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ठेला-खोमचा पर महंगाई की मार, फास्ट फूड की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी

रांची  शहर में बढ़ती महंगाई के बीच अब ठेला-खोमचा और स्ट्रीट फूड भी आम लोगों की पहुंच से धीरे-धीरे दूर होता जा रहा है। गैस सिलिंडर की किल्लत और ब्लैक में अधिक कीमत पर गैस खरीदने की मजबूरी ने फास्ट फूड से लेकर पारंपरिक नाश्ते तक की कीमतें बढ़ा दी है। इसका सीधा असर मध्यम वर्ग, मजदूर, छात्र और रोज कमाकर खाने वाले लोगों पर पड़ रहा है, जो सस्ते और गर्म खाने के लिए ठेला-खोमचा पर निर्भर रहते हैं। शहर के कई इलाकों में एग रोल, चौमिन, पकौड़ी, समोसा, जलेबी, कचौड़ी और कुलचा-नान जैसे खाद्य पदार्थों के दाम में अचानक बढ़ोतरी देखी जा रही है। पहले 30 से 40 रुपये में मिलने वाला एग रोल अब 60 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं 8 रुपये में बिकने वाला समोसा, आलू चाप और कचौड़ी अब 10 रुपये से लेकर कई जगहों पर 15 रुपये प्रति पीस तक बिक रहा है। गैस की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने से दुकानदारों को उठानी पड़ रही परेशानी इसी तरह 10 रुपये प्लेट मिलने वाली पकौड़ी अब 20 रुपये तक पहुंच गई है। जलेबी का भाव भी 30 रुपये पाव से बढ़कर 40 रुपये पाव हो गया है। कुलचा-नान और अन्य फास्ट फूड की कीमतों में भी लगभग 20 रुपये तक का इजाफा देखा जा रहा है। दुकानदारों का कहना है कि गैस की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। शहर के कई फास्ट फूड दुकानदारों ने बताया कि जितनी संख्या में गैस सिलेंडर की जरूरत होती है, उतनी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। मजबूरी में उन्हें अधिक कीमत देकर बाहर से गैस सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। एक गैस सिलिंडर पांच से छह दिनों तक चलता एक फास्ट फूड संचालक ने बताया कि चौमिन, चिल्ली और एग रोल बनाने में रोजाना अधिक गैस की खपत होती है। लेकिन गैस नहीं मिलने से खर्च बढ़ गया है, जिसके कारण खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ाने पड़े हैं। वहीं एक समोसा दुकानदार ने कहा कि उनकी दुकान में एक गैस सिलेंडर पांच से छह दिनों में खत्म हो जाता है। समय पर सिलेंडर नहीं मिलने पर उन्हें ब्लैक में गैस खरीदनी पड़ती है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई छोटे दुकानदार घरेलू गैस सिलिंडर का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन यह उनकी मजबूरी बन चुकी है। बढ़ती कीमतों ने चिंता बढ़ा दी उधर, ठेला-खोमचा में खाना खाने वाले लोगों का कहना है कि उनकी आय सीमित है और बड़े होटल या रेस्टोरेंट में खाना उनके बजट से बाहर है। ऐसे में ठेला-खोमचा ही उनके लिए सबसे बड़ा सहारा है। लोगों ने बताया कि कम कीमत में ताजा और गर्म खाना मिलने के कारण वे वर्षों से स्ट्रीट फूड पर निर्भर हैं, लेकिन अब यहां भी लगातार बढ़ती कीमतों ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।

बिहार में सामाजिक बहिष्कार का फरमान: परिवार ने बेटी का कराया प्रतीकात्मक दाह संस्कार

मुजफ्फरपुर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रेम विवाह करने वाली एक युवती को गांव की पंचायत ने सामाजिक रूप से ‘मृत’ घोषित कर दिया। पंचायत के दबाव में परिजनों ने अपनी ही बेटी का प्रतीकात्मक दाह संस्कार कर दिया। मामला जिले के मड़वन प्रखंड क्षेत्र के एक गांव का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार युवती अपने प्रेमी के साथ घर छोड़कर चली गई थी। इस घटना के बाद गांव में नाराजगी फैल गई और पंचायत बुलाई गई। पंचायत ने युवती के परिवार के सामाजिक बहिष्कार का फैसला सुनाया। पंचायत ने परिवार के सामने रखी शर्त ग्रामीणों ने परिवार से कहा कि यदि उन्हें गांव और समाज में फिर से रहना है तो अपनी बेटी का पूरी तरह बहिष्कार करना होगा। पंचायत का फरमान इतना कठोर था कि परिवार को बेटी को ‘मृत’ मानने के लिए मजबूर होना पड़ा। बताया जा रहा है कि गांव और समाज में अपनी जगह बनाए रखने के लिए परिजनों ने बेटी को कागजों और रस्मों में मृत घोषित कर दिया। प्रेमी के साथ शादी कर ससुराल चली गई युवती मामले में पहले युवती के परिजनों ने करजा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए युवती को बरामद किया और कोर्ट में पेश किया। न्यायालय में युवती ने बयान दिया कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से युवक के साथ शादी की है। उसने अपने पति के साथ रहने की इच्छा जताई। युवती ने अपने परिजनों पर ससुराल पक्ष को प्रताड़ित करने का आरोप भी लगाया। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने युवती को उसकी इच्छा के अनुसार उसके ससुराल भेज दिया। जिंदा लड़की की निकाली गई अर्थी पंचायत के फैसले के बाद युवती के परिवार ने गांव वालों के साथ मिलकर उसका सांकेतिक दाह संस्कार किया। ग्रामीणों के अनुसार हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार पूरे कार्यक्रम को किया गया। बताया गया कि युवती का प्रतीकात्मक शव तैयार किया गया, जिसमें उसकी तस्वीर रखी गई। इसके बाद अर्थी सजाकर गांव में शव यात्रा निकाली गई।   श्मशान घाट में किया गया पुतले का दाह संस्कार शव यात्रा के बाद लोगों ने श्मशान घाट पहुंचकर मंत्रोच्चारण के बीच पुतले का दाह संस्कार कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा कार्यक्रम उसी तरह किया गया, जैसे किसी व्यक्ति के निधन के बाद अंतिम संस्कार और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। घटना के बाद गांव में इस मामले को लेकर चर्चा तेज है, लेकिन अधिकांश लोग खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। वहीं यह मामला सामाजिक सोच और पंचायत के फैसलों को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।  

रिकॉर्ड उत्पादन के बाद संकट: यूपी के कोल्ड स्टोरेज भरने से किसानों की चिंता बढ़ी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में आलू किसानों की बदहाली दूर होगी। अन्य राज्यों से संपर्क करके वहां आलू भेजने की तैयारी चल रही है। अगले सीजन में बोआई के वक्त ही खपत की रणनीति बनाई जाएगी। इसमें कृषि, उद्यान, विपणन और प्रसंस्करण विभाग मिलकर कार्य करेंगे। आलू उत्पादन के मामले में देशभर में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। यहां इस वर्ष 246 लाख मीट्रिक टन आलू पैदा हुआ है। आलू बेल्ट के रूप में पहचाने जाने वाले फर्रुखाबाद, कन्नौज, फिरोजाबाद, आगरा सहित आसपास के जिलों में कोल्ड स्टोर भरने से किसानों के खेत में ढेर लगे हैं। फैक्ट फाइल     246 लाख मीट्रिक टन कुल उत्पादन     2363 कोल्ड स्टोर की संख्या प्रदेश में     131 नए कोल्ड स्टोर इस वर्ष खुले     202 लाख मीट्रिक टन कोल्ड स्टोर की क्षमता     172 लाख मीट्रिक टन आलू स्टोर में रखा गया किसानों की फजीहत को देखते हुए उद्यान विभाग अलग- अलग राज्यों से संपर्क में जुट गया हैं। जिन राज्यों में कम आलू उत्पादन होता है, वहां यूपी का आलू भेजने की तैयारी है। इसमें राजस्थान, हरियाणा, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, दादरा नगर हवेली, दमन दीव आदि हैं। इसी तरह नेपाल में ज्यादा से ज्यादा आलू का निर्यात करने के साथ ही श्रीलंका को भी आलू भेजा जाएगा। अगले वर्ष के लिए अभी से बनेगी रणनीति अब अगले वर्ष के लिए आलू से जुड़े सभी विभागों को मिलाकर अभी से संयुक्त कार्ययोजना बनाई जाएगी। इसमें कृषि अनुसंधान परिषद और आगरा में खुल रहे इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर के क्षेत्रीय केंद्र से भी मदद ली जाएगी। दो दिन पहले लखनऊ आए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और विभागीय अधिकारियों के साथ ही बैठक में यह सुझाव दिया है। निदेशक उद्यान बीपी राम ने बताया कि कुछ व्यापारी नेपाल आलू भेज रहे हैं। श्रीलंका और खाड़ी देशों में भी संभावना देखी जा रही है। व्यापारियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। अगले वर्ष यह नौबत न आए, इसके लिए भी अभी से तैयारी की जा रही है।  

भारत के अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक हेयर केयर टिप्स: लंबे और घने बालों का राज

 भारत की महिलाएं सदियों से अपने खूबसूरत बालों के लिए जानी जाती हैं, लंबे घने बाल महिलाओं की सुंदरता से जोड़ा जाता है और इसलिए हर महिला चाहती है कि उसका बाल काले, घने और लंबे हो. हालांकि भारत में हर राज्य की क्लाइमेट और खानपान अलग है, लेकिन बालों की देखभाल के उनके ट्रेडिशनल तरीके आज भी उतने ही असरदार हैं. अगर आप भी नेचुरल तरीके से अपने बालों को हेल्दी बनाना चाहती हैं, तो देशभर के इन आसान हेयर केयर टिप्स को जरूर अपनाएं. क्योंकि एक तो यह केमिकल फ्री होते हैं और इनसे बालों को कोई नुकसान भी नहीं होता है. आप भारत के जिस राज्य से हैं अब आपको अपने बालों की टेंशन लेने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आप अपने प्रदेश की जलवायु के मुताबिक सही हेयर केयर चुन सकते हैं. वैसे भी ज्यादातर गलती लोग गलत हेयरकेयर चुनने में ही करते हैं. केरल: नारियल तेल और हर्बल मास्क केरल की महिलाएं अपने घने और लंबे बालों के लिए मशहूर हैं. अगर आप भी उनकी तरह बाल चाहती हैं तो उनका सबसे बड़ा राज है नारियल तेल से नियमित मालिश. नारियल तेल के अलावा वो थाली नाम का एक खास हेयर मास्क लगाती हैं, जो गुड़हल (हिबिस्कस), खसखस, मूंग दाल और भृंगराज से मिलकर बनता है. यह बालों को पोषण देता है और उन्हें मजबूत बनाता है. आप इसमें मेथी दाना भी मिलाकर इस्तेमाल कर सकती हैं. राजस्थान: गर्मी में ठंडक देने वाले उपाय राजस्थान की तेज गर्मी के बावजूद वहां की महिलाओं के बाल लंबे और हेल्दी भी होते हैं, क्योंकि वो लोग अपने बालों का खास ख्याल रखती हैं. राजस्थानी महिलाएं लौकी यानी घिया को पीसकर स्कैल्प पर लगाती हैं, जो ठंडक देता है. इसके अलावा वे मुल्तानी मिट्टी, शिकाकाई और रीठा से बाल धोती हैं, जिससे बाल साफ और मुलायम रहते हैं. उत्तर प्रदेश: लकड़ी की कंघी का फायदा उत्तर प्रदेश में महिलाएं पीढ़ियों से लकड़ी की कंघी का इस्तेमाल करती आ रही हैं. यह कंघी बालों में फ्रिज कम करती है, स्कैल्प की हल्की मसाज करती है और बालों में नेचुरल ऑयल को समान रूप से फैलाती है. लकड़ी की कंघी से बालों को सुलझाने से बाल कम टूटते हैं और आसानी से सुलझ जाते हैं. पश्चिम बंगाल सरसों तेल और मुलायम कपड़ा बंगाल की महिलाएं अपने बालों में सरसों का तेल लगाना पसंद करती हैं, यह बालों को मजबूती और चमक देता है. बाल धोने के बाद वो मुलमल के कपड़े से बाल सुखाती हैं, जिससे बाल उलझते नहीं और फ्रिज भी कम होता है. तमिलनाडु: गुड़हल और नारियल तेल केरल की तरह तमिलनाडु की महिलाएं भी लंबे और मजबूत बालों के लिए जानी जाती हैं. तमिलनाडु की महिलाएं नारियल तेल में गुड़हल मिलाकर लगाती हैं, यह मिक्सर बालों की ग्रोथ को बढ़ाता है और उन्हें घना बनाता है. अगर आप तेजी से बाल बढ़ाना चाहती हैं, तो आप भी यह देसी नुस्खा आजमा कर देख सकते हैं. पंजाब: घी से मिलती है चमक और सॉफ्टनेस पंजाबी महिलाओं के घने और चमकदार बालों का एक राज घी भी है, वे इसे खाने के साथ-साथ बालों में भी लगाती हैं. देसी घी बालों को कंडीशन करता है, उन्हें सॉफ्ट बनाता है और उलझने से बचाता है.

शोएब का अपराध पकड़ा गया: सौरभ बनकर करता था लड़कियों का ब्लैकमेल और धर्मांतरण

   लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सैरपुर थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां एक युवक पर नाम बदलकर हिंदू लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाने, शारीरिक शोषण करने और फिर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगा है. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके पास से चौंकाने वाले सबूत बरामद हुए हैं।  सैलून चलाता है शोएब अख्तर आरोपी की पहचान गोंडा निवासी शोएब अख्तर के रूप में हुई है. शोएब सैरपुर थाना क्षेत्र के रैथा रोड पर एक सैलून चलाता है. आरोप है कि शोएब ने सोशल मीडिया पर अपनी पहचान छिपाकर सौरभ सिंह के नाम से फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट बना रखा था. इसी फर्जी प्रोफाइल के जरिए वह हिंदू युवतियों को अपने जाल में फंसाता था।  मोबाइल में मिले फोटो और वीडियो पुलिस की जांच में शोएब का मोबाइल फोन कई राज उगल रहा है. आरोपी के फोन से कई नाबालिग हिंदू लड़कियों की आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो मिले हैं. आरोपी शोएब पहले लड़कियों को बहला-फुसलाकर उनसे संबंध बनाता था और फिर उनकी अश्लील फोटो-वीडियो खींच लेता था. इन्हीं वीडियो के दम पर वह बाद में लड़कियों पर धर्मांतरण करने का दबाव बनाता और उन्हें ब्लैकमेल करता था।  इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक नाबालिग पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर सैरपुर थाने में शोएब के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाते हुए आरोपी के काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा पुलिस के सामने खोल दिया।  कई सारी लड़कियों को बना चुका शिकार एसीपी बीकेटी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपी शोएब फिलहाल पुलिस हिरासत में है. उसके खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट्स की गहनता से पड़ताल की जा रही है. जांच के आधार पर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल, पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शोएब अब तक कितनी लड़कियों को अपना शिकार बना चुका है और क्या इस साजिश में उसके साथ कुछ और लोग भी शामिल हैं. लखनऊ पुलिस मामले की हर एंगल से तफ्तीश कर रही है। 

आंखों में जलन और ड्राईनेस को न करें नजरअंदाज, जानें इसके बड़े कारण

आज की डिजिटल लाइफस्टाइल और बढ़ते प्रदूषण के बीच आंखों में जलन, खुजली और पानी आने की समस्या एक आम बात हो गई है। स्क्रीन के इस्तेमाल के बाद हल्की जलन कभी-कभी नॉर्मल लग सकती है, लेकिन अगर आपकी आंखों में बार-बार रेडनेस, ड्राईनेस या ऐसा महसूस होता है जैसे आंखों में कुछ चला गया है, तो यह गंभीर समस्या हो सकती है। आइए डॉ. रश्मि मित्तल (सीनियर कंसल्टेंट, ऑप्थैलमोलॉजी, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से जानें कि आंखों में इरिटेशन के पीछे क्या कारण जिम्मेदार हैं। आंसू की परत पतली होना हमारी आंखों की सतह पानी, ऑयल और म्यूकस की एक पतली परत से सुरक्षित रहती है, जिसे टियर फिल्म कहा जाता है। यह परत आंखों को नम रखने और बाहरी इन्फेक्शन से बचाने का काम करती है। जब यह सुरक्षात्मक परत अस्थिर हो जाती है, तो आंखें सीधे हवा के कॉन्टेक्ट में आती हैं, जिससे ड्राईनेस और जलन शुरू हो जाती है। डिजिटल आई स्ट्रेन और पलकें झपकाने में कमी आजकल आंखों की जलन का सबसे बड़ा कारण कंप्यूटर विजन सिंड्रोम है। जब हम लंबे समय तक स्क्रीन को देखते हैं, तो हमारी पलकें झपकाने की दर 50-60% तक कम हो जाती है। कम पलकें झपकाने से आंसू जल्दी सूख जाते हैं, जिससे आंखों में ड्राईनेस और चुभन महसूस होने लगती है। इसके कारण मीबोमियन ग्लैंड डिसफंक्शन की समस्या भी हो सकती है। इसमें पलकों क ऑयल ग्लैंड्स भी ठीक से काम करना बंद कर देते हैं। प्रदूषण और पर्यावरण से जुड़े कारण भारत के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। हवा में मौजूद प्रदूषण, धुआं और केमिकल सीधे हमारी आंखों की पुतली को प्रभावित करते हैं। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से आंखों की सतह पर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन पैदा होती है। एलर्जी और बीमारियां धूल, पोलन, पालतू जानवरों के बाल या मोल्ड अक्सर एलर्जी का कारण बनते हैं। इसे एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस कहा जाता है, जिसमें शरीर हिस्टामाइन रिलीज करता है, जिससे आंखों में तेज खुजली, सूजन और पानी आने लगता है। इसके अलावा, विटामिन-ए की कमी, डायबिटीज, साइनस एलर्जी और ऑटोइम्यून डिसऑर्डर भी आंखों की जलन के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। बचाव के उपाय ज्यादातर लोग राहत के लिए बिना डॉक्टरी सलाह के आई-ड्रॉप्स का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। स्टेरॉयड-बेस्ड आई-ड्रॉप्स डॉक्टर की सलाह के बिना इस्तेमाल करना मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी खतरनाक स्थितियों को जन्म दे सकता है। स्वस्थ आंखों के लिए कुछ जरूरी टिप्स     20-20-20 नियम- हर 20 मिनट के स्क्रीन समय के बाद, 20 फीट दूर रखी किसी चीज को 20 सेकंड के लिए देखें।     हाइड्रेशन और नींद- शरीर में पानी की कमी न होने दें और पूरी नींद लें।     पलकें झपकाएं- काम के दौरान जानबूझकर पलकें झपकाने की कोशिश करें।     डॉक्टरी सलाह- अगर जलन हफ्तों तक बनी रहे या आंखों में दर्द हो, तो घरेलू इलाज के बजाय किसी आई स्पेशेलिस्ट से पूरी जांच कराएं।  

पथ निर्माण विभाग का बड़ा फैसला, 185 अभियंताओं को मिलेगा करोड़ों का वेतन लाभ

 रांची  वित्तीय वर्ष 2022-23 में नियुक्त सहायक अभियंताओं को लगभग चार वर्षों के बाद विनियमन का फायदा देने का निर्णय लिया गया है। इसको लेकर पथ निर्माण विभाग ने आदेश जारी भी कर दिया गया है लेकिन, यह आदेश वित्त विभाग की ओर से जारी आपत्ति को दरकिनार कर निकाला गया है। अब सहायक अभियंताओं को विनियमन का लाभ मिलता है तो खजाने से करोड़ों की राशि निकल जाएगी। जेपीएससी के माध्यम से बहाल 185 सहायक अभियंताओं को 23 दिनों से लेकर 125 दिनों तक का वेतन बैठे-बिठाए मिलेगा। पूरी सूची में कुल मिलाकर चार लोग ही ऐसे हैं जिन्हें एक भी दिन के विनियमन का लाभ नहीं मिलेगा। झारखंड में सरकार की आंख में धूल झोंककर गबन करनेवाले कर्मियों का एक और कारनामा सामने आया है। राज्य में लगभग तीन वर्ष पूर्व नियुक्त सहायक अभियंताओं की नियुक्ति के साथ शर्त यह थी कि उन्हें प्रभार ग्रहण करने की तिथि से वेतन मिलेगा। कुछ कर्मियों ने पत्र जारी होने के साथ ही प्रभार ग्रहण कर लिया और कुछ अन्य को सेवा आवंटित होने में तीन-चार महीने का समय लग गया। इसके बाद वेतन के भुगतान काे लेकर सहायक अभियंताओं ने अपने विभाग से लेकर वित्त विभाग तक दौड़ लगाई। लंबे प्रयास के बावजूद वित्त विभाग ने पूर्व से निर्धारित सेवा शर्तों का हवाला देते हुए अभियंताओं की इस मांग का ठुकरा दिया और उनके मूल विभाग को भी आपत्ति की जानकारी दे दी। इसके बाद कई अभियंता कोर्ट भी गए लेकिन उनको अभी तक राहत नहीं मिली। इस बीच पथ निर्माण विभाग के द्वारा न्यायालय में लिए गए विभागीय निर्णय के विपरीत यूटर्न लेते हुए वित्त विभाग की सहमति के बगैर अपने स्तर से भुगतान का आदेश निर्गत कर दिया गया। इसके तहत जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि कोर्ट के निर्णय से फैसला प्रभावित होगा। हास्यास्पद यह है कि पथ निर्माण विभाग उच्च न्यायालय में अपील में भी गया हुआ है और वो मांग भी न्यायालय के बाहर ही पूरा कर दिया। सेवा शर्त में योगदान देने की तिथि से वेतन भुगतान की बात सहायक अभियंताओं की नियुक्ति के लिए विभाग की ओर से जारी सेवा शर्तों में स्पष्ट तौर पर उल्लेख है कि पदभार ग्रहण करने की तिथि से वेतन एवं भत्ता मिलेगा। आदेश की कंडिका 12 के अनुसार सेवा संहिता के नियम -58 एवं वित्तीय नियमावली के नियम 74 के तहत वेतन एवं भत्ता पदभार ग्रहण करने की तिथि से देय होगा। इस बीच, अभियंताओं ने लगातार प्रयास कर इस पत्र के इस अंश को संशोधित करवा लिया और नया आदेश जारी करवाया। नवंबर 2022 को जारी हुई थी अधिसूचना, मार्च में नियुक्त हुए सहायक अभियंताओं की नियुक्ति से संबंधित अधिसूचना 14 नवंबर 2022 को जारी हुई थी। इसके कुछ दिनों के बाद इन अभियंताओं को पथ निर्माण विभाग में नियुक्ति का निर्देश मार्च 2023 में जारी किया गया है। इस आदेश के बाद लगभग 5 करोड़ रुपये तक का भुगतान करना पड़ेगा। डोरंडा में ज्वाइन करने को 30 दिन और साहेबगंज के लिए एक दिन का समय इन सहायक अभियंताओं को डोरंडा में ज्वाइन करने के लिए तीस दिनों का समय दिया गया तो साहिबगंज में ज्वाइन करने के लिए एक दिन का समय दिया गया। ज्ञात हो कि डोरंडा राजधानी के बीचों बीच है और विभाग से चंद किमी की दूरी पर है जबकि साहिबगंज एक तरह से झारखंड का अंतिम छोर है। वित्त विभाग की ओर से पूर्व में निर्धारित नियमों के अनुसार अधिकतम सात दिनों में ज्वाइन करने का प्रविधान है लेकिन कर्मियों को एक महीने का समय दिया गया है। आश्चर्यजनक है कि कुछ अभियंताओं की पोस्टिंग योगदान दिये बिना ही कर दी गई है।

ओबीसी आयोग रिपोर्ट और संसाधन कमी का हवाला, पंचायत चुनाव टालने पर अर्जी पर बहस

जयपुर पंचायत-निकाय चुनाव के मामले में हाईकोर्ट सोमवार (11 मई) को सुनवाई करेगा. राज्य सरकार की ओर से 6 महीने के लिए चुनाव टालने को लेकर दलील दी जा चुकी है. सरकार ने कोर्ट में आवेदन दाखिल करते हुए था कि मौजूदा परिस्थितियों में दिसंबर से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है. इस तर्क के साथ समय बढ़ाने की अर्जी दायर की गई थी. वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग भी भजनलाल सरकार के तर्क के पक्ष में है. दिसंबर तक कई परिषद का कार्यकाल होगा खत्म सरकार की ओर से कहा गया कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. उस अवधि के बाद चुनाव कराना ज्यादा उचित होगा. सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का भी हवाला दिया था. साथ ही  प्रार्थना पत्र में स्कूल स्टाफ, ईवीएम और अन्य संसाधनों की उपलब्धता के भी तर्क जोड़े गए. 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के दिए थे निर्देश पिछले कई महीनों से पंचायत-निकाय चुनाव के मामले में कानूनी दांव-पेंच जारी है. हाईकोर्ट ने पहले सरकार को 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के निर्देश दिए थे. उस वक्त भी सरकार ने समय सीमा के भीतर चुनाव कराने में असमर्थता जताई थी. एक बार फिर चुनाव टालने की अर्जी दायर होने के बाद आज की सुनवाई अहम होगी.  

चेन्नई-बेंगलुरु की जीत का बड़ा असर, पॉइंट्स टेबल में RCB टॉप पर

 नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 में 10 मई (रविवार) को दो अहम मुकाबले खेले गए. पहला मुकाबला चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) और लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के बीच खेला गया. इस मुकाबले को चेन्नई सुपर किंग्स ने 5 विकेट से अपने नाम कर लखनऊ सुपर जायंट्स को प्लेऑफ की रेस से बाहर कर दिया. वहीं दूसरा मुकाबला रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ( RCB) और मुंबई इंडियंस (MI) के बीच खेला  गया. इस रोमांचक मुकाबले को आरसीबी ने 2 विकेट बाकी रहते आखिरी गेंद पर अपने नाम किया. इस हार ने मुंबई इंडियंस को प्लेऑफ की रेस से पूरी तरह आउट कर दिया. RCB-SRH सबसे आगे, CSK का भी कमबैक चेन्नई सुपर किंग्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की इन जीतों ने प्लेऑफ की रेस को और भी दिलचस्प बना दिया है. अब सिर्फ 8 टीमें प्लेऑफ की रेस में बनी हुई है. पिछले साल की चैम्पियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु अंक तालिका में 14 पॉइंट्स के साथ शीर्ष पर है. आरसीबी की इस जीत ने उनकी प्लेऑफ में पहुंचने की संभावना को 94.82% कर दिया है. आरसीबी के +1.103 नेट रनरेट के साथ टॉप-2 में फिनिश करने की संभावना अब 63.41% तक पहुंच गई है. आरसीबी यदि बाकी के तीन में से दो मुकाबले जीतती है तो वो टॉप-2 में फिनिश कर सकती है. वहीं आरसीबी की इस जीत ने सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) को अंक तालिका में दूसरे पायदान पर पहुंचा दिया. सनराइजर्स हैदराबाद के 11 मैचों में +0.737 नेट रनरेट के साथ 14 पॉइंट्स हैं और उसकी प्लेऑफ में पहुंचने की संभावना 91.74% है और टॉप-2 में फिनिश करनी की उम्मीद 58.66% है. गुजरात टाइटन्स (GT) ने  राजस्थान रॉयल्स (RR) को जयपुर में हराकर अपनी स्थिति मज़बूत कर ली है. यह टीम अंक तालिका में 14 पॉइंट्स के साथ तीसरे पायदान पर है. गुजरात टाइटन्स की प्लेऑफ में पहुंचने की संभावना 87.53% और टॉप-2 में फिनिश करने की उम्मीद 54.11 प्रतिशत है. पंजाब किंग्स (PBKS) की लगातार तीसरी हार ने उसको अंक तालिका में 13 पॉइंट्स के साथ चौथे पायदान पर ला खड़ा कर दिया है. हालांकि  84.69% की संभावना के साथ पंजाब प्लेऑफ में पहुंचने की बेहद मज़बूत दावेदार है. लगातार तीन हार के बाद भी पंजाब किंग्स लगभग 50% संभावना के साथ टॉप-2 में फिनिश कर सकती है. वहीं चेन्नई सुपर किंग्स की लगातार तीसरी जीत ने उसकी प्लेऑफ में पहुंचने की संभावना को 58.47% कर दिया है. चेन्नई अंक तालिका में +0.185  नेट रनरेट के साथ 5 वें पायदान पर है. चेन्नई के 11 मैचों में 12 पॉइंट्स हैं और प्लेऑफ में जगह बनाने के लिए उसके लिए सभी 3 मैच महत्वपूर्ण हैं. राजस्थान रॉयल्स की पिछले 4 मैचों में 3 हार ने उसको 11 मैचों में 12 पॉइंट्स के साथ अंक तालिका में 6 वें पायदान पर खड़ा कर दिया है. आरआर की प्लेऑफ में पहुंचने की संभावना 54.33% है. राजस्थान रॉयल्स को अपने अगले 3 मैच दिल्ली कैपिटल्स (DC), लखनऊ सुपर जायंट्स और मुंबई इंडियंस के साथ खेलने हैं. दिल्ली-कोलकाता की भी उम्मीदें कायम कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) लगभग 20% संभावना के साथ अभी भी प्लेऑफ में अपनी जगह बना सकती है. कोलकाता ने लगातार 4 मैच जीत कर अपनी प्लेऑफ की रेस को बरकरार रखा हुआ है. कोलकाता के 10 मैचों में 9 पॉइंट्स हैं और उसे बाकी 4 मुकाबलों मे कम से कम 3 मैच जीतने ही होंगे. कोलकाता का मौजूदा नेट रनरेट -0.169 है. दिल्ली कैपिटल्स भी अपने आखिरी 2 अहम मुकाबले चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स से हारकर पॉइंट्स टेबल में 8वें पायदान पर पहुंच गई  है. दिल्ली का मौजूदा नेट रनरेट (-1.154) बेहद खराब है, और प्लेऑफ में पहुंचने की संभावना महज 8.41% ही  है. दिल्ली को अपने बचे 3 मैच ना सिर्फ जीतने होंगे, बल्कि अच्छे अंतर से दूसरी टीमों को हराना भी  होगा.

शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति सुधार की तैयारी, 100 करोड़ की लागत से पाइपलाइन विस्तार

 रांची  राज्य के शहरी इलाकों में पेयजल स्वच्छता विभाग जलापूर्ति के लिए घरों तक पाइप लाइन बिछा चुका है। हालांकि कई शहरों में नए बसे क्षेत्र या नगर निगम की सीमा पर स्थित मोहल्लों में पाइप लाइन नहीं पहुंचाया जा सका है। अब नगर विकास विभाग और पेयजल स्वच्छता विभाग ने शहरों के बचे हुए क्षेत्र में भी पाइप लाइन बिछाने और साल के अंत तक घरों में पानी पहुंचाने की योजना बनाई है। इसके लिए 100 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की जाएगी। बचे हुए तीन लाख घरों तक पानी पहुंचाने के अलावा इस पाइप लाइन में विस्तार की संभावना भी है। राज्य सरकार अपने बजट से यह योजना पूर्ण करेगी। नगर निकायों से इसके लिए लिस्ट सौंपने को कहा गया है। जिन घरों तक पाइपलाइन पहुंच चुका है, वहां भी जल्द ही जलापूर्ति प्रारंभ कर दी जाएगी। अमृत योजना पूर्ण होने पर आठ लाख घरों तक पहुंचेगा पानी राज्य में अमृत- एक और अमृत- दो के अलावा सुनिश्चित जल सुविधा की योजना चल रही है। इस साल तीनों योजनाओं के लिए पर्याप्त फंड भी उपलब्ध है। इसके पूर्ण होने पर आठ लाख नए घरों तक पानी पहुंचने लगेगा। केंद्र सरकार ने इन योजनाओं के अगले चरण की प्रारंभिक रिपोर्ट भी मांगी है। तीनों योजनाओं के पूर्ण होने के बाद इसका विस्तार भी किया जाएगा बरसात में जल की शुद्धता बनाए रखना चुनौती पेयजल स्वच्छता विभाग ने बारिश के बाद भूगर्भ जल में होने वाले प्रदूषण मानकों की जांच के लिए जिला स्तर पर तैयारियां की हैं। इसके अलावा खुले जल स्रोत की भी जांच की जाएगी। जल सहियाओं को इसके लिए किट उपलब्ध कराए गए हैं। जल में किसी तरह के प्रदूषण की जानकारी होने पर स्थानीय निकाय इसकी जगह दूसरे स्रोत से आपूर्ति की व्यवस्था करेंगे।