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MP ट्रांसको की बड़ी उपलब्धि, इन-हाउस ओवरहॉलिंग से 400 केवी सर्किट ब्रेकर पर बचाए 50 लाख रुपये

एमपी ट्रांसको ने बिरसिंहपुर फीडर के 400 केवी सर्किट ब्रेकर की इन-हाउस ओवरहॉलिंग कर बचाए 50 लाख रुपये भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के अभियंताओं ने 400 केवी सब स्टेशन कटनी में स्थापित बिरसिंहपुर नंबर-2 फीडर के 400 केवी एबीबी निर्मित सर्किट ब्रेकर की सफलतापूर्वक इन-हाउस ओवरहॉलिंग कर कंपनी को लगभग 50 लाख रुपये की बचत कराई है। अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री आर.सी. शर्मा की पहल पर अभियंताओं एवं तकनीकी कर्मचारियों द्वारा लगभग एक सप्ताह तक सतत प्रयास कर यह कार्य पूर्ण किया गया। बिरसिंहपुर के महत्वपूर्ण फीडर में लगा है यह ब्रेकर यह सर्किट ब्रेकर बिरसिंहपुर ताप विद्युत गृह से आने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण 400 केवी फीडर पर स्थापित है, जिसके माध्यम से लगभग 350 मेगावॉट विद्युत का पारेषण होता है। प्रदेश की विद्युत व्यवस्था की दृष्टि से यह फीडर अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण फीडर पर स्थापित सर्किट ब्रेकर की सफल ओवरहॉलिंग ने न केवल इसकी विश्वसनीयता बढ़ाई है, बल्कि विद्युत आपूर्ति की निर्बाधता और ग्रिड सुरक्षा को भी सुदृढ़ किया है। फर्स्ट जेनरेशन का है ब्रेकर लगभग 20 वर्ष पुराने फर्स्ट जनरेशन सर्किट ब्रेकर के स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध न होने के बावजूद कटनी डिवीजन की टीम ने अपनी तकनीकी दक्षता और अनुभव का परिचय देते हुए इसका निरीक्षण, परीक्षण, मरम्मत एवं आवश्यक पार्ट्स का प्रतिस्थापन किया। इस चुनौतीपूर्ण कार्य में ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस संभाग दमोह एवं कटनी का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। ऊर्जा मंत्री ने की सराहना ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इसे कंपनी की तकनीकी क्षमता, संसाधनों के कुशल उपयोग, लागत नियंत्रण एवं आत्मनिर्भर कार्य संस्कृति का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए संबंधित अभियंताओं एवं कर्मचारियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि कंपनी के अभियंता अपनी विशेषज्ञता के बल पर महत्वपूर्ण उपकरणों के रखरखाव एवं पुनर्संचालन में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं।  

कागज नहीं, प्लास्टिक करेंसी! RBI की चर्चा के बीच जानिए कितने टिकाऊ होते हैं ये नोट

 नई दिल्ली भारत में भी अब 'प्लास्टिक' के नोट आने वाले हैं, जैसे कई दूसरे देशों में छापे जाते हैं. खास मैटेरियल से बने ये नोट जल्दी से फटते नहीं हैं और अगर पानी में गिर जाए तो खराब नहीं होते हैं. अब भारतीय रिजर्व बैंक ने भी बता दिया है कि इस तरह के नोट लाने का प्रस्ताव केंद्रीय बैंक के समक्ष विचाराधीन है और फिलहाल यह विचार अभी शुरुआती फेज में है. अभी भले ही इसमें टाइम लगेगा, लेकिन भारत के करेंसी नोट भी अलग मैटेरियल के होंगे. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये नोट प्योर प्लास्टिक से बनाए जाएंगे या फिर कुछ अलग मैटेरियल के होंगे और इस पर कितना काम हो चुका है? अभी आरबीआई का क्या कहना है? हाल ही में आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि पॉलिमर से बने नोट लाने का प्रस्ताव केंद्रीय बैंक के समक्ष विचाराधीन है और फिलहाल यह विचार अभी प्रारंभिक चरण में है. पॉलिमर नोट लाने के संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है और आरबीआई इसे लेकर आकलन कर रहा है. इस पर जैसे ही कोई निर्णय होता है, उसकी जानकारी दी जाएगी. दरअसल, सरकार इस पर लंबे वक्त से काम कर रही है।  इससे पहले इससे पहले फरवरी 2014 में सरकार ने संसद को बताया था कि 10 रुपये के एक अरब पॉलिमर नोटों को देश के पांच शहरों में परीक्षण के तौर पर जारी किया जाएगा. इस परीक्षण के लिए कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर का चयन किया गया था. हालांकि, तकनीकी और परिचालन संबंधी समस्याओं के कारण इस पहल को बाद में रोक दिया गया था।  किस मैटेरियल के होंगे ये नोट? जिन नोटों की चर्चा हो रही है, उन्हें पॉलिमर नोट कहा जाता है. ये कागज के बजाय एक विशेष प्रकार की पतली और लचीली प्लास्टिक फिल्म से बने मुद्रा नोट होते हैं. ये आम कागजी नोटों (जो कपास और लिनन से बनते हैं) की तुलना में कई गुना अधिक मजबूत होते हैं. ये पानी में भीगने या वॉशिंग मशीन में धुल जाने पर भी खराब नहीं होते हैं. ये नोट थोड़े चिकने होते हैं।  इन नोट्स को बनाने में BOPP यानी पॉलीप्रोपाइलीन का इस्तेमाल किया जाता है. पॉलिमर नोटों में पॉलीप्रोपाइलीन (BOPP) ही वह मुख्य आधार है, जो इन्हें पारंपरिक कागजी नोटों से अलग बनाता है. इन्हें प्लास्टिक का कहा जा सकता है, लेकिन ये पूरी तरह से प्लास्टिक के नोट नहीं होते हैं जबकि ये उसी मैटेरियल का सबसे अच्छा रूप है. पॉलिमर नोट आम प्लास्टिक (जैसे कैरी बैग या पीवीसी) से काफी अलग होते हैं. इसकी परत आम प्लास्टिक की तरह मोटी या सख्त नहीं, बल्कि कागज जितनी पतली होती है. यह सामान्य प्लास्टिक की तरह जेब की गर्मी या धूप से आसानी से पिघलता या सिकुड़ता नहीं है।  इस प्लास्टिक फिल्म पर स्याही को रोकने के लिए खास तरह की लेयर की कोटिंग की जाती है, इस पर छपाई टिकी रहती है. पॉलिमर नोटों की शुरुआत सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में हुई थी. इसके बाद से यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, न्यूजीलैंड और सिंगापुर जैसे कई अन्य देशों ने भी अपनी मुद्रा के लिए पॉलिमर तकनीक को सफलतापूर्वक अपनाया है. अब भारत भी इस पर विचार कर रहा है। 

वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले बढ़ा तनाव, ईरान-अमेरिका विवाद ने खींचा ध्यान

नई दिल्ली फीफा वर्ल्ड कप के 23वें संस्करण (FIFA World Cup 2026) को शुरू होने में अब 2 दिन बचे हैं. इससे पहले एक और विवाद खड़ा हो गया है. ईरान फुटबॉल फेडरेशन (FFIRI) ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उनकी टीम के वर्ल्ड कप के ग्रुप मैचों के टिकेटों का आवंटन रद्द कर दिया है. बता दें कि इस बार 3 देश मिलकर टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहे हैं, जिसमें USA भी है।  ईरान फुटबॉल फेडरेशन का कहना है कि डिप्लोमेटिक विवाद के कारण अमेरिका ईरानी दर्शकों को फीफा वर्ल्ड कप के मैच देखने से रोकने की कोशिश कर रहा है. बता दें कि इससे पहले अमेरिका में इराक फुटबॉल टीम के एक खिलाड़ी को एयरपोर्ट पर डिटेन कर लिया था, जिसे 7 घंटे पूछताछ के बाद छोड़ा था।  मंगलवार को बयान जारी करते हुए ईरान फुटबॉल फेडरेशन ने कहा, "फीफा वर्ल्ड कप 2026 शुरू होने में अब 2 दिन बचे हैं. अमेरिका ने एक बार फिर ग्रुप स्टेज में ईरान फुटबॉल टीम के तीनों मैचों के वेन्यू पर ईरानी समर्थकों के आने में बाधा डालने का काम किया है।  रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने ईरान के लिए कई प्रशासनिक मुश्किलें भी खड़ी की हैं, जैसे उन्होंने कुछ सपोर्ट स्टाफ के सदस्यों को वीजा देने से मना कर दिया. बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच अभी रिश्ते बिल्कुल भी अच्छे नहीं है।  फीफा के नियमों के मुताबिक हर मैच के लिए 8 प्रतिशत टिकट ईरान को मिलने चाहिए. ईरान ने आरोप लगाया है कि टिकट का ये हिस्सा टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले फेडरेशन को दिए जाते हैं, जिससे वह अपने माध्यम से समर्थकों को इन्हें बांट सके।  ईरान फुटबॉल फेडरेशन के मुताबिक उन्होंने अपने ग्रुप मैचों की टिकट बिक्री शुरू कर दी थी, जो अमेरिका में होने वाले हैं. लेकिन अमेरिका ने उन्हें मिलने वाला कोटा वापस ले लिया है, और अभी ईरान अपने समर्थकों को एक भी टिकट नहीं देने की स्थिति में है. ईरान फुटबॉल टीम ग्रुप 'जी' में है, जिसमें उनका सामना बेल्जियम, इजिप्ट और न्यूजीलैंड से होगा। 

जनजातीय अध्ययन में नई पहचान बना रहा DAVV इंदौर, शोध और नवाचार को मिल रही नई दिशा

जनजातीय अध्ययन को नई दिशा दे रहा इंदौर का डीएवीवी जनजातीय समाज, संस्कृति और विकास के अध्ययन-शोध के लिए विशेष पाठ्यक्रम; युवाओं के लिए शोध के अवसर डीएवीवी में एमए, एमबीए और पीएचडी में प्रवेश प्रारंभ इंदौर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के स्कूल ऑफ ट्राइबल स्टडीज द्वारा जनजातीय समाज, संस्कृति, परंपराओं और विकास के विविध आयामों को समझने के लिए एक अभिनव शैक्षणिक पहल की गई है। विश्वविद्यालय में जनजातीय अध्ययन एवं जनजातीय विकास पर केंद्रित विशेष पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को जनजातीय समुदायों के जीवन, ज्ञान परंपराओं, चुनौतियों और विकास की संभावनाओं से परिचित कराना है। यह पहल विद्यार्थियों में जनजातीय समाज के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने के साथ उन्हें ऐसे ज्ञान और कौशल से सुसज्जित करती है, जिससे वे भविष्य में जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण और विकास में सार्थक योगदान दे सकें। स्कूल ऑफ ट्राइबल स्टडीज में एम.ए. (जनजातीय अध्ययन), एम.बी.ए. (जनजातीय विकास एवं प्रबंधन) तथा पीएचडी (जनजातीय अध्ययन) जैसे विशिष्ट कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। ये पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को जनजातीय समाज के इतिहास, संस्कृति, जीवन-पद्धति, पारंपरिक ज्ञान, सामाजिक चुनौतियों तथा विकास संबंधी मुद्दों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। वर्तमान में जनजातीय समुदायों से जुड़े विषयों पर अध्ययन और शोध की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ये पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ जनजातीय विकास की नीतियों, योजनाओं और प्रबंधन से जुड़ी व्यावहारिक समझ भी प्रदान करते हैं। इससे छात्र शोध, शिक्षण, सामाजिक विकास, नीति निर्माण तथा प्रशासनिक क्षेत्रों में बेहतर कॅरियर के अवसर बढ़ जाते हैं। स्कूल ऑफ ट्राइबल स्टडीज द्वारा संचालित ये पाठ्यक्रम न केवल मध्यप्रदेश बल्कि देश के उच्च शिक्षा परिदृश्य में भी अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। जनजातीय अध्ययन के प्रति रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए यह पाठ्यक्रम समाज के एक महत्वपूर्ण वर्ग को निकट से समझने और उनके विकास में सार्थक योगदान देने का अवसर उपलब्ध कराते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों से इन विशेष पाठ्यक्रमों का लाभ उठाने और समय पर प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होने की अपील की है।  

10 जून का Horoscope: कुछ राशियों को मिलेगा लाभ, तो कुछ को स्वास्थ्य को लेकर रहना होगा सतर्क

मेष 10 जून के दिन आपका दिन शानदार रहने वाला है। आज एक खुशहाल, प्यार भरा रिश्ता बनाइए, अहंकार और मनमुटाव से मुक्त रहिए। ध्यान करें कि आप प्रोफेशनल आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। आज के दिन वित्तीय दिक्कतें हो सकती हैं। वृषभ 10 जून के दिन लव के मामले में छोटी-मोटी दिक्कतें आ सकती हैं। आपको अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों पर भी अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होगी। कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या नहीं है। फिर भी आज आपको वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। मिथुन 10 जून के दिन बिजनेस का विस्तार करने या नई पार्टनरशिप शुरू करने पर विचार कर सकते हैं। निजी और पेशेवर जीवन में परेशानियों से दूर रहें। अपने करियर के प्रति आपकी मेहनत सकारात्मक परिणाम देगी। कर्क 10 जून के दिन स्टूडेंट्स को कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता है। आर्थिक रूप से, भाग्य आपका इंतजार कर रहा है। कोई गंभीर दिक्कत आपके प्रेम जीवन को प्रभावित नहीं करेगी। दफ्तर में आपका प्रदर्शन अच्छा रहेगा। सिंह 10 जून के दिन कोई सहकर्मी आपकी कमिटमेंट पर उंगली उठा सकता है। आपकी वित्तीय स्थिति अच्छी रहेगी, लेकिन कुछ छोटी-मोटी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। सिंगल पुरुष जातकों को कोई दिलचस्प व्यक्ति मिलने का सौभाग्य प्राप्त होगा। कन्या 10 जून के दिन ऑफिस पॉलिटिक्स से दूर रहें। अपने विचारों को जाहिर करने और लक्ष्य निर्धारित करने का यह एक बढ़िया समय है। सबकुछ ठीक-ठाक होता हुआ प्रतीत होता है। प्रेम शांति से भरपूर महसूस होगा। तुला 10 जून के दिन आपके सीनियर्स आपके प्रयासों की सराहना कर सकते हैं। आज का दिन आगे बढ़ने, खुद को क्लियर रूप से एक्सप्रेस करने और दूसरों के साथ विचारशील और सार्थक तरीकों से जुड़ने के अवसरों से भरा है। वृश्चिक 10 जून के दिन अहंकार के रूप में चुनौतियां आ सकती हैं। आपकी जिज्ञासा आपको विभिन्न दृष्टिकोण का पता लगाने के लिए मोटिवेट करेगी, जिससे आपको समस्याओं को अधिक आसानी से सॉल्व करने में मदद मिलेगी। धनु 10 जून के दिन सिंगल जातक भाग्यशाली रहेंगे। आपका दिमाग नए विचारों और क्रिएटिव एनर्जी से भरा हुआ है। आप खुद को नई चीजें सीखने और अपने आस-पास के लोगों के साथ अपने विचारों को साझा करने के लिए अधिक मोटिवेटेड पाएंगे। मकर 10 जून के दिन जीवनशैली पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। आप अधिक केंद्रित और शांत महसूस कर रहे हैं। रिश्ते आसान महसूस हो सकते हैं और काम पर आपके प्रयास प्रगति दिखाने लग सकते हैं। फाइनेंशियल डिसीजन क्लियर हो सकते हैं। कुंभ 10 जून के दिन आर्थिक समृद्धि बनी हुई है। जब आप ईमानदारी से बात करते हैं और ध्यान से सुनते हैं तो दोस्तों, परिवार और सहकर्मियों के साथ संबंध मजबूत होते हैं। आपकी एनर्जी में सुधार हो सकता है। धन लाभ के योग हैं। मीन 10 जून के दिन प्रेमी द्वारा रिश्ते में आपकी कमिटमेंट पर सवाल उठाया जा सकता है। ये दिन बदलाव लेकर आया है। आपका आत्मविश्वास जीवन के हर हिस्से में पॉजिटिव एनर्जी को आकर्षित करता है।

जयपुर पुलिस कमिश्नरेट और JDA में बदलाव, कई अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी

जयपुर राजस्थान सरकार ने प्रदेश के पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है.  पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी की गई तबादला सूची में 141 उप पुलिस अधीक्षक (DSP) स्तर के अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है.  लंबे इंतजार के बाद प्रदेश में यह तबादला सूची जारी की गई है.  प्रदेश में मजबूत कानून व्यवस्था स्थापित करने के लिए अधिकारियों को नई जिम्मेदारी मिली है. यह तबादला सूची अतिरिक्त महानिदेश पुलिस (कार्मिक) बीजू जॉर्ज जोसफ ने जारी की है. इस सूची में जयपुर पुलिस कमिश्नरेट और जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) में भी कई अहम बदलाव किये गये है. रमेश कुमार पारीक, ओम प्रकाश मीणा और सुरेश कुमार स्वामी को JDA में उप पुलिस अधीक्षक के पद पर नियुक्त किया गया है. राजधानी में कानून व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए नए सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) भी लगाए गए हैं.   और किन अधिकारियों का हुआ तबादला? इसके अलावा हरजी लाल यादव को सहायक पुलिस आयुक्त बस्सी, हेमेन्द्र शर्मा को ACP मानसरोवर, सत्येन्द्र सिंह नेगी को ACP सोडाला और शिवकुमार भारद्वाज को ACP झोटवाड़ा की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसके साथ ही राम सिंह को ACP मेट्रो, जयपुर का कार्यभार दिया गया है. बांदीकुई में DSP रोहिताश देवन्दा के स्थान पर लक्ष्मीकांत शर्मा को नियुक्त किया गया है. लक्ष्मी सुथार को ACP (आदर्श नगर) से सीओ कोटपूतली बहरोड की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इस तबादला सूची में लंबे समय से एक ही जगह जमे हुए अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है. इस सूची में शामिल अधिकारियों को जल्द ही अपने नए स्थान पर ज्वाइन करने के आदेश दिए गए हैं. इसी संबंध में लिविंग और ज्वाइनिंग संबंधी कागजी कार्रवाई शुरू की गई है. पुलिस विभाग में हुए इस व्यापक फेरबदल का उद्देश्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना है. मुबारिक खान को पत्रकारिता में करीब 8 सालों का अनुभव है. उन्होंने राजस्थान की राजनीतिक खबरों के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट, एजुकेशन और मेडिकल क्षेत्र से जुड़ी ख़बरों की रिपोर्टिंग की है. 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में राजस्थान की अलग-अलग विधानसभा सीटों पर ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग की. आनंदपाल एनकाउंटर और लॉरेंस बिश्नोई गैंग की मैडम माया पर स्टोरी ने खूब सुर्खियां बटोरी. मुबारिक खान ने राजस्थान यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई करने के बाद बीजेएमसी में डिप्लोमा प्राप्त किया.

बोकारो में नई व्यवस्था लागू, कस्टमर आईडी से आसान होगा पार्सल ट्रैकिंग और बुकिंग

 बोकारो  डाक विभाग ने पार्सल बुकिंग की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कस्टमर आईडी जारी करने का निर्णय लिया है। यह कदम ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करने और पार्सल बुकिंग के अनुभव को सुगम बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। कस्टमर आईडी के माध्यम से ग्राहक अपनी पार्सल बुकिंग की स्थिति को आसानी से ट्रैक कर सकेंगे। इसके अलावा, यह आईडी ग्राहकों को विभिन्न सेवाओं का लाभ उठाने में भी मदद करेगी। डाक विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह पहल ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए की जा रही है, ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपनी पार्सल सेवाओं का उपयोग कर सकें। इस नई प्रणाली के तहत, ग्राहक को अपनी पहचान के लिए एक विशेष आईडी प्रदान की जाएगी, जिसे वे अपनी पार्सल बुकिंग के समय उपयोग कर सकेंगे। यह आईडी न केवल बुकिंग प्रक्रिया को तेज करेगी, बल्कि ग्राहकों को अपनी पार्सल की स्थिति की जानकारी भी समय पर उपलब्ध कराएगी। डाक विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कस्टमर आईडी सभी ग्राहकों के लिए अनिवार्य होगी, और इसे प्राप्त करने के लिए ग्राहकों को अपने व्यक्तिगत विवरण प्रदान करने होंगे। विभाग का मानना है कि इस पहल से पार्सल बुकिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों का विश्वास भी मजबूत होगा। इस नई प्रणाली का कार्यान्वयन जल्द ही शुरू किया जाएगा, जिससे ग्राहकों को बेहतर और सुविधाजनक सेवा मिल सकेगी। डाक विभाग ने सभी ग्राहकों से अपील की है कि वे इस नई सुविधा का लाभ उठाएं और अपनी पार्सल बुकिंग को और अधिक सरल बनाएं।

ट्रैफिक चालानों के लिए नई डिजिटल व्यवस्था, 45 दिन में करना होगा फैसला या भुगतान

नई दिल्ली  दिल्ली सरकार जल्द ही ट्रैफिक चालानों के निपटारे और शिकायतों के समाधान के लिए नई डिजिटल व्यवस्था लागू करने जा रही है। इसके लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अपने ई-चालान सिस्टम को अपग्रेड कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक नया प्लेटफॉर्म अगले एक महीने के भीतर तैयार हो जाएगा, जिससे चालान जारी करने से लेकर शिकायत दर्ज करने, जुर्माना भरने और अदालत में अपील करने तक की प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाएगी। इस नई व्यवस्था का मकसद ट्रैफिक नियम उल्लंघन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाना और अदालतों पर पड़ने वाले बोझ को कम करना है। दिल्ली सरकार केंद्र सरकार द्वारा संशोधित मोटर वाहन नियमों को लागू करने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत चालान से जुड़े मामलों के लिए पहले डिजिटल शिकायत निवारण प्रक्रिया अपनानी होगी। ई-चालान सिस्टम में होंगे अहम बदलाव दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के डीसीपी (ट्रैफिक मुख्यालय) एस.के. सिंह ने बताया कि नए नियमों के अनुसार चालान जारी करते समय वाहन चालक, वाहन और चालान करने वाले अधिकारी की तस्वीर लेना अनिवार्य होगा। अपग्रेडेड पोर्टल पर चालान की पूरी प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। 45 दिन में करना होगा फैसला नए नियमों के तहत वाहन चालक को चालान जारी होने की तारीख से 45 दिनों के भीतर जुर्माना जमा करना होगा या फिर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करनी होगी। यदि इस अवधि में कोई कार्रवाई नहीं की जाती है तो चालान को स्वीकार माना जाएगा। इसके बाद भुगतान के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय मिलेगा। शिकायत खारिज होने पर अदालत में जाने से पहले चालान राशि का 50 प्रतिशत जमा करना अनिवार्य होगा। CCTV चालान भी होंगे शामिल नया सिस्टम CCTV कैमरों और अन्य डिजिटल निगरानी प्रणालियों से जारी होने वाले चालानों को भी जोड़ेगा। मोबाइल नंबर उपलब्ध होने पर ई-चालान तीन दिन के भीतर भेजा जाएगा, जबकि नंबर उपलब्ध न होने पर 15 दिन के भीतर नोटिस जारी किया जाएगा। Metroकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर

22 लाख महिलाओं का शौर्य! ‘शौर्या दल’ को 2030-31 तक जारी रखने पर MP कैबिनेट की मुहर

शौर्या दल 22 लाख महिलाओं की देश की सबसे बड़ी साइलेंट आर्मी एमपी कैबिनेट ने दी वर्ष 2030-31 तक निरंतरता को मंजूरी भोपाल  मध्यप्रदेश के गांवों और शहरों की गलियों से गुज़रते हुए अगर आपको साड़ी का पल्लू संभाले या कॉलेज का बैग टांगे महिलाओं की कोई टोली दिखाई दे, तो उन्हें सिर्फ राहगीर समझने की भूल मत कीजिएगा। यह मध्यप्रदेश की 'शौर्या दल' सेना है—बिना वर्दी के समाज की वो 'गार्डियन' जो आज देश में महिला सशक्तिकरण की सबसे बुलंद हुंकार बन चुकी है ,जिसने महिला सशक्तिकरण की परिभाषा को कागजों से निकालकर धरातल पर साकार कर दिखाया है। वर्ष 2013  में महज़ 6 जिलों से शुरू हुआ यह कारवां आज प्रदेश के कोने-कोने में फैल चुका है, जिसे देखते हुए सरकार ने इसे अगले 5 साल (2026-27 से 2030-31) तक लगातार जारी रखने का महत्वपूर्ण फैसला किया है। अपराध पर 'प्री-एंट्री बैन': पुलिस से पहले पहुंचती है यह 'जाबांज टोली' शौर्या दल की सबसे बड़ी यूएसपी यह है कि ये अपराध होने के बाद मोमबत्तियां नहीं जलातीं, बल्कि अपराध होने से पहले ही उसकी कमर तोड़ देती हैं। किसी घर में घरेलू हिंसा की सुगबुगाहट हो, किसी गांव में गुपचुप बाल विवाह मंडप सज रहा हो, या कोई संदिग्ध मानव तस्करी (ट्रैफिकिंग) का जाल बुन रहा हो—शौर्या दल का खुफिया नेटवर्क तुरंत एक्टिव हो जाता है। 15 से 45 वर्ष की ये जांबाज महिलाएं पुलिस और कानून के हस्तक्षेप से पहले अपनी 'सामुदायिक समझाइश' के ब्रह्मास्त्र से बड़े-बड़े मामलों को शांति से सुलझा देती हैं। 22 लाख से अधिक की 'साइलेंट आर्मी', जहां किशोरी और गृहणी हैं एक साथ यह देश का शायद सबसे अनोखा और विशाल सामाजिक नेटवर्क है, जिसमें वर्तमान में 22.52 लाख से अधिक महिलाएं और बेटियाँ सीधे तौर पर जुड़ी हैं। इस दल की खूबसूरती देखिए—एक तरफ जहां 7.64 लाख कॉलेज और स्कूल जाने वाली नई पीढ़ी की लड़कियां अपने तकनीकी और आधुनिक विचारों के साथ इसमें शामिल हैं, वहीं दूसरी तरफ 14.88 लाख अनुभवी गृहणियां और बुजुर्ग महिलाएं हैं, जो समाज की विविधताओं से भलीभाँति परिचित हैं। युवा जोश और अनुभव जब एक मंच पर आता है, तो दकियानूसी सोच और नकारात्मक सामाजिक दृष्टिकोण को घुटने टेकने ही पड़ते हैं। आदिवासी अंचलों से शहरों तक हक की हुंकार महिला एवं बाल विकास विभाग की इस पहल ने सुदूर आदिवासी क्षेत्रों से लेकर शहरी वार्डों तक की महिलाओं को अपनी बंदिशें तोड़कर खुलकर सांस लेने का मौका दिया है। आज ये शौर्या दल सिर्फ सुरक्षा कवच नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर महिलाओं की समान पहुंच सुनिश्चित करने का जरिया बन चुके हैं। महिलाएं अब सिर्फ सरकारी योजनाओं की कतारों में खड़ी नहीं होतीं, बल्कि अपने मौलिक अधिकारों के लिये लड़ना सीख चुकी हैं। देश के लिए नया रोल मॉडल बना 'मध्यप्रदेश' शौर्या दल ने यह साबित कर दिया है कि असली महिला सशक्तिकरण तब आता है जब चाबी खुद महिलाओं के हाथ में सौंप दी जाए। समाज की नकारात्मक सोच और रूढ़ियों पर प्रहार करता मध्यप्रदेश का यह 'शौर्या मॉडल' आज पूरे देश के सामने एक मिसाल है, जो यह संदेश देता है कि जब महिलाएं खुद अपनी और समाज की रक्षक बन जाएं, तो बदलाव को आने से कोई नहीं रोक सकता।। 

जंगलों की नीलामी नहीं, फिर भी धड़ल्ले से चल रहा केंदुपत्ता व्यापार, ग्रामीणों ने उठाए सवाल

लातेहार  हेरहंज व बारियातू के जंगल इन दिनों एक अजीब कहानी कह रहे हैं। पेड़ों की डालियों से टूटकर गिरते केंदुपत्ते मानो अपनी ही बेबसी का बयान कर रहे हों। जिन जंगलों की हरियाली कभी वन विभाग के राजस्व का आधार हुआ करती थी, वहां आज माफियाओं का साया गहराता दिख रहा है। सुरक्षित वन क्षेत्रों में अवैध रूप से केंदुपत्ता तुड़वाने और उसकी खरीद-बिक्री का खेल इस कदर फैल चुका है कि जंगलों से अधिक चहल-पहल अब गांवों के खलिहानों में दिखाई दे रही है। खुलेआम अवैध खरीद केंद्र संचालित बिदीर, डोंरांग, इचाक, खीराखाड़, करंदाग समेत कई गांवों में खुलेआम अवैध खरीद केंद्र संचालित होने की चर्चा है। यहां सुबह से शाम तक मजदूर जंगलों से पत्ते ढोते हैं और बदले में उन्हें उनकी मेहनत की कीमत से कहीं कम राशि थमा दी जाती है। पसीना ग्रामीणों का बहता है, जबकि मुनाफे की हरियाली किसी और की झोली में चली जाती है। सूत्रों के अनुसार इस कारोबार की डोर आसपास के कुछ केंदुपत्ता ठेकेदारों से जुड़ी हुई है। स्थानीय लोगों को आगे कर खरीदारी करवाई जा रही है। पत्तों को भरने के लिए बोरे उपलब्ध कराए जा रहे हैं और रात ढलते ही ट्रैक्टरों तथा अन्य वाहनों पर लादकर इन्हें दूसरे स्थानों तक पहुंचा दिया जाता है। कई जंगलों की नहीं हुई नीलामी दिन में जंगलों में तुड़ाई और रात में परिवहन का यह सिलसिला चर्चा का विषय बना हुआ है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस वर्ष हेरहंज व बारियातू क्षेत्र के कई जंगलों की नीलामी ही नहीं हुई। नीलामी नहीं होने से वन विभाग को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा। इसके बावजूद जंगलों से केंदुपत्ता निकल रहा है, खलिहान भर रहे हैं और कारोबार भी चल रहा है।   लगातार बढ़ रहे अवैध हाथ यही सवाल अब ग्रामीणों के बीच गूंज रहा है कि जब नीलामी नहीं हुई तो केंदू पत्ता आखिर किस रास्ते से बाजार तक पहुंच रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल केवल पेड़-पौधों का समूह नहीं, बल्कि उनकी आजीविका और क्षेत्र की पहचान हैं। ऐसे में यदि वन संपदा पर अवैध हाथ लगातार बढ़ते रहे तो नुकसान केवल सरकारी राजस्व का नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की विरासत भी दांव पर लग जाएगी। फिलहाल जंगलों की खामोशी बहुत कुछ कह रही है व लोग यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि वन विभाग इस खेल पर कब और कैसी लगाम लगाता है।