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मोहन सरकार में मंत्रिमंडल में बदलाव, इन नामों को मिल सकता है मौका!

इंदौर   मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवास पर दो दिन पहले हुई एक महत्वपूर्ण बैठक को लेकर कवायद शुरू हो गई है जिसे मंत्रिमंडल के विस्तार से भी जोड़ा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार में मंत्रियों का कोरम पूरा हो जाएगा। इसमें बड़ा फेरबदल होने की भी संभावनाएं जताई जा रही है जिसमें नई मंत्री बनाए जाने के साथ कुछ की छुट्टी भी तय मानी जा रही है। मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार को ढाई साल होने जा रहे हैं। इस बीच मंत्रिमंडल के विस्तार की चर्चाओं ने भी जोर पकड़ लिया है। वर्तमान में 31 मंत्री हैं, जबकि 35 बनाए जा सकते हैं। चार पदों को भरा जाएगा जिसके साथ कुछ मंत्रियो को मुक्त करके नए बनाए जाने की भी बात सामने आ रही है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की भी मंजूरी इस बात को मजबूत यूं भी माना जा रहा है कि दो दिन पहले डॉ. मोहन यादव के निवास पर एक समन्वय समिति की बैठक हुई थी जिसमें संघ के कई बड़े दिग्गज नेता मौजूद थे और माना जाता है कि कोई भी बड़े फैसले से पहले समिति में बात रखी जाती है। इस बात से मुख्यमंत्री डॉ. यादव के पिछले दिनों दिल्ली के लगातार दौरे को भी जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की भी मंजूरी मानी जा रही है।  रिपोर्ट के मुताबिक ये भी कहानी सामने आ रही है कि मंत्रिमंडल विस्तार में इंदौर का नाम भी है जिसमें मालिनी गौड़ प्रमुखता से है तो दूसरे पायदान पर मनोज पटेल है। हालांकि विधायक उषा ठाकुर भी खासा प्रयास कर रही हैं जिसके लिए उन्होंने भोपाल-दिल्ली एक कर रखा है। उनके अलावा संभाग से अर्चना चिटनीस का नाम भी है। वहीं भूपेंद्र सिंह, गोपाल भार्गव, बृजेंद्र सिंह यादव और रीति पाठक के नाम भी मंत्री बनने वाले विधायकों की फेहरिस्त में हैं। ये नाम तो मंत्री बनने के दावेदारों के है, लेकिन कुछ नाम ऐसे दिग्गजों के भी हैं जिनके इस्तीफे भी हो सकते हैं। संतुलन बनाने का होगा प्रयास मंत्रिमंडल विस्तार में जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन बनाने का भी प्रयास किया जाएगा। हालांकि निगम मंडल और प्राधिकरणों में जो नियुक्ति हो रही है जिसमें मोहन सरकार व भाजपा का संगठन इस बात का बारीकी से ध्यान रख रहा है। भविष्य में होने वाले चुनाव को लेकर भी अभी से बिसात जमाई जा रही है ताकि सभी वर्गों की नाराजगी को दूर किया जा सके।

2 मई से MP में अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू, पुराने आवेदकों के लिए प्रोफाइल अपडेट जरूरी, चयन मेरिट के आधार पर

भोपाल  मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए MP अतिथि शिक्षक भर्ती (Guest Teacher Recruitment) की प्रक्रिया का बिगुल फूंक दिया है। इस बार विभाग ने पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए अतिथि शिक्षक पोर्टल 3.0 शुरू किया गया है। 2 मई 2026 से शुरू होने वाली इस प्रक्रिया के तहत प्रदेश भर के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में विषयवार पद करीब 10 हजार पदों को भरने की तैयारी है। हाल ही में अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे अतिथि शिक्षकों के लिए यह बड़ी खबर है, क्योंकि अब चयन का आधार पूरी तरह से डिजिटल स्कोर कार्ड और मेरिट होगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना सत्यापन के किसी भी आवेदक का स्कोर कार्ड जनरेट नहीं होगा, जिससे वह भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेगा। इसलिए सभी इच्छुक कैंडिडेट्स को तय समयसीमा में जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। विभाग ने पदों की कुल संख्या स्पष्ट नहीं की है, लेकिन यह प्रक्रिया प्रदेश के स्कूलों में विषयवार रिक्त करीब 10 हजार पदों को भरने के लिए संचालित की जा रही है। इसमें प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के शिक्षकों की आवश्यकता के अनुसार चयन किया जाएगा। एमपी अतिथि शिक्षक भर्ती 2026 आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर अपनी प्रक्रिया पूरी करें, क्योंकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम तिथि के बाद कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। पोर्टल 3.0 पंजीकरण और प्रोफाइल अपडेट की प्रक्रिया इस वर्ष भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी।  1. नए आवेदकों के लिए (For New Applicants) जो अभ्यर्थी पहली बार अतिथि शिक्षक के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें पोर्टल 3.0 पर फ्रेश रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसमें उन्हें अपनी व्यक्तिगत जानकारी, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी के माध्यम से अपनी आईडी जनरेट करनी होगी। 2. पूर्व रजिस्टर्ड उम्मीदवारों के लिए (For Old Applicants) पहले से पंजीकृत उम्मीदवारों को अपनी पुरानी आईडी से लॉगिन कर प्रोफाइल अपडेट (Profile Update) करना अनिवार्य है। इसमें उन्हें अपनी नवीनतम शैक्षणिक योग्यता, व्यावसायिक डिग्री (B.Ed/D.El.Ed) और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के अंक अपडेट करने होंगे। डाक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन और स्कोर कार्ड अतिथि शिक्षक भर्ती में सबसे जरूरी डाक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन है। बिना वेरिफिकेशन के आवेदक का स्कोर कार्ड (Score Card) जनरेट नहीं होगा, और बिना स्कोर कार्ड के भर्ती प्रक्रिया में शामिल होना असंभव है। पुराने कैंडिडेट्स को करनी होगी प्रोफाइल अपडेट भर्ती पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से “अतिथि शिक्षक पोर्टल 3.0” पर की जाएगी। नए आवेदकों को पहले पंजीयन करना होगा, जबकि पुराने उम्मीदवारों को अपनी प्रोफाइल अपडेट करनी होगी। इसके बाद सभी आवेदकों को अपने शैक्षणिक, व्यावसायिक योग्यता और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़े दस्तावेज अपलोड करने होंगे। प्रोफाइल लॉक करने के बाद आवेदकों को संकुल प्राचार्य के माध्यम से दस्तावेजों का सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। सत्यापन के बाद ही स्कोर कार्ड तैयार किया जाएगा, जो मेरिट तय करने का आधार बनेगा। साथ ही, इस बार पहले ही विभाग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम तिथि के बाद किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। वेरिफिकेशन की प्रक्रिया     आवेदकों को पोर्टल पर अपने डाक्यूमेंट्स अपलोड करने के बाद संकुल प्राचार्य (Cluster Principal) के पास मूल डाक्यूमेंट्स के साथ जाना होगा।     प्राचार्य ओटीपी के माध्यम से पोर्टल पर जानकारी को एक्सेप्ट या रिजेक्ट करेंगे।     यदि आवेदन रिजेक्ट होता है, तो आवेदक उसे सुधार कर दोबारा जमा कर सकता है। चयन का आधार: मेरिट और स्कोर कार्ड  अतिथि शिक्षकों का चयन मेरिट के आधार पर होगा।      शैक्षणिक योग्यता (Academic Record): 10वीं, 12वीं और ग्रेजुएट/पोस्टग्रेजुएट के अंक।     व्यावसायिक योग्यता: बी.एड (B.Ed) या डी.एल.एड के अंक।     पात्रता परीक्षा (TET): शिक्षक पात्रता परीक्षा में प्राप्त अंकों को विशेष वेटेज दिया जाएगा।     अनुभव: पूर्व में अतिथि शिक्षक के रूप में किए गए कार्य का अनुभव अंक। सावधानियां और निर्देश      अधूरी योग्यता: यदि बी.एड या अन्य कोर्स का रिजल्ट वेटिंग है, तो वेरिफिकेशन नहीं होगा।     मल्टीपल आईडी: यदि किसी आवेदक के पास एक से अधिक आईडी है, तो अनुभव प्रमाण पत्र मर्ज कराना अनिवार्य है।     डाक्यूमेंट्स: बिना ओरिजिनल डॉक्यूमेंट के संकुल प्राचार्य (Cluster Principal) वेरिफिकेशन नहीं करेंगे। अधिकारियों की जवाबदेही और निगरानी   लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इस प्रक्रिया की निरंतर निगरानी करें। किसी भी स्तर पर लापरवाही होने पर कार्रवाई की जाएगी। नाराजगी देख बदली व्यवस्था अतिथि शिक्षकों ने 29 अप्रैल को भोपाल के अंबेडकर पार्क में बड़ा आंदोलन किया था। अतिथि शिक्षक सरकार द्वारा वार्षिक अनुबंध का वादा तोड़ने और डीपीआई द्वारा 30 अप्रैल से कार्यमुक्त करने से नाराज हैं। उनके आंदोलन से प्रदेश में सरकार की छवि पर खराब असर पड़ने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग हरकत में आया है। उनकी नाराजगी को संभालने के लिए डीपीआई द्वारा नए शैक्षणिक सत्र के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया के संबंध में नया आदेश जारी किया है। 

प्रदेश की विमानन नीति की सफलता में जोड़ें नए आयाम

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विमानन क्षेत्र में मध्यप्रदेश को देश का रोल मॉडल बनाने के प्रयास किए जाएं। प्रदेश के दूरस्थ इलाकों के साथ ही पड़ौसी राज्यों के यात्रियों को भी विमानन सेवाएं लाभान्वित करती हैं। मध्यप्रदेश के पर्यटन क्षेत्र का महत्व बढ़ाने की दृष्टि से भी ये सेवाएं महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में हुई बैठक में विमानन विभाग के कार्यों की जानकारी प्राप्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विमानन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में विकसित होने वाले मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के परिसर में हैलीपेड निर्माण को प्राथमिकता दी जाए। हैली सेवाओं के विस्तार के लिए हैलीपेड निर्माण में निजी क्षेत्र का सहयोग प्राप्त किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने उज्जैन एयरपोर्ट के विकास के लिए संचालित कार्यों को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि उज्जैन एयरपोर्ट में एयरफील्ड का कुल क्षेत्रफल 95 एकड़ है। राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार उज्जैन एयरपोर्ट 2700 मीटर लंबाई के रनवे के साथ कुल 4 हजार 100 मीटर लंबाई में विकसित होगा। इसके लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के लिए 590 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि स्वीकृत की जा चुकी है। सिंहस्थ:2028 के दृष्टिगत श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए एयरपोर्ट उपयोगी होगा। उन्होंने निर्देशित किया कि एयरपोर्ट के विकास के सभी कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण किया जाए। बैठक में पीएम हेली पर्यटन सेवा के संचालन के संबंध में भी चर्चा हुई। रोजगारपरक एविएशन पाठ्यक्रम का लाभ युवाओं को दिलवाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में विमानन सेवाओं के विस्तार के साथ दक्ष पायलट और अन्य प्रशिक्षित अमले की आवश्यकता होगी। नई शिक्षा नीति में एविएशन पाठ्यक्रम को रोजगारपरक शिक्षा की श्रेणी में शामिल किया गया है। उन्होंने प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा एविएशन कोर्स का लाभ युवाओं को दिलवाने के लिये प्रयास करने के ‍निर्देश दिये। सफल है प्रदेश की विमानन नीति, रीवा से 24 हजार यात्रियों ने उठाया हवाई सेवा का लाभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 गत फरवरी 2025 में जारी की गई थी। नीति में विमानन क्षेत्र की समग्र वैल्यू चैन के लिए कई तरह के प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। मध्यप्रदेश से बनारस और पटना जैसे बड़े नगरों के लिए विमान सेवा प्रारंभ करने का प्रयास किया जाए ताकि धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिले। प्रदेश की विमानन नीति की सफलता में नए आयाम जोड़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विमानन नीति की सफलता के लिए विभाग के अधिकारियों को बधाई दी। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के एयरपोर्ट से नए गंतव्यों को हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए वित्तीय सहायता भी शिड्यूल्ड ऑपरेटर्स को दी जा रही है। मध्यप्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 की सफलता का ही यह प्रमाण है कि गत छह माह में रीवा से 24 हजार यात्रियों ने हवाई सेवा का लाभ उठाया है। रीवा से दिल्ली, रीवा से रायपुर सप्ताह में तीन दिन और रीवा से इंदौर प्रतिदिन फ्लाइट उपलब्ध है। गत चार माह में रीवा से इंदौर की ऑक्यूपेंसी 85 प्रतिशत और गत डेढ़ माह में रीवा से रायपुर की ऑक्यूपेंसी 80 प्रतिशत से अधिक है। रीवा- नई दिल्ली फ्लाइट की ऑक्यूपेंसी भी 70 प्रतिशत से अधिक है। बैठक में अपर मुख्य सचिव विमानन विभाग  संजय कुमार शुक्ला, मुख्यमंत्री के सचिव  आलोक कुमार सिंह, सचिव वित्त  लोकेश जाटव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।  

राजस्थान वन विभाग का बड़ा फैसला: लेपर्ड को मारने से पहले DNA जांच जरूरी

जयपुर  राजस्थान में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के बीच राज्य वन विभाग ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अब किसी भी लेपर्ड को 'आदमखोर' घोषित कर उसे मारने की अनुमति देना आसान नहीं होगा। चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन के.सी.ए. अरुणप्रसाद द्वारा जारी की गई नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर में स्पष्ट किया गया है कि लेपर्ड को 'आदमखोर' श्रेणी में डालने के लिए अब पुख्ता वैज्ञानिक और कानूनी साक्ष्यों की आवश्यकता होगी। बिना फॉरेंसिक जांच नहीं होगा फैसला नई गाइडलाइन के अनुसार, यदि किसी लेपर्ड पर इंसानों पर हमला करने या उन्हें खाने का संदेह है, तो केवल अनुमान के आधार पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। विभाग को अब निम्नलिखित प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी-     डीएनए विश्लेषण: घटनास्थल पर मिले बालों, लार या अन्य नमूनों का मिलान संदिग्ध जानवर से करना होगा।     फॉरेंसिक साक्ष्य: हमले के निशान और अन्य फॉरेंसिक एविडेंस की जांच अनिवार्य कर दी गई है।     वैज्ञानिक निगरानी: हमले वाले क्षेत्र में ट्रैप कैमरे और ड्रोन के जरिए लेपर्ड के व्यवहार की निगरानी की जाएगी। मारना नहीं, पकड़ना होगी पहली प्राथमिकता SOP में यह भी साफ किया गया है कि अगर किसी लेपर्ड को 'आदमखोर' मान भी लिया जाता है, तब भी पहली प्राथमिकता उसे जीवित पकड़ने की होगी। उसे मारने का आदेश केवल अंतिम विकल्प के रूप में और चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन की लिखित अनुमति के बाद ही दिया जा सकेगा। भीड़ पर लगेगी लगाम अक्सर रेस्क्यू के दौरान उमड़ने वाली भीड़ लेपर्ड को हिंसक बना देती है। अब ऐसे संवेदनशील ऑपरेशन्स के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (पूर्व में 144) लागू की जाएगी। पुलिस को भीड़ हटाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि वैज्ञानिक तरीके से जांच पूरी की जा सके। हर जिले में रैपिड रिस्पांस टीमें होगी तैनात वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि हैबिटेट के विखंडन के कारण लेपर्ड आबादी के करीब आ रहे हैं। इस नई नियमावली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी बेगुनाह जानवर को महज लोगों के गुस्से या डर के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े। अब हर जिले में रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात रहेंगी, जो आधुनिक उपकरणों और वैज्ञानिक डेटा के आधार पर ऐसे संकटों का समाधान करेंगी।

छत्तीसगढ़ में तबादलों की लिस्ट जारी: परिवहन विभाग के 20 RTO अधिकारी इधर से उधर

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार के परिवहन विभाग ने राज्य में सुचारू परिवहन व्यवस्था और प्रशासनिक कसावट लाने के उद्देश्य से 20 अधिकारियों का तबादला आदेश जारी किया है। महानदी भवन से जारी इस आदेश में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों से लेकर तकनीकी अधिकारियों के नाम शामिल हैं। आदेश के अनुसार, कई जिलों के जिला परिवहन अधिकारियों को बदला गया है। कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार हैं…     विवेक सिन्हा: जिला परिवहन अधिकारी (कोरबा/पेंड्रा) से अब जांजगीर-चांपा भेजे गए हैं।     अतुल असैया: जिला परिवहन अधिकारी (कोण्डागांव) से अब कोरबा की जिम्मेदारी संभालेंगे।     गौरव साहू: जांजगीर-चांपा से स्थानांतरित कर रायगढ़ का जिला परिवहन अधिकारी बनाया गया है।     अब्दुल मुजाहिद: जिला परिवहन अधिकारी (धमतरी) से परिवहन मुख्यालय, नवा रायपुर स्थानांतरित किए गए हैं।     अनिल भगत: कोरिया से राजनांदगांव (अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी) भेजे गए हैं। तकनीकी और मुख्यालय स्तर पर बदलाव सूची में एआरटीओ योगेश भण्डारी (बालोद), किशनलाल माहौर (बेमेतरा) और शिवभगत रावटे (धमतरी) जैसे नाम भी शामिल हैं जिन्हें नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इसके अलावा, तकनीकी विभाग से चुन्नीलाल देवांगन को भी मुख्यालय, नवा रायपुर में पदस्थ किया गया है।  

योगी सरकार का बड़ा फैसला, आयुष कॉलेजों में नई चिकित्सा पद्धतियों को मिलेगा स्थान

 लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब पारंपरिक और प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने जा रहा है। आयुष प्रणालियों को नई ऊंचाई देने के लिए योगी सरकार ने प्रदेश के आयुष कॉलेजों में 2500 वर्ष पुरानी तिब्बती चिकित्सा प्रणाली ‘सोवा रिग्पा’ (अमची चिकित्सा) और दक्षिण भारत की प्रसिद्ध 'सिद्ध' पद्धति की पढ़ाई शुरू करने की ऐतिहासिक तैयारी की है। इस कदम का उद्देश्य न केवल सदियों पुरानी चिकित्सा विधाओं को पुनर्जीवित करना है, बल्कि जटिल और दीर्घकालिक बीमारियों के लिए मरीजों को किफायती और प्रभावी वैकल्पिक उपचार प्रदान करना भी है। योगी सरकार की हरी झंडी: डिग्री के साथ मिलेगा रजिस्ट्रेशन का अधिकार प्रमुख सचिव आयुष, रंजन कुमार के अनुसार, योगी सरकार ने इन दोनों पद्धतियों के डिग्री कोर्स शुरू करने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी है। अब चयनित आयुष कॉलेजों में जरूरी बुनियादी ढांचे और पाठ्यक्रम का विकास किया जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन कोर्सों को पूरा करने वाले चिकित्सकों का विधिवत पंजीकरण (Registration) किया जाएगा। इससे डिग्री धारक डॉक्टर अधिकृत रूप से अपने क्लीनिक और उपचार केंद्र खोल सकेंगे, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। वाराणसी बनेगा रिसर्च और ट्रेनिंग का ग्लोबल हब सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य केंद्र भगवान शिव की नगरी वाराणसी होगी। वाराणसी को सोवा रिग्पा के प्रमुख शोध, प्रशिक्षण और उपचार केंद्र (Hub) के रूप में विकसित किया जाएगा। चूंकि काशी पहले से ही आयुर्वेद और आध्यात्मिक चिकित्सा की जननी रही है, इसलिए यहाँ सोवा रिग्पा और सिद्ध पद्धति का एकीकरण जटिल रोगों पर वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देगा। यह केंद्र विशेष रूप से उन बीमारियों के उपचार पर केंद्रित होगा जहां आधुनिक चिकित्सा के साथ पूरक उपचार (Complementary Therapy) की आवश्यकता होती है। असाध्य रोगों का रामबाण इलाज: क्या है सोवा रिग्पा और सिद्ध पद्धति? तिब्बत से निकली 'सोवा रिग्पा' पद्धति हिमालयी क्षेत्रों में अपनी प्रभावशीलता के लिए प्रसिद्ध है, जो शरीर, मन और पर्यावरण के संतुलन पर काम करती है। यह गठिया, पाचन विकार, मानसिक तनाव और कैंसर जैसे रोगों के उपचार में सहायक मानी जाती है। वहीं, दक्षिण भारत की 'सिद्ध' पद्धति वात, पित्त और कफ के दोषों को संतुलित कर जीवनशैली और प्राकृतिक औषधियों के जरिए स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती है। योगी सरकार का लक्ष्य आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी के साथ इन पद्धतियों को मुख्यधारा में लाकर उत्तर प्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं का 'वन स्टॉप डेस्टिनेशन' बनाना है।  

असंगठित मजदूरों के लिए नई योजना, स्वास्थ्य से आवास तक मिलेगा लाभ

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार श्रमिकों के लिए ठोस और दीर्घकालिक राहत की दिशा में काम कर रही है। अब तक अस्थायी कैंपों में मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं के बजाय श्रमिकों को स्थायी और कैशलेस इलाज से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही उनके लिए किफायती और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हॉस्टल सुविधा शुरू करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। 8.42 करोड़ असंगठित श्रमिकों का डेटा दर्ज आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष में कारखानों में 2.77 लाख पुरुष और 23,941 महिला श्रमिक पंजीकृत थे। वहीं, ई-श्रम पोर्टल पर प्रदेश के 8.42 करोड़ असंगठित श्रमिकों का डेटा दर्ज है, जिनमें से 7.06 करोड़ से अधिक को राशन कार्ड उपलब्ध कराए जा चुके हैं। लेटेस्ट और ट्रेंडिंग स्टोरीज करीब 35 लाख श्रमिक, जो पहले खाद्य सुरक्षा योजना से वंचित थे, उन्हें भी अब इसमें शामिल किया गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में श्रमिक अभी भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर हैं। श्रम विभाग नई स्वास्थ्य योजनाएं तैयार कर रहा प्रदेश में कई श्रमिक ईएसआई और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं और उन्हें समय-समय पर अस्थायी स्वास्थ्य कैंपों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए श्रम विभाग नई स्वास्थ्य योजनाएं तैयार कर रहा है। प्रस्ताव है कि ऐसे श्रमिकों को मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें अस्पताल में भर्ती, सर्जरी, जांच और दवाओं की कैशलेस सुविधा मिल सके। श्रमिकों के लिए हॉस्टल सुविधा शुरू करने पर भी काम सरकार श्रमिकों के लिए हॉस्टल सुविधा शुरू करने पर भी काम कर रही है, जिससे उन्हें सुरक्षित और सस्ती आवासीय व्यवस्था मिल सके। साथ ही, श्रमिकों के बच्चों के लिए चल रही छात्रवृत्ति योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की योजना है। वर्तमान में, जिन श्रमिकों की मासिक आय 24 हजार रुपये से कम है, उनके लिए श्रम कल्याण परिषद आठ योजनाएं संचालित कर रही है। जागरूकता की कमी के कारण इन योजनाओं में आवेदन कम इन योजनाओं के तहत बच्चों की शिक्षा, खेल, कन्यादान और धार्मिक पर्यटन के लिए 2,500 रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है। हालांकि, जागरूकता की कमी के कारण इन योजनाओं में आवेदन अपेक्षाकृत कम हैं। केंद्र सरकार द्वारा 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार नई श्रम संहिताएं लागू की गई हैं, जिनका उद्देश्य श्रमिकों और उद्योग दोनों के हितों की रक्षा करना है। प्रदेश में नियमावली तैयार की जा रही है इनमें वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां (OSH) संहिता और सामाजिक सुरक्षा संहिता शामिल हैं। इन संहिताओं के आधार पर प्रदेश में नियमावली तैयार की जा रही है, जिसके लागू होने से श्रमिकों के हित में कई योजनाओं को और गति मिलने की उम्मीद है।  

कपास का अच्छा भाव भी नहीं लुभा पा रहा किसान, 60% तक घट सकता रकबा

 ढिगावा मंडी  हरियाणा में कपास की खेती करने में किसान रूचि नहीं दिखा रहे हैं। मार्केट में अच्छा भाव मिलने के बावजूद भी किसानों का कपास से मोह भंग हो चुका है। मार्केट में नरमा कपास इस समय आठ से 10 हजार रुपये क्विंटल बिक रही है। इसके बावजूद किसान कपास की फसल की बिजाई करने में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे। जिसके कारण पिछले साल से 60 से 65 प्रतिशत तक कपास का रकबा घट सकता है। कपास की फसल से किसानों का मोह भंग होने का कारण गुलाबी सुंडी है। गुलाबी सुंडी ने पिछले साल कपास की फसल में कहर ढाया था। जिसके कारण किसानों ने समय से पहले कपास की फसल काटकर अगली फसल की बिजाई कर दी थी। सरकार और कृषि विभाग को भी पहले से ही इस बार कपास का रकबा घटने का अंदेशा था। जिसके चलते गुलाबी सुंडी पर नियंत्रण पाने के लिए खरीफ सीजन से पहले ही प्रयास शुरू कर दिए गए थे। अधिकारियों ने किया था किसानों से संपर्क कृषि विभाग के अधिकारियों ने काटन मिल में जाकर निरीक्षण किया और वहां रखे बिनौले को ढक कर रखने के आदेश दिए थे, ताकि बिनौले से निकल कर गुलाबी सुंडी का फैलाव ना हो। वहीं खेतों में रखे कपास के फसल अवशेष (लकड़ी) भी उठाने या नष्ट करने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से संपर्क किया। ताकि फसल अवशेष में अगर गुलाबी सुंडी है, तो वो भी नष्ट हो जाए और कपास की अगली फसल में जाए। लेकिन कृषि विभाग के प्रयासों के बावजूद कपास की फसल की बिजाई करने में किसान कम रुचि ले रहे हैं। पिछले साल एक लाख 52 हजार एकड़ में कपास की फसल थी भिवानी जिले का लोहारू, बहल क्षेत्र कपास उत्पादन के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यहां के किसान बाजरा, ग्वार, मूंग की फसलों का रुख कर रहे हैं। दैनिक जागरण टीम ने किसानों से इस बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि भूजल स्तर तेजी से गिरना, समर्थन मूल्य पर अनिश्चितता, गुलाबी सुंडी व सफेद मक्खी का प्रकोप किसानों ने कपास की खेती छोड़ने का प्रमुख कारण बताया। बता दें की भिवानी जिले में पिछले साल एक लाख 52 हजार एकड़ में कपास की फसल थी। 15 मई तक कपास की बिजाई के लिए अनुकूल समय माना जाता है, लेकिन अभी तक नाममात्र एकड़ पर ही कपास की बिजाई हो पाई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में आठ से 10 हजार एकड़ में और कपास की बिजाई हो सकती है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अगले पांच दिन मौसम कपास फसल बिजाई के लिए अनुकूल है। क्योंकि वर्षा से तेजी से बढ़ रहे तापमान में गिरावट आई है।

झारखंड: सरायकेला में 43°C तापमान, स्वास्थ्य सेवाएं हुईं प्रभावित

 सरायकेला सरायकेला-खरसावां जिले में बढ़ते तापमान और लू की मार ने स्वास्थ्य सेवाओं को हांफने पर मजबूर कर दिया है। सरायकेला के सदर अस्पताल व प्रखंडों के स्वास्थ्य केंद्रों में डायरिया, उल्टी, लूज मोशन और हीटस्ट्रोक से ग्रस्त मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सदर अस्पातल में प्रत्येक दिन डायरिया, बुखार व हीटस्ट्रोक से पीड़ित पांच से छह मरीजों को प्रतिदिन सदर अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है सरायकेला सदर अस्पताल के ओपीडी में रोजाना 230 से 260 के करीब मरीज पहुंचते हैं लेकिन गर्मी के कारण रोजाना 300 से अधिक मरीज यहां पहुंच रहे हैं। यहां 50 से 60 मरीज कमजोरी, चक्कर और डिहाइड्रेशन की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। यही हाल पूरे जिले के अस्पतालों का है। जहां मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। गर्मी के कारण पानी की कमी से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो रहा है। यह मौसमी बीमारी का प्रकोप है, जो गंदे पानी, प्रदूषित भोजन और अत्यधिक गर्मी से जुड़ा है। जिले का तापमान 43 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है, जिससे ग्रामीण इलाकों में स्थिति गंभीर है। लू लगने के प्रमुख लक्षण     तेज बुखार: शरीर का तापमान अचानक 103-104°F या उससे ऊपर होना।     त्वचा में बदलाव: त्वचा का बहुत गर्म, लाल और शुष्क (रूखा) हो जाना, पसीना आना बंद हो जाना।     सिरदर्द और चक्कर: तेज सिरदर्द और कमजोरी के साथ चक्कर आना।     उल्टी और जी मिचलाना: लगातार जी मिचलाना या उल्टी होना।     तेज धड़कन और सांस: दिल की धड़कन तेज होना और सांस लेने में तकलीफ।     मांसपेशियों में ऐंठन: शरीर में अकड़न या जकड़न महसूस होना।     गर्मी के कारण हीटस्ट्रोक के मरीजों में इजाफा हुआ है। इस मौसम में ताजे फल जैसे तरबूज, खीरा, नींबू-पानी और छाछ को आहार में शामिल करें। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप से पूरी तरह परहेज करें। हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें, सिर पर टोपी या छाता इस्तेमाल करें। –

टाइगर सफारी फर्जीवाड़ा: रणथंभौर में गाइडों पर सख्ती, वनकर्मी पर नरमी से विवाद

 सवाई माधोपुर  विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) में फर्जी टिकट के जरिए टाइगर सफारी कराने के गंभीर मामले में वन प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. डीएफओ मानस सिंह ने जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए गए दो नेचर गाइडों के पार्क में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. हालांकि, इस पूरी कार्रवाई में वन विभाग के ही एक कर्मचारी को मिली 'राहत' ने विभाग की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. 30 मार्च को हुआ था फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ यह पूरा मामला 30 मार्च 2026 की सुबह की पारी का है. जोन नंबर 1 में गश्ती दल ने जब कैंटर नंबर RJ-25-TA-1862 की जांच की, तो उसमें दो पर्यटक बिना किसी वैध टिकट के सफारी करते पाए गए. डीएफओ मानस सिंह के निर्देश पर एसीएफ महेश शर्मा ने जब मौके पर जांच की, तो पर्यटकों ने खुलासा किया कि उन्होंने एक एजेंट को 8000 रुपये देकर सफारी बुक की थी और उसकी रसीद भी पेश की. जांच में सामने आया कि इन पर्यटकों को फर्जी तरीके से पार्क में प्रवेश कराया गया था. गाइडों पर एक्शन, गार्ड पर मेहरबानी? सहायक वन संरक्षक (ACF) निखिल शर्मा की जांच रिपोर्ट में नेचर गाइड हरविंदर सिंह और जगदीश को वाइल्डलाइफ नियमों की अनदेखी और फर्जीवाड़े का दोषी माना गया. इसके आधार पर डीएफओ ने दोनों पर पार्क में प्रवेश का प्रतिबंध लगा दिया. लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इसी जांच में दोषी पाए गए फॉरेस्ट गार्ड भीम सिंह चौधरी को महज 17 सीसी (17CC) की चार्जशीट देकर छोड़ दिया गया. इतना ही नहीं, दोषी गार्ड को रणथंभौर के महत्वपूर्ण 'जोगी महल' प्रवेश द्वार पर तैनात कर अतिरिक्त चार्ज भी सौंप दिया गया है. विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल फर्जी टिकट जैसे गंभीर भ्रष्टाचार के मामले में नेचर गाइडों पर तो सख्त गाज गिरी है, लेकिन विभाग के अपने कर्मचारी पर दिखाई गई इस 'मेहरबानी' से अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं. सवाल यह है कि जब जांच में गार्ड द्वारा 'सिंह द्वार' से पर्यटकों को अवैध रूप से बैठाने की बात साबित हो चुकी है, तो उसे दंडित करने के बजाय इनाम के तौर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्यों दी गई?