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कबीर के दोहे से बदली जिंदगी: तानों से निकलकर भारतीय क्रिकेट टीम तक पहुंचे लोकेंद्र आर्य

बड़वानी ‘गांव वाले पिताजी से कहते कि तेरा ये लंगड़ा लड़का खुद तो किसी काम का नहीं है, हमारे बच्चों को भी बिगाड़ रहा है। पिताजी मुझे डांटते, घर से बाहर जाने के लिए मना करते।’ यह कहना है बाएं पैर से दिव्यांग लोकेंद्र आर्य का। उनका सिलेक्शन दिव्यांग क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ऑफ इंडिया (DCCBI) की इंडिया-ए टीम में हुआ है। वह 13 से 15 जून तक हरियाणा के यमुनानगर में होने वाले केसरी दिव्यांग टूर्नामेंट-2026 में इंडिया-ए की ओर से मैदान में उतरेंगे। सिलेक्शन के बाद लोग बधाई देने घर आ रहे हैं। मिठाई खिला कर फूल माला पहनाकर स्वागत कर रहे हैं। पिता रूमा आर्य पेशे से किसान हैं। बड़वानी जिले में सेंधवा के मोरदड़ गांव पहुंची। यहां लोकेंद्र और पिता से बात करके उनका सफर जानने की कोशिश की। क्रिकेट खेलने पर हंसी उड़ाते थे लोग यहां टीले पर बने कच्चे मकान के सामने बड़ा सा शामियाना लगा है। चारपाई के साथ 20-25 कुर्सियां रखी हैं। घर के बाहर फूलों की मालाएं और गुलदस्ते लिए किसी का इंतजार कर रहे हैं। इतने में घर के अंदर से एक 27 साल का युवक एक पैर से लंगड़ाते हुए बाहर आया। माला और गुलदस्ता लिए खड़े लोग उसे एक-एक कर माला पहनाते और फोटो खिंचवाने लगता है। ये वही लोग हैं, जो इसे कभी लंगड़ा कहकर चिढ़ाते थे। उसके पिता से कहते- ऐसा बेटा पैदा किया है, किसी काम का नहीं है। ये क्या करेगा। दाएं हाथ के बल्लेबाज लोकेंद्र वर्तमान में दिव्यांग क्रिकेट एसोसिएशन मध्यप्रदेश की सतपुड़ा डिवीजन (ग्रामीण) टीम के कप्तान हैं। बचपन में लोगों ने उनके पैरों की कमजोरी को लेकर ताने दिए थे। क्रिकेट खेलने पर हंसी उड़ाते थे, लेकिन उन्होंने इन बातों को अपनी ताकत बनाया। लोग बोलते- हमारे बच्चों को बिगाड़ देगा लोकेंद्र कहते हैं कि इस मुकाम पर पहुंचने के लिए मैंने क्या कुछ नहीं सुना और सहा है, ये मैं ही जानता हूं। लोगों के तानों से परेशान होकर पिताजी बचपन में ही विकलांग आश्रम में छोड़ आए थे। वे भी क्या करते, ताने और घर के हालत ऐसे नहीं थे कि मेरी इलाज और पढ़ाई के साथ देखभाल कर पाते। सोचता था कि जिंदगी ऐसे ही कट जाएगी। क्रिकेट खेलने का शौक, तो तीन-चार साल की उम्र से ही था। खड़ा तो ठीक से हो नहीं पाता था, लेकिन प्लास्टिक का बैट जरूर अपने पास ही रखता था। थोड़ा बड़ा हुआ, तो लकड़ी के पल्ले को बैट बना लिया। अपने गांव के हम उम्र बच्चों के साथ खेलना शुरू कर दिया। तब गांव वाले पिताजी से कहते कि तेरा ये लंगड़ा लड़का खुद तो किसी काम का नहीं है, हमारे बच्चों को भी बिगाड़ रहा है। पिताजी भी मुझे डांटते, घर से बाहर जाने के लिए मना करते। छोटा था, इसलिए कुछ समझ नहीं पाता था। आश्रम से मिली नई राह और जिंदगी विकलांग सेवा आश्रम में शुरुआती दिन मुश्किल से कटे। हर पल मां की याद आती थी। सोचता था, मेरा पैर ऐसा क्यों है? क्यों मैं अपने दोनों छोटे भाइयों की तरह अपने घर में रह सकता। आश्रम पहुंचा, तो वहां सीनियर्स को क्रिकेट खेलते देखा। मन को तसल्ली हुई। धीरे-धीरे अपने दोस्तों के साथ मैं भी क्रिकेट खेलने लगा। वहां जो हमारे वार्डन थे, वो हमेशा मोटिवेट करते। जितनी पढ़ाई करना हो करो, जितना खेलना हो खेलो। कबीर के दोहे ने दी प्रेरणा आश्रम में हम लोग प्रार्थना भी करते थे। कबीर ग्रंथावली का एक दोहा है- मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीत। कहै कबीर हरि पाइए, मन ही की परतीति॥ पहले तो इस दोहे को ऐसे ही दोहरा लेते थे। लेकिन, जब इसका अर्थ समझ आया, तो अमल करना शुरू कर दिया। सोच लिया कि अब किसी भी हालत और कीमत में अपने आपको और अपने मन को कभी हारने नहीं देना है। लोकेंद्र कहते हैं कि 2021 में विश्व दिव्यांग दिवस पर दिव्यांग क्रिकेटर टीम के कप्तान ब्रजेश द्विवेदी के बारे में पता चला। उनके बारे में जानकारी हासिल की तो पता चला वे IIT इंदौर में नौकरी करते हैं। दो-तीन दिन बाद उनसे मिलने IIT इंदौर पहुंच गया। उन्हें क्रिकेट को लेकर अपने जुनून के बारे में बताया। उन्होंने मेरा ट्रायल कराया। इसके कुछ महीने बाद ही खास तौर से हमारे लिए सतपुड़ा डिवीजन के नाम से टीम बन गई। चंदे से खरीदी पहली किट शुरुआत में लेदर बॉल से खेलने के दिक्कत हुई। किट भी नहीं थी। दोस्तों ने चंदा जमा कर किट की व्यवस्था की। शुरुआत में सेंधवा के किला परिसर स्थित मंडी में डामर सड़क पर खेले। इसके बाद निवाली के खेल परिसर में प्रैक्टिस करना शुरू किया। आज भी यहां से हर शनिवार रविवार को सेंधवा से 20 किमी दूर निवाली मैच खेलने जाते हैं। तीन साल पहले मेरी शादी हुई। आईटीआई करने के बाद बीए कर रहा हूं। बेटी को खेलते देख मिलता है सुकून तीन साल पहले 22 मार्च 2023 को टिकेश्वरी से शादी हुई। एक बेटी है। जब बेटी होने वाली थी, उस समय मन में डर था। लगता था कि कहीं बच्चा भी मेरी तरह तो नहीं होगा। ऐसे में पत्नी का समय समय डॉक्टरों से उपचार ओर जांच करवाते रहे। खुशी होती है, जब अपनी बेटी को सभी बच्चों के साथ अच्छे से खेलता देखता हूं।

पहले वनडे में भारतीय टीम का दमदार प्रदर्शन, अफगानिस्तान पर आसान जीत

धर्मशाला  भारतीय टीम ने अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में धमाकेदार शुरुआत की है। बारिश से प्रभावित मुकाबले में अफगानिस्तान ने गुरबाज की शतकीय पारी की बदौलत 25 ओवर में 194 रन बनाए। इसके जवाब में भारतीय टीम ने 13 गेंद शेष रहते मैच अपने नाम किया। भारत ने पहले वनडे में 22.5 ओवर में तीन विकेट खोकर 195 रन बनाए। टीम के लिए कप्तान शुभमन गिल ने सर्वाधिक 84 रन बनाए। अफगानिस्तान के लिए जिया उर रहमान और राशिद खान ने 1-1 विकेट लिया। भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला धर्मशाला के मैदान पर खेला जा रहा है। अफगानिस्ता ने बारिश से प्रभावित मैच में भारत के सामने 195 रनों का टारगेट रखा है। लक्ष्य का पीछा करते हुए रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई है। दोनों के बीच पहले विकेट के लिए 46 रन की साझेदारी हुई। रोहित रन आउट हुए। उन्होंने 16 गेंद में 16 रन बनाए। ईशान किशन ने 22 गेंद में 34 रन बनाए। श्रेयस अय्यर ने 15 गेंद में 12 रन बनाए। कप्तान शुभमन गिल ने 66 गेंद में 11 चौके और दो छक्के की मदद से 84 रन बनाए। केएल राहुल ने 19 गेंद में नाबाद 39 रन बनाए। भारत ने टॉस जीतकर बैटिंग चुनी और अफगानिस्तान को 24.5 ओवर में 194 रनों पर समेट दिया। भारत की ओर से डेब्यूटेंट हर्ष दुबे और गुरनूर बराड़ ने तीन-तीन विकेट चटकाए। अर्शदीप सिंह और नीतीश कुमार रेड्डी ने दो-दो विकेट लिए। बारिश के कारण टॉस में तीन घंटे 45 की देरी हुई, जिसकी वजह से मैच 25-25 ओवर का कर दिया गया। अफगानिस्तान की शुरुआत खराब रही। अफगानिस्तान ने पांच ओवर के पावरप्ले में 27 रन जोड़े और तीन विकेट गंवाए। गुरनूर ने दूसरे ओवर में इब्राहिम जादरान (1) का शिकार किया। अर्शदीप सिंह ने तीसरे ओवर में सेदिकुल्लाह अटल (0) और पांचवें ओवर में रहमत शाह (4) को अपने जाल में फंसाया। गुरबाज ने ऐतिहासिक शतक ठोका इसके बाद, रहमानुल्लाह गुरबाज ने मोर्चा संभाला और ऐतिहासिक शतक जमाया। उन्होंने 51 गेंदों में 8 चौकों और 8 छक्कों की मदद से 102 रनों की पारी खेली। उन्होंने 48 गेंदों में शतक कंप्लीट किया। वह अफगानिस्तान के लिए सबसे तेज वनडे शतक लगाने वाले प्लेयर बन गए हैं। गुरबाज ने कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी के संग चौथे विकेट के लिए 116 रनों की साझेदारी की। गुरबाज को नीतीश कुमार रेड्डी ने 16वें ओवर में बोल्ड किया। हर्ष दुबे ने 17वें ओवर में शाहिदी को आउट किया। कप्तान ने 30 गेंदों में 27 रन बटोरे, जिसमें तीन चौके हैं। हर्ष ने 22वें ओवर में अजमतुल्लाह उमरजई (16 गेंदों में 26) और अल्लाह गजनफर (0) को पवेलियन की राह दिखाई। गुरनूर ने 25वें ओवर में राशिद खान (13 गेंदों में 9) और जिया उर रहमान शरीफी (4) को आउट कर अफगानिस्तान की पारी को समेटा। हम्मद सलीम सफी एक रन बनाकर नाबाद रहे। रोहित शर्मा ने रचा इतिहास टीम इंडिया इस सीरीज से अगले साल होने वाले वनडे वर्ल्ड कप की तैयारी शुरू कर रही है। भारत की कमान शुभमन गिल के पास है जबकि अफगानिस्तान की बागडोर हशमतुल्लाह शाहिदी के हाथों में हैं। दिग्गज बल्लेबाज रोहित शर्मा पर सभी की नजरें रहेंगी। सीरीज में 'हिटमैन' की मैच फिटनेस की परीक्षा होगी। उन्हें आईपीएल के दौरान मांसपेशियों में खिंचाव के कारण कई मैचों में बाहर बैठना पड़ा था। वह साथ ही मैदान पर उतरते ही भारत के लिए खेलने वाले सबसे उम्रदार खिलाड़ी बन गए हैं। रोहित 39 साल और 44 दिन के हैं। उन्होंने मोहिंदर अमरनाथ (29 साल और 36 दिन) का 37 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ डाला। स्टार क्रिकेटर विराट कोहली और हार्दिक पांड्या अनफिट होने के कारण सीरीज से बाहर हैं। भारत: 195/3 (22.5 ओवर) अफगानिस्तान: 194/10 (24.5 ओवर) भारत की प्लेइंग XI: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, केएल राहुल, श्रेयस अय्यर, ईशान किशन (विकेटकीपर), वॉशिंगटन सुंदर, नीतीश कुमार रेड्डी, हर्ष दुबे, गुरनूर बराड़, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा। अफगानिस्तान की प्लेइंग XI: इब्राहिम जादरान, रहमानुल्लाह गुरबाज (विकेटकीपर), सेदिकुल्लाह अटल, रहमत शाह, हशमतुल्लाह शाहिदी (कप्तान), अजमतुल्लाह उमरजई, मोहम्मद नबी, राशिद खान, मोहम्मद सलीम सफी, अल्लाह गजनफर, जिया उर रहमान शरीफी।

बिहार में अतिक्रमण पर जीरो टॉलरेंस: सम्राट चौधरी बोले- बड़ा हो या छोटा, कार्रवाई तय

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में चल रहे बुलडोजर ऐक्शन पर दो-टूक कहा कि अतिक्रमण है तो तोड़ा ही जाएगा। लोगों द्वारा उनकी तुलना उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से किए जाने के सवाल पर भी उन्होंने बखूबी अंदाज में जवाब दिया। मीडिया ने सीएम से पूछा कि क्या आप दूसरे योगी आदित्यनाथ हैं? इस पर बिहार सीएम ने कहा- मेरा नाम सम्राट चौधरी है। उनके इस बयान की चर्चा सियासी गलियारों में होने लगी है। दरअसल, केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के अवसर पर पटना में शुक्रवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को पटना में मीडिया संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। भाषण की समाप्ति के बाद सीएम ने विभिन्न पत्रकारों से अनौपचारिक रूप से बातचीत की। इस दौरान पत्रकारों ने उनसे बिहार में अतिक्रमण हटाने को लेकर चल रहे बुलडोजर ऐक्शन वाले अभियान पर सवाल किया। इस पर उन्होंने कहा कि मेरा नाम सम्राट चौधरी है। राज्य में जहां भी अतिक्रमण है, चाहे वह किसी उद्योगपति का हो या बड़े व्यक्ति का, उसे तोड़ा ही जाएगा। बुलडोजर बाबा और योगी मॉडल… जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने लगभग दो दशक तक बिहार की सत्ता के मुखिया रहने के बाद 14 अप्रैल को सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके अगले दिन, सम्राट चौधरी ने बिहार में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पहले सीएम के रूप में शपथ ली थी। सम्राट के शपथग्रहण के दिन भी पटना स्थित लोकभवन के बाहर बुलडोजर बाबा जिंदाबाद के नारे लगाए थे। इससे पहले लगभग 5 महीने तक सम्राट, नीतीश सरकार में गृह मंत्री रहे। पुलिस और कानून-व्यवस्था की कमान हाथ में आने के बाद सम्राट चौधरी ने राज्य भर में अतिक्रमण के खिलाफ सख्त मुहिम छेड़ रखी थी। अब सम्राट खुद सीएम बन गए तो उन्होंने गृह विभाग अपने पास ही रखा। राज्य भर में जगह-जगह बुलडोजर ऐक्शन जारी है। विपक्ष इसकी आलोचना भी करता रहा है और बिहार में योगी मॉडल लागू होने का आरोप लगाता रहा है। वहीं, सम्राट चौधरी लगातार अधिकारियों को सख्त निर्देश दे रहे हैं कि अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाए। इसके लिए राज्यवापी अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने सख्त लहजे में कह दिया है कि अतिक्रमण करने वाला कितना भी बड़ा आदमी क्यों ना हो, प्रशासन कार्रवाई जरूर करेगा। दूसरी ओर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी सीमावर्ती जिलों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की पूरी रणनीति बना चुके हैं। उस पर भी प्रशासन काम कर रहा है।

जमशेदपुर रेलवे प्रोजेक्ट: टाटानगर को मिलेगा हाईटेक वंदे भारत कोचिंग डिपो

जमशेदपुर  टाटानगर रेलवे स्टेशन पर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के रख-रखाव और नए कोचिंग डिपो के विस्तार की योजना अंतिम चरण में पहुंच गई है। दक्षिण-पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल ने इस पूरी परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। 383.78 करोड़ रुपये की लागत वाली यह महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल रेलवे बोर्ड के पास प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी के लिए विचाराधीन है। दक्षिण पूर्व रेलवे ने सूचना के अधिकार के तहत रेलवे पैसेंजर कमेटी के सदस्य शशांक शेखर स्वाई को यह जानकारी दी है। वर्तमान में टाटानगर रेलवे स्टेशन से ट्रेन नंबर 20893/ 21893 / 21895 टाटा-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस, 20891 टाटानगर – ब्रह्मपुर वंदे भारत एक्सप्रेस चलती है। इसके अलावा 20898 रांची-हावड़ा और 20872 हावड़ा-राउरकेला वंदे भारत एक्सप्रेस टाटानगर से होकर गुजरती है। कोचिंग डिपो का होगा स्थानांतरण प्रस्ताव के मुताबिक, टाटानगर स्टेशन के मौजूदा कोचिंग डिपो को स्थानांतरित (रि-लोकेट) किया जाएगा। नए स्थान (लोको कालोनी) पर अत्याधुनिक और पूर्ण बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। इस नए डिपो का मुख्य उद्देश्य अत्याधुनिक वंदे भारत ट्रेन सेटों का सुचारू रूप से मेंटेनेंस और तकनीकी परीक्षण सुनिश्चित करना है। जमशेदपुर को मिलेगा बड़ा फायदा इस हाईटेक डिपो के निर्माण से टाटानगर स्टेशन की क्षमता में भारी इजाफा होगा। भविष्य में जमशेदपुर से अन्य रूटों पर भी नई वंदे भारत ट्रेनें शुरू होने का रास्ता साफ हो जाएगा। इसके अलावा, डिपो के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। चक्रधरपुर मंडल के अधिकारियों के अनुसार, रेलवे बोर्ड से हरी झंडी मिलते ही इस परियोजना के लिए टेंडर की प्रक्रिया और धरातल पर काम शुरू कर दिया जाएगा।  

बिहार पुलिस में सुधार: फील्ड पुलिसिंग मजबूत करने को जोनल ढांचा फिर बनेगा

पटना सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसके तहत पुरानी जोनल व्यवस्था को फिर से लागू किया जाएगा, जिसे 7 साल पहले खत्म कर दिया गया था। इसके बाद राज्य में फील्ड पुलिसिंग को अलग-अलग रेंज में बांटा गया था। अब फिर से बिहार के 12 पुलिस रेंज को जोन में बांट दिया जाएगा। फील्ड पुलिसिंग को सुदृढ़ करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जोनल सिस्टम फिर से लागू करने को लेकर पुलिस मुख्यालय से प्रस्ताव तैयार कर गृह विभाग को भेजा गया था जिसे मंजूरी मिलने की बात कही जा रही है। बहुत जल्द इसे लागू कर दिया जाएगा। नई व्यवस्था में पहले की तरह ही चार जोन बनाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, उसमें कुछ सुधार की भी संभावना है। अभी हैं 12 पुलिस रेंज बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव जुलाई 2019 में किया गया था, तब 4 जोन को खत्म कर सिर्फ रेंज रहने दिया गया था। बेगूसराय को नया रेंज बनाकर तत्कालीन 11 रेंज को बढ़ाकर 12 कर दिया गया था। वर्तमान रेंज के जिलों की बात करें तो पटना रेंज में पटना और नालंदा, मगध रेंज में गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद और अरवल जिले शामिल हैं। भागलपुर रेंज में भागलपुर, बांका और नवगछिया पुलिस जिला शामिल है। वहीं, तिरहुत रेंज में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर और वैशाली जिले आते हैं। कोसी रेंज में सहरसा, सुपौल और मधेपुरा हैं। पूर्णिया रेंज में पूरा सीमांचल यानी पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जिले आते हैं। मुंगेर रेंज में मुंगेर, जमुई, लखीसराय और शेखपुरा, तो बेगूसराय रेंज में बेगूसराय एवं खगड़िया जिले शामिल हैं। इन सभी रेंज में आईजी रैंक के अधिकारियों की तैनाती की जाती है। 2019 से पहले थे 4 जोन बिहार पुलिस में जोन की व्यवस्था 37 साल तक चली। 1982 में जोनल सिस्टम को लागू किया गया था। कुल चार जोन बनाए गए थे। पटना, भागलपुर, कोसी और तिरहुत जोन हुआ करते थे। जुलाई 2019 तक यही व्यवस्था थी और कुल 11 रेंज को तत्कालीन चार जोन में बांटा गया था। रेंज में डीआईजी जबकि जोन में आईजी बैठते थे। तत्कालीन भागलपुर जोन की बात करें तो उस समय इस जोन में भागलपुर और मुंगेर रेंज के 9 जिले शामिल थे। भागलपुर के अंतिम आईजी विनोद कुमार थे।

गाय के असामान्य व्यवहार से फैली भीड़, जांच में हाइपोग्लाइसीमिया की पुष्टि

श्रीवस्ती यूपी श्रावस्ती जिले के बसभरिया पुरैना गांव में एक गाय का असामान्य व्यवहार पिछले एक सप्ताह तक लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। गाय लगातार सात दिनों तक एक खेत में चक्कर लगाती रही, जिससे उसे देखने के लिए आसपास ही नहीं बल्कि दूर-दराज के इलाकों से भी लोगों की भीड़ उमड़ने लगी। सोशल मीडिया पर इसके वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने और अधिक तूल पकड़ लिया। हालांकि पशु चिकित्सकों की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि गाय किसी चमत्कार के कारण नहीं, बल्कि एक बीमारी की वजह से ऐसा व्यवहार कर रही थी। 7 दिनों से खेत के चक्कर लगा रही थी गाय ग्रामीणों के अनुसार गाय ने शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे खेत में घूमना शुरू किया था। इसके बाद वह रुक-रुक कर लगातार सात दिनों तक उसी खेत में परिक्रमा करती रही। गाय के इस व्यवहार को देखकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कई लोगों ने इसे चमत्कार मान लिया और खेत में पहुंचकर गाय की पूजा-अर्चना करने लगे। कुछ श्रद्धालुओं ने तो स्वयं भी खेत की परिक्रमा शुरू कर दी। गाय के दर्शन के लिए पहुंचने लगे लोग गांव में लगातार बढ़ती भीड़ के कारण स्थिति को नियंत्रित करना मुश्किल होने लगा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के चलते प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग गांव पहुंच रहे थे, जिससे स्थानीय लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस ने भी स्थिति पर नजर रखनी शुरू कर दी। उधर, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में पशु चिकित्सा विभाग की टीम गांव पहुंची और गाय की जांच की। उत्तर प्रदेश के जिला श्रावस्ती में गाय पिछले 8 दिन से एक ही खेत के लगातार चक्कर लगा रही थी। लोगों ने चमत्कार मानकर पूजा–अर्चना शुरू कर दी। गाय की तरह लोगों ने भी खेत की परिक्रमा शुरू कर दी।      सर्रा बीमारी से पीड़ित निकली गाय डॉक्टरों ने बताया कि गाय ‘सर्रा’ यानी हाइपोग्लाइसीमिया नामक बीमारी से पीड़ित है। इस बीमारी के कारण पशु असामान्य व्यवहार करने लगते हैं और लगातार एक ही दिशा में घूमने जैसी गतिविधियां कर सकते हैं। टीम ने गाय का उपचार शुरू कर दिया और उसकी स्थिति पर निगरानी रखी। आठवें दिन पुलिस मौके पर पहुंची और अनावश्यक भीड़ को हटाने के लिए लोगों को समझाया। इसके बाद गाय को उसके मालिक के सुपुर्द कर दिया गया। साथ ही परिवार को भी निर्देश दिए गए कि घटना को लेकर भीड़ इकट्ठा न होने दें। डॉक्टर बोले- धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी गाय पशु चिकित्सकों का कहना है कि उपचार के बाद गाय धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी। हालांकि विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बावजूद कई लोग अब भी इस घटना को चमत्कार या किसी विशेष संकेत के रूप में देख रहे हैं। फिलहाल गांव में हालात सामान्य हैं और लोग गाय के पूरी तरह स्वस्थ होने का इंतजार कर रहे हैं।

सीएम योगी का बयान: कृषि और विज्ञान भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत रहे हैं

लखनऊ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि कृषि प्रधान देश भारत का किसान हमेशा से नवाचारी रहा है और खेती किसानी में नए प्रयोग कर कृषि योग्य भूमि की उत्पादक क्षमता बढ़ाने और उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर करने में दिलचस्पी जाहिर करता रहा है। यही कारण है कि भारत में कृषि क्षेत्र कभी घाटे का सौदा नहीं रहा है। योगी ने अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन शनिवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय में विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कहा, पहले किसान केवल किसान नहीं था, बल्कि वह इनोवेटर था। कृषि कभी घाटे का सौदा नहीं था। उस समय का किसान स्वयं नवाचार करता था। हमारा व्यापारी केवल व्यापारी नहीं था, बल्कि वह देश को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी था। हमारी अर्थव्यवस्था खेती-बाड़ी से जुड़ी हुई थी, जो अपने उत्पादों को दुनिया भर में पहुंचाने का काम करती थी। भारत एक कृषि प्रधान देश माना जाता है। हमारी सबसे बड़ी ताकत एमएसएमई और कृषि क्षेत्र था। विज्ञान का मतलब ही लोक कल्याण सीएम योगी विज्ञान का मतलब ही लोक कल्याण है। दुनिया के अंदर जिस भी देश ने प्रगति की है, उसके पास विज्ञान का यही भाव था। आधुनिक विज्ञान का कुल समय चार से पांच सौ साल का रहा है। भारत की प्राचीन गौरवशाली परंपरा का अध्ययन करें तो पता चलता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 से 45 प्रतिशत थी। चार सौ साल पहले भी लगभग 24-25 प्रतिशत हिस्सेदारी हमारी थी, लेकिन स्वतंत्रता के समय हम डेढ़ से दो प्रतिशत पर आ गए थे। हमें यह देखना होगा कि ऐसा क्यों हुआ। मुख्यमंत्री ने जगदीश चंद्र बसु की दो पौधों वाली कहानी का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवों में ही नहीं, जड़-पौधों में भी चेतना होती है। उन्होंने बचपन में अपनी मां द्वारा पौधे लगाए जाने का जिक्र किया और कहा कि ज्ञान जहां से भी आए, उसका स्वागत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले कारीगरों को बदहाल बना दिया गया था, उनके बनाए उत्पादों को बेकार बताया गया था, परिणामस्वरूप वे बाजारों से बाहर हो गए थे। 2017 के बाद एक जिला एक उत्पाद दिया जोर सीएम योगी ने कहा, 2017 के बाद हमने 'एक जिला एक उत्पाद' शुरू करके डिजाइन और पैकेजिंग पर जोर दिया। बाजार से कारीगरों को जोड़ने का काम किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में विशेषकर बुजुर्गों की स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिये लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 200 बिस्तरों वाले सात मंजिला अत्याधुनिक 'नेशनल सेंटर फॉर एजिंग' का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद कार्यदायी संस्था के अभियंताओं को युद्धस्तर पर कार्य कर प्राथमिकता के आधार पर समय से पहले निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए।

औद्योगिक विकास पर बड़ा प्लान: बिहार में स्टार्टअप और इंडस्ट्री को मिलेगा 30 दिन में क्लियरेंस

पटना बिहार में इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई योजनाएं ला रही है. इस बीच आज मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में इंवेस्टमेंट को लेकर बड़ी जानकारी दी. सीएम सम्राट ने कहा, बिहार में 85 प्रतिशत लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं. देश के किसी भी कोने में आप कश्मीर से कन्याकुमारी तक चले जाएं सबसे अच्छी ग्रामीण सड़क आपको बिहार में ही मिलेगी. शहरी इलाकों में भी सड़कों को बेहतर बनाया जा रहा. 12 नई टाउनशिप से आएगा 6.5 लाख करोड़ का निवेश सीएम सम्राट ने यह भी कहा कि आज से 30-40 साल पहले प्रतियोगिता दर्पण में यह सामान्य ज्ञान हुआ करता था कि एशिया की सबसे बड़ी कॉलोनी कंकड़बाग, पटना है. हमलोग 12 नई टाउनशिप विकसित कर रहे हैं इसके लिए 6 लाख 25 हजार एकड़ भूमि पर काम शुरू किया जा रहा है. जिसमें 6.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश आने वाला है. विकसित होने वाले 12 टाउनशिप में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, इंडस्ट्रियल पार्क भी विकसित किया जाएगा. इसमें जिन लोगों की जमीन अधिग्रहित होगी उन्हें सरकार उचित मुआवजा देगी. हमने कहा है कि किसी व्यक्ति की जमीन टाउनशिप क्षेत्र में आती है और उनके घर में अगर बेटी की शादी है या वह किसी भी विपदा से जूझ रहे हैं तो वे डीएम को आवेदन दें. उनके खाते में मुआवजे की राशि तत्काल भेजी जाएगी ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है. उद्योग या स्टार्टअप के लिए 30 दिनों के अंदर क्लियरेंस मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए पिछले कैबिनेट की बैठक में निर्णय लिया है. पहले ऐसी व्यवस्था थी कि आवेदन देने के बाद भी नगर निगम और अग्निशमन में आवेदन लंबित रहते थे. अब हमने ऐसी व्यवस्था बनाई है कि उद्योग या स्टार्टअप लगाने के लिए आवेदन देने के 30 दिनों के अंदर क्लियरेंस मिलेगा. इस तरह से बिहार में युवाओं को बंपर रोजगार मिल सकेगा. जमीन अधिग्रहण को लेकर दिखे सख्त इससे पहले सीएम सम्राट चौधरी ने बिहार की विकास योजनाओं को लेकर भी कड़ा आदेश दिया था. खासकर उद्योग और टाउनशिप की जमीन को लेकर वे सख्त दिखे. उन्होंने स्पष्ट कहा कि जमीन अधिग्रहण को लेकर अगर कहीं भी बाधा आ रही है तो उसे तुरंत दूर किया जाए. इस तरह से उन्होंने जमीन अधिग्रहण से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को निर्धारित समय-सीमा के अंदर पूरा कराने का अधिकारियों को निर्देश दिया है.

लर्निंग गैप भरने की पहल: परिषदीय और कस्तूरबा विद्यालयों में शुरू होगा विशेष शिक्षण कार्यक्रम

 लखनऊ अब परिषदीय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में कोई भी बच्चा पढ़ाई में पीछे नहीं छूटेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (एनसीएफएसई) के अनुरूप प्रदेश सरकार जुलाई से विशेष ‘कैच-अप शिक्षण’ अभियान शुरू करने जा रही है। इससे विद्यार्थियों के सीखने के अंतर (लर्निंग गैप) को भरना है जो नियमित कक्षाओं के बावजूद अपेक्षित अधिगम स्तर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। सभी डायट प्राचार्यों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को अपर मुख्य सचिव बेसिक और माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत जुलाई में सभी विद्यालयों में 15 दिवसीय पुनरावृत्ति शिक्षण अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद अगस्त से जनवरी 2027 तक प्रतिदिन 20 से 30 मिनट का अतिरिक्त कैच-अप शिक्षण कराया जाएगा। कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों का फॉर्मेटिव असेसमेंट कराया जाएगा। इसके आधार पर उनकी जरूरतों के अनुसार समूह बनाए जाएंगे और अलग-अलग शिक्षण योजनाएं तैयार की जाएंगी। नई अवधारणाओं को विद्यार्थियों को दैनिक जीवन और स्थानीय अनुभवों से जोड़कर पढ़ाया जाएगा ताकि सीखना आसान और स्थायी बन सके। विद्यालयों में बिग बुक, वार्तालाप कार्ड, पोस्टर, पुस्तकालय की किताबें, गणित किट और स्थानीय स्तर पर तैयार शिक्षण सामग्री का उपयोग बढ़ाया जाएगा। भाषा शिक्षण में पहले दो अक्षरों वाले शब्द, फिर छोटे वाक्य और उसके बाद अनुच्छेद पढ़ाने की रणनीति अपनाई जाएगी। गणित को खेल आधारित बनाया जाएगा। किसी बच्चे को नहीं कहा जाएगा कमजोर कैच-अप शिक्षण में पहले शिक्षक उदाहरण देंगे, फिर विद्यार्थियों के साथ अभ्यास करेंगे और अंत में बच्चे स्वयं कार्य करेंगे। पीयर लर्निंग, पेयर लर्निंग और कोआपरेटिव लर्निंग जैसी विधियों का भी प्रयोग होगा। भाषा खेल, कहानी, चित्र आधारित गतिविधियां, रोल प्ले, स्किट और प्रतियोगिताओं के माध्यम से पढ़ाई को रोचक बनाया जाएगा। किसी भी विद्यार्थी को कमजोर या पीछे होने का एहसास नहीं कराया जाएगा। अतिरिक्त कक्षाओं को सकारात्मक शैक्षिक सहयोग के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। कार्य पुस्तिकाओं और नोटबुक की नियमित जांच होगी तथा गलतियों को दंड नहीं बल्कि सीखने का अवसर माना जाएगा।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट राहत: श्रीलंका ऑपरेशन पवन सैनिक को पूर्ण पेंशन लाभ

चंडीगढ़ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने ऑपरेशन पवन के दौरान श्रीलंका में तैनात एक सैनिक को बड़ी राहत देते हुए सशस्त्र बल अधिकरण (एएफटी) के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें सैनिक को सामान्य विकलांगता पेंशन के बजाय वॉर इंजरी पेंशन देने और उसकी 50 प्रतिशत विकलांगता को 75 प्रतिशत मानकर पेंशन का लाभ प्रदान करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऑपरेशनल एरिया में आतंकवादियों की तलाश के दौरान लगी चोट को सैन्य सेवा से असंबद्ध नहीं माना जा सकता। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ केंद्र सरकार द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। केंद्र सरकार ने एएफटी के 29 मार्च 2022 के आदेश को चुनौती दी थी। मामला भारतीय सेना की पैरा रेजीमेंट में तैनात रहे नायक नाहर सिंह से जुड़ा है जो ऑपरेशन पवन के दौरान श्रीलंका में भारतीय शांति सेना के हिस्से के रूप में तैनात थे।केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सैनिक की बाईं आंख में लगी चोट पेड़ों की झाड़ियों और शाखाओं के टकराने से हुई थी। सरकार का तर्क था कि सैनिक को डयूटी के दौरान अधिक सावधानी बरतनी चाहिए थी, इसलिए इस चोट को युद्धजनित या सैन्य सेवा से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी चोट नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार एक ऐसे सैनिक की चोट को सैन्य सेवा से जोड़ने से इंकार कर रही है, जो ऑपरेशनल एरिया के जंगलों में आतंकवादियों की तलाश कर रहा था। अदालत ने कहा कि सैनिक को “परफोरेटिंग इंजरी लेफ्ट आई” नामक गंभीर चोट उसी दौरान लगी, जब वह सरकार के आदेश पर ऑपरेशन पवन के तहत सैन्य दायित्व निभा रहा था। ऐसे में यह चोट न केवल सैन्य सेवा से संबंधित है, बल्कि वास्तविक सैन्य कर्तव्य के निर्वहन के दौरान हुई है।खंडपीठ ने केंद्र सरकार की 31 जनवरी 2001 की नीति का हवाला देते हुए कहा कि सरकार द्वारा अधिसूचित विशेष सैन्य अभियानों के दौरान होने वाली मृत्यु या विकलांगता श्रेणी-ई के अंतर्गत आती है और ऐसे मामलों में वॉर इंजरी पेंशन देय होती है। कोर्ट ने एएफटी के फैसले को सही ठहराया ऑपरेशन पवन इसी श्रेणी में शामिल है।अदालत ने विकलांगता के प्रतिशत को 50 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत मानने के एएफटी के फैसले को भी सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि नाहर सिंह भर्ती के समय पूरी तरह स्वस्थ थे और सेवा के दौरान ही उन्हें यह विकलांगता हुई, इसलिए वॉर इंजरी पेंशन तथा 75 प्रतिशत विकलांगता के आधार पर लाभ देने में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। परिणामस्वरूप केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी गई।