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चित्तौड़गढ़: भक्तों की ‘पार्टनरशिप भक्ति’ से बढ़ा सांवलिया सेठ का खजाना

चित्तौड़गढ़  राजस्थान के प्रसिद्ध श्रीसांवलिया सेठ मंदिर में इस साल आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि दान के सभी पुराने रिकॉर्ड टूट गए। पिछले एक साल में मंदिर के भंडार में 337 करोड़ रुपये का चढ़ावा आया है, जो पिछले 34 वर्षों में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। लेकिन इस दान की सबसे रोचक बात यह है कि इसमें एक बड़ा हिस्सा 'भक्ति के मुनाफे' का है। दुनिया के सबसे अनोखे 'बिजनेस पार्टनर' भक्तों के बीच मान्यता है कि सांवलिया जी यहां 'सेठ' के रूप में विराजमान हैं। यही कारण है कि देशभर के बड़े कारोबारी और शेयर बाजार के खिलाड़ी भगवान को अपना बिजनेस पार्टनर मानते हैं। यहां दान केवल श्रद्धा से नहीं, बल्कि 'पार्टनरशिप डीड' के तहत आता है। स्टाम्प पेपर पर होती है 'साझेदारी' यह जानकर आपको हैरानी होगी कि भक्त यहां बाकायदा स्टाम्प पेपर पर पार्टनरशिप करार बनवाकर लाते हैं। मंदिर में इस तरह के पत्र चढ़ाए जाते हैं- 'मैं निवासी जयपुर, यह साझेदारी करार श्री सांवलिया मंदिर के साथ करता हूं कि मेरे शेयर बाजार और व्यापारिक स्रोतों से होने वाले मुनाफे में 10% हिस्से की साझेदारी ठाकुर जी की रहेगी।' जब मन्नत पूरी होती है और व्यापार चमकता है, तो भक्त अपनी कंपनी के लेटर हेड पर पूरी जानकारी लिखकर लाखों-करोड़ों की राशि ठाकुर जी के चरणों में समर्पित कर देते हैं। 34 साल का रिकॉर्ड टूटा, मुनाफे में डूबे भक्त भक्तों का अटूट विश्वास है कि एक बार अगर 'सांवलिया सेठ' को अपना पार्टनर बना लिया, तो व्यापार कभी घाटे में नहीं जाता। जैसे-जैसे व्यापार बढ़ता है, मंदिर के भंडार में आने वाली 'प्रॉफिट शेयरिंग' भी बढ़ती जाती है। इसी का नतीजा है कि इस वित्तीय वर्ष में चढ़ावे ने 337 करोड़ का जादुई आंकड़ा छू लिया है।  

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला सही, विवाद से बचने की दी सलाह : मौलाना रजवी

बरेली यूपी के बरेली शहर में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले का समर्थन किया है। मौलाना ने शरीयत का हवाला देते हुए इस फैसले को सही बताया है। शनिवार को मौलाना शहाबुद्दीन ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि कोर्ट का निर्णय पूरी तरह सही और दुरुस्त है। शरियत के नजरिये का हवाला देते हुए मौलाना ने कहा कि अगर किसी जगह नमाज पढ़ने से विवाद की स्थिति बनती हो या किसी को आपत्ति हो सकती हो, तो ऐसी जगहों पर नमाज पढ़ने से बचना चाहिए। मौलाना ने आगे कहा कि इस्लाम अमन और भाईचारे का पैगाम देता है, इसलिए ऐसे किसी भी कार्य से बचना जरूरी है जिससे सामाजिक सौहार्द्र प्रभावित हो। दरअसल, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर बड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि सार्वजनिक स्थान सबके लिए है। धार्मिक आजादी के नाम पर इस पर कब्जे की अनुमति नहीं दी जा सकती। जब सार्वजनिक भूमि की बात आती है तो ये साफ है कि ये सबके लिए है और कानून से कंट्रोल होती है। कोई भी शख्स नियमित धार्मिक आयोजनों के इस्तेमाल के लिए इस पर दावा नहीं कर सकता। दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए ऐसा कहा। अदालत ने आबादी भूमि के हिस्से के निजी परिसर में नमाज की अनुमति मांगने की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने साफ कहा कि इस स्थान के इस्तेमाल पर आम जनता के आने-जाने और सुरक्षा पर असर पड़ता है। यह राज्य की जिम्मेदारी है कि वह सार्वजनिक स्थानों पर सभी की बराबर पहुंच करे। आपराधिक केस है तो शासनादेश के तहत जारी करें चरित्र प्रमाण पत्र : हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अन्यआदेश में स्पष्ट किया है कि केवल आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर चरित्र प्रमाण पत्र रोका नहीं जा सकता। इसी के साथ कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को शासन द्वारा जारी नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुसार याची को प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा एवं न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने नीतीश कुमार की याचिका पर उसके अधिवक्ता निर्भय कुमार भारती व सरकारी वकील को सुनकर दिया है। याची ने याचिका में एडीजी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें याची का चरित्र प्रमाण पत्र आवेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया था कि याची के विरुद्ध आपराधिक मामला लंबित है।

CID की बड़ी कार्रवाई, करोड़ों के घोटाले में नकदी और संपत्ति बरामद

 रांची झारखंड के जिला कोषागारों से अवैध तरीके से वेतन निकासी के करोड़ों रुपये के घोटाले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की विशेष जांच टीम (SIT) ने कार्रवाई की। SIT ने गुरुवार को बोकारो के एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में तैनात सिपाही काजल मंडल को गिरफ्तार किया है। आरोपित के घर से नकदी की बरामदगी   यह इस घोटाले में अब तक की चौथी गिरफ्तारी है। गिरफ्तार सिपाही काजल मंडल बोकारो स्टील सिटी का निवासी है। पुलिस की पूछताछ और उसकी निशानदेही पर SIT ने बोकारो स्थित उसके आवास पर छापेमारी की, जहां से 8.75 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह राशि अवैध तरीके से सरकारी खजाने से निकाली गई थी। मुख्य आरोपित के साथ साठगांठ जांच में यह खुलासा हुआ है कि काजल मंडल इस घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड और लेखापाल (Accountant) कौशल कुमार पांडेय का सक्रिय सहयोगी था। कौशल पांडेय ने यात्रा मद (Travel Allowance) और अन्य मदों से प्राप्त अवैध राशि काजल मंडल के बैंक खाते में ट्रांसफर की थी। सिपाही ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में इस राशि को घर में छिपाने की बात स्वीकार की है। इस मामले में SIT पूर्व में ही तीन अन्य आरोपितों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है:         कौशल कुमार पांडेय: मुख्य आरोपित, लेखापाल (एसपी कार्यालय)।         सतीश कुमार उर्फ सतीश कुमार सिंह: सहयोगी गृह रक्षक।         अशोक कुमार भंडारी: एएसआई (ASI) और सहयोगी। ये तीनों वर्तमान में रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद हैं। अब काजल मंडल सहित सभी चारों आरोपितों को रिमांड पर लेकर अन्य साथियों और नेटवर्क के बारे में पूछताछ की जाएगी। जब्त संपत्तियों का विवरण SIT ने इस घोटाले की जांच के दौरान अब तक करोड़ों की संपत्ति और दस्तावेज जब्त किए हैं :         भूमि व मकान: बोकारो के तेलीडीह में 4.08 डिसमिल और 4.98 डिसमिल भूमि के दस्तावेज। साथ ही, उक्त भूमि पर निर्मित तीन मंजिला आलीशान मकान।         फिक्स्ड डिपॉजिट: विभिन्न बैंकों में जमा 1.93 करोड़ रुपये और 18 लाख रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट को फ्रीज (Seize) कर दिया गया है।         नकद: ताजा कार्रवाई में जब्त 8.75 लाख रुपये। राज्य सरकार के आदेश पर SIT की पैनी नजर झारखंड सरकार के कड़े रुख के बाद CID की विशेष टीम बोकारो, हजारीबाग और चाईबासा में दर्ज अवैध निकासी के मामलों की जांच कर रही है। SIT ने इन सभी मामलों को टेकओवर करते हुए रांची के CID थाने में प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों का मानना है कि रिमांड पर पूछताछ के बाद इस सिंडिकेट में शामिल कई अन्य बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। कार्रवाई को लेकर पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।  

योगी सरकार का स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल, एक्सप्रेसवे निर्माण में तकनीक का बढ़ा इस्तेमाल

लखनऊ यूपी में एक्सप्रेसवे निर्माण का मॉडल अब पारंपरिक ढांचे से आगे निकलकर तकनीक-आधारित निगरानी और प्रबंधन की दिशा में प्रवेश कर चुका है। एक ओर तेज गति से एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार हुआ, वहीं अब इन परियोजनाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और स्विस सेंसर तकनीक को केंद्र में रखा गया है। यूपी एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा स्विट्जरलैंड की ईटीएच ज्यूरिख और आरटीडीटी लैबोरेट्रीज एजी के साथ की गई साझेदारी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत सड़क निर्माण को ‘डेटा-ड्रिवन’ और ‘रियल-टाइम मॉनिटरिंग’ आधारित बनाया जा रहा है। पीएम मोदी द्वारा लोकार्पित गंगा एक्सप्रेसवे में भी इस तकनीक का उपयोग किया गया है। निर्माण के साथ-साथ निगरानी अब तक सड़क निर्माण में गुणवत्ता का आकलन पहले निर्माण पूरा होने के बाद होता था, जिससे खामियों के सुधार में समय और लागत दोनों बढ़ते थे। नई प्रणाली में यह पूरी प्रक्रिया बदल गई है। सेंसर आधारित मॉड्यूल के जरिए निर्माण के दौरान ही सड़क की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे किसी भी कमी को उसी समय दुरुस्त किया जा सके। सड़क की ‘रीयल कंडीशन’ का वैज्ञानिक आंकलन इस तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह विशेष वाहन है, जिसमें सात एक्सेलेरोमीटर सेंसर लगाए गए हैं। यह वाहन एक्सप्रेसवे की हर लेन पर चलकर सतह की एकरूपता, ऊंचाई में उतार-चढ़ाव और कंपन का डेटा जुटाता है। यह डेटा सड़क की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन प्रस्तुत करता है, जो पारंपरिक विजुअल इंस्पेक्शन से कहीं अधिक सटीक माना जा रहा है। डेटा से तय होगी सड़क की गुणवत्ता सेंसर से प्राप्त आंकड़ों को एआई सॉफ्टवेयर के जरिए प्रोसेस कर सड़क की गुणवत्ता को ‘एक्सीलेंट’, ‘गुड’ और ‘पुअर’ जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। इससे न केवल गुणवत्ता का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन संभव होता है, बल्कि निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होती है। खास बात यह है कि एआई आधारित यह सिस्टम सड़क की छोटी-से-छोटी खामी को भी पहचान लेता है, जिससे समय रहते सुधार किया जा सकता है। स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, सुरक्षा पर सीधा असर योगी सरकार का फोकस केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। एक्सप्रेसवे के संचालन चरण में भी एआई का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। एआई-सक्षम कैमरे ओवरस्पीडिंग या गलत लेन में चलने जैसे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को स्वतः चिन्हित करेंगे। इससे न केवल प्रवर्तन मजबूत होगा, बल्कि मार्ग दुर्घटनाओं में कमी लाने में भी मदद मिलेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर से आगे, ‘स्मार्ट नेटवर्क’ की ओर बढ़ता यूपी यह पहल उत्तर प्रदेश को पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल से आगे ले जाकर ‘स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर’ की श्रेणी में स्थापित करती है। एक्सप्रेसवे अब केवल कनेक्टिविटी का माध्यम नहीं, बल्कि डेटा, तकनीक और प्रबंधन के समन्वय से संचालित एक इंटेलिजेंट नेटवर्क के रूप में विकसित हो रहे हैं। स्पष्ट है कि योगी सरकार अब इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुकी है, जहां फोकस केवल निर्माण पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता, सुरक्षा और टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन पर है।

NET-PhD धारकों का आक्रोश बढ़ा, संविदा भर्ती को बताया भविष्य से खिलवाड़

जयपुर  राजस्थान के उच्च शिक्षा विभाग में भर्ती को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा कॉलेजों में 3,540 पदों पर 'टीचिंग एसोसिएट' की संविदा भर्ती निकालने के फैसले ने प्रदेश के शिक्षित युवाओं में आक्रोश भर दिया है. युवा इस योजना को 'शिक्षावीर' करार देकर इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं. नेट और PhD धारकों के साथ धोखा विरोध कर रहे युवाओं का कहना है कि जिन्होंने बरसों मेहनत कर NET, JRF और PhD जैसी डिग्रियां हासिल की हैं, उनके भविष्य के साथ यह खिलवाड़ है. युवाओं का तर्क है कि सरकार स्थाई भर्ती करने के बजाय अस्थायी नियुक्तियां कर रही है, जिससे उच्च शिक्षा का स्तर गिरेगा. छात्रों का कहना है कि यदि कॉलेजों में स्थाई आचार्य नहीं होंगे, तो शोध (Research) और नए विमर्श पूरी तरह ठप हो जाएंगे, जिसका सीधा असर विद्यार्थियों की स्किल और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा. वेतन पर भड़के युवा भर्ती के विरोध का सबसे बड़ा कारण तय किया गया मानदेय है. टीचिंग एसोसिएट के लिए मात्र 28,500 रुपये वेतन तय किया गया है. छात्र नेताओं का कहना है कि यह राशि एक तृतीय श्रेणी शिक्षक से भी कम है. UGC के मानकों के अनुसार, एक सहायक आचार्य की बेसिक पे ही 57,700 रुपये से शुरू होती है. ऐसे में आधे वेतन पर उच्च शिक्षित युवाओं से काम कराना उनका अपमान है. खाली पदों से जूझते विश्वविद्यालय प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों की हालत पहले ही जर्जर है. कॉलेजों में शैक्षणिक स्टाफ के 32% पद खाली पड़े हैं. प्रदेश की 15 में से 7 यूनिवर्सिटी ऐसी हैं जहां एक भी नियमित शिक्षक नहीं है. राजस्थान विश्वविद्यालय में 60% शिक्षकों के पद रिक्त हैं. सियासी पारा चढ़ा, कांग्रेस ने घेरी सरकार अब इस मुद्दे पर सियासत भी गर्मा गई है. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने सरकार पर हमला बोला है. विपक्ष का आरोप है कि सेना में 'अग्निवीर' की तर्ज पर अब सरकार 'शिक्षावीर' और 'डॉक्टरवीर' बनाकर युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रही है. युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि संविदा भर्ती वापस लेकर स्थाई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन और उग्र होगा.

सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, नक्सलियों की साजिश नाकाम

 चाईबासा झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में कोबरा 209 बटालियन के नेतृत्व में चल रहे अभियान में अब फॉलो-अप कार्रवाई के दौरान बड़ी बरामदगी सामने आई है। सारंडा और टोंटो-गोइलकेरा क्षेत्र के रूटुगुटू जंगल में मुठभेड़ के बाद चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन में भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री जब्त की गई है सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, घटनास्थल से एक SLR राइफल, मैगजीन और जिंदा कारतूस, करीब 182 राउंड SLR गोली, खाली कारतूस और एक कार्बाइन हथियार बरामद हुआ है। इसके अलावा एक AK-47 का खाली केस भी मिला है। सबसे अहम बरामदगी विस्फोटक सामग्री की है। कोबरा 209 और अन्य सुरक्षाबलों ने कुल 4 पैकेट जिलेटिन (करीब 5 किलो), डेटोनेटर, कॉर्टेक्स वायर और अन्य विस्फोटक उपकरण बरामद किए हैं। इससे संकेत मिलता है कि नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे। बरामद सामानों में पिट्ठू, बैग, पाउच, पानी की बोतलें, बैटरी, टेप, धागा, पिन, कैंची, मल्टीपर्पज चाकू, प्लेट, छाता, सिरिंज, नीडल, सिरिंज बोतलें, हेडफोन और डेटा केबल जैसे दैनिक उपयोग और संचार से जुड़े उपकरण भी शामिल हैं। यह दर्शाता है कि नक्सली लंबे समय तक जंगल में ठहरने की तैयारी में थे। अभी भी फंसे हैं कुछ नक्सली इधर, मुठभेड़ में मारे गए नक्सली अमृत उर्फ इजरायल पूर्ति का पोस्टमार्टम पूरा कर लिया गया है। सुरक्षा कारणों से शव को 48 घंटे बाद शुक्रवार को चाईबासा लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उसका पोस्टमार्टम किया। बताया जा रहा है कि वह करीब 14 साल की उम्र से माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था और अजय महतो दस्ते का सक्रिय सदस्य था। सूत्रों के मुताबिक, इलाके में अभी भी कुछ नक्सलियों के फंसे होने की आशंका है। इसी को ध्यान में रखते हुए कोबरा 209 और अन्य सुरक्षाबलों ने पूरे जंगल क्षेत्र की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन और तेज कर दिया है। बीच-बीच में रुक-रुक कर फायरिंग की भी सूचना है, हालांकि अब स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। पूरे इलाके में हाई अलर्ट सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह दस्ता हाल ही में सारंडा जंगल से निकलकर इस इलाके में सक्रिय हुआ था और कुख्यात नक्सली नेता मिसिर बेसरा तथा अजय महतो समूह से जुड़ा हुआ था। फिलहाल पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी है और अभियान लगातार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री की जांच से माओवादी नेटवर्क और उनकी भविष्य की योजनाओं को लेकर अहम सुराग मिल सकते हैं।

श्याम स्वीट्स दुकान में काम करने वाले कर्मचारी ने उड़ाए लाखों रुपये

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस ने चावड़ी बाजार में दुकान से 3.85 लाख रुपए की चोरी के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि आरोपी दुकान में ही काम करता था। उसे घटना के 36 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया है। क्या था पूरा मामला? दिल्ली के हौज काजी पुलिस थाने में 29 अप्रैल को चोरी के संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह चावड़ी बाज़ार इलाके में 'श्याम स्वीट्स' नाम से एक दुकान चलाता है। 28 अप्रैल को रात करीब 9 बजे, उसने अपने मैनेजर और हेल्पर (जिसकी पहचान संजय के रूप में हुई है) को रात 10 बजे तक दुकान बंद करने का निर्देश देकर दुकान छोड़ दी। हालांकि, उसी रात हेल्पर ने कथित तौर पर दुकान की चाबियां लीं, दुकान को फिर से खोला और कैश बॉक्स में रखे 3.85 लाख रुपए लेकर फरार हो गया। सीसीटीवी से हुई आरोपी की पहचान दिल्ली पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज से आरोपी की पहचान की। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी का पता लगाने और उसे पकड़ने के लिए एक विशेष पुलिस टीम गठित की गई थी। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी फरार है और उसके पास केवल उसका मोबाइल नंबर ही एक अहम सुराग के तौर पर उपलब्ध था। जांच में आया सामने अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी निगरानी शुरू की गई, जिससे लोकेशन का पता चला। छानबीन के दौरान सामने आया कि आरोपी मध्य प्रदेश के मुरैना और ग्वालियर के बीच घूम रहा है। पुलिस ने कहा, "गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी बार-बार अपनी लोकेशन बदल रहा था। इसके बावजूद टीम ने लगातार उसका पीछा किया और उसके सुरागों पर नजर रखी। दृढ़ संकल्प और आपसी तालमेल का प्रदर्शन करते हुए टीम ने सफलतापूर्वक आरोपी को मध्य प्रदेश के ग्वालियर से गिरफ्तार कर लिया।" मध्य प्रदेश का रहने वाला है आरोपी आरोपी की पहचान संजय शर्मा के रूप में हुई है, जो ग्वालियर का रहने वाला है। पुलिस ने आगे बताया कि आरोपी 8वीं कक्षा तक पढ़ा-लिखा है और पिछले 12 से 13 सालों से दिल्ली में मिठाइयों की दुकानों पर रुक-रुककर काम कर रहा है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि दीपावली के दौरान उसने कुछ समय के लिए उसी दुकान पर भी काम किया था।  

उज्जैन एवं भोपाल पुलिस ने ट्रैक्टर एवं चारपहिया वाहन धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों का किया भंडाफोड़

भोपाल प्रदेश में संपत्ति संबंधी अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने हेतु चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश पुलिस को दो अलग-अलग प्रकरणों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। उज्जैन एवं भोपाल पुलिस द्वारा संगठित धोखाधड़ी गिरोहों का भंडाफोड़ करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर 20 ट्रैक्टर, 1 एक्सयूव्ही , 02 बोलेरो एवं 02 इनोवा कार सहित लगभग 2 करोड़ 60 लाख रुपए से अधिक की संपत्ति जप्त की गई है। उज्जैन-ट्रैक्टर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश, 20 ट्रैक्टर (कीमत 1 करोड़ 80 लाख रुपए) जप्त जिले के थाना भाटपचलाना पुलिस द्वारा किसानों के साथ ट्रैक्टर धोखाधड़ी करने वाले एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से लगभग 1 करोड़ 80 लाख रुपये मूल्य के 20 ट्रैक्टर जप्त किए गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना भाटपचलाना क्षेत्र में किसानों द्वारा ट्रैक्टर धोखाधड़ी एवं ट्रैक्टर वापस न करने की शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपराध पंजीबद्ध कर तत्काल विशेष टीम गठित कर विवेचना प्रारंभ की गई। 30 अप्रैल को तकनीकी साक्ष्यों एवं मुखबिर सूचना के आधार पर आरोपी रफीक पिता गनी मोहम्मद निवासी ग्राम माधीपुरा को गिरफ्तार किया गया। आरोपी के कब्जे से पुलिस ने उज्जैन, इंदौर, धार एवं रतलाम जिलों के विभिन्न क्षेत्रों से 1 करोड़ 80 लाख रुपये मूल्य के 20 ट्रैक्टर जप्त किए हैं। विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ग्रामीण क्षेत्रों के भोले-भाले किसानों को निशाना बनाकर उन्हें ट्रैक्टर पर अधिक मासिक किराया देने का लालच देता था। इस प्रलोभन में आकर किसान अपने ट्रैक्टर आरोपी को सौंप देते थे। आरोपी ट्रैक्टरों को अपने कब्जे में लेकर उन्हें अन्य जिलों के दूरस्थ क्षेत्रों में बेच देता या गिरवी रख देता था। वह न तो किसानों को कोई किराया देता था और न ही ट्रैक्टर वापस करता था। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी लगातार अपने मोबाइल नंबर बदलता रहता था तथा अपने निवास स्थान से भी फरार रहता था। भोपाल- चार पहिया वाहन धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़, 05 वाहन (कीमत 80 लाख) जप्त जिले के थाना अयोध्यानगर पुलिस ने किराए पर वाहन लगवाने का झांसा देकर चार पहिया वाहन बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया। प्रकरण में 01 आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 1 महिन्द्रा एक्सयूव्ही , 02 बुलेरो एवं 02 इनोवा कार सहित कुल 05 चार पहिया वाहन (कीमत लगभग 80 लाख रुपये) जप्त किए। प्राप्त जानकारी के अनुसार फरियादी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी द्वारा वाहन को एयरपोर्ट पर किराए से लगवाने का झांसा देकर अनुबंध के माध्यम से वाहन लिया गया तथा प्रारंभिक अवधि में किराया देने के बाद वाहन को भोपाल लाकर अन्य व्यक्तियों को सस्ते दामों पर बेच दिया गया। शिकायत पर अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। विवेचना में सामने आया कि आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर टीकमगढ़, सागर एवं दमोह जैसे जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों के वाहन मालिकों को सरकारी विभाग में वाहन लगवाकर अधिक किराया देने का लालच देते थे। उसके बाद वाहनो को भोपाल लाकर गिरोह उन्हें मजबूरी बताकर कम कीमत में अन्य व्यक्तियों को बेच देते थे। गिरोह के अन्य आरोपियों की तलाश जारी है तथा प्रकरण में और भी वाहनों की बरामदगी की संभावना है। मध्यप्रदेश पुलिस आमजन, विशेषकर किसानों एवं वाहन मालिकों से अपील करती है कि किसी भी प्रकार के लालच या प्रलोभन में आकर अपनी संपत्ति अज्ञात व्यक्तियों को न सौंपें। वाहन किराए पर देने से पूर्व संबंधित व्यक्ति की पूर्ण जानकारी एवं सत्यापन अवश्य करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।  

घर बैठे भर सकेंगे जनगणना फॉर्म, 21 मई तक मिलेगा ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन का मौका

लखनऊ यूपी में जगणना की तैयारियां पूरी हो गई हैं। सात मई से स्व गणना (सेल्फ एन्युमिरेशन) कोई भी व्यक्ति कर सकता है। 21 मई तक अवसर मिलेगा। इसमें एक आईडी जनरेट होगी जिसे प्रगणक को देना होगा। इससे दोनों का काम आसान हो जाएगा। प्रगणक 22 मई से दरवाजे पर दस्तक देंगे। जनगणना में सेल्फ एन्युमिरेशन पोर्टल (एसई) नागरिकों को जनगणना 2027 के लिए घर बैठे खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने की सुविधा देगा। यह 16 भाषाओं में उपलब्ध है। जिला जगणना अधिकारी ममता मालवीय ने बताया कि जनगणना के लिए घर बैठे स्व-जनगणना (सेल्फ एन्युमिरेशन) करने के लिए आधिकारिक पोर्टल https://se.census.gov.in पर जाना होगा। इसके लिए परिवार के मुखिया का मोबाइल नंबर डालना होगा। आधार और मकान से जुड़ी जानकारी इसमें भरनी होगी। एक मोबाइल नंबर से एक ही घर का लॉगिन किया जा सकेगा। सबसे पहले पोर्टल खोलें फिर अपना राज्य और कैप्चा भरें। इसके बाद स्वागत स्क्रीन आगे का मार्गदर्शन करेगी। परिवार का मुखिया अपना नाम मोबाइल नंबर भर कर अपनी भाषा चुनेगा। ओटीपी से कन्फरमेशन होने के बाद जिला भरेंगे। लैंडमार्क मैप के साथ हाईलाइट होगा उसे चुना जाएगा। इसके बाद अपने घर का डिटेल भरेंगे। कोई गलती होने पर पोर्टल पर विकल्प मिलेगा और कोई चीज छूटेगी तो उसका भी संकेत मिलेगा। इसके बाद ड्राफ्ट सहेजें, संशोधन भी कर सकते हैं अंत में सबमिट कर दें। इसके बाद एच के साथ 11 अंकों का एसईआईडी नंबर दिखेगा। एसएमएस से भी यह नंबर आएगा। जब प्रगणक आपके घर आए तो उसे यह एसईआईडी नंबर दे दें तो समय बचेगा और सूचना भी सही से भरी जा सकेंगी। जनगणना कार्यों की लगातार होगी मानीटरिंग जनगणना प्रबंधन डिजिटली होगा। इस पोर्टल का नाम सीएमएसएस है। लखनऊ से सहायक निदेशक जनगणना राजेंद्र कुमार व सांख्यिकी अन्वेषक संस्कृति तिवारी भी इस कार्य में मुरादाबाद में मानीटरिंग कर रहे हैं। साथ ही मुरादाबाद स्तर से एसडीएम स्निग्धा चतुर्वेदी, माधव उपाध्याय पर्यवेक्षक अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं। जिले में आठ हजार से ज्यादा कर्मचारी जनगणना कार्य में लगेंगे। घर की स्थिति से इस्तेमाल होने वाले अनाज तक सवाल घर का नंबर, जनगणना का नंबर, घर की छत, फर्श कैसी, परिवार का क्रमांक, मुखिया का नाम, मकान का स्वामित्व, उपलब्ध कमरों की संख्या, विवाहित दंपतियों की संख्या, पेयजल के मुख्य स्रोत, पेयजल स्रोत की उपलब्धता कितने निकट, प्रकाश का मुख्य स्रोत, शौचालय की स्थिति, शौचालय का प्रकार, गंदे पानी की निकासी किससे जुड़ी, परिसर के अंदर स्नान की सुविधा है या नहीं, रसोई घर में एलपीजी, पीएनजी अथवा अन्य सुविधा, रेडियो, मोबाइल, स्मार्ट फोन की स्थिति, टेलिविजन में मुफ्त दूरदर्शन, डिश, केबिल कनेक्शन या अन्य व्यवस्था, इंटरनेट की सुविधा का इस्तेमाल, लैपटॉप डेस्कटॉप या मोबाइल यूज में होता, साइकिल, मोटर साइकिल, मोपेड है अथवा कार व अन्य 4 पहिया वाहन है अंतिम सवाल परिवार में उपभोग किए जाने वाला अनाज कौन सा है होगा। जिला जनगणना अधिकारी, ममता मालवीय ने कहा कि जनगणना की हमारी तैयारी पूरी है। समय से सभी कार्य संपन्न करवाएंगे। 7 से 21 मई तक स्व गणना के बाद 22 मई से प्रगणक जाएंगे। अगर स्व गणना से आईडी बनाएंगे तो सहूलियत मिलेगी। प्रगणकों की ट्रेनिंग हो चुकी है।

राजधानी में सनसनी: जज अमन कुमार शर्मा का शव फंदे से लटका मिला

दिल्ली दिल्ली के जज अमन कुमार शर्मा ने आत्महत्या कर ली है। शनिवार को सफदरजंग इलाके में उनका शव फंदे से लटका मिला। जानकारी के मुताबिक थाना सफदरजंग एन्क्लेव को आज एक पीसीआर कॉल मिली जिसमें आत्महत्या के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान पुलिस को जानकारी दी गई कि 30 साल के अमन कुमार शर्मा ने अपने आवास पर सुसाइड कर लिया है। वह दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में डीएलएसए (DLSA) के पद पर तैनात थे। घटना की जानकारी अमन के जीजा शिवम ने दी। घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस मौके पर पहुंची और मामले में जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की जांच जारी है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, अभी तक किसी भी प्रकार की संलिप्तता साबित नहीं हुई है। हालांकि, जांच प्रक्रिया के तहत सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। सिम्बायोसिस लॉ स्कूल से पूरी की पढ़ाई आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, जज ने 19 जून, 2021 को दिल्ली न्यायिक सेवा में कार्यभार संभाला था। उन्होंने 2018 में पुणे के सिम्बायोसिस लॉ स्कूल से पढ़ाई पूरी की। अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कई तरह के आपराधिक और दीवानी (सिविल) मामलों की सुनवाई की। उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) और सिविल जज के रूप में अपनी सेवाएं दीं। पिछले महीने वकील ने की आत्महत्या पिछले महीने ही दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाके में स्थित एक होटल की 15वीं मंजिल से कूद कर 26 साल के वकील ने आत्महत्या कर ली थी। पुलिस को रॉयल प्लाजा होटल में हुई इस घटना की सूचना रविवार रात करीब सवा नौ बजे दी गई। मृतक की पहचान दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता राजेश सिंह के रूप में हुई है, जो उसी दिन शाम में होटल में ठहरने आया था। पुलिस के एक बयान के मुताबिक, पुलिस दल ने होटल पहुंच कर पाया कि महावीर एनक्लेव निवासी सिंह ने इमारत की 15वीं मंजिल से कथित तौर पर छलांग लगा दी थी। पुलिस के मुताबिक, मृतक कमरे में अकेला ठहरा हुआ था। पुलिस ने बताया कि घटना के बाद उसे तुरंत लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार, घटनास्थल की जांच के लिए अपराध दल और फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) के दल बुलाए गए। साक्ष्य इकट्ठा किए गए तथा होटल परिसर में सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई। जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें वकील ने किसी को दोषी नहीं ठहराया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पीड़ित कुछ मुद्दों को लेकर डिप्रेशन में था।