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बाढ़-जलभराव से निपटने के लिए 15 जून से 24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय

 जयपुर  आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि आगामी मानसून के दृष्टिगत प्रदेश में संभावित बाढ़, अतिवृष्टि, जलभराव एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी विभाग व्यापक एवं समन्वित तैयारियां सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा संभावित आपदा की स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए अभी से पूर्ण तैयारी रखें। शासन सचिवालय के सभागार में गुरुवार को आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में डॉ.किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि पिछले वर्षों के अनुभवों एवं संवेदनशील क्षेत्रों के आकलन के आधार पर बाढ़ संभावित एवं जलभराव वाले क्षेत्रों की पुनः पहचान की जाए तथा वहां आवश्यक संसाधनों की अग्रिम उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में पूर्व तैयारी, समयबद्ध चेतावनी, त्वरित प्रतिक्रिया तथा प्रभावी समन्वय सफलता का आधार है। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य एवं जिला स्तर पर स्थापित आपदा नियंत्रण कक्ष 15 जून से चौबीसों घंटे सक्रिय रहें। राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष, जिला नियंत्रण कक्ष तथा विभागीय नियंत्रण कक्षों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए तथा सभी सूचनाएं समय पर राज्य नियंत्रण कक्ष को प्रेषित की जाएं। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों एवं एडवाइजरी की पूर्ण पालना सुनिश्चित की जाए। आपदा प्रबंधन मंत्री ने कहा कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा 24 घंटे संचालित वेधशालाओं एवं मौसम निगरानी तंत्र के माध्यम से नियमित मौसम पूर्वानुमान एवं चेतावनियां जारी की जा रही हैं। मौसम संबंधी जानकारी के त्वरित प्रसार के लिए सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया, एसएमएस, व्हाट्सएप समूहों तथा अन्य संचार माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों को सचेत ऐप डाउनलोड कर चेतावनी अलर्ट से अद्यतन रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानसून की नियमित निगरानी के लिए वेदर वॉच ग्रुप का गठन किया गया है, जो नियमित बैठकों के माध्यम से वर्षा की स्थिति, संभावित जोखिमों तथा आवश्यक तैयारियों की समीक्षा करेगा। राज्य एवं जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन तंत्र, मौसम विभाग, जल संसाधन विभाग तथा जिला प्रशासन के बीच सतत समन्वय बनाए रखा जाएगा।  डॉ. मीणा ने जल संसाधन विभाग को सभी बांधों, जलाशयों एवं एनीकटों के गेटों की मरम्मत, रखरखाव एवं नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए प्रभावी अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करने, बाढ़ संभावित क्षेत्रों का जोखिम मूल्यांकन करने तथा आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।  उन्होंने नगरीय विकास विभाग, स्थानीय निकायों एवं पंचायतीराज संस्थाओं को नालों की सफाई, ड्रेनेज तंत्र को सुचारू बनाने, जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान करने तथा डी-वाटरिंग के लिए पर्याप्त पम्पसेट, जनरेटर, रेत की बोरियां एवं अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उचित ड्रेनेज व्यवस्था के माध्यम से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या को न्यूनतम किया जाए।  डॉ. मीणा ने कहा कि बाढ़ प्रबंधन के लिए त्रिस्तरीय तैयारी सुनिश्चित की जाए। इसमें बाढ़ से पूर्व की तैयारी, बाढ़ के दौरान राहत एवं बचाव कार्य तथा बाढ़ के पश्चात पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की कार्ययोजना शामिल हो। जिला कलक्टर बाढ़ संहिता के अनुसार सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। उन्होंने राज्य आपदा मोचन बल एसडीआरएफ, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल एनडीआरएफ, सेना, वायुसेना, पुलिस, सिविल डिफेंस, होमगार्ड तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों को पूर्ण सतर्कता बनाए रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। विशेष बचाव दलों एवं क्विक रिस्पॉन्स टीमों की तैनाती कर आवश्यक उपकरणों, नौकाओं, लाइफ जैकेट, रस्सियों एवं अन्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।  बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को 24×7 नियंत्रण कक्ष संचालित करने, पर्याप्त दवाइयों एवं जीवनरक्षक औषधियों का भंडारण रखने तथा मोबाइल मेडिकल टीमों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही जलजनित एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए विशेष निगरानी रखने को कहा गया। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को सुरक्षित पेयजल आपूर्ति, क्लोरीनेशन तथा क्षतिग्रस्त जलापूर्ति लाइनों की त्वरित मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।  ऊर्जा विभाग को विद्युत आपूर्ति व्यवस्था सुचारू बनाए रखने, क्षतिग्रस्त लाइनों एवं ट्रांसफार्मरों की त्वरित मरम्मत तथा राहत शिविरों में निर्बाध विद्युत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। जिलों में उपलब्ध हेवी ड्यूटी जनरेटर सेट्स का डेटाबेस तैयार कर आवश्यकता पड़ने पर उनका उपयोग सुनिश्चित करने को कहा गया।  उन्होंने सार्वजनिक निर्माण विभाग को जर्जर भवनों की पहचान करने, रेलवे अंडरपास एवं संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों में चेतावनी संकेतक लगाने तथा क्षतिग्रस्त सार्वजनिक परिसंपत्तियों के त्वरित पुनर्स्थापन की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। सभी विभागों को अपने क्षेत्राधिकार में जर्जर भवनों एवं जोखिम वाले स्थलों का सर्वेक्षण कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।  पशुपालन विभाग को पशुओं के लिए चारा, दवाइयों एवं टीकाकरण की पर्याप्त व्यवस्था रखने तथा पशुपालकों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए। वहीं मत्स्य विभाग को मछुआरों, तैराकों एवं विशेषज्ञ गोताखोरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को संवेदनशील क्षेत्रों के लिए आवश्यक खाद्यान्न एवं अन्य जरूरी वस्तुओं का अग्रिम भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। डॉ. मीणा ने जिला कलक्टरों को राहत शिविरों, निकासी मार्गों, सुरक्षित आश्रय स्थलों, खोज एवं बचाव दलों तथा उपलब्ध संसाधनों का पूर्व परीक्षण करने के निर्देश दिए। जलभराव एवं बाढ़ संभावित क्षेत्रों की मैपिंग, राहत शिविरों का चिन्हीकरण तथा मॉक ड्रिल आयोजित कर तैयारियों की समीक्षा करने को कहा । जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों की बैठकें आयोजित कर विभागवार तैयारियों की समीक्षा करने तथा ग्राम स्तर तक चेतावनी एवं सूचना तंत्र को सुदृढ़ बनाने को निर्देशित किया।  आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा राज्य मंत्री श्री ओटाराम देवासी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य आपदा आने पर राहत पहुंचाने के साथ पूर्व चेतावनी एवं समयबद्ध तैयारी के माध्यम से जनहानि एवं संपत्ति की क्षति को न्यूनतम करना है। उन्होंने कहा कि 15 जून से राज्य एवं जिला आपदा नियंत्रण कक्ष 24×7 सक्रिय रहेंगे तथा हेल्पलाइन सेवाएं भी पूर्ण रूप से कार्यशील रहे। मौसम विभाग, जल संसाधन विभाग, जिला प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन तंत्र के मध्य सतत समन्वय स्थापित कर संभावित अतिवृष्टि, जलभराव एवं बाढ़ की परिस्थितियों पर निरंतर निगरानी रखने के निर्देश दिए।  श्री देवासी ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, राहत शिविरों की तैयारी, … Read more

जौनपुर में सबसे ज्यादा, गौतमबुद्धनगर में सबसे कम मतदाता—जानें पूरी सूची

लखनऊ यूपी निर्वाचन आयोग ने बुधवार को बहुप्रतिक्षीत त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी। इसमें कुल 12.58 करोड़ मतदाता हैं। पुनरीक्षण में 29 लाख के नाम बढ़े हैं और 2.03 करोड़ के नाम सूची से काटे गए हैं। जौनपुर में सबसे ज्यादा 36.97 लाख और गौतमबुद्धनगर में सबसे कम 2.09 लाख मतदाता हैं। पहली बार सभी मतदाताओं के स्टेट वोटर नंबर (एसवीएन) जारी किए गए हैं। चुनाव में फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) की मदद से फर्जी वोटिंग रोकी जाएगी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अब फर्जी मतदान करना संभव नहीं होगा। फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) से मतदाताओं की फोटो खींचकर उसका तुरंत पूरा ब्योरा चेक किया जाएगा। इससे पहले किस मतदान किया है, तो तुरंत पकड़ा जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग तकनीक के प्रयोग से फर्जी मतदान को रोकेगा। नई सूची में 2.32 करोड़ मतदाताओं के नाम जोड़े गए राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी की। वर्ष 2021 की मतदाता सूची में 12.29 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल थे। वर्ष 2025-26 की मतदाता सूची में 12.58 करोड़ मतदाता हैं। नई मतदाता सूची में कुल 2.32 करोड़ मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं। मृतक व स्थानांतरित इत्यादि 2.03 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। ऐसे में 29.01 लाख वोटरों के नाम मतदाता सूची में बढ़े हैं। जौनपुर में सबसे ज्यादा, गौतमबुद्धनगर में सबसे कम मतदाता जौनपुर में सबसे अधिक 36.97 लाख, दूसरे नंबर पर आजमगढ़ में 35.76 लाख व तीसरे नंबर पर प्रयागराज में 34.95 लाख मतदाता हैं। सबसे कम गौतमबुद्धनगर में 2.09 लाख मतदाता हैं। सबसे कम मतदाता वाले जिलों में दूसरे नंबर पर महोबा में 5.88 लाख व तीसरे नंबर पर चित्रकूट में 7 लाख मतदाता हैं। ब्लॉक प्रमुखों का 19 जुलाई को खत्म होगा कार्यकाल ग्राम प्रधानों के बाद जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई व ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को खत्म होगा। तब तक अगर चुनाव न हुए तो इनका भी कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के बाद इसकी मांग भी तेज हो गई है। ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल थे 12.69 करोड़ वोटर राज्य निर्वाचन आयोग ने 23 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की थी, इसमें कुल 12.69 करोड़ मतदाता शामिल थे। इसके बाद मतदाताओं को दावे व आपत्तियों का समय दिया गया और अंतिम मतदाता सूची जारी की गई। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन सभी जिलों में जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा किया गया है।

WDFC बना लॉजिस्टिक्स गेमचेंजर: तेज माल परिवहन, कम लागत और नए रोजगार के अवसर

 जयपुर वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) के माध्यम से देश-प्रदेश में औद्योगिक विकास तेजी से फास्ट्रेक पर दौड़ रहा है। इस कॉरिडोर से रेल आधारित लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण और आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता में बड़ा सुधार आ रहा है। कॉरिडोर में विशेषकर रेल-पर-ट्रक की सेवा से माल का आवागमन अधिक तेज और सुगम बना है। यह कॉरिडोर राजस्थान में आर्थिक विकास को गति देने एवं रोजगार बढ़ाने के साथ-साथ शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ा सामाजिक बदलाव लाने को तैयार है। जवाहर लाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (जेएनपीटी) से दादरी तक फैले इस वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की लम्बाई 1 हजार 506 किमी. एवं लागत 1 लाख 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। कॉरिडोर का लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान से होकर गुजरता है। यह कॉरिडोर राजस्थान को भारत के उत्तरी एवं पश्चिमी बाजारों तक बेहतर संपर्क प्रदान करता है। कॉरिडोर के अंतर्गत जेएनपीटी से न्यू सफाले (वेतरणा) सेक्शन पर हाल ही में सफलतापूर्वक ट्रायल रन हो चुका है। इसके साथ ही, इस कॉरिडोर का काम पूर्ण हो चुका है। वहीं, कई सेक्शन में माल परिवहन पहले से ही प्रारंभ है। अजमेर में 1.5 मिलियन टन क्षमता का कार्गो टर्मिनल शुरू- यह कॉरिडोर राजस्थान के सीकर, रींगस, फुलेरा, ब्यावर, सिरोही से होकर गुजर रहा है। जिससे इन जिलों के साथ-साथ अन्य स्थानों के उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित हो सकेगी। हाल ही में अजमेर के सराधना में नए गतिशक्ति मल्टी मॉडल कार्गो टर्मिनल का उद्घाटन हुआ है। इस टर्मिनल में आधुनिक कार्गो हैंडलिंग अवसंरचना, वेयरहाउसिंग सुविधाएं तथा निर्बाध मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई है, जिससे उद्योगों एवं व्यापारियों के लिए माल परिवहन अधिक तेज, सुरक्षित एवं किफायती होगा। यह टर्मिनल प्रति माह लगभग 40 रेक (लगभग 1.5 मिलियन टन प्रति वर्ष) कार्गो हैंडल करने में सक्षम होगा, जिसमें मार्बल, ग्रेनाइट, खनिज तथा अन्य वस्तुएं शामिल हैं। यानि किशनगढ़ के मार्बल को कॉरिडोर के उच्च गति माल परिवहन नेटवर्क के माध्यम से जेएनपीटी, पीपावाव एवं मुंद्रा बंदरगाहों तक पहुंचाया जाएगा। इससे लोकल फॉर ग्लोबल का संकल्प साकार होगा। ट्रेन की लम्बाई लगभग दोगुनी, रफ्तार डेढ़ गुना से अधिक- यह कॉरिडोर लॉजिस्टिक्स अवसंरचना को सुदृढ़ करने के साथ ही माल परिवहन को तेजी से बढ़ाने की दीर्घकालिक पहल है। सामान्य कॉरिडोर की तुलना में 66 प्रतिशत वृद्धि के साथ इस कॉरिडोर की ऊंचाई 7.1 मीटर और 14 प्रतिशत वृद्धि के साथ चौड़ाई 3,660 एमएम रखी गई है। ट्रेन की लम्बाई 1500 मीटर है, जबकि सामान्य कॉरिडोर में 700 मीटर ही होती है। वहीं, डबल कन्टेनर स्टेक और 2.4 प्रतिशत ट्रेन लोड की क्षमता भी इस कॉरिडोर में उपलब्ध है। इस कॉरिडोर में ट्रेन की रफ्तार भी औसतन 25 किमी. से बढ़ाकर 65 किमी. प्रति घण्टे की गई है।  रेल-पर-ट्रक की सुविधा, डीजल की खपत कम- डब्ल्यूडीएफसी की सबसे बड़ी विशेषता रेल-पर-ट्रक (टीओटी) सेवा है। यह रेलवे की दीर्घकालिक माल परिवहन परिवर्तन रणनीति के हिस्सा के रूप में बनाई गई है, जो बहु-मॉडल लॉजिस्टिक्स को सक्षम बनाता है। इस सेवा के तहत माल से लदे ट्रकों को विशेष रूप से संशोधित फ्लैट वैगनों पर समर्पित माल ढुलाई गलियारा के माध्यम से ले जाया जाता है। यह रेल-पर-ट्रक सेवा राजमार्गों की भीड़भाड़ को कम करने, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स लागतों को अनुकूलित करने में मदद करती है। इससे डीजल की खपत घटती है और सड़क अवसंरचना की क्षति में कमी आती है। टीओटी सेवा किसानों और उद्यमियों के लिए लाभकारी है। यह उन्हें अपनी फसलों और उत्पादों का तेजी से परिवहन करने की सुविधा प्रदान करती है। जैसे सीकर के प्याज को खेतों से नजदीकी टीओटी टर्मिनलों तक ले जाया जा सकता है, इसे समर्पित माल ढुलाई गलियारे के माध्यम से तेजी से स्थानांतरित किया जा सकता है, और सड़क मार्ग से दूर के उपभोक्ता केंद्रों तक न्यूनतम रख-रखाव और समय हानि के साथ पहुंचाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसमें पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अंतर्गत दादरी से जीएनपीटी एवं पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तहत लुधियाना से डंकुनी तक जोड़ा गया है। यह परियोजना देश का लगभग 70 प्रतिशत माल परिवहन करने के उद्देश्य से बनाई गई है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के दोनों तरफ 150 किलोमीटर का प्रभाव क्षेत्र दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना निवेश क्षेत्र और जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं

12 अगस्त 2026 सूर्य ग्रहण: कर्क राशि में लगेगा ‘रिंग ऑफ फायर’, इन राशियों पर असर

 सूर्य ग्रहण एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रोमांचक खगोलीय घटना है. जब अंतरिक्ष में चक्कर लगाते-लगाते चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है, तो वह सूर्य की रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने से रोक देता है. इस स्थिति में चंद्रमा की परछाई पृथ्वी पर पड़ती है और दिन में ही अंधेरा छा जाता है. इसी घटना को सूर्य ग्रहण कहते हैं. साल का दूसरा व आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026, बुधवार के दिन लगेगा. संयोग की बात यह है कि ये सूर्य ग्रहण सावन के महीने में पड़ेगा. ये सूर्य ग्रहण कर्क राशि में लगेगा. खगोलीय दृष्टि से यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसे आसमान में रिंग ऑफ फायर के रूप में देखा जा सकेगा. हालांकि, ये भारत में दृश्यमान नहीं होगा, जिसकी वजह से इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. आइए जानते हैं कि साल का दूसरा व आखिरी सूर्य ग्रहण किन राशियों के लिए अशुभ रहेगा. मेष धन हानि और खर्चों में अचानक बढ़ोतरी के योग बन सकते हैं. वाणी पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी होगा, अन्यथा करीबी रिश्तों में खटास आ सकती है. निवेश करने से बचें. कर्क चूंकि ग्रहण इसी राशि में लग रहा है, इसलिए कर्क राशि के जातकों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. मानसिक तनाव, सेहत में गिरावट और निर्णय लेने में भ्रम की स्थिति बन सकती है. दुर्घटनाओं से बचें और वाद-विवाद से दूर रहें. तुला संतान को लेकर चिंता बढ़ सकती है. प्रेम संबंधों और विद्यार्थियों की पढ़ाई में रुकावटें आ सकती हैं. बजट बिगड़ सकता है, इसलिए पैसों के लेनदेन में सावधानी बरतें. मकर साझेदारी के कामों और वैवाहिक जीवन में तनाव का सामना करना पड़ सकता है. कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों या उच्च अधिकारियों के साथ मतभेद होने की आशंका रहेगी. इन राशियों के लिए रहेगा शुभ साल का आखिरी सूर्य ग्रहण मिथुन, कन्या और मीन राशि के जातकों के लिए शुभ रहने वाला है. इन राशि के लोगों को करियर में बेहतरीन सुनहरे अवसर, व्यापार में मनमुताबिक वृद्धि, लंबे समय से फंसे हुए धन की वापसी और कार्यस्थल पर उच्च पद-प्रतिष्ठा व सम्मान मिलने के प्रबल योग बन रहे हैं. कितने बजे लगेगा सूर्य ग्रहण? भारतीय समयानुसार, साल का दूसरा व आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 की रात 09 बजकर 5 मिनट से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 की सुबह 04 बजकर 25 मिनट तक लगेगा. कहां कहां दिखाई देगा? यह ग्रहण मुख्य रूप से यूरोप, उत्तरी अमेरिका, और उत्तरी गोलार्ध के क्षेत्रों में दिखाई देगा.

क्वींस क्लब में सेरेना की वापसी: कनाडा की एमबोको के साथ मिलकर जीता पहला मैच

 लंदन  टेनिस की दिग्गज खिलाड़ी सेरेना विलियम्स ने लगभग चार वर्ष बाद पेशेवर टेनिस में वापसी करते हुए क्वींस क्लब ग्रास कोर्ट प्रतियोगिता में मंगलवार को डबल्स मुकाबले में यादगार जीत दर्ज की। अमेरिकी स्टार ने कनाडा की 19 वर्षीय खिलाड़ी विक्टोरिया एमबोको के साथ मिलकर अपना पहला मुकाबला जीता। सेरेना और एमबोको की जोड़ी ने तीसरी वरीयता प्राप्त निकोल मेलिचार-मार्टिनेज और एरिन राउटलिफ की जोड़ी को 7-6 (2), 6-2 से हराया। यह मुकाबला वर्ष 2022 के यूएस ओपन के बाद सेरेना का पहला पेशेवर मैच था। मैच के दौरान सेरेना ने 120 मील प्रति घंटे तक की रफ्तार से सर्विस की और कई दमदार विनर शाट लगाए। मुकाबले का अंत भी उन्होंने दो दो ऐस और एक शानदार सर्विस विनर के साथ शानदार अंदाज में किया। जीत से खुश सेरेना जीत के बाद सेरेना ने कोर्ट पर कहा, 'यह बहुत मजेदार था। विक्टोरिया के साथ खेलकर मुझे बहुत आनंद आया। हमने पहले कभी साथ नहीं खेला, लेकिन कोर्ट पर सब कुछ बहुत स्वाभाविक लगा।' हालांकि, बाद में प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने अपने प्रदर्शन को लेकर विनम्रता दिखाई। उन्होंने मजाकिया अंदाज में खुद को 'सी माइनस' अंक दिए, लेकिन साथ ही कहा कि चार साल बाद सीधे घास के कोर्ट पर लौटना आसान नहीं होता और कुल मिलाकर उनका प्रदर्शन अच्छा रहा। वापसी क्‍यों खास सेरेना की वापसी इसलिए भी खास रही, क्योंकि विपक्षी टीम बेहद मजबूत थी। एरिन राउटलिफ दो बार यूएस ओपन डबल्स चैंपियन रह चुकी हैं, जबकि निकोल मेलिचार-मार्टिनेज विंबलडन और यूएस ओपन के डबल्स फाइनल तक पहुंच चुकी हैं। क्वींस क्लब में दर्शकों ने भी उनका जोरदार स्वागत किया। एंडी मरे एरिना में सेरेना को दिन की सबसे बड़ी तालियां मिलीं। इससे पहले दर्शक ब्रिटेन की एमा राडुकानू और केटी बोल्टर के मुकाबले भी देख चुके थे।

श्वान का धार्मिक महत्व: भैरव वाहन और सुरक्षा कवच की मान्यता

 सनातन परंपरा, लोक मान्यताओं और तांत्रिक धारणाओं में कुत्ता यानी श्वान को साधारण जीव नहीं माना गया है. विशेष रूप से भगवान भैरव के वाहन के रूप में कुत्ते का उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि जिस घर के द्वार पर कोई कुत्ता नियमित रूप से आकर बैठता है, वह केवल आश्रय लेने नहीं आता है, बल्कि उस स्थान की सूक्ष्म ऊर्जा से भी जुड़ जाता है. कई परंपराओं में इसे घर की सुरक्षा, नकारात्मक शक्तियों से रक्षा और आने वाले संकटों के संकेत से जोड़ा जाता है. आइए इसका जवाब पंडित श्रीपति त्रिपाठी जी से जानते हैं. कुत्ते का घर के बाहर बैठने का संकेत शकुन शास्त्र के अनुसार, कभी-कभी ऐसा कुत्ते पिछले जन्म के किसी आत्मीय संबंधी, मित्र या पूर्वज की चेतना से भी जुड़ा माना जाता है, जो किसी कारणवश उस परिवार के प्रति विशेष लगाव रखता है. कहा जाता है कि वह परिवार के दुख-कष्ट और ग्रहों के अशुभ प्रभावों को अपने ऊपर लेने का प्रयास करता है तथा घर के चारों ओर एक अदृश्य सुरक्षा कवच निर्मित करता है. इसी कारण शास्त्रीय परंपराओं में श्वान यानी कुत्ते को भोजन कराना, जल देना और उसके प्रति दया भाव रखना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है. विशेषकर शनिवार और भैरव उपासना में काले श्वान को रोटी खिलाने का विधान भी बताया गया है. कुत्ते को न करें नजरअंदाज हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि वंश विनाश, तत्काल पुण्य नाश या किसी विशेष भयावह दंड जैसी बातें मुख्यतः लोक मान्यताओं और जनश्रुतियों का हिस्सा हैं. शास्त्रों का मूल संदेश यह है कि किसी भी जीव पर अत्याचार करना पाप है और सभी जीवों के प्रति करुणा, सेवा और सम्मान ही सच्चा धर्म है. इसलिए, यदि कोई श्वान आपके द्वार पर आता है, तो उसे प्रेम, दया और सम्मान की दृष्टि से देखें. कौन जाने वह केवल भोजन की तलाश में आया एक जीव हो या ईश्वर द्वारा भेजा गया करुणा और सेवा का एक अवसर. आखिर दया ही वह धर्म है, जो मनुष्य को देवत्व के सबसे निकट ले जाती है. कुत्ते का पौराणिक महत्व महाभारत के महाप्रस्थानिक पर्व में वर्णन मिलता है कि जब पांडव हिमालय की ओर प्रस्थान कर रहे थे, तब एक श्वान अंत तक धर्मराज युधिष्ठिर के साथ रहा. अंत में वही श्वान यानी कुत्ता धर्मदेव का रूप निकला. यह प्रसंग दर्शाता है कि युधिष्ठिर ने शरणागत का त्याग करने से इनकार किया, क्योंकि ऐसा करना धर्म के विरुद्ध है. यह कथा श्वान के प्रति करुणा, निष्ठा और धर्म पालन का संदेश देती है.

NCR प्लान-2041 पर मंथन तेज, करनाल समेत 5 जिलों की सदस्यता पर संकट

पंचकूला वर्तमान में हरियाणा के 22 जिलों में से 14 जिले एनसीआर यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आते हैं। इनमें से पांच जिले जल्द ही बाहर हो सकते हैं। जी हां, हरियाणा सरकार इस बाबत 16 जून को बड़ा फैसला ले सकती है। ये पांच जिले कौन से हैं, सरकार यह फैसला क्यों ले रही है और यह NCR होता है क्या है? आइए इसे पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं। क्या है NCR? राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का संदर्भ दिल्ली के पड़ोसी राज्यों के जिलों से संबंधित है। दरअसल, 1951 के बाद दिल्ली में औद्योगिक विकास तेजी से हुआ। जिससे देश की राजधानी में अन्य राज्यों के लोग भी रोजगार और बेहतर सुविधाओं के लिए प्रवास करने लगे। दिल्ली पर इस बढ़ती आबादी और भीड़-भाड़ के दबाव को कम करने के लिए NCR की परिकल्पना की गई। इसी उद्देश्य के साथ साल 1985 में NCR प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) का गठन किया गया, ताकि पूरे क्षेत्र का विकास एक व्यवस्थित योजना के तहत हो सके। अत: पड़ोसी राज्यों के कुछ शहर और जिलों में इसका विस्तार (100 KM तक) कर दिल्ली जैसी सुविधाएं और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सके। मौजूदा समय में एनसीआर में तीन राज्यों (हरियाणा, यूपी और राजस्थान) के 24 जिले शामिल हैं। इस सूची में सबसे ज्यादा जिले (14) हरियाणा के हैं, इन्हीं 14 जिलों के पांच जिलों को बाहर करने के प्रस्ताव पर अगले सप्ताह बैठक की जाएगी। हरियाणा के इन पांच जिलों में करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी शामिल है।। इस बाबत एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की 16 जून को होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी। सरकार क्यों ले रही यह फैसला? दिल्ली से 100 किलोमीटर के दायरे से बाहर के जिलों को एनसीआर से बाहर करने के लिए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय ऊर्जा और आवास व शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने प्रयास शुरू किए थे। रीजनल प्लान-2041 के तहत एनसीआर सीमा को नए सिरे से तय करने का प्रस्ताव है। हरियाणा सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली तो राज्य का एनसीआर क्षेत्र करीब 60 फीसदी तक सिमट सकता है। बैठक के मसौदे में प्रस्ताव है कि एनसीआर की सीमा राजघाट से 100 किमी के दायरे तक सीमित की जाए। अभी हरियाणा के 14 जिले किसी न किसी रूप में एनसीआर का हिस्सा हैं, जिसका कुल क्षेत्रफल 25 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक है। NCR से बाहर होने की वजह हरियाणा सरकार का तर्क है कि एनसीआर (NCR) के सख्त नियमों के कारण इन 5 जिलों को फायदे से ज्यादा भारी आर्थिक और व्यापारिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। दिल्ली से दूर मौजूद जींद या महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में औद्योगिक विकास ठप होने की आशंका है। NGT और GRAP के कड़े नियमों के कारण उद्योगों और फैक्ट्रियों पर लगातार सख्त कार्रवाई होती है। इसके साथ ही 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर रोक से स्थानीय व्यापारियों और किसानों का परिवहन बजट बिगड़ जाता है। नए फॉर्मूले में क्या होगा? नए फॉर्मूले के लागू होने पर यह क्षेत्र घटकर करीब 10.5 हजार वर्ग किलोमीटर तक रह सकता है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने उन तहसीलों को भी एनसीआर में शामिल रखने का सुझाव दिया है, जिनका कुछ हिस्सा 100 KM की सीमा में आता है, जबकि हरियाणा का तर्क है कि केवल एनसीआर की सीमा में पूरी तरह आने वाली तहसीलों को ही रखा जाए।

सैयद किरमानी का बड़ा बयान: कप्तानी रेस में थे वे और वेंगसरकर, लेकिन चुने गए कपिल देव

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सुनहरे अध्याय- 1983 विश्व कप को लेकर पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज सैयद किरमानी का एक पुराना लेकिन बेहद अहम खुलासा एक बार फिर सुर्खियों में है. किरमानी ने बताया है कि इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट से ठीक पहले टीम इंडिया की कप्तानी को लेकर चयन समिति के भीतर गहन और निर्णायक मंथन चला था, जिसमें उनका नाम और दिलीप वेंगसरकर भी गंभीर दावेदारों के रूप में शामिल थे. … लेकिन अंतिम निर्णय उस खिलाड़ी के पक्ष में गया, जिसने आगे चलकर न सिर्फ उस विश्व कप की तस्वीर बदली, बल्कि भारतीय क्रिकेट के पूरे इतिहास को नई दिशा दे दी… और वह नाम था- कपिल देव. किरमानी के इस बयान ने 1983 विश्व कप से जुड़े उस कम चर्चित पहलू को फिर से चर्चा में ला दिया है, जो अब तक क्रिकेट इतिहास की परतों में दबा हुआ था. उस समय भारतीय चयन समिति की अध्यक्षता गुलाम अहमद कर रहे थे. उनके साथ अनुभवी चयनकर्ताओं की एक मजबूत टीम थी, जिसमें  बिशन सिंह बेदी, पंकज रॉय, चंदू बोर्डे और चंदू सरवते जैसे दिग्गज शामिल थे. किरमानी के अनुसार, वेस्टइंडीज दौरे के दौरान ही कप्तानी को लेकर अंदरखाने चर्चा तेज हो गई थी. यह बहस दो नामों के बीच सिमटी थी- किरमानी और वेंगसरकर. दोनों खिलाड़ियों के पास अपनी-अपनी मजबूत दावेदारी थी. एक ओर जहां किरमानी टीम के भरोसेमंद विकेटकीपर थे, वहीं वेंगसरकर शीर्ष क्रम के अनुभवी बल्लेबाज के रूप में स्थापित हो चुके थे. लेकिन इसी चर्चा के बीच एक महत्वपूर्ण तर्क सामने आया- क्या एक विकेटकीपर को कप्तानी का अतिरिक्त दबाव देना सही होगा? इसी सोच ने चयनकर्ताओं की दिशा बदल दी और अंतिम निर्णय की भूमिका तैयार की. कपिल देव की ओर झुकी तौल अंततः चयन समिति ने जिस खिलाड़ी पर भरोसा जताया, वह थे कपिल देव यह निर्णय उस समय भले ही साधारण चयन की तरह लगा हो, लेकिन इतिहास ने इसे भारतीय क्रिकेट का सबसे निर्णायक फैसला साबित कर दिया. कपिल देव की कप्तानी में भारत ने न सिर्फ विश्व कप में भाग लिया, बल्कि पूरे टूर्नामेंट की तस्वीर ही बदल दी. कमजोर मानी जाने वाली भारतीय टीम ने पहले दौर में इंग्लैंड और वेस्टइंडीज जैसी मजबूत टीमों को हराकर सबको चौंका दिया. 25 जून 1983: इतिहास का अमर दिन 25 जून 1983 को लॉर्ड्स के मैदान पर भारत ने वेस्टइंडीज को 43 रन से हराकर क्रिकेट इतिहास में स्वर्णिम अध्याय लिखा. यह वही वेस्टइंडीज टीम थी, जिसे उस समय दुनिया की सबसे मजबूत क्रिकेट टीम माना जाता था. इस जीत ने भारत को पहली बार 50 ओवर का विश्व कप दिलाया और ‘कपिल्स डेविल्स’ की एक ऐसी पहचान बनाई, जो आज भी प्रेरणा का स्रोत है. किरमानी का मानना है कि यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं थी, बल्कि भारतीय क्रिकेट की नींव थी, जिसने आने वाले दशकों में खेल की दिशा और दशा दोनों बदल दी. 'पहला प्यार कभी नहीं भूलता' किरमानी ने भावुक होते हुए कहा कि 1983 की जीत भारतीय क्रिकेट के लिए 'पहले प्यार' जैसी है, जिसे कोई भी देशवासी कभी नहीं भूल सकता. उनके अनुसार, उस टीम ने न सिर्फ जीत हासिल की, बल्कि भारतीय क्रिकेट को आत्मविश्वास, पहचान और वैश्विक सम्मान दिलाया. वे यह भी कहते हैं कि इस उपलब्धि को हर वर्ष 25 जून को विशेष रूप से मनाया जाना चाहिए, क्योंकि इसी दिन भारतीय क्रिकेट ने दुनिया को अपनी असली ताकत दिखाई थी. सम्मान को लेकर सवाल किरमानी ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) पर भी परोक्ष सवाल उठाए. उनका कहना है कि जिस तरह 2007 टी20 विश्व कप जीत के बाद महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली टीम का भव्य सम्मान हुआ, वैसा 1983 के नायकों को नहीं मिला. उनका मानना है कि 1983 की टीम ने भारतीय क्रिकेट की आर्थिक और लोकप्रियता की नींव रखी, लेकिन समय के साथ उस योगदान को उतनी प्रमुखता नहीं मिली, जितनी मिलनी चाहिए थी. किरमानी ने यह भी कहा कि उस दौर के खिलाड़ियों ने भारतीय क्रिकेट को सिर्फ जीत नहीं दी, बल्कि उसे टीवी, स्पॉन्सरशिप और वैश्विक पहचान के नए युग में पहुंचाया. बदलता क्रिकेट और विकेटकीपर की भूमिका किरमानी ने आधुनिक क्रिकेट में विकेटकीपर की भूमिका पर भी विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि पहले विकेटकीपर को केवल स्टंप के पीछे की जिम्मेदारी निभाने वाला खिलाड़ी माना जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है. उन्होंने एमएस धोनी का उदाहरण देते हुए कहा कि आज का विकेटकीपर मैदान का रणनीतिक केंद्र बन चुका है. वह गेंदबाजों को दिशा देता है, फील्ड सेट करता है और बल्लेबाजों की कमजोरियों को पढ़ने में अहम भूमिका निभाता है. उनके अनुसार, विकेटकीपर को अब केवल विशेषज्ञ नहीं, बल्कि 'आधुनिक ऑलराउंडर सोच' वाला खिलाड़ी माना जाना चाहिए.

रोनाल्डो, मेसी, एमबापे और नेमार पर टिकी दुनिया की नजरें

 नई दिल्ली  48 देश, 1248 खिलाड़ी और लक्ष्य एक फीफा विश्व कप की चमचमाती ट्रॉफी। वो ट्रॉफी जो आज तक सिर्फ आठ देश जीत पाए हैं। अमेरिका की उष्णकटिबंधीय जलवायु में जहां औसत तापमान 32 डिग्री रहेगा, वहां दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी अपने खेल से तापमान को और बढ़ाने के लिए जी जान लगा देंगे। अगले 39 दिन तक दुनिया फुटबॉल के मैदान पर सिमट जाएगी। गुरुवार रात मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका की भिड़ंत के साथ शुरू होने वाले इस टूर्नामेंट का अंत 19 जुलाई को न्यूजर्सी में फाइनल के साथ होगा। अब तक के सबसे बड़े और भ‍व्य फुटबॉल विश्व कप में सभी की नजरें पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो, अर्जेंटीना के लियोन मेसी, फ्रांस के काइलियन एमबापे और ब्राजील के नेमार पर सभी की नजरें होंगी। रोनाल्डो के लिए विश्व कप जीतने का ये छठा प्रयास होगा। नेमार की झोली में भी ये बहुमूल्य ट्रॉफी नहीं है। तो वहीं मेसी और एमबापे चाहेंगे कि वो इसे दूसरी बार अपने नाम कर लें, लेकिन ये आसान नहीं होने वाला। मौजूदा विश्व कप में शामिल किसी भी खिलाड़ी ने ऐसे गरम मौसम में फुटबॉल विश्व कप नहीं खेला। इससे पहले सिर्फ एक बार इतनी गर्मी में फीफा विश्व कप खेला गया था। वो साल था 1994 और मेजबान, यही अमेरिका। उस विश्व कप को याद करने वाले आज भी गर्मी से बेचैन हो जाते हैं। उस बार के चैंपियन ब्राजील के सामने एक बार फिर से मौका होगा कि वो दुनिया को सांबा के मोहपाश में बांध लें। शकीरा और बर्ना बाय देंगे रंगारंग प्रस्तुति उद्घाटन मुकाबले से 90 मिनट पहले रंगारंग समारोह होगा, जिसमें शकीरा, बर्ना बाय, जे बैल्विन, टायला, माना, अलेहांद्रो फर्नांडेज, बेलिंडा जैसे दिग्गज सितारे प्रस्तुति देंगे। नंबर गेम 104 मैच खेले जाएंगे इस बार विश्व कप में जो सबसे ज्यादा हैं, पहले 64 मैच होते थे 3 अलग अलग विश्व कप मैचों की मेजबानी करने वाला मेक्सिको का एज्टेका पहला स्टेडियम बनेगा 17 वर्षीय मेक्सिको के गिल्बर्टो मोरा सबसे युवा खिलाड़ी होंगे जबकि स्काटलैंड के गोलकीपर क्रेग गार्डन सबसे उम्रदराज 357 खिलाड़ी ऐसे हैं, जो पहले भी किसी न किसी विश्व कप टीम का हिस्सा रह चुके हैं 891 खिलाड़ी पहली बार फीफा विश्व कप का अनुभव करेंगे पहली बार खेलेंगे ये देश कैप वेर्डे, कुराकाओ, जार्डन और उज्बेकिस्तान पहली बार फीफा विश्व कप में खेलेंगे अब तक के विजेता     ब्राजील : 1958, 1962, 1970, 1994, 2002     जर्मनी : 1954, 1974, 1990, 2014     इटली : 1934, 1938, 1982, 2006     अर्जेंटीना : 1978, 1986, 2022     उरुग्वे : 1930, 1950     फ्रांस : 1998, 2018     इंग्लैंड : 1966     स्पेन : 2010 फीफा विश्व कप के मैच मेक्सिको बनाम दक्षिण अफ्रीका स्थान : मेक्सिको सिटी समय : 12:30 एएम दक्षिण कोरिया बनाम चेकिया स्थान : गुअलदहारा समय : 7:30 एएम प्रसारण : युनाइट8 1 व 2 स्पोर्ट्स, जी5

भ्रष्टाचार मामलों में बढ़ी कार्रवाई, लोकायुक्त ने 272 फाइलों का निपटारा किया

 रांची  पांच साल तक बेपटरी रहा लोकायुक्त झारखंड का कार्यालय अब धीरे-धीरे रेस पकड़ने लगा है। इसी वर्ष 21 अप्रैल 2026 को झारखंड के नव नियुक्त लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता के पदभार ग्रहण के साथ ही इस कार्यालय में भ्रष्टाचार के विरुद्ध शिकायतें आनी शुरू हो चुकी हैं। गत वर्ष जहां 12 महीने में केवल 157 शिकायतें आईं थीं, इस वर्ष अब तक 161 शिकायतें आईं हैं। लोकायुक्त के पदभार ग्रहण के बाद से अब तक यानी महज डेढ़ महीने में 100 शिकायतें आ चुकी हैं, जिसपर काम भी शुरू हो चुका है। लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता ने इस डेढ़ महीने के भीतर करीब 1400 लंबित फाइलें देख ली हैं। इनमें से 272 फाइलों को निष्पादित कर दिया, जबकि 250 मामलों में लोकायुक्त ने सुनवाई के लिए आदेश जारी किया है। शिकायतकर्ता को नोटिस गया है और उनकी शिकायतें सुनी जा रही हैं और उसपर आगे की कार्रवाई चल रही हैं। भ्रष्टाचार के विरुद्ध लोकायुक्त कार्यालय में जो शिकायतें आ रही हैं, उनमें सर्वाधिक शिकायतें अंचलों में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध हैं। कई शिकायतों में लोकायुक्त ने एसीबी दिया है जांच का आदेश लोकायुक्त ने कई शिकायतों में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को जांच का आदेश दिया है। ये शिकायतें लोकसेवकों के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने से संबंधित हैं। लोकायुक्त के यहां जो शिकायतें आईं हैं, उनमें भूमि विवाद, टेंडर आवंटन, आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने व सेवांत लाभ नहीं मिलने से संबंधित शिकायतें सर्वाधिक हैं। अंचलों में भ्रष्टाचार पर भी लगातार आ रहीं शिकायतें लोकायुक्त झारखंड के कार्यालय में अंचलों में भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार आ रही हैं। इनमें रसीद निर्गत करने से रोकना, बिना पक्ष जाने दाखिल खारिज रद करने की अनुशंसा करना, दाखिल खारिज के एवज में रिश्वत की मांग करना और नहीं देने पर आवेदन अस्वीकृत करना, बिना किसी ठोस वजह बताए, बिना पक्ष सुने दाखिल खारिज के आवेदन को अस्वीकृत करना आदि शामिल हैं। लोग अपनी-अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में लोकायुक्त कार्यालय से संबंधित अंचलाधिकारियों को उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी होगा।