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एक ही पेड़ पर बौर, कच्चे और पके आम एक साथ, हैरान कर रही वैरायटी

सहारनपुर  मीठे-मीठे आमों का सीजन चल रहा है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जिला पूरे देश में आम की बेहतरीन किस्मों के लिए मशहूर है। इस बार यहां आम की एक ऐसी अनोखी वैरायटी हुई है, जो हर तरफ चर्चा में है। आमतौर पर आम के पेड़ पर साल में एक बार बौर आती है और फिर निश्चित समय पर फल तैयार होते हैं। लेकिन, इस वैरायटी की खासियत यह है कि ये केवल मौसम विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे साल फल देने की क्षमता रखता है। आम की इस दुर्लभ किस्म को 'सदाबहार' नाम दिया गया है। सदाबहार 'आम' के पेड़ की सबसे खास बात यह है कि इसके ऊपर एक साथ बौर, छोटे फल और पकने के लिए तैयार आम दिखाई देते हैं। यानी पेड़ पर हर समय किसी न किसी अवस्था में फल मौजूद रहता है। यही वजह है कि इसे देखने के लिए दूर-दराज के इलाकों से लोग सहारनपुर पहुंच रहे हैं। खासकर वो लोग, जिन्होंने आम के बड़े-बड़े बाग लगा रखे हैं। नई बोर के साथ छोटे फल और पके फल आम की अनोखी किस्म को संरक्षित और विकसित करने का काम कर रहे किसान राजेंद्र अटल बताते हैं कि उनके पास कई दुर्लभ और विशेष पौधों का संरक्षण किया जा रहा है। सदाबहार आम का यह पेड़ अब अपने तीसरे साल में प्रवेश कर चुका है और लगातार बेहतर फल दे रहा है। पिछले साल भी इस पेड़ ने सालभर फल दिए थे और इस समय भी नई बौर के साथ छोटे और पकने के लिए तैयार फल एक साथ मौजूद हैं। दूसरे आम से कितना अलग है सदाबहार राजेंद्र अटल बताते हैं कि इस किस्म की एक और विशेषता इसका आकार है। अन्य आम के पेड़ों के मुकाबले यह छोटा रहता है, जिससे इसकी देखभाल और फल तोड़ने का काम आसान हो जाता है। साइज में छोटा होने के बावजूद इसकी उत्पादकता काफी अच्छी मानी जाती है। ये आम बेहद मीठे और खुशबूदार होते हैं। यही कारण है कि एक बार इसका स्वाद चखने वाले लोग इसकी तारीफ किए बिना नहीं रहते। जैविक तरीके से उगाया जाता है सदाबहार आम एक और खास बात यह भी है कि इस वैरायटी की खेती पूरी तरह जैविक तरीके से की जा रही है। राजेंद्र अटल बताते हैं कि इसके उत्पादन में किसी प्रकार की रासायनिक खाद या केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। प्राकृतिक तरीकों से तैयार होने के बावजूद यह पेड़ लगातार फल देने में सक्षम है, जो इसे अन्य किस्मों से अलग बनाता है। फिलहाल राजेंद्र अटल के पास सदाबहार आम के करीब 20 पेड़ हैं। साथ ही कलम विधि के जरिए नए पौधे भी तैयार किए जा रहे हैं।  

सुबह की ये 5 गलत आदतें चुपचाप कमजोर कर रही हैं आपका दिल

आज की भागदौड़ भरी इस जिंदगी में अगर हम किसी चीज़ को सबसे ज़्यादा नजरअंदाज कर रहे हैं, तो वह है हमारी सेहत. खासकर जब बात हार्ट हेल्थ का ख्याल रखने की आती है, तो हम सबसे ज़्यादा इसे ही अनदेखा करने लगे हैं. आज का यह आर्टिकल उन सभी लोगों के लिए है, जो अपनी हार्ट हेल्थ का बेहतर तरीके से ख्याल रखना चाहते हैं. आज हम आपको सुबह की कुछ ऐसी आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें अगर आप समय रहते सुधार नहीं लेते हैं, तो इसका आपकी हार्ट हेल्थ पर काफी बुरा असर पड़ सकता है. तो चलिए जानते हैं सुबह की ऐसी 5 गलत आदतों के बारे में, जो धीरे-धीरे आपके दिल को कमजोर करने का काम कर रही हैं और आपको इस बात का अंदाजा भी नहीं लग रहा है. सोकर उठते ही अचानक से बिस्तर से उठ जाना सुबह जैसे ही हमारी आंख खुलती है, हमारा शरीर एकदम रेस्ट मोड से जागने की स्थिति में आ रहा होता है. ऐसे में कई लोग क्या करते हैं कि अलार्म बजते ही झटके से बिस्तर से उठकर खड़े हो जाते हैं. सच मानिए, यह आदत आपके दिल के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकती है. अचानक ऐसे उठने से ब्लड प्रेशर एकदम से बढ़ जाता है, जिससे दिल पर अचानक बहुत ज्यादा प्रेशर पड़ता है. सबसे सही तरीका यह है कि जब भी सुबह आपकी आंख खुले, तो तुरंत हड़बड़ाकर न उठें. कम से कम दो मिनट आराम से बिस्तर पर ही बैठे रहें, शरीर को थोड़ा स्ट्रेच करें और उसके बाद धीरे से उठें. इससे आपके शरीर का ब्लड सर्कुलेशन एकदम नॉर्मल रहता है और दिल पर कोई फालतू का लोड नहीं पड़ता. खाली पेट चाय या कॉफी पीना भारत में ज्यादातर लोगों के दिन की शुरुआत बेड-टी यानी बिस्तर पर चाय या कॉफी पीने से होती है. लेकिन खाली पेट कैफीन का सेवन करना आपकी हार्ट हेल्थ के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है. खाली पेट चाय या कॉफी पीने से शरीर में एसिडिटी बढ़ती है और हार्ट रेट तेज हो सकती है. इसके अलावा, आपकी यह आदत आपके ब्लड प्रेशर को भी अचानक से बढ़ा सकता है. सुबह उठकर सबसे पहले एक या दो ग्लास गुनगुना पानी पीना चाहिए ताकि शरीर हाइड्रेट हो सके, उसके बाद ही कुछ खाना या पीना चाहिए. हैवी और अनहेल्दी ब्रेकफास्ट करना या उसे स्किप कर देना ब्रेकफास्ट हमारे पूरे दिन का सबसे जरूरी डाइट होता है. कुछ लोग समय की कमी के कारण ब्रेकफास्ट स्किप कर देते हैं, तो कुछ लोग सुबह-सुबह ही बहुत ज्यादा तला-भुना, कचौड़ी, समोसा या पैक्ड चीजें खा लेते हैं. ये दोनों ही आदतें आपकी हार्ट हेल्थ के लिए काफी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं. ब्रेकफास्ट स्किप करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा होता है जिससे मोटापा बढ़ने लगता है. इसकी वजह से दिल की बीमारी का खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है. वहीं, दूसरी ओर, सुबह-सुबह ज्यादा तेल और फैट वाली चीजें खाने से शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, जिससे दिल की नसें ब्लॉक हो सकती हैं. हद से ज्यादा स्ट्रेस लेना या गुस्सा करना सुबह उठते ही ऑफिस की टेंशन, काम का प्रेशर या किसी बात पर गुस्सा करना आपकी हार्ट हेल्थ को बुरी तरह से बिगाड़ सकता है. जब आप सुबह-सुबह स्ट्रेस लेते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन्स रिलीज होते हैं. ये हॉर्मोन्स दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर को बढ़ा देते हैं. अगर यह रोज की आदत बन जाए, तो समय के साथ आपका दिल कमजोर होने लगता है. अगर आप नहीं चाहते हैं कि ऐसा हो, तो सुबह के समय खुद को शांत रखने की कोशिश करें. इसके लिए आप थोड़ी देर मेडिटेशन या डीप ब्रीदिंग की प्रैक्टिस कर सकते हैं. फिजिकल एक्टिविटी बिल्कुल भी न करना आपको शायद यह जानकर हैरानी हो लेकिन, रात भर सोने के बाद सुबह हमारे शरीर की नसें और मसल्स थोड़ी टाइट हो जाती हैं. अगर आप सुबह उठकर सीधे कुर्सी या सोफे पर बैठ जाते हैं और कोई फिजिकल मूवमेंट नहीं करते, तो यह आपके दिल के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं है. सुबह के समय कम से कम 20 से 30 मिनट की लाइट वॉकिंग, योगा या स्ट्रेचिंग करना बहुत जरूरी है. फिजिकल एक्टिविटी न करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन स्लो हो जाता है, जिसकी वजह से दिल को काम करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है.

शिक्षकों को पोस्टिंग में बड़ी राहत, सम्राट चौधरी बोले- अब पढ़ाई पर कोई समझौता नहीं

 पटना बिहार में शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग और स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर चल रही तमाम चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का एक बेहद सख्त बयान सामने आया है। कैमूर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने साफ लहजे में शिक्षकों को चेतावनी दी है कि सरकार उनकी सुविधाओं का पूरा ख्याल रख रही है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों की पढ़ाई से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। शिक्षकों के ट्रांसफर नीति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि "ट्रांसफर जहां कराना है, करा लीजिए, लेकिन पढ़ाना तो पड़ेगा। कोई बहाना नहीं चलेगा।" मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख से साफ है कि सरकार अब राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पूरी तरह से एक्शन मोड में है और लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों पर गाज गिरना तय है। शिक्षकों को पोस्टिंग की बड़ी राहत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंच से घोषणा करते हुए कहा कि सरकार ने शिक्षकों की सहूलियत के लिए ट्रांसफर के नियमों को काफी आसान बनाया है। उन्होंने कहा, "शिक्षकों के लिए हम लोगों ने तय किया है कि आप अपने गांव के बिल्कुल बगल में चले जाइए, इसमें सरकार को कोई दिक्कत नहीं है।" उन्होंने महिला शिक्षिकाओं के लिए कहा कि जो हमारी बहनें शिक्षिका हैं, उन्हें उनके घर या गांव के ठीक बगल वाले पंचायत में ही पढ़ाने के लिए पोस्टिंग दी जाएगी। वहीं, जो हमारे भाई शिक्षक हैं, उन्हें भी ज्यादा दूर न भेजकर उनके बगल वाले प्रखंड में ही काम करने का अवसर दिया जाएगा। सम्राट चौधरी बोले- 'पढ़ाने के लिए अब कोई एक्सक्यूज नहीं मिलेगा' शिक्षकों को बड़ी राहत देने के साथ ही मुख्यमंत्री ने अपनी दूसरी शर्त भी बेहद कड़े शब्दों में सामने रख दी। उन्होंने मंच से हुंकार भरते हुए कहा, "बगल के पंचायत और प्रखंड में पोस्टिंग तो मैं दे दूंगा, लेकिन पढ़ाना तो आपको हर हाल में पड़ेगा। अब पढ़ाने के लिए किसी भी तरह का कोई एक्सक्यूज नहीं मिलेगा।" उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे पूरी निष्ठा से स्कूल जाएं, बच्चों को पढ़ाएं और बिहार के भविष्य को आगे बढ़ाने का काम करें। मुख्यमंत्री ने राज्य में हुए ढांचागत बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि आज बिहार की पूरी स्कूल व्यवस्था बदल चुकी है और लगभग 75 हजार सरकारी स्कूलों को खोला व सुधारा जा चुका है। अब सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और किसान के बच्चों को देश की सबसे बेहतरीन शिक्षा मिल सके।

संवेदनशील पहल से बदली दाखू देवी की जिंदगी, मिली सरकारी योजनाओं की सौगात

जैसलमेर जैसलमेर जिले की राजमथाई ग्राम पंचायत निवासी दाखू देवी जोगी पूर्व में हुई एक भीषण आगजनी की घटना में लगभग 75 प्रतिशत तक झुलस गई थी। इस दुर्घटना में उनका चेहरा एवं हाथों की उंगलियां भी गंभीर रूप से प्रभावित हो गई थी। शारीरिक स्थिति के कारण उनका आधार कार्ड नहीं बन पा रहा था, जिसके चलते वे विभिन्न सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के लाभ से वंचित थी।  पहले पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी की उपस्थिति में पंचायत समिति भणियाणा के विकास अधिकारी हनुमान राम ने दाखू देवी की समस्या का समाधान करने का संकल्प लिया था। इसके बाद उन्होंने अपने निजी वाहन से दाखू देवी को पांच बार जोधपुर ले जाकर आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण करवाईं। इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप दाखू देवी का आधार कार्ड,जन आधार कार्ड एवं बैंक खाता बनवाया गया एवं उनकी वृद्धावस्था पेंशन भी स्वीकृत करवाई गई। ग्राम पंचायत राजमथाई में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी ने दाखू देवी को पेंशन पीपीओ सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रदान किए।  दस्तावेज प्राप्त कर भावुक हुई दाखू देवी ने कहा कि अब उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा और उनका जीवन पहले से अधिक सुरक्षित एवं सम्मानजनक बनेगा। उन्होंने पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी, विकास अधिकारी हनुमान राम, ग्राम विकास अधिकारी भीमदान चारण तथा वरिष्ठ सहायक राणा राम गौरा सहित सभी संबंधित अधिकारियों एवं कार्मिकों का आभार व्यक्त किया।   दाखू देवी की यह सच्ची कहानी दर्शाती है कि यदि प्रशासन संवेदनशीलता, समर्पण और जनसेवा की भावना के साथ कार्य करे तो कठिन से कठिन समस्या का समाधान संभव है।

रामायण वाटिका उद्घाटन समेत 1088 विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास करेंगे योगी

बरेली मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित बरेली दौरे को लेकर लोकार्पण और शिलान्यास के कार्यक्रमों की सूची लगभग फाइनल हो चुकी है। सीएम के हाथों करीब चार हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण कराया जाएगा। इसमें 3530.75 करोड़ के 1,013 कामों का शिलान्यास और 534.49 करोड़ के 75 कामों का लोकार्पण शामिल है। दौर की तिथि अभी निश्चित नहीं हुई है, लेकिन 20 जून के आसपास उनके आने की संभावना है। जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री मुरादाबाद में जनसभा को संबोधित करने के बाद बरेली आ सकते हैं। सर्किट हाउस में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ मंडलीय समीक्षा बैठक के बाद वह बरेली कॉलेज में जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद शाम को रामायण वाटिका का उद्घाटन करेंगे। वहां लेजर शो के बीच वाटिका का भ्रमण करेंगे। जिले में रात्रि विश्राम के बाद सुबह वह शाहजहांपुर जा सकते हैं। वहां भी जनसभा प्रस्तावित है। रामगंगा नगर में रामायण वाटिका का विकास बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) की ओर से कराया गया है। 33 हजार वर्गमीटर में बनी इस वाटिका पर बीडीए ने 46 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। दौरे को देखते हुए बीडीए ने रामगंगानगर के ट्री-गार्डों को भगवा रंग में रंग दिया है। सोमवार को भी रामायण वाटिका में बीडीए की टीम लगी रही। नगर निगम की ओर से सड़कों की मरम्मत भी शुरू करा दी गई है। पीलीभीत बाइपास के गड्ढों को भरा जा रहा है। प्रमुख सचिव ने परखीं तैयारियां मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे से पहले सोमवार को प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास एवं ग्रामीण अभियंत्रण विभाग व नोडल अधिकारी सौरभ बाबू ने अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों को परखा। कलक्ट्रेट सभागार में हुई समीक्षा बैठक में विभिन्न योजनाओं और राजस्व से जुड़े कार्यों की जानकारी ली।  कहा कि जिन परियोजनाओं पर काम चल रहा है और 90 फीसदी से ज्यादा निर्माण हो चुका है उसे जल्दी पूरा कराएं। जो परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, उन्हें हस्तांतरित किया जाए।   छात्रवृत्ति, निराश्रित महिला पेंशन, दिव्यांग पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन योजना की समीक्षा कर पात्रों को इसके दायरे में लाने के निर्देश दिए। बिजली निगम की समीक्षा में बताया गया कि ट्रांसफार्मरों के खराब होने की शिकायत मिलने पर शहर में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र में 72 घंटे में उन्हें बदला जा रहा है। निर्देश दिए कि पात्रों को ही आवास योजनाओं का लाभ दिया जाए। जल जीवन मिशन, फैमिली आईडी की भी समीक्षा की। बैठक में डीएम अविनाश सिंह, सीडीओ देवयानी, नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य व अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के बाद उन्होंने सीबीगंज में निर्माणाधीन आईटी पार्क का निरीक्षण किया। कार्यदायी संस्था को शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण कार्य कराने की हिदायत दी। मीरगंज के सिधौली में निर्माणाधीन आईटीआई परिसर का जायजा लिया। झुमका चौराहा के पास स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला और लोक निर्माण विभाग की ओर से निर्मित 19.5 किलोमीटर लंबे मीरगंज-सहोड़ा वाया सिहोर मार्ग का भी जायजा लिया।  

परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए पटना-गया समेत कई रूटों पर परीक्षा स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू

गयाजी  पुलिस भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले हजारों अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए पूर्व मध्य रेल ने 16 और 17 जून को कई परीक्षा स्पेशल ट्रेनों के परिचालन की घोषणा की है। इन विशेष ट्रेनों का उद्देश्य अभ्यर्थियों को समय पर और सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाना है। गया जंक्शन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाएगा, जिससे मगध क्षेत्र के परीक्षार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी। सुबह 7:15 बजे पटना से चलकर गया पहुंचेगी रेलवे द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 17 जून को पटना-गया परीक्षा स्पेशल सुबह 7:15 बजे पटना से चलकर गया पहुंचेगी। वहीं परीक्षा समाप्त होने के बाद अभ्यर्थियों की वापसी के लिए गया-किऊल स्पेशल शाम 5:30 बजे गया से खुलेगी, जो नवादा और शेखपुरा होते हुए किऊल तक जाएगी। इसके अलावा किऊल से गया के लिए भी दोपहर 12:30 बजे विशेष ट्रेन का संचालन होगा। यह ट्रेन शेखपुरा और नवादा के रास्ते गया पहुंचेगी। इससे नवादा, शेखपुरा और किऊल क्षेत्र के अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र तक आने-जाने में सहूलियत होगी। बख्तियारपुर-राजगीर स्पेशल सुबह 8 बजे राजगीर और बिहारशरीफ क्षेत्र के अभ्यर्थियों के लिए भी रेलवे ने विशेष व्यवस्था की है। बख्तियारपुर-राजगीर स्पेशल सुबह 8 बजे तथा दोपहर 3:30 बजे चलाई जाएगी, जबकि राजगीर-बख्तियारपुर स्पेशल दोपहर 1 बजे और शाम 6:15 बजे रवाना होगी। ये ट्रेनें बिहारशरीफ और नालंदा होकर गुजरेंगी, जिससे नालंदा जिले के अभ्यर्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार परीक्षा के दौरान सामान्य ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ की संभावना को देखते हुए इन विशेष ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। इससे अभ्यर्थियों को यात्रा के दौरान अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे समय पर अपने परीक्षा केंद्र तक पहुंच सकेंगे। अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पूर्व मध्य रेल ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे परीक्षा स्पेशल ट्रेनों का अधिक से अधिक उपयोग करें तथा यात्रा के दौरान रेलवे के नियमों का पालन करें। रेलवे प्रशासन ने स्टेशनों पर अतिरिक्त निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और यात्री सहायता केंद्रों की भी व्यवस्था की है। पुलिस भर्ती परीक्षा में बड़ी संख्या में युवाओं के शामिल होने की संभावना को देखते हुए रेलवे की यह पहल न केवल भीड़ प्रबंधन में मददगार होगी, बल्कि अभ्यर्थियों की यात्रा को भी आसान बनाएगी। गया जंक्शन सहित मगध क्षेत्र के रेलवे स्टेशनों पर इन विशेष ट्रेनों को लेकर परीक्षार्थियों में उत्साह देखा जा रहा है। गया से जुड़ी प्रमुख परीक्षा स्पेशल ट्रेनें     पटना – गया स्पेशल : 17 जून, सुबह 7:15 बजे     किऊल – गया स्पेशल : 17 जून, दोपहर 12:30 बजे     गया – किऊल स्पेशल : 17 जून, शाम 5:30 बजे     पटना – भभुआ स्पेशल : गया होकर संचालित, 16 जून रात 11:30 बजे  

नाम की गलती से परेशान ग्रामीण को शिविर में मिला न्याय

जयपुर  माता—पिता ने नाम रखा डूंगरदास लेकिन पटवारी की लापरवाही से राजस्व रेकार्ड में नाम दर्ज हुआ डूंगरराम। बैंक पास बुक, आधार, जन आधार और अन्य रेकार्ड में असली नाम डूंगरदास चलता रहा। अब उसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि समेत अन्य योजनाओं का लाभ ही नहीं मिल सकता था क्योंकि खेत हो गया डूंगरराम के नाम और बैंक पास बुक डूंगरदास के नाम। एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर काट काट कर थक गया और अब यह डर घर कर गया कि नाम दुरूस्ती से पहले ईश्वर के यहां से बुलावा आ गया तो जमीन उसकी संतान के नाम नहीं हो पायेगी क्योंकि जमीन डूंगरराम के नाम है और डूंगरराम नाम का कोई आदमी उस गांव में था ही नहीं। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने डूंगरदास जैसे लोगों की समस्या का समाधान करने के लिए ही ग्रामीण सेवा शिविर अभियान चला रखा है। जैसलमेर जिले की ग्राम पंचायत खींया में आयोजित शिविर में डूंगरदास की जमीन के रेकार्ड में 10 मिनट में उसका गलत नाम डूंगरराम हटा कर वास्तविक नाम दर्ज किया गया।  वर्षों से चली आ रही समस्या का शिविर में ही समाधान होने पर डूंगरदास के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने मुख्यमंत्री की इस जनहितैषी पहल की सराहना करते हुए उनका आभार प्रकट किया है। अब उसे उन सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा, जिनका अब तक पात्र तो था लेकिन नाम में त्रुटि के कारण अब तक वंचित था।                  जैसलमेर जिले की ही ग्राम पंचायत सादा में आयोजित शिविर में वर्षों से लंबित नाम शुद्धिकरण की समस्या का भी मौके पर ही समाधान किया गया।       शिविर में चेतनाराम, भागूराम, नेताराम एवं चन्द्रेश ने राजस्व अभिलेखों मेंदर्ज नामों की त्रुटियों के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया। दस्तावेज चैक करने के बाद शिविर में ही पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी ने इनको  नाम शुद्धिकरण पत्र प्रदान किए गए। इसी प्रकार ग्राम पंचायत लोहारकी निवासी मीना पत्नी बाबूनाथ के जीवन में यह शिविर उम्मीद की नई किरण लेकर आया और वर्षों से संजोया गया उसका आवासीय भूखण्ड  पट्टे का सपना पूरा हुआ। उसने बताया कि श्री भजनलाल शर्मा ने उसे और उसके परिवार को इतना बड़ा उपहार दिया, वे उनकी इस पहल को कभी नहीं भूलेंगे।

नाम की गलती से परेशान ग्रामीण को शिविर में मिला न्याय

जयपुर  माता—पिता ने नाम रखा डूंगरदास लेकिन पटवारी की लापरवाही से राजस्व रेकार्ड में नाम दर्ज हुआ डूंगरराम। बैंक पास बुक, आधार, जन आधार और अन्य रेकार्ड में असली नाम डूंगरदास चलता रहा। अब उसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि समेत अन्य योजनाओं का लाभ ही नहीं मिल सकता था क्योंकि खेत हो गया डूंगरराम के नाम और बैंक पास बुक डूंगरदास के नाम। एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर काट काट कर थक गया और अब यह डर घर कर गया कि नाम दुरूस्ती से पहले ईश्वर के यहां से बुलावा आ गया तो जमीन उसकी संतान के नाम नहीं हो पायेगी क्योंकि जमीन डूंगरराम के नाम है और डूंगरराम नाम का कोई आदमी उस गांव में था ही नहीं। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने डूंगरदास जैसे लोगों की समस्या का समाधान करने के लिए ही ग्रामीण सेवा शिविर अभियान चला रखा है। जैसलमेर जिले की ग्राम पंचायत खींया में आयोजित शिविर में डूंगरदास की जमीन के रेकार्ड में 10 मिनट में उसका गलत नाम डूंगरराम हटा कर वास्तविक नाम दर्ज किया गया।  वर्षों से चली आ रही समस्या का शिविर में ही समाधान होने पर डूंगरदास के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने मुख्यमंत्री की इस जनहितैषी पहल की सराहना करते हुए उनका आभार प्रकट किया है। अब उसे उन सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा, जिनका अब तक पात्र तो था लेकिन नाम में त्रुटि के कारण अब तक वंचित था।                  जैसलमेर जिले की ही ग्राम पंचायत सादा में आयोजित शिविर में वर्षों से लंबित नाम शुद्धिकरण की समस्या का भी मौके पर ही समाधान किया गया।       शिविर में चेतनाराम, भागूराम, नेताराम एवं चन्द्रेश ने राजस्व अभिलेखों मेंदर्ज नामों की त्रुटियों के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया। दस्तावेज चैक करने के बाद शिविर में ही पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी ने इनको  नाम शुद्धिकरण पत्र प्रदान किए गए। इसी प्रकार ग्राम पंचायत लोहारकी निवासी मीना पत्नी बाबूनाथ के जीवन में यह शिविर उम्मीद की नई किरण लेकर आया और वर्षों से संजोया गया उसका आवासीय भूखण्ड  पट्टे का सपना पूरा हुआ। उसने बताया कि श्री भजनलाल शर्मा ने उसे और उसके परिवार को इतना बड़ा उपहार दिया, वे उनकी इस पहल को कभी नहीं भूलेंगे।

खान ग्लोबल स्टडीज केस में सुनवाई, पुलिस से मांगी केस डायरी

 पटना  राजधानी पटना के मुसल्लहपुर हाट स्थित खान ग्लोबल स्टडीज में हुए बवाल और फायरिंग मामले में मंगलवार को अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान फैजल खान उर्फ खान सर के दोनों गार्डों को राहत नहीं मिली। कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका पर तत्काल फैसला सुनाने के बजाय पुलिस को अपडेटेड केस डायरी और अन्य जरूरी दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 20 जून को होगी। इसी दिन फैजल खान से जुड़े मामले की भी सुनवाई प्रस्तावित है। उन्‍हें 20 जून तक के लिए गिरफ्तारी से राहत मिली है। वहीं, ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के संचालक रौशन आनंद के सहयोगियों की ओर से भी जमानत याचिका दायर किए जाने की चर्चा तेज है। फैजल खान पर हत्‍या का आरोप इधर, एक दिन पहले जेल से बाहर आए रौशन आनंद ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने फैजल खान और एक कोल्ड स्टोरेज मालिक पर अपने भाई प्रिंस यादव की हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। बताया जा रहा है कि सोमवार देर रात सहरसा में प्रिंस यादव का अंतिम संस्कार किया गया। उनके चाचा ने मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और समर्थक शामिल हुए। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। प्रिंस यादव के बड़े चाचा मनोज यादव के अनुसार, बेटे की मौत की खबर सुनने के बाद उसके माता-पिता गहरे सदमे में हैं और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है। परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है। तेजस्‍वी यादव ने की सीबीआई जांच की मांग गौरतलब है कि प्रिंस यादव की मौत नेपाल के विराटनगर स्थित एक होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। इस मामले में नेपाल पुलिस ने प्रिंस के पांच दोस्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। घटना के बाद से बिहार और नेपाल दोनों जगह यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जाता है कि पटना पुलिस प्र‍िंस के साथि‍यों को लाने जाएगी। इस बीच पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्‍वी यादव ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखा है। इसके बाद राज्य की राजनीति में भी इस मामले को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है।

150 साल पुराना बलरामपुर का स्वयंसिद्ध हनुमान मंदिर, नेपाल तक है आस्था

बलरामपुर जहाँ एक तरफ गहरी नीरवता है और दूसरी तरफ सरोवर का अनंत विस्तार, ठीक उन दोनों के बीच एक पीपल की छांव तले विराजते हैं संकटमोचन हनुमान। न भव्य शिखर, न विशाल प्रांगण, फिर भी डेढ़ सदी से यहाँ आस्था का जो दीप जल रहा है, वह आज नेपाल की सीमाओं तक अपनी रोशनी बिखेर रहा है। यही है बलरामपुर के रानी तालाब स्थित वह हनुमान मंदिर, जिसे लोग चमत्कारी भी कहते हैं और स्वयंसिद्ध भी, क्योंकि यहाँ जो माँगा जाता है, वह मिलता जरूर है। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर को छोटी काशी यूं ही नहीं कहा जाता। इस प्राचीन नगर की गलियों में इतिहास सांस लेता है। नीलबाग महल हो, राजा की ड्योढ़ी हो या सदियों पुराने शिवालय, हर ओर गौरवशाली अतीत की छाप है। लेकिन इन सबके बीच रानी तालाब का हनुमान मंदिर अपनी एक अलग ही पहचान रखता है, जहाँ धर्म, प्रकृति और आस्था का अनूठा त्रिभुज बनता है। स्वयंसिद्ध है यह धाम मंदिर की भौगोलिक स्थिति ही इसे असाधारण बनाती है। पूरब में एकांत भूमि, पश्चिम में शांत सरोवर और उन दोनों के मध्य एक विशाल पीपल वृक्ष, जिसके नीचे युगों से बजरंगबली विराजमान हैं। शास्त्रों और लोक परंपराओं के अनुसार ऐसा संयोग जहाँ भी बनता है, वह स्थान स्वयंसिद्ध हो जाता है। यानी वहाँ स्थापित देवता साक्षात जागृत अवस्था में होते हैं और भक्तों की पुकार सीधे उन तक पहुँचती है। रानी तालाब का यह मंदिर उसी दिव्य श्रेणी में आता है। डेढ़ सदी की अटूट विरासत मंदिर का इतिहास लगभग 150 वर्ष पुराना है। इसकी स्थापना स्थानीय निवासी शंभू नाथ ने की थी। शुरुआत में यह केवल पीपल के नीचे स्थापित एक मूर्ति थी, कोई दीवार नहीं, कोई छत नहीं। लेकिन जब भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने लगीं तो मंदिर की महिमा स्वयं फैलती गई। लोग स्वेच्छा से जुड़ते गए, जनसहयोग से निर्माण होता गया और आज उसी स्थान पर एक सुंदर एवं सुव्यवस्थित मंदिर खड़ा है। भले ही वह केवल 100 वर्ग गज में समाया हो, पर उसकी आस्था का कोई आयाम नहीं। दशकों से इस मंदिर की सेवा और देखरेख पंडित रामदुलारे और उनका परिवार निःस्वार्थ भाव से करता आ रहा है। पाँच मंगलवार की मन्नत और बाबा का वचन मंदिर के पुजारी राम दुलारे के अनुसार यहाँ हनुमान जी को बेसन के लड्डू और सिंदूर अर्पित करने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि जो भक्त लगातार पाँच मंगलवार पूर्ण श्रद्धाभाव से यह प्रसाद चढ़ाते हुए मन्नत माँगता है, बाबा उसे कभी खाली हाथ नहीं लौटाते। कहते हैं कि उसकी नैया बजरंगी अवश्य पार लगाते हैं। मंदिर के ठीक सामने शिवलिंग स्थापित है और उसके पीछे पेड़ की ओट में शनिदेव की मूर्ति विराजमान है। तीनों देवशक्तियों का यह संगम इस स्थान को और भी पवित्र बनाता है। प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को यहाँ भजन कीर्तन और सुंदरकांड का पाठ होता है, जो पूरे परिसर को एक अलौकिक ऊर्जा से भर देता है। नेपाल तक फैली आस्था की लहर इस मंदिर की ख्याति केवल बलरामपुर तक सीमित नहीं है। गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती, बस्ती, सिद्धार्थनगर जैसे जिलों से हजारों श्रद्धालु यहाँ नियमित रूप से आते हैं। यहाँ तक कि पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी भक्त मन्नत लेकर इस द्वार पर पहुँचते हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर वे पुनः आभार व्यक्त करने लौटते हैं। यही इस मंदिर की सबसे बड़ी गवाही है। बड़े मंगल पर उमड़ता है जनसैलाब ज्येष्ठ मास के बड़े मंगल पर इस मंदिर का दृश्य अविस्मरणीय होता है। दूर-दूर से आए भक्त प्रसाद और ध्वजा लेकर उमड़ पड़ते हैं। हनुमान जयंती पर भव्य आयोजन होते हैं और पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठता है। यह नजारा देखकर सहज ही अनुभव होता है कि रानी तालाब का यह हनुमान मंदिर महज एक धार्मिक स्थल नहीं, यह लाखों लोगों की श्रद्धा, आस्था और विश्वास की जीवंत त्रिवेणी है, जो डेढ़ सदी से बह रही है और आने वाली पीढ़ियों तक बहती रहेगी।