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ग्रामीणों को बड़ी राहत! मकान पर संपत्ति कर से छूट, ईंट भट्ठे से मोबाइल टावर तक आएंगे टैक्स के दायरे में

पटना सरकार गांव वालों को बड़ी राहत देने जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में घर अथवा व्यावसायिक संपत्ति पर लगने वाले कर को लेकर पंचायती राज विभाग ने नियमावली में सुधार की औपचारिकता पूर्ण कर ली है। नई नियमावली में ऐसी कर व्यवस्था तैयार की गई जिससे ग्रामीणों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े और पंचायतों की स्थानीय आय के स्रोत भी स्पष्ट हो सकें। इसके लिए विधान मंडल से पारित कानून एवं नियमावली संशोधन किया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर गत दिनों पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की अध्यक्षता में विभागीय अधिकारियों के साथ हुई बैठक में इस पर सहमति बनी। प्रस्तावित सुधार के तहत गांवों में सामान्य आवासीय मकान या निजी व्यावसायिक संपत्ति पर सीधे संपत्ति कर लगाने की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। विभाग का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां शहरी क्षेत्रों से अलग हैं, इसलिए नगर निकायों की तर्ज पर ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति आधारित कर व्यवस्था लागू करना व्यावहारिक नहीं होगा। पंचायती राज विभाग पंचायतों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए कर एवं शुल्क से जुड़े दूसरे विकल्पों पर काम पूरा कर लिया है। नियमावली में यह स्पष्ट किया जाएगा कि पंचायतें किन सेवाओं अथवा स्थानीय सुविधाओं के एवज में शुल्क ले सकती हैं। इससे पंचायतों को आय का स्रोत मिलेगा और ग्रामीणों पर सीधे संपत्ति कर का भार भी नहीं पड़ेगा। विभाग स्तर पर पूर्व नियमावली को शिथिल कर नए प्रविधानों की समीक्षा के उपरांत संशोधन का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। इसमें कर निर्धारण, वसूली और पंचायतों की आय से जुड़े प्रविधानों को सरल और स्पष्ट करने पर बल रहेगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य पंचायतों की वित्तीय क्षमता बढ़ाने के साथ ग्रामीणों के हितों का संरक्षण करना है। नियमावली में संशोधन के बाद पंचायतों को स्थानीय स्तर पर संसाधन जुटाने के लिए अधिक स्पष्ट अधिकार मिल सकेंगे। निजी स्कूल, मोबाइल टावर, रेस्टोरेंट पर टैक्स नए प्रविधान के तहत ईंट भट्ठे, निजी स्कूल, मोबाइल टावर, रेस्टोरेंट, चावल मिल, निजी अस्पताल आदि को कर के दायरे में लाने की तैयारी है। इसी तरह बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान से कर वसूली की तैयारी है। होर्डिंग, बैनर आदि व्यावसायिक गतिविधियों पर कर देना होगा। मकान मालिक को व्यावसायिक संपत्ति पर कर नहीं देना होगा। पंचायती राज विभाग कैबिनेट से शीघ्र प्रस्ताव स्वीकृत कराएगा। गांवों का नेटवर्क     गांवों की संख्या: 45,103     पंचायतों की संख्या: 8041  

‘मछली’ की कहानी के बाद यूपी के जंगलों की बारी, नल्ला मुथु बनाएंगे वन्यजीवन पर खास डॉक्यूमेंट्री

लखनऊ  रणथंभौर की बाघिन ‘मछली’ की जिंदगी को नौ साल कैमरे में कैद कर दुनिया को उसकी कहानी दिखाने वाले मशहूर वन्यजीव फिल्मकार सुब्बैया नल्ला मुथु अब प्रदेश के जंगलों की अनकही कहानियां दुनिया तक पहुंचाएंगे। बाघों की जिंदगी और जंगल की धड़कन को कैमरे के जरिये कहानी में बदलने वाले नल्ला के अनुभव का लाभ अब प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने में लिया जाएगा। इसके लिए आठ अक्टूबर को वन विभाग उनके साथ एमओयू करेगा। एमओयू के तहत दुधवा टाइगर रिजर्व, पीलीभीत, रानीपुर व अमानगढ़ टाइगर रिजर्व आदि में डाक्यूमेंट्री और अन्य फिल्मांकन की दिशा में काम होगा। मुथु को तराई के जंगलों में शूटिंग के लिए तीन वर्ष का समय मिलेगा। बाघों के साथ ही यहां की जैव विविधता, प्राकृतिक आवास, वन्यजीवों के व्यवहार और संरक्षण की चुनौतियों को कहानी का हिस्सा बनाया जा सकता है। दुर्लभ वन्यजीव और समृद्ध जैव विविधता मौजूद यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि तराई के जंगलों में बाघों के साथ हाथी, गैंडा, बारहसिंघा समेत कई दुर्लभ वन्यजीव और समृद्ध जैव विविधता मौजूद है। गौरतलब है कि मुथु के लिए वन्यजीव फिल्मांकन महज कैमरे से वीडियो बनाना नहीं, बल्कि जंगल में लंबे समय तक रहकर उसके किरदारों को समझना रहा है। रणथंभौर की ‘मछली’ पर बनाई गई उनकी फिल्म ‘द वर्ल्ड्स मोस्ट फेमस टाइगर’ को 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण फिल्म का पुरस्कार मिला। उन्होंने करीब नौ वर्ष तक मछली और उसके वंश की कहानी को कैमरे में दर्ज किया था। वर्ष 2024 में मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में उन्हें वी. शांताराम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड भी मिला था। पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल कर चुके नल्ला के चर्चित काम में ‘टाइगर डायनेस्टी’, ‘टाइगर क्वीन’ और ‘लाइफ फोर्स’ जैसी वन्यजीव फिल्में शामिल हैं। 1987 से फिल्म निर्माण से जुड़े नल्ला ने 11 सीरीज और 55 डाक्यूमेंट्री बनाने के साथ भारतीय वन्यजीवों पर व्यापक काम किया है। इससे पहले वह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में हाई-स्पीड कैमरा विशेषज्ञ के रूप में भी काम कर चुके हैं।  

कैसा होगा कलयुग का अंत? धर्मग्रंथों में बताए गए हैं ये संकेत और भविष्यवाणियां

 कल्पना कीजिए उस समय की, जब दुनिया में धर्म का नाम लेने वाला कोई नहीं होगा. जब इंसानों की उम्र लगातार घटती जाएगी और आखिर में मनुष्य की औसत आयु महज 20 साल रह जाएगी. जब छोटी उम्र में ही बाल सफेद होने लगेंगे और इंसान का जीवन पाप, लालच और अधर्म से घिर जाएगा. धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में कलयुग के अंतिम चरण को लेकर कई तरह के वर्णन मिलते हैं. इन वर्णनों के अनुसार, जैसे-जैसे कलयुग अपने चरम पर पहुंचेगा, वैसे-वैसे धर्म, सत्य, दया, पवित्रता, क्षमा और मनुष्य की आयु में कमी आती जाएगी. लेकिन सवाल है कि आखिर कलयुग का अंत कैसा होगा? क्या समुद्र और नदियां सूख जाएंगी? और सबसे बड़ा सवाल, इस घोर अधर्म के बीच भगवान विष्णु का कल्कि अवतार कैसे होगा? आइए जानते हैं पुराणों में बताए गए कलयुग के अंतिम समय की उस कथा के बारे में. जब 20 साल की उम्र ही बन जाएगी बुढ़ापे की निशानी धार्मिक ग्रंथों में कलयुग के अंतिम चरण को बेहद भयावह बताया गया है. मान्यता है कि इस दौर में मनुष्य की आयु लगातार कम होती जाएगी. आज जहां 20 साल की उम्र को युवावस्था की शुरुआत माना जाता है, वहीं कलयुग के अंतिम चरण में यही उम्र जीवन के अंतिम पड़ाव के करीब मानी जाएगी. कहा गया है कि इंसानों के शरीर में भी समय से पहले बुढ़ापे के लक्षण दिखाई देने लगेंगे. कम उम्र में ही बाल सफेद होने लगेंगे और शारीरिक शक्ति तेजी से घटने लगेगी. यानी जिस उम्र में आज के युवा अपना करियर और भविष्य बनाने के बारे में सोचते हैं, उस समय इंसान अपने जीवन के अंत के करीब पहुंच चुका होगा. रिश्ते और परिवार भी कमजोर पड़ जाएंगे कलयुग के अंतिम समय को लेकर शास्त्रों में सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों के पतन का भी वर्णन मिलता है. धर्म, सत्य, पवित्रता, दया, क्षमा और संयम जैसी चीजें धीरे-धीरे समाप्त होती जाएंगी. पति-पत्नी के रिश्तों में भी विश्वास और सम्मान कम होता जाएगा. लोग स्वार्थ और अपनी इच्छाओं को रिश्तों से ऊपर रखने लगेंगे. परिवार की जगह धन और व्यक्तिगत लाभ को ज्यादा महत्व दिया जाएगा. धार्मिक वर्णनों में तो यहां तक कहा गया है कि उस समय अच्छे चरित्र की पहचान भी व्यक्ति के आचरण से नहीं, बल्कि उसके पास मौजूद धन से की जाएगी. जिसके पास धन होगा, वही सम्मानित माना जाएगा कलयुग के अंतिम चरण में धन ही प्रतिष्ठा का सबसे बड़ा आधार बन जाएगा. जिस व्यक्ति के पास जितना ज्यादा धन होगा, समाज उसे उतना ही प्रभावशाली और गुणवान समझेगा. उसके परिवार और कुल की प्रतिष्ठा भी धन के आधार पर तय की जाएगी.  वहीं गरीब व्यक्ति को अपमानित और अयोग्य समझा जाएगा. धन के लिए लोग अपने ही रिश्तेदारों और मित्रों के खिलाफ खड़े हो जाएंगे. लालच इतना बढ़ जाएगा कि इंसान अपने स्वार्थ के लिए किसी भी हद तक जाने से पीछे नहीं हटेगा. धर्म की जगह अधर्म का बोलबाला होगा कलयुग के अंतिम समय में धर्म का पालन करने वाले लोगों की संख्या बेहद कम रह जाने की बात कही गई है. लोग धार्मिक ग्रंथों और वेदों की बातें तो करेंगे, लेकिन उनके जीवन में उनका पालन दिखाई नहीं देगा. कुछ धार्मिक गुरु भी अपने स्वार्थ के लिए लोगों का इस्तेमाल करेंगे. वे ज्ञान की बातें करेंगे, लेकिन उनके आचरण में धर्म और सदाचार की कमी होगी. वहीं चालाक, लोभी और स्वार्थी व्यक्ति को ही बुद्धिमान और सफल माना जाएगा. धरती पर अन्न उगना भी मुश्किल हो जाएगा. पुराणों में कलयुग के अंतिम चरण में प्राकृतिक असंतुलन का भी वर्णन मिलता है. मान्यता है कि धरती की उर्वरता कम होती जाएगी और अन्न का उत्पादन प्रभावित होगा. बारिश अनियमित हो जाएगी और मौसम का संतुलन बिगड़ जाएगा. कहीं भयंकर गर्मी होगी तो कहीं कड़ाके की ठंड. आंधी, बाढ़ और दूसरे प्राकृतिक संकट बढ़ सकते हैं. कुछ धार्मिक वर्णनों में तो यह भी कहा गया है कि सूर्य का तेज इतना बढ़ जाएगा कि नदियां और समुद्र तक सूखने लगेंगे. जब तीर्थों की जगह छोटे तालाबों को महत्व मिलेगा कलयुग के अंत से जुड़े धार्मिक वर्णनों में यह भी कहा गया है कि लोगों की धार्मिक आस्था और परंपराओं में इतना बदलाव आ जाएगा कि पवित्र तीर्थों के महत्व को भी लोग भूलने लगेंगे. लोग दूर स्थित पवित्र नदियों और तीर्थस्थलों की जगह अपने आसपास मौजूद छोटे जलस्रोतों को ही तीर्थ मानने लगेंगे. यह वर्णन सिर्फ भौगोलिक बदलाव की बात नहीं करता, बल्कि उस समय मनुष्य की सोच और धार्मिक मूल्यों में आने वाले बदलाव की ओर भी संकेत करता है. कलयुग का सबसे बड़ा प्रतीक होगा कली पुरुष धार्मिक मान्यताओं में कली पुरुष को कलयुग के अधर्म और बुराइयों का प्रतीक माना गया है. जैसे-जैसे अधर्म बढ़ेगा, कली की शक्ति भी बढ़ती जाएगी. उसका प्रभाव मनुष्यों की सोच और व्यवहार पर पड़ने लगेगा. लोग धीरे-धीरे लोभ, क्रोध, हिंसा, छल और स्वार्थ के रास्ते पर जाने लगेंगे. कहा जाता है कि कली पुरुष को सबसे ज्यादा शक्ति अधर्म से ही मिलेगी. जितना अधर्म बढ़ेगा, उतना ही उसका प्रभाव भी बढ़ता जाएगा. फिर होगा भगवान कल्कि का अवतार लेकिन सनातन परंपरा में एक बात हमेशा कही गई है कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब धर्म की पुनर्स्थापना के लिए ईश्वर अवतार लेते हैं. कलयुग के अंत में भगवान विष्णु के दसवें अवतार भगवान कल्कि के अवतार की मान्यता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब अधर्म अपने चरम पर पहुंच जाएगा और धर्म लगभग समाप्त हो जाएगा, तब भगवान कल्कि अवतार लेकर अधर्म का नाश करेंगे और धर्म की दोबारा स्थापना करेंगे. मान्यता है कि भगवान कल्कि सफेद घोड़े पर सवार होकर प्रकट होंगे. उनके घोड़े का नाम देवदत्त बताया जाता है. वे हाथ में तलवार धारण करके अधर्म और अत्याचार का अंत करेंगे. भगवान कल्कि के गुरु होंगे परशुराम भगवान कल्कि से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में भगवान परशुराम का भी विशेष स्थान बताया गया है. परशुराम को विष्णु का छठा अवतार माना जाता है और वे चिरंजीवी माने गए हैं. मान्यता है कि भगवान परशुराम ही भगवान कल्कि को युद्ध और धर्म का ज्ञान देंगे. धार्मिक प रंपराओं में यह भी कहा जाता है कि परशुराम आज भी महेंद्र पर्वत पर तपस्या कर रहे … Read more

पंजाब में किसानों का बड़ा प्रदर्शन, बठिंडा-मानसा में प्रशासनिक दफ्तरों पर लगाया ताला

 बठिंडा  पंजाब के विभिन्न जिलों में मांगों को लेकर किसानों की ओर से जिला प्रबंधकीय परिसर के सभी गेटों का बंद कर धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है।किसान सोमवार से यहां धरना-प्रदर्शन करने में जुटे हैं। इस दौरान किसी भी कर्मचारी को अंदर जाने नहीं दिया गया। इस कारण जिला प्रबंधकिय परिसर में बने सभी सरकारी दफ्तरों में काम बंद पड़ा है। मानसा में भी दिखा असर वहीं, मानसा में भी किसान जिला प्रबंधकीय परिसर के गेट पर लगा रहे हैं। इस बीच किसान संगठन उगराहा की ओर से मंगलवार सुबह प्रबंधन के परिसर को जाने वाले दोनों गेट को बंद करते धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया गया। प्रशासन की ओर से किसानों के प्रदर्शन को देखते धरना स्थल के आसपास पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। इस दौरान किसी भी अधिकारी और कर्मचारियों को प्रबंधन के परिसर के अंदर और बाहर जाने की अनुमति नहीं है। नतीजन डीसी, एसएसपी समेत अन्य विभागों के अधिकारी अपने दफ्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं। बेशक सोमवार को जिले में मुख्यमंत्री की लोक मिलनी को लेकर पूरा प्रशासन गांव फत्ता मालोका में व्यस्त होने के कारण बड़े अधिकारी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाए, लेकिन किसानों ने मंगलवार सुबह ही प्रबंधकीय कॉम्प्लेक्स के बाहरी गेट से आगे बढ़ते परिसर के अंदर जाने वाले दोनों दरवाजों को बंद करते सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई। किसान नेता राम सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री गांव की चौपाल में लोगों की समस्या हल करने के दावे कर रहे हैं, लेकिन किसानी मांगों को लेकर पिछले महीने डीसी दफ्तरों के आगे दिन रात का धरना देने के बाद भी सरकार उनकी मांगे मानने को मंजूर नहीं है। किसान नेता ने कहा कि संगठन की प्रदेश कमेटी नेताओं कि फैसले अनुसार प्रबंधकीय कांप्लेक्स का। घेराव जारी रहेगा। प्रदर्शन में ही लंगर का प्रबंध प्रबंधकीय कांप्लेक्स में धरने पर बैठे किसानों के लिए लंगर की व्यवस्था भी की गई है ताकि किसान लंगर खाने के लिए इधर-उधर में जा सके।  

Aadhaar Name Update: नाम में बदलाव के लिए जरूरी होंगे ये डॉक्यूमेंट, जानें नया नियम

आधार कार्ड के नए नियमों ने पुराने नियमों की जगह ले ली है. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार कार्ड पर नाम बदलवाने, अपडेट कराने के नियमों में बदलाव कर दिया है. 18 सितंबर 2026 को जारी किए नए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) ने पुराने नियमों की जगह ले ली है. नए नियमों के तहत नाम में किए जाने वाले बदलावों को अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है. इंडियाटुडे ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि मामूली सुधार, डेटा एंट्री ऑपरेटर की गलती, शादी या तलाक के बाद सरनेम में बदलाव और पुराना नाम बदलाने के लिए अलग-अलग दस्तावेजों की जरूरत होगी. UIDAI की तरफ से क्लियर किया जा चुका है कि नाम अपडेट कराने के लिए दिए जाने वाले डॉक्यूमेंट, एफिडेविट और गजट नोटिफिकेशन्स की जांच के बाद ही आवेदन पर आगे काम किया जाएगा. आधार कार्ड होल्डर्स को नए नियमों की 5 अहम बातों को जानना जरूरी है. आइए इसके बारे में एक-एक करके जानते हैं. मामूली सुधार शख्स की पहचान में अगर कोई बदलाव नहीं हो रहा है और केवल नाम में छोटा सुधार करना है. ऐसे में इसको Minor Name Change माना गया है, जिसके तहत इन कामों को रखा गया है.     नाम के शुरुआती अक्षरों को पूरा करना     मिडिल नेम या सरनेम जोड़ना या हटाना     नाम के क्रम में बदलाव करना     स्पेलिंग सुधार, जिसमें उच्चारण लगभग समान है इस तरह के मामलों में आधार कार्ड होल्डर्स को प्रूफ ऑफ आइडेंटी (PoI) जमा करना जरूरी होगा. साथ ही 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Head of Family (HoF) बेस्ड नाम अपडेट के मामलों में Proof of Relationship (PoR) का भी इस्तेमाल किया जाएगा. UIDAI ने इस स्थिति को साफ करते हुए बताया है कि Ram को Rama, Somya को Saumya करने या फिर मिडिल नाम को शामिल करने जैसे कामों को मामूली सुधार में शामिल किया गया है. डेटा एंट्री की एक गलती के लिए लगेगा एफिडेविट अगर आधार कार्ड बनवाते समय डेटा एंट्री ऑपरेटर की गलती के कारण नाम गलत एंटर हो चुका है तो उसका प्रोसेस थोड़ा सा अलग है. 18 साल से अधिक आयु वाले लोगों को Annexure B एफिडेविट के साथ साथ PoI या फिर PoR सब्मिट करना होगा. वहीं अगर आवेदक नाबालिक है तो माता-पिता या अभिभावक को Annexure C एफिडेविट के साथ PoI या PoR को सब्मिट करना होगा. शादी और तलाक के बाद सरनेम बदलने के नियम शादी या तलाक के बाद अगर सरनेम बदलने वाली महिलाओं को Annexure D एफिडेविट और प्रूफ ऑफ आइडेंटी (POI) जमा करना होगा. एफिडेविट में यह कंफर्म किया जाएगा कि सरनेम में बदलाव शादी या तलाब के कारण किया जा रहा है. इससे शख्स की पहचान में कोई बदलाव नहीं हो रहा है. वहीं, जेंडर में बदलाव के बाद नाम अपडेट करने के लिए SOP में अलग प्रावधान किए हैं. इसके लिए संबंधित PoI देना होगा. नाम में इन सुधारों के लिए नहीं लगेगा कोई डॉक्यूमेंट प्राधिकरण ने कुछ ऐसे मामलों की भी जानकार दी है, जहां पर नाम सुधार या अपडेट करने के लिए किसी डॉक्यूमेंट की जरूरत नहीं है. इसमें नाम में गलत तरीके से लगाए गए कैपिटल लेटर्स को ठीक करन शामिल है. जैसे RaMesh को Ramesh करना. नाम बदलने के लिए Gazette नोटिफिकेशन जरूर प्राधिकरण ने बताया है कि अगर कोई शख्स अपना पूरा नाम बदलना चाहता है, जिससे उसकी पहचान बदल सकती है. इसको मेजर नाम चेंज की कैटेगरी में रखा गया है. नाम में बदलाव करने के लिए Gazette नोटिफिकेशन्स जरूरी है. साथ ही संबंधित Proof of Indentity भी जमा करना होगा.

फल-सब्जियों की बर्बादी रोकने की तैयारी, भारत-ब्रिटेन मिलकर बनाएंगे ग्रीन कोल्ड चेन नेटवर्क

करनाल भारत में हर साल मेहनत से उगाई गई करोड़ों टन फल और सब्जियां बाजार तक पहुंचने से पहले ही सड़ जाती हैं। इस राष्ट्रीय नुकसान से निपटने और किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल और ब्रिटेन के ब्रुनेल विश्वविद्यालय लंदन ने हाथ मिलाया है। दोनों वैश्विक संस्थानों ने मिलकर सोल टेक नाम से एक महत्वाकांक्षी अनुसंधान परियोजना पर काम शुरू किया है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर आधारित कोल्ड स्टोरेज और एक मजबूत हार्टिकल्चर कोल्ड चेन नेटवर्क तैयार करना है, जिससे दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में भी बिना ग्रिड बिजली या महंगे डीजल के फसलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके। क्यों पड़ी इस प्रोजेक्ट की जरूरत? भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और नाबार्ड की रिपोर्ट बताती है कि भारत में उचित कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे की भारी कमी है। सालाना 4 से 5 करोड़ टन फल-सब्जियों की बर्बादी देश में हर साल कुल उत्पादन का लगभग 6 से 15 प्रतिशत यानि करीब 40 से 50 मिलियन मीट्रिक टन फल और सब्जियां खेत से बाजार तक पहुंचने के दौरान ही खराब हो जाती हैं। टमाटर और हरी सब्जियों जैसी जल्द खराब होने वाली फसलों में यह नुकसान 20 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। इस बर्बादी के कारण देश को सालाना करीब 1.53 लाख करोड़ का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कोल्ड स्टोरेज न होने के कारण किसानों को अपनी फसल तुरंत औने-पौने दामों में बेचनी पड़ती है या फिर सड़ाकर फेंकनी पड़ती है। कैसे काम करेगा सोल टेक मडल जानिये? एमएचयू और ब्रुनेल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक मिलकर दो प्रमुख मोर्चों पर काम कर रहे हैं। सौर संचालित डिसेंट्रलाइज्ड कोल्ड स्टोरेज परंपरागत कोल्ड स्टोरेज बिजली या डीजल जनरेटर पर चलते हैं, जिनकी संचालन लागत बहुत अधिक होती है। सोल टेक के तहत ऐसे सोलर-पावर्ड छोटे और मध्यम स्टोरेज बनाए जा रहे हैं जो गांवों और मंडियों के पास आसानी से स्थापित किए जा सकेंगे। वैज्ञानिक प्रोटोकाल का विकास हर फल और सब्जी की प्रकृति अलग होती है। किस फसल को किस तापमान और आर्द्रता पर कितने दिनों तक रखा जा सकता है, इसके लिए दोनों संस्थानों के वैज्ञानिक सटीक वैज्ञानिक गाइडलाइंस और डेटाबेस तैयार कर रहे हैं। उच्चस्तरीय बैठकों में तय हुई रणनीति परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए एमएचयू, करनाल और ब्रुनेल यूनिवर्सिटी के शीर्ष वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के बीच रणनीतिक बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में देश के मैदानी इलाकों की जलवायु परिस्थितियों के अनुसार तकनीकी डिजाइन और डेटा ट्रांसफर पर विस्तृत सहमति बनी है। दोनों संस्थान अब इसके प्रयोगात्मक माडल स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। किसान फसल को औने-पौने दाम पर बेचने के बजाय सौर कोल्ड स्टोरेज में रखकर बाजार में बेहतर भाव मिलने का इंतजार कर सकेंगे। सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से बिजली बिल और डीजल का खर्च खत्म हो जाएगा। डीजल का उपयोग न होने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और हरित कृषि को बढ़ावा मिलेगा। यह अंतरराष्ट्रीय साझेदारी न केवल हरियाणा के बागवानी किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी, बल्कि देश में कृषि संकट के समाधान के लिए एक वैश्विक नजीर भी पेश करेगी। -डॉ. एसके मल्हौत्रा, कुलपति महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल।  

राहु-केतु की चाल बदलेगी 6 राशियों की किस्मत! अगले 68 दिन करियर-धन और सफलता के लिहाज से खास

 ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु को अत्यंत प्रभावशाली और मायावी ग्रह माना जाता है. ये दोनों ही ग्रह हमेशा वक्री (उल्टी) चाल चलते हैं और एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करने में लगभग डेढ़ साल का लंबा समय लेते हैं. इनकी चाल में होने वाला हल्का सा बदलाव भी देश-दुनिया और सभी 12 राशियों के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है. वर्तमान में राहु शनि की राशि कुंभ और केतु सूर्य की राशि सिंह में विराजमान हैं. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, आने वाले कुछ विशेष दिनों (करीब 68 दिनों) तक राहु और केतु की स्थिति कुछ चुनिंदा राशियों के लिए बेहद मंगलकारी और लाभप्रद रहने वाली है. आइए जानते हैं कि वे भाग्यशाली राशियां कौन सी हैं, जिनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की प्रबल संभावना है. मेष राशि (Aries) मेष राशि के जातकों के लिए राहु-केतु का यह गोचर बेहद शुभ साबित होने वाला है. इस दौरान आपको अपने करियर और कार्यक्षेत्र में तरक्की के नए और बेहतरीन मार्ग मिलते नजर आएंगे. लंबे समय से रुके हुए कार्य गति पकड़ेंगे और आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा. मिथुन राशि (Gemini) मिथुन राशि के लोगों के लिए यह अवधि अत्यंत सकारात्मक परिणाम लेकर आई है. यदि आप किसी दुविधा या मुश्किल में फंसे थे, तो गुरुजनों या वरिष्ठ मार्गदर्शकों के सहयोग से आप सभी बाधाओं को आसानी से पार कर लेंगे. आत्मविश्वास में वृद्धि होगी. कन्या राशि (Virgo) कन्या राशि के जातकों का यह दौर बहुत ही शानदार रहने वाला है. कार्यक्षेत्र में अनुकूलता बनी रहेगी. इसके अलावा, जो जातक शिक्षा या करियर के सिलसिले में यात्रा की योजना बना रहे थे, वे किसी एजुकेशनल ट्रिप पर भी जा सकते हैं. तुला राशि (Libra) तुला राशि के विद्यार्थियों के लिए यह समय विशेष तौर पर फलदायी और उत्तम माना जा रहा है. पठन-पाठन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को मेहनत का पूरा फल मिलेगा. मानसिक शांति बनी रहेगी. धनु राशि (Sagittarius) धनु राशि के जातकों में इस दौरान गजब का आत्मविश्वास देखने को मिलेगा. आप अपनी कम्युनिकेशन स्किल्स और सामाजिक मेलजोल से लोगों को प्रभावित करने में पूरी तरह सक्षम रहेंगे. व्यापार और कारोबार में विस्तार के नए अवसर हाथ लग सकते हैं. मीन राशि (Pisces) मीन राशि के जातकों के लिए यह समय उत्तम फल देने वाला है. इस अवधि में आपका झुकाव धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की तरफ अधिक रहेगा. मानसिक रूप से आप काफी शांत और ऊर्जावान महसूस करेंगे, जिससे परिवार में सुख-शांति का माहौल बना रहेगा.  

गैस सिलेंडर बुकिंग पर संकट! e-KYC अधूरा होने पर सेवा बंद, एजेंसियों के बाहर लगी लंबी कतार

 रांची एलपीजी गैस का ई-केवाईसी नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है। 30 सितंबर से कई उपभोक्ताओं की गैस बुकिंग सेवा प्रभावित हो गई है। आइवीआरएस नंबर, पंजीकृत मोबाइल नंबर और संबंधित गैस कंपनियों के एप के माध्यम से भी ऐसे उपभोक्ता गैस सिलिंडर की बुकिंग नहीं करा पा रहे हैं। ई-केवाईसी पूरा कराने के बाद ही दोबारा बुकिंग सेवा शुरू हो रही है। इसके कारण इन दिनों गैस एजेंसियों के बाहर ई-केवाईसी कराने के लिए उपभोक्ताओं की लाइन लग रही है। वहीं झारखंड में इंडियन आयल के करीब 38 लाख गैस उपभोक्ता हैं। इनमें से करीब 71 प्रतिशत उपभोक्ताओं का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है। यानी अभी भी इंडियन आयल के राज्य में 11 लाख से अधिक उपभोक्ताओं का ई-केवाईसी नहीं हुआ है। रांची में 77 प्रतिशत का ई-केवाईसी पूरा रांची जिलें में तीनों प्रमुख गैस कंपनियों के करीब 7.25 लाख उपभोक्ता हैं। इनमें इंडियन आयल के करीब 4.71 लाख, भारत गैस के 1.51 लाख और एचपी गैस के करीब 1.03 लाख उपभोक्ता शामिल हैं। रांची में अब तक करीब 77 प्रतिशत उपभोक्ताओं का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है। इसके बावजूद लगभग 1.66 लाख उपभोक्ता अभी ई-केवाईसी से वंचित हैं। वहीं शहर में इंडियन आयल के 1.5 लाख उपभोक्ता मौजूद है। आम उपभोक्ताओं ने कराया, वीवीआईपी पीछे गैस एजेंसी संचालकों के अनुसार, शहर में अधिकांश सामान्य कामकाजी उपभोक्ताओं ने अपना ई-केवाईसी करा लिया है। अब बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ता सामने आ रहे हैं, जिन्होंने अभी तक प्रक्रिया पूरी नहीं की है। एजेंसी संचालकों का कहना है कि इनमें कई वीवीआईपी उपभोक्ता भी शामिल हैं, जो ई-केवाईसी कराने में पीछे रह गए हैं। सिर्फ फार्म, आधार और उपभोक्ता नंबर की जरूरत गैस एजेंसी संचालक ने बताया कि ई-केवाईसी की प्रक्रिया काफी आसान है। इसके लिए उपभोक्ता को एक फार्म भरना होता है। साथ में आधार कार्ड, एलपीजी कंज्यूमर नंबर और पंजीकृत मोबाइल नंबर की आवश्यकता होती है। पूरी प्रक्रिया सामान्य तौर पर एक दिन में आसानी से पूरी हो जाती है। ई-केवाईसी पूरा होने के बाद उपभोक्ता दोबारा सामान्य तरीके से गैस सिलिंडर की बुकिंग करा सकते हैं। एजेंसियों पर बढ़ी भीड़ बुकिंग सेवा प्रभावित होने के बाद अब बड़ी संख्या में उपभोक्ता ई-केवाईसी कराने के लिए गैस एजेंसियों का रुख कर रहे हैं। एजेंसियों के बाहर कतार लगने से भीड़ बढ़ गई है। एजेंसी संचालकों का कहना है कि उपभोक्ताओं को अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए, ताकि गैस सिलिंडर की बुकिंग में किसी तरह की परेशानी न हो।  

बिहार में वर्षों से अटकी विकास योजनाओं पर सरकार नाराज, अब होगी गहन समीक्षा

पटना सम्राट चौधऱी सरकार मुख्यमंत्री क्षेत्र योजना को ठीक से लागू नहीं करने पर नाराज हो गई है। अब राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत पूरे राज्य से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। कई योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही सुस्ती से सरकार नाराज है और अब इसकी गहन समीक्षा की जाएगी। विभागीय स्तर पर कई वर्षों से काफी योजनाओं के अधूरे रहने की खबरें सामने आई हैं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है। योजना एवं विकास विभाग के अनुसार, जनवरी 2026 में 17वीं विधानसभा (2021-22 से 2025-26) के दौरान विधायकों और विधान पार्षदों द्वारा अनुशंसित विकास कार्यों पर 71.40 फीसदी राशि खर्च हो चुकी है। लगभग 20 फीसदी स्वीकृत योजनाएं अभी भी विभिन्न चरणों में लागू की जा रही हैं। कुल उपलब्ध निधि का ठीक से उपयोग नहीं हुआ विभागीय सूत्रों के अनुसार, अभी भी कई क्षेत्रों में आठ वर्ष पहले की स्वीकृत राशि के कार्य पूरे नहीं हुए हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की मार्च 2023 की रिपोर्ट में भी मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के क्रियान्वयन में गंभीर कमियां सामने आई थीं। नमूना जांच किए गए 13 प्रमंडलों में कुल उपलब्ध निधि का 28 से 59 प्रतिशत तक उपयोग नहीं हुआ था। इससे पर्सनल लेजर अकाउंट में अव्यवहृत शेष राशि पड़ी रही। वित्तीय वर्ष 2023-24 से प्रत्येक विधायक के लिए वार्षिक आवंटन ती करोड़ रुपये से बढ़ाकर ती करोड़ रुपये कर दिया गया था, ताकि उनके क्षेत्र में विकास कार्य तेज गति से हो सकें। बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में कुल 318 सदस्य (243 विधायक और 75 विधानपार्षद) हैं, जो सालाना 1272 करोड़ रुपये की योजनाओं की अनुशंसा कर सकते हैं पटना समेत ये शहर चयनित मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत चयनित शहरों में पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर, पूर्णिया, छपरा, सीवान, सासाराम, बेतिया, सीतामढ़ी, मधुबनी, समस्तीपुर, बेगूसराय, नवादा, औरंगाबाद, बांका, सहरसा, खगड़िया, मुंगेर, जमुई, लखीसराय सहित कई प्रमुख शहरी क्षेत्र शामिल हैं।

भोपाल के 4 पुलिस थानों का कमाल, बेहतर सेवा के लिए मिला इंटरनेशनल ISO प्रमाणन

भोपाल   राजधानी भोपाल के 4 थाने और एक डीसीपी कार्यालय को बेहतर कार्य के लिए आईएसओ सर्टिफिकेट मिला है. जनता की शिकायतों का निर्धारित समय पर निराकरण करने, अपराधियों को पकड़ने, थाने के रखरखाव और रिकॉर्ड कम्प्यूटराइज्ड होने के साथ जनता के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने पर भोपाल पुलिस कमिश्नरेट के चार थानों और एक एडिशनल DCP कार्यलय जोन-3 को अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन ने सर्टिफिकेट जारी किया है. भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार, एडिशनल पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान और ISO टीम की मौजूदगी में थाना प्रभारियों और अधिकारियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।  भोपाल के इन थानों को ISO सर्टिफिकेट भोपाल पुलिस कमिश्नरेट द्वारा थानों को बेहतर, आधुनिक और जनोन्मुखी बनाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी उपलब्धि मिली है. भोपाल शहर के चार थाने कोलार, बागसेवनिया, अशोका गार्डन और खजूरी सड़क सहित एडिशनल डीसीपी कार्यालय जोन-3 को ISO-9001:2015 सर्टिफिकेट प्रदान किया गया।  जर्जर थानों का किया गया कायाकल्प भोपाल पुलिस कमिश्नरेट ने शहर के जर्जर पुलिस थानों के जीर्णोद्धार को अभियान के तौर पर शुरू किया है. इन थानों की इमारतें लंबे समय से खराब स्थिति में थीं. पुलिस स्टाफ के साथ-साथ शिकायत लेकर आने वाले आम लोगों और पीड़ितों के बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी. रिकॉर्ड के रखरखाव की स्थिति भी बेहतर नहीं थी. वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में इन थानों का कायाकल्प किया गया. पुराने रिकॉर्ड को नियमानुसार नष्ट करने के साथ आवश्यक रिकॉर्ड को व्यवस्थित और संधारित किया गया. आमजन के बैठने के लिए बेहतर व्यवस्था, थाना परिसर का सौंदर्यीकरण और जनोन्मुखी सुविधाओं को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।  ISO टीम ने गुणवत्ता और व्यवस्थाओं का किया मूल्यांकन थानों में की गई व्यवस्थाओं, साफ-सफाई, रिकॉर्ड प्रबंधन, जनसुविधाओं और निर्धारित गुणवत्ता मानकों का ISO टीम द्वारा मूल्यांकन किया गया. मूल्यांकन के बाद बागसेवनिया, अशोका गार्डन, कोलार, खजूरी सड़क थाना और एडिशनल डीसीपी जोन-3 कार्यालय को ISO-9001:2015 प्रमाणन के लिए चयनित किया गया. इससे पहले मिसरोद, रातीबड़ और महिला थाना भी ISO सर्टिफाइड हो चुके हैं।  पुलिस कमिश्नर ने स्टाफ को दी बधाई पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने ISO प्रमाण पत्र मिलने पर चारो थानों के थाना प्रभारियों सहित अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी. उन्होंने कहा, '' थानों में की गई जनोन्मुखी व्यवस्थाओं का उद्देश्य आम नागरिकों और पीड़ितों को बेहतर वातावरण और प्रभावी पुलिस सेवा उपलब्ध कराना है.'' उन्होंने अन्य थानों को भी इसी श्रेणी में लाने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रेरित किया. साथ ही उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में भोपाल कमिश्नरेट के अन्य थानों का भी इसी तरह जीर्णोद्धार कर उन्हें ISO-9001:2015 प्रमाणन दिलाने का प्रयास किया जाएगा।  कार्यक्रम में DCP विकास सहवाल, एडिशनल डीसीपी शालिनी दीक्षित, एडिशनल डीसीपी मिनी शुक्ला, ACP उमराव सिंह, ACP मनोज कुमार, ISO टीम से योगेंद्र द्विवेदी, RI जयसिंह तोमर सहित सभी थाना प्रभारी, पुलिस स्टाफ, गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।