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घर बनवाने से पहले वास्तु के ये जरूरी नियम जानें, मिलेगा सुख और समृद्धि हमेशा।

घर बनाना हर किसी का सपना होता है. यह सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य और खुशियों से जुड़ा होता है. इसलिए घर बनवाते समय जल्दबाजी करने के बजाय हर काम को सोच-समझकर करना चाहिए. वास्तु शास्त्र में भी कुछ ऐसे नियम बताए गए हैं, जिन्हें ध्यान में रखने से घर बनाने का काम आसानी से पूरा हो सकता है. सही जमीन का चुनाव है जरूरी घर बनाने से पहले जमीन का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण होता है. वास्तु के अनुसार जमीन का आकार और उसकी दिशा सही होनी चाहिए. माना जाता है कि जिस जमीन का ढलान उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा की ओर होता है, वह शुभ मानी जाती है. शुभ समय में शुरू करें निर्माण कार्य घर बनवाने का काम शुरू करने से पहले शुभ समय का ध्यान रखना भी अच्छा माना जाता है. मान्यता है कि सही समय पर शुरू किया गया काम कम रुकावटों के साथ पूरा हो सकता है. इसलिए कई लोग निर्माण शुरू करने से पहले मुहूर्त निकलवाते हैं. निर्माण सामग्री सही जगह पर रखें ईंट, सीमेंट, सरिया और दूसरी निर्माण सामग्री रखने की जगह भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. वास्तु के अनुसार भारी सामान को दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना बेहतर माना जाता है. इससे सामान सुरक्षित रहता है और काम भी व्यवस्थित तरीके से चलता है. पहले चारदीवारी बनवाना हो सकता है फायदेमंद घर का निर्माण शुरू करने से पहले यदि पूरे प्लॉट की चारदीवारी बनवा ली जाए तो यह अच्छा माना जाता है. इससे सुरक्षा बनी रहती है और निर्माण कार्य के दौरान भी सुविधा होती है. सामान रखने के लिए अलग जगह बनाएं यदि संभव हो तो निर्माण शुरू करने से पहले एक छोटा कमरा या स्टोर बनवा सकते हैं, जहां निर्माण का सामान रखा जा सके. इससे सामान इधर-उधर नहीं बिखरता और जरूरत पड़ने पर आसानी से मिल जाता है. वास्तु के साथ जरूरी बातों का भी रखें ध्यान वास्तु नियमों के साथ-साथ घर बनाते समय मजबूत निर्माण, सुरक्षा, बजट और परिवार की जरूरतों का ध्यान रखना भी जरूरी है. अच्छी योजना और धैर्य के साथ बनाया गया घर लंबे समय तक परिवार को सुख और आराम देता है.

आचार्य चाणक्य ने बताए ऐसे लोगों से शादी करने के नुकसान, जरूर जानें पहले।

शादी हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा और जरूरी फैसला होती है. अगर लाइफपार्टनर सही और अच्छा हो, तो आपकी जिंदगी खुशियों से भर जाती है, लेकिन अगर एक गलत इंसान जिंदगी में कदम रख दे, तो पूरी जिंदगी बर्बाद होने का खतरा रहता है. आचार्य चाणक्य ने सदियों पहले अपनी नीतियों में शादी को लेकर कुछ बेहद ही जरूरी और साथ ही कड़वी बातें बताई थीं, जो आज के समय में भी हमें एक सही रास्ता दिखाने का काम कर रही हैं. अपनी नीतियों में उन्होंने बहुत ही साफ-साफ यह चेताया था कि कुछ खास तरह के लोगों से आपको कभी भी शादी करने का फैसला जल्दबाजी में नहीं लेना चाहिए. अगर आप इन लोगों से शादी कर लेते हैं, तो आपकी जिंदगी बर्बाद होने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है. अगर आप भी शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं, तो चाणक्य की इन बातों को एक बार जरूर समझ लें. बाहरी खूबसूरती के चक्कर में न फंसें आचार्य चाणक्य के अनुसार आपको कभी भी सिर्फ चेहरा देखकर या बाहरी सुंदरता पर मरकर शादी का फैसला नहीं लेना चाहिए. कई बार लोग सुंदर चेहरा देखकर शादी के लिए बिना सोचे ही हां कर देते हैं, लेकिन बाद में उनका यही फैसला जीवनभर पछतावे की वजह बनता है. चाणक्य के अनुसार, किसी भी इंसान की असली सुंदरता उसके मन और उसकी सोच में होती है. अगर किसी भी व्यक्ति का स्वभाव और संस्कार अच्छे नहीं हैं, तो उसकी बाहरी खूबसूरती बहुत जल्दी फीकी लगने लगती है. इसलिए, चेहरे की चमक के पीछे भागने के बजाय इंसान के दिल और सोच को परखना ज्यादा जरूरी है. 30 साल के होने से पहले जान लें आचार्य चाणक्य की ये 7 बातें, वरना बाद में हाथ लगेगा सिर्फ पछतावा गुस्से वाले और कड़वा बोलने वाले लोगों से अक्सर हमने अपने बड़ों से यह सुना ही है कि मीठी बोली से दुश्मन को भी अपना दोस्त बनाया जा सकता है, लेकिन जो इंसान हमेशा गुस्से में रहता है और हर छोटी बात पर कड़वे शब्दों का इस्तेमाल करता है, वह घर की शांति को पूरी तरह खत्म कर देता है. आचार्य चाणक्य नीति के अनुसार, ऐसे इंसान से शादी करने से पहले सौ बार सोचना चाहिए क्योंकि जिसका खुद के गुस्से पर कंट्रोल न हो, वह कभी भी आपकी परवाह नहीं करेगा. कड़वी जुबान वाले लोग न सिर्फ आपका दिल दुखाएंगे, बल्कि समाज में आपके परिवार की इज्जत को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं. लालची और पैसों के पीछे भागने वाले आचार्य चाणक्य के अनुसार शादी का जो रिश्ता होता है वह पूरी तरह से भरोसे और प्यार की बुनियाद पर टिका हुआ होता है. यह कभी भी धन-दौलत पर टिका हुआ नहीं रहता है. आचार्य चाणक्य ने इस बात को लेकर आगाह करते हुए बताया है कि जो लोग बेहद लालची होते हैं या सिर्फ पैसों को देखकर रिश्ता जोड़ते हैं, वे कभी भी आपके बुरे वक्त में आपका साथ नहीं निभाएंगे. इस तरह के लोगों के लिए रिश्ते से ज्यादा आपकी जेब और हैसियत मायने रखती हैं. अगर कल को आपकी जिंदगी में पैसों से जुड़ी दिक्कतें आई, तो ये लोग सबसे पहले आपका साथ छोड़ सकते हैं. इसलिए, पैसों के लालची इंसान से दूरी बनाकर रखना ही आपके लिए समझदारी है. जो दूसरों का आदर-सम्मान न करना जानते हों एक अच्छे जीवनसाथी या लाइफपार्टनर की पहचान इस बात से भी होती है कि वह आपके साथ ही नहीं बल्कि दूसरों के साथ भी कैसा बर्ताव करता है. चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता, बड़ों या समाज के अन्य लोगों का सम्मान नहीं करता, वह कभी आपको भी सच्चा सम्मान नहीं दे पाएगा. शादी के बंधन में सिर्फ दो लोग नहीं, बल्कि दो परिवार भी आपस में जुड़ते हैं. अगर सामने वाले में अपनों के प्रति आदर का भाव नहीं है, तो वह आपके परिवार को कभी अपना नहीं मान पाएगा और घर में हमेशा कलह बनी रहेगी. धर्म और अच्छे कर्मों से दूर रहने वाले यहां पर धर्म का मतलब सिर्फ पूजा-पाठ से नहीं है, बल्कि इसका संबंध सही और गलत की समझ से है. जो इंसान अच्छे कर्मों में विश्वास नहीं रखता, हमेशा झूठ कहता है या फिर दूसरों को धोखा देने में माहिर होता है, वह कभी एक भरोसेमंद लाइफपार्टनर नहीं बन सकता. आचार्य चाणक्य के अनुसार, ऐसे लोगों के साथ जिंदगी बिताना किसी नरक से कम नहीं होता क्योंकि उनकी गलत आदतें एक न एक दिन आपको भी बड़ी मुसीबत में डाल सकती हैं. इसलिए शादी से पहले इंसान के चाल-चलन और उसकी आदतों को अच्छी तरह से जान लेना आपके लिए बहुत ही जरूरी हो जाता है.

मोबाइल नंबर बिना WhatsApp इस्तेमाल होगा आसान, नए फीचर की करेगी सरकार समीक्षा।

अगर आप जल्द ही अपना मोबाइल नंबर बताए बिना सिर्फ यूजरनेम के जरिए WhatsApp इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है. WhatsApp जल्द ही ऐसा बड़ा बदलाव करने जा रहा है, जिससे लोग फोन नंबर शेयर किए बिना एक-दूसरे से जुड़सकेंगे. हालांकि इस नए फीचर ने भारत सरकार का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार इस फीचर की गहराई से समीक्षा करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इससे साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के नए रास्ते न खुल जाएं. अगर जांच में कोई गंभीर खामी सामने आती है, तो Meta से जवाब भी मांगा जा सकता है. WhatsApp का नया यूजरनेम फीचर क्या है? व्हाट्सऐप एक नया यूजरनेम सिस्टम ला रहा है, जिसके बाद यूजर्स अपनी पहचान के लिए मोबाइल नंबर की जगह एक यूनिक यूजरनेम का इस्तेमाल कर सकेंगे. इसका मकसद लोगों की प्राइवेसी बढ़ाना है, खासकर उन परिस्थितियों में जहां किसी अनजान व्यक्ति या ग्रुप के साथ बातचीत करनी होती है. कंपनी के अनुसार, यूजरनेम बनाना पूरी तरह वैकल्पिक होगा. यूजर चाहें तो बाद में अपना यूजरनेम बदल भी सकेंगे या हटा भी सकेंगे. शुरुआत में यह सुविधा धीरे-धीरे सभी यूजर्स तक पहुंचाई जाएगी. सरकार क्यों कर रही है इस फीचर की समीक्षा? भारत में पिछले कुछ वर्षों में WhatsApp के जरिए होने वाले ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर स्कैम के मामलों में तेजी आई है. ऐसे में सरकार यह समझना चाहती है कि मोबाइल नंबर छिपने के बाद कहीं अपराधियों के लिए फर्जी पहचान बनाना और आसान तो नहीं हो जाएगा. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि WhatsApp ने फर्जी अकाउंट, पहचान की नकल (Impersonation) और साइबर अपराध रोकने के लिए कितनी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था तैयार की है. यदि समीक्षा के दौरान कोई गंभीर कमी मिलती है, तो Meta को नोटिस जारी किया जा सकता है. कैसे काम करेगा नया सिस्टम? WhatsApp के अनुसार, यूजरनेम 3 से 35 कैरेक्टर तक का हो सकेगा. कुछ बड़े सार्वजनिक व्यक्तियों और मशहूर हस्तियों के नाम सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि कोई दूसरा उनका गलत इस्तेमाल न कर सके. इसके अलावा कंपनी एक वैकल्पिक “यूजरनेम की” भी उपलब्ध कराने की योजना बना रही है. यह एक छोटा न्यूमेरिक कोड होगा, जिसे यूजर अपने भरोसेमंद लोगों के साथ साझा कर सकेंगे. इसका उद्देश्य फर्जी अकाउंट और नाम की नकल करने वालों से अतिरिक्त सुरक्षा देना है. Meta यह भी कहता है कि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पहले की तरह जारी रहेगा और निजी संदेश सुरक्षित रहेंगे. चिंता किस बात की है? डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फीचर जहां प्राइवेसी बढ़ाएगा, वहीं साइबर अपराधियों को भी नया मौका दे सकता है. यदि कोई ठग किसी मशहूर व्यक्ति, बैंक, कंपनी या सरकारी संस्था से मिलता-जुलता यूजरनेम बना ले, तो लोगों को धोखा देना आसान हो सकता है. कुछ विशेषज्ञों ने Telegram का उदाहरण भी दिया है, जहां यूजरनेम आधारित सिस्टम का फायदा उठाकर कई फर्जी अकाउंट बनाए गए और लोगों से ठगी की गई. उनका मानना है कि भारत जैसे बड़े WhatsApp बाजार में मजबूत एंटी-फ्रॉड सिस्टम बेहद जरूरी होंगे. आम यूजर्स पर क्या पड़ेगा असर? अगर यह फीचर सुरक्षित तरीके से लागू होता है, तो यूजर्स को कई फायदे मिल सकते हैं. ग्रुप चैट, बिजनेस बातचीत और नए लोगों से संपर्क करते समय मोबाइल नंबर छिपा रहेगा, जिससे प्राइवेसी बेहतर होगी. लेकिन यूजर्स को भी सतर्क रहने की जरूरत होगी. किसी अनजान यूजरनेम से आए मैसेज पर भरोसा करने से पहले उसकी पहचान की पुष्टि करना जरूरी होगा. संदिग्ध अकाउंट मिलने पर तुरंत ब्लॉक और रिपोर्ट करने की सलाह दी जाती है.  

दिल्ली में चार साल में बनेंगे 32 हजार चार्जिंग पॉइंट, नई ईवी पॉलिसी लागू।

नई दिल्ली  ईवी पॉलिसी 2.0 के आने के बाद सरकार का अनुमान है कि 2030 तक सड़कों पर 31.83 लाख इलेक्ट्रिक गाड़ियां होंगी। इसमें 77.17 फीसदी टूव्हीलर शामिल होंगी। इस अनुमानित संख्या के आधार पर सरकार ने अगले चार साल में 32 हजार से अधिक चार्जिंग पॉइंट बनाने की भी योजना तैयार कर ली है। नई ईवी पॉलिसी 2.0 के अनुसार, दिल्ली में वर्तमान (15 जून 2026 तक) में कुल 9.89 लाख रजिस्टर्ड ई-गाड़ियां हैं। नई ईवी पॉलिसी में परिवहन विभाग के अनुमान के मुताबिक, आने वाले सालों में हर साल औसतन 7-8 लाख ई-गाड़ियां रजिस्टर्ड होंगी। इन चार सालों में 24.57 लाख ई-टूव्हीलर, 1.88 लाख फोरव्हीलर, 2.50 लाख ई-रिक्शा, 22,887 ई-ऑटो के अलावा अलग-अलग कैटेगरी के कामर्शियल या गुड्स व्हीकल रजिस्टर्ड होंगे। ईवी पॉलिसी 2.0 में हर साल 6-7 लाख गाड़ियां बढ़ेंगी     परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि चार्जिंग इंफ्रा की योजना भी पॉलिसी में तैयार की गई है।     चार साल में 32 हजार चार्जिंग पॉइंट तैयार होंगे, जिसमें 8913 अभी मौजूद हैं।     अगले चार साल में एक हजार करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश करके कुल 23 हजार से अधिक चार्जिंग पॉइंट बनाए जाएंगे।     बैटरी स्वैपिंग पॉइंट भी बनाए जाएंगे। ईवी पॉलिसी के अनुसार, कुल मौजूद इलेक्ट्रिक गाड़ियों में से 9.57 लाख गाड़ियों को पब्लिक चार्जिंग इंफ्रा की जरूरत पड़ेगी।     कुल मौजूद ई-टूव्हीलर में से 25 फीसदी को पब्लिक चार्जिंग स्टेशन की जरूरत होगी।     इसी तरह 25 फीसदी निजी ई-कार के लिए चार्जिंग पॉइंट की जरूरत होगी।     6-7 लाख गाड़ियां हर साल बढ़ेंगी ईवी पॉलिसी 2.0 में     32 हजार से ज्यादा चार्जिंग पॉइंट बनाने की प्लानिंग कर रही सरकार अगले चार साल में     सीएम ने कहा, पुरानी ईवी पॉलिसी की कमियों को दूर कर बनाया गया 2030 का रोडमैप     2030 तक दिल्ली के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को ई-मोबिलिटी की दिशा में ले जाने की प्लानिंग कितनी खूबसूरत हैं रवीना टंडन की 21 साल की बेटी राशा, देखिए वीडिय नई ईवी पॉलिसी जुलाई से होगी लागू नई ईवी पॉलिसी-2026 एक जुलाई से लागू हो जाएगी। सीएम आतिशी मार्लेना ने कहा कि इसका उद्देश्य केवल इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीद को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि 2030 तक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में ले जाना है। इसलिए नई नीति में ई-गाड़ी की खरीद के साथ बैटरी मैनेजमेंट, चार्जिंग पॉइंट इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का रोडमैप तैयार किया है। ईवी पॉलिसी ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की शुरुआत करने में अहम भूमिका निभाई     सीएम के मुताबिक, 2020 में लागू की गई पुरानी ईवी पॉलिसी ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की शुरुआत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन समय के साथ यह महसूस किया गया कि केवल प्रोत्साहन देकर ईवी की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं।     इसी को ध्यान में रखते हुए नई ईवी पॉलिसी-2026 तैयार की गई है, जिसमें चार्जिंग इन्फ्रा के विस्तार, संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने का रोडमैप शामिल है।     नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक टू व्हीलर पर 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी जारी रहेगी।     पुरानी गाड़ी को स्क्रैप कराने पर 10 हजार रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। साथ ही एक अप्रैल 2028 से दिल्ली में नए दोपहिया गाड़ी सिर्फ इलेक्ट्रिक रजिस्टर्ड होंगे।     थ्री व्हीलर के लिए भी प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है।     पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने पर 25 हजार रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप कराने पर 50 हजार तक प्रोत्साहन मिलेगा जनवरी 2027 से ई-ऑटो रिक्शा का रजिस्ट्रेशन केवल इलेक्ट्रिक गाड़ियों के रूप में किया जाएगा। पहली बार माल ढोने वाली गाड़ियों को व्यापक रूप से शामिल किया गया है। एन-1 कैटेगरी के इलेक्ट्रिक ट्रकों पर एक लाख रुपये तक की सब्सिडी और पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप कराने पर 50 हजार तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। शुरुआती एक हजार एन-2 इलेक्ट्रिक ट्रकों को नो-एंट्री समय में विशेष छूट मिलेगी। सरकार ने स्कूल ट्रांसपोर्ट को भी नीति का हिस्सा बनाया है। 2030 तक स्कूल बसों के बेड़े को 30 फीसदी इलेक्ट्रिक करने का लक्ष्य रखा गया है।  

एचवीएसी और सुपर लग्जरी बसों में बिना टिकट सफर पर होगी विभागीय कार्रवाई।

चंडीगढ़  हरियाणा रोडवेज की एचवीएसी (हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग) तथा सुपर लग्जरी एसी बसों में रोडवेज कर्मचारी और अधिकारी मुफ्त यात्रा नहीं कर सकेंगे। इन बसों में बगैर टिकट यात्रा करते पाए जाने वाले परिवहन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। परिवहन निदेशालय ने बिना टिकट यात्रा करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्ती के निर्देश जारी किए हैं। उप परिवहन नियंत्रक (यातायात) अरविंद शर्मा द्वारा सभी महाप्रबंधकों को भेजे पत्र में कहा गया है कि मुख्यालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कुछ अधिकारी और कर्मचारी एचवीएसी और सुपर लक्जरी बसों में बिना टिकट यात्रा कर रहे हैं, जो नियमों के खिलाफ है। इससे पहले 30 जून 2024 को भी इस संबंध में निर्देश जारी किए गए थे कि हरियाणा रोडवेज का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी बिना टिकट एचवीएसी बसों में यात्रा नहीं करेगा। इसके बावजूद नियमों के उल्लंघन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। रियायती और निशुल्क यात्रा के लिए निर्धारित श्रेणियों को छोड़कर किसी भी व्यक्ति, यहां तक कि हरियाणा रोडवेज के अधिकारी और कर्मचारी भी, इन बसों में मुफ्त यात्रा के पात्र नहीं होंगे। सभी को निर्धारित किराया देकर टिकट लेना अनिवार्य है।

रांची में ओला-उबर-रैपिडो सेवाएं प्रभावित, हड़ताल से यात्रियों की बढ़ी परेशानी आज।

रांची  ऑनलाइन कैब सेवाओं से जुड़े चालकों की हड़ताल आज भी जारी है। झारखंड प्रदेश टैक्सी यूनियन ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा। यूनियन का दावा है कि ओला, उबर और रैपिडो प्रबंधन के साथ हुई बातचीत में किराए में लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी पर सहमति बनी है, लेकिन बढ़ा हुआ किराया लागू करने के लिए कंपनियों को अपने सॉफ्टवेयर में आवश्यक अपडेट करना होगा, जिसमें कुछ समय लग सकता है। यूनियन नेताओं के अनुसार, चारपहिया टैक्सी सेवाओं के किराए को लेकर सकारात्मक बातचीत हुई है, जबकि चारपहिया कैब चालकों की मांगों से संबंधित मामला कंपनियों के बेंगलुरु स्थित मुख्यालय तक पहुंच गया है। कंपनियों की ओर से बताया गया है कि इस विषय पर पैनल स्तर पर चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। वहीं कंपनी ने कहा तीन दिनों में एक भी बुकिंग नहीं हो पाई है। यह चिंता का विषय है। करीब 12 हजार चालक हड़ताल में शामिल टैक्सी यूनियन का दावा है कि रांची और आसपास के क्षेत्रों के लगभग 12 हजार चालक हड़ताल में शामिल हैं। हड़ताल के कारण शहर में ऑनलाइन कैब सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। यूनियन के अनुसार, कई चालकों को पिछले तीन दिनों से कोई बुकिंग नहीं मिली है। इसी मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए आज रांची प्रेस क्लब में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें बड़ी संख्या में कैब चालकों के शामिल होने की संभावना है। शहर के प्रमुख इलाकों में दिखा हड़ताल का असर एयरपोर्ट, रांची रेलवे स्टेशन, हटिया स्टेशन, कांके, अरगोड़ा चौक, कांटाटोली, बरियातू, नामकुम रेलवे स्टेशन, हरमू रोड और रातू रोड सहित कई इलाकों में चालक अपनी गाड़ियों के साथ सांकेतिक प्रदर्शन करते नजर आए। कई स्थानों पर टैक्सियां सड़क किनारे खड़ी कर आंदोलन को समर्थन दिया गया। यात्रियों को उठानी पड़ी परेशानी हड़ताल का सबसे अधिक असर एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और कांटाटोली बस स्टैंड के आसपास देखने को मिला। यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। बारिश के मौसम में अचानक कैब सेवाएं ठप होने से लोगों को बैटरी रिक्शा, आटो और टैंपो का सहारा लेना पड़ा है। वहीं इलाज के लिए अस्पताल जाने वाले मरीजों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यात्रियों ने जल्द समाधान निकालकर सामान्य कैब सेवाएं बहाल करने की मांग की है, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।

जयपुर सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, ग्राहकों को मिली राहत।

जयपुर  राजस्थान की राजधानी जयपुर अपनी खूबसूरत ज्वेलरी के लिए देश-विदेश में खास पहचान बनाए हुए है. अगर आप शादी के लिए गहने खरीदने की तैयारी कर रहे हैं या फिर सोने-चांदी में इन्वेस्ट करने का प्लान बना रहे हैं, तो सबसे पहले आज के ताजा भाव जान लेना जरूरी है. आइए जानते हैं 1 जुलाई 2026 को जयपुर के सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई है या तेजी? जयपुर सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई. सर्राफा ट्रेडर्स कमेटी की ओर से जारी ताजा भाव के अनुसार 1 जुलाई 2026 को सोने के दाम में करीब 220 रुपये प्रति ग्राम की कमी आई है. वहीं चांदी भी 2.5 रुपये प्रति ग्राम सस्ती हुई है. लगातार दो दिनों से बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिससे खरीदारी करने वालों और कारोबारियों की नजर भाव पर बनी हुई है. मंगलवार यानी 30 जून को जयपुर में सोने का भाव 14,520 रुपये प्रति ग्राम था, जो बुधवार को घटकर 14,300 रुपये प्रति ग्राम पर आ गया. इसी तरह चांदी का भाव 231 रुपये प्रति ग्राम से घटकर 228.5 रुपये प्रति ग्राम दर्ज किया गया. दोनों कीमती धातुओं में आई इस गिरावट का असर आभूषणों के दाम पर भी देखने को मिला. 22 कैरेट गोल्ड में बड़ी गिरावट 22 कैरेट सोने का भाव 13,510 रुपये प्रति ग्राम से घटकर 13,260 रुपये प्रति ग्राम हो गया. यानी इसमें 250 रुपये प्रति ग्राम की गिरावट दर्ज की गई. वहीं 18 कैरेट सोना 11,330 रुपये से घटकर 11,060 रुपये प्रति ग्राम पर पहुंच गया. 14 कैरेट सोने का भाव भी 9,000 रुपये से घटकर 8,870 रुपये प्रति ग्राम रह गया. इससे साफ है कि सभी प्रमुख श्रेणियों के सोने में गिरावट दर्ज की गई है. सर्राफा ट्रेडर्स कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि 22 कैरेट, 18 कैरेट और 14 कैरेट सोने के आभूषणों की वापसी (रिटर्न) पर 500 रुपये प्रति ग्राम की कटौती लागू रहेगी. यह नियम पहले की तरह जारी रहेगा। 1 जुलाई 2026 के जयपुर सर्राफा बाजार के प्रमुख भाव इस प्रकार है…     गोल्ड- 14,300 रुपये प्रति ग्राम     सिल्वर- 228.5 रुपये प्रति ग्राम जयपुर में 14 से लेकर 22 कैरेट गोल्ट के दाम     22 कैरेट गोल्ड- 13,260 रुपये प्रति ग्राम     18 कैरेट गोल्ड- 11,060 रुपये प्रति ग्राम     14 कैरेट गोल्ड- 8,870 रुपये प्रति ग्राम जयपुर में आज का चांदी का भाव     1 ग्राम चांदी: ₹231     1 किलो चांदी: ₹2,60,000 मार्केट के एक्सपर्ट का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर की चाल और निवेशकों की खरीदारी का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ता है. ऐसे में आने वाले दिनों में भी सोने और चांदी के भाव में बदलाव देखने को मिल सकता है. फिलहाल जयपुर सर्राफा बाजार में बुधवार को दोनों कीमती धातुओं के दाम में गिरावट से ग्राहकों को कुछ राहत मिली है.

भागलपुर के 384 गांवों के विकास को लेकर 20 वर्षीय महायोजना तैयार होगी।

पटना  राज्य सरकार ने भागलपुर शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों के सुनियोजित विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भागलपुर आयोजना क्षेत्र का विस्तार कर दिया है। विस्तारित क्षेत्र के लिए अगले 20 वर्षों की महायोजना (मास्टर प्लान) तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य शहर के साथ आसपास के ग्रामीण और तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों का समेकित विकास सुनिश्चित करना है। पहले आयोजना का क्षेत्रफल था 218.28 वर्ग किमी अब 359 वर्ग किमी नगर विकास विभाग के अनुसार पहले अधिसूचित भागलपुर आयोजना क्षेत्र का क्षेत्रफल 218.28 वर्ग किलोमीटर था। विस्तार के बाद इसमें 140.72 वर्ग किलोमीटर नया क्षेत्र जोड़ दिया गया है। अब कुल आयोजना क्षेत्र 359 वर्ग किलोमीटर का हो गया है। महायोजना के तहत आवास, सड़क, जल निकासी, पेयजल, परिवहन, सार्वजनिक सुविधाओं, हरित क्षेत्र और भविष्य की शहरी जरूरतों को ध्यान में रखकर विकास की रूपरेखा तैयार की जाएगी। इससे अनियोजित निर्माण पर नियंत्रण लगाने और शहर के संतुलित विस्तार में मदद मिलेगी। सबसे अधिक गांव नाथनगर प्रखंड के, कुल 384 गांवों का होगा विकास विस्तारित आयोजना क्षेत्र में भागलपुर नगर निगम के अलावा नगर पंचायत सबौर और नगर पंचायत हबीबपुर भी शामिल हैं। इसके साथ दो सेंसस टाउन तथा कुल 384 राजस्व गांव इस योजना का हिस्सा होंगे। इनमें सबसे अधिक 144 गांव नाथनगर प्रखंड के हैं। इसके अलावा जगदीशपुर के 90, सबौर के 60, शाहकुंड के 42, सुल्तानगंज के 33, गोराडीह के 11 और नारायणपुर के चार राजस्व गांव शामिल किए गए हैं। सरकार ने आयोजना क्षेत्र की नई सीमाएं भी निर्धारित कर दी हैं। साथ ही नक्शा, शामिल शहरी निकायों और राजस्व गांवों की सूची तथा आबादी का विवरण भी स्वीकृत कर दिया है। एक नजर में     कुल आयोजना क्षेत्र: 359 वर्ग किमी     पहले का क्षेत्रफल: 218.28 वर्ग किमी     नया जोड़ा गया क्षेत्र: 140.72 वर्ग किमी     शहरी निकाय: 3 (भागलपुर नगर निगम, सबौर व हबीबपुर नगर पंचायत)     सेंसस टाउन: 2     राजस्व गांव: 384     महायोजना की अवधि: अगले 20 वर्ष या विस्तारित अवधि     उद्देश्य: भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों का समेकित एवं सुनियोजित शहरी विकास।  

अरुण साव ने जारी किए ₹104.54 करोड़, महापौर-अध्यक्ष और पार्षद निधि से होंगे शहरी विकास कार्य

नगरीय निकायों को महापौर, अध्यक्ष और पार्षद निधि के 104.54 करोड़ जारी उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने निधि का सदुपयोग कर शहरी आबादी को समुचित लाभ पहुंचाने के दिए निर्देश रायपुर  राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने नगर निगमों में महापौर निधि, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में अध्यक्ष निधि तथा तीनों तरह के निकायों में पार्षद निधि के रूप में 104 करोड़ 54 लाख 25 हजार रुपए जारी किए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने नगरीय निकायों को ये राशि जारी कर दी है। श्री साव ने नगरीय निकायों को इन निधियों का सदुपयोग करते हुए राज्य की शहरी आबादी तक योजनाओं का समुचित लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। इस राशि से निकायों में मूलभूत विकास के कार्य किए जाएंगे। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के निर्देश पर चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नगर निगमों में महापौर निधि तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों में अध्यक्ष निधि की 50-50 प्रतिशत राशि की प्रथम किस्त के रूप में कुल 31 करोड़ 16 लाख 25 हजार रुपए जारी किए गए हैं। तीनों तरह की नगरीय निकायों में पार्षद निधि के रूप में कुल 73 करोड़ 38 लाख रुपए भी जारी किए गए हैं।  विभाग द्वारा 14 नगर निगमों में महापौर निधि के 10 करोड़ 12 लाख 50 हजार रुपए, 57 नगर पालिकाओं में अध्यक्ष निधि के 11 करोड़ 6 लाख 25 हजार रुपए तथा 121 नगर पंचायतों में अध्यक्ष निधि के 9 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपए जारी किए गए हैं। वहीं पार्षद निधि के प्रथम किस्त (50 प्रतिशत) के रूप में नगर निगमों को 21 करोड़ 84 लाख रुपए, नगर पालिकाओं को 24 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपए एवं नगर पंचायतों को 27 करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपए जारी किए गए हैं।

सोनम रघुवंशी की जमानत पर नया मोड़, मेघालय हाईकोर्ट ने किया फैसला स्पष्ट; राजा रघुवंशी का परिवार करेगा चुनौती

 इंदौर मेघालय हाई कोर्ट द्वारा सोनम रघुवंशी की जमानत बरकरार रखने के एक दिन बाद राजा रघुवंशी के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला किया है. राजा के बड़े भाई विपिन रघुवंशी ने मंगलवार को कहा कि परिवार जल्द ही सोनम की जमानत रद्द कराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करेगा।  विपिन रघुवंशी ने कहा कि उन्हें अभियोजन पक्ष की पैरवी से संतुष्टि नहीं है. इसलिए अब उनका परिवार न्याय की लड़ाई अपने दम पर लड़ेगा और इसके लिए निजी वकील नियुक्त करेगा. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मेघालय पुलिस ने गिरफ्तारी के समय सोनम को गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी क्यों नहीं दी. उनके मुताबिक, इसी कानूनी चूक का फायदा सोनम को जमानत मिलने में मिला।  दरअसल, मेघालय हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें निचली अदालत द्वारा 27 अप्रैल को दी गई सोनम की जमानत रद्द करने की मांग की गई थी. हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया का सही ढंग से पालन नहीं किया और सोनम को प्रभावी तरीके से गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए. अदालत ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(1) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 47(1) का उल्लंघन माना।  मेघालय हाईकोर्ट ने साफ की तस्वीर मेघालय हाई कोर्ट ने  ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें सोनम रघुवंशी को ज़मानत दी गई थी. सोनम पर 2025 में मेघालय में हनीमून के दौरान अपने पति की हत्या का मुख्य आरोपी होने का आरोप है. जस्टिस डब्ल्यू डिएंगडोह की सिंगल-जज बेंच ने राज्य सरकार की आपराधिक याचिका को खारिज कर दिया. सरकार ने 27 अप्रैल को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई ज़मानत को रद्द करने की मांग की थी।  जस्टिस डिएंगडोह ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार जिस तरह से तैयार किए गए थे, उससे पता चलता है कि उसमें "न्यायिक सोच का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया गया".  कोर्ट ने कहा कि यह साफ है कि ऐसी तैयारी बिना किसी सोच-विचार के की गई थी और कहीं भी कोई खास आरोप या जानकारी नहीं मिलती. पुलिस स्पष्ट भी नहीं कर सकी कि आखिर सोनम रघुवंशी के खिलाफ असल में क्या आरोप हैं? कोर्ट ने राज्य की याचिका खारिज की कोर्ट ने कहा कि अगर गिरफ्तारी के आधार की जानकारी इस तरह दी जाती है तो यह गिरफ्तारी करने वाली एजेंसी की ओर से न्यायिक सोच के पूरी तरह से इस्तेमाल न किए जाने को दिखाता है. कोर्ट ने राज्य की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उसके पास ज़मानत रद्द करने के लिए अपनी खास शक्तियों का इस्तेमाल करने का कोई आधार नहीं है।  क्या है पूरा मामला? गौरतलब है कि राजा रघुवंशी और सोनम की शादी 11 मई 2025 को इंदौर में हुई थी. दोनों 20 मई को हनीमून मनाने मेघालय गए थे. 23 मई को सोनम के लापता होने की खबर सामने आई, जबकि 2 जून को राजा का शव पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा (चेरापूंजी) स्थित एक झरने के पास गहरी खाई में मिला था।  किसे हई थी सजा? इस मामले में पुलिस ने सोनम रघुवंशी, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा और उसके तीन दोस्तों को हत्या की साजिश और हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था. सोनम करीब 10 महीने न्यायिक हिरासत में रहने के बाद जमानत पर रिहा हुई है।