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दिग्विजय सिंह के बयान से बढ़ा सियासी विवाद, BJP ने साधा निशाना

 भोपाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक सांप्रदायिकता से कहीं ज्यादा खतरनाक बहुसंख्यक सांप्रदायिकता होती है। भोपाल में बुधवार को पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह बयान दिया, जिसके बाद राजनीति गरमा गई है। नेहरू के विचारों का हवाला देकर कही यह बात नेहरू के विचारों का हवाला देते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू मानते थे कि सांप्रदायिकता समाज में नफरत फैलाती है। उन्होंने आगे कहा कि अल्पसंख्यक वर्ग की सांप्रदायिकता से ज्यादा खतरनाक बहुसंख्यक सांप्रदायिकता होती है और आज देश के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती है।  

भ्रष्टाचार और लापरवाही पर गिरी गाज, राजस्व विभाग में सख्त कार्रवाई

पटना  बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने भ्रष्टाचार को लेकर कड़ा रुख अपना रखा रहा है। भ्रष्टाचार को लेकर नीतीश कुमार की तरह सम्राट सरकार भी जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। इसी के तहत आज बुधवार को 14 अंचल अधिकारियों (सीओ) पर कार्रवाई की गई है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने एक साथ 14 सीओ पर एक्शन लेते हुए सस्पेंड कर दिया गया है। 14 अंचल अधिकारियों पर मंत्री दिलीप जायसवाल ने लिया एक्शन मिली जानकारी के मुताबिक, मिली जानकारी के मुताबिक, अलग-अलग मामलों में ये कार्रवाई की गई है। ये कार्रवाई भ्रष्टाचार के मामले में, काम में लापरवाही के मामले में, काम में अनियमितता को लेकर भी कार्रवाई की गई है। मंत्री दिलीप जायसवाल ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से जुड़े 14 अंचल अधिकारियों पर कार्रवाई की है। दानापुर, पाटलिपुत्र, राघोपुर सहित 14 सीओ के खिलाफ हुई कार्रवाई मंत्री दिलीप जायसवाल ने पत्थरघट के सीओ राकेश कुमार, पाटलिपुत्र के सीओ अनुज कुमार, दानापुर के सीओ चंदन कुमार, सिसवन के सीओ पंकज कुमार, राघोपुर के अंचल अधिकारी संजीव कुमार त्रिवेदी सहित 14 सीओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की है। लापरवाही और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा: मंत्री दिलीप जायसवाल इस मामले पर मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि लापरवाही और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि दो ढाई महीने तक विभाग में हड़ताल चली। इस वजह से पूरे विभाग में करीब 37 लाख आवेदन लंबित थे। जब मैंने इस विभाग का कार्य संभाला तो इसे एक चुनौती के रूप में लिया। अच्छा काम करने वालों को सम्मानित किया जाएगा: दिलीप जायसवाल दिलीप जायसवाल ने कहा कि हम सीओ के कामों की समीक्षा कर रहे हैं। जो अधिकारी अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें सम्मानित किया जाएगा। और जो काम में लापरवाही कर रहे हैं, उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा।

योगी सरकार का बड़ा कदम: ‘चहक’ और ‘कलांकुर’ से निखरेगी बच्चों की शुरुआती शिक्षा

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के बाद अब प्री-प्राइमरी शिक्षा के ढांचे को भी जड़ से मजबूत करने में जुट गई है। राज्य के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए खेल और गतिविधि आधारित आधुनिक शिक्षण सामग्री का वितरण शुरू कर दिया गया है। ‘चहक-1, 2, 3’, ‘कदम’, ‘कलांकुर’, और 'बिग बुक' जैसी विशेष तौर पर तैयार सामग्रियों के माध्यम से अब प्रदेश के लाखों नौनिहालों को उनकी शुरुआती शिक्षा का एक नया, रचनात्मक और बेहतर माहौल मिलने जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के विजन को मिली गति योगी सरकार की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इसके तहत प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को बच्चों के सीखने की मुख्य बुनियाद माना गया है। उत्तर प्रदेश में अब आंगनबाड़ी केंद्रों को सिर्फ पोषण और बुनियादी देखभाल तक सीमित न रखकर, उन्हें आधुनिक और गतिविधि आधारित शिक्षा के जीवंत केंद्रों के रूप में पुनर्जीवित किया जा रहा है 'चहक' और 'कलांकुर' से निखरेगी बच्चों की रचनात्मकता विशेषज्ञों के अनुसार, 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के मानसिक, भाषाई और सामाजिक विकास के लिए सबसे संवेदनशील समय होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए 'चहक' श्रृंखला की पुस्तिकाएं बच्चों में भाषा के विकास और बुनियादी दक्षताओं को बढ़ाएंगी, जबकि ‘कदम’ और ‘कलांकुर’ जैसी सामग्री उनकी सोच, जिज्ञासा और रचनात्मकता को नई उड़ान देगी। इसके साथ ही, बड़ी तस्वीरों वाली 'बिग बुक' और 'टीचर गाइड' के जरिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी शिक्षण की आधुनिक तकनीकों से लैस किया जाएगा। किताब वितरण ऐप' से होगी डिजिटल मॉनिटरिंग पूरी वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए योगी सरकार ने तकनीक का सहारा लिया है। इस अभियान के तहत सामग्री के वितरण की रीयल-टाइम निगरानी के लिए ‘किताब वितरण ऐप’ लागू किया गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) से लेकर डायट मेंटर्स और प्रधानाध्यापकों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे सीधे शासन स्तर पर यह ट्रैक किया जा सके कि किस बालवाटिका तक सामग्री पहुंच चुकी है। प्री-प्राइमरी शिक्षा को मिला नया संस्थागत स्वरूप उत्तर प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है जब प्री-प्राइमरी शिक्षा को इतने व्यापक पैमाने पर एक मजबूत संस्थागत स्वरूप दिया जा रहा है। पहले जहाँ सरकारी तंत्र का पूरा ध्यान केवल प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों पर केंद्रित रहता था, वहीं अब बच्चों की शुरुआती नींव को मजबूत करने पर समान प्राथमिकता दी जा रही है। 'ऑपरेशन कायाकल्प' और 'निपुण भारत' जैसी बड़ी योजनाओं की सफलता के बाद, प्री-प्राइमरी स्तर पर किया जा रहा यह सुधार आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को देश के शिक्षा मॉडल में सबसे आगे खड़ा कर सकता है। कुल मिलाकर, योगी सरकार का यह कदम ग्रामीण और वंचित परिवारों के बच्चों के लिए मील का पत्थर साबित होगा, जिन्हें अब निजी कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर बचपन में ही आधुनिक और रचनात्मक शिक्षा का अधिकार मिल रहा है।

नेतरहाट तराई के गांव में पानी के लिए हाहाकार, 300 लोगों की जिंदगी प्रभावित

लातेहार नेतरहाट की तराई में बसे सुदूरवर्ती नैना गांव में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। 18 मई को गांव का एकमात्र सरकारी कुआं अचानक तेज आवाज के साथ धंस गया। इस घटना के बाद गांव में नल-जल योजना के तहत होने वाली पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई है। करीब 50 परिवारों और लगभग 300 की आबादी वाले इस गांव के लिए यही कुआं जीवनरेखा था। गनीमत रही कि हादसे के वक्त वहां कोई मौजूद नहीं था, नहीं तो बड़ा नुकसान हो सकता था। कुआं धंसने के बाद गांव में पानी को लेकर हाहाकार की स्थिति बन गई है और ग्रामीणों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई है। नदी पर बढ़ी निर्भरता, महिलाएं-बच्चे परेशान कुएं के ध्वस्त होने के बाद अब नैना गांव के लोगों को पीने और घरेलू जरूरतों के लिए नदी और अन्य अस्थायी जलस्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है। चिलचिलाती गर्मी के बीच कई ग्रामीणों को रोज लंबी दूरी तय कर पानी लाना पड़ रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ा है। गांव की महिलाएं शकुंतला देवी, विमला देवी और मनीता देवी ने बताया कि पहले पानी घर तक पहुंच जाता था, जिससे राहत रहती थी। अब सुबह-शाम पानी के लिए दूर नदी तक जाना मजबूरी बन गया है। उन्होंने कहा कि गर्मी के इस मौसम में परेशानी और बढ़ गई है। पानी की कमी के कारण खाना बनाने, पशुओं को पानी पिलाने और अन्य दैनिक कार्यों में भी दिक्कत हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पहले से बुनियादी सुविधाओं की कमी रही है, लेकिन अब पानी जैसी जरूरी सुविधा भी बाधित हो गई है। विभाग ने जांच व जल्द समाधान का दिया भरोसा गांव के उमेश महतो समेत अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक जलस्रोत की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि नैना गांव में यही एक भरोसेमंद सरकारी जलस्रोत था। इसके ध्वस्त होने के बाद पूरा गांव संकट में आ गया है। ग्रामीणों ने कुएं की मरम्मत कराने या नए कुएं अथवा बोरिंग की व्यवस्था जल्द कराने की मांग उठाई है। समस्या को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी भी देखी जा रही है। फिलहाल नैना गांव के लोग भीषण गर्मी में राहत के लिए प्रशासनिक पहल का इंतजार बेसब्री से कर रहे हैं सूचना मिलने के बाद विभाग गंभीरता से कार्रवाई कर रहा है। संबंधित कनीय अभियंता को मौके पर भेजकर जांच कराई जाएगी व पानी की आपूर्ति बहाल करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। दीपक कुमार महतो, कार्यपालक अभियंता पेयजल एवं स्वच्छता विभाग लातेहार।

मोटर व्हीकल SI भर्ती पर बड़ा फैसला: डिग्री नहीं, सिर्फ डिप्लोमा उम्मीदवार होंगे शामिल

जयपुर राजस्थान में SI भर्ती 2021 पहले से ही विवादों में है, जिसे कोर्ट के आदेश पर रद्द कर दिया गया है. जबकि अब SI भर्ती की परीक्षा फिर से आयोजित होने वाली है. वहीं अब मोटर व्हीकल एसआई भर्ती (MVSI भर्ती 2021) को लेकर भी हाई कोर्ट का फैसला आय गया है, जिस पर काफी समय से विवाद चल रहा था. MVSI परीक्षा भी 2021 में हुई थी और इसमें सफल हुए अभ्यर्थी की मेरिट लिस्ट बन चुकी है. लेकिन अब हाई कोर्ट के फैसले से फिर विवाद खड़ा होने वाला है. दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने Motor Vehicle Sub Inspector (MVSI) भर्ती 2021 विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि भर्ती नियमों में केवल डिप्लोमा योग्यता निर्धारित है, वहां डिग्री धारकों को स्वतः पात्र नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने राज्य सरकार को दिया आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने परिवहन उप निरीक्षक भर्ती (MVSI) से जुड़ी विशेष अपीलों पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया. कोर्ट ने केवल डिप्लोमा धारकों को भर्ती में शामिल करते हुए राज्य सरकार को भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए. क्या था विवाद दरअसल, मोटर व्हीकल एसआई भर्ती परीक्षा में डिग्री धारक यानी बीटेक और बीई करे हुए अभ्यर्थियों ने दावा किया कि चूंकि वे उच्च योग्यता रखते हैं. ऐसे में उन्हें भर्ती में शामिल किया जाए. वहीं, डिप्लोमा धारकों ने तर्क दिया कि भर्ती विज्ञापन विशेष रूप से उनके लिए था और डिग्री धारकों को शामिल करना नियमों के खिलाफ होगा. हाईकोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद बुधवार (27 मई) को यह आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि भर्ती नियमों के शेड्यूल में MVSI पद के लिए “minimum qualification” शब्द का उल्लेख नहीं है. नियमों में स्पष्ट रूप से Automobile Engineering या Mechanical Engineering में डिप्लोमा को ही पात्रता माना गया है. साथ ही, केवल वही योग्यताएं मान्य हैं जिन्हें केंद्र या राज्य सरकार द्वारा समकक्ष घोषित किया गया हो. ऐसे में अदालत नियमों में ऐसी योग्यता नहीं जोड़ सकती जो वहां मौजूद ही नहीं है.

बिहार: आधुनिक तकनीक से बदलेगी मत्स्य पालन की तस्वीर, बढ़ेगी किसानों की आय

दरभंगा बिहार में दरभंगा जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। आधुनिक तकनीक और उन्नत मछली प्रजातियों के सहारे जिले में मत्स्य पालन को नई पहचान देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि मत्स्य पालकों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। किसानों को मिला उन्नत मछलियों का स्पान मत्स्य निदेशालय, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग तथा बिहार एक्कावाकल्चर इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम (बीएआइपी) के संयुक्त प्रयास से मंगलवार को जिले के चयनित मत्स्य पालकों के बीच उन्नत मछलियों का स्पान वितरित किया गया। प्रथम चरण में नौ मत्स्य पालकों को 21 लाख जयंती रोहू और 18 लाख अमृत कतला का स्पान उपलब्ध कराया गया। वैज्ञानिक तकनीक से तैयार प्रजातियां जिला मत्स्य पदाधिकारी अनुपम कुमार ने बताया कि जयंती रोहू और अमृत कतला उच्च उत्पादन क्षमता वाली उन्नत प्रजातियां हैं। इन्हें वैज्ञानिक चयन प्रजनन तकनीक के माध्यम से विकसित किया गया है। इन मछलियों की वृद्धि सामान्य प्रजातियों की तुलना में अधिक तेज होती है, जिससे किसानों को कम समय में ज्यादा उत्पादन प्राप्त होगा। किसानों की आय बढ़ाने पर जोर उन्होंने कहा कि उन्नत प्रजातियों के उपयोग से मत्स्य पालकों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलेगा। इससे जिले में मत्स्य उत्पादन को नई गति मिलने के साथ किसानों की आमदनी में भी बढ़ोतरी होगी। विभाग का उद्देश्य मत्स्य पालन को रोजगार और आय का मजबूत माध्यम बनाना है। प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग मिलेगा बीएआइपी टीम के राहुल कुमार ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य जिले में उन्नत मत्स्य प्रजातियों का विस्तार करना और किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है। किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। समावेशी विकास की दिशा में पहल विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक और उन्नत प्रजातियों के प्रयोग से दरभंगा में मत्स्य पालन का व्यापक विकास होगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।  

योगी सरकार का बड़ा मिशन, ग्रामीण यूपी को मिलेगा फ्री Wi-Fi और डिजिटल सुविधाओं का नेटवर्क

 लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजनरी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब डिजिटल आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखने जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों को आधुनिक तकनीकी मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार का बेहद महत्वाकांक्षी “प्रोजेक्ट गंगा” अब जल्द ही धरातल पर "लाइव" होने के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार ने इस दूरगामी परियोजना से जुड़े लगभग सभी तकनीकी और प्रशासनिक माइलस्टोन को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिससे गांवों और छोटे शहरों में डिजिटल क्रांति का रास्ता साफ हो गया है। माइलस्टोन पूरे, जुलाई 2025 से चल रही थी तैयारी इस ऐतिहासिक मिशन की रूपरेखा जुलाई 2025 में प्रारंभिक सीडिंग के साथ शुरू हुई थी, जिसने दिसंबर 2025 में विभिन्न सरकारी विभागों की रणनीतिक चर्चाओं के साथ गति पकड़ी। जनवरी 2026 में इसके कॉन्सेप्ट नोट के बाद, 9 मार्च 2026 को वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की गरिमामयी उपस्थिति में इसका एमओयू (MoU) साइन किया गया। फाइनल डीपीआर (DPR) तैयार होने और अप्रैल 2026 में बैंकिंग पार्टनर्स के साथ फाइनेंशियल एनेबलमेंट की बातचीत पूरी होने के बाद, अब यह प्रोजेक्ट जमीनी स्तर पर लागू होने के अंतिम पड़ाव पर है। गांवों तक पहुंचेगा वर्ल्ड-क्लास डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट गंगा का मुख्य उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच के डिजिटल डिवाइड (तकनीकी अंतर) को हमेशा के लिए समाप्त करना है। इसके तहत राज्य के ग्रामीण इलाकों में एक मजबूत डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। इस नेटवर्क के जरिए हर ग्रामीण घर तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड, मुफ्त पब्लिक वाई-फाई, आईपीटीवी (IPTV) और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की पहुंच आसान होगी। इसके अलावा, गांवों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए सीसीटीवी समाधान और उन्नत साइबर सिक्योरिटी सेवाएं भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा होंगी। ग्रामीण युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार और ट्रेनिंग के द्वार यह परियोजना केवल इंटरनेट कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने का एक बड़ा जरिया बनेगी। प्रोजेक्ट गंगा के माध्यम से गांवों के युवाओं को फ्रीलांसिंग, रिमोट वर्क (घर बैठे काम) और ऑनलाइन वोकेशनल ट्रेनिंग से जोड़ा जाएगा। डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना से छात्रों को पढ़ाई के वैश्विक अवसर मिलेंगे, जिससे गांवों में ही रहते हुए युवा डिजिटल इकोनॉमी का हिस्सा बन सकेंगे और बड़े शहरों की तरफ होने वाला पलायन थमेगा। योगी सरकार का यह दृढ़ विश्वास है कि डिजिटल कनेक्टिविटी ही भविष्य की मजबूत अर्थव्यवस्था का आधार है। "प्रोजेक्ट गंगा" के जरिए सरकार 'कनेक्टेड गांव, समृद्ध यूपी' के अपने संकल्प को सिद्ध करने जा रही है, ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी तकनीक का पूरा अधिकार मिल सके।

बिहार में उजाला, झारखंड के गांव अंधेरे में: प्रतापपुर के ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

प्रतापपुर (चतरा) बस कुछ कदम दूर बिहार है।वहां रातभर गांव रोशनी में जगमगाते रहते हैं और यहां पूरा गांव अंधेरे में डूबा रहता है।झारखंड-बिहार सीमा पर बसे प्रतापपुर प्रखंड के गांवों में इन दिनों यही दर्द लोगों की जुबान पर है।बिजली व्यवस्था की बदहाली ने ग्रामीणों का जीवन बेहाल कर दिया है। लोगों का आरोप है कि गांवों में दिनभर में मुश्किल से दो से तीन घंटे बिजली मिल रही है, वह भी लो वोल्टेज के सहारे। हालत यह है कि पंखे ठीक से नहीं चल पा रहे और रातभर उमस भरी गर्मी में लोग जागने को मजबूर हैं। सीमावर्ती गांवों के लोग जब रात के अंधेरे में बिहार के गांवों को 24 घंटे बिजली से जगमगाते देखते हैं, तो उनके भीतर व्यवस्था को लेकर गहरी मायूसी और आक्रोश उभर आता है। इस पार अंधेरे में डूबे गांव और उस पार रोशनी से चमकते घर लोगों को भीतर तक झकझोर रहे हैं। कई ग्रामीण अब पीड़ा भरे स्वर में कहते हैं कि काश, हम बिहार से अलग न हुए होते तो शायद आज हमारे गांवों में भी रातभर उजाला रहता। गर्मी के इस मौसम में बिजली संकट ने हालात और भयावह बना दिए हैं। पूरी रात बिजली कटौती से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बुजुर्ग और मरीज परेशान हैं, जबकि किसान सिंचाई के लिए दर-दर भटक रहे हैं। छोटे दुकानदारों और ग्रामीण कारोबारियों का कामकाज भी ठप पड़ने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की कोई तय समय-सारिणी नहीं रह गई है। कब बिजली आएगी और कब चली जाएगी, इसका कोई भरोसा नहीं। कभी अचानक हाई वोल्टेज आ जाता है तो कभी इतना लो वोल्टेज कि बल्ब तक टिमटिमाने लगते हैं। लगातार वोल्टेज के उतार-चढ़ाव से पंखे, टीवी, फ्रिज, मोटर और अन्य उपकरण खराब हो रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।लोगों ने आरोप लगाया कि कई बार विभागीय अधिकारियों को सूचना देने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा। सरकारी कार्यालयों में जेनरेटर और इनवर्टर की सुविधा होने के कारण अधिकारियों को ग्रामीणों की पीड़ा का एहसास तक नहीं होता। जनप्रतिनिधियों पर भी लोगों ने उपेक्षा का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में गांवों की सुध लेने वाला कोई नहीं आता।प्रतापपुर प्रखंड के सीमावर्ती ग्रामीणों ने सरकार और बिजली विभाग से जल्द स्थायी समाधान निकालने तथा नियमित, निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।  

पाकिस्तान सीमा होगी हाईटेक: ड्रोन रोधी सिस्टम, नई फेंसिंग और 184 गांवों का विकास

जयपुर राजस्थान की अंतरराष्ट्रीय सीमा अब पहले से ज्यादा मजबूत और आधुनिक होने जा रही है. राजस्थान की पाकिस्तान सीमा का सुरक्षा का पूरा मॉडल बदलने जा रहा है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीकानेर के सांचू पोस्ट दौरे के बाद अब बॉर्डर पर "चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड" तैयार करने की रणनीति तैयार की गई है. यानी बीएसएफ, सेना, स्थानीय नागरिक और प्रशासन मिलकर सीमा सुरक्षा की नई दीवार बनेंगे. इसके साथ ही सीमावर्ती गांवों को हाईटेक और आत्मनिर्भर बनाने की बड़ी तैयारी भी शुरू हो चुकी है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह परसों, 25 मई की रात दो दिन के दौर पर बीकानेर आए थे. उन्होंने राजस्थान के 5 बॉर्डर जिलों के DM-SP के साथ अहम बैठक की थी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीकानेर में हुई हाईलेवल बैठक में राजस्थान के सीमावर्ती जिलों के लिए बड़ा सुरक्षा ब्लूप्रिंट तैयार किया है. भारत-पाक सीमा से 15 किलोमीटर तक अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. शाह ने साफ कहा है कि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अवैध निर्माण तुरंत ध्वस्त किए जाएं. बैठक में घुसपैठ और ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए संयुक्त एक्शन प्लान पर जोर दिया गया. BSF, NCB, CBDT और राज्य एजेंसियां मिलकर बॉर्डर मैनेजमेंट करेंगी. डीएम को बड़े अधिकार दिए जाएंगे. फर्जी कंपनियों, शेल अकाउंट्स, नकली आधार कार्ड और संदिग्ध फंडिंग की जांच के भी निर्देश दिए गए हैं.   बीएसएफ, सेना, नागरिक और प्रशासन का "चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड" साइबर क्राइम रोकने के लिए 1930 हेल्पलाइन के प्रभावी इस्तेमाल और नए आपराधिक कानूनों के सख्त क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया. कल, 26 मई को बीकानेर के सांचू पोस्ट पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संदेश दिया कि सीमा सुरक्षा अब सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि तकनीक, स्थानीय लोगों और प्रशासन के तालमेल से मजबूत होगी. अमित शाह ने बीएसएफ, सेना, जागरूक नागरिक और प्रशासन को मिलाकर "चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड" बनाने की बात कही है. यानी सीमा के उस पार से होने वाली हर गतिविधि पर चौतरफा निगरानी रखी जाएगी. सीमा को बनाया जाएगा ड्रोन रोधी पाकिस्तान से लगती सीमा सुरक्षा को हाईटेक बनाने के लिए अब कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नई डिजाइन की फेंसिंग लगाई जा रही है. ड्रोन रोधी सिस्टम अगले छह महीने में शुरू करने की तैयारी है. 1096 किलोमीटर लंबी लिटरल रोड और 520 किलोमीटर लंबी एक्ससीएल रोड का निर्माण भी किया जा रहा है ताकि जवानों की आवाजाही और निगरानी आसान हो सके. बीएसएफ चौकियों तक पाइपलाइन से पानी पहुंचाने का काम भी तेजी से चल रहा है. वहीं महिला जवानों के लिए आधुनिक बैरक बनाए जा रहे हैं. सीमावर्ती गांवों की बदलेगी तस्वीर वाईब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 के तहत राजस्थान के पांच सीमावर्ती जिलों के 184 रणनीतिक गांवों को चुना गया है. इन गांवों में सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, टीवी कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और रोजगार से जुड़े विकास कार्य किए जाएंगे. हर गांव पर करीब 3 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और फलौदी के गांव अब सिर्फ सीमा के आखिरी गांव नहीं, बल्कि देश की पहली सुरक्षा लाइन बनेंगे. मुख्यमंत्री थार सीमा विकास कार्यक्रम से भी विकास राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री थार सीमा विकास कार्यक्रम के जरिए भी सीमावर्ती इलाकों के विकास को गति दी है. इसके तहत 1 हजार 206 गांवों में बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत ढांचे से जुड़े एक हजार से ज्यादा काम स्वीकृत किए गए हैं.

नायब सैनी ने जताया पीएम मोदी का आभार, हरियाणा में दौड़ेगी ग्रीन एनर्जी ट्रेन

 जींद  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश को देश की पहली हाइड्रोजन डेमू (DEMU) ट्रेन की सौगात मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है। रेलवे बोर्ड द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के विकास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। क्या होगा रूट यह देश की पहली पर्यावरण अनुकूल हाइड्रोजन डेमू ट्रेन होगी, जिसे हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चलाया जाएगा। इसमें कुल 10 कोच होंगे। रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देने वाली इस परियोजना के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में हरियाणा विकास और रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। भविष्य की परियोजनाओं के लिए 'मील का पत्थर': नायब सैनी मुख्यमंत्री ने इस ट्रेन की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा, "यह हाइड्रोजन डेमू ट्रेन न केवल प्रदूषण मुक्त सफर का एक आधुनिक विकल्प बनेगी, बल्कि भविष्य की हरित ऊर्जा (Green Energy) परियोजनाओं को देखते हुए एक मील का पत्थर (Milestone) साबित होगी।" हरित और आधुनिक हरियाणा का संकल्प इस ट्रेन के शुरू होने से हरियाणा देश में अत्याधुनिक और इको-फ्रेंडली रेल कनेक्टिविटी वाला पहला राज्य बन जाएगा। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से चल रहे ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स से आने वाले समय में राज्य के नागरिकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी और उद्योगों व रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। हाइड्रोजन ट्रेन की खासियतें यह ट्रेन अधिकतम 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। यह ट्रेन पारंपरिक डीजल या इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग करेगी। ट्रेन कुल 1,200 किलोवाट बिजली उत्पन्न करेगी। नई ट्रेन में डिस्ट्रीब्यूटेड पावर रोलिंग स्टॉक (डीपीआरएस) तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। इस तकनीक की मदद से बिजली एक ही लोकोमोटिव पर निर्भर रहने के बजाय सभी डिब्बों में वितरित की जाती है। हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों को डीजल इंजनों का एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है।  इसके जरिए कम उत्सर्जन होता है और ये स्वच्छ परिवहन को दिशा मिलती हैं।  रेल मंत्रालय ने अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) से तकनीकी मंजूरी और रेल सुरक्षा आयुक्त (सीसीआरएस) द्वारा किए गए सुरक्षा परीक्षण के बाद इस परियोजना को मंजूरी दी।