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लगभग 8 हजार से अधिक प्रकरणों को जनजातीय समुदाय ने आपसी विमर्श में सुलझाया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश पेसा अधिनियम के क्रियान्वयन में देश में अग्रणी पेसा अधिनियम बना जनजातीय समुदाय के लिए वरदान : चौपाल लगाकर सुलझा रहे हैं आपसी विवाद लगभग 8 हजार से अधिक प्रकरणों को जनजातीय समुदाय ने आपसी विमर्श में सुलझाया थाने में शिकायत किए बिना सुलझाए मामले भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जनजातीय वर्ग के उत्थान के लिए लगातार कार्य कर रही है। जनजातीय समुदाय के लिये राज्य सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही है। प्रदेश के 88 ट्राइबल ब्लॉक्स में लागू पेसा अधिनियम जनजातीय समुदाय के लिए वरदान साबित हो रहा है। इस अधिनियम के अंतर्गत जनजातीय समुदाय आपसी विवादों का समाधान थानों में शिकायत दर्ज कराए बिना ही चौपालों के माध्यम से कर रहे हैं। पेसा अधिनियम के क्रियान्वयन में देश में मध्यप्रदेश न केवल अग्रणी है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। जनजातीय समुदाय ने अब तक लगभग 8 हजार से अधिक विवाद प्रकरणों का चौपाल के माध्यम से निराकरण कर मिसाल पेश की है। इन मामलों में पारिवारिक जमीन संबंधी विवाद शामिल है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा लागू किए गए पेसा एक्ट का उद्देश्य भी यही है कि जनजातीय समुदाय के लोगों को छोटे-छोटे विवाद में पुलिस थाना का चक्कर ना लगाना पड़े और आपस में बैठकर ही मामले की सुलह कर लें। साथ ही उनकी परंपरा, कला संस्कृति की भी रक्षा की जा सके। पेसा अधिनियम के अंतर्गत 3 प्रकार की समितियां कर रहीं हैं काम पेसा अधिनियम के तहत प्रदेश के 88 विकासखंडों में तीन प्रकार की समितियां काम रही है। इसमें शांति और विवाद निवारण समिति, सहयोगिनी मातृ समिति और वन संसाधन योजना एवं नियंत्रण समिति शामिल है। प्रदेश में शांति और विवाद निवारण समिति की संख्या 11 हजार 639 है। वन संसाधन योजना एवं नियंत्रण समिति की संख्या 11 हजार 331 है, जबकि सहयोगिनी मातृ निवारण समिति की संख्या 21 हजार 887 है। देश के 10 राज्य में हो रहा है पेसा एक्ट का क्रियान्वयन, मध्यप्रदेश है अग्रणी देश के 10 राज्यों में पेसा एक्ट का क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिसमें मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है। पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार द्वारा सफलता की कहानियों को लेकर एक पुस्तिका भी निकाली गई है जिसमें मध्यप्रदेश की दो कहानियों को शामिल किया गया है। इस वजह से मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। 5133 ग्राम पंचायतों में लागू है पेसा अधिनियम मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जनजातीय बाहुल्य वाले प्रदेश के 20 जिलों के 88 विकासखंड की 5133 ग्राम पंचायतों के 11 हजार 596 ग्रामों में पेसा एक्ट लागू किया गया है। वर्तमान में 4850 पेसा मोबलाइजर कार्य कर रहे हैं। पेसा कानून में सबसे महत्वपूर्ण विषय वित्तीय प्रबंधन है, जिसके तहत राज्य में अब तक 11 हजार 538 खाते खोले गये है।  

वाल्मी और इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक के बीच होगा एमओयू

पेसा एक्ट के बेहतर क्रियान्वयन के लिए त्रि-पक्षीय अनुबंध आज 24 जुलाई को आज 24 जुलाई को होगा पेसा एक्ट पर त्रि-पक्षीय समझौता, ग्राम स्वशासन को मिलेगा बल वाल्मी और इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक के बीच होगा एमओयू भोपाल प्रदेश में पेसा एक्ट के बेहतर क्रियान्वयन के लिए आज 24 जुलाई को त्रि-पक्षीय अनुबंध होगा। अनुबंध सचिव पंचायती राज मंत्रालय, केन्द्र सरकार, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक के बीच होगा। कार्यक्रम मध्यप्रदेश जल एवं भूमि प्रबंध संस्थान वाल्मी, भोपाल में आज 24 जुलाई को शाम 4 बजे से होगा। कार्यक्रम में पेसा एक्ट पर बनी पुस्तिका का विमोचन किया जाएगा। साथ ही देशभर से आए पेसा एक्ट पैनलिस्ट, विशेषज्ञों के बीच चर्चा होगी। प्रदेश में पेसा एक्ट के बेहतर क्रियान्वयन, उपनियमों को लागू करना, जनजातीय समुदाय को प्रशिक्षण देना, जनजातीय समुदाय की परंपराओं की रक्षा, नए शोध, जनजातीय कलाओं को कैसे सुरक्षित रखा जाए और जनजातीय समुदाय के बीच हो रहे बेहतर कार्यों का प्रचार-प्रसार, के बारे में चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में केन्द्रीय सचिव पंचायती राज मंत्रालय विवेक भारद्वाज, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी, संचालक सह आयुक्त पंचायत राज संचालनालय छोटे सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे।  

काली ब्रा से ब्रेस्ट कैंसर का डर सिर्फ एक मिथक, मेडिकल रिसर्च ने किया साफ

नई दिल्ली   हाल ही में सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि काली रंग की ब्रा पहनने से महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। इस खबर ने कई महिलाओं को डराया है, जबकि कुछ इसे अफवाह मानकर नजरअंदाज कर रहे हैं। आइए, इस दावे की वैज्ञानिक जांच करते हैं और समझते हैं कि इसमें कितनी हकीकत है। काली ब्रा और ब्रेस्ट कैंसर का दावा कैसे फैला? इंटरनेट पर कई बार यह बात सामने आई है कि काली ब्रा, खासकर टाइट या अंडरवायर ब्रा पहनने से शरीर में गर्मी बढ़ती है, जिससे त्वचा को नुकसान पहुंचता है और यह ब्रेस्ट कैंसर का कारण बन सकती है। इसके अलावा कुछ लोगों का मानना है कि काले रंग की ब्रा सूरज की किरणों को ज्यादा सोखती है, जिससे स्तन के टिश्यू में गर्मी बढ़ती है और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन क्या यह सच है? क्या है वैज्ञानिक सच? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और Cancer Research UK जैसी प्रमुख संस्थाओं की रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करे कि ब्रा का रंग, चाहे वह काला हो या कोई भी रंग, ब्रेस्ट कैंसर का कारण बनता है। 2014 में फ्रेड हचिंसन कैंसर रिसर्च सेंटर, सिएटल की एक स्टडी में 1500 महिलाओं पर रिसर्च की गई, जिसमें ब्रा पहनने की आदतों जैसे कि ब्रा की टाइटनेस, पहनने का समय, और रंग का ब्रेस्ट कैंसर से कोई संबंध नहीं पाया गया। 2023 में कैंसर रिसर्च यूके ने भी इस बात को दोहराया कि ब्रा का रंग या स्टाइल ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ा नहीं है। 2024 में प्रकाशित एक अध्ययन में मैमोग्राम और बायोप्सी डेटा की मदद से यह पाया गया कि ब्रेस्ट कैंसर के रिस्क फैक्टर्स में जेनेटिक म्यूटेशन (BRCA1 और BRCA2 जीन), फैमिली हिस्ट्री, हार्मोनल बदलाव, मोटापा, शराब और स्मोकिंग जैसे कारण शामिल हैं, लेकिन ब्रा का रंग या टाइट होना इनमें कहीं भी शामिल नहीं है। डॉक्टर क्या कहते हैं? नई दिल्ली के अनुभवी ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रमेश शर्मा, जो 20 सालों से ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों का इलाज कर रहे हैं, कहते हैं कि काली ब्रा और ब्रेस्ट कैंसर का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह सिर्फ एक मिथक है जो सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है। उनका कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर का खतरा मुख्य रूप से जेनेटिक कारणों, जीवनशैली और उम्र से जुड़ा होता है। उन्होंने यह भी बताया कि बहुत टाइट ब्रा पहनने से त्वचा में जलन या चुभन हो सकती है, लेकिन इससे कैंसर नहीं होता। इसलिए महिलाओं को चाहिए कि वे नियमित रूप से मैमोग्राम करवाएं और ब्रेस्ट का सेल्फ-चेकअप करें। अगर ब्रेस्ट में कोई गांठ, निप्पल से स्राव, या त्वचा में कोई बदलाव दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।   काली ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर होने का दावा पूरी तरह से गलत और बिना किसी वैज्ञानिक आधार के है। महिलाओं को इस तरह की अफवाहों से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि वे अपनी सेहत का ध्यान रखें, नियमित जांच कराएं और सही जानकारी ही फैलाएं।  

वर्ल्ड पॉवर चैम्पियनशिप में 10 लाख से अधिक स्कूली छात्रों ने की भागीदारी

भोपाल  प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इंग्लिश भाषा के शिक्षकों के प्रशिक्षण की विशेष व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा की जा रही है। प्रशिक्षण के लिये भोपाल में एक राज्य स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान इंग्लिश लर्निंग ट्रेनिंग इन्स्टीट्यूट (ईएलटीआई) कार्यरत है। यह संस्थान राज्य के समस्त शासकीय, प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षण संस्थानों में इंग्लिश भाषा संबंधी अकादमिक और प्रशिक्षण के क्षेत्र में मार्गदर्शन एवं सहयोग कर रहा है। ईएलटीआई संस्थान इंग्लिश भाषा अध्यापन क्षेत्र में सतत उन्नयन एवं स्तरीकरण के लिये हैदराबाद के इंग्लिश एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय (ईएफएलयू) से सहयोग प्राप्त कर रहा है। इंग्लिश भाषा शिक्षकों का प्रशिक्षण स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सरकारी सकूलों में इंग्लिश भाषा पढ़ाने वाले शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया है। प्रशिक्षण के लिये ईएलटीआई ने शिक्षण सत्र के लिये कैलेंडर तैयार किया है। संस्थान इंग्लिश भाषा के मूल्यांकन के लिये विभिन्न स्तरों के प्रश्न-पत्रों के निर्माण और अन्य विषय के प्रश्न-पत्रों के अनुवाद कार्य में भी सहयोग कर रहा है। इंग्लिश भाषा के शिक्षकों को प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से जुड़े डिप्लोमा कोर्स कराने के लिये उनकी चयन प्रक्रिया में भी सहयोग कर रहा है। प्रदेश के ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों में कार्यरत शिक्षकों के लिये प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन में संस्थान विशेष ध्यान दे रहा है। संस्थान समय-समय पर विभिन्न शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता के आकलन एवं मूल्यांकन के कार्यों को भी सतत रूप से कर रहा है। इंग्लिश ओलम्पियाड संस्थान ने पिछले वर्ष इंग्लिश विषय में कक्षा-2 से 8 के लिये संकुल, विकासखण्ड तथा जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिये ओलम्पियाड प्रश्न बैंक तथा प्रश्न-पत्रों का निर्माण किया था। पिछले वर्ष ओलम्पियाड में शामिल छात्रों की संख्या 10 लाख से अधिक रही। संस्थान ने माध्यमिक शालाओं में इंग्लिश विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिये आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण के लिये मेन्युअल का भी निर्माण किया है। संस्थान ने राज्य द्वारा निर्मित कक्षा-1 से 8 तक की इंग्लिश की पाठ्य-पुस्तकों और एनसीईआरटी से जुड़ी कक्षा-9 से 12 तक की पाठ्य-पुस्तकों के निर्माण में समन्वय का कार्य भी किया है।  

STF ने किया बड़ा खुलासा: गाजियाबाद में चल रहा था नकली दूतावास, एक आरोपी दबोचा

नोएडा  उत्तर प्रदेश की नोएडा एसटीएफ (STF) ने 22 जुलाई को गाजियाबाद में एक फर्जी दूतावास का पर्दाफाश किया। पुलिस ने हर्ष वर्धन जैन नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। हर्ष वर्धन पर आरोप है कि वह खुद को कई देशों का एम्बेसडर बताकर लोगों को ठग रहा था। वह हवाला के जरिए पैसे का लेन-देन भी करता था। पुलिस के अनुसार, हर्ष वर्धन कविनगर में किराए के मकान में "वेस्ट आर्कटिक दूतावास" चला रहा था। वह खुद को West Arctica, Saborga, Poulvia, Lodonia जैसे देशों का कॉन्सुल या एम्बेसडर बताता था। लोगों को झांसा देने के लिए वह प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और अन्य महत्वपूर्ण लोगों के साथ अपनी फोटोशॉप की हुई तस्वीरें दिखाता था। पुलिस का कहना है कि हर्ष वर्धन का मुख्य काम कंपनियों और लोगों को विदेश में काम दिलाने के नाम पर दलाली करना था। वह शेल कंपनियों के माध्यम से हवाला रैकेट भी चला रहा था। जांच में पता चला है कि हर्ष वर्धन पहले चंद्रास्वामी और अदनान खगोशी (अंतर्राष्ट्रीय हथियार डीलर) के संपर्क में भी था। 2011 में उसके पास से एक अवैध सैटेलाइट फोन भी बरामद हुआ था, जिसके लिए कविनगर थाने में मामला दर्ज किया गया था। इतने दस्तावेज बरामद पुलिस ने हर्ष वर्धन के पास से कई चीजें बरामद की हैं। इनमें डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट लगी चार गाड़ियां, माइक्रोनेशन देशों के 12 डिप्लोमैटिक पासपोर्ट, विदेश मंत्रालय की मोहर लगे फर्जी दस्तावेज, दो फर्जी पैनकार्ड, विभिन्न देशों और कंपनियों की 34 मोहरें, 2 फर्जी प्रेस कार्ड, 44,70000 रुपए नकद और कई देशों की विदेशी मुद्रा शामिल हैं। इसके अलावा, कई कंपनियों के दस्तावेज और 18 डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट भी बरामद हुई हैं। जांच जारी पुलिस ने कविनगर थाने में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, उक्त के संबंध में थाना कविनगर गाजियाबाद में अभियोग पंजीकृत कराकर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। इसका मतलब है कि इस मामले में कविनगर थाने में FIR दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। एसटीएफ (STF) अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हर्ष वर्धन के इस गोरखधंधे में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि उसने अब तक कितने लोगों को ठगा है और हवाला के जरिए कितने पैसे का लेन-देन किया है।

26 जुलाई से गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली शुरू, जानें यात्रियों के लिए क्या बदलेगा

गोरखपुर  गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे पर 26 जुलाई की रात 12 बजे से टोल प्लाजा का संचालन शुरू हो जाएगा। उसके बाद एक्सप्रेस-वे पर फर्राटा भरने वाले वाहनों का फास्टैग या नगद टोल टैक्स की वसूली की जाएगी। फिलहाल टोल बूथों पर सिस्टम का ट्रायल किया जा रहा है। बस्ती में भदेश्वर नाथ महादेव की कांवड़ यात्रा के लिए तेनुआ टोल प्लाजा से वाहनों का डायवर्जन किया गया है। इस कारण गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर वाहनों की संख्या बढ़ गई है। इसी दौरान टोल बूथों का ट्रायल किया जा रहा है। एक्सप्रेसवे पर करीब 91 किमी दूरी पर 9 टोल बूथ बनाए गए हैं, जिसे सॉफ्टवेयर से आपस में कनेक्ट किया जा रहा है। नेशनल हाईवे पर 60 किमी या इससे अधिक दूरी पर टोल बूथ पर टोल टैक्स दिया जाता है, जबकि एक्सप्रेसवे पर कम दूरी पर टोल बूथ बनाए गए हैं। इंटरचेंज से एक्सप्रेसवे पर चढ़ने पर वाहनों को पर्ची दी जाएगी, जबकि नीचे उतरने पर टोल टैक्स जमा होगा। यह सुविधा मिलेगी कि फास्टैग नहीं होने पर भी उतना ही टोल टैक्स जमा होगा, जितना फास्टैग में जमा करने का नियम है। एक्सप्रेसवे पर बाइक, ऑटो एवं ट्रैक्टर का भी टोल टैक्स जमा करना होगा। फिलहाल एक्सप्रेसवे पर स्थानीय बाइक वालों की संख्या अधिक है, उन्हें तीन दिन बाद टोल टैक्स जमा करना होगा। क्या बोले अधिकारी यूपीडा के अधिशासी अभियंता पीपी वर्मा ने कहा कि गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर 26 जुलाई की रात 12 बजे से टोल टैक्स की वसूली शुरू होगी। ट्रायल में जहां कमियां मिल रही हैं, वहां सुधार किया जा रहा है। सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की टीम सिस्टम सही करने में जुटी है। अतिक्रमण का ब्योरा अब पोर्टल पर वहीं, गोरखपुर में नगर निगम ने ध्वस्तीकरण और अतिक्रमण को लेकर पोर्टल बनाया है। अब अतिक्रमणकारियों को नोटिस या ध्वस्तीकरण का आदेश नहीं मिलने की शिकायत नहीं होगी। निगम ने अतिक्रमण पर कार्रवाई को लेकर लगने वाले आरोपों को देखते हुए यह कवायद की है। अपर नगर आयुक्त निरंकार सिंह ने बताया कि निगम की वेबसाइट में जाकर डिमोलिशन का लिंक आएगा। इस पर क्लिक कर सीधे आदेश देखें जा सकते हैं। अपर नगर आयुक्त ने कहा कि निगम अब अतिक्रमणकारी को ऑनलाइन और ऑफलाइन नोटिस देगा।

गलवान के बाद रिश्तों में बदलाव? भारत ने चीनी पर्यटकों के लिए वीजा पर लगाई रोक हटाई

नई दिल्ली  भारत और चीन ने अपने तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने की दिशा में तेजी से कदम उठाए हैं। भारत सरकार चीनी पर्यटकों के लिए वीजा फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पांच सालों के बाद भारत चीनी पर्यटकों के लिए टूरिस्ट वीजा फिर से जारी करने जा रहा है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इसकी जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक 24 जुलाई से चीनी पर्यटकों के लिए फिर से वीजा जारी होने लगेंगे। चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने चीन स्थित भारतीय दूतावास की तरफ से वीबो प्लेटफॉर्म पर शेयर की गई पोस्ट को शेयर किया है। भारतीय दूतावास की तरफ से जारी पोस्ट में कहा गया है कि "24 जुलाई 2025 से, चीनी नागरिक भारत आने के लिए पर्यटक वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्हें पहले वेब लिंक पर ऑनलाइन वीजा आवेदन पत्र भरना होगा और उसका प्रिंट आउट लेना होगा, और फिर वेब लिंक पर अपॉइंटमेंट लेना होगा। इसके बाद, उन्हें भारतीय वीजा आवेदन केंद्र में आवेदन जमा करने के लिए पासपोर्ट, वीजा आवेदन पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेज साथ ले जाने होंगे।" भारत ने खोला चीन पर्यटकों के लिए दरवाजा भारत सरकार की तरफ से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों देश आपसी रिश्ते को सामान्य करने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। साल 2020 में कोविड-19 महामारी के चलते भारत ने सभी पर्यटन वीजा पर रोक लगा दी थी। लेकिन अप्रैल 2022 में IATA (इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन) ने एक नोटिस जारी कर कहा था, कि चीन के नागरिकों के पर्यटक वीजा अभी मान्य नहीं रहेंगे। भारत ने वो कदम उस वक्त उठाया था, जब चीन ने 22,000 भारतीय छात्रों को वापस देश में आने के लिए वीजा देने से मना कर दिया था। भारत ने उसके बाद चीनी पर्यटकों को वीजा देना बंद कर दिया था। लेकिन पिछले कुछ महीनों से भारत और चीन के बीच रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला है। पूर्वी लद्दाख के डेपसांग और डेमचोक इलाकों से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटी हैं। पिछले चार सालों से ये तनाव लगातार बना हुआ था और कभी भी जंग छिड़ने का खतरा था। सैनिकों की वापसी, दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम माना गया था। इसके अलावा, जनवरी 2025 में भारत और चीन के बीच विमानों की उड़ाने भी शुरू हो गईं। यह फैसला भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री की चीन यात्रा के बाद सामने आया, जहां दोनों पक्षों ने कूटनीतिक स्तर पर कई सकारात्मक बातचीत की थी। इसी यात्रा के दौरान यह भी तय हुआ था कि भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी इस साल से फिर से शुरू किया जाएगा। इसके अलावा हाल ही में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी चीन का दौरा किया, जहां वे शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए थे।  

गलवान के बाद रिश्तों में बदलाव? भारत ने चीनी पर्यटकों के लिए वीजा पर लगाई रोक हटाई

नई दिल्ली  भारत और चीन ने अपने तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने की दिशा में तेजी से कदम उठाए हैं। भारत सरकार चीनी पर्यटकों के लिए वीजा फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पांच सालों के बाद भारत चीनी पर्यटकों के लिए टूरिस्ट वीजा फिर से जारी करने जा रहा है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इसकी जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक 24 जुलाई से चीनी पर्यटकों के लिए फिर से वीजा जारी होने लगेंगे। चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने चीन स्थित भारतीय दूतावास की तरफ से वीबो प्लेटफॉर्म पर शेयर की गई पोस्ट को शेयर किया है। भारतीय दूतावास की तरफ से जारी पोस्ट में कहा गया है कि "24 जुलाई 2025 से, चीनी नागरिक भारत आने के लिए पर्यटक वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्हें पहले वेब लिंक पर ऑनलाइन वीजा आवेदन पत्र भरना होगा और उसका प्रिंट आउट लेना होगा, और फिर वेब लिंक पर अपॉइंटमेंट लेना होगा। इसके बाद, उन्हें भारतीय वीजा आवेदन केंद्र में आवेदन जमा करने के लिए पासपोर्ट, वीजा आवेदन पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेज साथ ले जाने होंगे।" भारत ने खोला चीन पर्यटकों के लिए दरवाजा भारत सरकार की तरफ से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों देश आपसी रिश्ते को सामान्य करने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। साल 2020 में कोविड-19 महामारी के चलते भारत ने सभी पर्यटन वीजा पर रोक लगा दी थी। लेकिन अप्रैल 2022 में IATA (इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन) ने एक नोटिस जारी कर कहा था, कि चीन के नागरिकों के पर्यटक वीजा अभी मान्य नहीं रहेंगे। भारत ने वो कदम उस वक्त उठाया था, जब चीन ने 22,000 भारतीय छात्रों को वापस देश में आने के लिए वीजा देने से मना कर दिया था। भारत ने उसके बाद चीनी पर्यटकों को वीजा देना बंद कर दिया था। लेकिन पिछले कुछ महीनों से भारत और चीन के बीच रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला है। पूर्वी लद्दाख के डेपसांग और डेमचोक इलाकों से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटी हैं। पिछले चार सालों से ये तनाव लगातार बना हुआ था और कभी भी जंग छिड़ने का खतरा था। सैनिकों की वापसी, दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम माना गया था। इसके अलावा, जनवरी 2025 में भारत और चीन के बीच विमानों की उड़ाने भी शुरू हो गईं। यह फैसला भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री की चीन यात्रा के बाद सामने आया, जहां दोनों पक्षों ने कूटनीतिक स्तर पर कई सकारात्मक बातचीत की थी। इसी यात्रा के दौरान यह भी तय हुआ था कि भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी इस साल से फिर से शुरू किया जाएगा। इसके अलावा हाल ही में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी चीन का दौरा किया, जहां वे शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए थे।  

पीडब्ल्यूडी सलाहकार समिति की बैठक में विकास कार्यों की समीक्षा, मंत्री ने दिए निर्देश

लोक निर्माण मंत्री की अध्यक्षता में विभागीय सलाहकार समिति की बैठक संपन्न लोक निर्माण विभाग की रणनीतियों पर मंथन, मंत्री की अध्यक्षता में बैठक आयोजित पीडब्ल्यूडी सलाहकार समिति की बैठक में विकास कार्यों की समीक्षा, मंत्री ने दिए निर्देश निर्माण गुणवत्ता, अभियंताओं के प्रशिक्षण और सड़क विकास रणनीति पर हुआ विस्तार से मंथन भोपाल लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को विभागीय सलाहकार समिति की बैठक में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को और अधिक बेहतर बनाने पर विशेष बल देते हुए अभियंताओं के कौशल विकास की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने निर्देश दिए कि विभागीय अभियंताओं को राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रशिक्षण दिलाया जाए, जिससे वे गुणवत्तापूर्ण निर्माण तकनीकों और नवीनतम इंजीनियरिंग विधाओं से परिचित हो सकें। बैठक में सलाहकार समिति सदस्य प्रशांत पोल, विक्रांत सिंह तोमर, प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग सुखवीर सिंह, प्रबंध संचालक एमपीआरडीसी भरत यादव, प्रबंध संचालक भवन निर्माण सी.बी. चक्रवर्ती सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री सिंह ने ‘लोकपथ’ मोबाइल ऐप पर प्राप्त जन-शिकायतों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि नागरिकों की समस्याओं का समय-सीमा में त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग की प्राथमिकता जनसेवा है और जन-विश्वास बनाए रखने के लिए जवाबदेही और तत्परता अनिवार्य है। बैठक में सड़क निर्माण एवं उन्नयन की दीर्घकालिक रणनीति पर भी गंभीरतापूर्वक चर्चा हुई। मंत्री सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोक निर्माण का मूल उद्देश्य जन-कल्याण होना चाहिए, इसलिए योजनाओं का निर्माण आमजन की आवश्यकताओं को केंद्र में रखकर किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक परियोजना ऐसी हो जो जनता को सुगमता, सुविधा और सुरक्षा प्रदान कर सके। उपस्थित अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं और प्रस्तावों पर विस्तार से जानकारी दी और निर्माण की गुणवत्ता बढ़ाने तथा तकनीकी उन्नयन के लिए किए जा रहे प्रयासों की रूपरेखा प्रस्तुत की।  

छात्रों को मिलेगा कौशल विकास का अवसर, विश्वविद्यालयों में लगेंगे प्रशिक्षण शिविर

विश्वविद्यालय स्तर पर प्रशिक्षण शिविर होंगे प्रारंभ : उच्च शिक्षा मंत्री परमार विश्वविद्यालयों में शुरू होंगे प्रशिक्षण शिविर: उच्च शिक्षा मंत्री परमार का ऐलान छात्रों को मिलेगा कौशल विकास का अवसर, विश्वविद्यालयों में लगेंगे प्रशिक्षण शिविर राष्ट्रीय सेवा योजना राज्यस्तरीय सलाहकार समिति की बैठक हर छः माह में की जाए भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंत्रालय स्थित सभाकक्ष में, राष्ट्रीय सेवा योजना राज्यस्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में मंत्री परमार ने विश्वविद्यालय स्तर प्रशिक्षण शिविर फिर से विश्वविद्यालय की सहयोग राशि से प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने गोदग्राम योजना के विभिन्न पहलुओं को धरातल पर सार्थकता प्रदान करने के निर्देश दिए। मंत्री परमार ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना की राज्य स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक वर्ष में प्रत्येक 6 माह में अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए। मंत्री परमार ने कहा कि कार्यक्रम अधिकारियों का जिला/विश्वविद्यालय स्तर पर एक या दो दिवसीय प्रशिक्षण कराया जाये। उन्होंने कहा कि एनएसएस गतिविधियों के कार्य प्राथमिकता के आधार पर किये जायें और इसकी समीक्षा भी की जाये। मंत्री परमार ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों में स्वयंसेवी विद्यार्थियों की सहभागिता को उनके मूल्यांकन में अतिरिक्त वेटेज देने की विश्वविद्यालयों द्वारा कार्य-योजना बनायी जाये। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों से ग्रामों में रोजगार एवं स्व-रोजगार आदि विभिन्‍न महत्वपूर्ण विषयों पर सर्वेक्षण भी कराया जाये। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि कार्यक्रम अधिकारियों का प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से होना चाहिए। जब तक 7 दिवसीय प्रशिक्षण की पूर्ण व्‍यवस्‍था नही हो जाती, तब तक जिला/ विश्‍वविद्यालय स्‍तर पर एक या दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। परमार ने कहा कि एनएसएस गतिविधियों के कार्य प्राथमिकता के आधार पर किए जाएं और इसकी समीक्षा विभागीय बैठकों में की जाए। विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय सेवा योजना के माध्यम से ग्रामों में परिणामुन्मुखी क्रियान्वयन करें। अपर मुख्‍य सचिव उच्‍च शिक्षा अनुपम राजन ने कहा कि रासेयो द्वारा किए जाने वाले गोदग्राम गतिविधियों में विद्यार्थियों के मध्य ''मेरा गोदग्राम सबसे अच्‍छा'' नाम से विश्‍वविद्यालय स्‍तर पर इकाईयों के मध्य आपसी स्वस्थ प्रतिस्‍पर्धा कराकर उत्‍कृष्‍ट ग्राम की रासेयो इकाई को पुरस्‍कृत करें। राजन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर ''एक पेड मां के नाम'' अंतर्गत रासेयो के स्वयंसेवी विद्यार्थियों द्वारा अधिकाधिक पौधरोपण किया जाए। सचिव स्‍कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल ने स्‍कूल शिक्षा में रासेयो इकाइयों की स्‍थापना के लिए पूर्ण सहयोग देने की बात कही। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव दिनेश जैन ने रोसेयो प्रशिक्षण के लिए ग्रामीण विकास विभाग के ट्रेनिंग सेन्‍टर उपलब्‍ध कराने के लिए सहमति प्रदान की। बैठक में राष्‍ट्रीय सेवा योजना की सत्र 2024-25 की गतिविधियां एवं सत्र 2025-26 की कार्ययोजना का प्रस्‍तुतिकरण किया गया, जिसका सर्वसम्मिति से अनुमोदन किया गया। बैठक में आयुक्‍त उच्‍च शिक्षा प्रबल सिपाहा, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल के कुलगुरू प्रो. एस.के. जैन, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के कुलगुरू प्रो. राजेंद्र कुडरियां, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलगुरू प्रो. राजेश वर्मा, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलगुरू अर्पण भारद्वाज, जनसंपर्क के उप सचिव कैलाश बुंदेला, ईटीआई भोपाल के सह प्रशिक्षक राहुल सिंह परिहार सहित विभिन्‍न स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं के प्रतिनिधि, रासेयो युक्‍त विश्‍वविद्यालय के कार्यक्रम समन्‍वयक सहित समिति के अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।