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LG–सांसद बैठक: DDA बनाएगा 3 हजार पार्किंग स्थल, जाम से मिलेगी राहत

नई दिल्ली  राजधानी में पार्किंग और उसकी वजह से लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। LG तरनजीत सिंह संधू ने DDA को दिल्ली में तीन हजार पार्किंग जगहों की पहचान करके काम शुरू करने का निर्देश दिया है। LG ने बुधवार को इसे लेकर सभी सात लोकसभा सांसदों और DDA के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हाई लेवल बैठक की है। बैठक में राजधानी के विकास, नागरिक सुविधाओं और जमीनी स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार को लेकर चर्चा हुई।  LG की सांसदों के साथ हुई बैठक में बताया गया कि पार्किंग की समस्या से निजात के लिए DDA अगले एक साल के भीतर दिल्ली भर में 3 हजार से ज्यादा खाली भूखंडों की पहचान करेगा, जिनका इस्तेमाल सरफेस पार्किंग के रूप में किया जाएगा। फिलहाल 232 खाली पड़े DDA के प्लॉट को पार्किंग में बदलने को लेकर टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि इन भूखंडों की पहचान के बाद करीब एक लाख गाड़ियों की पार्किंग की व्यवस्था की जा सकेगी। पार्किंग के लिए जिन 232 जगहें चिह्नित की गई हैं। इनमें सबसे ज्यादा 98 जगह द्वारका जोन में हैं। इसके अलावा 53 उत्तर जोन, 30 रोहिणी जोन, 28 पूर्वी जोन और 23 दक्षिण जोन में है। LG तरनजीत सिंह संधू ने सातो सांसदों के साथ की बैठक DDA अधिकारियों का कहना है कि इससे पार्किंग संकट कम होने के साथ ट्रैफिक जाम की समस्या से भी राहत मिलेगी। बैठक में पार्किंग और ट्रैफिक के अलावा अतिक्रमण, खाली पड़ी DDA जमीनों के इस्तेमाल और DDA पार्कों की देखरेख जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सभी सांसदों ने अवैध कब्जा और अतिक्रमण को बड़ी समस्या बताते हुए कार्रवाई में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया। सूत्रों की मानें तो LG और सांसदों के साथ बैठक अब नियमित आयोजित की जाएगी। बैठक में मौजूद साउथ दिल्ली से सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि बैठक में हमने DDA की अतिक्रमण वाली जमीनों को खाली करने के साथ-साथ साउथ दिल्ली में 69 एफ्लुएंट कॉलोनियों को नियमित करने, ग्रामसभा की जमीन पर गांव वासियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने और ग्राम सभा की खाली पड़ी जमीन पर पार्कों के विकास का मुद्दा उठाया।  

पैरोल खत्म, सीधे जेल पहुंचे आसाराम; राजस्थान हाईकोर्ट ने सजा में नहीं दी राहत

 जोधपुर नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम एक बार फिर जोधपुर सेंट्रल जेल की सलाखों के पीछे पहुंचने वाले हैं. राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ से बड़ा कानूनी झटका लगने के बाद आसाराम गुरुवार को एयर इंडिया की दिल्ली-जोधपुर फ्लाइट से जोधपुर पहुंच गए हैं. कोर्ट के आदेश के मुताबिक, वे सिविल एयरपोर्ट से सीधे जोधपुर सेंट्रल जेल जा रहे हैं, जहां कुछ ही देर में वे जेल प्रशासन के सामने सरेंडर करेंगे. हाईकोर्ट की डबल बैंच ने बरकरार रखी थी सजा एक दिन पहले ही राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम की याचिका पर अपना अहम फैसला सुनाया था. जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित की डबल बैंच ने निचली अदालत द्वारा दी गई 'अंतिम सांस तक आजीवन कारावास' की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा था. कोर्ट ने आसाराम को आंशिक राहत देते हुए सामूहिक दुष्कर्म की धाराओं से भले ही बरी कर दिया हो, लेकिन मुख्य मामले में उम्रकैद की सजा पर कोई ढील नहीं दी थी. इसके साथ ही अदालत ने उन्हें तुरंत सरेंडर करने के सख्त निर्देश दिए थे. पैरोल खत्म, अब सीधे जेल का रास्ता आसाराम पिछले कुछ समय से खराब सेहत और इलाज के आधार पर मिली पैरोल पर जेल से बाहर चल रहे थे. हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आने के बाद उनकी बाहर रहने की उम्मीदें पूरी तरह टूट गईं. दिल्ली से जोधपुर सिविल एयरपोर्ट उतरते ही सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस बल मुस्तैद हो गए, ताकि कानून-व्यवस्था की कोई स्थिति न बिगड़े. एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही आसाराम का काफिला सीधे सेंट्रल जेल के लिए रवाना हो गया. अब कानूनी विकल्पों के तौर पर आसाराम के पास सिर्फ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का रास्ता बचा है, लेकिन फिलहाल उन्हें जोधपुर सेंट्रल जेल की उसी कोठरी में वापस लौटना होगा जहां वे साल 2018 में दोषी ठहराए जाने के बाद से बंद हैं.

चाणक्य नीति: मूर्ख व्यक्ति की 4 बड़ी पहचान

 जरा सोचिए कि क्या सच में मूर्खता छुप सकती है? चाणक्य ने कहा था कि किसी भी व्यक्ति की मूर्खता ज्यादा समय तक छुप नहीं सकती है. उस वक्त भले ही लोग हंस रहे हों, लेकिन समय आते ही सच्चाई सामने आ जाती है. ऐसे में सबसे खतरनाक बात क्या होती है? कई लोग खुद को बहुत समझदार समझते हैं. लेकिन, वे उन्हीं आदतों के साथ जी रहे होते हैं, जिन्हें चाणक्य ने मूर्खता की पहचान बताया है. आज हम चाणक्य नीति के उन्हीं 4 संकेतों से समझेंगे कि मूर्ख आदमी की क्या पहचान होती है. मूर्खता का असली अर्थ हमारे समाज में अक्सर मूर्ख का मतलब होता है कि जो पढ़ा-लिखा नहीं है या जिसे दुनिया की बिल्कुल समझ नहीं है. लेकिन, चाणक्य की सोच इससे बिल्कुल अलग है. उनके अनुसार, मूर्खता का पढ़ाई-लिखाई से कोई लेना-देना नहीं है. मूर्खता की शुरुआत ही सोच और समझ से होती है और वही उसका अंत भी तय करती है. एक इंसान गलतियां करें तो यह सामान्य है. लेकिन जो इंसान अपनी गलतियों को सही ठहराए, उन्हें दोहराए, सलाह को नजरअंदाज करे, वही सबसे बड़ा मूर्ख होता है. 1. बिना सोचे बोलना चाणक्य कहते हैं कि मूर्ख की पहली पहचान उसकी जुबान होती है. ऐसा व्यक्ति पहले बोलता है और फिर सोचता है. और जब तक वह सोचता है, तब तक नुकसान हो चुका होता है. इसलिए, बिना सोचे बोले गए शब्द तीर की तरह होते हैं यानी एक बार निकल गए, तो वापस नहीं आते हैं. ऐसे लोग अक्सर रिश्ते खराब करते हैं, भरोसा खो देते हैं और अपनी इमेज खुद खराब कर लेते हैं. वहीं, समझदार व्यक्ति कम बोलता है, सोचकर बोलता है. मूर्ख व्यक्ति हर बात पर बोलता है चाहे उसकी जरूरत हो या ना हो. 2. सलाह देना, लेकिन खुद कुछ नहीं सीखना चाणक्य कहते हैं कि मूर्ख व्यक्ति सलाह देने में माहिर होता है, लेकिन सीखने से डरता है. आपने ऐसे लोग जरूर देखे होंगे, जो खुद की जिंदगी में बदलाव नहीं लाते हैं. लेकिन, दूसरों को हर समय सलाह देते रहते हैं. और जब उन्हें समझाया जाए तो कहते हैं कि, 'मुझे सब पता है'. सीखना बंद करने का मतलब है कि उन्नति रुक जाना. इसलिए, जो इंसान सीखना छोड़ देता है, वह धीरे-धीरे पीछे छूट जाता है. 3. गुस्से में फैसले लेना चाणक्य नीति के मुताबिक, गुस्सा इंसान की सोचने की क्षमता छीन लेता है. क्योंकि गुस्से में लिया गया फैसला, बर्बादी का पहला कदम होता है. गुस्से में अक्सर रिश्ते टूटते हैं. मौके हाथ से निकलते हैं और करियर तक बर्बाद हो जाता है. समझदार इंसान गुस्सा महसूस करता है. लेकिन, उसके भरोसे फैसला नहीं लेता है. 4. अहंकार और जिद यह मूर्खता की सबसे खतरनाक पहचान है. अहंकारी व्यक्ति अपनी गलती नहीं मानता है, माफी नहीं मांगता है और हर बात पर बहस करता है. चाणक्य कहते हैं कि अहंकार इंसान को वहां सबसे ज्यादा मूर्ख बनाता है, जहां उसे सबसे ज्यादा समझदार होना चाहिए. धीरे-धीरे ऐसे व्यक्ति रिश्ते खो देता है, अवसर खो देता है और अकेला रह जाता है. सबसे बड़ी सच्चाई चाणक्य कहते हैं कि सबसे बड़ी मूर्खता यह है कि इंसान मान ले कि उसमें कोई मूर्खता नहीं है. यानी असली दुश्मन बाहर नहीं अंदर होता है. अगर आप अपनी गलतियों को पहचान लेते हैं तो वही आपकी सबसे बड़ी ताकत बन जाती है. खुद से पूछिए कि क्या मैं बिना सोचे बोलता हूं? क्या मैं सलाह सुनता हूं, लेकिन मानता नहीं? क्या मैं गुस्से में फैसले लेता हूं? क्या मेरा अहंकार मुझे नुकसान पहुंचा चुका है? अंतिम चेतावनी जो इंसान अपनी गलतियों को पहचान लेता है, वही अपने जीवन का सच्चा राजा बनता है. और जो इंसान अपनी गलतियों को आदत कहकर सही ठहराता है, वह धीरे-धीरे खुद को ही खत्म कर देता है.

किसानों को मिलेगा प्रोत्साहन: दलहन बीज पर ₹4500 तक सहायता, क्लस्टर मॉडल से खेती का विस्तार

रांची दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (अरहर, उड़द और मसूर) को लेकर कृषि विभाग ने कार्य शुरू कर दिया है। पांच साल तक चलने वाले इस मिशन का उद्देश्य दलहन उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आय को बढ़ाना है। राज्य के कई जिलों को इस योजना में शामिल किया गया है। पल्स मिशन के तहत क्लस्टर-आधारित कार्य किया जाएगा, जिसमें कम से कम 10 हेक्टेयर के क्लस्टर बनाए जाएंगे। झारखंड के चिह्नित जिलों में अरहर, उड़द, मसूर, चना और अन्य दलहनों के उत्पादन पर जोर दिया जाएगा। सरकार की ओर से दलहन बीज उत्पादक किसानों को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। अरहर के लिए 4.5 हजार प्रति क्विंटल, उड़द और मसूर के लिए तीन हजार प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि दी जानी है। यहां से मिले प्रमाणित बीजों को किसानों को दिया जाएगा, ताकि उत्पादन क्षेत्र को बढ़ाया जा सके। राज्य में लगभग 12 लाख हेक्टेयर तक दलहन की खेती किए जाने की संभावना है। झारखंड के इन जिलों में होगा मिशन का क्रियान्वयन झारखंड में 22 जिलों को दलहन उत्पादन के लिए चिह्नित किया गया है।  अरहर: बोकारो, चतरा, देवघर, धनबाद, गिरिडीह, गुमला, हजारीबाग, जामताड़ा, रांची, साहिबगंज, पलामू, गढ़वा। उड़द : गोड्डा, लोहरदगा, बोकारो, चतरा, देवघर, धनबाद, दुमका, रांची, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला, लातेहार। मसूर: बोकारो, देवघर, दुमका, गढ़वा, गोड्डा, गुमला, कोडरमा, सिमडेगा, साहिबगंज, रांची। चना : सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा, चतरा, गुमला, लातेहार, लोहरदगा। अन्य दलहन: रांची, लातेहार, गुमला, खूंटी, रामगढ़, देवघर, कोडरमा, गिरिडीह। आठ लाख टन होता है दलहन का उत्पादन राज्य में अभी आठ लाख टन दलहन का उत्पादन होता है, जिसमें दो लाख टन अरहर और दो लाख टन चना का उत्पादन होता है। चार लाख टन में उरद, मूंग, मटर सहित अन्य दलहन का उत्पादन होता है। राज्य में दलहन की उत्पादकता विश्व में सबसे ज्यादा है। यहां 1069 किलो प्रति हेक्टेयर उत्पादन होता है। जबकि राष्ट्रीय औसत 881 किलो प्रति हेक्टेयर उत्पादन है। अगले चार वर्षों तक अरहर, उड़द और मसूर की प्रतिशत खरीद सरकार करेगी। 5.7 लाख हेक्टेयर परती खेत में होगा उत्पादन झारखंड में 5.75 लाख हेक्टेयर परती भूमि का उपयोग दलहन उत्पादन के लिए किया जाएगा। रबी सीजन में उड़द, मसूर और चना आसानी से उगाए जा सकते हैं। अरहर की खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य के 12 से अधिक जिलों को कवर किया गया है। राज्य में धान की खेती के बाद किसान अपने खेत को परती छोड़ देते हैं, लेकिन इस मिशन के तहत उन खेतों में दलहन की फसल लगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दलहन के खेती के लिए किसानों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस में छोटे एवं सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी। एक किसान अधिकतम पांच हेक्टेयर तक ही प्रोत्साहन राशि की सहायता ले सकता है जो किसानों के बैंक खाते में भेजे जाएंगे। राज्य में खेती की स्थिति राज्य लगभग 25 लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती की जाती है।     धान : लगभग 16–18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती     दलहन : लगभग आठ लाख हेक्टेयर (दोनों सीजन में)     तिलहन : लगभग 1.5–2 लाख हेक्टेयर     श्रीअन्न : लगभग एक लाख हेक्टेयर से कम क्षेत्र में खेती होती है, जिसमें रागी, कोदो, बाजरा आदि शामिल हैं। झारखंड देश में दलहन के उत्पादन में सातवां स्थान रखता है। यहां पर दलहन की उत्पादकता सबसे ज्यादा है। अच्छे और प्रमाणित बीज से राज्य में दलहन के उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। -प्रदीप कुमार हजारी, पूर्व विशेष सचिव सह पूर्व सलाहकार, कृषि विभाग  

‘मेक इन हरियाणा’ से निवेश और रोजगार पर फोकस, 500 करोड़+ प्रोजेक्ट्स को मिलेगा मेगा दर्जा

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने राज्य को देश का अग्रणी औद्योगिक और मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए नई ‘मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026’ लागू कर दी है। मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी के बाद हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त व सचिव डा. अमित कुमार अग्रवाल ने बुधवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। राज्यपाल की मंजूरी के पास जारी अधिसूचना के मुताबिक यह नीति अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगी। नई नीति में निवेश आकर्षित करने, उद्योगों को आधुनिक सुविधाएं देने, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों तक औद्योगिक विकास पहुंचाने पर विशेष फोकस किया गया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने देश में पहली बार एक साथ 10 औद्योगिक पालिसी जारी की थी, जिसमें मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पालिसी-2026 सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी पालिसी है। राज्य सरकार का मानना है कि यह नीति हरियाणा को केवल आटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि इलेक्ट्रानिक्स, ई-व्हीकल, लाजिस्टिक्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, वेयरहाउसिंग और नई तकनीक आधारित उद्योगों का भी बड़ा केंद्र बनाएगी। औद्योगिक विकास को संतुलित बनाने के लिए हरियाणा सरकार ने प्रदेश के जिलों को चार श्रेणियों कोर एरिया, इंटरमीडिएट एरिया, प्राइम एरिया और प्राइम फोकस एरिया में विभाजित किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिर्फ एनसीआर क्षेत्र ही नहीं, बल्कि अपेक्षाकृत पिछड़े जिलों में भी बड़े उद्योग स्थापित होंगे और वहां रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। नई औद्योगिक नीति में बड़े निवेश को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रविधान किए गए हैं। परिवार पहचान पत्र से होगी स्थानीय कर्मचारियों की पहचान नई औद्योगिक पालिसी के अनुसार हरियाणा में 500 करोड़ या उससे अधिक निवेश वाली इकाइयों को मेगा प्रोजेक्ट का दर्जा मिलेगा। इससे बड़े निवेश वाली परियोजनाओं को अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे उद्योगों को भूमि आवंटन, बिजली कनेक्शन, टैक्स प्रोत्साहन, बुनियादी ढांचे और अन्य मंजूरियों में प्राथमिकता दी जाएगी। नीति में हरियाणा के युवाओं को रोजगार दिलाने पर खास जोर दिया गया है। स्थानीय कर्मचारियों की पहचान परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) के माध्यम से की जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश में लगने वाले नए उद्योगों से अधिकतम लाभ हरियाणा के युवाओं को मिले। एमएसएमई और स्टार्टअप्स पर किया गया विशेष फोकस नई नीति में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को मजबूत करने के लिए कई रियायतें दी गई हैं। इनमें पूंजी निवेश सहायता, जीएसटी आधारित प्रोत्साहन, तकनीकी सहायता और इन्फ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट शामिल हैं। साथ ही स्टार्टअप्स, इनोवेशन सेंटर और रिसर्च यूनिट्स को भी बढ़ावा देने का प्रविधान किया गया है। ई-व्हीकल, इलेक्ट्रानिक्स और लाजिस्टिक्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार का ध्यान इलेक्ट्रानिक्स सिस्टम डिजाइन, ई-व्हीकल, ग्रीन एनर्जी, लाजिस्टिक्स और सप्लाई चेन सेक्टर को प्राथमिकता देने पर अधिक है। इससे हरियाणा को नई तकनीक और हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र बनाने की कोशिश की जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण, ग्रीन एनर्जी और टिकाऊ औद्योगिक विकास नई औद्योगिक नीति के तहत औद्योगिक पार्क, फ्लैटेड फैक्ट्री, वेयरहाउसिंग, निजी इंडस्ट्रियल टाउनशिप और स्किल डेवलपमेंट सेंटर विकसित किए जाएंगे। सरकार प्रदूषण नियंत्रण, ग्रीन एनर्जी और टिकाऊ औद्योगिक विकास को भी नीति का अहम हिस्सा बना रही है। हरियाणा सरकार का दावा है कि नई औद्योगिक नीति से प्रदेश में हजारों करोड़ रुपये का निवेश आएगा, लाखों रोजगार सृजित होंगे और हरियाणा देश के सबसे तेज औद्योगिक विकास वाले राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा। खासतौर पर एनसीआर से बाहर के जिलों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने से क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है

पैरा एथलीट सुमित अंतिल का 74.82m थ्रो, F64 में नया विश्व रिकॉर्ड

 नई दिल्ली शक्ति और सटीकता का शानदार प्रदर्शन करते हुए, भारत के पैरा-एथलेटिक्स सुपरस्टार सुमित अंतिल ने बुधवार को आठवीं इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स इंटरनेशनल चैंपियनशिप में पुरुषों की भाला फेंक F64 स्पर्धा में अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़कर स्वर्ण पदक जीता। हरियाणा के इस एथलीट ने 74.82 मीटर का विशाल थ्रो किया, जिससे दर्शक खुशी से झूम उठे और वैश्विक पैरा-खेल समुदाय को एक स्पष्ट संदेश दिया। दो बार के पैरालंपिक चैंपियन एंटिल ने प्रतियोगिता के दौरान ही अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म का प्रदर्शन कर दिखाया था। उन्होंने धीरे-धीरे गति पकड़ी और चौथे प्रयास में 70.30 मीटर का थ्रो किया, जिसके बाद उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पांचवें थ्रो में दिखाया। उनके इस अंतिम प्रयास ने न केवल उन्हें स्वर्ण पदक दिलाया, बल्कि 2022 एशियाई पैरा गेम्स में बनाए गए उनके पिछले विश्व रिकॉर्ड 73.29 मीटर को भी तोड़ दिया। शानदार प्रदर्शन ने प्रतिद्वंद्वियों को अचंभित कर दिया। नौ खिलाड़ियों के इस समूह का सुमित अंतिल के विस्फोटक प्रदर्शन के आगे कोई चांस नहीं था। उन्होंने शुरू से अंत तक प्रतियोगिता पर पूरी तरह से अपना दबदबा बनाए रखा। महाराष्ट्र के संदीप सरगर ने 62.88 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ रजत पदक जीता और काफी पीछे दूसरे स्थान पर रहे। यह अंतर इस बात को स्पष्ट करता है कि उस दिन अंतिल कितने आगे थे। इस ताजा जीत ने एंटिल के पहले से ही शानदार करियर में एक और चमकीला अध्याय जोड़ दिया है। पिछले ही साल, 26 वर्षीय एंटिल ने नई दिल्ली में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीता था, जिससे उन्होंने बार-बार साबित किया कि वे F64 वर्ग में भाला फेंक के निर्विवाद बादशाह बने हुए हैं। भारतीय पैरा स्पोर्ट्स के लिए यह रिकॉर्ड क्यों महत्वपूर्ण है? भारतीय पैरा-एथलेटिक्स प्रशंसकों के लिए सुमित एंटिल की उपलब्धि सिर्फ एक और पदक से कहीं अधिक है; इसने देश में इस खेल के तीव्र विकास को उजागर किया है। इंडियन ओपन जैसी अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप की मेजबानी से घरेलू खिलाड़ियों को परिचित परिस्थितियों में अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलता है, साथ ही उन्हें विदेशी खिलाड़ियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करने का अवसर भी मिलता है। एंटिल के विश्व-रिकॉर्ड थ्रो से राष्ट्रीय टीम का आत्मविश्वास बढ़ेगा और हजारों दिव्यांग युवा खिलाड़ियों को इस खेल को अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। इस आयोजन में मौजूद कोचों और अधिकारियों ने हरियाणा के इस स्टार खिलाड़ी की निरंतरता और मानसिक दृढ़ता की सराहना की। प्रतियोगिता में प्रबल दावेदार के रूप में उतरे इस खिलाड़ी ने दबाव को बखूबी संभाला और अहम मौकों पर शानदार प्रदर्शन किया। भविष्य की ओर: सुमित एंटिल और अधिक सफलता की ओर अग्रसर हैं। आगामी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं को देखते हुए, सुमित एंटिल का प्रदर्शन शानदार है। नई दिल्ली में उनके रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन ने साबित कर दिया है कि वे F64 भाला फेंक में अपनी क्षमताओं को लगातार निखार रहे हैं। समर्थक यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि भविष्य की चैंपियनशिप और पैरालंपिक खेलों में वे कितनी ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं।  

महेश भट्ट की पर्सनल लाइफ पर पूजा भट्ट का बड़ा खुलासा

फिल्ममेकर महेश भट्ट अपनी रोमांटिक-ड्रामा फिल्मों के लिए मशहूर रहे हैं. उन्होंने अपनी रियल लाइफ लव स्टोरी पर बेस्ड 1990s की सुपरहिट फिल्म आशिकी भी बनाई थी. हालांकि वो प्रोफेशनल से ज्यादा, अपनी पर्सनल जिंदगी को लेकर चर्चाओं में बने रहे. महेश भट्ट ने दो शादियां की थीं. इसके अलावा उनके धर्म परिवर्तन की बातें भी खूब चला करती थीं. कहा जाता है कि सोनी राजदान से शादी करने के लिए, उन्होंने मुसलमान धर्म अपना लिया था. पिता की दूसरी शादी पर बोलीं पूजा महेश भट्ट की जिंदगी विवादों से घिरी रही. हाल ही में उनकी बेटी पूजा भट्ट ने अपने पिता की दो शादियों और सोनी राजदान संग रिश्ते पर खुलकर बात की. विक्की लालवानी के यूट्यूब चैनल पर पूजा ने बताया कि उनके जन्म के बाद, मां किरण और पिता महेश भट्ट की लव स्टोरी ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी, और महेश भट्ट घर से बाहर निकल गए. हालांकि वो कुछ समय बाद वापस घर लौटे और फिर उनके भाई राहुल भट्ट का जन्म हुआ. मगर वो भी उनके रिश्ते को बचा ना सका, जिसके बाद फिल्ममेकर की मुलाकात सोनी राजदान से हुई जिनसे उन्होंने शादी की. पूजा ने आगे कहा- मैं सोनी (राजदान) के बारे में मेरी मां से भी पहले जान चुकी थी. मेरे पिता ने मुझे नींद से उठाकर कहा कि मैं तुम्हें बताना चाहता हूं कि मैं एक महिला से मिला और मैं घर छोड़कर जाने वाला हूं. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि मैं तुम्हें थोड़ा कम प्यार करता हूं और मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगा. कई लोगों ने मुझसे सवाल किए कि कैसे इतनी छोटी उम्र में तुम्हारे पिता ने तुमसे सच कह दिया? लेकिन मैंने उन्हें कहा कि अगर वो मुझसे नहीं कहेंगे, तो किससे कहेंगे? मैं किसी दूसरी जगह से बेहतर ये बात अपने पिता या मां के मुंह से सुनना पसंद करूंगी. जब सोनी राजदान को लगा बुरा पूजा आगे उस दिन का भी जिक्र करती हैं, जब सोनी राजदान ने एक्ट्रेस से उनकी और महेश भट्ट की शादी पर खुलकर बात की थी. उन्होंने बताया- एक दिन सोनी ने मुझसे अपने दिल की बात कही कि पूजा मुझे दोषी जैसा महसूस होता है. लेकिन मैंने उनसे पूरे दिल से कहा कि सोनी, तुम एक मजबूत रिश्ते को तोड़ नहीं सकती थी. एक मजबूत रिश्ते में किसी और के लिए कोई जगह नहीं होती जब तक कि उसमें कोई दरार न हो या कोई कमी न हो, ताकि कोई दूसरा आकर उस कमी को पूरा कर सके. पूजा ने इसी बातचीत में अपनी दोनों बहनों आलिया और शहीन भट्ट संग रिश्ते पर भी खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि जब शहीन का जन्म हुआ था, तबसे वो उनसे करीब हो गई थीं. महेश भट्ट ने बेटी के जन्म के बाद सीधा उनकी मां किरण को कॉल किया था, जिसके बाद उन्होंने पूजा को बड़ी बहन बनने की खबर दी. वो धीरे-धीरे सोनी राजदान और उनके परिवार से करीब हो गईं. आज पूजा कहती हैं कि उनका रिश्ता आलिया, सोनी राजदान और शहीन भट्ट से काफी बेहतर है.

ऑफिस में बैठकर काम से बढ़ रहा कमर दर्द, सही पोस्टर और ब्रेक से मिल सकती है राहत

आजकल ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करना आम हो गया है, लेकिन इससे कमर दर्द की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है. लगातार एक ही पोजिशन में बैठने से पीठ और कमर की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे दिन के अंत में दर्द और जकड़न महसूस होती है. कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय रहते ध्यान न देने पर यह समस्या बढ़ सकती है. सही बैठने का तरीका, बीच-बीच में ब्रेक लेना और हल्की एक्सरसाइज करने से इस दर्द से राहत पाई जा सकती है. कुछ आसान आदतें अपनाकर आप अपनी कमर को स्वस्थ और मजबूत रख सकते हैं. 1. सही पोस्टर रखें ऑफिस में बैठते समय हमेशा अपनी पीठ को सीधा रखें और कुर्सी के बैक सपोर्ट से सटाकर बैठें. कोशिश करें कि आपके कंधे ढीले रहें और झुककर काम न करें. पैरों को जमीन पर सीधा टिकाकर रखें, उन्हें हवा में लटकने न दें. गलत पोस्टर में लंबे समय तक बैठने से कमर की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है, जिससे दर्द और जकड़न की समस्या हो सकती है. 2. हर 30-40 मिनट में ब्रेक लें लगातार एक ही जगह बैठकर काम करना कमर दर्द का बड़ा कारण है. इसलिए हर 30-40 मिनट में 2-3 मिनट का छोटा ब्रेक जरूर लें. इस दौरान आप खड़े होकर थोड़ा चल सकते हैं या हल्का स्ट्रेच कर सकते हैं. इससे शरीर की मांसपेशियों को आराम मिलता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है.  3. आरामदायक कुर्सी का इस्तेमाल करें ऑफिस में काम करते समय ऐसी कुर्सी का चुनाव करें जिसमें अच्छा बैक सपोर्ट हो. कुर्सी की ऊंचाई ऐसी हो कि आपके पैर आराम से जमीन पर टिक सकें. अगर कुर्सी में लंबर सपोर्ट नहीं है, तो आप कुशन या छोटा तकिया लगाकर अपनी कमर को सपोर्ट दे सकते हैं. सही कुर्सी आपके पोस्टर को सुधारने में मदद करती है.  4. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें कमर दर्द से राहत पाने के लिए रोजाना कुछ आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करना बहुत फायदेमंद होता है. आप forward bend, back stretch और body twisting जैसी एक्सरसाइज कर सकते हैं. ये एक्सरसाइज मांसपेशियों की जकड़न को कम करती हैं और शरीर को लचीला बनाती हैं. दिन में 5-10 मिनट भी स्ट्रेचिंग करने से फर्क महसूस होगा. 5. गर्म सिकाई करें अगर दिनभर काम करने के बाद कमर में दर्द या भारीपन महसूस हो, तो गर्म सिकाई बहुत राहत देती है. आप गर्म पानी की बोतल या हीट पैड का इस्तेमाल कर सकते हैं. 10-15 मिनट तक सिकाई करने से मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और दर्द कम होता है. यह एक आसान और असरदार घरेलू उपाय है. 6. सही गद्दे का चुनाव करें रात में सोते समय गद्दे का सही होना भी बहुत जरूरी है. बहुत ज्यादा सॉफ्ट गद्दा आपकी कमर को सही सपोर्ट नहीं देता, जबकि बहुत हार्ड गद्दा भी असहज हो सकता है. मीडियम फर्म गद्दा कमर के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह शरीर को संतुलित सपोर्ट देता है और दर्द से बचाव करता है.  7. पानी और पोषण का ध्यान रखें अक्सर लोग पानी पीने और सही खानपान को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह भी कमर दर्द का एक कारण हो सकता है. शरीर में पानी की कमी से मांसपेशियां जल्दी थक जाती हैं. दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और अपनी डाइट में कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन्स शामिल करें, ताकि आपकी मांसपेशियां मजबूत और स्वस्थ बनी रहें.

केदारनाथ यात्रा 2026: रिकॉर्ड 9 लाख श्रद्धालु, हेली और फ्लाइट रूट चर्चा में

वर्ष 2026 की केदारनाथ यात्रा ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. कपाट खुलने के शुरुआती 35 दिनों में ही रिकॉर्ड 9 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर चुके हैं. हर रोज करीब 30,000 लोग केदारनाथ पहुंच रहे हैं. ऐसे में अगर आप भारी भीड़, लंबे जाम और 16 किलोमीटर की थका देने वाली पैदल चढ़ाई से बचना चाहते हैं, तो हवाई सफर (By Flight/Air) आपके लिए सबसे बेस्ट और आरामदायक विकल्प है. आइए जानते हैं दिल्ली और देहरादून से केदारनाथ धाम तक के हवाई सफर के दोनों बड़े विकल्प, रूट और खर्च का पूरा ब्योरा. दिल्ली से देहरादून (फ्लाइट द्वारा) आपकी हवाई यात्रा देश की राजधानी से शुरू होगी.  दिल्ली से उत्तराखंड के लिए सीधी फ्लाइट्स उपलब्ध हैं. फ्लाइट रूट: दिल्ली (DEL) से देहरादून के जॉली ग्रांट एयरपोर्ट (DED). समय: मात्र 50 मिनट से 1 घंटे 10 मिनट. खर्च: एडवांस बुकिंग पर आने-जाने (राउंड ट्रिप) का किराया लगभग ₹6,800 से ₹7,800 प्रति व्यक्ति आता है. देहरादून से आगे केदारनाथ के लिए हवाई विकल्प देहरादून पहुंचने के बाद आपके पास बाबा के धाम तक पहुंचने के लिए दो बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं:  बेस कैंप से हेलीकॉप्टर सेवा देहरादून एयरपोर्ट पर उतरने के बाद आप सड़क मार्ग से सीधे नीचे दिए गए प्रमुख बेस कैंप हेलीपैड पर पहुंच सकते हैं, जहां से नियमित हेलीकॉप्टर सेवाएं दी जाती हैं: प्रमुख लोकेशंस: गुप्तकाशी (Guptkashi), सिरसी (Sirsi) और फाटा (Phata). समय: हेलीपैड से मंदिर तक का सफर महज 10 से 15 मिनट का होता है. खर्च: आने-जाने का कुल किराया (Return Ticket) लगभग ₹5,500 से ₹8,500 प्रति व्यक्ति के बीच होता है (यह आपके द्वारा चुने गए हेलीपैड पर निर्भर करता है). जरूरी नोट: हेलीकॉप्टर टिकटों में होने वाली धोखाधड़ी से बचें.  इसकी बुकिंग सिर्फ और सिर्फ IRCTC की आधिकारिक हेलीयात्रा वेबसाइट से ही कराना सही रहता है. विकल्प 2: देहरादून से डायरेक्ट चार्टर सेवा अगर आप बिना किसी कतार और बिना किसी झंझट के प्रीमियम सफर चाहते हैं, तो देहरादून से सीधे प्राइवेट चार्टर सर्विस ले सकते हैं. रूट प्लान: प्राइवेट चार्टर सेवा प्रदाता सीधे देहरादून से केदारनाथ के लिए उड़ान भरते हैं. इसके अलावा आप अपनी पसंद के अनुसार यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ (चार धाम) या फिर सिर्फ केदारनाथ और बद्रीनाथ (दो धाम) का कस्टमाइज्ड ट्रिप भी बुक कर सकते हैं. केदारनाथ के मुख्य आकर्षण: क्या देखें? हवाई सफर से उतरते ही आप सीधे बाबा के धाम पहुंचेंगे, जहां आपको इन मुख्य स्थलों के दर्शन जरूर करने चाहिए: ऐतिहासिक मंदिर व भीम शिला: 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक भव्य मंदिर.  इसके ठीक पीछे स्थित भीम शिला ने 2013 की भीषण बाढ़ के पानी को दो हिस्सों में बांटकर मंदिर की रक्षा की थी. आदि शंकराचार्य समाधि: मुख्य मंदिर के ठीक पीछे स्थित, जहां महान संत आदि शंकराचार्य ने मात्र 32 वर्ष की आयु में मोक्ष प्राप्त किया था. भैरव नाथ मंदिर: मंदिर से 500 मीटर की दूरी पर स्थित है.  इन्हें केदारनाथ का रक्षक माना जाता है, जो सर्दियों में कपाट बंद होने के बाद इस पूरे क्षेत्र की रक्षा करते हैं. रुद्र मेडिटेशन केव (मोदी गुफा): मंदिर परिसर से 2 किमी दूर बनी एक भूमिगत गुफा, जहां साल 2019 में पीएम नरेंद्र मोदी ने 17 घंटे ध्यान लगाया था.

नई शिक्षा नीति लागू करना प्राथमिकता, बोर्ड चेयरमैन ने संभाला कार्यभार

भिवानी  वरिष्ठ भाजपा नेता शंकर लाल धूपड़ को हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। मंगलवार देर रात उनकी नियुक्ति और डा. पवन कुमार को रिलीव करने के आदेश जारी किए गए। जिसके बाद बुधवार को नवनियुक्त चेयरमैन शंकर लाल धूपड़ ने स्वजन और भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं के बीच हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड चेयरमैन का कार्यभार संभाला। कार्यभार संभालते हुए उन्होंने कहा कि भारत सरकार की नई शिक्षा नीति को पूर्णरूपेण लागू करना मेरी प्राथमिकता होगी। इससे पूर्व उन्होंने बोर्ड की लाबी में स्थापित मां सरस्वती की पूजा की। बोर्ड अध्यक्ष शंकर लाल धूपड़ का पूर्व बोर्ड अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार, बोर्ड अधिकारियों/कर्मचारियों, बीजेपी कार्यकर्ताओं व समाजसेवियों ने फूलों के गुलदस्ते देकर स्वागत किया गया। कार्यग्रहण उपरांत धूपड़ ने बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करना उनकी प्राथमिकता रहेगी। बोर्ड की कार्यप्रणाली को अधिकाधिक सुदृढ़ किया जाएगा शिक्षा-परीक्षा को सुधारवादी कदमों को और अधिक गति देते हुए बोर्ड की कार्यप्रणाली को अधिकाधिक सुदृढ़ किया जाएगा। वे शिक्षा बोर्ड के उन सभी क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव के हिमायती व पैरोकार रहे हैं, जिनसे शिक्षा जगत का बहुआयामी विकास हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा-परीक्षा में गुणात्मक सुधार, परीक्षाओं में नकल पर अंकुश लगाने तथा शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली को और अधिक उत्तरदायी, त्वरित, पारदर्शी व विद्यार्थियों/शिक्षकों के लिए संतुष्टिपूर्ण बनाने के लिए सत्त व सार्थक प्रयास किए जाएंगे। उनका मानना है कि शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति को गुणवान, सुशील, ज्ञानवान, समाज व देश के प्रति समर्पित बनाया जा सकता है। शंकर लाल धूपड़ ने अपनी नियुक्ति के लिए केन्द्रीय मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, शिक्षा मंत्री महीपाल सिंह ढांडा, प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन पर जो विश्वास जताया है वह उसे सार्थक सिद्ध करेंगे तथा बोर्ड सचिव व अधिकारियों के साथ मिलकर बोर्ड को उच्च मुकाम पर ले जाएंगे। शंकर लाल धूपड़ मूल रूप से जिला भिवानी के रहने वाले है जो कि पेशे से वकील है। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा भिवानी में पूरी करने के बाद जयपुर विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की। उनकी राजनीतिक शुरूआत 1975 में हुई तथा वे लगभग 04 वर्षों तक जिला भिवानी के बीजेपी के जिलाध्यक्ष भी रहे हैं।