लंबी कूद में 6.42 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ चौथा स्थान हासिल किया। हालांकि, भारत ने उनके चौथे प्रयास के नाप के तरीके पर आपत्ति जताई थी। इसे आधिकारिक तौर पर 6.41 मीटर दर्ज किया गया था लेकिन भारत ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने कूद की लंबाई कम नापी थी। खेल पंचाट में पहुंचा मामला भारत ने प्रतियोगिता के दौरान विरोध दर्ज किया था जिसको खारिज कर दिया गया। इसके बाद भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने खेल पंचाट के सामने यह मामला उठाया। शैली में कहा कि जो कुछ हुआ वो मेरे लिए बिल्कुल नया था। उस समय मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया। मुझे इससे उबरने में कई दिन लग गए। मैं इतने साल से मेहनत कर रही हूं लेकिन अगर मैं इसके बारे में ही सोचती रहूंगी तो उससे किसी तरह का फायदा नहीं होगा। मुझे इस घटना को भूलना होगा। फैसला स्वीकार होगा उन्होंने कहा कि हमने वहां भी आपत्ति दर्ज कराई थी और मामला अभी चल रहा है। फैसला जो भी हो मैं उसे स्वीकार करूंगी। शैली ने कहा कि वह उस घटना में उलझे रहने के बजाय आगामी चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मुझे आगामी प्रतियोगिता के लिए भी तैयार होना है। इसलिए मुझे पुरानी बातों को पीछे छोड़ना होगा और नई चीजों को स्वीकार करना होगा।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 के पश्चात कृषि क्षेत्र में आए अभूतपूर्व परिवर्तन से प्रदेशवासियों को कराया अवगत

प्रदेश की अर्थव्यवस्था की ताकत और समृद्धि का आधार है 'अन्नदाता': सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 के पश्चात कृषि क्षेत्र में आए अभूतपूर्व परिवर्तन से प्रदेशवासियों को कराया अवगत किसानों को बीज से बाजार तक की सुविधा उपलब्ध करा रही डबल इंजन सरकार: मुख्यमंत्री 80 लाख से अधिक किसानों से खरीदा गया 519 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा धान, ₹1,03,833 करोड़ से अधिक भुगतान: मुख्यमंत्री 2017 से पहले कर्ज में डूबा था किसान, अब मिल रही 'सम्मान निधि': सीएम योगी लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 के बाद कृषि क्षेत्र में आए अभूतपूर्व परिवर्तन से प्रदेशवासियों को अवगत कराया। उन्होंने अन्नदाता किसान को प्रदेश की अर्थव्यवस्था की ताकत और समृद्धि का आधार भी बताया।  किसान को बीज से लेकर बाजार तक की सुविधा मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के यशस्वी मार्गदर्शन में प्रदेश की डबल इंजन सरकार आज अन्नदाता किसान को बीज से लेकर बाजार तक की सुविधा उपलब्ध करा रही है। वर्ष 2017 से पहले जो अन्नदाता किसान कर्ज, बदहाली व लाचारी में डूबा रहता था और बिचौलियों के चक्कर लगाने को मजबूर था, आज वही अन्नदाता किसान कर्ज से मुक्त होकर उन्नत बीज, सिंचाई, और डीबीटी के माध्यम से एमएसपी एवं पीएम सम्मान निधि का लाभ ले रहा है। 8 से बढ़कर 18 प्रतिशत हुई कृषि विकास दर  मुख्यमंत्री ने बताया कि दशकों से लटकी सिंचाई परियोजनाएं पूर्ण हुई हैं। प्रदेश, देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21 प्रतिशत का योगदान कर रहा है। कृषि विकास दर 8 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हुई है। दुग्ध, गन्ना, गेहूं आदि के उत्पादन में यूपी देश में प्रथम स्थान पर है। धान किसानों को किया गया ₹1,03,833 करोड़ से अधिक का भुगतान  मुख्यमंत्री ने बताया कि अन्नदाता किसान की मेहनत का सम्मान एवं उसकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करते हुए वर्ष 2017 से मार्च 2026 के बीच प्रदेश में 80 लाख से अधिक किसानों से 519 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद की गई और ₹1,03,833 करोड़ से अधिक का सीधा भुगतान किया गया। उसी प्रतिबद्धता के साथ इस बार भी धान के समर्थन मूल्य में 71 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।  किसान की खुशहाली सरकार की प्राथमिकता मुख्यमंत्री ने डबल इंजन सरकार के लिए अन्नदाता किसान को प्रदेश की अर्थव्यवस्था की ताकत और समृद्धि का आधार बताया। उन्होंने कहा कि इसीलिए अन्नदाता किसान के अधिकार की रक्षा और उसकी खुशहाली हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

जगतपुरा के गंगा मार्ग पर चला JCB, दुकानें और मकान हटे; हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई

जयपुर सड़क 200 फीट थी, लेकिन अतिक्रमण के कारण एक हिस्से में रास्ता ही सिमट गया। नतीजतन वाहनों का दबाव बढ़ा और हादसों का खतरा बना रहा। आखिरकार जगतपुरा के इंदिरा गांधी नगर स्थित कुंदनपुरा के गंगा मार्ग पर राजस्थान आवासन मंडल ने कार्रवाई की। मंडल अधिकारियों के मुताबिक, हाईकोर्ट के आदेश के बाद आपसी सहमति से निर्माणकर्ताओं ने अपने निर्माण हटाए। करीब 450 मीटर लंबी लेन में जेसीबी से 20 से अधिक स्ट्रक्चर हटाए गए। इनमें आठ दुकानें, 15 ढांचे और तीन से चार मकान शामिल थे। सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई कार्रवाई दोपहर 1.30 बजे तक चली। हाईकोर्ट की डबल बेंच के आदेश की पालना में हुई कार्रवाई से सड़क विकास का रास्ता साफ हुआ। इससे पहले करीब दो साल पहले भी इसी स्थान से 60 स्ट्रक्चर हटाए गए थे। कार्रवाई शांतिपूर्ण इससे पहले बोर्ड प्रशासन ने नोटिस जारी कर जगह खाली करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद कुछ निर्माणकर्ताओं ने सुबह से ही सामान और निर्माण हटाने शुरू कर दिए। हाउसिंग बोर्ड के उप आवासन आयुक्त राजेश व्यास ने बताया कि गंगा मार्ग इंदिरा गांधी नगर के मास्टर प्लान की महत्वपूर्ण सड़क है। पुनर्वास योजना के तहत अब तक 25 आवेदन प्राप्त हुए हैं। संबंधित लोगों से शपथ पत्र भी लिए गए हैं। पात्र प्रभावितों को इंदिरा गांधी नगर के सेक्टर-5 में लॉटरी के माध्यम से व्यावसायिक और आवासीय भूखंड व दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसकी कवायद शुरू हो चुकी है। व्यास ने बताया कि पूरे गंगा मार्ग का निर्माण 2024 में किया गया था, लेकिन 450 मीटर का यह हिस्सा अधूरा छूट गया था। यह सड़क 60 मीटर चौड़ी है। यहां शांतिपूर्ण तरीके से कार्रवाई पूरी कर ली गई। जगतपुरा में सीबीआइ फाटक से गोनेर रोड रेलवे ओवरब्रिज तक बनी 200 फीट रोड पर फाटक से आगे अतिक्रमण के कारण एक तरफ का रास्ता बंद था। ऐसे में वाहनों को दूसरी लेन से गुजरना पड़ता था। सेक्टर रोड पर एक ही तरफ सड़क होने से वाहनों का दबाव बढ़ रहा था और रात के समय आए दिन दुर्घटनाएं हो रही थीं। मास्टर प्लान के मुताबिक, यह सड़क पूरी तरह 200 फीट चौड़ी प्रस्तावित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क बनने से आवागमन सुगम होगा और हादसों की आशंका कम होगी। उन्होंने मंडल से जल्द से जल्द सड़क निर्माण पूरा करने की मांग की। पत्रिका ने भी पिछले कई अंकों में इस मार्ग की समस्या को प्रमुखता से उठाया था। सर्विस लेन में अब भी कुछ निर्माण शेष कार्रवाई के बाद भी इस रास्ते पर कुछ स्ट्रक्चर के हिस्से नहीं हटाए गए हैं। इससे आगे सर्विस लेन बनाने में परेशानी आ सकती है। अधिकारियों के अनुसार, आपसी सहमति से संबंधित निर्माणकर्ताओं को मकानों के शेष दो से तीन फीट हिस्से स्वयं हटाने के लिए समय दिया गया है। सड़क विकास कार्य शुरू होने पर इन्हें भी हटाया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि गंगा मार्ग के इस कैरिज एरिया में कोई व्यक्ति निवास नहीं कर रहा था।

बिहार के छोटे गांव से शंघाई तक का सफर, दिलखुश की कामयाबी पर भावुक हुए माता-पिता

कटिहार   छोटा सा गांव, पगडंडियों का डगर और बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव, लेकिन सीने में पल रहे सपने गगनचुंबी थे। कटिहार जिले के कदवा प्रखंड अंतर्गत सुदूरवर्ती सिहपुर गांव में आज गर्व और उल्लास की लहर है। इस मिट्टी के लाल मो. दिलखुश ने चीन के शंघाई में आयोजित विश्व कौशल प्रतियोगिता (वर्ल्ड स्किल्स) में अपनी असाधारण तकनीकी दक्षता का परचम लहराकर न केवल अपने साधारण परिवार, बल्कि पूरे बिहार और देश का मान अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थापित कर दिया है। प्रतियोगिता से लौटने के बाद नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई आत्मीय मुलाकात और पीएम द्वारा हौसला अफजाई के बाद दिलखुश की यह उपलब्धि गांव-गांव तक प्रेरणा की नई मिसाल बन चुकी है। जिस गांव में बुनियादी शिक्षा हासिल करने के लिए भी बच्चों को दूसरे गांव का रुख करना पड़ता है, वहां के एक युवा की वैश्विक कामयाबी अब सीमांचल के सुदूर इलाकों में शिक्षा, हुनर और सुनहरे भविष्य की नई उम्मीद जगा रही है। माता-पिता की आंखों में छलके गर्व के आंसू दिलखुश की इस ऐतिहासिक सफलता की सबसे मर्मस्पर्शी और भावुक तस्वीर उसके माता-पिता के आंसुओं और शब्दों में झलकती है। बेटे की उपलब्धि पर गदगद पिता मोहम्मद इमामुद्दीन कहते हैं, "जीवन भर जो मेहनत और मजदूरी की, उसका फल आज मिल गया। अब लोग मुझे मेरे नाम से नहीं, बल्कि दिलखुश के अब्बा के रूप में पहचानते हैं। किसी भी पिता के लिए इससे बड़ा सम्मान और फख्र का लम्हा क्या हो सकता है!" पिता बोले- बेटे के नाम से मिली पहचान वहीं, मां दिलबरी खातून की जुबां पर बेटे के लिए सिर्फ दुआएं हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि इस खुशी को लफ्जों में बयां नहीं किया जा सकता। तीन भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटे दिलखुश ने कभी गरीबी और तंगहाली को अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया। उसने अपनी अटूट लगन से पिता के पसीने का मोल चुकाया है और गांव के सपनों को नई परवाज दी है। गांव में स्कूल तक नहीं दिलखुश की कामयाबी के पीछे कड़े संघर्ष की ऐसी दास्तान है, जो अभावों में जीने वाले हर नौजवान को हिम्मत देती है। सिहपुर गांव में स्कूल की सुविधा नहीं होने के कारण उसे अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा के लिए रोजाना ढाई किलोमीटर दूर बलिया बेलौन जाना पड़ता था। संघर्ष से शंघाई तक: मो. दिलखुश की प्रोफाइल     नाम: मोहम्मद दिलखुश     गांव व प्रखंड: सिहपुर, कदवा प्रखंड, जिला- कटिहार (बिहार)।     माता-पिता: मां दिलबरी खातून एवं पिता मोहम्मद इमामुद्दीन (साधारण किसान)।     परिवार: तीन भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटे।     शुरुआती चुनौती: गांव में विद्यालय न होने के कारण रोज ढाई किलोमीटर दूर बलिया बेलौन पैदल जाकर पढ़ाई की।     वैश्विक मंच: चीन के शंघाई में आयोजित 'वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता' में भारतीय दल का प्रतिनिधित्व और टॉप-10 में स्थान।     ताजा उपलब्धि: प्रधानमंत्री आवास में पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा विशेष मुलाकात और उत्साहवर्धन। ढाई किमी दूर पैदल जाकर पूरी की तालीम पिता बताते हैं कि कड़ी धूप हो या बरसात की कीचड़, दिलखुश रोजाना 15 से 20 मिनट तेज कदमों से चलकर स्कूल पहुंचता था। जहां बुनियादी सुविधाओं की कमी अक्सर ग्रामीण प्रतिभाओं का दम तोड़ देती है, वहीं दिलखुश ने पढ़ाई और सीखने की ललक को अपना सबसे बड़ा संबल बनाया। उसने यह सिद्ध कर दिया कि मंजिल की राह में दूरियां और आर्थिक तंगहाली रुकावट बन सकती हैं, लेकिन मजबूत संकल्प के आगे कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। एक बेटे की कामयाबी से पूरे इलाके में जगी उम्मीद की नई किरण गांव के मुखिया मिराज आलम, पूर्व मुखिया मो. शाहिद, प्रदीप कुमार दास, मो. शमसी और पूर्व मुखिया अब्दुल रऊफ बताते हैं कि इमामुद्दीन ने बेहद तंगहाली और कठिनाइयों के बीच अपने बच्चों की परवरिश की। दिलखुश बचपन से ही मेधावी और शांत स्वभाव का था। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि दिलखुश की यह वैश्विक उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह पूरे पिछड़े इलाके की सोच बदलने में क्रांतिकारी भूमिका निभाएगी। अब गांव के बच्चों के सामने एक ऐसा रोल मॉडल मौजूद है, जिसे देखकर वे भी पगडंडियों से निकलकर आसमान छूने और तकनीकी हुनर से तकदीर संवारने का सपना देख सकेंगे। दिलखुश का यह सफर सिर्फ एक ग्रामीण लड़के की निजी कामयाबी का दस्तावेज नहीं है। यह उस पिता के अनथक श्रम और त्याग की कहानी है, जिसने फटेहाल होकर भी बच्चों के हाथों से कलम नहीं छूटने दी। यह उस सुदूर गांव की दास्तान है, जहां विकास की रोशनी देर से पहुंची, लेकिन हुनर का उजाला पहले जगमगा उठा। अब पीढ़ियों की तकदीर बदलने की आस जिस पिता को आज अपने बेटे के नाम से सामाजिक सम्मान मिल रहा है, उसी बेटे की कामयाबी अब आने वाली पीढ़ियों की दिशा तय करेगी। सिहपुर के लिए दिलखुश की यह उड़ान यह संदेश देती है कि संसाधनों की कमी कभी प्रतिभा की सीमा तय नहीं कर सकती। लगन, शिक्षा और हुनर जब एक साथ मिलते हैं, तो इतिहास के पन्नों पर स्वर्णिम अक्षर खुद-ब-खुद लिखे जाते हैं।  

उत्तर प्रदेश में ग्रीन एविएशन फ्यूल बनाने पर जोर, निवेशकों को 10 साल तक बिजली शुल्क में 100% छूट

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में कृषि अवशेषों व कचरे से हवाई जहाज के लिए हरित ईंधन तैयार किया जाएगा। कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश सतत विमानन ईंधन (एसएएफ) विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2026 को लागू करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। नीति के तहत कृषि अवशेषों से किसानों की आय बढ़ाने व विमानन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करने की कोशिश की जाएगी। साथ ही धान की भूसी, गेहूं का भूसा, गन्ने की खोई, तिलहन और कचरे का उपयोग कर विमानन ईंधन के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा। इकाइयों को मिलेंगी ब्याज सब्सिडी जैसी सुविधाएं नीति में निवेश के आधार पर एसएएफ विनिर्माण इकाइयों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। 200 करोड़ से 500 करोड़ रुपये तक के पूंजी निवेश वाली इकाइयों को वृहद श्रेणी, 500 करोड़ से 1500 करोड़ रुपये तक के निवेश वाली इकाइयों को मेगा और 1500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली इकाइयों को अल्ट्रा मेगा श्रेणी में रखा जाएगा। नीति के तहत इकाइयों को स्टांप शुल्क, भू-उपयोग परिवर्तन प्रभार और विकास शुल्क में छूट, राज्य वस्तु एवं सेवा कर की प्रतिपूर्ति, ब्याज सब्सिडी तथा कौशल विकास अनुदान जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। निवेशकों को बिजली शुल्क में मिलेगी शत-प्रतिशत छूट इसके अलावा, 10 वर्षों तक बिजली शुल्क में 100 प्रतिशत छूट, पेटेंट पंजीकरण शुल्क की प्रतिपूर्ति और भूमि आवंटन की स्थिति में शुरुआती भूमि सब्सिडी का भी प्रविधान किया गया है। गन्ने की खेती और एथेनाल उत्पादन में अग्रणी होने के कारण उत्तर प्रदेश में दूसरी पीढ़ी के जैव ईंधन और अल्कोहल से विमानन ईंधन बनाने वाली तकनीकों के विकास की व्यापक संभावना हैं। नीति के क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। आवेदनों के मूल्यांकन के लिए निदेशक स्तर पर समिति गठित होगी। यह नीति पांच वर्षों तक या नई नीति लागू होने तक प्रभावी रहेगी।