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ईंधन खपत कम करने की सलाह के बीच लॉकडाउन पर बोले किरेन रिजिजू, चर्चा तेज

नई  दिल्ली  क्या भारत में लॉकडाउन लगने वाला है? इसको लेकर मोदी सरकार के मंत्री का बड़ा बयान आया है। संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पर अपडेट दी है। उन्होंने कहाकि अभी भारत में हालात इतने नहीं बिगड़े हैं कि ऐसा कदम उठाना पड़े। लेकिन खराब समय के लिए अभी से सतर्कता जरूरी है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश के नागरिकों से तेल बचाने और अनावश्यक खर्च से बचने की सलाह दी थी। पीएम मोदी ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के बीच लोगों को और पैनिक बाइंग से बचने के लिए भी कहा था। केंद्रीय मंत्री रिजिजू प्रधानमंत्री के इसी बयान के संदर्भ में अपनी बात रख रहे थे। इतनी क्राइसिस नहीं कि… किरेण रिजिजू ने कहाकि भारत में इतनी क्राइसिस की हालत नहीं हैं। टाइम्स नाऊ पर बोलते हुए उन्होंने कहाकि पश्चिम एशिया में समस्या काफी ज्यादा है। इसके चलते दुनिया भर में एनर्जी क्राइसिस चल रही है। व्यापार के रास्तों पर भी असर पड़ा है। रिजिजू ने कहाकि भारत ने पश्चिम एशिया में तनाव पैदा नहीं किया है। लेकिन दुर्भाग्य से हमें इस संकट में घसीटा जा रहा है। ऐसे में हमें खुद के स्तर पर तैयारी करनी पड़ेगी। उन्होंने कहाकि हमें बाहरी दया पर निर्भर नहीं रह सकते। इन सबको देखते हुए ही प्रधानमंत्री ने एक आह्वान किया है। हमें पेट्रोल-डीजल बचाने के साथ अन्य चीजों पर भी ध्यान देना होगा। घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर केंद्रीय मंत्री ने आगे कहाकि पिछले 12 साल से पीएम मोदी, लगातार घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। साथ ही वह विदेशी आयत पर निर्भरता कम करने की कोशिशों में भी जुटे हैं। उन्होंने कहाकि पीएम मोदी ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं। हालांकि भारत अभी भी तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बना हुआ है। ऐसे में हमें अपने लीडर को जरूर सुनना होगा। खासकर ऐसे वक्त में जबकि वैश्विक स्तर पर मुश्किलें हैं। यह नॉर्मल समय नहीं है। विपक्ष पर भी निशाना इस दौरान रिजिजू ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहाकि कठिन समय में साथ देने की जगह, विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने में जुटा है। केंद्रीय मंत्री ने कहाकि मैं विपक्ष को संसद में जवाब देना चाहता हूं। संकट के समय, देश को अपने नेता के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से कहाकि जब हालात सामान्य होंगे तो राजनीति कर लीजिएगा। लेकिन मुश्किल हालात में हर किसी का साथ चाहिए होता है। ऐसे में विपक्ष को यह बात भूलनी नहीं चाहिए।

J-TET पास पैरा शिक्षकों के लिए खुला सहायक आचार्य बनने का रास्ता

 रांची सर्वोच्च न्यायालय ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत पैरा शिक्षकों (सहायक अध्यापकों) को चरणबद्ध ढंग से सहायक आचार्य के रिक्त पदों पर नियुक्त करने का आदेश राज्य सरकार को दिया है। कोर्ट के इस आदेश के अनुपालन में काेई समस्या भी नहीं है। राज्य सरकार ने सहायक आचार्य के कुल पदों में 50 प्रतिशत पद पारा शिक्षकों के लिए आरक्षित भी रखा है, लेकिन सहायक आचार्य नियुक्त होने के लिए पैरा शिक्षकों का झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) उत्तीर्ण होना जरूरी है। दूसरी तरफ, स्थिति यह है कि राज्य में वर्तमान में लगभग आठ हजार पारा शिक्षक जेटेट उत्तीर्ण हैं और सहायक आचार्य के पद पर नियुक्ति की अर्हता रखते हैं। राहत की बात यह है कि राज्य में लंबे समय बाद जेटेट के आयोजन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें बड़ी संख्या में पैरा शिक्षक भी भाग लेंगे। झारखंड अधिवद्य परिषद द्वारा इस परीक्षा के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 21 मई निर्धारित है। इधर, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश आने के बड़ी संख्या में पैरा शिक्षक इस परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए आवेदन कर रहे हैं। ऐसे में आयोजित होनेवाली जेटेट परीक्षा से इनके सहायक आचार्य नियुक्त होने का रास्ता खुलेगा, बशर्ते पारा शिक्षक यह पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होते हैं। राज्य के प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में सहायक आचार्य नियुक्ति के लिए गठित नियमावली के तहत पैरा शिक्षकों को सहायक आचार्य नियुक्त होने के लिए एक और परीक्षा से गुजरना होगा। कोर्ट के आदेश के आलोक में राज्य सरकार पैरा शिक्षकों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित कर सकती है। राज्य में वर्तमान में लगभग 55 हजार पारा शिक्षक कार्यरत हैं। लगभग 40 हजार पद हैं रिक्त राज्य सरकार ने सहायक आचार्य के 50 हजार पद सृजित किए थे, जिनमें पहले चरण में 26,001 पदों पर शुरू ही नियुक्ति के तहत लगभग 10 हजार पदों पर ही नियुक्ति हो सकी है। बड़ी संख्या में पद रिक्त रह गए हैं, जिनमें पारा शिक्षकों के लिए आरक्षित पद भी सम्मिलित हैं। इस तरह, पहले चरण की लगभग 16 हजार तथा शेष 24 हजार पद रिक्त हैं। क्या है सर्वोच्च न्यायालय का आदेश सर्वोच्च न्यायालय ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया कि वह सहायक आचार्य के 50 प्रतिशत आरक्षित पदों पर पैरा शिक्षकों की चरणबद्ध ढंग से नियुक्ति करे। इसे लेकर पारा शिक्षकों के लिए विशेष रूप से प्रक्रिया शुरू की जाए। कोर्ट ने पारा शिक्षकों को सीधे नियमितीकरण करने से इंकार कर दिया, लेकिन राज्य को झारखंड प्राथमिक विद्यालय शिक्षक भर्ती नियमावली, 2012 और झारखंड प्राथमिक विद्यालय सहायक आचार्य संवर्ग नियमावली, 2022 के तहत पहले से बनाए गए वैधानिक भर्ती तंत्र को लागू करने और समय-समय पर इसका पालन करने का निर्देश दिया।

सांवलिया सेठ के दरबार में धनवर्षा, सोना-चांदी की गिनती अभी बाकी

चित्तौड़गढ़ मेवाड़ के सुप्रसिद्ध और आस्था के सबसे बड़े केंद्र 'कृष्णधाम श्री सांवलियाजी मंदिर' में शुक्रवार को जब राजभोग आरती के बाद भगवान का दानपात्र (भंडार) खोला गया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें फटी की फटी रह गईं। मासिक मेले के पहले ही दिन नोटों का ऐसा पहाड़ नजर आया कि शुरुआती गिनती में ही आंकड़ा 11 करोड़ 30 लाख रुपये पार कर गया। सांवलिया सेठ के दरबार में उमड़े इस 'धनवर्षा' के सैलाब को संभालने के लिए तत्काल नोटों से भरे बैग अलग-अलग बैंकों में कड़ी सुरक्षा के बीच जमा कराए गए। कड़े पहरे में खुला भंडार, जयकारों से गूंजा गर्भगृह मंदिर मंडल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रभा गौतम, प्रशासनिक अधिकारी प्रथम शिव शंकर पारीक और मंदिर बोर्ड के सदस्यों की मौजूदगी में कड़ी सुरक्षा के बीच गर्भगृह के मुख्य दानपात्र को खोला गया। जैसे ही खजाने के ताले टूटे, मंदिर परिसर में मौजूद हजारों भक्तों ने एक सुर में 'सांवलिया सेठ के जयकारे' लगाने शुरू कर दिए। पूरा माहौल भक्ति के अनूठे रंग में सराबोर हो गया। भंडार खुलते ही मंदिर प्रशासन और बैंक कर्मियों की टीम तुरंत नोटों की गड्डियां बनाने और उनकी गिनती करने में जुट गई। सोना-चांदी और चिल्लर की गिनती अभी बाकी! चमत्कारी बात यह है कि 11.30 करोड़ रुपये तो सिर्फ पहले दिन गिने गए नोटों की रकम है। सांवलिया सेठ मंदिर के दानपात्र से बड़ी मात्रा में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने और चांदी के आभूषण भी निकले हैं, जिन्हें नोटों की गड्डियों से अलग कर सुरक्षित रख लिया गया है। मंदिर प्रशासन के मुताबिक, अभी इन कीमती धातुओं का वजन किया जाना बाकी है। इसके अलावा, सिक्कों (चिल्लर) का एक बहुत बड़ा ढेर और भेंट कक्ष व कार्यालय में मनीऑर्डर या ऑनलाइन माध्यम से आई राशि का अंतिम मिलान होना बाकी है। जब यह पूरी प्रक्रिया संपन्न होगी, तब सांवलिया सेठ के इस मासिक चढ़ावे का असली और अंतिम जादुई आंकड़ा सामने आएगा। मासिक मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब श्री सांवलियाजी को 'व्यापार का साझेदार' मानने वाले भक्तों की आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां हर महीने करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है। राजस्थान ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, गुजरात और देश के कोने-कोने से व्यापारी और आम लोग यहां मन्नत पूरी होने पर अपने 'सेठ' को हिस्सा देने आते हैं। मासिक मेले के चलते इस समय भक्तों की भीड़ कई गुना बढ़ गई है, जिसे देखते हुए सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।  

IDFC और AU बैंक घोटाले में बड़ा खुलासा, तीन और IAS अधिकारी जांच के घेरे में

चंडीगढ़ हरियाणा में आइडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनांस बैंक में हुए 590 करोड़ रुपये के घोटाले में तीन और सीनियर आइएएस अधिकारी जांच के लपेटे में आ गए हैं। हाल ही में सीबीआई को पांच आइएएस अधिकारियों से पूछताछ की अनुमति दे चुकी प्रदेश सरकार ने तीन और आइएएस अधिकारियों से भी सवाल-जवाब करने की मंजूरी दे दी है। आठ आइएस अधिारियों से होगी पूछताछ वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही सीबीआई ने मामले में कुल आठ आइएएस अधिकारियों से पूछताछ की अनुमति मांगी थी, जो मिल गई है। सरकार की ओर से लिखित स्वीकृति मिलते ही सीबीआई टीम जांच पर आगे बढ़ेगी। जांच की कमान सीबीआई द्वारा संभालने के बाद से ही बैंक घोटाले को लेकर लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। सबसे पहले 2014 बैच के आइएएस अनीश यादव ने घोटाले काे पकड़ा था। वर्ष 2024 में तत्कालीन कृषि निदेशक अनीश यादव ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। तब जांच में सामने आया कि आइडीएफसी बैंक में 50 करोड़ और एयू स्मॉल फाइनांस बैंक में नियमों को ताक पर रखकर 25 करोड़ रुपये जमा किए गए। घोटाले के खुलासे के बाद विजिलेंस जांच में भी इसी कमेटी की रिपोर्ट को आधार बनाया गया। अब सीबीआई भी कमेटी की उसी रिपोर्ट को आधार बनाकर जांच को आगे बढ़ा रही है। अभी तक की जांच में सामने आया है कि पंचायत विभाग में तैनात एक बड़े आइएएस अधिकारी ने मातहत अधिकारियों पर दोनों बैंकों में अकाउंट खोलने का दबाव बनाया गया। इसी दबाव में अन्य आइएएस अधिकारी की ओर से बाकायदा एक पत्र जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि विभाग के सीनियर अधिकारी से टेलीफोन पर चर्चा के बाद दो नए बैंकों में खाता खोलने के ऑर्डर जारी किए गए हैं। आरोप है कि एक मंत्री ने घोटाले में आरोपित पंचायत विभाग के सुपरिंटेंडेंट के पद से बर्खास्त नरेश कुमार की बहाली की सिफारिश भी की। हालांकि यह सिफारिश इस घोटाले के खुलासे से पहले की गई थी। विजिलेंस जांच में नरेश कुमार के खाते में 11 करोड़ रुपये आने के साथ और भी कई सबूत मिल चुके हैं। नरेश कुमार ने इस राशि से एक फार्च्यूनर गाड़ी ली, मोहाली में फ्लैट लिया और बेटी के खाते में 10 लाख रुपए भी जमा किए। जेल में बंद नरेश कुमार से भी सीबीआई पूछताछ कर रही है।  

हिडन कैमरा कांड से हिला किशनगढ़, पति पर महिलाओं को फंसाने का गंभीर आरोप

 अजमेर राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ में एक ऐसा खौफनाक मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है. एक महिला ने अपने ही जिम ट्रेनर पति के खिलाफ मदनगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया है. महिला ने पति पर हिडन कैमरे से वीडियो बनाने, ब्लैकमेल करने और अश्लील सामग्री सोशल मीडिया पर वायरल करने का गंभीर आरोप लगाया है. पत्नी को मोबाइल से मिला पति का कच्चा चिट्ठा शादी के कुछ समय बाद जब पत्नि को अपने पति की हरकतों पर शक हुआ, तो उसने एक दिन चोरी-छिपे उसका मोबाइल चेक किया. मोबाइल खोलते ही महिला के होश उड़ गए. उसमें कई युवतियों के अश्लील फोटो, वीडियो, आपत्तिजनक वॉयस रिकॉर्डिंग और चैट्स का एक बड़ा डेटा मौजूद था. इन सब के बारे में पूछने पर आरोपी ने पहले तो इसे पुरानी बात कहकर टालने की कोशिश की, लेकिन जल्द ही उसके खौफनाक नेटवर्क का भंडाफोड़ हो गया. पत्नी ने किया विरोध तो इंटरनेट पर कर दी वीडियो वायरल जब पत्नी ने इस घिनौनी हरकत का विरोध किया, तो आरोपी ने उसे भी अंजाम भुगतने की धमकी दी. प्रताड़ना से तंग आकर पीड़िता ने सबूत के तौर पर कुछ वीडियो अपने फोन में सेव कर अपने पीहर (मायके) चली गई। इस बात से बौखलाए आरोपी पति ने सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी बनाकर अपनी पत्नी के एडिटेड अश्लील फोटो और वीडियो इंटरनेट पर वायरल कर दिए, जिससे पीड़ित परिवार गहरे सदमे में आ गया. लड़कियों से पहले करता था दोस्ती फिर हिडन रुप में ले जाकर बनाता था वीडियो मामले की जानकारी देते हुए एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला ने बताया कि पीड़िता के परिवार वालों ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कराया है. जिसमें बताया कि आरोपी जिम ट्रेनर होने का फायदा उठाकर अपने जिम में आने वाली भोली-भाली लड़कियों से पहले दोस्ती बढ़ाता था. इसके बाद वह उन्हें किसी बहाने से एक निजी कमरे में ले जाता था, जहां उसने पहले से ही 'हिडन कैमरे' इंस्टॉल कर रखे थे.इन कैमरों की मदद से युवतियों के बेहद निजी पलों को रिकॉर्ड कर लिया जाता था. पैसों की डिमांड और दूसरी लड़कियों को फंसाने का दबाव वीडियो रिकॉर्ड करने के बाद आरोपी उन वीडियो के दम पर महिलाओं को ब्लैकमेल करता था, उनसे मोटी रकम ऐंठता था और हद तो तब हो गई जब वह पीड़ित महिलाओं पर यह दबाव भी बनाता था कि वे उसकी हवस के जाल में दूसरी लड़कियों को भी फंसाकर लाएं. आरोपी ने इस गंदे धंधे में अपनी पत्नी को भी घसीटने की कोशिश की और दूसरी लड़कियों को संपर्क में लाने का दबाव बनाया.  IT एक्ट के तहत मामला दर्ज  मदनगंज थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह ने तुरंत भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट (IT Act) की संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है. पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट्स और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज को कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है.

हाजीपुर में बनेगा देश का तीसरा NIFTEM, किसानों और युवाओं को मिलेगा बड़ा फायदा

मुजफ्फरपुर बिहार में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलने जा रही है। राज्य सरकार ने निवेश और रोजगार के मोर्चे पर बड़ा कदम उठाया है। मुजफ्फरपुर और किशनगंज में बड़ी सीमेंट फैक्ट्रियों तथा हाजीपुर में राष्ट्रीय स्तर के फूड टेक्नोलॉजी संस्थान की स्थापना को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं से खासकर उत्तर बिहार और सीमांचल क्षेत्र में रोजगार, उद्योग और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी में की पूजा-अर्चना वट-सावित्री पूजा की शुभकामनाएं देने के बाद राजधानी के गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी में पूजा-अर्चना कर मुख्‍यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार को मिलने जा रही इन सौगातों की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि बिहार में औद्योगिक निवेश का नया अध्याय शुरू हो चुका है। राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (SIPB) की 67वीं बैठक में मुजफ्फरपुर और किशनगंज में डालम‍िया और अंबूजा की बड़ी सीमेंट इकाइयों को स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा 16 परियोजनाओं को स्टेज-1 क्लीयरेंस और चार परियोजनाओं को वित्तीय मंजूरी भी दी गई। सरकार का मानना है कि इन उद्योगों के शुरू होने से सीमांचल और उत्तर बिहार के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, वहीं परिवहन, निर्माण और छोटे कारोबारों को भी गति मिलेगी। हाजीपुर में बनेगा देश का तीसरा निफ्टेम इसी क्रम में वैशाली जिले के हाजीपुर में देश के तीसरे राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) की स्थापना को भी मंजूरी दी गई है। करीब 100 एकड़ में बनने वाला यह संस्थान खाद्य प्रसंस्करण, रिसर्च, तकनीकी शिक्षा और उद्यमिता का बड़ा केंद्र बनेगा। इससे बिहार के कृषि और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को राष्ट्रीय पहचान मिलने की संभावना है। सरकार का दावा है कि यह संस्थान किसानों, स्टार्टअप्स और युवा उद्यमियों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। खासकर फल-सब्जी, मक्का, मखाना और अन्य कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग को बढ़ावा मिलने से किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है। राज्य सरकार इसे विकसित बिहार और समृद्ध बिहार के विजन से जोड़कर देख रही है। उद्योग और शिक्षा के इन बड़े निवेशों को आने वाले वर्षों में बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है।

फूल, कांटे, पत्ती, छिलके, बीज, छाल, जड़ सब के मिलते अच्छे दाम किसानों के लिए है वरदान

भोपाल  मध्यप्रदेश के नीमच जिले की हर्बल मंडी प्रदेश के औषधीय फसलों के उत्पादक किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। यह देश की एक मात्र मंडी है जहां कांटे, फूल, पत्ती, छिलके, बीज, छाल, जड़ सब बिकते हैं। किसानों को विभिन्न औषधीय फसलों के 500 रूपये से लेकर 2 लाख रूपये प्रति क्विंटल तक भाव मिल जाते हैं। नीमच मंडी की प्रसिद्ध‍ि देखते हुए गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान अपनी फसलें लेकर यहां आ रहे हैं। अप्रैल माह तक मंडी की भरपूर आवक बनी रहती है जो मई के आखरी सप्ताह तक कम होने लगती है। किसानों को निराश नहीं होना पड़ता। हर प्रकार की जड़ी-बूटी बिक जाती है। मुख्य मंडी प्रांगण में 16 शेड हैं। यह एक मात्र मंडी है जहां 40−50 प्रकार के औषधीय पौधों की खरीदी बोली लगाकर होती है। मसाला फसलों की खरीदी करने वाली देश की एक मात्र सबसे बड़ी मंडी है। श्री नीलेश पाटीदार नीमच के बड़े काश्तकार हैं। उनकी 45 एकड जमीन है। परिवार में 12 सदस्य हैं। वे पिछले दो-तीन सालों से मसाला फसलों की खेती कर रहे हैं। वे बताते हैं कि इसबगोल, इरानी अकरकारा, चिरायता, आजवाइन, किनोवा, चियासीड, तुलसी बीज जैसी फसलों के बहुत अच्छे दाम मिल जाते हैं। लहसून के भी अच्छे दाम मिलते हैं। नीलेश को इस बात की प्रसन्नता है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव औषधीय फसलों के उत्पादन के लिये प्रोत्साहित कर रहे हैं। वे कहते हैं कि सरकार जड़ी-बूटी की खेती के तौर-तरीकों के संबंध में अच्छी ट्रेनिंग दिलवायेगी तो अच्छे परिणाम मिलेंगे। फिलहाल सरकार की ओर से हर जरूरी सहूलियतें मिल रही हैं। मदद सरकार की और मेहनत हमारी। जड़ी-बूटी उगाने वाले किसानों के लिये नीमच मंडी एक बड़ा सहारा है। श्री प्रहलाद सिंह रतलाम जिले के आजमपुर डोडिया गांव में रहते हैं। उन्हें अश्वगंधा और अकरकारा बीज बेचने के अच्छे दाम मिले हें। मंडी में समय पर बोली लग जाती है और आसानी से फसल बिक जाती है। किसानों को जरा सी भी परेशानी नहीं होती। मंडी के सब लोगों का व्यवहार बहुत अच्छा है। सरकार ने हमारे जैसे छोटे और मझौले किसानों के लिए मंडी में अच्छी व्यवस्थाएं करा दी हैं। श्री पंचम सिंह भी इसी गांव के किसान है और आजवाइन, अश्वगंधा लेकर आते हैं। उन्हें तत्काल भुगतान हो जाता है। मंडी की व्यवस्थाएं बहुत अच्छी हो गई हैं। वे बताते हैं कि अब मंडी की प्रसिद्ध‍ि दूर-दूर तक फैल गई है। गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र , उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान लंबी दूर तय कर यहां माल जाते हैं। अच्छी तुलाई और अच्छे दाम और तत्काल भुगतान के कारण सब यहां आना पसंद करते हैं। इसबगोल, अश्वगंधा, कलौंजी, सतावारी, सफ़ेद मूसली, केसर, सर्पगंधा, अकलकारा जड, जैसी फसलों के दाम ज्यादा है और मांग भी हमेशा बनी रहती है। मंडी की विशेषताओं की चर्चा करते हुए मंडी सचिवउमेश बसेडिया शर्मा बताते हैं कि समय पर नीलामी, गुणवत्तापूर्ण तुलाई और भुगतान की व्यवस्था किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। किसानों के हित में निरंतर सुविधाएं बढाई जा रही हैं। वित्तीय प्रबंधन निरंतर सुधरा है। वर्ष 2024−25 में 64.16 लाख क्विंटल और 2025−26 में 72.40 क्विंटल आवक हुई थी। वे बताते हैं कि मंडी ने किसानों के हित की सभी व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरूस्त कर दिया है। राष्ट्रीय पादप बोर्ड ने साढे पांच करोड़ रूपये का अनुदान भी मंडी की अधोसंरचनात्मक गतिविधियों के लिये उपलब्ध कराया है। इलेक्ट्रानिक नाप-तौल और सीधे व्यापारियों के गोडाउन में पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। यह मंडी प्रांगण 10.9 हेक्टेयर में फैला है। करीब 1100 लाइसेंसधारी व्यापारी इससे जुडे हैं और 150 से ज्यादा तुलावटी उपलब्ध रहते हैं। औषधीय फसलों के उत्पादन में देश में आगे मप्र मध्यप्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश में 46 हजार 837 हैक्टेयर क्षेत्र में औषधीय फसलों ईसबगोल, सफेद मूसली, कोलियस व अन्य फसलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में लगभग सवा लाख मीट्रिक टन औषधीय फसलों का उत्पादन हुआ है। देश और विदेश में औषधीय फसलों की बढ़ती मांग से किसान इन फसलों की ओर आकर्षित हुए हैं। देश में औषधीय फसलों का 44 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश में उत्पादित होता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के साथ किसानों को अनुदान और अन्य सहूलियतें दी जा रही है। औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए 20 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक का अनुदान देती है। औषधीय पौधों की खेती और संग्रह से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। प्रदेश में प्रमुख रूप से अश्वगंधा, सफेद मूसली, गिलोय, तुलसी और कोलियस जैसी कई औषधीय फसलों का उत्पादन होता है।  

आयुष्मान कार्ड न होने पर भी नहीं रुकेगा इलाज, सीएम योगी का बड़ा भरोसा

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान शनिवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। सीएम योगी ने गंभीर बीमारियों के इलाज में मदद की गुहार लेकर आए लोगों को उन्होंने आश्वस्त किया और इलाज कराने के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से धनराशि देने की बात कही। सीएम योगी ने कहा, जिन लोगों के आयुष्मान कार्ड नहीं बने होंगे उनके कार्ड बनवाए जाएंगे गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित जनता दर्शन के दौरान सीएम योगी करीब 200 लोगों से मिले। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगो तक जाकर उनकी समस्याओं को सुना। उनके प्रार्थना पत्र लिए और पास में खड़े अधिकारियों को समस्या समाधान हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अलग-अलग मामलों से जुड़ी समस्याओं के निस्तारण के लिए उन्होंने संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र संदर्भित कर निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और संतोषप्रद होना चाहिए। जरूरतमंदों का आयुष्मान कार्ड बनवाने के निर्देश जनता दर्शन में कई लोग गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद का अनुरोध करने आए थे। एक महिला ने अपने बच्चे के इलाज में आर्थिक दिक्कत और आयुष्मान कार्ड न होने की समस्या बताई। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि चिंता मत करिए। बच्चे का इलाज जरूर होगा। आयुष्मान कार्ड बनवाएंगे और विवेकाधीन कोष से इलाज में आर्थिक सहायता देंगे। एक अन्य महिला को भी उन्होंने इन्हीं शब्द भावों का आत्मीय संबल दिया। इस्टीमेट शासन को उपलब्ध कराएं अफसर इलाज संबंधी प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए सीएम योगी ने कहा कि इस्टीमेट की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कर शासन को उपलब्ध करा दें। अपराध व जमीन कब्जा किए जाने से संबंधी शिकायतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस अधिकारियों को अपराधियों व भू माफिया के खिलाफ सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए। जनता दर्शन में कुछ महिलाएं अपने बच्चों को लेकर आई थीं। मुख्यमंत्री ने इन बच्चों को खूब दुलारा और चॉकलेट के साथ आशीर्वाद दिया।

ईंधन संकट की आशंका से रांची में हड़कंप, लोग भरवा रहे टंकियां फुल

रांची पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई को लेकर फैली अफवाहों के बाद राजधानी रांची के कई पेट्रोल पंपों पर शुक्रवार को अफरा-तफरी जैसे हालात देखने को मिले। शहर के हरमू स्थित दुलारी पंप, बिरसा चौक, कोकर समेत कई इलाकों में सुबह से ही वाहनों की लंबी कतार लगी रही। लोग जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल खरीदते नजर आए। कई लोग डब्बों में तेल भरवाते दिखे, जबकि कई वाहन चालकों ने अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल करवाईं। तीन अंकों में पहुंची कीमत नई दरें लागू होने के बाद रांची में पेट्रोल की कीमत 97.86 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 100.86 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। वहीं डीजल 92.62 रुपये से बढ़कर 95.76 रुपये प्रति लीटर हो गया है। शुक्रवार सुबह से ही नई कीमतों पर बिक्री शुरू कर दी गई। प्रशासन की अपील, अफवाहों पर ध्यान न दें स्थिति को देखते हुए प्रशासन और पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शहर में ईंधन की सप्लाई पूरी तरह बंद नहीं हुई है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। लोगों से केवल जरूरत के अनुसार ही पेट्रोल-डीजल खरीदने को कहा गया है। मांग और सप्लाई में बड़ा अंतर सूत्रों के मुताबिक रांची में रोजाना मांग और सप्लाई के बीच करीब एक लाख लीटर का अंतर बना हुआ है, जिसके कारण कुछ पेट्रोल पंपों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल रहा है। वहीं कई जगहों से निर्धारित दर से अधिक कीमत पर तेल बेचने की शिकायतें भी सामने आई हैं। आम लोगों की बढ़ी चिंता ईंधन की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है। खासकर रोजाना वाहन इस्तेमाल करने वाले लोग और परिवहन व्यवसाय से जुड़े कारोबारी बढ़ती कीमतों को लेकर चिंतित हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर पेट्रोलियम कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत समेत कई देशों में ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है। आगे और बढ़ सकते हैं दाम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में इसी तरह तेजी बनी रही, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।  

बिहार सरकार का बड़ा कदम, पटना में बढ़ेगा ई-बस नेटवर्क और घटेगा ट्रैफिक दबाव

पटना बिहार सरकार ने राजधानी पटना में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब सचिवालय कर्मियों के लिए 18 मई 2026 से विशेष इलेक्ट्रिक और पिंक बस सेवा शुरू की जाएगी। सरकारी कर्मियों को मिलेगी सुविधा इस नई पहल के तहत सचिवालय आने-जाने वाले सरकारी कर्मियों को सुरक्षित, सुलभ और समयबद्ध परिवहन सुविधा मिलेगी। सरकार का उद्देश्य निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना है। परिवहन सचिव राज कुमार ने बताया कि बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी प्रतिदिन निजी कार और बाइक से सचिवालय आते हैं, जिससे शहर में ट्रैफिक दबाव और ईंधन की खपत दोनों बढ़ती है। नई इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू होने से सरकारी कर्मियों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन विकल्प मिलेगा। 25 इलेक्ट्रिक बसें पहले से चल रहीं बिहार राज्य पथ परिवहन निगम द्वारा फिलहाल पटना शहर में 25 इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन किया जा रहा है। अब इन्हीं बसों का उपयोग सचिवालय कर्मियों के नियमित आवागमन के लिए भी किया जाएगा। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के प्रशासक अतुल कुमार वर्मा ने बताया कि इस पहल से न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि लोगों का परिवहन खर्च भी कम होगा। महिला कर्मियों के लिए भी विशेष सुविधा महिला कर्मचारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शाम 5 बजे छुट्टी के समय विशेष पिंक बस सेवा भी उपलब्ध रहेगी। इससे महिला कर्मियों को सुरक्षित यात्रा का विकल्प मिलेगा। इन रूटों पर चलेगी विशेष बस सेवा पटना जंक्शन से सचिवालय-  मल्टी मॉडल हब (पटना जंक्शन) से बसें आर ब्लॉक, इनकम टैक्स, विद्युत भवन, पटना हाईकोर्ट और बिहार म्यूजियम होते हुए सचिवालय तक जाएंगी। सुबह 8:30 बजे से सेवा शुरू होगी। दानापुर स्टेशन से सचिवालय- दानापुर स्टेशन से सगुना मोड़, आरपीएस मोड़, गोला रोड, जगदेव पथ, आशियाना नगर, आईजीआईएमएस, शेखपुरा मोड़ और चिड़ियाघर होते हुए बसें सचिवालय पहुंचेंगी। इस रूट पर सुबह 8:15 बजे से सेवा शुरू होगी।  धनुकी मोड़ से विकास भवन- धनुकी मोड़ से शुरू होकर कुम्हरार, भूतनाथ रोड, एनएमसीएच, राजेंद्र नगर टर्मिनल, कंकड़बाग कॉलोनी मोड़ और करबिगहिया स्टेशन होते हुए बसें विकास भवन तक जाएंगी।  कुर्जी से सचिवालय तक पिंक बस- कुर्जी से पी एंड एम मॉल, साईं मंदिर, पाटलिपुत्र कॉलोनी, एएन कॉलेज, बोरिंग रोड चौराहा और हड़ताली मोड़ होते हुए सचिवालय तक पिंक बस सेवा संचालित होगी।  गांधी मैदान से दानापुर स्टेशन- गांधी मैदान से डाकबंगला चौराहा, इनकम टैक्स, नियोजन भवन, विद्युत भवन, हाईकोर्ट और बिहार म्यूजियम होते हुए विशेष बस सेवा सचिवालय क्षेत्र तक पहुंचेगी। ईंधन बचत और प्रदूषण नियंत्रण पर फोकस सरकार का मानना है कि बड़ी संख्या में लोग यदि निजी वाहनों के बजाय इलेक्ट्रिक बसों का इस्तेमाल करेंगे तो इससे पेट्रोल-डीजल की खपत में कमी आएगी और प्रदूषण नियंत्रण को भी बढ़ावा मिलेगा। यह पहल राज्य में ऊर्जा संरक्षण और हरित परिवहन व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।