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जनगणना में पूछे जाएंगे 33 सवाल, क्या जवाब देना अनिवार्य है? जानिए गलत जानकारी देने के परिणाम

नई दिल्ली जनगणना 2027 की प्रक्रिया पूरे जोर-शोर से जारी है। सबसे पहले मकानों की गणना की जा रही है। इसके लिए लोगों से 33 सवाल पूछे जा रहे हैं। मकानों की गणना के दौरान भी घर-परिवार और रहन-सहन के बारे में पूछे जाने वाले सवालों को लेकर लोगों के मन में कई तरह की आशंकाएं भी रहती हैं। एक तो यह कि क्या सभी सवालों का जवाब देना जरूरी है? दूसरा यह कि अगर किसी सवाल का गलत जवाब दिया गया तो क्या ऐक्शन हो सकता है? क्या है जनगणना की रूपरेखा जनगणना 2027 की रूपरेखा दो प्रमुख चरणों में बंटी है। सबसे पहले हाउसिंग सेंसस हो रहा है। इसके लिए जनगणना अधिकारी एक-एक घर तक पहुंच रहे हैं और उनकी स्थिति, सुविधाएं और घर में रहने वाले लोगों से जुड़ी बुनियादी जानकारियां इकट्ठी कर रहे हैं। इन जानकारियों के लिए परिवार के मुखिया से 33 सवाल किए जाते हैं और उन्हें ऑनलाइन दर्ज कर लिया जाता है। रजिस्ट्रार जनरल का कहना है कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य जमीनी हकीकत का को ठीक से समझना और मुख्य जनगणना के कार्य को आसान करना है। इसके बाद 1 फरवरी से जनगणना का दूसरा चरण शुरू होगा। क्यों पूछे जा रहे हैं 33 सवाल जनगणना के पहले चरण में यह पता लगाने का प्रयास है कि लोगों के जीवन का स्तर क्या है। इसी वजह से जो 33 सवाल किए जा रहे हैं उनमें सुविधाओं की जानकारी को मुख्य रखा गया है। इसमें घर में कितने लोग रहते हैं, फर्श कैसी है, दीवार की छत किस सामग्री से बनी है, पीने की पानी की क्या सुविधा है, घर का मुखिया कौन है। ऐसे सवाल शामिल किए गए हैं। इन सवालों में पानी, शौचालय, इंटरनेट, मोबाइल जैसे सुविधाओं को ध्यान में रखा गया है। इसके अलावा कार,बाइक, साइकल और वाहनों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। जिससे लोगों के जीवन स्तर के सही आंकड़े जुटाए जा सकें। जवाब ना देने पर क्या होगा सवाल है कि अगर कोई जनगणना में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं देता है तो क्या होगा। देश के नागरिक होने के नाते कोई भी सवालों का जवाब देने से इनकार नहीं कर सकता। वहीं जनगणना अधिकारी की भी जिम्मेदारी होती है को वह इन जानकारियों को पोर्टल पर ही अपडेट करे और कहीं प्रचारित ना करे। अगर कोई जानकारी गलत देता है तो सेंसस ऐक्ट 1948 के मुताबिक उस पर जुर्माना भी लग सकता है। हालांकि इससे नागरिकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार के लिए आपके सवाल इसलिए भी जरूरी हैं ताकि जिन सुविधाओँ तक आपकी पहुंच नहीं हैं, उन्हें भविष्य में सुलभ बनाया जा सके। सरकार का कहना है कि नागरिकों के हित में ही ये सवाल किए जा रहे हैं। क्या हैं जनगणना के 33 सवाल? 1. भवन संख्या 2. जनगणना घर संख्या 3- फर्श में उपयोग की गई सामग्री 4. घऱ की दीवार में उपयोग की गई सामग्री 6. घर के छत में उपयोग की गई प्रमुख सामग्री 7. घर का उपयोग 7. घर की स्थिति (नया या पुराना) 8. घर में रहने वाले लोगों की संख्या 9. परिवार में आम तौर पर उपलब्ध रहने वालों की संख्या 10. परिवार के मुखिया का नाम 11- परिवार के मुखिया का लिंग 12. परिवार के मुखिया की जाति 13. घर किराये का या खुद का 14. आवासीय कमरों की संख्या 15. परिवार में रहने वाले विवाहितों की संख्या 16. पीने के पानी का स्रोत 17. प्रकाश की व्यवस्था 18. शौचालय की उपलब्धता 19. शौचालय का प्रकार 20. जल निकासी की व्यवस्था 21. स्नान की सुविधा 22. रसोईघर में एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन 23. खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन 24. रेडियो या ट्रांजिस्टर 25. टेलीविजन 26. इंटरनेट 27. लैपटॉप या कंप्यूटर 28. मुख्य रूप से खाया जाने वाला अनाज 29. कार जीप की उपलब्धता 30. मोबाइल नंबर

टिकट बुकिंग में बड़ा बदलाव! अगस्त से लागू होगा रेलवे का नया रिजर्वेशन सिस्टम, जानिए क्या बदलेगा

नई दिल्ली भारतीय रेलवे अगस्त महीने से अपने करीब 40 साल पुराने रिजर्वेशन सिस्टम को बदलने जा रहा है. 1986 से इस्तेमाल हो रहे पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) की जगह अब नया और आधुनिक सिस्टम लाया जाएगा. रेलवे का दावा है कि इससे टिकट बुकिंग पहले से ज्यादा तेज, आसान और भरोसेमंद हो जाएगी. साथ ही यात्रियों को कई नई सुविधाएं भी मिलेंगी।  रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में रेल भवन में इस प्रोजेक्ट का रिव्यू किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि नए सिस्टम में बदलाव के दौरान यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो. रेलवे अगस्त से चरणबद्ध तरीके से ट्रेनों को नए रिजर्वेशन सिस्टम पर शिफ्ट करना शुरू करेगा।  1986 में शुरू हुआ था मौजूदा सिस्टम भारतीय रेलवे का मौजूदा पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम 1986 में शुरू किया गया था. पिछले चार दशकों में इसमें कुछ छोटे-मोटे बदलाव जरूर हुए, लेकिन इसकी मूल संरचना लगभग वैसी ही बनी रही. इस दौरान यात्रियों की संख्या और ऑनलाइन टिकट बुकिंग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में रेलवे को एक ज्यादा सक्षम और आधुनिक सिस्टम की जरूरत महसूस हो रही थी।  रेलवे ने साल 2002 में इंटरनेट के जरिए टिकट बुकिंग की सुविधा शुरू की थी. आज हालात यह हैं कि लगभग 88 प्रतिशत टिकट ऑनलाइन बुक किए जाते हैं. ऐसे में नए सिस्टम को इसी बढ़ती डिजिटल मांग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।  ज्यादा क्षमता वाला होगा नया सिस्टम रेलवे के मुताबिक नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम आधुनिक तकनीक पर आधारित है और मौजूदा सिस्टम की तुलना में कहीं ज्यादा क्षमता के साथ काम करेगा. इससे टिकट बुकिंग के दौरान सर्वर पर पड़ने वाला दबाव कम होगा और यात्रियों को वेबसाइट या ऐप पर बेहतर अनुभव मिलेगा।  त्योहारों या तत्काल टिकट बुकिंग के समय अक्सर वेबसाइट धीमी पड़ने या तकनीकी दिक्कतों की शिकायतें आती हैं. रेलवे का कहना है कि नया सिस्टम ऐसी समस्याओं को काफी हद तक कम करेगा।  RailOne ऐप की लोकप्रियता बढ़ी रेलवे का यह बदलाव उसकी डिजिटल रणनीति का हिस्सा है. जुलाई 2025 में लॉन्च किए गए रेलवन ऐप को एक साल से भी कम समय में 3.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है।  इस ऐप के जरिए यात्री टिकट बुक और कैंसिल कर सकते हैं, ट्रेन की लाइव लोकेशन देख सकते हैं, प्लेटफॉर्म और कोच की जानकारी हासिल कर सकते हैं, शिकायत दर्ज करा सकते हैं और कई दूसरी रेलवे सेवाओं का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।  रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, इस ऐप के जरिए हर दिन करीब 9.29 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं. इनमें लगभग 7.2 लाख अनारक्षित और 2.09 लाख आरक्षित टिकट शामिल हैं।  AI बताएगा टिकट कन्फर्म होने की संभावना नए सिस्टम की सबसे खास सुविधाओं में से एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित वेटिंग टिकट प्रेडिक्शन फीचर है. यह सुविधा यात्रियों को बताती है कि उनकी वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की कितनी संभावना है।  रेलवे के अनुसार, इस फीचर की सटीकता पहले करीब 53 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इससे यात्रियों को यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी और अनिश्चितता कम होगी।  करोड़ों यात्रियों को मिलेगा फायदा भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है और हर दिन लाखों लोग इसकी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में अगस्त से शुरू होने वाला यह बदलाव रेलवे के डिजिटल इतिहास की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।  करीब 40 साल पुराने रिजर्वेशन सिस्टम को बदलकर रेलवे अब पूरी तरह आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रहा है. उम्मीद है कि नया सिस्टम टिकट बुकिंग को ज्यादा तेज, स्मार्ट और भरोसेमंद बनाएगा, जिसका फायदा देशभर के करोड़ों रेल यात्रियों को मिलेगा। 

HPV टीकाकरण में मध्यप्रदेश ने बनाया रिकॉर्ड, 7.63 लाख से अधिक बालिकाओं को लग चुका है टीका

मध्यप्रदेश 7.63 लाख से अधिक बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण कर देश के शीर्ष राज्यों में शामिल भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश ने एचपीवी टीकाकरण अभियान में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर यह सिद्ध कर दिया है कि जनभागीदारी, स्वास्थ्य अमले की प्रतिबद्धता और प्रभावी नेतृत्व के बल पर बड़े से बड़े जनस्वास्थ्य अभियानों को समय से पहले सफल बनाया जा सकता है। उन्होंने अभियान से जुड़े चिकित्सकों, नर्सिंग स्टॉफ, आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, एएनएम, शिक्षकों, जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें सफलता के लिये बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह अभियान प्रदेश की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाकर सुरक्षित भविष्य देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 28 फरवरी 2026 को देशव्यापी एचपीवी(ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया गया था। महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए इस विशेष अभियान में मध्यप्रदेश शीर्ष राज्यों में शामिल है। स्वास्थ्य अमले, सहयोगी विभागों की प्रतिबद्धता एवं सतत मॉनिटरिंग के परिणामस्वरूप प्रदेश में 7.63 लाख से अधिक पात्र बालिकाओं का सफलतापूर्वक एचपीवी टीकाकरण किया जा चुका है। यह अभियान मूल रूप से 90 दिनों के लिए निर्धारित था, लेकिन मध्यप्रदेश ने निर्धारित लक्ष्य को मात्र 60 दिनों में ही पूर्ण कर लिया जो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता और प्रभावी क्रियान्वयन का उत्कृष्ट उदाहरण है। सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे सामान्य कैंसर है तथा इसके अधिकांश मामलों का प्रमुख कारण एचपीवी संक्रमण होता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह ऐसा कैंसर है जिसे प्रभावी टीकाकरण के माध्यम से काफी हद तक रोका जा सकता है। एचपीवी वैक्सीन बालिकाओं को भविष्य में इस गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करने का सुरक्षित, प्रभावी एवं वैज्ञानिक उपाय है। अभियान की सफलता में स्वास्थ्य विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तथा अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता रही। प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक जनजागरूकता, सूक्ष्म कार्ययोजना (माइक्रो प्लानिंग) एवं सतत मॉनिटरिंग के माध्यम से यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है।  

9 जून का दैनिक राशिफल: करियर-कारोबार में चमकेगा भाग्य, लेकिन कुछ जातकों के लिए स्वास्थ्य रहेगा चुनौती

मेष 9 जून के दिन आपकी लव लाइफ बिना किसी परेशानी के बहुत अच्छी रहेगी। प्रोफेशनल चुनौतियों को लगन से संभालें। आज आपकी दौलत और सेहत दोनों ही मुश्किल समय ला सकती है। पर्सनल मुद्दों को ऑफिस में प्रोडक्टिविटी पर असर न डालने दें। वृषभ 9 जून के दिन छोटी-मोटी पैसों की दिक्कतें आ सकती हैं। आप खुलकर बात करेंगे और मददगार दोस्तों को आकर्षित कर सकते हैं। नई स्किल्स सीखना आपके मन को उत्साहित करेगा। किसी रोमांचक टास्क की जिम्मेदारी लेने से पहले समझदारी से योजना बनाएं। मिथुन 9 जून के दिन खुलकर बात करने से रिश्ते को रोमांटिक और शांत बनाए रखें। आपका रवैया भी बहुत मायने रखता है। पुरानी बातों में न उलझें। आशावाद और तैयारी आपके लिए नए द्वार खोलती है। अपने दिन को फलदायी बनाने के लिए दिल खोलकर सोचें। बड़े सपने देखें। कर्क 9 जून के दिन अपनी पर्सनल लाइफ को परेशानियों से दूर रखें और काम पर सबसे अच्छे नतीजे देने की कोशिश करें। खुशहाली और अच्छी सेहत दोनों आपके साथ रहेंगी। सही कम्युनिकेशन आपकी लव लाइफ को रोमांटिक बनाए रखेगा। सिंह 9 जून के दिन टीम के सदस्यों पर अपनी नजर रखें। अच्छी बात यह है कि इस दिन आपको कोई फाइनेंशियल या हेल्थ प्रॉब्लम नहीं होगी। कन्या 9 जून के दिन एक बिजी ऑफिस शेड्यूल और मजबूत फाइनेंशियल बेस के साथ एक शानदार लव लाइफ जिएं। छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याएं मुश्किल समय ला सकती हैं। अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें। आपका अनुशासन पॉजिटिव नतीजे लाएगा। तुला 9 जून के दिन आज पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों लाइफ में ईमानदारी से स्टैंड लें। आपकी प्रोफेशनल लाइफ क्रिएटिव रहेगी और पूरे दिन धन भी बना रहेगा। लव अफेयर से परेशानियां दूर रखें और अपने पार्टनर के साथ एक्स्ट्रा समय बिताएं। वृश्चिक 9 जून के दिन आपका समय रोमांस से भरा रहेगा। प्रोफेशनल लाइफ में बिजी और प्रोडक्टिव रहें। सेहत और पैसे दोनों के मामले में दिक्कतें आ सकती हैं। आपको रिलेशन में ज्यादा बातचीत की जरूरत है। धनु 9 जून के दिन अपनी लव लाइफ में डिप्लोमेटिक रहें। ध्यान रखें कि आप अपने लवर के साथ अच्छा समय ज्यादा बिताएं। मुश्किल टारगेट के बावजूद, आप वर्कप्लेस पर लक्ष्य हासिल करने में सफल होंगे। आर्थिक रूप से, आप अच्छे रहेंगे, और आपका स्वास्थ्य भी अच्छी स्थिति में रहेगा। मकर 9 जून के दिन प्रोफेशनली एक सफल दिन आपका इंतजार कर रहा है। पैसे पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। लव अफेयर में झगड़े सुलझाएं। परिवार के लिए समय निकालें। सुरक्षित फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट के बारे में सोचें। इस हफ्ते सेहत भी अच्छी रहेगी। कुंभ 9 जून के दिन आज रिश्ते पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। फालतू बातचीत से बचें। ऑफिशियल लाइफ में चुनौतियां आएंगी, लेकिन उन पर नजर रखें। आर्थिक रूप से आप स्टेबल रहेंगे, और आपकी सेहत भी अच्छी है। मीन 9 जून के दिन लव लाइफ में परेशानियां आ सकती हैं। आज के दिन समझदार रहें। नए काम चुनौतीपूर्ण लगेंगे, लेकिन आप यह पक्का करेंगे कि वे पूरे हों। आज अपनी आर्थिक स्थिति को बनाए रखें।

हरियाणा के सबसे पुराने भूमि विवाद में फिर से होगी जांच, 2 महीने में नया फैसला देने के निर्देश

पंचकूला  पंचकूला जिले की 1394 एकड़ भूमि से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद में अंबाला मंडल के कमिश्नर संजीव वर्मा ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। कमिश्नर ने 26 मई 2026 को दिए फैसले में मामले को दोबारा सुनवाई के लिए कलेक्टर एग्रेरियन पंचकूला के पास भेजते हुए निर्देश दिया है कि सभी पक्षों को सुनकर दो माह के भीतर नए सिरे से निर्णय लिया जाए। यह मामला दिवंगत बड़े भू-स्वामी सरदार भगवंत सिंह की भूमि से जुड़ा है। रिकार्ड के अनुसार सरदार भगवंत सिंह के पास पंचकूला क्षेत्र के सात गांवों बरवाला, संगराना, फतेहपुर विरान, भराली, जलौली, बीर बाबूपुर और बीर फिरोजारी में 1396 एकड़ भूमि थी। उनके निधन के बाद भूमि के अधिशेष (सरप्लस) क्षेत्र को लेकर कानूनी लड़ाई दशकों से चली आ रही है। यह भूमि आइटीबीपी के पास जीटी रोड के आसपास पड़ती है। अंबाला के मंडलायुक्त संजीव वर्मा के आदेश में उल्लेख है कि भूमि अधिशेष से संबंधित कार्यवाही 1960 के दशक से लंबित है। इस दौरान मामला कई बार कलेक्टर, कमिश्नर, वित्तायुक्त राजस्व तथा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा। हाईकोर्ट ने 24 फरवरी 2023 को भी निर्देश दिया था कि अधिशेष भूमि का मामला पुनर्निर्धारण के सिद्धांत के आधार पर एक वर्ष के भीतर तय किया जाए। राजस्व रिकॉर्ड में सुधारों को रद करने के निर्देश देहरादून निवासी आशा सिंह ने कलेक्टर एग्रेरियन पंचकूला के चार जनवरी 2024 के आदेश को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि कलेक्टर ने 11 अप्रैल 2023 के अपने पूर्व आदेश को वापस लेकर राजस्व रिकार्ड में किए गए सुधारों को रद करने का निर्देश दिया था, जबकि यह कदम उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप नहीं था। सुनवाई के दौरान भूमि खरीदने वाले पक्षों ने दावा किया कि वे वर्षों से भूमि के वैध खरीददार हैं और उनके नाम राजस्व रिकार्ड में करीब दो दशक से दर्ज हैं। उनका तर्क था कि ऐसे मामलों में केवल सिविल कोर्ट ही जमाबंदी की प्रविष्टियों में बदलाव कर सकता है। दूसरी ओर अपीलकर्ता पक्ष ने कहा कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुसार पूरे भूमि होल्डिंग को मूल भू-स्वामी सरदार भगवंत सिंह के नाम से देखते हुए अधिशेष भूमि का निर्धारण किया जाना चाहिए और उनके कानूनी वारिसों को कानून के तहत मिलने वाले लाभ दिए जाने चाहिएं। सरकारी रिकार्ड में 583 एकड़ पहले से दर्ज राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार कुल भूमि में से 583 एकड़ तीन कनाल 16 मरला भूमि पहले ही राज्य सरकार के नाम दर्ज हो चुकी है, जबकि लगभग 810 एकड़ पांच कनाल सात मरला भूमि निजी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज है। मंडलायुक्त संजीव वर्मा ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध रिकार्ड और न्यायालयों के पूर्व निर्णयों के आधार पर अधिशेष भूमि का मामला पूरे होल्डिंग को ध्यान में रखकर तय किया जाना चाहिए। आदेश में यह भी कहा गया कि शेष 811 एकड़ भूमि को भी राज्य सरकार के नाम दर्ज किए जाने का प्रश्न पुनः विचारणीय है। दो माह में देना होगा नया फैसला अंतिम आदेश में कमिश्नर ने कलेक्टर एग्रेरियन पंचकूला को निर्देश दिया है कि सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर मामले का दो माह के भीतर नए सिरे से निर्णय करें। साथ ही यह भी टिप्पणी की गई कि हाईकोर्ट के समयबद्ध निर्देशों के बावजूद मामला अनावश्यक रूप से लंबे समय से लंबित है। इस आदेश के बाद हरियाणा के सबसे पुराने और बड़े भूमि विवादों में से एक माने जाने वाले इस मामले में फिर से व्यापक सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।

योगी सरकार की टेक होम राशन योजना से यूपी में कुपोषण में बड़ी गिरावट, डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता बढ़ी

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश अब देश में मातृ एवं शिशु पोषण में सुधार करने वाला सबसे अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजनरी मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित 'टेक होम राशन' योजना ने राज्य से कुपोषण को जड़ से मिटाने की मुहिम को एक नई और वैज्ञानिक दिशा दी है। भारत सरकार की 'सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0' गाइडलाइन को इतने बड़े पैमाने पर धरातल पर उतारने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। वर्तमान में इस पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था के जरिए हर महीने रिकॉर्ड 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक उच्च गुणवत्ता वाला पुष्टाहार सीधे पहुँच रहा है। डिजिटल निगरानी से पारदर्शी हुई वितरण प्रणाली योगी सरकार ने पुष्टाहार वितरण में होने वाले पुराने भ्रष्टाचार और लीकेज को रोकने के लिए पूरी सप्लाई चेन को आधुनिक तकनीक से लैस कर दिया है। हाईटेक ट्रैकिंग: राशन के हर पैकेट की डिजिटल निगरानी के लिए जीपीएस (GPS) ट्रैकिंग और क्यूआर (QR) कोड प्रणाली लागू की गई है। ओटीपी सत्यापन: आंगनवाड़ी केंद्रों से लाभार्थियों को पुष्टाहार सौंपते समय ओटीपी आधारित सत्यापन किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि राशन केवल सही हकदार तक ही पहुँचे। दिखने लगा जमीनी असर बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन की निदेशक हर्षिता माथुर के अनुसार, सरकार की इस केंद्रित नीति के परिणाम अब राष्ट्रीय स्तर के स्वास्थ्य सर्वे में भी प्रमाणित हो रहे हैं। स्टंटिंग में कमी: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में बच्चों में स्टंटिंग (उम्र के हिसाब से कम लंबाई) की दर 39.7 प्रतिशत से भारी गिरावट के साथ 31.5 प्रतिशत पर आ गई है। कुपोषण पर लगाम: बच्चों में अल्पवजन और दुबलेपन जैसी गंभीर समस्याओं में भी उल्लेखनीय और ऐतिहासिक सुधार दर्ज किया गया है। आयु के अनुसार तैयार हो रहे विशेष 'पोषण उत्पाद' इस योजना के तहत लाभार्थियों की शारीरिक जरूरत के हिसाब से अलग-अलग रेसिपी आधारित अनुपूरक पुष्टाहार तैयार किए जा रहे हैं। बच्चों के लिए: शिशु अमृत, शिशु आहार, बाल पुष्टिकर, आरोग्य पोषण और बाल संजीवनी जैसे ऊर्जा से भरपूर उत्पाद। माताओं के लिए: गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के संतुलित स्वास्थ्य के लिए विशेष 'संपूर्ण मातृ आहार'। महिला स्वयं सहायता समूहों को मिली उत्पादन की कमान यह योजना केवल स्वास्थ्य सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की भी नई मिसाल बन चुकी है। रोजगार की नई राह: टेक होम राशन के निर्माण और उसकी आपूर्ति की पूरी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों को दी गई है। आर्थिक रूप से सशक्त: वर्तमान में प्रदेश की 4,000 से अधिक ग्रामीण महिलाएं सीधे तौर पर इन हाईटेक उत्पादन इकाइयों का संचालन कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। 1.56 करोड़ लाभार्थियों को सुरक्षा कवच इस योजना के तहत हर महीने छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं और गंभीर रूप से अतिकुपोषित बच्चों समेत 1.56 करोड़ लोगों को कवर किया जा रहा है। तकनीक, सामाजिक समावेशन और पोषण के इस अनूठे समन्वय ने उत्तर प्रदेश को 'सक्षम और सुपोषित भारत' के संकल्प को सिद्ध करने वाला देश का सबसे सशक्त राज्य बना दिया है।  

मुख्यमंत्री सैनी करेंगे ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ की शुरुआत, बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा

चंडीगड़ हरियाणा सरकार की ओर से प्रदेश के बुजुर्गों को धार्मिक स्थलों के दर्शन कराने की कड़ी में आज एक बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी आज कुरुक्षेत्र पहुंच रहे हैं, जहां वे राज्य सरकार के विशेष उपक्रम 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का आगाज करेंगे। इस योजना के तहत कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन से गुजरात के सुप्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के लिए एक विशेष ट्रेन रवाना की जाएगी। मुख्यमंत्री दोपहर ठीक 1 बजे इस पावन यात्रा को हरी झंडी दिखाकर श्रद्धालुओं को गंतव्य के लिए विदा करेंगे। ऐन वक्त पर बदला मुख्यमंत्री का शिड्यूल, अब ब्रह्मसरोवर पर टेकेंगे माथा कुरुक्षेत्र आगमन के दौरान मुख्यमंत्री के तय कार्यक्रम में आंशिक बदलाव किया गया है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री को ऐतिहासिक स्थाणु महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना करनी थी। हालांकि, अब नए शिड्यूल के मुताबिक वे सीधे ऐतिहासिक ब्रह्मसरोवर तट पर स्थित सर्वेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेंगे। यहां वे विशेष पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे और इसके तुरंत बाद सीधे कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन के लिए रवाना होंगे। 7 जिलों के श्रद्धालुओं को सौगात, रहने-खाने का पूरा खर्च उठाएगी सरकार इस विशेष तीर्थ यात्रा को लेकर कुरुक्षेत्र समेत पूरे प्रदेश के बुजुर्गों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन से शुरू हो रही इस ट्रेन में केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कैथल, फतेहाबाद और सिरसा जिलों के चयनित बुजुर्ग श्रद्धालु भी सवार होंगे। कुल 5 दिनों की इस धार्मिक यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के रहने, खाने-पीने और रेलवे स्टेशन से लेकर सोमनाथ मंदिर तक लाने-ले जाने की तमाम जिम्मेदारी और खर्च प्रदेश सरकार खुद उठा रही है।  

परिवार पहचान पत्र से पारदर्शी शासन को बढ़ावा, 2.99 करोड़ नागरिकों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार

चंडीगढ़  हरियाणा में परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) योजना केवल एक डिजिटल डाटाबेस नहीं, बल्कि महिला सशक्तीकरण, पारदर्शी प्रशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। राज्य में कुल 77.50 लाख परिवार पहचान पत्र में पंजीकृत हैं, जिनमें से 23.30 लाख परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। यह कुल परिवारों का लगभग 30.07 प्रतिशत है, जो महिलाओं की बढ़ती सामाजिक भागीदारी और नेतृत्व क्षमता की तरफ इशारा कर रहा है। पीपीपी के स्टेट कॉर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला के अनुसार परिवार पहचान पत्र लगभग 2.99 करोड़ नागरिकों का एकीकृत डिजिटल रिकार्ड तैयार कर चुका है, जिससे सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ पात्र लोगों तक तेजी और पारदर्शिता के साथ पहुंचना सुनिश्चित हुआ है। महिला मुखिया परिवारों की संख्या में फरीदाबाद सबसे आगे महिला मुखिया परिवारों की संख्या में फरीदाबाद सबसे आगे है, जहां 1.61 लाख से अधिक परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। इसके बाद करनाल (1.41 लाख), सोनीपत (1.29 लाख), जींद (1.23 लाख) और गुरुग्राम में (1.22 लाख) परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। राज्यभर में कुल 23 लाख 30 हजार 394 परिवारों में महिलाओं को परिवार के मुखिया के रूप में दर्ज किया गया है। डॉ. सतीश खोला के अनुसार परिवार पहचान पत्र की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसकी व्यापक पारिवारिक संरचना है। इस प्रणाली में 105 प्रकार के रिश्तों को दर्ज करने की सुविधा है, जिससे परिवारों का वास्तविक और सटीक डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जा रहा है। इससे सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से संभव हो रही है। पीपीपी के माध्यम से आय, परिवार संरचना और अन्य आवश्यक जानकारियों का डिजिटल सत्यापन होने से नागरिकों को विभिन्न विभागों में बार-बार दस्तावेज जमा कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सतीश खोला ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने परिवार पहचान पत्र में दर्ज जानकारी को समय-समय पर अपडेट करते रहें, ताकि सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ उन्हें निर्बाध रूप से मिलता रहे।

सतीश पूनियां और अलका गुर्जर ने दाखिल किया राज्यसभा पर्चा

जयपुर राजस्थान राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की राजस्थान इकाई के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनियां और राष्ट्रीय सचिव डॉ. अलका गुर्जर ने अपना नामांकन भर दिया है. दोनों नेताओं ने विधानसभा परिसर पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. इस मौके पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मदन राठौड़, डिप्टी सीएम प्रेम चंद बैरवा और दीया कुमारी, सांसद मंजू शर्मा, सांसद घनश्याम तिवारी समेत राजस्थान सरकार के कई मंत्री और दूसरे प्रमुख नेता मौजूद रहे. बीजेपी के दोनों प्रत्याशियों का जोरदार स्वागत सतीश पूनियां और अलका गुर्जर ने दोपहर करीब 12:30 बजे शुभ मुहूर्त में पर्चा दाखिल किया. दोनों प्रत्याशी और बाकी नेता इससे पहले जयपुर में बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में इकट्ठे हुए. वहां दोनों प्रत्याशियों का जोरदार स्वागत किया गया. संख्या बल के हिसाब से राजस्थान में बीजेपी को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलेगी. कांग्रेस के नीरज डांगी पहले ही अपना नामांकन कर चुके हैं. अगर आज किसी चौथे उम्मीदवार ने नामांकन नहीं किया तो बीजेपी और कांग्रेस के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो जाएंगे. 11 जून को नामांकन पत्रों की जांच के बाद औपचारिक तौर पर तीनों के निर्वाचन का ऐलान कर दिया जाएगा. सीएम भजनलाल शर्मा ने दी बधाई राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सतीश पूनियां और अलका गुर्जर के साथ तस्वीर शेयर कर उन्हें बधाई दी. सीएम भजनलाल शर्मा ने लिखा, "आज भाजपा प्रदेश कार्यालय में राज्यसभा चुनाव हेतु राजस्थान से भाजपा प्रत्याशी सतीश पूनियां और अलका गुर्जर से नामांकन से पूर्व आत्मीय भेंट कर उनका अभिनंदन किया तथा शुभकामनाएं दीं. इस अवसर पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, संगठन अजेय कुमार, और केंद्रीय गजेंद्र सिंह शेखावत सहित पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारीगण, जनप्रतिनिधिगण एवं सम्मानित कार्यकर्ता उपस्थित रहे." मोहम्मद मोईन को पत्रकारिता का करीब तीन दशक का अनुभव है. वह प्रिंट – इलेक्ट्रानिक और डिजिटल तीनों ही माध्यमों में सालों तक काम कर चुके हैं. ABP नेटवर्क से वह पिछले करीब 18 सालों, स्टार न्यूज़ के समय से ही जुड़े हुए हैं. राजनीति – धर्म और लीगल टापिक के साथ सम सामयिक विषयों के एक्सपर्ट हैं. पत्रकार होने के साथ ही राजनीतिक विश्लेषक, एक्सपर्ट पैनलिस्ट, आलोचक और टिप्पणीकार भी हैं. इनकी चुनावी भविष्यवाणी ज्यादातर मौकों पर सटीक साबित हुई है. 8 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव कवर कर चुके हैं. 7 कुंभ और महाकुंभ की कवरेज कर अपनी अलग पहचान बनाई है. यह अपनी बेबाक- निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. मोहम्मद मोईन ने चार विषयों पत्रकारिता एवं जनसंचार, राजनीति विज्ञान, हिंदी और मध्यकालीन व आधुनिक इतिहास विषयों में मास्टर डिग्री यानी स्नातकोत्तर किया हुआ है. लॉ ग्रेजुएट भी हैं. देश के कई राज्यों में काम करने का अनुभव रखते हैं. देश की तमाम नामचीन हस्तियों का इंटरव्यू ले चुके हैं और कई चर्चित घटनाओं को कवर चुके हैं.  

नामांकन खत्म होते ही तय हुई जीत, बिहार विधानपरिषद की 10 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन

पटना बिहार विधानपरिषद चुनाव के लिए एनडीए और महागठबंधन उम्मीदवारों के नामांकन की प्रक्रिया सोमवार को पूरी हो गई। अंतिम दिन एनडीए की ओर से नौ उम्मीदवारों ने नामांकन किया जबकि महागठबंधन की ओर से केवल एक ही नामांकन किया । विधानपरिषद की दस सीटों के लिए दस उम्मीदवार मैदान में हैं। तीन बजे नामांकन की अवधि खत्म होते ही इन सभी उम्मीदवारों की जीत भी पक्की हो गई क्योंकि, दीपक प्रकाश के नामांकन नहीं करने से वोटिंग की स्थिति नहीं बन पाई। 18 जून को मतदान होना सुनिश्चित किया गया था नामांकन करने वालों में जदयू से निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद के अलावा भाजपा से संजय प्रकाश मयूख, पवन सिंह, अनिल ठाकुर और शीला पंडित जबकि लोजपा ने अशरफ अंसारी हैं। निशांत कुमार सदन का सदस्य बनने से पहले राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन चुके हैं। राजद ने राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई सुनील सिंह को टिकट दिया है। उन्हें दूसरी बार यह मौका मिला है। सुनील सिंह ने भी नामांकन दाखिल कर दिया है। हालांकि, लालू की बेटी और तेजस्वी की बहन रोहिणी आचार्या ने सुनील सिंह को टिकट दिए जाने का विरोध किया है। बिहार विधान परिषद की जिन दस सीटों के चुनाव हो रहे हैं उनमें सात सीटें विधान पार्षदों का टर्म पूरा होने के कारण खाली हो रहे हैं। दो सीट सम्राट चौधरी और और भगवान सिंह कुशवाहा के विधानसभा जाने से खाली हुआ। सभी का टर्म 28 जून को पूरा हो रहा है। इन सीटों पर जीतने वाले उम्मीदवारों का कार्यकाल 6 सालों का होगा। एक सीट नीतीश कुमार के इस्तीफे के कारण खाली हुआ। इस सीट पर जदयू ने ललन प्रसाद को मौका दिया है। ललन प्रसाद का कार्यकाल चार वर्षों का होगा। इस चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा के मंत्री बेटे दीपक प्रकाश को मौका नहीं मिला। एनडीए ने उन्हें अपना उम्मीदवार नहीं बनाया। सोमवार को अंतिम दिन उन्होंने नामांकन भी दाखिल नहीं किया। इस वजह से उनके मंत्री पद पर भी तलवार लटक गई है क्योंकि, दीपक प्रकाश वर्तमान में किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। उपेंद्र कुशवाहा खेमे में इससे नाराजगी देखी जा रही है। सोमवार को एनडीए के सभी घटक दलों के नेता नामांकन में पहुंचे पर उपेंद्र कुशवाहा और दीपक प्रकाश नहीं दिखे। इससे पहले रविवार को पार्टी के अधिवेशन में उपेंद्र कुशवाहा नें कहा कि जदयू और आरएलएम की विचारधारा मेल खाती है पर भाजपा की अलग है। भाषण में उनका दर्द भी छलका। उपेंद्र कुशवाहा पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन के लिए दिल्ली जा रहे हैं।