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चीन तक पहुंचा अफगानिस्तान का नया रास्ता, वाखान कॉरिडोर में 121 किमी सड़क तैयार; पाकिस्तान की बढ़ी चिंता

काबुल  अफगानिस्तान ने चीन से सड़क संपर्क मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. देश ने उत्तर-पूर्वी बदख्शां प्रांत में वाखान कॉरिडोर के जरिए 121 किलोमीटर लंबी सड़क का आधिकारिक उद्घाटन किया है. यह सड़क चीन के शिनजियांग क्षेत्र की ओर सीधा रास्ता उपलब्ध कराती है. हालांकि, फिलहाल यह सड़क बिना पक्की सतह वाली है।  इस सड़क का निर्माण करीब दो साल पहले शुरू हुआ था और इसे बनाने में करीब 365 मिलियन अफगानी यानी लगभग 55 लाख डॉलर की लागत आई है. अफगानिस्तान के ग्रामीण पुनर्वास और विकास मंत्री अब्दुल लतीफ मंसूर ने इसके उद्घाटन के दौरान कहा कि इस सड़क का देश के लिए रणनीतिक, राजनीतिक और आर्थिक महत्व है।  चीन तक पहुंच बनाने में अहम होगा वाखान वाखान कॉरिडोर अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत में मौजूद एक संकरी पट्टी है. यह इलाका ताजिकिस्तान और पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र के बीच स्थित है. लंबे समय से इसकी भौगोलिक स्थिति को अफगानिस्तान और चीन के बीच संपर्क के लिहाज से अहम माना जाता रहा है।  नई सड़क के शुरू होने से इस दूरदराज इलाके में आवाजाही आसान होने की उम्मीद है. अफगान सरकार का कहना है कि उसने खास तौर पर कम विकसित प्रांतों में बुनियादी ढांचे से जुड़े ऐसे प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी है।  विदेशी इंजीनियरों के बिना तैयार हुई सड़क अब्दुल लतीफ मंसूर ने कहा कि इस परियोजना पर अफगान इंजीनियरों ने ही काम किया और निर्माण के लिए किसी विदेशी इंजीनियर या सलाहकार की मदद नहीं ली गई. सरकार ने इसे स्थानीय तकनीकी क्षमता और बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में अहम उपलब्धि बताया।  अफगानिस्तान के लिए वाखान कॉरिडोर सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं है. सरकार इसे चीन की ओर व्यापार और संपर्क बढ़ाने के साथ-साथ देश के रणनीतिक और आर्थिक हितों से जोड़कर देख रही है. वहीं पाकिस्तान भी चीन के साथ मिलकर उसके CPEC प्रोजेक्ट के तहत कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दे रहा है, लेकिन प्रोजेक्ट के 2030 तक पूरा होने की उम्मीद है. ऐसे में अफगानिस्तान ने कमोबेश तीन साल में ही सड़क बनाकर पूरी कर ली है। 

महंगा हुआ IndiGo का हवाई सफर, घरेलू फ्लाइट्स पर ₹375 से ₹1,300 तक बढ़ा फ्यूल चार्ज

मुंबई  हवाई सफर करने वालों के लिए टिकट महंगा हो सकता है. देश की बड़ी एयरलाइन IndiGo ने घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट के लिए फ्यूल चार्ज बढ़ाने का फैसला किया है. नए चार्ज 6 अक्टूबर 2026 की रात 12:01 बजे के बाद की जाने वाली नई बुकिंग पर लागू होंगे. यानी इस समय के बाद टिकट बुक करने वाले यात्रियों को पहले के मुकाबले ज्यादा फ्यूल चार्ज देना होगा. घरेलू उड़ानों में चार्ज यात्रा की दूरी के हिसाब से तय होगा. इसमें 100 रुपये से लेकर 350 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है।  सबसे ज्यादा बढ़ोतरी 2,000 किलोमीटर से ज्यादा की घरेलू उड़ानों पर हुई है. वहीं, 1,001 से 1,500 किलोमीटर की उड़ान पर यात्रियों को 300 रुपये ज्यादा देने होंगे. अगर एक परिवार में चार लोग सफर कर रहे हैं, तो दूरी के हिसाब से उन्हें एक तरफ की यात्रा पर अधिकतम 1,200 रुपये तक अतिरिक्त फ्यूल चार्ज देना पड़ सकता है. हालांकि, यह बढ़ोतरी टिकट के बेस किराए से अलग होगी।  दूरी के हिसाब से लगेगा नया फ्यूल चार्ज IndiGo ने घरेलू उड़ानों को अलग-अलग दूरी की कैटेगरी में बांटा है. जितनी लंबी उड़ान होगी, फ्यूल चार्ज उतना ही ज्यादा होगा. 1,001 से 1,500 किलोमीटर की उड़ान पर अब ₹900 फ्यूल चार्ज लगेगा. वहीं, 2,000 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा करने वाले यात्रियों से ₹1,300 लिया जाएगा।  उड़ान की दूरी नया फ्यूल चार्ज 0–500 किमी ₹375 501–1,000 किमी ₹600 1,001–1,500 किमी ₹900 1,501–2,000 किमी ₹1,150 2,000 किमी से ज्यादा ₹1,300 100 से 350 रुपये तक बढ़ा चार्ज  नई दरों के मुताबिक घरेलू उड़ानों पर फ्यूल चार्ज में ₹100 से ₹350 तक की बढ़ोतरी हुई है. 1,001-1,500 किलोमीटर की उड़ान के लिए चार्ज ₹300 बढ़ा है. वहीं, 2,000 किलोमीटर से ज्यादा की उड़ान पर ₹350 की बढ़ोतरी हुई है. इसका सीधा असर परिवार के बजट पर पड़ सकता है. उदाहरण के लिए, अगर चार लोग ऐसी उड़ान लेते हैं जिसमें प्रति यात्री ₹350 की बढ़ोतरी हुई है, तो एक तरफ की यात्रा में परिवार को ₹1,400 ज्यादा देने होंगे. आने-जाने की यात्रा में यह अतिरिक्त खर्च ₹2,800 तक हो सकता है. इंटरनेशनल फ्लाइट पर भी बढ़ा फ्यूल चार्ज IndiGo ने इंटरनेशनल फ्लाइट के लिए भी फ्यूल चार्ज में बदलाव किया है. अलग-अलग क्षेत्रों के लिए चार्ज अलग रखा गया है. SAARC  सेक्टर की उड़ानों पर चार्ज ₹1,000 से बढ़ाकर ₹3,000 किया गया है. यूरोप जाने वाली उड़ानों के लिए फ्यूल चार्ज ₹10,000 रखा गया है. क्षेत्र फ्यूल चार्ज SAARC ₹3,000 दक्षिण-पूर्व एशिया ₹5,500 GCC और मिडिल ईस्ट ₹5,500 उत्तर और पूर्वी एशिया ₹5,500 अफ्रीका ₹6,000 यूरोप ₹10,000 ATF महंगा होने से बढ़ा खर्च  IndiGo के मुताबिक, एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लिया गया है. एयरलाइन के लिए ईंधन एक बड़ा खर्च होता है. जब ATF महंगा होता है, तो उड़ानों के संचालन की लागत भी बढ़ जाती है. एयरलाइन का कहना है कि बढ़ी हुई लागत की पूरी भरपाई करने के लिए फ्यूल चार्ज में इससे ज्यादा बढ़ोतरी करनी पड़ सकती थी. लेकिन यात्रियों पर बोझ कम रखने के लिए चार्ज में सीमित बढ़ोतरी की गई है.

Maruti की नई Baleno ने मचाया धमाल! लॉन्च के पहले महीने में 25 हजार से ज्यादा कारें बिकीं

मुंबई  मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) ने पिछले महीने अपनी प्रीमियम हैचबैक – Baleno का फेसलिफ्ट लॉन्च किया था। यह फेसलिफ्ट कई शानदार अपग्रेड्स से लैस है। इसके फ्रंट लुक को भी कंपनी ने पहले से ज्यादा बोल्ड और अग्रेसिव बना दिया है। यही कारण है कि सेल के मामले में 2026 बलेनो ने कमाल कर दिया है। कारवाले की रिपोर्ट के अनुसार पिछले महीने इसकी सेल 25 हजार यूनिट से ज्यादा रही है। पहले महीने हुई शानदार सेल का यह माइलस्टोन बता रहा है कि नई बलेनो अपने सेगमेंट पर राज करने के मूड से आई है। आइए जानते हैं नई बलेनो में क्या कुछ है खास। 5.99 लाख रुपये शुरुआती कीमत नेक्सा की वेबसाइट पर नई बलेनो 5.99 लाख रुपये की शुरुआती कीमत के साथ लिस्ट है। इसके टॉप वेरिएंट की कीमत 9.99 लाख रुपये तक जाती है। दोनों कीमतें एक्स-शोरूम हैं। फीचर्स की बात करें, तो बलेनो फेसलिफ्ट में आपको 1.2 लीटर का थ्री-सिलेंडर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन मिलेगा। यह नया इंजन 82bhp की पावर और 114Nm का टॉर्क ऑफर करता है। कंपनी नई बलेनो (AMT) का माइलेज 24.77 kmpl तक का क्लेम करती है। बलेनो मैन्युअल और AMT गियरबॉक्स ऑप्शन के साथ आती है। खास बात है कि बलेनो में आपको सीएनजी के साथ एएमटी का भी ऑप्शन मिलेगा। नई बलेनो में हुए ये बदलाव बलेनो के एक्सटीरियर में हुए बदलावों की बात करें, तो अब इसमें ब्लैक हॉरिजॉन्टल स्लैट्स वाली बड़ी फ्रंट ग्रिल ऑफर की जा रही। वहीं, हेडलैंप और टेल लैंप पहले जैसे ही हैं। नए फॉग लैंप हाउसिंग के साथ बंपर में थोड़ा बदलाव किया गया है। हैचबैक के 16-इंच के अलॉय व्हील्स और शार्क फिन एंटीना को भी डिजाइन दिया गया है। गाड़ी के डाइमेंशन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बलेनो की लंबाई अभी भी 3,990mm है और इसका व्हीलबेस 2,520mm है। इंटीरियर की जहां तक बात है, तो केबिन का लेआउट पहले जैसा ही है। इसमें नौ-इंच का टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम और सेमी-डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर दिया गया है। इस बार इसमें वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, टायर प्रेशर मॉनिटर और लेवल 2 ADAS-बेस्ड सेफ्टी फीचर्स भी दिए गए हैं। पुराने मॉडल से लिए गए फीचर्स में हाइट-एडजस्टेबल ड्राइवर सीट, वायरलेस चार्जर, हेड-अप डिस्प्ले, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल और 360-डिग्री कैमरा शामिल हैं। आने वाला है फ्रॉन्क्स का फेसलिफ्ट कंपनी बलेनो के बाद अपनी कई और कारों को अपडेट देने वाली है। फ्रॉन्क्स इन्हीं में से एक है। मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स का फेसलिफ्ट इसी साल नवंबर में मार्केट में एंट्री कर सकता है। इसमें कंपनी नया फ्रंट ग्रिल, अपडेटेड बंपर और नई एलईडी लाइट्स के साथ डिजाइन में छोटे-मोटे बदलाव कर सकती है। इंटीरयर में आपको बड़ा टचस्क्रीन, अपडेटेड डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, सनरूफ और वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स जैसे फीचर देखने को मिल सकते हैं। इसमें लेवल-2 ADAS भी दिया जा सकता है।

J&K में खेती का बदलेगा अंदाज! AI-रोबोटिक्स से कृषि और बागवानी को मिलेगी नई रफ्तार

जम्मू  जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कृषि और बागवानी क्षेत्र में उभरती आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और स्मार्ट फार्मिंग जैसी भविष्योन्मुखी तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने का जोरदार आह्वान किया है। SKUAST-कश्मीर में AI और रोबोटिक्स पर आयोजित एक आंतरिक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि कृषि क्षेत्र अब केवल पारंपरिक खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि नवाचार, तकनीक और आधुनिक इंजीनियरिंग हस्तक्षेपों के माध्यम से भविष्य का नेतृत्व करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मानव बुद्धिमत्ता और एआई का होगा तालमेल सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर इन मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए उपयुक्त मंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र का कृषि परिदृश्य ऐतिहासिक रूप से किसानों को कठिन परिस्थितियों से निपटने और सीमित संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रेरित करता रहा है। 1960 के दशक में भारत के सामने आई चुनौतियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय देश खाद्यान्न की कमी से जूझ रहा था और आयात पर काफी हद तक निर्भर था। कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और इंजीनियरों ने मशीनीकरण सहित विभिन्न उपायों के जरिए कृषि क्षेत्र को बदलने और हरित क्रांति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि अब कृषि इंजीनियरिंग को उत्पादन बढ़ाने, कम संसाधनों में अधिक उपज हासिल करने, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से कृषि और बागवानी को सुरक्षित रखने जैसी व्यावहारिक और तात्कालिक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। सिन्हा ने कहा, “इन चुनौतियों का समाधान अतीत के औजारों से नहीं किया जा सकता। हमें नए औजारों की जरूरत है।” उन्होंने आधुनिक तकनीकों और नए दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। खेती में महिलाओं की भूमिका को तकनीक से मिले मजबूती उपराज्यपाल ने कहा कि हाल के महीनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में तेजी से हुए बदलावों ने दुनियाभर में इसके प्रति रुचि और चिंताएं दोनों बढ़ाई हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि AI और मानव बुद्धिमत्ता एक-दूसरे के पूरक बनकर काम करें, न कि उन्हें अलग-अलग देखा जाए। उन्होंने समाज के व्यापक वर्ग को लाभ पहुंचाने वाले नवाचारों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। विशेष रूप से महिलाओं की भूमिका का उल्लेख करते हुए सिन्हा ने कहा कि महिला नेतृत्व वाली इंजीनियरिंग और तकनीकी पहल केवल चर्चा का विषय न रहें, बल्कि उनके ठोस और व्यावहारिक परिणाम सामने आने चाहिए। कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने श्रम बल से जुड़े आंकड़ों का हवाला दिया और कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं कृषि गतिविधियों से जुड़ी हैं, जबकि इस क्षेत्र में काम करने वाले कई श्रमिकों को नियमित मजदूरी भी नहीं मिलती। उपराज्यपाल ने कृषि इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और संस्थानों से ऐसी तकनीक एवं समाधान विकसित करने का आह्वान किया जो समावेशी और संसाधन-कुशल हों तथा बदलती जलवायु परिस्थितियों में खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद करें।

वाराणसी की दालमंडी में चौड़ीकरण अभियान अंतिम चरण में, 187 भवनों पर कार्रवाई; दिसंबर तक तैयार होगी सड़क

 वाराणसी उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए दालमंडी से होकर बनाए जा रहे सुगम मार्ग के चौड़ीकरण का काम अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है. करीब एक साल पहले शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के तहत दालमंडी इलाके में ध्वस्तीकरण का काम लगभग पूरा हो गया है. सोमवार को पांच और भवनों पर बुलडोजर चलाया गया. इसके साथ ही चौड़ीकरण की जद में आए भवनों को हटाने का काम पूरा होने की बात पीडब्ल्यूडी ने कही है।  दालमंडी में चल रहा यह प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते को पहले के मुकाबले काफी चौड़ा करने के लिए शुरू किया गया था. पीडब्ल्यूडी की ओर से करीब सवा 200 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के तहत दालमंडी इलाके में कुल 187 भवन चौड़ीकरण की जद में आए थे. इन भवनों में छह मस्जिदें भी शामिल थीं।  अब तक 170 से ज्यादा भवनों को जमींदोज किया जा चुका है. पीडब्ल्यूडी के मुताबिक करीब 172 से 173 मकान पूरी तरह डिस्मेंटल किए जा चुके हैं. बचे हुए भवनों पर भी आधे से ज्यादा काम पूरा हो गया था. सोमवार को अंतिम चरण में पांच भवनों को गिराया गया. इसके साथ ही इस प्रोजेक्ट के तहत भवनों को हटाने का काम पूरा हो गया. दालमंडी का इलाका लंबे समय से संकरी गलियों और घनी आबादी के लिए जाना जाता है. इसी इलाके से होकर काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते को चौड़ा किया जा रहा है. प्रोजेक्ट के तहत करीब 60 फीट चौड़ी और साढ़े 600 मीटर लंबी सड़क तैयार की जानी है।  गलियों के जाल से निकलेगा 60 फीट चौड़ा रास्ता इस चौड़ी सड़क के तैयार होने के बाद मंदिर तक पहुंचने का रास्ता मौजूदा संकरी गलियों के मुकाबले काफी सुगम हो जाएगा. फिलहाल इस पूरे इलाके में चौड़ीकरण की जद में आए भवनों को हटाने का काम लगभग पूरा किया जा चुका है. अब आगे का काम सड़क और उससे जुड़ी सुविधाओं को तैयार करने पर केंद्रित होगा।  दालमंडी चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के तहत कुल 187 भवनों की पहचान की गई थी. इनमें छह मस्जिदें भी शामिल थीं. प्रशासन ने मस्जिद कमेटी के सहयोग से इन मस्जिदों को भी चौड़ीकरण की जरूरत के अनुसार आंशिक या पूर्ण रूप से हटाया है. भवनों को हटाने का काम चरणबद्ध तरीके से किया गया. अब अंतिम चरण में पांच भवनों को भी डिस्मेंटल कर दिया गया. पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के मुताबिक इसके साथ ही डिमोलिशन का अंतिम चरण पूरा हो गया है।  पीडब्ल्यूडी के वाराणसी के अधिशासी अभियंता केके सिंह ने बताया कि दालमंडी में डिस्मेंटलिंग का फाइनल चरण सोमवार को था. इस चरण में करीब पांच भवनों को डिस्मेंटल किया गया. उन्होंने बताया कि अब तक 172 से 173 मकान पूरी तरह डिस्मेंटल किए जा चुके हैं. बचे हुए भवनों पर भी आधे से ज्यादा काम पहले ही हो चुका था. केके सिंह के मुताबिक चौड़ीकरण की जद में आए भवनों के लिए अब तक 132 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा जा चुका है. भवनों को हटाने के लिए पोकलेन और जेसीबी मशीनों की मदद ली गई।  भवनों को हटाने के बाद अब प्रोजेक्ट के अगले महत्वपूर्ण हिस्से पर काम चल रहा है. अधिकारियों के मुताबिक इलाके में वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम अभी जारी है. यह काम नवंबर महीने में पूरा होने की उम्मीद है. पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता केके सिंह ने बताया कि वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम पूरा होने के बाद करीब एक से डेढ़ महीने में प्रोजेक्ट को पूरा कर दिया जाएगा. इस हिसाब से दिसंबर के अंत तक काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए तैयार किया जा रहा सुगम मार्ग पूरा होने की उम्मीद है।  अब वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम दालमंडी चौड़ीकरण का यह प्रोजेक्ट करीब एक साल तक चलने वाला था. अधिकारियों के मुताबिक इसे दिसंबर में पूरा करना बड़ी उपलब्धि होगी. इसके लिए भवनों के ध्वस्तीकरण के साथ-साथ सड़क से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं पर भी काम किया जा रहा है. केके सिंह ने बताया कि इस काम में प्रशासन का पूरा सहयोग मिला है. इसी सहयोग के चलते ध्वस्तीकरण के काम को अंतिम चरण तक पहुंचाया जा सका है. अब दालमंडी में भवनों को हटाने का काम खत्म हो चुका है और सड़क निर्माण से जुड़े बाकी काम को पूरा करने पर जोर है।  करीब एक साल पहले शुरू हुआ यह काम अब उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां दालमंडी में चौड़ीकरण की सबसे बड़ी बाधा यानी भवनों को हटाने का काम पूरा हो चुका है. 60 फीट चौड़ी और साढ़े 600 मीटर लंबी सड़क के तैयार होने के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर जाने वाले रास्ते को नया स्वरूप मिलेगा. अधिकारियों की योजना के मुताबिक नवंबर में वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम पूरा होगा और इसके बाद करीब एक से डेढ़ महीने में पूरा प्रोजेक्ट तैयार कर दिसंबर के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। 

गुना में बाल विवाह की चौंकाने वाली तस्वीर, 25% युवतियों की शादी 18 से पहले; 39% पुरुष 21 से पहले बने दूल्हे

 गुना  गुना में कम उम्र में शादी की परंपरा कानून और जागरूकता के बावजूद खत्म नहीं हुई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-6 के आंकड़े बताते हैं कि 20 से 24 वर्ष की उम्र की हर चार में करीब एक युवती का विवाह 18 साल की कानूनी उम्र से पहले हो चुका था। जिले में इसका अनुपात 25.9% है। पांच साल पहले हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 में यह 28.1% था, यानी कमी तो आई, लेकिन राज्य के 20% औसत से गुना अभी भी काफी ऊपर है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली तस्वीर पुरुषों के आंकड़े में सामने आई है। 25 से 29 वर्ष की उम्र के 39% पुरुषों की शादी 21 साल की कानूनी उम्र पूरी होने से पहले हुई। इसके पहले के सर्वे में यह अनुपात 21.8% था। यानी पांच साल में कम उम्र में शादी करने वाले पुरुषों का अनुपात 17.2% अंक बढ़ गया। राज्य का औसत 25% है। पुरुषों का आंकड़ा सबसे बड़ा अलार्म; 5 साल में 21.8% से 39% : बाल विवाह की चर्चा में आमतौर पर लड़कियों के आंकड़ों पर फोकस रहता है, लेकिन गुना में पुरुषों का आंकड़ा ज्यादा बड़ा सवाल खड़ा करता है। 25-29 वर्ष के 39% पुरुषों की शादी 21 साल से पहले हुई। पांच साल पहले यह अनुपात 21.8% था। यानी इसमें करीब 80% की सापेक्ष बढ़ोतरी हुई है। राज्य में 21 साल से पहले विवाह करने वाले पुरुषों का औसत 25% है। गुना का आंकड़ा इससे 14 प्रतिशत अंक अधिक है। शादी जल्दी तो मातृत्व भी जल्दी, किशोरियों में आंकड़ा 8.5% कम उम्र में विवाह का एक और संकेत किशोरियों के मातृत्व के आंकड़े में दिखता है। जिले में 15-19 वर्ष की 8.5% किशोरियां सर्वे के समय या तो मां बन चुकी थीं या गर्भवती थीं। पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 5.5% था। यानी पांच साल में इसमें 3% अंक की बढ़ोतरी हुई। मप्र का औसत 5.6% है, जबकि गुना इससे भी ऊपर है। इसके पीछे कारण शिक्षा भी है। जिले में 15-49 वर्ष की केवल 18.9% महिलाओं ने 10 या उससे अधिक वर्ष की स्कूली शिक्षा पूरी की है। जबकि प्रदेश में इसका औसत 33.7% है। यह आंकड़ा दिखाता है कि प्रदेश के मुकाबले बालिका शिक्षा में गुना की स्थिति बेहद खराब है। यही स्थिति लड़कों की शिक्षा में भी है।  

MSP पर फसल बेचने का मौका, 10 अक्टूबर तक करा सकते हैं पंजीयन; 3 लाख से अधिक किसान जुड़े

समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये 3 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन : मंत्री राजपूत 10 अक्टूबर तक होगा पंजीयन भोपाल खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये पंजीयन प्रक्रिया जारी है। अभी तक 3 लाख 5 हजार 82 किसानों ने पंजीयन कराया है। किसान 10 अक्टूबर तक पंजीयन करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय में पंजीयन करा लें, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। प्रदेश में 1100 से अधिक पंजीयन केन्द्र बनाये गये हैं। जबलपुर संभाग में 1 लाख 47 हजार 824, नर्मदापुरम में 16 हजार 398, भोपाल में 8 हजार 599, रीवा में 94 हजार 384, शहडोल में 21 हजार 456 और सागर संभाग में 16 हजार 155 किसानों ने पंजीयन कराया है। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत एवं तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। प्रति पंजीयन के लिये 50 रूपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जाएगा। किसान पंजीयन के लिए भूमि संबंधी दस्तावेज़ एवं किसान के आधार कार्ड एवं अन्य फोटो पहचान पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकार्ड रखा जाना अनिवार्य होगा। सिकमी/बटाईदार/कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन सहकारी संस्था द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर उपलब्ध होगी। इस श्रेणी के शत-प्रतिशत किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा। सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीयन केन्द्रों को क्रियाशील रखा जाए जिससे किसान वहां जाकर आसानी से अपना मोबाईल नंबर एवं बायोमेट्रिक अपडेट करा सके। इस कार्य के लिए पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केन्द्र का भी उपयोग किया जा सकता है। आधार नंबर से बैंक खाता लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ भी समन्वय आवश्यक होगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते के सत्यापन के लिये पंजीयन के दौरान ही एक रूपये का ट्रांजेक्शन मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन/जेआईटी पोर्टल के माध्यम से कराया जाएगा। आधार नंबर का वेरिफिकेशन पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। वेरीफिकेशन आधार नंबर से लिंक मोबाईल नंबर पर प्राप्त ओटीपी से या बायोमेट्रिक डिवाईस से किया जा सकेगा। किसान का पंजीयन केवल उसी स्थिति में हो सकेगा जबकि किसान के भू-अभिलेख के खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। भू-अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा। सत्यापन होने की स्थिति में ही उक्त पंजीयन मान्य होगा।  

मानसून के बाद पटना में तेज होंगे विकास कार्य, BUDCO ने तैयार किया नया प्लान

पटना मानसून के कारण थमे विकास कार्य अब रफ्तार पकड़ेंगे। वर्षा खत्म होते ही सड़कों, नालों, पार्कों और घाटों से जुड़ी अधूरी योजनाओं को धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) की ओर से सैदपुर, राजीव नगर और आनंदपुरी नाला समेत कई बड़ी योजनाओं पर इसी माह के अंतिम सप्ताह से काम शुरू कराया जाएगा। त्योहारों को देखते हुए बुडको ने काम शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। मुख्यमंत्री समग्र शहरी विकास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में स्वीकृत 300 से अधिक ऐसी योजनाएं हैं, जिनका काम वर्षा के कारण रोक दिया गया था। इनमें सड़क निर्माण, पुरानी सड़कों की मरम्मत, पार्क व घाटों का विकास और नालों के पक्कीकरण का काम शामिल है। आठ डिविजन में बांटकर विकास कार्य करा रहा बुडको बुडको पटना को आठ डिविजन में बांटकर विकास कार्य करा रहा है। इनमें अजीमाबाद, बांकीपुर, कंकड़बाग, नूतन राजधानी, पटना पश्चिम, पाटलिपुत्र, पटना पूर्वी और पटना सिटी डिविजन शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत 500 योजनाओं में से 177 योजनाओं का काम वर्षा के दौरान रोक दिया गया था। इसी तरह 2024-25 में स्वीकृत 393 योजनाओं में से 127 रुकी योजनाओं पर भी दोबारा काम शुरू होगा। दो तरफ से बनेगा सैदपुर नाला सैदपुर नाले का निर्माण तेजी से पूरा करने के लिए गायघाट और रामपुर, दोनों ओर से एक साथ काम शुरू कराया जाएगा। निर्माण में बाधा बन रहे बिजली के खंभों को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है। नाले के पानी का बहाव भी अस्थायी रूप से डायवर्ट किया गया है, ताकि निर्माण के दौरान जलजमाव की समस्या न हो। राजीव नगर में हटे खंभे, अब ढलाई राजीव नगर बड़े नाले का काम भी इसी माह के अंतिम सप्ताह से शुरू होगा। मानसून शुरू होने पर जुलाई में लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं हो, इसलिए काम रोक दिया गया था। अब राजापुर पुल की ओर से निर्माण शुरू कराया जाएगा। रविवार को नाले के किनारे लगे सभी बिजली के खंभे हटा दिए गए। नाले में जमा गाद की सफाई भी तेजी से कराई जा रही है। आनंदपुरी नाले का काम भी दोबारा शुरू किया जाएगा। कहीं नाला बना, सड़क का इंतजार अधूरे विकास कार्यों के कारण कई इलाकों के लोगों की परेशानी बढ़ी हुई है। वार्ड सात के इंद्रपुरी रोड नंबर-10 में बाक्स नाला बन चुका है, लेकिन खोदी गई सड़क की मरम्मत नहीं हुई है। लोगों को नाले के ऊपर से पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है। वहीं, वार्ड 45 के गीता प्रसाद रोड में 1.57 करोड़ रुपये की लागत से योगीपुर चौक से गांधी नगर तक नाला और सड़क बननी है। नाले का काम लगभग पूरा है, लेकिन सड़क नहीं बनने से राहगीरों को परेशानी हो रही है। अब इन अधूरे कामों को भी पूरा कराया जाएगा।

वृद्धावस्था पेंशन में बड़ा बदलाव, अब ₹1,500 की किस्त; जानें कौन उठा सकता है लाभ

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा और उनके सम्मान को ध्यान में रखते हुए वृद्धावस्था पेंशन योजना में एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन की राशि बढ़ाकर 1500 प्रतिमाह कर दी है। प्रदेश सरकार ने न केवल वृद्धजनों की मासिक पेंशन राशि में शानदार इजाफा किया है, बल्कि इस योजना को बिना किसी रुकावट के लगातार चलाने के लिए अनुपूरक बजट में 1500 करोड़ रुपये के बड़े फंड की मंजूरी भी दे दी है। सरकार के इस कदम से राज्य के लाखों वरिष्ठ नागरिकों को सीधा फायदा पहुंचेगा और उन्हें आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा। अब उत्तर प्रदेश के पात्र बुजुर्गों (Old Age Scheme) को हर महीने मिलने वाली 1000 रुपये की पेंशन को बढ़ाकर सीधे 1500 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। यानी अब हमारे बुजुर्गों को सालाना पूरे 18,000 रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी, जिससे उन्हें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। पेंशन भेजने का तरीका भी हुआ आसान इसके साथ ही, पेंशन बांटने के तरीके को भी पहले से कहीं ज्यादा पारदर्शी और आसान बना दिया गया है। पहले जहां तीन महीने में एक साथ 3000 रुपये दिए जाते थे, वहीं अब बढ़े हुए पैसों को 1500-1500 रुपये की दो किस्तों में जारी किया जाएगा। सबसे अच्छी बात यह है कि पेंशन का सारा पैसा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के जरिए सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा जाएगा, ताकि बिना किसी बिचौलिए या झंझट के बुजुर्गों को उनका हक सीधे उनके हाथ में मिल सके। किसे मिलेगा पेंशन का लाभ, पात्रता और शर्तें पेंशन का नियमित लाभ प्राप्त करने के लिए लाभार्थियों को तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पूरा होना अनिवार्य है। जैसे कि लाभार्थी का बैंक खाता आधार से लिंक होना अनिवार्य है। डीबीटी (DBT) से भुगतान प्राप्त करने के लिए बैंक खाते का NPCI पोर्टल पर मैप होना जरूरी है। इसके अलावा सबसे जरूरी बात कि e-KYC सत्यापन। यदि किसी वृद्धजन की पेंशन रुकती है, तो उन्हें तुरंत अपना e-KYC अपडेट कराना होगा। यदि पेंशन खाते में न आए तो क्या करें? अगर किसी पात्र बुजुर्ग के खाते में बढ़ी हुई पेंशन की किस्त नहीं पहुंची है, तो सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार:     सबसे पहले अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) या बैंक शाखा में जाकर e-KYC और NPCI मैपिंग का स्टेटस चेक कराएं।     अपने संबंधित जनपद के समाज कल्याण विभाग के कार्यालय से संपर्क कर आवेदन विवरण और आधार विवरण का मिलान कराएं।     योजना के आधिकारिक यूपी सामाजिक पेंशन पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन स्टेटस ट्रैकिंग करें।  

₹2,500 की लक्ष्मी योजना से महिलाओं को कितनी राहत? जानें दिल्ली सरकार की योजना

 नई दिल्ली लोधी रोड पर कैंप में रहने वाली 52 साल की उमा खुश हैं कि ' दिल्ली लक्ष्मी योजना' की वजह से उनकी बचत में हर महीने कुछ पैसे जुड़ेंगे। उनकी बेटी ने अभी कॉलेज जाना शुरू किया है, और उमा को उसकी शादी के लिए पैसे जुटाने की चिंता थी। 29 साल की प्रीति के लिए, हर महीने मिलने वाले 2,500 रुपये का मतलब सिर्फ एक है- अपनी 10 साल की बेटी की पढ़ाई में रुचि को बढ़ावा देना। उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी के नाथूपुरा में रहने वाली प्रीति के परिवार के भविष्य का सपना उनकी बेटी की पढ़ाई पर टिका है। उन्होंने गर्व से TOI को बताया कि वह टीचर बनना चाहती हैं। और प्रीति क्या चाहती हैं? अपने तीन साल के शरारती बेटे को संभालते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों के बाद, मेरी अपनी इच्छाएं खत्म हो गईं। क्या कह रहीं दिल्ली की महिलाएं? कोटला मुबारकपुर के पास रहने वाली सुमित्रा (35) के मन में भी लंबे समय से यही बात थी। उनकी जिंदगी अपने 15 और 13 साल के बेटों की परवरिश और पति की मदद करने के इर्द-गिर्द घूमती है। लेकिन मिलने वाले स्टाइपेंड (भत्ते) की उम्मीद ने जिम्मेदारियों के बोझ तले दबी एक पुरानी इच्छा को फिर से उनके दिल में जगा दिया। सुमित्रा सिलाई सीखना चाहती थीं। लेकिन छह महीने के कोर्स की फीस 4,000-5,000 रुपये है। पति की 20,000 रुपये महीने की सैलरी में सुमित्रा का घर बहुत सीमित बजट में चलता है। 5,000 रुपये किराए में, लगभग 10,000 रुपये खाने-पीने और राशन में, और बाकी पैसे बेटों की पढ़ाई और घर के दूसरे खर्चों में चले जाते हैं। 2500 रुपये की मदद से कितना असर हालांकि, अब, सुमित्रा घर तक सीमित भूमिकाओं से आगे की सोच रही हैं। वह सिलाई सीखना चाहती हैं, अपना कुछ शुरू करना चाहती हैं और घर में ज्यादा योगदान देना चाहती हैं। उनके पति, जो चपरासी का काम करते हैं, ने कहा कि अगर वह अपने पैसे खुद कमाएंगी तो मुझे बहुत खुशी होगी। 2025 के विधानसभा चुनावों के दौरान, बीजेपी के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने घोषणा की थी कि वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की सहायता देगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा था कि इस कदम का मकसद ऐसी महिलाओं को ज्यादा आर्थिक सुरक्षा देना और उन्हें स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करना है। कुछ राहत, लेकिन आय की शर्तें 'पहले इंडिया फाउंडेशन' के चेयरमैन और नीति आयोग के पूर्व वाइस-चेयरमैन, अर्थशास्त्री राजीव कुमार के अनुसार, हालांकि यह योजना महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण बचत का अवसर देती है, लेकिन आय की पात्रता की शर्त कई लोगों को इससे बाहर कर सकती है। राजीव कुमार ने कहा कि कोई भी अतिरिक्त आय कुछ राहत तो देती ही है। लेकिन सालाना 2.5 लाख रुपये से कम पारिवारिक आय का मानदंड थोड़ा कड़ा है। इसका मतलब है कि प्रति परिवार मासिक आय 21,000 रुपये से कम या प्रतिदिन 700 रुपये से कम होनी चाहिए। क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट उन्होंने आगे कहा कि इसका मतलब चार लोगों के परिवार के लिए प्रति व्यक्ति आय प्रतिदिन 200 रुपये से कम है। राजीव कुमार ने बताया कि मार्च में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 के लिए दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय 5.3 लाख रुपये रहने का अनुमान था। हम इससे ज्यादा आय सीमा (कट-ऑफ) चुन सकते थे। अंजली ने बताया कैसे चलता है घर खर्च करोल बाग के शिदीपुरा की रहने वाली अंजली (38) अपने घर के पास एक गोदाम में पेन और अन्य सामान पैक करके महीने के 7,000 रुपये कमाती हैं। उनके पति की न तो कोई पक्की नौकरी है और न ही कोई निश्चित वेतन। हालांकि, आय के अनिश्चित स्रोतों के बावजूद, वह घर संभालने में माहिर हैं और यह जोड़ा मिलकर अगले महीने की योजना बनाता है। उन्होंने कहा कि बहुत सारी परेशानियां हैं, लेकिन हम उनका सामना करते हैं और आगे बढ़ते रहते हैं। 'लक्ष्मी योजना जरूर मिलेगी कुछ राहत' अंजली ने कहा कि उनके घर में एक ऐसा खर्च है जिसमें कोई कटौती नहीं की जा सकती, और वह है उनके 15 साल के बेटे की स्कूल और ट्यूशन फीस- जो महीने में 2,000 से 3,000 रुपये है। उनके 70 से ज्यादा उम्र के सास-ससुर, जिनके घर में पूरा परिवार रहता है, उनका साथ देते हैं और उन्हें राहत भी मिलती है। महंगाई का असर इस इनकम ग्रुप वाले परिवारों के लिए, जिन्हें जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ने की उम्मीद नहीं होती, 'लक्ष्मी योजना' जैसी वेलफेयर स्कीम कितनी मददगार होती है? डीयू के जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज में इकोनॉमिक्स की एसोसिएट प्रोफेसर शिरीन अख्तर ने कहा कि दिल्ली में औसत प्रति व्यक्ति आय इतनी ज्यादा है, फिर भी बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जिनकी सालाना आय 2.5 लाख रुपये से कम है। यह भारी असमानता को दिखाता है। यह बंटवारे से जुड़ा मुद्दा है। 2500 रुपये का ट्रांसफर बेहद अहम शिरीन अख्तर ने आगे कहा कि चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी पर गौर करें। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पूरे भारत में चीनी की औसत खुदरा कीमत जुलाई में लगभग 48 रुपये प्रति किलो थी, जो 26 अगस्त तक 65 रुपये से ज्यादा हो गई। जो परिवार बमुश्किल अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर पा रहे हैं, उनके लिए कीमतों में ऐसी बढ़ोतरी का मतलब है कि उन्हें अपनी खपत में असल बदलाव करने पड़ सकते हैं। ऐसे में, 2,500 रुपये का ट्रांसफर अहम हो जाता है। हालांकि, अख्तर ने कहा कि सबसे गरीब परिवारों के मामले में, 'खर्च का एक बहुत बड़ा हिस्सा जरूरी चीजों पर ही होता है।' महिलाओं की जिंदगी बदलेगी ये योजना! शिरीन अख्तर ने कहा कि यहां एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि परिवार क्या खरीदना बंद कर देता है? यदि यह फल, दूध, दालें हैं, तो आज की मुद्रास्फीति कल की पोषण संबंधी कमी बन जाती है। यदि यह दवाएं हैं, तो यह स्वास्थ्य की कमी बन जाती है। यदि यह ट्यूशन, किताबें या स्कूली शिक्षा है, तो यह मानव-पूंजी की कमी बन जाती है। यदि परिवार केवल आवश्यक उपभोग को बनाए रखने के लिए उधार लेता है, तो आज की … Read more