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अफवाहों से तरबूज बाजार बेहाल, बिक्री घटी; किसान और व्यापारी दोनों परेशान

भोपाल गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा खाए जाने वाले फलों में शामिल तरबूज इस बार डर की वजह से बाजार में मार झेल रहा है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में तरबूज खाने के बाद कथित मौतों की खबरें सामने आने के बाद लोगों ने इसे खरीदना कम कर दिया है, जिसका सीधा असर बिक्री और कीमतों पर पड़ा है। बाजार में मांग घटी, कीमतों में बड़ी गिरावट इन घटनाओं और सोशल मीडिया पर फैली खबरों के बाद भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में तरबूज की मांग तेजी से घट गई है। थोक और खुदरा दोनों बाजारों में बिक्री कम होने से किसानों और छोटे फल विक्रेताओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई जगहों पर दाम 20 से 30 प्रतिशत तक नीचे आ गए हैं। पहले जो तरबूज 18–20 रुपए किलो बिक रहा था, वह अब 12–13 रुपए किलो तक पहुंच गया है, जबकि थोक में कीमत 7–8 रुपए किलो तक गिर गई है। संदिग्ध मामलों से बढ़ी चिंता मुंबई के पायधुनी इलाके में अप्रैल के अंत में एक परिवार की मौत के बाद मामला चर्चा में आया, जहां खाने के बाद अचानक सभी की तबीयत बिगड़ गई थी। बाद में फोरेंसिक रिपोर्ट में तरबूज में जिंक फॉस्फाइड जैसे जहरीले रसायन के संकेत मिलने की बात सामने आई, हालांकि जांच अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा मध्यप्रदेश के श्योपुर में भी इसी तरह का मामला सामने आया, जहां तरबूज खाने के बाद दो लोगों की मौत हो गई थी और सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। मंडियों में माल, लेकिन ग्राहक गायब भोपाल की करोंद फल मंडी में रोजाना 15 से 20 मिनी ट्रक तरबूज पहुंच रहा है। थोक व्यापारी मोहम्मद सैफुद्दीन का कहना है कि पिछले 15-20 दिनों में बिक्री पर बड़ा असर पड़ा है। उन्होंने बताया, ‘पहले 25-30 क्विंटल तरबूज वाली गाड़ी सुबह तक खाली हो जाती थी, लेकिन अब दोपहर तक भी मुश्किल से बिकती है। मजबूरी में दाम घटाने पड़ रहे हैं। अगर ये खबरें नहीं आतीं तो इतनी गर्मी में बिक्री दोगुनी होती और भाव 25-30 रुपए किलो तक पहुंच जाते।’ इंदौर में भी स्थिति अलग नहीं है। फार्मिंग इन्फ्लूएंसर नीलेश पाटीदार के मुताबिक सोशल मीडिया पर वायरल खबरों ने पूरे बाजार को प्रभावित किया है। उनका कहना है कि अच्छी गुणवत्ता वाले तरबूज के दाम सामान्य स्थिति में 17-18 रुपए किलो तक जाते, लेकिन अभी 10-12 रुपए से ऊपर नहीं पहुंच पा रहे। सबसे ज्यादा मार छोटे विक्रेताओं पर फुटपाथ पर फल बेचने वाले छोटे व्यापारियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। भोपाल के अशोका गार्डन में ठेला लगाने वाले राजू बताते हैं कि गर्मी के मौसम में तरबूज ही उनकी कमाई का सबसे बड़ा सहारा होता है, लेकिन इस बार बिक्री आधी रह गई है। राजू कहते हैं, ‘वीडियो और खबरें वायरल होने के बाद लोग खरीदने से डर रहे हैं। जो ग्राहक आते भी हैं, वे पूछते हैं कि इसमें कुछ मिलाया तो नहीं गया।’ किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा खंडवा जिले के किसान अजय सिंह गुर्जर ने बताया कि इस बार मौसम अच्छा होने से उत्पादन बढ़िया हुआ और किसानों को अच्छी कमाई की उम्मीद थी। लेकिन अचानक मांग घटने से हालात बिगड़ गए। उन्होंने कहा, ‘मंडी में दाम इतने गिर गए कि लागत निकालना मुश्किल हो गया। कई व्यापारी खेत से माल उठाने ही नहीं पहुंचे। कई जगह 5-6 रुपए किलो तक भाव आ गए। मजबूरी में फसल खेतों में ही खराब हो गई।’ खरीदारों में डर, बदल रही आदतें भोपाल में पढ़ाई कर रहे एक छात्र के अनुसार, ऐसी खबरों के बाद लोग तरबूज खरीदने से बच रहे हैं या फिर बहुत सावधानी से चुनकर खरीद रहे हैं। कई ग्राहक अब इसकी जगह अन्य फलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे बाजार में मांग और भी कम हो गई है। मंडियों में माल ज्यादा, ग्राहक कम भोपाल की करोंद फल मंडी में रोजाना कई ट्रक तरबूज पहुंच रहे हैं, लेकिन बिक्री धीमी पड़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि पहले पूरा माल सुबह तक बिक जाता था, लेकिन अब दिनभर में भी पूरा स्टॉक खत्म नहीं हो रहा। मजबूरी में दाम घटाने पड़ रहे हैं। इंदौर में भी स्थिति लगभग ऐसी ही है, जहां अच्छे क्वालिटी के तरबूज भी सामान्य कीमत से काफी कम दाम पर बिक रहे हैं। फूड सेफ्टी विभाग अलर्ट मामले सामने आने के बाद भोपाल, जबलपुर समेत कई शहरों में फूड सेफ्टी विभाग ने जांच अभियान चलाया। एहतियात के तौर पर कई जगह सैंपलिंग की गई है। भोपाल के फूड सेफ्टी अधिकारी पंकज श्रीवास्तव के मुताबिक दुकानों और गोदामों से तरबूज, आम समेत कई फलों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। कुछ जगहों पर कृत्रिम रूप से फल पकाने में इस्तेमाल किए जा रहे संदिग्ध केमिकल भी जब्त किए गए हैं। घर पर ऐसे करें तरबूज की जांच भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के अनुसार तरबूज में कृत्रिम रंग या मिलावट की पहचान घर पर भी की जा सकती है।     कॉटन टेस्ट: तरबूज के लाल हिस्से पर सफेद कॉटन या टिशू पेपर रगड़ें। अगर कॉटन गहरा लाल या चटक गुलाबी हो जाए तो कृत्रिम रंग होने की आशंका हो सकती है।     वाटर टेस्ट: तरबूज का छोटा टुकड़ा पानी से भरे ग्लास में डालें। यदि पानी तुरंत लाल या गुलाबी होने लगे तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है। इसके अलावा तरबूज के अंदर बड़े क्रैक, ज्यादा सफेद-पीले रेशे या असामान्य रूप से चमकदार सतह भी कृत्रिम पकाने के संकेत माने जाते हैं। विशेषज्ञ भरोसेमंद दुकानदार से ही ताजा फल खरीदने की सलाह दे रहे हैं।

बिजली हादसों से बचने सतर्क रहें, सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में करें कंपनी का सहयोग

आमजन सामाजिक दायित्‍वों के निर्वहन के साथ कंपनी का करें सहयोग विद्युत दुर्घटनाओं से बचाव के प्रति सतर्कता बरतें भोपाल विद्युत वितरण कंपनियों ने कतिपय प्राकृतिक और मानवीय कारणों से होने वाली विद्युत दुर्घटनाओं से बचाव के लिए आमजनों और उपभोक्‍ताओं से अपील की है कि वे विद्युत लाइनों, वितरण ट्रांसफार्मरों तथा अन्‍य विद्युतीय उपकरणों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड न करें तथा सजगता और सतर्कता बरतते हुए अपने दैनिक कार्यों का निर्वहन करें। आमजन अमूल्‍य जीवन और विद्युत सुरक्षा की ओर विशेष ध्यान देते हुए पूर्व से विद्यमान विद्युतीय उपकरणों, लाइनों तथा वितरण ट्रांसफार्मरों के समीप भवन निर्माण, कालोनी के निर्माण और रोड के विस्तार के दौरान विद्युत सुरक्षा के मापदण्डों के अनुसार उचित दूरी का ध्यान रखें। विद्युत उपकरणों के साथ छेड़खानी करना या उन्‍हें नुकसान पहुंचाना अथवा चुराकर ले जाना कानूनी अपराध है और इसके लिए जुर्माने और सजा का प्रावधान है। आम लोगों से अपील की गयी है कि वे इस प्रकार की घटना होने पर तत्‍काल इसकी सूचना नजदीकी विद्युत वितरण केन्द्र पर दें। साथ ही इस प्रकार से गैर कानूनी कार्य करने वालों को रोकने के लिए आमजन अपना सामाजिक दायित्‍व समझकर इस तरह की अव्‍यवस्‍थाओं पर अंकुश लगाने में कंपनी का सहयोग करें। अक्सर यह देखने में आया है कि कालोनी के विद्युतीकरण के दौरान कालोनाइज़र अपनी सुविधा से बिजली के खम्बों को लगा देता है तथा सड़क विस्तार के दौरान सड़क को ऊंचा कर दिया जाता है। कई बार यह पाया जाता है कि रोड ऊंची कर ली जाती है परन्तु बिजली के खम्बों से रोड के बीच का विस्तार और दूरी को ध्यान में नहीं रखा जाता तथा सुरक्षा के नियमों को अनदेखा कर दिया जाता है। फलस्वरूप दुर्घटना की आशंका बनी रहती है और कभी-कभी दुर्घटनाएं हो भी जाती है। कंपनी ने कहा है कि भवन निर्माण और विस्तार के दौरान यदि कोई भवन निर्माता/संस्था निर्धारित प्रावधान के अनुसार काम नहीं करता है तो संबंधित संस्थाओं अथवा व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जाए। कंपनी ने अपने मैदानी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि विद्युत लाइनों की पेट्रोलिंग कराते समय यदि कहीं रोड, भवन, स्ट्रक्चर का निर्माण नियम विरूद्ध होता हुआ पाया जाता है तो संबंधित उपभोक्ता, एजेन्सी और भवन स्वामी को विद्युत अधिनियम 2003 के अनुसार सुरक्षित अंतराल रखने के लिये रजिस्टर्ड नोटिस जारी करें तथा नोटिस की अवधि के दौरान सुरक्षित अंतराल बनाये रखने के लिये कार्यवाही नहीं किये जाने पर उसके विरूद्ध वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार त्वरित कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित करें। नई लाइनों के निर्माण में रोड, भवन या स्ट्रक्चर से नियमानुसार निर्धारित सुरक्षित दूरी रखते हुए ही कार्य कराए जाएं। विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत बनने वाली सड़क मार्गों के ऊपर से गुजरने वाली लाइनों का अंतराल यदि प्रस्तावित सड़क के कारण कम हो रहा है तो विद्युत लाइन के खम्बों की ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव कम्पनी के प्रचलित नियमानुसार संबंधित एजेन्सी को नोटिस के साथ भेजें और साथ ही सुनिश्चित करें कि निर्धारित सुरक्षित अंतराल मेन्टेन करने के बाद ही उस लोकेशन पर सड़क निर्माण हों।  

भीषण गर्मी में MP में बियर की किल्लत, सरकार और ठेकेदारों के आंकड़ों में बड़ा फर्क

भोपाल  मध्य प्रदेश में इस बार गर्मियों का सीजन बियर के शौकीनों के लिए काफी मायूस करने वाला साबित हो रहा है। राज्य में बियर की सप्लाई में भारी गिरावट आई है, जिससे कई बड़े शहरों के आउटलेट्स खाली पड़े हैं। इस संकट की मुख्य वजह आबकारी विभाग द्वारा इसी साल फरवरी में रायसेन स्थित एक निजी मैन्युफैक्चरिंग और बॉटलिंग यूनिट को बंद किया जाना है। इस फैक्ट्री के बंद होने से बाजार में अचानक बड़ा गैप आ गया, जिसकी भरपाई समय रहते नहीं की जा सकी। सरकार का दावा बनाम इंडस्ट्री की हकीकत आबकारी कमिश्नर दीपक सक्सेना के मुताबिक, विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए दूसरे राज्यों और स्थानीय डिस्टिलरीज से बैकअप अरेंजमेंट किया है। सरकार का दावा है कि शुरुआती 45% के घाटे को अब घटाकर सिर्फ 14% पर ले आया गया है। हालांकि, शराब कारोबारियों और इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जमीनी स्तर पर यह किल्लत अभी भी 45% के आसपास बनी हुई है, क्योंकि सरकार समय पर वैकल्पिक टेंडर जारी करने में नाकाम रही। दरअसल, पीक सीजन में राज्य में रोजाना दो लाख क्रेट बियर की मांग रहती है, जिसमें से आधी सप्लाई अकेले रायसेन की इसी बंद पड़ी यूनिट से होती थी। मध्य प्रदेश का सिस्टम उत्तर प्रदेश जैसा नहीं है, जहां कंपनियां सीधे ठेकेदारों से संपर्क करती हैं। यहां सरकार के मदर डिपो से सप्लाई होती है। जब सरकार हमसे भारी आबकारी ड्यूटी लेती है, तो मांग के मुताबिक स्टॉक देना भी उसी की जिम्मेदारी है। विभाग रायसेन प्लांट के बंद होने के बाद के हालात का अंदाजा लगाने में पूरी तरह फेल रहा। देशव्यापी है बियर की कमी इसके अलावा, भोपाल के सहायक आबकारी आयुक्त वीरेंद्र सिंह धाकड़ ने बताया कि बियर की कमी इस बार देशव्यापी है। इस साल नए सिरे से हुए ठेकों और नीलामी में देरी के कारण वेंडर गर्मियों के लिए एडवांस स्टॉक जमा नहीं कर पाए। रही सही कसर छोटे कस्बों के वेंडर्स ने पूरी कर दी, जिन्होंने प्रीमियम बियर के बड़े स्टॉक पहले ही बुक कर लिए, जिससे भोपाल जैसे मुख्य शहरों में हाई-एंड ब्रांड्स की भारी कमी हो गई है।  

ASDDF फॉर्मूला के तहत वोटर एब्सेंट, शिफ्ट, डेथ, डुप्लीकेट या फॉरेन नेशनल मतदाताओं की सूची अपडेट की जाएगी

नई दिल्ली  चुनाव आयोग ने दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कार्यक्रम को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार ने बुधवार को कहा कि 30 जून से बीएलओ घर-घर जाकर तय नियमों के अनुसार यहां SIR की प्रक्रिया शुरू करेंगे। एक महीने के अंदर इसे पूरा किया जाएगा। इसके लिए आयोग ने ASDDF फॉर्मूला तैयार किया है। बीएलओ मौके पर जाकर देखेंगे कि क्या कोई वोटर एब्सेंट है, कहीं और शिफ्ट हो गया है, डेथ हो गई या डुप्लीकेट मतदाता है या फॉरेन नेशनल है। ऐसे कारण अगर आस-पड़ोस से पूछताछ और लिस्ट की चेकिंग के बाद मिलते हैं तो वोटर लिस्ट से नाम हटा दिया जाएगा। अशोक कुमार ने बताया कि BLO जब लोगों के घर आएंगे, तो वे दो कॉपियों वाला एक एन्यूमरेशन फॉर्म देंगे। इसकी एक कॉपी भरकर वापस बीएलओ को देनी होगी। अगर आपका घर बंद मिलता है या आप बीएलओ से नहीं मिल पाते हैं, तो वे आपके घर में फॉर्म छोड़कर चले जाएंगे। नियम के मुताबिक, बीएलओ को एक घर में कम से कम तीन बार चक्कर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। तब ASDDF के तहत उनका नाम काटा जाएगा। ऑनलाइन फॉर्म भरने का विकल्प भी खुला रखा गया है। वेबसाइट पर मौजूद है पुराना रिकॉर्ड जनता को अपने पुराने रिकॉर्ड ढूंढने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए वेबसाइट voters.eci.gov.in पर साल 2002 की वोटर लिस्ट अपलोड कर दी गई है। जो लोग 2002 से दिल्ली में स्थायी रूप से रह रहे हैं, वे वहां अपना ब्योरा देख सकते हैं। फॉर्म पर BLO का नाम और नंबर अशोक कुमार ने कहा कि एन्यूमरेशन फॉर्म पर संबंधित बूथ के बीएलओ का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज होगा। फॉर्म भरने में समस्या आने पर या 2002 की लिस्ट नाम न मिलने पर बीएलओ से जानकारी ले सकते हैं। इसके लिए दिल्ली में 13,033 बीएलओ की ड्यूटी लगाई जाएगी। क्या है ASDDF? वोटर एब्सेंट (A) है, कहीं और शिफ्ट (S) हो गया है, डेथ (D) हो गई है या डुप्लीकेट (D) मतदाता है या फॉरेन नेशनल (F) है। अशोक कुमार ने कहा कि एन्यूमरेशन फॉर्म पर संबंधित बूथ के बीएलओ का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज होगा। जिन्हें फॉर्म भरने में समस्या आ रही है या 2002 की सूची में उनका नाम नहीं मिल रहा है, तो सीधे बीएलओ को फोन करके जानकारी ले सकते हैं। इसके लिए राजधानी में 13,033 बीएलओ को जमीन पर उतारा जा रहा है। सरकारी अमले के साथ-साथ इस काम में पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए 6 प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त किए गए 29,758 बूथ लेवल एजेंट भी फील्ड में सक्रिय रहेंगे दिल्ली से बाहर से आने वाले कैसे खोजें अपना नाम अगर 2002 के बाद दिल्ली में आकर बस गए हैं, तो आपका नाम जिस राज्य से आप आए हैं, वहां की 2002 से 2005 की SIR सूची में दिखेगा। इसके लिए आपको ईसीआई की वेबसाइट voters.eci.gov.in में जाना होगा। यहां 'सर्च योर नेम लास्ट एसआई' पर क्लिक करें। फिर 'सर्च बाय इलेक्टर डिटेल्स' में अपनी जानकारी भरकर डिटेल्स प्राप्त करें। दिल्ली के लोग ऐसे खोजें अपना नाम www.ceo.delhi.gov.in पर जाएं। जहां आपको सर्च बार में EPIC नंबर इलेक्टर डिटेल और पोलिंग स्टेशन के विकल्प दिखाई देंगे। इनसे आप 2002 की मतदाता सूची की डिटेल्स निकाल सकते हैं। यदि 2002 का EPIC नंबर मालूम है तो अपना नंबर और कैप्चा एंटर करें। अगर इलेक्टर डिटेल से सर्च करना चाहते हैं तो इसके ऑप्शन में जाकर AC नंबर भरें।  

ताजमहल से लेकर बटेश्वर तक सभी स्मारक, सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं की होगी संख्या अंकन

आगरा  जन-जन की गणना का कार्य गति पकड़ रहा है। प्रगणक प्रत्येक मकान की जियो टैगिंग करते हुए नंबर आवंटित कर रहे हैं। इसमें ताजमहल, आगरा किला सहित सभी स्मारक, कमिश्नरी, कलक्ट्रेट भी शामिल हैं। जनगणना ताजमहल को एक नंबर, आगरा किला को 150 और बटेश्वर को 170 नंबर में अंकित किया गया है। जनगणना ठीक तरीके से करने के लिए जिले को 23 जोन में बांटा गया है। जनगणना के लिए 11 हजार प्रगणक लगाए गए हैं। जिले में 16 साल के बाद 22 मई से जनगणना शुरू हुई है जो 20 जून तक चलेगी। प्रत्येक प्रगणक को 180 से 200 मकानों का सर्वे करना होगा। सबसे पहले प्रत्येक मकान की जियो टैगिंग की जाएगी। जिला जनगणना अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि विश्वदाय स्मारक ताजमहल को एक नंबर, आगरा किला को 150, सिकंदरा स्मारक को 47, फतेहपुर सीकरी स्मार को 40, बटेश्वर को 170 नंबर में चिन्हित किया गया है। सभी स्मारकों, सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों, स्कूल-कालेजों की जियो टैगिंग होगी। फील्ड में उतरेंगे सुपरवाइजर, लापरवाही पर मुकदमा नगर निगम को चार जोन में बांट जनगणना हो रही है। जनगणना कार्य को गति देने और प्रत्येक वार्ड में प्रगति को लेकर बुधवार को अपर नगरायुक्त शिशिर कुमार ने बैठक की। बैठक में अपर नगरायुक्त ने कहा कि सभी सुपरवाइजर प्रतिदिन फील्ड में जाकर प्रगणकों से गणना कार्य कराएं और कार्य की नियमित मानीटरिंग करें। जिन प्रगणकों और सुपरवाइजरों द्वारा कार्य में रुचि नहीं दिखाई जा रही है, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। कई स्थानों पर प्रगणकों द्वारा अभी तक ड्यूटी ज्वाइन नहीं की गई है, जिससे कार्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे प्रगणकों और सुपरवाइजरों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बैठक में उपनगर आयुक्त डा. सरिता सिंह, सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम मौजूद रहे। सही और सटीक दें जानकारी जनगणना प्रमुख मनीष बंसल ने कहा कि प्रगणकों द्वारा मकानों का सूचीकरण किया जा रहा है। प्रत्येक व्यक्ति से 33 प्रश्नों के उत्तर पूछे जाएंगे। लोगों को प्रश्नों के उत्तर सही और सटीक देने होंगे। प्रश्नों के उत्तर गलत न दें और न ही टालमटोल करें।  

दूषित पानी और बाहर का खाना बना बीमारी की वजह, अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें

 भिवानी  लगातार बढ़ रही गर्मी अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। तेज तापमान और दूषित पानी के कारण उल्टी-दस्त, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। वीरवार को पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कालेज की ओपीडी बंद होने के बावजूद के अस्पताल के आपातकालीन विभाग में मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। रोजाना 50 से 60 मरीज उल्टी-दस्त और पेट संबंधी समस्याओं को लेकर ओपीडी पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चे, बुजुर्ग और युवा सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। गर्मी की छुट्टियों में बच्चे बाहर खेल रहे हैं और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ खाने से बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि दूषित पानी और बाहर का तला-भुना खाना पेट संबंधी बीमारियों की बड़ी वजह बन रहा है। अस्पतालों में आने वाले अधिकांश मरीजों को दवा के साथ खानपान और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है। दूषित पानी भी बढ़ा रहा समस्या अस्पताल में आने वाले मरीजों से बातचीत के दौरान सामने आया कि कालोनियों में सप्लाई हो रहा दूषित पानी भी एक मुख्य समस्या है। असल में शहर की अंदरूनी कॉलोनियों में सबसे अधिक दूषित पानी सप्लाई की समस्या बनी हुई है। सबसे अधिक बिचला बाजार, हालु बाजार, दिनोद गेट, नया बाजार, बर्तन बाजार, बाग कोठी, सराय चौपटा, हालुवास गेट, हनुमान गेट आदि क्षेत्र में समस्या बनी हुई है। डाक्टरों की सलाह, हल्का भोजन करें, धूप से बचें स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से गर्मी में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। डाक्टरों का कहना है कि साफ और शुद्ध पानी पीएं, खुले में बिकने वाले कटे फल और फास्ट फूड से दूरी बनाएं। मसालेदार और ज्यादा तैलीय भोजन से परहेज करें तथा हल्का और सुपाच्य भोजन लें। बच्चों को तेज धूप में बाहर न भेजें और जरूरत पड़ने पर सिर ढककर ही बाहर निकलें। साथ ही शरीर को ढकने वाले सूती कपड़े पहनने और नियमित हाथ धोने की सलाह भी दी गई है। विशेषज्ञों ने छह माह तक के बच्चों को मां का दूध पिलाने पर भी जोर दिया है। गर्मी में इन बातों का रखें खास ध्यान     बच्चों को धूप में खेलने से बचाएं     घर से निकलते समय सिर ढकें और पानी साथ रखें     साफ-सफाई और हाथ धोने की आदत अपनाएं     खुले खाद्य पदार्थ और फास्ट फूड से दूरी रखें     हल्का और ताजा भोजन करें     पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीएं  

कोविड राहत खत्म, एफआरबीएम एक्ट के तहत झारखंड की ऋण सीमा अब और कड़ी

रांची  केंद्र सरकार ने राज्यों को दी जानेवाली ऋण राशि में अब गैर बजटीय उधारी को भी जोड़ने का निर्णय लिया है। इसकी सूचना राज्यों को दे भी दी गई है। इस प्रकार नई व्यवस्था में राज्यों के लिए ऋण लेना पहले से कठिन हो जाएगा। झारखंड सरकार के लिए मुसीबत की बात यह है कि इसमें गैर बजटीय उधारी को भी शामिल करने की बात कही गई है। ऐसा हुआ तो राज्यों को एफआरबीएम (फिस्कल रेस्पांसिबिलिटि एंड बजट मैनेजमेंट ) एक्ट के तहत मिलनेवाली ऋण राशि पहले से कम हो जाएगी। कोविड काल में राज्यों को एक जीएसडीपी के हिसाब से चार प्रतिशत तक ऋण लेने की छूट दी गई थी और इसके ऊपर एक प्रतिशत ऋण बिना किसी शर्त के लिया जा सकता था। अब राज्यों को कोविड के कारण मिलनेवाली सुविधाओं को समाप्त कर दिया गया है। साथ ही गैर बजटीय उधारी को शामिल किए जाने से ऋण लेने की सीमा निर्धारित हो जाएगी। झारखंड सरकार पर कुल बकाया कर्ज की राशि 1.10 लाख करोड़ रुपये के ऊपर पहुंच चुकी है। देश के कई राज्यों पर इससे भी अधिक कर्ज है। कर्ज लेने की इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2003 में एफआरबीएम एक्ट को पास कराया था। यह कानून राज्यों को एक निर्धारित सीमा में ऋण लेने को बाध्य करता है। अभी यह सीमा बजट के हिसाब से तीन प्रतिशत पर सीमित है। इसे कोविड काल में दो प्रतिशत तक बढ़ाने की छूट केंद्र सरकार से मिली थी। इसमें एक प्रतिशत सशर्त छूट थी तो एक प्रतिशत पर कोई शर्त नहीं थोपा गया था। अब राज्यों को मिलनेवाली गैर बजटीय उधारी को भी सम्मिलित करने के केंद्र के निर्देश के आलोक में वित्त विभाग ने कैबिनेट से प्रस्ताव भी पारित करा लिया है। ऐसे में राज्य सरकार के लिए उधारी की सीमा और भी नियंत्रित हो जाएगी। आम तौर पर राज्य सरकार को विभिन्न एजेंसियों से विकास योजनाओं के लिए ऋण की राशि मिलती रहती है। नई व्यवस्था में इसको भी राज्य के ऊपर कुल ऋण में जोड़कर देखा जाएगा। झारखंड पर पहले से ही 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक का है कर्ज झारखंड सरकार पूर्व में ही विभिन्न एजेंसियों से 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज उठा चुकी है।अलग-अलग वर्षों में विकास कार्यों को पूरा करने के लिए उधारी ली गई है। कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को पूरा करने के लिए अभी भी राज्य सरकार बाजार से भी कर्ज उठाती है। चालू वित्तीय वर्ष में भी राज्य सरकार विभिन्न माध्यमों से 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण लेने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई राज्यों की प्री-बजट बैठक के दौरान मैंने यह मामला उठाया था। एफआरबीएम की सीमा तीन प्रतिशत से बढ़ाकर पांच प्रतिशत तक करने की मांग की थी। तीन प्रतिशत के दायरे में ही झारखंड को और भी ऋण मिल सकता है। निर्धारित अनुपात को देखें तो राज्य सरकार अभी आठ हजार करोड़ रुपये और ऋण ले सकती है। अच्छी बात यह है कि हमें इसकी आवश्यकता नहीं पड़ रही है। गैर बजटीय ऋण को जोड़कर हमारे अधिकारों को रोका नहीं जा सकता है। -राधाकृष्ण किशोर, वित्त मंत्री, झारखंड।  

भीषण गर्मी से निपटने की तैयारी तेज, अस्पतालों और बिजली व्यवस्था पर सीएम योगी की नजर

लखनऊ उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रहे तापमान और हीट वेव के खतरे को देखते हुए सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग और राहत एजेंसियों को सतर्क रहते हुए प्रभावी इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि कि आमजन को गर्मी से राहत दिलाने में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को अस्पतालों, पेयजल आपूर्ति और बिजली व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखने को कहा है। निर्देश दिए गए हैं कि सरकारी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त बेड, दवाएं, आइस पैक, ओआरएस और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रहें, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सके। सीएम योगी आदित्यनाथ ने राहत और बचाव कार्य पूरी गंभीरता और तत्परता के साथ संचालित किए जाएं। विशेष रूप से श्रमिकों, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मजदूरों को लू, थकावट और निर्जलीकरण से बचाने के लिए जरूरी इंतजाम किए जाएं। उन्होंने इसके साथ ही आमजन से भी सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि लोग दोपहर में तेज धूप में बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और हल्के, सूती या खादी के ढीले कपड़े पहनें। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की सलाह भी दी गई है। इसके साथ ही आग लगने की घटनाओं को लेकर भी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। अपील की कि ऐसी किसी भी लापरवाही से बचें, जिससे आग लगने की आशंका पैदा हो सकती है।

साइबर अटैक से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और वेतन व्यवस्था प्रभावित

कानपूर कानपुर नगर निगम की मुख्य आधिकारिक वेबसाइट गुरुवार दोपहर अचानक हैक हो गई। इस हाई-प्रोफाइल साइबर हमले के बाद कानपुर से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक के प्रशासनिक गलियारों और आईटी (IT) महकमे में हड़कंप मच गया है। सरकारी वेबसाइट के हैक होते ही नगर निगम से जुड़ी तमाम ऑनलाइन जनहित सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं, जिससे आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एनआईसी के इंजीनियरों में खलबली जैसे ही वेबसाइट के हैकिंग की भनक लगी, सरकारी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का संचालन और रखरखाव करने वाली देश की सबसे बड़ी एजेंसी, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के इंजीनियरों की टीम तुरंत अलर्ट मोड पर आ गई। दिल्ली और लखनऊ के वरिष्ठ आईटी विशेषज्ञों व इंजीनियरों की फौज इस तकनीकी सेंधमारी को ठीक करने और वेबसाइट को दोबारा बहाल करने में जुट गई है। हालांकि, साइबर हमला इतना तगड़ा है कि खबर लिखे जाने तक वेबसाइट को पूरी तरह चालू नहीं किया जा सका था। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर कर्मचारियों का वेतन तक अटका नगर निगम की मुख्य वेबसाइट हैक होने के कारण इसका सबसे बड़ा और सीधा असर आम जनता से जुड़ी बुनियादी डिजिटल सेवाओं पर पड़ा है। अधिकारियों के मुताबिक, वेबसाइट ठप होने से सबसे ज्यादा जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। सैकड़ों लोग अस्पतालों और दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। नगर निगम के महत्वपूर्ण टेंडर विकास कार्यों के ऑनलाइन प्रस्ताव और नगर निगम से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण सेवाएं भी पूरी तरह ब्लॉक हो गई हैं। इतना ही नहीं, इस साइबर सेंधमारी की वजह से नगर निगम के हजारों कर्मचारियों के वेतन और भत्तों से संबंधित महत्वपूर्ण डेटा और ऑनलाइन सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे कर्मचारियों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी? इस पूरे साइबर संकट और तकनीकी खामी को लेकर जब नगर निगम के आईटी विभाग के आला अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया। नगर निगम आईटी विभाग के नोडल अधिकारी राहुल सबबरवाल के अनुसार,वेबसाइट के सर्वर में कुछ गंभीर दिक्कतें आई हैं और हैकिंग की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। एनआईसी के विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम लगातार सिस्टम की बारीकी से जांच कर रही है और इसे ठीक करने में जुटी है। हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द सभी ऑनलाइन सेवाओं को सुरक्षित तरीके से बहाल कर दिया जाए ताकि जनता को और अधिक परेशानी न उठानी पड़े।  

कामकाजी महिलाओं को बड़ी राहत: बिहार में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को मिलेगी पीरियड लीव

 पटना बिहार की सम्राट सरकार ने राज्य की कामकाजी महिलाओं के हित में एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला लिया है। एनडीए सरकार की इस नई पहल के बाद अब राज्य की संविदा और आउटसोर्सिंग महिला कर्मचारियों को एक बहुत बड़ी राहत मिलने जा रही है। सरकार ने इन महिलाओं के लिए एक विशेष नीति को मंजूरी दी है, जिसके तहत इन्हें हर महीने 'स्पेशल लीव' की सौगात दी जाएगी। सरकार के इस बड़े कदम से राज्य की लगभग डेढ़ लाख से अधिक महिला कर्मियों को सीधा फायदा पहुंचने की उम्मीद है। हर महीने मिलेगी 2 दिनों की स्पेशल लीव, बिहार बना देश का पहला राज्य इस नई नीति के लागू होने के बाद अब बिहार की तमाम संविदा, बेलट्रॉन और आउटसोर्सिंग महिला कर्मचारियों को हर महीने 2 दिनों की स्पेशल लीव दी जाएगी। गौरतलब है कि नियमित सरकारी महिला कर्मचारियों की तरह ही इन संविदा कर्मियों को भी लंबे समय से इस सुविधा की दरकार थी। अब बिहार पूरे देश में ऐसा पहला और इकलौता राज्य बन गया है, जिसने संविदा और आउटसोर्सिंग स्तर पर काम करने वाली महिलाओं को प्रति माह 2 दिनों की विशेष छुट्टी देने की घोषणा की है। पीरियड लीव का पुराना इतिहास और अन्य राज्यों की स्थिति क्या है? बिहार में महिला कर्मचारियों को मिलने वाली यह विशेष छुट्टी असल में 'पीरियड लीव' के तौर पर जानी जाती है। इस व्यवस्था की सबसे पहली शुरुआत 34 साल पहले साल 1992 में लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान की गई थी, जब नियमित महिला कर्मियों के लिए 2 दिनों की विशेष छुट्टी का प्रावधान लागू हुआ था। हाल ही में कर्नाटक सरकार ने भी अपने राज्य में सरकारी और प्राइवेट सेक्टर्स की महिलाओं के लिए पीरियड लीव की नीति घोषित की है, लेकिन वहां केवल एक ही दिन की छुट्टी का प्रावधान है। वहीं बिहार अब संविदा और आउटसोर्सिंग महिलाओं के लिए भी पूरे 2 दिनों की छुट्टी लागू कर देश में सबसे आगे निकल गया है। ड्यूटी टाइमिंग के विवाद के बीच महिला कर्मियों के लिए बड़ी राहत बता दें कि यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में मुख्य सचिव के एक पत्र को लेकर काफी घमासान मचा हुआ था। दरअसल, नए आदेश के मुताबिक नियमित महिला कर्मचारियों की ड्यूटी शाम 5 बजे तक तय है, जबकि संविदा और आउटसोर्सिंग महिला कर्मियों को शाम 6 बजे तक यानी एक घंटा अतिरिक्त ड्यूटी करनी पड़ रही है। इस टाइमिंग को लेकर भले ही अभी थोड़ा कन्फ्यूजन बना हुआ है, लेकिन इसी बीच बीजेपी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से ट्वीट कर इस 2 दिनों की 'स्पेशल लीव' की घोषणा ने महिलाओं के चेहरे पर बड़ी खुशी ला दी है। महिला संगठनों का कहना है कि यह नई व्यवस्था कामकाजी महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान के लिए एक संजीवनी की तरह काम करेगी।