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मेट्रो विस्तार का बड़ा प्लान: दिल्ली-NCR में 18 नए कॉरिडोर, जुड़ेंगे 5 शहर

नई दिल्ली  दिल्ली और एनसीआर के लाखों यात्रियों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। जल्द ही मेट्रो नेटवर्क का दायरा और भी व्यापक होने जा रहा है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने शहर और उससे जुड़े इलाकों में 18 नए मेट्रो कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। यह परियोजना सिर्फ कनेक्टिविटी नहीं बढ़ाएगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। दो चरणों में होगा मेट्रो विस्तार इस महापरियोजना को दो चरणों में विभाजित किया गया है: फेज-5A के तहत 3 कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा चुकी है। फेज-5B में बाकी 15 कॉरिडोर को शामिल किया गया है, जिसकी प्रक्रिया प्रगति पर है। इस पूरे विस्तार को केंद्र सरकार के नेशनल मोबिलिटी प्लान के तहत आर्थिक सहायता से क्रियान्वित किया जा रहा है। दिल्ली-NCR के 5 बड़े शहर होंगे जुड़ाव का हिस्सा नई योजना के तहत गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और बहादुरगढ़ जैसे एनसीआर के प्रमुख शहरों को भी सीधे दिल्ली मेट्रो से जोड़ा जाएगा। गाजियाबाद में सबसे ज्यादा-5 नए मेट्रो रूट्स की योजना बनाई गई है, जो निम्नलिखित हैं: -वैशाली से मोहन नगर -नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी से साहिबाबाद -मयूर विहार फेज-3 से लोनी बॉर्डर -नया बस अड्डा से गाजियाबाद रेलवे स्टेशन -गोकुलपुरी से अर्थला -इसके अलावा कुछ अन्य प्रस्तावित रूट्स: -द्वारका सेक्टर-21 से उद्योग विहार, गुरुग्राम -तुगलकाबाद से नोएडा सेक्टर-142 -राजा नाहर सिंह से पलवल -बहादुरगढ़ से असुधा कुल नेटवर्क में 400+ किमी का इजाफा DMRC के मुताबिक, इन 18 प्रस्तावित रूट्स को मिलाकर करीब 404 किलोमीटर का नया नेटवर्क तैयार किया जाएगा। योजना के अनुसार, मेट्रो स्टेशनों को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि वो घर से सिर्फ 500 मीटर दूरी पर हों, जिससे आम जनता की सुविधा में जबरदस्त सुधार आएगा।    कहां तक पहुंचा फेज-4? वर्तमान में फेज-4 के तहत 6 कॉरिडोर में से 3 पर काम तेजी से चल रहा है: तुगलकाबाद से एयरोसिटी इंद्रप्रस्थ से आरके आश्रम मौजपुर से मजलिस पार्क तीनों मिलाकर कुल 65.15 किलोमीटर लंबे होंगे। साथ ही, इन रूट्स पर आधुनिक तकनीक से अंडरग्राउंड और एलिवेटेड स्टेशन बनाए जा रहे हैं। जैसे: इंद्रप्रस्थ से आरके आश्रम: 9.5 किमी लंबा, 8 भूमिगत स्टेशन एयरोसिटी से टर्मिनल: 2.3 किमी, 1 स्टेशन तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज: 4 किमी, 3 एलिवेटेड स्टेशन क्या मिलेगा फायदा? दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक जाम में भारी कमी यात्रियों को घर से मेट्रो तक आसान एक्सेस रोजगार के हजारों नए अवसर रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर  

Su-57 अब भारत में होगा मैन्युफैक्चर, अमेरिकी F-35 की डील पर मंडराया खतरा

नई दिल्ली चीन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्‍ट्रपत‍ि व्‍लाद‍िमीर पुत‍िन की मुलाकात देख अमेर‍िका परेशान हो ही रहा था क‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप की नींदें उड़ाने वाली एक और खबर आ गई. एक रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस अपने पांचवीं पीढ़ी के सबसे एडवांस्ड लड़ाकू विमान सुखोई Su-57 को भारत में बनाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है. यह कदम न केवल दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेगा बल्कि अमेरिका के F-35 लड़ाकू विमान को भारत में बेचने की कोशिशों पर भी सीधा असर डालेगा. डोनाल्‍ड ट्रंप भारत को F-35 फाइटर जेट बेचा चाहते थे, उसी के ल‍िए जंग लड़ रहे थे, लेक‍िन अगर रूस ये फैसला ले लेता है तो उनके सपने चकनाचूर हो जाएंगे. भारतीय वायुसेना लंबे समय से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की जरूरत पर जोर देती रही है. सूत्रों के मुताबिक, भारत को फिलहाल कम से कम दो से तीन स्क्वॉड्रन एडवांस्ड फाइटर जेट्स की आवश्यकता है. इस रेस में एक ओर है रूस का Su-57 और दूसरी तरफ है अमेरिका का F-35.रूस ने साफ संदेश दिया है कि वह न केवल भारत को ये विमान बेचना चाहता है, बल्कि इन्हें यहीं भारत में बनाने के लिए तैयार है. इस परियोजना में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अहम भूमिका निभा सकती है, जो पहले से ही नासिक में Su-30 MKI का निर्माण करती है. निवेश और लागत पर मंथन रूसी एजेंसियां इस वक्त इस बात का आकलन कर रही हैं कि भारत में Su-57 का उत्पादन करने के लिए कितनी बड़ी निवेश राशि की जरूरत होगी. अगर यह प्रोजेक्ट शुरू होता है, तो इसका फायदा दोहरा होगा. भारत को दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान मिलेंगे. इन विमानों की लागत भी कम हो जाएगी, क्योंकि निर्माण यहीं पर होगा. भारत में पहले से कई फैक्ट्रियां हैं जो रूस के बनाए सैन्य उपकरण तैयार करती हैं. इन्हें Su-57 प्रोडक्शन के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है. अमेरिका की टेंशन: F-35 पर ग्रहण ये खबर ऐसे वक्त आई है जब अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड वॉर जैसी स्थिति बनी हुई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत पर कई सेक्टरों में 50% तक का टैरिफ और रूसी तेल आयात का हवाला देते हुए अतिरिक्त 25% शुल्क लगाया है. अमेरिका लगातार भारत पर दबाव डाल रहा है कि वह F-35 खरीदे. लेकिन अगर भारत और रूस मिलकर Su-57 का निर्माण करने लगते हैं, तो यह ट्रंप की योजना पर पानी फेर देगा. यह साफ संकेत होगा कि भारत अपनी रक्षा ज़रूरतों में रूस के साथ गहरी साझेदारी रखता है. S-400, S-500 और अब Su-57 भारत ने हाल के वर्षों में रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा है और अब उसने S-500 में भी रुचि दिखाई है. रूस चाहता है कि इसके साथ ही भारत Su-57 को भी अपनी वायुसेना का हिस्सा बनाए. दिलचस्प बात यह है कि भारत पहले भी रूस के फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट (FGFA) प्रोग्राम का हिस्सा रह चुका है. हालांकि, तकनीकी और वित्तीय मतभेदों के कारण भारत ने इस प्रोजेक्ट से दूरी बना ली थी. लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात और अमेरिका-भारत तनाव ने एक बार फिर इस प्रोजेक्ट को ज़िंदा कर दिया है. भारत का अपना फाइटर प्लान रूस के साथ यह संभावित डील ऐसे समय में चर्चा में है जब भारत खुद भी अपना स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाने की तैयारी कर रहा है. इस विमान का पहला टेस्ट फ्लाइट 2028 तक होने की उम्मीद है और इसे 2035 तक वायुसेना में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है. इसका मतलब है कि अगले 10 साल भारत के लिए बेहद अहम हैं. तब तक उसे या तो किसी बड़े साझेदार की मदद से फिफ्थ जेनरेशन जेट्स की ज़रूरत पूरी करनी होगी या फिर वायुसेना में बड़ी कमी का सामना करना पड़ेगा. भारत के लिए बड़ा मौका     अगर Su-57 का उत्पादन भारत में होता है तो इसके कई फायदे होंगे.     भारत को मिलेंगे अत्याधुनिक स्टेल्थ फाइटर जेट्स.     रक्षा निर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे.     भारत रूस के साथ रक्षा साझेदारी को और गहरा करेगा.     अमेरिका के दबाव और शर्तों से बचकर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखेगा.  

व्यावहारिक प्रशिक्षण से कार्यकुशलता में आएगा निखार, गांव में मिलेगा रोजगार- कलेक्टर

अम्बिकापुर ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार निर्मित करने की दिशा में सरगुजा जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। अंबिकापुर के दरिमा ग्राम पंचायत में जिला प्रशासन एवं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) के संयुक्त तत्वावधान में 30 दिवसीय राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण में 16 महिलाओं को रानी मिस्त्री तथा 19 पुरुषों को राजमिस्त्री का हुनर सिखाया गया। कुल 35 प्रतिभागियों ने व्यावहारिक और तकनीकी ज्ञान अर्जित किया। आयोजित समापन समारोह में कलेक्टर श्री विलास भोसकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ जिला पंचायत सीईओ श्री विनय कुमार, अग्रणी बैंक प्रबंधक श्री विकास यादव, सेंट्रल बैंक के रिजनल हेड श्री रणधीर सिंह, आरसेटी डायरेक्टर श्री श्याम किशोर गुप्ता, जनपद पंचायत सीईओ श्री राजेश सेंगर, साक्षर भारत जिला परियोजना अधिकारी श्री गिरीश गुप्ता और प्रशिक्षण समन्वयक सुश्री तमना निशा मौजूद रहीं। समापन समारोह में कलेक्टर श्री भोसकर ने प्रशिक्षार्थियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनके अनुभव और सीखी गई तकनीकों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि व्यावहारिक प्रशिक्षण से कार्यकुशलता बेहतर होती है। इससे न केवल आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि काम की गुणवत्ता और गति भी सुधरती है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आपके पंचायत में सर्वाधिक आवास स्वीकृत हुए हैं। इन्हें समय पर पूरा करना अब आपकी जिम्मेदारी है। यह प्रशिक्षण आपको केवल श्रमिक नहीं, बल्कि कुशल मिस्त्री बनाता है। इस प्रशिक्षण से गांव में ही पर्याप्त काम और सम्मानजनक आमदनी का अवसर मिलेगा। प्रशिक्षणार्थियों ने बताया कि पहले वे सामान्य मजदूरी करते थे, लेकिन प्रशिक्षण के बाद उन्होंने नाप-जोख, ईंट की चिनाई, प्लास्टरिंग, लेवलिंग, लेआउट और भवन निर्माण की नई तकनीकें सीखीं। अब वे आत्मविश्वास के साथ स्वयं को कुशल राजमिस्त्री कह सकते हैं। समापन कार्यक्रम के अवसर पर सभी प्रतिभागियों को राजमिस्त्री के टूल किट भी वितरित किए गए। इनमें भवन निर्माण कार्य हेतु आवश्यक औजार शामिल थे। इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण अब अपने सीखे हुए कौशल का उपयोग स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्यों में करेंगे। इससे न केवल उन्हें रोजगार मिलेगा, बल्कि गांव की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी। जिला प्रशासन की इस पहल ग्रामीण आत्मनिर्भर और आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

शून्य आधारित बजटिंग और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट वाला पहला राज्य बनेगा मध्यप्रदेश

नई बजटिंग प्रणाली से होगा मध्यप्रदेश का सर्वांगीण विकास- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शून्य आधारित बजटिंग और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट वाला पहला राज्य बनेगा मध्यप्रदेश निवेश एवं सर्वांगीण विकास पर होगा फोक्स- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश तेजी से औद्योगिकीकरण और विकास की नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार का फोकस केवल आर्थिक वृद्धि पर ही नहीं, बल्कि रोज़गार सृजन, आधारभूत संरचना निर्माण और सामाजिक न्याय पर भी है। इसी दिशा में सरकार ने मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिये बजट को अगले 5 वर्ष में दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इससे हर क्षेत्र में निवेश और जनकल्याणकारी योजनाओं को गति मिलेगी। साथ ही बढ़ते बजट   प्रावधान में विभागों के बजट पर अनुशासन लगाने की महत्वपूर्ण पहल भी की जा रही है। इसी कड़ी में अब राज्य सरकार ने वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक विकास की ठोस रणनीति तैयार करते हुए शून्य आधारित बजटिंग (Zero Based Budgeting) और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि यह पहल “विकसित मध्यप्रदेश 2047” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में ठोस आधार बनेगी और देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श साबित होगी। देवड़ा ने कहा “शून्य आधारित बजटिंग और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट से न केवल प्रदेश की योजनाओं का ठोस मूल्यांकन होगा, बल्कि प्रत्येक खर्च का सीधा संबंध समाज की आवश्यकताओं और राज्य की प्राथमिकताओं से जोड़ा जा सकेगा। यह कदम मध्यप्रदेश को विकसित भारत और विकसित मध्यप्रदेश 2047 की दिशा में सबसे मजबूत आधार प्रदान करेगा।” महत्वपूर्ण है यह पहल अब तक अधिकांश राज्यों में पारंपरिक बजटिंग पद्धति लागू होती रही है, जिसमें पिछले वर्षों का व्यय आधार बनते थे। इसके विपरीत 'जीरो बेस्ड बजटिंग' में हर योजना को शून्य से शुरू कर उसकी उपयोगिता सिद्ध करनी होगी। इससे अप्रभावी योजनाएँ स्वतः समाप्त होंगी और संसाधनों का इष्टतम उपयोग संभव होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने इस प्रणाली को अपनाया है, जहाँ इससे गुड गवर्नेंस और फाइनेंशियल डिसिप्लिन को मजबूती मिली है। अब मध्यप्रदेश इस दिशा में भारत में अग्रणी राज्य बनकर अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल पेश कर रहा है। रोलिंग बजट से लगातार “फॉरवर्ड लुकिंग” दृष्टि रोलिंग बजट पद्धति से 2026-27, 2027-28 और 2028-29 के लिए बजट बनेगा और हर वर्ष इसकी समीक्षा कर नए अनुमानों को जोड़ा जाएगा। इससे योजनाएँ हमेशा आगे की ओर देखने वाली होगी और अल्पकालिक दबाव से मुक्त होकर दीर्घकालिक विकास को गति मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मॉडल कॉर्पोरेट जगत में पहले से सफल साबित हो चुका है, और राज्य शासन में इसे लागू करना नीतिगत दूरदर्शिता का प्रतीक है। वित्तीय अनुशासन और सामाजिक न्याय वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 16% और अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 23% बजट सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही वेतन, पेंशन , भत्तों की गणना में पारदर्शिता हेतु नई गाइडलाइन लागू होंगी। इसके अतिरिक्त ऑफ-बजट व्यय और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के वित्तीय प्रभाव को भी अब राज्य बजट में समाविष्ट किया जाएगा। यह व्यवस्था वित्तीय अनुशासन के साथ जनहित में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में महत्व देश के अन्य राज्यों में अभी भी पारंपरिक बजटिंग पद्धति पर निर्भरता बनी हुई है। मध्यप्रदेश का यह निर्णय वित्तीय सुधारों की दिशा में गेम-चेंजर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो आने वाले वर्षों में केंद्र और अन्य राज्य भी इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

‘द ग्रेटेस्ट’ माने जा चुके खिलाड़ी को मिला मौका, पहली बार खेलेंगे SKY की कप्तानी में

नई दिल्ली 2024 टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद सूर्यकुमार यादव ने रोहित शर्मा की जगह भारत के टी20I कप्तान का पद संभाला। हालांकि, हार्दिक पांड्या लंबे समय तक रोहित शर्मा के उप-कप्तान रहे थे। वह कप्तान बनने की रेस में सबसे आगे थे। हालांकि, चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन ने सूर्यकुमार को ही चुना। पदभार संभालने के बाद से उन्होंने अपनी कप्तानी से प्रभावित किया है। भारत को ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका सहित अन्य देशों के खिलाफ टी20I सीरीज में जीत दिलाई है। इन जीतों ने न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है, बल्कि आगामी एशिया कप और 2026 टी20 विश्व कप के लिए एक मजबूत नींव भी रखी है।   10 सितंबर को भारत खेलेगा पहला मैच गौरतलब है कि भारत अपने एशिया कप अभियान की शुरुआत 10 सितंबर को यूएई के खिलाफ करेगा। भारतीय टीम 4 सितंबर को फिर से मैदान पर उतरेगी और अगले दिन से ट्रेनिंग कैंप शुरू होगा। उससे पहले जसप्रीत बुमराह की उपलब्धता पर बड़ा सवाल बना हुआ है। पहली बार सूर्या की कप्तानी में खेलेंगे बुमराह दिलचस्प बात यह है कि बुमराह एकमात्र ऐसे भारतीय क्रिकेटर हैं, जिन्होंने अपने करियर में कभी भी सूर्यकुमार की कप्तानी में नहीं खेला। इस आक्रामक बल्लेबाज ने मुंबई इंडियंस की भी कप्तानी की है, लेकिन बुमराह उन मैचों में भी नहीं खेले। एशिया कप के दौरान बुमराह पहली बार सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में खेलेंगे। बता दें कि अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन ने भारत की सलामी जोड़ी के रूप में खुद को साबित किया है। पिछले एक साल में उन्होंने लगभग सभी विरोधियों पर दबदबा बनाया है और मध्यक्रम में अपनी बादशाहत कायम की है। हालांकि, शुभमन गिल को टीम का उप-कप्तान बनाए जाने के बाद इस जोड़ी पर खतरा मंडरा रहा है। सैमसन तीन नंबर पर बल्लेबाजी कर सकते हैं। थिंक टैंक से सामने चुनौती ऐसे में सूर्यकुमार चौथे, तिलक वर्मा पांचवें और हार्दिक पांड्या छठे नंबर पर बल्लेबाजी कर सकते हैं। हालांकि, यह देखने वाली बात होगी कि भारतीय टीम प्रबंधन और थिंक टैंक ने क्या प्लान बनाया है। यह तो एशिया कप शुरू होने के बाद ही पता चलेगा।  

‘आप’ पार्टी ने शुरू किया राष्ट्रव्यापी अभियान, पंजाब बाढ़ पीड़ितों को मिलेगी राहत

पंजाब  पंजाब में आई भीषण बाढ़ से उत्पन्न त्रासदी को देखते हुए आम आदमी पार्टी (आप) ने देशभर के अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने की अपील की है। 'आप' के दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पंजाब सरकार मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पूरी तरह से राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई है। मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक से लेकर पार्टी के हजारों वालंटियर्स प्रभावित लोगों तक हर संभव मदद पहुंचा रहे हैं। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पंजाब और सिख समुदाय ने हमेशा दुनिया को निःस्वार्थ सेवा और सहयोग का संदेश दिया है। चाहे प्राकृतिक आपदा हो या युद्ध जैसी परिस्थिति, सिख समाज सबसे पहले पीड़ितों की मदद के लिए खड़ा होता है और गुरुद्वारों में लंगर लगाकर राहत पहुंचाता है। अब समय है कि हम सब भी उनसे प्रेरणा लेकर सेवा के इस कार्य में शामिल हों। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि इंसानियत के नाते सभी को मिलकर पंजाब के लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए। 'आप' के दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष और विधायक जरनैल सिंह ने कहा कि पंजाब के कई जिले, हजारों गांव, लाखों परिवार और अनगिनत पशु इस बाढ़ की चपेट में आए हैं। राज्य सरकार और कई सामाजिक संगठन मिलकर राहत कार्य चला रहे हैं, लेकिन नुकसान बहुत व्यापक है। पंजाब के लोग हमेशा दूसरों की मदद करते हैं, इसलिए इस समय पूरे देश का कर्तव्य है कि वे पंजाब की सहायता के लिए आगे आएं। उन्होंने बताया कि इस आपदा में राशन से ज्यादा जरूरत मच्छरदानियों, तिरपाल, दवाइयों और बच्चों के कपड़ों जैसी चीजों की है, क्योंकि बाढ़ का पानी घरों को बुरी तरह नुकसान पहुंचा चुका है। राहत और पुनर्वास की प्रक्रिया कई हफ्तों तक चलेगी। आम आदमी पार्टी ने निर्णय लिया है कि देशभर के सभी 'आप' के कार्यालयों को पंजाब राहत अभियान का केंद्र बनाया जाएगा। वहां से आवश्यक सामग्री एकत्रित कर पीड़ितों तक पहुंचाई जाएगी।

भारत ने अमेरिका से कहा- ट्रेड डील पर डेडलाइन की बात नहीं करेंगे

नई दिल्ली  भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर सहमति ना बनने पर खिसियाए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते सोमवार को एक बार फिर भारत को निशाने पर लिया था। ट्रंप ने कहा कि भारत अब टैरिफ कम करने की पेशकश कर रहा है, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है। इसके एक दिन बाद अब भारत ने एक बार फिर उन्हें दो टूक जवाब दिया है। भारत के वाणिज्य औऱ उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा है कि भारत डेडलाइन वाले ट्रेड डील पर कभी चर्चा नहीं करता है। पीयूष गोयल ने अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर भारत के दृष्टिकोण पर बातचीत करते हुए हुए कहा कि भारत जल्दबाजी में समझौते करने के लिए दबाव में काम नहीं करता। उन्होंने कहा, "हम कभी भी समय-सीमा वाले व्यापार समझौतों पर बातचीत नहीं करते। हम सिर्फ अच्छे और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौतों पर ही बातचीत करते हैं।" अमेरिका के साथ बातचीत जारी- गोयल पीयूष गोयल ने आगे कहा कि भारत अपने सभी समझौतों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "हम एक समान और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते के लिए हमेशा तैयार हैं।" केंद्रीय मंत्री ने इस दौरान यह पुष्टि भी की है कि भारत अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर सक्रिय रूप से चर्चा कर रहा है। गोयल ने कहा, "अभी बहुत कुछ हुआ है, अभी बहुत कुछ होना बाकी है। BTA के लिए अमेरिका के साथ हमारी बातचीत जारी है।’’ छठे दौर की वार्ता स्थगित गौरतलब है कि भारत और अमेरिका मार्च से इस समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। अब तक पांच दौर की वार्ता पूरी हो चुकी है। हालांकि 27 अगस्त से 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के बाद अमेरिकी दल ने अगले दौर की वार्ता के लिए भारत का अपना दौरा स्थगित कर दिया है। इसके बाद अभी तक छठे दौर की वार्ता के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है। गोयल ने कार्यक्रम में यह भी कहा है कि भारत ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, मॉरीशस, ब्रिटेन और चार यूरोपीय देशों के समूह ईएफटीए के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर चुका है और अन्य देशों के साथ संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।  

मनोज जरांगे आंदोलन खत्म करने को तैयार, बोले- जीत हमारी हुई, लेकिन शर्त भी होगी पूरी

मुंबई  मुंबई में जारी मराठा आंदोलन पर जल्द ही विराम लगने वाला है। मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। हालांकि, उन्होंने साफ कर दिया है कि एक बार GR यानी सरकारी प्रस्ताव जारी होने के बाद आजाद मैदान को खाली कर दिया जाएगा। खास बात है कि बंबई उच्च न्यायालय ने भी आंदोलन के लिए मुंबई की सड़कों को रोकने पर आपत्ति जताई थी। मंगलवार को ही महाराष्ट्र सरकार में मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे से मुलाकात की थी। उन्होंने सरकार के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है कि मराठाओं को कुनबी प्रमाण पत्र देने के लिए हैदराबाद गजट लागू किया जाएगा, एक महीने के अंदर ही ऐसा ही फैसला सतारा रियासत को लेकर भी लिया जाएगा। साथ ही सितंबर के अंत तक मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज केस वापस लिए जाएंगे। इसके अलावा प्रस्ताव में आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के परिजनों को आर्थिक मुआवजा देने की बात भी शामिल है। जरांगे 29 अगस्त से दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में भूख हड़ताल कर रहे हैं और ओबीसी समूह के तहत सरकारी नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहे हैं। दरअसल, हैदराबाद गजट पर जरांगे इसलिए जोर दे रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि साबित करता है कि मराठवाड़ा क्षेत्र में रह रहे मराठाओं को आधिकारिक तौर पर कुनबी माना गया था। महाराष्ट्र में कुनबी समुदाय को ओबीसी के तहत आरक्षण मिलता है। खास बात है कि मौजूदा मराठवाड़ा क्षेत्र पहले हैदराबाद राज्य का हिस्सा हुआ करता था। जरांगे ने समर्थकों से कहा, 'हम आपकी ताकत से जीत गए हैं। आज मैंने गरीब की ताकत को समझ लिया है।'  

मंत्री सारंग ने की राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ की गतिविधियों की समीक्षा

भोपाल  सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने मंगलवार को मध्यप्रदेश राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए कहा कि उपभोक्ता संघ को आर्थिक रूप से सशक्त और प्रासंगिक बनाने के लिये अभिनव कदम उठाने होंगे। संघ को पुनर्जीवित करने के लिये सीपीपीपी (को-ऑपरेटिव पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल को अपनाया जाए, जिससे संघ की व्यावसायिक गतिविधियों में आधुनिकता और प्रतिस्पर्धात्मकता आ सकेगी। मंत्री श्री सारंग ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि उपभोक्ता संघ को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने की दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। इसके अंतर्गत बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के साथ कार्य करने की संभावनाओं को तलाशा जाए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता संघ द्वारा संचालित उपभोक्ता केंद्रों को बहुउद्देशीय बनाया जाए, क्योंकि ये केंद्र शहरों की प्रमुख लोकेशन्स पर स्थित हैं और बड़े ब्रांड्स को जोड़ने के लिये आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। बैठक में मंत्री श्री सारंग ने उपभोक्ता संघ की वर्तमान आर्थिक स्थिति, व्यवसाय, मानव संसाधन, और व्यवसाय वृद्धि की संभावनाओं की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिये कि उपभोक्ता संघ को ‘सहकारिताओं से सहकार’ के सिद्धांत पर कार्य करते हुए प्रदेश की अन्य सहकारी संस्थाओं के साथ व्यवसायिक गतिविधियों को जोड़ने की रूपरेखा तैयार करनी चाहिए। खाद्यान्न उपार्जन से संबंधित आवश्यक सामग्रियों के प्रदाय के लिए उपभोक्ता संघ को नोडल एजेंसी नियुक्त करने के विषय पर भी चर्चा हुई। सुझाव दिया गया कि पैक्स और विपणन समितियों द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदी के दौरान उपार्जन में उपयोग होने वाली सामग्रियां विभिन्न जिलों में उनकी मांग के अनुसार उपभोक्ता संघ उपलब्ध कराए। इससे संघ को प्राप्त होने वाला मार्जिन उसकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा और साथ ही उपार्जन करने वाली समितियों को पूरे प्रदेश में गुणवत्ता युक्त सामग्रियां न्यूनतम मूल्य पर उपलब्ध हो सकेंगी। मंत्री श्री सारंग ने विस्तृत कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिये। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि सहकारी उपभोक्ता संघ को पुनः सक्रिय और प्रगतिशील बनाने के लिये हर स्तर पर ठोस और दूरगामी कदम उठाए जाएं। बैठक में प्रमुख सचिव सहकारिता श्री डी.पी. आहूजा, आयुक्त सहकारिता श्री मनोज पुष्प, प्रबंध संचालक उपभोक्ता संघ श्री ऋतुराज रंजन, प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक श्री मनोज गुप्ता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित करने पर कैबिनेट के सदस्यों ने माना आभार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मुख्यमंत्री निवास में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित किए जाने पर मंत्रि-परिषद के सदस्यों ने शॉल और पुष्प-गुच्छ भेंट कर आभार व्यक्त किया। मंत्रियों ने कहा कि यह पहल भारतीय परंपरा, वैदिक गणना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाली है, जो प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करेगी। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम है। यह घड़ी केवल समय बताने तक सीमित नहीं है, बल्कि सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल, अभिजीत मुहूर्त और चंद्रमा की स्थिति जैसी जानकारी भी उपलब्ध कराती है। इसमें वैदिक समय के साथ-साथ भारतीय मानक समय और ग्रीनविच मानक समय का तुलनात्मक अध्ययन भी संभव है। इस अनूठी घड़ी के साथ मोबाइल एप भी तैयार किया गया है, जो 189 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है और विश्वभर के 7000 से अधिक स्थानों के लिए समय व पंचांग की जानकारी देता है। मंत्रियों ने कहा कि उज्जैन की वैदिक और सांस्कृतिक परंपरा से प्रेरित यह घड़ी मुख्यमंत्री निवास में स्थापित होना गर्व की बात है। यह पहल प्रदेश की गौरवशाली धरोहर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने के साथ युवाओं को वैदिक विज्ञान और गणना प्रणाली से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी। इस अवसर पर परिवहन, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान, ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री नारायण सिंह पवार सहित अन्य मंत्री शामिल थे।