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आषाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव-2026 का भव्य आगाज, दो दिवसीय आयोजन शुरू

रायपुर : आषाढ़ के प्रथम दिवस पर दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 का हुआ भव्य शुभारंभ पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया उद्घाटन रामगढ़ सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक धरोहर है : मंत्री अग्रवाल समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय होंगे मुख्य अतिथि रायपुर, आषाढ़ मास के प्रथम दिवस पर सरगुजा अंचल की गौरवशाली ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत के प्रतीक दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 का शुभारंभ सोमवार को पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया। पारंपरिक गरिमा, सांस्कृतिक उल्लास और ऐतिहासिक चेतना से ओतप्रोत इस आयोजन में लोक संस्कृति, साहित्य, पुरातत्व और पर्यटन का अद्भुत समागम देखने को मिला। महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर स्कूली बच्चों एवं स्थानीय कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समां बांध दिया, वहीं नई दिल्ली से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भव्य रामलीला ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर सांसद चिंतामणि महाराज, लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज, जिला एवं जनपद पंचायत के जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, इतिहासकार, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि रामगढ़ महोत्सव प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति, इतिहास, पुरातत्व, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी गौरवशाली विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। मंत्री अग्रवाल ने रामगढ़ महोत्सव के 50 वर्ष पूर्ण होने पर सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रामगढ़ केवल सरगुजा ही नहीं, बल्कि पूरे देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। राज्य सरकार इसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि महोत्सव के दौरान आगंतुकों को विश्व की प्राचीनतम रंगशाला के रूप में प्रसिद्ध सीताबेंगरा गुफा, ऐतिहासिक जोगीमारा गुफा, रामगढ़ पर्वत श्रृंखला तथा अन्य महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। इतिहास एवं पुरातत्व विशेषज्ञ इन स्थलों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्व की विस्तृत जानकारी भी प्रदान करेंगे, जिससे नई पीढ़ी अपनी ऐतिहासिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकेगी। उन्होंने कहा कि रामगढ़ महोत्सव क्षेत्रीय पर्यटन को नई दिशा देने के साथ-साथ सरगुजा की ऐतिहासिक धरोहर, प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। सांसद चिंतामणि महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि रामगढ़ भारत की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल का समय यहां व्यतीत किया था। उन्होंने कहा कि महाकवि कालिदास ने भी यहीं मेघदूतम् की रचना की थी। सीताबेंगरा, जोगीमारा, राम-जानकी मंदिर तथा हाथीपोल जैसे ऐतिहासिक स्थल विश्व पर्यटन के मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से रामगढ़ को विश्वस्तरीय पहचान दिलाई जाएगी। लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने कहा कि रामगढ़ केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक एवं साहित्यिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहां की सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटन की अपार संभावनाओं से परिपूर्ण है। उन्होंने इस धरोहर को वैश्विक स्तर पर प्रचारित एवं संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया। कलेक्टर अजीत वसंत ने उपस्थित अतिथियों एवं नागरिकों का स्वागत करते हुए कहा कि रामगढ़ महोत्सव सरगुजा की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर पर नई पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में स्थानीय कलाकारों, लोक संस्कृति और पारंपरिक कला को विशेष स्थान दिया गया है, जिससे स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रामगढ़ की ऐतिहासिक पहचान भविष्य में विश्वस्तर पर और अधिक सशक्त होगी तथा अधिकाधिक पर्यटक इस धरोहर से जुड़ेंगे। उन्होंने सभी आगंतुकों से महोत्सव के विभिन्न आयोजनों में सहभागिता कर सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत का आनंद लेने का आग्रह किया। कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष देवनारायण यादव, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अध्यक्ष राम किशुन सिंह, पूर्व सांसद कमलभान सिंह मरावी, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती राधा रवि एवं श्रीमती रायमुनिया कुरियम, जनपद पंचायत अध्यक्ष आलोक सिंह, उपाध्यक्ष सिद्धार्थ सिंह, पार्षद आलोक दुबे, एल्डरमैन करता राम गुप्ता, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार अग्रवाल, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, साहित्यकार, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

विशेष लेख: नैनो उर्वरक से बदल रही छत्तीसगढ़ की खेती, किसानों के लिए नई क्रांति की शुरुआत

रायपुर : विशेष लेख : नैनो उर्वरक- छत्तीसगढ़ के खेती-किसानी में आई नई क्रांति किसान भईयों को कम लागत में होगी अधिक पैदावारी रायपुर छत्तीसगढ़ को देश का धान का कटोरा कहा जाता है। यहां की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है और किसानों की समृद्धि राज्य के विकास से सीधे जुड़ी हुई है। बदलते समय के साथ खेती में नई तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है, जिनमें नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में उभरा है। कम लागत, अधिक प्रभाव और पर्यावरण संरक्षण जैसे गुणों के कारण नैनो उर्वरक आज किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा हैं।     नैनो उर्वरक अत्यंत सूक्ष्म कणों से निर्मित होते हैं, जिन्हें पौधे तेजी से और अधिक मात्रा में अवशोषित कर लेते हैं। इसके कारण पौधों को आवश्यक पोषक तत्व सही समय पर उपलब्ध हो जाते हैं और फसलों का विकास बेहतर तरीके से होता है। पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में इनकी मात्रा कम लगती है, जिससे किसानों का खर्च घटता है और उत्पादन में वृद्धि होती है।     छत्तीसगढ़ में धान, मक्का, चना, अरहर तथा सब्जी फसलों में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहा है। प्रदेश में कई किसानों ने अनुभव किया है कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से फसल की पैदावार बेहतर होती है, पौधे अधिक हरे-भरे रहते हैं और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है।     नैनो उर्वरकों का एक बड़ा लाभ यह भी है कि इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव कम पड़ता है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से जहां भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होती है, वहीं नैनो उर्वरक संतुलित पोषण प्रदान कर मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायता करते हैं। साथ ही जल स्रोतों में रासायनिक तत्वों के बहाव को भी कम करते हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।     परिवहन और भंडारण की दृष्टि से भी नैनो उर्वरक काफी सुविधाजनक हैं। पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों की जगह छोटी बोतलों में उपलब्ध नैनो उर्वरक किसानों के लिए आसानी से ले जाने और उपयोग करने योग्य होते हैं। इससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।     छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे उन्नत उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देकर खेती को अधिक उत्पादक, किफायती और टिकाऊ बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और नवाचार आधारित खेती ही भविष्य की कृषि का आधार है। नैनो उर्वरकों का उपयोग न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को भी बढ़ावा देगा।     छत्तीसगढ़ सरकार तथा कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही हैं। इसी क्रम में माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी ने भी राज्य के किसानों से अपील की है कि वे वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और नवीन तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाएं। उन्होंने किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक होने तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार इनका प्रयोग करने का आग्रह किया है, ताकि उत्पादन बढ़े, लागत घटे और किसानों की आय में वृद्धि हो सके।      वर्तमान में कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत और संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बीच नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर सामने आए हैं। यह तकनीक कम खर्च में बेहतर उत्पादन, स्वस्थ मिट्टी और सुरक्षित पर्यावरण का मार्ग प्रशस्त करती है। यदि छत्तीसगढ़ के किसान वैज्ञानिक सलाह और संतुलित उपयोग के साथ नैनो उर्वरकों को अपनाते हैं, तो आने वाले समय में यह राज्य की कृषि उन्नति और किसानों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन सकता है। निस्संदेह, नैनो उर्वरक छत्तीसगढ़ के किसान भाइयों के लिए आधुनिक खेती का नया वरदान साबित हो सकता है। तेजबहादुर सिंह भुवाल,  सहा. जनसंपर्क अधिकारी

आईटीआई दाखिले को बढ़ावा, हरियाणा सरकार देगी ईडब्ल्यूएस विद्यार्थियों को स्टाइपेंड

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को आर्थिक मदद देने का निर्णय लिया है। इसके पीछे सरकार की सोच है कि विद्यार्थी तकनीकी शिक्षा की ओर आकर्षित होंगे। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के विद्यार्थियों के लिए दो हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड (आर्थिक मदद) देने की मंजूरी प्रदान की जा चुकी है। आर्थिक सहयोग मिलने से आईटीआई में दाखिले बढ़ेंगे, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होगी और उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा। वर्ष 2026-27 के सत्र के लिए हरियाणा के 377 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में दाखिले की प्रक्रिया चल रही है। इनमें 197 सरकारी और 180 निजी आईटीआई शामिल हैं। इन संस्थानों में करीब एक लाख सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। विद्यार्थियों को 89 से अधिक इंजीनियरिंग और गैर-इंजीनियरिंग ट्रेड में प्रशिक्षण का विकल्प मिलेगा, जिनमें पारंपरिक ट्रेडों के साथ आधुनिक तकनीकी पाठ्यक्रम भी शामिल हैं। हरियाणा सरकार इस समय ड्यूल सिस्टम ऑफ ट्रेनिंग (डीएसटी) पर विशेष जोर दे रही है। इस मॉडल में विद्यार्थियों को केवल कक्षा तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि प्रशिक्षण के दौरान ही उद्योगों में व्यावहारिक अनुभव दिया जाता है। प्रवेश प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए विभाग ने सभी आईटीआई में हेल्प डेस्क स्थापित किए हैं। आईटीआई में प्रवेश के लिए आठवीं, दसवीं और बारहवीं पास अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। अलग-अलग ट्रेडों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है।

World’s Tallest Dam: चीन का नया कमाल, 315 मीटर ऊंचे डैम से होगा रिकॉर्ड बिजली उत्पादन

बीजिंग  चीन ने दुनिया के सबसे ऊंचे डैम के हाइड्रोपावर स्टेशन के पहले यूनिट को बिजली ग्रिड से जोड़ दिया है. यह स्टेशन चीन के सिचुआन प्रांत में बना है. शुआंगजियांगकोउ हाइड्रोपावर स्टेशन 315 मीटर ऊंचा है. इसकी कुल क्षमता 20 लाख किलोवॉट है. इससे हर साल औसतन 7.7 अरब यूनिट बिजली बनेगी. यह प्रोजेक्ट बिजली बनाने के साथ यांग्त्जे नदी के ऊपरी हिस्से में बाढ़ का खतरा कम करने में भी मदद करेगा।  शुआंगजियांगकोउ हाइड्रोपावर स्टेशन का डैम 315 मीटर ऊंचा है. इसी के साथ यह दुनिया का सबसे ऊंचा डैम बन गया है. इसे बनाने में 4.6 करोड़ क्यूबिक मीटर से ज्यादा समान का इस्तेमाल हुआ है. यह मात्रा इतनी ज्यादा है कि इससे पूरी पृथ्वी की भूमध्य रेखा के चारों ओर करीब 1 मीटर ऊंची दीवार बनाई जा सकती है।  हर साल बनेगी 7.7 अरब यूनिट बिजली इस हाइड्रोपावर स्टेशन की क्षमता 20 लाख किलोवॉट है. इसके पूरी तरह शुरू होने के बाद हर साल औसतन 7.7 अरब यूनिट बिजली बनेगी. इससे साफ एनर्जी का उत्पादन बढ़ेगा. साथ ही कोयला जैसे ईंधनों पर निर्भरता भी कम हो सकती है।  यह प्रोजेक्ट पहाड़ों के बीच और बेहद ठंडे इलाके में बनाया गया है. इसे बनाने के दौरान इंजीनियरों को गहरी नदी और कड़ाके की ठंड जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इनसे निपटने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल किया गया. इनमें हेलियोस्टैट बेस्ड सरफेस हीटिंग और पूरी तरह बंद एयर-सपोर्टेड मेम्ब्रेन सिस्टम शामिल हैं।  बाढ़ का खतरा कम करने में भी करेगा मदद यह हाइड्रोपावर स्टेशन सिर्फ बिजली बनाने के लिए नहीं है. यह यांग्त्जे नदी के ऊपरी हिस्से में पानी के बहाव को नियंत्रित करेगा. इससे बाढ़ का खतरा कम करने और पानी के बेहतर इस्तेमाल में भी मदद मिलेगी।  शुआंगजियांगकोउ हाइड्रोपावर स्टेशन चीन के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है. दुनिया का सबसे ऊंचा डैम बनने के साथ इसने एक नया रिकॉर्ड भी बनाया है. इससे बिजली उत्पादन बढ़ेगा और बाढ़ नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। 

Tamil Nadu Politics: स्टालिन का बड़ा हमला, थलपति विजय को लेकर किया चौंकाने वाला दावा

चेन्नई तमिलनाडु में CM थलपति विजय की सरकार को लेकर तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने बहुत बड़ा दावा कर दिया है। स्टालिन ने कहा है कि विजय की सरकार जल्द ही गिर सकती है और राज्य में जल्दी चुनाव भी हो सकते हैं। राज्य में बीते महीने आए चुनाव परिणामों के बाद सत्ता से बाहर होने वाली मुख्य विपक्षी दल द्रमुक (DMK) के अध्यक्ष स्टालिन ने रविवार रात एक जनसभा को संबोधित करते हुए यह बातें कही हैं। उन्होंने इस दौरान राज्य में बहुत जल्द मध्यावधि चुनाव होने की भविष्यवाणी भी की। स्टालिन ने दावा किया कि अभिनेता से नेता बने मुख्यमंत्री विजय की अगुवाई वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार के पास बहुमत नहीं है और अगले 3 से 6 महीनों के भीतर राज्य में विधानसभा चुनाव दोबारा हो सकते हैं। पार्टी कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए स्टालिन ने टीवीके सरकार के आंकड़ों का गणित भी समझाया। क्या बोले स्टालिन? बता दें कि तमिलनाडु की 234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए कम से कम 118 सीटें चाहिए। हालिया विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री विजय की पार्टी टीवीके सबसे पार्टी बन कर उभरी थी। लेकिन TVK केवल 108 सीटें ही जीत सकी थी। इसके बाद विजय ने कांग्रेस, IUML और VCK जैसे दलों के समर्थन से सरकार बनाई। स्टालिन ने इन दलों का हवाला देते हुए आगे कहा कि टीवीके सरकार अपने दम पर नहीं, बल्कि द्रमुक गठबंधन के पूर्व सहयोगियों के समर्थन के भरोसे ही चल रही है। उन्होंने कहा, “चुनाव कभी भी आ सकते हैं। यह जल्द ही हो सकते हैं, तीन महीने बाद या छह महीने बाद आ सकते हैं, क्योंकि मौजूदा सरकार अपने दम पर बहुमत से नहीं जीती है। बहुमत का मतलब 234 सदस्यों वाले सदन में 118 सीटें हासिल करना है, लेकिन उन्होंने हालिया विधानसभा चुनावों में केवल 108 सीटें ही जीतीं।" कार्यकर्ताओं को तैयार रहने का आदेश स्टालिन ने कहा कि आगामी चुनावों को देखते हुए द्रमुक कैडरों को चुनावी मोड में रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “टीएमसी सरकार का इंजन कहां जाकर रुकेगा, कोई नहीं जानता। चुनाव किसी भी क्षण, किसी भी स्थिति में आ सकते हैं। हमें इसके लिए 100 फीसदी तैयार रहना होगा। आप सभी आज और इसी वक्त से चुनावी तैयारियों में जुट जाएं।” कानून व्यवस्था को लेकर घेरा इस दौरान स्टालिन ने कानून-व्यवस्था से लेकर आर्थिक मोर्चे पर सरकार को बुरी तरह घेरा। स्टालिन ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। महिला और बच्चों के खिलाफ अपराध बढ़ गए हैं। वहीं राज्य में अघोषित बिजली कटौती शुरू हो गई है और सरकार की खराब नीतियों के कारण बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज तमिलनाडु छोड़कर दूसरे राज्यों में जा रही हैं। MDMK ने भी छोड़ा साथ स्टालिन का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब द्रमुक के एक और पुराने सहयोगी MDMK ने DMK गठबंधन छोड़ने का ऐलान कर दिया है। 2 महीने में यह स्टालिन के लिए दूसरा बड़ा झटका है। इससे पहले कांग्रेस ने भी DMK लेड अलायंस का साथ छोड़ दिया और विजय की सरकार को समर्थन दे दिया। DMK ने तब इसे विश्वासघात कहा था।

विंबलडन 2026 में सेरेना विलियम्स की एंट्री, वाइल्ड कार्ड मिला; युवा प्रतिद्वंद्वी से होगी पहली टक्कर

लंदन  सात बार की विंबलडन चैंपियन अमेरिका की सेरेना विलियम्स चार साल बाद ग्रैंड स्लैम में वापसी करेंगी। टूर्नामेंट के पहले दौर में उनका मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की 20 वर्षीय माया जाइंट से होगा। 44 वर्षीय सेरेना को आयोजकों ने वाइल्ड कार्ड दिया है और वह 2022 के बाद पहली बार विंबलडन में सिंगल्स मुकाबला खेलेंगी। सेरेना ने 2022 के अमेरिकी ओपन के बाद कहा था कि वह टेनिस से आगे बढ़ रही हैं। अब वापसी पर उनकी चुनौती आसान नहीं होगी, क्योंकि दुनिया की 53वें नंबर की खिलाड़ी माया जाइंट दो डब्ल्यूटीए खिताब जीत चुकी हैं, जिनमें पिछले साल ईस्टबार्न का ग्रास कोर्ट खिताब भी शामिल है। सबालेंका के सामने कोस्तोविच महिला वर्ग में शीर्ष वरीयता प्राप्त एरिना सबालेंका अपने अभियान की शुरुआत सर्बिया की क्वालीफायर तेओदोरा कोस्तोविच के विरुद्ध करेंगी। मौजूदा चैंपियन इगा स्वियातेक का सामना अमेरिका की टेलर टाउनसेंड से होगा। तीसरी वरीय स्वियातेक और दूसरी वरीय एलेना रिबाकिना एक ही हिस्से में हैं। रिबाकिना पहले दौर में फ्रांस की लोइस बोइसों से भिड़ेंगी। वहीं, पुरुष वर्ग में मौजूदा चैंपियन और शीर्ष वरीय इटली के यानिक सिनर सोमवार को सेंटर कोर्ट पर अपने अभियान की शुरुआत सर्बिया के मियोमिर केचमानोविच के विरुद्ध करेंगे। दूसरी वरीयता प्राप्त और हाल में फ्रेंच ओपन चैंपियन बने अलेक्जेंडर ज्वेरेव का मुकाबला बेल्जियम के अलेक्जेंडर ब्लाक्स से होगा। निकला दिलचस्प ड्रॉ ड्रॉ में कई दिलचस्प मुकाबले भी सामने आए हैं। ब्रिटेन के जैक ड्रेपर का सामना छठी वरीयता प्राप्त अमेरिका के टेलर फ्रिट्ज से होगा, जबकि 41 वर्षीय स्विट्जरलैंड के दिग्गज स्टान वावरिंका अपने आखिरी विंबलडन में पूर्व उपविजेता माटेओ बेरेटिनी से भिड़ेंगे। 39 वर्षीय नोवाक जोकोविक रिकॉर्ड 25वें ग्रैंड स्लैम सिंगल्स खिताब की तलाश में पहले दौर में चीन के वू यीबिंग से खेलेंगे। यदि वह आगे बढ़ते हैं तो सेमीफाइनल में उनकी भिड़ंत सिनर से हो सकती है। सिनर के लिए पहले दौर में केचमानोविच आसान प्रतिद्वंद्वी नहीं होंगे। सिनर बिना किसी ग्रास कोर्ट अभ्यास टूर्नामेंट के विंबलडन पहुंचे हैं और उनकी फिटनेस को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। फ्रेंच ओपन में वह दो सेट की बढ़त गंवाकर अर्जेंटीना के जुआन मैनुअल सेरुंडोलो से हार गए थे। हालांकि, कार्लोस अलकराज के चोट के कारण बाहर होने से सिनर को लगातार दूसरा विंबलडन खिताब जीतने का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। क्वार्टर फाइनल में उनका संभावित मुकाबला आठवीं वरीयता प्राप्त दानिल मेदवेदेव से हो सकता है। हालांकि मेदवेदेव को पहले ही दौर में पूर्व उपविजेता मारिन चिलिच से कड़ी चुनौती मिलेगी।

Scholarship 2026: बीड़ी एवं खदान श्रमिकों के बच्चों को मिलेगा छात्रवृत्ति का लाभ, जानें आवेदन की अंतिम तारीख

बीड़ी एवं खदान श्रमिकों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति आवेदन 31 अक्टूबर तक भोपाल श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा संचालित छात्रवृत्ति योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। योजना के अंतर्गत बीड़ी एवं खदान श्रमिकों के अध्ययनरत संतानों को स्‍कूली शिक्षा से लेकर उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को पात्र विद्यार्थियों तक योजना की जानकारी पहुंचाने तथा समय-सीमा में आवेदन एवं सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं। उच्च शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए छात्रवृत्ति आवेदन राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) पर एक जून से प्रारंभ हो चुके हैं। पात्र विद्यार्थी 31 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। विभाग ने महाविद्यालयों से अधिकाधिक पात्र विद्यार्थियों को योजना से जोड़ने और उनके आवेदनों का समयबद्ध सत्यापन सुनिश्चित करने को कहा है। योजना के अंतर्गत कक्षा एक से लेकर व्यावसायिक पाठ्यक्रमों तक अध्ययनरत विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 1,000 रुपये से 25,000 रुपये तक की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। कक्षा एक से चौथी तक के विद्यार्थियों को 1,000 रुपये, कक्षा 5 से 8 तक 1,500 रुपये, कक्षा 9 एवं 10 के विद्यार्थियों को 2,000 रुपये, कक्षा 11 एवं 12 के विद्यार्थियों को 3,000 रुपये तथा आईटीआई, पॉलिटेक्निक एवं डिग्री पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को 6,000 रुपये की सहायता दी जाती है। वहीं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को 25,000 रुपये प्रतिवर्ष तक की छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जाती है। यह सहायता राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से हस्तांतरित की जाती है। योजना का लाभ बीड़ी श्रमिकों, लौह अयस्क, मैंगनीज एवं क्रोम अयस्क खदान श्रमिकों, चूना पत्थर एवं डोलोमाइट खदान श्रमिकों के पात्र बच्चों को दिया जाता है। यह योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है।  

भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन से आसान होंगे भूमि रिकॉर्ड, राजस्व सेवाओं में आएगी पारदर्शिता

भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन से राजस्व सेवाएँ होंगी अधिक प्रभावी, भूमि रिकॉर्ड प्राप्त करना होगा आसान डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम का जबलपुर एवं नर्मदापुरम संभाग में प्रथम चरण पूर्ण भोपाल एवं सागर संभाग के 11 जिलों में जुलाई से शुरू होगा अगला चरण भोपाल प्रदेश के नागरिकों को भूमि संबंधी सरकारी अभिलेखों की सहज, त्वरित और पारदर्शी उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ पुराने भू-अभिलेखों के सुरक्षित संरक्षण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत प्रदेश में चरणबद्ध रूप से डिजिटाइजेशन का कार्य किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से राज्य के लगभग 15 करोड़ पुराने भू-अभिलेख रिकॉर्ड का आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिसके लिए दस्तावेज प्रबंधन प्रणाली और डीबीईएस सॉफ्टवेयर विकसित किए जा रहे हैं। वर्ष 2008 में शुरू हुए राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम को 1 अप्रैल 2016 से डीआईएलआरएमपी के रूप में पुनर्गठित किया गया था। इसके तहत मॉडर्न रिकॉर्ड रूम (एमआरआर) के अंतर्गत पुराने अभिलेखों के डिजिटाइजेशन की रूपरेखा तैयार की गई। योजना के फेज-1 (2013-2020) में लगभग 3,18,82,222 दस्तावेजों और फेज-2 (2021-22) में लगभग 2,39,24,462 दस्तावेजों की स्कैनिंग का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। अब फेज-3 के तहत 15 करोड़ रिकॉर्ड्स के डिजिटाइजेशन का कार्य किया जा रहा है। परियोजना में जिला स्तर पर अत्याधुनिक स्कैनिंग केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। दस्तावेजों की सुरक्षित स्कैनिंग, मेटा-डाटा एंट्री और भोपाल में डीबीईएस आधारित डबल-बाइंड डेटा एंट्री की व्यवस्था की गई है। आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित क्षेत्र के पटवारी द्वारा ऑनलाइन गुणवत्ता परीक्षण किया जाएगा। अंतिम रूप से सत्यापित रिकॉर्ड ‘भूलेख पोर्टल’ पर ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना के प्रथम चरण में जबलपुर एवं नर्मदापुरम संभाग के 12 जिलों में लगभग 2.70 करोड़ दस्तावेजों की शत-प्रतिशत स्कैनिंग पूरी कर ली गई है। इन जिलों में डेटा एंट्री का कार्य निरंतर जारी है। दूसरे चरण में भोपाल एवं सागर संभाग के 11 जिलों में जुलाई 2026 से कार्य प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए संबंधित जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन से राजस्व व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। साथ ही नागरिकों को अपने भूमि रिकॉर्ड ऑनलाइन देखने और प्राप्त करने में आसानी होगी। इससे भूमि अभिलेखों का सुरक्षित संरक्षण सुनिश्चित होने के साथ राजस्व सेवाओं की गुणवत्ता और दक्षता में भी वृद्धि होगी।  

मिड-डे मील में गड़बड़ी पर सख्ती, खाली बोरों की राशि जमा नहीं करने पर महालेखाकार की आपत्ति

रांची  पीएम पोषण योजना (मध्याह्न भोजना योजना) के तहत चावल के खाली बोरे की राशि सरस्वती वाहिनी के बैंक खाते में जमा करना अनिवार्य है। इसे प्रधानाध्यापक या कोई शिक्षक अपने पास नहीं रख सकता। साथ ही स्कूलों को इसका पूरा हिसाब-किताब सरकार को देना है। महालेखाकार द्वारा कई जिलों में बोरे की राशि सरस्वती वाहिनी के बैंक खाते में जमा नहीं होने पर आपत्ति व्यक्त करते हुए हर हाल में राशि जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसे लेकर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने भी सभी जिलों के जिला शिक्षा अधीक्षकों को यह राशि हर हाल में जमा करने को कहा है। महालेखाकार ने वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर 2025-26 तक मध्याह्न भोजन में चावल के उपयोग के बाद खाली बोरे के हिसाब-किताब दुरुस्त नहीं होने तथा राशि जमा नहीं होने की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है। इस अवधि में चावल के उपयोग के बाद खाली बोरे के लिए प्रति बोरा 14.40 रुपये जमा किया जाना है। इस राशि का सही तरह से आकलन कर पूरी राशि को सरस्वती वाहिनी की बैंक खाते में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जिलों को इसकी रिपोर्ट देने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस आशय के निर्देश मिलने के बाद कुछ जिलों में इसके पूर्व के वर्षों की राशि का भी हिसाब-किताब लिया जा रहा है। बताते चलें कि स्कूलों को कुकिंग कास्ट के रूप में निर्धारित राशि दी जाती है, जबकि चावल एफसीआई के माध्यम से उपलब्ध कराए जाते हैं। चावल की राशि एफसीआई को झारखंड मध्याह्न भोजन प्राधिकरण द्वारा दी जाती है, जिसमें केंद्रांश की 60 प्रतिशत तथा राज्यांश की 60 प्रतिशत राशि होती है।

IMD Weather Update: मानसून की धमाकेदार एंट्री, 48 घंटे तक भारी बारिश और तेज तूफान की चेतावनी

लखनऊ  भीषण गर्मी, चिलचिलाती धूप और उमस से उत्तर प्रदेश के लोगों को राहत मिलने की बारी आ गई है. मौसम का मिजाज करवट बदलने जा रहा है. मौसम विभाग की ताजा बुलेटिन के अनुसार, मानसूनी हवाओं ने उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर दस्तक दे दी हैं, जिससे अगले दो दिनों के भीतर प्रदेश का मौसम पूरी तरह सुहावना हो जाएगा।  आधिकारिक मौसम विभाग की बुलेटिन के अनुसार, अगले 24 से 48 घंटों के भीतर मानसून उत्तर प्रदेश में पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा. 30 जून से ही राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मानसूनी बारिश शुरू हो जाएगा. जुलाई के पहले सप्ताह तक मानसून की रफ्तार इतनी तेज होगी कि यह पूरे उत्तर प्रदेश को अपनी आगोश में ले लेगा और झमाझम बारिश से सूबे को सराबोर कर देगा।  तापमान 10 डिग्री तक की भारी गिरावट मौसम विभाग का कहना है कि मानसून के सक्रिय होते ही उमस भरी गर्मी से राहत मिली. अधिकतम तापमान में भी 7 से 10 डिग्री सेल्सियस तक की बड़ी गिरावट दर्ज होने की संभावना है. हालांकि, सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली जैसे सुदूर दक्षिणी जिलों के निवासियों को अभी अगले दो दिनों तक थोड़ी तपिश और गर्मी का सामना करना पड़ सकता है, जिसके बाद वहां भी मौसम साफ और ठंडा हो जाएगा।  66 जिलों में गरज-चमक और बिजली गिरने का अलर्ट मौसम के बदलते रुख को देखते हुए विभाग ने उत्तर प्रदेश के 66 जिलों में विशेष चेतावनी जारी की है. इन जिलों में तेज हवाएं चलने, गरज-चमक होने और अचानक वज्रपात (आकाशीय बिजली गिरने) की आशंका जताई गई है. खासकर तराई के इलाकों (नेपाल सीमा से सटे जिलों) में भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है, जिसके लिए स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने को कहा गया है।  पश्चिमी विक्षोभ भी बढ़ाएगा बारिश की रफ्तार मौसम वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश ने विशेष जानकारी देते हुए बताया कि पिछले कई दिनों से शुष्क और भीषण गर्मी का जो दौर चल रहा था, वह अब खत्म होने की कगार पर है क्योंकि ‘मॉनसूनल फ्लो’ (मानसूनी हवाओं का प्रवाह) काफी मजबूत हो चुका है. इसके साथ ही, आगामी 2 जुलाई को एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय होने जा रहा है. इन दोनों मौसमी प्रणालियों के एक साथ मिलने के कारण उत्तर प्रदेश में मानसून के आगमन के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हो चुकी हैं और बारिश का यह दौर लंबा खिंचेगा।