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रांची: ऑनलाइन ठगी मामलों की सुनवाई अब होगी तेज, आईटी विभाग को अधिकार

 रांची राज्य में इलेक्ट्रानिक लेनदेन तथा साइबर फ्राड की शिकायतों का शीघ्र निपटारा होगा। राज्य सरकार ने शिकायतों के निपटारे के लिए एडजुडिकेटिंग ऑफिसर के रूप में सूचना तकनीक एवं ई-गवर्नेंस विभाग के सचिव को प्राधिकृत किया है। झारखंड हाई कोर्ट के आदेश पर सूचना तकनीक अधिनियम, 2000 के सेक्शन 46 के प्रविधान के तहत एडजुडिकेटिंग आफिसर के कर्त्तव्यों के साथ-साथ शिकायत दर्ज कराने व सुनवाई को लेकर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी गई है। इस एसओपी पर विभागीय मंत्री के रूप में मुख्यमंत्री की स्वीकृति ली गई है। इससे पहले इसपर विधि विभाग से वेटिंग कराकर कानूनी तौर पर सत्यापित भी कराया गया है। यह एसओपी सूचना तकनीक अधिनियम, 2000 के तहत शिकायतों के निपटारे के लिए एक पारदर्शी, यूनिफार्म और कानूनी रूप से सक्षम बनाता है। इसके माध्यम से नागरिकों, बिज़नेस मैन और सरकारी संस्थाओं के लिए शिकायतों की प्रक्रियाओं को आसान बनाना गया है। इसका उद्देश्य शिकायतों का समय पर और अच्छे से निपटारा सुनिश्चित करना तथा डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम में भरोसा मजबूत करना है। इस एसओपी के माध्यम से आइटी एक्ट के तहत फाइल की गई वैसी सभी शिकायतों का निपटारा एडजुडिकेटिंग आफिसर द्वारा किया जाएगा, जहां नुकसान या मुआवजे का दावा पांच करोड़ रुपये से ज़्यादा नहीं है। बताते चलें कि राज्य में एडजुडिकेटिंग आफिसर के रूप में विभाग के सचिव की नियुक्ति तो हुई थी, लेकिन एसओपी नहीं होने से एक्ट का अनुपालन नहीं हो रहा था। यह होगा केस प्रोसेसिंग फ्रेमवर्क किसी शिकायत के निपटारा के लिए फोरा (एफओआरए : फाइलिंग, आब्जेक्शन, रजिस्ट्रेशन, और एलोकेशन प्रोसीजर) सिस्टम को अपनाया जाएगा। शिकायतें एडजुडिकेटिंग आफिसर के कार्यालय में मैनुअल या आनलाइन सिस्टम के ज़रिए दर्ज कराई जाएंगी। शिकायतें निर्धारित फारमेट में ही जमा होंगी। साथ ही निर्धारित शुल्क तथा आवश्यक दस्तावेज की स्वअभिप्रमाणित प्रति जमा करना होगी। शिकायतकर्ता को एक सही तरह से हस्ताक्षर किया हुआ शपथपत्र और पता और संपर्क की पूरी जानकारी देनी होगी। शुल्क डिमांड ड्राफ्ट या चालान से या आनलाइन जमा होगा। शिकायतकर्ता और प्रतिवादी को दिया जाएगा यूनिक केस नंबर सूचना तकनीक एवं ई-गवर्नेंस विभाग का अधिकृत प्रशाखा पदाधिकारी प्राप्त शिकायत और दस्तावेज की शुरुआती जांच करेगा। अगर शिकायत पूरी है,तो उसे रजिस्टर किया जाएगा तथा शिकायतकर्ता को एक यूनिक डायरी नंबर या केस नंबर दिया जाएगा। केस नंबर सभी संबंधित पार्टियों को भी बताया जाएगा। अधूरे आवेदन को लागू नियमों के अनुसार सुधार के लिए वापस किया जा सकता है या रद किया जा सकता है। शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया जाएगा। प्रतिवादी तय तारीख पर आवश्यक दस्तावेज के साथ एक लिखित जवाब जमा करेगा। उसपर शिकायतकर्ता भी जवाब दे सकता है तथा एडजुडिकेटिंग आफिसर की अनुमति से अन्य दस्तावेज भी फाइल कर सकता है। सुनवाई ऑफलाइन या ऑनलाइन दोनों हो सकती है सुनवाई ऑफलाइन एवं ऑनलाइन दोनों हो सकती है। सुनवाई के दौरान पार्टियां डाक्यूमेंट्री सबूत, टेक्निकल रिकार्ड, गवाह आदि प्रस्तुत कर सकती हैं। सुनवाई की कार्यवाही को डिजिटल रिकार्ड के रूप में मेंटेन किया जाएगा। सुनवाई के बाद एडजुडिकेटिंग आफिसर केस के तकनीकी, वित्तीय और विधिक पहलुओं का मूल्यांकन करेगा। इसमें विशेषज्ञों का भी सहयोग लिया जा सकेगा। जांच के बाद एडजुडिकेटिंग आफिसर रूल-5 के तहत लिखित आर्डर पास करेगा। इसे आफिशियल डिपार्टमेंट पोर्टल पर अपलोड भी किया जाएगा।

कुशीनगर से वाराणसी और नेपाल सीमा से प्रयागराज तक बनेंगे फोर लेन हाईवे

 लखनऊ  प्रदेश में प्रस्तावित किए गए छह नार्थ-साउथ हाईवे कारिडोर में से दो कारिडोर का काम जल्द शुरू होने जा रहा है। टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई, भूमि अधिग्रहण का काम शुरू किए जाने की तैयारी है। पहला कारिडोर कुशीनगर-देवरिया-दोहरीघाट-गाजीपुर-जमानिया होते हुए वाराणसी तक तथा दूसरा कारिडोर पिपरी (भारत-नेपाल सीमा)-बांसी-सिद्धार्थनगर से प्रयागराज तक के बीच बनेगा। दोनों कारिडोर में पीडब्ल्यूडी द्वारा कराए जाने वाले कार्यों में से तीन खंडों का काम स्वीकृत होने के साथ ही हुए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हाईवे कारिडोर का काम लोक निर्माण विभाग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) द्वारा किया जाना है। दोनों कारिडोर का निर्माण कार्य पूरा होने पर पूर्वांचल के दर्जन भर पिछड़े जिले आपस में फोर लेन हाईवे से जुड़ जाएंगे। प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी अजय चौहान ने बताया है कि कुशीनगर-देवरिया-गाजीपुर-वाराणसी हाईवे में 31.5 किमी कसया-देवरिया मार्ग तथा 21.75 किमी देवरिया-बरहज मार्ग का निर्माण कार्य स्वीकृत कर दिया गया है। वहीं पिपरी (भारत नेपाल सीमा)-बांसी-सिद्धार्थनगर से प्रयागराज तक प्रस्तावित हाईवे में 9.4 किमी बर्डपुर पिपरहवा मार्ग का काम भी स्वीकृत किया गया है। अन्य खंडों के काम भी जल्द स्वीकृत किए जाएंग। विशेष सचिव प्रभुनाथ के मुताबिक हाईवे कारिडोर के 62 किमी कार्य के लिए 725 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। अभी 235 किमी कार्य स्वीकृत किए जाना शेष है। मुख्य अभियंता (मुख्यालय-एक) अनिल कुमार दुबे के मुताबिक दोनों कारिडोर का काम दो वर्ष में पूरा होगा। भूमि अधिग्रहण के साथ ही निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा। कुशीनगर-वाराणसी हाईवे कारिडोर कुशीनगर-देवरिया-दोहरीघाट-गाजीपुर-जमानिया होते हुए वाराणसी तक बनने वाले कारिडोर की कुल लंबाई 220 किमी है। दोहरीघाट-मऊ-गाजीपुर खंड तथा गाजीपुर-वाराणसी पहले से चार लेन हैं। कुशीनगर-देवरिया और देवरिया-दोहरीघाट खंड का कार्य लोक निमार्ण द्वारा किया जाना है। जिसकी अनुमानित लागत 342 करोड़ रुपये है। कॉरिडोर-1 (कुशीनगर से वाराणसी) के जिले इस रूट पर आने वाले मुख्य जिले:     कुशीनगर     देवरिया     मऊ (दोहरीघाट खंड के जरिए)     गाजीपुर     वाराणसी नेपाल सीमा पिपरी-प्रयागराज कारिडोर पिपरी (भारत-नेपाल सीमा)-सिद्धार्थनगर- प्रयागराज कारिडोर की लंबाई 295 किलोमीटर है। पहला हिस्सा 9.4 किमी पिपरी-बर्डपुर का काम स्वीकृत कर दिया गया है। यह कारिडोर शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और विंध्य एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। इसमें 107 किमी के तीन खंडो का काम पीडब्ल्यूडी 642 करोड़ रुपये से और 123 किलोमीटर का काम सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) 738 करोड़ की लागत से करेगा। इस रूट की कनेक्टिविटी इन जिलों को कवर करेगी:     सिद्धार्थनगर (पिपरी-बर्डपुर-बांसी खंड)     बस्ती (सिद्धार्थनगर से प्रयागराज के रास्ते में)     संत कबीर नगर     अमेठी (पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लिंक के जरिए)     सुलतानपुर     प्रतापगढ़     प्रयागराज  

लापरवाही और भ्रष्टाचार पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का सख्त एक्शन

 लखनऊ  उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लापरवाह और भ्रष्ट चिकित्सकों पर बड़ी कारवाई करते हुए पांच चिकित्साधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया। पीसीपीएनडीटी एक्ट का उल्लंघन करने पर एडीएम की जांच में दोषी पाए गए अंबेडकरनगर के सीएमओ डॉ. संजय शैवाल एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय वर्मा के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के आदेश दिए गए हैं। हरदोई में संडीला के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने अवैध रूप से संचालित प्राइवेट अस्पतालों के संचालकों को बचाया। वरिष्ठ चिकित्साधिकारियों को नजरंदाज कर कनिष्ठों से काम लेने पर सीएमओ से जवाब-तलब किया गया है। लंबे समय से गैरहाजिर गोरखपुर जिला चिकित्सालय की डॉ. अलकनन्दा, कुशीनगर सीएमओ के अधीन डॉ. रामजी भरद्वाज, बलरामपुर सीएमओ के अधीन डॉ. सौरभ सिंह, अमेठी स्थिति जगदीशपुर सीएचसी के डॉ. विकलेश कुमार शर्मा व औरैया दिबियापुर सीएचसी की डॉ. मोनिका वर्मा को बर्खास्त किया गया है। प्रयागराज मेजा सीएचसी के अधीक्षक डॉ. शमीम अख्तर पर कोरांव सीएचसी अधीक्षक रहते हुए प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही पर विभागीय कार्यवाही एवं तबादला किये जाने के आदेश दिये गये हैं। सुल्तानपुर के लम्भुआ सीएचसी में महिला के इलाज में लापरवाही बरतने पर तत्कालीन अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह (वर्तमान तैनाती-सीएचसी कादीपुर), डॉ. धर्मराज, चिकित्साधिकारी एवं सीएचसी-लम्भुआ में तैनात फार्मासिस्ट अवधनारायण के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही होगी। मथुरा जिला चिकित्सालय में तैनात इमर्जेन्सी मेडिकल अफसर डॉ. देवेन्द्र कुमार एवं सर्जन डॉ. विकास मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने गलत मेडिकोलीगल बनाया। उन पर विभागीय अनुशासनिक कार्यवाही होगी। डिप्टी सीएम ने बलरामुर सीएमओ के अधीक्षक डॉ. अन्नू चन्द्रा, वाराणसी के पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय के डॉ. शिवेश जायसवाल, बदायूं जिला चिकित्सालय के डॉ. राजेश कुमार वर्मा, डॉ. अरुण कुमार, खीरी स्थित गोला सीएचसी के अधीक्षक डॉ. गणेश कुमार, संयुक्त चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं डा.अरविन्द कुमार श्रीवास्तव, संभल के जिला संयुक्त चिकित्सालय के डॉ. जानकीश चन्द्र शंखधर शामिल हैं। झांसी के मोठ ट्रामा सेंटर में आर्थोसर्जन डॉ. पवन साहू पर प्राइवेट प्रैक्टिस करने का आरोप सही पाए जाने पर दो वेतनवृद्धियां रोक दी गई हैं। बलरामपुर सीएमओ के अधीन डॉ. संतोष सिंह की चार, झांसी सीएमओ के अधीन डॉ. निशा बुन्देला की दो वेतनवृद्धियां रोकने के आदेश दिए गए हैं। हमीरपुर जिला महिला चिकित्सालय की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. लालमणि पर आजमगढ़ में तैनाती के दौरान प्रसूताओं से वसूली एवं अभद्रता करने पर तीन वेतनवृद्धियां स्थायी रूप से रोकी गई हैं। स्टेट हेल्थ एजेन्सी, साचीज की ओर से संचालित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेश चिकित्सा योजना में प्रतिनियुक्ति पर तैनात डॉ. आदित्य पाण्डेय की प्रतिनियुक्ति समाप्त करते हुए उन्हें मूल तैनाती स्थल रायबरेली सीएमओ के अधीन भेजा गया है। लापरवाही बरतने के मामले में बहराइच महसी सीएचसी की डॉ. प्रतिभा यादव व मथुरा राल सीएचसी के डॉ. राकेश सिंह को परिनिन्दा का दंड दिया गया। बदायूं राजकीय मेडिकल कालेज में हड्डी रोग विभाग में तैनात सह-आचार्य डॉ. रितुज अग्रवाल द्वारा एक महिला चिकित्साधिकारी एवं एक अन्य चिकित्साधिकारी से गाली गलौज एवं अभद्रता किये जाने के मामले पर उन पर विभागीय कार्यवाही की गई है।  

चेन्नई सुपर किंग्स बनाम लखनऊ सुपर जायंट्स हेड टू हेड रिकॉर्ड और मैच एनालिसिस

चेन्नई इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के 53वें मुकाबले में चेन्नई सुपरकिंग्स (CSK) का सामना लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) से होगा। CSK ने इस संस्करण 10 मुकाबले खेले हैं। 5 मैच में उसे जीत और इतने ही मुकाबलों में उसे हार का सामना करना पड़ा है। वहीं, LSG ने भी 10 मैच खेले हैं। टीम 3 मुकाबले ही जीत पाई है और उसे 7 मैचों में हार मिली है। ऐसे में आइए मुकाबले से जुड़ी जरूरी बातों पर नजर डालते हैं। दोनों टीमों के बीच रही है कांटे की टक्कर IPL में दोनों टीमों के बीच अब तक 6 मुकाबले हुए हैं। CSK को 2 मैच में जीत मिली है। LSG ने 3 मुकाबले अपने नाम किए हैं। एक मैच में कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। IPL 2025 में दोनों टीमें आखिरी बार भिड़ी थी। उस मैच में CSK को 5 विकेट से जीत मिली थी। IPL 2024 में हुए दोनों मुकाबलों में LSG ने जीत दर्ज की थी। ऐसी हो सकती है CSK की प्लेइंग इलेवन CSK को अपने पिछले मैच में दिल्ली कैपिटल्स (DC) के खिलाफ 8 विकेट से जीत मिली थी। ऐसे में वह अपनी प्लेइंग इलेवन में बड़ा बदलाव नहीं करना चाहेंगे। संजू सैमसन अच्छे फॉर्म में चल रहे हैं। ऐसे में उनसे एक और बड़ी पारी की उम्मीद होगी। संभावित एकादश: संजू सैमसन (विकेटकीपर), रुतुराज गायकवाड़ (कप्तान), उर्विल पटेल, कार्तिक शर्मा, डेवाल्ड ब्रेविस, जेमी ओवरटन, अकील हुसैन, नूर अहमद, अंशुल कंबोज, मुकेश चौधरी और गुरजपनीत सिंह। इस संयोजन के साथ नजर आ सकती है LSG LSG ने पिछले मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के खिलाफ शानदार जीत दर्ज की थी। ऐसे में वह CSK के खिलाफ उसी फॉर्म को जारी रखना चाहेंगे। मिचेल मार्श और निकोलस पूरन से एक बार फिर ताबड़तोड़ पारी की उम्मीद होगी। गेंदबाजी में प्रिंस यादव बेहतर करना चाहेंगे। संभावित एकादश: मिचेल मार्श, अर्शिन कुलकर्णी, निकोलस पूरन, एडेन मार्करम, ऋषभ पंत (विकेटकीपर/कप्तान), अक्षत रघुवंशी, हिम्मत सिंह, शाहबाज अहमद, दिग्वेश सिंह राठी, मोहम्मद शमी और प्रिंस यादव। ये हो सकते हैं इम्पैक्ट सब्स प्लेयर LSG: मयंक यादव, मुकुल चौधरी, अब्दुल समद, मणिमारन सिद्धार्थ और आवेश खान। CSK: शिवम दुबे, प्रशांत वीर, मैथ्यू शॉर्ट, आकाश मधवाल और सरफराज खान। कैसा रहेगा पिच का मिजाज? चेन्नई की पिच लाल मिट्‌टी से बनी है जो आमतौर पर स्पिनरों को मदद करती है। हालांकि, शुरुआती कुछ ओवरों में तेज गेंदबाजों को फायदा मिलता है। यहां की विकेट अमूमन सूखी और सख्त होती है जो मैच आगे बढ़ने के साथ और खराब होती जाती है। बल्लेबाजों को बड़े-बड़े शॉट्स लगाने के लिए नजरें जमाने होती है। हाउस्टेट के मुताबिक, IPL में यहां पर पहली पारी का औसत स्कोर 165 रन है। ऐसा रहेगा चेन्नई का मौसम एक्यूवेदर के अनुसार, 10 मई को चेन्नई का मौसम पूरी तरह साफ नहीं रहेगा। यहां अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान के 28 डिग्री रहने का अनुमान है। बारिश होने की 55 प्रतिशत संभावना है। पूरे दिन बादल छाए रहेंगे। इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर रहेगी नजर CSK के लिए सैमसन ने पिछले 10 मैचों में 167.5 की स्ट्राइक रेट से 402 रन बनाए हैं। गायकवाड़ के बल्ले से पिछले 10 मैचों में 251 रन निकले हैं। LSG के लिए मार्श ने पिछले 10 मैच में 152.91 की स्ट्राइक रेट से 367 रन बनाए हैं। गेंदबाजों में कंबोज ने पिछले 10 मैच में 8.92 की इकॉनमी से 17 विकेट लिए हैं। LSG से प्रिंस ने पिछले 10 मैचों में 8.08 की इकॉनमी से 16 विकेट चटकाए हैं। कब और कहां देखें मुकाबला? MI और CSK के बीच यह मुकाबला चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में दोपहर 3:30 बजे से खेला जाएगा। भारत में स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क और जियोहॉटस्टार ऐप पर इस मैच का सीधा प्रसारण देखा जा सकता है।  

यूपी में बूथ सत्यापन अभियान शुरू, दो हजार कार्यकर्ता मैदान में उतरे

 लखनऊ  बंगाल, असम और पुडुचेरी में प्रचंड जीत के बाद यूपी का चुनावी पारा चढ़ गया है। आत्मविश्वास की लहर पर सवार भाजपा ने प्रदेश पर पूरा फोकस कर दिया है। मिशन-2027 को भेदने के लिए बूथ कमेटियों के सत्यापन, सामाजिक समीकरण और जीत-हार के कारकों पर 15 दिन में रिपोर्ट बनाने के लिए दो हजार अनुभवी कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारा गया है। उन्हें हर मंडल में दस दिन रहते हुए चुनावी धड़कन पकड़ना होगा गाजियाबाद, लखनऊ एवं कानपुर में बैठक कर पार्टी होमवर्क बना चुकी है। 12 मई को प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री संगठन जिलाध्यक्षों के साथ लखनऊ में मीटिंग कर बूथ प्रबंधन को मथेंगे। 1981 मंडलों में बूथों सत्यापन के लिए पार्टी ने उतारे गए दो हजार कार्यकर्ता भाजपा ने प्रदेश के विधान सभा चुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल बनाकर बूथ प्रबंधन को बदले हुए तेवर के साथ जमीन पर उतारा है। प्रभारी रहते हुए वर्ष 2014 में अमित शाह ने विरोधी दलों को बूथ प्रबंधन के चक्रव्यूह में उलझाकर भाजपा को बड़ी जीत दिलाई। वर्ष 2017 विधानसभा चुनाव में भी माइक्रोमैनेजमेंट ने पार्टी को प्रचंड बहुमत दिलाया। 2019 लोकसभा एवं 2022 विधानसभा चुनाव में भी बूथों के राजनीतिक कौशल की भूमिका रही, लेकिन कमेटियों का भौतिक सत्यापन न होने से बाद में कई पदाधिकारी कागजों पर ही नजर आए। अब 2027 विधान सभा चुनाव से पहले पार्टी ने बूथ प्रबंधन का गियर नए सिरे से लगाया है। जातीय समीकरण, विपक्षी दलों की स्थिति व जीत-हार पर भी देनी होगी रिपोर्ट प्रदेश के 98 संगठनात्मक जिलों के 1981 मंडलों में बूथ कमेटियों एवं शक्ति केंद्रों (जिसमें पांच से सात बूथ होते हैं) की जांच के लिए पार्टी ने दो हजार अनुभवी कार्यकर्ताओं को जिम्मा दिया है, जो 10 दिन में प्रदेश संगठन को रिपोर्ट देंगे। उन्हें न सिर्फ बूथ अध्यक्षों, बूथ प्रभारियों एवं शक्ति केंद्रों का भौतिक सत्यापन करना है, बल्कि विपक्षी दलों एवं मतदाता सूची की स्थिति, सामाजिक-राजनीतिक समीकरण, जीत-हार के फैक्टर एवं कार्यकर्ताओं की स्थिति पर जमीनी रिपोर्ट बनाकर देनी होगी। कार्यकर्ता चुनावी कील कांटे दुरुस्त करने उतरेंगे बूथ कमेटियों की रिपोर्ट तैयार होने के बीच योगी सरकार में छह नए मंत्रियों एवं प्रदेश और क्षेत्रीय इकाई घोषित करने की योजना है। लखनऊ में प्रदेश इकाई की जिलाध्यक्षों के साथ बैठक के बाद बूथों के सत्यापन की प्रक्रिया तेज करते हुए कार्यकर्ता चुनावी कील कांटे दुरुस्त करने उतरेंगे। सालभर चले अभियानों की पड़ताल करने के साथ ही भाजपाइयों को हर विधानसभा सीट पर फीडबैक भी देना होगा।  

किसी की लगी लॉटरी, किसी को लगा झटका! बिहार कैबिनेट विस्तार में दिखा बड़ा फेरबदल

पटना  बिहार में सम्राट का स्मार्ट मूव। कल तक जो मुख्यमंत्री के रेस में थे मंत्री तक नहीं बन पाए। सम्राट का 'स्मार्ट मूव' गांधी मैदान में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान दिखा। कई मंत्रियों को मिजाज के साथ-साथ विभाग भी बदल दिया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार में विभागों का जब बंटवारा हुआ तो कई के तो लॉटरी लग गए, गर कई को तो जोर का झटका धीरे से लगा। बिहार में जिन मंत्रियों का विभाग बदला बीजेपी के कई मंत्रियों के विभाग बदल दिए गए। ये बदलाव विभाग में अपेक्षित कार्य नहीं करने के कारण नहीं लगा। ऐसा इसलिए कि तीन चार-माह में किसी का मूल्यांकन क्या हो सकता है। लेकिन जैसे पानी में पत्थर फेंक शांत तालाब में हलचल लाई जाती है वैसे ही विभाग को बदल कर आलाकमान ने साफ-साफ कह दिया कि यहां स्थाई कुछ नहीं होता, काम कर के दिखाना पड़ता है।     विजय सिन्हा: पिछले मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री रहे विजय कुमार सिन्हा को एक साथ कई विभाग मसलन राजस्व एवं भूमि सुधार के साथ-साथ खान एवं भूतत्व विभाग भी था। लेकिन इस बार विजय कुमार सिन्हा को कृषि विभाग से संतोष करना पड़ा।     दिलीप जायसवाल: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के पास पिछली बार पथ निर्माण जैसा विभाग था, मगर इस बार उन्हें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग दिया गया।     रामकृपाल यादव: विभाग तो रामकृपाल यादव का बदल दिया गया है। रामकृपाल यादव के पास कृषि था, अब इन्हें सहकारिता दी गई है।     नीतीश मिश्रा: पिछले के पिछले मंत्रिमंडल में उद्योग मंत्री थे। इस बार उन्हें नगर विकास विभाग मिला है। साथ में सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग मिला है।     अरुण शंकर प्रसाद: पिछले मंत्रिमंडल में कला, संस्कृति एवं पर्यटन थे, उन्हें श्रम एवं प्रवासी कल्याण युवा विभाग दी गई है। बीजेपी में जिनका कद बढ़ा कुछ विधायक जो इस बार मंत्री बने हैं उन पर सम्राट चौधरी विशेष मेहरबान रहे हैं।     इंजीनियर शैलेन्द्र: पहली बार मंत्रिमंडल में शामिल इंजीनियर शैलेन्द्र को मिला बड़े विभाग का तोहफा। इन्हें पथ निर्माण जैसा विभाग दिया गया है।     संजय टाइगर: इस बार उच्च शिक्षा विभाग देकर मान बढ़ाया है। साध ही विधि विभाग भी दिया गया है। इसके पहले संजय टाइगर को श्रम विभाग था।     श्रेयसी सिंह: इनका कद बढ़ाया गया है, इन्हें पहले खेल विभाग मिला था। इस बार इस विभाग के साथ ही इन्हें उद्योग भी मिला है।     प्रमोद चंद्रवंशी: पर्यावरण एवं वन खान एवं भूतत्व, कला एवं संस्कृति विभाग बिहार में पहली बार मंत्री बने     केदार गुप्ता: पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी दी गई।     रामचंद्र प्रसाद: पर्यावरण, वन्य एवं जलवायु परिवर्तन विभाग मिला।     नंद किशोर राम: डेयरी, मतस्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री बना गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में पश्चिम बंगाल की नई सरकार का भव्य शपथ ग्रहण समारोह

लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामय उपस्थिति में शनिवार को कोलकाता में पश्चिम बंगाल की नई सरकार का भव्य शपथ ग्रहण समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले सुवेंदु अधिकारी को बधाई दी और उनके उज्जवल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं भी दीं। सीएम योगी ने सुवेंदु अधिकारी को मंच पर भगवा अंगवस्त्र भी पहनाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक किर्तनिया, क्षुदीराम टुडू, निशीथ प्रमाणिक को भी बधाई दी। शपथ ग्रहण के पश्चात पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंच पर मौजूद प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों व मुख्यमंत्रियों से मुलाकात कर सबके प्रति आभार प्रकट किया। गौरतलब है कि चुनाव प्रचार के दौरान सुवेंदु अधिकारी ने एक जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भगवा अंगवस्त्र पहनाकर उनका बंगाल की धरा पर स्वागत किया था। इसके उपरांत उनके चरणों में शीश नवाकर अपनी श्रद्धा भी निवेदित की थी।

किसानों की समस्या पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिए तत्काल जांच के आदेश

 पटना बिहार में अपनी विश्व प्रसिद्ध लीची की फसल को कीड़ों और बीमारियों से बर्बाद होता देख परेशान किसानों के लिए एक बड़ी और राहत देने वाली खबर है। लीची के फलों में लगने वाले खतरनाक 'स्टिंग बग' और अन्य बीमारियों से फसल को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने तुरंत कड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सीधे निर्देश पर एक्स्पर्ट्स की एक विशेष टास्क फोर्स का गठन कर दिया गया है। यह उच्च स्तरीय कमेटी न सिर्फ प्रभावित इलाकों का दौरा करेगी, बल्कि एक हफ्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट सीधे केंद्र सरकार को सौंपेगी। किसानों की गुहार के बाद एक्शन में आए कृषि मंत्री दरअसल, इस सीजन में बिहार के लीची उत्पादक किसान अपनी फसल में लग रहे 'स्टिंग बग' नाम के कीड़े से भारी नुकसान का सामना कर रहे हैं। इस कीड़े के कारण फल खराब हो रहे हैं, जिससे किसानों की आमदनी पर गहरा संकट आ गया है। किसानों द्वारा इस गंभीर मुद्दे को मजबूती से उठाए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तत्काल इसका संज्ञान लिया। उनके तुरंत निर्देश पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत आने वाले राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर द्वारा यह विशेषज्ञ कार्यबल गठित करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है। खेतों का दौरा करेगी टीम जारी आदेश के मुताबिक, यह टास्क फोर्स प्रभावित क्षेत्रों के लीची बागानों का जमीनी दौरा कर 'स्टिंग बग' की वर्तमान स्थिति का आकलन करेगी। टीम का मुख्य काम फसल को हुए नुकसान का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करना होगा। इसके अलावा, यह टीम किसानों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक कीटनाशकों और उपायों का सुझाव देगी। साथ ही, भविष्य में इस तरह की बीमारियों से फसल को बचाने के लिए लॉंग टर्म रणनीति तैयार करेगी और राज्य व केंद्र स्तर पर जरूरी हस्तक्षेप के लिए अपनी सिफारिशें भी देगी। दिग्गज वैज्ञानिकों को सौंपी गई जांच की कमान इस अहम कमेटी की कमान राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र मुजफ्फरपुर के निदेशक डॉ. विकास दास को सौंपी गई है, जिन्हें अध्यक्ष बनाया गया है। उनके साथ उद्यान-सह-बिहार राज्य बागवानी मिशन और पौधा संरक्षण निदेशालय के प्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे। इसके अतिरिक्त, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि और बिहार कृषि विवि के जाने-माने कीट वैज्ञानिकों को भी टीम में जगह दी गई है। वहीं, डॉ. इप्सिता सामल और प्रधान वैज्ञानिक (कीट विज्ञान) डॉ. विनोद कुमार को इस टास्क फोर्स का सदस्य सचिव बनाया गया है।

लखनऊ में खाद्य विभाग की समीक्षा बैठक, 25 लाख टन लक्ष्य पर जोर

 लखनऊ  खाद्य तथा रसद राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने गेहूं खरीद की गति बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि खरीद का लक्ष्य पाने के लिए तेजी से प्रयास किए जाएं। क्रय केंद्रों पर किसानों को परेशानी न हो। खाद्य तथा रसद राज्यमंत्री ने दिए निर्देश राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने शुक्रवार को आयोजित बैठक में बताया गया कि गेहूं खरीद के लिए 5797 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। भारत सरकार ने 25 लाख टन की खरीद का लक्ष्य तय किया है और अब तक 190704 किसानों से 9.75 लाख टन (39.01 प्रतिशत) की खरीद हो चुकी है। जबकि पिछले वर्ष इस अवधि में 9.19 लाख टन की खरीद हुई थी। मंत्री ने राशन की दुकानों पर ई-पास मशीनों से खाद्यान्न वितरण की नियमित जांच के भी निर्देश दिए। मंत्री ने 60 प्रतिशत से कम प्रगति वाले जिलों में गति बढ़ाने के निर्देश दिए। बताया गया कि खाद्यान्न वितरण की ऑनलाइन रिपोर्ट की मानिटरिंग की जा रही है और विभागीय कार्मिकों द्वारा फील्ड स्तर पर मोबाइल इंस्पेक्शन एप से आनलाइन जांच भी की जा रही है। इसकी औसत प्रगति 71.31 प्रतिशत है। मंत्री ने 60 प्रतिशत से कम प्रगति वाले जिलों में गति बढ़ाने के निर्देश दिए। ई-केवाईसी और अन्नपूर्णा भवनों का निर्माण जल्द पूरा कराने के भी निर्देश दिए मंत्री ने राशन कार्ड धारकों की ई-केवाईसी और अन्नपूर्णा भवनों का निर्माण जल्द पूरा कराने के भी निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव एवं आयुक्त रणवीर प्रसाद, अपर आयुक्त (प्रशासन) कामता प्रसाद सिंह, अपर आयुक्त (आपूर्ति) सत्यदेव, वित्त नियंत्रक शशि भूषण तोमर, संभागीय खाद्य नियंत्रक (मुख्यालय) अशोक कुमार पाल आदि मौजूद रहे।  

हल्दी के ‘कुरकुमिन’ से कैंसर उपचार की नई उम्मीद, GJU में शुरू हुआ खास शोध

 हिसार  महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर मामलों के बीच गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयू) में हर्बल आधारित नैनो-जैल पर शोध शुरू किया गया है। फार्मास्युटिकल साइंसिज विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. रेखा राव इस शोध के माध्यम से ऐसी जैल विकसित करने पर काम कर रही हैं, जो शुरुआती स्तर पर कैंसर कोशिकाओं की पहचान और लक्षित उपचार में सहायक हो सके। शोध में गुरुग्राम स्थित डीपीजी यूनिवर्स कालेज की डॉ. वर्षा भी सहयोग कर रही हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार नैनो फार्मूलेशन तकनीक पर आधारित यह जैल प्रभावित हिस्से पर सीधे काम करने के सिद्धांत पर विकसित की जा रही है। इसमें हल्दी के सक्रिय तत्व ‘कुरकुमिन’ जैसे हर्बल घटकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे साइड इफेक्ट कम रहने की संभावना जताई जा रही है। शोध पूरा होने पर इसका पेटेंट कराया जाएगा। जानें… क्या है नैनो-जैल तकनीक शोध के तहत विकसित की जा रही जैल नैनो फार्मूलेशन तकनीक पर आधारित होगी। इसका उद्देश्य कैंसर कोशिकाओं को लक्षित कर दवा के प्रभाव को प्रभावित हिस्से तक केंद्रित करना है। शोधकर्ताओं के अनुसार वर्तमान उपचार में दवाओं की अधिक मात्रा और उनके व्यापक प्रभाव से शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ते हैं। नैनो-जैल तकनीक इस चुनौती को कम करने की दिशा में उपयोगी हो सकती है। हरियाणा में बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर के मामले हर साल लगभग 8 हजार से 10 हजार नए ब्रेस्ट कैंसर मामले सामने आने का अनुमान है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला और हिसार जैसे शहरी क्षेत्रों में मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञ बदलती जीवनशैली, तनाव, खानपान और जागरूकता की कमी को प्रमुख कारण मानते हैं। चिकित्सकों के अनुसार अधिकांश महिलाएं शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे बीमारी कई बार तीसरे या चौथे चरण में सामने आती है। हर्बल तत्वों पर फोकस, साइड इफेक्ट कम करने का प्रयास इस जैल में हल्दी से प्राप्त ‘कुरकुमिन’ जैसे हर्बल तत्वों का उपयोग किया जाएगा। शोधकर्ताओं का मानना है कि हर्बल बेस होने के कारण इसके दुष्प्रभाव कम हो सकते हैं। जैल को त्वचा पर लगाने योग्य रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है, ताकि प्रभावित हिस्से पर सीधे उपयोग संभव हो सके।