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भारत को रांची टी20 में बड़ा झटका, 250 रन का लक्ष्य भी नहीं बचा पाए गेंदबाज; वेस्टइंडीज ने मारी बाजी

रांची भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला शुक्रवार (9 अक्टूबर) को रांची के JSCA इंटरनेशनल स्टेडियम कॉम्प्लेक्स में खेला गया. इस मुकाबले में वेस्टइंडीज ने 6 विकेट से जीत हासिल की. वेस्टइंडीज को जीत के लिए 250 रनों का टारगेट मिला था, जिसे उसने 18.3 ओवरों में हासिल कर लिया. वेस्टइंडीज के लिए कप्तान शाई होप ने 45 बॉल पर नाबाद 102 रन बनाए, जिसमें 9 छक्के और 6 चौके शामिल रहे. शेरफेन रदरफोर्ड ने भी बल्ले से तूफानी प्रदर्शन किया. टी20 इंटरनेशनल में ये वेस्टइंडीज का सबसे सफल रनचेज रहा. इस जीत के साथ ही वेस्टइंडीज ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 1-1 की बराबरी कर ली है. सीरीज का पहला मुकाबला लखनऊ में आयोजित हुआ था, जिसमें भारतीय टीम ने 8 विकेट से जीत हासिल की थी. रनचेज में वेस्टइंडीज की शुरुआत अच्छी नहीं रही. पहले ही ओवर में तेज गेंदबाज मयंक यादव ने कामिल पूरन (4 रन) और शिमरॉन हेटमायर (0 रन) को पवेलियन का रास्ता दिखा दिया. फिर मयंक ने तूफानी बल्लेबाजी कर रहे रोवमैन पॉवेल को भी आउट किया. पॉवेल के आउट होने के समय वेस्टइंडीज का स्कोर 58/3 था. यहां से शेरफेन रदरफोर्ड और कप्तान शाई होप ने चौथे विकेट के लिए 54 गेंदों पर 120 रनों की साझेदारी कर मैच का नक्शा पलट दिया. शेरफेन रदरफोर्ड ने 7 छक्के और 7 चौके की मदद से 37 बॉल पर 84 रनों का योगदान दिया. कुलदीप यादव ने रदरफोर्ड को आउट कर इस साझेदारी को तोड़ा. यहां से शाई होप और रोमारियो शेफर्ड (34*) ने नाबाद 74 रनों की साझेदारी कर भारतीय टीम को कोई मौका नहीं दिया. ऐसी रही भारत की बल्लेबाजी मुकाबले में भारतीय टीम ने टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए 5 विकेट पर 249 रन बनाए. भारतीय टीम को अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन ने अच्छी शुरुआत दिलाई. दोनों के बीच पहले विकेट के लिए 42 रनों की साझेदारी हुई. अभिषेक (20 रन) को रोस्टन चेज ने अपनी फिरकी में फंसाया. यहां से ईशान किशन और संजू सैमसन ने दूसरे विकेट के लिए 97 रन जोड़े. इस पार्टनरशिप के दौरान संजू ने 21 बॉल पर ही फिफ्टी पूरी कर ली. ईशान 43 रनों के निजी स्कोर पर रोस्टन चेज का शिकार बने. ईशान ने 22 गेंदों की पारी में 6 चौके और दो छक्के लगाए. शिवम दुबे (7 रन) कुछ खास नहीं कर पाए और उनका विकेट रोस्टन चेज ने लिया. फिर संजू सैमसन के रूप में वेस्टइंडीज को चौथी सफलता मिली. संजू ने 41 गेंदों पर 82 रन बनाए, जिसमें 9 चौके और 4 छक्के शामिल रहे. संजू का विकेट शमर स्प्रिंगर ने लिया. यहां से श्रेयस अय्यर (18 बॉल पर 40 रन) और तिलक वर्मा (18 बॉल पर नाबाद 44 रन) ने पांचवें विकेट के लिए 83 रनों की साझेदारी कर भारत को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में मदद की. वेस्टइंडीज के लिए रोस्टन चेज ने तीन और शमर स्प्रिंगर ने दो सफलताएं हासिल कीं. इस मुकाबले के लिए भारतीय टीम ने अपनी प्लेइंग-11 में कोई बदलाव नहीं किया. भारतीय टीम उसी एकादश के साथ उतरी, जिसने उसे लखनऊ में खेले गए मुकाबले में जीत दिलाई थी. दूसरी ओर वेस्टइंडीज न मैथ्यू फोर्ड की जगह स्पिनर गुडाकेश मोती को प्लेइंग-11 में जगह दी. मुकाबले में भारत की प्लइंग-11: श्रेयस अय्यर (कप्तान), संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, नमन धीर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, मयंक यादव. मुकाबले में वेस्टइंडीज की प्लेइंग-11: शाई होप (कप्तान/विकेटकीपर), कामिल पूरन, शिमरोन हेटमायर, रोवमैन पॉवेल, शेरफेन रदरफोर्ड, रोमारियो शेफर्ड, रोस्टन चेज, गुडाकेश मोती, अकील हुसैन, शमर जोसेफ और शमर स्प्रिंगर. भारत का स्क्वॉड: वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), ईशान किशन, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव, मयंक यादव, कुलदीप यादव, रवि बिश्नोई, नीतीश कुमार रेड्डी और नमन धीर. वेस्टइंडीज का स्क्वॉड: शाई होप (कप्तान/विकेटकीपर), कामिल पूरन, आमिर जंगू, शिमरॉन हेटमायर, शेरफेन रदरफोर्ड, रोवमैन पॉवेल, रोस्टन चेज, रोमारियो शेफर्ड, गुडाकेश मोती, अकील हुसैन, शमर जोसेफ, मैथ्यू फोर्ड, कीमो पॉल, क्वेंटिन सैम्पसन और शमर स्प्रिंगर. भारत vs वेस्टइंडीज हेड टू हेड • कुल टी20I मैच: 33 • भारत जीता: 21 • वेस्टइंडीज जीता: 11 • बेनतीजा: 1   वनडे सीरीज (3 मैच) 27 सितंबर : पहला वनडे (तिरुवनंतपुरम)- भारत जीता 8 विकेट से 30 सितंबर : दूसरा वनडे (गुवाहाटी)- भारत जीता 8 विकेट से 3 अक्टूबर : तीसरा वनडे (न्यू चंडीगढ़)- वेस्टइंडीज जीता 5 विकेट से टी20 सीरीज (5 मैच) 6 अक्टूबर : पहला टी20 (लखनऊ)- भारत जीता 8 विकेट से 9 अक्टूबर: दूसरा टी20 (रांची)- वेस्टइंडीज की 8 विकेट से जीत 11 अक्टूबर: तीसरा टी20 (इंदौर)- शाम 7:00 बजे 14 अक्टूबर: चौथा टी20 (हैदराबाद)- शाम 7:00 बजे 17 अक्टूबर: पांचवा टी20 (बेंगलुरु)- शाम 7:00 बजे

यूपी के सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, योगी सरकार ने दी बड़ी सौगात

राज्य कर्मचारियों के लिए योगी सरकार की बड़ी सौगात सचिवालय प्रशासन विभाग और एक्सिस बैंक के बीच एमओयू, कर्मचारियों को मिलेंगे स्पेशल सैलरी अकाउंट के साथ सुरक्षा और कल्याण के अतिरिक्त लाभ पात्र राज्य कर्मचारियों को एक करोड़ रुपये तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर, साथ ही 30 लाख रुपये का अतिरिक्त स्वास्थ्य बीमा कवर मिलेगा लखनऊ  योगी सरकार ने प्रदेश के राज्य कर्मचारियों के कल्याण और उनके परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। सचिवालय प्रशासन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन और एक्सिस बैंक के बीच एमओयू किया गया है। इसके तहत प्रदेश के राज्य सरकारी कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से तैयार सैलरी अकाउंट के साथ कई अतिरिक्त सुरक्षात्मक और कल्याणकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। एक करोड़ रुपये का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर एमओयू के तहत पात्र राज्य कर्मचारियों को एक करोड़ रुपये तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध होगा। इससे आकस्मिक परिस्थितियों में कर्मचारी और उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों को 30 लाख रुपये तक का अतिरिक्त स्वास्थ्य बीमा कवर भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए मात्र सात रुपये प्रतिदिन के नाममात्र प्रीमियम की व्यवस्था की गई है। इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को गंभीर बीमारी अथवा आकस्मिक स्वास्थ्य खर्चों के समय अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा मिल सकेगी। बच्चों की शिक्षा के लिए आठ लाख रुपये तक की सहायता व्यवस्था के तहत आश्रित बच्चों की शिक्षा के लिए आठ लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता का प्रावधान भी किया गया है। इसके साथ ही कर्मचारियों को 10 लाख रुपये का सावधि जीवन बीमा कवर भी मिलेगा। एमओयू के तहत कर्मचारियों के लिए विशेष वेतन खाता उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें विभिन्न बैंकिंग सुविधाओं के साथ सुरक्षा और कल्याण से जुड़े अतिरिक्त लाभ भी मिलेंगे।

मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 में दिखी प्रदेश की स्वादिष्ट विरासत, विदेशी मेहमानों ने चखे स्थानीय पकवान

मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026: अंतर्राष्ट्रीय अतिथियों ने चखा मध्यप्रदेश के पारंपरिक स्वाद का जायका ‘मां की रसोई’ में स्थानीय व्यंजनों की खुशबू और स्वाद ने जीता मेहमानों का दिल भोपाल  मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 मे अंतर्राष्ट्रीय स्टेकहोल्डर्स, टूर ऑपरेटर्स, हॉस्पिटेलिटी प्रतिनिधियों और डेलीगेट्स को प्रदेश की समृद्ध पर्यटन विरासत के साथ-साथ यहां के पारंपरिक खाने का स्वाद भी चखने का मौका मिला। ट्रैवल मार्ट में परोसे गए अलग-अलग व्यंजनों से मेहमानों को मध्यप्रदेश के विभिन्न अंचलों के स्वाद का अनुभव मिला। पारंपरिक मसालों की खुशबू, देसी खाने और घर के स्वाद ने भोजन के अनुभव को खास बना दिया। ‘मां की रसोई’ में सजे मध्यप्रदेश के पारंपरिक स्वाद ट्रैवल मार्ट में ‘मां की रसोई’ लाइव फूड काउंटर विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। यहां मेहमानों ने मध्यप्रदेश के अलग-अलग इलाकों के पारंपरिक खाने और खास स्वाद का आनंद लिया। मिलेट ब्रेड, घर की बनी चटनियां, मट्ठे के आलू, चक्की का साग, निघौना, उड़द की दाल जैसे पारंपरिक व्यंजनों ने देश के विभिन्न हिस्सों से आए मेहमानों को प्रदेश के ग्रामीण और घरेलू स्वाद से रूबरू कराया। स्थानीय अनाज और देसी स्वाद का संगम विशेष रूप से कोदो मेथी भात ने मेहमानों को मध्यप्रदेश के पारंपरिक अनाज और स्थानीय खान-पान की समृद्ध परंपरा का अनुभव कराया। वहीं मट्ठे के आलू और चक्की के साग में देसी मसालों का संतुलित स्वाद और पारंपरिक पकाने की विधि की झलक दिखाई दी। घर में तैयार की जाने वाली चटनियों ने इन व्यंजनों के स्वाद को और अधिक समृद्ध किया। मिलेट से तैयार ब्रेड ने पारंपरिक अनाजों को आधुनिक प्रस्तुति के साथ जोड़ते हुए मेहमानों का ध्यान आकर्षित किया। दाल-बाफला में घुला मालवा का पारंपरिक स्वाद मध्यप्रदेश के पारंपरिक स्वाद के साथ मेहमानों को दाल बाफला, भटे का भरता और चूरमा के लड्डू का भी स्वाद मिला। मालवा की पहचान से जुड़े इस पारंपरिक भोजन ने खास तौर पर मेहमानों को आकर्षित किया। बुरहानपुर की मावा जलेबी ने बढ़ाई मिठास बुरहानपुर की मावा जलेबी और रबड़ी, मावा बाटी, दूध का हलवा जैसे पारंपरिक मिष्ठानों ने भोजन को मिठास से भर दिया। विशेष रूप से बुरहानपुर की मावा जलेबी का स्वाद मेहमानों के लिए मध्यप्रदेश की मिठास और स्थानीय खाने की विरासत का यादगार अनुभव रहा। मध्यप्रदेश के स्वाद से लेकर वैश्विक जायके तक ट्रैवल मार्ट में पारंपरिक व्यंजनों के साथ आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्वादों का भी समावेश किया गया। लाइव पास्ता काउंटर, विभिन्न प्रकार के सलाद, और अंतरराष्ट्रीय व्यंजनों ने देश-विदेश से आए मेहमानों की अलग-अलग स्वाद पसंद का ध्यान रखा। इस तरह भोजन की पूरी श्रृंखला में मध्यप्रदेश की पारंपरिक रसोई से लेकर आधुनिक वैश्विक खान-पान तक की विविधता देखने को मिली।  

600 मीटर तक निशाना साधने में सक्षम M8 कार्बाइन, जानें क्यों चर्चा में है यह आधुनिक हथियार

नईदिल्ली  ट्रिगर दबते ही बंदूक की नली से निकली गोली जब 3,180 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ़्तार से हवा को चीरती हुई आगे बढ़ती है, तो 600 मीटर दूर छिपा बैठा दुश्मन भी ढेर हो जाता है. चाहे दुश्मन ने कितना भी मजबूत मॉडर्न बुलेटप्रूफ आर्मर क्यों न पहन रखा हो, इस हथियार की मारक क्षमता के आगे उसका बचना नामुमकिन है. वजन में हल्की, चलाने में बेहद तेज और ‘स्मार्ट कंप्यूटर’ जैसे हाई-टेक स्कोप से लैस M8 कार्बाइन (M8 Carbine) को आज डिफेंस एक्सपर्ट सेना की राइफलों का असली ‘बाप’ कह रहे हैं।  3 साल में 50,000 राइफलों का फैसला पलटा दुनिया की सबसे आधुनिक और ताकतवर मानी जाने वाली अमेरिकी सेना अपनी बंदूकों को बदलने और अपग्रेड करने के मामले में हमेशा बेहद सख्त रही है. लेकिन इस बार उसने जो बड़ा फैसला लिया है, उसने वैश्विक डिफेंस सेक्टर को हैरान कर दिया है. महज तीन साल पहले जिस M7 राइफल को भविष्य का सबसे विध्वंसक हथियार घोषित कर बेड़े में शामिल किया गया था, अमेरिकी सेना अब उससे दूरी बनाने जा रही है।  तकरीबन 50,000 M7 राइफलों की डिलीवरी लेने के बाद भी US आर्मी इसे नए हथियार से रिप्लेस कर रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह रही, युद्ध के मैदान और ट्रेनिंग कैंपों में तैनात अमेरिकी सैनिकों का प्रैक्टिकल फीडबैक. वजन ज्यादा होने और लंबाई की वजह से सैनिकों को ऑपरेशन्स के दौरान काफी दिक्कतें आ रही थीं. अब US आर्मी इसकी जगह नई, हल्की और अत्याधुनिक M8 कार्बाइन को अपने बेड़े में शामिल करने जा रही है, जिसकी पहली तैनाती इसी साल दिसंबर में उत्तर कैरोलिना स्थित फोर्ट ब्रैग से शुरू होने जा रही है।  M8 कार्बाइन का खौफनाक पावर्स सैनिकों की शिकायतों के बाद, हथियार निर्माता कंपनी सिग सॉयर और अमेरिकी सेना ने मिलकर M7 के डिजाइन में तेजी से सुधार किए. इसी का नतीजा है नई M8 कार्बाइन, जिसे पहले XM8 नाम दिया गया था।      1 पाउंड हल्की और 3.5 इंच छोटी: M8 का खाली वजन केवल 3.3 किग्रा है और सप्रेसर और हीट शील्ड के साथ ये 4 किग्रा की रहती है. ये M7 से करीब आधा किलो हल्की है. वहीं इसकी बैरल भी M7 से करीब 3.5 इंच छोटी बनाई गई है, जिससे अर्बन वॉरफेयर में मूव करना आसान हो जाता है।      घातक 6.8 मिमी कारतूस: साइज छोटा होने के बावजूद M8 के कारतूस में कोई समझौता नहीं किया गया है. ये वही शक्तिशाली 6.8×51mm कारतूस फायर करती है, जो M7 करती थी।      एर्गोनॉमिक्स और फ्री-फ्लोटिंग हैंडगार्ड: M8 में M-LOK फ्री-फ्लोटिंग हैंडगार्ड दिया गया है जो बैरल को बिना छुए ग्रिप देता है, जिससे लगातार फायरिंग के दौरान बैरल का तापमान राइफल की सटीकता पर असर नहीं डालता. साथ ही, फिक्स्ड स्टॉक की वजह से रीकॉइल कंट्रोल बहुत बेहतर हो जाता है।  3,180 किमी/घंटा स्पीड और ‘स्मार्ट कंप्यूटर’ स्कोप     तूफानी रफ्तार : इसकी मजल वेलोसिटी करीब 3,180 किलोमीटर प्रति घंटा है. इसका मतलब है कि ट्रिगर दबाते ही गोली 1 सेकेंड से भी कम समय में 500 मीटर से ज्यादा की दूरी तय कर लेती है।     750 राउंड प्रति मिनट की स्पीड: ये सेलेक्ट-फायर मोड पर काम करती है, जिससे सैनिक इसे सिंगल शॉट या फुली-ऑटोमैटिक मोड में 600 से 750 राउंड प्रति मिनट की दर से चला सकते हैं।      M157 फायर कंट्रोल सिस्टम: M8 राइफल की सबसे बड़ी ताकत इसका M157 फायर कंट्रोल सिस्टम है. ये सिर्फ एक साधारण दूरबीन या स्कोप नहीं है, बल्कि 1.21 किग्रा का एक ‘स्मार्ट कंप्यूटराइज्ड स्कोप’ है. इसमें 1x से 8x जूम, लेजर रेंजफाइंडर, बैलिस्टिक कैलकुलेटर, हवा और तापमान मापने वाले सेंसर और इन्फ्रारेड ऐमिंग लेजर लगे हैं. ये स्कोप हवा और दूरी का खुद हिसाब लगाकर सिपाही की स्क्रीन पर बिल्कुल सही निशाना दिखाता है, जिससे 600 मीटर दूर बैठे दुश्मन पर भी पहला शॉट अचूक लगता है।  2027 के बजट से M7 का पत्ता साफ ‘डिफेंस न्यूज’ के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने वित्तीय वर्ष 2027 के अपने बजट प्रस्ताव में 14,944 नई M8 कार्बाइन खरीदने की मांग रखी है, जबकि नई M7 राइफलों के लिए एक भी रुपया नहीं मांगा गया है।  3 साल में 50,000 M7 राइफलें खरीदने के बाद M8 पर शिफ्ट होना ये साबित करता है कि कागजों पर कोई हथियार कितना भी ताकतवर क्यों न दिखे, अगर युद्ध के मैदान में सिपाही उसे आसानी से इस्तेमाल नहीं कर पा रहा, तो वह बेकार है. M8 कार्बाइन के आने से पैदल सेना को एक ऐसा हथियार मिल गया है जो हल्का भी है, तेज भी और 600 मीटर दूर बैठे दुश्मन को पलक झपकते ही ढेर करने का दम रखता है। 

विधायकों के विरोध के बावजूद भोपाल में रजिस्ट्री महंगी करने की तैयारी, कॉलोनियों में बढ़ेंगी दरें

भोपाल  भोपाल में कलेक्टर गाइडलाइन में पिछले दरवाजे से दरवृद्धि की फिर से तैयारी है। इस बार 200 से अधिक क्षेत्र मर्ज करने की तैयारी की जा रही है। मुख्य मार्ग से जोड़ने से अंदरूनी क्षेत्रों में दर 40 फीसदी तक बढ़ जाएगी। यहां रजिस्ट्री महंगी होगी। प्रशासन दो साल से सीधे दरों में बढ़ोतरी के साथ क्षेत्रों की संख्या घटाकर अप्रत्यक्ष रूप से भी रजिस्ट्री महंगी कर रहा है। 2025 में तो 1000 क्षेत्रों को मर्ज कर दिया था। इससे कई क्षेत्रों में 200 फीसदी तक बढ़ोतरी हो गई थी। यहां के क्षेत्र मर्ज करेंगे अयोध्या बायपास से जुड़े 40 क्षेत्रों को मुख्यमार्ग व अंदरूनी क्षेत्रों की मर्जिंग होगी। इसके साथ संतनगर मुख्यमार्ग के 32 क्षेत्रों को अंदरूनी क्षेत्रों से जोड़ा जा रहा। रातीबढ़ से लेकर नीलबड़, कलखेड़ा, बरखेड़ा नाथू में मुख्यमार्ग से 600 मीटर अंदर तक के क्षेत्र की एक समान दर की जा रही। यहां 18 क्षेत्र मर्ज करेंगे। कोलार रोड के साथ सनखेड़ी मास्टर प्लान रोड से अंदर वाले क्षेत्र मुख्यमार्ग से जोड़े जा रहे। ये भी 35 क्षेत्र है। ऐसे होगा असर क्षेत्रों को मर्ज करने की इस नीति का सबसे बड़ा नुकसान मध्यमवर्गीय और आम गृह खरीदारों पर पड़ेगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी मुख्य मार्ग की गाइडलाइन दर 4,000 प्रति वर्गफीट है और उसके अंदर स्थित कॉलोनी की दर 2,500 प्रति वर्गफुट थी, तो विलय के बाद कॉलोनी के अंदरूनी मकान की दर भी 4,000 प्रति वर्ग फुट मानी जाएगी। जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य भले ही कम हो, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में दरें मुख्य मार्ग के बराबर होने से स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क का बोझ सीधा खरीदार की जेब पर पड़ेगा। विरोध भी बेअसर कलेक्टर गाइडलाइन तय करने के लिए आयोजित होने वाली जिला मूल्यांकन समिति की बैठकों में स्थानीय विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने लगातार इस नीति का कड़ा विरोध किया है। विधायकों का तर्क रहा है कि मुख्य मार्ग और अंदरूनी क्षेत्रों का व्यावसायिक और आवासीय मूल्य कभी एक समान नहीं हो सकता। ये है स्थिति 2024: 3900 क्षेत्रों के आधार पर 25 से 95 फीसदी दरवृद्धि की थी 2025 में 2885 क्षेत्रों के आधार पर दरें तय की थी। 18 फीसदी बढ़ोतरी तय की थी। 2026 में अब 2680 क्षेत्र करने की स्थिति

आज का राशिफल 10 अक्टूबर 2026: इन राशियों के लिए शुभ रहेगा शनिवार, नौकरी-बिजनेस में मिल सकती है सफलता

मेष राशि- आज आपका दिन ठीक रहेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। कामकाज में पहले से बेहतर स्थिति बन सकती है। व्यापार में कोई नया काम शुरू करने का विचार आ सकता है। प्रेम और संतान से जुड़े मामले मध्यम रहेंगे। किसी काम में मन थोड़ा कम लगेगा। छोटी-मोटी परेशानी हो सकती है, लेकिन किसी बड़े नुकसान के संकेत नहीं हैं। लाल वस्तु पास रखना शुभ होगा। वृषभ राशि- आज मन थोड़ा परेशान रह सकता है। मानसिक तनाव बढ़ सकता है। प्रेम संबंधों में छोटी बात पर तू-तू, मैं-मैं हो सकती है। विद्यार्थियों के मन में असमंजस रहेगा कि क्या करें और क्या न करें। आज कोई महत्वपूर्ण फैसला लेने से बचें। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। व्यापार की स्थिति अच्छी रहेगी। काली जी को प्रणाम करना शुभ होगा। मिथुन राशि- आज घर में किसी बात को लेकर मनमुटाव हो सकता है। कोई बड़ा विवाद नहीं होगा, लेकिन एक-दूसरे की बात गलत समझने की स्थिति बन सकती है। भूमि, भवन या वाहन की खरीदारी में अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। काम में देरी होगी, लेकिन काम पूरा होगा। व्यापार अच्छा चलेगा। काली जी को प्रणाम करना शुभ होगा। कर्क राशि- आज स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। प्रेम और संतान से जुड़े मामलों में दिन अच्छा रहेगा। व्यापार की स्थिति अभी सामान्य रहेगी। न ज्यादा फायदा दिख रहा है और न कोई बड़ा नुकसान। कुल मिलाकर स्थिति न्यूट्रल रहेगी। बाकी मामलों में पहले से बेहतर स्थिति बन सकती है। लाल वस्तु पास रखना शुभ होगा। सिंह राशि- आज धन हानि से बचकर रहें। निवेश करने से अभी बचना बेहतर होगा। स्वास्थ्य पहले से बेहतर रहेगा। प्रेम और संतान से जुड़े मामले मध्यम रहेंगे। व्यापार की स्थिति अच्छी रहेगी। पैसों से जुड़े किसी फैसले में जल्दबाजी न करें। सूर्य को जल देना शुभ होगा। कन्या राशि- आज घबराहट और बेचैनी बनी रह सकती है। मन में उत्साह रहेगा, लेकिन ऊर्जा का स्तर थोड़ा कम रहेगा। प्रेम और संतान से जुड़े मामलों में दिन अच्छा रहेगा। व्यापार भी अच्छा चलेगा। काम को लेकर ज्यादा दबाव न लें। शनि देव को प्रणाम करना शुभ होगा। तुला राशि- आज सिर दर्द और आंखों से जुड़ी परेशानी हो सकती है। खर्च बढ़ने से मन थोड़ा परेशान रहेगा। किसी अज्ञात डर या चिंता की स्थिति भी बन सकती है। हालांकि स्वास्थ्य पहले से बेहतर रहेगा। प्रेम और संतान के मामले मध्यम रहेंगे। व्यापार अच्छा चलेगा। शनि देव को प्रणाम करना शुभ होगा। वृश्चिक राशि- आज आय के नए रास्ते खुल सकते हैं। पुराने स्रोतों से भी धन लाभ होगा। स्वास्थ्य पहले से बेहतर रहेगा। प्रेम और संतान से जुड़े मामलों में स्थिति अच्छी रहेगी। व्यापार बहुत अच्छा चलेगा। यात्रा में ज्यादा मजा नहीं आएगा, लेकिन यात्रा लाभ देने वाली रहेगी। सूर्य को जल देना शुभ होगा। धनु राशि- आज व्यापार में थोड़ी शिथिलता रहेगी। हालांकि नुकसान के संकेत नहीं हैं। पिता के स्वास्थ्य पर ध्यान दें। अपने स्वास्थ्य को लेकर भी लापरवाही न करें। प्रेम और संतान से जुड़े मामले मध्यम रहेंगे। कामकाज में धैर्य से आगे बढ़ें। बजरंगबली को प्रणाम करना शुभ होगा। मकर राशि- आज भाग्य के भरोसे कोई काम बनता हुआ नहीं दिख रहा है। हालांकि स्थिति नकारात्मक नहीं है। यात्रा बहुत अच्छी नहीं रहेगी। अपमानित होने का थोड़ा भय रह सकता है, इसलिए संभलकर रहें। प्रेम, संतान और व्यापार से जुड़े मामले बहुत अच्छे रहेंगे। काली जी को प्रणाम करना शुभ होगा। कुंभ राशि- आज चोट-चपेट लग सकती है। किसी परेशानी में पड़ने से बचें। परिस्थितियां थोड़ी प्रतिकूल रहेंगी, इसलिए संभलकर आगे बढ़ें। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। प्रेम और संतान से जुड़े मामले बहुत अच्छे रहेंगे। व्यापार भी अच्छा चलेगा। गणेश जी को प्रणाम करना शुभ होगा। मीन राशि- आज निजी जीवन में मन नहीं लगेगा। स्वास्थ्य भी थोड़ा मध्यम रहेगा। प्रेम और संतान से जुड़े मामलों में उत्साह कम रहेगा। मन थोड़ा बुझा-बुझा रह सकता है। व्यापार लगभग ठीक चलेगा। ज्यादा चिंता करने से बचें। शिवजी का जलाभिषेक करना शुभ होगा।

जयपुर में डिजिटल शासन पर मंथन, पूर्वोत्तर के 8 राज्यों के प्रतिनिधिमंडल ने समझी राजस्थान की तकनीक

जयपुर  राजस्थान में संचालित डिजिटल परियोजनाओं और तकनीकी व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के लिए शुक्रवार को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों का 33 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जयपुर स्थित भामाशाह डेटा सेंटर पहुंचा। केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में संयुक्त सचिव (डिजिटल गवर्नेंस) एवं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी  नंद कुमारम के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने यहां आयोजित कार्यशाला में भाग लिया। इस दौरान डिजिटल सेवाओं के विस्तार, तकनीकी संसाधनों के बेहतर उपयोग और राज्यों के बीच अनुभव साझा करने पर विचार-विमर्श किया गया। दो दिवसीय अध्ययन दौरे में असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के 25 अधिकारी तथा राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के आठ अधिकारी शामिल हुए। कार्यशाला में प्रतिनिधिमंडल को भामाशाह डेटा सेंटर, नेटवर्क संचालन केंद्र, सुरक्षा संचालन केंद्र, राजस्थान राज्यव्यापी क्षेत्र नेटवर्क (आरस्वान) और राजनेट की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों ने इन व्यवस्थाओं के तकनीकी पहलुओं और अन्य राज्यों में इनके उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की। कार्यशाला को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव (डिजिटल गवर्नेंस) एवं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी  नंद कुमारम ने कहा कि डिजिटल शासन की सफलता केवल किसी राज्य की आर्थिक स्थिति या उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर नहीं करती। इसके लिए मजबूत तकनीकी व्यवस्था, स्पष्ट कार्ययोजना और विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में पहले से संचालित सफल डिजिटल परियोजनाओं के अनुभवों का लाभ उठाकर नई व्यवस्थाओं को कम समय और बेहतर संसाधन प्रबंधन के साथ लागू किया जा सकता है।  नंद कुमारम ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की भूमिका केवल तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा सहित अन्य विभागों की सेवाओं पर भी पड़ता है। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में ई-ऑफिस व्यवस्था को ब्लॉक स्तर तक विस्तारित करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे वहां प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और आमजन की समस्याओं के समाधान में सहायता मिलेगी। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी  नंद कुमारम ने परिवार आधारित डिजिटल डेटाबेस की उपयोगिता बताते हुए कहा कि इससे सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की सही पहचान करने और लाभ वितरण में त्रुटियां कम करने में मदद मिलती है। उन्होंने समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के डिजिटल विश्लेषण को भी महत्वपूर्ण बताया, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में सामने आने वाली जनसमस्याओं की पहचान कर संबंधित विभागों तक समय पर जानकारी पहुंचाई जा सके।  नंद कुमारम ने डेटा सेंटर जैसी तकनीकी सुविधाओं के बेहतर उपयोग पर जोर देते हुए पूर्वोत्तर राज्यों के लिए आपदा की स्थिति में राजस्थान के डेटा सेंटर को वैकल्पिक केंद्र के रूप में उपयोग करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल परियोजनाओं को लागू करने से पहले उनकी लागत, समयसीमा, आवश्यक मानव संसाधन और अपेक्षित लाभ का स्पष्ट आकलन किया जाना चाहिए। साथ ही, तकनीकी संस्थानों की क्षमता बढ़ाने और विभिन्न विभागों के अनुभवी अधिकारियों को जोड़ने पर भी जोर दिया। कार्यशाला में सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग के तकनीकी निदेशक  अखिलेश मित्तल सहित अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित रहे दो दिवसीय अध्ययन दौरे के दूसरे दिन शनिवार, 10 अक्टूबर को प्रतिनिधिमंडल योजना भवन स्थित आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय में जन आधार योजना की कार्यप्रणाली का अध्ययन करेगा। इसके बाद अधिकारी सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क 181 का दौरा कर जनशिकायतों के पंजीकरण, निगरानी और समाधान की डिजिटल व्यवस्था की जानकारी प्राप्त करेंगे।  

बिहार में जाली करेंसी का अंतरराज्यीय नेटवर्क उजागर, सिलीगुड़ी से जुड़ा कनेक्शन; दो आरोपी फरार

 जोकीहाट (अररिया)  सीमांचल के अररिया जिले में जाली नोटों (एफआईसीएन) के अवैध कारोबार की जड़ें पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से लेकर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक फैली नजर आ रही हैं। महलगांव थाना क्षेत्र में बीते पांच अक्टूबर को 500 रुपये के 434 जाली नोटों (कुल दो लाख 17 हजार रुपये) के साथ पकड़े गए वार्ड सदस्य मो. पनाउल्लाह उर्फ पनबुल से पुलिस रिमांड और सघन पूछताछ में एक बड़े अंतरराज्यीय जाली करेंसी सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। तफ्तीश में यह सनसनीखेज सच सामने आया है कि जाली नोटों की खेप किसी स्थानीय प्रिंटर से नहीं निकली थी, बल्कि इसे पश्चिम बंगाल के रणनीतिक शहर सिलीगुड़ी से विशेष सौदे के तहत खरीदा गया था। 1 लाख असली दो, 3 लाख जाली लो पुलिस पूछताछ में वार्ड सदस्य पनाउल्लाह ने कबूल किया है कि इस पूरे सौदे की मुख्य कड़ी उसका करीबी साथी मो. आफताब था, जो फिलहाल फरार चल रहा है। आफताब ही पनाउल्लाह को सिलीगुड़ी लेकर गया था। वहां सिलीगुड़ी के एक शातिर जाली नोट तस्कर आलम से उसकी गोपनीय मुलाकात कराई गई। आफताब ने कराई थी आलम से डील सिलीगुड़ी में एक लाख रुपये की असली भारतीय करेंसी देकर तीन लाख रुपये के उच्च गुणवत्ता वाले 500-500 के जाली नोट हासिल किए गए थे। बरामद खेप में से ₹83,000 की राशि या तो आफताब के पास थी या उसे पहले ही कहीं ट्रायल के रूप में खपाया जा चुका था, जिसकी गहनता से छानबीन की जा रही है। ग्रामीण हाट-बाजारों और खुदरा दुकानों में खपाने की थी साजिश पनाउल्लाह ने स्वीकार किया कि इस नकली करेंसी को अररिया, जोकीहाट और आसपास के ग्रामीण हाट-बाजारों, पशु मेलों, गल्ला मंडियों और छोटी खुदरा दुकानों में खपाने की पूरी तैयारी कर ली गई थी। ग्रामीण इलाकों में 500 रुपये के नोटों की सूक्ष्म सुरक्षा विशेषताओं (Security Features) की जांच के लिए मशीनें नहीं होती हैं, जिसका फायदा उठाकर यह गिरोह आसानी से जाली नोटों को बाजार में उतार देता था। पुलिस अब इस बात का पता लगा रही है कि क्या पनाउल्लाह और आफताब इससे पहले भी ऐसी कोई खेप सिलीगुड़ी से लाकर सीमांचल के बाजारों में खपा चुके हैं। इसके लिए पनाउल्लाह के सभी सक्रिय बैंक खातों के लेन-देन, यूपीआई विवरण और मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिपोर्ट (सीडीआर) का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है। रातों-रात अमीर बनने की हवस पुलिस जांच में सामने आया है कि पनाउल्लाह कम समय में अकूत संपत्ति बनाने के फेर में जाली नोटों के इस काले साम्राज्य में उतरा था। हाल के दिनों में उसकी माली हालत में तेजी से बदलाव आया था। उसने जोकीहाट के बरडेंगा में जमीन खरीदकर एक पक्का मकान खड़ा कर लिया था, जिसे वह ग्रामीणों के सामने अपनी ‘कामत’ (कृषि फार्म हाउस) बताता था। बरडेंगा में बना लिया पक्का मकान पनाउल्लाह का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला गया है। वर्ष 2019 में भी महलगांव थाने में उसके खिलाफ चोरी का संगीन मामला दर्ज हुआ था, जिसमें पुलिस ने उसके घर पर छापेमारी कर चोरी का सामान बरामद किया था। सिलीगुड़ी रूट से बांग्लादेश कनेक्शन की आशंका सिलीगुड़ी का इलाका नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के समीप 'चिकन नेक' कॉरिडोर में पड़ता है। पूर्व में भी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और बीएसएफ द्वारा सिलीगुड़ी कॉरिडोर से बांग्लादेशी जाली नोट गिरोहों के कई मॉड्यूल पकड़े जा चुके हैं। ऐसे में भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं और इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि कहीं बरामद जाली नोटों की खेप सीमा पार बांग्लादेश से तो तस्करी कर भारत नहीं लाई गई थी। एजेंसियों के कान खड़े महलगांव थानाध्यक्ष ब्रजेश कुमार ने बताया कि मामले की कड़ियां तेजी से जोड़ी जा रही हैं। फरार चल रहे मुख्य बिचौलिए मो. आफताब और सिलीगुड़ी के सप्लायर आलम की गिरफ्तारी के लिए विशेष पुलिस टीम लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। उनकी गिरफ्तारी के बाद ही इस सिंडिकेट के अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पूरी तरह खुलासा हो सकेगा।  

ऑस्ट्रेलिया का बॉल टेंपरिंग कांड कैसे पकड़ा गया? कैमरे के जूम ने खोली बेनक्रॉफ्ट की पोल

नई दिल्ली  दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज की शुरुआत के साथ ही बॉल टेंपरिंग की घटना एक बार फिर चर्चा में है। ऑस्ट्रेलियाई टीम इससे पहले जब दक्षिण अफ्रीका पहुंची थी, तब कंगारू खिलाड़ियों ने मैच जीतने के लिए बॉल टेंपरिंग की थी। इससे ऑस्ट्रेलियाई टीम की बहुत बदनामी हुई थी। हालांकि, हैरान करने ववाली बात यह है कि ब्रॉडकास्टर ने बॉल टेंपरिंग का खुलासा गलती से किया था। फुटबॉल और रग्बी मैच कवर करने की आदत के कारण उन्होंने क्रिकेट में भी गेंद पर कैमरा बनाए रखा और बाद में जूम भी किया। इसी वजह से बेनक्राफ्ट के हाथ में सैंडपेपर दिखा। इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम की काली करतूत सामने आई। केप टाउन टेस्ट के ब्रॉडकास्टर एल्विन नाइकर ने बताया था कि ऑस्ट्रेलियाई टीम की बॉल टेंपरिंग पकड़े जाना एक संयोग ही था। बीबीसी के अनुसार उन्होंने कहा, 'ऑस्ट्रेलियाई टीम जिस तरह से पकड़ी गई, वह सरासर संयोग था। रग्बी और फुटबॉल का प्रसारण बहुत सुनियोजित होता है। पहले कैमरा एक और दो चालू होते हैं, फिर जब खेल रुक जाता है तो क्लोज-अप शॉट्स के जरिए पूरी कहानी दिखाई जाती है।' ऐसा ही क्रिकेट मैच में किया गया तो बॉल टेंपरिंग पकड़ी गई। हथेली पर गेंद घिसकर पकड़े गए बेनक्राफ्ट नैकर ने बताया कि 2018 की सीरीज खराब माहौल में शुरू हुई थी। पहले दो टेस्ट मैचों में गड़बड़ियों के बावजूद स्थानीय प्रसारक ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की बॉल टेंपरिंग पर नजर नहीं रख रहे थे। उन्होंने कहा, 'किसी ने भी मुझे कुछ नहीं बताया। डरबन में पहले टेस्ट में जमकर बवाल हुआ था। इसके बाद पोर्ट एलिजाबेथ में दूसरे टेस्ट मैच में भी हंगामा हुआ। हमें तब भी कुछ समझ नहीं आया। गेंद विकेटकीपर के पास गई, फिर बैनक्रॉफ्ट के पास और वह गेंद को चमका रहे थे। पहले गेंद उसकी पैंट पर थी, फिर अगली गेंद पर, कैमरामैन का ध्यान बैनक्रॉफ्ट पर इसलिए रुका रहा, क्योंकि वह गेंद को अपनी पैंट पर नहीं, बल्कि अपनी हथेली पर रगड़ रहे थे।' बड़े लेंस में सामने आई सच्चाई नैकर ने कहा, 'जब उसने गेंद फेंकी, तो उसने अपना हाथ जेब में डाला। कैमरामैन ने बड़े-बड़े लेंस वाले कैमरे से जेब पर जूम किया। स्लो-मो ऑपरेटर ने उसे देखा, आगे-पीछे किया फिर जूम किया और सैंडपेपर नजर आया। इसके बाद बेनक्राफ्ट ने सैंडपेपर पैंट में छिपा लिया। इस घटना को ब्रॉडकास्टर ने बार-बार स्क्रीन पर दिखाया। जब बैनक्रॉफ्ट ने स्क्रीन पर देखा तो उसने उसे निकालकर अपनी अंडरवियर में रख लिया। कैमरामैन ने इसे रिकॉर्ड कर लिया। फिर भी यह लाइव नहीं था, हमने रिप्ले चलाया।' तीनों खिलाड़ियों पर लगा बैन इस घटना के बाद स्मिथ एक लाइव टेलीविजन इंटरव्यू के दौरान फूट-फूटकर रो पड़े और उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की। हालांकि, इसके बाद उन पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट से 12 महीने का बैन लगाया गया। इसके साथ ही उनसे कप्तानी भी छीन ली गई। वार्नर पर भी इसी तरह 12 महीने का बैन लगाया गया और उन्हें ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में कभी भी कप्तान बनने से रोक दिया गया। वहीं, बैनक्रॉफ्ट पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट से 9 महीने का बैन लगा दिया गया। इसमें हैरान करने वाली बात यह थी कि किसी भी गेंदबाज पर कोई एक्शन नहीं हुआ, जबकि गेंदबाज ही सबसे ज्यादा गेंद के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में यह कैसे संभव था कि किसी भी गेंदबाज को बॉल टेंपरिंग के बारे में जानकारी नहीं थी

हरियाणा के किसानों की बदली तस्वीर, पराली नहीं जलाई; सरकार दे रही ₹1,200 प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि

कैथल सरकार की तरफ से चलाई जा रही फसल अवशेष प्रबंधन योजना किसानों को अब रास आने लगी है। जिले में अब तक 60 हजार एकड़ में धान फसल की कटाई हो चुकी है, लेकिन एक भी किसान ने धान अवशेष नहीं जलाएं हैं। धान कटते ही किसान बेलर से अवशेषों की गांठें बनवा रहे हैं, जो फैक्टरी में भेजी जा रही है। इससे किसान को भी फायदा हो रहा है और जमीन की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ रही है। बता दें पिछले साल जिले में कुल 11 लोकेशन सामने आई थी। 13 अक्टूबर को पहली लोकेशन धान अवशेष की मिली थी, लेकिन इस बार राहत की बात ये है की 60 हजार एकड़ में धान कटाई होने के बाद भी किसी किसान ने अवशेष नहीं जलाए हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की टीम ने किया कैथल जिले का दौरा जिले में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के मुख्य वैज्ञानिक प्रवीण गुप्ता ने कैथल जिले का दौरा किया। उन्होंने कई ब्लाकों में कृषि विभाग के साथ धान अवशेष प्रबंधन को लेकर खेतों का दौरा किया। कई भी इस तरह की लोकेशन नहीं मिली है की खेतों में धान अवशेष जलाए जा रहे हो। बता दें कि जिले में धान अवशेष जलाने से रोकने के लिए कुल 629 टीमों का गठन किया हुआ है, ये टीमें गांव-गांव जाकर किसानों को धान अवशेष जलाने से रोकने बारे जागरूक कर रही हैं। इसके साथ-साथ धान अवशेष खेतों में मिलाने के फायदे भी बताए जा रहे हैं। 60 हजार किसानों ने किया साढ़े चार लाख एकड़ का पंजीकरण : मलिक कृषि विभाग के कार्यकारी अभियंता जगदीश मलिक ने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन योजना किसानों को अब रास आ रही है। किसान इस योजना से जुड़कर धान अवशेष खेतों में जलाने की बजाए इसका प्रबंधन करने में लगे हैं। इस बार 60 हजार किसानों ने साढ़े चार लाख एकड़ का पंजीकरण मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर करवाया है। धान अवशेष न जलाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 1200 रुपये की राशि सरकार की तरफ से दी जा रही है। अब तक 60 हजार एकड़ में धान कट चुका हैं, लेकिन एक भी किसान ने धान अवशेष नहीं जलाए हैं। पिछले साल 11 लोकेशन सामने आई थी। वहीं 48 हजार किसानों को 50 करोड़ की राशि योजना के तहत दी गई थी। पूरे जिले का एक बार सर्वे हो चुका है, एक भी लोकेशन धान अवशेष की सामने नहीं आई है।