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निवेशकों के लिए बड़ी राहत: बिहार में सिंगल विंडो सिस्टम से तेज होगी मंजूरी प्रक्रिया

पटना  बिहार में उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को तेज और निवेशकों के लिए अधिक सरल बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को कहा कि अब बिहार में नए उद्योग लगाने के लिए जरूरी स्वीकृतियां मात्र 30 दिनों के भीतर प्रदान की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि बिहार ने औद्योगिक प्रगति की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। सिंगल विंडो स‍िस्‍टम की व्‍यवस्‍था उन्होंने बताया कि निवेशकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने तथा उद्योग स्थापना की प्रक्रियाओं को आसान और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से राज्य में सिंगल विंडो प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद (SIPB) सचिवालय को एकल नोडल एजेंसी के रूप में अधिकृत किया गया है। इसके माध्यम से विभिन्न विभागों से मिलने वाली अनुमतियों और स्वीकृतियों की प्रक्रिया एक ही मंच से संचालित होगी। इससे निवेशकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर मंजूरी मिल सकेगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, नई व्यवस्था से विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और अनुमोदन प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनेगी। दूर होंगी प्रशासनिक जटिलताएं साथ ही प्रशासनिक जटिलताओं को भी काफी हद तक समाप्त किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इससे औद्योगिक परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन में मदद मिलेगी और निवेशकों का भरोसा बिहार में और मजबूत होगा। सम्राट चौधरी ने दावा किया कि राज्य सरकार के इस फैसले से बिहार में निवेश को नई रफ्तार मिलेगी। नए उद्योग स्थापित होने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसरों के साथ बिहार अब विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से अग्रसर है।  

पटना केस में नया मोड़, खान सर की कानूनी टीम FIR क्वैशिंग पर कर रही विचार

 पटना पटना कोचिंग विवाद से जुड़े मामले में शिक्षक और यूट्यूबर फैसल खान (खान सर) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सूत्रों के मुताबिक, उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देने की तैयारी चल रही है। बताया जा रहा है कि उनकी कानूनी टीम अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। इस संभावित कदम ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। कानूनी और राजनीतिक गलियारों में भी इस पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ‘FIR खत्म, तो खत्म होगा पूरा विवाद?’ हाईकोर्ट में दांव लगाने की तैयारी जानकारी के अनुसार, खान सर की ओर से FIR Quashing Petition दाखिल करने पर विचार किया जा रहा है। इस याचिका के जरिए हाईकोर्ट से एफआईआर रद करने की मांग की जाती है। कानूनी टीम मामले के हर पहलू का बारीकी से अध्ययन कर रही है। यदि याचिका दायर होती है तो यह केस का सबसे अहम मोड़ साबित हो सकता है। कोर्ट पहले याचिका की वैधता और आधारों की जांच करेगा। इसके बाद आगे की सुनवाई का रास्ता तय होगा। कब रद होती है FIR? जानिए हाईकोर्ट के पास कितनी बड़ी ताकत कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, हर एफआईआर को रद नहीं किया जा सकता। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में हाईकोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है। यदि मामला झूठा या निराधार प्रतीत हो तो राहत मिल सकती है। कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग की स्थिति भी अहम आधार मानी जाती है। समझौता होने या गंभीर अपराध के तत्व न मिलने पर भी सुनवाई संभव है। अंतिम फैसला तथ्यों और सबूतों के आधार पर ही होता है। बढ़ता दबाव या बड़ी रणनीति? हर कदम पर टिकी हैं सबकी निगाहें कोचिंग विवाद पहले से ही चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अब हाईकोर्ट जाने की खबर ने उत्सुकता और बढ़ा दी है। कई कानूनी जानकार इसे बचाव पक्ष की बड़ी रणनीति मान रहे हैं। अगर याचिका दाखिल होती है तो कई नए कानूनी सवाल उठ सकते हैं। प्रशासन और जांच एजेंसियां भी घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में मामला और दिलचस्प हो सकता है। खान सर को बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर फिलहाल लगी ब्रेक इस बीच खान सर को अदालत से महत्वपूर्ण राहत मिली है। अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई है। इस फैसले से उन्हें तत्काल कानूनी सुरक्षा मिल गई है। पिछले कुछ दिनों से पुलिस कार्रवाई की चर्चाएं तेज थीं। इसी बीच अग्रिम जमानत की मांग को अदालत ने स्वीकार किया। फिलहाल अगली सुनवाई तक राहत बरकरार रहेगी। अब सबकी नजर हाईकोर्ट पर, क्या बदल जाएगी केस की पूरी कहानी? सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या FIR रद कराने की याचिका वास्तव में दाखिल होगी। यदि ऐसा होता है तो हाईकोर्ट के सामने पूरे मामले की कानूनी जांच होगी। याचिका मंजूर होने पर केस की दिशा पूरी तरह बदल सकती है। वहीं, राहत न मिलने पर जांच प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल हर पक्ष अगली कानूनी चाल का इंतजार कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी ज्यादा चर्चा में रह सकता है।

योगी सरकार की नई पहल, पीड़ित महिलाओं को आवास और स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ

 लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण को लेकर लगातार नए कदम उठा रही है। इसी क्रम में योगी सरकार ने तीन तलाक(Triple Talaq) तथा एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। योगी सरकार इन पीड़ित महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना(PM Housing Scheme), मुख्यमंत्री आवास योजना (Chief Minister Housing Scheme), आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना तथा मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से लाभान्वित करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही निराश्रित महिलाओं को भी इन सभी योजनाओं का लाभ देने की तैयारी शुरू कर दी गयी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर महिला कल्याण विभाग ने विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके साथ ही महिला कल्याण विभाग तीन तलाक एवं एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं के साथ निराश्रित महिलाओं का विस्तृत डाटा एकत्रित किया जा रहा है, ताकि पात्र महिलाओं को योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जा सके। लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा शासन स्तर पर इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश और शासनादेश (जीओ) तैयार करने की प्रक्रिया भी चल रही है। महिला कल्याण विभाग द्वारा पीड़ित महिलाओं का सत्यापित विवरण एकत्रित किया जा रहा है। इसके आधार पर लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा। योगी सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी पात्र महिला को केवल जानकारी के अभाव या प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण सरकारी योजनाओं से वंचित न रहना पड़े। इसके लिए विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है। योगी ने उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को दिए थे निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये थे कि जिन महिलाओं को तीन तलाक या एसिड अटैक जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है और जिनके पास स्थायी आवास नहीं है, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही इन महिलाओं और उनके परिवारों को आयुष्मान भारत योजना एवं मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़कर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का भी लाभ दिया जाए। मालमू हो कि एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को लंबे समय तक इलाज, सर्जरी और पुनर्वास की आवश्यकता होती है। वहीं, तीन तलाक से प्रभावित कई महिलाएं आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा का सामना करती हैं। ऐसे में आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा दोनों उपलब्ध कराकर योगी सरकार उनके जीवन को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

रिहायशी इलाके में धमाका-आग: जयपुर पटाखा फैक्ट्री हादसे से मची अफरा-तफरी

जयपुर राजस्थान की राजधानी जयपुर के खो नागोरियान इलाके में एक घर के अंदर चल रही पटाखा फैक्ट्री में मंगलवार सुबह अचानक आग लग गई. इस भीषण हादसे में 3 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 5 लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं. इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है और दमकल व प्रशासन की टीमें मौके पर राहत कार्य में जुटी हैं. रिहायशी इलाके में हुआ हादसा आयशा नगर के तलाई क्षेत्र में यह पटाखा फैक्ट्री घनी आबादी के बीच एक मकान में चल रही थी. बताया जा रहा है कि घर में रखे किसी ज्वलनशील पदार्थ ने अचानक आग पकड़ ली. आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर काम कर रहे लोगों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला. घायलों को SMS अस्पताल किया गया रेफर हादसे में झुलसे 5 लोगों को तुरंत रेस्क्यू कर अस्पताल ले जाया गया. इनमें से कई लोगों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिसे देखते हुए उन्हें जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया है. डॉक्टरों की टीम घायलों के इलाज में जुटी हुई है. दमकल की दो गाड़ियां बुझा रही हैं आग घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग ने मोर्चा संभाल लिया. मौके पर सिविल डिफेंस की टीम भी रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी है. फिलहाल दमकल की दो गाड़ियां लगातार आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही हैं ताकि आग को आस-पास के घरों तक फैलने से रोका जा सके. आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार जयपुर जिला कलेक्टर संदेश नायक और एडीएम सहित आला अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं और हालात की निगरानी कर रहे हैं. कलेक्टर संदेश नायक ने बताया कि घर के अंदर रखे किसी ज्वलनशील पदार्थ के कारण यह हादसा हुआ. उन्होंने स्पष्ट किया कि कुल मौतों और घायलों का आधिकारिक आंकड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही एक प्रेस रिलीज के जरिए जारी किया जाएगा.

श्रीराम कथा समापन में बोले योगी आदित्यनाथ: राम नाम से एकजुट हुआ देश

लखनऊ सीतापुर रोड स्थित ब्रज की रसोई परिसर में आयोजित श्रीराम कथा के समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्रहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। सीएम ने कहा कि भारत की धरती कोई धर्मशाला नहीं है। जो भारत की संस्कृति, विरासत और मूल्यों का सम्मान करेगा, वही यहां सम्मानपूर्वक रह सकेगा। जो भारत की आत्मा और उसके संस्कारों को स्वीकार नहीं कर सकता, उसके लिए यहां कोई स्थान नहीं है। मुख्यमंत्री ने पद्म विभूषण जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य महाराज के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि चित्रकूट में देश के पहले दिव्यांग विश्वविद्यालय की स्थापना कर उन्होंने सेवा और समर्पण का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस आयु में भी वे विश्राम करने के बजाय लोकमंगल और राष्ट्रकल्याण के लिए देश-विदेश में श्रीराम कथा के माध्यम से जनजागरण का कार्य कर रहे हैं। श्रीराम के नाम ने पूरे देश को एक जुट बनाए हैं योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन किसी व्यक्ति, संगठन या दल का आंदोलन नहीं था, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का विषय था। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का नाम वह सूत्र रहा, जिसने उत्तर से दक्षिण तक पूरे देश को एकजुट बनाए रखने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति भगवान राम के आदर्शों का थोड़ा-सा अंश भी अपने जीवन में उतार ले, तो उसका ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र का भी कल्याण संभव है। कंस और मारीच का दिया उदाहरण मुख्यमंत्री ने पौराणिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास और धर्मग्रंथ हमें सज्जन शक्ति को संगठित करने तथा अधर्म और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कंस और मारीच के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि गलत संगति और स्वार्थपूर्ण सलाह हमेशा समाज और राष्ट्र को नुकसान पहुंचाती है। संत समाज सदैव लोगों को जोड़ने का काम करता है सीएम योगी ने कहा कि कुछ शक्तियां समाज को जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर बांटने का प्रयास करती हैं, जबकि संत समाज सदैव लोगों को जोड़ने और राष्ट्र को मजबूत करने का कार्य करता है। मुख्यमंत्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं का अभिनंदन करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम और संतों का सानिध्य व्यक्ति को जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य को नमन करते हुए उनके आगामी साधना पर्व की सफलता तथा राष्ट्र कल्याण की कामना की। साथ ही उपस्थित श्रद्धालुओं को जय श्रीराम के उद्घोष के साथ शुभकामनाएं भी दीं।  

50 लाख से अधिक की प्रॉपर्टी डील पर TDS नियमों की जांच तेज, बागपत में खंगाले जा रहे दस्तावेज

लखनऊ यूपी में जमीन-मकान की खरीद-फरोख्त पर नजर रखी जा रही है। आयकार की नजर है। बागपत में बीते वर्षों में मिली खामियों और सर्वे की कार्रवाई के बाद आयकर विभाग ने वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही रजिस्ट्री कार्यालयों के रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू कर दी है। टीडीएस देयता, रजिस्ट्री संबंधी विवरण और वित्तीय लेनदेन के ब्योरे में दर्ज प्रविष्टियों की बारीकी से जांच की जा रही है। आयकर विभाग की आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण इकाई के अधिकारी हर पहलू की समीक्षा कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2021-22 से लेकर वर्तमान अवधि तक के रिकॉर्ड को जांच के दायरे में लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, जमीन के बैनामे के समय संपत्ति के मूल्य के आधार पर टीडीएस देयता निर्धारित होती है। इसके लिए पैन कार्ड नंबर दर्ज कराना अनिवार्य है। हालांकि जांच में सामने आया कि कई मामलों में इन औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया। इसी लापरवाही को देखते हुए जनपद की विभिन्न तहसीलों के रजिस्ट्री कार्यालयों का सर्वे किया गया। यदि बैनामा की गई संपत्ति का मूल्य 30 लाख रुपये या उससे अधिक है तो संबंधित सब रजिस्ट्रार कार्यालय को स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन (एसएफटी) के तहत इसकी सूचना आयकर विभाग को देनी होती है। निर्धारित प्रारूप में यह विवरण तय समय सीमा के भीतर जमा करना अनिवार्य है। वहीं 50 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की संपत्ति के सौदे में खरीदार को विक्रेता के भुगतान से एक प्रतिशत टीडीएस काटना होता है। नियमों के तहत फार्म 60 भरना अनिवार्य यदि किसी संपत्ति का सौदा 10 लाख रुपये या उससे अधिक का है और संबंधित व्यक्ति के पास पैन कार्ड नहीं है तो आयकर नियमों के तहत फार्म-60 भरना अनिवार्य है। इसमें सौदा करने वाले व्यक्ति की पहचान और निवास संबंधी विवरण दर्ज किए जाते हैं। इन मामलों की जानकारी एसएफटी फाइलर द्वारा फार्म-61 और फार्म-61ए के माध्यम से आयकर विभाग को भेजी जाती है। ये खामियां आईं सामने आयकर व्यवस्था में किसानों की कृषि आय को कर से छूट प्राप्त है। जांच में पाया गया कि कुछ बिल्डरों ने इस प्रावधान का लाभ उठाने के लिए नगरीय क्षेत्र की कृषि भूमि के करोड़ों रुपये के सौदे किए। कई मामलों में न तो टीडीएस काटा गया और न ही पैन कार्ड का विवरण दर्ज किया गया। पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) की देयता को भी नजरअंदाज किया गया। आयकर विभाग की जांच में ऐसे कई सौदे सामने आए, जिनमें बाद में टीडीएस और कैपिटल गेन टैक्स की देयता निर्धारित की गई।

सचिवों की समिति की बैठक में बड़ा निर्देश: ई-फाइल प्रक्रिया होगी सरल, शिकायतों का होगा त्वरित निस्तारण

जयपुर मुख्य सचिव श्री वी.श्रीनिवास की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में सचिवों की समिति (Committee of Secretaries) की बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव एवं शासन सचिव उपस्थित रहे। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति, बजटीय प्रावधानों के विरुद्ध निधियों के उपयोग तथा जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने योजनाओं के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचे। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक विलंब समाप्त करने के लिए ई-फाइलों के निस्तारण की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि ई-फाइल को जिन विभिन्न स्तरों से होकर गुजरना पड़ता है, उनकी संख्या यथासंभव कम की जाए ताकि निर्णय प्रक्रिया में तेजी आए तथा प्रशासन अधिक दक्ष एवं उत्तरदायी बन सके। उन्होंने विभागों को लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण पर विशेष ध्यान देने के लिए भी कहा। बैठक में मुख्य सचिव ने वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान जैसे जनभागीदारी आधारित अभियानों में व्यापक जनसहभागिता सुनिश्चित करने हेतु प्रभावी जनजागरूकता एवं आउटरीच कार्यक्रम आयोजिंत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर समाज की सक्रिय भागीदारी अभियान की सफलता की कुंजी है तथा विभागों को स्थानीय स्तर पर व्यापक संवाद एवं सहभागिता को बढ़ावा देना चाहिए। मुख्य सचिव ने राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर प्राप्त होने वाली शिकायतों के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि शिकायतों का निपटारा निर्धारित समय सीमा में उचित माध्यम से किया जाए। साथ ही, पोर्टल एवं हेल्पलाइन पर कार्यरत शिकायत निवारण अधिकारियों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करने के निर्देश दिए ताकि शिकायतों के प्रभावी एवं त्वरित समाधान की व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो सके। उन्होंने विधानसभा सदस्यों द्वारा पूछे गए लंबित प्रश्नों के उत्तर भी शीघ्र एवं तथ्यपरक रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान विभिन्न विभागों की कार्य रिपोर्टों की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अंतर्विभागीय विषयों पर प्रभावी सहयोग एवं संवाद से योजनाओं के बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने इज़ ऑफ डूइंग बिज़नस के संबंध में प्रदेश की डी-रेगुलेशन सेल एवं राजनिवेश पोर्टल के उत्कृष्ट प्रदर्शन सहित विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की।

स्मार्ट सिटी की ओर दिल्ली, CSIR-CRRI और SPA के साथ सड़क सुधार पर बड़ा समझौता

नई दिल्ली  राजधानी की सड़कों को धूल मुक्त, सुरक्षित और स्मार्ट बनाने की दिशा में सरकार ने सीएसआईआर-सीआरआरआई और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) से समझौता किया है। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि पीडब्ल्यूडी के साथ इस समझौते के तहत दिल्ली में रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम (आरएएमएस) लागू किया जाएगा, जिसके जरिए सड़कों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और उनकी स्थिति, मरम्मत की जरूरत तथा यातायात दबाव का वैज्ञानिक आकलन के साथ प्लानिंग की जा सकेगी। डेटा आधारित रोड मैनेजमेंट सीएम ने कहा, सरकार केवल नई सड़कें बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि ऐसा अर्बन रोड इकोसिस्टम विकसित कर रही है जो पर्यावरण-अनुकूल, सुरक्षित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हो। बढ़ते ट्रैफिक, वायु प्रदूषण और जलभराव जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अब सड़कों का रखरखाव पारंपरिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और डेटा आधारित प्रणाली से किया जाएगा। सीएम के मुताबिक, नई व्यवस्था से सड़कों के रखरखाव और मरम्मत की योजना डेटा आधारित होगी, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग और रोड स्ट्रक्चर की गुणवत्ता में सुधार होगा। सड़कों के किनारे वैज्ञानिक तरीके से ग्रीन एरिया विकसित किया जाएगा, स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने तथा मिकैनाइज्ड रोड स्वीपिंग और डस्ट कंट्रोल के उपायों को लागू किया जाएगा। समझौते के तहत सड़कों के स्लोप और स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम को भी वैज्ञानिक आधार पर विकसित किया जाएगा। समझौते की मुख्य बातें…     सड़कों के स्लोप और स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम को पुनर्गठित किया जाएगा।     पेवमेंट डिजाइन में तकनीक का इस्तेमाल होगा, जो भूजल रिचार्ज में सहायक हो।     सड़क इंजीनियरिंग, पेवमेंट टेक्नोलॉजी, रोड सेफ्टी और एसेट मैनेजमेंट पर काम होगा।     एसपीए शहरी डिजाइन, स्ट्रीट एस्केप प्लानिंग, पब्लिक स्पेस डिवेलपमेंट, अर्बन लैंडस्केपिंग पर काम करेगी।     सड़कों के लिए एक इंटीग्रेटेड अर्बन रोड डिवेलपमेंट मॉडल विकसित किया जाएगा। आधुनिक रोड मॉडल पर जोर पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, यह समझौता रोड स्ट्रक्चर को आधुनिक, वैज्ञानिक और भविष्य की आवश्यकताओं के हिसाब से विकसित करेगा। सड़कों के लिए एक इंटीग्रेटेड अर्बन रोड डिवेलपमेंट मॉडल विकसित किया जाएगा। वहीं, मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, सरकार सड़कों के किनारे स्थानीय और पर्यावरण-अनुकूल वृक्षों, झाड़ियों तथा घास के रोपण के माध्यम से डस्ट पॉल्यूशन कम करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है।  

यातायात नियम उल्लंघन पर बड़ी कार्रवाई, काली फिल्म और VIP नंबर प्लेट पर सबसे ज्यादा चालान

 जयपुर महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार प्रदेशभर में चलाए जा रहे विशेष यातायात एवं कानून पालन अभियान के तहत राजस्थान पुलिस ने आठवें दिन व्यापक कार्रवाई करते हुए 8,448 वाहन चालकों के विरुद्ध कार्रवाई की। अभियान का उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना, यातायात नियमों की पालना सुनिश्चित करना तथा आमजन में जिम्मेदार वाहन संचालन के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। डीजी ट्रैफिक श्री अनिल पालीवाल के पर्यवेक्षण में चल रहे अभियान के बारे में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस यातायात डॉ बी एल मीणा ने बताया कि अभियान के दौरान पुलिस ने वाहनों में अवैध संरचनात्मक परिवर्तन, अनधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर एवं स्ट्रोब लाइट, प्रेशर हॉर्न, काली फिल्म, वाहनों पर अनधिकृत शब्द एवं चिन्ह तथा नियम विरुद्ध नम्बर प्लेट लगाने जैसे उल्लंघनों पर विशेष कार्रवाई की।  ब्लैक फिल्म और वीआईपी स्टाइल नंबर प्लेट का सबसे ज्यादा क्रेज आंकड़ों के विश्लेषण से साफ है कि प्रदेश में लोग सबसे ज्यादा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। पूरे राज्य में सबसे ज्यादा 3,264 कार्रवाई वाहनों के शीशे पर लगी काली फिल्म के खिलाफ की गई। नियम विरुद्ध और वीआईपी स्टाइल में नंबर प्लेट लगाने वाले 2,079 वाहन चालक पुलिस के हत्थे चढ़े। अपनी गाड़ियों पर अवैध रूप से पद, जाति या अनाधिकृत शब्द लिखने वाले 1,204 लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई। बिना अनुमति के गाड़ी की चेसिस या बॉडी को मॉडिफाई कराने वाले 861 वाहनों पर भी डंडा चला है। बत्तीबाज़ों और प्रेशर हॉर्न पर भी कड़ा प्रहार सड़कों पर बेवजह रौब झाड़ने और शोर मचाने वालों को भी पुलिस ने नहीं बख्शा। राज्यभर में 544 ऐसे मामले सामने आए जहां गाड़ियों पर अनाधिकृत रूप से लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर या हूटर लगे हुए थे। वहीं, ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले 496 प्रेशर हॉर्न और एयर हॉर्न के खिलाफ भी पुलिस ने सख्त एक्शन लिया है। पटाखे की ध्वनि करती बुलेट गाड़ियों के विरुद्ध भी कार्यवाही की जा रही है। अभियान में कोटा शहर सर्वाधिक 572 कार्रवाइयों के साथ प्रथम स्थान पर रहा, जबकि अजमेर में 416, बाड़मेर में 340, चित्तौड़गढ़ में 311 तथा भरतपुर में 309 कार्रवाइयाँ दर्ज की गईं। वहीं भीलवाड़ा में 281, झुंझुनूं में 257, जयपुर ग्रामीण में 247 तथा उदयपुर में 215 कार्रवाई कर नियम उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए गए। जयपुर यातायात पुलिस ने भी अभियान में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए 320 मामलों में कार्रवाई की, जबकि जोधपुर ट्रैफिक पुलिस ने 180 और जयपुर ग्रामीण पुलिस ने 247 मामलों में नियम उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की। महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा ने सभी पुलिस इकाइयों को निर्देश दिए हैं कि सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों की पालना सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अभियान निरंतर जारी रखे जाएं। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का पालन केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामाजिक जिम्मेदारी भी है। राजस्थान पुलिस का उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता बढ़ाकर सुरक्षित और अनुशासित यातायात व्यवस्था स्थापित करना है।

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद खादर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू

नई दिल्ली  यमुना नदी के खादर क्षेत्र में बसी अनधिकृत कालोनियों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिल्ली हाई कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने यमुना के संरक्षित ओ-जोन इलाके से अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर एक्शन शुरू कर दिया है। हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद डीडीए अवैध निर्माणों और बस्तियों को हटाने की कार्रवाई तेज कर सकती है। क्या है दिल्ली का O-Zone ? दिल्ली सरकार के मास्टर प्लान-2021 के अनुसार, यमुना के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र को O-Zone घोषित किया गया है। यह इलाका वजीराबाद से ओखला तक करीब 22 किलोमीटर में फैला हुआ है और लगभग 9,700 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करता है। राजधानी का यह इलाके का उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा और यमुना नदी को प्रदूषण से बचाना है। नियमों के अनुसार यहां आवासीय निर्माण और स्थायी मकान का निर्माण नहीं किया जा सकता है। क्यों चर्चा में है O-Zone? डीडीए के अनुसार, पिछले कई सालों में यमुना के खादर क्षेत्र में बड़ी संख्या में अवैध बस्तियां और कालोनियां विकसित हो गई हैं। इनमें से कई जगहों पर सीवर और अन्य बुनियादी जरूरतों का भी अभाव है, जिसके कारण गंदा पानी सीधे यमुना में पहुंचता है। इससे नदीं प्रदूषित होती और बाढ़ का खतरा बढ़ता है। दिल्ली हाई कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के बाद डीडीए इसी ओ-जोन इलाके को मूल अवस्था में लाने के लिए बुलडोजर एक्शन शुरू कर रहा है। दिल्ली के O-Zone में कौन से इलाके? DDA के रिकॉर्ड के मुताबिक, यमुना फ्लडप्लेन के भीतर करीब 90 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियां मौजूद हैं। इनमें मदनपुर खादर, जैतपुर, मीठापुर, झंगोला, सोनिया विहार के कुछ हिस्से, खजूरी खास, करावल नगर समेत यमुना किनारे के कई अन्य इलाके शामिल बताए जाते हैं। बता दें ओ-जोन बाढ़ क्षेत्र है, इसलिए कई इलाकों का पूरा हिस्सा इसके अंतर्गत नहीं आता है। बल्कि केवल यमुना के करीब स्थित कुछ हिस्से ही आते हैं।     मदनपुर खादर     जैतपुर     मीठापुर     झंगोला     सोनिया विहार के कुछ हिस्से     खजूरी खास     करावल नगर के कुछ हिस्से     जगतपुर     बुराड़ी के यमुना किनारे वाले क्षेत्र     उस्मानपुर     गढ़ी मांडू     शेरपुर     बेहटा हाजीपुर     ताजपुर खुर्द     छिल्ला गांव क्षेत्र     कोंडली के कुछ हिस्से     मयूर विहार के यमुना किनारे स्थित क्षेत्र     ओखला बैराज के आसपास के इलाके     आईटीओ बैराज के आसपास का फ्लडप्लेन क्षेत्र