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बिहार में विकास योजनाओं के साथ वैचारिक एजेंडे के समन्वय की नई रणनीति

पटना  बिहार में सत्ता की बागडोर संभालने के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भाजपा के आस्था और अध्यात्म के कोर एजेंडा को सर्वोपरि मान योजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने गंगा पर जेपी सेतु के समानांतर निर्माणाधीन पुल का नामकरण गंगा-अंबिका पथ करने की घोषणा की है। भाजपा के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की राह पर अग्रसर हाेते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरस्वती शिशु मंदिर की तर्ज पर सरस्वती विद्या निकेतन स्कूल खोलने मन बनाए हैं सरस्‍वती विद्या निकेतन बनेगा मॉडल स्‍कूल इन विद्यालयाें में आधुनिक दौर के निजी स्कूलों से बेहतर व्यवस्था होगी। एक तरह से ये माॅडल स्कूल होंगे। दरअसल, भाजपा एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लंबे समय से भारतीय सांस्कृतिक विरासत, आस्था और शिक्षा के क्षेत्र में वैचारिक हस्तक्षेप को अपने प्रमुख एजेंडे के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं। ऐसे में सम्राट चौधरी की हालिया पहलें इसी व्यापक राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोण का हिस्सा मानी जा रही हैं। मुख्यमंत्री द्वारा गंगा पर जेपी सेतु के समानांतर निर्माणाधीन नए पुल का नाम गंगा-अंबिका पथ रखने की घोषणा को केवल नामकरण भर नहीं माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बिहार के सार्वजनिक स्थलों और अधोसंरचना परियोजनाओं को सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान से जोड़ने की कोशिश का हिस्सा है। भाजपा लंबे समय से विकास एवं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के समन्वय की राजनीति करती रही है और सम्राट चौधरी उसी सूत्र को बिहार में आगे बढ़ाते दिखाई दे रहे हैं। इसी क्रम में सरकार की ओर से सरस्वती विद्या निकेतन नाम से नए विद्यालयों की स्थापना की तैयारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि इन विद्यालयों की अवधारणा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से संचालित सरस्वती शिशु मंदिरों के माॅडल से प्रभावित होगी। आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे मॉडल स्‍कूल हालांकि इन्हें आधुनिक शिक्षा, अत्याधुनिक संसाधनों और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं से लैस करने की योजना है, ताकि ये निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठित विद्यालयों को भी चुनौती दे सकें। स्वयं मुख्यमंत्री यह घोषणा कर चुके हैं कि स्कूल ऐसे होंगे कि अधिकारी एवं प्रतिष्ठित लोग अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए सिफारिश करेंगे। सरकार की सोच है कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्ति का माध्यम न होकर भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक दायित्वों से भी जुड़ी हो। इसी कारण इन प्रस्तावित विद्यालयों में आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कार आधारित शिक्षा तथा स्थानीय सांस्कृतिक विरासत पर विशेष बल दिए जाने की संभावना है। राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो सम्राट चौधरी का यह कदम भाजपा के परंपरागत समर्थक वर्ग को मजबूत संदेश देने वाला माना जा रहा है। बिहार में भाजपा लंबे समय से सांस्कृतिक और वैचारिक मुद्दों को विकास के एजेंडे के साथ जोड़ने की कोशिश करती रही है। सावरकर पर पाठ्यक्रम लागू करने की घोषणा मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी इन प्रयासों को सरकारी योजनाओं और संस्थागत ढांचे के माध्यम से नई गति देना चाहते हैं। वीर विनायक दामोदर सावरकर पर शोध उपरांत पाठ्यक्रम में लागू करने, आदिवासी क्षेत्र में मैराथन कराने के साथ विजेताओं को एक लाख रुपये, 75 हजार रुपये एवं 50 हजार रुपये देने की घोषणा दूरगामी रणनीति है। विपक्ष इस तरह की घोषणाओं को वैचारिक एजेंडे के विस्तार के रूप में देख सकता है, लेकिन भाजपा इसे भारतीय परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में आवश्यक कदम बता रही है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि देश के विभिन्न राज्यों में स्थानीय संस्कृति एवं परंपराओं के अनुरूप संस्थानों और परियोजनाओं का नामकरण होते रहे हैं, इसलिए बिहार में भी ऐसी पहल स्वाभाविक है। मुख्यमंत्री के कदम इस बात का संकेत दे रहे हैं कि वे बिहार में केवल प्रशासनिक उपलब्धियों के आधार पर ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक पहचान के माध्यम से भी अपनी अलग राजनीतिक छाप छोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।  

कानून-व्यवस्था पर योगी का अल्टीमेटम, नोएडा-लखनऊ समेत 8 जिलों के अधिकारियों को चेतावनी

 लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के कुछ जिलों में पिछले दिनों हुईं बड़ी आपराधिक घटनाओं पर शनिवार को कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने आठ जिलों की समीक्षा की और पुलिस प्रमुख व जिलाधिकारियों को अपनी सरकार की प्राथमिकता से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने वाराणसी, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, लखनऊ के डीएम व पुलिस कमिश्नरों के साथ ही जौनपुर, पीलीभीत, बागपत व गाजीपुर के डीएम व एसपी को जमकर फटकार लगाई। मुख्यमंत्री ने डीजीपी राजीव कृष्ण की मौजूदगी में सभी को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर जिला नहीं संभाल पा रहे हैं तो बता दें। लापरवाही पर सीधी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्य में पिछले कुछ दिनों में कई जिलों में लगातार बड़ी आपराधिक घटनाएं हुई हैं। विपक्ष लगातार इन घटनाओं को लेकर कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। इसे लेकर मुख्यमंत्री ने बीते कुछ दिनों में सर्वाधिक बड़ी आपराधिक घटनाओं वाले जिलों की रिपोर्ट तलब की थी। नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह को फटकार मुख्यमंत्री ने शनिवार की देर रात तक संबंधित जिलों के पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की और एक-एक घटना को लेकर अधिकारियों की प्रतिक्रिया जानी। गौतमबुद्धनगर पिछले कई दिनों से आपराधिक घटनाओं को लेकर चर्चा में है। हाल ही में किन्नर की हत्या सहित जिले में हुए अन्य अपराधों को लेकर मुख्यमंत्री ने कमिश्नर लक्ष्मी सिंह को कानून-व्यवस्था कायम करने को लेकर चेतावनी दी है। लखनऊ के पुलिस कमिश्नर को भी वार्निंग वहीं लखनऊ में पिछले दिनों हुई भाजपा नेता शिवम सिंह की हत्या को लेकर भी मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने पुलिस कमिश्नर अमरेन्द्र सिंह सेंगर को यहां तक कह दिया कि लखनऊ के नवविकसित क्षेत्रों में अपराधिक घटनाएं क्यों नहीं रुक रही हैं। चेतावनी भरे लहजे में जमकर फटकारा पिछले दिनों वाराणसी के सारनाथ में एक युवक की पिटाई से हुई मृत्यु व मनीष सिंह हत्याकांड, गाजियाबाद में बकरीद वाले दिन 17 वर्षीय सूर्या चौहान की चाकुओं से गोदकर हत्या करने के मामले को लेकर मुख्यमंत्री ने वहां के पुलिस कमिश्नरों को भी चेतावनी भरे लहजे में जमकर फटकारा। पीलीभीत में पिछले दिनों कपड़ा व्यापारी पंकज गुप्ता की हत्या, जौनपुर में दूल्हे आजाद की हत्या, बागपत में कूलर मैकेनिक चंद्रपाल व एक अन्य व्यक्ति की हत्या के मामले में मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलों के पुलिस कप्तानों को चेतावनी दी है। गाजीपुर में होटल व्यवसायी आलोक राय उर्फ डब्बू के बेटे विनित राय की गोली मारकर हत्या किए जाने के मामले को लेकर मुख्यमंत्री ने गाजीपुर के कप्तान को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। बैठक में संबंधित क्षेत्रों के मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, एडीजी जोन, आइजी व डीआइजी रेंज भी मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने संबंधित पुलिस अधिकारियों से कहा है कि अगर कानून व्यवस्था नहीं सुधार सकते हैं तो अंजाम भुगतने के लिए भी तैयार रहें। बैठक में मुख्यमंत्री के बेहद कड़े रुख के बाद हरकत में आए पुलिस अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में कानून-व्यवस्था को और पुख्ता करने के लिए कार्रवाई भी शुरू कर दी।  

दिल्ली: मेजरमेंट बुक संकट से ठप पड़ी कामों की एंट्री, गुणवत्ता पर खतरा

नई दिल्ली  एमसीडी में पिछले 4-6 महीने से मेजरमेंट बुक का भारी अकाल पड़ा हुआ है। मेजरमेंट बुक न होने की वजह से संबंधित डिविजनों (मेंटिनेंस) के तहत चल रहे हजारों कामों की मेजरमेंट बुक में एंट्री नहीं हो पा रही है। जब मेजरमेंट बुक में एंट्री ही नहीं हो पा रही है तो संबंधित डिविजनों में कॉन्ट्रैक्टर जितने भी काम कर रहे हैं उनकी कोई निगरानी नहीं हो रही है। इसका सीधा असर काम की क्वॉलिटी पर पड़ेगा। एमसीडी के पास खुद की प्रिटिंग प्रेस सूत्रों का कहना है कि यह स्थिति तो तब है जबकि एमसीडी को मेजरमेंट बुक किसी बाहरी प्रिंटर से नहीं छपवानी, बल्कि सिविल लाइन स्थित अपनी ही प्रिंटिंग प्रेस पर छापनी है। बावजूद इसके पिछले कई महीनों से डिविजनों में मेजरमेंट बुक उपलब्ध नहीं हो पा रही। दिल्ली सरकार की ओर से सड़कें, गलियां और कॉलोनियों की टूटी पुलिया आदि बनाने के लिए भरपूर फंड उपलब्ध कराया हुआ है। MCD के 12 जोनों में चल रहे विकास कार्य वॉर्ड वाइज काम कराने के लिए संबंधित जोन की डिविजनों द्वारा टेंडर मांगे जाते हैं। टेंडर अलॉट होने के बाद जब कॉन्ट्रैक्टर काम शुरू करता है उसी दिन से मेजरमेंट बुक में एंट्री करने का काम शुरू हो जाता है। एमसीडी के 12 जोनों के तहत आने वाली मेंटिनेंस डिविजनों में हजारों काम चल रहे हैं। किसी वॉर्ड में कॉलोनी के अंदर ही सड़कें बनाने का काम चल रहा है तो कहीं पर गलियों के साथ-साथ नालियों को बनाया जा रहा है। कॉन्ट्रैक्टर को काम शुरू करने से पहले करनी होती है एंट्री इसके अलावा जिन कॉलोनियों में पुलिया टूटी हुई थी उन्हें भी दोबारा बनाया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि कॉन्ट्रैक्टर जब काम शुरू करता है तो उसके हर दिन वह जो भी काम करता है उसकी एंट्री मेजरमेंट बुक में की जाती है। उदाहरण के रूप में अगर कोई कॉन्ट्रैक्टर कहीं पर सड़क बनाने का काम कर रहा है तो सड़क बनाने से पहले वह पुरानी सड़क को तोड़ेगा। कॉन्ट्रैक्टर ने किस दिन कितनी सड़क तोड़ी यह सब मेजरमेंट बुक में दर्ज किया जाता है। प्रिंटिंग प्रेस अपनी, फिर मेजरमेंट बुक क्यों नहीं ? प्रिंटिंग प्रेस अपनी, प्रिंटिंग प्रेस पर काम करने वाला स्टॉफ भी अपना, पेपर की भी कोई कमी नहीं, बावजूद इसके मेजरमेंट बुक का अकाल पड़ना एमसीडी के प्रिंटिंग प्रेस विभाग पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। डिविजन के लिए मेजरमेंट बुक का बड़ा महत्व है। कॉन्ट्रैक्टर को जो वर्कआर्डर मिलता है शुरुआत से लेकर आखिर तक छोटे से छोटे काम की एंट्री इसमें दर्ज होती है। मेजरमेंट बुक कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस वजह से कई डिविजनों में काम शुरू नहीं हो पाए।

कचहरी रोड पर फिल्मी नजारा: बंदर ने 500-500 के नोट हवा में उड़ाए, भीड़ जुटी

बुलंदशहर  कहावत है कि ऊपर वाला जब भी किसी पर मेहरबान होता है तो उसे छप्पर फाड़ के धन दौलत देता है। बुलंदशहर में शनिवार को कचहरी रोड पर एक बंदर ने पेड़ पर चढ़ कर दो लाख रुपये के नोटों की जमकर बरसात की। वकीलों के साथ अन्य लोग भी 500-500 रुपये के नोट बटोरने में जुट गए। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। यह मामला शहर से लेकर गांव तक चर्चा का विषय बना है। इसी बीच लोगों ने वीडियो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर दिया। प्रसारित वीडियो को बड़ी संख्या में लोग लाइक कर रहे हैं। रजिस्ट्री करने स्टांप पेपर खरीदने को नोटों से भरे बैग को लेकर कचहरी जा रहे अधिवक्ता से बैग को लेकर बंदर नीम के पेड़ पर चढ़ गया। उसके बाद बंदर ने नोटों की जमकर बरसात की। नोट उठाने के लिए अधिवक्ताओं के अलावा आम लोग भी टूट पड़े। इस घटना का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर बड़ी तेजी से प्रसारित हो रहा है। आदतन बंदर ने नीम की डाली पर बैठकर बैग को फाड़ दिया और खाने के सामान की तलाश में नोटों को बाहर फेंकने लगा। पेड़ के नीचे कुछ लोग जमा थे, लोगों ने 500-500 के नोटों को पेड़ से गिरते देखा तो सब चौंक गए। लोग पेड़ के नीचे नोटों को बटोरने लगे। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने जमीन पर बिखरे पड़े एक लाख 98 हजार रुपये बरामद कर रविन्द्र लोधी को सौंप दिए। दो लाख रुपये के नोटों से भरा बैग छीना कोतवाली नगर पुलिस के अनुसार अधिवक्ता रविंद्र उर्फ राजा अपने साथी आमिर खान और सोहन पाल के साथ प्लाट की रजिस्ट्री करने को शनिवार को स्टांप खरीदने के लिए बैग में दो लाख रुपए की नगदी लेकर कचहरी जा रहे थे। इसी बीच बंदर ने दो लाख रुपये के नोटों से भरा बैग छीन लिया और उसके बाद कचहरी रोड पर लोहा कारोबारी गौरी शंकर के मकान में स्थित नीम के पेड़ की सबसे ऊंची टहनी पर बैठ गया। बैग चोरी होने की आशंका के बीच जब लोगों की नजर ऊपर गई तो नजारा किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था। एक बंदर वकील का बैग लेकर पेड़ पर चढ़ गया और वहां से 500-500 रुपये के नोट हवा में उछाल रहा था। सड़क पर नोटों की बारिश होने लगी और लोग उन्हें बटोरने के लिए दौड़ पड़े। नोट उठाने को उमड़ पड़ी भीड़ बंदर ने उसके बाद बैग खोलकर नोटों की बरसात करनी शुरू कर दी। नोट को उठाने के लिए पेड़ के नीचे अधिवक्ताओं के साथ आम लोगों की भीड़ भी उमड़ पड़ी। अधिवक्ताओं ने नोटों की बरसात के दौरान एक लाख 91 हजार 500 रुपए एकत्र किए। बंदर उड़ाने लगा 500-500 के नोट पेड़ पर बंदर ने बैग खोल लिया। बैग के अंदर रखे 500-500 रुपये के नोट एक-एक करके नीचे फेंकनी शुरू कर दिया। कुछ ही देर में हवा में जमीन पर गिरने लगे। पेड़ के नीचे और आसपाल मौजूद लोगों ने जब नोट गिरते देखा तो वहां भीड़ जमा हो गई। कई लोग नोट उठाने लगे तो कुछ मोबाइल फोन पर पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाने लगे। पेड़ पर चढ़ा व्यक्ति वकील साहब के लिए सबसे बड़ी चिंता अपने रुपये और जरूरी दस्तावेजों से भरा बैग वापस पाना था। ऐसे में एक व्यक्ति साहस दि खाते हुए पेड़ पर चढ़ गया और बंदर से बैग छीनने की कोशिश की। इसके कुछ देर बाद बंदर बैग छोड़कर भाग गया। इसके बाद बैग को सुरक्षित नीचे उतार कर वकील को सौंप दिया गया।  

राजस्थान के श्री सांवलिया सेठ मंदिर में 16 करोड़ की अलौकिक कलाकृति बनी आकर्षण का केंद्र

चित्तौड़गढ़  राजस्थान के विख्यात कृष्ण धाम श्री सांवलिया सेठ मंदिर में श्रद्धालुओं की अगाध आस्था अब सोने और चांदी की दिव्य भव्यता के रूप में साकार हो उठी है। मंदिर मंडल द्वारा भक्तों से चढ़ावे के रूप में मिले 20 किलोग्राम सोने और 120 किलोग्राम चांदी का उपयोग करके ठाकुर जी के गर्भगृह के लिए एक अत्यंत मनमोहक और अलौकिक पिछवाई तैयार करवाई गई है। भगवान श्रीकृष्ण की मूल प्रतिमा के ठीक पीछे स्थापित की गई यह नई पिछवाई अपनी बेजोड़ कलात्मकता और वैभव के कारण इन दिनों मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है। सागवान की लकड़ी पर नक्काशी इस भव्य कलाकृति को तैयार करने में उस समय लगभग 16 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत आई थी। इसकी मजबूती को बनाए रखने के लिए इसे सागवान की उच्च गुणवत्ता वाली लकड़ी के विशेष पैनल पर मढ़ा गया है। सोने और चांदी की अत्यंत महीन व बारीक नक्काशी से सुसज्जित यह कलाकृति मंदिर के गर्भगृह के सौंदर्य को एक अद्वितीय और दिव्य स्वरूप प्रदान करती है। आपको बता दें कि इस प्रसिद्ध मंदिर को राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी धार्मिक सर्किट योजना में भी शामिल किया गया है। राजकोट के कारीगरों की मेहनत इस दिव्य पिछवाई के निर्माण के विषय में जानकारी देते हुए ट्रस्ट के अध्यक्ष हजारीलाल वैष्णव ने बताया कि इस अलौकिक कृति को आकार देने के लिए विशेष रूप से गुजरात के राजकोट से कुशल शिल्पकारों को आमंत्रित किया गया था। इस पूरी कलाकृति को धरातल पर उतारने में कारीगरों को पूरे 90 दिनों का समय लगा। इस ऐतिहासिक काम की कुल निर्माण लागत 16 करोड़ रुपये रही है। सीसीटीवी की निगरानी में पिघलाया गया सोना-चांदी सबसे पहले चढ़ावे में आए सोने और चांदी को उच्च तापमान पर गलाकर उनकी सिल्लियां तैयार की गईं, जिन्हें बाद में आधुनिक मशीनों की मदद से महीन और पतली शीट्स में परिवर्तित किया गया। इन तैयार स्वर्ण और रजत शीट्स पर अनुभवी कारीगरों द्वारा बेहद बारीक नक्काशी की गई और फिर इन्हें सागवान की लकड़ी से बने सुदृढ़ पैनलों पर मजबूती से फिट कर दिया गया। मूल्यवान धातुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्माण के दौरान पूरे मंदिर परिसर में 24 घंटे सशस्त्र सुरक्षाकर्मी तैनात रहे। धातु को गलाने से लेकर नक्काशी करने तक की संपूर्ण निर्माण प्रक्रिया को चौबीसों घंटे सीसीटीवी कैमरों की सख्त निगरानी में अंजाम दिया गया। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए किसी भी बाहरी कोष या फंड से कोई मदद नहीं ली गई, बल्कि यह पूर्ण रूप से भक्तों द्वारा ठाकुर जी के चरणों में समर्पित किए गए सोने और चांदी से ही संपन्न हुआ।

पाकुड़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 13 मामलों में वांछित अमन अंसारी दबोचा गया

 पाकुड़  कहते हैं कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन नगर थाना क्षेत्र में सक्रिय शातिर दिमाग अपराधी अमन अंसारी ने इन हाथों को बार-बार बौना साबित करने की कोशिश की है। अमन आज पाकुड़ शहर और आसपास के इलाकों में खौफ, चोरी और नशे के काले कारोबार का दूसरा नाम बन चुका है। हैरान करने वाली बात यह है कि अमन किसी अंतर-प्रांतीय गैंग का हिस्सा नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही इतना सक्रिय है कि सिर्फ नगर थाना क्षेत्र में उसके खिलाफ 13 संगीन मामले दर्ज हैं। एक ही थाने की डायरी में किसी एक अपराधी का नाम बार-बार आना यह साफ बयां करता है कि वह पुलिस के लिए एक बड़ा सिरदर्द और आम अवाम के सुकून के लिए नासूर बन चुका है। अपराधी अमन अंसारी का अपराध की दुनिया का इतिहास आज का नहीं, बल्कि पूरे 11 साल पुराना है। पुलिस रिकार्ड के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि उसने साल 2015 में अपराध की दुनिया में कदम रखा था। शुरुआती दौर वर्ष 2015 में अमन के विरुद्ध पाकुड़ नगर थाना क्षेत्र में चोरी और सेंधमारी करने का पहला मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद अमन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अमन के अपराध के रिकार्ड ने यह साबित कर दिया है कि वह मामूली चोर नहीं, बल्कि एक आदतन अपराधी बन चुका है। अमन अंसारी का यह पूरा क्रिमिनल ग्राफ दिखाता है कि वह हर बार जेल जाता है, जमानत पर बाहर आता है और फिर से उसी दुस्साहस के साथ पाकुड़ नगर थाना क्षेत्र को अपनी आपराधिक गतिविधियों का केंद्र बना लेता है। सेंधमारी से लेकर नशा तस्करी का फैलाया जाल समय के अनुसार अमन अंसारी का हौंसला बुलंद होता चला गया। उसने सिर्फ घरों में ताले चटकाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि शहर के युवाओं को खोखला करने वाले नशीले पदार्थों के धंधे में भी पैर पसार लिया। वर्ष 2019 में पाकुड़ नगर थाना में उसके खिलाफ एनडीपीएस के तहत मामला दर्ज है। यह इस बात का सबूत है कि अमन अब न सिर्फ संपत्ति संबंधी अपराध कर रहा था, बल्कि नशीली दवाओं की तस्करी के सिंडिकेट से भी जुड़ चुका था। रोनी शेख भी हैं चर्चित पुलिस के हत्थे चढ़ा मौलाना चौक निवासी रोनी शेख का भी अपराधिक रिकार्ड रहा है। यह भी शातिर अपराधी है। रोनी के विरुद्ध पाकुड़ नगर थाना में दो मामले दर्ज हैं, जबकि एक मामला पाकुड़ आरपीएफ में है। नलपोखर निवासी बजीर भी इसके पूर्व जेल की हवा खा चुका है। इन अपराधियों को गिरफ्तार कर पुलिस ने राहत की सांस ली है। पुलिस ने राहत की सांस लॉकडाउन के समय यानी वर्ष 2020 में भी वह काफी सक्रिय रहा। उस समय भी अमन ने सूनी सड़कों और बंद दुकानों को अपना निशाना बना रहा था। वर्ष 2021, वर्ष 2022 में अमन सक्रिय रहा। पुलिस के लिए वह सिरदर्द बन गया था। हाल ही में शहर में हुई कई चोरी की घटनाओं में शामिल है। अमन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली है।  

पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में सत्तू और जर्दालु आम का किया जिक्र, बिहार में खुशी

पटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम के 134वें एपिसोड में वैसे तो कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस दौरान पीएम मोदी ने बिहार के मशहूर पेय पदार्थ सत्तू का भी जिक्र किया। ‘मन की बात’ में पीएम ने बिहार के जर्दुालु आम के बारे में भी चर्चा की है। पीएम मोदी द्वारा सत्तू और जर्दालु आम का उल्लेख किए जाने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी काफी गदगद नजर आए। सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि इससे बिहार की इन चीजों को देश-विदेश में पहचान मिलेगी। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में बिहार का विशेष उल्लेख किए जाने पर उनके प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। पीएम के 'मन की बात' को सुनने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की भिन्न-भिन्न खासियतों एवं पहलुओं पर देशवासियों से सीधे संवाद कर उन्हें प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'मन की बात' कार्यक्रम में बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय उत्पादों और जनजीवन से जुड़े विषयों का उल्लेख किया जाना राज्यवासियों के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। सम्राट चौधरी ने कहा कि विशेष रूप से भीषण गर्मी से बचाव के लिए बिहार के पारंपरिक और पौष्टिक पेय सत्तू का उल्लेख तथा राज्य के प्रसिद्ध जर्दालु आम की चर्चा बिहार की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का यह उल्लेख बिहार के किसानों, उद्यमियों और आम नागरिकों के परिश्रम तथा राज्य की समृद्ध कृषि एवं खाद्य परंपरा का सम्मान है। उन्होंने कहा कि इससे बिहार के स्थानीय उत्पादों को देश-विदेश में नई पहचान मिलेगी तथा किसान भी प्रोत्साहित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार अपनी सांस्कृतिक धरोहर, कृषि उत्पादों और लोक परंपराओं के माध्यम से देश की समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा इन विशेषताओं को राष्ट्रीय मंच पर स्थान दिए जाने से राज्य के लोगों का उत्साह और बढ़ा है। बता दें कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी ने प्रचंड गर्मी का जिक्र करते हुए देशवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी। इस दौरान पीएम मोदी ने सत्तू का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी तो बात ही क्या है। पेट भी भरे और ताकत भी देता है। प्रधानमंत्री ने फलों के राजा आम का भी उल्लेख करते हुए कहा कि गर्मी के मौसम में शायद ही कोई घर हो, जहां आम की चर्चा न होती हो। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र का अपना आम और उसकी अपनी सुगंध होती है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र का हापुस या अल्फांसो, गुजरात का केसर- ये तो आमरस की जान हैं। उत्तर प्रदेश का दशहरी और मेरी काशी का लंगड़ा। पीएम नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि बिहार का जर्दालू जिसकी खुशबू दूर से पहचान में आ जाए। चौसा, मालदा…हर नाम के साथ लोगों की यादें जुड़ी हुई हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कोई दक्षिण भारत जाए तो उसे बंगनपल्ली, तोतापुरी, नीलम, मलगोवा, पश्चिम बंगाल के हिमसागर, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के सुवर्णरखा जैसी अन्य किस्में मिलेंगी। उन्होंने कहा कि जगह बदलती है और साथ ही आम का रूप-रंग एवं उसका स्वाद भी बदल जाता है। आम की यह यात्रा अब गांवों से वैश्विक बाजार तक भी पहुंच रही है।

चैंपियंस लीग जश्न बना बवाल: पेरिस की सड़कों पर हिंसा, थाने पर धावा और दुकानों में तोड़फोड़

पेरिस पेरिस सेंट-जर्मेन (पीएसजी) के शनिवार को दूसरी बार चैंपियंस लीग खिताब जीतने के बाद देर रात जश्न के दौरान हिंसा भड़क गई। लोगों के एक समूह ने फ्रांस की राजधानी में एक थाने पर धावा बोलने की कोशिश की। पेरिस पुलिस ने हिंसा के इस मामले में कई लोगों को हिरासत में लिया है। पेरिस सेंट-जर्मेन (पीएसजी) ने शनिवार को पुस्कास एरिना में खेले गए चैंपियंस लीग के रोमांचक फाइनल मुकाबले में आर्सेनल को पेनाल्टी शूटआउट में मात देकर लगातार दूसरी बार इस स्पर्धा का खिताब अपने नाम कर लिया। इस मामले में रविवार तड़के 416 लोगों को गिरफ्तार किया गया प्रशंसक मना रहे थे जश्न हंगरी के बुडापेस्ट में पीएसजी की जीत के बाद पेरिस में प्रशंसकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। प्रशंसक आर्क डी ट्रायम्फ के पास की सड़कों पर मार्च करते हुए निकले, कुछ लोगों ने पटाखे जलाए और गाड़ियों के हॉर्न बजाए। चैंप्स-एलिसी पर लगभग 20,000 लोग जमा हो गए और पुलिस भीड़ को नियंत्रित करने में जुटी रही। पेरिस पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि छोटे-छोटे समूहों ने विभिन्न स्थानों पर अशांति फैलाई। कुछ समूहों ने दुकानों में तोड़फोड़ और आगजनी की। कारों में भी आग लगा दी गई। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस घटना में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया। लगातार दूसरे साल फुटबॉल के चलते हिंसा पुलिस ने बताया कि पॉश 8वें अरॉन्डिसमेंट इलाके में एक थाने पर धावा बोलने की कोशिश करने वालों को तितर-बितर कर दिया गया। पुलिस के अनुसार रात 10 बजे तक 45 लोगों को हिरासत में लिया गया। पेरिस के मुख्य रिंग रोड को कुछ देर के लिए भीड़ ने अवरुद्ध कर दिया जिसे बाद में पुलिस ने हटा दिया। पुलिस ने बताया कि एक बेकरी और एक रेस्तरां को नुकसान पहुंचा है। पुलिस ने 16वें अरॉन्डिसमेंट में पीएसजी स्टेडियम के पास जमा हुए लगभग 1,000 लोगों को भी काबू में किया और साइकिलों से बने अवरोधों को हटाया। गौरतलब है कि यह लगातार दूसरा साल है जब फुटबॉल की वजह से हिंसा भड़की। इससे पहले 2025 में फ़्रांसीसी टीम की जीत के बाद हुए जश्न ने हिंसक रूप ले लिया था। सोशल मीडिया पर वायरल फोटो सोशल मीडिया में वायरल तस्वीरों में पेरिस में सड़कों पर इलेक्ट्रिक बाइक जलती हुई और जश्न मनाने वालों को दुकानों के शीशे तोड़ते हुए देखा जा सकता है। पुलिस ने बताया कि इस अशांति के दौरान छह वाहन, दो दुकानें और एक बस स्टॉप क्षतिग्रस्त हो गए। फ़्रांस के गृह मंत्रालय ने बताया कि रविवार तड़के 416 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें पेरिस के 280 लोग शामिल हैं। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने कहाकि सात अधिकारी घायल हुए हैं और उन्होंने इस अशांति को बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं बताया। दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने सोशल मीडिया एक पर लिखा कि सिर्फ़ फ़्रांस में ही किसी फ़ुटबॉल क्लब की जीत दंगे भड़का देती है। उन्होंने कहाकि सिर्फ फ़्रांस में ही जीत की शाम को हर किसी को हिंसा का शिकार होने से बचने के लिए अपने घरों में बंद रहने पर मजबूर होना पड़ता है।

अभिषेक बनर्जी पर हमले की जांच तेज, वीडियो के आधार पर 5 लोग गिरफ्तार

  पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी के ऊपर हुए हमले के मामले में नया मोड़ आ गया है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद के ऊपर हमले के आरोप में गिरफ्तार किए गए पांच लोग टीएमसी की पूर्व विधायक और इस बार प्रत्याशी रहीं लवली मैत्रा के करीबी हैं। लवली मैत्रा 2021 विधानसभा चुनाव में सोनारपुर दक्षिण से सीट से जीतकर आई थीं। इस बार भी तृणमूल कांग्रेस ने उन पर भरोसा जताया था, लेकिन वह भाजपा की रूपा गांगुली के सामने हार गईं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल पुलिस ने बनर्जी के ऊपर हुए हमले के वीडियो के आधार पर पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान तपन मैती, निर्मल्य सेनगुप्ता उर्फ जॉय, काजल दास, देबासिस दत्ता और आकाश गायन के गयान के रूप में हुई है। सूत्रों के मुताबिक निर्मल्य और तपन को टीएमसी की पूर्व विधायक और अंतिम विधानसभा चुनाव में रूपा गांगुली से चुनाव हारने वाली लवली मैत्रा के करीबी हैं। इसके अलावा पुलिस ने काजल दास और देबासिस दत्ता के तार भी टीएमसी की पूर्व विधायक के जुड़े बताए जा रहे हैं। अभिषेक बनर्जी पर हमला करने का कोई कारण नहीं: हमलावर की मां इन सब में सबसे बड़ा नाम आकाश गयान का है। उसके परिवार के मुताबिक उनका बेटा टीएमसी का नियमित कार्यकर्ता था और वह इस चुनाव में लगातार टीएमसी की बूथ लेवल मीटिंग्स में जाता रहता था। आकाश की मां के मुताबिक, शनिवार दोपहर की घटना के बाद वह हमेशा की तरह ही घर आया और खाना खाकर मैदान में फुटबॉल खेलने के लिए चला गया। इसके बाद रात में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, पुलिस ने अभी तक परिवार को आकाश की गिरफ्तारी का कोई कारण नहीं बताया। बता दें, शनिवार को टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी चुनावी हिंसा में मारे गए कार्यकर्ता के घर जा रहे थे। इसी दौरान उन पर हमला हो गया था। उनके ऊपर अंडे और पत्थर फेंके गए। साथ में मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने हेलमेट पहना कर उन्हें बचाने की कोशिश की लेकिन इसके बाद भी कुछ लोगों ने उन्हें खींच लिया और उनके साथ मारपीट की। इस झूमा झटकी में बनर्जी की शर्ट भी फट गई। इसके बाद भी वह कार्यकर्ता के घर पहुंचे और उसके परिवार के साथ वक्त निकाला। अभिषेक बनर्जी समेत टीएमसी के तमाम नेताओं ने इस घटना का आरोप भाजपा के ऊपर लगाया। दूसरी तरफ भाजपा ने पलटवार करते हुए इसे लोगों के 15 साल गुस्से का नतीजा बताया। हालांकि, अब शुरुआती जांच में अलग ही कहानी निकलकर सामने आ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी जैसे दिग्गज नेता के ऊपर हमले के आरोप टीएमसी के पूर्व कार्यकर्ताओं के ऊपर ही लग रहे हैं ऐसे में तृणमूल कांग्रेस के अंदर ही असंतोष की बात एक बार फिर से सामने आ रही है। हालांकि, अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि अभिषेक पर हमला करने के पीछे की क्या वजह थी।

11 फर्जी एंट्री का दावा, विभागीय दस्तावेजों में गड़बड़ी से बढ़ा होमगार्ड घोटाले का मामला

चंडीगढ़ होमगार्ड वेलफेयर एवं भर्ती घोटाले की जांच में गृह रक्षी विभाग (होमगार्ड) से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि विभागीय रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर कुछ स्वयंसेवकों (होमगार्ड) का दोबारा नामांकन कराया गया। जांच रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितता की ओर संकेत किया गया है। हालांकि, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के अधिकारी जांच प्रभावित होने का हवाला देते हुए आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, राज्य मुख्यालय ने अगस्त 2021 में 13 लोगों को दोबारा होमगार्ड के रूप में नामांकित करने की मंजूरी दी थी। बाद में रिकॉर्ड की जांच के दौरान पाया गया कि इनमें से 11 लोगों के नाम फर्जी तरीके से लॉन्ग रोल रजिस्टर में दर्ज किए गए थे। जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन सेंटर कमांडर स्तर पर रिकॉर्ड में फ्लूड लगाकर और बाद में प्रविष्टियां कर हेराफेरी की गई। जांच टीम ने 18 और 19 अक्तूबर 2021 को संबंधित कार्यालय पहुंचकर रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की। जांच में पाया गया कि जिन 11 लोगों के नाम दर्ज किए गए थे, उनके व्यक्तिगत नामांकन फॉर्म, सेवा रिकॉर्ड, ड्यूटी कॉल-आउट रजिस्टर, भुगतान प्राप्ति रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध ही नहीं थे। इतना ही नहीं, राज्य मुख्यालय को भेजी गई उनकी सेवा अवधि संबंधी रिपोर्ट भी संदिग्ध पाई गई। जांच के बाद पुलिस अधीक्षक ने संबंधित रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेने के साथ राज्य मुख्यालय को इन 11 लोगों की पुनर्नियुक्ति मंजूरी रद्द करने की सिफारिश की थी। इसके अलावा रिकॉर्ड से छेड़छाड़, फर्जी रिपोर्ट भेजने और सरकारी दस्तावेजों में कथित हेराफेरी के आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की भी अनुशंसा की गई है। रविवार को दर्ज मिली भर्ती की तारीख रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं। कुछ होमगार्ड स्वयंसेवकों की भर्ती की तारीख रविवार के दिन दर्ज मिली, जबकि कुछ की सेवा मुक्ति सरकारी अवकाश के दिन दर्शाई गई है। जांच अधिकारियों ने इसे रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ी और सुनियोजित फर्जीवाड़े का संकेत माना है। उच्च अधिकारियों तक कब पहुंचेगी जांच की आंच एसीबी ने होमगार्ड विभाग के अज्ञात अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। हालांकि अब तक किसी वरिष्ठ अधिकारी को पूछताछ के लिए तलब नहीं किया गया है। शिकायत के अनुसार अनियमितताओं का यह मामला वर्ष 2010 से 2025 के बीच का बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जांच की आंच विभाग के उच्च अधिकारियों तक कब पहुंचेगी और इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होगी।