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बीएड प्रवेश परीक्षा PTET-2026: 1.26 लाख अभ्यर्थी देंगे एग्जाम, कड़े सुरक्षा इंतजाम

जयपुर राजस्थान में बीएड महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित पीटीईटी-2026 (PTET-2026 ) की परीक्षा रविवार 14 जून को राज्य के 41 जिलों के 300 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित की जा रही है. परीक्षा के मुख्य समन्वयक और वीएमओयू के कुलगुरू प्रोफेसर बीएल वर्मा ने बताया कि इस बार फरवरी में राज्य सरकार से दिशा निर्देश मिलने के बाद आवेदन आमंत्रित किए गए. अब तक कुल 1 लाख 26 हजार 600 आवेदन प्राप्त हुए हैं. इनमें छात्रों के 48 हजार 138 तथा छात्राओं के 78 हजार 462 आवेदन शामिल हैं. सुबह 9 बजे से 12 बजे तक परीक्षा होगी आयोजित प्रोफेसर वर्मा ने बताया कि डीएलएड परीक्षा की तरह इस परीक्षा में भी पूरी शुचिता, पारदर्शिता और गोपनीयता बरती जा रही है. उन्होंने बताया कि 14 जून को परीक्षा का आयोजन सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच किया जा रहा है. सभी परीक्षार्थियों को प्रातः 7.30 बजे से 8.30 बजे के बीच ही परीक्षा केन्द्रों पर प्रवेश मिल सकेगा. इस बार सबसे ज्यादा 1 लाख 15 हजार 293  परीक्षार्थी हिन्दी माध्यम में तथा 11 हजार 307 परीक्षार्थी अंग्रेजी माध्यम में परीक्षा देंगे. जयपुर में हाई टेक कमांड सेंटर प्रोफेसर वर्मा ने बताया के परीक्षार्थी के एडमिट कार्ड में क्यूआर कोड होगा जिसमें उसकी पूरी जानकारी समाहित रहेगी. प्रश्नपत्र पर भी क्यूआर कोड अंकित किया गया है. उन्होंने बताया कि संवेदनशील केन्द्रों की निगरानी के लिए जयपुर में हाई टेक कमांड सेंटर बनाया गया है और कोटा मुख्यालय से भी परीक्षा केन्द्रों की निगरानी की जाएगी. कुलगुरू प्रोफेसर वर्मा ने कहा कि पहली बार एआई साफ्टवेयर से सतर्कता बरती जाएगी. परीक्षा के वक्त जिलों में कई स्तरों पर बनाये गए उड़नदस्ता दल छापामारी का कार्य करेंगे और संदिग्धों पर कड़ी नजर रखी जाएगी. परीक्षा केन्द्रों पर बायोमेट्रिक जांच के बाद भी परीक्षार्थी को प्रवेश मिलेगा.

पटना से गया, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय और राजगीर के लिए चलेगी रैपिड रेल: सीएम का ऐलान

 पटना बिहार में आने वाले समय में रैपिड रेल का जाल बिछने वाला है। राजधानी पटना से गयाजी, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय और राजगीर जैसे शहरों को हाईस्पीड ट्रेन से जोड़ा जाएगा। इन शहरों के बीच रोजाना सफर करने वाले कामकाजी लोगों एवं अन्य सभी वर्ग के यात्रियों को सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को इस बारे में घोषणा की। उन्होंने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने की बात कही है। सीएम सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर पटना में आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद बिहार में रेलवे का नेटवर्क मजबूत हो रहा है। राज्य के लगभग सभी रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं। अब भारत सरकार ने कहा है कि यहां रैपिड रेल चलाई जाएंगी। पटना से 4 शहरों के लिए चलेगी रैपिड रेल मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अभी पटना से गयाजी जाने में डेढ़ से दो घंटे का समय लगता है। सरकार ऐसी व्यवस्था करेगी कि रैपिड रेल से यह यह सफर 40 मिनट से भी कम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ट्रेन से पटना और मुजफ्फरपुर के बीच का सफर भी दो से ढाई घंटे में पूरा होता है, उससे कम समय में रोड से लोग पहुंच जाते हैं। इन शहरों को भी रैपिड रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा नालंदा जिले का राजगीर टूरिस्ट हब के रूप में विकसित हो रहा है। बेगूसराय भी राज्य का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र हो गया है। पटना से राजगीर और बेगूसराय के लिए भी आने वाले समय में रैपिड रेल चलेंगी। सीएम ने दावा किया कि इन शहरों का भी राजधानी से सफर 40 मिनट के अंदर ही पूरा होगा। उन्होंने कहा कि रैपिड रेल को मेट्रो और रोड नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा। पटना से जयनगर के बीच चल रही नमो भारत अभी पटना से जयनगर के बीच नमो भारत ट्रेन चलाई जा रही है। इसकी शुरुआत पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले की गई थी। सप्ताह में 6 दिन चलने वाली यह ट्रेन बाढ़, मोकामा, बरौनी, समस्तीपुर, दरभंगा, सकरी और मधुबनी स्टेशन पर रुकती है। हालांकि, 266 किलोमीटर की दूरी यह लगभग पौने 6 घंटे में पूरी करती है। इसकी औसत स्पीड 46 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह ट्रेन पूरी तरह से वातानुकूलित है और यात्री बिना रिजर्वेशन के सामान्य टिकट पर इस में यात्रा कर सकते हैं। ट्रेन की बाहरी बनावट वंदे भारत ट्रेन जैसी है। रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को ध्यान में रखते हुए इसे शुरू किया गया था।

गोरखपुर में 295 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण, योगी ने गिनाए सरकार के काम

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दल जोरशोर से तैयारियों में जुटे हैं। ऐसे में सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी एक तरह से चुनावी शंखनाद कर दिया है। सीएम योगी पश्चिम से लेकर पूरब तक यूपी के धुआंधार दौरे कर रहे हैं। इन दौरों के दौरान सैकड़ों करोड़ की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण-शिलान्यास के साथ ही वह लोगों को अपनी सरकार के कामों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं साथ ही विपक्ष पर जमकर हमला भी बोल रहे हैं। शनिवार को सीएम योगी वाराणसी, आजमगढ़ से होते हुए अपने गृह जनपद गोरखपुर पहुंचे। यहां चिल्लूपार की जनसभा में उन्होंने राम मंदिर निर्माण, रोजगार, कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दों पर विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। सीएम योगी ने जनता से आह्वान किया जो दल आस्था का सम्मान, युवाओं को रोजगार और क्षेत्र का विकास नहीं कर सकते, उन्हें न चुनें। सीएम योगी शनिवार को गांधी इंटर कालेज महुआपार बड़हलगंज में 295 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने 152.21 करोड़ रुपये की 122 पूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और 143.25 करोड़ रुपये की 197 नई परियोजनाओं का शिलान्यास किया। सीएम योगी ने कहा कि चिल्लूपार क्षेत्र के लोग सरयू मैया के प्रति गहरी आस्था रखते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु नियमित रूप से सरयू में स्नान करते हैं और पर्व-त्योहारों पर काशी तथा अयोध्या धाम की यात्रा करते हैं। अनुमान कीजिए आपका एक वोट कैसे पीढ़ियों को तार देता है। 500 वर्ष पहले जिस अयोध्या धाम में हम सब अपमानित हुए थे। पांच सौ वर्षो तक संघर्ष चलता रहा। पीढ़ी दर पीढ़ी, साल दर साल संघर्ष का सिलसिला थमा नहीं। फिर डबल इंजन की सरकार आई। आज अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर का निर्माण हो गया। सीएम ने सभा में लोगों से पूछा कि क्या ये काम कांग्रेस कर पाती? कांग्रेस के वश का था? क्या समाजवादी पार्टी कर पाती? उन्होंने कहा कि आप सोचें कि जब ये आपकी आस्था को सम्मान नहीं दे सकते, महापुरुषों को सम्मान नहीं दे सकते, विकास की योजनाएं नहीं ला सकते, नौजवान को रोजगार नहीं दे सकते, उद्योग धंधे नहीं ला सकते, बेटी बहन को सुरक्षा नहीं दे सकते, बाढ़ की समस्या का समाधान नहीं दे सकते, सड़कों का निर्माण नहीं कर सकते है, बब इन्हें चुनकर भेजते क्यों हैं? इन्हें चुनकर भेजने का मतलब स्वयं पर एक बोझ और कलंक का ठप्पा लगा लेना है। सपा पर साधा निशाना सीएम योगी ने नाम लिए बगैर सपा पर जमकर निशाना साधा। सीएम योगी ने कहा कि जब गलत लोग चुन कर जाते थे, तब जनता का पैसा चंद लोगों के परिवारों के विकास में लगता था। नौकरियों में सेंध लगती, यूपी के नौजवानों को नौकरी नहीं लगती। विकास की योजना में ठेके पट्टे के लिए पहले ही मार होने लगती थी। विधायक स्वयं ठेका करेगा तो हो चुका काम। यही होता था। लेकिन अब विकास भी हो रहा, नौजवानों को नौकरी भी मिल रही है। पुलिस भर्ती में चिल्लूपार और गोरखपुर के नौजवान भर्ती हुए। हर सरकारी भर्ती में नियुक्ति पत्र वितरित करता हूं तो गोरखपुर के सभी विधानसभा क्षेत्र से नौजवान मंच पर दिखते हैं। प्रसन्नता होती है। सीएम ने एक बार फिर लोगों से पूछा कि क्या ये 2017 के पहले संभव था? उन्होंने कहा कि तब चाचा-भतीजे की जोड़ी आपके हक पर डकैती डालती थी। नौजवानों का सलेक्शन नहीं होता था बल्कि वे नौकरी रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पहचान के संकट से जूझता था। मै मानता हूं कि चिल्लूपार, आजमगढ़, मऊ और यूपी के नाम पर रोजगार नहीं मिलता था। हक विकास भी करेंगे, सुरक्षा और सम्मान भी देंगे सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले यूपी में दंगा, कर्फ्यू, अव्यवस्था, गुंडागर्दी, माफियागिरी यही सब था यूपी में। न बेटी सुरक्षित न व्यापारी। आज ऐसा नहीं है। एक नई पहचान बनी है यूपी की। यह नई पहचान आपके विकास की इस यात्रा की पहचान है। हम विकास भी करेंगे, सुरक्षा भी देंगे, आस्था का सम्मान भी करेंगे और समृद्धि की नई उंचाई की ओर आप सब को भी लेकर जाएंगे। सीएम योगी ने कहा कि सरकार यहां लगने वाले उद्योगों के लिए ऐसे प्रशिक्षण केंद्र भी खोलेगी जहां तकनीशियन पैदा होंगे। उद्योगों में प्रशिक्षित बेटे और बेटियों को नौकरी मिलेगी, उन्हें पलायन नहीं करना होगा। लेकिन इन प्रक्रियाओं को गति तब मिलेगी जब अच्छी सरकारें होंगी, सुशासन होगा, सुरक्षा होगी।

तिर्वा रियासत की जमीन पर बड़ा आदेश: अपर आयुक्त न्यायालय ने दिया अंतिम निर्णय

कन्नौज यूपी के कन्नौज में 50 साल पुराने भू-सीलिंग विवाद में अपर आयुक्त न्यायालय ने अंतिम आदेश जारी करते हुए तिर्वा रियासत की 67.29 एकड़ भूमि सरकारी घोषित कर दी है। उप्र अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम, 1960 के तहत अपर आयुक्त प्रशासन रेनू सिंह ने राजा शारदा नरायण सिंह के वारिसों की अपील पर यह फैसला दिया। उन्होंने कुल 112.60 एकड़ भूमि में से 67.29 एकड़ भूमि को अंतिम रूप से सीलिंग के तहत अतिरिक्त यानी सरप्लस घोषित किया है। 17.31 एकड़ भूमि को आबादी और बाग की श्रेणी में होने के कारण सीलिंग से अवमुक्त कर दिया गया है। राज्य सरकार का पक्ष रख रहे शासकीय अधिवक्ता कानपुर मंडल नीरज सिंह सेंगर के मुताबिक तिर्वा रियासत की कन्नौज एवं फर्रुखाबाद के कई गांवों में जमीन थी। जिसको लेकर न्यायालयों में वाद दायर था। जिसमें राजा शारदा नरायण सिंह की 44 एकड़ भूमि सीलिंग में घोषित की गई थी। जिसके विरुद्ध रियासत ने न्यायालय में वाद दायर किया था। जिस पर प्रशासन द्वारा जमीनों की बिक्री पर रोक लगा दी थी। तिर्वा खास की भूमि को लेकर उच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र की 37 एकड़ भूमि को रियासत ने छोड़ने का प्रार्थना पत्र दिया था। 1 जून को अपर आयुक्त कानपुर मंडल ने निर्णय लेते हुए कहा कि राजा शारदा नरायण सिंह की 112 एकड़ भूमि में से 67.29 एकड़ भूमि को सीलिंग में घोषित किया जाता है। एसडीएम की जांच में खुला खेल उच्च न्यायालय ने 27 जून 2023 को साल 1994 के पुराने आदेश को निरस्त करते हुए अपर आयुक्त को निर्देश दिया था कि सभी पक्षों को दोबारा सुनकर छह महीने के भीतर मामले का अंतिम निस्तारण करें। इस आदेश के अनुपालन में अदालत ने एसडीएम तिर्वा से रिपोर्ट मांगी। जिसमें खुलासा हुआ कि सीलिंग का मुकदमा लंबित रहने और क्रय-विक्रय पर रोक होने के बावजूद खातेदारों द्वारा जमीनों की लगातार खरीद-फरोख्त की गई। जमीन पर कोल्ड स्टोरेज बना लिया गया। सड़कें निकाल दी गई और बड़े हिस्से पर मकान बनाकर आबादी बसा दी गई।

पैरामाउंट-वार्नर ब्रदर्स डील को अमेरिकी न्याय विभाग से मंजूरी, जांच बंद

 यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट ने पैरामाउंट स्काईडांस की तरफ से वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी को खरीदने के प्रपोजल की जांच की है। जांच में पाया गया है कि मीडिया कंपनियों के मर्जर से इंडस्ट्री में कंज्यूमर्स को नुकसान होने की संभावना नहीं है। एजेंसी ने शुक्रवार को कहा कि उसने इस डील की जांच बंद कर दी है। इसके एंटीट्रस्ट डिवीजन के रेगुलेटर्स ने निष्कर्ष निकाला कि मर्जर का असर 'मीडिया और एंटरटेनमेंट इकोसिस्टम में कंपटीशन बढ़ाने वाला होगा, जिससे अमेरिकी कंज्यूमर्स और वर्कर्स को फायदा होगा।' साल के शुरुआत में हुई थी डील पैरामाउंट स्काईडांस ने फरवरी के आखिर में वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी को खरीदने की डील की थी। पैरामाउंट को यह सफलता महीनों की बातचीत और नेटफ्लिक्स की एक बोली के बाद मिली। पैरामाउंट को पिछले साल स्काईडांस ने खरीदा था। कंज्यूमर्स को मिलेगा ज्यादा कंटेंट कंपनियों का तर्क है कि मर्जर इंडस्ट्री की ग्रोथ के लिए अच्छा होगा और कंज्यूमर्स को ज्यादा कंटेंट मिलेगा। मगर आलोचकों ने इस बात पर चिंता जताई है कि ऐसी इंडस्ट्री में और ज्यादा समेकन का क्या मतलब हो सकता है, जिस पर पहले से ही कुछ बड़ी कंपनियों का कब्जा है। मर्जर से बढ़ेगा कॉम्पिटिशन मर्जर से मार्केट पर संभावित असर के बारे में रेगुलेटर्स ने इस बात पर भी विचार किया कि क्या इस डील से वीडियो स्ट्रीमिंग में कॉम्पिटिशन को नुकसान होगा। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि मर्जर से कॉम्पिटिशन बढ़ने की संभावना है क्योंकि यह कस्टमर्स को बड़े वीडियो स्ट्रीमिंग विकल्पों के मुकाबले एक मजबूत विकल्प देगा। कंज्यूमर का ध्यान खींचते हैं यूट्यूब और टिक टॉक एजेंसी ने यह भी पाया कि यूट्यूब, टिकटॉक और अन्य सोशल मीडिया पोर्टल, जो वीडियो स्ट्रीमिंग कंटेंट भी देते हैं, वह अच्छी तरह से स्थापित एंटीट्रस्ट कानूनी मिसालों के तहत यहां कॉम्पिटिटिव विकल्प नहीं लगते हैं, हालांकि वे कंज्यूमर का ध्यान खींचने के लिए बड़े पैमाने पर कॉम्पिटिशन करते हैं। रेगुलेटर्स ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि मर्जर से तथाकथित लीनियर टेलीविजन के लिए कॉम्पिटिशन को नुकसान होने की संभावना नहीं है, क्योंकि लाइव प्रोग्रामिंग के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा है। मर्जर के विरोध में हैं कई लोग हजारों एक्टर्स, डायरेक्टर्स, राइटर्स और इंडस्ट्री के अन्य प्रोफेशनल्स ने पैरामाउंट डील का विरोध किया है। उनका तर्क है कि और ज्यादा समेकन से नौकरियां जाएंगी और फिल्ममेकर्स और फिल्म देखने वालों के लिए विकल्प कम हो जाएंगे। कई सांसदों ने भी इसी तरह चिंता जताई है।  

बिरयानी विवाद के बाद प्रणित मोरे का यू-टर्न, कहा- मुझसे बड़ी गलती हुई, लोगों से मांगी क्षमा

नई दिल्ली  गुड़गांव के ‘₹370 बिरयानी विवाद’ को लेकर मचे भारी बवाल के बाद स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे ने माफी मांगी है. उन्होंने एक वीडियो शेयर कर अपनी गलती को स्वीकार किया लोगों का गुस्सा पूरी तरह जायज बताया. उन्होंने माना कि शो के दौरान उनके जजमेंट में बड़ी चूक हुई थी. सोशल मीडिया पर हो रही तीखी आलोचना और कानूनी कार्रवाई के बीच प्रणित मोरे ने ये कदम उठाया है।  ‘₹370 बिरयानी विवाद’ सोशल मीडिया पर काफी बढ़ा. सेलेब्स और लोगों की आलोचाओं के बाद महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया है. वहीं, राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी दोनों को समन जारी किया है।  प्रणित मोरे ने क्या कहा आज प्रणित मोरे ने वीडियो जारी कर कहा, ‘आप सबने मेरा क्राउड वर्क का वीडियो देखा होगा. इसके लिए मुझे बहुत हेट मिल रही है. मुझे लगता है कि मैं यह हेट डिजर्व भी करता हूं. जब मैं उस लड़के के साथ बात कर रहा था तो उसने काफी गलत बातें बोलीं. लेकिन उस वक्त सब लोग हंस रहे थे. मैं भी भावनाओं में बह गया और मेरे से मुझसे ‘लैप्स इन जजमेंट’ हो गया. यह मेरी बहुत बड़ी गलती थी। ‘मैं उसे रोक सकता था लेकिन…’ प्रणीत ने आगे माना कि एक कॉमेडियन के तौर पर उनके पास माइक और स्टेज की जिम्मेदारी होती है. प्रणीत ने आगे कहा, ‘मैं चाहता तो उसे वहीं पर टोक सकता था या स्टैंड ले सकता था. लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाया. मैंने उसे एक प्लेटफॉर्म दिया, जिसकी वजह से बात इतनी बढ़ गई. जिन लोगों को भी इस वजह से ठेस पहुंची है, मैं उन सभी से माफी मांगता हूं. यह मेरी बहुत बड़ी गलती थी।  ‘पुलिस का सहयोग कर रहा हूं, एक मौका और दे’ प्रणित ने वीडियो में कहा, ‘मेरे खिलाफ जो भी कानूनी कार्रवाई हो रही है, मैं उसमें पुलिस और अधिकारियों का पूरा सहयोग कर रहा हूं. मैं बस यही गुजारिश करना चाहता हूं कि प्लीज मुझे एक मौका दें. मैं एक बेहतर इंसान बनकर दिखाऊंगा. यह मेरे लिए एक बड़ा सबक था. अब मैं खुद पर और अपने कंटेंट पर काम करूंगा।  विवाद क्या है ₹370 बिरयानी’ मामला यह पूरा विवाद प्रणित मोरे के एक लाइव शो के दौरान शुरू हुआ था. शो में दर्शकों के बीच बैठे हिमांशु जांगड़ा नाम के एक 22 साल युवक ने अपनी डेटिंग लाइफ का एक किस्सा सुनाया. युवक ने कहा कि उसने एक लड़की को ₹370 की चिकन बिरयानी खिलाई थी. जब लड़की ने डेट के बाद घर जाने को कहा तो युवक ने शो में माइक कुछ आपत्तिजनक शब्द कहे. ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा दोनों ट्रोल होने लगे. हिमांशु को तो अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा।  प्रणित ने हंसकर दिया था इनाम इस विवादित बयान पर वहां मौजूद दर्शक और खुद प्रणित मोरे जोर-जोर से हंसने लगे. प्रणित ने इसे ‘पीक गुड़गांव कंटेंट’ कहा और युवक को उसकी कहानी के लिए 5000 रुपये का इनाम भी दे दिया. इसके बाद प्रणित ने इस क्लिप को एडिट करके अपने लाखों सब्सक्राइबर्स के साथ सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया. वीडियो वायरल होते ही लोग भड़क गए। लोगों ने इसे महिलाओं के साथ जबरदस्ती और असहमति को बढ़ावा देने वाला बताया।   

अब्दू रोजिक का खुलासा: बिग बॉस से एक भी पैसा नहीं मिला, टीम पर लगाया धोखे का आरोप

सलमान खान के शो बिग बॉस में जो भी आया है, उसे फायदा जरूर मिला है. पैसा हो या काम, बिग बॉस शो ने हर किसी की किस्मत पलटी है. ताजिकिस्तान वाले अब्दू रोजिक भी साल 2022-23 में सलमान के शो पर आए थे. यहां उन्हें लोगों का बेशुमार प्यार मिला. लेकिन अब्दू ने बिग बॉस से एक भी रुपये की कमाई नहीं की थी. अब्दू को मिला धोखा हाल ही में अब्दू रोजिक ने हाउस ऑफ जेन पॉडकास्ट में बताया कि उनकी टीम ने उनका गलत फायदा उठाया. जो लोग उनके काम को मैनेज किया करते थे, उन्होंने अब्दू को ठगा और उनके सारे पैसे हड़प लिए. अब्दू ने कहा- इस दुनिया में लोगों को आपकी परवाह नहीं होती. मैंने उनके साथ तीन-चार साल काम किया. उन्होंने मुझे आगे बढ़ने में मदद की, लेकिन मैंने जो शो किए, उनसे मिलने वाला पैसा उन्होंने ले लिया. सोचिए, बिग बॉस के लिए मुझे एक डॉलर भी नहीं मिला. उन्होंने मुझे बुरी तरह धोखा दिया. उन्होंने मेरा सब कुछ ले लिया. अब्दू का ये भी कहना है कि कई लोग सोशल मीडिया पर उनकी लाइफस्टाइल देखकर ये सोचते हैं कि वो काफी अमीर हैं. मगर हकीकत एकदम उलटी है. बिग बॉस फेम ने कहा- जब लोग मुझे देखते हैं, तो उन्हें लगता है कि मैं करोड़पति हूं, लेकिन उन्हें नहीं पता कि मैं कितना बोझ ढो रहा हूं. कैमरे के सामने आप खुश, मुस्कुराते हुए, तस्वीरें खिंचवाते हैं, लेकिन घर जाते ही सारी परेशानियों का तनाव महसूस करते हैं. 'लोग सोचते हैं कि मैं बहुत अमीर हूं, लेकिन उन्हें नहीं पता कि मेरे पास न तो कार है और न ही घर. अच्छे लोगों के साथ काम करना बहुत जरूरी है. मेरी बस यही गुजारिश है कि लोग ईमानदार रहें और साफ-सुथरा काम करें. मुझे धोखा न दें. शायद मेरी लंबाई की वजह सें लोग मुझे कम आंकते हैं और सोचते हैं कि वो मुझे बेवकूफ बना सकते हैं. लेकिन असल में, मैं उनकी हर चाल समझ जाता हूं. हमें बहुत सावधानी बरतनी चाहिए कि हम किस पर भरोसा करते हैं और किसके साथ व्यापार करते हैं.' हाईट बनी अड़चन अब्दू ने आगे ये भी बताया कि कैसे उनकी शारीरिक बनावट के कारण लोग अक्सर उन्हें कम आंकते हैं और धोखा देते हैं. उन्हें ग्रोथ हार्मोन डेफिशियेंसी नाम की बीमारी है, जिसमें उनका कद उम्र के हिसाब से छोटा है. उन्होंने कहा, 'जब भी मैं काम के लिए बाहर जाता हूं, लोग मुझसे सीधे बात नहीं करते. वो मान लेते हैं कि मुझे बातें समझ नहीं आतीं और वो अपनी टीम से बात करना पसंद करते हैं. मैं देखता हूं कि वो दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं और मेरे साथ कैसा व्यवहार करते हैं, इसमें कितना अंतर है.'

पहले गेम में कड़ी टक्कर के बावजूद सिंधु नहीं बचा सकीं बढ़त, फाइनल से बाहर

सिडनी  भारत की बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु शनिवार यानि 13 जून को ऑस्ट्रेलियन ओपन के सेमीफाइनल में जापान की शीर्ष वरीय अकाने यामागुची के खिलाफ हार गईं। जिससे इस भारतीय खिलाड़ी का बीडब्ल्यूएफ खिताब का इंतजार बरकरार रहा। साथ ही इस साल के पहले खिताब से भी हाथ धोना पड़ा। सिंधू को यहां तीसरी वरीयता मिली थी। उन्होंने पहले गेम में कड़ी टक्कर दी लेकिन 43 मिनट तक चले मुकाबले में यामागुची से 20-22, 12-21 से हार गईं। पीवी सिंधु ने पहले गेम में किया डंटकर मुकाबला सिंधु के बाहर होने के साथ ही इस बीडब्ल्यूए ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर 500 टूर्नामेंट में भारत का अभियान भी समाप्त हो गया है। सिंधु ने पहले गेम में यामागुची के हर प्रहार का बखूबी जवाब दिया। दोनों खिलाड़ियों ने लगातार छह-छह अंक हासिल किए, लेकिन भारतीय खिलाड़ी अपने गेम प्वाइंट को अंक में बदलने में नाकाम रही। यामागुची ने संयम का परिचय देते हुए पहला गेम जीत लिया। दूसरे गेम में फिसली बाजी पहले गेम में कांटे की टक्कर होने के बाद दूसरे गेम में खेल का रुख पूरी तरह बदल गया। यामागुची ने लगातार आठ अंक बनाकर 13-6 की बढ़त बना ली और पूरे गेम में अपना दबदबा बनाए रखते हुए आसानी से मैच जीत लिया। अब जापानी खिलाड़ी महिला एकल के खिताबी मुकाबले में थाईलैंड की पोर्नपावी चोचुवोंग से भिड़ेंगी। सिंधु का इस हार के साथ यामागुची के खिलाफ हालिया संघर्ष जारी रहा। हालांकि जीत के रिकॉर्ड में भारतीय खिलाड़ी अब भी 15-13 से आगे हैं, लेकिन पिछले छह मुकाबलों में से पांच में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। खिताब का इंतजार हुआ लंबा दिसंबर 2024 में सैयद मोदी इंटरनेशनल में जीत के बाद से सिंधु बीडब्ल्यूएफ टूर का खिताब नहीं जीत पाई हैं। इस सत्र में सिंधू का यह दूसरा सेमीफाइनल था। इससे पहले वह मलेशिया ओपन के सेमीफाइनल तक पहुंची थीं जिसमें उन्हें चीन की वांग झियी से हार का सामना करना पड़ा था। वह इस सत्र में तीन बार क्वार्टर फाइनल में भी पहुंची हैं। पीवी सिंधु ने चीन की चेन सु यू को क्वार्टर फाइनल में 21-6, 21-9 से एकतरफा मैच में मात दी थी। जिसके उनकी खिताब जीतने की उम्मीद मजबूत हो गई थी।  

योगी सरकार का बड़ा फैसला: आउटसोर्स सेवा निगम का पोर्टल अगस्त तक तैयार, नई भर्ती भी शुरू

लखनऊ  प्रदेश के सरकारी विभागों में कार्यरत लगभग चार लाख आउटसोर्स कार्मिकों को बढ़ा मानदेय और अन्य सुविधाओं का लाभ सरकार सितंबर से दे सकती है। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकास) की सेवाओं को धरातल पर उतारने के लिए पोर्टल अगस्त तक तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। पोर्टल तैयार होने के बाद पहले से कार्यरत आउटसोर्स कार्मिकों को प्रस्तावित बढ़ा मानदेय व अन्य सुविधाओं का लाभ देने की प्रक्रिया शुरू होगी। नई भर्तियां भी शुरू की जाएंगी। पोर्टल विकसित करने का काम उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट सिस्टम कारपोरेशन (यूपी डेस्को) के माध्यम से एक निजी संस्था को दिया गया गई है। इस पोर्टल में आउटसोर्स कार्मिकों से संबंधित जानकारियों के साथ ही नई भर्तियों के लिए आवेदन, मानदेय की दर, कार्मिकों को दिए जाने वाले अन्य लाभ का पूरा विवरण होगा। सभी गतिविधियां पोर्टल से होंगी संचालित कुल मिलाकर निगम की समस्त गतिविधियां इसी पोर्टल के माध्यम से संचालित होंगी। सूत्रों के मुताबिक निगम का पोर्टल तैयार हो जाने पर बढ़ा मानदेय देने के साथ ही अन्य सभी लाभ कार्मिकों को दिया जाएगा। नई भर्तियां भी शुरू की जाएंगी। प्रदेश में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के गठना का शासनादेश 20 सितंबर 2025 को जारी किया गया था। निगम के लिए एमडी और अन्य पदाधिकारियों की तैनाती की जा चुकी है। निगम के माध्यम से प्रदेश सरकार आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और पारिश्रमिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और एकरूप बनाने का काम करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए थे निर्देश हाल ही में समीक्षा बैठक कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आउटसोर्स व्यवस्था को तकनीक आधारित, जवाबदेह और कर्मचारी हितैषी बनाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि पोर्टल के माध्यम से नियुक्ति, सत्यापन, निगरानी तथा अन्य प्रक्रियाओं का केंद्रीकृत संचालन किया जाए, जिससे व्यवस्था अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बन सके। निगम का गठन होने से कार्मिकों को न्यूनतम 20 हजार व अधिकतम 40 हजार रुपये तक मासिक मानदेय मिलेगा। इसके साथ ही कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) आदि का भी लाभ कार्मिकों को मिलेगा। सरकार ने आउटसोर्सिंग भर्तियों के लिए चार श्रेणियां बनाई हैं। श्रेणी एक के लिए 40 हजार, दो के लिए 25 हजार, श्रेणी तीन के लिए 22 और चार के लिए 20 हजार पारिश्रमिक तय किया गया है।

हथेली पर सर्प रेखा का रहस्य, हस्तरेखा शास्त्र में शुभ-अशुभ संकेतों की व्याख्या

हिंदू धर्म में सांप को सिर्फ एक जीव नहीं, बल्कि पूजनीय भी माना गया है. तभी तो नाग पंचमी और महाशिवरात्रि जैसे शुभ अवसरों पर सांपों की पूजा भी होती है. ऐसा भी मान्यता है कि स्वर्ग में धन के देवता कुबेर के खजाने की रखवाली स्वयं नाग देवता करत हैं. भगवान विष्णु भी क्षीरसागर में शेषनाग पर लेटे हुए हैं. इसी तरह हस्तरेखा शास्त्र में भी सांपों को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बातें कहीं गई हैं. हस्तरेखा विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी व्यक्ति की हथेली पर रेखाओं से सर्प जैसी आकृति बने तो यह सामान्य नहीं होता है. इसके पीछे कोई न कोई रहस्य छिपा होता है. हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, हथेली पर सांप की आकृति का चिह्न शुभ और अशुभ दोनों तरह के प्रभाव को उजागर करता है. इसके परिणाम अच्छे होंगे या बुरे, यह सृप रेखा के स्थान से तय होता है.  इसके लिए यह देखना जरूरी है कि उंगली के नीचे कौन से पर्वत के पास वो सृप रेखा बन रही है. धन-वैभव का लाभ अंगूठे के नीचे स्थान को शुक्र पर्वत कहा जाता है. यह जीवन में प्रेम, आकर्षण, वैवाहिक जीवन और भौतिक सुख-सुविधाओं को दर्शाता है. हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, अगर शुक्र पर्वत के पास कोई रेखा ऐसी सृप आकृति बनाए तो यह जीवन में सुख-सुविधाओं और धन-वैभव की ओर इशारा करती है. हालांकि ऐसे लोगों के वैवाहिक जीवन में अक्सर परेशानियां देखी जाती हैं. पढ़ाई-लिखाई में तेज तर्जनी उंगली के नीचे गुरु पर्वत होता है, जिसे ज्ञान-शिक्षा और आध्यात्मिकता का प्रतीक माना जाता है. कहते हैं कि अगर हथेली के इस स्थान पर किसी रेखा से सृप की आकृति बने तो व्यक्ति बुद्धिमान, विद्वान और बहुत गुणी बनता है. ऐसे लोग पढ़ाई-लिखाई में बहुत अच्छे होते हैं और अपने बुद्धि-कौशल के दम पर जीवन में बड़ी उपलब्धियों को हासिल करते हैं. सांप की दो आकृतियां अशुभ मध्यमा उंगली (मिडिल फिंगर) के नीचे स्थित शनि पर्वत भाग्य और कर्म से जुड़ा माना जाता है. इस स्थान पर सर्प का चिह्न बनने पर व्यक्ति को बड़ी धन-संपत्ति और भौतिक समृद्धि प्राप्त हो सकती है. हालांकि यदि सर्प की आकृति दोहरी हो तो इसके परिणाम विपरीत हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में व्यक्ति अपने संचित धन को गलत आदतों के कारण खो सकता है. सूर्य ग्रहण जैसी स्थिति अनामिका उंगली के नीचे स्थित सूर्य पर्वत पर सर्प की आकृति को शुभ चिह्न नहीं माना जाता है. हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, हथेली पर सृप की आकृति का ऐसा निशान व्यक्ति की उन्नति और सफलता में बाधा पैदा करता है. अनामिका उंगली के नीचे सांप की आकृति वाले ऐसे निशान को सूर्य ग्रहण पर ग्रहण लगने जैसा समझा जाता है. बुद्धि-कौशल, व्यापार में लाभ कनिष्ठा उंगली के नीचे स्थित बुध पर्वत व्यापार, बुद्धिमत्ता और संचार कौशल का प्रतिनिधित्व करता है. यदि इस स्थान पर सर्प का चिह्न हो तो व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत, दृढ़ संकल्पित माना जाता है. ऐसे लोग अपने निर्णयों पर अडिग रहते हैं. इन्हें जीवन में आगे चलकर क्या करना है. इसे लेकर ये बहुत क्लीयर रहते हैं. व्यापार या व्यवसाय के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल करने की क्षमता रखते हैं.