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गर्मी में चावल या रोटी? एक्सपर्ट्स ने बताया दोपहर के लिए क्या है बेहतर विकल्प

देश में गर्मी अभी भी अपने चरम पर है और उमस भी लगातार बनी हुई है. गर्मी में अक्सर लोगों का डाइजेशन कमजोर या सुस्त हो जाता है और ऐसे में लोग चाहते हैं कि वो हल्का भोजन करें इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट्स गर्मियों में हल्का और आसानी से पचने वाला खाना खाने की सलाह देते हैं. भारतीय घरों में चावल और रोटी, दोनों ही थाली का अहम हिस्सा हैं. लेकिन जब बात भयंकर गर्मी की हो तो अक्सर लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं कि क्या खाना अधिक फायदेमंद हो सकता है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं चावल और रोटी में से क्या खाना अधिक बेहतर है. डाइजेशन में क्या बेहतर? गर्मियों में भारी भोजन पचाना शरीर के लिए एक बड़ा टास्क होता है. मेडिकल रिपोर्ट्स का कहना है कि चावल में फाइबर की मात्रा गेहूं की रोटी के मुकाबले काफी कम होती है. कम फाइबर होने की वजह से चावल को पचाना आसान है. ऐसे लोग जिन्हें गर्मी के दिनों में ब्लोटिंग, गैस या बदहजमी की शिकायत रहती है, उनके लिए दोपहर के समय चावल खाना रोटी की तुलना में अधिक हल्का साबित होता है. वॉटर कंटेंट और बॉडी टेम्परेचर हेल्थलाइन का कहना है कि पानी से भरपूर फूड्स शरीर के तापमान को कंट्रोल रखने में मदद करते हैं. चावल को पकाते समय वह पानी की भारी मात्रा को सोखता है. दोपहर में चावल खाने से शरीर को थोड़ा एक्स्ट्रा हाइड्रेशन मिलता है जबकि रोटी सूखी होती है और इसे पचाने के लिए शरीर को अपने अंदर के पानी का इस्तेमाल करना पड़ता है. इसलिए वॉटर कंटेंट के मुताबिक, चावल खाना सही माना जाता है. न्यूट्रिशन और फाइबर भले ही चावल पचाने में आसान हो लेकिन न्यूट्रिशन वैल्यू के मामले में रोटी को कम नहीं आंका जा सकता. हेल्थलाइन का कहना है साबुत गेहूं की रोटी में फाइबर, प्रोटीन और आवश्यक मिनरल्स जैसे फास्फोरस और मैग्नीशियम अधिक मात्रा में होते हैं. रोटी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स चावल से कम होता है यानी कि यह ब्लड शुगर लेवल को अचानक नहीं बढ़ाती. हालांकि, गर्मी के लंच में अगर आप चावल खा रहे हैं तो इसके साथ दाल और हरी सब्जियां जरूर खाएं ताकि न्यूट्रिशन बैलेंस बना रहे. दोपहर के लिए क्या है बेस्ट? समर सीजन में दोपहर के खाने के लिए स्लीपिंग और हेल्थ एक्सपर्ट्स चावल को थोड़ा बेहतर मानते हैं क्योंकि यह पेट को ठंडक देता है. लेकिन अगर आप वेट लॉस जर्नी पर हैं या डायबिटीज के मरीज हैं तो आपको चावल की मात्रा पर कंट्रोल रखना होगा. आप चाहें तो दोपहर में ब्राउन राइस का ऑपशन भी चुन सकते हैं. सबसे बेस्ट तरीका यह है कि आप अपनी फिजिकल एक्टिविटी और हेल्थ कंडीशन के हिसाब से डाइट तय करें, लेकिन गर्मियों के लंच को जितना हो सके हल्का खाना खाएं.

मध्यप्रदेश की बेटी का कमाल! प्रिया मालवीय ने इंडियन एयरफोर्स में पाई फ्लाइंग ऑफिसर की रैंक

छिंदवाड़ा   मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की बेटी प्रिया मालवीय ने भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है. एएफसीएटी 2025 परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने ऑल इंडिया 113वीं रैंक हासिल की और चयन की अंतिम सूची में जगह बनाई. अब प्रिया भारतीय वायुसेना में अधिकारी के रूप में सेवा देंगी और हैदराबाद में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी. एक साधारण परिवार से निकलकर देश सेवा के अपने सपने को साकार करने वाली प्रिया की यह उपलब्धि प्रेरणादायक कहानी बन गई है. खास बात यह है कि वह छिंदवाड़ा जिले की पहली बेटी हैं, जिन्हें फ्लाइंग ऑफिसर बनने का गौरव मिला है।  पुलिस परिवार से उड़ान तक का सफर प्रिया मालवीय छिंदवाड़ा की निवासी हैं और उनके पिता रवि मालवीय कोतवाली में एएसआई पद पर पदस्थ हैं. बचपन से पिता को वर्दी में देखकर प्रिया के मन में भी देश सेवा का जज्बा पैदा हुआ. उन्होंने अपने इसी सपने को लक्ष्य बनाकर मेहनत शुरू की और आखिरकार उसे हासिल कर लिया।  एएफसीएटी 2025 में शानदार प्रदर्शन प्रिया ने एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) 2025 में ऑल इंडिया 113वीं रैंक हासिल की. इस परीक्षा के बाद उन्होंने एसएसबी इंटरव्यू और मेडिकल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया. इसके बाद अंतिम मेरिट सूची में उनका चयन फ्लाइंग ऑफिसर के पद के लिए हुआ।  प्रिया ने अपनी सफलता पर क्या कहा? आपके लिए और.. ऑनलाइन तैयारी से हासिल की सफलता प्रिया ने बताया कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोचिंग का सहारा लिया. उनके अनुसार, सही रणनीति और नियमित अध्ययन की मदद से उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल किया. उन्होंने कहा कि हर छात्र को अपने लक्ष्य के प्रति स्पष्टता और मेहनत के साथ आगे बढ़ना चाहिए।  प्रिया ने गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीई की डिग्री प्राप्त की. इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने एयरफोर्स में जाने का लक्ष्य तय किया और एएफसीएटी परीक्षा दी।  प्रिया ने अपनी सफलता को लेकर कहा कि यह उनके लिए गर्व और जिम्मेदारी दोनों का विषय है. उन्होंने अन्य बेटियों को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें अपने सपनों को चुनने और पूरा करने का पूरा अधिकार है. उन्होंने कहा कि बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं, बस उन्हें अवसर और आत्मविश्वास की जरूरत होती है।  पिता बोले- “बेटी ने जीवन सार्थक कर दिया” प्रिया के पिता रवि मालवीय ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है. उन्होंने कहा कि प्रिया हमेशा पढ़ाई के प्रति गंभीर रही और अपनी मेहनत से इस मुकाम तक पहुंची है. उनके शब्दों में, “बेटी ने मेरा जीवन सार्थक कर दिया।  जिले की पहली फ्लाइंग ऑफिसर बनीं प्रिया मालवीय को छिंदवाड़ा जिले की पहली फ्लाइंग ऑफिसर बनने का गौरव हासिल हुआ है. उनकी इस उपलब्धि से जिले में खुशी का माहौल है और युवा उन्हें प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं।  अब हैदराबाद में ट्रेनिंग चयन के बाद अब प्रिया मालवीय भारतीय वायुसेना की ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद जाएंगी. यह प्रशिक्षण उनके करियर का अगला महत्वपूर्ण चरण होगा, जहां उन्हें वायुसेना की जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया जाएगा।  प्रेरणा बनी प्रिया की कहानी प्रिया की सफलता यह साबित करती है कि मेहनत और लगन के बल पर छोटे शहरों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं. उनकी उपलब्धि न केवल छिंदवाड़ा, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है। 

17 साल की तन्वी शर्मा ने किया बड़ा उलटफेर

सिडनी  दो बार की ओलिंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू की अगुआई में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने बुधवार को ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर 500 बैडमिंटन टूर्नामेंट में प्रभावी प्रदर्शन किया जबकि तन्वी शर्मा भी उलटफेर करने में सफल रहीं। तीसरी वरीय सिंधू, तन्वी, मालविका बंसोड, ईशारानी बरुआ और तान्या हेमंत सभी ने राउंड आफ 16 में जगह बनाई। सिंधू ने महिला सिंगल्स के पहले दौर के एकतरफा मुकाबले में पेरू की इनेस लूसिया कास्टिलो सालाजार को सीधे गेम में सिर्फ 32 मिनट में 21-13, 21-11 से हराया। सिंधू अगले दौर में हमवतन ईशारानी से भिड़ेंगी जिन्होंने एक घंटा तीन मिनट चले कड़े मुकाबले में चीन की हान कियान को 22-20, 10-21, 21-14 से शिकस्त दी। दिन का सबसे बड़ा उलटफेर दिन का सबसे बड़ा उलटफेर 17 साल की तन्वी ने किया जिन्होंने पांचवीं वरीय और दुनिया की 11वें नंबर की खिलाड़ी चीनी ताइपे की च्यु पिन चियान को 45 मिनट में 21-12, 22-20 से शिकस्त दी। तन्वी अगले दौर में साथी भारतीय खिलाड़ी मालविका से भिड़ेंगी, जिन्होंने पहला गेम गंवाने के बाद वापसी करते हुए थाईलैंड की तोंरुंग सेहेंग को 15-21, 21-7, 21-13 से हराया। जॉर्ज ने झेली शिकस्‍त पुरुष सिंगल्स में किरण जॉर्ज को कड़े मुकाबले में मलेशिया के जस्टिन हो के विरुद्ध एक घंटा दो मिनट में 19-21, 21-14, 15-21 से हार का सामना करना पड़ा। मिक्स्ड डबल्स में ध्रुव रावत और मनीषा के ने लिन जेडन और विक्टोरिया जोनाडी की स्थानीय जोड़ी को 27 मिनट में 21-13, 21-14 से हराकर दूसरे दौर में प्रवेश किया।  

सीएम सम्राट चौधरी से गूगल प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात, निवेश और टेक सहयोग पर चर्चा

पटना  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बुधवार को नई दिल्ली स्थित बिहार भवन में गूगल इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट चंदू थोटा के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। उस दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कृषि से संबंधित क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने गूगल को बिहार में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) स्थापित करने हेतु आमंत्रित किया। दोनों पक्षों ने बिहार के डिजिटल विकास को गति देने के लिए सुदृढ़ साझेदारी की दिशा में कार्य करने पर सहमति जताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीसीसी नीति के अंतर्गत गूगल के लिए बिहार में बेहतरीन अवसर है। उल्लेखनीय है कि यह नीति राज्य को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए एक प्रमुख तकनीकी और अनुसंधान हब बनाने के उद्देश्य से लागू की गई है। इसका मुख्य लक्ष्य बिहार में आधुनिक तकनीकों (एआइ, क्लाउड कंप्यूटिंग आदि) के केंद्रों की स्थापना को बढ़ावा देना और स्थानीय युवाओं के लिए उच्च-स्तरीय रोजगार सृजित करना है। मौके पर सूचना प्रावैधिकी विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह भी उपस्थित रहे। कंपनियों के अनुकूल नीति बिहार जीसीसी नीति-2026 के अंतर्गत राज्य में जीसीसी स्थापित करने वाली पात्र कंपनियों को पूंजीगत व्यय के 30 प्रतिशत (अधिकतम 50 करोड़ रुपये) तक की सब्सिडी का प्रविधान है। राज्य के मूल निवासियों को रोजगार देने वाली कंपनियों को कर्मचारियों के वेतन पर सब्सिडी मिलेगी। प्रति इकाई अधिकतम 200 कर्मचारियों तक यह सहायता पहले वर्ष में 50 प्रतिशत, दूसरे वर्ष में 40 प्रतिशत और तीसरे वर्ष में 30 प्रतिशत तक होती है। कंपनियों के कार्यालयों के किराये पर भी वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। नवाचार को बढ़ावा देने के लिए पेटेंट फाइलिंग फीस का शत प्रतिशत (पांच वर्षों में 50 लाख रुपये तक) और अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन का 50 प्रतिशत (पांच वर्षों में 25 लाख रुपये तक) वापस किया जाएगा। पटना और दानापुर नगर निगम क्षेत्रों के बाहर जीसीसी स्थापित करने वाली कंपनियों को अतिरिक्त 10 प्रतिशत प्रोत्साहन मिलेगा। जीसीसी क्या है जीसीसी वस्तुत: बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा दूसरे देशों में स्थापित की गई रणनीतिक शाखाएं हैं। इनका मुख्य उद्देश्य बाहरी वेंडर्स पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं का केंद्र बनाकर वैश्विक प्रतिभा, कम लागत और तकनीकी नवाचार (एआइ, क्लाउड कंप्यूटिंग, आरएंडडी और डेटा विश्लेषण आदि) का लाभ उठाना है

‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी लौट आई: अक्षय कुमार की फिल्म में फुल ऑन मस्ती और हंगामा

 लंबे इंतजार के बाद फाइनली ‘वेलकम टू द जंगल’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है. पॉपुलर ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म में अनलिमिटेड कॉमेडी देखने को मिल रही है. ट्रेलर की शुरुआत बेहद अलग तरीके से होती है, जहां एक साथ कई कलाकारों की एंट्री दिखाई जाती हैं और उनका नाम भी लिया जाता है. फिर परेश रावल कहते हैं, पहले टॉप का हीरो था, अब फ्लॉप का हीरो है. वेलकम टू द जंगल का धांसू ट्रेलर आउट ट्रेलर में साफ पता चलता है कि इस बार मेकर्स कॉमेडी को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने वाले हैं. शुरुआत से आखिर तक फुल ऑन मस्ती, कन्फ्यूजन और मजेदार गड़बड़ियों का सिलसिला चलता रहता है, जो आपको हंसने पर मजबूर कर देगा. सबसे खास बात यह है कि वीडियो में पुराने ‘वेलकम’ के कई नॉस्टैल्जिक मोमेंट्स की झलक देखने को मिलती है. खासकर ‘मजनू भाई’ वाइब्स वाला सीक्वेंस टोटल शो-स्टीलर बनकर सामने आया है. वेलकम टू द जंगल के बारे में ‘वेलकम टू द जंगल’ का निर्देशन अहमद खान ने किया है. फिल्म 26 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. मेकर्स का दावा है कि इस बार फ्रेंचाइजी एंटरटेनमेंट और कॉमेडी की सारी हदें पार कर देगी. फिल्म की स्टारकास्ट इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है. अक्षय कुमार के अलावा इसमें सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडिस, रवीना टंडन, लारा दत्ता, जैकी श्रॉफ, उर्वशी रौतेला, परेश रावल, जॉनी लीवर, राजपाल यादव, श्रेयस तलपड़े, तुषार कपूर, कृष्णा अभिषेक, कीकू शारदा और दलेर मेहंदी जैसे स्टार्स की टोली है. फिल्म साल 2026 की सबसे बड़ी बॉलीवुड कॉमेडी फिल्मों में से एक बनने जा रही है. दर्शक इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.

5 राज्यों में फैला ड्रग नेटवर्क ध्वस्त, सिरसा में एएनटीएफ ने पकड़ी करोड़ों की खेप

 जयपुर राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार कार्रवाई करते हुए नशे के खिलाफ अपने अभियान में एक और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई में मणिपुर से उत्तर भारत के रास्ते राजस्थान लाई जा रही करीब 90 किलोग्राम अवैध अफीम के दूध की खेप जब्त की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत 4.50 करोड़ रुपये आंकी गई है। हरियाणा के सिरसा जिले में हरियाणा पुलिस के सहयोग से अंजाम दी गई यह कार्रवाई हाल के वर्षों में एएनटीएफ की सबसे बड़ी और प्रभावशाली कार्रवाइयों में गिनी जा रही है। राजस्थान को नशामुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का कहर अब नशे के सौदागरों पर वज्र बनकर टूटा है। एएनटीएफ महानिरीक्षक पुलिस श्री विकास कुमार ने बताया कि  उत्तर-पूर्वी राज्यों से उत्तर भारत में आ रही नशे की बड़ी खेपों को रोकने के लिए 'मणिपुर मॉड्यूल' पर तकनीकी अन्वेषण शुरू किया गया था। महीनों की अथक मेहनत और 5 राज्यों में फैले जाल को काटकर एएनटीएफ ने यह ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। दो महीने तक पकाई खिचड़ी: साए की तरह पीछे लगी रही एएनटीएफ एएनटीएफ को मणिपुर और उत्तर-पूर्वी राज्यों से राजस्थान में भारी मात्रा में मादक पदार्थ लाए जाने का इनपुट मिल रहा था। आईजी श्री विकास कुमार ने अपनी विशेष खुफिया टीमों को तीन बार मणिपुर भेजा, जहां टीमों ने 10-10 दिन कैंप कर पूरे इलाके का सर्वे किया। इस दौरान पाली निवासी सुखराम विश्नोई रडार पर आया, जो लगातार मणिपुर और राजस्थान के चक्कर काट रहा था। इस बार जब सुखराम मणिपुर गया, तो एएनटीएफ की टीमें साए की तरह उसके पीछे लग गईं। शातिर सुखराम लगातार अपने फोन, गाड़ियां और रास्ते बदलता रहा, लेकिन एएनटीएफ का इरादा नहीं बदल सका। मौज-मस्ती, भगवत भक्ति और पुलिस की पहेली मणिपुर से नशे का सौदा फाइनल कर सुखराम अपने ऐश-ओ-आराम के ठिकाने लखनऊ उत्तर प्रदेश पहुंचा। वहां उसने अपनी एक महिला मित्र को बुलाया और उसके साथ नैनीताल तथा प्रसिद्ध कैंची धाम की यात्रा कर जीवन के आनंद लेता रहा। एएनटीएफ इस पहेली को सुलझाने में जुटी रही कि जिस गाड़ी में करोड़ों का नशा होने का शक है, उससे यह जोड़ा खुलेआम घूम कैसे रहा है? आखिरकार, महिला मित्र बस से जयपुर के लिए रवाना हुई और सुखराम अपनी मिजोरम नंबर की कार से अलग रास्ते से जयपुर की तरफ बढ़ा। फोन बदले, गाड़ियां बदलीं, रास्ते बदले… लेकिन नहीं टूटा पुलिस का पीछा जयपुर के नजदीक नाकाबंदी कर एएनटीएफ ने सुखराम को दबोच लिया, लेकिन पूरी कार खंगालने पर भी एक ग्राम अफीम नहीं मिली। दरअसल, सुखराम ने टोल नाके पर पुलिस को देखकर अपने सारे मोबाइल और तकनीकी उपकरण रिसेट कर दिए थे। एएनटीएफ की तकनीकी विंग ने जब सुखराम के रिसेट उपकरणों से डेटा रिकवर किया, तो उसमें एक संदिग्ध ट्रक के फास्टैग कार्ड की डिटेल मिली। गहनता से जांच करने पर पता चला कि इस ट्रक का फास्टैग भुगतान सुखराम खुद कर रहा था और वह ट्रक मणिपुर से असम, पश्चिम बंगाल, बिहार और यूपी होते हुए हरियाणा की सीमा में दाखिल हो चुका था। श्रीनगर और जम्मू का 'कोड वर्ड' एएनटीएफ की हनुमानगढ़, गंगानगर और नागौर की टीमें तुरंत उस ट्रक के पीछे लग गईं। इसी बीच जम्मू में बैठे मुख्य सूत्रधार मगनलीप (काल्पनिक नाम) ने सुखराम के पकड़े जाने के डर से ट्रक ड्राइवर को कोड वर्ड में निर्देश दिया- "रात तक श्रीनगर (जोधपुर) पहुंचना था पर अब जम्मू ही रुकना पड़ेगा, आगे नहीं जाएंगे।" इसका मतलब था कि पुलिस के डर से अब माल राजस्थान नहीं बल्कि रास्ते में ही ठिकाने लगाया जाएगा। इसके बाद ट्रक अचानक राजस्थान सीमा से ठीक पहले हरियाणा के सिरसा इलाके में रुक गया। महिला इंस्पेक्टर का जांबाज नेतृत्व और सिरसा पुलिस की मुस्तैदी इस क्रिटिकल मोड़ पर आईजी विकास कुमार ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने रात के करीब 03:30 बजे हरियाणा के सिरसा एसपी श्री दीपक सारण को फोन किया। मुस्तैदी दिखाते हुए सिरसा एसपी ने तत्काल अपनी फोर्स को राजस्थान एएनटीएफ की टीम के साथ अटैच किया। इस पूरे धरपकड़ ऑपरेशन की कमान एएनटीएफ की महिला इंस्पेक्टर श्रीमती किरणजीत कौर (हनुमानगढ़ टीम प्रभारी) के हाथ में थी, जो पिछले 36 घंटों से बिना खाए-पिये और बिना सोए पूरी मुस्तैदी से अपने कर्तव्य को अंजाम दे रही थीं। संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर संदिग्ध ट्रक को ढूंढ निकाला। ट्रक के नीचे वेल्डिंग कर बनाया था गुप्त कमरा शुरुआती जांच में ट्रक पूरी तरह खाली मिला और ड्राइवर अनजान बनता रहा। लेकिन जब एएनटीएफ की टीम ने ट्रक के निचले हिस्से (चेसिस) की बारीकी से जांच की, तो दंग रह गए। तस्करों ने ट्रक के नीचे लोहे की पत्तियों से वेल्डिंग कर और नट-बोल्ट लगाकर एक गुप्त कमरेनुमा केबिन बना रखा था। जब कटर से उस तहखाने को तोड़ा गया, तो उसके अंदर से 95 पोटलियों में पैक 88.970 किलोग्राम अवैध अफीम बरामद हुई। मौके से आरोपी किशनाराम विश्नोई पुत्र छोगा राम उम्र 44 साल निवासी शिवपुरा जिला पाली को गिरफ्तार किया गया और मुख्य सूत्रधार सुखराम विश्नोई को हिरासत में लिया गया। क्यों रखा गया 'ऑपरेशन जमुहार' नाम? पांच राज्यों में फैले इस नेटवर्क को ध्वस्त करने वाले इस मेगा ऑपरेशन का नामकरण (ज-मु-हा-र) इन राज्यों के शुरुआती अक्षरों को मिलाकर किया गया: ° *ज* – जम्मू (जहां मुख्य सूत्रधार बैठा था) ° *म* – मणिपुर (जहां से नशे की खेप चली) ° *उ* – उत्तर प्रदेश (ट्रांजिट पॉइंट – लखनऊ) ° *हा* – हरियाणा (जहां माल को दबोचा गया) ° *र* – राजस्थान (जहां नशे की सप्लाई होनी थी) ° *शाब्दिक अर्थ:* 'जमुहार' का शाब्दिक अर्थ मुख्य फसल को नुकसान पहुंचाने वाली 'जहरीली घास' होता है, जो मणिपुर से लाए जा रहे अफीम के इस जहर के लिए बिल्कुल सटीक बैठता है। मुख्यालय में किया जाएगा जांबाज टीम को सम्मानित एएनटीएफ महानिरीक्षक श्री विकास कुमार ने बताया कि हाल ही के दिनों की यह सबसे बड़ी और प्रभावशाली कार्रवाई है। 36 घंटों तक बिना आराम किए इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने वाली महिला निरीक्षक किरणजीत कौर और उनकी पूरी टीम को विशेष कार्यक्रम आयोजित कर एएनटीएफ मुख्यालय, जयपुर में सम्मानित किया जाएगा। एएनटीएफ की आमजन से अपील महानिरीक्षक … Read more

भारतीय पुरुषों में बढ़ती तोंद का बड़ा कारण, खराब डाइट और लाइफस्टाइल जिम्मेदार

भारत में पुरुषों का मोटापा और बाहर निकली हुई तोंद आज के समय में काफी कॉमन समस्या बन चुकी है. जहां पहले कुछ लोग ही ओवरवेट होते थे, वहीं आजकल कम उम्र के लोगों में भी पेट बाहर आने की समस्याएं दिख रही हैं, जबकि वेस्टर्न देशों के पुरुष बढ़ती उम्र में भी काफी फिट और मस्कुलर नजर आते हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसके पीछे कोई जेनेटिक जादू नहीं बल्कि हमारी रोजाना की खराब आदतें और डाइट पैटर्न जिम्मेदार हैं. यदि समय रहते इन गलत आदतों को सुधार लिया गया तो आप भी तोंद कम कर सकते हैं और बीमारियों से बच सकते हैं. लेकिन उससे पहले भारतीयों की तोंद निकलना का कारण समझ लीजिए. कम प्रोटीन और ज्यादा कार्ब्स की आदत भारतीय पुरुषों के मोटे होने का सबसे बड़ा कारण उनका खानपान है. दरअसल, भारतीयों की डेली डाइट में प्रोटीन की मात्रा बहुत कम और कार्बोहाइड्रेट्स (जैसे रोटी, चावल) की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. वहीं इसके विपरीत वेस्टर्न पुरुष हाई प्रोटीन और एक बैलेंस्ड डाइट को फॉलो करते हैं. इसके अलावा भारतीय पुरुष दिनभर में कई बार मीठी चाय, बिस्कुट और नमकीन खाते हैं जो शरीर में एक्स्ट्रा कैलोरी स्टोर करता है. वेस्टर्न लाइफस्टाइल में प्रोसेस्ड फूड और मीठे का सेवन काफी सीमित मात्रा में किया जाता है. खराब ईटिंग टाइमिंग और सिटिंग लाइफस्टाइल भारतीय वर्किंग कल्चर में ज्यादातर पुरुषों की लाइफस्टाइल बैठने वाली हो चुकी है जिसमें फिजिकल मूवमेंट बहुत कम होता है. सबसे बड़ी गड़बड़ी रात के खाने के समय में होती है. भारतीय घरों में अक्सर देर रात 10 या 11 बजे हैवी डिनर किया जाता है और लोग तुरंत सो जाते हैं. वहीं, वेस्टर्न देशों में लोग शाम को 7 से 8 बजे तक अपना लाइट डिनर पूरा कर लेते हैं. देर से खाने और कम एक्टिविटी के कारण कैलोरी बर्न नहीं हो पाती और वह सीधे पेट के आसपास फैट के रूप में जमा होने लगती है. कम नींद, भारी स्ट्रेस और पानी की कमी मोटापे का सीधा कनेक्शन मेंटल हेल्थ और स्लीपिंग पैटर्न से भी है. भारतीय पुरुष अक्सर काम के प्रेशर में ज्यादा स्ट्रेस लेते हैं और मात्र 5-6 घंटे की अधूरी नींद लेते हैं, जिससे हार्मोनल इंबैलेंस होने लगता है. वहीं वेस्टर्न लाइफस्टाइल में बेहतर स्ट्रेस मैनेजमेंट और 7-8 घंटे की गहरी नींद को प्राथमिकता दी जाती है. इसके अलावा भारतीय पुरुषों की डाइट में फाइबर और पानी की भारी कमी देखी जाती है जिससे डाइजेशन सुस्त हो जाता है. तोंद कम करने के लिए क्या करें? एक्सपर्ट्स का कहना है, यदि आप भी बाहर निकलती तोंद को अंदर करना चाहते हैं तो सिर्फ क्रैश डाइट करने से काम नहीं चलेगा. इसके लिए आपको अपनी आदतें बदलनी होंगी. हर मील में अंडे, पनीर या दाल जैसे प्रोटीन के ऑप्शंस शामिल करें. रोजाना कम से कम 8 से 10 हजार स्टेप्स पैदल चलने की आदत डालें. चीनी, मीठी चाय और जंक फूड को अपनी लाइफ से तुरंत कम करें. रात का डिनर हर हाल में 7-8 बजे तक खत्म कर लें और 7-8 घंटे की भरपूर नींद लें. इसके साथ ही हफ्ते में 4 से 5 दिन वर्कआउट जरूर करें.

सोशल मीडिया और AI पर सख्ती: कनाडा लाएगा नया डिजिटल सेफ्टी विधेयक

अब एक और देश बच्चों को सोशल मीडिया से होने वाले नुकसान से बचाना चाहता है, जिसके लिए वह एक नया कानून ला रहा है. इस देश का नाम कनाडा है और वहां की सरकार ने एक नया डिजिटल सुरक्षा विधेयक पेश किया है. नए विधेयक के तहत 16 साल से कम उम्र के किशोर और बच्चों को सोशल मीडिया पर प्रतिबंधित किया जाएगा. हालांकि नए कानून के तहत उन प्लेटफॉर्म को छूट भी मिल सकती है, जो कुछ सेफ्टी रूल्स को फॉलो करते हैं. AI चैटबॉट्स भी होंगे रेगुलाइज जानकारी के मुताबिक, नया विधेयक AI चैटबॉट्स को भी अधिक सुरक्षित बनाने के लिए एक डिजिटल रेगुलेटर बनाने का भी प्रस्ताव रखा है, जो असल में सेफ्टी रूल्स को तैयार करेगा. डिजिटल सेफ्टी एक्ट का विधेयक लाने के साथ ही कनाडा भी उन देशों की सूची में शामिल किया जा चुका है, जो बच्चों पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक प्रभावों को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए सख्त कानून लेकर आ रहे हैं.   कनाडा के मंत्री मार्क मिलर ने कहा है कि उन्होंने देखा है कि ऑनलाइन नुकसान कितने गंभीर परिणाम पैदा कर सकते हैं. उन्होंने आगे कहा कि बच्चों की सुरक्षा को टाला नहीं जा सकता है. नियम ना मानने पर लगेगी पैनल्टी कनाडा के प्रस्तावित विधेयक में पेनल्टी को भी मेंशन किया है, जहां बताया गया है कि अगर कोई कंपनी नियम का पालन नहीं करती हैं तो उनपर ग्लोबल रेवेन्यू या 3 परसेंट या 1 करोड़ कनाडाई डॉलर (लगभग 68 करोड़ रुपये) तक का हर्जाना लगाया जा सकता है, जो अधिक हो. विधेयक Bill C-34 के प्रस्ताव में कनाडा सरकार ने कहा कि ऑनलाइन नुकसान केवल नागरिकों से नहीं बल्कि डिजिटल सेवाओं के डिजाइन और ऑपरेशनल सिस्टम की वजह से भी होते हैं.   सुरक्षा संबंधित बातों को ध्यान में रखते हुए विधेयक सोशल मीडिया और AI चैटबॉट्स के लिए नए सुरक्षा नियम लागू करना चाहता है. इसके साथ ही कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर संभावित जोखिमों की पहचान करनी होगी और उन्हें कम करने की दिशा में काम करना होगा. ऑस्ट्रेलिया बन चुका है पहला देश   बीते साल के दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश बन चुका है, जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को बैन किया जा चुका है. कानून लागू होने के बाद एक महीने के अंदर कंपनियों ने सामूहिक रूप से 50 लाख टीनएजर्स के अकाउंट को डिएक्टिवेट कर दिया था. और भी देश कर रहे हैं तैयारी कनाडा ही नहीं और भी देश बच्चों पर सोशल मीडिया की वजह से पड़ने नकारात्मक नुकसान को कम करना चाहते हैं. इसके लिए वे देश भी सोशल मीडिया उपयोग पर लगने वाले नियमों को सख्त करने की दिशा में काम कर रहे हैं. ग्रीस कर चुका है ऐलान ग्रीस अप्रैल में ऐलान कर चुका है कि वह जनवरी 2027 से 15 साल से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को बैन करेगा.

Airtel की ‘Fast Lane’ सर्विस क्या है? रीब्रांड के बाद फिर छिड़ी नेट न्यूट्रैलिटी की बहस

भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में एक बार फिर बहस छिड़ गई है. एयरटेल ने अपने ‘Priority Postpaid’ प्लान को रीब्रांड करके अब ‘Fast Lane’ नाम दे दिया है. नाम बदलने के साथ ही यह सर्विस फिर चर्चा में आ गई है, क्योंकि इसे लेकर पहले ही यूजर्स में काफी नाराजगी देखी गई थी. दरअसल Airtel ने कुछ समय पहले ‘Priority’ नाम से एक पोस्टपेड सर्विस शुरू की थी. कंपनी का दावा था कि इस प्लान में पोस्टपेड यूजर्स को भीड़-भाड़ वाले इलाकों में प्रीपेड यूजर्स के मुकाबले ज्यादा स्पीड मिलेगी और बेहतर नेटवर्क एक्सपीरियंस मिलेगा. हालांकि, जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई कि क्या अब बेहतर नेटवर्क स्पीड पाने के लिए अलग से पैसे देने पड़ेंगे? अब कंपनी ने उसी सर्विस को नए नाम ‘Fast Lane’ के साथ पेश किया है. Airtel ने सिर्फ नाम बदला है, जबकि प्लान और इसकी सुविधाएं लगभग पहले जैसी ही हैं. कंपनी इसे एक प्रीमियम एक्सपीरियंस के तौर पर पेश कर रही है. कंपनी के मुताबिक नया पोस्टपेड प्लान रीब्रांड कर दिया गया है. दरअसल कंपनी नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी का यूज करके बेहतर 5G एक्सपीरिएंस देने की बात कह रही है. एयरटेल के मुताबिक फास्ट लेन नाम इस प्लान के हिसाब से सही है, इसलिए प्रायॉरिटी प्लान की जगह ये नया नाम दिया गया है. Fast Lane है क्या? आसान भाषा में समझें तो यह एक ऐसी सर्विस है जिसमें कुछ यूजर्स को नेटवर्क पर प्रायॉरिटी दी जाती है. यानी जब नेटवर्क पर ज्यादा भीड़ होती है, तब Fast Lane वाले यूजर्स को बेहतर स्पीड और कम लेटेंसी मिल सकती है. यही वजह है कि इसे लेकर नेट न्यूट्रैलिटी की बहस फिर शुरू हो गई है. नेट न्यूट्रैलिटी का मतलब होता है कि सभी यूजर्स को इंटरनेट पर बराबर का एक्सेस मिले. लेकिन अगर कुछ यूजर्स को पैसे देकर ‘फास्ट लेन’ मिलती है, तो बाकी यूजर्स के लिए अनुभव खराब हो सकता है. कंपनी का स्टैंड है कि इस तरह की सर्विस से नेट न्यूट्रैलिटी के साथ कोई खिलवाड़ नहीं हो रहा है. दूसरी कंपनियों ने भी कहा है कि नेटवर्क स्लाइसिंग पहले से यूज होता आया है. कंपनी का कहना है कि यह सर्विस नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी पर बेस्ड है, जो 5G के साथ आती है. इसका मतलब यह है कि नेटवर्क को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर अलग-अलग यूजर्स को अलग अनुभव दिया जा सकता है. कंपनी यह भी दावा करती है कि इससे बाकी यूजर्स पर कोई नेगेटिव असर नहीं पड़ेगा. यानी फास्ट लेन लेने वालों को फायदा मिलेगा, लेकिन बाकी लोगों की स्पीड कम नहीं होगी. लेकिन टेक एक्सपर्ट्स इस दावे को पूरी तरह से मानने के लिए तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि अगर नेटवर्क लिमिटेड है और कुछ यूजर्स को प्राथमिकता दी जाती है, तो इसका असर बाकी यूजर्स पर जरूर पड़ेगा, खासकर भीड़ वाले इलाकों में. कुछ यूजर्स का कहना है कि यह टेलीकॉम इंडस्ट्री में एक खतरनाक शुरुआत हो सकती है, जहां फ्यूचर में हर बेहतर सर्विस के लिए अलग से पैसे देने पड़ेंगे. वहीं कुछ लोग इसे प्रीमियम सर्विस मानते हैं, जैसे एयरपोर्ट पर फास्ट ट्रैक या टोल पर फास्टैग. यानी जो ज्यादा पैसे देगा, उसे बेहतर और तेज अनुभव मिलेगा.. अगर यह मॉडल सफल होता है, तो आने वाले समय में बाकी टेलीकॉम कंपनियां भी इसी रास्ते पर चल सकती हैं. इसका मतलब यह होगा कि इंटरनेट का अनुभव अब पूरी तरह समान नहीं रहेगा. फिलहाल Airtel ने साफ किया है कि प्लान्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है, सिर्फ ब्रांडिंग बदली गई है.

लोकसभा में अलग ब्लॉक की मांग, TMC में 20 सांसद बागी गुट में शामिल

पश्चिम बंगाल TMC लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी पार्टी के बागी 'काकोली ग्रुप' में शामिल हो गए हैं. उन्होंने संसद में एक अलग ब्लॉक बनाने की मांग वाले पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. उनके इस कदम से तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल में विभाजन का संकट और गहरा गया है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) में चल रही बगावत रूकने का नाम नहीं ले रही है. बुधवार तक जो लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी ममता के साथ खड़े थे उन्होंने अब पार्टी आलाकमान के खिलाफ बगावती रुख अपनाते हुए बागी सांसदों के 'काकोली ग्रुप' का दामन थाम लिया है. प्रसून बनर्जी ने संसद में एक अलग गुट बनाने की मांग करने वाले पत्र पर अपने हस्ताक्षर (साइन) भी कर दिए हैं. टीएमसी के भीतर का बागी गुट लोकसभा में खुद को एक अलग ब्लॉक के रूप में मान्यता दिलाने की कोशिशों में जुटा है. इस गुट में अभी तक प्रसून को मिलाकर 20 लोकसभा सांसद शामिल हो चुके हैं. वहीं अब ममता के खेमे में 8 सांसद बचे हैं. बागी गुट अपने कुनबे को बढ़ाने के लिए लगातार सांसदों का समर्थन जुटा रहा है. प्रसून बनर्जी हावड़ा से लगातार तीसरी बार सांसद चुने गए हैं और खेल जगत के साथ-साथ राजनीति में भी उनका बड़ा कद है. TMC के बागी सांसदों की लिस्ट आई सामने! शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान का भी नाम इससे पहले राज्यसभा से कई सांसदों के इस्तीफे और कुछ अन्य सांसदों के बागी गुट के संपर्क में होने की खबरें आई थीं. हालांकि, कुछ सांसदों ने इन खबरों का खंडन भी किया था, लेकिन प्रसून बनर्जी के इस कदम ने बागी गुट के दावों को मजबूत कर दिया है.