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‘Naagin 7’ फिनाले ट्विस्ट: राधिका पर जानलेवा हमला, कहानी में बड़ा मोड़

 एकता कपूर का लोकप्रिय सुपरनैचुरल शो ‘नागिन 7’ अपने फिनाले की ओर बढ़ रहा है और इसके साथ ही कहानी में जबरदस्त ट्विस्ट देखने को मिल रहे हैं. आने वाले एपिसोड्स में दर्शकों को हाई-वोल्टेज ड्रामा, साजिश और बदले की कहानी देखने को मिलेगी. शो के फिनाले को लेकर सामने आ रही जानकारी के अनुसार, विशाखा की एंट्री पूरे खेल को बदल सकती है. राधिका पर होगा बड़ा हमला फिनाले से पहले राधिका की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. कहानी में एक ऐसा मोड़ आएगा, जब उस पर जानलेवा हमला किया जाएगा. इस हमले के बाद उसकी हालत बिगड़ जाएगी और उसे अपनी जान बचाने के लिए मदद की जरूरत पड़ेगी. इसी दौरान वह विशाखा से संपर्क करती नजर आएगी. विशाखा और राधिका बनाएंगी नई रणनीति आने वाले एपिसोड में राधिका और विशाखा एक-दूसरे के करीब आती दिखेंगी. दोनों का लक्ष्य एक ही दुश्मन को मात देना होगा. इसी वजह से वे मिलकर एक नई योजना तैयार करेंगी. उनकी यह साझेदारी अनंता के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है. आर्यमान बनेगा निशाना फिनाले में सबसे बड़ा झटका तब लगेगा, जब विशाखा आर्यमान को निशाना बनाने की कोशिश करेगी. बताया जा रहा है कि अनंता को रोकने और उसकी ताकत कमजोर करने के लिए यह कदम उठाया जाएगा। आर्यमान पर मंडराता खतरा कहानी में रोमांच को और बढ़ा देगा. अधूरी रह जाएगी पूजा कहानी में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आएगा जब अनंता अपने मिशन के लिए विशेष पूजा कर रही होगी। इसी दौरान आर्यमान पर संकट की खबर उसे पूजा बीच में छोड़ने पर मजबूर कर देगी. अपने पति को बचाने के लिए वह तुरंत कार्रवाई करती नजर आएगी. फिनाले में होगा बड़ा मुकाबला शो के अंतिम एपिसोड में अनंता अपने दुश्मनों का सामना करती दिखाई देगी. वहीं विशाखा की वापसी और नई चालें कहानी को और दिलचस्प बना देंगी. फैंस को एक्शन, इमोशन और सुपरनैचुरल ड्रामे से भरपूर फिनाले देखने को मिलने वाला है, जो शो के अंत को यादगार बना सकता है.

बेसन और कच्चे दूध से बने नेचुरल फेस वॉश से पाएं चमकती त्वचा

खूबसूरत, बेदाग और चमकती त्वचा पाना हर किसी का सपना होता है जिसके लिए लोग बाजार में मिलने वाले महंगे से महंगे फेस वॉश और साबुन पर हजारों रुपये खर्च कर देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन ब्यूटी प्रोडक्ट्स में मौजूद हानिकारक केमिकल्स आपकी त्वचा का नेचुरल ऑयल छीन लेते हैं जिससे चेहरा समय से पहले रूखा, बेजान और बूढ़ा दिखने लगता है. अगर आप भी इस केमिकल के चक्रव्यूह से बाहर निकलकर त्वचा पर असली और परमानेंट ग्लो चाहते हैं तो आपको महंगे पार्लर या महंगे प्रोडक्ट्स की जरूरत नहीं है. आपकी रसोई में ही कुछ ऐसी जादुई चीजें मौजूद हैं जो त्वचा को अंदर से साफ कर सकती हैं. आज हम आपको घर पर ही सिर्फ 2 प्राकृतिक चीजों से एक बेहतरीन नेचुरल फेस वॉश बनाने का तरीका और उसके इस्तेमाल का तरीका बताने जा रहे हैं. इससे रोजाना सिर्फ 5 मिनट मसाज करने से केवल 10 दिनों के भीतर आपकी त्वचा में ऐसा चमत्कारी बदलाव आएगा कि चेहरा हीरे जैसा चमकने लगेगा. फेस वॉश बनाने और इस्तेमाल करने की डिटेल्स बेसन: 1 बड़ा चम्मच (यह त्वचा की गहराई से सफाई करता है और अतिरिक्त तेल सोखता है). कच्चा दूध या गुलाब जल: आवश्यकताानुसार (यह त्वचा को मॉइश्चराइज करता है और रंगत निखारता है). नोट: अगर त्वचा बहुत ज्यादा ड्राई है तो आप इसमें आधा चम्मच शहद भी मिला सकते हैं. बनाने का तरीका एक छोटी कटोरी में एक चम्मच बेसन लें. अब इसमें आवश्यकताानुसार कच्चा दूध या गुलाब जल मिलाकर एक स्मूथ और गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें. आपका केमिकल-फ्री, 100% नेचुरल फेस वॉश तैयार है. इस्तेमाल और मसाज की विधि सबसे पहले अपने चेहरे को नॉर्मल पानी से हल्का सा गीला कर लें. अब तैयार किए गए इस होममेड फेस वॉश को अपने पूरे चेहरे और गर्दन पर अच्छी तरह लगाएं. अपने दोनों हाथों की उंगलियों से सर्कुलर मोशन में चेहरे की कम से कम 5 मिनट तक हल्के हाथों से मसाज करें. माथे, नाक और ठुड्डी के आसपास थोड़ा अच्छे से मसाज करें ताकि ब्लैकहेड्स और व्हाइटहेड्स निकल जाएं. 5 मिनट की मसाज के बाद चेहरे को साफ और ठंडे पानी से धो लें.

चांदी महंगी होने पर बदली योजना, दुल्हन के खाते में बढ़कर भेजे जाएंगे 64 हजार रुपये

लखनऊ मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में राज्य सरकार ने बदलाव करते हुए पायल और बिछिया उपहार की जगह भी दुल्हन के खाते में धनराशि ट्रांसफर की जाएगी। ये बदलाव चांदी की कीमतों में उछाल आने के बाद किया गया है सरकार ने अब विवाह करने वाली कन्याओं को दी जाने वाली चांदी की पायल और बिछिया के बदले भी नकद राशि देने का फैसला किया है। इसके लिए समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव प्रवीण मिश्र द्वारा शासनादेश जारी कर दिया गया है। क्या है मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रति युगल एक लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। पूर्व में इसमें से 60 हजार रुपये की राशि दुल्हन के खाते में भेजी जाती थी और 25 हजार रुपये से पायल, बिछिया सहित अन्य उपहार दिए जाते थे। जबकि 15 हजार रुपये की राशि आयोजन पर खर्च की जाती है। लेकिन पिछले कुछ समय से चांदी की कीमतों में भारी उछाल आ रहा है। जिसके बाद चांदी की पायल और बिछिया नहीं देने का निर्णय लिया गया है। इसके बजाय चार हजार रुपये की राशि दुल्हन के खाते में भेजी जाएगी। क्यों हुआ बदलाव इस तरह से दुल्हन के खाते में कुल 64 हजार रुपए भेजे जाएंगे। उपहार सामग्री पर 21 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत पहले निर्धारित वजन (30 ग्राम चांदी की पायल और 10 ग्राम चांदी की बिछिया) के लिए 4 हजार रुपए निर्धारित थे, लेकिन चांदी की बढ़ती कीमतों के बाद 4 हजार रुपए में ये सब खरीद पान मुश्किल है। ऐसे में सरकार ने 4 हजार रुपए सीधे दुल्हन के खाते में भेजने का निर्णय लिया है। इस नए फैसले के बाद अब कन्या के बैंक खाते में 60 हजार की जगह कुल 64 हजार भेजे जाएंगे। बाकि योजना में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।

परमा एकादशी 2026 आज, भगवान विष्णु की पूजा से मिलता है विशेष पुण्य फल

 आज अधिकमास की परमा एकादशी मनाई जा रही है. एकादशी की तिथि अपने आप में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को परम पुण्य की प्राप्ति होती है. धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह व्रत शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी माना गया है. इससे मानसिक शांति, एकाग्रता और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है. साल में सामान्यतः 24 एकादशी आती हैं, लेकिन जब अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) आता है तो इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है. अधिकमास में आने वाली एकादशी विशेष रूप से अधिक फलदायी और पुण्यदायी मानी जाती है. इन्हीं में से एक है परमा एकादशी, जो अत्यंत दुर्लभ होती है क्योंकि यह केवल अधिकमास में ही आती है. परमा एकादशी की तिथि 11 जून यानी आज अर्धरात्रि 12 बजकर 57 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन आज ही रात में 10 बजकर 36 मिनट पर होगा. परमा एकादशी का पारण 12 जून यानी कल सुबह 5 बजकर 23 मिनट से लेकर 8 बजकर 10 मिनट तक कर सकते हैं. परमा एकादशी व्रत की पूजा विधि परमा एकादशी का व्रत विशेष रूप से 5 दिनों तक करने की परंपरा बताई जाती है. व्रत की शुरुआत एकादशी से पहले या उसी दिन की जा सकती है. इस दौरान अनाज का सेवन नहीं किया जाता और केवल फल, दूध या तरल आहार लिया जाता है, जबकि संभव हो तो निर्जल व्रत रखना सर्वोत्तम माना गया है. व्रत के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ, विशेषकर सफेद वस्त्र धारण करने चाहिए और भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए. पूजा के दौरान ऊं नमो नारायणाय और विष्णवे नमः जैसे मंत्रों का जप करना शुभ होता है. साथ ही विष्णु सहस्त्रनाम, भगवद्गीता या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है. व्रत का समापन अगले दिन द्वादशी पर किया जाता है, जिसमें किसी जरूरतमंद को भोजन या अन्न का दान दिया जाता है और उसके बाद नींबू पानी या हल्के आहार से व्रत खोला जाता है. व्रत के दौरान ध्यान रखें ये बातें एकादशी व्रत के दौरान मन को शांत और सकारात्मक बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है. इस दिन क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए और अधिक से अधिक समय भगवान की भक्ति में लगाना चाहिए. साथ ही दान-पुण्य करना भी इस व्रत के फल को कई गुना बढ़ा देता है, जिससे व्यक्ति को आध्यात्मिक और मानसिक दोनों प्रकार का लाभ प्राप्त होता है. परमा एकादशी का महत्व परमा एकादशी को सभी एकादशियों में विशेष स्थान प्राप्त है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से दरिद्रता दूर होती है और धन संबंधी बाधाएं समाप्त हो जाती हैं. साथ ही संतान प्राप्ति का योग बनता है और व्यक्ति को जीवन में यश व प्रसिद्धि मिलती है. धार्मिक दृष्टि से यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है, क्योंकि इसके प्रभाव से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति और भगवान विष्णु के दर्शन का फल भी मिलता है. यदि कोई व्यक्ति अपनी विशेष मनोकामना पूरी करना चाहता है, तो उसे इस दिन श्रद्धा और विधिपूर्वक भगवान नारायण की पूजा करते हुए व्रत अवश्य रखना चाहिए.

अनुभव सिन्हा का बड़ा बयान: “निर्देशकों से छीना जा रहा है सबसे जरूरी चीज”

फिल्ममेकर अनुभव सिन्हा ने हाल ही में सोशल मीडिया पर फिल्म इंडस्ट्री को लेकर अपनी बात रखी है. उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि आज के समय में फिल्म निर्देशकों से उनके काम की सबसे अहम चीज विश्वास धीरे-धीरे छीनी जा रही है. इस बीच उन्होंने निर्देशक इम्तियाज अली की आने वाली फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ की जमकर तारीफ भी की है. “निर्देशकों से छीनी जा रही है सबसे जरूरी चीज” – अनुभव सिन्हा अनुभव सिन्हा ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, इम्तियाज, मेरे दोस्त, मुझे यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि ‘मैं वापस आऊंगा’ बन रही है. आज के समय में जब फिल्म निर्देशकों से उनके काम की सबसे अहम चीज कई कारणों से छीन ली जा रही है, तब तुम्हारी फिल्म का हर फ्रेम उसी सबसे जरूरी गुण से भरा हुआ है – विश्वास. यह फिल्म इस गलत धारणा को तोड़ देती है कि दर्शक क्या पसंद करते हैं और क्या नहीं, और अपने दिल और आत्मा पर मजबूती से खड़ी रहती है. उन्होंने आगे लिखा, इसकी आत्मा बहुत मजबूत भी है और बेहद भावुक व दिल को छू लेने वाली भी है. यह कहानीकार और उसके देश के बीच एक बहुत ही गहरा और खूबसूरत रिश्ता दिखाती है. प्रिय दर्शकों, यह शायद वही फिल्म है जिसका आप लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, जिसे आप अपने परिवार के साथ थिएटर में देखना चाहेंगे. जिंदाबाद दोस्त! इम्तियाज अली की फिल्म और उनकी सोच इम्तियाज अली की आने वाली फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह, शरवरी और वेदांग रैना मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे. इम्तियाज ने फिल्म में दिलजीत के साथ अपने सहयोग के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट भावनात्मक रूप से बहुत गहरा है और उन लोगों के साथ एकजुटता दिखाता है, जिन्होंने इतिहास के कठिन समय को झेला है. इम्तियाज ने कहा कि विभाजन के कारण लाखों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था और ऐसी स्थितियां आज भी दुनिया के कई हिस्सों में देखने को मिलती हैं.

2026 में शनि की वक्री चाल, कुंभ और मीन राशि को मिल सकती है बड़ी राहत

 ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्मफल दाता और न्याय का देवता माना जाता है. जब भी शनि देव अपनी चाल बदलते हैं, चाहे वह राशि परिवर्तन हो या मार्गी से वक्री होना, जिसका सीधा असर सभी 12 राशियों पर पड़ता है. साल 2026 में एक बेहद महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना होने जा रही है. द्रिक पंचांग के अनुसार, शनि देव 27 जुलाई 2026 को अपनी उल्टी चाल यानी वक्री होने जा रहे हैं, जो 11 दिसंबर 2026 तक इसी अवस्था में रहेंगे. वर्तमान में मेष, मीन और कुंभ राशि के जातक शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव से गुजर रहे हैं. आमतौर पर शनि की वक्री चाल को कष्टदायक माना जाता है, लेकिन इस बार यह 138 दिनों की अवधि साढ़ेसाती से जूझ रही 2 विशेष राशियों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं होगी. शनि की उल्टी चाल से इन्हें मानसिक और आर्थिक कष्टों से बड़ी राहत मिलने वाली है. आइए जानते हैं कौन सी हैं वो भाग्यशाली राशियां और उन्हें क्या लाभ होने वाले हैं. कुंभ राशि (Aquarius) कुंभ राशि के जातकों पर इस समय शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण (अवरोही चरण) चल रहा है. 27 जुलाई से शुरू हो रही शनि की वक्री चाल आपके लिए राहत की बड़ी खिड़की खोलने वाली है. पिछले काफी समय से जो मानसिक तनाव, काम में रुकावटें और अज्ञात भय बना हुआ था, वह अब धीरे-धीरे दूर होने लगेगा. यदि आपका पैसा कहीं फंसा हुआ था या बिजनेस में लगातार घाटा हो रहा था, तो इस अवधि में धन लाभ के मजबूत योग बनेंगे. नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में चल रही राजनीति से मुक्ति मिलेगी. आपके काम की सराहना होगी. मीन राशि (Pisces) मीन राशि के जातकों पर इस समय शनि की साढ़ेसाती का दूसरा यानी मध्य चरण चल रहा है, जिसे सबसे ज्यादा कष्टदायी माना जाता है. लेकिन इस वक्री काल में शनि देव आपके लिए थोड़े नरम रहने वाले हैं. जो काम पिछले कई महीनों से बिल्कुल ठप पड़े थे या जिनमें लगातार देरी हो रही थी, वे अब अचानक गति पकड़ेंगे. यदि आप व्यापार या मीडिया क्षेत्र से जुड़े हैं, तो इस 138 दिनों की अवधि में आपको कोई बड़ी डील या नई जिम्मेदारी मिल सकती है. पुराने नुकसान की भरपाई होगी. लंबे समय से चली आ रही शारीरिक समस्याओं या पुरानी बीमारी में राहत देखने को मिलेगी और आत्मविश्वास वापस लौटेगा. शनि देव की कृपा पाने के अचूक उपाय पीपल के नीचे दीपक: हर शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक चौमुखा दीपक जरूर जलाएं. शनिवार का दान: शनिवार के दिन किसी जरूरतमंद या गरीब व्यक्ति को काली उड़द, काले तिल, काले कपड़े या छाते का दान करें. हनुमान चालीसा का पाठ: शनि देव को हनुमान जी के भक्त बेहद प्रिय हैं. नियमित रूप से या हर शनिवार-मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें.

ढिकली गांव में सांपों का कुनबा बरामद, मां के साथ 22 नवजात रसेल वाइपर रेस्क्यू

उदयपुर राजस्थान के उदयपुर शहर के ढिकली गांव से गुरुवार को एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां एक ट्यूबवेल के चेंबर से रसेल वाइपर प्रजाति के सांपों (Russells Viper Snakes) का पूरा कुनबा बरामद किया गया है. चेंबर के भीतर एक साथ इतने जहरीले सांपों की मौजूदगी की खबर फैलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. सूचना मिलते ही वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर (WARC) की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और एक रेस्क्यू अभियान चलाया. जब टीम ने चेंबर से सांपों को बाहर निकालकर गिनना शुरू किया तो गिनती 1, 2, 3, 4 करते हुए सीधे 23 पर जाकर रुकी. इस सफल रेस्क्यू के बाद सामने आया कि इन सांपों में 22 नवजात बच्चे और उनकी मां शामिल है. अंडे नहीं, सीधे बच्चों को जन्म देती है रसेल वाइपर प्रजाति इस रेस्क्यू के बाद वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर के संभागीय अध्यक्ष डॉ. चमन सिंह चौहान ने सांपों की इस प्रजाति के बारे में एक विशेष जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि रसेल वाइपर सांपों की अन्य सामान्य प्रजातियों की तरह अंडे नहीं देता, बल्कि यह सीधे बच्चों को जन्म देता है. जीव विज्ञान के अनुसार, इस प्रजाति का प्रजनन काल सामान्यतः नवंबर महीने के आसपास होता है और इसके बाद जून-जुलाई के महीनों में बच्चे जन्म लेते हैं. यही वजह है कि जून के महीने में इस ट्यूबवेल चेंबर के भीतर एक साथ इतने सारे नवजात बच्चे अपनी मां के साथ पाए गए. वन्य जीवों को नुकसान न पहुंचाने की विशेष अपील रेस्क्यू के बाद वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर की टीम ने स्थानीय लोगों से एक अपील भी की. विशेषज्ञों ने कहा है कि यदि कभी भी किसी के घर या आसपास कोई वन्य जीव या सांप दिखाई दे, तो लोग घबराकर उसे खुद पकड़ने या जान से मारने का प्रयास बिल्कुल न करें. ऐसी किसी भी स्थिति में तुरंत रेस्क्यू टीम को सूचित करना चाहिए ताकि वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से उनके प्राकृतिक आवास में भेजा जा सके.

एफपीपीसीए वसूली पर विवाद, नियामक आयोग ने कॉर्पोरेशन को फिर भेजा नोटिस

लखनऊ प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं से जून माह में 10 फीसदी ईंधन अधिभार शुल्क वसूला जा रहा है। इस मामले में नियामक आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने पॉवर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक को दोबारा नोटिस जारी किया है। उन्हें 19 जून तक इस वसूली का आधार बताने वाली रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। विद्युत उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 10 प्रतिशत ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) की वसूली हो रही है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इसके विरोध में नियामक आयोग में याचिका दायर की। आयोग ने 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार को नियम विरुद्ध बताया। उसने पॉवर कॉर्पोरेशन को नोटिस भेजकर दस्तावेज मांगे थे। सप्ताह भर बाद भी कॉर्पोरेशन जवाब नहीं दे पाया। प्रबंध निदेशक ने जवाब के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा। वर्मा ने इस पर आपत्ति जताई और वसूली रोकने की मांग की। इसके बाद नियामक आयोग ने बुधवार को प्रबंध निदेशक को फिर नोटिस भेजा। आयोग की सख्त टिप्पणी आयोग ने अपने नए आदेश में स्पष्ट किया है कि एफपीपीसीए के आंकड़े यूपीपीसीएल के पास होने चाहिए। यूपीईआरसी विनियमों के तहत यह जानकारी वेबसाइट पर भी सार्वजनिक होनी चाहिए थी। कॉर्पोरेशन ने आयोग द्वारा मांगी गई मूल सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराईं। वह अन्य राज्यों में लागू व्यवस्था का अध्ययन करने की बात कर रहा है। जबकि आयोग ने केवल उत्तर प्रदेश में 10 प्रतिशत एफपीपीसीए के आंकड़ों का आधार पूछा था। बिना आंकड़े वसूली अवैध अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि कॉर्पोरेशन के पास एफपीपीसीए निर्धारण के आवश्यक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं से की जा रही वसूली अवैध है। यह स्वयं संदेह के घेरे में आ जाती है। यह स्थिति अत्यंत गंभीर है क्योंकि लाखों उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है। उन्होंने आयोग से तत्काल 10 प्रतिशत की वसूली पर रोक लगाने की मांग की। पारदर्शिता और जवाबदेही परिषद अध्यक्ष ने बताया कि आयोग ने यूपीपीसीएल को 19 जून तक सभी मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने को कहा है। आयोग का यह आदेश इस बात का संकेत है कि नियामक संस्था मामले को गंभीरता से ले रही है।  उपभोक्ताओं से अतिरिक्त धनराशि वसूलने से पहले सभी गणनाएं और नियामकीय प्रक्रियाएं स्पष्ट होनी अनिवार्य हैं।  यदि नियमानुसार अभिलेख वेबसाइट पर प्रकाशित नहीं किए गए, तो यह नियामकीय प्रावधानों का उल्लंघन है। आयोग ने 1 जून को ही इस आदेश को गैर कानूनी बताया था।  

महाभारत युद्ध में इन 4 महान योद्धाओं ने नहीं लिया हिस्सा, वजह जानकर चौंक जाएंगे

महाभारत का युद्ध मानव इतिहास में धर्म और अधर्म के बीच लड़ा गया सबसे भीषण युद्ध माना जाता है. माना जाता है कि यह युद्ध 18 दिनों तक चला था, जिसमें कुल 18 अक्षौहिणी (प्राचीन भारत में चतुरंगिणी सेना की सबसे बड़ी और मानक माप इकाई) सेनाओं ने भाग लिया था. कौरवों के पास 11 अक्षौहिणी सेना थी, जबकि पांडवों की ओर से केवल 7 अक्षौहिणी सेनाएं युद्ध में उतरी थीं. उस समय लगभग कोई भी राजा-महाराजा इस युद्ध से स्वयं को पूरी तरह अलग नहीं रख पाया था. लेकिन कुछ ऐसे महान योद्धा भी थे, जिन्होंने अपनी अपार शक्ति के बावजूद इस युद्ध में हिस्सा नहीं लिया था. आइए जानते हैं ऐसे ही 4 महान योद्धाओं के बारे में, जिन्होंने युद्ध में भाग नहीं लिया था. बलराम जी भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी यदुवंश के सबसे शक्तिशाली योद्धाओं में से एक थे. उन्होंने मगध नरेश जरासंध के युद्ध अभियानों को कई बार विफल किया था. कथा के मुताबिक, एक बार जब कौरवों ने श्रीकृष्ण के पुत्र सांब को बंदी बना लिया था, तब बलराम जी अकेले ही हस्तिनापुर पहुंचे थे. वहां कौरवों ने उनका अपमान किया, जिससे क्रोधित होकर उन्होंने अपने हल से हस्तिनापुर को गंगा में डुबाने के लिए खींचना शुरू कर दिया. भयभीत होकर कौरवों ने तुरंत सांब को मुक्त कर दिया था. कहा जाता है कि बलराम जी शेषनाग के अवतार माने जाते हैं. दुर्योधन उनका प्रिय शिष्य था, लेकिन श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन का साथ देने के कारण उन्होंने इस युद्ध में निष्पक्ष रहना ही उचित समझा. यदि वे कौरवों की ओर से युद्ध करते, तो परिणाम कुछ और भी हो सकता था. रुक्मी रुक्मिणी के भाई और श्रीकृष्ण के साले रुक्मी भी एक महान योद्धा थे. वे विदर्भ के राजा भीष्मक के पुत्र थे और विजय नामक धनुष धारण करते थे. जब श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण किया था, तो रुक्मी ने उन्हें रोकने के लिए सेना के साथ उनका पीछा किया. उन्होंने प्रतिज्ञा की थी कि यदि वे श्रीकृष्ण को बंदी बनाकर नहीं लाए, तो वे अपने राज्य कुंडिनपुर (विदर्भ की राजधानी) वापस नहीं जाएंगे. लेकिन युद्ध में वे श्रीकृष्ण से हार गए. श्रीकृष्ण ने उनका अपमान करते हुए उनकी दाढ़ी-मूंछ काट दी. अपनी प्रतिज्ञा के कारण रुक्मी कभी अपने राज्य वापस नहीं लौटे और महाभारत युद्ध में भी उन्होंने भाग नहीं लिया था. वीर बर्बरीक भीम के पौत्र वीर बर्बरीक को महाभारत का सबसे महान धनुर्धर माना जाता है. वे घटोत्कच और मोरवी के पुत्र थे. बर्बरीक ने प्रतिज्ञा की थी कि वे युद्ध में हमेशा हारने वाले पक्ष का साथ देंगे. जब वे कुरुक्षेत्र की ओर बढ़े, तो श्रीकृष्ण उनकी इस प्रतिज्ञा से चिंतित हो गए, क्योंकि वे जानते थे कि अंततः कौरवों की हार निश्चित है. बर्बरीक के पास केवल तीन बाण थे, लेकिन उनकी शक्ति इतनी अद्भुत थी कि वे पूरे युद्ध को कुछ ही क्षणों में समाप्त कर सकते थे. इसी कारण श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का रूप धारण कर उनसे दान में उनका मस्तक मांग लिया. बर्बरीक ने सहर्ष अपना शीश दान कर दिया और इस प्रकार वे युद्ध में भाग नहीं ले सके, लेकिन उन्होंने पूरे युद्ध को अपने दृष्टिकोण से देखा. विदुर महाभारत के समय विदुर ने युद्ध में हिस्सा नहीं लिया था. उन्होंने खुद को इस लड़ाई से दूर रखा और सिर्फ एक दर्शक बनकर सब कुछ देखा. विदुर राजा धृतराष्ट्र के मुख्य सलाहकार थे, लेकिन एक बार दुर्योधन ने उनका अपमान कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने दरबार और युद्ध दोनों से दूरी बना ली. विदुर हमेशा धर्म और सच्चाई के पक्ष में खड़े रहने वाले व्यक्ति थे. उन्हें अच्छी तरह समझ आ गया था कि कौरव गलत रास्ते पर चल रहे हैं. यही वजह थी कि उन्होंने किसी भी पक्ष का साथ देने के बजाय तटस्थ रहना सही समझा.

NCR प्लान-2041: दिल्ली का बोझ घटाने को नए ग्रीनफील्ड शहरों का खाका तैयार

नई दिल्ली  दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती आबादी और दबाव को कम करने के लिए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) ने बड़ा खाका तैयार किया है। अगले सप्ताह मंजूरी के लिए रखे जाने वाले रीजनल प्लान-2041 में 5 से 8 नए ग्रीनफील्ड स्मार्ट टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही दिल्ली समेत एनसीआर के प्रमुख शहरों को महज 30 मिनट की दूरी पर लाने की योजना है। NCRPB की योजना के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के एनसीआर क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए नए स्मार्ट शहर बसाए जाएंगे। इन टाउनशिप में आधुनिक नागरिक सुविधाएं, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट मॉडल अपनाया जाएगा। दिल्ली का बोझ कम करने पर फोकस रीजनल प्लान-2041 प्लान में मौजूदा शहरों और बस्तियों के पुनर्विकास के साथ-साथ नए ग्रीनफील्ड शहर बसाने का सुझाव दिया गया है। इन शहरों को आत्मनिर्भर और स्व-संपूर्ण बनाया जाएगा ताकि रोजगार, आवास और अन्य सुविधाओं के लिए लोगों को दिल्ली पर निर्भर न रहना पड़े। योजना में उत्तर प्रदेश सरकार के यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एरिया (YEIDA) को 20 लाख आबादी वाले ग्रीनफील्ड शहर के रूप में विकसित करने और हरियाणा में कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे के आसपास प्रस्तावित पंचग्राम परियोजना का भी जिक्र किया गया है। रीजनल प्लान-2041 की बड़ी बातें     NCR में 5-8 नए स्मार्ट ग्रीनफील्ड शहर बसाने का प्रस्ताव     दिल्ली से प्रमुख एनसीआर शहरों की दूरी 30 मिनट करने की योजना     हाई-स्पीड रेल और हेली-टैक्सी नेटवर्क पर जोर     YEIDA और हरियाणा के पंचग्राम को नए विकास केंद्र के रूप में शामिल किया गया     अगले 15 सालों में 20 लाख करोड़ रुपये निवेश की जरूरत     2030 तक दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर बन सकता है दिल्ली-एनसीआर दिल्ली से जुड़ेंगे एनसीआर के प्रमुख शहर रीजनल प्लान-2041 का सबसे महत्वाकांक्षी प्रस्ताव 30 मिनट NCR है। इसके तहत दिल्ली और NCR के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय 30 मिनट तक सीमित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए हाई-स्पीड और सीमित स्टॉपेज वाली मास ट्रांजिट रेल प्रणाली, सुपरफास्ट ट्रेनें और हेली-टैक्सी जैसी सुविधाओं की संभावनाएं तलाशने का प्रस्ताव है। योजना के अनुसार अन्य रेल सेवाओं से NCR के किसी भी हिस्से तक 60 मिनट और कार से 2 से 3 घंटे के भीतर पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। 2030 तक बनेगा दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर प्लान के अनुसार, साल 2030 तक दिल्ली-एनसीआर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला शहरी क्षेत्र बन सकता है। जो कि जापान की राजधानी टोक्यो को भी छोड़ देगा। अनुमान है कि अगले 15 वर्षों में 3 करोड़ से अधिक अतिरिक्त लोगों को बसाने और मौजूदा आबादी के लिए बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश की आवश्यकता होगी।