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मई महीने की शुरुआत और अंत दोनों पूर्णिमा से, बना दुर्लभ धार्मिक संयोग

 आज से मई का महीना शुरू हो चुका है. ज्योतिषियों के मुताबिक, मई का महीना धार्मिक नजरिए से बेहद खास माना जा रहा है. दरअसल, मई में एक अनोखा संयोग बन रहा है, जहां महीने की शुरुआत और समापन दोनों ही पूर्णिमा से होगा. ऐसे योग बहुत कम देखने को मिलते हैं, इसलिए इस पूरे महीने को पूजा-पाठ, स्नान और दान के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है. इस दिन पूरे महीने श्रीहरि और मां लक्ष्मी की पूजा करें और मनोकामना पूर्ति के लिए उनके आगे तेल का दीपक भी जलाएं. पूर्णिमा से होगी महीने की शुरुआत मई की शुरुआत 1 तारीख को वैशाख पूर्णिमा से हो रही है, जिसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है. यह दिन हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों में बहुत पवित्र माना जाता है. इस दिन लोग सुबह स्नान करके पूजा करते हैं और जरूरतमंदों को दान देते हैं. मान्यता है कि इस दिन किए गए अच्छे कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है. बुद्ध पूर्णिमा का खास महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और जल दान करना बहुत शुभ होता है. वहीं बौद्ध धर्म में यह तिथि इसलिए खास है क्योंकि इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था. इसलिए यह दिन आध्यात्म और साधना के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है. महीने का अंत भी होगा पूर्णिमा पर दिलचस्प बात यह है कि मई का आखिरी दिन यानी 31 मई को भी पूर्णिमा तिथि पड़ेगी. यह ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा होगी, जो अपने आप में बहुत विशेष मानी जाती है. अधिक मास में आने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. अधिक पूर्णिमा क्यों मानी जाती है खास? अधिकमास करीब ढाई से तीन साल में एक बार आता है और इस दौरान आने वाली पूर्णिमा को बहुत पुण्यदायक माना जाता है. इसे पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा भी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि और शांति मिलने की मान्यता है. शास्त्रों में महत्व धार्मिक ग्रंथों में इस पूर्णिमा को बहुत फलदायी बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन किए गए व्रत, पूजा और दान से व्यक्ति को सफलता और सकारात्मक परिणाम मिलते हैं. इसे ‘सर्व सिद्धिदायिनी’ तिथि भी कहा जाता है. इन कामों को करना रहेगा शुभ इस पूरे महीने में खासतौर पर पूर्णिमा के दिन व्रत रखना, भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना और सत्यनारायण कथा सुनना लाभकारी माना जा रहा है. इसके अलावा गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करके अन्न, कपड़े और धन का दान करना भी बहुत शुभ माना गया है.

लखनऊ: गंगा एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/घंटा स्पीड लिमिट, टोल दरें तय

लखनऊ गंगा एक्सप्रेसवे पर फिलहाल वाहन बिना टोल का भुगतान किए ही दौड़ेंगे। टोल की दरें तय जरूर कर दी गई हैं पर उसकी वसूली शुरू होने में अभी लगभग दो सप्ताह का वक्त लगेगा। सूत्रों के अनुसार, लगभग 15 दिन बाद टोल की वसूली शुरू हो सकेगी। इससे पूर्व गंगा एक्सप्रेसवे के लिए निर्धारित टोल दरों के प्रस्ताव को कैबिनेट से स्वीकृत कराया जाएगा। इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों के लिए अधिकतम रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अभी गंगा एक्सप्रेसवे पर दो पहिया, तीन पहिया और पंजीकृत ट्रैक्टर के लिए टोल दर 1.28 रुपये प्रति किलोमीटर तय की गई है। ऐसे ही कार, जीप, वैन व हल्के वाहन के लिए 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर, हल्के वाणिज्यिक वाहन, हल्के माल वाहन के लिए 4.05 रुपये प्रति किलोमीटर, मिनी बस, बस व ट्रक के लिए 8.20 रुपये प्रति किलोमीटर, भारी निर्माण मशीनरी, मिट्टी हटाने वाले वाहन के लिए 12.60 रुपये प्रति किलोमीटर तथा उपकरण व बहुएक्सल वाहन, अत्यधिक बड़े वाहन (सात व अधिक एक्सेल वाले) के लिए 16.10 रुपये प्रति किलोमीटर टोल दर तय की गई है। हर मौसम के अनुकूल है डामर की परत लखनऊ।गंगा एक्सप्रेसवे पर 594 किलोमीटर लंबे सफर को आरामदेह व सुरक्षित बनाने के लिए उच्च तकनीक का उपयोग किया गया है। इस एक्सप्रेसवे पर मौसूम अनुकूल डामर परत (डीबीएम) को 100 मिलीमीटर तक की मोटाई दी गई है। यह तकनीक सड़क को भीषण गर्मी और अत्यधिक बारिश के प्रभाव से सुरक्षित रखती है। इसके लिए 3.67.022 मीट्रिक टन डामर का इस्तेमाल किया गया। यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार एक्सप्रेसवे को मजबूती देने के लिए मिट्टी की मजबूती का पैमाना अपनाया गया है। कैलिफोर्निया बेयरिंग रेशियो (सीबीआर) का प्रयोग किया गया है, जिसकी वैल्यू आठ पर रखी गई है, जो एक अत्यंत स्थिर और ठोस आधार का प्रमाण है। एक्सप्रेसवे पर 19 करोड़ घन मीटर मिट्टी, 2,78,380 मिट्रिक टन स्टील, 14.83.313 मीट्रिक टन सीमेंट व 41.88 लाख घनमीटर रेत का भी प्रयोग किया गया है। संरचनात्मक मजबूती के हर पहलू को ध्यान में रखकर कार्य को पूरा कराया गया है। 154.58 लाख घनमीटर मिट्टी सड़क की निचली और ऊपरी परतों को ठोस स्वरूप देने के लिए प्रयोग की गई है। एक्सप्रेसवे के मुख्य कैरिजवे की कुल मोटाई 485 मिलीमीटर से 500 मिलीमीटर तक रखी गई है। यह आधा मीटर मोटी बहु-स्तरीय संरचना सुनिश्चित करती है कि सड़क भारी यातायात का दबाव आसानी से झेल सके। इस एक्सप्रेसवे की क्षमता 79 से 108 मिलियन स्टैंडर्ड एक्सल (एमएसए) तक मापी गई है। अधिकारियों का दावा है कि एक्सप्रेसवे करोड़ों भारी मालवाहक वाहनों के भार को बिना किसी संरचनात्मक क्षति के सहन करने की क्षमता रखता है। 254 लाख मैन-डेज का श्रम और लाखों टन उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री एक्सप्रेसवे को सुरक्षा की दृष्टि से भरोसेमंद बनाती हैं। डिजाइन क्रस्ट तकनीक से रखरखाव की लागत में भी कमी आएगी। यात्रा को आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अत्याधुनिक स्विस सेंसर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

अहमदाबाद जा रहे बच्चों की तस्करी का मामला, उज्जैन-नागदा में 26 नाबालिगों को रेस्क्यू किया गया

उज्जैन उज्जैन रेलवे स्टेशन पर गुरुवार रात बच्चों की तस्करी की सूचना पर बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। अंत्योदय एक्सप्रेस ट्रेन को उज्जैन और फिर नागदा स्टेशन पर रोककर पुलिस, बाल कल्याण समिति (CWC) और अन्य विभागों की टीम ने 26 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। जानकारी के मुताबिक, बाल कल्याण समिति को सूचना मिली थी कि करीब 100 बच्चों को मजदूरी के लिए मुजफ्फरनगर से अहमदाबाद ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही उज्जैन में चार थानों का बल, आरपीएफ, जीआरपी, श्रम विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम को अलर्ट किया गया। गुरुवार रात करीब 11 बजे जैसे ही अंत्योदय एक्सप्रेस उज्जैन स्टेशन पहुंची, टीम ने ट्रेन में सर्चिंग शुरू की। करीब आधे घंटे तक 50 से अधिक बच्चों और उनके साथ मौजूद लोगों से पूछताछ की गई, जिसमें शुरुआती तौर पर 4 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। इसी दौरान ट्रेन आगे बढ़ गई। रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहीं सीएसपी दीपिका शिंदे ने तत्काल नागदा स्टेशन को सूचना देकर ट्रेन रुकवाई। वहां एक घंटे तक चली सर्चिंग के बाद 22 और नाबालिग बच्चों को ट्रेन से उतारा गया। इस तरह कुल 26 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। नागदा से उतारे गए सभी बच्चे नाबालिग बताए जा रहे हैं, जिनमें से दो की उम्र 14 साल से भी कम है। सभी बच्चों को फिलहाल उज्जैन जीआरपी को सौंप दिया गया है। परिजनों से संपर्क कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, वहीं बच्चों को फिलहाल CWC उज्जैन में रखा जाएगा। पुलिस को आशंका है कि बच्चों को मजदूरी के लिए गुजरात ले जाया जा रहा था, हालांकि कुछ बच्चे सोमनाथ और अन्य स्थानों पर घूमने जाने की बात भी कह रहे हैं। मामले की जांच जारी है। श्रम विभाग की सहायक आयुक्त राखी जोशी के अनुसार, सूचना थी कि चार लोग 100 से अधिक नाबालिगों को गुजरात ले जा रहे हैं। फिलहाल यह पता लगाया जा रहा है कि बच्चों को किस उद्देश्य से और किन लोगों द्वारा ले जाया जा रहा था।

ipl 2026 में बड़ा बवाल: पराग वीडियो के बाद का सख्त रुख

नई दिल्ली आईपीएल 2026 के बीचों-बीच जब मैदान पर मुकाबले तेज होते जा रहे हैं, उसी समय राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals) के ड्रेसिंग रूम से उठी एक तस्वीर ने पूरे टूर्नामेंट की हवा बदल दी. कप्तान रियान पराग का वेपिंग करते वीडियो सामने आया और फिर जो हुआ, उसने सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि पूरी फ्रेंचाइजो को कठघरे में खड़ा कर दिया. कहानी यहीं खत्म नहीं होती. इससे कुछ दिन पहले ही टीम मैनेजर रोमी भिंडर डगआउट में मोबाइल इस्तेमाल करते कैमरे में कैद हुए थे. यानी मामला सिर्फ एक गलती का नहीं, बल्कि टीम कल्चर पर उठते सवालों का बन गया. इस बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने सख्त रुख दिखाया. पराग पर मैच फीस का 25% जुर्माना और एक डिमेरिट पॉइंट… लेकिन संकेत साफ था-  मामला सिर्फ खिलाड़ी तक सीमित नहीं रहेगा. टीम कल्चर पर समझौता नहीं- संगकारा का कड़ा संदेश कुमार संगकारा जो अपने शांत स्वभाव के लिए जाने जाते हैं, इस बार शब्दों में सख्ती लेकर सामने आए. दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ मुकाबले से ठीक पहले उन्होंने साफ कहा- 'ऐसी विवाद टीम के लिए किसी भी तरह से सकारात्मक नहीं होते. खिलाड़ियों को यह याद रखना होगा कि टीम की संस्कृति बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है.' संगकारा का यह बयान सिर्फ एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि ड्रेसिंग रूम के भीतर चल रही हलचल का संकेत था. साफ है- मैनेजमेंट अब ढील देने के मूड में नहीं है. नियम हैं या मजाक, वाह रे BCCI! रियान पराग की ‘हल्की सजा’ से क्या सीखेगी IPL की यंग ब्रिगेड? BCCI का अगला कदम? BCCI ने अपने बयान में यह भी साफ कर दिया कि वे फ्रेंचाइजी और उसके अधिकारियों पर भी कार्रवाई के विकल्प तलाश रहे हैं. सचिव देवजीत सैकिया ने भी संकेत दिए कि मामला अभी बंद नहीं हुआ है. यानी आने वाले दिनों में यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है और इसका असर टीम के अभियान पर भी पड़ सकता है. दिलचस्प बात ये है कि मैदान पर RR अभी भी प्लेऑफ की रेस में मजबूती से बनी हुई है…. लेकिन सवाल यही है- क्या ड्रेसिंग रूम का माहौल उनकी रफ्तार को तोड़ देगा? संगकारा ने पराग का बचाव करते हुए उनके हालिया छोटे, लेकिन अहम योगदान का जिक्र जरूर किया- 'उस छोटी पारी ने मैच का मोमेंटम बदल दिया.' लेकिन सच्चाई यह भी है कि आईपीएल जैसे हाई-प्रेशर टूर्नामेंट में सिर्फ रन नहीं, अनुशासन भी मैच जिताता है. अब सबकी नजर 1 मई को जयपुर में होने वाले मुकाबले पर है, जहां Rajasthan Royals का सामना Delhi Capitals से होगा. यह सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि उस टीम की परीक्षा होगी, जो मैदान के बाहर उठे तूफान को अंदर की ताकत में बदलना चाहती है.

जयपुर में भिड़ंत, क्या अक्षर पटेल की टीम बचा पाएगी प्लेऑफ की उम्मीद?

जयपुर राजस्थान रॉयल्स (आरआर) और दिल्ली कैपिटल्स (डीसी) के बीच शुक्रवार को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 का 43वां मैच सवाई मानसिंह स्टेडियम में खेला जाना है। डीसी की निगाहें इस मुकाबले को जीतकर प्वाइंट्स टेबल में अपनी स्थिति को बेहतर करने पर होंगी। डीसी के लिए यह मुकाबला बेहद अहम है। अगर जयपुर में हार मिली तो प्लेऑफ की उम्मीदों को बड़ा झटका लगेगा यानी उनके लिए यह मुकाबला 'करो या मरो' जैसा है। मुश्किल में दिल्ली की टीम दिल्ली कैपिटल्स इस समय दबाव में है। यह टीम 8 में से 5 मुकाबले गंवाकर प्वाइंट्स टेबल में फिलहाल 7वें पायदान पर है। इस टीम ने शुरुआती 2 मुकाबले जीतने के बाद अगले 6 में से 5 मैच गंवा दिए हैं। अक्षर पटेल की कप्तानी वाली इस टीम का सबसे हालिया मुकाबला बेहद निराशाजनक रहा था। डीसी को अरुण जेटली स्टेडियम में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के हाथों बड़ी हार का सामना करना पड़ा। यह टीम महज 8 रन पर 6 विकेट गंवाने के बाद 75 रन पर सिमट गई थी। आसान लक्ष्य को विपक्षी टीम ने 6.3 ओवरों में हासिल कर लिया। इस मैच ने दिल्ली कैपिटल्स की बल्लेबाजी और गेंदबाजी, दोनों ही विभागों की कमजोरियों को उजागर कर दिया था। टॉप 4 पर राजस्थान की नजरें दूसरी तरफ, आरआर अपने घरेलू मैदान पर जीत हासिल करते हुए टॉप-4 में अपनी जगह और मजबूत करना चाहेगी। राजस्थान रॉयल्स की टीम 9 में से 6 मैच जीतकर चौथे स्थान पर मौजूद है। इस टीम ने शुरुआती 4 मुकाबलों में जीत के साथ अपने अभियान की शानदार शुरुआत की थी। इसके बाद उसे अगले 5 में से 3 मैच गंवाने पड़े। रियान पराग की कप्तानी वाली यह टीम एक मनोबल बढ़ाने वाली जीत के बाद इस मुकाबले में उतर रही है, उन्होंने 223 रनों के विशाल लक्ष्य का सफलतापूर्वक पीछा करते हुए पंजाब किंग्स को इस सीजन की पहली हार का स्वाद चखाया था। रियान पराग की फॉर्म को लेकर टेंशन भले ही राजस्थान रॉयल्स को सही समय पर लय मिल गई, लेकिन कप्तान रियान पराग की फॉर्म को लेकर चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं, क्योंकि बल्ले से उनका प्रदर्शन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। फिर भी, पिछले मैच में उनका छोटा लेकिन असरदार योगदान टीम के लिए एक सही समय पर मिला प्रोत्साहन साबित हो सकता है, क्योंकि टीम अब टूर्नामेंट के निर्णायक दौर में प्रवेश कर रही है। उस मैच में मध्यक्रम के बल्लेबाजों का फिर से फॉर्म में आना भी मेजबान टीम के लिए एक उत्साहवर्धक संकेत है। राजस्थान रॉयल्स की टीम: शिमरोन हेटमायर, यशस्वी जयसवाल, ध्रुव जुरेल, लुआन-ड्रे प्रिटोरियस, रियान पराग (कप्तान), वैभव सूर्यवंशी, डोनोवन फरेरा, रवींद्र जड़ेजा, जोफ्रा आर्चर, नंद्रे बर्गर, क्वेना मफाका, संदीप शर्मा, युद्धवीर सिंह चरक, रवि बिश्नोई, सुशांत मिश्रा, रवि सिंह, अमन राव पेराला, एडम मिल्ने, कुलदीप सेन, दासुन शनाका, शुभम दुबे, तुषार देशपांडे, विग्नेश पुथुर, ब्रजेश शर्मा। दिल्ली कैपिटल्स की टीम: अभिषेक पोरेल, केएल राहुल, नितीश राणा, समीर रिजवी, ट्रिस्टन स्टब्स, अक्षर पटेल, अजय मंडल, आशुतोष शर्मा, कुलदीप यादव, मुकेश कुमार, विपराज निगम, मिचेल स्टार्क, त्रिपुराना विजय, डेविड मिलर, औकिब नबी डार, पथुम निसांका, लुंगी एनगिडी, साहिल पारख, पृथ्वी शॉ, काइल जैमीसन, टी नटराजन, माधव तिवारी, करुण नायर, दुष्मंथा चमीरा।  

अटारी बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी का नया समय, आज से लागू: अब शाम 6:30 बजे तक

अमृतसर  अटारी-वाघा बॉर्डर पर रोज़ाना आयोजित होने वाली मशहूर रिट्रीट सेरेमनी के समय में बदलाव किया गया है। प्रशासन के नए फैसले के अनुसार, अब यह देशभक्ति से भरपूर समारोह शाम 6:00 बजे शुरू होगा और 6:30 बजे तक चलेगा। पहले यह कार्यक्रम शाम 5:30 बजे शुरू होकर 6:00 बजे समाप्त होता था। अधिकारियों के मुताबिक, यह बदलाव मौसम और दिन के समय में हो रहे परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए किया गया है। साथ ही, इसका उद्देश्य पर्यटकों को बेहतर अनुभव देना और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुचारू बनाना भी है। हर दिन बड़ी संख्या में देश-विदेश से लोग इस अनोखे आयोजन को देखने के लिए यहां पहुंचते हैं। अब इस नए शेड्यूल पर होगा आयोजन नया समय आज यानी 1 मई से लागू कर दिया गया है, इसलिए यहां आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को अब इस नए शेड्यूल के अनुसार अपनी योजना बनानी होगी। भारत और पाकिस्तान के सैनिकों द्वारा किया जाने वाला यह बीटिंग रिट्रीट समारोह अनुशासन, जोश और देशभक्ति का प्रतीक माना जाता है। दर्शकों में गूंज उठता है ‘वंदे मातरम्’ का नारा हर शाम हजारों दर्शकों की मौजूदगी में “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” जैसे नारों से पूरा माहौल गूंज उठता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे समय से पहले पहुंचें ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके और इस शानदार समारोह का पूरा आनंद लिया जा सके। मौसम और दिन की घटती-बढ़ती रोशनी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह फैसला लिया है। अधिकारियों का कहना है कि दर्शकों को बेहतर अनुभव देने और सुरक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए समय में यह बदलाव जरूरी था। अटारी-वाघा बॉर्डर पर हर रोज होने वाली इस देशभक्ति से भरपूर सेरेमनी को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। देशभक्ति की झलक देखने को मिलती है यह नया समय आज यानी 1 मई से लागू कर दिया गया है। यानी अब जो भी पर्यटक या स्थानीय लोग इस सेरेमनी को देखने की योजना बना रहे हैं, उन्हें नए समय के अनुसार ही पहुंचना होगा। बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी भारत और पाकिस्तान के सैनिकों द्वारा की जाने वाली एक विशेष परंपरा है, जिसमें जोश, अनुशासन और देशभक्ति की झलक देखने को मिलती है। हजारों लोग बनते हैं आयोजन का हिस्सा हर दिन हजारों लोग इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं और भारत माता की जय तथा वंदे मातरम जैसे नारों से माहौल देशभक्ति से गूंज उठता है। इस बदलाव के बाद उम्मीद है कि लोग समय से पहुंचकर इस अद्भुत दृश्य का आनंद ले पाएंगे। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे समय का विशेष ध्यान रखें और निर्धारित समय से पहले ही पहुंचकर अपनी सीट सुनिश्चित करें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।

GT ने RCB को 4 विकेट से हराया, बटलर-गिल की दमदार पारियां

अहमदाबाद इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के 42वें मैच में गुजरात टाइटंस (GT) ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को 4 विकेट से हराते हुए अपनी 5वीं जीत दर्ज की। नरेंद्र मोदी स्टेडियम में हुए मैच में RCB ने पहले खेलते हुए सभी विकेट खोकर 155 रन बनाए। जवाब में GT ने जोस बटलर (39) और शुभमन गिल (43) की पारियों की मदद से लक्ष्य हासिल किया। आइए मैच में बने रिकॉर्ड्स पर एक नजर डालते हैं। इस तरह से जीती GT की टीम टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए RCB ने 35 रन तक विराट कोहली (28) और जैकब बेथल (5) के विकेट गंवाए। निरंतर अंतराल पर गिर रहे विकेटों के बीच देवदत्त पडिक्कल ने 40 रन बनाते हुए टीम का स्कोर 150 के पार पहुंचाया। GT से अरशद खान ने 3 विकेट लिए। जवाब में साई सुदर्शन (6) के जल्दी आउट होने के बाद बटलर और गिल ने तेज रन बनाए। इसके बाद राहुल तेवतिया (27*) ने जीत सुनिश्चित की। कोहली ने पूरे किए 450 टी-20 छक्के कोहली ने 13 गेंदों में 28 रन बनाए। इस बीच उन्होंने 5 चौके और एक छक्का लगाया। अपने इकलौते छक्के के साथ ही कोहली ने टी-20 क्रिकेट में अपने 450 छक्के पूरे किए। वह इस आंकड़े को छूने वाले दूसरे भारतीय बने। कोहली टी-20 क्रिकेट में 450 छक्के पूरे करने वाले विश्व के कुल 21वें बल्लेबाज बने। भारतीय बल्लेबाजों में कोहली से ज्यादा छक्के सिर्फ रोहित शर्मा (555) ने लगाए हैं। बटलर ने पूरे किए 200 IPL छक्के बटलर ने 19 गेंदों में 39 रन की पारी खेली। इस बीच उन्होंने 2 चौके और 4 छक्के लगाए। इस इंग्लिश विकेटकीपर बल्लेबाज ने अपने IPL करियर में 200 छक्के पूरे किए। अपने IPL करियर में उन्होंने 130 मैचों में 39.90 की औसत और 149.88 की स्ट्राइक रेट के साथ 4,429 रन बनाए। इस बीच उन्होंने 7 शतक और 26 अर्धशतक लगाए। उनका सर्वोच्च स्कोर 124 रन रहा है। अरशद और होल्डर ने की उम्दा गेंदबाजी GT की ओर से अरशद सबसे सफल गेंदबाज साबित हुए। बाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज ने 3.2 ओवर में 22 रन देते हुए 3 सफलताएं हासिल की। यह उनके IPL करियर का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन है। ऑलराउंडर जेसन होल्डर ने अपने 4 ओवर के कोटे में 29 रन देते हुए 2 विकेट चटकाए। अनुभवी लेग स्पिनर राशिद खान ने 19 रन देते हुए 2 विकेट अपने नाम किए। भुवनेश्वर ने पूरे किए अपने 350 टी-20 विकेट भुवनेश्वर ने अपने 4 ओवर में 28 रन देते हुए 3 विकेट लिए। इस बीच उन्होंने अपने टी-20 करियर के 350 विकेट पूरे किए। GT के सलामी बल्लेबाज साई सुदर्शन उनका 350वां शिकार बने। क्रिकइंफो के अनुसार, टी-20 विकेटों के मामले में भारतीयों में भुवनेश्वर सिर्फ युजवेंद्र चहल से पीछे हैं। चहल 391 विकेटों के साथ इस सूची में सबसे ऊपर हैं। IPL 2026 में भुवनेश्वर अब तक 17 विकेट ले चुके हैं।  

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का आदेश, AAP बोली- ‘हम भुगतने को तैयार हैं

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) इन दिनों जहां एक तरफ पार्टी में टूट के संकट से जूझ रही है तो दूसरी तरफ पार्टी के बड़े नेता अदालती लड़ाई में भी उलझे हैं। खुद पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ बहिष्कार वाला सत्याग्रह छेड़ दिया है, जिसमें अब उनके अलावा मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक भी शामिल हो गए हैं। कथित शराब घोटाले से जुड़े केस की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में बुधवार को इन नेताओं की ओर से ना तो कोई वकील पेश हुआ और ना ही इनकी ओर से कोई जवाब दिया गया है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की ओर से दिए गए ‘अंतिम मौके’ पर 'आप' ने एक बार फिर अपना रुख जाहिर कर दिया है। आप के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में 'सत्याग्रह' जारी रखने की बात कहते हुए कहा कि परिणाम भुगतने को तैयार हैं और सबकुछ सोचकर फैसला लिया गया है कि जहां न्याय की उम्मीद नहीं है वहां पेश होने का फायदा नहीं है। अनुराग ने कहा, 'मुझे लगता है कि अरविंद केजरीवाल जी की तरफ से, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक की तरफ से साफ कह दिया गया है कि वह इन कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे। यह सत्याग्रह है हम लोगों का।' परिणाम भुगतने को तैयार, सोचकर लिया फैसला: केजरीवाल आप नेता ने कहा कि कानूनी विकल्प अपनाए जाएंगे पर अभी यह साफ है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में तीनों ही नेता अपना केस नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा, 'सत्याग्रह इसलिए कि हमने कानूनी प्रक्रिया अपनाई, रिक्यूजल के प्रोसेस में गए और सबकुछ किया। इसके बाद दो फैक्ट्स को मानते हुए जज कहती हैं कि मैं ही इस केस को सुनूंगी तो उनके सामने जाने का क्या फायदा, जब हमको पता है कि हमें इंसाफ मिलेगा या नहीं मिलेगा। सत्याग्रह जारी है। जब राजघाट गए थे तो इस प्रण को दृठ करते हुए कि दुष्परिणाम के लिए तैयार हैं। सारी चीजों को सोचकर फैसला लिया है। जहां न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है वहां पेश होने का फायदा नहीं है। जो भी कानूनी विकल्प होंगे उन्हें अपनाएंगे। लेकिन अभी तक स्पष्ट है कि ना तीनों ही नेता जाएंगे और ना ही वकील के माध्यम से पक्ष रखेंगे।' जज ने दिया आखिरी मौका आप के नेताओं ने न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा के सामने सुनवाई का बहिष्कार किया है। हालांकि, जज ने उन्हें अपना जवाब दाखिल करने का एक अंतिम मौका दिया है। जस्टिस शर्मा ने कहा कि 'हम रिकॉर्ड मंगवाएंगे और सोमवार से सुनवाई शुरू करेंगे' और निर्देश दिया कि रिकॉर्ड कल तक मंगवा लिया जाए। अदालत ने यह भी गौर किया कि कई पक्षों ने अपने-अपने जवाब दाखिल कर दिए हैं लेकिन बरी किए गए कुछ आरोपियों ने अब तक ऐसा नहीं किया है। अदालत ने कहा, '(अदालत) उन्हें जवाब दाखिल करने का एक और आखिरी मौका देगी। वे शनिवार तक जवाब दाखिल कर दें।' जस्टिस शर्मा ने खुद को अलग करने से किया इनकार, केजरीवाल का बहिष्कार जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा शर्मा ने 20 अप्रैल को इस मामले से खुद को अलग करने संबंधी केजरीवाल और सिसोदिया की याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इसके बाद आप नेताओं ने खुला पत्र लिखकर कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से या किसी वकील के माध्यम से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में पेश नहीं होंगे। केजरीवाल समेत अन्य आप नेताओं ने जस्टिस पर हितों के टकराव समेत कुछ आरोप लगाए हैं और आशंका जाहिर की है कि उनकी अदालत में न्याय नहीं मिल पाएगा।

गुजारा-भत्ता पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ‘पुरुष पल्ला नहीं झाड़ सकता’

ग्वालियर  शादी के बाद पत्नी का भरण-पोषण करना पति का न केवल नैतिक, बल्कि अनिवार्य कानूनी दायित्व है। हाईकोर्ट ने एकल पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि पति स्वस्थ और काम करने में सक्षम है, तो वह यह कहकर गुजारा भत्ता देने से नहीं बच सकता कि उसकी आय कम है या वह बेरोजगार है। जस्टिस अमित सेठ की एकल पीठ ने पति और पत्नी दोनों की ओर से दायर पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के अंतरिम भरण-पोषण के आदेश को यथावत रखा है। मैकेनिक नहीं बल्कि एक गैराज में महज हेल्पर दरअसल शबीना व शाहिद (दोनों के परिवर्तित नाम) का निकाह नवंबर 2019 में मुस्लिम रीति-रिवाजों से हुआ था। पत्नी का आरोप था कि निकाह के बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण उसे मायके में शरण लेनी पड़ी। पत्नी ने फैमिली कोर्ट में आवेदन देकर बताया कि उसका पति मैकेनिक है और 30 हजार रुपए महीना कमाता है, इसलिए उसे भरण पोषण दिलाया जाए।  दूसरी ओर पति ने कोर्ट में दलील दी कि वह मैकेनिक नहीं बल्कि एक गैराज में महज हेल्पर है और उसकी मासिक आय केवल 5,000 रुपए है। उसने दलील दी कि इतनी कम आय में वह 4,000 रुपए गुजारा भत्ता नहीं दे सकता। वहीं पत्नी ने गुजारा भत्ता की राशि बढ़ाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दिक्कतें अपनी जगह, हक अपनी जगह     कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के नजीरों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 125 सीआरपीसी का उद्देश्य महिला को दर-दर भटकने से बचाना और उसे गरिमापूर्ण जीवन देना है। यदि पति शारीरिक रूप से स्वस्थ है, तो उसे एक 'अकुशल श्रमिक' के बराबर कमाकर पत्नी को पैसा देना ही होगा।     पति ने अपनी सही आय के पुख्ता सबूत नहीं दिए, इसलिए फैमिली कोर्ट द्वारा कलेक्टर रेट (न्यूनतम मजदूरी) के आधार पर 4,000 रुपए का अंतरिम गुजारा भत्ता तय करना पूरी तरह उचित है। क्या होता है गुजारा भत्ता जानकारी के लिए बता दें कि गुजारा भत्ता (Alimony/Maintenance) तलाक या अलग होने के बाद एक पति/पत्नी द्वारा दूसरे को दी जाने वाली कानूनी और वित्तीय सहायता है। इस सहायता का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर साथी को विवाह के दौरान की जीवनशैली बनाए रखने में मदद करना है। यह राशि अदालत द्वारा या आपसी सहमति से तय की जा सकती है। ये भी जानें -मुख्य उद्देश्य तलाक के बाद आर्थिक असमानता को दूर करना।-यह स्थायी (जीवनभर) या अस्थायी (पुनर्वास के लिए) हो सकता है। -यह आमतौर पर पति की आय का 25-33% हो सकता है, जो पति-पत्नी की संपत्ति, उम्र और वैवाहिक अवधि पर निर्भर करता है। -यह आमतौर पर प्राप्तकर्ता के पुनर्विवाह करने या मौत होने तक जारी रहता है।

जल गंगा संवर्धन अभियान: जनसहभागिता से गोचा नदी के स्टॉप डैम की तस्वीर हुई बदल

सफलता की कहानी जल गंगा संवर्धन अभियान: जनसहभागिता से बदली गोचा नदी स्टॉप डैम की तस्वीर भोपाल मध्यप्रदेश में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ जल संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी जनआंदोलन के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 19 मार्च से 30 जून 2026 तक चल रहे इस अभियान ने प्रदेशभर में जल संरचनाओं के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन को नई गति दी है। इसी अभियान के अंतर्गत गुना जिले के जनपद पंचायत राघौगढ़ की ग्राम पंचायत मोररवास में जनसहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया है, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि सामूहिक प्रयासों से जल संकट जैसी चुनौती का समाधान संभव है। सूखे स्टॉप डैम में लौटी जीवन की धारा गोचा नदी पर स्थित स्टॉप डैम में पूर्व में पानी का ठहराव नहीं हो पाता था और वर्षा जल बहकर अन्य स्थानों पर चला जाता था। परिणामस्वरूप ग्रामीणों एवं पशुधन को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा था। स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से 50 हजार रुपये की जनसहयोग राशि से बोरी बंधान का कार्य 6 से 11 अप्रैल के बीच पूर्ण किया गया। इस छोटे लेकिन प्रभावी प्रयास से अब स्टॉप डैम में जल ठहराव बढ़ा है और जल संग्रहण की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। श्रमदान से बना जनआंदोलन इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता ग्रामवासियों की सक्रिय भागीदारी रही। ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक श्रमदान कर जल संरक्षण का संदेश दिया और जल की प्रत्येक बूंद को सहेजने का संकल्प लिया। जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व में यह कार्य सामूहिक रूप से पूर्ण किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में सकारात्मक संदेश प्रसारित हुआ। मवेशियों एवं वन्य जीवों को मिला सहारा बोरी बंधान से जल उपलब्धता में वृद्धि हुई है, जिससे अब मवेशियों एवं वन्य जीवों के लिए भी पानी की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित हो सकी है। जो स्थान पहले सूखा रहता था, वह अब जीवनदायी जल स्रोत के रूप में विकसित हो रहा है। प्रेरणादायक मॉडल गोचा नदी स्टॉप डैम का यह परिवर्तन ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत जनसहभागिता आधारित कार्यों की प्रभावशीलता को दर्शाता है। यह पहल प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभरी है और यह संदेश देती है कि सामूहिक प्रयास, जनसहयोग एवं सकारात्मक सोच से जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जा सकता है।