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तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने की बड़ी घोषणा: कालेश्वरम परियोजना पर होगी CBI जांच

हैदराबाद तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की पूर्ववर्ती राज्य सरकार के दौरान निर्मित कालेश्वरम परियोजना में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराए जाने की घोषणा की है। कलेश्वरम परियोजना पर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पर रविवार देर रात लगभग दो बजे समाप्त हुई चर्चा के अंत में रेड्डी ने विधानसभा में कहा कि इस परियोजना की जांच सीबीआई को सौंपना उचित है, क्योंकि यह अंतरराज्यीय मामला है, केंद्रीय एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभाग और एजेंसियां इस परियोजना में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना के डिजाइन, निर्माण और वित्तपोषण में केंद्र सरकार के संगठन और वित्तीय संस्थान भी शामिल हैं, ‘‘इसलिए अध्यक्ष की अनुमति से सदन इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्णय ले रहा है। इसमें कई मुद्दे शामिल हैं जिनकी जांच कराए जाने की आवश्यकता है इसलिए हमारी सरकार सीबीआई जांच के आदेश जारी कर रही है।’’ उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) और न्यायिक आयोग की रिपोर्ट ने परियोजना से संबंधित विभिन्न मुद्दों की गहन और अधिक व्यापक जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि न्यायिक आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कई खामियों और अनियमितताओं को चिह्नित किया है जिन पर आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि एनडीएसए की रिपोर्ट के अनुसार योजना, डिजाइन और गुणवत्ता नियंत्रण में खामियां कालेश्वरम परियोजना के मेदिगड्डा बैराज की विफलता का कारण पाई गई हैं। उन्होंने कहा कि बीआरएस सरकार ने परियोजना के लिए अत्यधिक ब्याज दरों पर ऋण लिया था। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) पिनाकी घोष आयोग ने सुझाव दिया है कि तेलंगाना सरकार को पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए। आयोग ने तेलंगाना में कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना के निर्माण में अनियमितताओं को लेकर अपनी रिपोर्ट रविवार को प्रस्तुत की। इससे पहले, बीआरएस ने विधानसभा से बहिर्गमन किया और आरोप लगाया कि पार्टी को न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पर अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘तत्कालीन सिंचाई मंत्री ने मनमाने ढंग से निर्देश दिए और वित्त एवं योजना मंत्री ने राज्य के वित्त और आर्थिक स्वास्थ्य के प्रति उदासीनता बरती। यह तत्कालीन मुख्यमंत्री ही हैं, जिन्हें तीनों बैराज की योजना, निर्माण, पूर्णता, संचालन और रखरखाव में अनियमितताओं के लिए सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से जवाबदेह बनाया जा सकता है। हालांकि, यह सरकार का काम है कि वह जांच करे और कानून के अनुसार उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करे।’’ उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश पी.सी. घोष की अध्यक्षता वाले आयोग ने 31 जुलाई को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। विधानसभा में आयोग की रिपोर्ट पर रविवार को चर्चा हुई।  

राहुल गांधी केस अपडेट: सुनवाई की नई तारीख 3 सितंबर तय

प्रयागराज इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के लिए तीन सितंबर की तिथि सोमवार को तय की। राहुल गांधी ने वाराणसी के विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया है। विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) ने राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग वाली एक याचिका नए सिरे से सुनवाई करने के लिए एसीजेएम की अदालत के पास भेज दिया जिसके खिलाफ राहुल गांधी ने इस उच्च न्यायालय का रुख किया है। यह मामला अमेरिका में सिखों के संबंध में 2024 में दिए गए एक बयान से जुड़ा है। शिकायतकर्ता नागेश्वर मिश्रा के वकील के अनुरोध पर न्यायमूर्ति समीर जैन ने सोमवार को सुनवाई टाल दी और अगली तिथि तीन सितंबर तय की। वाराणसी के नागेश्वर मिश्रा नाम के एक व्यक्ति ने वाराणसी के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए) के समक्ष एक आवेदन किया था जिसने 28 नवंबर, 2024 को इस मामले में सुनवाई के बाद राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग वाले आवेदन को खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था कि उक्त भाषण अमेरिका में दिया गया, इसलिए यह मामला उनके न्यायिक क्षेत्र से बाहर का है। अदालत द्वारा मामला खारिज किए जाने को राव ने पुनरीक्षण अदालत के समक्ष चुनौती दी जिसने उनकी पुनरीक्षण याचिका स्वीकार कर ली और एसीजेएम को इस मामले में नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया। यह मामला सितंबर, 2024 का है। अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा था कि भारत में सिखों के लिए माहौल अच्छा नहीं है। उनके इस बयान को लेकर विरोध हुआ था और इसे भड़काऊ और विभाजनकारी बताया गया था। वाराणसी के निवासी नागेश्वर मिश्रा ने इस बयान के खिलाफ वाराणसी के सारनाथ थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन जब वह सफल नहीं हुए तो उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए अदालत में एक आवेदन दाखिल किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 28 नवंबर, 2024 को यह कहते हुए उनका आवेदन खारिज कर दिया था कि यह मामला अमेरिका में दिए गए भाषण से जुड़ा है और यह उनके न्यायिक क्षेत्र से बाहर का है। इसके बाद, नागेश्वर मिश्रा ने सत्र न्यायालय में एक पुनरीक्षण याचिका दायर की जिसे अदालत द्वारा 21 जुलाई, 2025 को स्वीकार कर लिया गया। अब राहुल गांधी ने इस निर्णय के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक पुनरीक्षण याचिका दायर की है जिसमें दलील दी गई है कि वाराणसी की अदालत का आदेश गलत, अवैध और न्यायिक क्षेत्र से बाहर का है।  

रूसी तेल पर भारत का स्टैंड साफ, अमेरिका को दो टूक जवाब

नई दिल्ली  भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर स्थिति स्पष्ट किए जाने के बावजूद अमेरिका इसे लेकर भारत को लगातार निशाना बना रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी बेतुके तर्क देकर भारत पर मुनाफाखोरी तक के आरोप लगा चुके हैं। अब केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अमेरिका को सख्त संदेश दे दिया है। हरदीप पुरी ने कहा है कि भारत ने रूसी तेल खरीदने में किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है, बल्कि यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत के ऊर्जा व्यापार ने वैश्विक बाजारों को स्थिर करने और कीमतों को काबू में रखने में मदद की है। पुरी ने वाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो की हालिया टिप्पणी पर जवाब देते हुए यह बातें कहीं हैं। नवारो ने हाल ही में यह बयान दिए हैं कि भारत रूस की आर्थिक मदद कर पुतिन की ‘युद्ध मशीन’ को वित्तपोषित कर रहा है। नवारो ने बीते दिनों दूसरे कुछ बयानों में भी इस तरह की बातें कही हैं। पिछले सप्ताह उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को ‘मोदी का युद्ध’ तक बता दिया था। वहीं सोमवार को उन्होंने कहा है कि रूस से तेल खरीदने का फायदा भारत के ब्राह्मणों को हो रहा है। भारत का जवाब इस पर जवाब देते हुए ‘द हिंदू’ के लिए लेख में केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा कि भारत लंबे समय से और फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण से बहुत पहले से पेट्रोलियम उत्पादों का दुनिया का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक रहा है। इसके निर्यात की मात्रा और मुनाफे मोटे तौर पर समान रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने नवारो का नाम लिए बिना लिखा कि कुछ आलोचकों का आरोप है कि भारत रूसी तेल को खरीद कर ‘युद्ध मशीन’ को वित्तपोषित कर रहा है। यह पूरी तरह से गलत और असत्य है।" भारत ने नहीं तोड़े कोई नियम पुरी ने अमेरिका को संदेश देते हुए कहा कि ईरान या वेनेजुएला के कच्चे तेल की तरह रूसी तेल खरीद पर कभी प्रतिबंध नहीं लगाया गया। उन्होंने कहा, ‘‘ रूसी तेल G-7 और यूरोपीय संघ की मूल्य सीमा प्रणाली के अंतर्गत आता है जिसे तेल की आपूर्ति जारी रखने और राजस्व की सीमा निर्धारित करते हुए तैयार किया गया है।’’ केंद्रीयमंत्री ने कहा, ‘‘ऐसे ‘पैकेज’ के 18 दौर हो चुके हैं और भारत ने हर एक का पालन किया है। भारत द्वारा किया गया हर लेन-देन कानूनी है। हर लेन-देन में वैध निर्यात एवं बीमा, अनुपालन करने वाले व्यापारी और ‘ऑडिट’ माध्यमों का इस्तेमाल किया गया है। भारत ने कोई नियम नहीं तोड़े हैं। भारत ने बाजारों को स्थिर किया है और वैश्विक कीमतों को बढ़ने से रोका है।’’  

कितनी मुश्किल होती है एस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग? नासा से सामने आई एक्सक्लूसिव तस्वीरें

न्यूयॉर्क भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने एस्ट्रोनॉट्स की कड़ी ट्रेनिंग की एक झलक दिखाई है। उन्होंने नासा के मल्टी-एक्सिस ट्रेनर (मैट) स्पेस सेंटर से एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में शुभांशु शुक्ला कुछ खास मशीनों के साथ दिखाई देते हैं। ऐसी ही एक मशीन है, जिस पर एस्ट्रोनॉट्स को लगातार घुमाया जाता है। असल में स्पेस में अगल-अलग तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें काफी कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है। शुभांशु शुक्ला ने इसका वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए इसके कैप्शन में लिखा है, ‘लेट्स गेट स्पिनिंग।’ दिखाई वॉमिट कॉमेट चेयर शुभांशु शुक्ला ने जिस मशीन का वीडियो दिखाया है, उसे ‘वॉमिट कॉमेट चेयर’ कहा जाता है। यह एक तरह का सिम्यूलेटर है। इसमें ट्रेनिंग लेकर अंतरिक्ष यात्री स्पेस में होने वाली चीजों को महसूस कर सकता है। इसमें तीन रिंग्स लगी होती हैं, जो घूमती रहती हैं। जब एक एस्ट्रोनॉट अपनी सीट से बंधा होता है, तो रिंग कई दिशाओं में घूमती है। ऐसा इसलिए किया जाता है कि अगर कभी अंतरिक्ष यान अस्थिर हो जाए तो उस दौरान होने वाला अनुभव अंतरिक्ष यात्री महसूस कर सके। साथ ही वह ऐसे हालात में अपने ऊपर नियंत्रण बनाए रखने में भी सफल रहे और ध्यान केंद्रित कर सके। नील आर्मस्ट्रांग का बताया अनुभव अंदर की जानकारी देते हुए शुभांशु शुक्ला बताते हैं कि मैं मार्शल स्पेस फ्लाइट सेंटर के मैट में हूं। इस ट्रेनर का उपयोग मर्करी एस्ट्रोनॉट्स को ऑर्बिट के अनुभवों को देने के लिए किया गया है। इसके बाद उन्होंने बताया कि नील आर्मस्ट्र्रांग को जेमिनी 8 मिशन के दौरान समस्याएं आई थीं। तब थ्रस्टर में समस्या होने के चलते काफी ज्यादा घुमाव हो रहे थे। उन्होंने बाद में मैनुअल तरीके से स्पेसक्राफ्ट पर नियंत्रण पाया था।  

IPL चैंपियन से भी दोगुना इनाम, महिला वर्ल्ड कप जीत पर होगी धनवर्षा

नई दिल्ली इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने सोमवार को भारत और श्रीलंका में होने वाले महिला विश्व कप के लिए इनामी राशि की घोषणा की. खास बात यह है कि यह राशि ICC मेंस क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 की कुल इनामी राशि से $10 मिलियन से ज्यादा है. आधिकारिक बयान में ICC ने पुष्टि की कि इस प्रमुख टूर्नामेंट में कुल पुरस्कार राशि $13.88 मिलियन (अमेरिकी डॉलर) होगी. यह इस साल की शुरुआत में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु द्वारा जीते गए उनके पहले IPL खिताब की पुरस्कार राशि से दोगुनी है. महिला विश्व कप 2025 इनामी राशि की डिटेल: महिला क्रिकेट विश्व कप के 13वें एडिशन के विजेताओं को $4.48 मिलियन (INR 39,54,00,294) की पुरस्कार राशि मिलेगी; जो 2022 में ऑस्ट्रेलिया को दी गई $1.32 मिलियन की राशि से 239 प्रतिशत अधिक है. उप-विजेताओं को $2.24 मिलियन (INR 19,77,11,314) की राशि मिलेगी, जो तीन साल पहले इंग्लैंड को मिले $600,000 की तुलना में 273 प्रतिशत की वृद्धि है. * दो सेमीफाइनल हारने वाली टीमों को प्रत्येक $1.12 मिलियन (INR 9,88,57,926) मिलेंगे. * प्रत्येक ग्रुप स्टेज प्रतिभागी को $250,000 (INR 2,20,66,501) की गारंटी दी जाएगी. * प्रत्येक ग्रुप स्टेज जीत पर $34,314 (INR 30,28,794) मिलेंगे. * पांचवें और छठे स्थान पर रहने वाली टीमों को प्रत्येक $700,000 (INR 6,17,86,900) मिलेंगे. * सातवें और आठवें स्थान पर रहने वाली टीमों को प्रत्येक $280,000 (INR 2,47,14,765) मिलेंगे. महिला क्रिकेट में बड़ी पहल ICC के अध्यक्ष जय शाह ने कहा कि इनामी राशि में बढोतरी ‘महिला क्रिकेट की यात्रा में एक माइलस्टोन है. शाह ने कहा, “पुरस्कार राशि में यह चार गुना वृद्धि महिला क्रिकेट के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है और इसके लांग टर्म ग्रोथ के प्रति हमारी स्पष्ट प्रतिबद्धता को दिखाता है. हमारा मैसेज बहुत ही साफ है, महिला क्रिकेटरों को यह जानना चाहिए कि यदि वे इस खेल को प्रोफेशनल तौर से चुनती हैं तो उन्हें पुरुषों के समान पैसे मिलेंगे”

बीमार कैदियों की रिहाई पर बड़ा फैसला, योगी सरकार बनाएगी नियम आसान

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीर बीमारियों से ग्रसित बंदियों की समयपूर्व रिहाई से संबंधित नियमों को अधिक सरल, स्पष्ट तथा मानवीय दृष्टिकोण से परिभाषित किए जाने की आवश्यकता जताई। सोमवार को कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाओं की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन करते हुए प्रदेश की नीति को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पात्र बंदियों की रिहाई स्वतः विचाराधीन होनी चाहिए और इसके लिए उन्हें अलग से आवेदन न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्राणघातक रोग से पीड़ित होने की आशंका वाले सिद्धदोष बंदी, जिसे मुक्त करने पर उसके स्वस्थ होने की उपयुक्त संभावना है तथा वृद्धावस्था, अशक्तता या बीमारी के कारण भविष्य में ऐसा अपराध करने में स्थायी रूप से असमर्थ बंदी, जिसके लिए वह दोषी ठहराया गया हो, के साथ-साथ घातक बीमारी या किसी प्रकार की अशक्तता से पीड़ित सिद्धदोष बंदी जिसकी मृत्यु निकट भविष्य में होने की संभावना हो, के संबंध में प्रदेश के सभी कारागारों में सर्वेक्षण कर वास्तविक संख्या का आकलन किया जाए। इनमें महिलाओं, बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर रिहा करने की व्यवस्था हो।   मुख्यमंत्री ने कैदियों को कृषि, गोसेवा आदि कार्यों से जोड़कर उनकी जेल अवधि के सदुपयोग करने के लिए व्यवस्था बनाने की भी आवश्यकता बताई। सीएम योगी ने कहा कि जेल मैनुअल में यह भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना आवश्यक है कि किन बीमारियों को असाध्य रोग की श्रेणी में रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए समयपूर्व रिहाई उन्हीं मामलों में की जानी चाहिए, जहां से सामाजिक जोखिम न हो। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि हत्या, आतंकवाद, देशद्रोह, महिला और बच्चों के विरुद्ध जघन्य अपराध जैसे मामलों में रिहाई कतई नहीं की जानी चाहिए। नियमों में बदलाव पर जोर देते हुए सीएम योगी ने कहा कि प्रत्येक वर्ष तीन बार जनवरी, मई और सितंबर में पात्र बंदियों के मामलों की स्वतः समीक्षा की व्यवस्था हो। यदि किसी बंदी को रिहाई न दी जाए तो उसके कारण स्पष्ट रूप से दर्ज किए जाएं और उसे यह अधिकार मिले कि वह उस निर्णय को चुनौती दे सके। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा सुझाई गई प्रणाली को उत्तर प्रदेश में अपनाने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि बंदियों को न्यायिक अधिकारों का लाभ सुचारू रूप से मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, त्वरित और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित होनी चाहिए तथा जल्द ही नई नीति का प्रारूप तैयार कर अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया जाए।

सीपी राधाकृष्णन पर सुदर्शन रेड्डी का वार, बोले- विपक्षी कैंडिडेट तो बोलते ही नहीं

नई दिल्ली  विपक्षी INDIA गठबंधन के उपराष्ट्रपति कैंडिडेट सुदर्शन रेड्डी ने सत्ता पक्ष के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन पर तंज कसा है। उन्होंने सोमवार को कहा कि मेरे प्रतिद्वंद्वी तो बोलते ही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि दोनों कैंडिडेट बोलें तो एक डिबेट हो सकती है। इस तरह हैदराबाद पहुंचे रेड्डी ने राधाकृष्णन को अपने साथ डिबेट करने का चैलेंज दे दिया। रेड्डी ने कहा कि मैं भले ही विपक्षी दलों का कैंडिडेट हूं, लेकिन मुझे INDIA ब्लॉक के बाहर के दलों जैसे आम आदमी पार्टी का भी समर्थन हासिल है। रेड्डी ने कहा कि मेरी लड़ाई संविधान को बचाने के लिए है और मैं शुरुआती दिनों से ही इसके लिए संघर्ष करता रहा हूं। यही दलील देते हुए सुदर्शन रेड्डी ने सभी दलों के सांसदों पत्र लिखा है और उपराष्ट्रपति चुनाव में खुद को समर्थन देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई भारत के बीते कुछ सालों के इतिहास में सबसे साफ-सुथरी और शानदार चुनावी लड़ाई होगी। रेड्डी ने पहले ही कहा था कि वह सभी दलों के सांसदों को चिट्ठी लिखेंगे और मांग करेंगे उन्हें ही वोट दें। रेड्डी ने मुंबई में एक आयोजन में कहा था कि यदि मुझे आप लोगों ने जिताया तो यह संविधान को बचाने के लिए दिया गया वोट होगा। यदि मुझे उपराष्ट्रपति के तौर पर काम करने का मौका मिला तो मैं संविधान की रक्षा करूंगा। रेड्डी ने कहा कि उनका संविधान के साथ सफर 1971 में शुरू हुआ था, जब वे आंध्र प्रदेश बार काउंसिल के मेंबर बने और वकालत की शुरुआत की थी। इसके बाद वे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश बने। उन्होंने स्पष्ट किया कि मैं किसी भी राजनीतिक पार्टी का सदस्य नहीं हूं। मैं कभी किसी राजनीतिक पार्टी या संगठन का सदस्य नहीं रहा हूं और भविष्य में भी बनने का इरादा नहीं है। इसी वजह से मैं ही एकमात्र उम्मीदवार हूं जो सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से अपने योग्यता के आधार पर समर्थन की अपील कर सकता हूं। विपक्षी उम्मीदवार ने कहा कि वे संसद के दोनों सदनों के प्रत्येक सदस्य को व्यक्तिगत पत्र लिखेंगे और उनकी अंतरात्मा को संबोधित करते हुए अपने पक्ष में मतदान करने की अपील करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मौका मिला तो वे भाजपा नेतृत्व से मिलने को तैयार हैं। यह उपराष्ट्रपति चुनाव हाल ही में जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे की वजह से हो रहा है। विपक्ष ने इसे वैचारिक लड़ाई बताया है, लेकिन आंकड़े सत्तारूढ़ भाजपा और उसकी लीडरशिप वाले NDA गठबंधन के पक्ष में हैं, जिसने महाराष्ट्र राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को 9 सितंबर को होने वाले चुनाव हेतु अपना उम्मीदवार बनाया है।  

गडकरी ने क्यों कहा- बेवकूफ बनाने वाला होता है ‘बेस्ट लीडर’?

नई दिल्ली  केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि बेवकूफ बनाने वाले लोग अच्छे नेता बनते हैं। महाराष्ट्र के नागपुर में अखिल भारतीय महानुभाव परिषद के एक कार्यक्रम में शामिल हुए गडकरी ने मजाकिया अंदाज में राजनीति पर खुलकर बात की। साथ ही उन्होंने कहा कि शॉर्टकट जल्दी परिणाम दे सके हैं, लेकिन इसके भी दुष्प्रभाव हो सकते हैं। सोमवार को गडकरी ने कहा, 'कुछ भी हासिल करने का एक शॉर्टकट होता है। कोई भी व्यक्ति शॉर्टकट के जरिए जल्दी पहुंच सकता है। अगर आप नियम तोड़कर सड़क पार करना चाहते हैं, तो हो सकता है कि रेड लाइट हो और आप क्रॉस कर लें। शॉर्टकट का एक मतलब यह भी है कि यह आपको शॉर्ट कर देता है। इसलिए हमें ईमानदारी, विश्वसनीयता, समर्पण और सच्चाई जैसे मूल्य दिए गए हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'लंबे समय की सफलता सच्चाई से ही मिलती है। जैसे कि भगवान कृष्ण ने भगवत गीता में लिखा है कि अंत में जीत सत्य की होती है।' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनकी फील्ड में सच बोलना मना है। उन्होंने कहा, 'मैं जिस फील्ड में काम करता हूं, वहां पूरे दिल से सच बोलना मना है। जो लोगों को बेवकूफ बना सकता है, वह सबसे अच्छा नेता बन सकता है।' नागपुर में गडकरी ने कहा, 'चक्रधर स्वामी ने सत्य, अहिंसा, शांति, मानवता और समानता के मूल्यों की शिक्षा दी। सत्य हमारे जीवन का आधार है और हमें इसका पालन करना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'महानुभाव संप्रदाय के संस्थापक चक्रधर स्वामी की शिक्षाएं प्रेरणादायी हैं जिनका सभी को जीवन में अनुसरण करना चाहिए। किसी व्यक्ति में परिवर्तन उसे दिये गए संस्कारों से जुड़ा होता है।'

मोदी पर राहुल का हमला, कहा- हाइड्रोजन बम की बारी, जनता को क्या जवाब देंगे?

पटना  बिहार के सासाराम से शुरू हुई राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा का आज (एक सितंबर) को पटना में संपन्न हुई। इस मौके पर इंडिया अलायंस के सहयोगी दलों ने बड़ा मार्च निकाला। इस बीच जनसभा को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बीजेपी को चेताते हुए कहा कि अब एटम बम से बड़ा हाइड्रोजन बम आ रहा है। वोट चोरी की आपकी सच्चाई पूरी देश को पता चलने वाली है। बिहार क्रांतिकारी प्रदेश है, और इसने पूरे देश को संदेश दिया है, कि हम वोट चोरी नहीं होने देंगे। हाइड्रोजन बम के बाद नरेंद्र मोदी अपना चेहरा देश के लोगों को नहीं दिखा पाएंगे। राहुल ने कहा कि महादेवपुरा में 'वोट चोरी' के रूप में एटम बम के बाद, हम जल्द ही हाइड्रोजन बम लाएंगे। महात्मा गांधी की हत्या करने वाले अब लोकतंत्र और संविधान की हत्या करने की कोशिश कर रहे हैं। हम उन्हें ऐसा नहीं करने देंगे। हाल ही में हमने देश के सामने 'वोट चोरी' का सबूत पेश किया। वोट चोरी का मतलब है लोगों के अधिकारों, लोकतंत्र और भविष्य की चोरी है। आपको बता दें हाल में राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव 2024 में अनियमितताओं के दावों का 'एटम बम' फोड़ते हुए बेंगलुरू सेंट्रल लोकसभा सीट की एक विधानसभा में एक लाख से अधिक फर्जी वोटरों के जरिए चुनावी धांधली का दावा किया था। नेता प्रतिपक्ष ने ने कहा कि हमारे लोगों ने कागज के वोटर लिस्ट से पता और फोटो मिलाकर काम किया और फिर देश के सामने सबूत रखा है। इसमें 17-17 घंटे लगे। बिहार के युवाओं से मैं कहना चाहता हूं कि वोट चोरी का मतलब अधिकार की चोरी, आरक्षण की चोरी, लोकतंत्र की चोरी, युवाओं के भविष्य की चोरी। यह सिर्फ वोट नहीं ले रहे बल्कि आपकी जमीन और राशन कार्ड सब कुछ ले जाकर अडाणी- अंबानी को दे देंगे। जिन शक्तियों ने महात्मा गांधी की हत्या की वहीं शक्तियां गांधी और आबंडेकर के संविधान की हत्या की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए हमने बिहार में यात्रा की है और आपका बेहतरीन साथ मिला है। बिहार के सारे के सारे युवा खड़े हो गए। इस दौरान राहुल ने 'वोट चोर' के नारे भी लगवाए।  

सिएटल साउंडर्स बने लीग्स कप चैंपियन, इंटर मियामी को हराया

सिएटल सिएटल साउंडर्स एफसी ने लीग्स कप के फाइनल में मियामी सीएफ को 3-0 से शिकस्त देकर खिताब अपने नाम कर लिया है। यह मुकाबला सोमवार (भारतीय समयानुसार) को लुमेन फील्ड में खेला गया। इंटर मियामी पर इस जीत के साथ साउंडर्स एमएलएस की इकलौती ऐसी टीम बन गई, जिसने उत्तरी अमेरिकी फुटबॉल की सभी बड़ी ट्रॉफियां जीत ली हैं। क्लब इससे पहले चार यूएस ओपन कप, दो एमएलएस कप, एक कॉनकाकाफ चैंपियंस कप और एक सपोर्टर्स शील्ड जीत चुका है। साउंडर्स ने 26वें मिनट में बढ़त हासिल कर ली। फॉरवर्ड ओसाजे डी रोजारियो ने विंगर पॉल रॉथरॉक के क्रॉस को शानदार हेडर से गोलपोस्ट में पहुंचाया। इसके बाद 84वें मिनट में डिफेंडर एलेक्स रोल्डन ने पेनाल्टी किक पर गोल दागकर बढ़त 2-0 कर दी। रॉथरॉक ने 89वें मिनट में गोलपोस्ट के सामने से एक खूबसूरत शॉट लगाकर मियामी पर सिएटल साउंडर्स की जीत पक्की कर दी। इंटर मियामी को दूसरे हाफ में बराबरी करने के कई सुनहरे मौके मिले। लुइस सुआरेज ने मौके बनाए, लेकिन लियोनेल मेसी (50वें मिनट) और तादेओ अलेंदे (60वें मिनट) इसका फायदा नहीं उठा सके। सिएटल ने अपनी ट्रॉफी कैबिनेट में उत्तरी अमेरिका की सभी बड़ी ट्रॉफियां शामिल कर ली हैं। इस जीत ने साउंडर्स को 2026 कॉनकाकाफ चैंपियंस कप के अंतिम 16 के राउंड में बाई दे दी है। इस गर्मी में फीफा क्लब विश्व कप में प्रतिस्पर्धा करने के बाद से उनका शानदार प्रदर्शन जारी है। लीग्स कप के पहले चरण में (चाहे एमएलएस हो या लीगा एमएक्स) अधिकतम अंक हासिल करने वाली इकलौती टीम बनने के बाद सिएटल ने चोटों और निलंबनों के बावजूद शानदार प्रदर्शन किया और 16-2 के गोल अंतर के साथ अपनी ताकत दिखाई है। अब साउंडर्स को एक हफ्ते का ब्रेक मिलेगा। इस ब्रेक के बाद टीम 13 सितंबर को एलए गैलेक्सी के खिलाफ लुमेन फील्ड में होने वाले एमएलएस के नियमित सत्र में वापसी करेगी।