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गर्मियों में एनर्जी बनाए रखने के लिए बेस्ट हेल्दी ब्रेकफास्ट आइडियाज, जानें आसान विकल्प

गर्मियों के इन दिनों में हमारा शरीर और भी ज्यादा थका हुआ महसूस करने लगता है. हर समय तेज धूप, लगातार बहता पसीना और गर्म बहती हवाएं शरीर की एनर्जी को देखते ही देखते कम कर देती हैं. आपके साथ ऐसा न हो इसलिए यह काफी जरूरी हो जाता है कि आप अपने सुबह के ब्रेकफास्ट को हेल्दी और बैलेंस्ड रखने रखें. जब आप अपने दिन की शुरुआत हेल्दी और शरीर को ठंडक देने वाली चीजों के साथ करते हैं, तो आपका शरीर पूरे दिन एक्टिव और फ्रेश महसूस करता है. अगर आप भी गर्मियों के इन दिनों में अपने शरीर को एक्टिव और एनर्जेटिक बनाकर रखना चाहते हैं तो आज की यह आर्टिकल आपके लिए ही है. आज हम आपको कुछ ऐसे हेल्दी ब्रेकफास्ट आइडियाज देने जा रहे हैं जिन्हें खाकर आप पूरे दिन बिना थके और आलस महसूस किये एक्टिव और एनर्जेटिक बनाकर रख सकेंगे. तो चलिए इन चीजों के बारे में विस्तार से जानते हैं. दही और फलों का करें सेवन गर्मियों के इन दिनों में आपको दही का सेवन जरूर करना चाहिए. यह आपके शरीर को ठंडक देने का काम करता है. इसके अलावा इसमें पाए जाने वाले प्रोबायोटिक्स आपके पेट को हेल्दी रखने में मदद करते हैं और और साथ ही आपके डाइजेशन को भी बेहतर बनाता हैं. ब्रेकफास्ट में जब आप दही के साथ फलों को मिलाकर सेवन करते हैं, तो यह सबसे हेल्दी ब्रेकफास्ट ऑप्शंस में से एक साबित होता है. आप इसमें अपने हिसाब से केले, ऐपल, पापीते, आम या फिर तरबूज जैसे फलों को मिक्स करके भी खा सकते हैं. इसके ऊपर से अगर थोड़े से ड्राई फ्रूट्स और चिया सीड्स मिक्स कर देते हैं, तो इसका न्यूट्रिशन और भी ज्यादा बढ़ जाता है. यह ब्रेकफास्ट आपके शरीर को एनर्जी देता है और साथ ही पेट को भी ज्यादा देर तक भरा हुआ रखता है. ब्रेकफास्ट में ट्राय करें मूंग दाल चीला अगर आप सुबह के समय में कुछ ऐसा बनाना चाहते हैं जो सिर्फ हेल्दी ही न हो बल्कि आपका पेट भी जल्दी से भर दे, तो मूंग दाल चीला एक परफेक्ट चॉइस है. मूंग दाल में प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो गर्मियों के इन दिनों में आपके शरीर को हल्का महसूस करने में मदद करता है. इसे बनाना काफी ज्यादा आसान है. इसके लिए आपको मूंग दाल को अच्छे से पीसकर उसमें प्याज, टमाटर, हरी मिर्च और थोड़ा नमक मिला लेना है. इसके बाद एक तवे पर बिलकुल ही हल्का सा तेल लगाकर चीला तैयार कर लेना है. मूंग दाल का चीला काफी जल्दी डाइजेस्ट हो जाता है और आपके शरीर को लंबे समय तक एनर्जी देता रहता है. आप इसे दही या फिर हरी चटनी के साथ भी एन्जॉय कर सकते हैं. जरूर ट्राय करें ओट्स और ठंडा दूध गर्मियों के इन दिनों में आपको अपने ब्रेकफास्ट में ओट्स को जरूर शामिल करना चाहिए। इसमें आपको भरपूर मात्रा में फाइबर मिल जाता है, जिसकी वजह से आपका पेट लंबे समय तक भरा हुआ रहता है. आप अगर चाहें तो ठंडे दूध में भी ओट्स मिक्स करके ट्राय कर सकते हैं. आप अगर इसके स्वाद को बढ़ाना चाहते हैं तो इसमें शहद, केला और ड्राई फ्रूट्स मिक्स कर सकते हैं. यह ब्रेकफास्ट सिर्फ टेस्टी नहीं होता है, यह काफी ज्यादा न्यूट्रिशियस भी होता है. अगर आप सुबह की हड़बड़ी में रहते हैं तो आपको इस डिश को जरूर ट्राय करना चाहिए. यह आसानी से और काफी कम समय में बनाकर तैयार हो जाता है. इसके सेवन से आपके शरीर को एनर्जी मिलती है और साथ ही बार-बार भूख लगने की समस्या भी खत्म होती है.

बैडमिंटन अपडेट: पीवी सिंधू को हार, लक्ष्य सेन का सफर भी खत्म

बैंकाक  थाईलैंड ओपन में शुक्रवार को भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू क्वार्टर फाइनल में जापान की शीर्ष वरीयता प्राप्त अकाने यामागुची के विरुद्ध एक गेम की बढ़त गंवाकर हार गईं। वहीं सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की पुरुषों की डबल्स जोड़ी टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुंच गई। वहीं पुरुष सिंग्ल्स में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद लक्ष्य सेन का सफर भी टूर्नामेंट में समाप्त हो गया। लक्ष्य से जिस स्तर के खेल की उम्मीद थी वह दिखा नहीं और ज्यादा डिफेंसिव खेलने के कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हार के बाद भी रिकॉर्ड बेहतर सिंधू सुपर 500 टूर्नामेंट के एक घंटे से ज्यादा समय तक चले महिला सिंगल्स के क्वार्टरफाइनल में दुनिया की तीसरे नंबर की खिलाड़ी यामागुची से 21-19, 18-21, 15-21 से हार गईं। हार के बावजूद दुनिया की 12वें नंबर की खिलाड़ी सिंधू रिकॉर्ड में यामागुची से 15-13 से आगे हैं। वहीं लक्ष्य सेन को भी पुरुष एकल क्वार्टर फाइनल मैच में थाइलैंड के दूसरे वरीय खिलाड़ी कुनलावुत वितिदसर्ण से 53 मिनट में 19-21, 16-21 से हार का सामना करना पड़ा। सात्विक-चिराग को मिली जीत हालांकि डबल्स स्पर्धा में सात्विकसाईराज और चिराग की शीर्ष वरीयता प्राप्त जोड़ी ने जापानी के ताकुमी नोमुरा और युइची शिमोगामी की छठी वरीय जोड़ी को 21-12, 21-13 के शानदार स्कोर से हराकर सेमीफ़ाइनल में जगह बना ली।  

हाईकोर्ट की सरकार को फटकार, बोला- बताइए संदीप पाठक पर FIR दर्ज हुई या नहीं

चंडीगढ़  राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक के खिलाफ आपराधिक मामले को लेकर पंजाब सरकार की चुप्पी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- आप संकोच क्यों कर रहे हैं, एफआईआर है तो बता दीजिए, नहीं है तो भी बता दीजिए। अदालत ने सुनवाई टालते हुए बिना उसकी पूर्व अनुमति पाठक पर किसी कठोर कार्रवाई पर रोक जारी रखी। यह राहत अगले सप्ताह तक रहेगी। पाठक के वरिष्ठ अधिवक्ता रणदीप राय ने पंजाब सरकार पर अदालत से लुका-छिपी खेलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य आज तक यह बताने से बच रहा है कि पाठक के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई या नहीं। पिछली सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट जवाब मांगा था, लेकिन आज भी वही स्थिति है। 8 मई को सरकार ने कहा था- जानकारी नहीं, आज फिर वही जवाब। राय ने कहा कि यह सिर्फ एक सांसद का नहीं, हर नागरिक के मौलिक अधिकारों का सवाल है। अगर किसी के खिलाफ मामला दर्ज होता है तो उसे जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज होने के 24 घंटे में उसे सार्वजनिक किया जाना अनिवार्य है। पंजाब सरकार के वकील ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मीडिया रिपोर्टों पर आधारित आशंका है। याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत का वैधानिक उपाय अपनाना चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत यह समझने में असमर्थ है कि राज्य यह बताने में क्यों हिचक रहा है कि संज्ञेय अपराध दर्ज हुआ या नहीं। कोर्ट ने साफ किया- जब तक फैसला नहीं होता, बिना अदालत की इजाजत पाठक पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।  अगली सुनवाई अगले सप्ताह संजीव अरोड़ा की दलीलों से हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं, फिलहाल नहीं दी कोई राहत कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अपनी गिरफ्तारी व रिमांड को पूर्वनियोजित, कानूनविहीन और संवैधानिक सुरक्षा के खिलाफ बताया। उन्होंने हाईकोर्ट में कहा- ईडी ने पीएमएलए की प्रक्रियाओं की अवहेलना कर गिरफ्तारी को औपचारिकता बना दिया। हाईकोर्ट ने लंबी बहस के बाद असंतुष्टि जताते हुए फिलहाल कोई राहत नहीं दी। अरोड़ा के वकीलों ने बताया कि उन्हें वास्तव में सुबह 7:15 बजे हिरासत में ले लिया गया जबकि आधिकारिक गिरफ्तारी का समय शाम 4 बजे दर्शाया गया। अदालत में कहा गया- यह स्वतंत्रता पर प्रहार है और गिरफ्तारी की पारदर्शिता व वैधानिकता पर सवाल खड़े करता है। घंटों नियंत्रण में रखकर बाद में गिरफ्तारी दिखाना कानून की मूल भावना के विपरीत है। अदालत को बताया गया कि 5 मई के ईसीआईआर और 9 मई की छापेमारी के बीच ईडी ने धारा 50 के तहत कोई समन जारी नहीं किया, न स्वतंत्र पूछताछ की, न कोई नया साक्ष्य जुटाया। बचाव पक्ष ने कहा- पुराने फेमा मामले की सामग्री को पीएमएलए गिरफ्तारी का आधार बनाना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। अरोड़ा की ओर से एक और बड़ा सवाल उठाया गया- जिस अधिकारी ने पहले फेमा में शिकायतकर्ता की भूमिका निभाई, वही पीएमएलए की धारा 19 के तहत रीजन टू बिलीव कैसे बना सकता है। इसे अपने मामले का जज बताते हुए कहा गया कि पूर्वाग्रहग्रस्त अधिकारी से निष्पक्ष संतुष्टि संभव नहीं। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद मामला सोमवार दोपहर के लिए टाल दिया। फिलहाल अरोड़ा को राहत नहीं मिली है। गौरतलब है कि अरोड़ा के खिलाफ गुरुग्राम में केस दर्ज हुआ था।  

वास्तु शास्त्र: बाथरूम में खाली बाल्टी क्यों मानी जाती है अशुभ, जानें इसका असर

 अक्सर घर के बड़े-बुजुर्ग हमें टोकते हैं कि बाथरूम में बाल्टी को कभी खाली नहीं छोड़ना चाहिए. कई लोग इसे पुराने जमाने की बात या अंधविश्वास मानकर छोड़ देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तु शास्त्र में इसके पीछे बहुत गहरे अर्थ छिपे हैं? आइए समझते हैं कि खाली बाल्टी आपके जीवन पर क्या असर डाल सकती है. 1. पैसों की तंगी और फिजूलखर्ची वास्तु के अनुसार, पानी का सीधा संबंध धन (पैसे) से होता है. जैसे बहता पानी रुकता नहीं, वैसे ही खाली बाल्टी अभाव यानी कमी को दिखाती है. माना जाता है कि अगर बाल्टी खाली है, तो घर में पैसा टिकता नहीं है और बेवजह के खर्चे बढ़ जाते हैं. वहीं भरी हुई बाल्टी घर में बरकत और खुशहाली का संकेत है. 2. घर में बढ़ता है तनाव बाथरूम एक ऐसी जगह है जहां सबसे ज्यादा नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) पैदा हो सकती है. वास्तु एक्सपर्ट्स का कहना है कि खाली बाल्टी इस नकारात्मकता को अपनी ओर खींचती है. इससे घर के लोगों के मन में चिड़चिड़ापन, तनाव और आपस में झगड़े होने की संभावना बढ़ जाती है. 3. ग्रहों का खेल (शनि और चंद्रमा) ज्योतिष में पानी का नाता चंद्रमा से है और सफाई का नाता शनि देव से. अगर बाल्टी गंदी या खाली पड़ी है, तो शनि और चंद्रमा का संतुलन बिगड़ जाता है. इससे आपके बनते हुए काम बिगड़ने लगते हैं,  किस्मत साथ नहीं देती. 4. अनुशासन और शांति अगर हम विज्ञान या मनोविज्ञान की बात करें, तो साफ-सुथरा और व्यवस्थित बाथरूम आपके दिमाग को शांति देता है. भरी हुई बाल्टी इस बात का प्रतीक है कि आप अपने संसाधनों का सही प्रबंधन कर रहे हैं. बिखरा हुआ बाथरूम और खाली बाल्टी आलस और अनुशासन की कमी को दर्शाती है. ये 3 छोटे बदलाव बदल देंगे आपकी किस्मत: रात को बाल्टी भरकर सोएं: रात में सोने से पहले बाल्टी को साफ पानी से भर दें. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. नीले रंग की बाल्टी: वास्तु में नीला रंग बहुत शुभ माना गया है. अगर संभव हो तो बाथरूम में नीले रंग की बाल्टी और टब का इस्तेमाल करें, यह पैसों की तंगी दूर करने में मदद करता है. खाली बाल्टी को उल्टा रखें: अगर आपको बाल्टी खाली रखनी ही है, तो उसे सीधा न छोड़ें. हमेशा धोकर उल्टा करके रखें.

‘अनुपमा’ में बड़ा ड्रामा: कैफे विवाद के बीच भावुक हुई अनुपमा और टूटा दर्द

 सीरियल ‘अनुपमा’ के एपिसोड की शुरुआत में अनु सभी को हेल्दी लाइफस्टाइल और हेल्दी कॉम्पिटिशन का महत्व समझाती हैं. दूसरी तरफ दिग्विजय राही को समझाते हुए कहते हैं कि मां और धरती मां बहुत दर्द सहती हैं, लेकिन जब उनका सब्र टूटता है तो सब कुछ बदल जाता है. वह राही से कहते हैं कि वह दुआ करे कि उसे कभी अनुपमा के गुस्से का सामना न करना पड़े. राही अपनी बात पर अड़ी रहती है. वह साफ कह देती है कि अगर अनुपमा शांति चाहती हैं तो उन्हें इस बार कैफे नहीं खोलना चाहिए. अनुज को याद कर भावुक हुई अनुपमा इधर परितोष और पाखी, श्रुति को सपोर्ट करने लगते हैं. वहीं ख्याति को लगता है कि श्रुति जानबूझकर अनुपमा और राही के बीच दूरियां बढ़ा रही है. वह आरोप लगाती है कि श्रुति ने ‘अनुज कैफे’ सिर्फ इसलिए खोला ताकि अनुपमा रोज अनुज का नाम देखकर दुखी हो. जब अनुपमा ‘अनुज कैफे’ को देखती हैं तो वह बेहद भावुक हो जाती हैं. वह मन ही मन अनुज से राही और प्रेम को आशीर्वाद देने की प्रार्थना करती हैं. इसके बाद अनु, दिग्विजय के सामने टूट जाती हैं और कहती हैं कि भगवान ने शायद उनकी जिंदगी में खुशियां लिखना ही भूल गए. अनुपमा अपने बेटे समर को याद कर रो पड़ती हैं. शाह परिवार ने दिया अनुपमा का साथ दूसरी ओर शाह परिवार अब खुलकर अनुपमा के समर्थन में खड़ा नजर आ रहा है. अंश, माही, परी और ईशानी सभी अनुपमा के साथ रहने का फैसला करते हैं. अनुपमा भी कहती हैं कि कारोबार नफरत से चल सकता है, लेकिन रिश्ते सिर्फ प्यार से चलते हैं. एपिसोड के अंत में अनुपमा को कैफे की पहली कमाई मिलती है. दिग्विजय वह पैसे अनुपमा को देते हुए कहते हैं कि घर की पहली तनख्वाह घर की महिला को ही मिलनी चाहिए. यह सुनकर अनुपमा भावुक हो जाती है.

आय से अधिक संपत्ति मामले में हड़कंप, ग्रामीण कार्य विभाग के इंजीनियर पर शिकंजा

पटना बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त मुहिम के तहत शनिवार सुबह जमुई जिले में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की टीम ने ग्रामीण कार्य प्रमंडल, झाझा में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार के चार ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी। सुबह-सुबह हुई इस कार्रवाई से विभागीय महकमे में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। चार ठिकानों पर एक साथ छापेमारी EOU की अलग-अलग टीमों ने जमुई शहर के केकेएम कॉलेज के समीप स्थित किराये के मकान, झाझा स्थित कार्यालय समेत चार स्थानों को एक साथ घेर लिया। पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में चल रही इस कार्रवाई में दस्तावेजों, बैंक खातों, निवेश और संपत्ति से जुड़े कागजातों की बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज सूत्रों के अनुसार कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्रारंभिक जांच में करीब 2 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह संपत्ति उनकी वैध आय से लगभग 81.5 प्रतिशत अधिक है, जिसने पूरे मामले को बेहद गंभीर बना दिया है। कोर्ट से वारंट मिलने के बाद कार्रवाई बताया जा रहा है कि विशेष न्यायालय निगरानी, पटना से तलाशी वारंट मिलने के बाद EOU ने सुनियोजित तरीके से यह कार्रवाई शुरू की। तलाशी अभियान के दौरान बैंक लॉकर, जमीन खरीद-बिक्री के दस्तावेज, बीमा निवेश और अन्य वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है। कई बड़े खुलासों की संभावना आर्थिक अपराध इकाई के अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद तत्काल कानूनी कार्रवाई की गई। फिलहाल सभी ठिकानों पर तलाशी जारी है और कार्रवाई पूरी होने के बाद कई बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है। इस हाईप्रोफाइल छापेमारी के बाद ग्रामीण कार्य विभाग समेत प्रशासनिक गलियारों में दिनभर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।  

तारा सुतारिया ने ‘टॉक्सिक’ को लेकर खोला बड़ा राज, यश के साथ काम का बताया अनुभव

बॉलीवुड एक्ट्रेस तारा सुतारिया इन दिनों कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 में अपने ग्लैमरस अंदाज को लेकर चर्चा में हैं. इसी दौरान उन्होंने अपनी आगामी फिल्म ‘टॉक्सिक’ को लेकर कई दिलचस्प बातें शेयर की. इस फिल्म में उनके साथ साउथ सुपरस्टार यश नजर आने वाले हैं. द हॉलीवुड रिपोर्टर से बातचीत के दौरान तारा ने फिल्म की कहानी, अपने किरदार और यश के साथ काम करने के अनुभव को लेकर खुलकर बात की. ‘टॉक्सिक’ में दिखेंगी दमदार महिलाएं तारा सुतारिया फिल्म में ‘रेबेका’ नाम का किरदार निभा रही हैं. तारा ने कहा, “हम सभी अलग-अलग उम्र और करियर के पड़ाव पर हैं, लेकिन हर सीन को साथ मिलकर सेलिब्रेट करना बेहद खास अनुभव रहा. फिल्म की महिलाएं शानदार और बेखौफ हैं. जब भी हम साथ शूट करते थे, मैं बस उन्हें देखकर सीखती रहती थी क्योंकि ऐसा मौका बहुत कम मिलता है.” तारा ने कहा, “ग्लोबल लेवल पर यह फिल्म लोगों के लिए पूरी तरह अलग अनुभव होगी. दर्शकों ने शायद पहले कभी ऐसा कुछ नहीं देखा होगा। फिल्म में महिलाओं की ताकत, निडरता, साहस और अलग पहचान को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है.” यश के साथ काम करने पर क्या बोलीं तारा? तारा सुतारिया ने ‘केजीएफ’ स्टार यश के साथ काम करने को लेकर कहा, “यश एक शानदार को-स्टार और इंसान हैं. मैं हमेशा ऐसे सेट्स पर काम करना चाहती हूं जहां ईमानदारी, मकसद और स्पष्ट सोच हो. गीतू मोहनदास और यश दोनों के साथ हमें वही माहौल मिला. एक महिला निर्देशक के नेतृत्व में काम करना वाकई बहुत अलग अनुभव होता है.” फिल्म की रिलीज डेट टली ‘टॉक्सिक’ को गीतू मोहनदास ने लिखा और निर्देशित किया है. फिल्म में यश और तारा सुतारिया के अलावा कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, नयनतारा और रुक्मिणी वसंत भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगी. फिल्म के निर्माताओं ने घोषणा की थी कि ‘टॉक्सिक’ अब 4 जून 2026 को रिलीज नहीं होगी. फिल्म की नई रिलीज डेट अभी सामने नहीं आई है.

अधिकमास क्या है और क्यों खास माना जाता है?

 अधिकमास इस बार 17 मई यानी कल से शुरू हो रहा है और इसका समापन 15 जून तक रहेगा. यह अतिरिक्त महीना हर साल नहीं आता, बल्कि वैदिक ज्योतिष के अनुसार, इसे खास तौर पर हमारे कैलेंडर को संतुलित करने के लिए जोड़ा जाता है. दरअसल, चंद्र कैलेंडर लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर कैलेंडर 365 दिनों का. ऐसे में दोनों के बीच तालमेल बनाए रखने के लिए अधिकमास रखा जाता है, ताकि हमारे त्योहार सही मौसम में ही आएं. लेकिन यह सिर्फ कैलेंडर ठीक करने के लिए ही नहीं है. धार्मिक दृष्टि से यह महीना बहुत खास माना जाता है. इसे भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) को समर्पित किया जाता है. मान्यता है कि इस पूरे महीने में किए गए पूजा-पाठ, दान और ध्यान का फल कई गुना बढ़ जाता है. इसलिए इसे एक तरह से पूरे महीने चलने वाला आध्यात्मिक उत्सव भी कहा जाता है. अधिकमास में क्या करें (पुण्य कर्म) अधिकमास को पुण्य कमाने का सबसे अच्छा समय माना जाता है. यह एक ऐसा मौका है जिसे आपको गंवाना नहीं चाहिए. इस पूरे महीने में ध्यान अच्छे और निस्वार्थ कामों पर रखना चाहिए, जिससे मन और आत्मा शुद्ध होती है. 1. भगवान विष्णु की पूजा करें यह महीना भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) को समर्पित होता है, इसलिए उनकी पूजा सबसे जरूरी मानी जाती है. आप रोज विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर सकते हैं. सत्यनारायण व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी बहुत शुभ होता है. यहां बड़ी पूजा नहीं, बल्कि सच्चे मन से की गई भक्ति ज्यादा महत्वपूर्ण होती है. 2. दान करें अधिकमास में किया गया दान कई गुना फल देता है. यह सिर्फ पैसे का दान नहीं है, बल्कि भावना सबसे जरूरी होती है. आप अन्न दान, वस्त्र दान या दीप दान कर सकते हैं. जरूरतमंदों की मदद करना इस महीने का सबसे सीधा और असरदार उपाय माना जाता है. 3. जप और तप करें इस महीने में मंत्र जाप और व्रत रखना बहुत लाभदायक होता है. 'ऊं नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का रोज जाप करें, अगर संभव हो तो तुलसी की माला से 108 बार जप करें. व्रत रखने से मन और इंद्रियों पर नियंत्रण आता है और ध्यान भगवान में लगता है. 4. धार्मिक ग्रंथ पढ़ें इस समय आप भगवद्गीता, श्रीमद्भागवत पुराण या रामायण जैसे पवित्र ग्रंथ पढ़ सकते हैं. इससे ज्ञान बढ़ता है और जीवन को सही दिशा मिलती है. सिर्फ पढ़ें ही नहीं, बल्कि उसकी बातों को अपने जीवन में उतारने की कोशिश करें. अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए शुभ कार्य न करें: जैसे शादी (विवाह), मुंडन और गृह प्रवेश बड़ी खरीदारी से बचें: नया घर, गाड़ी या महंगे गहने न खरीदें नई शुरुआत न करें: नया बिजनेस शुरू करना, घर बनवाना या किसी प्रोजेक्ट की शुरुआत करना टालें क्यों टालें ये काम? क्योंकि ये सभी काम हमारी इच्छाओं और भौतिक सुखों से जुड़े होते हैं. अधिकमास हमें सिखाता है कि थोड़े समय के लिए इन चीजों से ध्यान हटाकर अपनी आत्मा और अध्यात्म पर ध्यान दें. पूरे महीने का व्रत और नियम जो लोग अधिकमास में अपनी भक्ति को और गहरा बनाना चाहते हैं, वे पूरे महीने व्रत रख सकते हैं. यह एक कठिन लेकिन बहुत ही फलदायी साधना मानी जाती है. अगर आप यह व्रत करते हैं, तो आपको एक सही दिनचर्या अपनानी होती है. इस दौरान आपका भोजन बहुत साधारण और सात्विक होना चाहिए. दिन में सिर्फ एक बार खाना खाएं और उसमें प्याज, लहसुन, अनाज और मांसाहार से पूरी तरह परहेज करें. फल, दूध और व्रत में खाए जाने वाले आहार जैसे साबूदाना आदि का सेवन करें. आपकी दिनचर्या ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले) उठकर स्नान और पूजा से शुरू होनी चाहिए. यह व्रत शरीर को कष्ट देने के लिए नहीं, बल्कि मन को शांत करने और भगवान की भक्ति में लगाने के लिए किया जाता है. अधिकमास की कथा अधिकमास से जुड़ी यह कथा बहुत सुंदर और भावुक है. पहले इस अतिरिक्त महीने का कोई देवता नहीं था, इसलिए इसे मलमास कहा जाता था, यानी ऐसा महीना जिसे अशुभ या बेकार माना जाता था. इस महीने में कोई त्योहार या शुभ काम नहीं किए जाते थे, इसलिए यह खुद को उपेक्षित और दुखी महसूस करता था. यह कथा हमें उस भावना से जोड़ती है, जब कोई खुद को महत्वहीन समझने लगता है. अपनी परेशानी लेकर यह महीना भगवान विष्णु के पास गया. पद्म पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु ने जब इस महीने की परेशानी सुनी तो उन्होंने इसे अपना लिया. उन्होंने न सिर्फ इसे महत्व दिया, बल्कि अपना ही एक नाम पुरुषोत्तम भी इसे दे दिया. तभी से यह महीना पुरुषोत्तम मास कहलाने लगा. भगवान विष्णु ने यह भी कहा कि जो भक्त इस महीने में बिना किसी स्वार्थ के पूजा-पाठ, दान और अच्छे कर्म करेगा, उसे उनका विशेष आशीर्वाद मिलेगा और उसका पुण्य कई गुना बढ़ेगा. इस तरह जो महीना पहले उपेक्षित था, वही सबसे पवित्र और खास बन गया.

DIOS ने जारी किए आदेश, आकस्मिक अनुमति के बिना शिक्षक नहीं जा सकेंगे बाहर

लखनऊ माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मी जून-जुलाई में जिला मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। इस दौरान होने वाली भर्ती परीक्षाओं के कारण शिक्षकों के जिला मुख्यालय छोड़ने पर रोक रहेगी। जिला स्तर पर डीआईओएस द्वारा इसके आदेश जारी किए जा रहे हैं। जून-जुलाई में लेखपाल भर्ती लिखित परीक्षा, पुलिस भर्ती, जीआईसी प्रवक्ता, बीएड परीक्षा, यूपीटेट समेत आधा दर्जन से अधिक परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। इसके साथ ही जनगणना का भी भौतिक काम शुरू होने वाला है। ऐसे में ये शिक्षक गर्मी की छुट्टियों का भी लाभ नहीं उठा सकेंगे। डीआईओएस की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि आकस्मिक व वैध कारण होने पर ही जिला विद्यालय निरीक्षक की अनुमति से वे जिला मुख्यालय से बाहर जा सकेंगे। इसके लिए उन्हें लिखित अनुमति लेनी होगी। वहीं माध्यमिक शिक्षा निदेशक डाॅ. महेंद्र देव ने कहा कि परीक्षा कराने के लिए अनुभवी शिक्षकों की जरूरत होती है। लिहाजा स्कूलों के शिक्षक व स्टाफ को ही इसमें ड्यूटी लगाई जाती है। कक्ष निरीक्षक बनाया जाता है ताकि किसी प्रकार की कोई समस्या न हो।   माध्यमिक के दो अपर शिक्षा निदेशक के कार्यक्षेत्र में बदलाव माध्यमिक शिक्षा विभाग ने समूह क श्रेणी के दो अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया है। विभाग के संयुक्त सचिव संदीप परमार की ओर से जारी आदेश के अनुसार अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) सुरेंद्र कुमार तिवारी को अपर शिक्षा निदेशक (व्यावसायिक शिक्षा) के पद पर तैनात किया गया है। वहीं अपर शिक्षा निदेशक (व्यावसायिक शिक्षा) मनोज कुमार द्विवेदी को अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) बनाया गया है। इन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपने नए तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करके इसका प्रमाण शासन को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।   आकांक्षी जिलों के शिक्षक तबादले के लिए पहुंचे निदेशालय प्रदेश के आकांक्षी जिलों के परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षकों ने अपने साथ दोहरा व्यवहार करने और तबादले का लाभ न देने का आरोप लगाया है। अपने तबादले के लिए कई जिलों के शिक्षक शुक्रवार को बेसिक से माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के चक्कर काटते रहे लेकिन उन्हें कोई प्रभावी आश्वासन नहीं मिला है। शिक्षकों ने बताया कि वर्ष 2018 और 2020 में इन जिलों के तबादले पर रोक लगा दी गई थी। 2023 में मात्र 10 फीसदी शिक्षकों के ही तबादले हुए। इसमें अधिक भारांक वाले शिक्षकों का ही तबादला हुआ। वरिष्ठ शिक्षक इससे वंचित हैं। उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा नियमावली के तहत वरिष्ठता के आधार पर एक से दूसरे जिले में तबादला किया जाए। इसमें भारांक की भेदभावपूर्ण नीति को समाप्त किया जाए। वहीं, इन जिलों में लगी अघोषित रोक को तत्काल हटाया जाए ताकि हमारे परिवार को राहत मिल सके। शिक्षकों ने इस गर्मी की छुट्टी में इस आधार पर जल्द तबादला प्रक्रिया पूरी करने की मांग उठाई।  

वास्तु शास्त्र: घर की सीढ़ियों पर क्यों नहीं बैठना चाहिए? जानें इसके पीछे की मान्यताएं और असर

हमारे वास्तु शास्त्र में घर की हर एक चीज का काफी खास महत्व बताया गया है. चाहे हमारे घर का मुख्य दरवाजा हो, किचन हो या फिर घर की सीढ़ियां ही क्यों न हों. जब आप इसमें बताया गए नियमों का सही से पालन करने लगते हैं तो आपकी जिंदगी काफी सुखद और समृद्धि से भरी हुई हो जाती है. वहीं, इन नियमों को नजरअंदाज करने से जीवन में परेशानियों के बढ़ने का भी खतरा रहता है. हमारे वास्तु शास्त्र में घर की सीढ़ियों को लेकर भी कुछ खास नियम बताये गए हैं, जिनमें आपको इस सवाल का जवाब भी मिल जाता है कि आखिर आपको क्यों घर की सीढ़ियों पर नहीं बैठना चाहिए. आज हम आपको इसी सवाल का जवाब इस आर्टिकल में देने वाले हैं. जब आप इस आर्टिकल को पढ़ लेंगे तो दोबारा कभी भी घर की सीढ़ियों पर बैठने की गलती नहीं करेंगे. सीढ़ियों पर बैठने से रुकती है पॉजिटिव एनर्जी वास्तु शास्त्र के अनुसार आपके घर में जो भी एनर्जी होती है वह लगातार एक जगह से दूर जगह घूमती रहती है. आपकी घर की सीढ़ियां ही इस एनर्जी के ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर जाने का रास्ता मानी जाती है. ऐसे में जब कोई भी आकर सीढ़ियों पर बैठ जाता है, तो वह एनर्जी के फ्लो में रुकावट बन जाता है. मान्यताओं के अनुसार जब आप ऐसा करते हैं तो घर में पॉजिटिव एनर्जी घटने लगती है और साथ ही स्ट्रेस और बेचैनी बढ़ने लग जाती है. फिनांशियल प्रॉब्लम्स से भी जोड़ा जाता है इसे वास्तु शास्त्र में हमारी घर की सीढ़ियों को ही जीवन में तरक्की करने का और आगे बढ़ने का संकेत माना गया है. ऐसे में अगर आप घर की सीढ़ियों में बैठते हैं या फिर लंबे समय तक खड़ा रहते हैं, तो हो सकता है कि आपकी तरक्की में रुकावट आ जाए. मान्यताओं के अनुसार आपकी यह गलती पैसों से जुड़ी दिक्कतों को भी बढ़ा सकती है. कई बार इसकी वजह से आपको मेहनत का भी पूरा फल नहीं मिलता है. परिवार के रिश्तों पर भी पड़ सकता है असर आपके घर का माहौल कैसा है और वहां की एनर्जी कैसी है इस बात का असर पारिवारिक रिश्तों पर भी काफी गहरा पड़ता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर घर की एनर्जी बैलेंस्ड न रहे, तो छोटी से छोटी बातों पर भी स्ट्रेस और झगड़े बढ़ने लग जाते हैं. इसके अलावा जब आप सीढ़ियों पर बैठे रहते हैं या फिर उसे गंदा करके रखते हैं तो पूरे घर का माहौल भारी लगने लगता है. कई बार इसकी वजह से परिवार में झगड़े और बहस भी बढ़ जाते हैं. हेल्थ पर भी पड़ सकता है निगेटिव असर वास्तु शास्त्र के अनुसार आपको इसलिए भी घर की सीढ़ियों पर नहीं बैठना चाहिए, क्योंकि इसकी वजह से दुर्घटना होने का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा आपके घर में आने-जाने वालों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. कई बार सीढ़ियों के आसपास धूल जमा हो जाती है, जिस वजह से इसका असर आपकी सेहत पर भी पड़ सकता है.