samacharsecretary.com

रिश्वत मामले में सुंदर शाम अरोड़ा को राहत नहीं, हाई कोर्ट ने ट्रायल रोकने से किया इनकार

चंडीगढ़  पंजाब की पूर्व कांग्रेस सरकार में उद्योग मंत्री रहे सुंदर शाम अरोड़ा को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने रिश्वत मामले में दर्ज एफआईआर और ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को रद्द करने की मांग वाली उनकी याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि याचिका आधारहीन है और इसमें कोई मेरिट नहीं है। गौरतलब है कि सुंदर शाम अरोड़ा को वर्ष 2022 में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने अपने सहायक महानिरीक्षक (एआईजी) को 50 लाख रुपये की रिश्वत देने के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोप था कि आय से अधिक संपत्ति के मामले से अपना नाम निकलवाने के लिए उन्होंने एआईजी को एक करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की थी। विजिलेंस के अनुसार, अरोड़ा पहली किस्त के तौर पर 50 लाख रुपये लेकर पहुंचे थे, तभी उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया था। इसी मामले में दर्ज एफआईआर और उसके आधार पर चल रही ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को रद्द करने के लिए उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। हालांकि, इस मामले में सुंदर शाम अरोड़ा को पहले ही पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से नियमित जमानत मिल चुकी है।

पहली ही बारिश बनी आफत! लेह-मनाली हाईवे बंद, सैकड़ों फंसे, हिमाचल में भारी तबाही

शिमला  हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की एंट्री के साथ ही कई इलाकों में भारी बारिश हुई है. इस वजह से कई सड़कें बंद हो गई हैं. वहीं, लाहौल स्पीति के जिस्पा में बीती रात को बादल फटलने से लेह मनाली नेशनल हाईवे बंद हो गया. इस वजह से सैंकड़ों गाड़ियां फंस गई।  मनाली की ओर से जाने वाले वाहनों को केलांग के पास ही रोक दिया गया था.  मंडी जिले के औट में शनि मंदिर के पास नालागढ़ की एक महिला पर पत्थर गिरने से मौत हो गई. एएसपी मंडी अभिमन्यू ने मौत की पुष्टि की और बताया कि सभी से अनुरोध है, सुरक्षित स्थानों पर ही वाहन रोकें और सुरक्षित यात्रा करें।  धराली-हर्षिल में पूरी रात जागकर नदी को ताक रहे लोग बीते साल वर्ष अगस्त में उत्तराखंड के धराली-हर्षिल क्षेत्र में आई विनाशकारी आपदा की भयावह यादें अभी ताजा हैं. उस आपदा में खीर गंगा से न केवल धराली बाजार और आसपास के क्षेत्र में भारी तबाही मची थी, बल्कि हर्षिल स्थित सेना का कैंप भी मलबे और बाढ़ की चपेट में आ गया था. कई सैनिक लापता हुए थे और बाद में कुछ जवानों के शव भी बरामद हुए. इसके बावजूद अब तक स्थायी सुरक्षात्मक कार्य नहीं होने से एक बार फिर पूरे हर्षिल क्षेत्र पर बड़ा संकट मंडरा रहा है।  इसी गंभीर चिंता को लेकर हर्षिल क्षेत्र के आठ ग्राम प्रधानों और पूर्व जनप्रतिनिधियों का प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा और जिलाधिकारी प्रशांत आर्य को ज्ञापन सौंपकर तत्काल प्रभावी सुरक्षा कार्य कराने की मांग की।  ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष की आपदा के बाद से हर्षिल के ऊपर बनी अस्थायी झील और भागीरथी नदी की बदलती धारा लगातार खतरा पैदा कर रही है. हाल ही में नदी का जलस्तर बढ़ने से जीएमवीएन का टीनशेड बह गया, कई बड़े पेड़ नदी में समा गए और कटाव लगातार बढ़ रहा है।  उन्होंने कहा कि अब जीएमवीएन परिसर, पुलिस थाना, लोक निर्माण विभाग का गेस्ट हाउस, सेब के बगीचे, आवासीय भवन, होटल और होमस्टे सीधे खतरे की जद में हैं. स्थिति इतनी गंभीर है कि रात में नदी का जलस्तर बढ़ते ही स्थानीय लोगों को पूरी रात चौकसी करनी पड़ रही है।  ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में हर्षिल का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है. ग्रामीणों ने प्रशासन को यह भी याद दिलाया कि अगस्त 2025 की धराली-हर्षिल आपदा में भारी जन-धन की क्षति हुई थी. अनेक होटल, मकान, सड़कें और अन्य ढांचे मलबे में समा गए थे. इस भीषण त्रासदी में लोगों की जानें गईं, बड़ी संख्या में लोग लापता हुए और हर्षिल स्थित सेना का कैंप भी आपदा की चपेट में आ गया, जहां राहत कार्य के लिए तैयार सैनिक भी मलबे में फंस गए थे. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।  जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वह बुधवार को हर्षिल क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करेंगे और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुरक्षात्मक कार्य शीघ्र शुरू कराने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।  बुधवार सुबह शिमला के मेहली शोघी रोड पर हैप्पी होम के पास लैंडस्लाइड से रोड़ बंद हो गई है।  जानकारी के अनुसार, बीते रोज मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के सात जिलों में मॉनसून की एंट्री हुई और फिर बीती रात को प्रदेशभर में मूसलाधार बारिश देखने को मिली.जिला चंबा में चंबा-तीसा मुख्य सड़क पागोला नाला के पास बंद हो गई. यहां पर लगातार बारिश के कारण पागोला नाला के पास भूस्खलन और मलबा आने से बंद हो गई है और मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित है. सलूणी उपमंडल की ग्राम पंचायत लनोट के लनोट और फगड़ोग गांवों में मूसलाधार बारिश के कारण मलबा और पानी कई घरों में घुस गया, जिससे लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।  जिला चंबा में चंबा-तीसा मुख्य सड़क पागोला नाला के पास बंद हो गया।  हिमाचल प्रदेश पुलिस ने अपने सोशल मीडिया पेज पर जिस्पा में बादल फटने की जानकारी दी. हालांकि, इससे कोई जान माल का नुकसान नहीं हुआ है. लेकिन नाले में फ्लैश फ्लड की वजह से लेह मनाली हाईवे पर गाड़ियों की आवाजाही थम गई. गौर रहे कि जिस्पा मनाली से करीब 100 किमी दूर है।  इसके अलावा, मंडी जिले के धर्मपुर में भारी बारिश की वजह से सिद्धपुर धर्मपुर रोड हाजरी क्रशर के पास और धर्मपुर-जोगिन्द्रनगर सड़क भंडारी मिक्सर प्लांट के पास अवरुद्ध हो गया है. कांढापतन–रखेड़ा मार्ग पर सड़क पर मलबा गिरा है और आवागमन प्रभावित हुआ है।  फिलहाल, सड़कों की बहाली की कोशिश की जा रही है. वहीं, मंडी जिले में ब्य़ास नदी का जलस्तर बढ़ गया है. लगातार बर्फ पिघलने और बारिस की वजह से पानी का लेवल बढ़ा है और लोगों को नदी नालों के पास ना जाने की अपील की गई है. लाहौल स्पीति के जाहलमा नाले में फ्लैश फ्लड की वजह से लोगों को रस्सी डालकर पार करवाया जा रहा है. इस वजह से किसानों की मटर और गोभी की फसलें फंस गई हैं. लाहौल की पंचायत रानिका के पढ़ाक गांव में बाढ़ से लगभग 5 बीघा गोभी की फसल तबाह हो गई है. इससे पहले, मंगलवार को शिमला के चक्कर बाइपास के पास लैंडस्लाइड हुआ था।  पहली ही बारिश में 45 रोड बंद हिमाचल प्रदेश आपदा प्रबंधन ने बुधवार रिपोर्ट में बताया कि बारिश की वजह से 30 जून को 45 सड़कें बंद हो गई थी. इसमें सबसे अधिक 28 रोड मंडी, कुल्लू में 12, ऊना में दो और लाहौल स्पीति में एक रोड बंद थे, हालांकि, अब 16 रोड ही बहाल होने से बची हैं और बारिश की वजह से 84 ट्रांसफार्मर बंद हैं. उधर, बरसात का सीजन शुरू होते ही हिमाचल प्रदेश में धान की रिपोई का काम भी शुरू हो गया है।  ऊना में स्कूलों की टाइमिंग बदली ऊना जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में एक जुलाई से सामान्य समय के अनुसार पढ़ाई होगी. डीसी जतिन लाल ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं और भीषण गर्मी के मद्देनज़र पांच मई को स्कूलों के समय में किए गए बदलाव संबंधी आदेश भी वापस ले लिए गए हैं. अब जिले के सभी प्री-प्राइमरी, प्राइमरी, मिडिल … Read more

शाला प्रवेशोत्सव: शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने बच्चों संग पढ़ाया पहाड़ा, स्मार्ट क्लास का किया लोकार्पण

रायपुर : शाला प्रवेशोत्सव: शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने बच्चों संग बैठकर सिखाया पहाड़ा, स्मार्ट क्लास का किया लोकार्पण नवप्रवेशी विद्यार्थियों का तिलक लगाकर किया स्वागत, गणवेश व जूते वितरित कर दी शुभकामनाएं रायपुर शाला प्रवेशोत्सव के अंतर्गत शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव आज दुर्ग विधानसभा क्षेत्र के बोरसी स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, आदर्श कन्या शाला एवं जेआरडी विद्यालय में आयोजित प्रवेशोत्सव कार्यक्रमों में शामिल हुए। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का तिलक लगाकर एवं मिठाई खिलाकर आत्मीय स्वागत किया तथा नवीन शिक्षा सत्र के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर विद्यार्थियों को गणवेश एवं जूते भी वितरित किए गए। शिक्षा मंत्री यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित अभिभावकों से संवाद करते हुए बच्चों की नियमित पढ़ाई, विद्यालय में शत-प्रतिशत उपस्थिति तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बच्चों की पहली पाठशाला उनका परिवार होता है और अभिभावकों का सहयोग ही उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की सबसे बड़ी प्रेरणा देता है। विद्यालय में स्थापित स्मार्ट क्लास का लोकार्पण करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक आधारित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित शिक्षण व्यवस्था विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होगी तथा उन्हें भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप सक्षम बनाएगी। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री यादव  सीधे कक्षाओं में पहुंचे और बच्चों के बीच बैठकर उनसे आत्मीय संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों से पहाड़े सुने और स्वयं भी सरल एवं रोचक तरीके से उन्हें पहाड़ा सिखाया। साथ ही बच्चों को पढ़ाई को आनंददायक बनाने के लिए प्रेरित किया।  विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्होंने उनके सपनों, भविष्य की आकांक्षाओं एवं लक्ष्यों पर चर्चा की तथा मन लगाकर अध्ययन करने, अनुशासन का पालन करने और निरंतर मेहनत से आगे बढ़ने का संदेश दिया। शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने छात्राओं एवं शिक्षकों से भी संवाद करते हुए शिक्षा के साथ संस्कार, आत्मविश्वास एवं व्यक्तित्व विकास के महत्व पर बल दिया। उन्होंने विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए छात्राओं से पूरी लगन, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ अध्ययन कर अपने परिवार, समाज एवं प्रदेश का नाम गौरवान्वित करने का आह्वान किया। 

CM मोहन यादव आज सिवनी को देंगे 494.16 करोड़ के 629 विकास कार्यों की सौगात

मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिवनी को देंगे 494.16 करोड़ के 629 विकास कार्यों की सौगात कोदो-कुटकी उत्पादक किसानों को मिलेगा प्रोत्साहन राशि का लाभ मुख्यमंत्री राज्य-स्तरीय धान महोत्सव में होंगे शामिल सिवनी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार 01 जुलाई को सिवनी जिले में राज्य-स्तरीय धान महोत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जिले को विकास और किसान कल्याण की अनेक सौगातें देंगे। महोत्सव में कोदो-कुटकी उत्पादक किसानों को प्रोत्साहन राशि का अंतरण, 494.161 करोड़ रुपये लागत के 629 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन और हितग्राहियों को हितलाभ वितरण किया जाएगा। इस अवसर पर राजस्व मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री करण सिंह वर्मा, कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, सांसद श्रीमती भारती पारधी सहित जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य के कोदो-कुटकी उत्पादक 3,941 किसानों के बैंक खातों में 2 करोड 82 लाख 99 हजार 300 रूपये की प्रोत्साहन राशि सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे। यह राशि किसानों को 1 हजार रूपये प्रति क्विंटल की दर से प्रदान की जा रही है, जिससे श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी। महोत्सव में विभिन्न विभागों द्वारा थीम आधारित विकास प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। प्रदर्शनी में धान बुवाई के आधुनिक कृषि यंत्र, प्राकृतिक खेती एवं प्राकृतिक बगीचे, कस्टम हायरिंग सेंटर, जीआई टैग एवं मिलेट्स उत्पाद, पीएमएफएमई उत्पाद, आम की विभिन्न किस्में, स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प एवं मिट्टी कला उत्पाद, लघु वनोपज, स्थानीय उद्यमियों के उत्पाद, पोषण आहार प्रदर्शनी, डिजिटल जमीन, कृषिका एप तथा किसान क्रेडिट कार्ड से संबंधित जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। प्रदर्शनी परिसर में आकर्षक सेल्फी प्वाइंट भी आमजन के लिए विशेष आकर्षण रहेगा।  

एसआईआर प्रक्रिया झारखंड में शुरू, 29 जुलाई तक चलेगा मतदाता सत्यापन अभियान

रांची  झारखंड में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) आज से गणना चरण के साथ शुरू हो जाएगा। इस चरण में बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं के बीच गणना प्रपत्र (इन्यूमरेशन फार्म) वितरित करेंगे। मतदाताओं को आंशिक रूप से भरे हुए इस प्रपत्र में पिछले एसआईआर से संंबंधित जानकारी भरकर तथा हस्ताक्षर कर बीएलओ को लौटाना होगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने सभी मतदाताओं से प्रपत्र मिलते ही आवश्यक जानकारी भरकर एवं हस्ताक्षर कर बीएलओ को लौटाने की अपील की है। यह कार्यक्रम 29 जुलाई तक चलेगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा है कि जब बीएलओ मतदाता के घर-घर जाएं तो मतदाताओं को विगत विशेष गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची से उनकी मैपिंग अवश्य सुनिश्चित करा लें। राज्य में एसआईआर कार्यक्रम में वर्ष 2003 में हुए एसआईआर की मतदाता सूची से मैपिंग की विवरणी को नागरिकता हेतु सुपीरियर दस्तावेज के रूप में माना गया है। जिन मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो जाएगी, उन्हें एसआईआर के क्रम में सामान्यतः कोई अन्य दस्तावेज नहीं देना होगा। उन्होंने कहा कि बीएलओ द्वारा मतदाताओं को आंशिक रूप से भरे हुए प्रपत्र की दो प्रति उपलब्ध कराई जाएगी।मतदाता एक प्रति अपने बीएलओ को देंगें और दूसरी प्रति पावती के रूप में अपने पास रखेंगे। जो भी मतदाता गणना प्रपत्र हस्ताक्षर कर लौटाएंगे, उनका नाम पांच अगस्त को प्रकाशित होनेवाली प्रारुप मतदाता सूची में होगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि वैसे मतदाता जिनकी अभी भी विगत विशेष गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची से मैपिंग नहीं हुई है, वे बीएलओ को अपना विवरण बताकर मैपिंग करा लें। नए मतदाता पंजीकरण के लिए पूरी करें यह प्रक्रिया यदि आप नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराना चाहते है और एक अक्टूबर 2026 तक आपकी आयु 18 वर्ष पूरी हो रही है, तो गणना चरण या दावा एवं आपत्ति अवधि के दौरान फॉर्म-6 भरकर अपने संबंधित बीएलओ को जमा करें। फॉर्म के साथ घोषणापत्र और आवश्यक दस्तवेज भी संलग्न करने होंगे। जन्मतिथि के आधार पर आवेदक को स्वयं का अथवा माता-पिता में से किसी एक या दोनों के दस्तावेज जमा करने होंगे। दस्तावेज के रूप में पिछले एसआईआर के दौरान तैयार मतदाता सूची का वह संबंधित पृष्ठ भी मान्य होगा, जिसमें माता-पिता का नाम दर्ज हो। ध्यान में रखें ये महत्वपूर्ण तारीखें     30 जून से 29 जुलाई तक बीएलओ द्वारा घर-घर भ्रमण कर मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा।     29 जुलाई तक मतदान केंद्रों का युक्तिकरण (रेशनलाइजेशन) होगा।     05 अगस्त को मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन होगा।     पांच अगस्त से चार सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि है।     पांच अगस्त से तीन अक्टूबर तक नोटिस फेज तथा दावा व आपत्तियों के निस्तारण की अवधि है।     सात अक्टूबर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होगा। गलत घोषणा पत्र भरकर देने पर कानूनी कार्रवाई मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने यह भी कहा कि गणना प्रपत्र में गलत घोषणा पत्र भरकर जमा करना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कानूनी रूप से दंडनीय अपराध है। उन्होंने कहा कि एक भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से नहीं छूटेंगे और एक भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में नहीं जुड़ेंगे। एसआईआर की प्रक्रिया पारदर्शी एवं सहभागी है, प्रत्येक फेज की जानकारी सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों एवं मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाता है। 74,329 बूथ लेवल एजेंट नियुक्त, सबसे अधिक भाजपा के एसआईआर को लेकर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा विभिन्न मतदान केंद्रों पर कुल 74,320 बीएलए-2 नियुक्त किए गए हैं। सबसे अधिक बीएलए-2 भाजपा द्वारा नियुक्त किए गए हैं। आप ने एक भी एजेंट नियुक्त नहीं किया है। वहीं, बसपा ने महज दो एजेंट नियुक्त किए हैं। सभी मतदान केंद्रों पर बीएलओ एवं बीएलए-2 की एसआईआर के दौरान बैठक की जानी है एवं इस बैठक के फोटो भी बीएलओ ऐप के माध्यम से ऑनलाइन अपलोड किए जाएंगे। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए-2 से अपने बीएलओ के कार्यों में सहयोग करने की अपेक्षा की है। 82 प्रतिशत मतदाताओं की हो चुकी है मैपिंग     कुल मतदाता : 2,64,63,236     जिन मतदाताओं की हो गई मैपिंग : 2,17,20,731     जिनकी नहीं हुई है मैपिंग : 47,42,505     जितने प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी : 82.08 प्रतिशत किस राजनीतिक दल ने नियुक्त किए कितने बीएलए-2? आप : 00 बसपा : 02 भाजपा : 28,217 सीपीआईएम : 103 कांग्रेस : 19,153 आजसू पार्टी : 4,596 झामुमो : 19,269 राजद : 2,980 कुल : 74,320 शिकायत के लिए 1950 हेल्पलाइन पर करें संपर्क निर्वाचन विभाग के अनुसार, एसआईआर से संबंधित किसी भी शिकायत या जानकारी के लिए मतदाता 1950 हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं। इस कॉल सेंटर पर प्रतिदिन औसतन 25 से 30 शिकायतें प्राप्त हो रही है, जिनका त्वरित और प्रभावी ढंग से निस्तारण किया जा रहा है।  

जून गया, अब मानसून की एंट्री का इंतजार खत्म! जानिए कब बरसेंगे बादल

जयपुर  राजस्थान में प्री-मानसून की बारिश का दौर थमने के बाद पिछले कुछ दिनों से पारा चढ़ा हुआ है. तापमान 40 से 45 डिग्री तक होने के चलते कई जिले भीषण गर्मी की चपेट में हैं. अब मानसून का इंतजार है और प्रदेशवासियों का इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है. मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून का काउंटडाउन शुरू हो गया है. पिछले 24 घंटों में प्रतापगढ़ के अरनोद में सर्वाधिक 94 मिमी वर्षा दर्ज की गई. वहीं, अगले 3–4 दिनों तक तेज आंधी के साथ बारिश का दौर जारी रह सकता है, जिसमें हवाओं की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना है. दक्षिणी-पूर्वी हिस्से में अनुकूल स्थिति मौसम विभाग के अनुसार, 2 जुलाई से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है. जबकि अगले 2–3 दिनों में मानसून की आधिकारिक एंट्री हो सकती है. दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में इसके लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं. पूर्वानुमान के मुताबिक, जयपुर, भरतपुर, कोटा और बीकानेर संभाग में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. जबकि जोधपुर और बीकानेर में फिलहाल उमस भरी गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. राजस्थान में 300 से ज्यादा बांध सूखे वहीं, इस साल मानसून की धीमी शुरुआत ने जल संकट के संकेत भी दिए हैं. कुल 693 बांधों में उनकी कुल क्षमता का केवल 44.22% पानी ही उपलब्ध है, जो पिछले साल इसी अवधि में 46.59% था. इनमें से 307 बांध पूरी तरह से सूख चुके हैं, 381 आंशिक रूप से भरे हैं और केवल 5 छोटे बांध ही पूरी तरह लबालब हो पाए हैं. जल संसाधन विभाग की 23 जून की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 23 प्रमुख बड़े बांधों में फिलहाल 56.09% पानी मौजूद है.  इस हफ्ते हो सकती है मध्यम से भारी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा इस समय गुजरात, मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार के कुछ भागों से होकर गुजर रही है. अगले 2-3 दिन में गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ भागों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं. विभाग के मुताबिक, कोटा और उदयपुर संभागों में कुछ भागों में आगामी दिनों में कहीं-कहीं मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना है. 3 से 5 जुलाई तक पूर्वी राजस्थान के कुछ और भागों में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी और कहीं-कहीं मध्यम से भारी बारिश हो सकती है.

नल जल योजना को रफ्तार, स्पर्श पोर्टल पर डेटा अपलोड से फंड रिलीज की तैयारी

रांची   झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक नल से शुद्ध जल पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना को गति देने के लिए राज्य सरकार ने अपनी कवायद को बेहद तेज कर दी है. केंद्र सरकार से जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत लंबित पड़ी भारी-भरकम राशि को हासिल करने के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग युद्ध स्तर पर काम कर रहा है. इसी सिलसिले में केंद्र सरकार के ‘एसएनए स्पर्श पोर्टल’ (SNA Sparsh Portal) पर जल जीवन मिशन की उन तमाम चालू और पूरी हो चुकी योजनाओं का विस्तृत विवरण अपलोड किया जा रहा है, जिनमें झारखंड सरकार अपने कोटे की राशि (राज्यांश) पहले ही खर्च कर चुकी है. डेटा अपलोडिंग के साथ-साथ इन सभी योजनाओं के उपयोगिता और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी पोर्टल पर डाले जा रहे हैं, ताकि वित्तीय लेन-देन में कोई तकनीकी अड़चन न रहे. दिल्ली में MOU के बाद बनी सहमति इस पूरी कवायद की पृष्ठभूमि हाल ही में नई दिल्ली में तैयार हुई थी. बीते 2 जून को नई दिल्ली में ‘जल जीवन मिशन 2.0’ को लेकर केंद्र और झारखंड सरकार के बीच एक उच्चस्तरीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे. इस महत्वपूर्ण बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के सामने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए राज्य की लगभग 6,500 करोड़ रुपये की लंबित केंद्रीय सहायता राशि को जल्द से जल्द जारी करने का आग्रह किया था. इस पर केंद्रीय अधिकारियों ने भरोसा दिया था कि एनओसी और अन्य कागजी प्रक्रियाओं में केंद्र पूरा सहयोग करेगा, बशर्ते राज्य सरकार निर्धारित मानकों और अपनी 50 प्रतिशत राज्यांश की हिस्सेदारी का कड़ाई से पालन करे. एमओयू की है कड़ी शर्त जल शक्ति मंत्रालय के नियमों और एमओयू की शर्तों के अनुसार, केंद्र सरकार से फंड की अगली किस्त पाने के लिए झारखंड को पहले अपने हिस्से की मैचिंग ग्रांट (राज्यांश) को धरातल पर खर्च करके दिखाना होगा. दिल्ली में हुए एमओयू के करीब एक महीना बीतने को है, लेकिन अब तक एसएनए स्पर्श पोर्टल पर झारखंड का पूरा तकनीकी डेटा और एनओसी समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण केंद्र की ओर से राशि जारी नहीं हो पाई है. इस देरी को गंभीरता से लेते हुए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के आलाधिकारियों ने पूरी कागजी और तकनीकी प्रक्रिया को फास्ट-ट्रैक मोड पर डाल दिया है ताकि केंद्र से मिलने वाला फंड बिना किसी देरी के सीधे राज्य के खाते में आ सके. जेजेएम 2.0 में मिला 2,500 करोड़ का विशेष बोनस झारखंड सरकार इस मेगा मिशन के तहत दिसंबर 2028 तक राज्य के शत-प्रतिशत ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचाने के बड़े और ऐतिहासिक लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही है. भौगोलिक रूप से कठिन माने जाने वाले झारखंड के पठारी इलाकों में इस लक्ष्य को समय पर हासिल करने के लिए ‘जेजेएम 2.0’ के तहत केंद्र सरकार ने झारखंड को 2,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त विशेष आवंटन (बोनस फंड) भी मंजूर किया है. विभाग का प्रयास यह है कि इस महीने के अंत तक सभी तकनीकी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं, ताकि जैसे ही फंड रिलीज हो, वैसे ही ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के निर्माण कार्य की गति को दोगुना किया जा सके. विभागीय मंत्री का आधिकारिक बयान मामले की जानकारी देते हुए झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि जेजेएम 2.0 को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच एमओयू की सभी आधिकारिक प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं. हमारी सरकार केंद्रांश की बड़ी राशि को समय पर प्राप्त करने के लिए अनिवार्य तकनीकी और कागजी प्रक्रियाएं पूरी करने में जुटी है. विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे दिन-रात काम करके स्पर्श पोर्टल पर डेटा फीडिंग पूरी करें, ताकि ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को बिना किसी बजटीय रुकावट के तेजी से पूरा किया जा सके.0 करोड़ के विकास कार्य, असुरक्षित भवनों पर तत्काल रोक लगाने का आदेश

विद्यालयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, सभी भवनों की जांच और मरम्मत के सख्त निर्देश जारी

 जयपुर  प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव  राजेश कुमार यादव ने मंगलवार को शासन सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य के सभी राजकीय विद्यालयों के भवनों की सुरक्षा, मरम्मत कार्यों, निर्माणाधीन परियोजनाओं तथा विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति में जर्जर अथवा असुरक्षित भवनों का उपयोग नहीं किया जाए। बैठक में एसीएस ने निर्देश दिए कि पूर्व में चिन्हित जर्जर विद्यालय भवनों के साथ-साथ वर्तमान में उपयोग में लिए जा रहे सभी विद्यालय भवनों की पुनः गहनता से जांच कराई जाए। प्रत्येक भवन की सुरक्षा का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया जाए तथा सुरक्षा संबंधी सभी मानकों और नियमों की पूर्ण पालना की जाए। उन्होंने कहा कि जो भवन या कक्ष किसी भी दृष्टि से असुरक्षित पाए जाएं, उन्हें तत्काल प्रभाव से लॉक किया जाए, बैरिकेडिंग कर उपयोग से बाहर किया जाए तथा उनकी यथास्थिति की विस्तृत रिपोर्ट पुनः प्रस्तुत की जाए। अधिकारियों को निर्देशित किया कि विद्यालय भवनों के मरम्मत कार्यों एवं नवीन भवनों के निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि इन कार्यों के लिए पर्याप्त वित्तीय स्वीकृति जारी की जा चुकी है, इसलिए कार्यों में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। बैठक में शिक्षा विभाग की विभिन्न प्रमुख योजनाओं, गतिविधियों एवं अन्य महत्वपूर्ण विषयों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ बनाने के लिए शिक्षा विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा, जिससे योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से विद्यार्थियों तक पहुंच सके। उन्होंने बताया कि बजट घोषणाओं के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में राज्यभर में 2,000 से अधिक विद्यालयों से संबंधित विकास एवं निर्माण कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। वहीं वर्ष 2026-27 में लगभग 550 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्य कराए जाएंगे। इसके अतिरिक्त विद्यालयों के विकास के लिए भामाशाहों, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) तथा अन्य उपलब्ध मदों से भी सहयोग एवं वित्तीय संसाधनों का उपयोग किया जाएगा, ताकि राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में आवश्यक विकास एवं आधारभूत सुविधाओं के कार्य प्रभावी ढंग से कराए जा सकें।

योगी सरकार का बड़ा फैसला, बेरोजगारी भत्ता और रोजगार गारंटी योजना एक जुलाई से शुरू

लखनऊ  यूपी में कल यानी एक जुलाई से रोजगार और काम को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यूपी की योगी कैबिनेट ने काम नहीं तो बेरोजगारी भत्ता देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी दी है। राज्य सरकार यूपी में एक जुलाई से मनरेगा के स्थान पर विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गांरटी मिशन ग्रामीण (वीबी जीरामजी) योजना लागू करने जा रही है। इस योजना की खास बात यह होगी कि पंजीकरण के बाद मजदूरों को 15 दिनों में काम न दिया गया तो उसे 16वें दिन से दैनिक बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। इतना ही नहीं 15 दिनों तक भुगतान न होने की स्थिति में मजदूर को 0.05 प्रतिशत की दर से विलंब मुआवजा भी दिया जाएगा। ग्राम विकास विभाग के इस प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दी गई। कैबिनेट मंजूरी के साथ ही एक जुलाई से यूपी में इस योजना लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। इस योजना में कुल खर्च का 60% केंद्र और 40% राज्य सरकार देगी। योजना ग्रामीण क्षेत्र के मजदूरों को रोजगार देने की गारंटी देगी। योजना को चार श्रेणियों में बांटा गया है। जल संबंधी काम, मूल ग्रामीण अवसंरचना (विकास कार्य), आजीविका देना व मौसम संबंधी घटनाओं व आपदाओं से निपटने के लिए विशेष तैयारी करना है। जिला मध्यवर्ती और ग्राम स्तर की पंचायतें योजना के नियोजन, कार्यान्वयन और निगरानी के लिए प्रमुख प्राधिकरण होंगी। एक साल में 125 दिन का काम ग्रामीण क्षेत्र के अकुशल शारीरिक रूप से काम करने वालों को योजना में एक वित्तीय वर्ष में 125 दिन का रोजगार दिया जाएगा। मास्टर रोल बंद होने की तारीख से 15 दिनों के अंदर मजदूरी का भुगतान किया जाएगा। ऐसा न होने पर 0.05 प्रतिशत रोजाना के हिसाब से विलंब मुआवजा दिया जाएगा। खेती के लिए व्यस्तम मौसम में 60 दिन आरक्षित रखा जाएगा। इस दौरान वीबी जीरामजी योजना के तहत कोई काम नहीं किया जाएगा। प्रदेश स्तर और जिलों में बनेगी संचालन समिति मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद होगा। मुख्य सचिव या राज्य सरकार द्वारा नामित अपर मुख्य सचिव के पद से अनिम्न स्तर के किसी अधिकारी की अध्यक्षता में संचालन समिति गठित होगी। जिलों में डीएम कार्यक्रम समन्वयक और पंचायत स्तर पर खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) कार्यक्रम अधिकारी होगा। वह रोजगार की मांग के अवसरों के साथ भुगतान कराने का जिम्मेदार होगा। ग्राम पंचायत का काम व उत्तरदायित्व मुख्यत: परिवारों का पंजीकरण और ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी करना, काम के आवेदन प्राप्त करना और विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करना होगा। मुफ्त मेडिकल और दुर्घटना बीमा का भी लाभ कार्यस्थल पर उपस्थिति बायोमेट्रिक से दर्ज होगी। योजना में काम के दौरान किसी तरह की दुर्घटना होने पर जरूरत के अनुसार मुफ्त उचार मिलेगा। मौत या निशक्त होने पर प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से पैसा दिया जाएगा। सभी कामों के लिए जिला स्तर पर सामग्री की लागत 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। वार्ड, ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर शिकायतें प्राप्त करने के लिए हर सप्ताह कम से कम एक दिन किसी को नामित किया जाएगा। हर श्रमिक को सुनवाई का मौका दिया जाएगा। अधिनियम में किसी भी प्रावधान के उल्लंघन पर 10 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा।

प्रयागराज से वाराणसी तक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का सर्वे जल्द शुरू, चार महीने में तैयार होगी डीपीआर

प्रयागराज  विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए प्रयागराज में 210 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इससे तीन तहसीलों के हजारों किसानों को फायदा मिलेगा। वहीं, इस संबंध में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर प्राथमिक सर्वे रिपोर्ट सोमवार को जिला प्रशासन को प्राप्त हो गई। अब विस्तृत सर्वे के दौरान अधिग्रहित की जाने वाली भूमि पर आने वाले काश्तकारों का आकलन किया जाएगा, जिसके बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। विंध्य एक्सप्रेसवे प्रयागराज जिले की सोरांव, फूलपुर और हंडिया तहसीलों से होकर गुजरेगा। यूपीडा ने पूर्व में प्रशासन को भेजी रिपोर्ट में इन तीनों तहसीलों के 73 गांवों में भूमि की आवश्यकता बताई थी। इसके आधार पर संबंधित एसडीएम से सर्वे कराकर आवश्यक भूमि का विवरण मांगा गया। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार हंडिया तहसील में 78 हेक्टेयर, फूलपुर में 68 हेक्टेयर और सोरांव में 64 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी। प्रशासन का अनुमान है कि भूमि अधिग्रहण की जद में 400 से 500 काश्तकार आ सकते हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह संख्या फिलहाल अनुमानित है। लेखपालों की विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद प्रभावित किसानों और भूमि का अंतिम आंकड़ा स्पष्ट हो सकेगा। ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के लिए सावन में शुरू होगा सर्वे का काम चित्रकूट से प्रयागराज होते हुए वाराणसी तक प्रस्तावित 294 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण का सर्वे सावन माह में शुरू होगा। इस परियोजना के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने भोपाल की कंसल्टेंट कंपनी नित्या नायारा का चयन किया है। अगस्त के पहले सप्ताह से एजेंसी चित्रकूट से सर्वे का कार्य शुरू करेगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को दो हिस्सों में बांटा गया है। चित्रकूट से प्रयागराज तक सर्वे और भूमि अधिग्रहण की जिम्मेदारी एनएचएआई को सौंपी गई है, जबकि प्रयागराज से वाराणसी तक का कार्य सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय कराएगा। एनएचएआई के प्रयागराज डिप्टी मैनेजर प्रखर सिंह के अनुसार, भूमि अधिग्रहण और एलाइनमेंट का कार्य करीब चार महीने तक चलेगा। सर्वे के दौरान प्रयागराज की सदर तहसील, कौशाम्बी की मंझनपुर तहसील और चित्रकूट तक प्रस्तावित मार्ग का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। इसमें यह तय किया जाएगा कि फोरलेन कॉरिडोर के निर्माण के लिए कितनी भूमि की आवश्यकता होगी। सर्वे पूरा होने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर एनएचएआई मुख्यालय को मंजूरी के लिए भेजी जाएगी। परियोजना के पूरा होने से चित्रकूट, प्रयागराज और वाराणसी के बीच सड़क संपर्क बेहतर होगा और यात्रा अधिक तेज व सुगम बनने की उम्मीद है।