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तीन साल की बच्ची द्वारा संथारा लेने पर कोर्ट सख्त, वैधता पर उठाए सवाल

इंदौर मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने केंद्र शासन और राज्य सरकार के साथ सभी संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कर पूछा है कि ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित साढ़े तीन साल की बच्ची वियाना 'जो कि समझने की स्थिति में नहीं थी' ने संथारा की सहमति कैसे दी थी। मामले को लेकर हाई कोर्ट में चल रही जनहित याचिका में मंगलवार को सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि अब तक तीन नाबालिग का संथारा हुआ है। ये तीनों ही बालिकाएं हैं। इनमें हैदराबाद की 13 वर्षीय, मैसूर की 10 वर्षीय और इंदौर की साढ़े तीन वर्षीय बालिका शामिल हैं।   मामले में सुनवाई अब 25 अगस्त को याचिकाकर्ता ने कोर्ट से गुहार लगाई कि याचिका का अंतिम निराकरण होने तक नाबालिग के संथारा पर रोक लगाई जाए, लेकिन कोर्ट ने यह कहते हुए इससे इंकार कर दिया कि यह जैन समाज से जुड़ा मामला है। उनका पक्ष सुने बगैर कोई आदेश नहीं दे सकते। मामले में अब 25 अगस्त को सुनवाई होगी। याचिका में अब वियाना के माता-पिता भी पक्षकार होंगे। कोर्ट ने मंगलवार उन्हें पक्षकार बनाने के आवेदन को स्वीकार कर लिया। हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता प्रांशु जैन ने एडवोकेट शुभम शर्मा के माध्यम से यह जनहित याचिका दायर की है। इसमें कहा है कि इतनी कम उम्र की बच्ची संथारा जैसे गंभीर निर्णय की सहमति कैसे दे सकती है। साढ़े तीन वर्षीय बेटी वियाना को 21 मार्च को संथारा मंगलवार को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील ने गुहार लगाई कि नाबालिग के संथारा दिलाए जाने पर रोक लगाई जाए, लेकिन कोर्ट ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि संबंधित पक्षकारों को सुनने के बाद ही कोई आदेश दिया जा सकता है। यह है मामला इंदौर के पीयूष और वर्षा जैन की लगभग साढ़े तीन वर्षीय बेटी वियाना को 21 मार्च को संथारा दिलवाया गया था। मई के पहले सप्ताह में वियाना की मां वर्षा ने यह बात खुद मीडिया को बताई थी। उन्होंने बताया था कि जनवरी 2025 में पता चला था कि वियाना को ब्रेन ट्यूमर है। एक रात निकालना भी मुश्किल 9 जनवरी को उसे मुंबई ले जाया गया था। वहां उसका ट्यूमर का आपरेशन हुआ जिसके बाद वह ठीक भी होने लगी थी, लेकिन मार्च 2025 के तीसरे सप्ताह में उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। ऐसी स्थिति में हम वियाना को 21 मार्च को राजेश मुनि महाराज के पास ले गए। उन्होंने कहा कि इसका एक रात निकालना भी मुश्किल है। इसे संथारा करा देना चाहिए। हमने संथारा की सहमति दे दी। गुरुदेव ने संथारा की प्रक्रिया पूरी कराई। संथारा लेने के मात्र 10 मिनट बाद ही वियाना का निधन हो गया।

मंत्री विश्वास सारंग ने कहा- अगर कांग्रेस को प्रदर्शन करना है तो चुपचाप करे, वे यह नाटक नौटंकी क्यों कर रहे हैं?

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस को प्रदर्शन करना है तो चुपचाप करे, वे यह नाटक नौटंकी क्यों कर रहे हैं? मध्य प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर अशोकनगर के मुंगावली थाने में एक व्यक्ति को गलतबयानी के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है। इस मामले का जिक्र करते हुए विश्वास सारंग ने कहा, “कांग्रेस चोरी और फिर सीनाजोरी की कहावत को सही साबित कर रही है। एक तरफ उन्होंने अपनी राजनीति को चमकाने के लिए संविधान का माखौल उठाया और दूसरी तरफ उन्होंने एक भोले-भाले व्यक्ति का अपमान किया। उसने खुद कहा है कि उसे बाइक का लालच देकर इस तरह की बयानबाजी कराई गई।” उन्होंने कहा, “जीतू पटवारी ने उस व्यक्ति के मान का हनन किया और अब वे इस मुद्दे को लेकर शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं। अगर वे संविधान के पालन की बात करते हैं तो उन्हें चुपचाप जाकर गिरफ्तारी देनी चाहिए। मैं पूछता हूं कि वे यह नौटंकी क्यों कर रहे हैं? उन्हें सार्वजनिक रूप से उस व्यक्ति से माफी मांगनी चाहिए, जिसके मान को ठेस पहुंचाई गई। इससे बड़ा अपमान उसका नहीं हो सकता है।” मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस के सरकार में आने के दावे पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “वे कहते हैं कि कुछ दिनों बाद हमारी सरकार आ जाएगी और यही दावा कमलनाथ ने भी किया था, लेकिन वे दहाई में रह गए। मैं इतना ही कहूंगा कि अगर वे (कांग्रेस) इस तरह के दावे करेंगे तो इकाई में पहुंच जाएंगे। जनता इस तरह की दादागिरी और बदमाशी को स्वीकार नहीं करेगी।” इससे पहले, मध्य प्रदेश प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एफआईआर दर्ज होने पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा, “मुद्दा मेरे या हमारे कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर का नहीं है। मुद्दा एक पीड़ित व्यक्ति का है। उसने 50 जगह शिकायत की, अलग-अलग वीडियो दिए और 300 किलोमीटर पैदल चलकर न्याय मांगने के बावजूद मेरे पास पहुंचा। मैंने विपक्ष के तौर पर अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभाया। सरकार को इस व्यक्ति का दर्द समझना चाहिए था और अपराधी, आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी। लेकिन क्योंकि आरोपी एक विधायक का रिश्तेदार, परिवार का सदस्य और सत्ताधारी पार्टी का कार्यकर्ता था, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बजाय, जिसने दर्द सुना, उसके खिलाफ कार्रवाई की गई। उन्होंने मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज की।” मध्य प्रदेश सरकार जेल भेजेगी, तो जाएंगे : जीतू पटवारी कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार मंगलवार को अशोकनगर में गिरफ्तारी देने जा रहे हैं और उन्होंने ऐलान किया है कि अगर सरकार उन्हें जेल भेजेगी तो वह जेल जाने को तैयार हैं। पिछले दिनों कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ अशोकनगर के मुंगावली में प्रकरण दर्ज किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक व्यक्ति को बरगला कर और प्रलोभन देकर गलत बयानी कराई। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक विद्वेष करार देते हुए विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। उसी क्रम में मंगलवार को प्रदेश अध्यक्ष सहित कांग्रेस के तमाम नेता गिरफ्तारी देने अशोकनगर जा रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि एक व्यक्ति जिसे मानव मल खिलाया गया था, उसने कई जगह शिकायत की मगर प्रशासन और पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। मजबूरन वह व्यक्ति मुलाकात करने अशोकनगर से ओरछा पहुंचा और उसने हकीकत बयान की। बाद में प्रशासन ने उस पर दबाव डालकर एक शपथ पत्र ले लिया और प्रकरण दर्ज कर लिया। यह पूरी तरह अवैधानिक है और कांग्रेस लगातार पीड़ितों की लड़ाई लड़ती रही है, लड़ती रहेगी और अब गिरफ्तारी भी हम देने जा रहे हैं। अगर पुलिस प्रशासन जेल भेजता है, तो जेल जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पटवारी का कहना है आज सभी कांग्रेस नेता अशोकनगर आम जनता की लड़ाई लड़ने जा रहे है, जनता ने हमे विपक्ष का दायित्व दिया है। उनकी समस्याएं को लेकर हम लगातार लड़ते है, जो वादे जनता से भाजपा ने चुनाव में किए है उन्हें पूरा कराने के लिए सरकार से लगातार मांग करते हैं। हम विपक्ष की सकारात्मक भूमिका निभा रहे है। हमारी आवाज को दबाने का काम किया जा रहा है, सत्ता का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होने प्रशासन द्वारा प्रदर्शन को लेकर उठाए गए कदमों पर कहा, “जिस नियम के तहत अनुमति दी है उसी हिसाब से प्रदर्शन करेंगे। अगर हमें जेल में डालना है तो सरकार हमें जेल में डाल दे।” मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को लेकर विधानसभा में विधेयक लाने का वादा किया है, जिसका जिक्र करते हुए पटवारी ने कहा कि ओबीसी आरक्षण पर मुख्यमंत्री का बयान बेहद गलत है। सरकार ओबीसी के युवाओं के साथ अन्याय कर रही है। मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि हम नए नियम बना रहे हैं, जबकि नियम बने हुए हैं। अगर उसमें सुधार करना है तो करो, पर देखने में आ रहा है कि सरकार कोर्ट में वकील खड़े करके ओबीसी आरक्षण लागू नहीं करना चाहती है।   

धर्मांतरण केस में बड़ा ऐक्शन, झांगुर बाबा की संपत्ति पर चला योगी सरकार का बुलडोजर

लखनऊ  यूपी में अवेध धर्मांतरण केस में जलालुद्दीन उर्फ झांगुर बाबा पर योगी सरकार ने तगड़ा ऐक्शन लिया है। बलरामपुर में बनी ​​छांगुर बाबा की आलीशान कोठी पर बुलडोजर चलना शुरू हो गया है। बताया रहा यह कोठी अवैध तरीके से बनाई गई थी। झांगुर बाबा यही से अपने सारे काले कारनामे करता था। मुख्य आरोपी जलालुद्दीन उर्फ झांगुर की कोतवाली उतरौला अन्तर्गत मधपुर स्थित कोठी पर मंगलवार सुबह साढ़े 10 बजे बुलडोजर चलाने की कार्रवाई की गई। यह कोठी अभिलेखों में नीतू नवीन रोहरा उर्फ नसरीन पत्नी नवीन रोहरा के नाम दर्ज है। प्रशासन का मानना है कि भवन निर्माण में झांगुर का पैसा लगा था। भवन को सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर निर्माण कराने की बात कही जा रही है। अतिक्रमण हटाने सम्बन्धित तीन नोटिस नीतू उर्फ नसरीन को पहले ही जारी की जा चुकी है। नीतू, उनके पति व बेटी को झांगुर ने इस्लाम धर्म कुबूल करवा दिया था। वे झांगुर के साथ आकर मधपुर में रहने लगे थे, जहां झांगुर ने नीतू उर्फ नसरीन के लिए विशाल कोठी बनाई थी। झांगुर, उनका बेटा महबूब, नीतू उर्फ नसरीन व नवीन को एटीएस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। राजस्व विभाग को झांगुर के सम्पत्ति की जांच का आदेश मिला था। साथ ही मामले में ईडी को जांच के लिए कहा गया है। मंगलवार प्रातः साढ़े 10 बजे को उतरौला एसडीएम राजेन्द्र बहादुर, तहसीलदार सत्यपाल प्रजापति, एएसपी विशाल पाण्डेय, सीओ राघवेन्द्र प्रताप व एसएचओ अवधेश राज सिंह बुलडोजर लेकर मधपुर पहुंचे। घर का सभी सामान सुरक्षित निकलवाकर सूचीबद्ध किया गया। उसके बाद भवन ढहाना शुरू कर दिया गया। एसडीएम राजेन्द्र बहादुर ने बताया कि भवन ढहाने की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की गई है। मधपुर गांव में धर्मातरण का रैकेट चलाना शुरू किया था झांगुर झांगुर बाबा को यूपी एटीएस ने चार दिन पहले लखनऊ से गिरफ्तार किया था। उसके साथ सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन को भी पकड़ा गया था। दोनों लोगों से पूछताछ के दौरान कई खुलासे हुए थे। झांगुर बाबा ने बलरामपुर के उतरौला, मधपुर गांव में धर्मातरण का रैकेट चलाना शुरू किया था। मुम्बई से लेकर लखनऊ तक उसने कई लोगों को अपने जाल में फंसाया और उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने पर मजबूर कर दिया था। कुछ दिन पहले गोमतीनगर में झांगुर के शिकार बने लोगों ने फिर से रीति रिवाज के जरिए हिन्दू धर्म अपना लिया था। इसके लिए उसे फांडिंग की जाती थी। झांगुर की संस्थाओं में आई रकम मुरादाबाद, औरैया और आजमगढ़ के कई लोगों को भेजी गई थी। इनमें से कुछ लेन-देन काफी बड़ी रकम के हुए। विदेशी फंडिंग के जरिए आई इस रकम की बंदरबाट भी खूब हुई। लखनऊ से भी कई बार रकम झांगुर के पास पहुंचाई गई। इतनी बड़ी फंड़िंग और फिर उसे कई लोगों तक पहुंचाने के लिए झांगुर का नेटवर्क देखकर एटीएस के अफसर भी हैरान रह गए। एटीएस को ऐसी ही कई और नई जानकारियां पड़ताल में मिली है। इस आधार पर ही झांगुर के गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश में एटीएस और एसटीएफ लगी हुई है। कल कोठी पर पहुंचे थे तहसीलदार सोमवार देर शाम उतरौला तहसील के तहसीलदार सत्यपाल प्रजापति व उतरौला कोतवाली के इंस्पेक्टर अवधेश राज सिंह भारी पुलिस बल के साथ मधपुर स्थित झांगुर की इस कोठी पर पहुंचे थे। यहां उन्होंने नीतू के नाम की नोटिस चस्पा की थी। नोटिस चस्पा कराने के बाद पुलिस ने कहा कि झांगुर द्वारा ग्राम सभा मधपुर में स्थित गाटा संख्या: 337/370 के सम्पूर्ण रकबा 0.0060 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर इन लोगों ने अवैध रूप से कोठी बनवा ली है। इनके विरुद्ध बेदखली का आदेश भी पारित कर दिया गया है।  

‘श्री रामपुरम’ नामकरण की मुहिम को मिला जनसमर्थन, दिल्ली में 60 हजार साइन जुटे

नई दिल्ली दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने के बाद कई इलाकों का नाम बदलने की मांग उठ चुकी है। नजफगढ़ से मुस्तफाबाद तक के विधायक अपने इलाके की 'इस्लामिक पहचान' हटाना चाहते हैं। इस बीच शकूरबस्ती के विधायक करनैल सिंह ने तो एक कदम आगे बढ़ाते हुए जनतमत संग्रह शुरू कर दिया है। वह इस इलाके का नाम बदलकर श्री रामपुरम करना चाहते हैं। करनैल सिंह ने इसे जनता की मांग बताते हुए जनमत संग्रह की शुरुआत की है। करनैल सिंह ने कहा, ‘यह जनता की मांग रही है। पहले इसका नाम बस्ती था। लेकिन अब यहां बड़ी इमारते हैं, अच्छी गलियां और बाजार हैं। लोगों ने इसके लिए मत दिया और चर्चा के बाद हमने इसका नाम श्री रामपुरम करने का फैसला किया है। हमें इसे राजनीति का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए।’ श्री रामपुरम के प्रस्ताव पर 60 हजार लोग कर चुके साइन भाजपा विधायक ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि जनमत संग्रह के लिए एक फॉर्म बनाया गया है। इस पर लोगों के हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक कुल 60 हजार लोग साइन कर चुके हैं और वह क्षेत्र की करीब 90 फीसदी जनता का हस्ताक्षर लेकर सरकार और संगठन से इस बदलाव की मांग करेंगे। भगवान राम से प्यार करते हैं लोग, इसलिए उनका नाम: करनैल सिंह करनैल सिंह ने कहा कि कुछ लोग इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना चाहते हैं जबकि ऐसा है नहीं। यह सिर्फ लोगों की भावना है। लोग भगवान राम से इतना प्यार करते हैं, हमारी विधानसभा भी प्रगति करे और उनके पदचिह्नों पर चले इसलिए हमने शकूरबस्ती का नाम श्री रामपुर करने का फैसला किया है।  

ऑपरेशन सिंदूर का सच आया सामने, राफेल को लेकर कंपनी ने बताई असली बात

नई दिल्ली  राफेल को मार गिराने के पाकिस्तान के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। अब लड़ाकू विमान बनाने वाली कंपनी ने भी साफ कर दिया है कि पाकिस्तान ने भारत का कोई राफेल नहीं गिराया है। इससे पहले एक इंटरव्यू के दौरान भारत के रक्षा सचिव भी इस बात की पुष्टि कर चुके हैं। पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसके तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। एक राफेल का नुकसान पर पाकिस्तान ने नहीं गिराया मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्रांस की वेबसाइट Avion De Chasse को दसॉ एविएशन के अध्यक्ष और सीईओ एरिक ट्रैपियर ने बताया है कि एक राफेल जेट ऊंचाई पर जाकर तकनीकी खामी आ गई थी, जिसके चलते वह क्रैश हुआ। संघर्ष के दौरान कोई जेट नहीं गिरा था। भारत ने क्या कहा मीडिया से खास बातचीत में रक्षा सचिव आरके सिंह ने कहा कि यह कहना गलत है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के राफेल विमान गिराए गए थे। उन्होंने कहा, 'आपने राफेल्स का इस्तेमाल बहुवचन में किया है। मैं आपको भरोसा दिला सकता हूं कि यह सच नहीं है। भारत के मुकाबले पाकिस्तान को जान और माल के मामले कई गुना नुकसान हुआ है।' उन्होंने कहा कि 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए। उन्होंने कहा है कि भारतीय बलों को ऑपरेशन के दौरान पूरी छूट दी गई थी। उन्होंने कहा, 'हमारे सशस्त्र बलों पर कोई राजनीतिक रोक नहीं थी और उनके पास पूरी स्वतंत्रता थी।' चीन पर भड़के फ्रांस के अधिकारी चीन ने मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष के बाद फ्रांस निर्मित राफेल लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन के बारे में भ्रम की स्थिति पैदा करने की जिम्मेदारी अपने दूतावासों को दी थी, ताकि इस विमान की प्रतिष्ठा और बिक्री को नुकसान पहुंचाया जा सके। फ्रांसीसी सैन्य और खुफिया अधिकारियों ने यह निष्कर्ष निकाला है। एसोसिएटेड प्रेस द्वारा देखी गई फ्रांसीसी खुफिया सेवा की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के दूतावासों में रक्षा अधिकारियों (डिफेंस अताशे) ने राफेल की बिक्री को प्रभावित करने के लिए अभियान चलाया, जिसका उद्देश्य उन देशों को राजी करना था, जिन्होंने पहले से ही फ्रांस निर्मित लड़ाकू विमान का ऑर्डर दे दिया है – विशेष रूप से इंडोनेशिया- कि वे राफेल विमान न खरीदें तथा अन्य संभावित खरीदारों को चीन निर्मित विमान चुनने के लिए प्रोत्साहित किया। फ्रांसीसी सेना के अधिकारी ने पहचान गुप्त रखते हुए रिपोर्ट एपी के साथ साझा की। पाकिस्तान ने दावा किया कि उसकी वायुसेना ने सैन्य संघर्ष के दौरान पांच भारतीय विमानों को मार गिराया, जिनमें तीन राफेल भी शामिल थे। फ्रांसीसी अधिकारियों का कहना है कि इससे उन देशों की ओर से राफेल के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठे, जिन्होंने फ्रांसीसी निर्माता दसॉ एविएशन से लड़ाकू विमान खरीदे हैं।  

पुजारी को मंदिर की संपत्ति का मालिक नहीं माना जा सकता, केवल पूजा और प्रबंधन का होता है अधिकार: हाईकोर्ट

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मंदिर की संपत्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि पुजारी को मंदिर की संपत्ति का मालिक नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि पुजारी केवल देवता की पूजा करने और मंदिर का सीमित प्रबंधन करने के लिए नियुक्त एक प्रतिनिधि होता है, न कि स्वामी। बता दें कि यह फैसला जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने उस याचिका पर सुनाया, जो धमतरी जिले के श्री विंध्यवासिनी मां बिलाईमाता मंदिर के पुजारी परिषद अध्यक्ष मुरली मनोहर शर्मा ने दायर की थी। शर्मा ने राजस्व मंडल, बिलासपुर के 3 अक्टूबर 2015 के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई थी। विवाद की शुरुआत तब हुई जब मुरली मनोहर शर्मा ने तहसीलदार के समक्ष आवेदन देकर अपना नाम मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग की थी। तहसीलदार ने उनके पक्ष में आदेश जारी किया, लेकिन एसडीओ ने इस आदेश को रद्द कर दिया। इसके खिलाफ शर्मा ने अपर आयुक्त रायपुर के समक्ष अपील की, जो खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने राजस्व मंडल में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की, जिसे भी खारिज कर दिया गया। शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर यह दलील दी कि तहसीलदार का आदेश न्यायोचित था और अन्य अधिकारियों ने मामले की सही समीक्षा नहीं की। हाईकोर्ट की टिप्पणी हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि विंध्यवासिनी मंदिर ट्रस्ट समिति 23 जनवरी 1974 से विधिवत पंजीकृत संस्था है और वही मंदिर की संपत्ति का वैधानिक प्रबंधन करती है। कोर्ट ने 21 सितंबर 1989 को सिविल जज, वर्ग-2, धमतरी द्वारा पारित एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ट्रस्ट समिति ट्रस्ट की संपत्ति की देखरेख के लिए किसी भी व्यक्ति को प्रबंधक नियुक्त कर सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि उस व्यक्ति को संपत्ति का स्वामित्व प्राप्त हो गया। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पुजारी एक “ग्राही” यानी धारक होता है, जो मंदिर की पूजा संबंधी गतिविधियों के लिए नियुक्त होता है। यदि वह अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करता, तो यह अधिकार वापस भी लिया जा सकता है। इसलिए पुजारी को मंदिर की भूमि या संपत्ति का मालिक नहीं माना जा सकता। यह निर्णय उन मामलों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है जहां मंदिर की संपत्ति को लेकर पुजारियों और ट्रस्ट के बीच विवाद खड़े होते हैं। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि धार्मिक सेवा का अधिकार और मालिकाना हक अलग-अलग बातें हैं और पुजारी केवल सेवा के लिए नियुक्त व्यक्ति है, स्वामी नहीं।

कोरबा में वाटरफॉल में फंसे 5 युवक-युवतियों का सफल रेस्क्यू, सेल्फी-पॉइंट पर मौजूद थे, अचानक बढ़ा जलस्तर

कोरबा  छत्तीसगढ़ में लगातार दो दिनों से हो रही बारिश से आफत बढ़ती ही जा रही है। हालांकि इस पानी से गर्मी-उमस से भी राहत मिली है। कोरबा जिले में तेज पानी गिर रहा है। है। कोरबा के पाली में पिछले 24 घंटे के दौरान 260 मिमी बारिश हुई। यानी हर घंटे करीब 11 मिमी की औसत से बारिश हुई। कई जगहों पर भारी वर्षा रिकॉर्ड की गई। इस बीच, घूमने के लिए देवपहरी पहुंचा 5 दोस्तों का ग्रुप जलस्तर बढ़ने से टापू पर फंस गया। 5 दोस्तों का ग्रुप बारिश का नजारा देखने देवपहरी के गोविंदझुंझा जलप्रताप पहुंचा था। इनमें तीन युवती और दो युवक शामिल हैं।  जलप्रताप में बारिश के दौरान नजारा मनमोहक होने से दोस्तों का ग्रुप आगे टापू की ओर चला गया, जहां फोटो और सेल्फी लेने के बाद लौट रहे थे, तभी ऊपर से पहाड़ी की ओर से बारिश का पानी तेजी से पहुंचा। वे सभी जलस्तर बढ़ने से टापू पर बने गुंबद में पहुंचे। चारों ओर तेज पानी का बहाव होने से वे फंस गए हैं। दूसरी ओर, अमरकंटक से लौटते वक्त पेंड्रा इलाके में सजहा नाले के तेज बहाव में एक कार बह गई। इसमें नर्स प्रीति यादव, उनके पति चंद्रशेखर यादव और दो बच्चे सवार थे। हादसे में चारों की मौत हो गई। घटना किरर टोल प्लाजा के पास हुई, जहां पुल पर तेज पानी होने के बावजूद कार को पार कराने की कोशिश की गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बस के पार होते देख चंद्रशेखर ने भी कार बढ़ा दी, जो तेज बहाव में बह गई। सोमवार को शव बरामद कर लिया गया है। मप्र के मंत्री दिलीप जायसवाल ने परिजन को सांत्वना दी और 25-25 हजार रुपए की सहायता घोषित की। वहीं, रतनपुर से केंवची के रास्ते में मझवानी गांव के पास पुल के ऊपर से पानी बहता हुआ देखने के बावजूद पार करने की कोशिश में कोयला लोड ट्रक बह गया। हालांकि सड़क के दूसरी छोर पर मौजूद लोगाें ने ड्राइवर को बचा लिया। बारिश के कारण धमतरी जिले में सोंढूर नदी उफान पर है। इससे घोरागांव, छोटे गोबरा, दौड़ पंडरीपानी, समेत 15 गांव जिला मुख्यालय से कट गए। वहीं मगरलोड मार्ग पर महानदी पर मेघा एनीकट के पास निर्माणाधीन पुल से लगकर 50 गांव की आवाजाही के लिए वैकल्पिक रास्ता बनाया गया था, जो बह गया। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक तेज बारिश होगी। 9 जुलाई के बाद बारिश की गतिविधियों में कमी आने लगेगी। मंगलवार को भी प्रदेश के बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग में कहीं-कहीं पर भारी बारिश की संभावना है। लगातार हो रही बारिश से 15 जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। भिलाई में भी रविवार की रात से सोमवार सुबह 10 बजे तक दुर्ग- भिलाई में तेज बारिश होने से ट्विनसिटी के अलावा रिसाली और भिलाई-तीन चरोदा नगर निगम क्षेत्र की बहुत सी निचली बस्तियों में पानी भर गया। अभी तक इतनी हो चुकी है बारिश रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के कई शहरों में पिछले 24 घंटे से हो रही भारी बारिश के कारण छत्तीसगढ़ में अब तक की बारिश सामान्य से ऊपर हो गई है। 7 जुलाई तक पूरे प्रदेश में 306 मिमी पानी गिर चुका है, जबकि औसत 271.9 मिमी है। यानी औसत से 13 फीसदी ज्यादा पानी गिर चुका है। उत्तरी और मध्य छत्तीसगढ़ में पिछले दो-तीन दिनों से हो रही तेज बारिश के कारण 7 जुलाई तक का कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। कोरबा के पाली में पिछले 24 घंटे के दौरान 260 मिमी बारिश हुई। यानी हर घंटे करीब 11 मिमी की औसत से बारिश हुई। कई जगहों पर भारी वर्षा रिकॉर्ड की गई।  

कवर्धा जिले में सरकारी कार्यालयों में अनुशासन की नई मिसाल कायम हुई, देर से ऑफिस पहुंचने वाले कर्मचारियों को सबक सिखाया

कवर्धा  छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में सरकारी कार्यालयों में अनुशासन की नई मिसाल कायम हुई है। कलेक्टर गोपाल वर्मा ने देर से ऑफिस पहुंचने वाले कर्मचारियों को ऐसा सबक सिखाया कि अब शायद ही कोई समय पर न आए। जिला पंचायत कार्यालय के मुख्य द्वार पर हाजिरी रजिस्टर लेकर खुद बैठ गए कलेक्टर साहब और जो भी लेटलतीफ कर्मचारी दिखा, उससे कान पकड़वाकर उठक-बैठक कराई। इस अनोखे दृश्य का वीडियो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। गेट पर कलेक्टर, हाथ में रजिस्टर गुरुवार सुबह कलेक्टर गोपाल वर्मा ने जिला पंचायत कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। सुबह 10 बजे के बाद भी कई कर्मचारी अपनी कुर्सियों पर नदारद थे। बस फिर क्या, कलेक्टर ने कुर्सी जमा ली और कार्यालय के मुख्य द्वार पर डेरा डाल दिया। कलेक्टर ने देरी से दफ्तर पहुंचने वाले कर्मचारियों की क्लास लगा दी। उन्होंने कर्मचारियों को कान पकड़कर माफी मांगने और उठक-बैठक करने को कहा गया। क्यों सख्त हुए कलेक्टर साहब? कवर्धा में सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों की समयबद्धता पर सवाल उठते रहे हैं। पंचिंग मशीन के बावजूद कई कर्मचरारी समय पर नहीं पहुंचते, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है। कलेक्टर ने कहा, 'जनता के लिए काम समय पर हो, यह सुनिश्चित करना हमारा फर्ज है। अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी।' इस कार्रवाई के बाद कर्मचारियों ने भविष्य में समय पर आने का वचन दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। कुछ लोग कलेक्टर की तारीफ कर रहे हैं, कह रहे हैं कि ऐसी सख्ती जरूरी थी।

बारिश के कारण सब्जियों की आवक कम, दाम छु रहे आसमान, रसोई का बजट बिगड़ा

भोपाल  मानसून आते ही सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं। हरी सब्जियां बहुत महंगी हो गई हैं। फूल गोभी और गिलकी 120 रुपये प्रति किलो बिक रही हैं। लौकी और पत्ता गोभी 80 रुपये प्रति किलो बिक रही हैं। टमाटर, जो सर्दी और गर्मी में 10 से 20 रुपए प्रति किलो बिकते थे, अब 60 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं। आलू और प्याज ही ऐसे हैं जो 30 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं। कद्दू भी 30 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। बारिश के कारण सब्जियों की आवक कम हो गई है। इसलिए दाम बढ़ गए हैं। करेला और गिलकी के दाम सुन हैरान हैं लोग स्कूल टीचर प्रेरणा शर्मा ने बताया कि कुछ दिन पहले बिट्टन हाट में सब कुछ सस्ता था। बैंगन 10 रुपये का ढेर था। टमाटर 20 से 40 रुपये प्रति किलो थे, पर अब 60 रुपये से कम में कुछ नहीं मिल रहा है। करेला और गिलकी 120 रुपये प्रति किलो देखकर वे हैरान रह गईं। फल खरीदने का मौसम सरकारी कर्मचारी पंकज दुबे ने हंसते हुए कहा 'मुझे नहीं पता कि लोगों के लिए यह कितना संभव है, लेकिन मैं सुझाव दूंगा कि यह साल का वह समय है जब सब्जियां खरीदने के बजाय फल खरीदना बेहतर है। आपके पास कई तरह के आम, केले, संतरे, जामुन और कुछ और हैं, और वे बहुत महंगे भी नहीं हैं, सिवाय लीची और निश्चित रूप से अनार और सेब के, जो अभी भी सब्जियों से महंगे हैं। सब्जियों की सप्लाई हुई कम सब्जी विक्रेता राकेश चौरसिया ने बताया कि सब्जियों की सप्लाई कम हो गई है। थोक बाजार में दाम बढ़ने से खुदरा बाजार में भी दाम बढ़ जाते हैं। बिट्टन मार्केट सब्जी व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष हरिओम खटीक ने कहा कि बारिश में सब्जियों के दाम बढ़ जाते हैं। बारिश सबसे पहला कारण उन्होंने कहा कि 'सब्जियों की कीमतें आमतौर पर बारिश के मौसम में बढ़ जाती हैं, लेकिन अगर थोक बाजार में कद्दू 20 रुपये प्रति किलो बिकना शुरू हो जाए, तो हम यह कह सकते हैं कि सब्जियों की कीमतें वास्तव में बढ़ गई हैं। जिन क्षेत्रों से सब्जियां भोपाल लाई जाती हैं, उनमें बारिश की मात्रा उनकी कीमतों को तय करने में एक प्रमुख कारक है। भोपाल के आसपास नहीं होती सब्जियां बारिश के मौसम में, भोपाल के आसपास के क्षेत्रों में सब्जियों का उत्पादन नहीं होता है, इसलिए सब्जियों की स्थानीय आवक बहुत कम हो जाती है। हरिओम खटीक ने बताया कि अब, हमारे पास महाराष्ट्र, रतलाम और मंदसौर की ओर मालवा और मैहर से आपूर्ति हो रही है, और इसमें कोई संदेह नहीं है कि सभी सब्जियों की कीमतें अधिक हैं।  

कार्यपालिका के पदाधिकारी की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश की भी भागीदारी होती है, क्यों देते हैं राय?: उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली  भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने CBI निदेशक की नियुक्ति में CJI की भूमिका पर आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने सवाल उठाए हैं कि क्या ऐसा दुनिया में कहीं और हो रहा है? इसके अलावा उन्होंने जज के घर से नकदी मिलने पर भी खुलकर बात की। उपराष्ट्रपति ने कहा है कि हर अपराध की जांच होनी चाहिए। साथ ही कहा कि अगर पैसा मिला है, तो उसके स्त्रोत का भी पता लगाया जाना चाहिए। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, 'मैं इस बात से पूरी तरह हैरान हूं कि CBI निदेशक जैसे कार्यपालिका के पदाधिकारी की नियुक्ति में भारत के मुख्य न्यायाधीश की भी भागीदारी होती है। कार्यपालिका की नियुक्ति कार्यपालिका के अलावा किसी और की तरफ से क्यों होनी चाहिए? क्या ऐसा संविधान के तहत होता है? क्या ऐसा दुनिया में कहीं और हो रहा है?' दरअसल, DSPE एक्ट के तहत सीबीआई निदेशक की नियुक्ति एक हाई पावर कमेटी करती है, जिसके सदस्य प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनकी तरफ से नॉमिनेट किया हुआ कोई जज शामिल होते हैं। कोच्चि में कानूनी की पढ़ाई कर रहे छात्रों से बातचीत में उन्होंने न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका को अलग करने वाली सीमा कमजोर होने पर चिंता जाहिर की। नकदी मिलने पर क्या बोले नखड़ ने सोमवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नई दिल्ली में एक न्यायाधीश के आधिकारिक आवास से भारी मात्रा में नकदी मिलने के मामले की आपराधिक जांच शुरू की जाएगी। धनखड़ ने इस घटना की तुलना शेक्सपीयर के नाटक जूलियस सीजर के एक संदर्भ 'इडस ऑफ मार्च' से की, जिसे आने वाले संकट का प्रतीक माना जाता है। रोमन कलैंडर में इडस का अर्थ होता है, किसी महीने की बीच की तारीख। मार्च, मई, जुलाई और अक्टूबर में इडस 15 तारीख को पड़ता है। उपराष्ट्रपति ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि अब मुद्दा यह है कि यदि नकदी बरामद हुई थी तो शासन व्यवस्था को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए थी और पहली प्रक्रिया यह होनी चाहिए थी कि इससे आपराधिक कृत्य के रूप में निपटा जाता, दोषी लोगों का पता लगाया जाता और उन्हें कठघरे में खड़ा किया जाता। उपराष्ट्रपति ने कहा कि 14-15 मार्च की रात को न्यायपालिका को अपने खुदे के 'इडस ऑफ मार्च' का सामना करना पड़ा, जब बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार की गई थी, लेकिन अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। धनखड़ ने कहा कि इस मामले से शुरुआत से ही एक आपराधिक मामले के तौर पर निपटा जाना चाहिए था, लेकिन उच्चतम न्यायालय के 90 के दशक के एक फैसले के कारण केंद्र सरकार के हाथ बंधे हुए हैं। उन्होंने कहा, 'अगर इतना अधिक मात्रा में पैसा है, तो हमें पता लगाना होगा: क्या यह दागी पैसा है? इस पैसे का स्रोत क्या है? यह एक न्यायाधीश के आधिकारिक आवास में यह कैसे पहुंचा? यह किसका था? इस प्रक्रिया में कई दंड प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है। मुझे उम्मीद है कि प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।'