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‘शहर चलो अभियान’ की तैयारी पूरी, 4 से 13 सितम्बर तक लगेंगे प्री-कैम्प

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का प्रमुख ध्येय अंत्योदय की संकल्पना को सिद्धि की ओर ले जाते हुए अंतिम छोर के व्यक्ति को अधिक से अधिक राहत पहुंचाना है। 15 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक संचालित होने वाला शहर चलो अभियान इस उद्देश्य की प्राप्ति में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने अधिकारियों को अभियान के सफल संचालन के लिए प्रभावी कार्ययोजना के अंतर्गत कार्य करने के लिए निर्देशित किया, ताकि शहरी निकायों में बुनियादी नागरिक सुविधाएं सुदृढ़ हों और सेवाओं को नई गति मिले। शर्मा मंगलवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अभियान से पूर्व 4 से 13 सितम्बर तक प्री-कैम्प आयोजित किए जाएं। इस दौरान अधिकारी शहरी निकायों के वार्डों में पहुंचें और पार्षदों से चर्चा कर समस्याओं का चिन्हीकरण करें। इससे आमजन को मुख्य कैम्प के दौरान सुगम और त्वरित राहत मिल सकेगी। जन उपयोगी कार्यों के त्वरित निस्तारण से आमजन को मिलेगी राहत मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी निकायों में सफाई व्यवस्था सुधार, नई स्ट्रीट लाइट्स लगाने, आवारा पशुओं को पकड़ने, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, सार्वजनिक स्थानों का रखरखाव और सौंदर्यकरण, सड़क मरम्मत जैसे जनोपयोगी कार्य इस अभियान में किए जाएंगे। उन्होंने पीएम स्वनिधि ऋण वितरण, पीएम सूर्यघर 150 यूनिट निःषुल्क बिजली योजना के आवेदन प्राप्त करने के साथ ही सामुदायिक भवन, आंगनवाड़ी एवं विद्यालय आदि के मरम्मत के कार्य विशेष रूप से संपादित करने के लिए भी निर्देशित किया। ग्रामीण क्षेत्रों के सुनियोजित विकास के लिए करें विशेष कार्य शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सुनियोजित विकास को गति देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, जिससे प्रदेश के सुदृढ़ बुनियादी ढांचे को गति मिल सके। उन्होंने भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों के सुनियोजित विकास पर विशेष जोर देते हुए स्वच्छता, पेयजल, सड़क, सीवरेज जैसी आधारभूत सुविधाओं पर विशेष रूप से कार्य करने के लिए निर्देशित किया। बैठक में नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) झाबर सिंह खर्रा एवं नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस से पूछा- राइफल से खुद को गोली मारना कैसे संभव?

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई के दौरान पुलिस से कड़ा सवाल पूछा। कोर्ट ने पूछा कि क्या कोई व्यक्ति राइफल से अपने सीने में गोली मार सकता है? शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश से पुलिस से यह सवाल पूछा है। यह मामला मौत के मामले को सुसाइड की तरह पेश करने से जुड़ा हुआ है। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या क्या सभी एंगल पर जांच हो चुकी है? क्या यह एंगल भी देखा जा चुका है कहीं यह मामला मर्डर का तो नहीं है? सुनवाई के वक्त बेंच ने क्या कहा जस्टिस मनोज मिश्रा और उज्जल भुयान की बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हमारी समझ से यह जांच का विषय है कि क्या कोई व्यक्ति अपने सीने में राइफल से गोली मारने में सक्षम है? अभियोजन पक्ष के अनुसार, ऐसा प्रतीत हुआ कि मृतक ने राइफल से अपनी छाती में गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। इस पर, हाई कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत आरोपी-प्रतिवादी नंबर 2 को अग्रिम जमानत दे दी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट को इस बात पर संदेह था कि क्या कोई व्यक्ति राइफल से अपनी छाती में खुद को गोली मार सकता है। इसलिए उसने राज्य के हलफनामे, मृतक की ऑटोप्सी रिपोर्ट और जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्री को तलब किया। अदालत ने कहा कि हलफनामे में राइफल की जब्ती और उसकी लंबाई के बारे में जानकारी का खुलासा होना चाहिए। यह है पूरा मामला यह मामला याचिकाकर्ता के 17 वर्षीय बेटे से संबंधित है। उसके बेटे ने भोपाल की एक अकादमी में शॉटगन शूटिंग प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में दाखिला लिया था। यहां पर प्रतिवादी नंबर दो ने बेटे के ऊपर 40 हजार रुपए चुराने का आरोप लगाया। आरोपों के अनुसार, प्रतिवादी नंबर 2 और अकादमी के अन्य छात्रों ने याचिकाकर्ता के बेटे को अपना अपराध स्वीकार करने की धमकी दी। उन्होंने उसका फोन छीन लिया और अपराध स्वीकार करने वाले संदेश भेजे, साथ ही उसकी पिटाई भी की। उनके इस व्यवहार से दुखी और असमर्थ होकर, याचिकाकर्ता के बेटे ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। घटना से पहले मृतक ने क्या किया इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से पहले, मृतक ने अपने एक दोस्त और अपनी बहन को बताया था कि वह आत्महत्या कर रहा है। उसने अपने दोस्त के पास एक सुसाइड नोट भी छोड़ा था, जिसमें उसने अकादमी के छात्रों (प्रतिवादी नंबर 2 सहित) को दोषी ठहराया था। लगभग एक महीने के बाद, भारतीय न्याय संहिता की धारा 107 के तहत एक एफआईआर दर्ज की गई थी। शुरुआत में, सत्र न्यायालय ने प्रतिवादी नंबर 2 की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। हालांकि बाद में हाई कोर्ट ने उसे यह राहत प्रदान कर दी। उम्र के संबंध में भी गलती याचिकाकर्ता के अनुसार, हाई कोर्ट ने न केवल उसके बेटे की आत्महत्या की घटना को मामूली बना दिया, बल्कि मृतक को दबाव न झेल पाने का दोषी ठहराया और आरोपी के कृत्यों का बचाव किया। यह दावा किया गया है कि हाई कोर्ट ने मृतक की उम्र 18 मानकर गलती की, जबकि घटना के समय वह 17 साल का था, और इस प्रकार, एक नाबालिग को आत्महत्या के लिए उकसाने का गंभीर अपराध लागू होता है। याचिकाकर्ता का यह भी तर्क है कि प्रतिवादी नंबर 2 एक प्रभावशाली परिवार से संबंधित है। उसकी हिरासत में पूछताछ आवश्यक है क्योंकि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी उसने जांच में सहयोग नहीं किया।  

धार का पीएम मित्रा पार्क बनेगा भारत का सबसे बड़ा टेक्सटाइल हब : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश का नया विज़न – फार्म टू फैशन 3 सितम्बर को दिल्ली में पीएम मित्रा पार्क में निवेश पर "इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीस्" भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश अब देश का सबसे बड़ा पीएम मित्रा (मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल) पार्क स्थापित करने जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की 5F रणनीति – "फार्म टू फाइबर टू फैक्ट्री टू फैशन टू फॉरेन'' को मूर्त रूप देने वाला यह पार्क न केवल प्रदेश बल्कि पूरे भारत के टेक्सटाइल सेक्टर की औद्योगिक तस्वीर बदलने वाला साबित होगा। इसी सिलसिले में 3 सितम्बर 2025 को नई दिल्ली के होटल आईटीसी मौर्य में “इंटरएक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन पीएम मित्रा पार्क” का आयोजन होगा। इसमें केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरीराज सिंह मुख्य वक्तव्य देंगे और भारत के वस्त्र उद्योग की वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डालेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विशेष संबोधन देंगे और उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन मीटिंग कर निवेश प्रस्तावों पर चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “पीएम मित्रा पार्क मध्यप्रदेश को ‘फार्म टू फैशन’ की पूरी वैल्यू चेन में अग्रणी बनाएगा। यह पार्क न केवल रोजगार और निवेश का केंद्र बनेगा, बल्कि ‘Made in MP – Wear Across the World’ के विज़न को भी साकार करेगा।” बड़ा निवेश अवसर धार जिले में प्रस्तावित यह पार्क 2,158 एकड़ विकसित औद्योगिक भूमि पर बसाया जा रहा है। राज्य और केंद्र सरकार की आकर्षक प्रोत्साहन नीतियों का लाभ निवेशकों को मिलेगा। भूमि प्रीमियम मात्र 1 रुपये प्रति वर्ग मीटर, डेवलपमेंट चार्ज 120 रुपये प्रति वर्ग फुट, बिजली 4.5 रुपये प्रति यूनिट और पानी 25 रुपये प्रति किलोलीटर की दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा। अधोसंरचना और कनेक्टिविटी पार्क को वर्ल्ड क्लास इंडस्ट्रियल हब के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसमें 2,063 करोड़ रुपये की लागत से कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है, जिसमें 60 और 45 मीटर चौड़ी सड़कें, सीवरेज और ड्रेनेज नेटवर्क, अंडरग्राउंड केबल, लॉजिस्टिक्स बे, पार्किंग, CETP, सोलर प्लांट, प्लग-एंड-प्ले यूनिट्स और सेंट्रलाइज्ड स्टीम बॉयलर शामिल हैं। पूरी यूटिलिटीज को CCTV, IoT और SCADA से मॉनिटर किया जाएगा। साथ ही 60 मीटर चौड़ा 6-लेन अप्रोच रोड, 220 केवी बिजली लाइन, और 20 एमएलडी जलापूर्ति का निर्माण तेजी से चल रहा है। पार्क राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 47) से केवल 40 किमी, इंदौर हवाई अड्डे से 110 किमी और निकटतम रेलवे स्टेशन से 16 किमी की दूरी पर स्थित है। यह डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (रतलाम – 55 किमी) और ड्राई पोर्ट (पिथमपुर/तिही – 90 किमी) से भी जुड़ा रहेगा। सामाजिक और अनुसंधान सुविधाएँ पार्क में केवल औद्योगिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक व सहयोगी अधोसंरचना भी विकसित की जा रही है। इसमें आवासीय टावर, कामकाजी महिलाओं के लिए आवास, अस्पताल, चाइल्ड केयर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर और टेस्टिंग लैब्स शामिल होंगे। इससे यह पार्क इंडस्ट्री-फ्रेंडली ही नहीं बल्कि वर्कर-फ्रेंडली भी बनेगा। वैश्विक निवेशकों का भरोसा कई अंतरराष्ट्रीय ब्रांड जैसे HanesBrands, PVH Corp, Puma और Mothercare पहले ही मध्यप्रदेश की संभावनाओं में रुचि जता चुके हैं। बायर सोर्सिंग लीडर्स (BSL) के साथ एमओयू से डिजाइन, लॉजिस्टिक्स और स्किल डेवेलपमेंट का एकीकृत नेटवर्क भी तैयार होगा। राष्ट्रीय दृष्टि से महत्व विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में कई राज्य टेक्सटाइल पार्क विकसित कर रहे हैं, लेकिन मध्यप्रदेश का पीएम मित्रा पार्क अपने आकार, नीतिगत सहयोग और वैश्विक स्तर की अधोसंरचना के कारण सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली होगा। यह राज्य के औद्योगिकीकरण की नई पहचान बनेगा और भारत की निर्यात क्षमता को भी नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।  

TMC मंच हादसे के बाद कोलकाता पुलिस की सख्ती, सेना का ट्रक रोका

कोलकाता  सेना द्वारा भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित राज्यों में बांग्लाभाषी प्रवासी श्रमिकों पर कथित अत्याचार के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस द्वारा बनाए गए मंच को गिरा दिए जाने के एक दिन बाद कोलकाता पुलिस ने मंगलवार को लापरवाही से वाहन चलाने के आरोप में सेना के एक ट्रक को रोक लिया। ट्रक चला रहे सैन्यकर्मी के खिलाफ खतरनाक तरीके से वाहन चलाने का मामला दर्ज किया गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह घटना पूर्वाह्न करीब 11 बजे राइटर्स बिल्डिंग के सामने हुई। उन्होंने कहा, 'वाहन इतनी तेज रफ्तार से चल रहा था कि मोड़ लेते समय एक बड़ा हादसा हो सकता था। कोलकाता पुलिस के आयुक्त मनोज वर्मा का वाहन ट्रक के पीछे चल रहा था।' कोलकाता पुलिस द्वारा जारी सीसीटीवी वीडियो में यातायात अधिकारियों द्वारा ट्रक को रोके जाने से लेकर तक की घटनाओं को दर्शाया गया है। वीडियो में सेना का वाहन बीबीडी बाग नॉर्थ रोड के बाएं किनारे पर राइटर्स बिल्डिंग ट्रैफिक सिग्नल पर धीमा होता हुआ दिखाई देता है, जहां से उसने अचानक दक्षिण की ओर दाहिनी ओर मुड़ने का प्रयास किया। वीडियो के अनुसार, ट्रक वर्मा की कार से टकराने से बाल-बाल बच गया और यह दुर्घटना से बचने के लिए सिग्नल पर दाहिनी ओर से तेजी से आगे निकल गया। वर्मा का वाहन सेना के ट्रक के पीछे चल रहा था। व्यस्त चौराहे पर यातायात का प्रबंधन कर रहे पुलिस अधिकारियों ने ट्रक को तेजी से जाते हुए देखा और उन्होंने नियमों का उल्लंघन करने के लिए उसे रोक दिया, क्योंकि चौराहे पर लगे यातायात संकेतों में वाहनों को सड़क के बाएं किनारे से दाहिनी ओर मुड़ने से मना किया गया था। सेना के अधिकारियों के अनुसार, ट्रक कोलकाता स्थित सेना के पूर्वी कमान मुख्यालय फोर्ट विलियम से बीबीडी बाग के पास ब्रेबोर्न रोड स्थित पासपोर्ट कार्यालय जा रहा था। अधिकारी ने बताया कि सेना के दो जवानों को ले जा रहे ट्रक को बाद में हेयर स्ट्रीट पुलिस थाने ले जाया गया। उन्होंने बताया कि चालक के खिलाफ खतरनाक तरीके से वाहन चलाने के लिए मोटर वाहन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। फोर्ट विलियम के अधिकारी भी घटना के बारे में पुलिस से बात करने के लिए पुलिस थाने पहुंच गए हैं। सेना के अधिकारियों ने किसी भी गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा कि पुलिस ने वाहन को राइटर्स बिल्डिंग के पास मोड़ते समय रोका था। उन्होंने कहा कि यातायात के किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है। मंगलवार को हुई इस घटना से के स्थल से कुछ ही दूरी पर सेना के अधिकारियों ने मध्य कोलकाता के मायो रोड पर गांधी प्रतिमा के पास बनाए गए तृणमूल कांग्रेस के मंच को सोमवार को इस आधार पर तोड़ना शुरू कर दिया था कि पार्टी ने कार्यक्रम की अनुमति की अवधि पार कर ली थी। मायो रोड रक्षा बलों के स्वामित्व और प्रशासन वाला क्षेत्र है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी घटनास्थल पर पहुंचीं और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तृणमूल के खिलाफ ‘प्रतिशोध की राजनीति’ के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए ‘भारतीय सेना का दुरुपयोग’ करने का आरोप लगाया था।  

मोदी के भावुक पलों में फूट पड़े आंसू, दिलीप जायसवाल और बिहार BJP अध्यक्ष भी रोए

पटना बिहार को जीविका बैंक की सौगात देने के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी भावुक दिखे। पीएम अपनी दिवगंत मां पर की गई अभद्र टिप्पणी से आहत दिखे। जो बीते महीने इंडिया अलायंस की वोटर अधिकार यात्रा के मंच से की गई थी। पीएम मोदी आपत्तिजनक टिप्पणी का जवाब दे रहे थे। इस दौरान उन्होने कांग्रेस और आरजेडी पर निशाना साधा। वहीं इस कार्यक्रम को सुनने के दौरान बिहार बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप जायसवाल भी रो पड़े। वो भी काफी भावुक हो गए, और आंखों से आंसू पोछते नजर आए। इस दौरान जायसवाल के अलावा कार्यक्रम में मौजूद अन्य लोग भी भावुक दिखे, महिलाएं भी अपने आंसू नहीं रोक पाई। आपको बता दें मंगलवार को वर्चुअली पीएम मोदी ने बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होने कहा कि मेरी मां को गाली दी गई, ये मेरी मां का अपमान नहीं है। ये देश की मां, बहन, बेटी का अपमान है। पीएम मोदी ने कहा- "मां हमारा संसार है। मां हमारा स्वाभिमान है। इस संस्कार संपन्न बिहार में कुछ दिन पहले जो हुआ, उसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी। बिहार में आरजेडी-कांग्रेस के मंच से मेरी मां को गालियां दी गईं। ये गालियां सिर्फ़ मेरी मां का अपमान नहीं हैं। ये देश की माताओं, बहनों और बेटियों का अपमान है। पीएम मोदी को मां की गाली देने के विरोध में 4 सितंबर को बिहार बंद बुलाया गया है। बीजेपी समेत एनडीए के सहयोगी दलों के नेता और महिलाएं सड़कों पर उतरेंगी। ये बंदी सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक रहेगी। इस दौरान बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि राजद और कांग्रेस के द्वारा पीएम की मां पर आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल कराया गया है, इससे पूरा बिहार शर्मसार है।  

नगर विकास विभाग के नेतृत्व में किया गया लोगों को जागरूक

स्थानीय समस्याओं का समाधान करने और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए नई पहल लखनऊ सीएम योगी के निर्देश पर नगर विकास विभाग के नेतृत्व में प्रदेश के विभिन्न नगर निगमों में स्वच्छता, नागरिक सुविधाओं और जन-जागरूकता के लिए 12 घंटे का विशेष अभियान चलाया गया। यह पहल स्वच्छ भारत मिशन और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों के अनुरूप स्थानीय समस्याओं का समाधान करने और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए शुरू की गई। यह अभियान न केवल लोगों की मूलभूत समस्याओं का समाधान करने में सफल रहा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को भी मजबूत करता है। विभिन्न शहरों की मुख्य उपलब्धियां इस प्रकार हैं : लखनऊ : कर वसूली शिविर लखनऊ नगर निगम ने सभी आठ जोनों में 32 कर वसूली और शिकायत निवारण शिविर आयोजित किए। इन शिविरों में तत्काल कर संग्रह की व्यवस्था की गई और वॉर रूम से निगरानी की गई। अपर नगर आयुक्त और मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के नेतृत्व में 1,365 शिकायतों का मौके पर समाधान किया गया और एक दिन में 2.30 करोड़ रुपये का कर संग्रह हुआ। गोरखपुर : प्लास्टिक मुक्त अभियान गोरखपुर नगर निगम ने वेंडिंग जोन और बाजार क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर दुकानदारों को कपड़े के थैले वितरित किए। इसके अलावा सिंगल यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना भी लगाया गया। वाराणसी : कचरा पृथक्करण पहल वाराणसी में नगर निगम की टीम ने भरत मिलाप कॉलोनी और महेश नगर कॉलोनी के 86 घरों में कचरा पृथक्करण को बढ़ावा दिया। घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाने के परिणामस्वरूप अब अधिकांश घरों में गीला और सूखा कचरा अलग-अलग डस्टबिन में डाला जा रहा है, जिसे नगर निगम की गाड़ियों से ले जाया जाता है। मथुरा-वृंदावन : सौंदर्यीकरण और स्वच्छता मथुरा-वृंदावन नगर निगम ने मछली फाटक के 15 साल पुराने कूड़ा ढलाव घर को पूरी तरह हटाकर उसका सौंदर्यीकरण किया गया, जिससे यह पूरी तरह स्वच्छ और आकर्षक बन गया। राधा अष्टमी के अवसर पर अहिल्या बाई पार्क और आसपास के क्षेत्रों में विशेष सफाई अभियान चलाया गया, जिसमें स्थानीय निवासियों को कचरा पृथक्करण और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया। गाजियाबाद: जलभराव समाधान गाजियाबाद नगर निगम ने भारी बारिश के दौरान मोहन नगर, शालीमार गार्डन और मोहन नगर बस स्टैंड में जलभराव की समस्या को हल करने के लिए जलकल, स्वास्थ्य और निर्माण विभागों की संयुक्त कार्रवाई की। 20 साल पुराने नालों और पाइपलाइनों की सफाई कर जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया गया, जिससे स्थानीय निवासियों ने संतुष्टि जताई। अयोध्या : कचरा संग्रहण में तेजी अयोध्या को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड से 20 इलेक्ट्रॉनिक हॉपर टिपर प्राप्त हुए, जिससे स्वच्छ भारत मिशन के तहत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण को गति मिलेगी। प्रत्येक वार्ड में एक टिपर उपलब्ध होगा, जिसे जीपीएस और रूट मैप के साथ संचालित किया जाएगा। शाहजहांपुर : गीले कचरे का निस्तारण शाहजहांपुर नगर निगम ने निगोही रोड पर वर्षों पुराने 150 टन गीले कचरे के ढेर को ट्रीटमेंट प्लांट भेजकर निस्तारित किया। इससे लंबे समय से चल रही एक पुरानी समस्या का समाधान हुआ। मुरादाबाद : कचरा निस्तारण मुरादाबाद नगर निगम ने विशेष अभियान के तहत 200 मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण किया। यह क्षेत्र नगर निगम को हस्तांतरित नहीं होने के कारण लंबे समय से उपेक्षित था, जिससे यह एक बड़ा गार्बेज वल्नरेबल पॉइंट बन गया था। 250 सफाई कर्मियों और आधुनिक उपकरणों की मदद से इसे साफ किया गया और निवासियों को कचरा नगर निगम की गाड़ियों में देने के लिए प्रोत्साहित किया गया। बरेली : बेहतर जल आपूर्ति बरेली नगर निगम ने वार्ड-53, मोहल्ला रोहली टोला और आशीष रॉयल पार्क कॉलोनी में जल आपूर्ति की समस्याओं का समाधान किया। रोहली टोला में 1,100 मीटर नई पाइपलाइन बिछाकर 200 भवनों में शुद्ध पेयजल सुनिश्चित किया गया। आशीष रॉयल पार्क कॉलोनी में नलकूप की बोरिंग फेल होने के बाद 15 एचपी का नया नलकूप स्थापित किया गया, जिससे 260 परिवारों को शुद्ध पानी मिल रहा है। कानपुर : सिंगल यूज प्लास्टिक पर जागरूकता कानपुर नगर निगम ने सिंगल यूज प्लास्टिक के बहिष्कार और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए तीन नए फुटबॉल ग्राउंड का उद्घाटन किया और फ्रेंडली फुटबॉल मैच आयोजित किए। प्रयागराज : बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सफाई प्रयागराज नगर निगम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता और एंटी-लार्वा फॉगिंग अभियान चलाया। वार्ड समिति सदस्यों और नागरिक समाज के साथ मिलकर अपशिष्ट पृथक्करण पर जोर दिया गया। इससे मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम में मदद मिली। मेरठ : गौशाला निरीक्षण मेरठ नगर आयुक्त ने कान्हा गौशाला का निरीक्षण कर निराश्रित और अशक्त गौवंश की देखभाल, पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन की स्थिति का जायजा लिया। सामाजिक संस्थाओं और स्कूलों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। नगर आयुक्त ने कहा, गौ सेवा केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। फिरोजाबाद : जलभराव निवारण फिरोजाबाद नगर निगम ने दो दिन की बारिश के बाद जलभराव की 12 शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया। नगर आयुक्त ने स्वयं कंट्रोल रूम और फील्ड में निगरानी की और नागरिकों के फीडबैक के आधार पर समस्याओं का समाधान किया। अलीगढ़ : जलभराव और खेल सुविधा अलीगढ़ नगर निगम ने बारिश से उत्पन्न जलभराव को कम करने के लिए निरंतर कार्य किया। सीएनडीएस परियोजनाओं की समीक्षा की गई और नारंगी लाल स्मार्ट सिटी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को अगले 2-3 सप्ताह में हस्तांतरित करने की तैयारी पूरी की गई, जिससे शहर को नई खेल सुविधा मिलेगी।

CM भगवंत मान की आंखों में आए आंसू, बाढ़ पीड़ितों को दिया हिम्मत का संदेश

फिरोजपुर पंजाब में बाढ़ ने तबाही मचा रखी है और लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। चारों तरफ हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज फिरोजपुर के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने बाढ़ की मार झेल रहे सरहदी गांवों के लोगों से मुलाकात की और उनकी परेशानियां सुनीं। इतने गंभीर हालात देखकर और लोगों की बदहाली देखकर मुख्यमंत्री मान की आंखों में भी आंसू आ गए। बाढ़ पीड़ित एक महिला ने अपना दुख सुनाते हुए कहा कि सब कुछ बह जाएगा और हमारा कुछ भी नहीं बचेगा। इस पर मुख्यमंत्री भावुक होकर बोले कि सब कुछ ठीक हो जाएगा, यह प्राकृतिक आपदा है और सब कुछ मुझ पर छोड़ दो। बताने योग्य है कि मुख्यमंत्री मान न केवल बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं, बल्कि बाढ़ प्रबंधन पर भी व्यक्तिगत रूप से नजर रख रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को बाढ़ पीड़ितों की हर संभव मदद करने के सख्त निर्देश दिए हैं। आज मुख्यमंत्री की ओर से एक उच्च स्तरीय बैठक भी की जाएगी जिसमें पूरे राज्य में चल रहे राहत कार्यों की स्थिति का जायजा लिया जाएगा। बैठक में बाढ़ के खतरे से बचाव के लिए अन्य जरूरी कदम उठाने पर भी चर्चा होगी। 

भूकंप ने अफगानिस्तान को झकझोरा, अब तक 1400 से अधिक लोगों की मौत

कुनार पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान का कुनार प्रांत रविवार आधी रात के बाद एक भयानक भूकंप से दहल उठा। भूकंप की तीव्रता 6.1 मापी गई और इसका केंद्र कुनार की राजधानी असदाबाद के पास लगभग 27 किलोमीटर गहराई में था। इस विनाशकारी प्राकृतिक आपदा ने अब तक 1,411 लोगों की जान ले ली है और 3,124 लोग घायल हुए हैं। तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने इस दुखद घटना की पुष्टि की और बताया कि अब तक कुनार में 5,412 घर पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं। सरकार की ओर से लगातार राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है। विशेष रूप से प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टर के ज़रिए घायलों को निकाला जा रहा है ताकि उन्हें तुरंत इलाज मिल सके। इससे पहले अफ़ग़ान रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने मरने वालों की संख्या 1,124 बताई थी और कहा था कि करीब 3,251 लोग घायल हुए हैं। संस्था ने यह भी कहा था कि 8,000 से ज़्यादा घरों को नुकसान पहुंचा है और बहुत से लोग अब भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं। यही कारण है कि राहत कार्य तेज़ी से चल रहे हैं और मौत का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है। सबसे ज़्यादा नुक़सान कुनार में नार प्रांत इस भूकंप से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है। यहां के अस्पतालों में इतनी भीड़ है कि घायलों को ज़मीन पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है। कई लोगों को सामूहिक रूप से दफनाया गया है क्योंकि परिवारों के पास न तो संसाधन हैं और न ही समय। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बच्चे जो अपने घरों से बेघर हो गए हैं वे खुले आसमान के नीचे रात बिता रहे हैं।नंगरहार, लघमन और नूरिस्तान जैसे पड़ोसी प्रांतों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए और वहां भी कुछ मौतें व घायल होने की सूचना मिली है। वहीं पंजशीर प्रांत में इस भूकंप से आर्थिक नुकसान हुआ है लेकिन किसी के मारे जाने की सूचना नहीं है। सीमा पार पाकिस्तान तक महसूस हुए झटके भूकंप के झटके अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल तक महसूस किए गए। इसके साथ ही पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत में भी कंपन दर्ज की गई। इसने साबित कर दिया कि भूकंप की तीव्रता कितनी अधिक थी और इसका प्रभाव कितना व्यापक रहा। राहत कार्यों में चुनौतियाँ दूरदराज़ के इलाकों में पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। तालिबान सरकार के पास संसाधनों की कमी है और जिन इलाकों में सड़कें नष्ट हो चुकी हैं वहां हेलीकॉप्टरों के माध्यम से घायलों को निकाला जा रहा है। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों ने तुरंत सहायता पहुंचाने की बात कही है। राहत शिविर लगाए जा रहे हैं लेकिन अब भी हज़ारों लोग भोजन, पानी और दवाइयों की कमी से जूझ रहे हैं।   भूकंप के बाद की ज़िंदगी भूकंप के बाद जो लोग बचे हैं उनकी ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई है। अपने प्रियजनों को खोने का दुख, घर उजड़ने की पीड़ा और भविष्य की अनिश्चितता ने लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है। बच्चों की पढ़ाई छूट गई है और महिलाएं व बुज़ुर्ग खुले में जीवन बिता रहे हैं।

क्या इतिहास दोहराएगा खुद को? पंजाब की भयावह बाढ़ ने दिलाई 1988 की याद

पंजाब  पंजाब में हाल ही में आई बाढ़ ने 1988 की भयंकर बाढ़ की यादें फिर से ताजा कर दी हैं। उस वक्त सतलुज, व्यास और रावी नदियाँ बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं, जिससे 500 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा बैठे थे। आज भी बाढ़ से कई जिले बहुत प्रभावित हुए हैं। खासकर गुरदासपुर, पठानकोट, होशियारपुर, कपूरथला, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का, जालंधर और रूपनगर जैसे जिले बाढ़ से सबसे ज्यादा परेशान हैं। यहाँ के लोग अपनी जिंदगी फिर से सही करने के लिए बड़ी मेहनत कर रहे हैं। बाढ़ की वजह सिर्फ इंसान नहीं पंजाब में बाढ़ सिर्फ बारिश और नदियों के बढ़ने की वजह से नहीं आती। इंसानों की कई गलतियों की वजह से भी बाढ़ बढ़ती है। जैसे नालों और नहरों की साफ-सफाई न होना, नदियों के रास्ते बंद हो जाना, कमजोर और टूटे हुए बांध, हरियाली की कमी, अवैध खनन और जंगलों की कटाई। साथ ही, नदी किनारे बिना अनुमति के घर और अन्य निर्माण भी बाढ़ की समस्या बढ़ाते हैं। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन की वजह से बारिश का तरीका बदल गया है और अब बारिश ज्यादा और अनियमित होती है, जिससे बाढ़ की स्थिति खराब हो रही है। नदियों में गाद जमा होने से पानी सही तरह से नहीं बह पाता क्योंकि सरकारें सालों से नदियों से गाद निकालने में कामयाब नहीं हो पाईं।  1988 की बाढ़ ने पंजाब को कर दिया था बर्बाद साल 1988 की बाढ़ पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के लिए बहुत बड़ी तबाही लेकर आई थी। इस बाढ़ में उत्तर भारत में 1,400 से ज्यादा लोग मारे गए, जिनमें से 383 सिर्फ पंजाब में थे। उस साल मार्च से लगातार बारिश हो रही थी, लेकिन सितंबर में सतलुज, रावी और व्यास नदियाँ बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं। 11 मार्च को गुरदासपुर में रावी नदी अचानक उफान पर आई, जिससे 40 गाँव पानी में डूब गए। जुलाई में सतलुज और रावी नदियों के पानी ने कई जिलों को पूरी तरह डुबो दिया। सितंबर के आखिरी दिनों में भाखड़ा और पौंग बाँधों के दरवाज़े खोलने से बाढ़ और भी बढ़ गई। 1993 की बाढ़ से भी मची थी भारी तबाही साल 1988 के पांच साल बाद, 1993 में भी पंजाब में बड़ी बाढ़ आई। इस बार करीब 300 लोग मारे गए और 6,200 मवेशी पानी में डूब गए। अमृतसर, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला, होशियारपुर और संगरूर जैसे इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर के अध्ययन से पता चला कि 1988 की बाढ़ नदियों के बहुत बढ़ जाने की वजह से आई थी, लेकिन 1993 की बाढ़ नहरों और तटबंधों में दरारें आने की वजह से ज्यादा नुकसान पहुंचाई। क्यों बढ़ती जा रही है तबाही? जानकारी से पता चलता है कि पंजाब में नदियों के किनारे बने तटबंध और बांध सही तरीके से रखरखाव नहीं होते। नहरों की सफाई भी ठीक से नहीं की जाती, जिससे पानी का बहाव ठीक से नहीं हो पाता। जल निकासी की व्यवस्था कमजोर है और प्राकृतिक जलमार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। नहरों, रेलवे ट्रैक, सड़कों और खेती के कारण पानी का प्राकृतिक रास्ता बाधित हो गया है। साथ ही, बाढ़ वाले इलाकों में बिना अनुमति के बन रहे घर और कमजोर बांधों की वजह से बाढ़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया है। साल 2023 की बाढ़ और जलवायु परिवर्तन का असर एक अध्ययन के मुताबिक साल 2023 की बाढ़ जलवायु परिवर्तन के कारण आई असामान्य और भारी बारिश की वजह से हुई थी। हिमाचल प्रदेश में 7 से 11 जुलाई 2023 तक सामान्य से 436% अधिक बारिश हुई जिससे ब्यास, घग्गर और सतलुज नदियाँ पंजाब के निचले इलाकों में घुस गईं। लगभग 2.21 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ गया, जिसमें खासकर धान की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई। सरकारें क्यों रही नाकाम? एक प्रोफेसर के अनुसार पंजाब में बाढ़ प्रबंधन के लिए मास्टर प्लान होने के बावजूद बाढ़ का प्रभाव कम करने में असफल रहे हैं। तटबंधों का कमजोर होना, नदियों के किनारे अवैध अतिक्रमण, और वित्तीय व राजनीतिक कमी ने स्थिति को खराब कर दिया है। साल 1988 से 2010 तक के आंकड़े बताते हैं कि सहायक नदियों की सफाई न होना, तटबंधों का टूटना, नहरों में कट लगाना और जल निकासी प्रणाली की कमी प्रमुख कारण रहे हैं।  

अंबिकापुर : कलेक्टर की साप्ताहिक बैठक, हड़ताल पर सख्ती और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा

अम्बिकापुर कलेक्टर विलास भोसकर की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में साप्ताहिक समय-सीमा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा किए जा रहे हड़तालों पर गंभीरता से चर्चा हुई। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि शासन के आदेशानुसार हड़ताल अवधि का कार्यालय  में अनुपस्थित रहने वाले अधिकारी-कर्मचारियों का वेतन काटा जाएगा और नियमानुसार कठोर कार्रवाई भी की जाएगी। कलेक्टर ने पीजी पोर्टल, सीएम जनदर्शन एवं अटल मॉनिटरिंग पोर्टल में प्राप्त आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीएम जनमन योजना के अंतर्गत बन रहे प्रधानमंत्री आवास, पीएम ग्राम सड़क एवं निर्माण कार्यों को समयसीमा में पूर्ण करने पर जोर दिया। साथ ही, एग्रीस्टैक पंजीयन और पीएम आवास में प्रगति लाने के भी निर्देश दिए। कलेक्टर ने फील्ड विजिट एवं सतत मॉनिटरिंग के माध्यम से शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में गति लाने को निर्देशित किया। ,वहीं कलेक्टर ने आगामी छत्तीसगढ़ रजत जयंती कार्यक्रमों के अंतर्गत विभागवार गतिविधियों को निर्धारित तिथि अनुसार बेहतर ढंग से आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए। इसके अतिरिक्त, आदि कर्मयोगी अभियान के तहत अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने और कार्य योजना को प्रभावशाली रूप से क्रियान्वित करने को निर्देशित किया। उन्होंने फसलों के डिजिटल क्रॉप सर्वे में प्रगति लाने और विभागीय लंबित प्रकरणों का शीघ्र व नियमानुसार निराकरण करने हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ विनय कुमार अग्रवाल, अपर कलेक्टर सुनील नायक, राम सिंह ठाकुर, अमृत लाल ध्रुव, निगम कमिश्नर डी. एन. कश्यप, सर्व एसडीएम सहित सभी विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।