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पचपदरा रिफाइनरी को रेलवे कनेक्टिविटी, 33 लाख का सर्वे स्वीकृत

बालोतरा राजस्थान में बालोतरा से पचपदरा को रेल मार्ग से जोड़ने की दिशा में रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है. रेलवे ने बालोतरा से पचपदरा को जोड़ने वाली नई लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी दे दी है. राजस्थान के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पचपदरा रिफाइनरी के लिए बालोतरा से पचदरा तक 11 किमी नई लाइन के सर्वे के लिए 33 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है. यह रेल लाइन पचपदरा को बालोतरा, बाड़मेर और आसपास के क्षेत्रों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ेगी. साथ ही क्षेत्र का जोधपुर और अहमदाबाद व दिल्ली-जयपुर की ओर भी सम्पर्क स्थापित होगा. सर्वे काम पूरा होने के बाद बनेगी DPR बालोतरा से पचपदरा तक प्रस्तावित रेल रूट इन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाएगा. इस नई रेल लाइन के निर्माण से पचपदरा स्थित रिफ़ाइनरी तक रेल मार्ग के माध्यम से पहुंच और सुगम होगी. साथ ही रोज़गार, व्यापार, कृषि और स्थानीय उद्योगों के लिए नए परिवहन का विकल्प उपलब्ध होगा. 11 किलोमीटर नई लाइन के लिए फ़ाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) पूरा होने के बाद परियोजना की वित्तीय और तकनीकी व्यवहार्यता के आधार पर DPR तैयार कर कार्य स्वीकृत रेलवे बोर्ड स्वीकृति के लिए भेजी जाएगी. 35 साल पहले इस मार्ग पर चलती थी ट्रेन इस मार्ग पर लगभग 35 साल पहले ट्रेन चला करती थी, जिसे 1992 में बंद कर दिया गया था और बाद में रेलवे ट्रैक भी हटा लिया गया था. इस पुरानी ट्रेन की कहानी पचपदरा के नमक उद्योग से जुड़ी है. सैकड़ों सालों से नमक उत्पादन का केंद्र रहे पचपदरा में, स्थानीय नगर सेठ गुलाब चंद के आग्रह पर तत्कालीन अंग्रेज़ सरकार ने 1939 में बालोतरा से पचपदरा साल्ट तक एक रेलवे ट्रैक बिछाया था. इस ट्रेन में नमक लदान के लिए वैगन के साथ दो यात्री कोच भी जोड़े गए थे. पचपदरा साल्ट की नमक खदानों से हज़ारों टन नमक रोज़ाना इसी ट्रेन से ढोया जाता था.1990 की बाढ़ में रेलवे ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद ट्रेन बंद कर दी गई थी.

खलनायक 2 में संजय दत्त की वापसी तय, लेकिन डायरेक्टर की तलाश अब भी जारी

बॉलीवुड स्टार संजय दत्त कितनी भी फिल्में कर डालें, मगर पक्के इंडियन सिनेमा फैंस के लिए वो हमेशा ओरिजिनल खलनायक (1993) ही रहेंगे. सुभाष घई की इस फिल्म का जनता पर ऐसा असर पड़ा कि लोग संजय को 'खलनायक' ही बुलाने लगे और आज भी बुलाते हैं. इसलिए अप्रैल के अंत में जब इसका सीक्वल खलनायक 2 अनाउंस हुआ तो फैंस में खुशी की लहर दौड़ गई. संजय दत्त तो खलनायक के रोल में लौट रहे हैं, मगर सबसे बड़ा सवाल ये है कि फिल्म को डायरेक्ट कौन करेगा? क्योंकि खलनायक 2 की अनाउंसमेंट बिना किसी डायरेक्टर के नाम के हुई थी. फिल्म अनाउंस होने के कुछ दिन बाद ही ओरिजिनल फिल्म के डायरेक्टर सुभाष घई ने साफ कर दिया था कि वो बतौर 'मेंटर' ही इस फिल्म के साथ जुड़ेंगे, लेकिन इसे डायरेक्ट नहीं करेंगे. अब सामने आया है कि 90 के दशक के एक और धमाकेदार मसाला एंटरटेनर डायरेक्टर राजकुमार संतोषी ने भी खलनायक 2 का निर्देशन करने से इनकार कर दिया है. राजकुमार संतोषी भी नहीं डायरेक्ट करना चाहते खलनायक 2 बॉलीवुड हंगामा की एक रिपोर्ट बताती है कि संजय दत्त को ये फिल्म राजकुमार संतोषी के हाथों में सौंपने की बड़ी इच्छा थी. एक सूत्र ने बताया, 'संजय को लगता है कि राज जी को कमर्शियल सिनेमा की बहुत शानदार समझ है, इसलिए वो इस कहानी के साथ पूरा न्याय कर सकते हैं. दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों दिग्गजों ने कभी साथ काम भी नहीं किया है. संजय दत्त को लगा कि अगर फाइनली वो और राजकुमार साथ आ जाएं, वो भी इतने स्पेशल प्रोजेक्ट के लिए, तो स्क्रीन पर मजा आ जाएगा.' इसी उम्मीद के साथ संजय दत्त ने राजकुमार संतोषी के साथ मुलाकात की थी, लेकिन संतोषी ने पूरे सम्मानजनक तरीके से फिल्म डायरेक्ट करने से मना कर दिया. सूत्र ने आगे बताया, 'वो आजकल सनी देओल स्टारर अपनी फिल्म लाहौर 1947 को फाइनल टच देने में काफी व्यस्त हैं. इसके अलावा उन्होंने कुछ नई स्क्रिप्ट भी लिखी हैं, जो वो सनी देओल और आमिर खान को पिच करने वाले हैं. इसलिए उन्होंने संजय को साफ बता दिया कि उनके पास समय की काफी कमी है.' हालांकि, संतोषी ने संजय दत्त को इस फिल्म के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं दी हैं और संजू बाबा को उनका यह जेस्चर बहुत पसंद आया. संजय दत्त को जेल में आया था खलनायक रिटर्न्स का आइडिया इससे पहले खलनायक के ओरिजिनल डायरेक्टर सुभाष घई ने यह कहते हुए फिल्म डायरेक्ट करने से इनकार कर दिया था कि वो अपनी ही फिल्म का सीक्वल नहीं बनाना चाहते. उनका मानना था कि 80 साल की उम्र में इस तरह की कड़क एक्शन-मसाला फिल्म संभालना उनके लिए थोड़ा मुश्किल होगा. मजेदार बात यह है कि खलनायक रिटर्न्स के लॉन्च इवेंट में संजय दत्त ने खुद खुलासा किया था कि उन्हें इस फिल्म का आइडिया जेल में आया था. जेल के दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया था कि जब वो वहां गाने बजाते थे, तो उनके साथी कैदी उनसे बार-बार खलनायक के गाने लगाने की फरमाइश करते थे. रिपोर्ट्स के अनुसार संजय ने बताया था, 'जब मैंने कैदियों से पूछा कि अगर खलनायक फिर से बनाएं तो कौन-कौन देखना चाहेगा? तो वहां मौजूद सारे 4000 कैदियों ने एकसाथ हाथ उठाकर कहा कि वो ये फिल्म जरूर देखना चाहेंगे. इसके बाद मैंने उन सबसे फिल्म के लिए एक-एक पेज का आइडिया भेजने को कहा. मुझे वो 4000 पन्ने पढ़ने में काफी समय लगा, लेकिन उनमें से एक आइडिया मुझे बेहद पसंद आया.' अब कहानी तो संजू बाबा के पास रेडी है, लेकिन देखना यह है कि ओरिजिनल 'खलनायक' की इस विरासत को आगे बढ़ाने की कमान बॉलीवुड का कौन सा डायरेक्टर थामता है.

पराली धुआं और PM2.5 से बढ़ रहा हाइपरटेंशन, डॉक्टरों की चेतावनी

नई दिल्ली  हर साल सर्दियों में दिल्ली की हवा पराली के धुएं और प्रदूषण से जहरीली हो जाती है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि दिल और ब्लड प्रेशर को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। एम्स के डॉक्टरों ने कहा है कि पराली जलाने और बढ़ते एयर पल्यूशन का सीधा संबंध हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन से जुड़ा पाया गया है। एम्स और IIT दिल्ली की संयुक्त स्टडी का हवाला देते हुए डॉक्टरों ने बताया कि जिन इलाकों में पराली जलाने का असर ज्यादा था, वहां रहने वाले लोगों में हाई ब्लड प्रेशर का खतरा करीब 15 प्रतिशत अधिक पाया गया। वहीं PM2.5 प्रदूषण में हर 10 माइक्रोग्राम की बढ़ोतरी की स्थिति में हाइपरटेंशन का खतरा लगभग 5 प्रतिशत तक बढ़ता देखा गया।  एम्स के कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर अंबुज कुमार ने बताया कि स्टडी में उत्तर भारत के चार राज्यों दिल्ली, पंजाब, यूपी और बिहार के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसके लिए 2015-16 के नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-4) के डेटा का इस्तेमाल किया गया। अध्ययन के मुताबिक, जिन लोगों ने पिछले 30 दिनों में 100 से ज्यादा फायर इवेंट वाले क्षेत्रों में रहकर धुएं का सामना किया, उनमें हाइपरटेंशन का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा पाया गया। शोध में बताया गया कि हाई इंटेंसिटी बायोमास बर्निंग वाले इलाकों में रहने वालों में हाइपरटेंशन की संभावना लगभग 15% तक बढ़ जाती है। डॉक्टर अंबुज ने कहा कि स्टडी में यह भी सामने आया कि हवा की दिशा में आने वाले यानी डाउनविंड क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर इसका असर और ज्यादा गंभीर होता है। 'बायोमास बर्निंग को रोका जाए' डॉक्टर ने कहा कि खासकर बुजुर्गों में सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई। शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि यदि बड़े स्तर पर बायोमास बर्निंग को रोका जाए तो उत्तर भारत में अगले पांच वर्षों में करीब 1.73 से 2.24 बिलियन अमेरिकी डॉलर (PPP आधार पर) की आर्थिक बचत भी संभव है। हाई BP से सालाना 16 लाख मौतें डॉक्टर अंबुज ने बताया कि भारत में हर साल करीब 16 लाख लोगों की मौत हाइपरटेंशन के कारण होती है। यह संख्या टीबी से होने वाली मौतों से पांच गुना ज्यादा है और टीबी, मलेरिया, डेंगू व एचआईवी जैसी कई संक्रामक बीमारियों से होने वाली कुल मौतों से भी अधिक है।  इसके बावजूद बड़ी चिंता यह है कि ज्यादातर लोगों को यह पता ही नहीं होता कि वे हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं। हाइपरटेंशन को 'साइलेंट लेकिन घातक बीमारी' कहा जाता है, क्योंकि 90 प्रतिशत मामलों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। कई लोग यह मानते हैं कि सिरदर्द या गुस्सा नहीं आता तो ब्लड प्रेशर नहीं होगा, जबकि ऐसा जरूरी नहीं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग बिना जांच के बीमारी के साथ जी रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हर चार में से एक और शहरी क्षेत्रों में हर तीन में से एक व्यक्ति हाइपरटेंशन का शिकार है।

1.25 लाख उपभोक्ताओं को फायदा: लखनऊ में बिजली कटौती और लो-वोल्टेज से मिलेगा छुटकारा

 लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ के पारा क्षेत्र के लोगों को अगले महीने से बड़ी राहत मिलने जा रही है। इलाके में रहने वाले करीब 1.25 लाख उपभोक्ताओं को जल्द बिजली कटौती व लो-वोल्टेज से निजात मिलेगी। पिछले लंबे समय से बिजली संकट की मार झेल रहे निवासियों को अगले महीने समस्या से राहत मिल जाएगी। लेसा द्वारा निर्माणाधीन न्यू एफसीआई उपकेंद्र अगले माह तक यह पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। इससे पारा, प्रभातपुरम, मुनेश्वरपुरम, चौधरीटोला, चिलौली, रेवरी, सलेमपुर पतौरा, नरौरा, वादरखेड़ा, जनता विहार, बुद्धेश्वर विहार, पिंक सिटी, भटपामऊ सहित आसपास की करीब तीन दर्जन से अधिक कॉलोनियों की बिजली व्यवस्था सुधर जाएगी। आक्रोशित उपभोक्ता कई बार उपकेंद्र पर हंगामा और सड़क जाम तक कर चुके वर्तमान में पुराने एफसीआई उपकेंद्र की कुल क्षमता 25 एमवीए है, जिसमें 10-10 एमवीए के दो और 05 एमवीए का एक पावर ट्रांसफार्मर लगा है। इस उपकेंद्र पर लगभग 26 हजार उपभोक्ताओं का भार है। भीषण गर्मी के दौरान बिजली की मांग बढ़ते ही ट्रांसफार्मर ओवरलोड हो जाते हैं, जिससे आए दिन ट्रिपिंग और घंटों की कटौती होती है। इस समस्या के कारण क्षेत्र के आक्रोशित उपभोक्ता कई बार उपकेंद्र पर हंगामा और सड़क जाम तक कर चुके हैं। 5-5 एमवीए के दो नए पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किए जा रहे लेसा ने इसी समस्या के समाधान के लिए पुराने उपकेंद्र परिसर में ही नया केंद्र बनाने का निर्णय लिया। इसमें 5-5 एमवीए के दो नए पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किए जा रहे हैं। इस विस्तार के बाद क्षेत्र के लगभग 1.25 लाख लोगों को निर्बाध बिजली मिल सकेगी। अधिकारी बोले अमौसी जोन में मुख्य अभियंता के राम कुमार ने बताया कि न्यू एफसीआई उपकेंद्र का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और अगले महीने तक यह चालू हो जाएगा। इससे प्रभातपुरम और मुनेश्वरपुरम जैसे बड़े इलाकों को बेहतर वोल्टेज और निर्बाध सप्लाई मिलेगी। साथ ही पुराने उपकेंद्र का भार कम होने से तकनीकी खामियां भी कम होंगी। कहीं केबल में आग, कहीं ट्रांसफार्मर फुंके उधर, राजधानी में भीषण गर्मी और उमस के बीच बिजली विभाग की जर्जर व्यवस्था ने आम जनता को बेहाल कर दिया है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या ने विकराल रूप ले लिया है। मंगलवार रात से बुधवार शाम तक शहर के विभिन्न हिस्सों में केबल फाल्ट, ट्रांसफार्मर खराबी और अंडरग्राउंड केबल में आग लगने की घटनाओं से हाहाकार मचा रहा। लोग पूरी रात सो नहीं सके और सड़कों पर टहलकर वक्त काटने को मजबूर हुए।

पूजा भट्ट ने बॉबी देओल संग पुराने रिश्ते पर तोड़ी चुप्पी, बताया क्यों नहीं चला प्यार

पूजा भट्ट 90 के दशक की खूबसूरत और मंझी हुई एक्ट्रेसेस में शुमार हैं. बहुत कम होता है जब पूजा ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर बात की हो. सालों बाद उन्होंने बॉबी देओल संग रिश्ते का सच बयां किया है. जानते हैं कि उनका और बॉबी का रिश्ता क्यों टूटा था. अधूरी रही मोहब्बत बॉबी देओल और तान्या देओल बॉलीवुड के शांत-शालीन कपल में से एक हैं. दोनों जब भी साथ आते हैं चाहने वालों का दिल खुश कर देते हैं. पर तान्या से पहले बॉबी का दिल पूजा भट्ट पर आया था. वो और पूजा लंबे समय तक रिलेशनशिप में भी रहे. पूजा भट्ट ने विक्की लालवानी संग बातचीत में इस अधूरी मोहब्बत का जिक्र किया है. पूजा भट्ट ने बॉबी को लेकर कहा कि उन्होंने उनके पिता की फिल्म आशिकी का लीड रोल ठुकरा दिया था. वो उस समय फिल्मी करियर के लिए ज्यादा उत्सुक नहीं थे. एक्ट्रेस कहती हैं कि हम दोनों में प्यार था. हमने कभी इससे इनकार नहीं किया. वो मेरे जीवन का एक जादुई समय था और उनके साथ होना एक जादुई अनुभव था. वो एक मैजिकल इंसान हैं. फिर हम अलग दिशाओं में बढ़ गए. जब पूजा भट्ट से पूछा गया कि उनका और बॉबी का रिश्ता क्यों टूटा, तो उन्होंने कहा कि बॉबी अब परिवार वाले हैं और करियर के एक नए दौर में हैं, तो सार्वजनिक रूप से पिछले रिश्ते के बारे में बात करने का मतलब नहीं बनता है. उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि आज बैठकर बताना अच्छा लगेगा कि मेरा उनसे रिश्ता क्यों खत्म हुआ या क्या हुआ ही था. हमने कभी इसे नकारा नहीं. वो आज शादीशुदा आदमी हैं, बड़े बच्चे के पिता हैं और करियर में शानदार तरीके से आगे बढ़ रहे हैं. मुझे वो एनिमल में अच्छे लगे. मेरे हिसाब से उन्होंने ही फिल्म बनाई. मुझे उनके लिए बहुत खुशी है. पूजा ने कहा कि अतीत के बारे में कुछ भी बताकर अपने रिश्ते को छोटा नहीं करना चाहती हैं. वो कहती हैं कि किसी के साथ अच्छा समय बिताया वो काफी है. ये बताना जरूर नहीं है कि रिश्ता क्यों नहीं चला. वर्तमान के लिए गरिमा और शालीनता बनाए रखना बहुत जरूरी है. यही हम सबके लिए अच्छा भी है. 

एबी डिविलियर्स, युवराज और गेल जैसे स्टार्स की वापसी से बढ़ेगा रोमांच

 नई दिल्ली  इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले चुके खिलाड़ियों को अब उनके फैंस एक बार फिर से एक्शन में देख पाएंगे। दरअसल, वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लेजेंड्स (WCL) ने अपने तीसरे सीजन की घोषणा कर दी है। अक्टूबर 2026 में होने वाले इस सीजन में संन्यास ले चुके दिग्गज खिलाड़ी और कुछ नए चेहरे मैदान पर धमाल मचाने वाले हैं। पहले दो सीजन में लीग ने क्रिकेट जगत में धमाकेदार एंट्री की। अब यह लीग IPL के बाद दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा देखी जाने वाली क्रिकेट लीग बन चुकी है। सीजन 2 के आंकड़े देखकर हैरानी होती है। इसके 42 करोड़ 30 लाख पूरी दुनिया में दर्शक हैं। इसके अलावा 120 करोड़ इसका डिजिटल इंप्रेशन है। कई दिग्गज खिलाड़ी करेंगे वापसी इस बार फिर मैदान पर पुरानी यादें ताजा होंगी। एबी डी विलियर्स बल्ले से जादू दिखाएंगे, युवराज सिंह अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से विपक्षी गेंदबाजों को परेशान करेंगे। हरभजन सिंह की स्पिन का जादू भी फैंस को देखने को मिलेगा। इनके अलावा डीजे ब्रावो, मोईन अली और क्रिस गेल जैसे स्टार भी वापसी करेंगे। खबरें तो यह भी कह रही हैं कि कुछ नए बड़े नाम भी इस सीजन में जुड़ सकते हैं, जिनकी वजह से रोमांच और बढ़ जाएगा। फॉर्मेट में नहीं होगा बदलाव WCL का फॉर्मेट पहले की तरह ही रहेगा। इसमें इंडिया चैंपियंस, पाकिस्तान चैंपियंस, इंग्लैंड चैंपियंस, ऑस्ट्रेलिया चैंपियंस, साउथ अफ्रीका चैंपियंस, वेस्टइंडीज चैंपियंस और बांग्लादेश चैंपियंस की टीमें हिस्सा लेंगी। ये टीमें उन खिलाड़ियों से भरी होंगी जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अपनी पहचान दी है। भारत-पाकिस्तान, भारत-ऑस्ट्रेलिया जैसी पुरानी राइवलरी फिर से मैदान पर देखने को मिलेगी। WCL के फाउंडर का बड़ा बयान WCL के फाउंडर और सीईओ हर्षित तोमर ने कहा, "जब हमने WCL शुरू किया था तो हमारा सपना था कि फैंस को क्रिकेट से ज्यादा कुछ दे सकें। दो सीजन में यह लीग दुनिया की दूसरी सबसे पॉपुलर क्रिकेट लीग बन गई है। सीजन 3 को हम और भी बड़े स्तर पर ले जाएंगे।"  

छह लेन फ्लाईओवर से ट्रैफिक राहत, रोजाना 1.43 लाख वाहन प्रभावित

चंडीगढ़ ट्रिब्यून चौक पर फ्लाईओवर निर्माण के लिए आगे कदम बढ़े हैं। केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट की दिशा में प्रक्रिया तेज कर दी है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने करीब 4.5 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए सलाहकार एजेंसी नियुक्त कर दी है। अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना पर लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। एजेंसी तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगी। प्रस्तावित छह लेन फ्लाईओवर बनने के बाद ट्रिब्यून चौक से जीरकपुर बॉर्डर तक पूरा मार्ग सिग्नल फ्री हो जाएगा, जिससे रोजाना हजारों वाहन चालकों को राहत मिलने की उम्मीद है। दो हिस्सों में बनेगा फ्लाईओवर अधिकारियों के अनुसार सेक्टर-32 स्थित जीएमसीएच चौक से सीधे जीरकपुर बॉर्डर तक एकल फ्लाईओवर बनाना संभव नहीं था, क्योंकि पोल्ट्री फार्म चौक के पास रेलवे ओवरब्रिज पहले से मौजूद है। इसी कारण परियोजना को दो हिस्सों में बांटा गया है। योजना के तहत पहला फ्लाईओवर ट्रिब्यून चौक पर बनाया जाएगा, जबकि दूसरा फ्लाईओवर रेलवे ओवरब्रिज के पास से शुरू होकर जीरकपुर बॉर्डर पर बने फ्लाईओवर से जुड़ेगा। इससे पोल्ट्री फार्म चौक, हल्लोमाजरा लाइट प्वॉइंट और पुराने एयरपोर्ट लाइट प्वाॅइंट पर लगने वाले जाम में कमी आने की संभावना है। प्रतिदिन गुजरते हैं 1.43 लाख वाहन ट्रिब्यून चौक शहर के सबसे व्यस्त ट्रैफिक जंक्शनों में शामिल है। यहां से प्रतिदिन करीब 1.43 लाख वाहन गुजरते हैं, जिनमें 1.35 लाख से अधिक यात्री वाहन शामिल हैं। सुबह और शाम कार्यालय समय के दौरान इस मार्ग पर अक्सर लंबा जाम लग जाता है। प्रशासन का मानना है कि फ्लाईओवर बनने के बाद ट्रैफिक का दबाव कम होगा और लोगों का सफर तेज एवं सुरक्षित बनेगा। हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर लगाई रोक इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है। अदालत में दायर याचिका में कहा गया कि फ्लाईओवर परियोजना शहर के मास्टर प्लान और हेरिटेज स्वरूप के खिलाफ है। वहीं यूटी प्रशासन ने अदालत में कहा कि मास्टर प्लान-2031 में फ्लाईओवर निर्माण की अनुमति है और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए 5:1 अनुपात में 2,799 पौधे लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। उल्लेखनीय है कि ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर परियोजना का ठेका हाल ही में सिंगला कंस्ट्रक्शन को 147.98 करोड़ रुपये में दिया गया है। 1.6 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट में रोटरी और अंडरपास भी शामिल होंगे। निर्माण कार्य मई 2026 से शुरू होकर दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।  

हेमंत सरकार की सौगातें: अबुआ दवाखाना योजना से लेकर जैविक खेती तक कई प्रस्तावों को मंजूरी

रांची झारखंड के कर्मचारियों को एक बड़ी सौगात देते हुए राज्य सरकार ने उनके महंगाई भत्ते में दो प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई झारखंड कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। इस बैठक में कुल 39 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। जिनमें 'अबुआ दवाखाना' योजना की शुरुआत, नशे के कारोबार पर रोक लगाने के लिए नई पुरस्कार नीति तथा दिव्यांग और वरिष्ठ कलाकारों को मासिक आर्थिक सहायता देने जैसे कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सातवें वेतनमान का लाभ देते हुए डीए को 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया। वहीं छठे वेतनमान में डीए को 257 प्रतिशत से बढ़ाकर 262 प्रतिशत और पांचवें वेतनमान में 474 प्रतिशत से बढ़ाकर 483 प्रतिशत कर दिया। इस फैसले से राज्य के हजारों कर्मचारी और पेंशनभोगी लाभान्वित होंगे। 'अबुआ दवाखाना' योजना को दी मंजूरी इसके अलावा राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से हेमंत सरकार ने 'अबुआ दवाखाना' योजना को भी मंजूरी दे दी। इस योजना के तहत अलग-अलग स्थानों पर नए दवाखाने खोले जाएंगे, जहां लोगों को एलोपैथी के साथ आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्धा पद्धति से इलाज की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अवधि बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया। नशीले पदार्थों की जानकारी देने पर मिलेगा इनाम कैबिनेट ने मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए NDPS एक्ट के तहत नई पुरस्कार नीति लागू करने का भी फैसला किया। इसके तहत इस बारे में सूचना देने वालों को तीन हजार रुपए से लेकर दो लाख रुपए से अधिक तक का इनाम दिया जा सकेगा। बुजुर्ग व दिव्यांग कलाकारों को मासिक सहायता राशि बैठक में 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, गंभीर रूप से बीमार और दिव्यांग कलाकारों को हर महीने चार हजार रुपए सहायता राशि देने का भी निर्णय लिया गया। योजना का लाभ उन कलाकारों को मिलेगा जिनकी मासिक आय आठ हजार रुपए से कम है। इसके अलावा बैठक में राज्य सरकार ने 1.05 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा देने की योजना को भी मंजूरी दे दी। यह योजना वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक तीन चरणों में लागू होगी, जिस पर करीब 370 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। रेल लिंक लाइन निर्माण के लिए जमीन हस्तांतरण को मंजूरी इसके अलावा एक अन्य निर्णय के तहत कैबिनेट ने दुमका एयरपोर्ट से नियमित उड़ान सेवा शुरू करने के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के साथ समझौते को भी मंजूरी दे दी। साथ ही अन्य निर्णयों में खूंटी जिले में लोधमा-फिसका रेल लिंक लाइन निर्माण के लिए जमीन हस्तांतरण, मेडिकल कॉलेजों में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों और इंटर्न्स की स्टाइपेंड राशि में संशोधन तथा मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत व्यवसायिक बकरी पालन योजना के लिए चार करोड़ रुपए की स्वीकृति भी दी गई। शराब के रिटेलर्स को दी इस बात की राहत एक अन्य फैसले में बिजनेस में ईज ऑफ डूइंग को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने पेट्रोल, डीजल और शराब के खुदरा विक्रेताओं को त्रैमासिक रिटर्न और मासिक एब्सट्रैक्ट दाखिल करने की बाध्यता से भी राहत देने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि इससे कारोबारियों को कागजी प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी। बैठक में कई प्रशासनिक और विकास योजनाओं को भी मंजूरी दी गई। बगोदर-सरिया और चक्रधरपुर अनुमंडल न्यायालयों में नए पद सृजित किए जाएंगे। ITI संस्थानों के अपग्रेडेशन और पंचायतों को वित्तीय मदद देने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगाई गई।

बकरीद से पहले ताजमहल विवाद: संरक्षित स्मारक के भीतर आयोजन की जांच शुरू

आगरा आगरा के ताजमहल में भजन-कीर्तन किए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। बकरीद से एक दिन पहले सामने आए इस वीडियो में कुछ लोग ताजमहल की मुख्य गुंबद के नीचे बैठकर भजन-कीर्तन करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। एएसआई अधिकारी कलन्दर बिन्द ने बताया कि वायरल वीडियो की जानकारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को भेज दी गई है और मामले की जांच कराई जा रही है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वीडियो कब का है और इसमें दिखाई दे रहे लोग कौन हैं। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो की सत्यता और घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। ताजमहल में भजन-कीर्तन का वीडियो वायरल करीब एक मिनट दो सेकंड के वीडियो में भगवा वस्त्र पहने कुछ लोग भजन-कीर्तन करते नजर आ रहे हैं। वहीं आसपास बैठे अन्य लोग तालियां बजाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो रिकॉर्ड करने वाला व्यक्ति भी यह कहता सुनाई दे रहा है कि ताजमहल में भजन-कीर्तन हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।  आगरा के ताजमहल में पर्यटकों के भजन-कीर्तन करने का वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें 30-35 लोग मुख्य मकबरे के नीचे चमेली फर्श पर बैठकर कीर्तन करते दिख रहे हैं। ये वीडियो एक मिनट दो सेकेंड का है। CISF के हवाले ताजमहल की सुरक्षा ताजमहल देश के सबसे संवेदनशील और संरक्षित स्मारकों में गिना जाता है। इसकी आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआईएसएफ के पास है, जबकि बाहरी सुरक्षा व्यवस्था उत्तर प्रदेश पुलिस और ताज सुरक्षा पुलिस संभालती है। परिसर में प्रवेश से पहले पर्यटकों की एयरपोर्ट जैसी जांच की जाती है। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरे, मेटल डिटेक्टर, बैगेज स्कैनिंग और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती रहती है। ऐसे में वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच स्मारक के भीतर इस तरह का आयोजन कैसे हुआ। ताजमहल को लेकर कई बार उठे विवाद ताजमहल को लेकर पहले भी कई बार विवाद हो चुके हैं। कुछ हिंदुत्ववादी संगठन ताजमहल को तेजोमहालय बताते हुए यहां धार्मिक अनुष्ठान कराने की मांग करते रहे हैं। पूर्व में ताजमहल परिसर में भगवा झंडा फहराने और शिव चालीसा पाठ करने जैसी घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। शाहजहां उर्स के दौरान भी धार्मिक आयोजनों को लेकर विवाद होते रहे हैं। जांच में जुटी सुरक्षा एजेंसियां वायरल वीडियो के बाद लोगों का कहना है कि यदि संरक्षित स्मारक के भीतर इस प्रकार का आयोजन हुआ है तो यह सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन दोनों के लिए गंभीर विषय है। फिलहाल एएसआई और सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच में जुटी हैं।

57 हजार किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शन लंबित, अगस्त तक जारी करने का लक्ष्य

चंडीगढ़  हरियाणा में अब 45 दिन के अंदर बोरवेल लगाने की अनुमति दी जाएगी। जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन और प्रबंधन) प्राधिकरण ने भूजल निकालने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र और अनुमति देने से जुड़े कार्यों को सेवा का अधिकार अधिनियम में शामिल कर लिया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। पदाभिहित अधिकारी के रूप में मुख्य तकनीकी अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि निर्धारित समयावधि में अनापत्ति प्रमाणपत्र और अनुमति जारी कर दी जाए। 45 दिन में बोरवेल की अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में प्रथम शिकायत निवारण प्राधिकारी मुख्य जल विज्ञानी के पास अपील की जा सकेगी। अगर फिर भी अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ तो द्वितीय शिकायत निवारण प्राधिकारी के रूप में मुख्य कार्यकारी अधिकारी मामले को निपटाएंगे। वहीं, प्रदेश में अब भी 57 हजार किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शन लंबित हैं। इनमें से 13 हजार 360 किसान पूरा शुल्क जमा करा चुके हैं, जिन्हें अगस्त अंत तक ट्यूबवेल कनेक्शन जारी करने का लक्ष्य रखा गया है। 31 दिसंबर 2023 तक किए गए आवेदनों के लिए मांग नोटिस जारी किए जा चुके हैं। पूरी लागत राशि जमा करा चुके उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के 4241 और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के 9119 किसानों को छह महीने में बिजली कनेक्शन जारी कर दिए जाएंगे। 10 बीएचपी तक आवेदन करने वालों को आफ-ग्रिड सोलर पंप दिए जा रहे हैं। इसके अलावा एक जनवरी 2024 से 31 जनवरी 2026 के बीच आवेदन करने वाले 43 हजार 527 किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शन लंबित हैं। इनमें उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के 16 हजार 323 और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के 27 हजार 204 किसान शामिल हैं।