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हेमंत सोरेन सरकार का बड़ा फैसला, उपायुक्तों को मिली लीज साइनिंग की शक्ति

रांची  झारखंड में जिन 35 बालू घाटों से बालू का उठाव सिर्फ उपायुक्त के हस्ताक्षर के लिए रुका हुआ था, उसका मार्ग प्रशस्त हो गया है। राज्य सरकार ने इससे संबंधित संशोधित नियमावली को स्वीकृति दे दी है। नई व्यवस्था में बालू लीज की निगरानी का सारा जिम्मा उपायुक्तों के पास होगा। जिले के उपायुक्त ही लीज डीड पर हस्ताक्षर करेंगे। उपायुक्त के हस्ताक्षर नहीं होने के कारण वर्तमान में 35 बालू घाटों से बालू का उठाव बंद था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश के बाद शनिवार से बालू घाटों से बालू का उठाव शुरू हो जाएगा। झारखंड बालू खनन नियमावली 2026 के नियम 14 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए खान एवं भूतत्व विभाग ने संबंधित जिले के उपायुक्त को नियमावली के अंतर्गत खनन पट्टे को निष्पादित करने की शक्तियां प्रदान कर दी हैं। इसके साथ ही अब राज्य के 35 घाटों से बालू का उठाव शुरू हो जाएगा। माना जा रहा है कि इससे राज्य में बालू की कालाबाजारी पर रोक लगाने में सफलता मिलेगी। एक महीने में उठेगा पांच करोड़ सीएफटी बालू झारखंड में कुल 444 बालू घाट जिनमें से 290 बालू घाटों की नीलामी हो चुकी है। इन 290 बालूघाटों में से 35 घाटों के लिए सभी आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त हो चुकी हैं और खनन पट्टों के साथ संचालन के लिए तैयार है। ऐसा होने के बाद 35 घाटों से बालू का उठाव वैध तरीके से होने लगेगा। खनन विभाग के अनुसार कि इन 35 बालू घाटों से हर दिन करीब दस लाख सीएफटी बालू का उठाव की उम्मीद है। इससे हर महीने करीब पांच करोड़ सीएफटी बालू का उठाव हो सकेगा। सुचारू रूप से एक महीने में इतने बालू का उठाव हो जाने से एनजीटी की रोक लगने के बावजूद बालू की कमी नहीं हो सकेगी। इससे पहले बालू घाटों कि नीलामी और उठाव पर कोर्ट की तरफ से पांच महीने तक रोक लगी रही।

80 फीट ऊंची पहाड़ी से कूदे थे सलमान खान, बाल-बाल बची थी जान

सुपरस्टार सलमान खान जब भी बड़े पर्दे पर नजर आते हैं, तो उनका चार्म सारी लाइमलाइट लूटकर चला जाता है. सलमान के स्टाइल पर उनके फैंस दिल हारते हैं. यही कारण है कि उनकी एक खराब फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर बॉलीवुड की छोटी फिल्मों से ज्यादा कमा लेती हैं. सलमान ने अपने 35 साल के करियर में 100 से ज्यादा फिल्में की हैं. उनमें कई सारे खतरनाक एक्शन सीन्स भी एक्टर ने खुद परफॉर्म किए. हाल ही में वैराइटी इंडिया से बातचीत में सलमान ने अपने उन स्टंट्स को याद किया, जिसे करते समय उन्होंने अपनी जान खतरे में डाली थी. सुपरस्टार ने बताया कि उनकी 90s की शुरुआत में दो ऐसी फिल्में रहीं, जिनमें वो बाल-बाल बचे थे. सलमान का खतरनाक स्टंट सलमान से जब उनके सबसे रिस्की स्टंट के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने अपने अंदाज में सबसे पहले कहा- मैं 60 साल का हो गया हूं, आप वो पूछ रहे हैं जो मैं 35 साल पहले कर चुका हूं. इतने सालों पहले मैंने वो कौनसा खतरनाक सबसे पहले स्टंट किया था मैं याद रख सकूं, ये संभव नहीं है. हालांकि बाद में उन्होंने याद किया और अपनी फिल्म जाग्रुती का किस्सा सुनाया, जब वो एक ऊंची पहाड़ी से कूद गए थे. सलमान ने कहा- हम लोग उडुपी में शूट कर रहे थे, वहां एक 80 फुट का पहाड़ था और खाई थी. तब के दौर में सिर्फ एक या दो बॉक्स हुआ करते थे, ताकि किसी को चोट ना पहुंचे. लेकिन ये हाई-जंप थी, तो स्टंट टीम ने बॉक्स के तीन लेयर लगाए थे जिसमें गद्दे भी बिछाए गए थे. 'जब मैं ऊपर चढ़ा, तो मैं वहां से बॉक्स ही नहीं देख पाया जिसपर मुझे जंप करना था. खाई गहरी थी, इसलिए मुझे अपनी जजमेंट के हिसाब से कूदना था. मैं वो जंप नहीं करता, लेकिन तबतक वहां काफी भीड़ आ चुकी थी. तो अब ऊपर जाकर नीचे आ जाना और स्टंट करने से मना करना, थोड़ा ईगो को नुकसान पहुंचाता. तभी मैंने फैसला किया कि अब मुझे कूदना है और बॉक्स वहीं कहीं पर हैं. तो मैंने अपने मेकअप मैन का हाथ पकड़ा और जैसे ही जंप करने के लिए दौड़ा, मेरा पैर फिसल गया.' सलमान ने बताया कि उनका सिर पहाड़ की चोटी पर लगभग लगने वाला था और वो तुरंत नीचे गिर गए. सुपरस्टार ने अपने एक और स्टंट का जिक्र किया, जो उन्होंने फिल्म पत्थर के फूल में किया था. सलमान को मुंबई की रोड पर स्केटिंग करनी थी, इस दौरान उनका बैलेंस बिगड़ा और वो गद्दे पर इतनी जोर से गिरे कि करीब 90 सेकेंड तक सांस नहीं आई थी.

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में बड़ा टर्निंग पॉइंट, इसी महीने चुनाव नोटिस जारी होने के संकेत

 जयपुर राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) में लंबे समय से जारी गतिरोध और प्रशासनिक खींचतान के बीच अब चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. राजधानी जयपुर में आरसीए की एडहॉक कमेटी और प्रदेश के विभिन्न जिला क्रिकेट संघों के पदाधिकारियों के बीच एक बेहद अहम बैठक आयोजित की गई. इस बैठक के बाद खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने सरकार का रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार या मुख्यमंत्री की मंशा आरसीए के कामकाज में दखल देने की बिल्कुल नहीं है. सरकार केवल यह चाहती है कि राजस्थान क्रिकेट में पारदर्शिता आए और खेल के हित में जल्द से जल्द चुनाव संपन्न हों. 'क्रिकेट का भविष्य जिला संघों के हाथ में' बैठक में शामिल होने पहुंचे खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने मीडिया से बातचीत में जोर देकर कहा कि राजस्थान क्रिकेट का संचालन अंततः जिला संघों और निर्वाचित पदाधिकारियों को ही संभालना है. उन्होंने सभी जिला क्रिकेट संघों से अपील की कि वे अपने आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट हों और एडहॉक कमेटी के साथ मिलकर चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं. खेल मंत्री ने यह भी साफ किया कि विवाद बढ़ने की स्थिति में सरकार केवल एडहॉक कमेटी का गठन कर सकती है, लेकिन चुनाव कराने की अंतिम जिम्मेदारी क्रिकेट से जुड़े पदाधिकारियों की ही होती है. समय पर चुनाव होने से सुधरेगा युवा खिलाड़ियों का भविष्य खेल मंत्री ने समय पर चुनाव कराने की अहमियत समझाते हुए कहा कि ऐसा होने से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से मिलने वाले संसाधनों और सहायता का सही और पारदर्शी इस्तेमाल हो सकेगा. जब आरसीए में एक चुनी हुई और पारदर्शी संस्था काम करेगी, तो प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के बेहतर और निष्पक्ष अवसर मिलेंगे. इसी महीने जारी हो सकता है चुनावों का आधिकारिक नोटिस दूसरी तरफ, आरसीए एडहॉक कमेटी के कन्वीनर मोहित यादव ने इस बैठक को बेहद सकारात्मक और उम्मीदों से भरा बताया. उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के 29 जिला संघों के पदाधिकारियों ने जल्द से जल्द चुनाव कराने की मांग का पुरजोर समर्थन किया है. मोहित यादव के मुताबिक, कमेटी पूरी गंभीरता और मुस्तैदी से काम कर रही है. उन्होंने उम्मीद जताई है कि इसी महीने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के चुनावों का आधिकारिक नोटिस जारी कर दिया जाएगा, जिससे चुनावी प्रक्रिया को आधिकारिक गति मिलेगी. मैदान पर 'फ्रेंडली मैच' और पर्दे के पीछे 'बड़ा एक्शन' इस पूरी बैठक और सकारात्मक माहौल के पीछे आरसीए की अंदरूनी सियासत भी पूरी तरह गरमाई रही. हालांकि पदाधिकारियों के बीच का तनाव और माहौल को हल्का करने के लिए एक फ्रेंडली क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया था, लेकिन पर्दे के पीछे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी भी दिखाई दी. सूत्रों के हवाले से खबर है कि बैठक के दौरान नागौर और सवाई माधोपुर जिला क्रिकेट संघों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर एक पत्र पर करीब 25 जिला संघों के पदाधिकारियों के हस्ताक्षर करवाए गए हैं, जिस पर एडहॉक कमेटी जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकती है. राजस्थान क्रिकेट प्रशासन के लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट कोर्ट-कचहरी के चक्करों और आपसी गुटबाजी से जूझ रहे आरसीए के लिए इस बैठक को एक बड़े टर्निंग पॉइंट के रूप में देखा जा रहा है. खेल मंत्री के कड़े रुख और एडहॉक कमेटी की सक्रियता से यह साफ है कि आने वाले दिनों में राजस्थान क्रिकेट के प्रशासन में बड़े बदलाव होने वाले हैं. अब सभी की नजरें इसी महीने जारी होने वाले चुनावी नोटिस और जिला संघों के अगले कदम पर टिकी हैं.

राऊज एवेन्यू कोर्ट में सोनिया गांधी केस पर बहस, नागरिकता और वोटर लिस्ट पर उठे सवाल

नई दिल्ली दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य सोनिया गांधी के खिलाफ दाखिल उस रिवीजन पिटीशन पर सुनवाई टल गई, जिसमें बिना भारतीय नागरिकता हासिल किए वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने का आरोप लगाया गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 जुलाई को होगी। पिछली सुनवाई ने दिया था निर्देश पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को एक सप्ताह के भीतर अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसी दौरान शिकायतकर्ता के वकील विकास त्रिपाठी ने चुनाव आयोग से प्राप्त कुछ दस्तावेजों को कोर्ट रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति मांगी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। याचिकाकर्ता ने लगाया आरोप सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया कि फिलहाल उनकी मांग ट्रायल शुरू कराने की नहीं है बल्कि पुलिस जांच करवाने की है। उनका कहना था कि मामले में कई ऐसे सवाल हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता हासिल की थी, लेकिन उनका नाम वर्ष 1980 की नई दिल्ली की मतदाता सूची में पहले से मौजूद था। याचिकाकर्ता ने उठाया सवाल याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि जब 1983 में नागरिकता मिली तो फिर 1980 की वोटर लिस्ट में उनका नाम किस आधार पर शामिल किया गया था। याचिका में यह भी पूछा गया है कि क्या उस समय वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने के लिए किसी फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल किया गया था। नाम हटाने की पूछी वजह इसके अलावा याचिका में यह भी दावा किया गया है कि वर्ष 1982 में सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था। शिकायतकर्ता ने सवाल किया है कि आखिर नाम हटाने की वजह क्या थी और इसके पीछे कौन से दस्तावेज या प्रक्रिया अपनाई गई थी। अब इस पूरे मामले पर अदालत 4 जुलाई को आगे की सुनवाई करेगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।  

साइबर गुलामी मामले में खुलासा, भारतीय युवाओं को विदेश में फंसाकर कराई जा रही थी ठगी

 पटना राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी और साइबर गुलामी मामले में बड़ी कार्रवाई की है। फरार मुख्य आरोपी आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। यह आरोप पत्र पटना स्थित एनआईए की विशेष अदालत में दाखिल की गई है। एनआईए ने आनंद कुमार सिंह और उसकेचार सहयोगियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत गंभीर आरोप लगाए हैं। यूपी के हैं दो आरोपित आरोप पत्र में शामिल तीन सह-आरोपी उत्तर प्रदेश के अभय नाथ दुबे, बिहार के अभिरंजन कुमार और उत्तर प्रदेश के रोहित यादव को इस वर्ष फरवरी में कंबोडिया से दिल्ली पहुंचने पर गिरफ्तार किया गया था। वहीं पांचवां आरोपी प्रहलाद कुमार सिंह फिलहाल जमानत पर बाहर है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने एक संगठित मानव तस्करी गिरोह के तहत भारतीय युवाओं को विदेश में वैध नौकरी और आकर्षक वेतन का झांसा देकर कंबोडिया भेजा। वहां पहुंचने के बाद पीड़ितों के पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उन्हें फर्जी कंपनियों में साइबर ठगी से जुड़े काम करने के लिए मजबूर किया गया। युवाओं को दिए जाते थे ब‍िजली के झटके विरोध करने वाले युवाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। जांच में सामने आया है कि पीड़ितों को बिजली के झटके दिए गए, जबरन कैद में रखा गया और भोजन-पानी तक से वंचित किया गया। एनआईए की जांच में आनंद कुमार सिंह को इस पूरे गिरोह का सरगना पाया गया है। एजेंसी के मुताबिक, वह भारत में एजेंटों और ट्रैवल एजेंटों के जरिए युवाओं की भर्ती करता था। इसके बाद कंबोडिया में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर उनकी अवैध तस्करी कराता था। जांच में यह भी सामने आया है कि प्रत्येक युवक को फर्जी कंपनियों को बेचने के बदले 2,000 से 3,000 अमेरिकी डॉलर तक वसूले जाते थे। एनआईए ने कहा है कि मामले आरसी-10/2024/एनआइए/डीएलाई में गिरोह के अन्य सदस्यों और पूरी साजिश का खुलासा करने के लिए जांच अभी जारी है।

पीएम मोदी की अपील का असर, राजस्थान में जज से लेकर अफसर तक साइकिल और ईवी का इस्तेमाल

 जयपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील का देश में बड़ा असर देखने को मिल रहा है. इस मुहिम से प्रेरित होकर राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस समीर जैन इन दिनों लग्जरी सरकारी गाड़ी छोड़कर साइकिल से अदालत पहुंच रहे हैं. शनिवार को भी वे अपने गांधीनगर स्थित आवास से करीब 5 किलोमीटर की दूरी तय कर साइकिल से हाईकोर्ट पहुंचे. इस दौरान उन्होंने सुरक्षाकर्मियों को भी साथ नहीं रखा, जो उनकी सादगी को दर्शाता है. हालांकि रास्ते में अंबेडकर सर्किल और हाईकोर्ट गेट पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने उन्हें पहचान लिया. वकीलों और कर्मचारियों के लिए प्रेरणा हाईकोर्ट परिसर में जब लोगों ने माननीय न्यायाधीश को साइकिल से आते देखा, तो हर कोई हैरान रह गया. अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और कोर्ट कर्मचारियों के बीच उनकी इस अनूठी पहल की जमकर चर्चा हो रही है. सभी ने इसे पर्यावरण संरक्षण, व्यक्तिगत फिटनेस और ईंधन की बचत के लिए एक बेहद सकारात्मक और प्रेरणादायक कदम बताया है. बड़े पदों पर बैठे लोगों ने बदला अपना अंदाज ईंधन बचाने और सादगी अपनाने का यह सिलसिला केवल न्यायपालिका तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के अन्य शीर्ष पदों पर बैठे लोग भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या कम कर दी है. इसी तरह, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी अपने सुरक्षा काफिले को सीमित किया है और हाल ही में वे एक कार्यक्रम में पर्यावरण अनुकूल ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) कार से पहुंचे. प्रशासनिक स्तर पर भी इसका असर दिख रहा है. जयपुर में आईपीएस विकास कुमार साइकिल चलाकर अपने दफ्तर पहुंचे, वहीं शुक्रवार को शहर में कुछ जगहों पर पुलिस अधिकारियों ने साइकिल पर ही गश्त कर जनता के बीच एक बेहतरीन संदेश दिया.

हजारों करोड़ के घोटाले के आरोप में कंपनी और 7 निदेशकों पर बैन, हरियाणा में लाइसेंस बंद

 चंडीगढ़ प्लॉट-फ्लैट के नाम पर हजारों करोड़ रुपये का घोटाला करने के आरोपित पार्श्वनाथ डेवलपर्स को अब हरियाणा में लाइसेंस नहीं मिलेंगे। प्रदेश सरकार ने पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड के साथ ही सात निदेशकों को भी प्रतिबंधित कर दिया है। कंपनी पर पिछले 20 वषों में सोनीपत में आठ सेक्टरों, रोहतक में तीन और पानीपत में दो सेक्टरों में विभिन्न परियोजनाओं के नाम पर निवेशकों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। इसी तरह दिल्ली में भी विभिन्न आरोपों को लेकर बाराखंभा रोड पर स्थित थाने में एफआईआर दर्ज हैं, जिनकी सुनवाई अदालत में चल रही है। नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के निदेशक अमित खत्री ने पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड और निदेशकों को विभिन्न अनियमितताओं के प्लॉट व फ्लैट के नाम पर हजारों करोड़ के घोटाले के आरोपित, दिल्ली में भी दर्ज हैं एफआईआर आरोपों के चलते हरियाणा में भविष्य में कोई भी लाइसेंस नहीं देने के आदेश जारी कर दिए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार ने पार्श्वनाथ डेवलपर्स को वर्ष 2006 में सोनीपत में आवासीय परियोजनाएं विकसित करने के लिए चार, 2007 में पानीपत और वर्ष 2010 में रोहतक में एक-एक लाइसेंस दिए थे। इन परियोजनाओं का लाइसेंस हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन अधिनियम 1975 और उसके नियम 1976 के प्रविधानों के तहत धोखाधड़ी के चलते निष्क्रिय किया जा चुका है। भूखंडों और फ्लैटों की बिक्री के दौरान धोखाधड़ी, जालसाजी और किए गए वादों का पालन न करने के संबंध में सरकार के पास आमजन से कई शिकायतें पहुंची हैं। हरियाणा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (हरेरा) भी लाइसेंसधारी कंपनी के खिलाफ कई आदेश पारित कर चुका है। दिवालियापन के कगार पर पहुंची कंपनी गंभीर वित्तीय और कानूनी समस्याओं का सामना कर रही पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड दिवालियापन के कगार पर पहुंच चुकी है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) 452 करोड़ से अधिक के डिफाल्ट के बाद कंपनी के खिलाफ कॉरपोरेट दिवालिया पन समाधान प्रक्रिया शुरू करने की याचिका स्वीकार कर चुका है। एनसी एलटी ने कंपनी के मामलों का प्रबंधन करने के लिए एक अंतरिम समाधान पेशेवर भी नियुक्त किया है। इससे पहले नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग ने सोनीपत के कुंडली में 84.155 एकड़ क्षेत्र में आवासीय कालोनी विकसित करने के लिए कंपनी को दिया गया लाइसेंस रद कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट भी विभिन्न मामलों में कंपनी को दोषी ठहराते हुए प्रतिकूल आदेश जारी कर चुके हैं। ईडीसी-एसआइडीसी के 331 करोड़ नहीं कराए जमा पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड पर 19 सितंबर 2024 तक बाह्य विकास शुल्क (ईडीसी) और एसआइडीसी का 333.31 करोड़ रुपये बकाया था, जिसे जमा नहीं कराया। गंभीर आरोपों में जांच का सामना कर रही कंपनी ने लाइसेंस नवीनीकरण के लिए आवेदन तक नहीं किया। इन निदेशकों पर लगा प्रतिबंध दीपा गुप्ता, रक्षिता शर्मा, राजीव जैन, प्रदीप कुमार जैन, संजीव कुमार जैन, सुभाष चंद्र सेतिया व अशोक कुमार  

कोर्ट ने सुनाया बड़ा निर्णय, Vijay Mishra और परिवार को मामले में दोषी माना

  लखनऊ भदोही के बाहुबली पूर्व विधायक विजय मिश्रा और उनके परिवार को अदालत से बड़ा झटका लगा है. भदोही की एमपी-एमएलए कोर्ट ने रिश्तेदार की संपत्ति अवैध रूप से हथियाने के मामले में विजय मिश्रा, उनकी पत्नी रामली मिश्रा और बेटे विष्णु मिश्रा को 10-10 साल की सजा सुनाई है. वहीं इस मामले में उनकी बहू रूपा मिश्रा को 4 साल की कैद की सजा दी गई है. कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर विजय मिश्रा और उनका परिवार चर्चा में आ गया है।  कोर्ट ने विजय मिश्रा समेत पूरे परिवार को माना दोषी बताया जा रहा है कि यह मामला रिश्तेदार की संपत्ति पर अवैध कब्जा करने और धोखाधड़ी से जुड़ा था. लंबे समय से इस मामले की सुनवाई चल रही थी. अभियोजन पक्ष ने अदालत में कई दस्तावेज और गवाह पेश किए, जिनके आधार पर कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी माना. फैसले के दौरान अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई थी।  विजय मिश्रा के लिए यह लगातार दूसरा बड़ा झटका है. इससे महज दो दिन पहले प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट ने एक हत्याकांड मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. अब एक और मामले में सजा मिलने से उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं. लगातार दो अलग-अलग मामलों में सजा सुनाए जाने के बाद विजय मिश्रा की राजनीतिक और सामाजिक छवि पर भी बड़ा असर पड़ रहा है।  विजय मिश्रा का भदोही की राजनीति में रहा है प्रभाव पूर्वांचल की राजनीति में विजय मिश्रा लंबे समय तक प्रभावशाली नेता माने जाते रहे हैं. भदोही जिले की राजनीति में उनका मजबूत दबदबा रहा है. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हुए, जिनमें रंगदारी, कब्जा, मारपीट और हत्या जैसे गंभीर आरोप शामिल रहे हैं. कई मामलों में जांच एजेंसियां और पुलिस पहले से कार्रवाई करती रही हैं।  अदालत के फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि लगातार मिल रही सजाओं से विजय मिश्रा और उनके परिवार की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं. वहीं अभियोजन पक्ष ने अदालत के फैसले को न्याय की जीत बताया है. फिलहाल कोर्ट के आदेश के बाद सभी दोषियों के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।   

फातिमा सना बनीं कप्तान, पांच नए खिलाड़ियों को मिला डेब्यू मौका

नई दिल्ली आईसीसी विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने 15 सदस्यीय टीम का ऐलान कर दिया है. पाकिस्तानी टीम की कप्तानी एक बार फिर स्टार ऑलराउंडर फातिमा सना को सौंपी गई है. पाकिस्तान की टीम में पांच ऐसे खिलाड़ियों को शामिल किया गया है, जो विमेंस T20 वर्ल्ड कप में डेब्यू करने के लिए तैयार हैं. इनमें सायरा जबीन, तस्मिया रुबाब, नतालिया परवेज, इमान फातिमा और रमीन शमीम शामिल हैं. हाल ही में जिम्बाब्वे के खिलाफ ODI सीरीज में दो शतक जड़ने वाली गुल फिरोजा टीम के टॉप ऑर्डर की सबसे बड़ी उम्मीद होंगी. इसके अलावा अनुभवी बल्लेबाज मुनीबा अली और आयशा जफर से भी बड़ी पारियों की उम्मीद की जा रही है. मिडिल ऑर्डर में आलिया रियाज और इरम जावेद भी अहम भूमिका निभा सकती हैं. पाकिस्तान की टीम की असली ताकत एक बार फिर उसकी गेंदबाजी मानी जा रही है. स्पिन विभाग में सादिया इकबाल, नाशरा संधू और तुबा हसन जैसी अनुभवी गेंदबाज मौजूद हैं. वहीं तेज गेंदबाजी का जिम्मा कप्तान फातिमा सना, डायना बेग और तस्मिया रुबाब संभालेंगी. आईसीसी विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत 12 जून को होनी है और इसका खिताबी मुकाबला 5 जुलाई को निर्धारित है. इस बार विमेंस टी20 वर्ल्ड कप की मेजबानी इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) कर रहा है. टी20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान अपना पहला मुकाबला चिर प्रतिद्वंद्वी भारत के खिलाफ खेलेगा. भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर अभी से जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. पाकिस्तानी टीम अब तक हर महिला T20 वर्ल्ड कप में हिस्सा ले चुकी है, लेकिन यह टीम कभी नॉकआउट स्टेज तक नहीं पहुंच पाई. इस बार युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के मिश्रण के साथ पाकिस्तान इतिहास बदलने की कोशिश करेगा. पाकिस्तानी टीम  फातिमा सना (कप्तान), गुल फिरोजा, आयशा जफर, इरम जावेद, इमान फातिमा, आलिया रियाज, नतालिया परवेज, सायरा जबीन, मुनीबा अली, तुबा हसन, रमीन शमीम, सादिया इकबाल, नाशरा संधू, डायना बेग और तस्मिया रुबाब. पाकिस्तानी टीम का शेड्यूल 14 जून बनाम भारत, बर्मिंघम 17 जून बनाम साउथ अफ्रीका, बर्मिंघम 20 जून बनाम बांग्लादेश, साउथम्प्टन 23 जून बनाम ऑस्ट्रेलिया, लीड्स 27 जून बनाम नीदरलैंड्स, ब्रिस्टल

फीफा वर्ल्ड कप 2026 का ऑफिशियल गाना ‘दाई दाई’ रिलीज, शकीरा और बर्ना बॉय ने दी आवाज

ज्यूरिख  अगले माह अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में शुरू होने वाले फुटबॉल के महाकुंभ फीफा विश्व कप के लिए आधिकारिक गीत 'दाई दाई' रिलीज कर दिया गया है। फीफा ने शुक्रवार को बताया कि शकीरा और नाइजीरिया के गायक-गीतकार बर्ना बाय ने इस गाने को गाया है। यह गाना उत्तरी अमेरिका में 11 जून से शुरू होने वाले इस टूर्नामेंट का आधिकारिक गीत होगा। फीफा ने कहा कि दाई दाई फुटबॉल, संस्कृति और एकता का जीवंत नमूना है। यह शकीरा और बर्ना बॉय की विश्व भर में जानी पहचानी ओजभरी आवाज और ऊर्जा का शानदार मिश्रण है। शकीरा, बर्ना बॉय ने ही इसे रिलीज किया है। फीफा ने कहा कि वह प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध इस गाने से मिलने वाली रॉयल्टी का उपयोग फीफा वैश्विक नागरिक शिक्षा कोष की मदद के लिए करेगा। कुछ इस तरह है दाई दाई गाना इस गाने में एक ही लाइन में दुनिया के कई सबसे मशहूर फुटबॉल खिलाड़ी और इस साल के विश्व कप में हिस्सा लेने वाले देशों के नाम लिए गए हैं। जैसे कि ब्राजील, उरुग्वे, अर्जेंटीना, कोलंबिया। साथ ही शकीरा खुशी से कहती हैं मेक्सिको, जापान, कोरिया, नीदरलैंड्स। इस गाने में पहले कोरस के बाद शकीरा और बर्ना बॉय बारी-बारी से अपने-अपने लाइन गाते हैं। फिर एक-दूसरे की लाइन को गाते हैं। शकीरा ने पिछले हफ्ते पहली बार दाई दाई गाने के छोटे से हिस्से को इंटरनेट मीडिया पर साझा किया था। इसमें ब्राजील के रियो डी जेनेरियो के माराकाना स्टेडियम के मैदान के बीच में उनके डांस का एक मिनट लंबा टीजर क्लिप दिखाया गया था। इससे पहले मार्च में, कोका-कोला ने विश्व कप के लिए अपना आधिकारिक एंथम शेयर किया था। रियल की जीत के बावजूद एमबापे को झेलनी पड़ी हूटिंग स्पेनिश फुटबॉल लीग ला लीगा में रियल मैड्रिड की ओविएडो पर 2-0 से जीत के बावजूद रीयल के फैंस ने एमबापे सहित टीम के अन्य खिलाड़ियों के विरुद्ध हूटिंग की। ओविएडो पहले ही लीग से बाहर हो चुका है। चोट के कारण कुछ समय बाहर रहने के बाद काइलियन एमबापे इस मुकाबले में सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर आए थे। हूटिंग पर एमबापे ने कहा कि मेरे करियर में पहले भी मेरी हूटिंग हुई है। यह खेल का ही एक हिस्सा है। कभी-कभी फैंस खुश नहीं होते। दरअसल इस हफ्ते की शुरुआत में ट्रेनिंग के दौरान रियल के खिलाड़ियों के बीच बहस से हुई थी, जिसके चलते क्लब ने फेडेरिको वाल्वरडे और आरेलियन टचौमेनी पर भारी जुर्माना लगाया था।