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नारनौल में बारिश से राहत, बाकी हरियाणा में जारी रही भीषण लू

हिसार  प्रदेश में सोमवार शाम को अचानक से मौसम में बदलाव हुआ। राजस्थान सीमा के साथ लगते नारनौल में वर्षा हुई। प्रदेश के बाकी सभी जिलों में मौसम साफ होने के साथ ही सोमवार को लू चली। मंगलवार को भी राजस्थान सीमा के साथ लगते 14 जिलों में लू का यलो अलर्ट जारी किया गया है। यह स्थिति आगामी तीन दिनों तक बनी रह सकती है। 11 जून की रात से मौसम में बदलाव हो सकता और तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है। सोमवार को भीषण लू चलने के कारण रोहतक सबसे ज्यादा गर्म रहा। यहां का अधिकतम तापमान 45.2 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं रविवार देर शाम को आंधी चली। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार सोमवार सुबह से ही प्रदेश में धूप खिलने के कारण लू चल रही थी। शाम को नारनौल में अचानक से मौसम में बदलाव हुआ और हवाओं के साथ वर्षा हुई। इससे वहां पर गर्मी से राहत मिली। वहीं राजस्थान सीमा के साथ लगते बाकी जिलों में लू चलने के कारण गर्मी अधिक रही। इसके चलते रोहतक सबसे गर्म शहर रहा। इसके अलावा हिसार का तापमान 43.6 डिग्री तो अंबाला, करनाल और सिरसा का तापमान 42 डिग्री तक पहुंच गया है। 11 जून तक भीषण लू चलने के कारण तापमान में वृद्धि होने की संभावना है। क्यों अचानक बढ़ा तापमान? मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, हाल ही में सक्रिय रहा पश्चिमी विक्षोभ अब आगे बढ़ चुका है। मैदानी इलाकों पर बना इसका प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण भी अब कमजोर पड़ गया है। वहीं, पूर्व-पश्चिम ट्रफ रेखा उत्तर की ओर खिसक गई है। इसके चलते निचले स्तर की हवाओं की दिशा बदलकर गर्म पछुआ (पश्चिमी) हो गई है। शुष्क और गर्म हवाओं के सीधे प्रभाव के कारण करनाल में सोमवार से बुधवार के बीच अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है, जिससे दोपहर के समय लू का प्रकोप रहेगा।

अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ, अधिकारी मैदान में बढ़ाएं सक्रियता: अरुण साव

अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ, अधिकारी फील्ड में दिखाएं ज्यादा सक्रियता : अरुण साव उप मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों, शहरी व्यवस्थाओं, जल जीवन मिशन और खेल सुविधाओं की समीक्षा की विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश, गुणवत्ता और समय-सीमा पर जोर रायपुर.  उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन एवं विकास और खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने सुकमा जिले में विकास कार्यों और विभागीय योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और परिणामोन्मुख कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सुकमा जिला मुख्यालय में आयोजित बैठक में कहा कि प्रभावी कार्यशैली, नई तकनीकों के उपयोग और नियमित फील्ड मॉनिटरिंग से ही जनसमस्याओं का त्वरित समाधान संभव है। उप मुख्यमंत्री साव ने लोक निर्माण विभाग की समीक्षा के दौरान सड़क, पुल-पुलिया और भवन निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा उन्हें निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली संभावित बाधाओं का पूर्व आकलन कर समय रहते उनका समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा में उप मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन के कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूर्ण करने, ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा पेयजल योजनाओं का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल स्रोतों के क्लोरीनेशन, पानी टंकियों की साफ-सफाई और नल-जल योजनाओं के बेहतर संचालन-संधारण पर विशेष जोर दिया। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की समीक्षा के दौरान साव ने वर्षा ऋतु से पहले नालियों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई पूर्ण करने, पेयजल गुणवत्ता की नियमित जांच तथा स्वच्छता व्यवस्था को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने रेन वाटर हार्वेस्टिंग, जल संरक्षण और शहरी निकायों में नागरिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण को प्राथमिकता देने को कहा। उप मुख्यमंत्री ने  बैठक में अधिकारियों से कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। इसके लिए सभी विभाग आपसी समन्वय, जवाबदेही और टीम भावना के साथ कार्य करें तथा फील्ड में सक्रिय रहकर विकास कार्यों की सतत निगरानी सुनिश्चित करें। सुकमा के कलेक्टर अमित कुमार और पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।

ढाई वर्ष के दौरान निगम क्षेत्र में 1000 करोड़ रूपये के विकास कार्य स्वीकृत

उद्योग मंत्री ने किया 40 लाख रूपए के सड़क डामरीकरण कार्य का शुभारंभ ढाई वर्ष के दौरान निगम क्षेत्र में 1000 करोड़ रूपये के विकास कार्य स्वीकृत रायपुर,   प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग, श्रम, आबकारी व सार्वजनिक उपक्रम मंत्री श्रीलखनलाल देवंागन ने आज नगर कोरबा के दर्री जोनांतर्गत वार्ड क्र. 54 में 40 लाख रूपये की लागत से किये जाने वाले सड़क डामरीकरण कार्य का भूमिपूजन व शुभारंभ किया। उन्होने कार्य का शुभारंभ करते हुये पूरी गुणवत्ता के साथ कार्य संपादन करने एवं शीघ्र कार्य को पूरा किये जाने के निर्देश अधिकारियांे को दिये।  नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा लगातार किये जा रहे विकास कार्याे की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में दर्री जोनांतर्गत वार्ड क्र. 54 में कुमगरी मुख्य चौक से पण्डाल होते हुये प्राथमिक शाला कुमगरी तक 40 लाख रूपये से सड़क डामरीकरण का कार्य किया जाना हैं। आज उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने उक्त महत्वपूर्ण विकास कार्य का भूमिपूजन किया, शिलान्यास पट्टिका का अनावरण व नारियल तोड़कर का कार्य शुभारंभ कराया। इस अवसर पर पार्षद नरेन्द्र देवंागन, वार्ड पार्षद मुकुंद सिंह कंवर, फिरतराम साहू, चन्द्रलोक सिंह, किशन केंवट आदि सहित अन्य लोग उपस्थित थे।  ढाई वर्ष के दौरान निगम क्षेत्र में 1000 करोड़ रूपये के विकास कार्य स्वीकृत  उद्योग मंत्री देवांगन ने इस मौके पर अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आशीर्वाद से विगत ढाई वर्ष के दौरान नगर पालिक निगम कोरबा क्षेत्रंातर्गत विभिन्न मदों के अंतर्गत लगभग 1000 करोड़ रूपये के विकास कार्य स्वीकृत किये गये हैं, जिसमें अनेकों कार्य पूर्ण कर लिये गये हैं, अनेक प्रगति पर हैं तथा शेष कार्य शीघ्र ही प्रारंभ होने जा रहे हैं। उन्होने वार्ड क्र. 54 में विकास कार्याे का उल्लेख करते हुये कहा कि इस वार्ड में 93 लाख रूपये के विकास कार्य पूर्ण कर लिये गये हैं, वहीं साढे़ 03 करोड़ रूपये के विकास कार्य प्रगति पर हैं।  उद्योग मंत्री देवंागन ने अपने उद्बोधन में कहा कि निगम क्षेत्र में 15 करोड़ रूपये के सड़क डामरीकरण कार्य कराये जाने हैं, जैसे-जैसे डामर की उपलब्धता होती जायेगी, यह कार्य संपादित होंगे। उन्होेने आगे कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हमारे छत्तीसगढ़ राज्य का तेजी से विकास हो रहा है तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केन्द्र सरकार की दर्जनों जनकल्याणकारी योजनाओं व मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य की विभिन्न योजनाओं से प्रदेश व देश के करोड़ों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होने कहा कि 15 वर्षाे तक डॉ. रमन सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, उन्होने राज्य का ऐतिहासिक विकास किया तथा विकास पुरूष की छबि अर्जित की, अब पुनः मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में विकास को तेज गति व सही दिशा दी जा रही है।  उद्योग मंत्री ने जो वायदा किया था, वह पूरा किया  इस अवसर पर वार्ड क्र. 54 के पार्षद मुकुंद सिंह कंवर ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान उद्योग मंत्री लाखनलाल देवंागन इस बस्ती में आये हुये थे, यहॉं की सड़क अत्यंत जर्जर थी, उन्होने वायदा किया था कि इस सड़क का डामरीकरण व जीर्णाेद्धार का कार्य किया जायेगा, आज हम सब बस्तीवासियों के लिये अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि देवंागन ने अपना वह वायदा पूरा किया, और आज बस्ती की सड़क का डामरीकरण व जीर्णाेद्धार का कार्य शुरू हो चुका है। उन्होने कहा कि मेरे वार्ड में अन्य वार्डाे की तरह ही व्यापक रूप से विकास कार्य कराये गये हैं, जिसके लिये मैं उद्योग मंत्री लखनलाल देवंागन एवं महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत को धन्यवाद देता हूॅं। भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान पार्षद नरेन्द्र देवंागन, वार्ड पार्षद मुकुंद सिंह कंवर, फिरतराम साहू, चन्द्रलोक सिंह, किशन केंवट, रतन सिंह कंवर, जिला उपाध्यक्ष प्रफुल्ल तिवारी, मण्डल अध्यक्ष मनोज लहरे, पूर्व मण्डल अध्यक्ष ईश्वर सिंह साहू व नारायण सिंह ठाकुर, नरेन्द्र पाटनवार, आकाश श्रीवास्तव, अनिल यादव, जोन कमिश्नर लीलाधर पटेल, यशवंत जोगी, रितेश सिंह, चंदन दास, अजय कुर्रे, कृष्णा यादव, प्रकाश यादव, अभय कुर्रे, गणेश दास, अजय भट्ट, भागवत प्रसाद, रामप्रसाद केंवट, सरवन यादव, दुर्गा महंत, विक्की तिवारी, विक्रांत कुर्रे, सरस्वती केंवट, नगीना महंत, प्रीति पटेल, दुलारी श्रीवास, बहारन सिंह, बोधन दास, मीना आदित्य, आदि साथ अन्य लोग उपस्थित थे।

टॉस जीतकर इंडिया A की बल्लेबाजी, वैभव सूर्यवंशी सस्ते में आउट

दांबुला रीलंका A और इंडिया A के बीच त्रिकोणीय वनडे सीरीज 2026 का पहला मुकाबला आज (9 जून) दांबुला के रणगिरि दांबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जा रहा है. दोनों टीमों के लिए यह सीरीज का पहला मैच है. भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया है. अभी त‍िलक वर्मा और ऋतुराज गायकवाड़ क्रीज पर मौजूद हैं. इस मुकाबले के लाइव स्कोर और मैच से जुड़े अपडेट को हम लगातार एड ऑन कर रहे हैं. भारत ए की पारी की हाइलाट्स इस मुकाबले में भारत ए की शुरुआत खराब रही, आईपीएल में अपने बल्ले से गदर काटने वाले वैभव सूर्यवंशी सबसे पहले आउट हुए. उन्होंने 12 गेंदों पर 14 रन बनाए. इसके बाद प्रभस‍िमरन सिंह (2) पर आउट हुए. इस तरह टीम का स्कोर 16/2 हो गया. इसके बाद प्रि‍यांश आर्य (32) और ऋतुराज गायकवाड़ के बीच 53 रनों की पार्टनरश‍िप हुई. लेकिन आर्य रन आउट हो गए. यह मुकाबला ट्राई नेशन A सीरीज इन श्रीलंका 2026 के तहत खेला जा रहा है. टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाली टीमों के युवा और उभरते खिलाड़ियों पर चयनकर्ताओं की नजरें हैं. ऐसे खिलाड़ियों के लिए यह मंच भविष्य में सीनियर राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है. भारत A और श्रीलंका A के बीच होने वाला यह मैच सीरीज के शुरुआती समीकरण तय कर सकता है. दोनों टीमों के पास प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का अच्छा मिश्रण है और दांबुला की परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीम को शुरुआती बढ़त मिल सकती है. इंडिया ए प्लेइंग इलेवन: वैभव सूर्यवंशी, प्रभसिमरन सिंह (विकेट कीपर), प्रियांश आर्य, ऋतुराज गायकवाड़, तिलक वर्मा (कप्तान), आयुष बदोनी, अनुकूल रॉय, सूर्यांश शेडगे, अंशुल कंबोज, अरशद खान, विप्रज निगम श्रीलंका ए प्लेइंग इलेवन: निरोशन डिकवेला (विकेट कीपर), अविष्का फर्नांडो, नुवान‍िदु फर्नांडो, सदीरा समरविक्रमा, सहान अराचिगे (कप्तान), चमिका करुणारत्ने, रविन्दु फर्नांडो, वानुजा सहान, विजयकांत व्यासकांथ, मोहम्मद शिराज, गरुका संकेथ कहां हो रहा लाइव प्रसारण श्रीलंका में 9 से 21 जून तक होने वाली भारत A, श्रीलंका A और अफगानिस्तान A की त्रिकोणीय सीरीज का लाइव प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स और सोनी ल‍िव पर होगा. इंडिया A स्कॉड: वैभव सूर्यवंशी, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), प्रियांश आर्य, रुतुराज गायकवाड़, तिलक वर्मा (कप्तान), आयुष बदोनी, अनुकूल रॉय, सूर्यांश शेडगे, अंशुल कंबोज, अरशद खान, विप्रज निगम श्रीलंका  A स्कॉड: निरोशन डिकवेला (विकेटकीपर), अविष्का फर्नांडो, नुवानिदु फर्नांडो, सदीरा समरविक्रमा, साहन अराचिगे (कप्तान), चमिका करुणारत्ने, रविंदु फर्नांडो, वनुजा साहन, विजयकांत व्यासकांत, मोहम्मद शिराज, गरुका संकेथ ट्राई सीरीज का फुल शेड्यूल 9 जून 2026- इंड‍िया A vs श्रीलंका A 11 जून 2026- इंड‍िया A vs अफगानिस्तान A 13 जून 2026- अफगानिस्तान A vs श्रीलंका A 15 जून 2026- इंड‍िया A vs श्रीलंका A 17 जून 2026- इंड‍िया A vs अफगानिस्तान A 19 जून 2026- अफगानिस्तान A vs श्रीलंका A 21 जून 2026- फाइनल मुकाबला

बस्तर दौरे पर एक्शन मोड में अरुण साव, निर्माण कार्यों का लगातार कर रहे निरीक्षण

उप मुख्यमंत्री अरुण साव का बस्तर में निर्माण कार्यों का निरीक्षण जारी  मिशन अमृत के तहत निर्माणाधीन इंटेक-वेल और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का लिया जायजा, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का काम भी देखा  रायपुर.  उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने बस्तर प्रवास के चौथे दिन आज सुकमा में मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था को मजबूत करने बनाए जा रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने योजना के तहत शबरी नदी पर निर्माणाधीन इंटेक-वेल के कार्यों को भी देखा। उन्होंने पानी टंकी और पाइपलाइन विस्तार के कार्यों को भी तेजी से पूर्ण करते हुए जनवरी-2027 से मिशन अमृत की इस योजना से सुकमा में जल की आपूर्ति प्रारंभ करने के निर्देश दिए। केंद्र सरकार की मिशन अमृत 2.0 के तहत नगर पालिका द्वारा 86 करोड़ की लागत से सुकमा शहर की पेयजल व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। इसका 54 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। उप मुख्यमंत्री साव ने नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों से कहा कि सुकमा की आगामी 25 वर्षों की जरूरत को ध्यान में रखकर इसका निर्माण किया जा रहा है। निर्माण और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करना है। काम में तेजी बरकरार रखते हुए नियत समय में इसे पूर्ण करना है।  उप मुख्यमंत्री साव ने लोक निर्माण विभाग द्वारा सुकमा के कुम्हाररास में 11 करोड़ 62 लाख रुपए की लागत से बनाए जा रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यों में तेजी लाते हुए अधिकारियों और निर्माण एजेंसी से दिसम्बर तक इसे पूर्ण करने को कहा। करीब 10 एकड़ में बन रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में फुटबॉल मैदान, एथलेटिक्स ट्रैक, इंडोर बैडमिंटन कोर्ट, प्रशासनिक भवन, बॉक्स-क्रिकेट, स्वीमिंग-पूल जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसके निर्माण से सुकमा की खेल प्रतिभाओं को अपने कौशल को निखारने एक सर्वसुविधायुक्त अधोसंरचना और सुविधाएं मिलेंगी। अब तक इसका 50 प्रतिशत काम पूरा हो गया है।  तीनों कार्यों के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर अमित कुमार भी उप मुख्यमंत्री के साथ थे।

पिछले एक दशक में विभागीय आय लगभग तीन गुना, डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर मुख्यमंत्री का जोर

तकनीक की मदद से रजिस्ट्री कार्यालयों को बनाएं पारदर्शिता और जनसुविधा का आदर्श मॉडल: मुख्यमंत्री पिछले एक दशक में विभागीय आय लगभग तीन गुना, डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर मुख्यमंत्री का जोर पेपरलेस रजिस्ट्रेशन, जियो-टैगिंग और एआई आधारित प्रणाली को तेजी से लागू करने के निर्देश पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर विकसित होंगे रजिस्ट्री कार्यालय, नागरिक सुविधाएं होंगी बेहतर मानकीकृत मूल्यांकन व्यवस्था से रुकेगी स्टाम्प शुल्क चोरी, घटेंगे विवाद मुख्यमंत्री का निर्देश, सरल होंगे कानून, कहा,कॉरपोरेट पुनर्गठन, एलएलपी और रेरा से जुड़े प्रावधानों को समयानुकूल बनाने की आवश्यकता लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, निवेश गतिविधियों और शहरीकरण की आवश्यकताओं के अनुरूप विभाग को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित, उत्तरदायी और जनसुविधा केंद्रित बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि रजिस्ट्री कार्यालय आमजन के प्रत्यक्ष संपर्क वाले कार्यालय हैं, इसलिए वहां की व्यवस्थाएं आधुनिक, व्यवस्थित और नागरिक केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने उप निबंधक कार्यालयों को चरणबद्ध ढंग से पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर विकसित करने की आवश्यकता बताई।  बैठक में बताया गया कि प्रदेश के रजिस्ट्री कार्यालयों में प्रतिवर्ष लगभग 2.4 करोड़ लोगों का प्रत्यक्ष संपर्क होता है। इसे देखते हुए हेल्प डेस्क, टोकन एवं क्यू मैनेजमेंट सिस्टम, आधुनिक प्रतीक्षालय, महिला एवं शिशु कक्ष, डिजिटल सुविधाएं तथा अन्य नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे नागरिकों को अनावश्यक प्रतीक्षा और असुविधा का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग राज्य की राजस्व व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2016-17 में विभाग की सकल आय 11,613.84 करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 32,598.49 करोड़ रुपये हो गई है। इसी अवधि में पंजीकृत लेखपत्रों की संख्या 28.25 लाख से बढ़कर 49.34 लाख से अधिक हो गई। मुख्यमंत्री ने इस प्रगति को आगे बढ़ाते हुए राजस्व वृद्धि के साथ सेवा गुणवत्ता और नागरिक संतुष्टि को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस विभागीय सुधारों का प्रमुख आधार बनना चाहिए। संपत्ति एवं विवाह पंजीकरण में आधार प्रमाणीकरण, बायोमेट्रिक और आईरिस आधारित सत्यापन, ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन तथा खतौनी आधारित डिजिटल जांच जैसी व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ किया जाए। पेपरलेस रजिस्ट्रेशन प्रणाली, अभिलेखों के डिजिटाइजेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कार्यप्रणाली तथा जियो-टैगिंग व्यवस्था को तेजी से लागू करने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने, विवाद कम करने और राजस्व अपवंचन रोकने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि संपत्तियों के मूल्यांकन में एकरूपता और पारदर्शिता लाने के लिए मानकीकृत मूल्यांकन व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। इससे बाजार आधारित मूल्यांकन सुनिश्चित होगा तथा मूल्यांकन संबंधी विवादों में कमी आएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से निवेश और औद्योगिक विकास का केंद्र बन रहा है। ऐसे में विधिक व्यवस्थाओं को भी वर्तमान आर्थिक और व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं में स्पष्टता होने से निवेशकों का विश्वास बढ़ता है, अनावश्यक विवाद और मुकदमेबाजी कम होती है तथा कारोबार करने की सुगमता को बल मिलता है। बैठक में कॉरपोरेट पुनर्गठन, विलय, विभाजन, समामेलन, अधिग्रहण, सीमित दायित्व भागीदारी (एलएलपी), शेयरधारिता में परिवर्तन, आवासीय सहकारी समितियों तथा रेरा के अंतर्गत विक्रय करारों से जुड़े विषयों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में स्पष्ट और व्यावहारिक स्टाम्प शुल्क व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि विभिन्न राज्यों की सर्वोत्तम व्यवस्थाओं का अध्ययन करते हुए ऐसा विधिक ढांचा तैयार किया जाए जिससे निवेश को प्रोत्साहन मिले, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस मजबूत हो, विवादों में कमी आए और राज्य के राजस्व हित भी सुरक्षित रहें।

योगी सरकार की सतर्कता से निर्बाध बिजली सप्लाई, दिन-रात मैदान में डटे बिजलीकर्मी

भीषण गर्मी में भी बिजली आपूर्ति में उत्तर प्रदेश बना नंबर वन, 31 हजार मेगावाट से अधिक की डिमांड पूरी योगी सरकार की सतर्कता से निर्बाध बिजली सप्लाई, दिन-रात मैदान में डटे बिजलीकर्मी 7 जून को 31,147 मेगावाट बिजली आपूर्ति, देश में सबसे अधिक डिमांड पूरी ट्रांसफार्मर, फीडर और उपकेंद्रों की चौबीसों घंटे निगरानी, मेंटेनेंस कार्य तेज  8 जून को दोपहर 12 बजे 27,838 मेगावाट बिजली सप्लाई, हर घंटे मांग के अनुसार आपूर्ति जारी लखनऊ  उत्तर प्रदेश में इस समय प्रचंड गर्मी का दौर जारी है। प्रदेश के कई जिलों में अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उप्र. पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटा हुआ है। डिमांड बिजली आपूर्ति करने में उत्तर प्रदेश नंबर वन पर है। बढ़ती मांग के बावजूद प्रदेश में सुचारु बिजली व्यवस्था बनाए रखने को लेकर योगी सरकार के प्रयासों की व्यापक सराहना हो रही है। 6 और 7 जून को यूपी में रिकॉर्ड डिमांड बिजली आपूर्ति की गई यूपी इस समय डिमांड बिजली आपूर्ति करने में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। 7 जून को प्रदेश में 31,147 मेगावाट की रिकॉर्ड डिमांड बिजली आपूर्ति की गई, जो देश में सबसे अधिक रही। इसी तरह 6 जून को भी डिमांड बिजली आपूर्ति करने में  उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा है। 6 जून को 31049 मेगावाट और 5 जून को 29130 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। लगातार इतनी बड़ी मात्रा में बिजली उपलब्ध कराना यूपीपीसीएल की मजबूत कार्यप्रणाली और बेहतर प्रबंधन को दर्शाता है। 8 जून को दोपहर 12 बजे 27838 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई 7-8 जून की रात 1 बजे 30165 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई। इसी तरह रात 3 बजे 29190 मेगावाट और रात 4 बजे 28482 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई है। इसी तरह 8 जून की सुबह 6 बजे 25463 मेगावाट, सुबह 8 बजे 22666 मेगावाट, सुबह 10 बजे 26288 मेगावाट और सुबह 11 बजे 27138 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई है। ऐसे ही दोपहर 12 बजे 27838 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई है।  विभागीय टीम लगातार मेंटेनेंस कार्य में जुटी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को गर्मी के मौसम में निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसी के अनुरूप यूपीपीसीएल की टीमें चौबीसों घंटे बिजली व्यवस्था की निगरानी कर रही हैं। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में बिजली मांग का लगातार विश्लेषण किया जा रहा है ताकि किसी भी स्थिति में उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने से ट्रांसफार्मर, फीडर और अन्य विद्युत उपकरणों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसे देखते हुए विभागीय टीमें लगातार मेंटेनेंस कार्यों में जुटी हुई हैं।  बिजली कर्मी दिन-रात फील्ड में रहकर कर रहे कार्य दिन के साथ-साथ रात्रिकालीन समय में भी बिजलीकर्मी फील्ड में रहकर आवश्यक तकनीकी कार्यों को पूरा कर रहे हैं। इससे संभावित खराबियों को पहले ही दूर किया जा रहा है और बिजली आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने में मदद मिल रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लगातार उपकेंद्रों तथा वितरण तंत्र का निरीक्षण कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान बिजली व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है और अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि उपभोक्ताओं को हर परिस्थिति में सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।  प्रदेश में लगातार रिकॉर्ड स्तर पर डिमांड बिजली आपूर्ति की जा रहीः निदेशक वितरण यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन पावर कॉरपोरेशन उपभोक्ताओं को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तत्परता के साथ कार्य कर रहा है। प्रदेश लगातार रिकॉर्ड स्तर पर डिमांड बिजली आपूर्ति कर रहा है। उन्होंने बताया कि यूपीपीसीएल की टीमें हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

चरित्र पर सवाल नहीं उठाए जा सकते! सहमति से बने संबंधों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान

हैदराबाद सुप्रीम कोर्ट ने अपनी एक टिप्पणी में कहा है कि आपसी सहमति से दो अविवाहित व्यस्कों के बीच बने शारीरिक संबंध किसी व्यक्ति के खराब चरित्र का प्रमाण नहीं हो सकता है. न्यायाधीश मनमोहन और मनोज मिश्रा की पीठ ने यह टिप्पणी तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड को एक ऐसे उम्मीदवार की नियुक्ति का निर्देश देते हुए की, जिसका पुलिस कांस्टेबल के रूप में चयन एक आपराधिक मामले की वजह से रद्द कर दिया गया था।  इस उम्मीदवार पर शादी का झांसा देकर रेप का आरोप लगा था, जो बाद में अदालत के बाहर सुलझ गया था. लेकिन तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड ने उस आरोप को देखते हुए खराब चरित्र का आधार देकर उम्मीदवार की भर्ती को रोक दिया था. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, "सहमति से बने दो अविवाहित वयस्कों के बीच शारीरिक संबंध अपने आप में किसी व्यक्ति के चरित्र के खराब होने का आधार नहीं हो सकता है और न ही ऐसा होना चाहिए. ऐसा कोई कानून नहीं है जो सहमति से बने दो अविवाहित वयस्कों को अपनी पसंद का संबंध रखने से रोकता हो।  उम्मीदवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी इस मामले में उम्मीदवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवार की ओर से दायर अपील को स्वीकार कर लिया और तेलंगाना उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें बोर्ड को पुलिस कांस्टेबल के पद पर उसकी नियुक्ति पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया गया था. तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड ने उनकी नियुक्ति इस आधार पर रद्द कर दी थी कि उनके खिलाफ 2014 में दर्ज विवाह का वादा करके बलात्कार का मामला दर्ज कराया गया था।  हर संबंध शादी में तबदील नहीं होता है सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस उम्मीदवार का अपनी पड़ोसी के महिला के साथ संबंध था. आरोप लगने के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता भी हो गया था. साल 2015 में लोक अदालत में इसका निपटारा भी हो गया था. आईपीसी की धारा 376 के तहत कोई आरोप नहीं लगाया गया था. ऐसे में उस आधार पर उम्मीदवार को भर्ती न करने का फैसला सही नहीं है।  कोर्ट ने कहा "हर रिश्ता शादी में तब्दील नहीं होता है. इसलिए, केवल इसलिए कि रिश्ता शादी में तब्दील नहीं हुआ, यह मानने का कोई आधार नहीं है कि एक पक्ष ने दूसरे को धोखा दिया है. इस आधार पर यह भी नहीं कहा जा सकता है कि उस व्यक्ति का चरित्र खराब था। 

जनगणना में पूछे जाएंगे 33 सवाल, क्या जवाब देना अनिवार्य है? जानिए गलत जानकारी देने के परिणाम

नई दिल्ली जनगणना 2027 की प्रक्रिया पूरे जोर-शोर से जारी है। सबसे पहले मकानों की गणना की जा रही है। इसके लिए लोगों से 33 सवाल पूछे जा रहे हैं। मकानों की गणना के दौरान भी घर-परिवार और रहन-सहन के बारे में पूछे जाने वाले सवालों को लेकर लोगों के मन में कई तरह की आशंकाएं भी रहती हैं। एक तो यह कि क्या सभी सवालों का जवाब देना जरूरी है? दूसरा यह कि अगर किसी सवाल का गलत जवाब दिया गया तो क्या ऐक्शन हो सकता है? क्या है जनगणना की रूपरेखा जनगणना 2027 की रूपरेखा दो प्रमुख चरणों में बंटी है। सबसे पहले हाउसिंग सेंसस हो रहा है। इसके लिए जनगणना अधिकारी एक-एक घर तक पहुंच रहे हैं और उनकी स्थिति, सुविधाएं और घर में रहने वाले लोगों से जुड़ी बुनियादी जानकारियां इकट्ठी कर रहे हैं। इन जानकारियों के लिए परिवार के मुखिया से 33 सवाल किए जाते हैं और उन्हें ऑनलाइन दर्ज कर लिया जाता है। रजिस्ट्रार जनरल का कहना है कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य जमीनी हकीकत का को ठीक से समझना और मुख्य जनगणना के कार्य को आसान करना है। इसके बाद 1 फरवरी से जनगणना का दूसरा चरण शुरू होगा। क्यों पूछे जा रहे हैं 33 सवाल जनगणना के पहले चरण में यह पता लगाने का प्रयास है कि लोगों के जीवन का स्तर क्या है। इसी वजह से जो 33 सवाल किए जा रहे हैं उनमें सुविधाओं की जानकारी को मुख्य रखा गया है। इसमें घर में कितने लोग रहते हैं, फर्श कैसी है, दीवार की छत किस सामग्री से बनी है, पीने की पानी की क्या सुविधा है, घर का मुखिया कौन है। ऐसे सवाल शामिल किए गए हैं। इन सवालों में पानी, शौचालय, इंटरनेट, मोबाइल जैसे सुविधाओं को ध्यान में रखा गया है। इसके अलावा कार,बाइक, साइकल और वाहनों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। जिससे लोगों के जीवन स्तर के सही आंकड़े जुटाए जा सकें। जवाब ना देने पर क्या होगा सवाल है कि अगर कोई जनगणना में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं देता है तो क्या होगा। देश के नागरिक होने के नाते कोई भी सवालों का जवाब देने से इनकार नहीं कर सकता। वहीं जनगणना अधिकारी की भी जिम्मेदारी होती है को वह इन जानकारियों को पोर्टल पर ही अपडेट करे और कहीं प्रचारित ना करे। अगर कोई जानकारी गलत देता है तो सेंसस ऐक्ट 1948 के मुताबिक उस पर जुर्माना भी लग सकता है। हालांकि इससे नागरिकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार के लिए आपके सवाल इसलिए भी जरूरी हैं ताकि जिन सुविधाओँ तक आपकी पहुंच नहीं हैं, उन्हें भविष्य में सुलभ बनाया जा सके। सरकार का कहना है कि नागरिकों के हित में ही ये सवाल किए जा रहे हैं। क्या हैं जनगणना के 33 सवाल? 1. भवन संख्या 2. जनगणना घर संख्या 3- फर्श में उपयोग की गई सामग्री 4. घऱ की दीवार में उपयोग की गई सामग्री 6. घर के छत में उपयोग की गई प्रमुख सामग्री 7. घर का उपयोग 7. घर की स्थिति (नया या पुराना) 8. घर में रहने वाले लोगों की संख्या 9. परिवार में आम तौर पर उपलब्ध रहने वालों की संख्या 10. परिवार के मुखिया का नाम 11- परिवार के मुखिया का लिंग 12. परिवार के मुखिया की जाति 13. घर किराये का या खुद का 14. आवासीय कमरों की संख्या 15. परिवार में रहने वाले विवाहितों की संख्या 16. पीने के पानी का स्रोत 17. प्रकाश की व्यवस्था 18. शौचालय की उपलब्धता 19. शौचालय का प्रकार 20. जल निकासी की व्यवस्था 21. स्नान की सुविधा 22. रसोईघर में एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन 23. खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन 24. रेडियो या ट्रांजिस्टर 25. टेलीविजन 26. इंटरनेट 27. लैपटॉप या कंप्यूटर 28. मुख्य रूप से खाया जाने वाला अनाज 29. कार जीप की उपलब्धता 30. मोबाइल नंबर

टिकट बुकिंग में बड़ा बदलाव! अगस्त से लागू होगा रेलवे का नया रिजर्वेशन सिस्टम, जानिए क्या बदलेगा

नई दिल्ली भारतीय रेलवे अगस्त महीने से अपने करीब 40 साल पुराने रिजर्वेशन सिस्टम को बदलने जा रहा है. 1986 से इस्तेमाल हो रहे पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) की जगह अब नया और आधुनिक सिस्टम लाया जाएगा. रेलवे का दावा है कि इससे टिकट बुकिंग पहले से ज्यादा तेज, आसान और भरोसेमंद हो जाएगी. साथ ही यात्रियों को कई नई सुविधाएं भी मिलेंगी।  रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में रेल भवन में इस प्रोजेक्ट का रिव्यू किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि नए सिस्टम में बदलाव के दौरान यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो. रेलवे अगस्त से चरणबद्ध तरीके से ट्रेनों को नए रिजर्वेशन सिस्टम पर शिफ्ट करना शुरू करेगा।  1986 में शुरू हुआ था मौजूदा सिस्टम भारतीय रेलवे का मौजूदा पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम 1986 में शुरू किया गया था. पिछले चार दशकों में इसमें कुछ छोटे-मोटे बदलाव जरूर हुए, लेकिन इसकी मूल संरचना लगभग वैसी ही बनी रही. इस दौरान यात्रियों की संख्या और ऑनलाइन टिकट बुकिंग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में रेलवे को एक ज्यादा सक्षम और आधुनिक सिस्टम की जरूरत महसूस हो रही थी।  रेलवे ने साल 2002 में इंटरनेट के जरिए टिकट बुकिंग की सुविधा शुरू की थी. आज हालात यह हैं कि लगभग 88 प्रतिशत टिकट ऑनलाइन बुक किए जाते हैं. ऐसे में नए सिस्टम को इसी बढ़ती डिजिटल मांग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।  ज्यादा क्षमता वाला होगा नया सिस्टम रेलवे के मुताबिक नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम आधुनिक तकनीक पर आधारित है और मौजूदा सिस्टम की तुलना में कहीं ज्यादा क्षमता के साथ काम करेगा. इससे टिकट बुकिंग के दौरान सर्वर पर पड़ने वाला दबाव कम होगा और यात्रियों को वेबसाइट या ऐप पर बेहतर अनुभव मिलेगा।  त्योहारों या तत्काल टिकट बुकिंग के समय अक्सर वेबसाइट धीमी पड़ने या तकनीकी दिक्कतों की शिकायतें आती हैं. रेलवे का कहना है कि नया सिस्टम ऐसी समस्याओं को काफी हद तक कम करेगा।  RailOne ऐप की लोकप्रियता बढ़ी रेलवे का यह बदलाव उसकी डिजिटल रणनीति का हिस्सा है. जुलाई 2025 में लॉन्च किए गए रेलवन ऐप को एक साल से भी कम समय में 3.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है।  इस ऐप के जरिए यात्री टिकट बुक और कैंसिल कर सकते हैं, ट्रेन की लाइव लोकेशन देख सकते हैं, प्लेटफॉर्म और कोच की जानकारी हासिल कर सकते हैं, शिकायत दर्ज करा सकते हैं और कई दूसरी रेलवे सेवाओं का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।  रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, इस ऐप के जरिए हर दिन करीब 9.29 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं. इनमें लगभग 7.2 लाख अनारक्षित और 2.09 लाख आरक्षित टिकट शामिल हैं।  AI बताएगा टिकट कन्फर्म होने की संभावना नए सिस्टम की सबसे खास सुविधाओं में से एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित वेटिंग टिकट प्रेडिक्शन फीचर है. यह सुविधा यात्रियों को बताती है कि उनकी वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की कितनी संभावना है।  रेलवे के अनुसार, इस फीचर की सटीकता पहले करीब 53 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इससे यात्रियों को यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी और अनिश्चितता कम होगी।  करोड़ों यात्रियों को मिलेगा फायदा भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है और हर दिन लाखों लोग इसकी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में अगस्त से शुरू होने वाला यह बदलाव रेलवे के डिजिटल इतिहास की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।  करीब 40 साल पुराने रिजर्वेशन सिस्टम को बदलकर रेलवे अब पूरी तरह आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रहा है. उम्मीद है कि नया सिस्टम टिकट बुकिंग को ज्यादा तेज, स्मार्ट और भरोसेमंद बनाएगा, जिसका फायदा देशभर के करोड़ों रेल यात्रियों को मिलेगा।