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RCB का अहम फैसला, भगदड़ पीड़ितों को मिलेगा सहारा!

नई दिल्ली  इस साल आईपीएल के इतिहास में पहली बार ट्रॉफी पर कब्जा जमाने के बाद आरसीबी के जश्न में मची भगदड़ पर फ्रेंचाइजी ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। उसने आरसीबी केयर्स नाम की पहल का ऐलान किया है। हालांकि, उसके बारे में अभी डीटेल से नहीं बताया गया है लेकिन जल्द ही डीटेल शेयर करने की बात कही गई है। आईपीएल खिताब जीतने के अगले दिन 4 जून को आरसीबी ने बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में जश्न का कार्यक्रम रखा था। उस दौरान स्टेडियम के गेट के पास भगदड़ मचने से 11 लोगों की मौत हो गई थी और 56 अन्य घायल हो गए थे। भगदड़ के 84 दिन बाद आरसीबी ने उसे लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उसने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट डालते हुए कहा है कि उसकी चुप्पी गैरमौजूदगी नहीं थी। वह दर्द था। इसके साथ ही फ्रेंचाइजी ने 'आरसीबी केयर' पहल का जिक्र किया है। पोस्ट में उसके बारे में तो और ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है लेकिन संकेत मिल रहा है कि हो सकता है कि फ्रेंचाइजी भगदड़ के पीड़ित परिवारों के लिए कुछ राहतभरा कदम उठाए। ये राहत आश्रितों के जीवनयापन, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी उठाने या आर्थिक मदद जैसी पहल के रूप में हो सकती है। लेकिन आरसीबी केयर के तहत ऐसा कुछ किया जाएगा या नहीं, ये फिलहाल स्पष्ट नहीं है। जल्द ही डीटेल देने की बात कही गई है। भगदड़ के बाद से ही आरसीबी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर एकदम से चुप्पी थी। 3 महीने तक न तो हादसे को लेकर कुछ लिखा गया और न ही क्रिकेट पर या किसी क्रिकेटर पर या किसी भी तरह का पोस्ट। आरसीबी ने गुरुवार को एक्स पर फैंस को संबोधित नोट पोस्ट किया। उसमें लिखा, 'डियर 12th मैन आर्मी, यह आपको हमारा दिल से लिखा खत है! करीब तीन महीने हो चुके हैं जब हमने यहां पिछली बार पोस्ट किया था। चुप्पी गैरमौजूदगी नहीं थी। यह दर्द था।' नोट में आगे लिखा गया है, 'यह स्पेस कभी ऊर्जा, यादों और मोमेंट्स से भरा हुआ होता था जिसे आप बहुत इंजॉय करते थे…लेकिन 4 जून ने सबकुछ बदल दिया। उस दिन ने हमारे दिलों को तोड़ दिया, और तब से हमारे इस स्पेस पर चुप्पी थी। उस चुप्पी में हम शोक मान रहे थे। सुन रहे थे। सीख रहे थे। और धीरे-धीरे हमने कुछ ऐसा बनाना शुरू किया जो सिर्फ एक प्रतिक्रिया नहीं है। कुछ ऐसा है जिसमें हम पूरी तरह यकीन करते हैं। इस तरह आरसीबी केयर्स का जन्म हुआ।' पोस्ट में बताया गया है कि आरसीबी केयर्स अपने फैंस के साथ खड़े होने, उन्हें सम्मान देने और घाव भरने के लिए है। आरसीबी ध्यान रखता है और हम हमेशा ध्यान रखेंगे। जल्द ही विस्तार से जानकारी देंगे।  

गवर्नर बनाम राष्ट्रपति: सेना तैनात करने की पावर किसके पास?

नई दिल्ली राज्यपालों और राष्ट्रपति की ओर से किसी विधानसभा से पारित बिल पर लंबे समय तक निर्णय न लेने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में एक आदेश दिया था। बेंच ने विधेयकों पर फैसले के लिए 90 दिन की लिमिट तय कर दी थी, जिस पर राष्ट्रपति ने अदालत में रेफरेंस दाखिल किया है। उन्होंने पूछा है कि क्या सुप्रीम कोर्ट की ओर से राष्ट्रपति और राज्यपाल के लिए टाइमलाइन तय की जा सकती है। इसी पर 5 दिन सुनवाई चल चुकी है और आज फिर से दिलचस्प बहस देखने को मिली। केंद्र सरकार के वकील तुषार मेहता ने कहा कि इस तरह यदि बिलों को रोकने की बात अदालत में आई है तो क्या किसी विधेयक को मंजूरी पर भी ऐसा हो सकता है। यही नहीं उन्होंने राज्यपाल और राष्ट्रपति के विवेकाधिकार एवं परिस्थितिजन्य निर्णय लेने की क्षमता पर अदालत में विचार होने पर भी सवाल उठाया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मान लीजिए कि किसी राज्य में कानून व्यवस्था की समस्या हो गई है। स्थानीय पुलिस स्थिति को संभाल नहीं पा रही है। ऐसे में क्या अर्धसैनिक बलों की तैनाती से पहले केंद्र सरकार को अदालत में अर्जी दाखिल करनी चाहिए। मेरा तो जवाब है कि ऐसा नहीं हो सकता। यही नहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आर्टिकल 32 के तहत तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों की ओर से अर्जी दाखिल करने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि आर्टिकल 32 में मूलभूत अधिकारों की रक्षा की बात कही गई है। एक बार कर्नाटक सरकार ने भी इसके तहत अर्जी डाली थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। बेंच का कहना था कि मूल अधिकारों के रक्षा के नाम पर सरकार अर्जी नहीं डाल सकती। कोई एनजीओ, पीड़ित पक्ष या अन्य उत्पीड़न के शिकार लोग या संस्था ऐसा कर सकते हैं, लेकिन सरकार नहीं। इस दौरान तमिलनाडु सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अभिषेक मनु सिंघवी ने भी दिलचस्प दलीलें दीं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल और सरकार एक म्यान में दो तलवार की तरह नहीं रह सकते। दोनों को सहयोगी की भूमिका में ही रहना होगा। राज्यपाल केंद्र सरकार के कर्मचारी नहीं हैं, किसने रखी दलील उन्होंने कहा कि राज्यपाल का काम एक मार्गदर्शक का है। वह टकराव की भूमिका में नहीं आ सकते और ना ही राज्य विधानसभा की ओर से पारित विधेयकों को पलट सकते हैं। यही नहीं उन्हें केंद्र सरकार का प्रतिनिधि बताने पर भी बहस हुई। तुषार मेहता ने कहा कि राज्यपाल कोई केंद्र सरकार के कर्मचारी नहीं हैं। वह एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति हैं। इस पर चीफ जस्टिस गवई ने कहा कि राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के तौर पर वह राज्यों में होते हैं। संविधान के मुताबिक केंद्र सरकार की शक्तियां राष्ट्रपति में समाहित होती हैं। इसलिए ऐसा कहना गलत है कि राज्यपाल केंद्र सरकार के प्रतिनिधि नहीं हैं।  

भाजपा पर बरसीं ममता, बोलीं- जब तक जिंदा हूं वोटिंग अधिकार सुरक्षित रहेगा

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को TMC छात्र परिषद की रैली में भाजपा पर जोरदार हमले किए हैं। ममता बनर्जी ने कहा है कि भाजपा 500 लोगों की टीम ले कर बंगाल आई है और लोगों का नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए सर्वे किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लेकिन उनके होते हुए किसी भी बंगाली के मतदान के अधिकार को नहीं छीनने दिया जाएगा। इस दौरान उन्होंने ‘भाषाई आतंकवाद’ का भी जिक्र किया है। CM ममता ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा है कि भाषाई आतंकवाद को कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोलकाता में छात्र शाखा की एक रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा, "आपको खुद जांच करनी चाहिए कि आपका नाम अभी भी मतदाता सूची में है या हटा दिया गया है। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपके पास आधार कार्ड हैं।" उन्होंने आगे कहा, "जब तक मैं ज़िंदा हूं, किसी को भी लोगों का मताधिकार नहीं छीनने दूंगी।" ममता बनर्जी ने इस दौरान चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग राज्य सरकार के अधिकारियों को धमका रहा है। उन्होंने दावा किया, "चुनाव आयोग हमारे अधिकारियों को धमका रहा है। आयोग का अधिकार क्षेत्र चुनाव के दौरान केवल तीन महीनों तक ही है, पूरे साल नहीं।" बंगालियों की भूमिका भुलाने की कोशिश ममता बनर्जी ने दावा किया है कि भाजपा स्वतंत्रता आंदोलन में बंगालियों द्वारा निभाई गई भूमिका को भुलाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “अगर बंगाली भाषा ही नहीं है, तो राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत किस भाषा में लिखे गए हैं? वे चाहते हैं कि लोग स्वतंत्रता आंदोलन में बंगालियों द्वारा निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका को भूल जाएं। हम इस भाषाई आतंक को बर्दाश्त नहीं करेंगे।” भाजपा के पास 'भ्रष्टाचार भंडार वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी ममता बनर्जी ने जवाब दिया। CM ममता ने दावा किया कि TMC सरकार ने कई सामाजिक कल्याणकारी पहल की हैं। वहीं केंद्र की भाजपा सरकार विकास के नाम पर भ्रष्टाचार में लिप्त है। उन्होंने कहा, "हम महिलाओं के लिए 'लक्ष्मी भंडार' योजना लेकर आए हैं, जबकि भाजपा के पास 'भ्रष्टाचार भंडार' और भाई-भतीजावाद है। वे देश को लूट रहे हैं, जबकि हम महिलाओं को सशक्त बना रहे हैं।"  

ब्रिटिश सांसद का खुलासा: 85 जगहों पर पाकिस्तानी बलात्कारियों के ग्रुप सक्रिय

लंदन  यूनाइटेड किंगडम (UK) के एक सांसद की जांच रिपोर्ट से ब्रिटेन में सनसनी फैल गई है। सांसद ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देशभर में ऐसे 85 इलाके हैं, जहां पाकिस्तानी बलात्कारियों का गैंग सक्रिय है और भोली-भाली बच्चियों को शिकार बनाता रहा है। निर्दलीय सांसद रूपर्ट लोव द्वारा की गई इस जाँच रिपोर्ट में कहा गया है कि इन 'बलात्कार गिरोह' में मुख्यतः पाकिस्तानी मूल के पुरुष शामिल हैं और ये घिनौनी हरकतों को अंजाम देने में दशकों से सक्रिय हैं। रूपर्ट लोव के 'गिरोह-आधारित बाल यौन शोषण' निजी रिपोर्ट में कहा गया है कि गिरोह के वीभत्स कारनामों के बारे में जितना सोचा गया था, वह उससे कहीं अधिक व्यापक हैं। रिपोर्ट में ब्रिटिश अधिकारियों पर निशाना साधकर होने वाले दुर्व्यवहार के मामलों में कार्रवाई करने में विफल रहने का भी आरोप लगाया गया है। सोशल मीडिया एक्स पर साझा की गई इस जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तानी पुरुषों के पैटर्न और सार्वजनिक निकायों की घोर लापरवाही पहचाने जाने योग्य हैं। ब्रिटिश सांसद ने ये भी कहा है कि यह बलात्कार गिरोह कांड का अब तक का सबसे बड़ा खुलासा है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर द्वारा जून में सरकार के समर्थन से इसी तरह की जाँच शुरू करने का आदेश दिया गया था लेकिन सांसद रूपर्ट लोव ने उससे पहले ही बलात्कार गिरोह की जाँच करनी शुरू करवा दी थी। उनकी रिपोर्ट ने यह तथ्य उजागर किया है कि ब्रिटेन में इस गिरोह की जड़ें बहुत गहरी हैं। इनमें तो कुछ 1960 के दशक से सक्रिय हैं। रिपोर्ट में ऐसे पाकिस्तानियों को जबरन डिपोर्ट करने का सुझाव दिया गया है। पीड़ितों ने क्या-क्या बताया? गिरोह का खुलासा करने वाले जांच दल ने कहा कि उसके निष्कर्ष सैकड़ों पीड़ितों, रिश्तेदारों और मुखबिरों की गवाही के साथ-साथ सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त हज़ारों अनुरोधों पर आधारित हैं। कई पीड़ितों ने जाँच समिति को बताया कि उन्हें बचपन में ही बहलाया-फुसलाया गया, नशीले पदार्थ दिए गए और बलात्कार किया गया। कुछ ने बताया कि उनकी तस्करी की गई और चुप रहने की धमकी दी गई। कई पीड़ितों, खासकर श्वेत लड़कियों के आरोपों को अधिकारियों ने खारिज कर दिया, क्योंकि वे उनके आरोपों की जांच करने और पीड़ित के रूप में उनकी पहचान करने विफल रहे। लेबर सरकार पर भी आरोप लोव ने कहा, "हमारी जाँच से पता चला है कि यह घिनौना कांड जितना सोचा गया था, उससे कहीं ज़्यादा व्यापक है – मुख्यतः पाकिस्तानी बलात्कार गिरोहों के हाथों लाखों लोगों की ज़िंदगी बर्बाद हो गई है।" लोव ने लेबर सरकार पर तत्काल कार्रवाई का वादा करने के बावजूद इस मुद्दे पर टालमटोल करने का भी आरोप लगाया है।  

भारत-चीन रिश्तों में नया मोड़, शी जिनपिंग की गुप्त चिट्ठी ने बदल दिया ट्रंप का खेल

नई दिल्ली जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के साथ अपना व्यापार युद्ध बढ़ा रहे थे ठीक उसी समय चीन ने भारत के साथ शांतिपूर्वक संबंध सुधारने की कोशिशें शुरू कर दी थीं। इसकी पहल चीन के द्वारा ही शूरू की गई। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत एक चिट्ठी भेजी, इसके बाद भारत ने भी अपने प्रयासों को तेज कर दिया। ब्लूमबर्ग ने इस मामले से परिचित एक भारतीय अधिकारी के हवाले से कहा है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखकर संबंधों को बेहतर बनाने की इच्छा जताई। इस पत्र में चीन ने किसी भी ऐसे किसी भी अमेरिकी समझौते पर चिंता व्यक्त की थी जो चीन के हितों को नुकसान पहुंचा सकता है। शी का यह संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाया गया था। जून में शुरू हुए प्रयास अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मोदी सरकार ने जून में चीन के साथ संबंधों को सुधारने के लिए गंभीर प्रयास करना शुरू किया। उस समय अमेरिका के साथ व्यापार वार्ताएं तनावपूर्ण हो रही थीं और मई में भारत-पाकिस्तान के बीच चार दिनों की लड़ाई के बाद ट्रंप के युद्धविराम कराने के दावों से भारत नाराज था। 7 साल बाद चीन जाएंगे मोदी अगस्त तक भारत और चीन के बीच संबंध सुधारने की प्रक्रिया तेज हो गई। ट्रंप के टैरिफ से प्रभावित होकर दोनों देशों ने पिछले सप्ताह 2020 के घातक सीमा संघर्ष को पीछे छोड़ने के लिए एक बड़ा कदम उठाया। दोनों देश अपने औपनिवेशिक काल से चले आ रहे सीमा विवादों को हल करने के प्रयासों को दोगुना करने पर सहमत हुए। इन तमाम कोशिशों के बाद इस सप्ताह के अंत में पीएम मोदी सात साल में पहली बार चीन की यात्रा करेंगे। भारत-चीन के बीच सुलह के अमेरिका के लिए गहरे निहितार्थ हैं। अमेरिका ने पिछले कुछ दशकों में लगातार शक्तिशाली हो रहे चीन को संतुलित करने के इरादे से भारत को अपने पाले में लाने की कोशिश की थी। ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने के कारण भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ लगाकर इस समीकरण को बदल दिया। ट्रंप का फैसला एक ऐसा बदलाव था जिसने मोदी सरकार को चौंका दिया। पूर्व दूत का ट्रंप पर तंज कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के वरिष्ठ फेलो और भारत में पूर्व अमेरिकी राजनयिक एशले टेलिस ने व्यंगात्मक लहजे में कहा, "ट्रंप वास्तव में एक महान शांतिदूत हैं। भारत और चीन के बीच इस उभरती हुई सुलह को बढ़ावा देने का सारा श्रेय उन्हें ही जाता है।" उन्होंने आगे कहा, "उन्होंने अकेले ही भारत को एक दुश्मन की तरह व्यवहार करके यह सब हासिल किया है।" इस मामले पर भारत या चीन की तरफ से फिलहाल आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा जा रहा है।  

पंजाब कांग्रेस संकट: पूर्व मंत्रियों ने हाईकमान के फार्मूले को ठुकराया

लुधियाना 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में एकजुटता का माहौल बनाने के लिए हाईकमान की एंट्री हो गई है, जिसके तहत पंजाब में उलझ रहे कांग्रेस के बड़े नेताओं की जफ्फी दिल्ली पहुंच कर पड़ गई।  इस संबंध में फोटो बाकायदा पंजाब प्रधान राजा वडिंग व पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा अपने सोशल मीडिया पर वायरल की गई है। जो पिछले काफी समय से पंजाब में चल रही संविधान बचाओ रैली में इकट्ठे हिस्सा लेने की बजाय एक दूसरे के खिलाफ गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं।  इस फोटो में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के सी वेणुगोपाल, प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल के अलावा पंजाब के नेता विपक्ष प्रताप बाजवा, पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर रंधावा, पूर्व मंत्री विजय इन्द्र सिंगला व प्रगट सिंह भी नजर आ रहे हैं।  यह फोटो राहुल गांधी व मल्लिकाअर्जुन खड़गे द्वारा संगठन सर्जन अभियान के तहत दिल्ली में बुलाई गई सियासी मामलों की कमेटी की बैठक के बाद जारी की गई है। मिली जानकारी के मुताबिक इस मीटिंग में जहां विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर विचार किया गया। वहीं उससे पहले एकजुटता पर भी जोर दिया गया जिसके लिए हाईकमान के दखल की जरूरत बताई गई,  क्योंकि पंजाब कांग्रेस में चल रही लड़ाई की मुख्य वज़ह मुख्यमंत्री का चेहरा बनने की है। सूत्रों के अनुसार सीनियर नेताओं ने इस दौड़ मे शामिल पंजाब के नेताओं को साफ कर दिया है कि पहले राज्य में पार्टी की मजबूती के लिए काम करें और मुख्यमंत्री के नाम को लेकर हाईकमान द्वारा  जो भी फैसला किया जाएगा, वो सबको मानना पड़ेगा।  इसके बाद उक्त नेताओं द्वारा आपसी मनमुटाव खत्म करने की गारंटी के साथ एक फ्रेम में फोटो जारी की गई है , जिसके चलते आने वाले समय में पंजाब में कांग्रेस की राजनीति में बदलाव देखने को मिलेगा।   राणा गुरजीत व आशु की गैर मौजूदगी को लेकर छिड़ी चर्चा दिल्ली में लंबे समय तक हुई मीटिंग के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कोर भट्ठल के पूर्व मंत्री रजिया सुल्तान, साधु सिंह धर्मसौत, राणा के पी, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, ओ पी सोनी, सुखसरकारीया, रणदीप नाभा, गुरुकीरत सिंह, एमपी डॉ अमर सिंह, गुरजीत ओजला, पूर्व एमपी जसबीर सिंह डिम्पा, विधायक सुखपाल खेहरा, कुलजीत नागरा मौजूद थे लेकिन दोनों मीटिंग के अलावा समझोता फोटो में से राणा गुरजीत व आशु की गैर मौजूदगी को लेकर चर्चा छिड़ गई है। क्योंकि यह दोनों ही नेता खुलकर राजा वडिंग के ग्रुप का विरोध कर रहे हैं। हालांकि उनके ग्रुप से चन्नी व प्रगट सिंह तो इस सुलह में शामिल हो गए हैं। लेकिन राणा गुरजीत व आशु की गैर मौजूदगी को लेकर यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वह विधानसभा चुनाव से पहले एकजुटता की जरूरत के मद्देनजर हाईकमान द्वारा अपनाए गए फार्मूले से पूरी तरह सहमत नहीं हैं।   

सिर्फ 30 दिन में हाई कोर्ट जज का तबादला, उठ रहे सवाल और चर्चाओं का दौर

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उच्च न्यायालयों के कई जजों के स्थानांतरण की सिफारिश की है। इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस अरुण मोंगा की है। उन्हें राजस्थान हाई कोर्ट भेजा गया है, जहां से एक महीने पहले ही वह दिल्ली आए थे और 21 जुलाई को शपथ ली थी। ऐसे में इस बात को लेकर चर्चा है कि आखिर एक महीने के अंदर ही ऐसा क्या हो गया कि उच्च न्यायालय के जज को राजस्थान वापस भेज दिया गया। कुल 14 जजों का बुधवार को ट्रांसफर करने की सिफारिश कॉलेजियम की ओर से की गई। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली कॉलेजियम की मीटिंग 25 और 26 अगस्त को हुई थी। दिल्ली हाई कोर्ट के एक और जज टीवी गंजू का कर्नाटक हाई कोर्ट में हुआ है। इसके अलाला राजस्थान हाई कोर्ट से जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस अवनीश झिंगन का ट्रांसफर भी दिल्ली उच्च न्यायालय हुआ है। केरल से जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा को भेजा गया है। कॉलेजियम की सिफारिशों पर मुहर लगने के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय में जजों की संख्या 45 हो जाएगी। इस उच्च न्यायालय में मंजूर जज के पदों की संख्या 60 है। आमतौर पर पूरा कोरम किसी भी उच्च न्यायालय में कम ही रहता है। खासतौर पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में ऐसा मुश्किल होता है, जहां जज के पदों की मंजूर संख्या 160 है। फिलहाल यहां 84 जज ही हैं। बता दें कि जस्टिस अवनीश झिंगन का ट्रांसफर पहले पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से गुजरात हुआ था। फिर वह राजस्थान लाए गए और अब दिल्ली की तैयारी है। बता दें कि जस्टिस अरुण मोंगा तो मूलत: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के ही जज हैं। उन्हें राजस्थान भेजा गया था और फिर दिल्ली आए तो 21 जुलाई को शपथ ली थी। लेकिन अब एक महीने के अंतराल पर ही वापस राजस्थान हाई कोर्ट भेजने की तैयारी है। अरुण मोंगा ने वकालत की प्रैक्टिस 1991 में शुरू की थी। दिल्ली में करीब 20 साल तक वकालत करने के बाद 2018 में वह हाई कोर्ट के जज बने थे।  

वैष्णो देवी त्रासदी में यूपी के 11 भक्तों की जान गई, बारिश बनी तबाही की वजह

लखनऊ  जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में बीते मंगलवार को एक बड़ा हादसा हुआ, जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। माता वैष्णो देवी मंदिर के रास्ते पर भूस्खलन की चपेट में आकर 34 लोगों की जान चली गई, जिनमें उत्तर प्रदेश के 11 श्रद्धालु भी शामिल हैं। इस दुखद घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक जताते हुए मृतकों के परिवारों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शवों को जल्द से जल्द और सम्मानपूर्वक उनके घर पहुंचाया जाए। कैसे हुआ हादसा? मिली जानकारी के मुताबिक, बीते मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे तेज बारिश के कारण माता वैष्णो देवी मंदिर जाने वाले रास्ते पर अर्धकुंवारी के पास भयानक भूस्खलन हुआ। पहाड़ी से बड़े-बड़े पत्थर और मलबा श्रद्धालुओं पर गिर गया। इस हादसे में 34 लोगों की मौत हो गई और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। घायलों का इलाज जम्मू के अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। उत्तर प्रदेश के श्रद्धालुओं की पहचान प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक आगरा से 3 लोग, मुजफ्फरनगर से 3 लोग, बरेली से 1 और अन्य जिलों से 4 लोग इस हादसे में मारे गए हैं। बागपत की रहने वाली चांदनी (23) और उनकी बड़ी बहन नीरा (36) भी इस हादसे में मारी गईं। चांदनी की शादी इसी साल अप्रैल में खेकड़ा निवासी मयंक गोयल से हुई थी। नीरा की शादी मेरठ के अमित जौहरी से हुई थी। मयंक, अमित और उनकी 10 साल की बेटी विधि हादसे में बुरी तरह घायल हुए हैं और अस्पताल में इलाज चल रहा है। परिवार वालों को हादसे की खबर एक अस्पताल कर्मचारी के फोन से मिली। फिर वे तुरंत जम्मू के लिए रवाना हुए। योगी सरकार की मदद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिवारों को 4 लाख रुपए की मदद देने का ऐलान किया। अधिकारियों को शवों को सम्मानपूर्वक घर भेजने और घायलों को बेहतर इलाज देने के निर्देश दिए। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि उत्तर प्रदेश के कितने लोग इस हादसे से प्रभावित हुए हैं, लेकिन 11 मृतकों की पहचान हो चुकी है।   तेज बारिश और राहत-बचाव कार्य जम्मू में पिछले 4 दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है। पिछले 24 घंटों में 380 मिमी बारिश हुई, जो कि इतिहास में सबसे ज्यादा है। इस बारिश के कारण भूस्खलन, बाढ़ और ट्रैफिक जाम जैसी दिक्कतें खड़ी हो गई हैं। राहत कार्य में जुटे दल: – NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) – भारतीय सेना – स्थानीय प्रशासन – भारतीय वायुसेना ने C-130 विमान से राहत सामग्री भेजी है। – Mi-17 V5 और चिनूक हेलीकॉप्टर भी तैयार रखे गए हैं। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने यात्रियों के लिए नई एडवाइजरी जारी कर दी है और यात्रा को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है।  

बनारस में गंगा-वरुणा का प्रकोप, एक मंजिल तक जलमग्न हुए घर

वाराणसी वाराणसी में गंगा के पलट प्रवाह से वरुणा में आई बाढ़ ने हाहाकार मचा दिया है। कई घर एक मंजिल तक डूब गए हैं। हालांकि राहत की बात यही है कि कई दिनों के बाद गुरुवार की सुबह गंगा स्थिर हो गई हैं। जलस्तर चेतावनी बिंदु को तो बुधवार की सुबह ही पार कर गया था लेकिन खतरे के निशान से करीब 30 सेंटीमीटर नीचे पानी स्थिर हो गया है। इससे लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि अभी गंगा के घटने का तो कोई संकेत नहीं मिल रहा है। सरकारी बुलेटिन के अनुसार भी वाराणसी में शुक्रवार को गंगा के लेवल खतरे के निशान को पार करते हुए 71.4 मीटर तक जाने की आशंका जताई गई है। फिलहाल जलस्तर 70.92 मीटर पर स्थिर हुआ है। यहां चेतावनी बिंदु 70.262 और खतरे का निशान 71.262 है। सोमवार को दस सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा जलस्तर बुधवार को तीन सेमी तक गिर गया था। इसके बाद बुधवार की देर रात रफ्तार केवल एक सेमी प्रतिघंटे रह गई। अब स्थिर हो गया है। गंगा में वेग से वरुणा के बेसिन में बने मकान पूरी तरह से पानी में घिर गए हैं। आपदा नियंत्रण कंट्रोल रूम के मुताबिक बाढ़ राहत शिविरों में मंगलवार को वरुणा किनारे के 26 परिवारों के 108 लोग और बुधवार को 483 परिवारों के 2080 लोग पहुंचे। दो दिन में कुल 509 परिवारों के 2188 सदस्य राहत शिविरों में शिफ्ट हुए हैं। बढ़ाव के कारण गंगा का रुख अब तटवर्ती घाटों और किनारों पर बसी कॉलोनियों की ओर होने लगा था। वरुणा के पानी ने आबादी की ओर रुख करते हुए पुरानापुल इलाके के चार दर्जन घरों में बाढ़ को अपनी आगोश में ले लिया था।   वरुणा किनारे रहने वाले सैकड़ों परिवारों की मुसीबतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इस सीजन में यह तीसरी बार है जब पानी बढ़ने से लोगों को घर खाली करने पड़ रहे हैं। लोग सुरक्षित जगह पलायन कर रहे हैं। अभी अपने घरों में शिफ्ट हुए लोगों को 15 दिन भी नहीं हुए कि उन्हें फिर अपना घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को हो रही है। सिर में गठरी लेकर और गोद में बच्चों को लेकर वह सुरक्षित स्थान पर पलायन करने को मजबूर हैं। गंगा में वृद्धि से चिरईगांव के ढाब सहित किनारे बसे गांवों के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालांकि ढाब के किनारे स्थित सोता में पानी अभीं भी दोनों तटों तक सीमित है लेकिन नालों के माध्यम से निचली भूमि पर तेजी से फैल रहा है। बुधवार शाम तक ढाब क्षेत्र में रामपुर की दलित बस्ती पानी से घिर गई। राजस्व कर्मियों के साथ बीडीओ वीरेन्द्र नारायण द्विवेदी मौके पर पहुंचे और प्रभावित आठ परिवारों के 50 सदस्यों को रामपुर प्राथमिक विद्यालय में बने बाढ़ राहत शिविर में पहुंचाया। नाले के रास्ते सोता के इस पार छितौना और जाल्हूपुर के निचले हिस्से में भी पानी भरना शुरू हो गया है। गांव के प्रभावित किसान लालजी यादव, सत्येन्द्र, चन्द्र शेखर, महेंद्र,राम अशीष,कमला, जयगोविंद आदि ने बताया कि पिछली बाढ़ हटने के बाद धान की फसलों में निकल रहे कल्ले भी इस बार चौपट हो जाएंगे। उधर, रोहनिया क्षेत्र के बेटावर गांव में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे घुसने लगा है। पहले आई बाढ़ से धान की फसल खराब हो गई थी। अब इसी तरह से बढ़ाव रहा तो धान की फसल व मवेशियों के हरे चारे पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे। लेखपाल आलोक पाठक ने बताया कि अभी गांव के निचले हिस्से में पानी है रोड पर नहीं आया है लेकिन बढ़ाव तेजी से हो रहा है गांव का मौका-मुआयना किया गया है। बाढ़ के हालात पर नजर बनी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 29 अगस्त को दो दिनी दौरे पर वाराणसी आ रहे हैं। वे यहां मॉरीशस प्रधानमंत्री के आगमन की तैयारी और बाढ़ से बचाव एवं राहत कार्यों का जायजा लेंगे। मुख्यमंत्री शाम करीब 4:30 बजे प्रतापगढ़ से हेलीकॉप्टर से पुलिस लाइन आएंगे। यहां से सर्किट हाउस जाएंगे। आधे घंटे विश्राम के बाद सवा पांच बजे से मॉरीशस प्रधानमंत्री के 11 सितंबर की बनारस में प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी की समीक्षा करेंगे। बैठक के पश्चात वह काशी विश्वनाथ और कालभैरव मंदिर में दर्शन-पूजन करने जाएंगे।  

रोहित-विराट-धोनी पर पड़ा असर, BCCI को एक फैसले ने लगाया 250 करोड़ का चूना

नई दिल्ली  ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 ने क्रिकेट जगत में खलबली मचा दी है. ये बिल जैसे ही कानून बना तो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और खिलाड़ियों को बड़ा नुकसान हुआ है. रियल मनी गेमिंग पर पूरी तरह से बैन लगने के चलते ड्रीम 11 और बीसीसीआई (BCCI) के रास्ते अलग हो चुके हैं. ड्रीम-11 जैसे रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगने से  बीसीसीआई को करीब 245 करोड़ सालाना नुकसान हुआ है, जबकि स्टार क्रिकेटर्स को भी झटका लगा है. विराट कोहली का 10 से 12 करोड़ और रोहित शर्मा और एमएश धोनी को 6 से 7 करोड़ रुपये का सालाना लॉस हुआ है. दरअसल, ड्रीम 11 से बीसीसीआई (BCCI) को साल भर में करीब 120 करोड़ रुपए मिल रहे थे, जो टीम इंडिया का लीड स्पॉन्सर था. लेकिन नए कानून के लागू होते ही दोनों के बीच 358 करोड़ का करार समय से पहले ही खत्म हो गया. इतना ही नहीं आईपीएल का एसोसिएट स्पॉन्सर माय11सर्किल था, जिसके साथ बीसीसीआई की करीब 125 करोड़ रुपये सीजन की डील थी. इस तरह बोर्ड को साल में 250 करोड़ का सीधा नुकसान हुआ है. बीसीसीआई को इतनी महंगी डील मिलना मुश्किल क्रिकेटबज ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर जोर दियाकि बीसीसीआई (BCCI) को फिर भी दूसरे स्पॉन्सर मिल जाएंगे, लेकिन इस बार शायद डील इतनी महंगी देखने को न मिले. रिपोर्ट के मुताबिक, विराट, रोहित और धोनी को छोड़कर बाकी खिलाड़ियों की फीस उतनी महंगी नहीं थी, लेकिन फिर भी ये करोड़ों रुपये चार्ज कर रहे थे.अब इन सभी खिलाड़ियों को तगड़ा झटका लगा है. किस खिलाड़ी को कितने पैसे मिल रहे थे? विराट कोहली को MPL एड करेन के लिए साल में 10 से 12 करोड़ देता था. रोहित शर्मा को ड्रीम 11 की तरफ से करीब 7 करोड़ आते थे. एमएस धोनी भी विंजो से करीब  6 से 7 करोड़ कमाते थे. जसप्रीत बुमराह, केएल राहुल, ऋषभ पंत, हार्दिक पंड्या को  Dream11 से 3 से 6 करोड़ देता था. इन खिलाड़ियों को भी करोड़ों का नुकसान भारतीय टीम के टेस्ट कप्तान  कप्तान शुभमन गिल, मोहम्मद सिराज, यशस्वी जायसवाल, ऋतुराज गायकवाड़, रिंकू सिंह और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के साथ My11 Circle से जुड़े हुए थे. इनका भी करोड़ों का नुकसान होने वाला है, क्योंकि भारत में ड्रीम11 और My11 Circle जैसी गेमिंग कंपनियां बैन हो चुकी हैं और वो अपना कारोबार समेट रही हैं. साल में कितने करोड़ का नुकसान? दरअसल, क्रिकेट में ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री ने तेजी से पैर पसारे थे. ये कंपनियां एड कराने के लिए खिलाड़ियों को खूब पैसा दे रहीं थीं. भारत में क्रिकेट जगत का लगभग हर बड़ा नाम इन कंपनियों से सीधे तौर पर जुड़ा था. सभी के पास अलग-अलग गेमिंग कंपनियों के साथ ब्रांड डील थीं. एक रिपोर्ट में दावा किया गा है कि इन गेमिंग एप्स पर बैन लगनेसे बीसीसीआई (BCCI) और खिलाड़ियों को हर साल 150-200 करोड़ रुपये का नुकसान होगा.