samacharsecretary.com

तस्करी मामलों की सुनवाई में देरी पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता, गवाहों की अनुपस्थिति पर उठाए सवाल

चंडीगढ़  पंजाब में नशा तस्करी से जुड़े मामलों की सुनवाई में हो रही देरी पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को पुलिस बल की जनशक्ति की उच्चस्तरीय समीक्षा करने और भर्ती प्रक्रिया को गति देने के निर्देश दिए हैं।  अदालत ने कहा कि पंजाब सरकार युद्ध नशे विरुद्ध अभियान चला रही है लेकिन पुलिसकर्मियों की कमी के कारण सरकारी गवाह समय पर अदालतों में पेश नहीं हो पा रहे हैं। इसका सीधा असर एनडीपीएस मामलों के ट्रायल पर पड़ रहा है। जस्टिस संजय वशिष्ठ की पीठ के समक्ष हेरोइन बरामदगी से जुड़े एक मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह मुद्दा सामने आया। पंजाब सरकार की ओर से विशेष डीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रवीण कुमार सिन्हा के हलफनामे और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स से जुटाए गए आंकड़े अदालत के समक्ष पेश किए गए।  अदालत ने कहा कि एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है जबकि पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। राज्य स्तर पर इस समस्या पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है ताकि अदालतों में गवाही देने के लिए पर्याप्त पुलिसकर्मी उपलब्ध कराए जा सकें।  अदालत ने टिप्पणी की कि नशे के खिलाफ सख्त अभियान चलाने के बावजूद वास्तविक स्थिति यह है कि कई मामलों में पुलिस गवाहों की अनुपस्थिति के कारण ट्रायल लंबित हो रहे हैं और आरोपियों को जमानत मिलने का आधार बन रहा है।   

तकनीक आधारित शिक्षा से छात्रों के लिए खुलेंगे नए अवसरों के द्वार : उच्च शिक्षा मंत्री परमार

तकनीक आधारित शिक्षा से विद्यार्थियों को मिलेंगे नए अवसर : उच्च शिक्षा मंत्री परमार उच्च शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन को गति देने के लिए इंदौर में आयोजित हुआ ‘डिजी100x मध्यप्रदेश समिट’ उच्च शिक्षा विभाग एवं डिजी के संयुक्त तत्वावधान में उच्च शिक्षा के डिजिटल भविष्य पर हुआ मंथन मंत्री परमार ने किया समिट का शुभारंभ भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग द्वारा  इंदौर के मेरियट होटल में “डिजी100x मध्यप्रदेश समिट” का आयोजन किया गया। उच्च शिक्षा विभाग एवं डिजी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महत्वपूर्ण समिट का शुभारंभ प्रदेश के उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने किया। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन, उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा, आर.आर. कन्हेरे सहित प्रदेश के विभिन्न शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, कुलसचिव, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ तथा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। समिट का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा डिजिटल नवाचारों के माध्यम से शिक्षण एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आधुनिक बनाना था। कार्यक्रम में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में डिजिटल परिवर्तन की संभावनाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डेटा आधारित निर्णय प्रणाली, ई-गवर्नेंस, डिजिटल मूल्यांकन तथा भविष्य की शिक्षा व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। मंत्री परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि विभाग उत्तर पुस्तिकाओं के शत-प्रतिशत डिजिटल वैलिडेशन की दिशा में कार्य कर रहा है, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और प्रभावी बन सकेगी। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित शिक्षा केवल प्रशासनिक सुधार का माध्यम नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का सशक्त उपकरण भी है। मंत्री परमार ने बताया कि विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार की जा रही है तथा उन्हें बहुभाषी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तेलुगू, तमिल, मराठी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए डिजिटल तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग है। उच्च शिक्षा संस्थानों को विद्यार्थियों की बदलती आवश्यकताओं तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तकनीकी रूप से सशक्त बनाना होगा। इसके लिए विश्वविद्यालयों को शोध, नवाचार तथा डिजिटल अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कार्यों में गति, पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए तकनीक को अपनाना आवश्यक है। जब तकनीकी विशेषज्ञ, विश्वविद्यालय और शासन मिलकर योजनाओं का स्वरूप तैयार करते हैं, तब शिक्षा एवं मूल्यांकन व्यवस्था को नई दिशा मिलती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग उच्च शिक्षा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर संसाधन और सीखने के अधिक अवसर उपलब्ध कराएगा। मंत्री परमार ने परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल मूल्यांकन (डिजिटल इवैल्यूएशन) प्रणाली को अपनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी नवाचारों का उपयोग शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए अनिवार्य हो गया है। उन्होंने विश्वविद्यालयों, तकनीकी विशेषज्ञों तथा शासन के प्रतिनिधियों से इस विषय पर व्यापक विमर्श कर व्यवहारिक और प्रभावी समाधान विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लागू करने से परीक्षा प्रक्रिया की गुणवत्ता में सुधार होगा, परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा विद्यार्थियों को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं मिल सकेंगी। उन्होंने इस कार्यशाला को समयानुकूल और महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह उच्च शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने कहा कि विभाग विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘सार्थक ऐप’ आधारित उपस्थिति प्रणाली को लागू करने के प्रयास कर रहा है। उन्होंने वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली में 30 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन और 70 प्रतिशत लिखित परीक्षा के अनुपात का उल्लेख करते हुए कहा कि बदलते शैक्षणिक परिवेश को देखते हुए इसे 40:60 करने पर विचार किया जाना चाहिए। इससे विद्यार्थियों की सतत शैक्षणिक सहभागिता और कक्षा आधारित सीखने की प्रक्रिया को अधिक महत्व मिलेगा। उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज शिक्षा जगत की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुकी है। विद्यार्थियों को एआई आधारित तकनीकों से परिचित कराने के लिए महाविद्यालयों में एआई से संबंधित सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को विद्यार्थियों को एआई टूल्स के रचनात्मक, नैतिक और जिम्मेदार उपयोग के लिए प्रेरित करना चाहिए, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें। समिट में विशेषज्ञों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म, स्मार्ट प्रशासन, ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली, डेटा आधारित प्रबंधन तथा तकनीक आधारित कौशल विकास जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि डिजिटल संसाधनों और नवाचारों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अधिक सुलभ, प्रभावी और समावेशी बनाया जा सकता है। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, विश्वविद्यालय प्रशासकों तथा तकनीकी विशेषज्ञों के बीच सार्थक संवाद स्थापित कर उच्च शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में साझा कार्ययोजना तैयार करना था। समिट में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने उच्च शिक्षा को अधिक नवाचारी, विद्यार्थी-केंद्रित, समावेशी और भविष्य उन्मुख बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव भी प्रस्तुत किए।  

किसानों के लिए राहत की खबर, समितियों और निजी विक्रेताओं के पास खाद का पर्याप्त भंडार

समितियों और निजी विक्रेताओं के पास खाद का पर्याप्त भंडार, किसानों को निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित कलेक्टर रोज कर रहे समीक्षा, 114 सहकारी समितियों सहित निजी दुकानों से हो रहा खाद का उठाव रायपुर खरीफ सीजन 2026 के मद्देनजर जिले में किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। कलेक्टर संजय अग्रवाल द्वारा प्रतिदिन खाद-बीज की उपलब्धता, भंडारण एवं वितरण की समीक्षा की जा रही है। जिले की 114 सहकारी समितियों तथा निजी उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में वर्तमान में खाद का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और मांग के अनुरूप निरंतर वितरण किया जा रहा है।      उप संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी के अनुसार खरीफ 2026 के लिए जिले को 68,950 टन रासायनिक उर्वरकों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसके विरुद्ध अब तक 46,780 टन से अधिक उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 60.28 प्रतिशत है। वहीं किसानों को अब तक 19,912 टन से अधिक उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है। जिले में वर्तमान में कुल 41,560 टन उर्वरक का भंडार उपलब्ध है। इनमें यूरिया 22,996 टन, डीएपी 5,621 टन, एनपीके 6,808 टन, एसएसपी 4,981 टन तथा एमओपी 1,155 टन शामिल है। कृषि विभाग द्वारा लगातार उर्वरक कंपनियों से अतिरिक्त रैक प्राप्त कर भंडारण बढ़ाया जा रहा है ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।       कृषि विभाग के अधिकारियों को समितियों एवं निजी विक्रेताओं के यहां नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं अनियमित वितरण पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। कलेक्टर श्री अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराया जाए तथा मांग और आपूर्ति की दैनिक मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे अधिकृत सहकारी समितियों एवं लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदें तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की जानकारी तत्काल कृषि विभाग को दें। जिले में खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता होने से खरीफ सीजन की तैयारियां सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं।

हमीरपुर सेतु हादसे की जांच के लिए दो हाईलेवल कमेटियां गठित, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

हमीरपुर सेतु दुर्घटना की जांच के लिए दो उच्चस्तरीय समितियां गठित, दोषियों पर होगी कठोर कार्रवाई योगी सरकार ने पहुंचाई मृतकों के परिजनों को तत्काल 4-4 लाख रुपए की आर्थिक मदद प्रभावित परिवारों को सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं से किया जाएगा आच्छादित हमीरपुर  बेतवा नदी पर निर्माणाधीन सेतु के सेगमेंटल स्पान (P-5 से P-6) गिरने की घटना को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के तहत जिला प्रशासन तथा उत्तर प्रदेश सेतु निगम द्वारा दो अलग-अलग उच्चस्तरीय जांच समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों ने घटना की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं व्यापक जांच शुरू कर दी है। इनकी रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी अभिषेक गोयल ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति, जिसकी अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) कर रहे हैं, घटना से संबंधित सभी प्रशासनिक, तकनीकी एवं प्रक्रियात्मक पहलुओं की विस्तृत जांच कर रही है। समिति के सदस्यों द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण एवं साक्ष्य संकलन का कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश सेतु निगम द्वारा भी तकनीकी परीक्षण एवं विशेषज्ञ जांच हेतु तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जो निर्माण कार्य की गुणवत्ता, डिजाइन, संरचनात्मक मानकों, निर्माण सामग्री तथा सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुपालन की गहन समीक्षा करेगी और आवश्यकता पड़ने पर निर्माण सामग्री की प्रयोगशाला जांच भी कराई जाएगी। घटना के लिए जिम्मेदार लोगों पर होगी कठोर कार्रवाई जिलाधिकारी ने बताया कि उक्त दुर्घटना के संबंध में थाना कुरारा में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) एवं धारा 125(ए) के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कर लिया गया है। प्रकरण की विवेचना प्रचलित है तथा जांच के दौरान प्राप्त तथ्यों, साक्ष्यों एवं दोनों जांच समितियों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली आख्या के आधार पर आवश्यक विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। घटना के लिए उत्तरदायी पाए जाने वाले व्यक्तियों अथवा संस्थाओं के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। योगी सरकार ने दी परिजनों को तत्काल 4-4 लाख रुपए की आर्थिक मदद डीएम ने बताया कि दुर्घटना में मृत 6 श्रमिकों के परिजनों को शासन की ओर से 4-4 लाख रूपए की अनुग्रह सहायता राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। इसके अतिरिक्त निर्माण कार्य से संबंधित फर्म मेसर्स शेल्टर इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड द्वारा प्रत्येक मृतक श्रमिक के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। श्रम विभाग की योजनाओं के अंतर्गत भी प्रत्येक पात्र परिवार को 1.25 लाख रुपए की सहायता राशि उपलब्ध कराई जा रही है। प्रभावित परिवारों को सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं से किया जाएगा आच्छादित जिलाधिकारी ने बताया कि प्रभावित परिवारों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं से भी आच्छादित किया जा रहा है। दो पात्र परिवारों को राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का लाभ प्रदान किया जा रहा है। स्वर्गीय राजेश पाल की पत्नी अनीता एवं पुष्पेन्द्र सिंह चौहान के पिता राजेन्द्र सिंह को राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना से लाभान्वित किया गया है। वहीं स्वर्गीय पुष्पेन्द्र सिंह चौहान के पिता राजेन्द्र सिंह को वृद्धावस्था पेंशन योजना तथा स्वर्गीय राजेश पाल की पत्नी अनीता को निराश्रित महिला पेंशन से आच्छादित किए जाने की कार्यवाही की जा रही है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का मृतक की बेटियों को दिया जाएगा लाभ डीएम ने बताया कि स्वर्गीय राजेश पाल की दो पुत्रियों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत लाभान्वित किया जाएगा। जिसके तहत दोनों बालिकाओं को 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक प्रतिमाह 2500 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त पात्र परिवारों को अंत्योदय राशन कार्ड, आवास, स्वच्छ शौचालय योजना तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी उपलब्ध कराया जा रहा है। डीएम अभिषेक गोयल ने कहा कि जनपद प्रशासन प्रभावित परिवारों के साथ पूर्ण संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता के साथ खड़ा है। सभी पात्र परिजनों को शासन की योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराया जाएगा तथा घटना की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करते हुए दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों के अनुपालन से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

सीएम योगी ने शाकम्भरी देवी दुर्घटना के घायलों और पीड़ित परिवारों को सहायता देने के निर्देश दिए

सीएम योगी ने दिए शाकम्भरी देवी खोल दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवजा देने के निर्देश आने वाले श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु यथासंभव व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश, कोई भी श्रद्धालु दर्शन से वंचित न हो मुख्यमंत्री ने मां शाकम्भरी देवी सिद्धपीठ खोल में अचानक जलप्रवाह के कारण हुई दुर्घटना की समीक्षा की बाबा भूरा देव मंदिर एवं मां शाकम्भरी देवी मंदिर में मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की सीएम योगी ने भूरा देव से मां शाकम्भरी देवी मंदिर तक एलिवेटेड ब्रिज एवं रोड का निर्माण कार्य शारदीय नवरात्रि तक पूर्ण करने का करें प्रयास: सीएम समयबद्धता एवं गुणवत्ता की जाए सुनिश्चित, बाबा भूरा देव मंदिर के समीप उचित स्थान पर बनाई जाए पार्किंग व्यवस्था: मुख्यमंत्री पुल के निर्माण होने तक खोल में आवागमन हेतु किए जाएं वैकल्पिक उपाय, आपदा की स्थिति में समय से हो अलर्ट: मुख्यमंत्री सहारनपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को जनपद सहारनपुर भ्रमण के दौरान बाबा भूरा देव मंदिर एवं मां शाकम्भरी देवी मंदिर में मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर स्थलीय निरीक्षण किया। इसके पश्चात उन्होंने मां शाकम्भरी देवी खोल में अचानक जलप्रवाह के कारण हुई दुर्घटना के संबंध में समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने अचानक बाढ़ आने से हुई जनहानि एवं धनहानि की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने दुकानदारों के आर्थिक नुकसान का आकलन कराकर उन्हें नियमानुसार मुआवजा देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु यथासंभव व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए, ताकि कोई भी श्रद्धालु दर्शन से वंचित न हो।  मण्डलायुक्त डॉ रूपेश कुमार एवं जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने मुख्यमंत्री को पीपीटी के माध्यम से घटना की विस्तृत जानकारी दी। मुआवजे के संबंध में जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री को बताया कि जनहानि होने पर संबंधित परिजनों को आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। पुलिस व्यवस्थाओं के दृष्टिगत पुलिस उप महानिरीक्षक अभिषेक सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनंदन द्वारा सीएम योगी को जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने एलिवेटेड रोड के निर्माण की प्रगति जानी। उन्होंने निर्देश दिए कि अतिरिक्त श्रमिक लगाकर शारदीय नवरात्रि तक इसे पूर्ण करने का प्रयास किया जाए, अन्यथा दिसंबर माह तक प्रत्येक दशा में इसे अवश्य पूरा कर लिया जाए। निर्माण में समयबद्धता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। पुल निर्माणाधीन रहने तक आमजन की सुविधा के दृष्टिगत खोल के अंदर से आवागमन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए तथा खोल का चैनलाइजेशन किया जाए। मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान निर्देश दिए कि भूरा देव मंदिर के समीप उचित स्थान पर पार्किंग व्यवस्था बनाई जाए। खोल में जलभराव की स्थिति में आमजन को सुरक्षित रखने के लिए खोल के दोनों तरफ बोल्डर का प्रयोग किया जाए। आपदा की स्थिति में समय से अलर्ट किया जाए तथा आपदा में हानि होने की स्थिति में इसकी सूचना शासन को यथाशीघ्र दी जाए, जिससे उच्च स्तर पर राहत कार्य समय रहते किए जा सकें। उन्होंने कहा कि आपदा मनुष्य के नियंत्रण में नहीं होती, लेकिन तकनीक का प्रयोग कर जनहानि तथा धनहानि को कम किया जा सकता है। बैठक में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग कपिल देव अग्रवाल, राज्यमंत्री संसदीय कार्य एंव औद्योगिक विकास जसवंत सैनी, जिला पंचायत अध्यक्ष मांगेराम चौधरी, महापौर डॉ. अजय सिंह, विधायक रामपुर मनिहारान देवेन्द्र निम, विधायक गंगोह किरत सिंह, विधायक नगर राजीव गुम्बर, एमएलसी श्रीचन्द शर्मा, जिलाध्यक्ष अजीत राणा, महानगर अध्यक्ष शीतल विश्नोई, पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा, पूर्व सांसद प्रदीप चौधरी, पूर्व विधायक नरेश सैनी, एडीजी भानू भास्कर, मण्डलायुक्त डॉ रूपेश कुमार, पुलिस उप महानिरीक्षक अभिषेक सिंह, जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनंदन, मुख्य विकास अधिकारी सुमित राजेश महाजन, एसपी देहात मयंक पाठक एवं संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर लर्निंग आउटकम के लिए राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण आज से शुरू

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं बेहतर अधिगम परिणामों के लिए राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण आज  से प्रदेश सरकार के राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (SIEMAT) तथा लोक  शिक्षण संचालनालय के असेसमेंट सेल के संयुक्त तत्वावधान में AICUF (ऑल इंडिया कैथोलिक यूनिवर्सिटी फेडरेशन) में होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदेश के सभी जिलों से चयनित शिक्षकों को राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर के रूप में दिया जाएगा प्रशिक्षण भोपाल प्रदेश के शासकीय स्‍कूलों में पढ़ाई कर रहे व‍िद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने एवं बेहतर अधिगम परिणामों के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण 2 जून से शुरू होगा। इसमें प्रदेश के सभी जिलों से चयनित शिक्षकों को राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार के राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (SIEMAT) तथा लोक शिक्षण संचालनालय के असेसमेंट सेल के संयुक्त तत्वावधान में राज्य के सभी जिलों से चयनित शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ 2 जून 2026 से AICUF (ऑल इंडिया कैथोलिक यूनिवर्सिटी फेडरेशन) में किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। प्रदेश के 1,872 शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम में होंगे शामिल प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के 1,872 शिक्षक शामिल होंगे। 12 विषयों में प्रत्येक जिले से चयनित 3-3 शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत ये शिक्षक अपने-अपने जिलों में अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करते हुए मूल्यांकन एवं अधिगम सुधार की गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा में मूल्यांकन प्रणाली को अधिक प्रभावी, वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है। प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को आधुनिक मूल्यांकन तकनीकों, उच्च गुणवत्ता वाले (Diagnostic Assessment), प्रश्नपत्र निर्माण, परीक्षा परिणामों के विश्लेषण तथा Values, Aptitude and Behaviour Test के निर्माण संबंधी व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। सटीक आकलन होगा संभव प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान एवं कॉमर्स सहित कुल 12 विषयों के लिए प्रत्येक जिले से चयनित शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। इस पहल से विद्यालयों में आयोजित मासिक, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक, प्री-बोर्ड एवं वार्षिक परीक्षाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। साथ ही विद्यार्थियों की सीखने की उपलब्धियों का अधिक सटीक आकलन संभव हो सकेगा, जिससे उनकी शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप सुधारात्मक योजनाएं तैयार की जा सकेंगी। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को परीक्षा परिणामों के विश्लेषण के आधार पर शैक्षणिक नियोजन एवं अधिगम सुधार रणनीतियों का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे विद्यार्थियों की विषयगत समझ, अधिगम स्तर और परीक्षा प्रदर्शन में सकारात्मक सुधार होने की संभवनाएं रहेंगी। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरुप विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर राज्य में मूल्यांकन सुधार की मजबूत शैक्षणिक टीम के रूप में कार्य करेंगे तथा विद्यार्थियों को बेहतर सीखने के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।  

राज्यपाल डेका पहुंचे बाल रोग शिविर, लोकभवन में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण का किया अवलोकन

लोकभवन में बाल रोग शिविर आयोजित  राज्यपाल डेका ने स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का किया अवलोकन  रायपुर  राज्यपाल रमेन डेका के निर्देशन में आज लोकभवन में 1 से 17 वर्ष आयु तक के बच्चों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण आयोजित किया गया। शिविर में सामान्य बीमारियों के साथ-साथ हृदय रोग, स्त्री रोग, दंत रोग, नेत्र रोग, नाक-कान-गला रोग, बी.पी. शुगर सहित बच्चों से संबंधित अन्य बीमारियों की निःशुल्क जांच एवं परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई गई। बच्चों में विशेष रूप से हृदय रोग से संबंधित जांच के लिए स्क्रीनिंग भी की गई।          लोकभवन स्थित छत्तीसगढ़ मंडपम में जिला प्रशासन रायपुर के ‘प्रोजेक्ट छांव’ के अंतर्गत आयोजित इस स्वास्थ्य शिविर में लगभग 250 बच्चों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। शिविर में खून जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई थी। शिविर में विभिन्न शासकीय एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं दीं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रायपुर की टीम द्वारा लैब जांच, बीपी और शुगर जांच की गई। वहीं सत्य साईं संजीवनी हॉस्पिटल द्वारा हदय रोग परामर्श, ईसीजी एवं ईको जांच की सुविधा दी गई। इसके अलावा बालाजी डेंटल कॉलेज, बर्नियों हॉस्पिटल, रूप जीवन हॉस्पिटल, गणेश विनायक नेत्रालय सहित विभिन्न संस्थानों द्वारा जांच और परामर्श प्रदान किया गया।         राज्यपाल डेका ने स्वास्थ्य शिविर का अवलोकन कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली और चिकित्सकों से चर्चा कर आवश्यक मार्गदर्शन दिया।

बस्तर संभाग का पहला प्रधानमंत्री आवास, जहां स्थापित हुआ प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का सोलर सिस्टम: मुख्यमंत्री साय

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना केवल बिजली बिल कम करने की योजना नहीं, बल्कि सामान्य परिवारों को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का एक व्यापक अभियान : मुख्यमंत्री साय बस्तर संभाग का पहला प्रधानमंत्री आवास, जहां स्थापित हुआ प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का सोलर सिस्टम रायपुर   सुशासन तिहार के अंतर्गत आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कोंडागांव जिले के ग्राम बड़ेकनेरा पहुंचे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के हितग्राही आनंद कुमार पवार से उनके निवास पर आत्मीय मुलाकात कर योजना से आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।  मुख्यमंत्री साय ने परिवार से संवाद कर जाना कि किस प्रकार एक जनकल्याणकारी योजना ने उनके जीवन में आर्थिक राहत, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद जगाई है।मुख्यमंत्री साय से चर्चा के दौरान आनंद कुमार पवार ने बताया कि पहले उनके घर का मासिक बिजली बिल लगभग 1200 से 1500 रुपये तक आता था, जो सीमित आय वाले परिवार के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ था। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत घर में सोलर सिस्टम स्थापित होने के बाद बिजली बिल पूरी तरह समाप्त हो गया और अब परिवार को बिजली खर्च की चिंता से पूरी तरह मुक्ति मिल गई है। पवार ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री को बताया कि पहले उनका परिवार केवल बिजली का उपभोक्ता था, लेकिन अब वे स्वयं बिजली उत्पादन भी कर रहे हैं। इससे न केवल आर्थिक बचत बढ़ी है, बल्कि परिवार में आत्मनिर्भरता का भाव भी मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि हर महीने होने वाली बचत अब परिवार की अन्य जरूरतों और बच्चों के  भविष्य पर खर्च की जा रही है। मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान पवार ने यह भी बताया कि योजना के लिए आवेदन करने के लगभग एक माह के भीतर उन्हें सब्सिडी प्राप्त हो गई। साथ ही बैंक से सरल प्रक्रिया के तहत ऋण भी उपलब्ध कराया गया, जिससे सोलर संयंत्र लगाने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं आई। शेष राशि का भुगतान आसान मासिक किश्तों में किया जा रहा है, जिससे परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव भी नहीं पड़ा। आनंद कुमार पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके परिवार को केवल बिजली बिल से राहत ही नहीं दी, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी दिया है। उन्होंने कहा कि अब उनका परिवार स्वच्छ ऊर्जा से जुड़कर भविष्य की ओर अधिक भरोसे के साथ देख रहा है। उल्लेखनीय है कि आनंद कुमार पवार, पिता चमन लाल पवार का घर बस्तर संभाग का पहला ऐसा प्रधानमंत्री आवास है, जहां प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर सिस्टम स्थापित किया गया है। यह आवास ग्रामीण विकास, स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और सरकारी योजनाओं के प्रभावी समन्वय का प्रेरक मॉडल बनकर सामने आया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना केवल बिजली बिल कम करने की योजना नहीं, बल्कि सामान्य परिवारों को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का एक व्यापक अभियान है। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से परिवारों को आर्थिक राहत मिलने के साथ-साथ स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी नई मजबूती मिल रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचे और आमजन के जीवन में वास्तविक परिवर्तन दिखाई दे। बड़ेकनेरा के आनंद कुमार पवार की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब योजनाएं संवेदनशीलता और प्रभावशीलता के साथ जमीनी स्तर तक पहुंचती हैं, तो वे केवल सुविधा नहीं देतीं, बल्कि जीवन की दिशा बदलने वाली नई संभावनाएं भी लेकर आती हैं।

EZI Hypevolt के साथ EV मार्केट में एंट्री करेगी Keeway, जून में होगा बड़ा लॉन्च

मुंबई   भारत का इलेक्ट्रिक स्कूटर मार्केट तेजी से बेहतर हो रहा है. बाजार में अगले माह एक नए इलेक्ट्रिक स्कूटर की एंट्री होने वाली है. स्कूटर निर्माता कंपनी Keeway जून में अपनी EZI Hypevolt ई-स्कूटर लॉन्च करने वाला है।  बता दें कि Keeway – Adishwar Auto Ride India (AARI) का हिस्सा, जो QJ Motor और Benelli को भी हैंडल करता है. Keeway भारतीय बाजार में एक छोटी इलेक्ट्रिक दोपहिया कंपनी है, और पहले ही Vieste 300 और Sixties 300i जैसे हाई-कैपेसिटी वाले पेट्रोल स्कूटर बेच रही है. हालांकि, Keeway अब भारतीय मार्केट में अपना पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर ला रहा है, जिसे चीन में उसके 'EZI' सब-ब्रांड से लिया गया है।  क्या है EZI इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की एक रेंज बाजार में उतारने के लिए, Keeway ने साल 2020 में EZI शुरू किया. EZI की चीन के ज़ियांग, सिचुआन में एक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी है, और यह कंपनी अभी कई तरह के स्कूटर और इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल बनाता है, जिसमें स्क्रैम्बलर, क्रूज़र और मैक्सी-स्कूटर वगैरह शामिल हैं।  Keeway EZI Hypevolt का डिजाइन डिज़ाइन की बात करें तो, Keeway EZI Hypevolt कुछ लोगों को BMW CE 04 की याद दिलाता है, क्योंकि इसका आकार लंबा और नया है. इसमें BMW CE 04 जैसी बेंच सीट भी दी गई है, जो राइडर और पीछे बैठने वाले के लिए अलग-अलग हिस्सों में बंटी हुई है।  Keeway EZI Hypevolt में स्प्लिट LED हेडलाइट्स हैं, जिनके दोनों तरफ वर्टिकल LED डेटाइम रनिंग लाइट्स लगाई गई हैं, और इसका स्टांस ऊंचा होगा, क्योंकि इसमें बड़े, 14-इंच के एलॉय व्हील्स लगे हैं. सीट की ऊंचाई 770 mm है, और स्कूटर का वज़न 145 kg है।  Keeway EZI Hypevolt का पावरट्रेन चीनी बाजार में, Keeway EZI Hypevolt दो 2.5 kWh बैटरी के साथ पेश किया जाएगा, जिनकी कुल क्षमता 5 kWh है. अपने घरेलू बाज़ार में, यह स्कूटर हब मोटर या मिड-ड्राइव मोटर के साथ मिल बेची जाती है. मिड-ड्राइव मोटर का कंटीन्यूअस आउटपुट 6 kW (8 bhp) है, जबकि पीक आउटपुट 12 kW (16 bhp) है. EZI के अनुसार, इसकी टॉप स्पीड 115 kmph है।  Keeway EZI Hypevolt सेफ्टी और फीचर्स नई EZI Hypevolt के सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो इसमें आगे और पीछे डिस्क ब्रेक दिए जाएंगे, और चीन में यह कॉम्बी-ब्रेकिंग सिस्टम (CBS) वाले एक वेरिएंट के साथ आता है, लेकिन भारत में संभावना है है कि इंडिया-स्पेक स्कूटर डुअल-चैनल एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) के साथ आएगा।  इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में दूसरे ज़रूरी सेफ्टी इक्विपमेंट के तौर पर ट्रैक्शन कंट्रोल, हिल डिसेंट कंट्रोल और हिल होल्ड कंट्रोल शामिल हैं. दिलचस्प बात यह है कि अपने होम मार्केट में, Hypevolt में रियर कैमरा और ब्लाइंड स्पॉट डिटेक्शन सिस्टम भी मिलता है, लेकिन यह देखना बाकी है कि इंडिया-स्पेक स्कूटर में ये फीचर्स शामिल किए जाते हैं या नहीं।  Keeway EZI Hypevolt की कीमत इस इलेक्ट्रिक स्कूटर को जून के बीच में लॉन्च किया जा सकता है, जिसके साथ, EZI Hypevolt एक नई जगह पर जाएगा, क्योंकि यह एक महंगा ई-स्कूटर होने की संभावना है. हालांकि यह BMW जितना महंगा नहीं होगा, जैसा कि यह दिखता है, लेकिन Hypevolt – अपनी ट्विन बैटरी और इक्विपमेंट लेवल के साथ – की कीमत 3 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से ज़्यादा होने की उम्मीद है। 

छोटे कारोबारियों के लिए वरदान साबित हो रही पीएम स्वनिधि योजना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

पीएम स्वनिधि योजना से देश के लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के सपनों को मिली नई उड़ान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने पीएम स्वनिधि योजना के सफलतम 6 वर्ष पूर्ण होने पर प्रधानमंत्री मोदी का माना आभार प्रदेश के 9 लाख से अधिक पथ-विक्रेता हो चुके हैं लाभांवित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के सम्मान का आधार बनी 'पीएम स्वनिधि' योजना के सफलतम 6 वर्ष पूर्ण होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 'पीएम स्वनिधि' ने देशभर के लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के सपनों को नई उड़ान और सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार दिलवाया है। उन्होंने कहा कि इस जनकल्याणकारी योजना से जुड़कर अब तक प्रदेश के 9 लाख से अधिक पथ-विक्रेता लाभान्वित हो चुके हैं।