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चटगांव में क्रिकेटर से कथित बदसलूकी पर BCB ने जांच की मांग की

नई दिल्ली बांग्लादेश क्रिकेट में उस समय हड़कंप मच गया, जब स्टार स्पिनर नईम हसन ने पुलिस पर मारपीट और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए. 25 वर्षीय क्रिकेटर का दावा है कि चटगांव में पुलिसकर्मियों ने ना सिर्फ उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, बल्कि उन्हें डंडों और प्लास्टिक पाइप से पीटा. इस घटना के सामने आने के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) से लेकर देश के कई मौजूदा और पूर्व क्रिकेटरों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक नईम हसन शुक्रवार रात ढाका से चटगांव लौट रहे थे, वह ढाका प्रीमियर डिवीजन क्रिकेट लीग में प्राइम बैंक क्रिकेट क्लब से जुड़े कार्यक्रम के बाद अपने घर जा रहे थे. इसी दौरान लालखान बाजार इलाके के पास उनकी सीएनजी ऑटो-रिक्शा को कुछ पुलिसकर्मियों ने रोक लिया. नईम का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें रोकने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया. इसके बजाय अधिकारियों ने शुरुआत से ही आक्रामक रवैया अपनाया और उनके साथ बदसलूकी शुरू कर दी. नईम हसन के अनुसार पुलिसकर्मियों ने उनका गला पकड़ लिया और जबरन उन्हें दूसरे ऑटो-रिक्शा में बैठाकर थाने ले जाने की कोशिश की. उन्होंने बताया कि आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को समझाने की कोशिश की कि वह बांग्लादेश की राष्ट्रीय टीम के क्रिकेटर हैं, लेकिन अधिकारियों ने किसी की बात नहीं सुनी. नईम ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'मैं लगातार उन्हें बता रहा था कि मैं राष्ट्रीय क्रिकेटर हूं, लेकिन उन्होंने मेरी बात सुनने से इनकार कर दिया. उन्होंने मुझे डंडों और प्लास्टिक पाइप से पीटा. जब थाने पहुंचकर मैंने अपनी पहचान बताई, तब भी मेरे साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया.' नईम हसन ने पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बताते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, 'अगर वे वास्तव में मुझे हिरासत में लेना चाहते थे, तो मुझे पुलिस वाहन में ले जाना चाहिए था मुझे एक सामान्य सीएनजी में बैठाने की कोशिश क्यों की गई. मैं चाहता हूं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सजा मिले.' चटगांव मेट्रोपॉलिटन पुलिस के डिप्टी कमिश्नर आमिरुल इस्लाम ने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है. उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआती जानकारी से ऐसा प्रतीत होता है कि ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों ने कार्रवाई के दौरान तय नियमों और प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन नहीं किया. आमिरुल ने कहा, 'हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं, अगर कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. नईम हसन को न्याय दिलाना हमारी जिम्मेदारी है.' नईम के सपोर्ट में उतरे मुश्फिुकर रहीम घटना के बाद बांग्लादेश क्रिकेट जगत में नाराजगी की लहर दौड़ गई. अनुभवी विकेटकीपर बल्लेबाज मुशफिकुर रहीम ने सोशल मीडिया पर नईम हसन के समर्थन में पोस्ट करते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्रीय खिलाड़ी के साथ ऐसा व्यवहार पूरी तरह अस्वीकार्य है. कई पूर्व क्रिकेटरों और खेल प्रशासकों ने भी इस घटना की आलोचना करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने आधिकारिक बयान जारी कर घटना पर गहरी चिंता जताई है. बोर्ड ने कहा कि राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ी के साथ इस तरह का व्यवहार न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि पूरी तरह अस्वीकार्य भी है. बीसीबी ने संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए दोषियों को जल्द से जल्द सजा देने की अपील की है. क्रिकेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ बांग्लादेश ने भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है. नईम हसन हाल ही में जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाले एकमात्र टेस्ट मैच के लिए बांग्लादेश की 15 सदस्यीय टीम में चुने गए हैं. ऐसे में यह घटना सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गई है, बल्कि राष्ट्रीय टीम की तैयारियों पर भी असर डाल सकती है. 2018 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले नईम अब तक बांग्लादेश के लिए 14 टेस्ट मैच खेल चुके हैं, जिसमें उन्होंने 48 विकेट झटके.

मानव हस्तक्षेप से प्रभावित अरावली क्षेत्र की जैव विविधता में गिरावट

 उदयपुर  उदयपुर संभाग के जंगलों में आज भले ही तेंदुए, सियार और जंगली सूअर बड़ी संख्या में दिखाई दे रहे हों, लेकिन एक सदी पहले मेवाड़ के वन बाघ, शेर, चीता और जंगली कुत्तों जैसे शीर्ष वन्यजीवों की शरणस्थली थे। जयसमंद वन्यजीव अभयारण्य पर किए गए एक शोध अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि मानव हस्तक्षेप, जंगलों के विखंडन और प्राकृतिक वन्यजीव गलियारों के टूटने से क्षेत्र की जैव विविधता में भारी गिरावट आई है। शोध के अनुसार जयसमंद और आसपास का क्षेत्र कभी बाघ, शेर, चीता, भेड़िया, जंगली कुत्ता, काला हिरण, चिंकारा, चीतल, सांभर और नीलगाय जैसे वन्यजीवों से समृद्ध था। उस समय अरावली के जंगल पाली के गोरमघाट और कमलीघाट से लेकर मध्यप्रदेश तक फैले हुए थे, जिससे वन्यजीवों का आवागमन निर्बाध बना रहता था। शिकार और जंगलों की कटाई बनी बड़ी वजह विशेषज्ञों के अनुसार राजशाही काल में बड़े पैमाने पर शिकार और बाद के वर्षों में बढ़ते मानव दबाव ने वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचाया। खेती के विस्तार, खनन गतिविधियों, सड़क निर्माण और आबादी बढ़ने से वन क्षेत्र छोटे-छोटे हिस्सों में बंट गए। इसका सीधा असर उन प्रजातियों पर पड़ा जिन्हें बड़े और निरंतर जंगलों की आवश्यकता होती है। कई प्रजातियां हुईं स्थानीय रूप से विलुप्त शोध में बताया गया है कि बाघ, शेर, चीता, जंगली कुत्ता और काला हिरण जैसी कई प्रजातियां जयसमंद क्षेत्र से स्थानीय रूप से विलुप्त हो चुकी हैं। वर्ष 2005 से 2009 के बीच किए गए अध्ययन में केवल 21 स्तनधारी प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें से बड़ी संख्या कम या दुर्लभ श्रेणी में पाई गई। वर्तमान में तेंदुआ और जंगली सूअर का दबदबा हाल ही में उदयपुर संभाग की वन्यजीव गणना के अनुसार वर्तमान में जंगली सूअर 515, सियार 251, जरख 173 और तेंदुए 57 दर्ज किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेंदुए जैसे अनुकूलनशील वन्यजीव बदलते परिवेश में खुद को ढालने में सफल रहे हैं, जबकि कई संवेदनशील प्रजातियां लगातार सिमटती जा रही हैं। कॉरिडोर बचाने की जरूरत वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि फुलवारी की नाल, जयसमंद, सज्जनगढ़ और कुंभलगढ़ के बीच प्राकृतिक वन्यजीव कॉरिडोर का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में जैव विविधता पर और गंभीर खतरा मंडरा सकता है। शोधकर्ताओं ने वन्यजीव आवासों की सुरक्षा, मानव हस्तक्षेप में कमी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया है।  

रांची-रामगढ़ समेत कई हाईवे पर जलभराव रोकने के लिए सफाई और मरम्मत शुरू

रांची  बरसात के मौसम को देखते हुए एनएचएआई ने झारखंड के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह दुरुस्त करने को लेकर अभियान चलाया है. इस क्रम में सड़कों के रखरखाव और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम किया गया. एनएचएआई ने रांची-रामगढ़ मार्ग सहित रांची-जमशेदपुर मार्ग, रांची-डाल्टनगंज मार्ग और अन्य प्रमुख राजमार्गों पर ड्रेनेज सिस्टम की सफाई और मरम्मत का काम शुरू कराया है. जल भराव रोकने के लिए किए जा रहे कार्य यातायात को निर्बाध रखने के लिए साइड ड्रेन, बॉक्स कल्वर्ट और क्रॉस-ड्रेनेज संरचनाओं की सफाई की जा रही है, ताकि बरसात के पानी की तेजी से निकासी की व्यवस्था हो सके. इसके अलावा, राजमार्गों पर जल जमाव वाले और संवेदनशील स्थलों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है. इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि भारी बारिश के दौरान भी यातायात प्रभावित न हो और यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न झेलनी पड़े. साथ ही, इन मार्गों पर सड़क सुरक्षा से जुड़े आवश्यक सुधार कार्य भी किए जा रहे हैं. एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी का बयान इस मानसून अभियान को लेकर एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी संतोष कुमार आर्य ने कहा कि मानसून के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध यातायात बनाये रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी की जा रही हैं, जिससे बारिश के दिनों में भी यात्रियों का सफर सुरक्षित रहेगा.

कर्वी में भारी वाहनों पर प्रतिबंध, श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम

 चित्रकूट  प्रभु श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में सोमवार को पड़ रही सोमवती अमावस्या पर करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम यातायात और मूलभूत सुविधाओं के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। वहीं कर्वी नगर में भारी और मध्यम मालवाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाते हुए विस्तृत रूट डायवर्जन योजना लागू कर दी गई है। अच्छी वर्षा और सुख-समृद्धि की कामना लेकर श्रद्धालु कामदगिरि की परिक्रमा करेंगे और मां मंदाकिनी में पवित्र स्नान करेंगे। भीषण गर्मी को देखते हुए रामघाट क्षेत्र में बड़े टेंट लगाकर छाया की व्यवस्था की जा रही है। परिक्रमा और पैदल मार्गों पर मैट और कारपेट बिछाए जा रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को गर्म जमीन से राहत मिल सके। कर्वी नगर में भारी एवं मध्यम मालवाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा बैठने और विश्राम के लिए अलग-अलग स्थानों पर छायादार स्थल बनाए गए हैं, जबकि पेयजल, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी ने परिक्रमा मार्ग पर पड़ी निर्माण सामग्री को तत्काल हटाने के निर्देश भी दिए हैं। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए 14 जून प्रातः 5:30 बजे से 16 जून मध्यरात्रि तक कर्वी नगर में भारी एवं मध्यम मालवाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके बाद 17 जून से अगले 30 दिनों तक निर्धारित समयावधि में नो-एंट्री व्यवस्था लागू रहेगी। प्रयागराज, कौशांबी, बांदा और सतना की ओर से आने वाले भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं। वहीं जानकीकुंड और सतना की ओर जाने वाले हल्के वाहनों के लिए भी अलग डायवर्जन प्लान बनाया गया है, ताकि मेले के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

500 यूनिट से ज्यादा खपत पर बढ़ेगा बिजली बिल, दिल्ली उपभोक्ताओं को झटका

नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी में बिजली के बिल बढ़ने वाले हैं, इसका सीधा असर हजारों विद्युत उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) ने बिजली वितरण कंपनियों को 'फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज' (FPPAS) वसूलने की अनुमति दे दी है। ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार जिसे आमतौर पर PPAC भी कहा जाता है। DERC के इस फैसले का सीधा असर उन ग्राहकों पर होगा, जो 500 यूनिट से ज्यादा बिजली खर्च करते हैं। DERC का फैसला, बढ़ जाएगा बिजली बिल दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) ने वैश्विक तनाव के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट और बिजली खरीद लागत में वृद्धि के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी बिजली बिल बढ़ाने की तैयारी कर रही है। DERC ने बिजली वितरण कंपनियों को उपभोक्ताओं से अधिक ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) वसूलने की अनुमति दे दी है अधिकारियों ने बताया कि इस फैसले का असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जो बिजली सब्सिडी योजना के दायरे में नहीं आते हैं। हालांकि पूर्ण या 50 फीसदी सब्सिडी प्राप्त करने वाले विद्युत उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा। 500 यूनिट से ज्यादा इस्तेमाल करने वालों को झटका एफपीपीएएस बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन और बिजली खरीद लागत में बदलाव के आधार पर लगाया जाने वाला अधिभार है। यह कुल ऊर्जा और स्थायी लागत के पर्सेंट के रूप में वसूला जाता है। अधिकारियों के अनुसार, हाल के समय में कोयले के आयात और परिवहन लागत बढ़ने से कोयले की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जानकारी के मुताबिक, पूर्वी और मध्य दिल्ली में BSES यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) से बिजली लेने वाले ग्राहकों के बिल में लगभग 5.7 फीसदी की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। जून से बढ़ सकता है बिजली बिल दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल), बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (बीवाईपीएल) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीीडीडीएल) ने मई में डीईआरसी से एफपीपीएएस वसूली की 10 फीसदी की सीमा में ढील देने का अनुरोध किया था। कंपनियों ने कहा था कि अप्रैल में उनकी वास्तविक बिजली खरीद लागत, 30 सितंबर 2021 के फीस आदेश में निर्धारित आधार लागत की तुलना में काफी बढ़ गई है। DERC के फैसले की बड़ी बातें     डीईआरसी के आदेश के अनुसार, अप्रैल के लिए एफपीपीएएस बीआरपीएल के मामले में 31.5 फीसदी, बीवाईपीएल के लिए 35.26 फीसदी और टाटा पावर डीडीएल के लिए 16 फीसदी रहा।     आयोग ने बिजली खरीद लागत में वृद्धि का उचित हिस्सा वसूलने में बिजली कंपनियों को हो रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए 10 फीसदी की सीमा में ढील देने का फैसला किया।     इसके तहत बीआरपीएल को अप्रैल के लिए अतिरिक्त 7.94 फीसदी और बीवाईपीएल को 7.43 फीसदी अतिरिक्त एफपीपीएएस वसूलने की अनुमति दी गई है।     टीपीडीडीएल को पूरा 16 फीसदी एफपीपीएएस वसूलने की अनुमति दी गई है।     इस आदेश के बाद अप्रैल के लिए बीआरपीएल की ओर से वसूला जाने वाला कुल एफपीपीएएस बढ़कर 17.94 फीसदी होगा     बीवाईपीएल के लिए 17.43 प्रतिशत हो गया है।     डीईआरसी ने स्पष्ट किया कि अगला आदेश जारी होने तक यह छूट मासिक आधार पर लागू रहेगी।

पीएम ई-बस योजना के तहत आईएसबीटी से इलेक्ट्रिक बसों का संचालन तय

पटना  राजधानी पटना में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत जिले में जल्द ही 200 इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन शुरू किया जाएगा। इस संबंध में शुक्रवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में परिवहन विभाग, पथ निर्माण विभाग, जिला प्रशासन और बस संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत होगा संचालन बैठक में योजना के क्रियान्वयन और बस परिचालन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना का उद्देश्य सतत और आधुनिक नगरीय परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि इस योजना से राजधानी के लोगों को बेहतर और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होगा। आईएसबीटी से शुरू होगा बसों का परिचालन जिलाधिकारी ने बताया कि पाटलिपुत्र बस टर्मिनल, बैरिया (आईएसबीटी) से 200 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। इससे पटना और आसपास के क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा में उल्लेखनीय सुधार होगा। बसों के परिचालन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अधिकारियों को समयबद्ध तैयारी के निर्देश समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सभी जरूरी तैयारियां निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया। उन्होंने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया। अनुमंडल पदाधिकारी पटना सदर, जिला परिवहन पदाधिकारी और पुलिस उपाधीक्षक को सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। यात्रियों को मिलेगी स्वच्छ और सुरक्षित यात्रा जिलाधिकारी ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और मजबूत होगी। लाखों यात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण-अनुकूल यात्रा सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही यातायात व्यवस्था में भी सुधार आएगा और लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। प्रदूषण घटेगा, हरित परिवहन को मिलेगा बढ़ावा इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से वायु प्रदूषण में कमी आएगी और हरित परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ टिकाऊ शहरी विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगी। बैठक में बस परिचालन से जुड़ी आधारभूत संरचना, यात्री सुविधाओं और यातायात प्रबंधन से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।  

14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस, एक यूनिट रक्त से बच सकती हैं कई जिंदगियां

एमसीबी : विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) : रक्तदान: जीवन बचाने का सबसे बड़ा उपहार सिर्फ एक यूनिट रक्त से बच सकती हैं तीन जिंदगियां एमसीबी रक्तदान को महादान कहा जाता है और यह केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। हर वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस ( World Blood Donor Day) मनाया जाता है। यह दिवस उन लाखों स्वैच्छिक रक्तदाताओं के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने का अवसर है, जो निस्वार्थ भाव से रक्तदान कर जरूरतमंद लोगों को नया जीवन प्रदान करते हैं। साथ ही यह दिवस सुरक्षित, पर्याप्त और नियमित रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने का भी संदेश देता है। क्यों मनाया जाता है विश्व रक्तदाता दिवस विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 2004 से विश्व रक्तदाता दिवस मनाने की शुरुआत की। 14 जून का दिन ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टीनर ( Karl Landsteiner) के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में चुना गया है। उन्होंने (ABO Blood Group System ) रक्त समूह प्रणाली की खोज की थी, जिसने रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) को सुरक्षित और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस महान खोज के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। रक्त का कोई विकल्प नहीं आज तक रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प विकसित नहीं किया जा सकता है। सड़क दुर्घटनाओं, बड़ी सर्जरी, प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, थैलेसीमिया, कैंसर, एनीमिया तथा अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए रक्त जीवनरक्षक साबित होता है। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदाता ही किसी जरूरतमंद के लिए आशा की किरण बनते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, रक्त की एक यूनिट कम से कम तीन लोगों की जान बचा सकती है। रक्तदान के बाद रक्त को विभिन्न घटकोंकृरेड ब्लड सेल्स, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा में विभाजित कर अलग-अलग मरीजों के उपचार में उपयोग किया जाता है। कौन कर सकता है रक्तदान? सामान्यतः 18 से 65 वर्ष की आयु का स्वस्थ व्यक्ति, जिसका वजन 45 से 50 किलोग्राम या उससे अधिक हो तथा हीमोग्लोबिन निर्धारित मानकों के अनुरूप हो, रक्तदान कर सकता है। रक्तदान से पूर्व चिकित्सकीय जांच और परामर्श लिया जाता है, जिससे दाता और प्राप्तकर्ता दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। रक्तदान से जुड़े भ्रम और सच्चाई समाज में रक्तदान को लेकर अनेक भ्रांतियां प्रचलित हैं। कुछ लोग मानते हैं कि रक्तदान से कमजोरी आती है या स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जबकि चिकित्सकीय दृष्टि से स्वस्थ व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित होता है। शरीर कुछ ही समय में रक्त की कमी की पूर्ति कर लेता है। नियमित रक्तदान स्वास्थ्य परीक्षण का भी एक अवसर प्रदान करता है। रक्त समूहों की समझ भी है जरूरी रक्तदान और रक्त प्राप्ति रक्त समूहों पर निर्भर करती है। सही रक्त समूह मिलने पर ही मरीज का सुरक्षित उपचार संभव होता है। O $ :  सबसे सामान्य रक्त समूह देश की लगभग 30 प्रतिशत आबादी का रक्त समूह  O $ माना जाता है। O $  रक्त समूह वाले व्यक्ति  O $‚ A $‚ B $ और  AB $   समूह के लोगों को रक्तदान कर सकते हैं, जबकि वे केवल  O $  और  O & समूह से रक्त प्राप्त कर सकते हैं। O & : यूनिवर्सल डोनर O & रक्त समूह को यूनिवर्सल डोनर कहा जाता है क्योंकि इस समूह का रक्त लगभग सभी रक्त समूहों के मरीजों को दिया जा सकता है। हालांकि  O&  समूह के व्यक्ति केवल  O &  रक्त ही प्राप्त कर सकते हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में इस रक्त समूह का विशेष महत्व होता है। AB $ : यूनिवर्सल रिसीवर AB $ रक्त समूह वाले लोग किसी भी रक्त समूह से रक्त प्राप्त कर सकते हैं। इसी कारण इन्हें यूनिवर्सल रिसीवर कहा जाता है। हालांकि वे केवल  AB $  समूह के लोगों को ही रक्तदान कर सकते हैं। A $ रक्त समूह A $ रक्त समूह वाले व्यक्ति  A $ और  AB $  रक्त समूह के लोगों को रक्तदान कर सकते हैं। वहीं वे  A $] A  &] O $ और  O & समूह से रक्त प्राप्त कर सकते हैं। A  & रक्त समूह A & रक्त समूह अपेक्षाकृत कम पाया जाता है। इस समूह के लोग  A $] A  &] AB $  और  AB & रक्त समूह को रक्तदान कर सकते हैं, लेकिन रक्त केवल  A& और  A& समूह से ही प्राप्त कर सकते हैं। B $ रक्त समूह B $ रक्त समूह वाले व्यक्ति  B $ और  AB $ समूह के लोगों को रक्तदान कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर वे  B $] B &] O $ और  O &   समूह से रक्त प्राप्त कर सकते हैं। B &रक्त समूह B &रक्त समूह वाले व्यक्ति  B $] B &] AB $ और  AB & समूह के लोगों को रक्तदान कर सकते हैं, लेकिन रक्त केवल  B & और  O & समूह से प्राप्त कर सकते हैं। AB & : दुर्लभ रक्त समूह AB & भारत में अपेक्षाकृत दुर्लभ रक्त समूहों में शामिल है। इस समूह के लोग  AB $ और  AB & को रक्तदान कर सकते हैं, जबकि रक्त  AB &] A  &] B & और  O &  समूह से प्राप्त कर सकते हैं। युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण देश में रक्त की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए युवाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। महाविद्यालयों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा आयोजित रक्तदान शिविरों में युवाओं की सक्रिय सहभागिता न केवल रक्त भंडार को मजबूत करती है, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और मानवीय संवेदना का संदेश भी प्रसारित करती है। रक्तदान: महादान रक्तदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वोत्तम उदाहरण है। किसी अनजान व्यक्ति को जीवनदान देने का सुख और संतोष अमूल्य होता है। एक छोटा-सा प्रयास किसी परिवार की खुशियां बचा सकता है और किसी मरीज को नया जीवन दे सकता है। निष्कर्ष विश्व रक्तदाता दिवस हमें यह याद दिलाता है कि रक्त की आवश्यकता किसी भी समय, किसी भी व्यक्ति को पड़ सकती है। अस्पतालों में हर दिन हजारों मरीजों की जिंदगी स्वैच्छिक रक्तदाताओं पर निर्भर रहती है। इसलिए प्रत्येक स्वस्थ नागरिक को नियमित और स्वैच्छिक रक्तदान का संकल्प लेना चाहिए। रक्तदान कर हम न केवल किसी का जीवन बचाते हैं, बल्कि एक संवेदनशील, सहयोगी और स्वस्थ समाज … Read more

सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी से घिरे दिग्विजय सिंह, इंदौर महापौर ने की कानूनी कार्रवाई की मांग

भोपाल  मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटों पर भाजपा के कब्जे के बाद शुरू हुई राजनीतिक जंग अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस जहां दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रही है, वहीं इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महापौर ने भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को एक शिकायती पत्र लिखकर दिग्विजय सिंह के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत की आपराधिक अवमानना का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। 'चोरी में सुप्रीम कोर्ट भी शामिल' बयान पर आपत्ति महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सॉलिसिटर जनरल को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने को मिली-जुली सीट चोरी करार दिया था। सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसकी ट्रांसक्रिप्ट भी शिकायत के साथ संलग्न की गई है। वीडियो में कांग्रेस नेता कथित तौर पर कह रहे हैं कि, 'इस चोरी में सभी शामिल हैं। न केवल राज्य बल्कि केंद्र भी, चुनाव आयोग भी और मुझे कहना पड़ रहा है कि सुप्रीम कोर्ट भी।' दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई में देरी को लेकर अदालत पर यह टिप्पणी की थी। कंटेम्प्ट एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग इंदौर मेयर ने पत्र में स्पष्ट किया है कि दिग्विजय सिंह का यह बयान माननीय न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला और अदालत को बदनाम करने की श्रेणी में आता है। उन्होंने मांग की है कि कांग्रेस नेता के खिलाफ 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट 1971' के सेक्शन 15(1)(बी) के तहत सर्वोच्च न्यायालय की आपराधिक अवमानना की सख्त वैधानिक कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए। 'पीड़ित महिला की बद्दुआ का असर है' इस पूरे घटनाक्रम पर महू से भाजपा विधायक उषा ठाकुर ने भी तीखा और विवादित बयान दिया है। उन्होंने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने को एक पीड़ित महिला की बद्दुआ का असर बताया। ठाकुर ने दावा किया कि तेलंगाना में एक महिला द्वारा कांग्रेस नेता के खिलाफ की गई शिकायत पर नटराजन ने कोई कार्रवाई नहीं की थी, जिसके कारण पीड़ित महिला की बद्दुआ के चलते उनका फॉर्म रिजेक्ट हुआ है। आपराधिक अवमानना क्या होती है? भारत में न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट 1971' लागू है। इसके तहत यदि कोई व्यक्ति या नेता लिखित, मौखिक या वीडियो के जरिए अदालत की गरिमा को कम करने, उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाने या उसे 'स्कैंडलाइज्ड' करने की कोशिश करता है, तो सॉलिसिटर जनरल या अटॉर्नी जनरल की सहमति से सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई कर सकता है, जिसमें जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान है।  

SSO आईडी से ऑनलाइन पेंशन वेरिफिकेशन की नई व्यवस्था लागू

जयपुर अब तक पेंशन चालू रखने के लिए हर साल बुजुर्गों को बैंकों में जाकर लंबी लाइनों में लगना पड़ता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सरकार ने तकनीक का इस्तेमाल करते हुए फेस ऑथेंटिकेशन को हरी झंडी दे दी है। इसका मतलब है कि पेंशनर्स अब मोबाइल या कंप्यूटर पर सिर्फ अपना चेहरा स्कैन करके अपना जीवन प्रमाण पत्र घर बैठे ही जमा कर सकेंगे। SSO ID से वेरिफिकेशन हुआ बेहद आसान पेंशनर्स के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को भी बहुत आसान बना दिया गया है। सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक, अब चतुर्थ श्रेणी से ऊपर के कोई भी सरकारी कर्मचारी अपनी एसएसओ आईडी का इस्तेमाल कर सकेंगे। वे इसके जरिए ई-साइन करके किसी भी पेंशनर के जीवन प्रमाण पत्र को तुरंत ऑनलाइन वेरिफाई कर पाएंगे। इससे कागजी कार्रवाई से पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा। दिव्यांग बच्चों की आजीवन पेंशन पर नया नियम सरकार ने दिव्यांग बच्चों को मिलने वाली आजीवन पारिवारिक पेंशन के नियमों में भी बड़ा सुधार किया है। अब दिव्यांगता का सर्टिफिकेट किसी सक्षम अधिकारी या विशेषज्ञों के मेडिकल बोर्ड से ही बनवाना होगा। अगर दिव्यांगता स्थाई है, तो यह सर्टिफिकेट पूरी जिंदगी में सिर्फ एक ही बार जमा करना होगा। अगर दिव्यांगता अस्थाई है, तो पेंशन जारी रखने के लिए हर 3 साल में नया सर्टिफिकेट जमा कराना जरूरी होगा।

भारतीय चिकित्सा परिषद हरियाणा चुनाव अपडेट: 11 हजार चिकित्सक डालेंगे वोट

 कुरुक्षेत्र  भारतीय चिकित्सा परिषद हरियाणा चुनाव की प्रक्रिया जहां बंद हुई थी, वहीं से अब दोबारा शुरू हो गई। पानीपत के जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. राज कपूर को चुनाव करवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें रिटर्निंग ऑफिसर बनाया। चुनाव में प्रदेशभर के 11 हजार से ज्यादा आयुर्वेदिक, यूनानी, होम्योपैथी और सिद्धा चिकित्सक अपने मत का प्रयोग करेंगे। डॉ. कपूर ने दैनिक जागरण को बताया कि पहले इस प्रक्रिया में 15 अक्टूबर 2024 तक के पंजीकृत चिकित्सक भाग ले रहे थे, जिसे अब अपडेट कर 15 अक्टूबर 2025 तक के चिकित्सकों को भी इसमें शामिल किया है। ऐसे में सात सदस्यों के चुनाव के लिए प्रदेश के जिन 20 चिकित्सकों ने नामांकन भरा था वह तो इसमें बने ही रहेंगे। साथ ही जो नए पंजीकृत चिकित्सक हैं, उन्हें भी नामांकन करने का मौका दिया जाएगा। इसकी रूपरेखा बनाकर अतिरिक्त मुख्य सचिव आयुष विभाग को भेज दी है, जहां से स्वीकृति मिलते ही इसे पुन: शुरू कर दिया जाएगा। 21 जून के बाद चुनाव की प्रक्रिया जोर पकड़ लेगी। भारतीय चिकित्सा परिषद हरियाणा की कार्यकारिणी में सात सदस्य एक चेयरमैन और एक वाइस चेयरमैन बनता है। सरकार की ओर से चेयरमैन को नामिनेट किया जाता है। परिषद का चुनाव हर पांच साल में होना चाहिए लेकिन कोरोना के चलते 2020-21 में यह चुनाव नहीं हो पाया था। अब यह चुनाव 12 साल बाद होगा। फरवरी में प्रशासनिक कारणों से चुनाव कर दिए थे स्थगित गौर हो कि भारतीय चिकित्सा परिषद हरियाणा के सात सदस्यों को चुनने की चुनाव प्रक्रिया इसी साल जनवरी में शुरू हो गई थी। मगर प्रशासनिक कारणों के चलते इस प्रक्रिया को फरवरी में रोक दिया था, जबकि उस दौरान नामांकन प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी। पहले परिषद के तत्कालीन चेयरमैन डॉ. दिनेश अग्रवाल की अध्यक्षता में यह प्रक्रिया चल रही थी। अब उनकी जगह रिटर्निंग आफिसर डॉ. राज कपूर को बनाया गया है। नई कार्यकारिणी से मिलेगा नया बल: डॉ. शुभम गर्ग आयुर्वेदिक चिकित्सक डाक्टर शुभम गर्ग ने कहा कि नई कार्यकारिणी चुनकर परिषद में जाएगी इससे आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को बल मिलेगा। साथ ही पंजीकृत चिकित्सकों के लिए नई नीतियां बन पाएंगी, जिससे चिकित्सकों को फायदा मिलेगा। 21 जून के बाद चुनाव की प्रक्रिया तेज होगी: डॉ. राज जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डाक्टर राज कपूर ने बताया कि 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के बाद चुनाव की प्रक्रिया तेज होगी। जिला आयुर्वेदिक अधिकारियों को चुनाव के नोटिस को बोर्ड पर प्रदर्शित करने के लिए पत्र भेजा गया है।