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ऑपरेशन सिंदूर पर डोवल का बड़ा बयान, बोले- ‘भारत पूरी तरह सुरक्षित, 23 मिनट में हुआ सबकुछ’

नई दिल्ली  भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवल ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। IIT मद्रास के 62वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए डोवल ने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान भारत को कोई नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि विदेशी मीडिया ने जानबूझकर झूठी खबरें फैलाईं, लेकिन किसी के पास भारत को हुए नुकसान की कोई तस्वीर नहीं है। पूरे ऑपरेशन में 23 मिनट लगे डोवल ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान के 9 आतंकवादी ठिकानों पर सटीक निशाना साधा था। ये ठिकाने सीमावर्ती इलाकों में नहीं थे और पूरे ऑपरेशन में केवल 23 मिनट लगे। उन्होंने कहा, "हमें अपनी स्वदेशी तकनीक विकसित करनी होगी। ऑपरेशन में इस्तेमाल की गई सामग्री भी ज्यादातर स्वदेशी थी।" विदेशी मीडिया पर भड़के  NSA ने विदेशी मीडिया की रिपोर्टिंग पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "विदेशी मीडिया ने कहा कि पाकिस्तान ने कुछ किया, लेकिन आप मुझे एक भी तस्वीर दिखाइए जिसमें भारत की तरफ से कोई नुकसान हुआ हो। आज के समय में सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध हैं। 10 मई से पहले और बाद की तस्वीरों में पाकिस्तान के 13 हवाईअड्डे ही दिखाए गए, जिनमें कोई भी नुकसान नहीं था।" उन्होंने आगे कहा, "मैं केवल वही बता रहा हूं जो विदेशी मीडिया ने तस्वीरों के आधार पर प्रसारित किया। हम पाकिस्तान के हवाई अड्डों को नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं। लेकिन भारत को कोई नुकसान नहीं हुआ।" इस बयान से स्पष्ट हुआ कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को पूरी तैयारी और रणनीति के साथ अंजाम दिया और किसी भी प्रकार की क्षति से बचा। NSA डोवल ने स्वदेशी तकनीक और रणनीतिक सतर्कता की आवश्यकता पर जोर देते हुए देश की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से प्रगति के पथ पर बढ़ रहा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से प्रगति के पथ पर बढ़ रहा है। भारत वसुधैव-कुटुम्बकम की संस्कृति पर चल रहा है, जहाँ पूरा विश्व एक परिवार की तरह है। जब सारा विश्व युद्ध में झुलस रहा है, तब भारत जियो और जीने दो का संदेश देकर अपनी उदार संस्कृति का परिचय दे रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को इंदौर के केसरबाग क्षेत्र में एक बगिया माँ के नाम नगर वन निर्माण का भूमि पूजन एवं पौधारोपण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह संयोग है कि आज श्रावण माह का पहला दिन है और इसी दिन केसरबाग में "एक बगिया माँ के नाम" के तहत इंदौर को हरा-भरा और सुंदर बनाने का संकल्प लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत के लोग प्रारंभ से ही प्रकृति के निकट रहे हैं और उन्होंने प्रकृति में भी परमात्मा के दर्शन किये है। कार्बन उत्सर्जन को दूर करने में पौधों की बड़ी भूमिका है। पेड़ ऋषि-मुनि के समान होते है, जो प्रकृति से कम और लेते देते अधिक हैं। पौधों में प्राण होते है और भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. जगदीश चन्द्र बसु ने वैज्ञानिक रूप से सिद्ध करके दिखाया कि पौधों मे प्राण होते है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केसरबाग में आम के पौधे का रोपण किया। नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि क्लॉथ मॉर्केट एसोसिएशन ने शासन को केसरबाग में जो चार एकड़ से अधिक जमीन पौधारोपण के लिए दी है, उस पर 51 हजार से अधिक पौधे लगाकर इसे सुन्दर और प्रदेश की सबसे बड़ी बगिया बनाया जाएगा। बगिया में फलदार और औषधीय पौधे लगाये जायेंगे। बीते वर्ष हमने एक दिन में रेवती रेंज मे 12 लाख 40 हजार से अधिक पौधारोपण कर इतिहास रचा था। वर्तमान में सभी पौधे जीवित है और लहरा रहे है। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि इस मानसून में इंदौर जिले में 7 लाख पौधों का रोपण हो चुका है और आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में विभिन्न सामाजिक संस्थाएं हजारों की संख्या में पौधारोपण करेंगी। महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में बेहतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रकृति प्रेमी है और वे जल संरक्षण एवं जल संर्वधन की दिशा में लगातार कार्य कर रहे हैं। मुनि श्री आचार्य विभोव सागर महाराज ने कहा कि पर्यावरण जीवन का आधार और संस्कृति का संरक्षक है। जहॉ वृक्ष होते है, वहाँ बादल अधिक बरसते हैं हर व्यक्ति अपने आंगन में एक पेड़ अवश्य लगाये। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, सांसद श्री शंकर लालवानी, विधायक श्री मधु वर्मा, श्री महेद्र हार्डिया, श्रीमती मालिनी गौड़, सुश्री उषा ठाकुर, श्री गोलू शुक्ला आदि शामिल थे।  

शैक्षणिक उन्नयन के लिए अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन की वार्षिक कार्ययोजना पर हुई अहम चर्चा

 भोपाल  आज अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के जिला संस्थान के सभागार मे जिला सागर के सभी विकासखण्ड के शैक्षणिक उन्नयन हेतु वार्षिक कार्ययोजना एवं क्रियान्वयन को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित हुई | इस कार्यक्रम मे पिछले वर्ष की प्रमुख गतिविधियों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमे शिक्षकों कि प्रभावी कक्षा शिक्षण की प्रक्रियाओं एवं बच्चों के सीखने मे पड़े प्रभाव से संबंधित विभिन्न कामों को सभी ने देखा और सराहा |  इस बैठक मे सागर जिले के सभी विकासखण्ड के बीआरसी समन्वयक एवं, जिला शिक्षा केंद्र से श्री अनिल जैन APC (अकादमिक), जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान से वरिष्ठ प्राध्यापक श्री नेमा, एवं असाटी जी तथा प्रियंक श्रीवास्तव, जिला प्रमुख अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन, सागर की उपस्थिति मे जिला सागर की पिछली वार्षिक कार्ययोजना के प्रभाव और चुनौतियों को समझा गया ।   एपीसी अनिल जैन एवं आर० के० असाटी (वरिष्ठ व्याख्याता) ने जिले के शिक्षकों की क्षमता संवर्धन हेतु अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से निपुण शिक्षक कार्यक्रम अंतर्गत संचालित डेमो कक्षाओं के प्रभाव से सहमति जताते हुए कहा की इस कार्यक्रम ने हमारे शिक्षकों को अपनी कक्षाओं को बेहतर बनाने के साथ साथ बच्चों के सीखने को भी बेहतर किया हैं | समीक्षा बैठक में जिला शिक्षा केंद्र से शालू शर्मा एवं अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन से शिफ़ा खान, आशुतोष, राम नरेश, स्वेता एवं राकेश मौजूद रहे ।  प्रियंक श्रीवास्तव (जिला प्रमुख अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन, सागर) द्वारा अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति योजना कि विस्तृत जानकारी प्रदान की  गई । जिसका विवरण संलग्न इस प्रकार है- अठारह राज्यों की 2.5 लाख छात्राओं को अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति (वर्ष 2024-25 में मध्य प्रदेश में 18,000 से अधिक छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई जिसमे से सागर जिले की 1,367 छात्राएं लाभान्वित हुई।) सागर, 11  जुलाई: अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति का उद्देश्य स्कूली शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राओ को सहायता प्रदान करना है।  अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति के बारे में मुख्य बातें: • पात्रता: o ऐसी छात्रायें जिन्होने सरकारी (पब्लिक) स्कूलों से कक्षा 10वी और 12वी की पढ़ाई की हो। o किसी प्रामाणिक उच्च शिक्षा संस्थान (HEI) में डिग्री या डिप्लोमा कार्यक्रम में प्रवेश लिया हो। ‘प्रामाणिक’ HEI की सूची में सभी सरकारी (पब्लिक) HEI और चुनिंदा निजी HEI भी शामिल होंगे। • छात्रवृत्ति: डिग्री या डिप्लोमा कार्यक्रम की अवधि के लिए प्रति वर्ष 30,000 रुपये, जब तक छात्रा सफलतापूर्वक कार्यक्रम में जारी रहती है । उदाहरण के लिए, 4 वर्षीय बीएससी नर्सिंग प्रोग्राम करने वाली छात्राओं को उन 4 वर्षों में 1,20,000 रुपये की छात्रवृत्ति सहायता मिलेगी । यह धनराशि हर साल दो किश्तों में छात्राओ के बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर की जाएगी । वह अपनी जरूरत के हिसाब से इस धनराशि का उपयोग कर सकती है ।  फाउंडेशन का अनुमान है कि वह शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में 2.5 लाख छात्राओ को अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही होगी । यह कार्यक्रम इस साल से देश के 18 राज्यों में शुरू किया जाएगा । अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति पायलट के तौर पर शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और झारखंड के कुछ चुनिन्दा जिलों में लॉन्च किया गया था । इस पायलट कार्यक्रम में 25,000 से अधिक छात्राओ को छात्रवृत्ति दी गई है । छात्रवृत्ति के पहले वर्ष का पैसा इन छात्राओ के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया है। वर्ष 2025-26 के लिए आवेदन प्रक्रिया सितंबर 2025 में शुरू होगी ।  अठारह राज्यों की सूची इस प्रकार है: अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड । कार्यक्रम का विवरण और कार्यक्रम के डिजाइन या कवरेज में कोई भी बदलाव आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत में अधिसूचित किया जाएगा । आने वाले वर्षों में ये संभावना है की छात्रवृत्ति कार्यक्रम में देश के सभी राज्यो को शामिल किया जाएगा ।  

पाकिस्तान के झूठ की खुली पोल, डोभाल ने कहा– आरोप नहीं, सबूत दिखाओ

नई दिल्ली  एनएसए अजीत डोभाल ने दो टूक कहा कि विदेशी मीडिया या जो भी लोग भारत के नुकसान को लेकर सवाल उठा रहे, वो हमें एक तस्वीर-वीडियो दिखाएं। हमने अब तक जो भी फोटो या सैटेलाइट इमेज सामने आए हैं उनमें पाकिस्तान के 13 एयरबेस और दूसरे ठिकानों पर एक्शन का पता चलता है।  एनएसए डोभाल ने कहा कि विदेशी प्रेस ने कहा कि पाकिस्तान ने यह किया, वो किया… आप मुझे एक भी फोटो या सबूत दिखाइए जिसमें भारत में किसी इमारत को नुकसान हुआ हो, एक कांच तक टूटा हो… उन्होंने बातें लिख दीं और छाप दीं।  उन्होंने आगे कहा कि विदेशी मीडिया द्वारा जारी की गईं सैटेलाइट तस्वीरों में 10 मई से पहले और बाद में पाकिस्तान के 13 एयरबेस दिखाए गए, चाहे वह सरगोधा हो, रहीम यार खान हो या चकलाला। मैं सिर्फ वही बता रहा हूं जो उन्होंने अपनी रिपोर्टिंग में छापा। हममें यह क्षमता है कि अगर हम चाहें तो पाकिस्तान के एयरबेस को नुकसान पहुंचा सकते हैं। एनएसए अजीत डोभाल ने कहा कि हमें अपनी स्वदेशी तकनीक विकसित करनी होगी।  ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र यहां किया गया था। हमें इस बात पर गर्व है कि इसमें कितनी स्वदेशी सामग्री थी… हमने पाकिस्तान के आर-पार नौ आतंकवादी ठिकानों पर निशाना साधने का फैसला किया, ये सीमावर्ती इलाकों में नहीं थे। हम कोई भी निशाना नहीं चूके। हमने इसके अलावा कहीं और निशाना नहीं साधा। यह उस बिंदु तक सटीक था जहां हमें पता था कि कौन कहां है? पूरे ऑपरेशन में 23 मिनट लगे। आप मुझे एक भी तस्वीर बताइए जिसमें भारत की तरफ से हुआ कोई नुकसान दिखाई दे रहा हो।

उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा हुई आरंभ, पहले ही दिन हजारों कांवड़िए गंगा जल भरने हरिद्वार पहुंचे

देहरादून सावन माह की शुरूआत के साथ ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुक्रवार को कांवड़ यात्रा भी आरंभ हो गयी और पहले दिन ही हजारों की संख्या में कांवड़िए गंगा जल भरने के लिए धर्मनगरी हरिद्वार पहुंचे। करीब एक पखवाड़े तक चलने वाली इस यात्रा में हर साल देश के विभिन्न राज्यों से कांवड़िए हरिद्वार से गंगा जल भरकर ले जाते हैं और उससे शिवरात्रि के अवसर पर अपने गांवों और घरों के शिवालयों में भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। हर की पैड़ी सहित हरिद्वार के विभिन्न घाटों पर सुबह से ही बड़ी संख्या में कांवड़िए स्नान करते और गंगा जल भरते दिखे जिससे वहां का नजारा केसरिया रंग में रंगा हुआ नजर आ रहा है। उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने बताया कि कांवड़ मेले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस, अर्धसैनिक बल, जल पुलिस, अभिसूचना, विशेष कार्यबल, राज्य आपदा प्रतिवादन बल, पीएसी और आतंकवाद निरोधी दल के 7000 से अधिक कार्मिकों को तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि ड्रोन, सीसीटीवी और सोशल मीडिया की निगराानी के जरिए हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। कांवड़ यात्रा के निर्विघ्न संचालन के लिए उत्तराखंड सरकार ने सनातन धर्म की आड़ में लोगों को ठगने और उनकी भावनाओं से खिलवाड़ करने वाले छद्म भेषधारियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन कालनेमि’ शुरू कर दिया है। यात्रा आरंभ होने से एक दिन पहले शुरू किए गए इस ऑपरेशन के बारे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां असामाजिक तत्व साधु-संतों का भेष धारण कर लोगों, विशेषकर महिलाओं को ठग रहे हैं। उन्होंने कहा, ''इससे न सिर्फ लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं बल्कि सामाजिक सौहार्द और सनातन परंपरा की छवि को भी नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे में किसी भी धर्म का व्यक्ति यदि ऐसे कृत्य करता हुआ मिलता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।'' उन्होंने कहा कि जिस प्रकार असुर कालनेमि ने साधु का भेष धारण कर भ्रमित करने का प्रयास किया था, वैसे ही आज समाज में कई "कालनेमि" सक्रिय हैं जो धार्मिक भेष धारण कर अपराध कर रहे हैं। सुर कालनेमि का दोनों प्रमुख हिंदू धर्मग्रंथों- रामायण और महाभारत में उल्लेख है। पौराणिक मान्यता है कि रावण के मामा मारीच के पुत्र कालनेमि ने साधु का भेष धारण कर लक्ष्मण की मूर्छा को तोड़ने के लिए संजीवनी बूटी ला रहे हनुमान का रास्ता रोकने का प्रयास किया था लेकिन हनुमान ने उसकी असलियत जानकर उसका वध कर दिया था। महाभारत काल में कालनेमि का पुनर्जन्म कंस के रूप में हुआ जिसका संहार भगवान कृष्ण ने किया। पिछले कुछ सालों में गंगा जल भरने वाले शिवभक्त कांवड़ियों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। पिछले साल कांवड़ यात्रा में चार करोड़ से अधिक कांवड़िए हरिद्वार और ऋषिकेश पहुंचे थे। प्रशासनिक सूत्रों ने यहां बताया कि इस बार करीब छह-सात करोड़ कांवड़ियों के आने की उम्मीद है जिसे देखते हुए सभी प्रकार के इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। उधर, उत्तर रेलवे ने भी कांवड़ मेला के दौरान कांवड़ियों के लिए विशेष रेलगाड़ियां चलाने के प्रबंध किए हैं।  

PHC सुधार को लेकर सरकार की पहल, हाईकोर्ट से मांगी 10 दिन की मोहलत

जबलपुर:  मप्र हाईकोर्ट ने अनूपपुर जिले के राजनगर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति तथा उपकरण सहित अन्य व्यवस्थाओं को सुचारू करने के निर्देश दिये थे. याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से स्टेटस रिपोर्ट पेश करते हुए व्यवस्थाओं के लिए दस दिन का समय मांगा गया. एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने सरकार के आग्रह को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 30 जुलाई को निर्धारित की है. अनूपपुर निवासी विकास सिंह ने दायर की है जनहित याचिका अनूपपुर निवासी विकास प्रताप सिंह ने राजनगर स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की थी. जिसमें कहा था कि स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों के निर्धारित पदों की संख्या 15 है. इसके अलावा पैरामेडिकल व अन्य स्टाफ के पद भी निर्धारित हैं. निर्धारित पदों के हिसाब से डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टॉफ सहित अन्य पदों पर नियुक्ति नहीं की गई है. केंद्र पर केवल एक ही डॉक्टर पदस्थ है, वह भी सप्ताह में सिर्फ दो दिन एक घंटे के लिए आते हैं. केंद्र तक पहुंचने वाली सड़क ऐसी हालत में है कि लोगों के लिए उस पर चलना भी मुश्किल है. युगलपीठ ने शासन से सड़क की स्थिति व अन्य सुविधाओं के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के आदेष जारी किये थे. सरकार की तरफ से पेश की गई स्टेट्स रिपोर्ट में कहा गया था कि केन्द्र में डॉक्टरों के निर्धारित 7 पद हैं. इसके अलावा बीपी तथा ईसीजी मशीन के अलावा लॉक बॉक्स व टेबल-कुर्सी सहित अन्य समान हैं. याचिकाकर्ता ने स्टेटस रिपोर्ट को बताया गलत स्वास्थ्य केन्द्र में व्यवस्था को सुधारने के लिए दस दिन का समय दिया जाए. याचिकाकर्ता की तरफ से विरोध करते हुए बताया गया कि उप केन्द्र के समय डॉक्टरों के निर्धारित पद सात होते हैं. प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में पदों की संख्या 15 निर्धारित है. युगलपीठ ने सुनवाई के बाद ये आदेश जारी किए. 

स्कूलों के विलय पर हाई कोर्ट की मुहर, जनहित याचिका एक बार फिर खारिज

लखनऊ   इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने बेसिक शिक्षा अधिकारी के तहत आने वाले स्कूलों के विलय को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति एआर मसूदी व न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह की खंडपीठ ने गुरवार को ज्योति राजपूत की याचिका पर यह फैसला दिया है। याचिका पर राज्य सरकार ने भी आपत्ति जताकर अपना पक्ष रखा। न्यायालय ने कहा कि इस विषय पर सात जुलाई को एकल पीठ ने निर्णय दिया था, जिसमें विलय के उक्त आदेश के विरुद्ध दाखिल याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था, वर्तमान जनहित याचिका में एकल पीठ के सात जुलाई के उक्त निर्णय का कोई जिक्र नहीं है लिहाजा इलाहाबाद हाई कोर्ट रुल्स के प्रावधानों के तहत उक्त जनहित याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों के विलय के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका को शुरुआती सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। इस याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर आपत्ति उठाई गई कि मामले में उठाए गए मुद्दे पहले ही सीतापुर के 51 बच्चों की याचिका में एकल पीठ ने निर्णीत कर दिए हैं। ऐसे में समान मुद्दों को लेकर दाखिल यह पीआईएल सुनवाई के योग्य नहीं है। सरकार की आपत्ति पर गौर करने के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। स्थानीय अधिवक्ता ज्योति राजपूत की जनहित याचिका में राज्य सरकार के स्कूलों के विलय या दो स्कूलों को जोड़ने के राज्य सरकार के 16 जून के आदेश को चुनौती देकर रद करने का आग्रह किया गया था। याची ने गांवों के दूरदराज इलाकों में रहने वाले गरीबों के बच्चों को स्कूल जाने के लिए परिवहन व्यवस्था करने का आग्रह किया था। याचिका में आरटीई अधिनियम के तहत राज्य सरकार को बच्चों के परिवहन के दिशानिर्देश तय करने के निर्देश देने का भी आग्रह किया गया था। याची ने स्कूलों के विलय को गरीब बच्चों के हितों के खिलाफ बताया था। राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता अनुज कुदेसिया ने मुख्य स्थाई अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह के साथ दलील दी कि इसी सात जुलाई को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने स्कूलों के विलय के खिलाफ सीतापुर के 51 बच्चों की दाखिल याचिका समेत एक अन्य याचिका पर विस्तृत फैसला देकर खारिज कर दिया है। ऐसे में समान मामले में यह जनहित याचिका सुनवाई के लायक नहीं है। कोर्ट ने सरकार की ओर से उठाई गई शुरुआती आपत्ति के मद्देनजर जनहित याचिका खारिज कर दी।  

सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी कामयाबी, देहरादून में डायनामाइट के साथ पकड़े गए तीन आरोपी

देहरादून  देहरादून में 11 जुलाई 2025 को तीन लोगों को 125 किलोग्राम डायनामाइट के साथ पकड़ा. एक सवाल जो लोगों के दिमाग में आ रहा है, वह है – 125 किलोग्राम डायनामाइट से कितना नुकसान हो सकता है? हाल ही में सोशल मीडिया और समाचारों में विस्फोटकों जैसे डायनामाइट के बारे में सवाल उठ रहे हैं. खासकर तब जब देहरादून जैसे पहाड़ी इलाकों में निर्माण कार्य और खनन गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं.  डायनामाइट क्या है और यह कैसे काम करता है? डायनामाइट एक विस्फोटक सामग्री है, जिसे 19वीं सदी में स्वीडिश वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल ने बनाया था. यह ट्राइट्रोटोल्यूनि (TNT) और अन्य रसायनों से मिलकर बनता है, जो जब फूटता है तो बहुत सारी ऊर्जा छोड़ता है. इस ऊर्जा से इमारतें, चट्टानें और जमीन को तोड़ा जा सकता है. डायनामाइट का इस्तेमाल खनन, निर्माण और कभी-कभी गलत तरीके से विनाश के लिए भी होता है.  हर 1 ग्राम डायनामाइट में लगभग 4.184 किलोजूल ऊर्जा होती है. इसका मतलब है कि 125 किलोग्राम (125,000 ग्राम) डायनामाइट में करीब 523,000 किलोजूल (523 मेगाजूल) ऊर्जा होगी. यह ऊर्जा कितना नुकसान कर सकती है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसे कहां और कैसे इस्तेमाल किया जाता है. 125 किलोग्राम डायनामाइट से कितना नुकसान? भौतिक नुकसान  125 किलोग्राम डायनामाइट का विस्फोट एक छोटे से पहाड़ी क्षेत्र या इमारत को पूरी तरह नष्ट कर सकता है. अगर यह देहरादून के एक छोटे से निर्माण स्थल पर फूटे, तो आसपास की 50-100 मीटर की दूरी तक की इमारतें ढह सकती हैं. चट्टानों को तोड़ने के लिए खनन में, यह एक बड़े हिस्से को हटा सकता है, लेकिन अगर गलत जगह फूटे तो सड़कें और पुल भी क्षतिग्रस्त हो सकते हैं. धमाका और दबाव विस्फोट से पैदा होने वाला दबाव 100 मीटर तक हवा को हिला सकता है, जिससे खिड़कियां टूट सकती हैं. लोग सुनने की क्षमता खो सकते हैं. अगर यह भीड़-भाड़ वाले इलाके में फूटे, तो गंभीर चोटें आ सकती हैं या जान-माल का नुकसान हो सकता है. जमीन पर प्रभाव पहाड़ी इलाकों में, जैसे देहरादून, विस्फोट से भूस्खलन (landslide) का खतरा बढ़ सकता है. अगर 125 किलोग्राम डायनामाइट मसूरी की पहाड़ियों पर फूटे, तो मिट्टी और चट्टानों का बहाव निचले इलाकों में तबाही मचा सकता है. उदाहरण के लिए तुलना 1 किलोग्राम TNT (जो डायनामाइट से मिलता-जुलता है) एक छोटे घर को नष्ट कर सकता है. तो 125 किलोग्राम से एक छोटा गांव या औद्योगिक क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंच सकता है. यह ऊर्जा करीब 0.125 टन TNT के बराबर है, जो एक छोटे परमाणु बम (हिरोशिमा बम का 0.0001%) से बहुत कम है, लेकिन फिर भी स्थानीय स्तर पर खतरनाक है. देहरादून में इतने डायनामाइट के मिलने का मतलब  देहरादून उत्तराखंड की राजधानी है, जो हिमालय की तलहटी में बसा एक खूबसूरत शहर है. यहां सड़क निर्माण, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और भवन निर्माण के लिए डायनामाइट का इस्तेमाल आम है. लेकिन 125 किलोग्राम डायनामाइट का अनियंत्रित विस्फोट यहां के लिए गंभीर खतरा हो सकता है…     भूस्खलन का जोखिम: देहरादून के पहाड़ी इलाकों में पहले से ही भूस्खलन की समस्या है. 2021 की आपदा के बाद से यह और गंभीर हो गई है. इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोट से मिट्टी का ढांचा कमजोर हो सकता है.     आबादी का नुकसान: शहर में घनी आबादी वाले क्षेत्र जैसे राजपुर रोड या प्रेमनगर में अगर ऐसा विस्फोट हो, तो सैकड़ों लोग प्रभावित हो सकते हैं.     पर्यावरणीय नुकसान: विस्फोट से धूल, राख और प्रदूषण फैल सकता है, जो देहरादून की हवा और पानी को नुकसान पहुंचा सकता है. हालांकि, निर्माण में डायनामाइट का इस्तेमाल नियंत्रित तरीके से होता है, लेकिन अगर यह गलती से या आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल हो,तो परिणाम भयानक हो सकते हैं. सुरक्षा और सावधानियां     नियंत्रित प्रयोग: डायनामाइट का इस्तेमाल केवल प्रशिक्षित लोगों और सरकार की अनुमति से होना चाहिए. देहरादून में खनन कंपनियों को सख्त नियमों का पालन करना पड़ता है.     जागरूकता: स्थानीय लोगों को विस्फोट के समय सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और आपातकालीन नंबर (112) याद रखने चाहिए.     निगरानी: सरकार को विस्फोटकों की बिक्री और भंडारण पर नजर रखनी चाहिए ताकि गलत हाथों में न जाएं.  

छात्रा से बदसलूकी का मामला: रतलाम में टीचर पर बड़ी कार्रवाई, कलेक्टर ने लिया संज्ञान

रतलाम  रतलाम में एक शिक्षक को उसकी हरकतों की सजा मिली है। वीरसिंह मईड़ा नाम के इस शिक्षक ने नशे में एक बच्ची की चोटी काट दी थी। पूरी घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था। यह घटना पिछले साल हुई थी। अब, करीब एक साल बाद, रतलाम के कलेक्टर ने उसे नौकरी से निकाल दिया है। कलेक्टर राजेश बाथम ने यह फैसला लिया। वीरसिंह मईड़ा रावटी के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाता था। स्कूल का नाम सेमलखेड़ी-2 है। मईड़ा वहां सहायक शिक्षक था। उसने 4 सितंबर 2024 को यह हरकत की थी। उस दिन वह स्कूल में नशे की हालत में पहुंचा था। उन्होंने कक्षा 5वीं की एक छात्रा की चोटी काट दी। बच्ची इस दौरान सिसक सिसक कर रोती दिख रही थी। जांच में हुआ खुलासा इस घटना के बाद 5 सितंबर 2024 को शिक्षक को सस्पेंड कर दिया गया था। पुलिस ने उसके खिलाफ मामला भी दर्ज किया था। मामले की जांच हुई। जांच में पता चला कि शिक्षक ने यह कारनामा किया है। इसके बाद कलेक्टर राजेश बाथम ने उसे नौकरी से निकालने का आदेश दिया। यह आदेश गुरुवार की शाम को दिया गया। अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी टीचर ने जब बच्ची की चोटी काटी, तो किसी ने उसका वीडियो बना लिया। वीडियो में टीचर कह रहा था कि जो करना है कर लेना। यह वीडियो इंटरनेट पर बहुत वायरल हुआ था। शुरुआती जांच में ही टीचर को सस्पेंड कर दिया गया था। अब 10 महीने बाद कलेक्टर ने उस पर कार्रवाई की है। उसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई है।

इतिहास रच दिया! महिला टीम ने इंग्लैंड में पहली बार T20 सीरीज अपने नाम की

मैनचेस्‍टर  हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली भारतीय वुमेंस क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड में उस समय इतिहास रचा जब उन्होंने मेजबान टीम को चौथी T20I में 6 विकेट से धूल चटाई। इंग्लैंड की सरजमीं पर पहली बार 2006 में T20I मैच खेलने वाली टीम इंडिया ने इंग्लिश टीम को उन्हीं के घर पर पहली बार 2 या उससे अधिक मैच की टी20 सीरीज में धूल चटाई है। यह कारनामा टीम इंडिया अपने स्पिनर्स के दम पर करने में कामयाब रही। भारत ने पहले गेंदबाजी करते हुए इंग्लैंड को मात्र 126 के स्कोर पर रोक दिया, इसके बाद इस स्कोर का पीछा उन्होंने 6 विकेट और तीन ओवर रहते आसानी से कर लिया। राधा यादव को उनकी शानदार गेंदबाजी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच के अवॉर्ड से नवाजा गया। टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही। पावरप्ले में ही टीम ने 38 के स्कोर पर दो विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद श्री चरणी और राधा यावद ने अपनी घूमती गेंदों के आगे इंग्लिश बल्लेबाजों की एक ना चलने दी। भारत की कसी हुई गेंदबाजी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कोई भी इंग्लिश बैटर 25 रन का आंकड़ा नहीं छू पाई। श्री चरणी और राधा यादव ने मिलकर 4 विकेट चटकाए और इंग्लैंड को निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 126 के स्कोर पर रोका। राधा यादव ने इस दौरान अपने 4 ओवर के कोटे में मात्र 15 रन खर्च कर 2 विकेट चटकाए। 127 रनों के टारगेट का पीछा करने उतरी टीम इंडिया को स्मृति मंधाना (32) और शैफाली वर्मा (31) की ओपनिंग जोड़ी ने धाकड़ शुरुआत दी। 7 ओवर में दोनों ने मिलकर 56 रन जोड़ जीत की नींव रखी। इसके बाद जेमिमा रोड्रिग्स (24) और हरमनप्रीत कौर (26) ने छोटी-छोटी पारी खेल टीम को जीत के नजदीक पहुंचाया। भारत ने 18 गेंदें और 6 विकेट रहते मैच को अपने नाम किया और 5 मैच की सीरीज में 3-1 की अजेय बढ़त बनाई।