samacharsecretary.com

कडलूर में रेलवे ट्रैक पार करते वक्त स्कूल बस को ट्रेन ने मारी जोरदार टक्कर, जानें कैसे हुआ बड़ा हादसा

चेन्नई तमिलनाडु के कडलूर जिले के चेम्मनकुप्पम इलाके में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ, जब तेज रफ्तार से आ रही ट्रेन ने बिना फाटक वाले रेलवे क्रॉसिंग पर स्कूल वैन को जोरदार टक्कर मार दी। इस भयानक हादसे में तीन मासूम बच्चों की जान चली गई, जबकि दस बच्चे और वैन का ड्राइवर गंभीर रूप से जख्मी हो गए। यह हादसा उस वक्त हुआ जब स्कूल वैन रेलवे ट्रैक पार करने की कोशिश कर रही थी, तभी चिदंबरम जा रही एक पैसेंजर ट्रेन ने वैन को टक्कर मार दी और उसे करीब 50 मीटर तक घसीट लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वैन पूरी तरह तहस-नहस हो गई। हादसे में तीन बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि बच्चों के नाम अभी तक सामने नहीं आए हैं। चश्मदीदों के मुताबिक, वैन में स्कूल के बच्चे सवार थे। हादसे के बाद घायल बच्चों और ड्राइवर को फौरन कडलूर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि मरने वालों की तादाद बढ़ सकती है। वैन ड्राइवर की लापरवाही से हुआ हादसा स्थानीय लोगों और रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह हादसा वैन ड्राइवर की लापरवाही की वजह से हुआ। बताया जा रहा है कि ड्राइवर ने ट्रेन को देखने के बावजूद जल्दबाजी में ट्रैक पार करने की कोशिश की। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) और जिला प्रशासन ने हादसे की तहकीकात शुरू कर दी है, ताकि इसकी असल वजह का पता लगाया जा सके और जिम्मेदारों को सजा दी जाए। हादसे की खबर फैलते ही इलाके में गम और गुस्से का माहौल है। स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए और रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा इंतजामों की कमी को लेकर नाराजगी जाहिर की। लोगों का कहना है कि स्कूलों के आसपास बिना फाटक वाले क्रॉसिंग खतरनाक हैं और इन्हें तुरंत ठीक करना चाहिए। लोगों को फूटा गुस्सा हादसे की आवाज सुनकर सबसे पहले स्थानीय लोग ही मौके पर पहुंचे। उन्होंने फंसे हुए बच्चों को निकालने की कोशिश की और बचाव दल के आने तक मदद की। गुस्साए लोगों ने रेलवे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और स्कूलों के पास सुरक्षा बढ़ाने की मांग की। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि जांच के नतीजों के आधार पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। हादसे की पूरी जांच की जा रही है।  

भारी बारिश के कारण सुबह बागेश्वर धाम में एक दीवार गिरने से एक महिला श्रद्धालु की मौत हो

 छतरपुर भारी बारिश के कारण छतरपुर जिले के गढ़ा गांव में एक दीवार गिरने से एक महिला श्रद्धालु की मौत हो गई, जबकि मलबे में दबने से 10 श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना मंगलवार तड़के की है, यह सभी लोग बागेश्वर धाम में दर्शन करने आए थे और पास में ही एक ढाबे पर रुके हुए थे, जहां यह हादसा हुआ। यूपी से आए थे सभी श्रद्धालु मिली जानकारी के अनुसार, मृतका और सभी घायल श्रद्धालु उत्तर प्रदेश के निवासी हैं और बागेश्वर धाम के दर्शन कर लौट रहे थे। वे गढ़ा गांव में एक ढाबे पर रुके थे, तभी अचानक भारी बारिश के कारण कमजोर हुई एक दीवार भरभराकर गिर गई। इस दुर्घटना में एक महिला की मौत हो गई है और 10 श्रद्धालु घायल हैं। एक-दो श्रद्धालुओं की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायल अस्पताल में भर्ती बमीठा थाना पुलिस को सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया। सभी घायलों को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

दुर्गावती टाइगर रिजर्व पर शिकारियों और तस्करों की हमेशा निगाह बनी रहती, उनपर नजर रखने 650 कैमरे, 35 वॉच टॉवर, 40 पेट्रोलिंग कैंप

दमोह  बारिश के मौसम को देखते हुए अन्य टाइगर रिजर्व की तरह वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को आगामी तीन महीने के लिए पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। इस दौरान रिजर्व क्षेत्र में शिकारियों की गतिविधियों और अन्य संदिग्ध हरकतों पर नजर रखने के लिए प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। वन्यजीवों की बढ़ी गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए टाइगर रिजर्व के भीतर 650 से अधिक ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मदद से हर मूवमेंट की निगरानी की जा रही है। इसके अलावा क्षेत्र में 35 वॉच टॉवर, 40 पेट्रोलिंग कैंप और 300 से अधिक सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है।  गश्त के लिए टीमें दिन और रात ड्यूटी पर हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा और चौकसी को विशेष रूप से बढ़ाया गया है। टाइगर रिजर्व का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा नौरादेही क्षेत्र है, जहां सबसे अधिक सुरक्षा संसाधन लगाए गए हैं। यहां 35 वॉच टॉवर, 650 ट्रैप कैमरे, करीब 40 पेट्रोलिंग कैंप और एक हाथी कैंप के साथ 300 से अधिक सुरक्षाकर्मी लगातार निगरानी में जुटे हैं। दरअसल एक जुलाई से सभी टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए बंद हो जाते हैं और एक अक्तूबर को ही खुलते हैं। यह समय बाघिनों के प्रजनन के लिए माना जाता है और कीचड़ होने के कारण जंगल में घूमना मुश्किल होता है। इसलिए टाइगर रिजर्व को बंद रखा गया है। इसी अवधि में शिकारी भी सक्रिय हो जाते हैं। इसलिए ऐसे समय प्रबंधन को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होती है। दमोह में अब भी अधूरी व्यवस्थाएं टाइगर रिजर्व के तहत आने वाले दमोह वनमंडल में फिलहाल 30-35 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं और कुछ ट्रैप कैमरे भी लगाए गए हैं, लेकिन इस क्षेत्र में वायरलेस स्टेशन जैसी सुविधाएं अब तक तैयार नहीं हो सकी हैं। अधिकारी मानते हैं कि यहां सुरक्षा इंतजामों को और मजबूत किए जाने की जरूरत है। प्राकृतिक संपदा पर बुरी नजर 2339 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले इस रिजर्व में 24 बाघों समेत 250 से अधिक जीव-जंतुओं की प्रजातियां, 90 से अधिक प्रकार के पेड़, 49 तरह की झाड़ियां, 30 प्रकार की घास और 15 तरह की बेल-लताएं पाई जाती हैं। यही वजह है कि इस जैव विविधता पर शिकारियों और घुसपैठियों की नजर बनी रहती है। अधिकारियों की अपील रिजर्व प्रबंधन ने आमजन से अपील की है कि वे इस बंद अवधि में टाइगर रिजर्व की ओर न जाएं और गाइडलाइन का पालन करें, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन बना रहे। टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. एए अंसारी का कहना है मानसून को ध्यान में रखते हुए ट्रैप कैमरे, गश्त व निगरानी के जरिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। 

वनतारा प्रबंधन उज्जैन के प्रस्तावित चिड़ियाघर को वन्यजीव देने पर पूरी तरह सहमत, अधिकारियों का दल 11 जुलाई को करेगा भ्रमण

उज्जैन   मध्य प्रदेश में पालपुर कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर अभयारण्य के बाद अब चिड़ियाघर में भी चीते देखे जा सकेंगे। राज्य सरकार उज्जैन में प्रस्तावित चिड़ियाघर में चीता बसाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस के वनतारा सेंटर से मध्य प्रदेश सरकार चीता सहित अन्य वन्यप्राणी ला सकती है। प्रदेश के अधिकारियों का दल वनतारा जाएगा और वहां की व्यवस्थाओं का अध्ययन करेगा। दरअसल, पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वनतारा गए थे। उन्होंने वहां व्यवस्थाओं को देखा था। वहां का अनुभव मध्य प्रदेश के अधिकारियों के साथ साझा किया। उन्होंने कहा कि वनतारा प्रबंधन मध्य प्रदेश को वन्यजीव देने पर सहमत है। वनतारा में 48 चीते हैं मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि मप्र वन विभाग के अधिकारी वनतारा रेस्क्यू सेंटर का भ्रमण कर हाथी प्रबंधन, विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण माडल, मानव-वन्यजीव द्वंद्व कम करने के प्रबंधन का अध्ययन करें। बता दें कि वनतारा में 48 चीता हैं। इन्हें दुबई व दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था। 11 से 13 जुलाई तक वनतारा का अध्ययन करेंगे वन अधिकारी मप्र के वन अधिकारी 11 जुलाई से 13 जुलाई तक वनतारा रेस्क्यू सेंटर का अध्ययन करेंगे। वन विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल, वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक सुभरंजन सेन एवं अन्य अधिकारियों का दल 10 जुलाई को रवाना हो जाएगा। 80 हेक्टेयर में होगा विकसित मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन में 300 करोड़ रुपये की लागत से 80 हेक्टेयर में चिड़ियाघर-सह-सफारी बनाया जाएगा। इस परियोजना के लिए 25 करोड़ रुपये की प्रारंभिक राशि मंजूर की गई है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार बाघ, सफेद बाघ और तेंदुआ, चीता सहित बड़े मांसाहारी जानवरों के लिए 47 अलग-अलग बाड़ों के साथ-साथ छोटे मांसाहारी, शाकाहारी, पक्षी, प्राइमेट, सरीसृप, एक तितली गुंबद, एक मछलीघर, एक बचाव केंद्र और एक पशु चिकित्सा अस्पताल की योजना है। इसका प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। चीता समेत कुछ अन्य जीव भी लाए जा सकते हैं     अधिकारियों का दल 11 जुलाई को जामनगर के वनतारा रेस्क्यू सेंटर का अध्ययन करने जाएगा। वहां जाकर देखेंगे कि किस तरह वन्यजीवों को रखा जाता है। उनकी देखरेख, खानपान से लेकर हर बिंदु का अध्ययन करेंगे। वहां से चीता समेत कुछ अन्य वन्यजीव मप्र लाए जा सकते हैं। हम इसकी संभवनाएं देखेंगे। – सुभरंजन सेन, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक, मप्र।  

इंदौर के पश्चिमी रिंग रोड के निर्माण पर NHAI ने साफ किया, 90 % किसानों को मुआवजा मिलने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू होगा

 इंदौर  इंदौर में शिप्रा से पीथमपुर नेट्रेक्स तक बनने वाली 64 किलोमीटर लंबी पश्चिमी रिंग रोड के निर्माण कार्य में अब और देरी तय है। किसानों को बढ़ी हुई मुआवजा राशि तो मंजूर हो गई है, लेकिन उनके बैंक खाता नंबर और एफआईसी कोड अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने साफ किया है कि 90 प्रतिशत किसानों को मुआवजा मिलने के बाद ही सड़क निर्माण शुरू किया जाएगा। अब तक जिले में 30 प्रतिशत किसानों के खाता नंबर ही एकत्रित हो सके है। ऐसे में बरसात बाद ही निर्माण एजेंसी की मशीने काम शुरू कर सकेगी। करीब एक साल पहले दो अलग-अलग एजेंसियों को इस सड़क का निर्माण कार्य सौंपा गया था। लेकिन किसानों के विरोध और जमीन अधिग्रहण की मुआवजा राशि में खामियों के चलते काम शुरू नहीं हो पाया। पहले इस परियोजना के लिए करीब 600 करोड़ रुपये का मुआवजा तय हुआ था, लेकिन किसानों के विरोध और शासन के निर्देश के बाद कलेक्टर आशीष सिंह ने नई गाइडलाइन के अनुसार मुआवजा बढ़वाया। अब यह राशि बढ़कर करीब एक हजार करोड़ रुपये हो गई है। जमीनों का सर्वे कर 26 मई को अवार्ड पारित कर दिए गए और 25 जून को एनएचएआइ ने फंड भी जारी कर दिया।अब तक किसानों जिले के 998 किसानों के खाता नंबर नहीं मिल सके है। इंदौर जिले की तीन तहसीलों की स्थिति 795 करोड़ इंदौर जिले में मिलेगा मुआवजा 570.5678 हेक्टेयर जमीन होगी अधिग्रहित 472.0545 हेक्टर नीजी जमीन 98.5133 हेक्टेयर शासकीय जमीन 998 किसानों की जमीन होगी अधिग्रहित 90 प्रतिशत जमीन मिलने पर शुरू होगा कार्य एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुमेश बांझल का कहना है कि 90 प्रतिशत जमीनों का स्वामित्व मिलने के बाद ही पश्चिम रिंग रोड का निर्माण कार्य शुरू होगा। इसके लिए किसानों के खाता नंबर और एफआइसी कोड मांगे जा रहे है, ताकि उनके खाते में सिंगल क्लीक पर राशि जारी की जा सके।एसडीएम द्वारा किसानों के खाता नंबर पोर्टल पर डालने के बाद विभाग इनकी जांच कर राशि जारी कर देता है। इंदौर जिले में 795 करोड़ मुआवजा एनएचएआइ के प्रोजेक्टर डायरेक्टर बांझल के अनुसार इंदौर जिले की तीन तहसीलों के 26 गांवों में 998 किसानों को 795 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलेगा, जबकि धार जिले की पीथमपुर तहसील में करीब 200 करोड़ रुपये का मुआवजा पारित हुआ है। इंदौर जिले में सांवेर तहसील को सबसे ज्यादा 473 करोड़ रुपये मिलेंगे। सांवेर के 9 गांवों के 512 किसानों को यह रकम दी जाएगी। देपालपुर के 5 गांवों के 153 किसानों को 140 करोड़ और हातोद तहसील के 12 गांवों के 333 किसानों को 182 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है। 570 हेक्टेयर से अधिक जमीन पश्चिम रिंग रोड के लिए इंदौर जिले में 570.5678 हेक्टेयर निजी जमीन और करीब 98.5 हेक्टेयर शासकीय जमीन अधिग्रहित होगी। पहले मुआवजा पुराने गाइडलाइन पर दिया जा रहा था, लेकिन अब औसत खरीदी-बिक्री दर के हिसाब से राशि तय की गई है।इससे किसानों में नाराजगी भी दूर हुई है और अब जमीन अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया है। खाता नंबर लेने का काम किया जा रहा है     किसानों से उनके खाता नंबर लेने का कार्य किया जा रहा है। अब तक 30 प्रतिशत किसानों के खाता नंबर प्राप्त हो चुके हैं। जल्द ही सभी किसानों के खाता नंबर लेकर पोर्टल पर दर्ज किए जाएंगे। जिले में 333 किसानों के खाता नंबर लिए जाना है। पटवारी इसके लिए किसानों से संवाद कर रहे है। – रबी वर्मा, एसडीएम हातोद  

दो सेवानिवृत्त अफसरों ने कायम की मिसाल, गांव में ‘प्रधान जी’ बने दो टॉप अफसर

देहरादून  उत्तराखंड के पहाड़ों से अक्सर पलायन की खबरें आती हैं। लोग बेहतर नौकरी, शिक्षा और जीवन के लिए अपने गाँव छोड़कर शहरों में बस जाते हैं। लेकिन इस बार एक अलग ही कहानी सामने आई है। यह कहानी सुखद है और लोकतंत्र में विश्वास को बढ़ाती है। उत्तराखंड में पंचायत चुनाव का प्रचार चल रहा है। इस दौरान दो ऐसे लोग सामने आए हैं, जिन्होंने सादगी और सेवा की मिसाल पेश की है। ये हैं रिटायर्ड कर्नल यशपाल नेगी और रिटायर्ड आईजी (IPS) विमला गुंज्याल। दोनों ही अफसर अब अपने-अपने गाँव में निर्विरोध प्रधान चुने गए हैं। कर्नल नेगी पौड़ी गढ़वाल जिले के बीरोंखाल ब्लॉक में और आईजी विमला गुंज्याल पिथौरागढ़ जिले के धारचूला में प्रधान चुनी गई हैं। कर्नल नेगी पलायन से दुखी थे और आईजी विमला गुंज्याल अपने गांव की सेवा करना चाहती थीं। कर्नल यशपाल नेगी ने बताया कि वे पहाड़ पर क्यों लौटे। उन्होंने कहा कि वे देश के कई हिस्सों में रहे, लेकिन उनका दिल हमेशा गाँव में रहा। दिल्ली में रहने के दौरान भी वे हर महीने गाँव की बैठक में शामिल होते थे। इससे उन्हें लोगों से मिलने का मौका मिलता था। कर्नल नेगी कहते हैं, "पहाड़ का अपनापन, लोगों का प्यार तो उन्हें अपनी तरफ खींच ही लाया, साथ में पलायन एक मुद्दा था जो मुझे कचोटता था।" इसका मतलब है कि उन्हें पहाड़ के लोगों से बहुत प्यार है। साथ ही, वे पलायन की समस्या से भी परेशान थे। वे गाँव छोड़कर जा रहे लोगों को रोकना चाहते थे। कर्नल नेगी ने अपनी पत्नी को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि उनकी वजह से ही वे खाली जमीन को आबाद कर पाए। कर्नल नेगी ने बताया कि जब वे गाँव आए तो उन्होंने मिर्च की खेती शुरू की। पहले ही साल में उन्हें 70-80 हजार रुपये मिले। इससे उनका हौसला बढ़ गया। कर्नल नेगी ने गाँव की खाली पड़ी 45 नाली जमीन (लगभग ढाई एकड़) को जैविक खेती में बदल दिया। इससे उन्होंने कई युवा किसानों के लिए एक उदाहरण पेश किया। कर्नल नेगी ने लोगों से गाँव लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रधान इसलिए चुना गया है क्योंकि लोगों ने उनका काम देखा है। उन्होंने फौज में नौकरी की है, इसलिए उनके पास काम का अनुभव है। वे आर्मी ऑर्डिनेंस कोर में थे, जो आर्मी के लिए सामान का प्रबंधन करती है। कर्नल नेगी ने कहा कि गाँव में छोटी-छोटी समस्याएं होती हैं। मुखिया इन समस्याओं को हल करने में मदद करता है। अगर गाँव समृद्ध होगा तो राज्य समृद्ध होगा और फिर देश समृद्ध होगा। उन्होंने चिंता जताई कि उनके यहाँ अधिकांश जमीन बंजर हो गई है। जल और जमीन दोनों ही कम हो रहे हैं। कर्नल नेगी ने कहा कि उनका सफर अब शुरू हुआ है और आगे देखते हैं क्या होता है। कर्नल नेगी चाहते हैं कि पहाड़ में वे लोग वापस आएं जो ऊंचे पदों पर रह चुके हैं और जिनके बच्चे अब सेटल हो चुके हैं। खासकर फौजी भाईयों को वापस आना चाहिए। कर्नल नेगी कहते हैं कि "वोकल फॉर लोकल" बोलना आसान है, लेकिन इसे सच में करना बहुत मुश्किल है। इसका मतलब है कि हमें अपने देश में बने सामान को खरीदना चाहिए। लेकिन ऐसा करना इतना आसान नहीं है। IPS ऑफिसर विमला गुंज्याल दूसरी कहानी है रिटायर्ड IPS अधिकारी विमला गुंज्याल की। वे पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजी विजिलेंस) थीं। उन्होंने 30 साल से ज्यादा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड पुलिस विभाग में काम किया। रिटायर होने के बाद वे अपने गाँव लौट गईं। गुंजी गाँव पिथौरागढ़ जिले में धारचूला में भारत-चीन सीमा पर है। यह इलाका बहुत महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति पदक से सम्मानित विमला गुंज्याल ने दिल्ली-देहरादून की आरामदायक जिंदगी नहीं चुनी। उन्होंने गाँव में जाकर बसने और गाँव की जिम्मेदारी संभालने का फैसला किया। गाँव वालों ने भी उन्हें पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ निर्विरोध ग्राम प्रधान चुन लिया। कर्नल नेगी और आईजी गुंज्याल का यह प्रयास उत्तराखंड के गांवों में एक नई उम्मीद लेकर आया है। यह पलायन को रोकने और गांवों को फिर से आबाद करने में मदद कर सकता है। कर्नल यशपाल नेगी और आईजी विमला गुंज्याल की कहानी प्रेरणादायक है। यह दिखाती है कि अगर हम चाहें तो अपने गाँव और समाज के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि रिटायरमेंट के बाद भी जीवन में एक नया मकसद हो सकता है। उनका यह कदम उन लोगों के लिए एक मिसाल है जो अपने गाँव को छोड़कर शहरों में बस गए हैं। इन दोनों अफसरों ने दिखा दिया कि गाँव में रहकर भी तरक्की की जा सकती है। उन्होंने लोगों को यह भी बताया कि गाँव में बहुत संभावनाएं हैं। अगर हम सब मिलकर कोशिश करें तो हम अपने गाँव को फिर से समृद्ध बना सकते हैं।

भाजपा छोड़ जनसुराज में शामिल हुए यूट्यूबर मनीष कश्यप: पटना के बापू सभागार में प्रशांत किशोर ने दिलाई सदस्यता

पटना चर्चित यूट्यूबर मनीष कश्यप ने प्रशांक किशोर की जन सुराज का दामन थाम लिया है। सोमवार उन्होने जन सुराज पार्टी की सदस्यता ली। इस दौरान प्रशांत किशोर ने स्वागत करते हुए कहा कि बिहार में व्यवस्था परिवर्तन की चाहत रखने वाले सभी लोगों को साथ आना चाहिए। जन सुराज ज्वाइन करने के मौके पर मनीष कश्यप ने कहा कि वो भाजपा में 13 महीने रहे। इस बार का चुनाव बिहार के भाग्य का चुनाव है। कश्यप ने दावा करते हुए कहा कि अगला 5 साल आपका होगा। बिहार की हकीकत आप सबको पता है। बिहार में कोई सुरक्षित नहीं है। बिहार को अगर सुरक्षित करना चाहते हैं तो जन सुराज की सरकार बनाए। इससे पहले मनीष कश्यप ने सोशल मीडिया पर प्रशांत किशोर, जन सुराज के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह के साथ तस्वीरें शेयर की थी। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि 7 जूलाई को बापू सभागार। उन्होंने आगे लिखा, बुझी हुई आश जलाएंगे हम, घर-घर रोशनी पहुंचाएंगे हम, पलायन का दर्द मिटाएंगे हम, फिर से नया बिहार बनाएंगे हम। आपको बता दें बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में मनीष चनपटिया सीट से चुनाव मैदान में उतरे थे। हालांकि, तब वो निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे। और तीसरे नंबर पर रहे थे। इस सीट से बीजेपी के उमाशंकर सिंह ने जीत दर्ज की थी। इस बार भी मनीष कश्यप के चनपटिया सीट से ही चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हो गई है। वहीं प्रशांत किशोर ऐलान कर चुके हैं कि जन सुराज बिहार की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगी वैसे विवादों से मनीष कश्यप का पुराना नाता रहा है। हाल ही में पीएमसीएच में मनीष कश्यप की डॉक्टरों के साथ मारपीट का मामला छाया रहा था। इससे पहले सारण जिला प्रशासन ने 11 यूट्यूब चैनल पर FIR दर्ज की थी। जिन पर एकतरफा खबरें चलाने का आरोप है। इन चैनलों में मनीष कश्यप का नाम भी शामिल था। मनीष कश्यप पर कानूनी शिकंजा तब कसा था, जब तमिलनाडु में बिहार के लोगों के खिलाफ हिंसा को लेकर एक वीडियो सामने आया था। जिसमें आरोप लगाया गया था कि ये वीडियो मनीष ने फर्जी तरीके से अपने चैनल पर दिखाया है। जिसके बाद तमिलनाडु पुलिस ने गलत बताते हुए केस दर्ज किया था। तमिलनाडु सरकार ने मनीष कश्यप पर एनएसए के तहत भी कार्रवाई की थी। तमिलनाडु में उसके खिलाफ 6 मामले दर्ज हुए थे। 9 महीने बाद मनीष को जेल से रिहाई मिली थी।

मुल्डर ने टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक ठोक मचाई खलबली, लारा का रिकॉर्ड खतरे में

 बुलावायो  बुलावायो के क्वींस स्पोर्ट्स क्लब में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में साउथ अफ्रीका के स्टार ऑलराउंडर वियान मुल्डर ने क्रिकेट इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है. बतौर कप्तान अपने पहले ही टेस्ट मैच में मुल्डर ने तिहरा शतक (300 रन) जड़कर वर्ल्ड क्रिकेट में एक अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम किया. वह टेस्ट क्रिकेट में बतौर कप्तान पहली पारी में तिहरा शतक लगाने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए हैं. वियान मुल्डर का ऐतिहासिक तिहरा शतक 27 साल के वियान मुल्डर को इस टेस्ट में नियमित कप्तान टेम्बा बवुमा और स्टैंड-इन कप्तान केशव महाराज की मौजूदगी में साउथ अफ्रीका की कमान सौंपी गई थी. महाराज को पहले टेस्ट में बल्लेबाजी के दौरान ग्रोइन इंजरी हो गई थी, जिसके बाद मुल्डर को कप्तानी की जिम्मेदारी मिली. यह उनके करियर का पहला मौका था जब वह साउथ अफ्रीकी टीम की कप्तानी करने उतरे. इस चुनौती को स्वीकार करते हुए मुल्डर ने नंबर तीन पर बल्लेबाजी करते हुए न केवल अपनी टीम को शुरुआती झटकों से उबारा, बल्कि एक ऐसी पारी खेली जो क्रिकेट इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी. वियान मुल्डर ने 297 गेंदों का सामना करते हुए तिहरा शतक जड़ा, इस दौरान उन्होंने 38 चौके और 3 छक्के लगाए. ये टेस्ट क्रिकेट का दूसरा सबसे तेज तिहरा शतक भी है. उनसे आगे इस लिस्ट में सिर्फ वीरेंद्र सहवाग हैं. वीरेंद्र सहवाग ने 278 गेंदों पर ये कारनामा किया था. वहीं, वियान मुल्डर साउथ अफ्रीका के सिर्फ दूसरे ऐसे बल्लेबाज भी बने हैं, जिसने टेस्ट में तिहरा शतक लगाया है. इससे पहले सिर्फ हाशिम आमला इस मुकाम तक पहुंच सके थे. रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुआ नाम वियान मुल्डर ने अपनी इस पारी के साथ कई बड़े कारनामे किए हैं. वह वीरेंद्र सहवाग के बाद 300 से कम गेंदों में तिहरा शतक बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज हैं. उन्होंने 300 रन बनाने वाले सबसे युवा टेस्ट कप्तान बनने के बॉब सिम्पसन के 61 साल के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया. अब वह सबसे युवा कप्तान बन गए हैं, जिसने टेस्ट में तिहरा शतक जड़ा है. टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 300 रन (Fastest 300s in Test Cricket) 278 गेंद – वीरेंद्र सहवाग बनाम SA 297 गेंद – वियान मुल्डर  बनाम ZIM* 310 गेंद – हैरी ब्रूक बनाम PAK 362 गेंद – मैथ्यू हेडन बनाम ZIM 364 गेंद – वीरेंद्र सहवाग बनाम PAK इसके अलावा वियान मुल्डर ने टेस्ट क्रिकेट की एक पारी में साउथ अफ्रीका की ओर से सबसे बड़ी पारी खेलनेवाले कप्तान बन गए हैं. ऐसा कर उन्होंने ग्रीम स्मिथ के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. ग्रीम स्मिथ ने साल 2003 में इंग्लैंड के खिलाफ कप्तान के तौर पर एक पारी में 277 रन बनाए थे.  टेस्ट पारी में साउथ अफ़्रीकी कप्तानों द्वारा बनाया गया सर्वोच्च स्कोर  300* – वियान मुल्डर बनाम ज़िम्बाब्वे, 2025* 277 – ग्रीम स्मिथ बनाम इंग्लैंड, 2003 259 – ग्रीम स्मिथ बनाम इंग्लैंड, 2003 234 – ग्रीम स्मिथ बनाम पाकिस्तान, 2013 इसके अलावा मुल्डर टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज तिहरा शतक लगाने वाले सबसे युवा कप्तान बन गए हैं. मुल्डर ने ऐसा कर बॉब सिम्पसन के 61 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. इसके साथ-साथ मुल्डर टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले दूसरे साउथ अफ्रीकी बल्लेबाज हैं. उनसे पहले साउथ अफ्रीका के लिए हाशिम अमला ने तिहरा शतक लगाने का कमाल किया था. साल 2012 में हाशिम अमला ने इंग्लैंड के खिलाफ द ओवल में 311 रन की पारी खेली थी.  टेस्ट में तिहरे शतकों के बारे में रोचक तथ्य कुल तिहरे शतक: 33 इस उपलब्धि को हासिल करने वाले खिलाड़ियों की संख्या: 29 पहला तिहरा शतक: 1930 में एंडी सैंडहम (325) सबसे हालिया तिहरा शतक: 2025 में वियान मुल्डर (300*) सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर: 2004 में ब्रायन लारा (400*) सबसे तेज़ तिहरा शतक: 2008 में वीरेंद्र सहवाग (278 गेंद) सबसे कम उम्र के तिहरे शतक: गारफील्ड सोबर्स (21 साल, 216 दिन) सबसे उम्रदराज तिहरा शतक: एंडी सैंडहम (39 साल, 275 दिन)  

जेनिफर सायमंस बनीं दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम की पहली महिला राष्ट्रपति

पारामरिबो दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम में पहली बार महिला राष्ट्रपति बनी हैं। संसद ने (स्थानीय समयानुसार) को डॉक्टर जेनिफर गेर्लिंग्स-सिमंस को संकटग्रस्त देश की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में चुना। नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी का नेतृत्व करने वाली जेनिफर 16 जुलाई को राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगी।  सूरीनाम की नेशनल असेंबली दो-तिहाई मतों से राष्ट्रपति का चुनाव करती है। जेनिफर, जो पहले कांग्रेसी थीं- ने निर्विरोध चुनाव जीता, क्योंकि उनकी पार्टी ने मई में हुए चुनाव के बाद देश के मौजूदा नेता को हटाने के उद्देश्य से एक गठबंधन बनाया था, जिसमें कोई स्पष्ट विजेता नहीं था। यह गठबंधन ऐसे समय में बना है, जब सूरीनाम को समुद्र के किनारे तेल मिलने की उम्मीद है और 2028 तक इसका उत्पादन शुरू हो सकता है।  पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी और भी बढ़ी: जेनिफर राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के बाद जेनिफर ने कहा, 'मुझे पता है कि राष्ट्रपति का पद बहुत बड़ा है, और इस तथ्य से जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है कि मैं इस पद पर देश की सेवा करने वाली पहली महिला हूं।' बता दें कि सूरीनाम 646,000 से अधिक लोगों वाला डच-भाषी देश है।  भ्रष्टाचार के मामलों से भरा रहा संतोखी का कार्यकाल  राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी का पांच साल का कार्यकाल भ्रष्टाचार के मामलों से भरा रहा है। उन्हें सूरीनाम की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मदद मांगने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके चलते देश के सार्वजनिक कर्ज का बड़े पैमाने पर पुनर्गठन किया गया और सरकारी सब्सिडी में कटौती की गई। इससे आर्थिक हालात थोड़े सुधरे, लेकिन आम लोगों को बहुत मुश्किलें झेलनी पड़ीं और कई बार हिंसक प्रदर्शन भी हुए। जेनिफर की प्राथमिकता- देश की आर्थिक स्थिति सुधारना 71 वर्षीय जेनिफर और उनके साथी ग्रेगरी रुसलैंड ने रविवार को पत्रकार वार्ता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि वे सबसे पहले देश की आर्थिक स्थिति को सुधारेंगे। उन्होंने खासतौर पर छोटे स्तर की सोने की खदानों से टैक्स वसूलने जैसे तरीकों से सरकारी कमाई बढ़ाने की बात कही है। तेल निकलने से पहले करना होगा चुनौतियों का सामना: रामौतारसिंह सूरीनाम के अर्थशास्त्रियों के संघ के पूर्व अध्यक्ष विंस्टन रामौतारसिंह ने कहा कि तेल निकलने से पहले के इन वर्षों में राष्ट्रपति को बहुत चुनौतियों का सामना करना होगा, क्योंकि देश को हर साल लगभग 400 मिलियन डॉलर का कर्ज और ब्याज चुकाना है। उन्होंने कहा, 'सूरीनाम के पास इतना पैसा नहीं है। पिछली सरकार ने ऋणों को पुनर्निर्धारित किया था, लेकिन वह सिर्फ एक अस्थायी रा

पृथ्वी शॉ ने मुंबई की टीम को कहा टाटा … अब घरेलू क्रिकेट में इस स्टेट से खेलेंगे

 मुंबई भारतीय बल्लेबाज और मुंबई के पूर्व खिलाड़ी पृथ्वी शॉ आगामी घरेलू सत्र के लिए सोमवार को महाराष्ट्र की टीम के साथ जुड़ गये हैं। महाराष्ट्र क्रिकेट संघ ने इसकी घोषणा की। शॉ ने किसी और राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए पिछले महीने मुंबई क्रिकेट संघ से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की मांग की थी, जिस पर उसकी संचालन समिति ने मुहर लगा दी थी। शॉ को खराब फिटनेस और अनुशासन संबंधी मुद्दों के कारण मुंबई की लाल गेंद टीम से बाहर कर दिया गया था । उन्होंने मुंबई के लिए अपना पिछला मैच मध्य प्रदेश के खिलाफ सैयद मुश्ताक अली टी20 ट्रॉफी के फाइनल में खेला था। महाराष्ट्र क्रिकेट संघ ने यहां जारी बयान में कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और भारतीय टीम के शीर्ष क्रम के आक्रामक बल्लेबाज पृथ्वी शॉ आधिकारिक तौर पर मुंबई क्रिकेट संघ से अलग हो गये हैं और वह आगामी घरेलू सत्र में महाराष्ट्र क्रिकेट संघ का प्रतिनिधित्व करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘इस रणनीतिक बदलाव को भारतीय घरेलू क्रिकेट में एक महत्वपूर्ण विकास के रूप में देखा जा रहा है, जिससे महाराष्ट्र की टीम और मजबूत होगी। भारत के लिए तीनों फॉर्मेट खेल चुके हैं पृथ्वी शॉ शॉ ने टेस्ट, वनडे और टी20 तीनों प्रारूपों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और मैच जीतने की क्षमता से इंडियन प्रीमियर लीग और घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रभावित किया है। महाराष्ट्र क्रिकेट संघ के अध्यक्ष रोहित पवार ने कहा, ‘उनके शामिल होने से रुतुराज गायकवाड़, अंकित बावने, राहुल त्रिपाठी, मुकेश चौधरी और रजनीश गुरबानी जैसे अनुभवी खिलाड़ियों वाली पहले से ही प्रतिभाशाली टीम की मजबूती और बढ़ेगी। शॉ का अंतरराष्ट्रीय और आईपीएल अनुभव खासकर टीम में युवा खिलाड़ियों को सलाह देने के लिए अमूल्य होगा।’ महाराष्ट्र से जुड़ने के बाद शॉ ने क्या कहा? शॉ ने कहा कि यह कदम उन्हें क्रिकेटर के तौर पर आगे बढ़ने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि करियर के इस पड़ाव पर महाराष्ट्र की टीम से जुड़ने से मुझे क्रिकेटर के तौर पर आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। मैं पिछले कुछ वर्षों में मुंबई क्रिकेट संघ की तरफ से मिले मौके और समर्थन के लिए आभारी रहूंगा।’