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NET-PhD धारकों का आक्रोश बढ़ा, संविदा भर्ती को बताया भविष्य से खिलवाड़

जयपुर  राजस्थान के उच्च शिक्षा विभाग में भर्ती को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा कॉलेजों में 3,540 पदों पर 'टीचिंग एसोसिएट' की संविदा भर्ती निकालने के फैसले ने प्रदेश के शिक्षित युवाओं में आक्रोश भर दिया है. युवा इस योजना को 'शिक्षावीर' करार देकर इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं. नेट और PhD धारकों के साथ धोखा विरोध कर रहे युवाओं का कहना है कि जिन्होंने बरसों मेहनत कर NET, JRF और PhD जैसी डिग्रियां हासिल की हैं, उनके भविष्य के साथ यह खिलवाड़ है. युवाओं का तर्क है कि सरकार स्थाई भर्ती करने के बजाय अस्थायी नियुक्तियां कर रही है, जिससे उच्च शिक्षा का स्तर गिरेगा. छात्रों का कहना है कि यदि कॉलेजों में स्थाई आचार्य नहीं होंगे, तो शोध (Research) और नए विमर्श पूरी तरह ठप हो जाएंगे, जिसका सीधा असर विद्यार्थियों की स्किल और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा. वेतन पर भड़के युवा भर्ती के विरोध का सबसे बड़ा कारण तय किया गया मानदेय है. टीचिंग एसोसिएट के लिए मात्र 28,500 रुपये वेतन तय किया गया है. छात्र नेताओं का कहना है कि यह राशि एक तृतीय श्रेणी शिक्षक से भी कम है. UGC के मानकों के अनुसार, एक सहायक आचार्य की बेसिक पे ही 57,700 रुपये से शुरू होती है. ऐसे में आधे वेतन पर उच्च शिक्षित युवाओं से काम कराना उनका अपमान है. खाली पदों से जूझते विश्वविद्यालय प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों की हालत पहले ही जर्जर है. कॉलेजों में शैक्षणिक स्टाफ के 32% पद खाली पड़े हैं. प्रदेश की 15 में से 7 यूनिवर्सिटी ऐसी हैं जहां एक भी नियमित शिक्षक नहीं है. राजस्थान विश्वविद्यालय में 60% शिक्षकों के पद रिक्त हैं. सियासी पारा चढ़ा, कांग्रेस ने घेरी सरकार अब इस मुद्दे पर सियासत भी गर्मा गई है. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने सरकार पर हमला बोला है. विपक्ष का आरोप है कि सेना में 'अग्निवीर' की तर्ज पर अब सरकार 'शिक्षावीर' और 'डॉक्टरवीर' बनाकर युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रही है. युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि संविदा भर्ती वापस लेकर स्थाई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन और उग्र होगा.

सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, नक्सलियों की साजिश नाकाम

 चाईबासा झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में कोबरा 209 बटालियन के नेतृत्व में चल रहे अभियान में अब फॉलो-अप कार्रवाई के दौरान बड़ी बरामदगी सामने आई है। सारंडा और टोंटो-गोइलकेरा क्षेत्र के रूटुगुटू जंगल में मुठभेड़ के बाद चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन में भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री जब्त की गई है सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, घटनास्थल से एक SLR राइफल, मैगजीन और जिंदा कारतूस, करीब 182 राउंड SLR गोली, खाली कारतूस और एक कार्बाइन हथियार बरामद हुआ है। इसके अलावा एक AK-47 का खाली केस भी मिला है। सबसे अहम बरामदगी विस्फोटक सामग्री की है। कोबरा 209 और अन्य सुरक्षाबलों ने कुल 4 पैकेट जिलेटिन (करीब 5 किलो), डेटोनेटर, कॉर्टेक्स वायर और अन्य विस्फोटक उपकरण बरामद किए हैं। इससे संकेत मिलता है कि नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे। बरामद सामानों में पिट्ठू, बैग, पाउच, पानी की बोतलें, बैटरी, टेप, धागा, पिन, कैंची, मल्टीपर्पज चाकू, प्लेट, छाता, सिरिंज, नीडल, सिरिंज बोतलें, हेडफोन और डेटा केबल जैसे दैनिक उपयोग और संचार से जुड़े उपकरण भी शामिल हैं। यह दर्शाता है कि नक्सली लंबे समय तक जंगल में ठहरने की तैयारी में थे। अभी भी फंसे हैं कुछ नक्सली इधर, मुठभेड़ में मारे गए नक्सली अमृत उर्फ इजरायल पूर्ति का पोस्टमार्टम पूरा कर लिया गया है। सुरक्षा कारणों से शव को 48 घंटे बाद शुक्रवार को चाईबासा लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उसका पोस्टमार्टम किया। बताया जा रहा है कि वह करीब 14 साल की उम्र से माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था और अजय महतो दस्ते का सक्रिय सदस्य था। सूत्रों के मुताबिक, इलाके में अभी भी कुछ नक्सलियों के फंसे होने की आशंका है। इसी को ध्यान में रखते हुए कोबरा 209 और अन्य सुरक्षाबलों ने पूरे जंगल क्षेत्र की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन और तेज कर दिया है। बीच-बीच में रुक-रुक कर फायरिंग की भी सूचना है, हालांकि अब स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। पूरे इलाके में हाई अलर्ट सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह दस्ता हाल ही में सारंडा जंगल से निकलकर इस इलाके में सक्रिय हुआ था और कुख्यात नक्सली नेता मिसिर बेसरा तथा अजय महतो समूह से जुड़ा हुआ था। फिलहाल पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी है और अभियान लगातार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री की जांच से माओवादी नेटवर्क और उनकी भविष्य की योजनाओं को लेकर अहम सुराग मिल सकते हैं।

श्याम स्वीट्स दुकान में काम करने वाले कर्मचारी ने उड़ाए लाखों रुपये

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस ने चावड़ी बाजार में दुकान से 3.85 लाख रुपए की चोरी के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि आरोपी दुकान में ही काम करता था। उसे घटना के 36 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया है। क्या था पूरा मामला? दिल्ली के हौज काजी पुलिस थाने में 29 अप्रैल को चोरी के संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह चावड़ी बाज़ार इलाके में 'श्याम स्वीट्स' नाम से एक दुकान चलाता है। 28 अप्रैल को रात करीब 9 बजे, उसने अपने मैनेजर और हेल्पर (जिसकी पहचान संजय के रूप में हुई है) को रात 10 बजे तक दुकान बंद करने का निर्देश देकर दुकान छोड़ दी। हालांकि, उसी रात हेल्पर ने कथित तौर पर दुकान की चाबियां लीं, दुकान को फिर से खोला और कैश बॉक्स में रखे 3.85 लाख रुपए लेकर फरार हो गया। सीसीटीवी से हुई आरोपी की पहचान दिल्ली पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज से आरोपी की पहचान की। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी का पता लगाने और उसे पकड़ने के लिए एक विशेष पुलिस टीम गठित की गई थी। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी फरार है और उसके पास केवल उसका मोबाइल नंबर ही एक अहम सुराग के तौर पर उपलब्ध था। जांच में आया सामने अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी निगरानी शुरू की गई, जिससे लोकेशन का पता चला। छानबीन के दौरान सामने आया कि आरोपी मध्य प्रदेश के मुरैना और ग्वालियर के बीच घूम रहा है। पुलिस ने कहा, "गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी बार-बार अपनी लोकेशन बदल रहा था। इसके बावजूद टीम ने लगातार उसका पीछा किया और उसके सुरागों पर नजर रखी। दृढ़ संकल्प और आपसी तालमेल का प्रदर्शन करते हुए टीम ने सफलतापूर्वक आरोपी को मध्य प्रदेश के ग्वालियर से गिरफ्तार कर लिया।" मध्य प्रदेश का रहने वाला है आरोपी आरोपी की पहचान संजय शर्मा के रूप में हुई है, जो ग्वालियर का रहने वाला है। पुलिस ने आगे बताया कि आरोपी 8वीं कक्षा तक पढ़ा-लिखा है और पिछले 12 से 13 सालों से दिल्ली में मिठाइयों की दुकानों पर रुक-रुककर काम कर रहा है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि दीपावली के दौरान उसने कुछ समय के लिए उसी दुकान पर भी काम किया था।  

उज्जैन एवं भोपाल पुलिस ने ट्रैक्टर एवं चारपहिया वाहन धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों का किया भंडाफोड़

भोपाल प्रदेश में संपत्ति संबंधी अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने हेतु चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश पुलिस को दो अलग-अलग प्रकरणों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। उज्जैन एवं भोपाल पुलिस द्वारा संगठित धोखाधड़ी गिरोहों का भंडाफोड़ करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर 20 ट्रैक्टर, 1 एक्सयूव्ही , 02 बोलेरो एवं 02 इनोवा कार सहित लगभग 2 करोड़ 60 लाख रुपए से अधिक की संपत्ति जप्त की गई है। उज्जैन-ट्रैक्टर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश, 20 ट्रैक्टर (कीमत 1 करोड़ 80 लाख रुपए) जप्त जिले के थाना भाटपचलाना पुलिस द्वारा किसानों के साथ ट्रैक्टर धोखाधड़ी करने वाले एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से लगभग 1 करोड़ 80 लाख रुपये मूल्य के 20 ट्रैक्टर जप्त किए गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना भाटपचलाना क्षेत्र में किसानों द्वारा ट्रैक्टर धोखाधड़ी एवं ट्रैक्टर वापस न करने की शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपराध पंजीबद्ध कर तत्काल विशेष टीम गठित कर विवेचना प्रारंभ की गई। 30 अप्रैल को तकनीकी साक्ष्यों एवं मुखबिर सूचना के आधार पर आरोपी रफीक पिता गनी मोहम्मद निवासी ग्राम माधीपुरा को गिरफ्तार किया गया। आरोपी के कब्जे से पुलिस ने उज्जैन, इंदौर, धार एवं रतलाम जिलों के विभिन्न क्षेत्रों से 1 करोड़ 80 लाख रुपये मूल्य के 20 ट्रैक्टर जप्त किए हैं। विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ग्रामीण क्षेत्रों के भोले-भाले किसानों को निशाना बनाकर उन्हें ट्रैक्टर पर अधिक मासिक किराया देने का लालच देता था। इस प्रलोभन में आकर किसान अपने ट्रैक्टर आरोपी को सौंप देते थे। आरोपी ट्रैक्टरों को अपने कब्जे में लेकर उन्हें अन्य जिलों के दूरस्थ क्षेत्रों में बेच देता या गिरवी रख देता था। वह न तो किसानों को कोई किराया देता था और न ही ट्रैक्टर वापस करता था। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी लगातार अपने मोबाइल नंबर बदलता रहता था तथा अपने निवास स्थान से भी फरार रहता था। भोपाल- चार पहिया वाहन धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़, 05 वाहन (कीमत 80 लाख) जप्त जिले के थाना अयोध्यानगर पुलिस ने किराए पर वाहन लगवाने का झांसा देकर चार पहिया वाहन बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया। प्रकरण में 01 आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 1 महिन्द्रा एक्सयूव्ही , 02 बुलेरो एवं 02 इनोवा कार सहित कुल 05 चार पहिया वाहन (कीमत लगभग 80 लाख रुपये) जप्त किए। प्राप्त जानकारी के अनुसार फरियादी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी द्वारा वाहन को एयरपोर्ट पर किराए से लगवाने का झांसा देकर अनुबंध के माध्यम से वाहन लिया गया तथा प्रारंभिक अवधि में किराया देने के बाद वाहन को भोपाल लाकर अन्य व्यक्तियों को सस्ते दामों पर बेच दिया गया। शिकायत पर अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। विवेचना में सामने आया कि आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर टीकमगढ़, सागर एवं दमोह जैसे जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों के वाहन मालिकों को सरकारी विभाग में वाहन लगवाकर अधिक किराया देने का लालच देते थे। उसके बाद वाहनो को भोपाल लाकर गिरोह उन्हें मजबूरी बताकर कम कीमत में अन्य व्यक्तियों को बेच देते थे। गिरोह के अन्य आरोपियों की तलाश जारी है तथा प्रकरण में और भी वाहनों की बरामदगी की संभावना है। मध्यप्रदेश पुलिस आमजन, विशेषकर किसानों एवं वाहन मालिकों से अपील करती है कि किसी भी प्रकार के लालच या प्रलोभन में आकर अपनी संपत्ति अज्ञात व्यक्तियों को न सौंपें। वाहन किराए पर देने से पूर्व संबंधित व्यक्ति की पूर्ण जानकारी एवं सत्यापन अवश्य करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।  

घर बैठे भर सकेंगे जनगणना फॉर्म, 21 मई तक मिलेगा ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन का मौका

लखनऊ यूपी में जगणना की तैयारियां पूरी हो गई हैं। सात मई से स्व गणना (सेल्फ एन्युमिरेशन) कोई भी व्यक्ति कर सकता है। 21 मई तक अवसर मिलेगा। इसमें एक आईडी जनरेट होगी जिसे प्रगणक को देना होगा। इससे दोनों का काम आसान हो जाएगा। प्रगणक 22 मई से दरवाजे पर दस्तक देंगे। जनगणना में सेल्फ एन्युमिरेशन पोर्टल (एसई) नागरिकों को जनगणना 2027 के लिए घर बैठे खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने की सुविधा देगा। यह 16 भाषाओं में उपलब्ध है। जिला जगणना अधिकारी ममता मालवीय ने बताया कि जनगणना के लिए घर बैठे स्व-जनगणना (सेल्फ एन्युमिरेशन) करने के लिए आधिकारिक पोर्टल https://se.census.gov.in पर जाना होगा। इसके लिए परिवार के मुखिया का मोबाइल नंबर डालना होगा। आधार और मकान से जुड़ी जानकारी इसमें भरनी होगी। एक मोबाइल नंबर से एक ही घर का लॉगिन किया जा सकेगा। सबसे पहले पोर्टल खोलें फिर अपना राज्य और कैप्चा भरें। इसके बाद स्वागत स्क्रीन आगे का मार्गदर्शन करेगी। परिवार का मुखिया अपना नाम मोबाइल नंबर भर कर अपनी भाषा चुनेगा। ओटीपी से कन्फरमेशन होने के बाद जिला भरेंगे। लैंडमार्क मैप के साथ हाईलाइट होगा उसे चुना जाएगा। इसके बाद अपने घर का डिटेल भरेंगे। कोई गलती होने पर पोर्टल पर विकल्प मिलेगा और कोई चीज छूटेगी तो उसका भी संकेत मिलेगा। इसके बाद ड्राफ्ट सहेजें, संशोधन भी कर सकते हैं अंत में सबमिट कर दें। इसके बाद एच के साथ 11 अंकों का एसईआईडी नंबर दिखेगा। एसएमएस से भी यह नंबर आएगा। जब प्रगणक आपके घर आए तो उसे यह एसईआईडी नंबर दे दें तो समय बचेगा और सूचना भी सही से भरी जा सकेंगी। जनगणना कार्यों की लगातार होगी मानीटरिंग जनगणना प्रबंधन डिजिटली होगा। इस पोर्टल का नाम सीएमएसएस है। लखनऊ से सहायक निदेशक जनगणना राजेंद्र कुमार व सांख्यिकी अन्वेषक संस्कृति तिवारी भी इस कार्य में मुरादाबाद में मानीटरिंग कर रहे हैं। साथ ही मुरादाबाद स्तर से एसडीएम स्निग्धा चतुर्वेदी, माधव उपाध्याय पर्यवेक्षक अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं। जिले में आठ हजार से ज्यादा कर्मचारी जनगणना कार्य में लगेंगे। घर की स्थिति से इस्तेमाल होने वाले अनाज तक सवाल घर का नंबर, जनगणना का नंबर, घर की छत, फर्श कैसी, परिवार का क्रमांक, मुखिया का नाम, मकान का स्वामित्व, उपलब्ध कमरों की संख्या, विवाहित दंपतियों की संख्या, पेयजल के मुख्य स्रोत, पेयजल स्रोत की उपलब्धता कितने निकट, प्रकाश का मुख्य स्रोत, शौचालय की स्थिति, शौचालय का प्रकार, गंदे पानी की निकासी किससे जुड़ी, परिसर के अंदर स्नान की सुविधा है या नहीं, रसोई घर में एलपीजी, पीएनजी अथवा अन्य सुविधा, रेडियो, मोबाइल, स्मार्ट फोन की स्थिति, टेलिविजन में मुफ्त दूरदर्शन, डिश, केबिल कनेक्शन या अन्य व्यवस्था, इंटरनेट की सुविधा का इस्तेमाल, लैपटॉप डेस्कटॉप या मोबाइल यूज में होता, साइकिल, मोटर साइकिल, मोपेड है अथवा कार व अन्य 4 पहिया वाहन है अंतिम सवाल परिवार में उपभोग किए जाने वाला अनाज कौन सा है होगा। जिला जनगणना अधिकारी, ममता मालवीय ने कहा कि जनगणना की हमारी तैयारी पूरी है। समय से सभी कार्य संपन्न करवाएंगे। 7 से 21 मई तक स्व गणना के बाद 22 मई से प्रगणक जाएंगे। अगर स्व गणना से आईडी बनाएंगे तो सहूलियत मिलेगी। प्रगणकों की ट्रेनिंग हो चुकी है।

राजधानी में सनसनी: जज अमन कुमार शर्मा का शव फंदे से लटका मिला

दिल्ली दिल्ली के जज अमन कुमार शर्मा ने आत्महत्या कर ली है। शनिवार को सफदरजंग इलाके में उनका शव फंदे से लटका मिला। जानकारी के मुताबिक थाना सफदरजंग एन्क्लेव को आज एक पीसीआर कॉल मिली जिसमें आत्महत्या के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान पुलिस को जानकारी दी गई कि 30 साल के अमन कुमार शर्मा ने अपने आवास पर सुसाइड कर लिया है। वह दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में डीएलएसए (DLSA) के पद पर तैनात थे। घटना की जानकारी अमन के जीजा शिवम ने दी। घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस मौके पर पहुंची और मामले में जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की जांच जारी है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, अभी तक किसी भी प्रकार की संलिप्तता साबित नहीं हुई है। हालांकि, जांच प्रक्रिया के तहत सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। सिम्बायोसिस लॉ स्कूल से पूरी की पढ़ाई आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, जज ने 19 जून, 2021 को दिल्ली न्यायिक सेवा में कार्यभार संभाला था। उन्होंने 2018 में पुणे के सिम्बायोसिस लॉ स्कूल से पढ़ाई पूरी की। अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कई तरह के आपराधिक और दीवानी (सिविल) मामलों की सुनवाई की। उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) और सिविल जज के रूप में अपनी सेवाएं दीं। पिछले महीने वकील ने की आत्महत्या पिछले महीने ही दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाके में स्थित एक होटल की 15वीं मंजिल से कूद कर 26 साल के वकील ने आत्महत्या कर ली थी। पुलिस को रॉयल प्लाजा होटल में हुई इस घटना की सूचना रविवार रात करीब सवा नौ बजे दी गई। मृतक की पहचान दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता राजेश सिंह के रूप में हुई है, जो उसी दिन शाम में होटल में ठहरने आया था। पुलिस के एक बयान के मुताबिक, पुलिस दल ने होटल पहुंच कर पाया कि महावीर एनक्लेव निवासी सिंह ने इमारत की 15वीं मंजिल से कथित तौर पर छलांग लगा दी थी। पुलिस के मुताबिक, मृतक कमरे में अकेला ठहरा हुआ था। पुलिस ने बताया कि घटना के बाद उसे तुरंत लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार, घटनास्थल की जांच के लिए अपराध दल और फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) के दल बुलाए गए। साक्ष्य इकट्ठा किए गए तथा होटल परिसर में सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई। जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें वकील ने किसी को दोषी नहीं ठहराया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पीड़ित कुछ मुद्दों को लेकर डिप्रेशन में था।  

ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन जोन में अब लग सकेंगे उद्योग, सरकार का नया फैसला

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए इंडस्ट्रियल लाइसेंसिंग पालिसी में बड़ा बदलाव किया है। इसके अंतर्गत ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन जोन में 25 प्रतिशत तक इंडस्ट्रियल कालोनियों को विकसित करने की मंजूरी दी जाएगी। एग्रीकल्चर जोन में लाइसेंस पर इन्फ्रास्ट्रक्चर लागत का नया नियम लागू होगा। यदि कोई इंडस्ट्रियल लाइसेंस शहरी सीमा से 500 मीटर से बाहर एग्रीकल्चर जोन में लिया जाता है तो वहां आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की लागत संबंधित डेवलपर से वसूल की जाएगी। निवेशकों को राहत प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने ईडीसी (बाह्य विकास शुल्क) में भी राहत प्रदान की है। हरियाणा सरकार ने साल 2015 में इंडस्ट्रियल लाइसेंसिंग पालिसी तैयार की थी, जिसमें 24 मार्च को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में संशोधन करने पर सहमति बनी थी। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल ने संशोधित पालिसी का परिपत्र जारी कर दिया है। हरियाणा में औद्योगिक विकास पर जोर नई व्यवस्था के तहत अब प्रकाशित डेवलपमेंट प्लान के अंतर्गत इंडस्ट्रियल जोन के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन जोन में भी औद्योगिक कालोनियां स्थापित करने की अनुमति दी जाएगी। यह अनुमति कुल नियोजित क्षेत्र के 25 प्रतिशत तक ही सीमित रहेगी। हरियाणा सरकार का मानना है कि इस बदलाव से राज्य में उद्योगों के लिए सकारात्मक माहौल बनेगा। आसान नियम, लागत में पारदर्शिता और राहत के प्रविधानों के चलते अधिक से अधिक निवेशक नये उद्योग लगाने के लिए आगे आएंगे तथा पुराने उद्योगपतियों को राहत मिलेगी। प्रदेश सरकार राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए लगातार बैठकें कर रही है। राज्य सरकार का यह निर्णय हरियाणा को औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने में सहयोग प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार के संशोधित फैसले के मुताबिक अब शहरी क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करना पहले से अधिक आसान हो जाएगा। पहले केवल सीमित क्षेत्रों में ही उद्योग करने की अनुमति मिलती थी, मगर अब ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन जोन को भी शामिल करने से औद्योगिक विस्तार के नये रास्ते खुलेंगे। एग्रीकल्चर जोन में ढांचागत विकास का खर्च निवेशक से वसूलेगी सरकार हरियाणा सरकार ने पालिसी में एक बड़ा बदलाव एग्रीकल्चर जोन को लेकर किया है। यदि कोई इंडस्ट्रियल लाइसेंस शहरी सीमा से 500 मीटर से बाहर एग्रीकल्चर जोन में लिया जाता है, तो वहां आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर की लागत संबंधित डेवलपर को वहन करनी होगी यानी सड़क, बिजली, पानी जैसी सुविधाओं का खर्च सीधे निवेशक से लिया जाएगा। इस बदलाव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े और विकास जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़े। एग्रीकल्चर जोन में लिए इंडस्ट्रियल लाइसेंस के शहरी क्षेत्र में शामिल होने पर ईडीसी माफ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल की ओर से जारी संशोधित पालिसी के अऩुसार यदि पहले से एग्रीकल्चर जोन में लिया गया इंडस्ट्रियल लाइसेंस बाद में शहरी क्षेत्र में शामिल हो जाता है और उस पर निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, तो उस हिस्से पर एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज (ईडीसी-बाह्य विकास शुल्क) नहीं लिया जाएगा। हालांकि, जो हिस्सा अभी अधूरा है, उस पर लागू नियमों के अनुसार ईडीसी देना होगा। इससे पुराने निवेशकों को बड़ी राहत मिलेगी और नये निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।

शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप, सीनियर IPS पर FIR से हड़कंप

जयपुर राजस्थान पुलिस के एक सीनियर आईपीएस अफसर के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज हुआ है। जयपुर शहर के मालवीय नगर थाने 29 अप्रैल को एफआईआर दर्ज की गई। यह एफआईआर एक महिला के पत्र के आधार पर दर्ज की गई है। महिला ने डाक के जरिए पुलिस थाने पत्र भेजा था। इस पत्र में आरोप लगाया कि आईपीएस किशन सहाय मीणा ने शादी का झांसा देकर उनके साथ दुष्कर्म किया। जयपुर आयुक्तालय की एडिशनल डीसीपी जिज्ञासा इस मामले की जांच कर रही है। मारपीट और धमकी का भी लगया आरोप पीड़िता महिला की उम्र करीब 53 वर्ष है। उसका आरोप है कि आईपीएस किशन सहाय मीणा ने शादी का झांसा देकर अपने जाल में फंसाया। कई दिनों तक शारीरिक संबंध बनाए। बाद में मिलना कम कर दिया। जब शादी के लिए कहा तो मारपीट करने लगा। साथ ही यह धमकी भी देता रहा कि अगर किसी से शिकायत की तो वे उसे जान से मरवा देंगे। मारपीट, धमकी और दुष्कर्म के गंभीर आरोपों के बाद मालवीय नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। सफाई में यह कहा आईपीएस ने दुष्कर्म का केस दर्ज होने के बाद सीनियर आईपीएस किशन सहाय मीणा का कहना है कि एक साजिश के तहत उन्हें फंसाने के लिए मुकदमा दर्ज कराया गया है। मीणा का कहना है कि वे पिछले दस साल से विज्ञानवाद का प्रचार करते हैं। ऐसे में अंध विश्वास में डूबे लोग विज्ञानवाद को हजम नहीं कर पा रहे। उन्हें बदनाम करने के लिए षड़यंत्र पूर्वक एफआईआर दर्ज कराई है। मीणा ने यह भी कहा कि महिला ने उन्हें कई बार मैसेज किए। चैट से स्पष्ट है कि उसने ब्लैकमेल करने के लिहाज से मुकदमा दर्ज कराया है। कौन हैं आईपीएस किशन सहाय मीणा आईपीएस किशन सहाय मीणा अलवर जिले के रहने वाले हैं। वे राजस्थान पुलिस सेवा में अधिकारी के तौर पर भर्ती हुए थे। वर्ष 2013 में पदोन्नत होकर आईपीएस बन गए। आईपीएस बनने के बाद वे टोंक जिले के एसपी रहे। जीआरपी और क्राइम ब्रांच में भी एसपी के तौर पर कार्य किया। वर्तमान में वे पुलिस महानिरीक्षक यानी आईजी मानवाधिकार प्रकोष्ठ के पद पर पुलिस मुख्यालय में कार्यरत हैं। लोकसभा चुनाव में बिना सूचना के ड्यूटी छोड़ी, सस्पेंड हुए वर्ष 2024 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान झारखंड में उनकी ड्यूटी लगाई गई थी। वे झारखंड गए लेकिन बिना सूचना के वापस जयपुर लौट आए। बिना किसी सूचना के ड्यूटी छोड़ने पर चुनाव आयोग ने इसे बड़ी गंभीर लापरवाही माना। चुनाव आयोग की शिकायत के बाद राज्य सरकार ने आईपीएस किशन सहाय मीणा को सस्पेंड कर दिया था। भगवान और धर्म को लेकर उठाए थे सवाल आईपीएस किशन सहाय मीणा पिछले कई वर्षों से सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं। अपने फेसबुक पेज पर वे आए दिन पोस्ट करते रहते हैं। कुछ समय पहले उन्होंने धर्म और भगवान के अस्तित्व को लेकर पोस्ट किया जिससे काफी विवाद हो गया था। उन्होंने लिखा है कि 'धार्मिक अंधविश्वास' जैसे भगवान, अल्लाह, गॉड, वाहेगुरु, फरिश्ते, देवी-देवता, स्वर्ग-नरक, जन्नत-जहन्नुम आदि का सिर्फ एक प्रकार से नहीं बल्कि, बहुत प्रकार से खंडन किया जा सकता है, क्योंकि ये हैं ही नहीं। उनके मुताबिक, 'ये सिर्फ कल्पना मात्र और मनगढ़ंत हैं।' विज्ञान को बताया था तरक्की का रास्ता आईपीएस किशन सहाय मीणा अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर विज्ञानवाद का प्रचार करते रहे हैं। साथ ही ढोंगी बाबाओं के झांसों से दूर रहने की सलाह भी देते रहते हैं। उनका कहना है कि धर्म और भगवान के भरोसे तरक्की संभव नहीं है। विज्ञान ही तरक्की का सही रास्ता है। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि लगभग सभी भारतीयों की प्रबल इच्छा है कि भारत सुपर पावर बने लेकिन यह केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण और विज्ञानवाद से ही संभव है। धार्मिक-महजबी अंधविश्वास भटकने का मार्ग है जिसे समाज और देश को त्यागना होगा।

सुरक्षा के साए में बंगाल री-पोलिंग, 15 बूथों पर रिकॉर्ड 86.90% मतदान

कोलकाता बंगाल के डायमंड हार्बर व मगराहट पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों के 15 बूथों पर शनिवार को कड़ी सुरक्षा में पुनर्मतदान हुआ। डायमंड हार्बर के चार (बूथ नंबर 117, 179, 194 व 243) और मगराहाट पश्चिम के 11 (बूथ नंबर 46, 126, 127, 128, 142, 214, 215, 216, 230, 231 व 232) बूथों पर फिर से वोट पड़े। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार शाम पांच बजे तक इन 15 बूथों पर कुल 86.90 प्रतिशत मतदान हुआ। मगराहाट पश्चिम में 86.11 प्रतिशत व डायमंड हार्बर में 87.60 प्रतिशत वोट पड़े। चूंकि मतदान जारी था, इसलिए वोट प्रतिशत बढ़ स्वाभाविक है। इन बूथों पर गड़बड़ी की शिकायतें मिलने के बाद चुनाव आयोग ने वहां नए सिरे से मतदान कराने का निर्णय लिया था। सुबह मतदान शुरू होने के साथ ही इन बूथों के सामने लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। फलता में फिर से कराया जा सकता है मतदान वहीं फलता विधानसभा क्षेत्र में भी फिर से मतदान कराने का आयोग निर्णय ले सकता है। इसे लेकर जल्द उच्च स्तरीय बैठक की जाएगी। सीईओ सूत्रों के अनुसार पुनर्मतदान का निर्णय लिए जाने पर आगामी चार मई को उक्त विस क्षेत्र के वोटों की गिनती स्थगित की जा सकती है। मालूम हो कि इस विधानसभा क्षेत्र में भी बूथों में गड़बड़ी की आयोग को कई शिकायतें मिली हैं। फलता में फिर तनाव, तृणमूल पर भाजपा समर्थकों को धमकाने का आरोप इस बीच शनिवार को फलता के कासिमनगर में फिर तनाव फैल गया। तृणमूल पर भाजपा समर्थकों को मारने-पीटने व धमकाने का आरोप लगा है। इसका प्रतिवाद करते हुए भाजपा समर्थकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध कर विरोध-प्रदर्शन किया। दूसरी तरफ तृणमूल ने इस आरोप को सिरे से नकारा है। आयोग ने इसे लेकर जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मालूम हो कि फलता में उत्तर प्रदेश के सख्त मिजाज आइपीएस अधिकारी व बंगाल में चुनाव आयोग के पुलिस पर्यवेक्षक अजयपाल शर्मा व यहां से तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी जहांगीर खान के बीच गत मंगलवार को वाकयुद्ध देखने को मिला था। अजयपाल शर्मा ने जहांगीर को डराने-धमकाने से बाज आने की चेतावनी दी थी, इसपर जहांगीर ने पलटवार करते हुए कहा था कि अगर अजयपाल शर्मा 'सिंघम' हैं तो वे भी 'पुष्पा' हैं और किसी के दबाव में नहीं झुकेंगे।

बिहार म्यूजियम की लोकप्रियता बढ़ी, 10 साल में पहली बार टूटा विज़िटर्स का रिकॉर्ड

पटना राजधानी पटना में स्थित बिहार म्यूजियम ने इस साल पर्यटकों की संख्या के मामले में एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। म्यूजियम के उद्घाटन के बाद बीते 10 सालों में यह पहला मौका है, जब महज एक साल के भीतर 5 लाख से अधिक पर्यटकों ने यहां का भ्रमण किया है। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि अपनी आधुनिक सुविधाओं और बेहतरीन प्रदर्शनी के कारण यह म्यूजियम लोगों की पसंद बनता जा रहा है। पर्यटकों की इस बढ़ती संख्या से राज्य में पर्यटन को भी सकारात्मक बढ़ावा मिल रहा है। कुल आंकड़ा 7 लाख के करीब पहुंचा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में 5 लाख से अधिक आम लोगों ने टिकट लेकर बिहार म्यूजियम का दौरा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर इस 5 लाख की संख्या में वीआईपी (VIP) मेहमानों के विशेष दौरे और म्यूजियम परिसर में आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने वाले लोगों की भीड़ को भी शामिल कर लिया जाए, तो कुल पर्यटकों का यह आंकड़ा 5 लाख से 7 लाख के बीच पहुंच जाता है। यह पर्यटकों की संख्या पिछले सभी सालों के मुकाबले सबसे अधिक है। प्राचीन कलाकृतियां बनीं मुख्य आकर्षण बिहार राज्य हमेशा से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से काफी समृद्ध रहा है। देश के अन्य राज्यों और विदेश से आने वाले पर्यटक यहां की प्राचीन संस्कृति, सभ्यता और इतिहास को करीब से समझने की इच्छा रखते हैं। बिहार म्यूजियम में बौद्ध धर्म, जैन धर्म, हिंदू धर्म और सिख धर्म से जुड़ी कई प्राचीन और दुर्लभ कलाकृतियां बड़े पैमाने पर मौजूद हैं। आधुनिक तरीके से सुरक्षित रखी गई इन ऐतिहासिक धरोहरों को देखने और अपने इतिहास को जानने के लिए ही पर्यटक इतनी बड़ी संख्या में पटना आ रहे हैं। अपर निदेशक ने बताया बड़ी उपलब्धि इस नई उपलब्धि पर बिहार म्यूजियम के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने बताया कि यह बिहार म्यूजियम के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है कि 10 सालों में पहली बार 5 लाख का आंकड़ा पार हुआ है। उन्होंने कहा कि बिहार ऐतिहासिक दृष्टिकोण से हमेशा से समृद्ध रहा है और यहां मौजूद प्राचीन कलाकृतियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक आ रहे हैं। इसी का नतीजा है कि इस साल पर्यटकों का आंकड़ा 5 लाख के पार हो गया है। आधुनिक सुविधाओं ने आम लोगों की दिलचस्पी को काफी बढ़ा दिया है।